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मानसून ने पकड़ी रफ्तार, अगले 48 घंटों में मुंबई पहुंचने की संभावना

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मुंबई। महाराष्ट्र में सुस्त पड़ी दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार एक बार फिर तेज हो गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले 48 घंटों के भीतर मानसून देश की आर्थिक राजधानी मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई अन्य इलाकों में दस्तक दे सकता है। मौसम विभाग ने यह भी साफ किया है कि बीते सोमवार को मुंबई और उसके आस-पास के इलाकों में हुई झमाझम बारिश मुख्य मानसून की नहीं, बल्कि प्री-मानसून गतिविधियां थीं।

महाराष्ट्र में दोबारा सक्रिय हुआ मानसून

पिछले कुछ दिनों से मानसून की चाल धीमी होने के कारण लोगों को उमस का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन अब मौसम की परिस्थितियां पश्चिमी तट और मध्य भारत में मानसून के आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह अनुकूल हो चुकी हैं। हालांकि, राहत की इस खबर के बीच एक चिंताजनक आंकड़ा भी सामने आया है। देश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश जरूर हुई है, लेकिन 22 जून तक पूरे देश में सामान्य से 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जो खेती-किसानी के लिहाज से एक बड़ी कमी है।

जून के अंत तक और तेज होगी रफ्तार

IMD के प्रमुख वैज्ञानिक ओपी श्रीजीत के अनुसार, पश्चिमी भारत में मानसूनी हवाएं एक बार फिर जोर पकड़ रही हैं। विभाग ने पहले ही अनुमान जताया था कि 22 और 23 जून के आस-आस मानसून दोबारा सक्रिय होगा, जो बिल्कुल सटीक साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में बंगाल की खाड़ी में कोई निम्न दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) नहीं बना है, लेकिन जून के आखिरी सप्ताह तक इसके बनने की पूरी उम्मीद है। इसके बनते ही मानसूनी बारिश की रफ्तार और ज्यादा तेज हो जाएगी।

दिल्ली और यूपी में जुलाई के पहले हफ्ते तक पहुंचेगा मानसून

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में मजबूत सिस्टम न बनने के कारण उत्तर भारत के राज्यों में मानसून काफी देरी से चल रहा है। निजी मौसम एजेंसी स्काइमेट के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने बताया कि उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में मानसून अब जून के बजाय जुलाई के पहले सप्ताह में दस्तक दे सकता है। गौरतलब है कि दिल्ली में मानसून के आने की सामान्य तारीख 27 जून और मुंबई में 11 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार दोनों ही महानगरों में यह अपने तय समय से काफी लेट है।

देशभर में मानसून की स्थिति और एल नीनो का खतरा

मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की भारी कमी देखी जा रही है:

क्षेत्रबारिश में कमी (%)
मध्य भारत67% कमी
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत40% कमी
दक्षिण भारत28% कमी
उत्तर-पश्चिम भारत15% कमी

 

मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस साल कुल मानसूनी बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) के करीब 90 प्रतिशत तक ही रह सकती है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 'एल नीनो' का असर इस पूरे सीजन, विशेषकर मानसून के दूसरे चरण (अगस्त-सितंबर) में देखने को मिल सकता है, जिसके कारण देश के कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका बनी हुई है।

लिव-इन में रहना है तो देना होगा सरकार को ब्योरा, UCC ड्राफ्ट तैयार

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भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। यूसीसी को लेकर गठित हाई लेवल कमेटी ने सोमवार (22 जून) को विभिन्न सामाजिक वर्गों और आयोगों के साथ बैठक कर महत्वपूर्ण सुझाव मांगे। कमेटी के अध्यक्ष और उत्तराखंड के पूर्व सचिव शत्रुघ्न सिंह ने जानकारी दी है कि यूसीसी का फाइनल ड्राफ्ट अगले 8 से 10 दिनों के भीतर पूरी तरह तैयार हो जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि राज्य सरकार इसे आगामी मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में पेश कर सकती है।

लिव-इन रिलेशनशिप के लिए 30 दिनों में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

यूसीसी के तहत लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बेहद कड़े और स्पष्ट प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं। नए नियमों के अनुसार, यदि कोई जोड़ा लिव-इन में रहने का फैसला करता है, तो उन्हें 30 दिनों के भीतर इसका अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इस ड्राफ्ट में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों का विशेष ध्यान रखा गया है:

  • भरण-पोषण का अधिकार: लिव-इन के दौरान किसी भी विवाद या अलगाव की स्थिति में महिला और बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पुरुष की होगी।

  • पैतृक संपत्ति में हक: लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा होने वाले बच्चों को पूरी तरह से वैध माना जाएगा और उन्हें सामान्य बच्चों की तरह ही माता-पिता की विरासत और संपत्ति में कानूनी अधिकार मिलेगा।

  • झूठे मामलों से राहत: इस कानूनी रजिस्ट्रेशन से पुरुषों को भी बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि लिव-इन टूटने के बाद 'शादी का झांसा देकर दुष्कर्म' के आरोप लगाने वाले मामलों में कमी आएगी।

हिंदू और मुस्लिम संगठनों ने किया विरोध

कमेटी द्वारा लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर तैयार किए गए इन कानूनी प्रावधानों पर विवाद भी शुरू हो गया है। विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी का कहना है कि लिव-इन जैसी व्यवस्था भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों के खिलाफ है, इसलिए इसे बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। दूसरी तरफ, मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भी इस नए नियम को लेकर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है।

आदिवासियों को छूट और विवाह की उम्र तय करने की मांग

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही साफ कर चुके हैं कि मध्य प्रदेश की जनजातीय (आदिवासी) आबादी को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाएगा ताकि उनकी पारंपरिक व्यवस्थाएं प्रभावित न हों। इस बीच, कमेटी को आदिवासी प्रतिनिधियों की ओर से एक महत्वपूर्ण सुझाव मिला है, जिसमें कहा गया है कि आदिवासी समाज में भी विवाह के लिए एक न्यूनतम उम्र सीमा कानूनी रूप से तय की जानी चाहिए। प्रतिनिधियों का मानना है कि इस कदम से समाज में होने वाले बाल विवाह की कुप्रथा को पूरी तरह से रोकने में मदद मिलेगी।

गरज-चमक के साथ बरसेंगे बादल, भोपाल-इंदौर समेत 41 जिले अलर्ट पर

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भोपाल। मध्य प्रदेश में चिलचिलाती गर्मी से परेशान लोगों के लिए एक बेहद अच्छी खबर सामने आई है। एमपी के पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में मानसून ने धमाकेदार दस्तक दे दी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले कई दिनों (8 जून) से एक ही जगह पर अटका हुआ मानसून अब आगे बढ़ चुका है और अगले कुछ ही दिनों में इसके मध्य प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने की पूरी संभावना है। मानसून के आने से प्रदेशभर में झमाझम बारिश का दौर शुरू हो जाएगा, जिससे लोगों को उमस और गर्मी से पूरी तरह राहत मिल जाएगी।

प्री-मानसून एक्टिव, 30 से ज्यादा जिलों में बरसे बादल

भले ही मुख्य मानसून के आने में कुछ दिन बाकी हों, लेकिन प्रदेश में प्री-मानसून की गतिविधियां पूरी तरह सक्रिय हैं। बीते सोमवार (22 जून) को राजधानी भोपाल, इंदौर, धार, खंडवा, रायसेन, उज्जैन और छिंदवाड़ा समेत 30 से भी ज्यादा जिलों में जोरदार बारिश दर्ज की गई। इस दौरान राज्य में सबसे ज्यादा 60.8 मिलीमीटर बारिश रायसेन जिले में रिकॉर्ड की गई। वहीं, संस्कारधानी जबलपुर में 52 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं और गरज-चमक के साथ झमाझम बूंदाबांदी हुई, जिससे मौसम सुहावना हो गया।

दतिया रहा सबसे गर्म, पचमढ़ी में सबसे ज्यादा ठंडक

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान प्रदेश का सबसे गर्म इलाका चंबल-ग्वालियर क्षेत्र रहा। दतिया शहर में अधिकतम तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा था। इसके अलावा खजुराहो में 40.4 डिग्री, सीधी में 40 डिग्री और ग्वालियर में 39.7 डिग्री सेल्सियस तापमान मापा गया। इसके विपरीत, मध्य प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी 18.2 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान के साथ प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान बना रहा। तापमान के मामले में चंबल संभाग का पारा सामान्य से 2.5 डिग्री कम रहा, जबकि इंदौर, नर्मदापुरम और जबलपुर संभागों में यह सामान्य से 5.6 डिग्री सेल्सियस तक अधिक बना हुआ है।

अगले 4 दिनों के लिए 41 जिलों में 'यलो अलर्ट'

मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले अगले चार दिनों तक प्रदेश के मौसम में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, यानी बारिश और गरज-चमक का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा। विभाग ने भोपाल, इंदौर, उज्जैन, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, रतलाम, शाजापुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा और मंडला समेत प्रदेश के 41 जिलों के लिए 'यलो अलर्ट' जारी किया है। इन इलाकों में तेज हवाओं और आकाशीय बिजली चमकने के साथ ही अच्छी बारिश होने की चेतावनी दी गई है।

पूजा में घंटी बजाने का क्या है सही नियम? जानें किस समय कितनी बार बजाना होता है शुभ

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अगर आप रोजाना घर के मंदिर में पूजा करते हैं और घंटी बजाते हैं, तो यह जानना आपके लिए बेहद जरूरी है कि घंटी बजाने का सही तरीका क्या है. कई लोग पूजा के दौरान बहुत लंबे समय तक घंटी बजाते रहते हैं, तो कुछ लोग इसे महज एक औपचारिकता मानकर सिर्फ एक-दो बार हिला देते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घंटी बजाने के कुछ निश्चित और वैज्ञानिक नियम हैं. सही तरीके से घंटी बजाने से न सिर्फ पूजा का फल मिलता है, बल्कि भगवान तक आपकी हाजिरी का संदेश भी पहुंचता है.
गरुड़ देव का स्वरूप है घंटी, वेदों से है इसका संबंध
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य ने बताया कि मंदिर में प्रवेश करते समय छत से लटकी हुई घंटी को केवल एक बार बजाना चाहिए, या फिर आप इसे तीन बार भी बजा सकते हैं. इसके पीछे एक गहरा धार्मिक रहस्य छिपा है. दरअसल, घंटी के ऊपरी हिस्से को गरुड़ भगवान का स्वरूप माना जाता है और गरुड़ देव के पंखों में चारों वेदों का वास होता है. जब कोई भक्त घंटी बजाता है, तो इसका आध्यात्मिक मतलब यह होता है कि वह वेदों के मंत्रों के जरिए ईश्वर का अभिनंदन और स्वागत कर रहा है. घंटी बजाकर भक्त भगवान से कहता है कि ‘हे प्रभु, मैं आपकी शरण में आ गया हूं’.
भोग लगाते समय 5 बार घंटी बजाना क्यों है जरूरी?
घरों में इस्तेमाल होने वाली छोटी हाथ वाली घंटी को ‘गरुड़ घंटी’ कहा जाता है, जिसके नियमों के बारे में महंत बताते हैं कि जब भी आप भगवान को लड्डू, पेड़ा, फल या भोजन का भोग लगाते हैं, तब पांच बार आचमन करने के साथ-साथ पांच बार ही घंटी बजानी चाहिए क्योंकि इसका मुख्य मकसद भगवान को भोग स्वीकार करने का निवेदन करना होता है. इसके साथ ही वे बताते हैं कि इस छोटी घंटी को हमेशा मंदिर में अपने बाईं तरफ रखना चाहिए और दाएं हाथ से भगवान को भोग लगाना तथा आरती करनी चाहिए.

मंदिर से निकलते समय न बजाएं घंटी
सबसे जरूरी बात यह है कि कभी भी मंदिर से बाहर निकलते समय घंटी नहीं बजानी चाहिए. अक्सर लोग आते और जाते दोनों समय घंटी बजा देते हैं, जो कि गलत है. घंटी सिर्फ मंदिर में प्रवेश करते समय ही बजाई जाती है क्योंकि इसका सीधा अर्थ भगवान का स्वागत करना होता है, विदा करना नहीं. शास्त्रों के अनुसार, सुबह-शाम की पूजा में इन सरल नियमों का पालन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और आपकी श्रद्धा सही रूप में भगवान तक पहुंचती है.

सपने में रोना देखकर डर गए? जानिए कौन से संकेत देता है ये सपना और क्या कहता है स्वप्न शास्त्र

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रात को देखे गए कुछ सपने सुबह उठने के बाद भी लंबे समय तक हमारे मन में बने रहते हैं. इनमें से एक सपना है खुद को रोते हुए देखना. ऐसे सपने के बाद अक्सर लोग घबरा जाते हैं और सोचने लगते हैं कि कहीं यह आने वाली किसी परेशानी का संकेत तो नहीं. हालांकि, स्वप्न शास्त्र की मानें तो हर सपना वैसा नहीं होता, जैसा वह दिखता है. कई बार दुखद लगने वाले सपने भी शुभ संदेश लेकर आते हैं. सपने में खुद को रोते हुए देखना भी ऐसा ही संकेत माना जाता है.
मान्यता है कि यह सपना जीवन में सकारात्मक बदलाव, मान-सम्मान में बढ़ोतरी और अच्छी खबर मिलने का इशारा हो सकता है. वहीं मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखें तो यह सपना आपके भीतर छिपी भावनाओं और मानसिक दबाव से भी जुड़ा हो सकता है.
स्वप्न शास्त्र में क्या कहता है यह सपना?
स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में खुद को रोते हुए देखना आमतौर पर शुभ माना जाता है. माना जाता है कि यह सपना जीवन में चल रही परेशानियों के खत्म होने और नए अवसर मिलने का संकेत देता है. कई लोगों के लिए यह सपना रुके हुए काम पूरे होने, करियर में प्रगति और सामाजिक पहचान बढ़ने का सूचक भी हो सकता है. दिलचस्प बात यह है कि वास्तविक जीवन में रोना जहां दुख का प्रतीक माना जाता है, वहीं सपनों की दुनिया में इसके अर्थ अक्सर उलट होते हैं.

1. अकेले रोते हुए दिखना क्या बताता है?
मान-सम्मान बढ़ने के संकेत अगर आप सपने में खुद को अकेले बैठकर या जोर-जोर से रोते हुए देखते हैं, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है. स्वप्न शास्त्र के मुताबिक, आने वाले समय में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ सकती है. कार्यक्षेत्र में आपको सराहना मिल सकती है या लंबे समय से रुका हुआ कोई काम पूरा हो सकता है. कई लोग बताते हैं कि महत्वपूर्ण बदलावों से पहले उन्होंने इस तरह के सपने देखे थे. हालांकि, इसे निश्चित भविष्यवाणी के बजाय एक पारंपरिक मान्यता के तौर पर ही देखना चाहिए.
मनोविज्ञान क्या कहता है?
भावनात्मक बोझ कम होने का संकेत मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, सपने में रोना अक्सर मन के भीतर दबे हुए तनाव, चिंता या अनकही भावनाओं को बाहर निकालने का तरीका हो सकता है. दिनभर की भागदौड़, काम का दबाव या रिश्तों से जुड़ी उलझनें सपनों के जरिए सामने आ सकती हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि कई बार ऐसे सपने मानसिक शुद्धि की तरह काम करते हैं. इनके बाद व्यक्ति को हल्कापन और राहत महसूस हो सकती है.
2. किसी दूसरे व्यक्ति के साथ रोने का मतलब
यदि आप सपने में किसी दोस्त, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति के साथ रोते हुए दिखाई देते हैं, तो स्वप्न शास्त्र इसे आर्थिक दृष्टि से सकारात्मक मानता है. मान्यता है कि यह सपना आकस्मिक धन लाभ, नए अवसर या आर्थिक स्थिति में सुधार का संकेत हो सकता है. इसके अलावा, यह आपके रिश्तों में मजबूती और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ने का भी इशारा माना जाता है.

3. अपनी बदनामी पर रोना क्या दर्शाता है?
सपने में अगर आप अपनी बदनामी, अपमान या आलोचना की वजह से रो रहे हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यह सपना वास्तविक जीवन में आपकी प्रतिष्ठा और लोकप्रियता बढ़ने का संकेत देता है. आने वाले समय में आपको अपने काम या व्यक्तित्व के लिए पहचान मिल सकती है. कई बार यह सपना आत्मविश्वास बढ़ने और सामाजिक दायरा मजबूत होने की ओर भी इशारा करता है.
4. मृत परिजन के साथ रोना क्यों माना जाता है अशुभ?
अगर सपने में आप किसी दिवंगत परिजन के साथ रोते हुए दिखाई देते हैं, तो स्वप्न शास्त्र इसे सावधानी बरतने का संकेत मानता है. ऐसी मान्यता है कि यह सपना आने वाले समय में कुछ चुनौतियों या मानसिक तनाव की ओर इशारा कर सकता है. कुछ लोग इसे पूर्वजों की नाराजगी से भी जोड़ते हैं. हालांकि, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे सपनों को लेकर डरने के बजाय अपने मानसिक और पारिवारिक हालात पर ध्यान देना चाहिए.
सपनों को कैसे समझें?
हर सपना हर व्यक्ति के लिए एक जैसा अर्थ नहीं रखता. सपने का असर आपकी मौजूदा परिस्थितियों, मानसिक स्थिति और अनुभवों पर भी निर्भर करता है. इसलिए किसी भी सपने को अंतिम सच मानने के बजाय उसे संकेत या सांस्कृतिक मान्यता के रूप में समझना बेहतर होता है. अगर आपको बार-बार परेशान करने वाले सपने आते हैं, तो तनाव कम करने, अच्छी नींद लेने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से सलाह लेने में हिचकिचाना नहीं चाहिए.

चालाकी से दुश्मन को देना चाहते हैं मात? आज ही अपनाएं लोमड़ी के ये गुप्त गुण, चाणक्य नीति का महामंत्र

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आचार्य चाणक्य ने जीवन में सफलता, नेतृत्व और शत्रुओं पर विजय पाने के लिए बुद्धि, धैर्य और रणनीति को सबसे बड़ा हथियार बताया है. चाणक्य के अनुसार केवल बल के भरोसे जीत हासिल नहीं की जा सकती, बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता ही व्यक्ति को विजेता बनाती है, जैसा कि लोमड़ी करती है. लोमड़ी को प्रकृति का सबसे चतुर और रणनीतिक जीव माना जाता है. लोमड़ी में कुछ ऐसे विशेष गुण पाए जाते हैं, जिन्हें प्रत्येक व्यक्ति को सीखना चाहिए, ताकि वे कठिन समय में भी अपनी चतुराई का उपयोग करके आगे बढ़ सकें, विशेषकर जब कोई शत्रु या प्रतिद्वंद्वी रास्ते में खड़े हों. आइए चाणक्य नीति के माध्यम से जानते हैं कि लोमड़ी के 11 गुण, जो प्रत्येक व्यक्ति को सीखने चाहिए…
1. एक विवेकशील और धूर्त लोमड़ी
चाणक्य कहते हैं कि लोमड़ी हर परिस्थिति का पूर्वानुमान लगा लेती है. हमें भी अपने जीवन के हर निर्णय को सोच-समझकर और सावधानी से लेना चाहिए.
2. समय का सदुपयोग करें
लोमड़ी कभी समय का चूकती नहीं. हर काम के लिए सही समय चुनना सफलता की पहली सीढ़ी है.

3. संकट में धैर्य
लोमड़ी कभी मुश्किल समय में घबराती नहीं बल्कि वह पहले से ज्यादा एक्टिव हो जाती है. चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को संकट के समय शांत और संयमित रहना महत्वपूर्ण है क्योंकि आपके अगले एक्शन का सामने वाला इंतजार कर रहा होता है और अगर आप कुछ गलत कदम उठा लेते हैं तो यह आप पर ही भारी पड़ सकता है

4. सतर्कता और सावधानी
लोमड़ी सतर्कता से अपने शिकार को पकड़ती है. चाणक्य कहते हैं कि हमें भी हर परिस्थिति में सतर्क और सावधान रहना चाहिए. साथ ही उसी हिसाब से काम भी करना चाहिए.
5. दिखावा और रणनीति
चाणक्य कहते हैं कि कभी-कभी चतुर योजना बनाना और दिखावा करना फायदेमंद हो सकता है. क्योंकि इससे सामने वाला कन्फ्यूज रहता है और सही चाल नहीं चल पाता. लोमड़ी की तरह अपनी रणनीति को छिपाना सीखें.
6. निरंतर सीखना
लोमड़ी हर नई परिस्थिति से कुछ ना कुछ सीखती है. चाणक्य कहते हैं कि मनुष्यों को भी हमेशा नए अनुभवों और ज्ञान से सीखते रहना चाहिए. जब तक वह सीखते रहेंगे तब तक वह कामयाब रहेंगे लेकिन जिस दिन से उन्होंने सीखना छोड़ दिया, वे पीछे रह जाएंगे.
स्वतंत्रता और स्वतंत्र सोच
लोमड़ी कभी किसी से प्रभावित नहीं होती. चाणक्य कहते हैं कि हमें भी स्वतंत्र रूप से सोचना और अपने निर्णय लेना चाहिए. क्योंकि जब तक हम स्वतंत्र रूप से नहीं सोचेंगे, तब तक यह जान नहीं पाएंगे कि दुनिया कैसे काम करती है और कौन अपना और कौन पराया.
8. कठिन समय में रणनीति
लोमड़ी हर चुनौती के लिए योजना बनाती है. चाणक्य कहते हैं कि कठिन समय में भी रणनीति और योजना बनाना आवश्यक होता है. अगर आप प्लानिंग करके नहीं चलेंगे तो यह आपके लिए नुकसान और सामने वाले के लिए फायदा बन सकता है.
9. संकेतों और परिवेश पर ध्यान दें
लोमड़ी हमेशा अपने परिवेश का अवलोकन करती है. चाणक्य कहते हैं कि हमें भी हर नई परिस्थिति का अवलोकन करना चाहिए और उसके संकेतों को समझना चाहिए.
10. क्षमता का ज्ञान
लोमड़ी अपनी शक्तियों और कमजोरियों दोनों को जानती है. चाणक्य कहते हैं कि मनुष्यों को भी अपनी शक्तियों और कमजोरियों को जानना चाहिए. जब तक वह अपने शक्तियों और कमजोरियों को नहीं जानेंगे, तब तक उन पर काम नहीं कर पाएंगे और इसका फायदा आपके शत्रु को मिल सकता है.
11. समय के साथ बदलना और अनुकूलन करना
लोमड़ी हर परिस्थिति के अनुकूल ढल जाती है. चाणक्य कहते हैं कि हमें भी जीवन में होने वाले परिवर्तनों के अनुकूल ढलना सीखना चाहिए. अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो हर समय परेशान रहेंगे और किसी ना किसी को दोष देते रहेंगे

कितना भी कमाओ, तंगी खत्म नहीं हो रही? हरिद्वार के पंडित से जानिए उपाय, करना होगा बस एक काम

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धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सभी नवग्रह भोलेनाथ के अधीन होते हैं. यदि किसी व्यक्ति पर ग्रहों की महादशा, साढेसाती, ढैया आदि चल रही है तो भोलेनाथ का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, उनके स्तोत्र आदि का पाठ करने पर लाभ होता है. विशेष तिथियों पर ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव भोलेनाथ की कृपा से खत्म होने की मान्यता है. संवत 2083 के ज्येष्ठ शुद्ध शुक्ल पक्ष में प्रदोष तिथि का आगमन शनिवार को होने से जातकों को इसका विशेष लाभ मिलेगा. मनुष्य के जीवन में आने वाले सुख, दुख का आधार 9 ग्रहों और 12 राशियों पर केंद्रित हैं. सभी नौ ग्रहों में राहु-केतु, शनि, शुक्र, बुध, सूर्य, मंगल, चंद्रमा और गुरु ग्रह होते हैं. 12 राशियां मेष से मीन तक हैं. सभी नौ ग्रहों में राहु-केतु और शनि ग्रह को क्रूर ग्रह बताया गया है. इन ग्रहों का मनुष्य के जीवन पर सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव होता है. इन ग्रहों में शनि सबसे अधिक शक्तिशाली ग्रह है, जिसका मानव जीवन पर सबसे अधिक प्रभाव साढ़ेसाती, महादशा और ढैया के रूप में होता है.

जब शनि ग्रह कि यह दशाएं किसी राशि पर चलती है तो उस राशि वाले व्यक्ति के जीवन में आर्थिक तंगी, दुख और अनेक प्रकार की समस्याओं का आगमन होता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सभी नवग्रह भोलेनाथ के अधीन होने की वजह से उनकी पूजा आराधना और व्रत से शनि समेत अन्य ग्रहों से होने वाली समस्याएं खत्म हो जाती हैं. यदि भोलेनाथ की आराधना विशेष स्थितियों पर प्रदोष काल में की जाए तो सबसे अधिक लाभ मिलता है.

शाम 05:44 से 07:14 तक
लोकल 18 से हरिद्वार के पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि संयोग से ज्येष्ठ शुद्ध शुक्ल पक्ष में प्रदोष तिथि का आगमन शनिवार को हो रहा है. 27 जून शनिवार को त्रयोदशी तिथि के दिन भोलेनाथ के निमित्त व्रत करें. तीसरे पहर यानी सूर्योदय से 45 मिनट पूर्व और सूर्योदय के 45 मिनट बाद के समय में भोलेनाथ का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र, शिव तांडव स्तोत्र आदि का पाठ भोलेनाथ के सिद्ध पीठ स्थल पर करें. ऐसा करने से ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव पूर्ण रूप से खत्म हो जाएगा. शनि ग्रह की साढ़ेसाती, महादशा, ढैया से पीड़ित जातकों की ओर से 27 जून शनिवार को प्रदोष व्रत का संकल्प करके शाम 05:44 से शाम 07:14 तक भोलेनाथ की आराधना, शनि ग्रह का बीज मंत्र और वैदिक मंत्र का 108 बार जाप आदि करें. इस उपाया से शनि ग्रह अनुकूल फल प्रदान करेंगे, अन्य सभी ग्रह भी अनुकूल हो जाएंगे. इस दिन शनि ग्रह से संबंधित वस्तुएं भी दान की जा सकती हैं.

राशिफल 23 जून 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा

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  • मेष राशि :- यात्रा भय, कष्ट, व्यापार बाधा, लाभ, पारिवारिक समस्या उलझी ही रहेंगी, ध्यान दें। 
  • वृष राशि :- शत्रुभय, रोग, स्वजन सुख, लाभ, शिक्षा-लेखन कार्य में सफलता, प्रगति के योग बनेंगे। 
  • मिथुन राशि :- वाहन भय, कष्ट, हानि, अस्थिरता, अशांति का वातावरण रहेगा, ध्यान अवश्य रखें। 
  • कर्क राशि :- सफलता, उन्नति, शुभ कार्य, विवाद, राजकार्य व मामले मुकदमे में स्थिति कष्टमय रहेगी। 
  • सिंह राशि :- शरीर कष्ट, अपव्यय, कार्य में सफलता, आर्थिक सुधार आदि के कार्य अवश्य ही होंगे। 
  • कन्या राशि :- खर्च, विवाद, स्त्री कष्ट, विद्या लाभ, धीरे-धीरे सुधार के साथ अर्थ लाभ होगा।
  • तुला राशि :- यात्रा से हानि, राजलाभ, शरीर कष्ट तथा खर्च की यात्रा कष्टदायक होगी। 
  • वृश्चिक राशि :- कार्यवृत्ति से लाभ, यात्रा, सम्पत्ति लाभ, व्यापार में सुधार, खर्च होते ही रहेंगे। 
  • धनु राशि :- अल्प लाभ, चोराग्नि भय, मानसिक परेशानी, अपवाद, उलझन का सामना करना पड़ेगा। 
  • मकर राशि :- शत्रु से हानि, अपव्यय, शरीरिक सुख, कभी-कभी व्यवस्था कुछ तंग पड़ेगा। 
  • कुंभ राशि :- शत्रु व्यय, संतान सुख, कार्य में सफलता, उत्साह की वृद्धि होगी। 
  • मीन राशि :- पदोन्नति, राजभय, न्याय लाभ, धन हानि, अधिकारियों से मनमुटाव अवश्य ही होगा। 
     

प्रधानमंत्री आवास योजना से बदली ग्रामीण परिवारों की तस्वीर

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रायपुर :  प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण प्रदेश के हजारों जरूरतमंद परिवारों के जीवन में खुशियों की नई रोशनी लेकर आई है। इस योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर हो रहा है। छत्तीसगढ़ में भी योजना का प्रभावी क्रियान्वयन ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन रहा है।

इसी परिवर्तन की एक प्रेरक मिसाल बलरामपुर जिले के विकासखण्ड कुसमी अंतर्गत ग्राम पंचायत सेमरा के निवासी महिपाल पैकरा हैं। कभी कच्चे मकान में रहने वाले महिपाल का परिवार हर मौसम में असुरक्षा और चिंता के बीच जीवन व्यतीत करता था। बरसात के दिनों में घर की दीवारों और छत को लेकर हमेशा भय बना रहता था। सीमित आय के कारण स्वयं पक्का मकान बनाना उनके लिए संभव नहीं था।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। योजना का लाभ मिलने के बाद उन्होंने अपना पक्का आवास बनवाया, जिससे परिवार को सुरक्षित और स्थायी आश्रय मिल सका। अब उनका परिवार मौसम की मार और अन्य जोखिमों से मुक्त होकर सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर रहा है।

महिपाल पैकरा बताते हैं कि पक्का घर मिलने से परिवार की सबसे बड़ी चिंता दूर हो गई है। बच्चों के लिए बेहतर वातावरण मिला है और पूरे परिवार में सुरक्षा की भावना बढ़ी है। वे प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि यह योजना केवल एक मकान नहीं, बल्कि बेहतर और सुरक्षित भविष्य की नींव है।
    
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन रही है। योजना के जरिए पात्र परिवारों को न केवल पक्की छत मिल रही है, बल्कि उनके जीवन में सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास का भी संचार हो रहा है।
 

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्र की एकता और अखण्डता को दी सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रीय एकीकरण के लिए समर्पित रहा। उन्होंने राष्ट्र की एकता और अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनका जन्म 6 जुलाई 1901 को निधन 23 जून 1953 को हुआ, जिसे राष्ट्रहित में दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान के रूप में देखा जाता है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में विशेष व्यवस्था के विरोध में आंदोलन किया था, उनका बलिदान राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक माना जाता है। डॉ. मुखर्जी शिक्षाविद, चिंतक, सांसद और दूरदर्शी राजनेता थे। डॉ. मुखर्जी ने वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की। उन्होंने वैचारिक राजनीति और संगठन निर्माण पर बल दिया और राष्ट्रहित को दलगत राजनीति से ऊपर रखने का संदेश दिया। डॉ. मुखर्जी की पुण्यतिथि 23 जून से उनकी जयंती 6 जुलाई तक विशेष पखवाड़ा आयोजित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरीय निकायों के महापौर तथा नगरपालिका अध्यक्ष को मुख्यमंत्री निवास से वी.सी. के माध्यम से संबोधित कर यह निर्देश दिए।

जनसेवा का अभियान हो पखवाड़ा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का मानना था कि युवा राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उन्होंने युवाओं को नेतृत्व, शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व के लिए प्रेरित किया। इस पखवाड़े का मुख्य उद्देश्य उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाना है। पखवाड़े के दौरान युवा सम्मेलन, निबंध प्रतियोगिता और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इससे नई पीढ़ी को राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़ने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नगरीय निकायों द्वारा मार्गों और उद्यानों का नामकरण डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर किया जा सकता है। इस प्रकार की पहल के लिए सभी प्रक्रियाओं का पालन, आवश्यक रूप से किया जाए तथा सक्षम स्तर से सभी स्वीकृतियां अवश्य ली जाएं। पखवाड़ा जनसेवा का अभियान होना चाहिए। पौधरोपण, स्वच्छता अभियान, रक्तदान, स्वास्थ्य शिविर जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएं। यह पखवाड़ा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने तथा सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को मजबूत करने का अवसर है।
 

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