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शेयर बाजार में गिरावट, वेदांता के शेयरों में भारी दबाव

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मुंबई: मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत दबाव के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में मुनाफावसूली के चलते प्रमुख सूचकांक लाल निशान में आ गए। हालिया रिकॉर्ड तेजी के बाद निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिससे बाजार में सुस्ती देखी गई। इसके अलावा, एशियाई बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और विदेशी फंडों की लगातार बिकवाली ने भी घरेलू सेंटीमेंट पर असर डाला।

शुरुआती दौर में 30 शेयरों वाला बीएसई (BSE) सेंसेक्स 57.43 अंक गिरकर 77,061.94 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी (NSE Nifty) 31.6 अंक की गिरावट के साथ 24,071.30 पर ट्रेड करता दिखा। हालांकि, बाद में निचले स्तरों पर आई खरीदारी से दोनों सूचकांकों ने मामूली रिकवरी की और सेंसेक्स 29.75 अंक सुधरकर 77,123.82 तथा निफ्टी 20.80 अंक बढ़कर 24,123.65 के स्तर पर पहुंच गया।

दिग्गज आईटी शेयरों में बिकवाली, बैंकिंग सेक्टर ने संभाला

बाजार खुलते ही चौतरफा दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स की टॉप 30 कंपनियों में से आईटी सेक्टर के बड़े शेयरों जैसे इंफोसिस, टीसीएस (TCS), टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक में गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा टाटा स्टील और हिंदुस्तान यूनिलीवर भी घाटे में रहे। दूसरी तरफ, सन फार्मा, ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और एनटीपीसी के शेयरों में तेजी ने बाजार को सहारा दिया। संस्थागत आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बाजार से 635.91 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

बड़ी ब्लॉक डील से वेदांता के शेयरों में भारी गिरावट

आज के कारोबार में वेदांता लिमिटेड के शेयरों में भारी हलचल रही। कंपनी में एक बड़ी ब्लॉक डील होने की खबर से इसके शेयर 6% तक टूट गए। इस सौदे के तहत करीब 2,149 करोड़ रुपये की वैल्यू वाले 7.3 करोड़ शेयरों का ट्रांसफर 292 रुपये प्रति शेयर के भाव पर किया गया। इस बड़े एग्रीमेंट के सामने आने के बाद निवेशकों ने वेदांता के शेयरों में बिकवाली तेज कर दी।

कमजोर वैश्विक संकेत और कच्चे तेल में नरमी

अंतरराष्ट्रीय बाजारों की बात करें तो आज एशियाई बाजारों में मंदी का माहौल रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 6% तक लुढ़क गया। इसके साथ ही जापान का निक्केई, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग भी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। वहीं, कमोडिटी मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी राहत रही। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.49% की गिरावट के साथ 77.53 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक है।

डॉलर के मुकाबले रुपया मामूली कमजोर

विदेशी मुद्रा बाजार में आज भारतीय रुपये की शुरुआत हल्की कमजोरी के साथ हुई। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 2 पैसे टूटकर 94.69 के स्तर पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 94.6775 पर बंद हुआ था।

आंध्र प्रदेश में बड़ा औद्योगिक हादसा, एनर्जी प्लांट में आग से मची अफरा-तफरी

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अनाकापल्ले। आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ले जिले से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। यहाँ स्थित 'दक्षिण एनर्जी' की एक औद्योगिक यूनिट में मंगलवार सुबह भीषण आग लग गई। इस अचानक भड़की आग की चपेट में आने से दो कर्मचारियों की मौके पर ही जलकर मौत हो गई। मृतकों की पहचान अच्युतापुरम निवासी त्रिनाथ और वेंकटेश के रूप में हुई है। वहीं, आशंका जताई जा रही है कि दो अन्य कर्मचारी अब भी प्लांट के भीतर फंसे हुए हैं। हालांकि, राहत की बात यह रही कि आग लगते ही यूनिट में मौजूद कई अन्य कर्मचारी समय रहते सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे।

प्लास्टिक सामग्री के कारण विकराल हुई आग

हादसे का शिकार हुई दक्षिण एनर्जी कंपनी मुख्य रूप से प्लास्टिक पायरोलिसिस ऑयल और कार्बन ब्लैक बनाने का काम करती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यूनिट के भीतर बहुत बड़ी मात्रा में प्लास्टिक का कच्चा माल और ज्वलनशील सामग्रियां मौजूद थीं, जिसके कारण आग ने कुछ ही मिनटों में बेहद विकराल रूप ले लिया। आग लगने की इस घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों के भीतर विशाखापत्तनम और उसके आस-पास के औद्योगिक क्षेत्रों में इस तरह के कई हादसे सामने आ चुके हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

राहत कार्य जारी और कारणों की जांच शुरू

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, प्राथमिकता के आधार पर आग बुझाने का काम तेजी से किया जा रहा है ताकि फंसे हुए लोगों को निकाला जा सके। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि आग पर पूरी तरह काबू पा लिए जाने के बाद विभिन्न तकनीकी विभागों की टीमें घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण करेंगी, जिसके बाद ही आग लगने के असली कारणों और लापरवाही का पता चल सकेगा।

कतर गैस प्लांट में विस्फोट का कहर, भारतीय नागरिक भी चपेट में

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दोहा। कतर के एक औद्योगिक क्षेत्र में स्थित गैस प्रसंस्करण संयंत्र (गैस प्रोसेसिंग प्लांट) में एक भीषण विस्फोट होने से बड़ा हादसा हो गया है। इस दर्दनाक दुर्घटना में भारतीय नागरिकों समेत कई लोगों की मौत हो गई है, जबकि बहुत बड़ी संख्या में श्रमिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं। विस्फोट इतना जोरदार था कि इसके तुरंत बाद पूरे प्लांट परिसर में भीषण आग फैल गई, जिससे वहां काम कर रहे कर्मचारियों के बीच अफरा-तफरी और भगदड़ मच गई।

बचाव कार्य जारी, हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका

हादसे की सूचना मिलते ही कतर के स्थानीय प्रशासन, दमकल विभाग और आपदा राहत टीमों ने बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंचकर बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। अधिकारियों के मुताबिक, जिस समय यह जोरदार धमाका हुआ, उस समय प्लांट के अंदर भारी संख्या में मजदूर अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। यही वजह है कि इस हादसे में हताहतों की संख्या अभी और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल, सभी घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ कई श्रमिकों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।

भारतीय दूतावास ने शुरू की मदद

प्रशासनिक अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि मलबे से निकाले गए मृतकों में कुछ भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। हालांकि, अभी कतर प्रशासन की ओर से सभी मृतकों और घायलों की आधिकारिक पहचान (नाम और पते) उजागर करने की कानूनी प्रक्रिया चल रही है। इस बीच, कतर स्थित भारतीय दूतावास ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। दूतावास ने बयान जारी कर कहा है कि वे कतर के स्थानीय अधिकारियों और अस्पताल प्रशासन के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और प्रभावित भारतीय मूल के श्रमिकों व उनके परिवारों को हर संभव कूटनीतिक और चिकित्सीय सहायता पहुंचाई जा रही है।

सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल, जांच के आदेश

इस भीषण हादसे के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीमों ने घटनास्थल को अपने घेरे में लेकर बारीकी से निरीक्षण शुरू कर दिया है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि प्लांट की पाइपलाइन में हुए किसी बड़े गैस रिसाव (लीकेज) के कारण यह धमाका हुआ होगा, लेकिन इसकी पूरी तरह से आधिकारिक पुष्टि विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। इस भयंकर औद्योगिक दुर्घटना ने कतर के कारखानों में लागू होने वाले सुरक्षा मानकों (सेफ्टी प्रोटोकॉल) पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय सरकार ने मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं और मामले की पूरी तरह निष्पक्ष जांच कराने का भरोसा दिया है।

एअर इंडिया में बड़ा बदलाव: खरोला वरिष्ठ प्रबंधन टीम में शामिल

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नई दिल्ली: एअर इंडिया ने अपने उच्च स्तरीय प्रबंधन में एक बहुत बड़ा फेरबदल किया है। देश के पूर्व नागरिक उड्डयन सचिव प्रदीप सिंह खरोला की कंपनी में 'कार्यकारी सलाहकार' के पद पर वापसी हुई है। वे सीधे एअर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को रिपोर्ट करेंगे और मैनेजमेंट कमेटी के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में काम संभालेंगे।

कंपनी के एक आंतरिक पत्र से यह जानकारी सामने आई है कि खरोला तत्काल प्रभाव से एक्टिव हो गए हैं। यह बदलाव ऐसे समय पर हो रहा है जब एअर इंडिया के मौजूदा सीईओ और एमडी कैंपबेल विल्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और वे आने वाले कुछ महीनों में कंपनी छोड़ देंगे। बता दें कि जनवरी 2022 में टाटा समूह द्वारा कमान संभालने के बाद से एयरलाइन लगातार भारी घाटे और अन्य समस्याओं से जूझ रही है।

प्रदीप सिंह खरोला की वापसी क्यों है बेहद अहम?

प्रदीप सिंह खरोला के पास एअर इंडिया को संभालने का पुराना और बेहतरीन अनुभव है। उन्होंने साल 2017 से 2019 तक एयरलाइन के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (CMD) के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। इसके बाद, नागरिक उड्डयन सचिव के तौर पर उन्होंने एअर इंडिया के निजीकरण की पूरी प्रक्रिया में एक मुख्य भूमिका निभाई थी। जाने वाले सीईओ कैंपबेल विल्सन ने भी माना है कि खरोला का यह अनुभव नए सीईओ के आने तक कंपनी में लीडरशिप के बदलाव को आसान और मजबूत बनाएगा।

एअर इंडिया के सामने खड़ीं बड़ी चुनौतियाँ

टाटा ग्रुप के हाथों में आने के बाद भी एअर इंडिया की राह आसान नहीं रही है। एयरलाइन इस वक्त भारी वित्तीय नुकसान से गुजर रही है। ऐसे नाजुक समय पर सीईओ कैंपबेल विल्सन का इस्तीफा कंपनी के लिए एक बड़ा झटका है। एयरलाइन को अब एक ऐसे नए नेतृत्व की तलाश है जो इसे इस संकट से बाहर निकाल सके, और यही वजह है कि खरोला के अनुभवों पर टाटा समूह ने इतना बड़ा भरोसा जताया है।

घाटे से उबरने के लिए उठाए जा रहे हैं कड़े कदम

वित्तीय संकट और भारी नुकसान को देखते हुए एअर इंडिया ने पिछले कुछ हफ्तों में कई कड़े फैसले लिए हैं। खर्चों में कटौती करने के लिए कंपनी ने 'बिना भोजन वाले किराए' (Unbundled Fares) की शुरुआत की है, जिससे यात्रियों को बिना खाने के टिकट सस्ते में मिल सकें। इसके अलावा, अस्थाई रूप से कुछ फ्लाइट रूट्स में भी कटौती की गई है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन खुद शुरुआत से ही एयरलाइन के बोर्ड की कमान संभाले हुए हैं ताकि कंपनी को जल्द से जल्द पटरी पर लाया जा सके।

मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए नहीं लगाने होंगे चक्कर, मुक्तिधाम पर मिलेगी सुविधा

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भोपाल। मध्य प्रदेश में अब आम जनता को मृत्यु प्रमाण पत्र (डेथ सर्टिफिकेट) बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा फैसला लेते हुए निर्देश दिए हैं कि अब मुक्तिधाम और विश्राम घाटों पर ही मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की व्यवस्था की जाए। सरकार के इस कदम से शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और सर्टिफिकेट पाने की प्रक्रिया बेहद आसान हो जाएगी।

मुख्यमंत्री ने दिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान जन्म और मृत्यु पंजीकरण की मौजूदा व्यवस्था को सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे विश्राम घाटों या मुक्तिधामों में ही प्रमाण पत्र जारी करने की एक प्रभावी कार्ययोजना (ब्लूप्रिंट) तैयार करें। इसका मुख्य उद्देश्य कागजी कार्रवाई को सरल बनाना है ताकि परिजनों को दुख की घड़ी में प्रशासनिक दफ्तरों में परेशान न होना पड़े।

स्वतंत्रता दिवस पर होगा विकास कार्यों का सोशल ऑडिट

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि आगामी 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेश के सभी जिलों में विकास कार्यों का 'सोशल ऑडिट' कराया जाएगा। इसके लिए सभी प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने जिलों की विकास रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया है। खास बात यह है कि विकास का पैमाना (इंडेक्स) जिलों की स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर तय होगा। औद्योगिक, कृषि प्रधान और वन संपदा वाले क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मानक (स्टैंडर्ड) निर्धारित किए जाएंगे।

जानें, वर्तमान में कैसे बनता है मृत्यु प्रमाण पत्र

मध्य प्रदेश में फिलहाल मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की एक तय कानूनी प्रक्रिया है:

  • समय-सीमा और आवेदन: मृत्यु होने के 21 दिनों के भीतर नगर निगम, नगर पालिका, नगर परिषद या संबंधित ग्राम पंचायत में पंजीकरण के लिए आवेदन करना होता है।

  • ऑनलाइन प्रक्रिया: इसके लिए आवेदक को 'MP e-District' की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होता है, जहाँ ‘Application for Death Certificate’ का विकल्प चुनना पड़ता है।

  • जरूरी दस्तावेज और शुल्क: आवेदन के लिए अस्पताल से मिलने वाली 'डेथ डिटेल' और मृतक के पहचान संबंधी विवरण (जैसे वोटर आईडी, राशन कार्ड आदि) की आवश्यकता होती है। निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद एक ट्रैकिंग नंबर जनरेट होता है, जिससे सर्टिफिकेट का स्टेटस जाना जा सकता है।

कैबिनेट में आज मंथन का दिन, सिंहस्थ प्राधिकरण से आपदा प्रबंधन तक कई मुद्दे एजेंडे में

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भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक आयोजित होने जा रही है। इस बैठक में प्रदेश के विकास, किसानों की राहत और आगामी बड़े आयोजनों से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा के बाद मुहर लग सकती है। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद राज्य सरकार की ओर से कुछ बड़ी घोषणाएं की जा सकती हैं, जो आम जनता और किसानों को सीधा फायदा पहुंचाएंगी।

उज्जैन सिंहस्थ के लिए विशेष प्रशासनिक ढांचा

बैठक के एजेंडे में सबसे प्रमुख विषय आगामी उज्जैन सिंहस्थ महापर्व की तैयारियां हैं। सिंहस्थ के आयोजनों को सुचारू और गति देने के लिए एक अलग कार्यालय और विशेष प्रशासनिक ढांचे के गठन के प्रस्ताव पर चर्चा होनी है। इसके अलावा, सिंहस्थ से जुड़ी विभिन्न बुनियादी ढांचा (अधोसंरचना) परियोजनाओं और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े जनकल्याणकारी प्रस्तावों को भी मंत्रिपरिषद के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जा सकता है।

किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण की राहत

खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए सरकार किसानों के लिए बड़ा फैसला ले सकती है। बैठक में किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध कराने और पुराना ऋण चुकाने की समय-सीमा बढ़ाने के विषय शामिल हैं। इस व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए बैंकों को अतिरिक्त ब्याज अनुदान देने के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट अंतिम निर्णय ले सकती है। इसके साथ ही, किसानों के लिए खाद और उन्नत बीजों की समय पर उपलब्धता की भी समीक्षा की जाएगी।

अग्निशमन सेवा विधेयक और मानसून की तैयारियां

नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा काफी समय से तैयार किए जा रहे 'मध्य प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक-2026' को अंतिम स्वीकृति के लिए कैबिनेट के सामने प्रस्तुत किया गया है, जिस पर आज मुहर लगने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही, प्रदेश में मानसून की दस्तक को देखते हुए बाढ़ और भारी बारिश (अतिवृष्टि) से निपटने के इंतजामों तथा राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की तैयारियों की भी विस्तृत समीक्षा की जाएगी।

 

 

ईरानी तेल पर नरम पड़ा अमेरिका, प्रतिबंधों से मिली अस्थायी राहत

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तेहरान। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर लगे कुछ प्रमुख कड़े प्रतिबंधों में अस्थायी रूप से ढील देने का बड़ा फैसला किया है। अमेरिकी प्रशासन ने इसके लिए 60 दिनों के लिए एक विशेष लाइसेंस जारी किया है। इस छूट के तहत 21 अगस्त तक ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन, बिक्री, उनके परिवहन (शिपिंग) और इससे जुड़े तमाम वित्तीय लेनदेन (बैंकिंग ट्रांजैक्शन) को वैध अनुमति दे दी गई है।

तनाव कम करने के लिए अंतरिम व्यवस्था

यह महत्वपूर्ण कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच शांति, क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा से जुड़े बेहद संवेदनशील मुद्दों पर गुप्त और द्विपक्षीय बातचीत चल रही है। इस उच्च स्तरीय वार्ता में दोनों देशों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही जैसे गंभीर विषयों पर गहन चर्चा हो रही है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका द्वारा दी गई यह राहत किसी स्थायी समझौते का हिस्सा नहीं है, बल्कि कूटनीतिक बातचीत को बिना किसी कड़वाहट के आगे बढ़ाने और दोनों देशों के बीच बने युद्ध के माहौल (तनाव) को कम करने के लिए एक अंतरिम (कामचलाऊ) व्यवस्था है।

वैश्विक तेल बाजार में आई गिरावट

अमेरिकी वित्त विभाग (US Treasury Department) ने इस फैसले पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। विभाग का कहना है कि यह विशेष छूट 21 अगस्त तक ही प्रभावी रहेगी और इसके बाद प्रतिबंधों को आगे बढ़ाना या हटाना पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि स्विट्जरलैंड में चल रही वार्ताओं की प्रगति कैसी रहती है। इस बड़े फैसले का सीधा और तत्काल असर वैश्विक ऊर्जा और तेल बाजार पर देखने को मिला है। प्रतिबंधों में ढील की घोषणा होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। बाजार के निवेशकों और विश्लेषकों को उम्मीद है कि इस छूट के बाद वैश्विक बाजार में ईरानी तेल की आपूर्ति (सप्लाई) तेजी से बढ़ेगी, जिससे कच्चे तेल के दाम नियंत्रित रहेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बातचीत सफल रही, तो न केवल मध्य पूर्व का संकट टलेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी बड़ी स्थिरता मिलेगी।

लखनऊ अग्निकांड: मदद की गुहार लगाते रहे युवक, आग की लपटों में चली गई जान

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के पोस्टमार्टम हाउस में गहरा मातम पसरा हुआ है। इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले 15 छात्र-छात्राओं के परिजन अपनों को खोने के गम में फूट-फूटकर रो रहे हैं। बदहवास माता-पिता और रिश्तेदारों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हर तरफ सिर्फ चीख-पुकार और बेबसी का माहौल है, जहाँ लोग अपने बच्चों के साथ हुई आखिरी बातचीत को याद कर तड़प रहे हैं।

'पापा मुझे बचा लो, यहाँ निकलने का रास्ता नहीं है'

इस भयानक हादसे में जान गंवाने वालों में 23 वर्षीय गेम डिजाइनर सुखमनी सिंह भी शामिल थे। उनके लाचार पिता ने रोते हुए बताया कि दोपहर करीब 2 बजे उनके बेटे का फोन आया था। वह फोन पर बुरी तरह रो रहा था और उसने कहा, "पापा मुझे बचा लो, यहाँ चारों तरफ आग है और बाहर निकलने की कोई जगह नहीं बची है।" इसी तरह एक अन्य मृतक छात्र के रिश्तेदारों ने बताया कि उनके बच्चे ने दोपहर में अपनी चाची को फोन करके कहा था कि "चाची, हम सब अंदर फंस गए हैं, हमें किसी तरह यहाँ से निकाल लो।" यह बात करते-करते फोन कट गया और जब तक रिश्तेदार दोपहर 3 बजे मौके पर पहुंचे, तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था।

परिजनों ने रेस्क्यू टीम पर उठाए सवाल

पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़े आक्रोशित और दुखी परिजनों ने राहत और बचाव दल (रेस्क्यू टीम) की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि प्रशासन और दमकल विभाग ने समय रहते सूझबूझ दिखाई होती और बगल वाली इमारत की छत से दीवार तोड़ने का फैसला जल्दी लिया होता, तो कई बच्चों को जिंदा बचाया जा सकता था। एक पीड़ित परिजन ने बताया कि जब रेस्क्यू टीम उनके सामने दीवार तोड़ रही थी, तब तक भी अंदर फंसे बच्चे से फोन पर बात हो रही थी, लेकिन टीम ने बेहद ढुलमुल तरीके से काम किया और देरी के कारण बच्चों ने दम तोड़ दिया।

शॉर्ट सर्किट और सिंगल गेट के कारण फैला धुआं

प्रशासनिक अधिकारियों ने घटना के कारणों की जानकारी देते हुए बताया कि दोपहर करीब 2 बजे बिल्डिंग के बेसमेंट में लगे एक एलईडी (LED) होर्डिंग में शॉर्ट सर्किट हुआ था, जिससे चिंगारी भड़की। बेसमेंट में ज्वलनशील सामान होने के कारण आग ने तुरंत विकराल रूप ले लिया और पूरी तीन मंजिला इमारत में काले धुएं का गुबार भर गया। अधिकारियों के मुताबिक, पूरी बिल्डिंग में आने-जाने के लिए केवल एक ही मुख्य दरवाजा (प्रवेश द्वार) था, जिसके कारण आग लगते ही वह रास्ता बंद हो गया और बच्चों को भागने का मौका नहीं मिला।

तारों के सहारे लटके और छतों से कूदे बच्चे

घटना के समय मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दृश्य बेहद खौफनाक था। जब चारों तरफ धुआं भर गया, तो कुछ छात्रों ने जान बचाने के लिए खिड़की से लटक रहे बिजली के तारों को पकड़कर नीचे उतरने की कोशिश की। वहीं, दम घुटने और आग की लपटों से बचने के लिए कई बच्चों ने घबराहट में दूसरी और तीसरी मंजिल से नीचे छलांग लगा दी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दर्दनाक मंजर के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

लापरवाही की जांच के लिए एसआईटी गठित

इस बेहद संवेदनशील और बड़े हादसे को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। सरकार द्वारा इस पूरे कांड की पड़ताल के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि रिहायशी और कमर्शियल इलाके की इस बिल्डिंग में भवन निर्माण के नियमों का उल्लंघन कैसे किया जा रहा था और अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी) के पुख्ता इंतजाम न होने के बावजूद यहाँ कोचिंग और गेमिंग जोन का संचालन किसकी अनुमति से हो रहा था।

मध्य प्रदेश में दर्दनाक सड़क हादसा, तेज रफ्तार कार ने ली तीन जिंदगियां

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मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के अंबाह थाना क्षेत्र में सोमवार की देर रात एक भीषण सड़क हादसा हो गया। यहाँ के किशनपुरा बंबा के पास एक तेज रफ्तार कार ने बाइक सवारों को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। इस भयानक हादसे में बाइक पर सवार तीनों लोगों की जिला अस्पताल में इलाज के दौरान दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद हाइवे पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई और कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बन गई। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए दुर्घटना को अंजाम देने वाली कार को अपने कब्जे में ले लिया है।

शादी समारोह से लौटते समय हुआ हादसा

मिली जानकारी के अनुसार, पलना गांव के रहने वाले 55 वर्षीय रामहेत छारी, 55 वर्षीय पुष्पेंद्र उर्फ बल्लू राजावत और 60 वर्षीय कुम्हेर सिंह एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए अंबाह आए थे। कार्यक्रम में खाना खाने के बाद रामहेत और कुम्हेर सिंह अपने साथी बल्लू राजावत को मुख्य हाईवे पर स्थित उनके घर छोड़ने जा रहे थे। तीनों बाइक पर सवार थे और जैसे ही वे किशनपुरा बंबा के पास बल्लू के घर के सामने पहुंचे, उन्होंने बाइक की रफ्तार धीमी की। इसी दौरान अंबाह से पोरसा की तरफ बेहद तेज गति से जा रही एक सफारी गाड़ी ने उनकी बाइक को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी।

इलाज के दौरान तीनों ने तोड़ा दम

टक्कर इतनी भीषण थी कि तीनों बाइक सवार सड़क पर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों और राहगीरों की मदद से तीनों को तुरंत अंबाह अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उनकी नाजुक हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत जिला अस्पताल मुरैना रेफर कर दिया। लेकिन घाव बेहद गहरे होने के कारण जिला अस्पताल में इलाज के दौरान तीनों घायलों ने एक-एक करके दम तोड़ दिया। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

शिक्षा की तलाश में गए छात्र, आग ने छीन ली 15 जिंदगियां

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो गया है। यहाँ के सेक्टर-डी में स्थित एक तीन मंजिला इमारत में भीषण आग लगने से कोचिंग और एनीमेशन का कोर्स करने वाले 15 छात्र-छात्राओं की झुलसकर मौत हो गई। दोपहर करीब ढाई बजे भड़की इस आग ने देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के वक्त दूसरी और तीसरी मंजिल पर मौजूद छात्र अंदर ही फंस गए। खुद को बचाने के लिए कुछ छात्रों ने बिल्डिंग से छलांग भी लगा दी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। फिलहाल, झुलसे और घायल हुए 9 छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ कई की हालत नाजुक बनी हुई है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि आग शॉर्ट सर्किट और एसी (AC) का कंप्रेसर फटने की वजह से लगी।

शॉर्ट सर्किट से भड़की आग

हादसे का शिकार हुई इस बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर एक पेट शॉप (पालतू जानवरों की दुकान) है, जबकि उसकी पहली मंजिल पर दुकान मालिक का गोदाम बना हुआ है। इसी गोदाम में अचानक आग लग गई और कुछ ही मिनटों में आग की लपटें पूरी इमारत में फैल गईं। इस बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर थ्री-डी एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर, गेमिंग जोन और 12वीं तक के बच्चों का कोचिंग सेंटर चल रहा था। आग इतनी तेजी से बढ़ी कि वहां पढ़ रहे बच्चों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला। सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मलबे से 15 शवों को बाहर निकाला गया।

मुख्यमंत्री और रक्षा मंत्री पहुंचे मौके पर

इस बड़े हादसे की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। हादसे के वक्त मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे, लेकिन सूचना मिलते ही वे अपना दौरा बीच में ही छोड़कर तुरंत लखनऊ वापस लौटे और सीधे घटनास्थल का मुआयना किया। इसके साथ ही देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी दिल्ली से लखनऊ पहुंचे और अस्पताल जाकर घायल छात्र-छात्राओं का हालचाल जाना। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गृह सचिव, डीजीपी और डीजी फायर समेत जिले के तमाम बड़े अधिकारी देर रात तक मौके पर मौजूद रहकर राहत और बचाव कार्य की निगरानी करते रहे।

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