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तनाव के बीच प्रशासन का बड़ा एक्शन, इलाके में खुदाई कराई गई

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बूंदी। शहर के अति संवेदनशील मीरा गेट इलाके में एक प्राचीन चबूतरे के नीचे धार्मिक महत्व की संरचनाएं और गंगाजी की पथवारियां होने के दावे को लेकर उपजा विवाद सोमवार को प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद शांत हुआ। हिंदू संगठनों द्वारा 24 जून तक खुदाई न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई थी, जिसके बाद जिला प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए मौके पर सफाई और खुदाई का काम शुरू करवाया। इस दौरान सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया गया था।

हिंदू संगठनों की चेतावनी के बाद हरकत में आया प्रशासन

मीरा गेट चौराहे के समीप गणेश मंदिर के पिछले हिस्से में स्थित एक पुराने चबूतरे को लेकर लंबे समय से दावा किया जा रहा था कि इसके नीचे ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की पथवारियां हैं। हिंदू संगठनों ने इस मांग को लेकर प्रशासन को कई बार ज्ञापन भी सौंपे थे। संगठनों द्वारा दी गई 24 जून की समयसीमा से पहले ही स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए संयुक्त टीम ने मोर्चा संभाल लिया।

भारी लाव-लश्कर के साथ मौके पर हुई खुदाई

तनाव की स्थिति को देखते हुए नगर परिषद, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम धरातल पर उतरी। उपखंड अधिकारी लक्ष्मीनारायण मीणा और नगर परिषद आयुक्त ब्रजेश राय की मौजूदगी में नगर परिषद की टीम ने जेसीबी मशीनों की मदद से चबूतरे के आसपास के हिस्से को खुदवाया और वहां जमी गंदगी को साफ कराया।

पहले चरण की खुदाई में नहीं मिले स्पष्ट अवशेष

नगर परिषद के अधिकारी जोधराज मीणा के अनुसार, संगठनों की मांग और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया। शुरुआती खुदाई और साफ-सफाई के दौरान वहां किसी मंदिर या विशेष धार्मिक ढांचे के पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं। एहतियात के तौर पर जगह को साफ कराकर सुरक्षित कर दिया गया है और आगामी निर्णय उच्चाधिकारियों के निर्देशों के बाद लिया जाएगा।

छावनी में तब्दील रहा मीरा गेट, पुलिस की पैनी नजर

कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। दोनों पक्षों के लोग मौके पर जमा होने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मुस्तैद जवानों ने उन्हें सुरक्षा घेरे से दूर ही रखा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कुछ रास्तों पर आवाजाही को भी रोका गया।

पुराना है विवाद, आगामी फैसले पर टिकी निगाहें

यह मामला नया नहीं है; इससे पहले भी पुजारी पक्ष द्वारा यहां खुदाई की कोशिश की जा चुकी है, जिसे तब प्रशासन ने रुकवा दिया था। फिलहाल मौके पर शांति व्यवस्था कायम है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस बल तैनात है। अब हर किसी की नजर इस बात पर है कि इस संवेदनशील जमीन को लेकर प्रशासन का अगला कदम क्या होगा।

राज्यसभा टिकट न मिलने के बाद जॉर्ज कुरियन ने छोड़ा मंत्री पद

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता जॉर्ज कुरियन ने मंगलवार को केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन राज्य मंत्री (MoS) के पद से इस्तीफा दे दिया है। राज्यसभा का छह साल का कार्यकाल पूरा होने की वजह से उन्हें अपने पद से हटना पड़ा है।

जॉर्ज कुरियन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तीसरी कैबिनेट में ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र केंद्रीय मंत्री थे। उनका राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया था। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि भारत की राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत केंद्रीय मंत्रिपरिषद से जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।

कौन हैं जॉर्ज कुरियन?

65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन भाजपा के एक बेहद वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं। वे साल 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के समय से ही इसके एक सक्रिय सदस्य के रूप में जुड़े रहे हैं। अगस्त 2024 से वे मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में राज्य मंत्री (MoS) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, कुरियन का जन्म 20 सितंबर, 1960 को केरल के कोट्टायम जिले की एट्टुमानूर नगरपालिका के नाम्बियाकुलम में हुआ था। उन्होंने अपने गृहनगर से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद कानून (लॉ) में ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है।

इस्तीफे की मुख्य वजह

नियमों के मुताबिक राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने के चलते जॉर्ज कुरियन को मंत्री पद छोड़ना पड़ा। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि केरल विधानसभा चुनावों में पार्टी के उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न रहने के कारण उन्हें दोबारा उच्च सदन (राज्यसभा) के लिए नामांकित (नॉमिनेट) नहीं किया गया।

ऐसा रहा राजनीतिक सफर

  • केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ: जॉर्ज कुरियन ने 9 जून, 2024 को केंद्रीय राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली थी। इसके बाद 11 जून, 2024 को उन्होंने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय का कार्यभार संभाला था।

  • पूर्व में रहे अहम पद: केंद्रीय मंत्री बनने से पहले भी वे कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और राजनीतिक पदों पर रह चुके हैं। वे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष (वाइस चेयरमैन) की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अलावा, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान तत्कालीन केंद्रीय रेल राज्य मंत्री ओ. राजगोपाल के विशेष कार्याधिकारी (OSD) के रूप में भी उन्होंने काम किया था।

अयोध्या राम मंदिर विवाद: चढ़ावे की कथित चोरी पर हाईकोर्ट में अहम सुनवाई आज

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अयोध्या। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित सुप्रसिद्ध श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे और दान राशि में हुई कथित वित्तीय अनियमितता व चोरी का मामला अब अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में समय के अभाव (समयाभाव) के चलते इस अति-संवेदनशील मामले पर सुनवाई नहीं की जा सकी। अदालती व्यस्तता के कारण अब इस संबंध में दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर आगामी 24 जून को सुनवाई होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। इस याचिका में मंदिर के चढ़ावे में हुए कथित गबन की उच्च स्तरीय जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या किसी अन्य निष्पक्ष स्वतंत्र एजेंसी से कराने तथा पूरे चढ़ावे व दान का व्यापक ऑडिट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग – CAG) से कराने की गुहार लगाई गई है। यह महत्वपूर्ण याचिका न्यायमूर्ति पंकज भाटिया और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की ग्रीष्मकालीन अवकाश पीठ (समर वेकेशन बेंच) के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई थी।

कैग ऑडिट और स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने के लिए याचिका दायर

अदालत में समय की कमी के चलते मामले को आगे बढ़ा दिया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित अशोक द्वारा जनहित में दायर की गई इस याचिका में यह दलील दी गई है कि देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं द्वारा आस्था के साथ भगवान रामलला को अर्पित किए गए चढ़ावे के धन में बड़े पैमाने पर हेरफेर और कथित गबन किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय स्तर पर जांच कराने के बजाय इसकी कमान सीधे सीबीआई या किसी केंद्रीय स्वतंत्र जांच एजेंसी को सौंपी जानी चाहिए। साथ ही, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मंदिर ट्रस्ट के खातों और चढ़ावे की राशि का कैग से विशेष ऑडिट कराया जाना बेहद जरूरी है।

राम मंदिर: प्राण प्रतिष्ठा के दो वर्षों में सामने आए चार बड़े विवाद, प्रबंधन पर उठे सवाल

रामलला के भव्य मंदिर में हुए ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बाद के पिछले दो वर्षों के सफर पर नजर डालें, तो मंदिर प्रबंधन और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े चार बड़े विवाद सामने आ चुके हैं। इन सभी मामलों में ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों, अधिकारियों और वहां की आंतरिक प्रबंधन व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर लगातार गंभीर सवालिया निशान खड़े होते रहे हैं। हालांकि, आश्चर्य की बात यह है कि पिछले किसी भी विवाद में अब तक कोई ठोस या बड़ी दंडात्मक कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। इस बार का चढ़ावा चोरी का मामला इसलिए अधिक तूल पकड़ चुका है क्योंकि इसका सीधा संबंध आम श्रद्धालुओं की आस्था और उनके द्वारा दिए गए दान से जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ इसकी तीखी चर्चा हो रही है और दोषियों पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

ये हैं वे चार मुख्य विवाद जिन्होंने राम मंदिर की सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया:

  • 1. रामलला का मुकुट चोरी होना: प्राण प्रतिष्ठा के कुछ ही महीनों बाद रामलला के दरबार से एक कीमती मुकुट चोरी होने की खबर आई थी। शुरुआत में ट्रस्ट की तरफ से इस गंभीर मामले को दबाने और छिपाने का पूरा प्रयास किया गया, लेकिन कुछ ही दिनों में यह मामला सार्वजनिक रूप से उजागर हो गया। बाद में यह मुकुट ट्रस्ट के ही एक रसूखदार पदाधिकारी के करीबी व्यक्ति के कब्जे से कारसेवकपुरम इलाके से बरामद किया गया था।

  • 2. जमीनों की खरीद-फरोख्त का विवाद: मुकुट चोरी का विवाद अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि मंदिर के आसपास की जमीनों की खरीद-फरोख्त में भारी वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगा। ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीनों की कीमतों और सौदों को लेकर तमाम विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने तीखे सवाल उठाए थे। हालांकि, इस मामले में भी कोई बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं देखी गई।

  • 3. दर्शन पास घोटाला: पिछले वर्ष मंदिर में वीआईपी और सुगम दर्शन के नाम पर एक बड़ा पास घोटाला उजागर हुआ था। कई असामाजिक तत्वों और दलालों ने मिलकर फर्जी पास रैकेट चलाया और सीधे-साधे श्रद्धालुओं से दर्शन कराने के नाम पर मोटी रकम वसूली। इस जांच में कुछ स्थानीय पुलिसकर्मियों की संलिप्तता भी सामने आई थी, जिसके बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई लोगों पर कार्रवाई की। इस व्यवस्था को पूरी तरह फुलप्रूफ बनाने के लिए बाद में क्यूआर (QR) कोड आधारित डिजिटल पास प्रणाली लागू की गई, जिससे फर्जीवाड़े पर काफी हद तक लगाम लगी।

  • 4. चढ़ावा चोरी और वित्तीय हेरफेर: दर्शन पास का मामला थमा ही था कि अब सीधे दानपात्र से चढ़ावा चोरी करने का महाघोटाला सामने आ गया है। इस बार के खेल में न केवल छोटे और मामूली संविदा कर्मचारी संदेही हैं, बल्कि ट्रस्ट के अंदरूनी सूत्र और प्रबंधन से जुड़े बड़े चेहरे भी सीधे तौर पर सवालों के घेरे में आ गए हैं।

पारदर्शिता की कमी और लचर निगरानी तंत्र से बढ़ीं घटनाएं

एक के बाद एक लगातार सामने आ रहे इन विवादों के कारण राम मंदिर ट्रस्ट की आंतरिक कार्यशैली और सुरक्षा ऑडिट पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जानकारों और श्रद्धालुओं का स्पष्ट मानना है कि मंदिर की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाओं में जिस उच्च स्तर की पारदर्शिता (ट्रांसपेरेंसी) होनी चाहिए थी, उसकी भारी कमी है। यदि पूर्व में हुए मुकुट चोरी या भूमि विवाद के मामलों में ही ट्रस्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों को जेल भेजा होता और मंदिर परिसर के भीतर एक मजबूत व आधुनिक तकनीकी निगरानी तंत्र (सर्विलांस सिस्टम) विकसित किया होता, तो आज दान की राशि चोरी होने जैसी शर्मनाक घटनाओं को आसानी से रोका जा सकता था। अब सभी की निगाहें 24 जून को हाईकोर्ट द्वारा दिए जाने वाले आदेश पर टिकी हैं।

थरूर विवाद के बीच कांग्रेस का सख्त संदेश, पार्टी लाइन से हटे तो होगी कार्रवाई

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नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। कांग्रेस पार्टी अब सार्वजनिक मंचों पर अपनी आधिकारिक नीति से अलग राय रखने वाले नेताओं के प्रति पहले की तुलना में अधिक सख्त रुख अपनाती दिखाई दे रही है। हाल के दिनों में पार्टी सांसद शशि थरूर के कुछ बयानों पर कांग्रेस नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाओं ने यह साफ संकेत दिया है कि संगठन के भीतर अनुशासन और विचारधारा के पालन को लेकर एक नया और कड़ा संदेश दिया जा रहा है।

पार्टी की नीति से अलग बयानबाजी बर्दाश्त नहीं

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान ने स्पष्ट कर दिया है कि चाहे कोई सांसद हो, विधायक हो या संगठन का कोई बड़ा पदाधिकारी, उसे पार्टी की निर्धारित नीति और विचारधारा के दायरे में रहकर ही सार्वजनिक बयान देने होंगे। यदि कोई नेता सार्वजनिक रूप से अपनी अलग राय रखता है, तो पार्टी अब उससे दूरी बनाने के बजाय खुलकर और तुरंत उसका विरोध भी कर सकती है। वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि खुले मंचों पर पार्टी की आधिकारिक सोच से अलग विचार रखने से कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होती है, जिससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचता है। इसी कारण अब ऐसे मामलों में तुरंत ऐक्शन लेने की रणनीति अपनाई जा रही है।

आंतरिक मंचों पर चर्चा की आजादी, बाहर अनुशासन अनिवार्य

पार्टी के भीतर चल रहे ‘संगठन सृजन’ कार्यक्रम और विभिन्न राज्यों में आयोजित की जा रही कार्यशालाओं के दौरान भी कार्यकर्ताओं और नेताओं को कड़े अनुशासन तथा पार्टी लाइन का पालन करने की सीख दी जा रही है। हालांकि, कांग्रेस ने इस बात को भी रेखांकित किया है कि संगठन के आंतरिक मंचों और बैठकों में अपनी राय रखने व खुलकर चर्चा करने की पूरी स्वतंत्रता पहले की तरह बनी रहेगी, लेकिन बैठक से बाहर निकलते ही सभी को एक सुर में बात करनी होगी।

तिरुवल्लूर में जहरीली गैस का कहर, 9 मौतों से मचा हड़कंप

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तिरुवल्लूर। तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में स्थित एक निजी सी-फूड (समुद्री खाद्य) प्रसंस्करण और निर्यात कारखाने में हुए अमोनिया गैस रिसाव हादसे ने विकराल रूप ले लिया है। इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है। यह घटना 21 जून को उस समय हुई जब कारखाने में रोजाना की तरह काम चल रहा था। तमिलनाडु सरकार द्वारा जारी आधिकारिक मीडिया बुलेटिन के अनुसार, इस जहरीली गैस की चपेट में आने से कुल 80 लोग प्रभावित हुए थे, जिनमें से 9 महिला श्रमिकों की मौत हो चुकी है।

प्रभावितों में अधिकांश प्रवासी महिला मजदूर

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस हादसे का शिकार हुए लोगों में से ज्यादातर ओडिशा, असम, झारखंड, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से आए प्रवासी श्रमिक हैं। मृतकों में 7 महिलाएं ओडिशा की और 2 महिलाएं असम की रहने वाली थीं। मारे गए श्रमिकों की पहचान शिबानी, जुमानी जुआंगा, गीता जुआंगा, पूर्णिमा जुआंगा, चंपाबती जुआंगा, पार्वती जुआंगा, सीता हसदा और अंजिला सोरेन के रूप में हुई है, जबकि एक मृतक महिला की पहचान अभी नहीं हो सकी है (संदेह है कि वह भी ओडिशा से थी)। वर्तमान में 69 श्रमिकों का इलाज वेल्स अस्पताल, वेंकटेश्वर अस्पताल, स्टेनली अस्पताल और राजीव गांधी सरकारी सामान्य अस्पताल में चल रहा है, वहीं दो लोगों को ठीक होने के बाद छुट्टी दे दी गई है।

सांस लेने में तकलीफ के बाद मची अफरा-तफरी

कारखाने में नियमित काम के दौरान अचानक अमोनिया गैस का रिसाव शुरू हो गया। गैस इतनी जहरीली थी कि संपर्क में आते ही श्रमिकों को सांस लेने में भारी तकलीफ, तेज खांसी, सीने में दर्द और आंखों व गले में भयंकर जलन होने लगी। देखते ही देखते कारखाने के भीतर चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग, बचाव दल और स्वास्थ्य अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और प्रभावितों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग घायलों की स्थिति पर नजर रखे हुए है और कारखाने के अंदर व आसपास के पूरे इलाके में पर्यावरण सुरक्षा की जांच की जा रही है।

ओडिशा के मुख्यमंत्री ने की मुआवजे की घोषणा

इस दर्दनाक हादसे पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, सीएम ने कहा कि वे इस घटना से बेहद व्यथित हैं। उन्होंने जान गंवाने वाली महिला श्रमिकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं और घायल श्रमिकों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। इसके साथ ही ओडिशा सरकार ने मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) से प्रत्येक मृतक श्रमिक के परिवार को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता (अनुग्रह राशि) देने का ऐलान किया है।

महाकाल भक्तों के लिए बड़ा बदलाव, भस्म आरती दर्शन पर नई पाबंदी

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उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली विश्व प्रसिद्ध 'भस्म आरती' देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। तड़के होने वाली इस अलौकिक आरती में शामिल होने के लिए भक्तों को पहले से विशेष पास या अनुमति लेनी होती है। भस्म आरती के पासों की लगातार बढ़ती मांग और सीमित सीटों को देखते हुए अब मंदिर प्रबंध समिति दर्शन व्यवस्था में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने जा रही है, जिससे आम भक्तों को बाबा महाकाल के दर्शन आसानी से मिल सकेंगे।

आधार कार्ड और मोबाइल नंबर से होगी निगरानी

वर्तमान व्यवस्था में कुछ लोग अलग-अलग मोबाइल नंबरों का उपयोग करके बार-बार भस्म आरती की अनुमति (पास) हासिल कर लेते हैं। इसके कारण दूर-दराज से पहली बार उज्जैन आने वाले हजारों आम श्रद्धालु इस दिव्य आरती के दर्शन से वंचित रह जाते हैं। इस गड़बड़ी और एकाधिकार को रोकने के लिए मंदिर समिति अब तकनीक का सहारा लेने जा रही है:

  • 3 महीने का प्रतिबंध: नई प्रणाली के तहत श्रद्धालुओं के बुकिंग डेटा की निगरानी सीधे उनके आधार कार्ड और मोबाइल नंबर के जरिए की जाएगी।

  • समान अवसर: यदि किसी श्रद्धालु ने एक बार भस्म आरती के दर्शन कर लिए हैं, तो उस आधार कार्ड पर अगले 3 महीने तक दोबारा भस्म आरती की अनुमति नहीं मिल सकेगी।

  • पारदर्शिता: मंदिर प्रशासन का मानना है कि इस डिजिटल कड़ाई से दर्शन प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष बनेगी। खासकर सावन और भाद्रपद जैसे व्यस्त महीनों में वीआईपी (VIP) या प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण जो सामान्य भक्त पीछे छूट जाते थे, अब उन्हें समान अवसर मिल सकेगा।

आम श्रद्धालुओं को मिलेगा सीधा फायदा

महाकाल मंदिर में हर दिन लगभग 1700 श्रद्धालुओं को ही भस्म आरती में शामिल होने की अनुमति दी जाती है, जिसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन (प्रोटोकॉल) दोनों श्रेणियां शामिल हैं। बढ़ती भीड़ के सामने यह संख्या बेहद कम है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पासों का वितरण अधिक संतुलित और पारदर्शी तरीके से हो सकेगा। जो श्रद्धालु महीनों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें अब आसानी से अनुमति मिल जाएगी और बिचौलियों या बार-बार पास बुक करने वालों पर पूरी तरह लगाम लग सकेगी।

तकनीक से सुधरेगा भीड़ प्रबंधन

धार्मिक मामलों के जानकारों के अनुसार, देश के अन्य बड़े और प्रमुख धार्मिक स्थलों जैसे तिरुपति बालाजी और माता वैष्णो देवी की तर्ज पर अब महाकाल मंदिर में भी भीड़ प्रबंधन के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग बेहद जरूरी हो गया है। मंदिर समिति का कहना है कि इस नई व्यवस्था का तकनीकी सिस्टम (सॉफ्टवेयर) लगभग तैयार किया जा रहा है और इसे जल्द ही आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया जाएगा। यदि ऐसा होता है, तो आने वाले सावन के महीने में बाबा महाकाल के दरबार पहुंचने वाले लाखों भक्तों को अधिक व्यवस्थित, सुलभ और निष्पक्ष दर्शन का लाभ मिल सकेगा।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर IIT भिलाई की नई उड़ान, फ्रांस के प्रतिष्ठित संस्थान से समझौता

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भिलाई। छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT Bhilai) ने अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। फ्रांस के नीस (Nice) शहर में 14 से 16 जून 2026 तक आयोजित 'भारत इनोवेट्स' (भारतीय शिक्षा इकोसिस्टम के लिए ग्लोबल एक्सेलेरेशन) वैश्विक कार्यक्रम के दौरान आईआईटी भिलाई ने फ्रांस के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थान 'इकोल सेंट्रेल डी नैनटेस' (Ecole Centrale de Nantes) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

शैक्षणिक, पेशेवर और सांस्कृतिक गतिविधियों को मिलेगा मजबूत ढांचा

यह समझौता दोनों शीर्ष तकनीकी संस्थानों के प्रोफेसरों, शोधकर्ताओं और छात्र-छात्राओं के बीच शैक्षणिक विकास, पेशेवर दक्षता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इस वैश्विक साझेदारी के जरिए अंतरराष्ट्रीय समझ विकसित करने, संयुक्त अनुसंधान (जॉइंट रिसर्च प्रोजेक्ट्स) को गति देने और दोनों देशों के बीच अकादमिक दोस्ती को प्रगाढ़ करने के लिए एक व्यापक व बहुआयामी ढांचा तैयार किया गया है।

एमओयू के तहत इन मुख्य क्षेत्रों पर होगा विशेष काम

आईआईटी भिलाई और सेंट्रेल नैनटेस के बीच हुए इस रणनीतिक समझौते के तहत दोनों संस्थान भविष्य में मिलकर कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर संयुक्त रूप से कार्य करेंगे:

  • फैकल्टी और छात्र विनिमय (Exchange Program): दोनों संस्थानों के प्राध्यापक (फैकल्टी) और विद्यार्थी एक-दूसरे के परिसर में जाकर पढ़ाई, अध्यापन और अत्याधुनिक तकनीकों को साझा कर सकेंगे।

  • संयुक्त अनुसंधान एवं परियोजनाएं: दोनों देशों के विशेषज्ञ मिलकर बहु-राष्ट्रीय और बहु-संस्थागत वैज्ञानिक परियोजनाओं पर काम करेंगे, जिससे वैश्विक समस्याओं के तकनीकी समाधान खोजे जा सकें।

  • जॉइंट डिग्री और विदेश अध्ययन प्रोग्राम: समझौते के तहत विशेष अल्पकालिक अकादमिक कार्यक्रमों, समर रिसर्च इंटर्नशिप और विदेश में पढ़ाई के अवसरों के साथ-साथ संयुक्त एवं दोहरी (जॉइंट एंड डुअल) डिग्री पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी तेजी से काम किया जाएगा।

  • सेमिनार और सूचनाओं का आदान-प्रदान: दोनों ही संस्थान उन्नत शैक्षणिक सामग्री, वैज्ञानिक डेटा, अकादमिक सूचनाओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक सेमिनारों व बैठकों में आपसी सहभागिता को बढ़ावा देंगे।

उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को मिलेगी नई वैश्विक पहचान

आईआईटी भिलाई और फ्रांस के सेंट्रेल नैनटेस के बीच हुई यह मजबूत साझेदारी उच्च शिक्षा, तकनीकी अनुसंधान और नवाचार (इनोवेशन) के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सशक्त बनाने की दिशा में एक बेहद क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है। इस वैश्विक गठजोड़ से आईआईटी भिलाई के विद्यार्थियों, छात्र-छात्राओं और युवा शोधकर्ताओं को वैश्विक पटल पर सीधे तौर पर सीखने, विश्वस्तरीय प्रयोगशालाओं में अनुसंधान करने और ज्ञान साझेदारी के बेहतरीन नए अवसर प्राप्त होंगे, जो उनके भविष्य को और अधिक उज्ज्वल बनाएंगे।

रायपुर में कबीर जयंती को लेकर आदेश जारी, मांस-मटन कारोबार रहेगा बंद

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रायपुर। आगामी 29 जून को कबीर जयंती के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मांस-मटन की बिक्री और पशु वध पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। रायपुर नगर पालिक निगम ने इस संबंध में एक आधिकारिक प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए शहर की सीमा के भीतर संचालित होने वाले सभी मटन-चिकन और मछली बाजारों, मांस दुकानों तथा वैध-अवैध बूचड़खानों (स्लॉटर हाउस) को अनिवार्य रूप से बंद रखने के निर्देश दिए हैं। आदेश के साथ ही निगम प्रशासन ने शहर के समस्त मांस कारोबारियों को कड़े लहजे में चेतावनी भी दी है कि यदि कबीर जयंती के दिन प्रतिबंधित होने के बावजूद कहीं भी गुपचुप तरीके से मांस बेचते हुए पाया गया, तो नगर निगम की टीम सामग्री को तत्काल जब्त कर दुकान को सील करने और कानूनी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी।

नगरीय प्रशासन विभाग के निर्देश पर लिया गया फैसला, जोन स्तर पर तैनात रहेंगे अधिकारी

नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह महत्वपूर्ण निर्णय राज्य सरकार के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जारी तय दिशा-निर्देशों के तहत लिया गया है। नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, 29 जून को चौबीस घंटे के लिए शहर के किसी भी रिहायशी, व्यावसायिक या आउटर क्षेत्र में मांस-मटन की खरीद-बिक्री पूरी तरह वर्जित रहेगी। इस प्रतिबंध को जमीनी स्तर पर कड़ाई से लागू करवाने के लिए निगम के सभी जोनों में विशेष उड़नदस्तों का गठन किया गया है। कबीर जयंती के दिन सभी जोनों के स्वास्थ्य अधिकारी (एचओ) और मुख्य स्वच्छता निरीक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार गश्त और कड़ा कड़ा पहरा देंगे।

दुकानों के साथ होटलों और रेस्तरां पर भी लागू होगा नियम, अधिकारियों ने की अपील

दूसरी तरफ, निगम प्रशासन ने अपने सर्कुलर में यह भी साफ कर दिया है कि यह प्रतिबंध केवल खुले बाजारों, कबीलों, चिकन सेंटर्स और बूचड़खानों तक ही सीमित नहीं रहेगा। यह नियम शहर के सभी छोटे-बड़े होटलों, ढाबों, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी समान रूप से लागू होगा। इस दिन किसी भी कमर्शियल किचन में नॉन-वेज फूड पकाने या परोसने की अनुमति नहीं होगी।

निगम की ओर से सभी मीट कारोबारियों, होटल संचालकों और आम नागरिकों से इस धार्मिक व सामाजिक आदेश का पूर्ण रूप से पालन करने और कबीर जयंती की पवित्रता बनाए रखने की अपील की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि 29 जून को सुबह से लेकर देर रात तक पूरे शहर में विशेष सर्विलांस और आकस्मिक निरीक्षण अभियान (सरप्राइज चेकिंग) चलाया जाएगा, और आदेश की अवहेलना करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

ममता को अध्यक्ष पद से हटाने के बाद बदले सुर, बागी बोले- दीदी हमारा मार्गदर्शन करें

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे भारी घमासान के बीच बागी गुट ने पार्टी संस्थापक ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाकर वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष (चेयरपर्सन) नियुक्त कर दिया है। इसके साथ ही बागी गुट के नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने एक नई 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्य समिति (NWC) की भी घोषणा की है। बागियों ने इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुख्य मार्गदर्शक (मेंटोर) की भूमिका निभाने की अपील की है।

सर्वसम्मति से चुनी गई नई राष्ट्रीय कार्य समिति

कोलकाता के एक निजी होटल में आयोजित तृणमूल कांग्रेस के विशेष सत्र के दौरान प्रतिनिधियों के सर्वसम्मत वोट से इस समानांतर सांगठनिक ढांचे को मंजूरी दी गई। नई कमेटी की घोषणा करते हुए विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि पार्टी के संविधान के अनुसार हर तीन साल में राष्ट्रीय कार्य समिति का पुनर्गठन अनिवार्य है, जिसका पालन नहीं हो रहा था। इस संवैधानिक संकट को दूर करने के लिए नियमों के तहत अरूप रॉय को नया चेयरपर्सन चुना गया है। अरूप रॉय के अलावा इस 30 सदस्यीय समिति में वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है, जिसके बाद अब बहुत जल्द जिला अध्यक्षों की नियुक्ति और जिला कमेटियों का गठन भी किया जाएगा। बागी गुट ने इस पूरे फैसले की आधिकारिक जानकारी चुनाव आयोग को देने की बात कही है।

80 में से 58 विधायकों की बड़ी बगावत

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी के भीतर शुरू हुआ यह संकट अब पार्टी के विभाजन के कगार पर पहुंच गया है। विधानसभा में टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से कम से कम 58 विधायकों ने मौजूदा शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ खुली बगावत कर दी है। इसी बागी गुट ने पहले शोभनदेब चट्टोपाध्याय की जगह ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर अपना समर्थन दिया था, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने भी मान्यता दे दी थी। अब इस गुट ने सीधे तौर पर संगठन पर अपना दावा ठोकते हुए इसे 'असली टीएमसी' करार दिया है। इस विशेष सत्र के दौरान लगे पोस्टरों और बैनरों से ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की तस्वीरें पूरी तरह नदारद रहीं, जबकि महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के चित्र प्रमुखता से लगाए गए थे।

अरूप रॉय और सबीना यास्मीन का बयान

पार्टी के शीर्ष पद पर नियुक्त होने के बाद हावड़ा मध्य के वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय ने अपनी नई भूमिका को लेकर केवल इतना कहा कि वे मिलकर पार्टी कार्यकर्ताओं के हित में "काम करेंगे।" वहीं, बागी गुट की वरिष्ठ विधायक सबीना यास्मीन ने फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि यह निर्णय किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे सदन और बैठक में मौजूद सभी प्रतिनिधियों की राय जानने के बाद सर्वसम्मति से लिया गया है। दूसरी तरफ, ममता बनर्जी के वफादार और पार्टी नेताओं ने इस पूरी बैठक को असंवैधानिक और एक "कॉमेडी शो" बताते हुए खारिज कर दिया है और कहा है कि ममता बनर्जी ही पार्टी की सर्वोच्च नेता बनी रहेंगी।

क्रिप्टोकरेंसी के जरिए गैंग तक पहुंचता था पैसा, गोदारा गैंग का भंडाफोड़

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बीकानेर। डिजिटल अपराध और संगठित माफिया तंत्र के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान में स्थानीय पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। साइबर थाना पुलिस ने दो ऐसे शातिर युवकों को दबोचा है, जो ऑनलाइन धोखाधड़ी के जरिए कमाए गए काले धन को कुख्यात गैंगस्टर रोहित गोदारा गिरोह तक पहुंचाने का काम कर रहे थे। शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि ठगी की इस रकम को ठिकाने लगाने के लिए हवाला और क्रिप्टोकरेंसी जैसे अवैध रास्तों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

क्रिप्टोकरेंसी और हवाला के जरिए होता था पैसों का ट्रांसफर

पकड़े गए आरोपी देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे ऑनलाइन ठगों के लगातार संपर्क में थे। ठगी की शिकार जनता से वसूली गई रकम को सबसे पहले फर्जी या डमी बैंक खातों में जमा कराया जाता था। इसके बाद, तकनीकी हेरफेर करते हुए उस पैसे को डिजिटल करेंसी (क्रिप्टो) में बदला जाता था, ताकि कानून की नजरों से बचकर इसे गैंग के मुख्य गुर्गों तक भेजा जा सके। जांच टीम को इस पूरे खेल में हवाला कारोबारियों के शामिल होने के भी पुख्ता सबूत मिले हैं।

रामपुरा बस्ती से दबोचे गए दो शातिर गुर्गे

पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए रामपुरा बस्ती के रहने वाले संदीप स्वामी और मुकेश बिश्नोई को अपनी कस्टडी में लिया है। पकड़े गए दोनों आरोपियों से की गई गहन पूछताछ में कई चौंकाने वाले राज उगले हैं। इन जानकारियों के बाद सुरक्षा और जांच एजेंसियां अब इस पूरे सिंडिकेट की आखिरी कड़ी तक पहुंचने के लिए जाल बिछा रही हैं।

देशभर में दर्ज हैं शिकायतें, 50 लाख के संदिग्ध ट्रांजैक्शन

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए युवकों के बैंक खातों की जब बारीकी से जांच की गई, तो देश के कई राज्यों में इनके खिलाफ ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायतें लिंक पाई गईं। शुरुआती दौर की अकाउंट ऑडिटिंग में करीब 50 लाख रुपये के संदिग्ध और अवैध लेन-देन की बात प्रमाणित हो चुकी है, जिसकी संख्या आगे और बढ़ सकती है।

हथियारों की खरीद और रंगदारी में फंडिंग का अंदेशा

सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि इस ठगी के पैसे का इस्तेमाल सिर्फ ऐशो-आराम के लिए नहीं, बल्कि गंभीर अपराधों को अंजाम देने के लिए किया जा रहा था। पुलिस इस एंगल पर भी बारीकी से काम कर रही है कि क्या इस ब्लैक मनी का उपयोग अवैध हथियारों की तस्करी, कारोबारियों से रंगदारी वसूलने और गैंग के नेटवर्क को मजबूत करने वाली गतिविधियों में तो नहीं किया जा रहा था।

पुराने मुकदमों की खंगाली जा रही हिस्ट्री, मोबाइल डेटा जब्त

पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला है कि पकड़े गए दोनों आरोपियों का पुराना इतिहास भी आपराधिक रहा है और इनके खिलाफ पहले भी मुकदमे दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस की टेक्निकल टीम उनके डिजिटल वॉलेट, मोबाइल कॉल डिटेल्स, चैट और बैंक स्टेटमेंट्स की बारीकी से स्क्रूटनी कर रही है ताकि इस संगठित गिरोह के बाकी चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।

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