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राम मंदिर में चढ़ावे पर सवाल, पांच वर्षों का ऑडिट खोल सकता है कई राज

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अयोध्या/लखनऊ। अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित हेरफेर और चोरी के मामले में आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। इस संवेदनशील मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) की टीम ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर ली है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में राम मंदिर में पिछले पांच सालों के दौरान आए पूरे चढ़ावे का गहन फॉरेंसिक ऑडिट (Scrutiny of Accounts) कराने की बेहद महत्वपूर्ण सिफारिश की है। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी वित्तीय अनियमितताओं को रोकने के लिए कई कड़े सुझाव भी दिए गए हैं, जिन पर अंतिम निर्णय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री लेंगे।

कई वर्षों से चल रहा था हेरफेर का खेल

एसआईटी ने अपनी शुरुआती तफ्तीश में कई चौंकाने वाले और अहम तथ्य शामिल किए हैं। जांच टीम को कुछ ऐसे पुख्ता साक्ष्य (सबूत) मिले हैं, जिनसे यह गंभीर आशंका पैदा हो गई है कि चढ़ावे में हेरफेर और गड़बड़ी का यह पूरा खेल कोई नया नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से लगातार पर्दे के पीछे चल रहा था। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की रिपोर्ट में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आंतरिक प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव करने, चढ़ावे की गिनती और जमा करने की व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता (Transparency) लाने के कड़े निर्देश शामिल हैं। इस रिपोर्ट के आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचने के बाद ही शासन स्तर से कोई बड़ा आधिकारिक बयान या आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।

ट्रस्ट को तत्काल भंग करने की उठी मांग

दूसरी तरफ, इस मामले के सामने आने के बाद संतों और धार्मिक संगठनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। मामले को लेकर मचे घमासान के बीच 'धर्मसेना' के अध्यक्ष संतोष दुबे ने सीधे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र के जरिए उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए मांग की है कि वर्तमान ट्रस्ट को तत्काल प्रभाव से भंग (Dismiss) कर दिया जाए। उन्होंने पत्र में लिखा है कि देश-विदेश के करोड़ों रामभक्तों की आस्था और उनकी गाढ़ी कमाई के दान के साथ ऐसा खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, इसलिए सरकार को तुरंत दखल देकर एक पारदर्शी और नई व्यवस्था कायम करनी चाहिए।

लखनऊ अग्निकांड: जांच तेज, घटनास्थल पर पहुंची विशेषज्ञों की टीम

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज पुरनिया इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद शासन और प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। इस दर्दनाक हादसे की जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीमों ने मंगलवार सुबह घटनास्थल का मुआयना किया। फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य और सबूत जुटाने के लिए पूरी तीन मंजिला इमारत को कड़े पहरे के बीच सील कर दिया है। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजहों की अभी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है, लेकिन शुरुआती तकनीकी जांच में यही सामने आया है कि पहली मंजिल के वेयरहाउस में पहले शॉर्ट सर्किट हुआ और फिर एसी (एयर कंडीशनर) का कंप्रेसर फटने से आग ने विकराल रूप धारण कर लिया।

मुख्यमंत्री की हाई-लेवल मीटिंग के बाद 4 अफसर निलंबित, 7 दिन में मांगी रिपोर्ट

हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात लखनऊ में एक उच्च स्तरीय आपातकालीन बैठक बुलाई। सीएम ने इस लापरवाही के जिम्मेदार दोषियों को कड़ा सबक सिखाने के लिए तत्काल एसआईटी (SIT) के गठन का हुक्म दिया। इस विशेष जांच दल में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ के एडीजी जोन प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है, जो अगले 7 दिनों में अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेंगे।

प्रथम दृष्ट्या घोर लापरवाही बरतने के आरोप में मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है। गाज गिरने वाले अफसरों में शामिल हैं:

  • गौरव कुमार (अधिशासी अभियंता – एक्सईएन कलेक्शन, बिजली विभाग, जानकीपुरम)

  • कमलेंद्र कुमार सिंह (फायर स्टेशन सेकंड ऑफिसर – एफएसएसओ, फायर विभाग, इंदिरा नगर)

  • अनिल कुमार (सहायक अभियंता – एई, लखनऊ विकास प्राधिकरण)

  • प्रमोद पांडे (अवर अभियंता – जेई, लखनऊ विकास प्राधिकरण)

इसके अलावा, लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने भी अपने स्तर पर एक पांच सदस्यीय आंतरिक जांच समिति बनाई है। माना जा रहा है कि इस समिति की रिपोर्ट आने के बाद कुछ और बड़े अधिकारियों पर निलंबन और विभागीय कार्रवाई की गाज गिर सकती है।

बिल्डिंग मालिक और संचालक समेत 4 नामजद आरोपी गिरफ्तार, 2 फरार

प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ पुलिसिया कार्रवाई भी बेहद तेजी से आगे बढ़ रही है। पुरनिया पुलिस चौकी के प्रभारी शुभम तिवारी की लिखित शिकायत (तहरीर) पर अलीगंज थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं और उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की धारा 6/10 के तहत 6 नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है।

सोमवार देर रात पुलिस की विशेष टीमों ने छापेमारी कर 4 मुख्य आरोपियों को दबोच लिया, जिनमें शामिल हैं:

  1. वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (मदेयगंज निवासी, बहुमंजिला इमारत का मुख्य मालिक)

  2. रामकृष्ण उपाध्याय (अलीगंज निवासी, ग्राउंड फ्लोर पर संचालित पेट शॉप का संचालक)

  3. तूशॉक कृष्णा जायसवाल (बालागंज निवासी, अवैध रूप से चल रहे थ्री-डी एनीमेशन सेंटर का संचालक)

  4. सुरेश कुमार शाहू (केशवनगर निवासी, पहली मंजिल पर स्थित वेयरहाउस का किरायेदार)

इस मामले में नामजद दो अन्य आरोपी धीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला फिलहाल फरार चल रहे हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) बबलू कुमार के मुताबिक, इस घटना में शामिल अन्य संदिग्धों और बैक-एंड पर मदद करने वाले लोगों की भूमिका की भी बारिकी से पड़ताल की जा रही है।

भीषण आग की चपेट में आने से 15 मासूमों ने गंवाई जान

उल्लेखनीय है कि सोमवार दोपहर करीब ढाई बजे अलीगंज के पुरनिया स्थित इस कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में अचानक आग लग गई थी। ग्राउंड फ्लोर पर पालतू जानवरों की दुकान थी और पहली मंजिल पर उसका गोदाम था, जहां से आग भड़की। ऊपरी मंजिलों यानी दूसरी और तीसरी मंजिल पर एक एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर, गेमिंग जोन और 12वीं तक के बच्चों का कोचिंग सेंटर चल रहा था।

आग इतनी तेजी से फैली कि ऊपर पढ़ाई कर रहे छात्रों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस, दमकल विभाग और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों ने करीब दो घंटे तक चले कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद 15 छात्रों के झुलसे हुए शव बाहर निकाले। जान बचाने के लिए खिड़की से नीचे कूदे 9 छात्र गंभीर रूप से चोटिल हैं, जबकि कई अन्य झुलसे हुए बच्चों का इलाज अस्पताल के आईसीयू में चल रहा है, जहां कई की हालत नाजुक बनी हुई है।

300 अरब डॉलर का आर्थिक पैकेज, ईरान के विकास की नई पटकथा

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तेहरान/वाशिंगटन। लगभग चार दशकों के कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय अलगाव के बाद, ईरान के लिए एक बहुत बड़े आर्थिक कायाकल्प (आर्थिक मोड़) का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में चल रही कूटनीतिक वार्ताओं के बीच अब 300 अरब डॉलर ($300 Billion) के एक विशालकाय प्रस्तावित 'विकास और निवेश फंड' की चर्चा दुनिया भर के बाजारों में जोर पकड़ रही है। यह भारी-भरकम राशि दुनिया के कई छोटे देशों की कुल जीडीपी (अर्थव्यवस्था) से भी कहीं बड़ी है, जो ईरान के भविष्य को पूरी तरह बदल सकती है।

यह सीधा मुआवजा नहीं, बल्कि 'इन्वेस्टमेंट मॉडल' है

इस ऐतिहासिक सौदे के पीछे के नियम और कूटनीति बेहद जटिल हैं। अमेरिकी प्रशासन ने पहले ही पूरी दुनिया के सामने यह साफ कर दिया है कि यह राशि ईरान को दिया जाने वाला कोई सीधा कैश पेमेंट (नकद भुगतान) या युद्ध का मुआवजा नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह ईरान के नाम कोई 300 अरब डॉलर का चेक काटना नहीं है, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय निवेश मंच (इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म) होगा।

इस मंच के जरिए अमेरिकी, खाड़ी देश और दुनिया भर की बड़ी कंपनियां व निजी कॉर्पोरेट निवेशक ईरान के अलग-अलग क्षेत्रों में अपना पैसा लगाएंगे। यह पूरा फंड सीधे ईरानी सरकार के खजाने या खाते में ट्रांसफर नहीं किया जाएगा, बल्कि सीधे विकास परियोजनाओं के निवेश के रूप में ईरान के भीतर आएगा।

दुनिया भर के निवेशकों से मिला बड़ा कमिटमेंट

इस प्रस्तावित फंड को लेकर वैश्विक बाजार में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इसमें सिर्फ अमेरिकी कंपनियां ही नहीं, बल्कि निम्नलिखित क्षेत्रों के बड़े निवेशक भी गहरी रुचि दिखा रहे हैं:

  • खाड़ी देश (Gulf Countries): यूएई, कतर और अन्य तेल समृद्ध राष्ट्र।

  • एशियाई देश: दक्षिण कोरिया, जापान, सिंगापुर और मलेशिया।

  • अन्य महाद्वीप: अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई बड़े कॉर्पोरेट घराने।

ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, इस 300 अरब डॉलर के कुल प्रस्तावित फंड में से आधे से अधिक राशि (लगभग 150 अरब डॉलर से ज्यादा) के लिए निवेशकों से शुरुआती कमिटमेंट (लिखित सहमति) पहले ही मिल चुकी है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि यह कोई कागजी योजना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर एक वास्तविक वैश्विक आर्थिक ढांचा तैयार करने की गंभीर कोशिश है।

400 अरब डॉलर के मुआवजे पर बना 'बीच का रास्ता'

हालिया सैन्य संघर्ष और जंग के दौरान ईरान के कई अत्यंत महत्वपूर्ण औद्योगिक और रणनीतिक ठिकानों—जैसे कच्चे तेल की रिफाइनरियों, कमर्शियल हवाई अड्डों और बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को भारी नुकसान पहुंचा था। इसी तबाही की भरपाई के लिए तेहरान शुरुआत में अमेरिका से करीब 400 अरब डॉलर के सीधे मुआवजे (कंपनसेशन) की मांग पर अड़ा हुआ था।

चूंकि अमेरिका ईरान को सीधे युद्ध का हर्जाना देने के लिए किसी भी कीमत पर तैयार नहीं था, इसलिए दोनों देशों के राजनयिकों ने बीच का रास्ता निकालते हुए 'मुआवजे' के इस दावे को 'वैश्विक निवेश के मॉडल' में तब्दील कर दिया। भले ही वाशिंगटन इसे विकास फंड कह रहा हो, लेकिन ईरान के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी इसे अपनी रणनीतिक जीत और 'अप्रत्यक्ष मुआवजे' के तौर पर ही देख रहे हैं, क्योंकि इस पैसे का अंतिम इस्तेमाल जंग में तबाह हुए ढांचे को दोबारा खड़ा करने में ही किया जाएगा।

ईरान की दशकों पुरानी ऊर्जा तकनीक का होगा आधुनिकीकरण

इस विशालकाय फंड की मदद से ईरान अपनी दशकों पुरानी और प्रतिबंधों के कारण जर्जर हो चुकी ऊर्जा (तेल और गैस) तकनीकों को पूरी तरह आधुनिक और अत्याधुनिक बना सकेगा। इसके साथ ही देश के भीतर:

  • नए और हाई-स्पीड रेलवे नेटवर्क बिछाए जाएंगे।

  • अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों (सी-पोर्ट्स) और हवाई अड्डों का बड़े पैमाने पर विकास होगा।

  • युद्ध में पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और संचार व्यवस्था को बहाल किया जाएगा।

गौरतलब है कि ईरान के पास वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार और चौथा सबसे बड़ा कच्चा तेल भंडार मौजूद है। इस निवेश के बाद ईरान अपनी इस प्राकृतिक ऊर्जा क्षमता का दुनिया के बाजारों में पूरी ताकत से इस्तेमाल कर सकेगा।

फंसे हुए 24 अरब डॉलर भी होंगे रिहा

इस 300 अरब डॉलर के नए निवेश फंड से अलग ईरान के लिए एक और बड़ी राहत की खबर है। विभिन्न देशों के विदेशी बैंकों में प्रतिबंधों के कारण फंसे (फ्रीज) पड़े ईरान के करीब 24 अरब डॉलर के सरकारी फंड को भी चरणबद्ध तरीके से जारी करने पर दोनों पक्षों में पूर्ण सहमति बन गई है। इस समझौते के तहत, कुल राशि की आधी रकम (लगभग 12 अरब डॉलर) दोनों देशों के बीच होने वाली अंतिम कूटनीतिक बातचीत से पहले ही ईरान को वापस मिल सकती है।

परमाणु शर्तों के पालन पर टिकी है पूरी डील

हालांकि, इस पूरे समझौते में एक बहुत बड़ा पेंच (शर्त) भी शामिल है। 300 अरब डॉलर का यह फंड अभी सिर्फ एक प्रस्तावित ढांचा है और इसकी शुरुआत तुरंत नहीं होने वाली है। इस वैश्विक पूंजी बाजार तक पहुंच बनाने के लिए ईरान को समझौते की बेहद सख्त और कड़ी शर्तों का अक्षरसः पालन करना होगा, जिनमें शामिल हैं:

  1. ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) को पूरी तरह सीमित करना होगा।

  2. देश में मौजूद संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के स्टॉक को पूरी तरह नष्ट/खत्म करना होगा।

  3. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के कड़े और अचानक होने वाले निरीक्षणों (इन्स्पेक्शंस) को बिना शर्त स्वीकार करना होगा।

यदि ईरान इनमें से किसी भी शर्त के पालन से पीछे हटता है, तो यह पूरी अरबों डॉलर की आर्थिक योजना तत्काल प्रभाव से खतरे में पड़ जाएगी और रद्द कर दी जाएगी।

शुक्रवार को होने वाले एमओयू (MoU) पर टिकी नजरें

पिछले चार दशकों के इतिहास में ईरान को वैश्विक वित्तीय और पूंजी बाजारों तक इतनी बड़ी और खुली पहुंच पहले कभी नहीं मिली है। यदि यह कूटनीतिक और आर्थिक योजना सफल रहती है, तो ईरान न केवल युद्ध की विभीषिका से हुए नुकसान से उबर जाएगा, बल्कि अपनी पूरी अर्थव्यवस्था को एक नई और ऐतिहासिक दिशा दे देगा। फिलहाल, दुनिया भर के कूटनीतिज्ञों और आर्थिक विश्लेषकों की निगाहें आगामी शुक्रवार पर टिकी हैं, जब अमेरिका और ईरान के शीर्ष अधिकारी इस ऐतिहासिक सहमति पत्र (MoU) पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर करने वाले हैं।

इनामी अपराधी ललन सिंह मुठभेड़ में ढेर, सामने आया लंबा आपराधिक इतिहास

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सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के सरसावा थाना क्षेत्र में सोमवार तड़के लखनऊ से आई स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़ी मुठभेड़ में ₹1.25 लाख के इनामी कुख्यात अपराधी ललन सिंह को मार गिराया। इस हाई-प्रोफाइल एनकाउंटर ने एक बार फिर स्थानीय जिला पुलिस की खुफिया कार्यप्रणाली और मुखबिर तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 700 किलोमीटर दूर राजधानी लखनऊ से पहुंची एसटीएफ की टीम ने इस बेहद गोपनीय ऑपरेशन को अपने स्तर पर अंजाम दिया, जबकि स्थानीय सरसावा पुलिस को इसकी कानोंकान भनक तक नहीं लगी। जब मुठभेड़ लगभग खत्म हो चुकी थी, तब जाकर स्थानीय पुलिस को मामले की जानकारी हुई।

तड़के 3 बजे सरसावा-नकुड़ मार्ग पर गूंजी गोलियां

यूपी एसटीएफ को खुफिया जानकारी मिली थी कि साल 2022 में बिहार के पटना में पुलिस हिरासत से अपने दो भाइयों के साथ फरार हुआ कुख्यात अपराधी ललन सिंह अपने एक साथी के साथ सहारनपुर में किसी बड़ी डकैती या जघन्य वारदात को अंजाम देने की फिराक में घूम रहा है। इस इनपुट के आधार पर सोमवार तड़के करीब तीन बजे एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक लाल प्रताप सिंह के नेतृत्व में निरीक्षक अंजनी कुमार पांडेय, आदित्य कुमार सिंह और उप निरीक्षक मनोज कुमार की विशेष टीम ने सरसावा-नकुड़ रोड पर नाकेबंदी कर वाहनों की चेकिंग शुरू की।

इसी दौरान एक मोटरसाइकिल पर सवार दो संदिग्धों को जब एसटीएफ ने रुकने का इशारा किया, तो उन्होंने पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। एसटीएफ की जवाबी आत्मरक्षार्थ फायरिंग में ₹1.25 लाख का इनामी बदमाश ललन सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि उसका दूसरा साथी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से भागने में सफल रहा। घायल बदमाश को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस भीषण गोलीबारी के दौरान बदमाशों की गोलियां अपर पुलिस अधीक्षक लाल प्रताप सिंह और निरीक्षक आदित्य कुमार सिंह की बुलेटप्रूफ जैकेट पर भी लगीं, जिससे वे बाल-बाल बच गए।

दरोगा की हत्या और बैंक डकैती समेत दर्ज थे कई संगीन मामले

एसटीएफ के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, मारा गया बदमाश ललन सिंह मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के आनंदगोलवा गांव का रहने वाला था। वह अपने भाइयों मनीश सिंह और रजनीश सिंह के साथ मिलकर एक अत्यंत क्रूर अंतर्राज्यीय गैंग चलाता था। उसके खिलाफ बिहार और उत्तर प्रदेश में 7 लोगों की हत्या, बैंक डकैती, कैश वैन से लूटपाट और सुरक्षाकर्मियों से सरकारी हथियार छीनने जैसे दर्जनों जघन्य मामले दर्ज थे।

ललन सिंह ने वाराणसी में एक उपनिरीक्षक (दरोगा) अजय यादव को गोली मारकर उनकी सर्विस पिस्टल लूटी थी। इसके अलावा वह पटना और नालंदा में दो अन्य पुलिस अधिकारियों की हत्या व हथियारों की लूट में भी नामजद था। वर्ष 2022 में वह पटना में न्यायिक हिरासत से भाग गया था, जिसके बाद वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट ने उस पर ₹1 लाख और चंदौली पुलिस अधीक्षक ने ₹25 हजार का नगद इनाम घोषित किया था। उसके दो भाई पहले ही अलग-अलग एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं।

स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे हैं ये 3 बड़े सवाल

इस सफल मुठभेड़ के बाद सहारनपुर के स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों में यह दूसरी बड़ी घटना है जब लखनऊ एसटीएफ ने स्थानीय पुलिस को बिना बताए जिले में घुसकर किसी बड़े अपराधी का काम तमाम किया है। इससे पहले 20 दिसंबर को भी एसटीएफ ने गंगोह क्षेत्र में ₹1 लाख के इनामी बदमाश सिराज को ढेर किया था। इस घटनाक्रम से निम्नलिखित गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:

  • पहला सवाल: बिहार का इतना बड़ा और कुख्यात अपराधी समस्तीपुर से चलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में आकर छिप जाता है या रेकी करता है, इसकी खबर लखनऊ में बैठी एसटीएफ को मिल जाती है, लेकिन स्थानीय पुलिस और खुफिया विभाग (एलआईयू) को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगती?

  • दूसरा सवाल: ललन सिंह के साथ मौके से फरार हुआ उसका दूसरा साथी कौन है? क्या वह स्थानीय स्तर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कोई अपराधी है जो बिहार के इस गैंग को पनाह और रसद मुहैया करा रहा था?

  • तीसरा सवाल: पिछले छह महीनों के भीतर सुल्तानपुर के सिराज, इमरान, शहजाद, अहसान और अब बिहार के ललन सिंह के एनकाउंटर से क्या यह साबित होता है कि सहारनपुर और आसपास के इलाके अब पूर्वांचल तथा बिहार के खूंखार गैंग्स की नई शरणस्थली या कार्यक्षेत्र बनते जा रहे हैं?

फिलहाल, एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें फरार बदमाश की तलाश में जंगलों और संभावित ठिकानों पर लगातार कॉम्बिंग व छापेमारी कर रही हैं। मारे गए बदमाश के शव को पोस्टमार्टम हाउस में रखवाकर बिहार में उसके परिजनों को सूचना भेज दी गई है।

AC के तारों से लटकी जिंदगी, आग में घिरे बच्चों की रुला देने वाली कहानी

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज पुरनिया इलाके में सोमवार दोपहर हुए भीषण अग्निकांड ने न केवल 15 मासूम छात्रों की जिंदगी छीन ली, बल्कि पीछे छोड़ गया है रूह कंपा देने वाले मंजर और अपनों को खोने का कभी न खत्म होने वाला दर्द। शॉर्ट सर्किट और एसी कंप्रेसर फटने से लगी इस आग ने चंद मिनटों में पूरी तीन मंजिला इमारत को श्मशान बना दिया। ग्राउंड फ्लोर पर पेट शॉप और पहली मंजिल पर उसके वेयरहाउस में लगी आग जब दूसरी और तीसरी मंजिल पर चल रहे थ्री-डी एनीमेशन सेंटर और कोचिंग इंस्टिट्यूट तक पहुंची, तो वहां मौजूद बच्चों के पास भागने का कोई रास्ता नहीं था। इस भयावह हादसे के दौरान अंदर फंसे छात्रों की आपबीती और चश्मदीदों के बयान किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी हैं।

"पापा शायद आज न बच पाऊं…" — जब मौत के मुंह से जयंत ने किया फोन

एनीमेशन सेंटर की पहली मंजिल की खिड़की से कूदकर अपनी जान बचाने वाले 26 वर्षीय जयंत गुप्ता इस समय अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। खिड़की से छलांग लगाने के दौरान नीचे मुख्य गेट पर लगी लोहे की नुकीली सरिया उनकी कमर में गहरे तक धंस गई। अत्यधिक खून बह जाने के कारण डॉक्टरों की टीम लगातार उन्हें रक्त चढ़ाकर बचाने का प्रयास कर रही है।

ऐशबाग स्थित एलडीए कॉलोनी के रहने वाले उनके पिता प्रदीप कुमार ने रुंधे गले से बताया, "मेरा बेटा अपने सुनहरे करियर का सपना लेकर इस सेंटर में आ रहा था, मुझे नहीं पता था कि यहां उसकी जान पर बन आएगी।" उन्होंने बताया कि हादसे के वक्त जयंत ने अंदर से फोन किया था। वह रोते और चीखते हुए बोला— 'पापा आज शायद मैं न बच पाऊं, चारों तरफ भीषण आग है और मैं फंस गया हूं।' यह सुनते ही पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। गनीमत यह रही कि जयंत को समय रहते ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया, जहां फिलहाल डॉक्टर उन्हें खतरे से बाहर बता रहे हैं।

"मेरी जान तो बच गई, पर मेरा सबसे जिगरी दोस्त 'भविष्य' चला गया"

उत्तराखंड के अल्मोड़ा का रहने वाला छात्र 'भविष्य' इस अग्निकांड की भेंट चढ़ गया। उसका सहपाठी और पक्का दोस्त पंकज इस सदमे से उबर नहीं पा रहा है और बार-बार फफक कर रो पड़ता है। उत्तराखंड से लखनऊ आकर एनीमेशन की दुनिया में कुछ बड़ा करने का सपना देखने वाले पंकज ने रोते हुए कहा, "हम दोनों ने एक साथ बैठकर अपने करियर के सपने बुने थे। हम साथ पढ़ते थे, साथ रहते थे। आज मेरी जान तो बच गई, लेकिन मेरा सबसे करीबी दोस्त हमेशा के लिए मुझसे छिन गया। हमारा वो सपना अब कभी पूरा नहीं होगा।" इस हादसे ने केवल सांसें नहीं छीनीं, बल्कि कई युवा दोस्तों के सपनों के संसार को हमेशा के लिए उजाड़ दिया।

खिड़की से जलते हुए बिजली के तारों के सहारे नीचे उतरे छात्र

गढ़वाल (उत्तराखंड) के रहने वाले छात्र शैलेंद्र ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि आग लगते ही पूरे हॉल में इस कदर जहरीला और गाढ़ा धुआं भर गया कि एक हाथ की दूरी पर भी कुछ देखना असंभव था। मुख्य दरवाजा आग की लपटों से घिर चुका था, इसलिए भागने का कोई रास्ता नहीं बचा था। जान बचाने के लिए छात्रों ने कुर्सियां फेंककर खिड़कियों के कांच के शीशे तोड़े।

शैलेंद्र ने बताया, "कोई रास्ता न देख मैं खिड़की से बाहर लटका और नीचे जा रहे बिजली के तारों को पकड़कर उतरने लगा। वे तार भी आग की गर्मी से पिघल रहे थे और जल रहे थे, जिससे मेरे दोनों हाथ बुरी तरह झुलस गए।" शैलेंद्र ने दमकल विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आग लगते ही तुरंत फोन किया गया था, लेकिन फायर ब्रिगेड की गाड़ियां करीब एक घंटे की देरी से पहुंचीं। अगर गाड़ियां समय पर आ जातीं, तो अंदर फंसे छात्रों का दम न घुटता।

गले तक आ गया धुआं, छात्रों ने सोचा 'आज जिंदगी का आखिरी दिन है'

सेंटर के छात्र आसिफ ने बताया कि दूसरी मंजिल पर हालात बिल्कुल नरक जैसे हो गए थे। गर्मी और ऑक्सीजन की कमी के कारण सांस लेना दूभर था। आसिफ ने कहा, "मैंने सोच लिया था कि आज मेरी जिंदगी का आखिरी दिन है। मेरे साथ मौजूद सिर्फ 3-4 लोग ही किसी तरह खिड़की के रास्ते बाहर आ पाए, अंदर मौजूद मेरे बाकी साथियों का अब तक कुछ पता नहीं चल सका है। मेरी आंखों के सामने कई साथी तड़प-तड़प कर शांत हो गए।"

बचाव के तरकीब भी हुए फेल: खुद को बाथरूम में किया बंद, नल खोलकर बैठे रहे

बिल्डिंग के बाहर खड़ी स्थानीय लोगों की भीड़ अंदर फंसे बच्चों को देखकर पूरी तरह बेबस थी। कुछ युवकों ने बाहर से पत्थर मारकर कांच की खिड़कियां तोड़ने की कोशिश की ताकि धुआं बाहर निकल सके, लेकिन तभी इमारत के ऊपर लगे भारी-भरकम लोहे के विज्ञापन बोर्ड (होर्डिंग्स) जलकर नीचे गिरने लगे, जिससे नीचे खड़े लोग भी पीछे हटने को मजबूर हो गए।

अंदर फंसे कुछ समझदार छात्रों ने खुद को आग और धुएं से बचाने के लिए बाथरूम के भीतर बंद कर लिया। वे लगातार नल खोलकर अपने ऊपर और फर्श पर पानी गिराते रहे ताकि आग की तपिश उन तक न पहुंचे, लेकिन जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के कारण कई छात्र वहीं अचेत हो गए।

दिल दहला देने वाली मौत: छत से कूदा युवक, पेट में आर-पार हो गई रेलिंग

हादसे का सबसे दर्दनाक और विचलित कर देने वाला नजारा तब देखने को मिला जब तीसरी मंजिल की छत पर लपटों से घिरे एक युवक ने जान बचाने की अंतिम कोशिश में नीचे छलांग लगा दी। बदकिस्मती से नीचे कूदते समय वह हवा में ही सीधे हाई-टेंशन बिजली के तारों से टकरा गया। करंट के झटके और असंतुलन के कारण वह सीधे नीचे बाउंड्री वॉल पर बनी लोहे की नुकीली रेलिंग पर जाकर गिरा। लोहे की नुकीली रॉड उसके पेट में पूरी तरह धंस गई। स्थानीय लोगों ने लोहे की जाली को काटकर लहूलुहान युवक को किसी तरह बाहर निकाला और अस्पताल भिजवाया, लेकिन अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव के कारण डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

अग्निकांड की इस विभीषिका ने पूरे लखनऊ शहर को झकझोर कर रख दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर घटना की मजिस्ट्रेट जांच शुरू कर दी गई है और अवैध रूप से बिना फायर एनओसी के चल रहे इस कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के मालिकों व जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

मध्य प्रदेश में प्रशासनिक गड़बड़ी, जूनियर अफसरों के हाथ में सीनियर्स की ACR

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भोपाल। मध्य प्रदेश में हाल ही में हुए सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों के बाद कई प्रशासनिक विभागों में बड़ी अनियमितताएं और विसंगतियां सामने आ रही हैं। राज्य के कई महत्वपूर्ण विभागों में वरिष्ठ (सीनियर) अधिकारियों को दरकिनार कर कनिष्ठ (जूनियर) अधिकारियों को ऊंचे और मलाईदार पदों पर बैठा दिया गया है। इस वीटो पावर और पोस्टिंग के कारण अब जिलों में एक अजीब स्थिति पैदा हो गई है, जहाँ उच्च पदों पर काबिज ये जूनियर अधिकारी अपने से सीनियर अधिकारियों की गोपनीय रिपोर्ट (सीआर – चरित्र संपावली) लिखेंगे। इस व्यवस्था को लेकर प्रदेश के प्रशासनिक हलके और कर्मचारियों में भारी रोष और असंतोष देखा जा रहा है।

MSME और कृषि विभाग में वरिष्ठता की अनदेखी

कृषि विभाग में हुए विवाद के बाद अब सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग में भी वरिष्ठता की अनदेखी का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। एमएसएमई विभाग में निचले स्तर पर कार्यरत कई प्रभारी प्रबंधकों (प्रमोशन या प्रभार वाले अधिकारियों) को सीधे जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्रों का महाप्रबंधक (जीएम) बना दिया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह फैसला तब लिया गया जब विभाग के पास मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा चयनित 2016, 2017 और 2019 बैच के 60 से अधिक योग्य वर्ग-2 (राजपत्रित) अधिकारी पहले से ही लाइन में मौजूद हैं।

एक ही कुर्सी पर दो-दो अफसरों की तैनाती

वाणिज्यिक कर विभाग और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में तो स्थानांतरण नीतियों और नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं। राजधानी भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में कई स्थानों पर एक ही स्वीकृत पद के लिए दो-दो अधिकारियों की पोस्टिंग के आदेश जारी कर दिए गए हैं, जिससे विभागों में भारी असमंजस और 'कौन बॉस है' की लड़ाई छिड़ गई है। इसी तरह इंदौर में पदस्थ चीफ इंजीनियर योगेंद्र कुमार को उनके मूल पद से सीधे दो स्तर ऊपर का प्रभार सौंप दिया गया, जिस पर विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने पदानुक्रम (सीनियरिटी लिस्ट) के उल्लंघन की कड़ी कानूनी आपत्ति जताई है।

ग्रामीण विकास विभाग में भारी विरोध के बाद सुधरी गलती

इसी तरह का एक बड़ा घालमेल ग्रामीण विकास विभाग में भी देखने को मिला था, जहाँ 40 से अधिक योग्य और सीनियर अधिकारी उपलब्ध होने के बावजूद लगभग 33% पदों को नियम विरुद्ध तरीके से जूनियरों से भर दिया गया था। हालांकि, चौतरफा कड़े विरोध और न्यायालय जाने की चेतावनी के बाद विभाग को बैकफुट पर आना पड़ा और अपनी गलतियों में सुधार करना पड़ा:

  • इंदौर संभाग: अतिरिक्त संचालक स्तर के अत्यंत वरिष्ठ अधिकारी दीतू सिंह राणदा को उनके मूल पद से नीचे 'संयुक्त आयुक्त' के पद पर डिमोट कर रख दिया गया था, जिसे अब सुधारा गया है।

  • भोपाल: जनपद स्तर के सीईओ विनोद यादव को नियम विरुद्ध तरीके से रातोंरात पदोन्नत कर 'संयुक्त आयुक्त' का बड़ा प्रभार दे दिया गया था, जिस पर अब कैंसिलेशन की तलवार लटक रही है।

मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों का खुला उल्लंघन

प्रशासनिक विशेषज्ञों और रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों का साफ कहना है कि ट्रांसफर और प्रभार की यह पूरी प्रक्रिया 'मप्र सिविल सेवा नियम, 1961' के प्रावधानों के पूरी तरह खिलाफ है। नियमों के अनुसार, शासकीय प्रशासनिक व्यवस्था हमेशा 'पदानुक्रम' (Hierarchy) के सिद्धांत पर ही काम करती है। कोई भी कनिष्ठ (जूनियर) अधिकारी कभी भी अपने से वरिष्ठ (सीनियर) का 'नियंत्रण प्राधिकारी' या रिपोर्टिंग अथॉरिटी नहीं हो सकता।

किसी जूनियर को उच्च पद का प्रभार देकर उसे अपने सीनियर की वार्षिक सीआर (Confidential Report) लिखने का वैधानिक अधिकार देना 'सर्विस ज्यूरिसप्रूडेंस' (सेवा न्यायशास्त्र) के मूल सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत और असंवैधानिक है, जिससे शासकीय व्यवस्था चरमरा सकती है।

अब्दुल बासित ने स्वीकार की भारत की रक्षा ताकत, S-400 की खुलकर तारीफ

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लाहौर। भारत और पाकिस्तान के बीच सामरिक संतुलन को लेकर पूर्व पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित का एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान सामने आया है। बासित ने पाकिस्तानी सेना और सरकार के उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें युद्ध के दौरान बढ़त बनाने की बात कही जा रही थी। उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि भारत की हवाई सुरक्षा में तैनात रूसी निर्मित 'S-400 ट्रायम्फ' एयर डिफेंस सिस्टम बेहद शानदार और अचूक है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी सरकार और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को आगाह करते हुए माना कि पाकिस्तान के पास फिलहाल इस अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली की काट या इसका मुकाबला करने की कोई ठोस क्षमता मौजूद नहीं है।

'ऑपरेशन सिंदूर' की खुली पोल, सेना के दावे खोखले

अब्दुल बासित का यह बयान इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह मई 2025 में दोनों देशों के बीच हुए चार दिनों के सैन्य संघर्ष (ऑपरेशन सिंदूर) की जमीनी हकीकत को बयां करता है। उस झड़प के बाद से ही पाकिस्तानी सेना लगातार यह ढिंढोरा पीट रही थी कि उसने भारतीय वायु सीमा की सुरक्षा को भेदकर बढ़त बना ली थी। लेकिन पूर्व उच्चायुक्त ने कबूल किया कि संघर्ष के दौरान भारतीय वायुसेना के S-400 सिस्टम ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तानी वायुसेना के मंसूबों को पूरी तरह नाकाम कर दिया था। उन्होंने चेताया कि पाकिस्तानी सेना को अब अपनी कमियों को छिपाने वाले खोखले दावों से बाहर निकलना चाहिए और खुद के एयर डिफेंस को मजबूत करने पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

क्या है भारत का S-400 सौदा?

सामरिक दृष्टिकोण से भारत ने साल 2018 में रूस के साथ 5.43 अरब डॉलर में पांच S-400 मिसाइल बैटरियों की खरीद का सौदा किया था।

  • मौजूदा स्थिति: इस सौदे के तहत अधिकांश मिसाइल बैटरियां भारतीय वायुसेना को मिल चुकी हैं और पश्चिमी व पूर्वी सीमाओं पर तैनात हैं।

  • आगामी योजना: सौदे की अंतिम खेप भी इसी साल (2026) के अंत तक भारत पहुंचने की उम्मीद है।

  • अतिरिक्त खरीद: इस रक्षा प्रणाली के जबरदस्त और सफल प्रदर्शन को देखते हुए भारत सरकार अब रूस से ऐसी पांच और अतिरिक्त S-400 बैटरियां खरीदने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है।

क्यों अचूक है S-400 ट्रायम्फ?

अब्दुल बासित के मुताबिक, यह सिस्टम भारत को दक्षिण एशिया क्षेत्र में भारी रणनीतिक और सैन्य बढ़त देता है। इस एयर डिफेंस सिस्टम की ताकत निम्नलिखित विशेषताओं के कारण बेहद घातक मानी जाती है:

  • मल्टी-लेयर सुरक्षा: यह लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली (Surface-to-Air) एक बहुस्तरीय मिसाइल प्रणाली है।

  • अचूक ट्रैकिंग: यह सिस्टम 600 किलोमीटर की दूरी से ही दुश्मन के लड़ाकू विमानों, स्टील्थ ड्रोन, क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों को आसानी से ट्रैक (चिह्नित) कर सकता है।

  • हवा में ही ध्वस्त: ट्रैक करने के बाद यह प्रणाली दुश्मन के किसी भी हवाई हमले को 400 किलोमीटर के दायरे में ही हवा में मार गिराने और ध्वस्त करने की अचूक क्षमता रखती है।

सांप के काटने से बच्ची की हालत बिगड़ी, परिजन इलाज के लिए भटके

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गोपालगंज। जिले के भोरे थाना इलाके के छठियाव गांव से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जहाँ रात में सो रही एक 17 साल की लड़की की सांप के काटने से जान चली गई। तबियत बिगड़ने पर घरवाले उसे आनन-फानन में कई अस्पतालों में लेकर भटके, लेकिन आखिरकार पटना के पीएमसीएच पहुँचने से ठीक पहले रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। मृत किशोरी की पहचान रामपुकार राम की बेटी गायत्री कुमारी के रूप में हुई है। इस हादसे के बाद से पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गाँव में सन्नाटा पसरा हुआ है।

चारपाई पर सोते समय सांप ने काटा

पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, गायत्री रोजाना की तरह रात को अपने घर में चौकी पर सोई हुई थी। इसी बीच एक विषैले सांप ने उसकी गर्दन पर डस लिया। जहर फैलने की वजह से कुछ ही देर में लड़की की हालत बिगड़ने लगी और वह बेहोश हो गई। जैसे ही घरवालों को इस बात का पता चला, घर में चीख-पुकार मच गई और वे तुरंत उसे लेकर अस्पताल की तरफ भागे।

एक से दूसरे अस्पताल रेफर करते रहे डॉक्टर्स

बेहद नाजुक हालत में परिजन सबसे पहले गायत्री को स्थानीय भोरे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लेकर गए। वहाँ के डॉक्टरों ने शुरुआती इलाज तो किया, लेकिन हालत गंभीर देखते हुए उसे सदर अस्पताल भेज दिया। सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने भी काफी कोशिश की, पर स्थिति में सुधार न होता देख उसे बेहतर इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (PMCH) रेफर कर दिया गया।

पटना पहुंचने से पहले ही थम गईं सांसें

परिजन एम्बुलेंस से गायत्री को लेकर पटना के लिए निकले ही थे कि रास्ते में उसकी तबीयत और ज्यादा बिगड़ गई। अस्पताल की दहलीज तक पहुँचने से पहले ही रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। पीएमसीएच के डॉक्टरों ने जाँच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। बेटी की मौत की खबर सुनते ही माता-पिता और परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

गाँव वालों ने की पुख्ता इलाज और एंटी-वेनम की मांग

इस दर्दनाक हादसे से गुस्साए और दुखी ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से ग्रामीण इलाकों में सांप के काटने के इलाज (एंटी-स्नेक वेनम) और इमरजेंसी मेडिकल सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर स्थानीय अस्पतालों में ही समय पर सही इलाज मिल जाए, तो ऐसी असमय मौतों को रोका जा सकता है।

सिर्फ 3 कोचिंग के पास फायर NOC, ग्वालियर में छात्रों की सुरक्षा भगवान भरोसे

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ग्वालियर। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुए भीषण कोचिंग अग्निकांड के बाद भी ग्वालियर का प्रशासनिक अमला और कोचिंग संचालक गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों में सैकड़ों की संख्या में कोचिंग सेंटर्स धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर स्थानों पर आग बुझाने के पुख्ता इंतजाम ही नहीं हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे शहर में सिर्फ तीन कोचिंग संस्थानों के पास ही नगर निगम से जारी फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) है। बाकी के संस्थानों में न तो फायर फाइटिंग सिस्टम काम कर रहे हैं और न ही सुरक्षा के कोई अन्य प्रबंध किए गए हैं।

दिखावे की कार्रवाई और अधिकारियों की लापरवाही

यह पूरी हकीकत नगर निगम के अधिकारियों की जानकारी में भी है, लेकिन रसूख और लापरवाही के चलते इन खतरनाक संस्थानों के खिलाफ कोई ठोस या प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। अमूमन देखा जाता है कि जब देश में कहीं आग लगने का कोई बड़ा हादसा होता है, तब निगम का फायर अमला कुछ दिनों के लिए नींद से जागता है और जांच अभियान का दिखावा शुरू कर देता है। लेकिन जैसे ही दिन बीतते हैं, यह अभियान पूरी तरह ठंडा पड़ जाता है। लखनऊ हादसे में 15 छात्रों की मौत के बाद भी ग्वालियर के जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं।

संकरी सीढ़ियां और सिंगल एग्जिट से बढ़ा खतरा

शहर के अधिकांश कोचिंग संस्थान ऐसे भवनों में चल रहे हैं जो सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाते हैं। इसके लिए जितना जिम्मेदार प्रशासन है, उतने ही लापरवाह अभिभावक भी हैं, जो सिर्फ कोचिंग की लोकप्रियता और उसका रिजल्ट देखकर बच्चों का दाखिला करा देते हैं, लेकिन बिल्डिंग की सुरक्षा को नजरअंदाज कर देते हैं। इन कोचिंगों में बेहद संकरी सीढ़ियां, बाहर निकलने का सिर्फ एक सीमित मार्ग (सिंगल एग्जिट), कमरों में लकड़ी के पार्टिशन और क्षमता से अधिक बच्चों की भीड़भाड़ है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में यह लापरवाही एक बड़े और जानलेवा खतरे को दावत दे रही है। खुद प्रशासन के पास भी शहर में चल रहे सभी कोचिंग संस्थानों का कोई सटीक और समग्र रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।

10 दिनों से ठप पड़ा है जांच अभियान

पूर्व में दिल्ली के एक होटल में लगी आग के बाद नगर निगम की टीम ने शहर के कमर्शियल कॉम्प्लेक्सों, होटलों और कोचिंग सेंटर्स की जांच की थी। इस दौरान सिटी सेंटर स्थित एक नामी कोचिंग में फायर फाइटिंग सिस्टम बंद मिला और उसकी एनओसी की अवधि भी समाप्त हो चुकी थी, जिस पर कार्रवाई करते हुए डायरेक्टर का केबिन सील किया गया था। इसके बाद गत 12 जून को टोपी बाजार और मोर बाजार के कुछ प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई, लेकिन पिछले 10 दिनों से यह पूरा जांच अभियान पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है।

अधिकारी का बयान:

"नगर निगम द्वारा विभिन्न संस्थानों में फायर सिस्टम की लगातार जांच की जा रही है। आगे भी ऐसे सभी संवेदनशील कोचिंग और व्यावसायिक संस्थानों में टीम भेजकर फायर सेफ्टी के नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"

संघ प्रिय, आयुक्त, नगर निगम ग्वालियर

राहुल गांधी की याचिका पर मानहानि मामले में अदालत में अहम सुनवाई

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जबलपुर। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा दायर मानहानि मामले की याचिका पर मंगलवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में सुनवाई होने जा रही है। यह मामला केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान द्वारा भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में दर्ज कराया गया था। पिछली सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट ने निचली अदालत से इस मामले की ऑर्डर शीट (मामले का विवरण) मंगवाई थी, जिसे आज अदालत के सामने पेश किया जाएगा।

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा मामला साल 2018 का है, जब झाबुआ में एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी ने पनामा पेपर्स लीक मामले का जिक्र करते हुए कार्तिकेय सिंह और शिवराज सिंह चौहान का नाम लिया था। इस बयान के बाद कार्तिकेय ने अपनी सामाजिक छवि को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया था। इसी मामले में निचली अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी किया था, जिसे चुनौती देते हुए उन्होंने इसे रद्द करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

कोर्ट के समन को दी गई चुनौती

भोपाल की विशेष अदालत द्वारा जारी किए गए समन के विरोध में राहुल गांधी ने उच्च न्यायालय की शरण ली है। याचिका में तर्क दिया गया है कि निचली अदालत द्वारा समन जारी करने की प्रक्रिया और उसके कानूनी आधारों की न्यायिक समीक्षा की जानी चाहिए। राहुल गांधी इस अदालती आदेश को पूरी तरह खारिज कराने की मांग कर रहे हैं।

बयान पर दी गई थी सफाई

गौरतलब है कि साल 2018 में इस बयान के ठीक अगले ही दिन राहुल गांधी ने इस पर अपनी सफाई भी पेश की थी। उन्होंने कहा था कि वे भूलवश कार्तिकेय का नाम ले गए थे, जबकि उनका आशय छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे का नाम लेने से था। अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट इस बात का फैसला करेगा कि निचली अदालत द्वारा उठाया गया कदम कानूनी रूप से सही है या नहीं। इस महत्वपूर्ण कानूनी कार्यवाही पर राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें टिकी हुई हैं।

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