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बड़े मुकाबलों में चमकते हैं वैभव सूर्यवंशी, विरोधी गेंदबाजों पर पड़ते हैं भारी

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क्रिकेट की दुनिया में हुनरमंद खिलाड़ियों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन कुछ विरले एथलीट ऐसे होते हैं जो अपने शुरुआती दिनों में ही यह आभास करा देते हैं कि वे लंबी रेस के घोड़े हैं। भारतीय क्रिकेट के क्षितिज पर उभरते हुए युवा सितारे वैभव सूर्यवंशी भी अब इसी खास फेहरिस्त में शामिल होते दिख रहे हैं। महज 15 वर्ष की अल्पायु में इस युवा बल्लेबाज ने बार-बार यह साबित किया है कि बड़े और खिताबी मुकाबलों का मानसिक दबाव उन्हें विचलित नहीं करता, बल्कि उनके भीतर के आक्रामक खिलाड़ी को और अधिक निडर बना देता है।

मैदानी विवाद का जवाब शब्दों से नहीं, बल्ले से दिया

हाल ही में श्रीलंका 'ए' के खिलाफ खेली गई त्रिकोणीय श्रृंखला (ट्राई-सीरीज) के दौरान वैभव सूर्यवंशी अपने खेल से इतर एक मैदानी विवाद के कारण अचानक चर्चाओं के केंद्र में आ गए थे। फाइनल मुकाबले से पहले तक टूर्नामेंट में उनका बल्ला उम्मीद के मुताबिक नहीं चला था और वे 30-40 रन के निजी स्कोर पर लगातार आउट हो रहे थे। इसी बीच, मैदान पर श्रीलंकाई खिलाड़ियों के साथ हुई उनकी तीखी कहासुनी ने खेल जगत में उनकी परिपक्वता को लेकर कई तरह के सवाल खड़े कर दिए थे। कुछ विश्लेषकों ने इसे उनका लड़कपन माना, तो कुछ ने यह कयास लगाए कि इस विवाद का नकारात्मक असर उनके खेल पर पड़ सकता है; परंतु वैभव ने इन तमाम आलोचनाओं का जवाब मुंह से देने के बजाय अपने बल्ले से देना बेहतर समझा।

फाइनल में मचाया कोहराम: 324 के स्ट्राइक रेट से खेली ऐतिहासिक पारी

त्रिकोणीय श्रृंखला के महामुकाबले (फाइनल) में मैदान पर उतरते ही वैभव ने विपक्षी टीम पर मानसिक बढ़त बनाने के लिए शुरुआत से ही बेहद आक्रामक तेवर अख्तियार किए। मैच के पहले ही ओवर में तेज गेंदबाज मोहम्मद शिराज की गेंद पर एक दर्शनीय चौका जड़कर उन्होंने श्रीलंकाई खेमे को बैकफुट पर धकेल दिया। इसके बाद मैदान पर रनों का जो तूफान आया, उसकी कल्पना विपक्ष ने भी नहीं की होगी।

वैभव ने विरोधी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए महज 29 गेंदों का सामना कर 94 रनों की आतिशी पारी खेल डाली। इस दौरान उन्होंने मैदान के हर कोने में चौकों और छक्कों की बरसात की। इस ऐतिहासिक पारी के दौरान उनका स्ट्राइक रेट 324.14 का रहा, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट में बेहद विरल और असाधारण माना जाता है। सबसे हैरतअंगेज बात यह रही कि उन्होंने सिर्फ 11 गेंदों में अपना अर्धशतक (फिफ्टी) पूरा कर लिया था। उनकी इस विध्वंसक पारी ने मैच की दिशा को पूरी तरह बदल दिया और फाइनल को एकतरफा बना दिया। जब वैभव क्रीज पर थे, तब रन गति को देखते हुए भारत का अनुमानित (प्रोजेक्टेड) स्कोर एक समय 950 रनों के पार जाता हुआ दिखाई दे रहा था।

बड़े मैचों के मसीहा: अंडर-19 वर्ल्ड कप से लेकर आईपीएल तक जलवा

वैभव की इस पारी को महज एक इत्तेफाक या केवल एक टी-20 शैली का ब्लास्ट कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि उनके पिछले एक साल के आंकड़ों का विश्लेषण करें, तो उनकी बल्लेबाजी में एक खास पैटर्न साफ नजर आता है— मुकाबला जितना बड़ा और महत्वपूर्ण होता है, वैभव का बल्ला उतना ही खतरनाक रूप अख्तियार कर लेता है:

  • अंडर-19 विश्व कप फाइनल: इस टूर्नामेंट के शुरुआती मैचों में उनका प्रदर्शन औसत रहा था, लेकिन जब टीम को फाइनल में उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब उन्होंने 80 गेंदों पर 175 रनों की अविश्वसनीय पारी खेलकर भारत को विश्व चैंपियन बनाया।

  • IPL 2026 एलिमिनेटर: इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 में राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए उन्होंने सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ करो या मरो वाले एलिमिनेटर मैच में सिर्फ 29 गेंदों पर 97 रन कूटकर अपनी टीम को एकतरफा जीत दिलाई थी।

  • IPL 2026 क्वालिफायर-2: इसके बाद गुजरात टाइटंस के खिलाफ अहम क्वालिफायर-2 मुकाबले में भी उन्होंने दबाव की परिस्थितियों में 47 गेंदों पर 96 रनों की जुझारू पारी खेली। हालांकि, राजस्थान यह मैच हार गई, लेकिन वैभव की तकनीकी क्षमता की हर तरफ सराहना हुई।

'प्रेशर इज अ प्रिविलेज' की कसौटी पर खरे उतरे वैभव

आईपीएल 2026 के सत्र के दौरान दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने एक प्रसिद्ध वक्तव्य दिया था कि 'प्रेशर इज अ प्रिविलेज' अर्थात दबाव एक विशेषाधिकार है। इसका सीधा अर्थ यह है कि उम्मीदों और दबाव का बोझ उन्हीं कंधों पर होता है, जिनमें कुछ बड़ा करने की क्षमता होती है। 15 साल के वैभव सूर्यवंशी पर भी इस वक्त देश के करोड़ों खेल प्रेमियों की नजरें टिकी हुई हैं। इतनी कम उम्र में हर मैच में बड़ी पारी खेलने की उम्मीदें किसी भी खिलाड़ी के करियर को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन वैभव इन अपेक्षाओं के बोझ तले दबे बिना, इस दबाव का पूरा लुत्फ उठा रहे हैं और इसे बड़े मंच पर खुद को साबित करने के एक बेहतरीन अवसर के रूप में देख रहे हैं।

अंशुला कपूर की शादी की तैयारियां तेज, परिवार संग नजर आए अर्जुन और जान्हवी

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बॉलीवुड के गलियारों से एक बेहद खूबसूरत और बड़ी खबर सामने आ रही है। दिग्गज फिल्म निर्माता बोनी कपूर की बेटी और अभिनेता अर्जुन कपूर की बहन अंशुला कपूर जल्द ही अपने मंगेतर रोहन ठक्कर के साथ सात फेरे लेकर शादी के बंधन में बंधने जा रही हैं। कपूर परिवार के घर पर शादी से पहले के मांगलिक उत्सव और विशेष पूजा-अर्चना की रस्में पूरी भव्यता के साथ शुरू हो चुकी हैं। इस शानदार पारिवारिक जश्न की कुछ बेहद खूबसूरत और अनदेखी झलकियां शनाया कपूर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर प्रशंसकों के साथ साझा की हैं।

कपूर परिवार ने एक साथ की आरती, भाई का फर्ज निभाते दिखे अर्जुन

इस मांगलिक और खास मौके पर पूरा कपूर कुनबा एक छत के नीचे बेहद खुशहाल अंदाज में एकजुट नजर आया। प्री-वेडिंग पूजा के दौरान होने वाले दूल्हे राजा रोहन ठक्कर और दुल्हन अंशुला कपूर ने एक साथ मिलकर भगवान की आरती उतारी और सुखद भविष्य के लिए प्रार्थना की। इस दौरान परिवार के सभी करीबी सदस्य इस भक्तिमय पल के साक्षी बने।

अंशुला के बड़े भाई और अभिनेता अर्जुन कपूर लाल रंग के शानदार पारंपरिक (ट्रेडिशनल) परिधान में सजे बेहद जंच रहे थे, और वे अपनी बहन की शादी के हर इंतजाम को खुद संभालते हुए भाई का फर्ज निभाते नजर आए। वहीं, उनकी बहनें जाह्नवी कपूर और खुशी कपूर भी इस उत्सव में शामिल होकर अपनी दीदी की शादी की खुशियों को दोगुना करती दिखाई दीं।

पारंपरिक परिधानों में सजे सितारे, नवजोड़े को दिया आशीर्वाद

कपूर खानदान के इस पारिवारिक समारोह में महीप कपूर, सुनीता कपूर, संजय कपूर और शनाया कपूर सहित परिवार के तमाम वरिष्ठ और युवा सदस्यों ने शिरकत की। सभी लोग बेहद खूबसूरत पारंपरिक भारतीय कपड़ों में सज-धजकर पहुंचे थे। परिवार के सभी बड़ों ने होने वाले नए जोड़े (अंशुला और रोहन) को अपनी शुभकामनाएं और अटूट आशीर्वाद दिया। इसके बाद पूरे परिवार ने इस यादगार पल को कैमरों में कैद कराते हुए एक साथ कई शानदार ग्रुप तस्वीरें भी खिंचवाईं।

डेटिंग ऐप से शुरू हुई थी लव स्टोरी, 2025 में हुई थी सगाई

अंशुला कपूर और रोहन ठक्कर की प्रेम कहानी बेहद दिलचस्प है। दोनों की पहली मुलाकात साल 2022 में एक डिजिटल डेटिंग ऐप के माध्यम से हुई थी, जिसके बाद दोनों के बीच दोस्ती हुई और धीरे-धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया। शनाया कपूर ने इन खास तस्वीरों को अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किया है, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले अक्टूबर 2025 में अंशुला और रोहन की सगाई (इंगेजमेंट) की रस्म बेहद रोमांटिक अंदाज में संपन्न हुई थी। रोहन ने अंशुला के सबसे पसंदीदा शहर के ऐतिहासिक सेंट्रल पार्क में एक बेहद खूबसूरत महल (पैलेस) के सामने, रात के ठीक 1:15 बजे घुटनों पर बैठकर उन्हें शादी के लिए प्रपोज किया था, जिसके बाद अब साल 2026 में यह जोड़ा हमेशा-हमेशा के लिए एक-दूसरे का होने जा रहा है।

23 करोड़ की सौगात: मंत्री और सांसद ने छतरपुर की चार सड़कों का किया शिलान्यास

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पलामू। झारखंड के वित्त, योजना एवं विकास मंत्री राधाकृष्ण किशोर और स्थानीय सांसद विष्णु दयाल राम ने रविवार को एक संयुक्त कार्यक्रम के दौरान पलामू जिले के छतरपुर विधानसभा क्षेत्र के लिए 23 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली चार बड़ी सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इस मौके पर वित्त मंत्री ने क्षेत्र की उन्नति को लेकर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति जाहिर की और कहा कि वे विकास कार्यों में किसी भी तरह की दलगत राजनीति या सियासी भेदभाव को आड़े नहीं आने देंगे। उन्होंने सुदूर ग्रामीण अंचलों की प्रगति के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच मजबूत प्रशासनिक तालमेल को बेहद जरूरी बताया। नेताओं ने यह भी रेखांकित किया कि जो इलाका कभी धुर उग्रवाद की गिरफ्त में था, वहाँ सबसे पहले सुरक्षा चौकियां स्थापित कर अमन-चैन बहाल किया गया और अब बुनियादी ढाँचे को मजबूत कर जनता के जीवन स्तर को बेहतर बनाया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री जन-मन योजना के तहत क्षेत्र में 100 से अधिक नई ग्रामीण सड़कों के जाल बिछाने का खाका खींचा गया है।

दशकों की जर्जरता से मुक्ति दिलाएगा सरईडीह-डगरा मार्ग

इन स्वीकृत परियोजनाओं में सबसे मुख्य और बड़ी सौगात नौडीहा बाजार प्रखंड के निवासियों को सरईडीह-डगरा पथ के रूप में मिली है। योजना एवं विकास विभाग की अनाबद्ध निधि से मंजूर की गई इस विशेष सड़क की कुल लंबाई 8.87 किलोमीटर निर्धारित की गई है, जिसके निर्माण पर सरकार करीब 9 करोड़ 76 लाख रुपये खर्च करने जा रही है। वर्तमान में इस रास्ते की हालत इतनी खस्ताहाल है कि महज 9 किलोमीटर का सफर पूरा करने में राहगीरों को दो घंटे से भी ज्यादा का समय बर्बाद करना पड़ता है। मंत्री राधाकृष्ण किशोर के विशेष प्रयासों से स्वीकृत इस मार्ग के धरातल पर उतरने के बाद हार्वे, सलैया, डागरा, अंतकाल और जमुना सहित दर्जनों गांवों की हजारों की आबादी को आवागमन की इस बड़ी समस्या से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।

उग्रवाद के खात्मे के बाद अब बुनियादी विकास की बारी

सार्वजनिक मंच से जनता को संबोधित करते हुए जनप्रतिनिधियों ने पुराने दौर को याद किया और बताया कि डगरा और उसके आस-पास का क्षेत्र कभी घोर नक्सली और उग्रवादी गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था, जहां खौफ के कारण आम नागरिकों का दिन में भी निकलना दूभर था। सरकार की नीति के तहत पहले इलाके को पूरी तरह उग्रवाद मुक्त कराया गया और अब शांति की स्थापना के बाद यहाँ तीव्र गति से सड़क, बिजली, शिक्षा और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। सांसद ने भरोसा दिलाया कि सुदूरवर्ती इलाकों का सर्वांगीण विकास उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इन सड़कों के बन जाने से आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

शिलान्यास समारोह में उमड़ा जनसैलाब और गणमान्य जनों की मौजूदगी

इस ऐतिहासिक शिलान्यास कार्यक्रम के गवाह बनने के लिए नौडीहा बाजार प्रखंड और छतरपुर क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण और विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भारी संख्या में आयोजन स्थल पर पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक और स्थानीय नेतृत्व की भी सक्रिय सहभागिता रही, जिसमें प्रखंड प्रमुख रेशम कुमारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) परितोष प्रियदर्शी और स्थानीय मुखिया विनोद सिंह प्रमुख रूप से मंच पर मौजूद रहे। उनके अलावा सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता संतोष पाठक, मोहन जायसवाल, धर्मदेव यादव, ईश्वरी पांडे और आलोक यादव ने भी इस विकास योजना का स्वागत करते हुए क्षेत्र की जनता को बधाई दी और अधिकारियों से निर्माण कार्य को समय सीमा के भीतर व उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा कराने का आग्रह किया।

हार्टब्रेक गानों की परंपरा पर सोना मोहापात्रा का बड़ा बयान, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

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अपनी बुलंद आवाज और बेबाक अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली मशहूर सिंगर सोना मोहापात्रा ने एक बार फिर फिल्म उद्योग की आंतरिक कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। मनोरंजन जगत में महिलाओं की कम हिस्सेदारी, लैंगिक असमानता (सेक्सिज्म) और पक्षपात जैसे गंभीर मुद्दों पर अक्सर खुलकर बोलने वाली सोना ने इस बार बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री के मौजूदा सिस्टम को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर महिला गायिकाओं को बराबरी का हक न मिलने पर गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की है।

'ये कैसा डुएट है, जिसमें लड़की सिर्फ आखिर में आती है?'

सोना मोहापात्रा ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए बॉलीवुड के गानों के पीछे की कड़वी सच्चाई को उजागर किया। उन्होंने कहा, "आज के दौर में बॉलीवुड के जितने भी दिल टूटने (हार्टब्रेक) वाले या गहरे जज्बात के गाने आ रहे हैं, वे सभी पुरुषों के लिए रिजर्व कर दिए गए हैं। पर्दे पर प्यार की गहराई भी वही महसूस करते हैं और टूटे दिल का दर्द भी उन्हीं के माध्यम से दिखाया जाता है।"

अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए सिंगर ने आगे बताया, "मुझे जब भी किसी डुएट (युगल) गीत के लिए रिकॉर्डिंग स्टूडियो बुलाया गया, तो अक्सर मुझे पूरे गाने में बहुत कम जगह दी गई और सिर्फ आखिर की कुछ लाइनों में गाने का मौका मिला।" उन्होंने एक बेहद चर्चित गाने का जिक्र करते हुए कहा कि जब उन्हें उस गाने के शुरुआती ट्रैक के लिए बुलाया गया था, तो वह उसका स्ट्रक्चर देखकर पूरी तरह हैरान रह गई थीं।

सोना ने म्यूजिक कंपोजर्स की सोच पर सवाल उठाते हुए कहा, "उस गाने में मुखड़ा, अंतरा और मुख्य सुर- सब कुछ पुरुष सिंगर के हिस्से में डाल दिया गया था। महिला सिंगर की आवाज बस अंत में कुछ पलों के लिए आती है। मैंने तत्कालीन म्यूजिक डायरेक्टर से सीधे पूछा था कि क्या फिल्म का नायक खुद से ही मोहब्बत कर रहा है? यह कैसा डुएट गाना है, जिसमें फीमेल वॉयस को केवल अंत में एक औपचारिकता की तरह इस्तेमाल किया गया है?" हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह किसी एक संगीतकार या कलाकार की व्यक्तिगत गलती नहीं है, बल्कि पूरी इंडस्ट्री का ढांचा ही ऐसा रूढ़िवादी हो चुका है, जो प्रयोग करने या कोई नया रिस्क लेने से लगातार बचता है।

प्रतिनिधित्व का संकट: महिला सिंगर्स को बराबरी का मुकाम कैसे मिलेगा?

सोना मोहापात्रा के अनुसार, यह समस्या केवल कुछ चुनिंदा गानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के प्रतिनिधित्व (रिप्रेजेंटेशन) से जुड़ा एक बेहद गंभीर और गहरा मुद्दा है। यदि मुख्यधारा का सिनेमा महिलाओं के दृष्टिकोण से मजबूत और भावनात्मक कहानियां बुनना बंद कर देगा, तो आने वाले समय में संगीत और अभिनय के क्षेत्र में बड़ी फीमेल सुपरस्टार्स का उभरना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, "बात यह बिल्कुल नहीं है कि महिला गायिकाओं ने कभी दर्द भरे या कालजयी गाने नहीं गाए हैं। इतिहास गवाह है कि फीमेल सिंगर्स ने एक से बढ़कर एक सदाबहार नगमे दिए हैं। असली चिंता की बात यह है कि अब समकालीन दौर के गीतकारों और संगीतकारों द्वारा ऐसे बड़े पैमाने के गाने महिलाओं के नजरिए को ध्यान में रखकर लिखे ही नहीं जा रहे हैं। जब इंडस्ट्री के 80 से 90 प्रतिशत बड़े और बजट वाले गाने सिर्फ पुरुष कलाकारों के इर्द-गिर्द केंद्रित होंगे, तो महिला सिंगर्स को पुरुषों के समकक्ष बराबरी का मुकाम और पहचान कैसे हासिल होगी?"

चर्चित गाने 'जालिमा' का संदर्भ

गौरतलब है कि चर्चा में आया सुपरहिट गाना ‘जालिमा’ साल 2017 में रिलीज हुई बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान और माहिरा खान स्टारर फिल्म ‘रईस’ का है। इस बेहद लोकप्रिय रोमांटिक ट्रैक को मुख्य रूप से अरिजीत सिंह और हर्षदीप कौर की आवाजों में रिकॉर्ड किया गया था। सोना ने इसी शैली के गानों की संरचना को आधार बनाकर पूरी म्यूजिक इंडस्ट्री के भीतर पनप रही इस असमानता के खिलाफ आवाज उठाई है, जिसकी सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा हो रही है।

भीषण सड़क हादसा: ट्रक से टकराई कार, एक की जान गई; तीन की हालत नाजुक

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मुजफ्फरपुर। फकुली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रजला स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोमवार की सुबह एक भीषण सड़क हादसा सामने आया है। यहाँ एक तेज रफ्तार स्विफ्ट डिजायर कार आगे चल रहे ट्रक के पिछले हिस्से में अनियंत्रित होकर जा घुसी। इस दर्दनाक भिड़ंत में कार सवार एक व्यक्ति की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि वाहन चालक सहित तीन अन्य लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा ट्रक के नीचे बुरी तरह फंस गया और वाहन के परखच्चे उड़ गए। घटना के बाद हाईवे पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।

नियंत्रण खोने से ट्रक के नीचे घुसी तेज रफ्तार कार

प्राथमिक जानकारी के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त कार और ट्रक दोनों मुजफ्फरपुर से पटना की तरफ जा रहे थे। जैसे ही दोनों वाहन रजला हाईवे के समीप पहुंचे, अचानक कार चालक ने गाड़ी पर से अपना नियंत्रण खो दिया, जिसके चलते कार सीधे ट्रक के पिछले हिस्से से जा टकराई। इस भयानक एक्सीडेंट के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग की एक लेन पूरी तरह बाधित हो गई और देखते ही देखते सड़कों पर गाड़ियों का लंबा जाम लग गया, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

पुलिस ने बहाल कराया यातायात और शव को अस्पताल भेजा

सड़क दुर्घटना की भनक लगते ही स्थानीय थाना पुलिस तुरंत दलबल के साथ मौके पर पहुंची और युद्धस्तर पर राहत व बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हाईवे से हटाकर किनारे कराया, जिससे यातायात को दोबारा सामान्य किया जा सका। इसके बाद पुलिस कर्मियों ने कार में फंसे मृतक के शव को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला और उसे अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कानूनी प्रक्रिया के लिए नजदीकी मेडिकल कॉलेज अस्पताल भिजवा दिया।

वैशाली के निवासी के रूप में पहचान और घायलों का इलाज

पुलिस प्रशासन द्वारा की गई शुरुआती तफ्तीश में सामने आया है कि मृतक वैशाली जिले के सेंदुआरी गांव का रहने वाला था। हादसे में घायल हुए अन्य तीनों व्यक्तियों को इलाज के लिए पास के ही एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की देखरेख में उनका उपचार चल रहा है। स्थानीय थाना प्रभारी ने बताया कि कार और ट्रक की इस भिड़ंत में एक व्यक्ति की जान गई है। पुलिस फिलहाल परिजनों को सूचित करने के साथ ही मामले की विस्तृत जांच और अन्य जरूरी तथ्यों का सत्यापन करने में जुटी हुई है।

खौफनाक अंदाज, दमदार आवाज और यादगार डायलॉग्स; यही थी अमरीश पुरी की पहचान

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भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपनी रौबदार आवाज, बड़ी-बड़ी खौफनाक आंखों और दमदार अभिनय से खलनायकी को एक नया आयाम देने वाले दिग्गज अभिनेता अमरीश पुरी की आज जयंती है। 22 जून 1932 को पंजाब के नवांशहर में जन्मे अमरीश पुरी ने कला की दुनिया में कदम सीधे फिल्मों से नहीं, बल्कि थिएटर के जरिए रखा था। रुपहले पर्दे पर आने से पहले उन्होंने अपनी जीविका के लिए कई वर्षों तक सरकारी नौकरी भी की। 80 के दशक में जब उन्होंने पूरी तरह से फिल्मों का रुख किया, तो फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और विलेन के किरदारों को नायक के समकक्ष लाकर खड़ा कर दिया।

किरदारों से बनाई ऐसी पहचान कि हीरो पर भी भारी पड़े

अमरीश पुरी सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने पर्दे पर जो भी चोला ओढ़ा, उसे अमर कर दिया। चाहे वह किसी खुफिया गुफा में बैठकर दुनिया को तबाह करने का मंसूबा पालने वाला क्रूर 'मोगैंबो' हो, रेगिस्तान की विशाल हवेली से आतंक का साम्राज्य चलाने वाला 'ठाकुर दुर्जन सिंह' हो, या फिर ‘जा सिमरन जा, जी ले अपनी जिंदगी’ जैसा कड़क लेकिन भावुक संवाद बोलकर दर्शकों की आंखें नम करने वाला अनुशासित पिता।

उनकी गूंजती हुई आवाज और स्क्रीन पर छा जाने वाला जादुई व्यक्तित्व ऐसा था कि कई बार दर्शक सिनेमाघरों से बाहर निकलने के बाद फिल्म के मुख्य नायक से ज्यादा विलेन के रूप में अमरीश पुरी को याद रखते थे। आइए, उनकी जयंती के इस विशेष अवसर पर उनके कुछ सबसे ऐतिहासिक किरदारों और उनके प्रभाव पर नजर डालते हैं:

भारतीय और वैश्विक सिनेमा के सबसे यादगार किरदार

  • मोगैंबो (फिल्म: मिस्टर इंडिया): चमकीली मिलिट्री यूनिफॉर्म, अजीबोगरीब सिंहासन और दुनिया पर राज करने की सनक। मोगैंबो को भारतीय सिनेमा का अब तक का सबसे लोकप्रिय विलेन माना जाता है। अमरीश पुरी ने इस कॉमिक-बुक विलेन के चरित्र को जिस गंभीरता और स्वैग के साथ निभाया, उसने इसे अमर बना दिया। आज भी ‘मोगैंबो खुश हुआ’ संवाद सुनते ही दर्शकों के जेहन में उनका चेहरा उभर आता है।

  • अशरफ अली (फिल्म: गदर: एक प्रेम कथा): इस ब्लॉकबस्टर फिल्म में उन्होंने एक ऐसे पिता का संवेदनशील और कड़क किरदार निभाया, जो भारत-पाकिस्तान के विभाजन के बाद अपनी बेटी और अपने मुल्क के राष्ट्रवाद के बीच फंसा था। यह शुद्ध रूप से कोई पारंपरिक खलनायक नहीं था, लेकिन कहानी की परिस्थितियों में उनका विरोधी पक्ष इतना मजबूत था कि यह किरदार मील का पत्थर साबित हुआ।

  • ठाकुर दुर्जन सिंह (फिल्म: करण अर्जुन): रेगिस्तान की धूल, ऊंची हवेली और बदले की आग में जलता हुआ ठाकुर दुर्जन सिंह क्रूरता का पर्याय था। अमरीश पुरी ने इस भूमिका में स्क्रीन पर ऐसा खौफ पैदा किया कि दर्शक बेसब्री से फिल्म के हीरो द्वारा उसकी मौत का इंतजार करते थे।

  • जनरल डोंग (फिल्म: तहलका): ‘डोंग इज नेवर रॉन्ग’ के तकियाकलाम के साथ जनरल डोंग 90 के दशक का एक बेहद मनोरंजक और अतरंगी खलनायक था। उसकी अनूठी हंसी और तानाशाह शैली ने इस किरदार को आज के दौर में भी मीम्स और पॉप-कल्चर में कल्ट स्टेटस दिला रखा है।

  • बलवंत राय (फिल्म: घायल): पैसे, रसूख और व्यवस्था को अपनी जेब में रखने वाला बलवंत राय उस दौर के सबसे यथार्थवादी विलेन्स में से एक था। यह किरदार सिर्फ शारीरिक रूप से हिंसक नहीं था, बल्कि यह उस भ्रष्ट तंत्र का चेहरा था जहां दौलत कानून से ऊपर नजर आती है।

  • मोला राम (फिल्म: इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ डूम): हॉलीवुड के महान निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग की इस फिल्म के जरिए अमरीश पुरी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तहलका मचाया। रहस्यमयी पंथ का मुखिया 'मोला राम' अपनी डरावनी वेशभूषा और खौफनाक आंखों के कारण आज भी वर्ल्ड सिनेमा के सबसे चर्चित विलेन्स में गिना जाता है।

  • बलराज चौहान (फिल्म: नायक: द रियल हीरो): राजनीति के सबसे भ्रष्ट और शातिर चेहरे को पर्दे पर उतारते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री बलराज चौहान का किरदार निभाया। इस फिल्म में उन्होंने दिखाया कि वे सिर्फ पारंपरिक लाठी-बंदूक वाले विलेन नहीं, बल्कि आधुनिक दौर के सफेदपोश और दिमाग से चालें चलने वाले खलनायक की भूमिका भी उतनी ही शिद्दत से निभा सकते हैं।

  • बैरिस्टर चड्ढा (फिल्म: दामिनी): हर खलनायक हथियारों से नहीं डराता, कुछ अपनी चालाकी और बौद्धिक क्रूरता से डराते हैं। 'दामिनी' में वकील चड्ढा के रूप में अदालत के भीतर सच को झूठ और झूठ को सच साबित करने के उनके शातिर अंदाज और गर्दन झटकने की शैली ने दर्शकों को भीतर तक झकझोर कर रख दिया था।

प्रधानमंत्री से लेकर फिल्मी सितारों तक, सभी ने दी विजय को जन्मदिन की शुभकामनाएं

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चेन्नई। तमिल सिनेमा में 'थलापति' के नाम से करोड़ों प्रशंसकों के दिलों पर राज करने वाले और वर्तमान में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय सोमवार (22 जून) को अपना 51वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास अवसर पर राजनीतिक जगत से लेकर भारतीय सिनेमा जगत की तमाम बड़ी हस्तियों ने उन्हें बधाई संदेश भेजे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तमिल फिल्म इंडस्ट्री के महानायक कमल हासन समेत कई नामचीन शख्सियतों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए सीएम विजय को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीर्घायु होने की कामना की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक विशेष पोस्ट साझा करते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को उनके जन्मदिन की बधाई दी। पीएम मोदी ने अपने संदेश में लिखा, ‘तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई। मैं ईश्वर से उनके लंबे, समृद्ध और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।’

राहुल गांधी ने दिया मिलकर काम करने का भरोसा

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने भी मुख्यमंत्री विजय को उनके 51वें जन्मदिन पर ढेरों शुभकामनाएं भेजी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘तमिलनाडु के मुख्यमंत्री, थिरु जोसेफ विजय को जन्मदिवस की बहुत-बहुत बधाई। मैं आपके उत्तम स्वास्थ्य और आपके द्वारा लोकहित में किए जा रहे सभी प्रयासों की सफलता की कामना करता हूं। तमिल जनता के अधिकारों, उनके गौरव, सम्मान और आकांक्षाओं की रक्षा करने तथा राज्य की निरंतर प्रगति के लिए मिलकर काम करने के संकल्प में मैं आपके साथ खड़ा हूं।’

सिनेमा जगत से कमल हासन और राघव लॉरेंस ने जताया स्नेह

राजनीतिक दिग्गजों के अलावा तमिल फिल्म उद्योग (कॉलिवुड) से जुड़े उनके समकालीन और वरिष्ठ अभिनेताओं ने भी उन पर जमकर प्यार बरसाया है। दिग्गज अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने बेहद आत्मीयता से ट्वीट करते हुए लिखा, ‘तमिलनाडु के माननीय मुख्यमंत्री और अपनी कला से लाखों लोगों के दिलों में खास जगह बनाने वाले मेरे प्यारे छोटे भाई विजय को जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं।’

वहीं, दक्षिण भारतीय फिल्मों के जाने-माने अभिनेता, निर्देशक और कोरियोग्राफर राघव लॉरेंस ने भी इस दिन को बेहद ऐतिहासिक बताया। उन्होंने 'एक्स' पर विजय के साथ अपनी भावनाएं साझा करते हुए लिखा, ‘हर साल मैं अपने एक बेहद करीबी दोस्त को जन्मदिन की बधाई देता आया हूं। लेकिन इस साल का यह अवसर मेरे लिए बहुत गौरवशाली और खास है, क्योंकि मुझे तमिलनाडु के माननीय मुख्यमंत्री के रूप में अपने मित्र को बधाई देने का सौभाग्य मिल रहा है। मैं आपके बेहतर स्वास्थ्य और भविष्य की निरंतर सफलताओं के लिए प्रार्थना करता हूं। जनता की सेवा के आपके सभी सपने सच हों।’

एमएलसी चुनाव में महायुति का जलवा, 16 सीटें जीतीं; नासिक में शिंदे खेमे को हार

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मुंबई। महाराष्ट्र विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के परिणामों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने एक बार फिर अपना सियासी लोहा मनवाया है। कुल 17 सीटों पर हुए इस चुनावी समर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के त्रिशूल ने 16 सीटों पर परचम लहराकर विपक्षी खेमे को पस्त कर दिया है। हालांकि, नासिक सीट के नतीजों ने सत्तारूढ़ गठबंधन के स्वाद को थोड़ा फीका कर दिया, जहां भाजपा के ही एक बागी नेता ने निर्दलीय ताल ठोकते हुए आधिकारिक शिवसेना प्रत्याशी को शिकस्त दे दी। इस इकलौती हार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की रणनीतिक विफलता के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि इन 17 सीटों में से छह पर पहले ही निर्विरोध फैसला हो चुका था, जबकि बाकी बची 11 सीटों के परिणाम सोमवार को सार्वजनिक किए गए, जिनमें अकेले भाजपा ने नौ सीटों पर एकतरफा जीत हासिल की है।

नासिक में बागी का दांव और महायुति के विजयी चेहरों का ब्योरा

इस पूरे चुनाव में नासिक सीट का मुकाबला सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा, जहां मुख्यमंत्री गुट के उम्मीदवार नरेंद्र दराडे को निर्दलीय प्रत्याशी गोकुल गिट्टे के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा। गोकुल गिट्टे मूल रूप से भाजपा से जुड़े थे, लेकिन टिकट न मिलने के बाद उन्होंने बगावत कर दी थी। गठबंधन ने अपनी साख बचाने के लिए पार्षदों की बाड़ेबंदी करते हुए उन्हें ठाणे के एक आलीशान होटल में भी रोका था, फिर भी भीतरघात को नहीं रोका जा सके। दूसरी ओर, महायुति ने राज्य के अन्य गढ़ों में शानदार प्रदर्शन किया है। चुनावी मैदान में जीत दर्ज करने वाले प्रमुख उम्मीदवारों में नांदेड़ से भाजपा के अमरनाथ राजूरकर, नागपुर उपचुनाव से डॉ. राजीव पोतदार, भंडारा-गोंदिया से अविनाश ब्रह्मांकर, छत्रपति संभाजीनगर-जालना से सुहास शिरसाट और जलगांव से नंदकिशोर महाजन शामिल हैं। इसके अलावा सांगली-सातारा से पेशेंस कदम, सोलापुर से राजेंद्र राउत, धाराशिव-लातूर-बीड से बसवराज पाटिल और अमरावती से प्रवीण पोटे भी विजयी रहे, जबकि परभणी-हिंगोली सीट पर शिवसेना के सईद खान ने परचम लहराया।

निर्विरोध चुने गए सदस्य और निर्विवाद राजनीतिक वर्चस्व

चुनावी प्रक्रिया के शुरुआती चरण में ही 17 में से छह सीटों पर उम्मीदवारों का निर्विरोध चयन हो गया था, जिससे महायुति की राह पहले ही आसान हो गई थी। बिना किसी विरोध के उच्च सदन पहुंचने वाले नेताओं में वर्धा-गडचिरोली-चंद्रपुर क्षेत्र से भाजपा के अरुण लखानी, ठाणे से शिवसेना के कद्दावर नेता रवींद्र फाटक और रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग से एनसीपी के अनिकेत तटकरे शामिल हैं। इनके अलावा यवतमाल सीट से शिवसेना के दुष्यंत चतुर्वेदी, अहिल्यानगर से भाजपा के प्राजक्त तनपुरे और पुणे से एनसीपी के विक्रम काकड़े ने भी निर्विरोध जीत का प्रमाण पत्र हासिल किया। इन एकतरफा नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सूबे के स्थानीय नीतिगत समीकरणों पर फिलहाल सत्तापक्ष का नियंत्रण बेहद मजबूत है।

आगामी चुनावी जंग पर असर और भविष्य की बड़ी चुनौतियां

राजनीतिक समीक्षकों का मत है कि विधान परिषद के इन नतीजों ने महायुति सरकार के सांगठनिक तालमेल और जमीनी पकड़ को दोबारा प्रमाणित कर दिया है। आगामी विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों के मुहाने पर खड़ी सत्ताधारी पार्टियों के लिए यह जीत टॉनिक का काम करेगी और उनका मनोबल बढ़ाएगी। इसके विपरीत, महाविकास अघाड़ी (विपक्ष) के लिए यह परिणाम आत्ममंथन करने और अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार करने का अलार्म है। हालांकि, नासिक की हार ने महायुति के शीर्ष नेतृत्व को यह चेतावनी भी दे दी है कि टिकट वितरण से उपजी अंतर्कलह और बागियों के तेवर भविष्य के बड़े चुनावों में उनकी जीत के रथ को रोक भी सकते हैं।

शाहरुख-रजनीकांत को पीछे छोड़ यह स्टार बना भारत का सबसे महंगा एक्टर

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भारतीय सिनेमा जगत से एक बेहद चौंकाने वाली और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, बॉलीवुड के सुपरस्टार रणवीर सिंह ने अपने एक ही प्रोजेक्ट से रिकॉर्डतोड़ करीब 325 करोड़ रुपये की कमाई की है। यह रकम भारतीय फिल्म उद्योग के इतिहास में अब तक किसी भी अभिनेता को मिलने वाली सबसे बड़ी और ऐतिहासिक राशि मानी जा रही है। इस बेमिसाल कमाई के साथ ही रणवीर सिंह ने देश के सबसे महंगे अभिनेताओं की सूची में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है।

कैसे हासिल किया यह मुकाम? समझिए रणवीर का 'प्रॉफिट शेयरिंग मॉडल'

मनोरंजन जगत के विश्लेषकों के मुताबिक, रणवीर सिंह को यह छप्परफाड़ कमाई उनकी हालिया ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर’ से हुई है। यह मेगा-बजट फिल्म दो भागों (पार्ट्स) में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और दोनों ही पार्ट्स ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए। इन दोनों फिल्मों ने सामूहिक रूप से दुनिया भर में करीब 3200 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया, जिसमें से केवल भारतीय बाजार से ही 1900 करोड़ रुपये से अधिक की शानदार कमाई दर्ज की गई।

सिनेमाई सूत्रों का कहना है कि रणवीर सिंह ने इस महत्वाकांक्षी फिल्म के लिए अपनी पारंपरिक या तयशुदा फीस नहीं ली थी। इसके बजाय उन्होंने 'प्रॉफिट शेयरिंग मॉडल' (मुनाफे में हिस्सेदारी) की रणनीति अपनाई। इतना ही नहीं, निर्माण के दौरान जब फिल्म का बजट तय सीमा से ऊपर चला गया, तो रणवीर ने खुद भी इस प्रोजेक्ट में व्यक्तिगत रूप से निवेश किया, जिससे फिल्म के मालिकाना हक में उनका लाभांश और अधिक बढ़ गया। अंततः थियेट्रिकल कलेक्शन, डिजिटल ओटीटी राइट्स, सैटेलाइट राइट्स और म्यूजिक राइट्स से होने वाली कुल शुद्ध आय को मिलाकर रणवीर सिंह का हिस्सा लगभग 325 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।

रजनीकांत, प्रभास और शाहरुख खान जैसे दिग्गजों को छोड़ा पीछे

रणवीर सिंह की इस ऐतिहासिक छलांग ने भारतीय सिनेमा के कई बड़े कीर्तिमानों को ध्वस्त कर दिया है:

  • साउथ के दिग्गजों को पछाड़ा: इससे पहले भारत में एक फिल्म से सर्वाधिक कमाई करने का रिकॉर्ड दक्षिण भारतीय सिनेमा के थलाइवा रजनीकांत के नाम दर्ज था, जिन्होंने साल 2024 की अपनी सुपरहिट फिल्म ‘जेलर’ के लिए शेयर मिलाकर 250 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की थी। वहीं, अल्लू अर्जुन (‘पुष्पा 2’) और प्रभास (‘कल्कि 2898 एडी’) जैसे पैन-इंडिया स्टार्स भी अपनी चर्चित फिल्मों से 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुनाफा कमा चुके हैं।

  • बॉलीवुड का रिकॉर्ड टूटा: हिंदी फिल्म इंडस्ट्री (बॉलीवुड) की बात करें तो इससे पहले यह रिकॉर्ड किंग खान यानी शाहरुख खान के नाम था, जिन्होंने साल 2023 में ‘पठान’ और ‘जवान’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के प्रॉफिट शेयर के माध्यम से लगभग 200 करोड़ रुपये प्रति फिल्म अर्जित किए थे।

चिरंजीवी के 1 करोड़ से रणवीर के 325 करोड़ तक का सफर

भारतीय सिनेमा में अभिनेताओं की फीस का ग्राफ पिछले कुछ दशकों में अविश्वसनीय रूप से बदला है। एक दौर वह था जब 90 के दशक में किसी एक्टर का 10 करोड़ रुपये फीस लेना भी अकल्पनीय माना जाता था। 90 के दशक के शुरुआती दौर में साउथ सुपरस्टार चिरंजीवी, कमल हासन और लेडी सुपरस्टार श्रीदेवी देश के ऐसे पहले कलाकार थे, जिन्होंने पहली बार आधिकारिक तौर पर 1 करोड़ रुपये की फीस छूकर सनसनी मचा दी थी।

इसके बाद के दशकों में आमिर, सलमान और शाहरुख खान जैसे सुपरस्टार्स ने इस दायरे को 50 से 100 करोड़ के पार पहुंचाया। लेकिन अब, साल 2026 में रणवीर सिंह ने सीधे 300 करोड़ रुपये की जादुई विकास दर को पार करते हुए भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

सोने में लौटी चमक, पिछले हफ्ते की बड़ी गिरावट के बाद आज बढ़े दाम

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नई दिल्ली। पिछले सप्ताह सराफा बाजार में आई भारी मंदी के बाद आज 22 जून को कीमती धातुओं के भाव में आंशिक सुधार दर्ज किया गया है। कमोडिटी बाजार के आंकड़ों के अनुसार, आज 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत में 43 रुपये का इजाफा हुआ है, जिसके बाद यह 14,651 रुपये प्रति ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। इसी तरह 22 कैरेट जेवराती सोने का भाव भी 40 रुपये की तेजी के साथ 13,430 रुपये प्रति ग्राम दर्ज किया गया। दूसरी ओर, आज चांदी के हाजिर भाव में स्थिरता देखी गई और यह 250 रुपये प्रति ग्राम पर टिकी रही, जिसके चलते घरेलू खुदरा बाजार में एक किलोग्राम चांदी की कीमत 2,50,000 रुपये के पुराने स्तर पर ही अपरिवर्तित है।

वायदा बाजार में तेजी का रुख और महानगरों में सोने-चांदी के दाम

हाजिर बाजार के साथ-साथ वायदा कारोबार में भी आज मजबूती का माहौल बना हुआ है। मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने का अनुबंध बढ़त के साथ 1,48,040 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेंड कर रहा है। वहीं, जुलाई डिलीवरी वाली चांदी भी करीब 1.13 प्रतिशत की छलांग लगाकर 2,36,490 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है। देश के प्रमुख महानगरों की बात करें तो दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,46,660 रुपये और 22 कैरेट 1,34,450 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। मुंबई और कोलकाता में 24 कैरेट का भाव 1,46,510 रुपये व 22 कैरेट का 1,34,300 रुपये है, जबकि चेन्नई में यह क्रमश: 1,48,360 रुपये और 1,35,990 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। इन सभी महानगरों में एक किलोग्राम चांदी का भाव 2,50,000 रुपये पर स्थिर बना हुआ है।

पिछले सप्ताह आई ऐतिहासिक मंदी की वजह और अमेरिकी फेड का फैसला

बीते हफ्ते देश के खुदरा बाजारों में सोने के भाव में प्रति 10 ग्राम 5,228 रुपये की बड़ी गिरावट देखी गई थी, जबकि 19 जून को समाप्त हुए कारोबारी सत्र में वायदा बाजार (MCX) पर भी सोना 2,750 रुपये तक टूट गया था। इस दौरान चांदी भी करीब 10,609 रुपये से लेकर 12,000 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हो गई थी। इस भारी बिकवाली का मुख्य कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से नीतिगत ब्याज दरों में कटौती टालने के संकेत देना था। आर्थिक नियमों के मुताबिक जब ब्याज दरें उच्च स्तर पर होती हैं, तो निवेशक सोने जैसे गैर-ब्याज वाले सुरक्षित साधनों से पैसा निकालकर फिक्स्ड डिपॉजिट या सरकारी बॉन्ड्स में निवेश करना पसंद करते हैं, क्योंकि वहां बिना किसी जोखिम के निश्चित रिटर्न मिलता है।

निचले स्तर पर लिवाली बढ़ने से बाजार में फिर लौटी रौनक

पिछले सात दिनों की लगातार गिरावट के चलते सोने की कीमतें काफी आकर्षक और निचले स्तर पर आ गई थीं। कम कीमतों को देखते हुए निवेशकों और आम खरीदारों ने भविष्य में बेहतर रिटर्न की उम्मीद में बाजार में दोबारा खरीदारी शुरू कर दी। जैसे ही बाजार में मांग (डिमांड) ने रफ्तार पकड़ी, अर्थशास्त्र के सिद्धांतों के अनुरूप कीमतों में एक बार फिर उछाल आना शुरू हो गया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सराफा बाजार की चाल वैश्विक भू-राजनीतिक हालातों और डॉलर इंडेक्स के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगी, इसलिए खरीदारों को फूंक-फूंक कर कदम रखने की जरूरत है।

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