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एमएलसी चुनाव में महायुति का जलवा, 16 सीटें जीतीं; नासिक में शिंदे खेमे को हार

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मुंबई। महाराष्ट्र विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के परिणामों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने एक बार फिर अपना सियासी लोहा मनवाया है। कुल 17 सीटों पर हुए इस चुनावी समर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के त्रिशूल ने 16 सीटों पर परचम लहराकर विपक्षी खेमे को पस्त कर दिया है। हालांकि, नासिक सीट के नतीजों ने सत्तारूढ़ गठबंधन के स्वाद को थोड़ा फीका कर दिया, जहां भाजपा के ही एक बागी नेता ने निर्दलीय ताल ठोकते हुए आधिकारिक शिवसेना प्रत्याशी को शिकस्त दे दी। इस इकलौती हार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की रणनीतिक विफलता के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि इन 17 सीटों में से छह पर पहले ही निर्विरोध फैसला हो चुका था, जबकि बाकी बची 11 सीटों के परिणाम सोमवार को सार्वजनिक किए गए, जिनमें अकेले भाजपा ने नौ सीटों पर एकतरफा जीत हासिल की है।

नासिक में बागी का दांव और महायुति के विजयी चेहरों का ब्योरा

इस पूरे चुनाव में नासिक सीट का मुकाबला सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा, जहां मुख्यमंत्री गुट के उम्मीदवार नरेंद्र दराडे को निर्दलीय प्रत्याशी गोकुल गिट्टे के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा। गोकुल गिट्टे मूल रूप से भाजपा से जुड़े थे, लेकिन टिकट न मिलने के बाद उन्होंने बगावत कर दी थी। गठबंधन ने अपनी साख बचाने के लिए पार्षदों की बाड़ेबंदी करते हुए उन्हें ठाणे के एक आलीशान होटल में भी रोका था, फिर भी भीतरघात को नहीं रोका जा सके। दूसरी ओर, महायुति ने राज्य के अन्य गढ़ों में शानदार प्रदर्शन किया है। चुनावी मैदान में जीत दर्ज करने वाले प्रमुख उम्मीदवारों में नांदेड़ से भाजपा के अमरनाथ राजूरकर, नागपुर उपचुनाव से डॉ. राजीव पोतदार, भंडारा-गोंदिया से अविनाश ब्रह्मांकर, छत्रपति संभाजीनगर-जालना से सुहास शिरसाट और जलगांव से नंदकिशोर महाजन शामिल हैं। इसके अलावा सांगली-सातारा से पेशेंस कदम, सोलापुर से राजेंद्र राउत, धाराशिव-लातूर-बीड से बसवराज पाटिल और अमरावती से प्रवीण पोटे भी विजयी रहे, जबकि परभणी-हिंगोली सीट पर शिवसेना के सईद खान ने परचम लहराया।

निर्विरोध चुने गए सदस्य और निर्विवाद राजनीतिक वर्चस्व

चुनावी प्रक्रिया के शुरुआती चरण में ही 17 में से छह सीटों पर उम्मीदवारों का निर्विरोध चयन हो गया था, जिससे महायुति की राह पहले ही आसान हो गई थी। बिना किसी विरोध के उच्च सदन पहुंचने वाले नेताओं में वर्धा-गडचिरोली-चंद्रपुर क्षेत्र से भाजपा के अरुण लखानी, ठाणे से शिवसेना के कद्दावर नेता रवींद्र फाटक और रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग से एनसीपी के अनिकेत तटकरे शामिल हैं। इनके अलावा यवतमाल सीट से शिवसेना के दुष्यंत चतुर्वेदी, अहिल्यानगर से भाजपा के प्राजक्त तनपुरे और पुणे से एनसीपी के विक्रम काकड़े ने भी निर्विरोध जीत का प्रमाण पत्र हासिल किया। इन एकतरफा नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सूबे के स्थानीय नीतिगत समीकरणों पर फिलहाल सत्तापक्ष का नियंत्रण बेहद मजबूत है।

आगामी चुनावी जंग पर असर और भविष्य की बड़ी चुनौतियां

राजनीतिक समीक्षकों का मत है कि विधान परिषद के इन नतीजों ने महायुति सरकार के सांगठनिक तालमेल और जमीनी पकड़ को दोबारा प्रमाणित कर दिया है। आगामी विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों के मुहाने पर खड़ी सत्ताधारी पार्टियों के लिए यह जीत टॉनिक का काम करेगी और उनका मनोबल बढ़ाएगी। इसके विपरीत, महाविकास अघाड़ी (विपक्ष) के लिए यह परिणाम आत्ममंथन करने और अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार करने का अलार्म है। हालांकि, नासिक की हार ने महायुति के शीर्ष नेतृत्व को यह चेतावनी भी दे दी है कि टिकट वितरण से उपजी अंतर्कलह और बागियों के तेवर भविष्य के बड़े चुनावों में उनकी जीत के रथ को रोक भी सकते हैं।

शाहरुख-रजनीकांत को पीछे छोड़ यह स्टार बना भारत का सबसे महंगा एक्टर

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भारतीय सिनेमा जगत से एक बेहद चौंकाने वाली और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, बॉलीवुड के सुपरस्टार रणवीर सिंह ने अपने एक ही प्रोजेक्ट से रिकॉर्डतोड़ करीब 325 करोड़ रुपये की कमाई की है। यह रकम भारतीय फिल्म उद्योग के इतिहास में अब तक किसी भी अभिनेता को मिलने वाली सबसे बड़ी और ऐतिहासिक राशि मानी जा रही है। इस बेमिसाल कमाई के साथ ही रणवीर सिंह ने देश के सबसे महंगे अभिनेताओं की सूची में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है।

कैसे हासिल किया यह मुकाम? समझिए रणवीर का 'प्रॉफिट शेयरिंग मॉडल'

मनोरंजन जगत के विश्लेषकों के मुताबिक, रणवीर सिंह को यह छप्परफाड़ कमाई उनकी हालिया ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर’ से हुई है। यह मेगा-बजट फिल्म दो भागों (पार्ट्स) में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और दोनों ही पार्ट्स ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए। इन दोनों फिल्मों ने सामूहिक रूप से दुनिया भर में करीब 3200 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया, जिसमें से केवल भारतीय बाजार से ही 1900 करोड़ रुपये से अधिक की शानदार कमाई दर्ज की गई।

सिनेमाई सूत्रों का कहना है कि रणवीर सिंह ने इस महत्वाकांक्षी फिल्म के लिए अपनी पारंपरिक या तयशुदा फीस नहीं ली थी। इसके बजाय उन्होंने 'प्रॉफिट शेयरिंग मॉडल' (मुनाफे में हिस्सेदारी) की रणनीति अपनाई। इतना ही नहीं, निर्माण के दौरान जब फिल्म का बजट तय सीमा से ऊपर चला गया, तो रणवीर ने खुद भी इस प्रोजेक्ट में व्यक्तिगत रूप से निवेश किया, जिससे फिल्म के मालिकाना हक में उनका लाभांश और अधिक बढ़ गया। अंततः थियेट्रिकल कलेक्शन, डिजिटल ओटीटी राइट्स, सैटेलाइट राइट्स और म्यूजिक राइट्स से होने वाली कुल शुद्ध आय को मिलाकर रणवीर सिंह का हिस्सा लगभग 325 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।

रजनीकांत, प्रभास और शाहरुख खान जैसे दिग्गजों को छोड़ा पीछे

रणवीर सिंह की इस ऐतिहासिक छलांग ने भारतीय सिनेमा के कई बड़े कीर्तिमानों को ध्वस्त कर दिया है:

  • साउथ के दिग्गजों को पछाड़ा: इससे पहले भारत में एक फिल्म से सर्वाधिक कमाई करने का रिकॉर्ड दक्षिण भारतीय सिनेमा के थलाइवा रजनीकांत के नाम दर्ज था, जिन्होंने साल 2024 की अपनी सुपरहिट फिल्म ‘जेलर’ के लिए शेयर मिलाकर 250 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की थी। वहीं, अल्लू अर्जुन (‘पुष्पा 2’) और प्रभास (‘कल्कि 2898 एडी’) जैसे पैन-इंडिया स्टार्स भी अपनी चर्चित फिल्मों से 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुनाफा कमा चुके हैं।

  • बॉलीवुड का रिकॉर्ड टूटा: हिंदी फिल्म इंडस्ट्री (बॉलीवुड) की बात करें तो इससे पहले यह रिकॉर्ड किंग खान यानी शाहरुख खान के नाम था, जिन्होंने साल 2023 में ‘पठान’ और ‘जवान’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के प्रॉफिट शेयर के माध्यम से लगभग 200 करोड़ रुपये प्रति फिल्म अर्जित किए थे।

चिरंजीवी के 1 करोड़ से रणवीर के 325 करोड़ तक का सफर

भारतीय सिनेमा में अभिनेताओं की फीस का ग्राफ पिछले कुछ दशकों में अविश्वसनीय रूप से बदला है। एक दौर वह था जब 90 के दशक में किसी एक्टर का 10 करोड़ रुपये फीस लेना भी अकल्पनीय माना जाता था। 90 के दशक के शुरुआती दौर में साउथ सुपरस्टार चिरंजीवी, कमल हासन और लेडी सुपरस्टार श्रीदेवी देश के ऐसे पहले कलाकार थे, जिन्होंने पहली बार आधिकारिक तौर पर 1 करोड़ रुपये की फीस छूकर सनसनी मचा दी थी।

इसके बाद के दशकों में आमिर, सलमान और शाहरुख खान जैसे सुपरस्टार्स ने इस दायरे को 50 से 100 करोड़ के पार पहुंचाया। लेकिन अब, साल 2026 में रणवीर सिंह ने सीधे 300 करोड़ रुपये की जादुई विकास दर को पार करते हुए भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

सोने में लौटी चमक, पिछले हफ्ते की बड़ी गिरावट के बाद आज बढ़े दाम

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नई दिल्ली। पिछले सप्ताह सराफा बाजार में आई भारी मंदी के बाद आज 22 जून को कीमती धातुओं के भाव में आंशिक सुधार दर्ज किया गया है। कमोडिटी बाजार के आंकड़ों के अनुसार, आज 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत में 43 रुपये का इजाफा हुआ है, जिसके बाद यह 14,651 रुपये प्रति ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। इसी तरह 22 कैरेट जेवराती सोने का भाव भी 40 रुपये की तेजी के साथ 13,430 रुपये प्रति ग्राम दर्ज किया गया। दूसरी ओर, आज चांदी के हाजिर भाव में स्थिरता देखी गई और यह 250 रुपये प्रति ग्राम पर टिकी रही, जिसके चलते घरेलू खुदरा बाजार में एक किलोग्राम चांदी की कीमत 2,50,000 रुपये के पुराने स्तर पर ही अपरिवर्तित है।

वायदा बाजार में तेजी का रुख और महानगरों में सोने-चांदी के दाम

हाजिर बाजार के साथ-साथ वायदा कारोबार में भी आज मजबूती का माहौल बना हुआ है। मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने का अनुबंध बढ़त के साथ 1,48,040 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेंड कर रहा है। वहीं, जुलाई डिलीवरी वाली चांदी भी करीब 1.13 प्रतिशत की छलांग लगाकर 2,36,490 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है। देश के प्रमुख महानगरों की बात करें तो दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,46,660 रुपये और 22 कैरेट 1,34,450 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। मुंबई और कोलकाता में 24 कैरेट का भाव 1,46,510 रुपये व 22 कैरेट का 1,34,300 रुपये है, जबकि चेन्नई में यह क्रमश: 1,48,360 रुपये और 1,35,990 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। इन सभी महानगरों में एक किलोग्राम चांदी का भाव 2,50,000 रुपये पर स्थिर बना हुआ है।

पिछले सप्ताह आई ऐतिहासिक मंदी की वजह और अमेरिकी फेड का फैसला

बीते हफ्ते देश के खुदरा बाजारों में सोने के भाव में प्रति 10 ग्राम 5,228 रुपये की बड़ी गिरावट देखी गई थी, जबकि 19 जून को समाप्त हुए कारोबारी सत्र में वायदा बाजार (MCX) पर भी सोना 2,750 रुपये तक टूट गया था। इस दौरान चांदी भी करीब 10,609 रुपये से लेकर 12,000 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हो गई थी। इस भारी बिकवाली का मुख्य कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से नीतिगत ब्याज दरों में कटौती टालने के संकेत देना था। आर्थिक नियमों के मुताबिक जब ब्याज दरें उच्च स्तर पर होती हैं, तो निवेशक सोने जैसे गैर-ब्याज वाले सुरक्षित साधनों से पैसा निकालकर फिक्स्ड डिपॉजिट या सरकारी बॉन्ड्स में निवेश करना पसंद करते हैं, क्योंकि वहां बिना किसी जोखिम के निश्चित रिटर्न मिलता है।

निचले स्तर पर लिवाली बढ़ने से बाजार में फिर लौटी रौनक

पिछले सात दिनों की लगातार गिरावट के चलते सोने की कीमतें काफी आकर्षक और निचले स्तर पर आ गई थीं। कम कीमतों को देखते हुए निवेशकों और आम खरीदारों ने भविष्य में बेहतर रिटर्न की उम्मीद में बाजार में दोबारा खरीदारी शुरू कर दी। जैसे ही बाजार में मांग (डिमांड) ने रफ्तार पकड़ी, अर्थशास्त्र के सिद्धांतों के अनुरूप कीमतों में एक बार फिर उछाल आना शुरू हो गया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सराफा बाजार की चाल वैश्विक भू-राजनीतिक हालातों और डॉलर इंडेक्स के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगी, इसलिए खरीदारों को फूंक-फूंक कर कदम रखने की जरूरत है।

खकुआ नदी में मिला लापता युवक का शव, मौत की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस

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किशनगंज। कोचाधामन प्रखंड के बिशनपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खकुआ नदी घाट पर रविवार की शाम एक युवक का शव बरामद होने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। मृतक की शिनाख्त बिशनपुर हाट के रहने वाले 35 वर्षीय विक्की के रूप में की गई है, जो बीते 24 घंटों से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता था। जानकारी के मुताबिक, रविवार की देर शाम नदी में एक लाश को उतराता देख घाट पर मौजूद ग्रामीणों ने शोर मचाया, जिसके बाद देखते ही देखते वहां भारी संख्या में स्थानीय लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। घटना की भनक लगते ही बिशनपुर थाना पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और स्थानीय गोताखोरों की मदद से शव को पानी से बाहर निकलवाया।

शनिवार से लापता था युवक और परिजनों ने दर्ज कराई थी शिकायत

पुलिसिया तफ्तीश और परिजनों द्वारा की गई पहचान में यह साफ हुआ कि मृतक विक्की बिशनपुर बाजार का ही निवासी था। मृतक के परिवार वालों ने पुलिस को बताया कि वह शनिवार के दिन से ही अचानक घर से गायब था। परिजनों ने अपने स्तर पर सगे-संबंधियों और संभावित ठिकानों पर उसकी काफी खोजबीन की, लेकिन जब उसका कोई अता-पता नहीं चला तो रविवार की सुबह थक-हारकर बिशनपुर थाने में उसकी गुमशुदगी की लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव और विभिन्न एंगल से जांच शुरू

बिशनपुर थाने के सब-इंस्पेक्टर (एसआई) ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि शव को नदी से बरामद करने के बाद इसकी सूचना तुरंत पीड़ित परिवार को दे दी गई थी। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। शुरुआती जांच में शरीर पर किसी स्पष्ट चोट के निशान न होने के कारण मौत की वजह साफ नहीं हो सकी है, जिसके चलते पुलिस इस गुत्थी को सुलझाने के लिए मर्डर और सुसाइड दोनों ही बिंदुओं को केंद्र में रखकर साक्ष्य खंगाल रही है।

बाजार क्षेत्र में फैला तनाव और पुलिस की संयम बरतने की अपील

मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मौत के असली कारणों का अधिकारिक खुलासा हो पाएगा। इस दर्दनाक घटना के बाद से ही पूरे बिशनपुर बाजार इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग तरह-तरह की आशंकाएं व्यक्त कर रहे हैं, वहीं मृतक के घर में कोहराम मचा हुआ है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन ने आम जनता से किसी भी तरह की भ्रामक अफवाहों पर यकीन न करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है।

बुलडोजर के डर से बाजार में सन्नाटा, गलियों तक बंद रहीं दुकानें

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मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में आवास एवं विकास परिषद द्वारा अवैध निर्माणों के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक ध्वस्तीकरण (मलबे में तब्दील करने के) अभियान ने सेंट्रल मार्केट और उसके आस-पास के व्यापारिक अंचलों में भारी बेचैनी और हड़कंप मचा दिया है। बीते दो दिनों के भीतर प्रशासन द्वारा 30 से अधिक व्यावसायिक व आवासीय भवनों पर की गई सख्त कानूनी कार्रवाई के बाद हताश दुकानदार और मकान मालिक अब किसी बड़े नुकसान से बचने के लिए स्वयं ही अपने अनाधिकृत निर्माणों को हटाने में जुट गए हैं। दूसरी ओर, इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध कर रही स्थानीय महिलाओं ने रविवार से धरनास्थल पर सात दिवसीय सुंदरकांड पाठ की शुरुआत कर दी है और मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

अवकाश के दिन भी गर्जा सरकारी अमला, व्यापारियों में बढ़ी हलचल

शनिवार से शुरू हुई परिषद की यह बड़ी कार्रवाई रविवार को साप्ताहिक अवकाश होने के बावजूद बिना रुके जारी रही। निर्धारित सेट बैक (सड़क से तय दूरी) के लिए जगह छोड़ने और अवैध रूप से संचालित हो रही दुकानों को जमींदोज करने की इस मुहिम से समूचे व्यापारिक समुदाय में घोर चिंता और अनिश्चितता का माहौल है। दिनभर कई बड़े कारोबारी मौके पर पहुंचकर प्रशासनिक गतिविधियों का जायजा लेते रहे, वहीं राहत की उम्मीद लगाए बैठे प्रभावित लोगों की नजरें अधिकारियों और शासन के अंतिम निर्णयों पर टिकी रहीं।

इस कार्रवाई के सीधे प्रभाव के चलते कई दुकानदारों ने प्रशासनिक टीम के पहुंचने से पहले ही खुद हथौड़े उठा लिए हैं। अनेक प्रमुख स्थानों पर लोग स्वेच्छा से अपनी बाहरी दीवारें ढहा रहे हैं और भविष्य की कार्रवाई से बचने के लिए अब निर्धारित दूरी को ध्यान में रखते हुए भीतर की ओर नया निर्माण कर रहे हैं।

दिन-रात चल रहा अवैध निर्माण हटाने का काम, हटाए जा रहे शटर

आवास एवं विकास परिषद कार्यालय से क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर इस समय अजीब सा नजारा है; यहाँ मकान मालिकों ने स्वयं ही अपने अवैध निर्माणों को ढहाना शुरू कर दिया है। रात-दिन मजदूरों की मदद से ड्रिल मशीन, छेनी और भारी हथौड़ों के जरिए पक्के ढांचों को तोड़ा जा रहा है।

प्रशासनिक सख्ती को देखते हुए कई मकानों के भूतल (ग्राउंड फ्लोर) पर बनी दुकानों के लोहे के शटर रातों-रात हटाकर उनकी जगह दोबारा पक्की दीवारें, खिड़कियां और रिहायशी दरवाजे लगाए जा रहे हैं। जो व्यापारी अब तक इस अभियान को हल्के में ले रहे थे, उन्होंने भी आनन-फानन में अपनी दुकानें बंद कर कीमती सामान सुरक्षित स्थानों पर समेटना शुरू कर दिया है। कई बड़े शोरूम के सामने की शानदार बाहरी सजावट और फ्रंट एलिवेशन को भी हटा लिया गया है।

73 दिनों से जारी है धरना, पुलिस ने हटवाया तंबू तो महिलाओं ने शुरू किया सुंदरकांड

सेंट्रल मार्केट में सेट बैक छोड़ने के कड़े नियमों के विरोध में पिछले 73 दिनों से धरने पर बैठी महिलाओं का आंदोलन अब धार्मिक रूप ले चुका है। रविवार को जब पुलिस प्रशासन ने सुबह धरनास्थल पर लगाया जा रहा तंबू जबरन हटवा दिया, तो महिलाओं ने वहीं जमीन पर राम दरबार सजाकर और बजरंग बली का विशेष श्रृंगार कर घरों व आजीविका को बचाने के लिए सुंदरकांड का पाठ शुरू कर दिया। इसके साथ ही सेक्टर-3 और 4 के चौराहे के पास स्थित गोल मंदिर क्षेत्र में महिलाओं ने सामूहिक सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन कर अपना शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया।

27 जून तक चलेगा धार्मिक अनुष्ठान, बड़े आंदोलन की चेतावनी

आंदोलन का नेतृत्व कर रही महिलाओं का कहना है कि वे पिछले ढाई महीने से अधिक समय से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को लेकर बैठी हैं, परंतु अब तक किसी भी स्थानीय जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी ने उनकी सुध नहीं ली और न ही कोई ठोस आश्वासन दिया है।

महिलाओं ने दोटूक शब्दों में घोषणा की है कि आगामी 27 जून तक धरनास्थल पर प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ और भजन-कीर्तन किया जाएगा। यदि इस धार्मिक अनुष्ठान की अवधि के भीतर प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक या सहानुभूतिपूर्ण निर्णय नहीं लिया गया, तो इस आंदोलन को और अधिक व्यापक व आक्रामक रूप दिया जाएगा। रविवार को अनुष्ठान की समाप्ति के बाद बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया, जहाँ सभी ने एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

पंकज त्रिपाठी के परिवार पर हमला, बड़े भाई की हालत नाजुक; दहशत में परिजन

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गोपालगंज। बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता पंकज त्रिपाठी के पैतृक गांव से एक बेहद दुखद और सनसनीखेज खबर सामने आई है। जिले के माधोपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बेलसंड गांव में अभिनेता के बड़े भाई बिजेंद्र नाथ तिवारी पर कुछ बदमाशों ने धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में वे बुरी तरह लहूलुहान हो गए। वारदात के तुरंत बाद परिजन उन्हें आनन-फानन में गोपालगंज सदर अस्पताल ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद भी उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) रेफर कर दिया। वर्तमान में उनकी स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है और वे डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं।

पुरानी दुश्मनी और आपसी रंजिश के चलते हमले की आशंका

स्थानीय सूत्रों और प्राथमिक इनपुट के अनुसार, इस खूनी वारदात के पीछे किसी पुरानी रंजिश या आपसी दुश्मनी के होने का अंदेशा जताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि गांव के ही कुछ लोगों के साथ उनका काफी समय से कोई विवाद चल रहा था, जिसके नतीजे में इस भयावह घटना को अंजाम दिया गया। हालांकि, जांच एजेंसियां जमीनी स्तर पर सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर साक्ष्य जुटा रही हैं ताकि हमले की असली वजह और इसके पीछे के किरदारों का पूरी तरह पर्दाफाश किया जा सके।

मुख्य आरोपी की पहचान और पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी

वारदात की भनक लगते ही स्थानीय थाना पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गई और घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य हमलावर की पहचान स्थापित कर ली है और उसकी धरपकड़ के लिए इलाके में संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बेलसंड गांव और उसके आस-पास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है।

परिजनों के बयान दर्ज और पूरे इलाके में पसरा सन्नाटा

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों से पूछताछ कर बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही इस हिंसक घटना की वास्तविक वजह साफ हो पाएगी। दूसरी ओर, इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद से पूरे गोपालगंज जिले और अभिनेता के पैतृक गांव में गहरी चिंता और तनाव का माहौल है, जहां लोग पीड़ित के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

21 साल से खड़े सपा कार्यालय का हुआ अंत, प्रशासन ने की ध्वस्तीकरण कार्रवाई

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सीतापुर। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में सोमवार को प्रशासन ने एक बड़ी और कड़ी कार्रवाई करते हुए टाउन हॉल परिसर में स्थित समाजवादी पार्टी (सपा) के जिला कार्यालय की इमारत को जमींदोज कर दिया। भारी पुलिस बल और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा घेरे के बीच घटना स्थल पर पहुंचे चार बुलडोजरों ने पूरी इमारत को ढहाकर मलबे के ढेर में बदल दिया। इस अचानक हुई बड़ी कार्रवाई के चलते पूरे इलाके में काफी समय तक अफरातफरी और गहमागहमी का माहौल बना रहा। कार्रवाई को देखने के लिए मौके पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी।

21 साल से संचालित हो रहा था दफ्तर, डीएम कोर्ट ने दिया था आदेश

प्रशासनिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाल ही में जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) न्यायालय ने टाउन हॉल परिसर की इस विवादित भूमि को नियम विरुद्ध कब्जे से मुक्त कर राज्य सरकार के अधीन (निहितीकरण) करने का अंतिम आदेश जारी किया था। समाजवादी पार्टी का यह जिला कार्यालय पिछले 21 वर्षों से इसी परिसर से संचालित किया जा रहा था।

राजस्व विभाग की जांच रिपोर्ट में यह बात पूरी तरह स्पष्ट हो गई थी कि जिस भूखंड पर इस इमारत का निर्माण किया गया था, वह मूल रूप से सरकारी (नजूल) भूमि थी। इस बेशकीमती और मुख्य बाजार स्थित सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से पूरी तरह मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन द्वारा लंबे समय से वैधानिक और कानूनी प्रक्रियाएं चलाई जा रही थीं।

नोटिस के बाद भी खाली न करने पर लिया गया कड़ा एक्शन

अधिकारियों ने बताया कि इस कार्रवाई से पूर्व संबंधित पक्ष को नियमानुसार कई बार परिसर को स्वेच्छा से खाली करने के लिए आधिकारिक नोटिस और वैधानिक निर्देश जारी किए गए थे। समय सीमा समाप्त होने के बावजूद जब इमारत को खाली नहीं किया गया, तब प्रशासन ने कानून का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए भारी मशीनों और बुलडोजर का सहारा लिया। प्रशासन की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई के बाद करोड़ों रुपये मूल्य की यह सरकारी जमीन अब पूरी तरह से शासन के नियंत्रण में आ गई है। सुरक्षा के मद्देनजर इलाके में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

भाई, भाभी और भतीजे की हत्या से मचा हड़कंप, पुलिस कर रही पड़ताल

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गोरखपुर। जिले के बांसगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव में रविवार देर रात एक बेहद रूहकँपा देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ महज 16 साल के एक किशोर ने घरेलू कलह के चलते कथित तौर पर अपने सगे बड़े भाई, भाभी और केवल तीन वर्ष के मासूम भतीजे पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। एक ही घर में तीन लोगों की निर्मम हत्या की खबर फैलते ही पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और कई आला अधिकारी भारी पुलिस बल और फॉरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की तफ्तीश शुरू की।

कमरे में सो रहा था परिवार, रात के सन्नाटे में उतारा मौत के घाट

पुलिस नियंत्रण कक्ष से प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, इस जघन्य हत्याकांड में मारे गए लोगों की पहचान अमित गुप्ता, उनकी पत्नी रंजना गुप्ता और उनके 3 वर्षीय मासूम बेटे रेयान गुप्ता के रूप में हुई है।

परिजनों ने बताया कि रविवार की रात रोज की तरह पूरा परिवार खाना खाकर अपने कमरे में सो रहा था। इसी दौरान देर रात करीब तीन बजे आरोपी छोटा भाई धारदार हथियार लेकर कमरे में दाखिल हुआ और सोते हुए भाई-भाभी सहित भतीजे पर बेरहमी से वार करना शुरू कर दिया। हमले की क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तीनों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और अत्यधिक खून बह जाने के कारण तीनों की बिस्तर पर ही तड़प-तड़प कर मौके पर ही मौत हो गई।

बदहवास पिता ने पुलिस को दी सूचना, आरोपी भाई हथियार सहित हिरासत में

रात में चीख-पुकार और अजीब आवाजें सुनकर जब मृतक के पिता कमरे की ओर भागे, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत स्थानीय पुलिस को घटना की जानकारी दी।

मौके पर पहुंची पुलिस ने तीनों क्षत-विक्षत शवों को अपने कब्जे में लेकर विधिक पंचनामे के बाद पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भागने की फिराक में लगे 16 वर्षीय मुख्य आरोपी किशोर को घेराबंदी कर हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने उसके पास से वारदात में इस्तेमाल किया गया खून से सना हुआ धारदार हथियार भी बरामद कर लिया है, जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

वारदात के पीछे पारिवारिक कलह की आशंका, गांव में पसरा सन्नाटा

मामले की जानकारी देते हुए एसपी दक्षिणी दिनेश पुरी ने बताया कि पुलिस को देर रात लगभग तीन बजे इस तिहरे हत्याकांड की सूचना मिली थी। प्रारंभिक फोरेंसिक जांच और साक्ष्यों से साफ है कि आरोपी ने पूरी योजना के साथ सोते समय इस खूनी खेल को अंजाम दिया।

अधिकारी ने बताया कि शुरुआती पूछताछ में घटना के पीछे गहरा पारिवारिक विवाद और जमीनी या आपसी कलह की बात सामने आ रही है। हालांकि, पुलिस हर छोटे-बड़े पहलू और एंगल की गहनता से वैज्ञानिक जांच कर रही है ताकि हत्या की वास्तविक और सटीक वजह का पता लगाया जा सके।

गाँव में तनाव और आक्रोश, पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

सोमवार की सुबह जैसे ही इस वीभत्स हत्याकांड की खबर पूरे इलाके में फैली, समूचे ग्रामीण अंचल में सन्नाटा पसर गया और चारों तरफ मातम छा गया। पीड़ित के घर के बाहर बड़ी संख्या में आक्रोशित ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। लोग इस बात से हैरान और गुस्से में हैं कि एक नाबालिग लड़का अपने ही परिवार के प्रति इतना हिंसक कैसे हो सकता है।

बांसगांव थाना पुलिस ने मृतक अमित गुप्ता के पिता द्वारा दी गई लिखित तहरीर के आधार पर आरोपी के खिलाफ हत्या की संगीन और सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। पुलिस ने कहा कि चूंकि आरोपी नाबालिग (किशोर) है, इसलिए किशोर न्याय बोर्ड के नियमों के तहत विधिक कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर समाज में बढ़ रहे मानसिक तनाव और पारिवारिक कलह के डरावने अंजाम को उजागर किया है।

भोपाल में UCC पर बड़ी बैठक आज, मानसून सत्र में विधेयक लाने की तैयारी तेज

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भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को अमलीजामा पहनाने के लिहाज से सोमवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में गठित उच्च स्तरीय समिति आज भोपाल में राजनीतिक दलों के नेताओं, धार्मिक गुरुओं, विभिन्न सामाजिक आयोगों के डेलीगेट्स और आला प्रशासनिक अफसरों के साथ मैराथन बैठक करेगी। इस व्यापक विचार-विमर्श के बाद यूसीसी का अंतिम ड्राफ्ट तैयार कर राज्य सरकार को सुपुर्द किए जाने की प्रबल संभावना है। भोपाल की नरोन्हा प्रशासनिक अकादमी में सुबह से लेकर शाम तक चलने वाले इस मंथन में महिला, बाल, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक आयोग समेत कई अहम संस्थाओं के प्रतिनिधि अपनी राय रखेंगे। दोपहर के सत्र में विभिन्न राजनीतिक दलों और शाम को धार्मिक नेताओं के साथ संवाद का कार्यक्रम तय किया गया है।

प्रशासनिक तंत्र से फीडबैक और लाखों सुझावों का विश्लेषण

इस महामंथन के लिए समिति ने शासन के सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अफसरों को भी तलब किया है। बैठक में गृह विभाग कानून-व्यवस्था और इसके प्रशासनिक पक्षों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन देगा, जबकि अन्य महकमे अपने-अपने कार्यक्षेत्र से जुड़े तकनीकी सुझाव समिति के सामने रखेंगे। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, समिति को ऑनलाइन पोर्टल, जनसुनवाई और विभिन्न अन्य स्रोतों के जरिए लगभग दो से ढाई लाख से अधिक सुझाव मिले हैं। विशेषज्ञ इन सभी इनपुट्स का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं ताकि नए कानून के प्रारूप में हर वर्ग की चिंताओं और उनके हितों का पूरा ख्याल रखा जा सके।

मंत्रिमंडल की हरी झंडी के बाद मानसून सत्र में आएगा बिल

समिति की ओर से रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद मुख्य सचिव अनुराग जैन की कप्तानी वाली वरिष्ठ सचिवों की कमेटी इस पूरे ड्राफ्ट का परीक्षण करेगी। वहां से पास होने के बाद इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। मंत्रिमंडल की मुहर लगते ही इसे 20 जुलाई से प्रस्तावित मध्य प्रदेश विधानसभा के आगामी मानसून सत्र के दौरान सदन के पटल पर विधिवत चर्चा और पारित होने के लिए पेश किया जा सकता है।

जनता से संवाद की लंबी प्रक्रिया का आखिरी और निर्णायक दौर

राज्य सरकार यूसीसी के संवेदनशील मसौदे को लेकर पिछले काफी समय से हर स्तर पर जनपरामर्श का अभियान चला रही है। इस कवायद के तहत आम जनता से लेकर कानूनविदों, बुद्धिजीवियों, गैर-सरकारी संगठनों, जन-प्रतिनिधियों और विभिन्न संप्रदायों के प्रमुखों से फीडबैक जुटाया गया है। सोमवार को राजधानी में हो रही इस उच्च स्तरीय बैठक को इस पूरी जनपरामर्श प्रक्रिया का अंतिम और सबसे निर्णायक पड़ाव माना जा रहा है, जिसके बाद सूबे में नए कानून की रूपरेखा पूरी तरह साफ हो जाएगी।

इंस्टाग्राम से रचता था जाल, NEET का फर्जी पेपर बेचने वाला अक्षय मालवीय दबोचा गया

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इन्दौर। इंदौर पुलिस की क्राइम ब्रांच (एसआईटी) ने सोशल मीडिया के माध्यम से नीट परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र बेचने और छात्रों से ठगी करने के आरोप में कानून (लॉ) के एक प्रथम वर्ष के छात्र को गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कोटा पुलिस से मिले एक गोपनीय ईमेल के बाद इंदौर पुलिस सतर्क हुई और इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान लसूड़िया क्षेत्र के आंगन शक्कर खेड़ी निवासी अक्षय मालवीय के रूप में हुई है, जो इंदौर के ही एक प्रतिष्ठित लॉ कॉलेज में पढ़ाई कर रहा है। वह इंस्टाग्राम पर नीट 2026 परीक्षा के पर्चे लीक होने का दावा कर पोस्ट साझा करता था।

इंस्टाग्राम के जरिए जाल बिछाकर परीक्षार्थियों को फंसाने का तरीका

आरोपी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को झांसे में लेने के लिए इंस्टाग्राम पर आकर्षक और भ्रामक विज्ञापन पोस्ट करता था। इन पोस्ट को देखने और लाइक करने वाले छात्रों को वह अपनी प्रोफाइल के बायो में दिए गए एक संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने के लिए उकसाता था। इस लिंक को खोलने और कथित प्रश्नपत्र तक पहुंचने के लिए छात्रों को पहले ऑनलाइन माध्यम से एडवांस पेमेंट करना पड़ता था। डिजिटल भुगतान की पुष्टि होने के बाद ही वह छात्रों को पुराने या खुद से तैयार किए गए फर्जी प्रश्नपत्र थमा देता था।

साइबर सेल की रडार पर आने और अकाउंट ब्लॉक होने से मिला सुराग

नीट परीक्षा को लेकर चल रहे विवादों और सोशल मीडिया पर परीक्षा रद्द होने की चर्चाओं के बीच भी आरोपी लगातार इस तरह की भ्रामक सामग्री फैला रहा था। इस संदिग्ध गतिविधि के कारण वह काफी समय से साइबर पुलिस की विशेष निगरानी सूची में शामिल था। हाल ही में इंस्टाग्राम प्रबंधन ने नियमों के उल्लंघन के चलते उसका सोशल मीडिया अकाउंट स्थाई रूप से बंद कर दिया था, जिसके बाद पुलिस को उसके डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए ठिकाने का सुराग मिला और उसे दबोच लिया गया।

दर्जनों लोगों से यूपीआई से वसूली और गिरोह की जांच

प्रारंभिक पूछताछ और बैंक खातों की पड़ताल में सामने आया है कि आरोपी अक्षय ने अब तक लगभग 30 से 35 परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों को अपने जाल में फंसाकर यूपीआई (UPI) के जरिए अवैध वसूली की है। वह बाजार में उपलब्ध पुरानी अध्ययन सामग्री और पिछले वर्षों के पर्चों को मिलाकर एक नया सेट तैयार करता था और उसे असली प्रश्नपत्र बताकर बेच देता था। फिलहाल अपराध शाखा की टीम आरोपी को रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि इस धोखाधड़ी में उसके साथ कोई और भी शामिल है या नहीं।

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