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सरकार का बड़ा फैसला, अब बैठकों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जरूरी

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भोपाल। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिदृश्यों और प्रधानमंत्री के संदेश को आत्मसात करते हुए मध्य प्रदेश शासन ने प्रशासनिक अमले में फिजूलखर्ची रोकने तथा नागरिकों को संसाधनों के समझदारी से इस्तेमाल के लिए जागरूक करने हेतु नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा समस्त जिला कलेक्टरों और विभागाध्यक्षों को प्रेषित इस परिपत्र में सरकारी खजाने पर वित्तीय भार कम करने, बिजली की बचत, पर्यावरण संवर्धन और स्वावलंबन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। नए नियमों के तहत अब सभी शासकीय बैठकों, प्रशिक्षण सत्रों, कार्यशालाओं और गोष्ठियों का आयोजन अनिवार्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या हाइब्रिड माध्यम से किया जाएगा, ताकि राजकीय दौरों पर होने वाले अनावश्यक खर्च को रोका जा सके। इसके अतिरिक्त, मंत्रालय और क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों-कर्मचारियों को दफ्तर आने-जाने के लिए निजी वाहनों के बजाय सामूहिक परिवहन (पब्लिक ट्रांसपोर्ट), कार-पूलिंग अथवा पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

बाहरी राज्यों के आधिकारिक दौरों पर मुख्य सचिव की मंजूरी की बंदिश और उज्ज्वला योजना की समीक्षा

प्रशासनिक स्तर पर वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए मध्य प्रदेश से बाहर होने वाले सरकारी दौरों पर कड़ा पहरा बिठा दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत अधीनस्थ स्तर के कर्मचारियों और अधिकारियों के अंतर-राज्यीय दौरों को केवल बेहद आपातकालीन या अपरिहार्य परिस्थितियों में ही अनुमति दी जाएगी, जबकि सचिव स्तर के वरिष्ठ नौकरशाहों को राज्य की सीमा से बाहर किसी भी राजकीय कार्य के लिए मुख्य सचिव (सीएस) से पूर्वानुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इसी के साथ सरकार ने कृषि और उद्यानिकी जैसे विभागों को निर्देशित किया है कि वे रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल पर रोक लगाने और प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन का रूप देने के लिए कृषकों के बीच अभियान चलाएं। वहीं दूसरी ओर, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को जिम्मेदारी दी गई है कि वह पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) के बुनियादी ढांचे को तेजी से विकसित करे और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना सहित एलपीजी उपभोक्ताओं की सूची से अपात्र तथा फर्जी लाभार्थियों को चिन्हित कर उनके नाम हटाए।

सरकारी परिसरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम की अनिवार्यता और पर्यावरण अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर

विकास कार्यों से जुड़े लोक निर्माण और अन्य निर्माण विभागों को हिदायत दी गई है कि वे अपनी सरकारी परियोजनाओं में पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाली हरित निर्माण सामग्री (इको-फ्रेंडली मटेरियल) को प्राथमिकता दें और आम लोगों को भी इसके प्रति प्रेरित करें। इसके साथ ही, राज्य के सभी सरकारी भवनों और कार्यालयों की छतों पर 'प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना' के अंतर्गत सौर ऊर्जा (रूफटॉप सोलर सिस्टम) प्रणाली स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बिजली के पारंपरिक ग्रिड पर निर्भरता कम हो सके। शासन ने जनसंपर्क विभाग को "मेरा भारत-मेरा योगदान" नामक एक राज्यव्यापी जन-जागरूकता अभियान शुरू करने का दायित्व सौंपा है, जिसके माध्यम से प्रदेश के नागरिकों को बिजली की बचत, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति उत्तरदायी व्यवहार अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

प्रवासी भारतीयों के जरिए घरेलू पर्यटन को बढ़ावा और महत्वपूर्ण खनिजों के खनन को सर्वोच्च प्राथमिकता

आर्थिक और सांस्कृतिक मोर्चे पर सक्रियता बढ़ाते हुए पर्यटन विभाग को "देखो अपना देश" नीति के तहत काम करने को कहा गया है, ताकि विदेशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों (NRIs) को छुट्टियों के दौरान मध्य प्रदेश और देश के अन्य पर्यटन स्थलों की यात्रा करने के लिए आकर्षित किया जा सके, जिसमें "फ्रेंड्स ऑफ एमपी" जैसे वैश्विक संगठनों की मदद ली जाएगी। देश को औद्योगिक रूप से सशक्त करने और अंतरराष्ट्रीय आयात पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से खनिज साधन विभाग को एक बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभाग से कहा गया है कि वह आधुनिक तकनीकों के लिए जरूरी लिथियम, कोबाल्ट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, तांबा (कॉपर) और कोयले जैसी रणनीतिक संपदाओं से संबंधित खनन अनुमतियों, पर्यावरणीय स्वीकृतियों और लीज आवंटन के आवेदनों को बिना किसी देरी के सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर तुरंत मंजूरी प्रदान करे ताकि राष्ट्र की आत्मनिर्भरता को और अधिक बल मिल सके।

राम मंदिर दानपात्र चोरी पर सख्त बयान, दोषियों को नहीं मिलेगी माफी: जमाल सिद्दीकी

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भोपाल। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता महुआ मोइत्रा द्वारा सड़क पर नमाज की तुलना अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से करने पर देशव्यापी बहस छिड़ गई है। इस विवाद की गूंज अब मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में भी तेजी से सुनाई दे रही है। महुआ मोइत्रा ने ट्वीट कर आरोप लगाया था कि बंगाल के रेड रोड पर ईद की नमाज के लिए तो पाबंदी दिखाई गई, लेकिन योग दिवस के नाम पर उसे एक हफ्ते तक यातायात के लिए बंद रखा गया। इस बयान पर तीखी आपत्ति जताते हुए मध्य प्रदेश के खंडवा पहुंचे भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने दोटूक कहा कि कुछ लोग केवल राजनीतिक रोटियां सेकने और मुसलमानों को बदनाम करने के लिए ऐसे धार्मिक मुद्दों को भटकाने का काम करते हैं। मध्य प्रदेश भाजपा के नेताओं का भी मानना है कि इस तरह के बयान केवल तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा हैं, जिनका जमीनी हकीकत से कोई वास्ता नहीं है।

मध्य प्रदेश से उठी आवाज, इस्लाम के प्रोटोकॉल और मस्जिदों में नमाज की वकालत

खंडवा में मीडिया से औपचारिक चर्चा के दौरान जमाल सिद्दीकी ने इस्लामिक सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि इस्लाम में इबादत का एक स्पष्ट और पवित्र प्रोटोकॉल है। दुनिया के 55 प्रमुख मुस्लिम देशों और स्वयं इस्लाम की उद्गम स्थली सऊदी अरब का उदाहरण देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वहां भी नमाज केवल मस्जिदों के भीतर ही पढ़ी जाती है, सार्वजनिक सड़कों पर नहीं। सिद्दीकी ने कहा कि शरिया के अनुसार किसी भी विवादित या आम जनता को परेशान करने वाले स्थान पर की गई इबादत कबूल नहीं होती। मध्य प्रदेश के प्रमुख मुस्लिम विचारकों और राजनीतिक विश्लेषकों ने भी इस बयान का समर्थन करते हुए कहा है कि नमाज जैसी पावन व्यवस्था को वातानुकूलित कमरों में बैठकर राजनीति करने वाले लोग सड़कों पर लाकर खराब न करें।

योग को संस्कृति का हिस्सा बताते हुए एमपी के नागरिकों से निरोगी रहने की अपील

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के विषय पर बात करते हुए भाजपा नेता ने इसे भारत की ऋषि परंपरा और महान संस्कृति का गौरवशाली प्रतीक बताया, जिसके माध्यम से वैश्विक स्तर पर देश का मान बढ़ा है। उन्होंने मध्य प्रदेश सहित देश भर के नागरिकों से अपील की कि वे अपने जीवन में संतुलन स्थापित करें। नमाज जहां आत्मिक शांति का जरिया है, वहीं योग शारीरिक और मानसिक आरोग्यता का आधार है। उन्होंने प्रदेश के युवाओं और आमजन से आह्वान किया कि वे किसी के बहकावे में न आएं; पाबंदी से नमाज भी अदा करें और शरीर को निरोगी रखने के लिए नियमित रूप से योग को भी अपनाएं, ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके।

अयोध्या राम मंदिर मामले में विपक्ष की घेराबंदी पर पलटवार और जांच का भरोसा

इसके अतिरिक्त, अयोध्या स्थित प्रभु श्रीराम मंदिर के दानपात्र से कुछ कथित कर्मचारियों द्वारा चंदा चोरी किए जाने के मामले पर भी मध्य प्रदेश के राजनीतिक हलकों में बयानबाजी तेज है। इस विषय पर जमाल सिद्दीकी ने कहा कि चुनावी पराजय से हताश हो चुका विपक्ष अब हर संवेदनशील मुद्दे पर सरकार को घेरने की नाकाम कोशिशें कर रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार ने तत्काल विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है। भगवान राम के दरबार में ऐसी घिनौनी हरकत करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत उन्हें ऐसी कड़ी सजा दी जाएगी कि देश के सामने एक कड़ा उदाहरण पेश हो सके।

धर्मांतरण के विरोध में नारायणपुर में प्रदर्शन, जनजातीय समाज ने उठाई मांगें

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नारायणपुर| छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम भरंडा में कथित धर्मांतरण और सांस्कृतिक मान्यताओं के साथ छेड़छाड़ का मामला अब पूरी तरह गरमा गया है। इस विषय को लेकर स्थानीय जनजातीय समाज, ग्राम सभा के प्रतिनिधियों और विभिन्न पारंपरिक सामाजिक संगठनों ने बड़ी संख्या में लामबंद होकर उग्र प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने स्थानीय प्रशासन पर इस संवेदनशील मामले में ढुलमुल रवैया अपनाने और निष्क्रियता का सीधा आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि लिखित शिकायत दर्ज कराए जाने के कई दिन बीत जाने के बाद भी शासन-प्रशासन द्वारा जांच की वस्तुस्थिति स्पष्ट नहीं की गई है और न ही धरातल पर कोई ठोस कदम उठाए गए हैं। इसी आक्रोश के तहत समाज प्रमुखों ने जिला प्रशासन के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एक मांग पत्र (ज्ञापन) भी प्रेषित किया है।

आस्था और देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप, बाजार पारा में प्रदर्शन

मामले की गंभीरता को देखते हुए नारायणपुर के बाजार पारा क्षेत्र में आज जनजातीय समुदाय के नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एकत्रित होकर जमकर नारेबाजी की और त्वरित दंडात्मक कार्रवाई की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बीते 9 जून को स्थानीय पुलिस थाने में एक आधिकारिक शिकायत सौंपी गई थी। इस शिकायत में स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया गया था कि कुछ बाहरी व स्थानीय तत्वों द्वारा जनजातीय समाज की प्राचीन धार्मिक आस्था, लोक देवी-देवताओं और पारंपरिक मान्यताओं के विरुद्ध बेहद आपत्तिजनक व अमर्यादित टिप्पणियां की जा रही हैं, साथ ही भोले-भाले ग्रामीणों को प्रलोभन देकर धर्मांतरण के लिए उकसाया जा रहा है। समाज का कहना है कि एफआईआर के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से पूरे अंचल के आदिवासियों में गहरा रोष व्याप्त है।

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग

आंदोलन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन में प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं:

  • समयबद्ध जांच: पूरे प्रकरण की किसी उच्च स्तरीय एजेंसी से निष्पक्ष और समय सीमा के भीतर जांच कराई जाए।

  • कठोर कानूनी कार्रवाई: यदि जांच में धर्मांतरण और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो दोषियों पर रासुका (NSA) जैसी कड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई हो।

  • गतिविधियों पर निगरानी: नारायणपुर जिले के अंदरूनी और वनांचल क्षेत्रों में संचालित हो रही इस तरह की अन्य संदिग्ध गतिविधियों की भी व्यापक स्क्रूटनी (जांच) की जाए।

  • पारदर्शिता: स्थानीय पुलिस और प्रशासन द्वारा इस मामले में अब तक की गई प्रोग्रेस रिपोर्ट को आम जनता के सामने सार्वजनिक किया जाए।

सांस्कृतिक पहचान पर संकट: समाज प्रमुखों की चेतावनी

जनजातीय समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि यह पूरा विवाद सिर्फ एक सामान्य विवाद नहीं है, बल्कि यह उनकी सदियों पुरानी धार्मिक आस्था, मूल सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक मूल्यों को नष्ट करने का एक सुनियोजित प्रयास है। इसलिए, कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से पहले शासन को इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप कर कड़े कदम उठाने चाहिए। फिलहाल, इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर पूरे बस्तर संभाग और नारायणपुर जिले में तनावपूर्ण शांति है और हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन आगे क्या रुख अख्तियार करता है।

हेल्दी खाने और एक्सरसाइज के बावजूद थकान क्यों? जानें इसके पीछे की वजह

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संतुलित खानपान और नियमित तौर पर जिम-व्यायाम करने के बावजूद क्या आपकी सेहत में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है? क्या सुबह सोकर उठते ही आपको अत्यधिक थकान महसूस होती है, पेट में भारीपन रहता है और लगातार वजन बढ़ता जा रहा है? यदि इन सभी सवालों का जवाब 'हाँ' है, तो आपको अपनी दैनिक दिनचर्या और विशेषकर सूर्यास्त के बाद की गतिविधियों पर गहराई से पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। चिकित्सा जगत के जानकार चेतावनी देते हैं कि दिनभर की मेहनत पर पानी फेरने वाली ये समस्याएं असल में आपकी शाम और रात की कुछ अनजानी और गलत आदतों का नतीजा हो सकती हैं।

शाम ढलते ही बदल जाती है शरीर की कार्यप्रणाली

हार्मोनल और फिजियोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार, इंसानी शरीर का आंतरिक चक्र (बॉडी क्लॉक या सर्केडियन रिदम) शाम ढलने के बाद बिल्कुल अलग तरीके से काम करने के लिए प्रोग्राम होता है। इस संवेदनशील समय में की गई छोटी से छोटी लापरवाही भी आगे चलकर मेटाबॉलिज्म से जुड़ी बड़ी बीमारियों का आधार बन जाती है।

आधुनिक कॉर्पोरेट जीवन और काम के अत्यधिक दबाव के चलते अक्सर लोग दफ्तर से देर रात घर लौटते हैं, भूख मिटाने के लिए भारी भोजन करते हैं, मानसिक थकान दूर करने के नाम पर घंटों मोबाइल या टीवी स्क्रीन के सामने आंखें गड़ाए रहते हैं, या फिर चाय-कॉफी का सहारा लेकर देर रात तक काम निपटाते हैं। डिनर समाप्त करते ही सीधे बिस्तर पर सो जाने की यह जीवनशैली भले ही आपको सामान्य और विवशता लगती हो, परंतु यह आपके आंतरिक अंगों पर जानलेवा दबाव डाल रही होती है।

रात का समय: शरीर की मरम्मत और आंतरिक रिकवरी का मुख्य चरण

विभिन्न मेडिकल रिसर्च और लैबोरेटरी रिपोर्ट्स से यह प्रमाणित हो चुका है कि रात का समय मानव शरीर के भीतर जीर्ण-शीर्ण हो चुकी कोशिकाओं (सेल्स) की मरम्मत, टिशू रिकवरी और हार्मोनल संतुलन के लिए सबसे महत्वपूर्ण कालखंड होता है। इसी अवधि के दौरान मस्तिष्क दिनभर के तनाव और सूचनाओं के बोझ को प्रोसेस कर खुद को तरोताजा करता है।

परंतु, यदि इस निर्धारित समय पर पेट में गरिष्ठ भोजन डाल दिया जाए, आँखों के सामने लगातार कृत्रिम रोशनी बनी रहे, या सोने का कोई निश्चित समय न हो, तो शरीर अपनी मरम्मत का काम छोड़कर भोजन पचाने और जागते रहने के संघर्ष में लग जाता है। इससे शरीर की प्राकृतिक रिकवरी प्रक्रिया पूरी तरह बाधित हो जाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा जारी मुख्य स्वास्थ्य गाइडलाइंस

दीर्घायु और निरोगी जीवन के लिए चिकित्सा विज्ञानियों ने निम्नलिखित आदतों में तत्काल सुधार की सिफारिश की है:

1. डिजिटल स्क्रीन से बनाएं दूरी (स्लीप साइकिल सुधारें)

रात के समय स्मार्टफोन, लैपटॉप या टेलीविजन की स्क्रीन से उत्सर्जित होने वाली हानिकारक 'ब्लू लाइट' (नीली रोशनी) मस्तिष्क में नींद लाने वाले मुख्य हार्मोन 'मेलाटोनिन' के स्राव को पूरी तरह रोक देती है। इसके चलते अनिद्रा (इंसोमनिया) और अधूरी नींद की समस्या जन्म लेती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि सोने के समय से कम से कम एक घंटे पहले सभी प्रकार के डिजिटल गैजेट्स को पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।

2. डिनर की टाइमिंग और जंक फूड का त्याग

  • पाचन की धीमी गति: सूर्यास्त के बाद शरीर की जठराग्नि और पाचन क्रिया प्राकृतिक रूप से मंदी हो जाती है। ऐसे में देर रात पिज्जा, बर्गर, पैकेटबंद चिप्स या अत्यधिक तैलीय और मसालेदार भोजन का सेवन करने से एसिडिटी, पेट फूलना (ब्लोटिंग) और शरीर में अवांछित कैलोरी (चर्बी) जमा होने लगती है।

  • 8 बजे की समय-सीमा: स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से रात का भोजन (डिनर) हर हाल में रात 8:00 बजे से पहले संपन्न कर लेना चाहिए।

  • भोजन के बाद वॉक: डिनर करने के तुरंत बाद बिस्तर पर लेटने की आदत बेहद खतरनाक है। भोजन के उपरांत 10 से 15 मिनट की सामान्य सैर (वॉक) पाचन तंत्र को सुचारू रखने, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और भोजन के बेहतर अवशोषण में क्रांतिकारी लाभ देती है।

शाम के समय भूलकर भी न करें ये गलतियां

  • लेट नाइट कैफीन: रात 8:00 बजे के बाद चाय, कॉफी, डार्क चॉकलेट या किसी भी तरह के एनर्जी ड्रिंक का सेवन नींद की गहराई (डीप स्लीप) को नष्ट कर देता है, जिससे अगली सुबह शरीर भारी और थका हुआ रहता है।

  • मसालेदार भोजन से तौबा: रात में अत्यधिक तीखा या गरिष्ठ भोजन खाने से 'एसिड रिफ्लक्स' (सीने में जलन) की समस्या बढ़ जाती है, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए भी ठीक नहीं है।

  • जैविक घड़ी का असंतुलन: प्रतिदिन सोने और जागने का समय बदलना शरीर की जैविक घड़ी को भ्रमित कर देता है। इसका सीधा दुष्प्रभाव आपके थायराइड, इंसुलिन जैसे महत्वपूर्ण हार्मोन्स, ऊर्जा के स्तर और समग्र मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है।

आदिवासी जिलों में बीमारी की दस्तक, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए दिशा-निर्देश

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पहाड़ों की शांत वादियों वाले हिमाचल प्रदेश के जनजातीय अंचलों में इन दिनों स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक गंभीर संक्रामक बीमारी के फैलने की आशंका को लेकर अलर्ट जारी कर रहे हैं। राज्य के सुदूर आदिवासी जिलों— चंबा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति में जमीनी स्तर पर किए गए एक व्यापक सामुदायिक स्वास्थ्य सर्वे में चौंकाने वाली बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बीते एक वर्ष के दौरान इन क्षेत्रों में रहने वाले हर पांच में से एक व्यक्ति ने यौन संचारित रोग (एसटीडी) से मिलते-जुलते लक्षणों का सामना करने की बात स्वीकार की है।

यह महत्वपूर्ण अध्ययन जनजातीय विकास विभाग और शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) के सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया गया था। इस शोध के नतीजों को स्वास्थ्य वैज्ञानिक एक बड़ी सामूहिक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं। चिंता की बात यह है कि समस्या केवल बीमारी के लक्षणों तक सीमित नहीं है, बल्कि रिपोर्ट से पता चलता है कि एक बड़ी आबादी इस संक्रमण से बचने के सबसे सुलभ और सुरक्षित संसाधनों का उपयोग करने से कतरा रही है।

सामुदायिक सर्वे के मुख्य और चौंकाने वाले आंकड़े

जिलाएसटीडी लक्षणों की व्यापकता दर
चंबा24.2 प्रतिशत
किन्नौर20.1 प्रतिशत
लाहौल-स्पीति15.7 प्रतिशत
औसत व्यापकता (तीनों जिले)20.0 प्रतिशत

सामाजिक झिझक और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां बनीं रोड़ा

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि आज के आधुनिक दौर में भी यौन स्वास्थ्य जैसे विषयों पर खुलकर बात न करना, सामाजिक संकोच और सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित पहुंच इस समस्या को और अधिक गंभीर बना रही है। लोक-लाज के डर से कई नागरिक शरीर में लक्षण दिखाई देने के बावजूद समय पर चिकित्सीय जांच नहीं कराते। इस गोपनीयता के कारण संक्रमण लंबे समय तक शरीर में दबा रहता है और अनजाने में ही अन्य लोगों तक स्थानांतरित (फैलने) होने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

इस विशेष शोध के अंतर्गत 15 से 49 वर्ष के आयु वर्ग के करीब 3,000 नागरिकों को शामिल किया गया था, जिनमें 54.3 प्रतिशत पुरुष और 45.7 प्रतिशत महिलाएं थीं। कुल मिलाकर, कम से कम एक एसटीडी लक्षण की मौजूदगी की दर 20 फीसदी दर्ज की गई है। इन तीनों आदिवासी जिलों में चंबा जिला संक्रमण के लक्षणों के मामले में शीर्ष पर रहा।

बचाव के उपायों से दूरी और आधी-अधूरी जानकारी

रिपोर्ट के निष्कर्ष साफ तौर पर इशारा करते हैं कि सुरक्षात्मक उपायों के प्रति घोर लापरवाही ही इस खतरे को बढ़ाने का मुख्य कारण है:

  • सुरक्षा संसाधनों की अनदेखी: सर्वे में शामिल केवल 24.9 प्रतिशत लोगों ने माना कि वे संबंधों के दौरान सुरक्षात्मक साधनों (कंडोम) का नियमित उपयोग करते हैं।

  • शून्य उपयोग दर: इसके विपरीत, 33 फीसदी से अधिक आबादी ऐसी थी जिन्होंने जीवन में कभी भी इन सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल नहीं किया।

  • स्क्रीनिंग की बेहद धीमी रफ्तार: जानलेवा बीमारियों जैसे एचआईवी और हेपेटाइटिस की समय पर जांच कराने की दर भी निराशाजनक रूप से केवल 2 प्रतिशत पाई गई।

अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि लोगों ने इन बीमारियों का नाम (72 प्रतिशत) तो सुन रखा है, लेकिन इसके वैज्ञानिक बचाव को लेकर उनकी समझ आधी-अधूरी है। सिर्फ 46.6 प्रतिशत लोग ही यह जानते थे कि कंडोम का सही इस्तेमाल संक्रमण के इस चक्र को तोड़ने में कारगर साबित हो सकता है।

क्या कहते हैं सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

शिमला के वरिष्ठ चिकित्सकों का कहना है कि यह शोध उन सुदूर पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों के वास्तविक हालात बयां करता है, जहां आबादी बिखरी हुई है और मौसम की प्रतिकूलता के कारण साल के कई महीने संपर्क कटा रहता है। कठिन भौगोलिक रास्ते और सीमित क्लीनिकल संसाधनों के चलते इन संवेदनशील विषयों पर स्वास्थ्य शिक्षा और स्क्रीनिंग कैंप आयोजित करना स्वास्थ्य कर्मियों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता। आज भी ग्रामीण समाज में इसे एक बेहद गोपनीय और संवेदनशील विषय माना जाता है, जिससे लोग खुलकर डॉक्टरों से अपनी समस्या साझा करने में कतराते हैं।

अनदेखी से बढ़ सकता है एचआईवी और कैंसर का जोखिम

चिकित्सा विज्ञान के वैश्विक अध्ययनों के अनुसार, जिन मरीजों में एसटीडी के शुरुआती लक्षण जैसे कि जननांगों में घाव, अल्सर या लगातार सूजन रहती है, उनमें एचआईवी संक्रमण की चपेट में आने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। क्षतिग्रस्त त्वचा के रास्ते खतरनाक वायरस शरीर में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं।

इसके साथ ही, कुछ विशेष प्रकार के यौन जनित संक्रमण आगे चलकर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का रूप ले सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) का लंबे समय तक बने रहना महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की मुख्य वजह बनता है। ठीक इसी प्रकार, हेपेटाइटिस बी वायरस का पुराना संक्रमण सीधे तौर पर लिवर कैंसर के जोखिम को आमंत्रित करता है। इसलिए विशेषज्ञ इन सुदूर क्षेत्रों में तत्काल बड़े स्तर पर अवेयरनेस और मेडिकल कैंप लगाने की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं।

मेडिसिन खरीदने से पहले पढ़ें यह जरूरी सूचना, नहीं तो हो सकती है परेशानी

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देश में आम जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने तत्काल प्रभाव से 16 फिक्स्ड-डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं के निर्माण, विपणन (बिक्री) और वितरण पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

क्यों लगाया गया इन दवाओं पर प्रतिबंध?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और औषधि विशेषज्ञों की गहन समीक्षा में यह बात सामने आई है कि इन कॉकटेल (मिश्रित) दवाओं के फॉर्मूले का कोई भी ठोस चिकित्सीय या वैज्ञानिक आधार नहीं है। सरकार के अनुसार:

  • जोखिम की आशंका: इन कॉम्बिनेशन दवाओं के इस्तेमाल से मरीजों को फायदे के बजाय गंभीर स्वास्थ्य संबंधी नुकसान होने का अंदेशा बना हुआ था।

  • प्रभावशीलता की कमी: वैज्ञानिक पैमानों पर यह दवाएं खरी नहीं उतरीं, जिसके कारण इनका लगातार उपयोग इंसानी शरीर के लिए किसी भी तरह से लाभदायक नहीं माना गया।

मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि: स्वास्थ्य मंत्रालय

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस कड़े फैसले पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि यह कदम देशवासियों की सेहत की सुरक्षा और दवाओं के सही व सुरक्षित इस्तेमाल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस प्रतिबंध का मुख्य लक्ष्य यह पक्का करना है कि देश के बाजारों में केवल वही दवाएं उपलब्ध रहें जो पूरी तरह से असरदार, सुरक्षित और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान द्वारा प्रमाणित हों।

पहले विस्फोट में घायल, फिर रास्ते में दूसरा ब्लास्ट; पाकिस्तान में दहशत

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इस्लामाबाद| पाकिस्तान के अशांत उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में शनिवार को हुए दो सिलसिलेवार और भीषण बम धमाकों ने देश में पैर पसार रहे आतंकवाद के खौफनाक चेहरे को एक बार फिर उजागर कर दिया है। उग्रवादियों ने बेहद सुनियोजित तरीके से पहले एक आम नागरिक गाड़ी को अपना निशाना बनाया। इसके बाद, जब स्थानीय लोग और मददगार पहले धमाके के जख्मियों को लेकर अस्पताल की तरफ भाग रहे थे, तभी रास्ते में दूसरा तगड़ा विस्फोट कर दिया गया। इन दोनों कायराना हमलों में कम से कम सात नागरिकों की जान चली गई है, जबकि दर्जन भर से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय पुलिस प्रशासन ने इसे रिमोट कंट्रोल के जरिए अंजाम दिया गया आईईडी (IED) ब्लास्ट करार दिया है। घटना के फौरन बाद सेना और अर्धसैनिक बलों ने पूरे संवेदनशील बेल्ट की घेराबंदी कर बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

पहला धमाका: डैटसन गाड़ी के उड़े परखच्चे, 5 ने मौके पर ही तोड़ा दम

सुरक्षा अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, पहला आईईडी धमाका बन्नू जिले के फांग मूसा खेल नामक ग्रामीण इलाके में हुआ। यहाँ एक निजी डैटसन गाड़ी आम मुसाफिरों को लेकर डोमेल की तरफ बढ़ रही थी, तभी सड़क किनारे छिपाकर रखे गए रिमोट संचालित बम में अचानक ब्लास्ट कर दिया गया। विस्फोट का असर इतना घातक था कि वह चौपहिया गाड़ी पूरी तरह मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। इस शुरुआती हमले में ही पांच यात्रियों की घटना स्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि गाड़ी में बैठे अन्य लोग गंभीर रूप से लहूलुहान हो गए। धमाके की आवाज सुनते ही नजदीकी गांवों के लोग राहत और बचाव के लिए दौड़े और उन्होंने घायलों को गाड़ियों में लादना शुरू किया।

दूसरा विस्फोट: एम्बुलेंस के रास्ते में हमला, मलबे में तब्दील हुई दूसरी गाड़ी

रोंगटे खड़े कर देने वाली बात यह रही कि जब पहले हमले के पीड़ितों को इलाज के लिए ले जाया जा रहा था, ठीक उसी रूट पर करीब एक किलोमीटर की दूरी पर दूसरा जोरदार धमाका हुआ। चश्मदीदों के अनुसार, आतंकियों ने इस बार उन वाहनों को टारगेट किया जो घायलों की मदद के लिए आगे बढ़े थे। दूसरे विस्फोट की चपेट में आने से दो और नागरिकों की मौत हो गई और वह गाड़ी भी पूरी तरह तबाह हो गई। बैक-टू-बैक दो बम धमाकों के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई और दहशत का माहौल पैदा हो गया। खुफिया एजेंसियों को अंदेशा है कि आतंकियों ने रेस्क्यू टीम और आम लोगों को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने के लिए ही इस डबल-ब्लास्ट की रणनीति बनाई थी।

अस्पतालों में इमरजेंसी लागू, नए बमों की तलाश में जुटे खोजी कुत्ते

वारदात की भयावहता को देखते हुए रेस्क्यू टीमों को तुरंत घटना स्थल के लिए रवाना किया गया। मृतकों के शवों और खून से लथपथ घायलों को तुरंत डोमेल ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र और खलीफा गुल नवाज टीचिंग अस्पताल पहुंचाया गया, जहाँ आपातकाल (इमरजेंसी) घोषित कर दी गई है। दूसरी तरफ, सुरक्षा बलों ने अतिरिक्त बारूदी सुरंगों या बमों की आशंका के मद्देनजर पूरे हाईवे को सील कर दिया है। खोजी कुत्तों और बम निरोधक दस्ते की मदद से झाड़ियों और संदिग्ध रास्तों की सघन चेकिंग की जा रही है ताकि किसी और अनहोनी को रोका जा सके।

हुक्मरानों ने जताई संवेदना, आतंकवाद के वित्तीय तंत्र को ध्वस्त करने की मांग

इस खूनी खेल पर नाराजगी जाहिर करते हुए पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हमले की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है और बेगुनाह लोगों की मौत पर गहरा रंज प्रकट किया है। राष्ट्रपति ने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि न केवल बंदूक उठाने वाले आतंकियों, बल्कि उन्हें पीछे से लॉजिस्टिक सपोर्ट, पनाह और वित्तीय मदद (फंडिंग) देने वाले आकाओं के खिलाफ भी निर्णायक कार्रवाई की जाए। वहीं, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और नेशनल असेंबली के अध्यक्ष अयाज सादिक ने भी इस घटना को बेहद कायराना और इंसानियत को शर्मसार करने वाला कृत्य बताया है।

आतंकवाद का नया गढ़ बनता जा रहा है बन्नू जिला

भौगोलिक रूप से संवेदनशील बन्नू जिला पिछले कई महीनों से उग्रवादी संगठनों की हिंसक गतिविधियों का मुख्य केंद्र बनकर उभरा है। हालिया हफ्तों में यहाँ स्थानीय पुलिसकर्मियों, सीमा सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को लगातार निशाना बनाया गया है। बीते हफ्ते भी चरमपंथियों ने रणनीतिक रूप से अहम एक पुल को उड़ाने की नाकाम कोशिश की थी, जबकि जून महीने की शुरुआत में ही दो अलग-अलग हमलों में पुलिस के जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। क्षेत्र में लगातार खराब होती कानून-व्यवस्था और बढ़ते बारूदी हमलों के कारण स्थानीय कबीलाई समाज में भारी आक्रोश है, और हाल ही में आयोजित एक पारंपरिक जिरगा (पंचायत) में भी स्थानीय नेताओं ने सरकार और फौज से इस इलाके को आतंकवाद से पूरी तरह मुक्त कराने की पुरजोर मांग की थी।

बस और कार की आमने-सामने की भिड़ंत, तीन लोगों की मौके पर मौत

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जबलपुर। मध्य प्रदेश के दमोह-जबलपुर राज्य राजमार्ग (स्टेट हाईवे) पर शुक्रवार की देर शाम एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। यहाँ एक यात्री बस और तेज रफ्तार कार के बीच हुई आमने-सामने की जोरदार टक्कर में कार सवार एक ही परिवार के तीन सदस्यों की घटना स्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस भीषण दुर्घटना में दो अन्य लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं, जिन्हें स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार देने के बाद बेहतर इलाज के लिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। हादसे की भयावहता की सूचना मिलते ही जिला पुलिस अधीक्षक (SP) आनंद कलादगी तुरंत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

सड़क दुर्घटना में उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार

मौके पर सुरक्षा व्यवस्था संभालने पहुंचे थाना प्रभारी विकास सिंह चौहान ने दुर्घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि इस दर्दनाक भिड़ंत में कार के भीतर मौजूद अखिलेश प्रजापति, मुकेश प्रजापति और माया प्रजापति ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था, ये तीनों आपस में रिश्तेदार थे और एक ही परिवार से ताल्लुक रखते थे। वहीं, कार चला रहे ड्राइवर रशीद खान (निवासी शाहगढ़) और परिवार की महिला सदस्य रीना प्रजापति गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका डॉक्टरों की देखरेख में सघन उपचार किया जा रहा है।

क्रॉसिंग के दौरान पुरेनहाउ के पास आपस में टकराए दोनों वाहन

घटना स्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यात्री बस जबलपुर से सवारियां लेकर दमोह की ओर आ रही थी, जबकि कार कटनी मार्ग से होते हुए शाहगढ़ की तरफ जा रही थी। जैसे ही दोनों वाहन जबेरा मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित पुरेनहाउ गांव के समीप पहुंचे, तभी एक मोड़ पर क्रॉसिंग के दौरान दोनों में आमने-सामने की भीषण टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह लोहे के मलबे में तब्दील हो गया। जबेरा स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी (CBMO) डॉ. डी.के. राय ने बताया कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही तीन नागरिकों की सांसें थम चुकी थीं। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम (शव परीक्षण) की वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।

कटर से गाड़ी के दरवाजे काटकर फंसे हुए लोगों को निकाला बाहर

टक्कर की गूंज सुनकर आस-पास के ग्रामीण तुरंत मदद के लिए दौड़े। कार पूरी तरह से चकनाचूर होकर पिचक गई थी, जिसके कारण घायल और मृतक अंदर बुरी तरह फंस गए थे। सूचना मिलते ही पहुंची स्थानीय पुलिस ने ग्रामीणों के सहयोग से लोहे के कटर और रॉड की मदद से कार के दरवाजों और खिड़कियों को कड़े संघर्ष के बाद तोड़ा, जिसके बाद फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला जा सका। हालांकि, तब तक तीन लोग दम तोड़ चुके थे। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को क्रेन की मदद से हाईवे से हटाकर यातायात को सुचारू रूप से बहाल कराया है।

TMC में वित्तीय घमासान, 440 करोड़ विवाद में तीन बैंक अकाउंट फ्रीज

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल के हालिया विधानसभा चुनावों में मिली शिकस्त के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की मुखिया ममता बनर्जी के राजनीतिक गलियारे में उथल-पुथल मची हुई है। पार्टी के भीतर विधायकों और सांसदों के बगावती सुरों के बीच अब संगठन को एक और बड़ा झटका लगा है, जहां टीएमसी के तीन प्रमुख बैंक खातों को पूरी तरह से 'डेबिट फ्रीज' कर दिया गया है। इन खातों में लगभग 440 करोड़ रुपये की विशाल धनराशि जमा है, जिसके निकासी परिचालन पर अब पूरी तरह रोक लग गई है। यह दंडात्मक कार्रवाई पार्टी के ही असंतुष्ट विधायकों की लिखित शिकायत के बाद अमल में लाई गई है, जिन्होंने इन पैसों के वास्तविक स्रोतों की उच्च स्तरीय आपराधिक जांच कराने की मांग उठाई थी। इस नए घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर वित्तीय खजाने और सांगठनिक वर्चस्व पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए चल रहे अंदरूनी शीतयुद्ध को और अधिक हवा दे दी है।

क्या है खातों के फ्रीज होने का गणित और पार्टी के भीतर दो गुटों का टकराव

जांच से जुड़े वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एक निजी वाणिज्यिक बैंक में संचालित इन तीन खातों को 'डेबिट फ्रीज' की श्रेणी में डालने का तात्पर्य यह है कि अब इन खातों से किसी भी प्रकार का वित्तीय भुगतान, चेक क्लीयरेंस या ऑनलाइन ट्रांजैक्शन नहीं किया जा सकेगा, हालांकि पार्टी के देशव्यापी चंदे या अन्य माध्यमों से इसमें पैसे जमा (क्रेडिट) होने की प्रक्रिया सुचारू रहेगी। दरअसल, यह पूरा बवाल टीएमसी के दो शीर्ष धड़ों—पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के गुटों के बीच वित्तीय नियंत्रण को लेकर छिड़ी वर्चस्व की जंग का नतीजा है। बनर्जी खेमे के समर्थक 10 बागी विधायकों ने बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के तहत साइबर क्राइम थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए एक प्राथमिकी (एफआईआर) पंजीकृत कराई थी, जिसमें खातों में जमा अकूत संपत्ति के वैधानिक स्रोतों पर गहरे सवाल खड़े किए गए थे।

संदिग्ध 'कट-मनी' और घोटालों की काली कमाई को सफेद करने का संगीन आरोप

बागी विधायकों द्वारा सौंपी गई शिकायत की प्रति के मुताबिक, जांचकर्ताओं से इस बात की गहराई से तफ्तीश करने का पुरजोर आग्रह किया गया है कि क्या खातों में मौजूद यह फंड पूरी तरह विधिक और पारदर्शी तरीकों से जुटाया गया है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा अवैध तंत्र सक्रिय था। शिकायत पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि पार्टी के रसूख का दुरुपयोग कर बेईमानी से जुटाए गए संदिग्ध 'कट-मनी' कलेक्शन, सार्वजनिक सरकारी फंडों के अवैध डायवर्जन तथा विभिन्न वित्तीय घोटालों से अर्जित काली कमाई को घुमा-फिराकर (मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए) इन बैंक खातों में खपाया गया हो सकता है। दूसरी तरफ, ममता बनर्जी के वफादार विधायक कुणाल घोष सहित अन्य नेताओं ने माना है कि उन्हें पुलिसिया कार्रवाई की भनक लगी है, परंतु वे अभी बैंक और प्रशासन की ओर से मिलने वाले आधिकारिक नोटिस और विवरण का इंतजार कर रहे हैं।

अरूप बिस्वास के पत्र से शुरू हुआ विवाद, कोषाध्यक्ष पद को लेकर छिड़ा नया घमासान

इस पूरे वित्तीय विवाद में नया मोड़ तब आया था जब कुछ दिनों पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता अरूप बिस्वास ने स्वयं बैंक प्रबंधन को एक पत्र लिखकर नेतृत्व का विवाद सुलझने तक पार्टी के करीब 500 करोड़ से अधिक के फंड के संचालन को रोकने की अपील की थी। मजे की बात यह है कि यह शिकायतें उसी साइबर सेल थाने में दर्ज हुई हैं, जो अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी के कोलकाता आगमन के दौरान हुए वित्तीय प्रबंधन की अनियमितताओं के मामले में बिस्वास के खिलाफ जांच कर रहा है। इस बीच, ममता खेमे के कद्दावर नेता कुणाल घोष ने तीखा पलटवार करते हुए स्पष्ट किया है कि अरूप बिस्वास अब पार्टी के आधिकारिक कोषाध्यक्ष नहीं रहे हैं, क्योंकि 5 जून को आयोजित कार्यकारिणी की उच्च स्तरीय बैठक में सर्वसम्मति से सुभाशीष चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया जा चुका है। ऐसे में बिस्वास को पार्टी के किसी भी बैंक खाते या आर्थिक लेन-देन पर बयानबाजी करने का कोई विधिक अधिकार नहीं है।

जबलपुर में आग का कहर, बेकरी जलने से बड़ा आर्थिक नुकसान

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जबलपुर। संसकारधानी के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले घनी आबादी वाले खटीक मोहल्ला स्थित 'जैन बेकरी' में शनिवार, 20 जून की सुबह अचानक भड़की भीषण आग से पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। देखते ही देखते आग की चिंगारियों ने विकराल रूप अख्तियार कर लिया, जिससे बेकरी की दुकान सहित उससे सटे रिहायशी मकान का एक बड़ा हिस्सा भी आग की लपटों की चपेट में आ गया। गनीमत यह रही कि जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय मकान के भीतर परिवार के कई सदस्य मौजूद थे, जिन्हें पड़ोसियों की सजगता, बहादुरी और त्वरित सूझबूझ के चलते वक्त रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस तत्परता की वजह से एक बहुत बड़ा और दर्दनाक हादसा होने से टल गया।

लपटें और धुआं देख दौड़े पड़ोसी, दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद पाया काबू

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शनिवार सुबह तड़के बेकरी के भीतर से अचानक काले धुएं का गुबार और आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठती देख स्थानीय निवासियों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत स्थानीय पुलिस प्रशासन और अग्निशमन दल (फायर ब्रिगेड) को दुर्घटना की जानकारी दी। आपातकालीन सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां और बचाव दल तुरंत घटना स्थल पर पहुंचे। फायर फाइटर्स ने स्थानीय युवाओं की मदद से मोर्चा संभाला और काफी जद्दोजहद व कड़ी मशक्कत करने के बाद आग पर पूरी तरह से काबू पाया।

हालांकि, जब तक आग पर नियंत्रण पाया जाता, तब तक बेकरी के भीतर रखी भारी मात्रा में खाद्य सामग्री, कीमती फर्नीचर, बिजली के बड़े उपकरण (ओवन, फ्रिज) और अन्य व्यावसायिक सामान पूरी तरह जलकर खाक हो चुके थे। इसके अलावा, आग की तपिश और लपटें घर के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचने के कारण घरेलू उपयोग का कीमती सामान और दस्तावेज भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

शॉर्ट सर्किट बना हादसे की वजह, कोई जनहानि नहीं

प्रशासनिक और तकनीकी टीम द्वारा की गई शुरुआती तफ्तीश में इस आगजनी का मुख्य कारण बिजली के बोर्ड में हुआ शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। इस पूरे हादसे में सबसे बड़ी राहत और संतोष की बात यह रही कि किसी भी नागरिक या कर्मचारी को आंच नहीं आई और कोई जनहानि (कैजुअलिटी) नहीं हुई। वर्तमान में स्थानीय पुलिस और दमकल अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा इस हादसे से हुए कुल आर्थिक नुकसान का सटीक मूल्यांकन और सर्वे किया जा रहा है। इस अप्रत्याशित घटना के बाद वार्ड में काफी देर तक तनाव और सुरक्षा को लेकर चिंता का माहौल देखा गया, और स्थिति का जायजा लेने के लिए मौके पर सैकड़ों लोगों का हुजूम जुटा रहा।

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