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सामंथा ने मनाया फिल्म की दमदार शुरुआत का जश्न, टीम की महिलाओं की तारीफ की

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भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु की नई मुख्य भूमिका वाली फिल्म ‘मां इंटी बंगारम’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। रिलीज के पहले दिन (ओपनिंग डे) इस फिल्म ने ₹5.35 करोड़ की बेहतरीन शुरुआत की थी, वहीं दूसरे दिन भी इसका जलवा बरकरार रहा और फिल्म ने ₹2.54 करोड़ का शानदार कलेक्शन किया। इसके साथ ही फिल्म की कुल दो दिनों की कमाई का आंकड़ा ₹7.89 करोड़ तक पहुंच गया है। सिनेमाघरों में इस पारिवारिक और थ्रिलर ड्रामा को देखने के लिए दर्शकों, विशेषकर महिला वर्ग की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिससे फिल्म की पूरी टीम और सामंथा बेहद उत्साहित हैं। अभिनेत्री ने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से अपने तमाम प्रशंसकों का दिल से आभार जताया है।

सिनेमा का बदलता दौर: ओपनिंग डे पर महिलाओं के योगदान की सराहना

सामंथा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक भावुक और विचारणीय पोस्ट साझा की है। उन्होंने लिखा, "रिलीज के पहले ही दिन किसी फिल्म को दर्शकों का इतना अपार प्यार और शानदार ओपनिंग मिलते देखना एक अद्भुत और सुखद अहसास है। यह सफलता हमारे पूरे क्रू के लिए बहुत मायने रखती है। आज का दर्शक कंटेंट को प्रधानता दे रहा है, चाहे फिल्म पुरुष-केंद्रित (मेल-लीड) हो या महिला-केंद्रित (फीमेल-लीड)। लोग पूरे दिल से थिएटर्स तक पहुंच रहे हैं।"

अभिनेत्री ने आगे सिनेमा के बदलते स्वरूप पर जोर देते हुए कहा, "सबसे क्रांतिकारी बात यह रही कि ओपनिंग डे के कलेक्शन में महिला दर्शकों की भागीदारी बहुत ज्यादा दर्ज की गई है। दशकों से फिल्म इंडस्ट्री में यह धारणा बनी हुई थी कि पहले दिन की बम्पर कमाई केवल पुरुष दर्शकों के कारण होती है। ऐसे में सिनेमा देखने के इस ट्रेंड और दर्शकों की सोच में आ रहा यह सकारात्मक बदलाव वाकई सराहनीय है। हमारे एक छोटे से प्रोडक्शन हाउस की इस कोशिश को बड़ा बनाने के लिए सभी का धन्यवाद।"

क्या है ‘मां इंटी बंगारम’ की रहस्यमयी कहानी?

यह फिल्म एक ऐसी संस्कारी और पारंपरिक महिला के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक रूढ़िवादी परिवार में नई बहू बनकर कदम रखती है। वह स्वभाव से अत्यंत शांत, बड़ों की आज्ञा मानने वाली और हर कसौटी पर खरी उतरने वाली आदर्श बहू दिखाई देती है। हालांकि, ससुराल के लोगों को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं होता कि उसकी इस सादगी के पीछे एक गहरा रहस्य छिपा है। कहानी में मोड़ तब आता है जब उसका छुपा हुआ अतीत अचानक सबके सामने उजागर होने लगता है। विपरीत परिस्थितियों के बीच उसे अंततः उन्हीं लोगों की ढाल बनना पड़ता है, जो उस पर शक कर रहे होते हैं।

पारिवारिक मूल्यों और सस्पेंस से भरपूर इस बेहतरीन फिल्म का निर्देशन विख्यात निर्देशक नंदिनी रेड्डी ने किया है, जिनकी सधे हुए निर्देशन शैली की समीक्षक और दर्शक जमकर तारीफ कर रहे हैं।

आय घटने वाले बयान पर कांग्रेस सांसद ने दी सफाई, कहा- गलत पेश किया गया

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लातूर। कांग्रेस के लोकसभा सदस्य डॉ. शिवाजी कालगे ने अपनी आमदनी में गिरावट को लेकर दिए गए अपने पिछले बयान पर मचे सियासी घमासान के बीच एक औपचारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि उनके द्वारा दिए गए वक्तव्य को पूरी तरह से प्रसंग से अलग करके और तोड़-मरोड़कर जनता के सामने परोसा गया है। उन्होंने साफ किया कि सार्वजनिक जीवन में कदम रखने को लेकर उनके मन में रत्ती भर भी मलाल नहीं है और न ही उन्होंने सांसद के पद को किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत या आर्थिक नुकसान बताया है। लातूर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले डॉ. कालगे ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा किए गए अपने संदेश में आरोप लगाया कि कुछ तत्वों द्वारा सोची-समझी रणनीति के तहत उनके शब्दों का अनर्थ निकाला गया, जिससे आम जनता के बीच यह भ्रामक संदेश गया कि वे राजनीति में आकर दुखी हैं, जबकि हकीकत इसके सर्वथा विपरीत है।

आयकर भुगतान में भारी गिरावट के आंकड़ों से शुरू हुआ था समूचा विवाद

विवाद की पृष्ठभूमि दरअसल कुछ दिनों पूर्व डॉ. शिवाजी कालगे द्वारा अपनी पेशेवर जिंदगी को लेकर दिए गए एक बयान से जुड़ी हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि संसद सदस्य निर्वाचित होने के उपरांत उनकी चिकित्सकीय सेवाएं (मेडिकल प्रैक्टिस) काफी हद तक प्रभावित हुई हैं। उन्होंने तुलनात्मक आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया था कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान उन्होंने बतौर चिकित्सक लगभग 36 लाख रुपये का इनकम टैक्स (आयकर) अदा किया था, जबकि वर्ष 2024-25 में उनकी व्यावसायिक आय अत्यधिक कम हो जाने के कारण यह टैक्स घटकर महज 8.75 लाख रुपये के आसपास रह गया। उन्होंने अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए कहा था कि जनसेवा के दायित्वों के कारण वे अब अपने निजी अस्पताल और वहां आने वाले मरीजों को पहले की भांति पर्याप्त समय प्रदान करने में असमर्थ हैं।

साक्षात्कार के जवाब को गलत ढंग से परोसने का आरोप, जनसेवा को बताया अमूल्य

अपने नए स्पष्टीकरण में डॉ. कालगे ने स्थिति को साफ करते हुए बताया कि एक हालिया मीडिया साक्षात्कार के दौरान पत्रकारों ने उनसे यह सीधा सवाल किया था कि सक्रिय राजनीति और जनसेवा में आने के बाद उनके मुख्य चिकित्सा व्यवसाय पर क्या व्यावहारिक प्रभाव पड़ा है। इसके उत्तर में उन्होंने केवल एक सहज सत्य साझा किया था कि सामाजिक व राजनैतिक व्यस्तताओं के चलते उनके डॉक्टर वाले पेशे पर असर पड़ा है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि विरोधियों ने इस निष्कपट स्वीकारोक्ति को इस प्रकार प्रचारित किया जैसे कि वे जनसेवा के इस पावन कार्य को केवल पैसों के घाटे-मुनाफे की तराजू पर तौल रहे हों। उन्होंने अत्यंत दृढ़ता से कहा कि भारतीय लोकतंत्र के इस सबसे बड़े मंदिर (लोकसभा) में देश और क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व करने का जो अभूतपूर्व गौरव उन्हें प्राप्त हुआ है, वह उनके लिए पूरी तरह अमूल्य है और इसकी तुलना संसार के किसी भी बड़े वित्तीय लाभ या व्यक्तिगत स्वार्थ से कभी नहीं की जा सकती।

बिना किसी राजनैतिक पृष्ठभूमि के मिला जनसमर्थन, निष्ठा से कार्य करने का संकल्प

कांग्रेस सांसद ने भावुक होते हुए कहा कि वे किसी रसूखदार राजनैतिक घराने या पृष्ठभूमि से ताल्लुक नहीं रखते हैं, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उनकी योग्यता पर पूर्ण विश्वास जताते हुए उन्हें वर्ष 2024 के आम चुनाव में लातूर से अपना प्रत्याशी बनाया। इसके बाद क्षेत्र के जागरूक मतदाताओं ने भी उन पर अगाध स्नेह बरसाते हुए भारी मतों से विजयी बनाकर देश की संसद में भेजा। उन्होंने कहा कि दल और जनता द्वारा दिया गया यह अपार सम्मान ही उनके जीवन की सर्वश्रेष्ठ थाती है, जो उन्हें दिन-रात जनता के दुखों को दूर करने की ऊर्जा देती है। डॉ. शिवाजी कालगे ने अंत में दोहराया कि मतदाताओं, कार्यकर्ताओं और महाविकास अघाड़ी गठबंधन के नेताओं से उन्हें जो अमूल्य स्नेह मिल रहा है, उसकी कीमत रुपयों-पैसों में कतई नहीं मापी जा सकती और वे अपनी आखिरी सांस तक पूरी ईमानदारी, शुचिता तथा निष्ठा के साथ आमजन के कल्याण के लिए समर्पित रहेंगे।

कर्नाटक MLC चुनाव में कांग्रेस का दबदबा, बीजेपी को झटका

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बेंगलुरु। झारखंड में राज्यसभा चुनाव के दौरान लगे तगड़े झटके के बाद कांग्रेस पार्टी के लिए दक्षिण भारत से एक बेहद सुकून देने वाली खबर सामने आई है। कर्नाटक में संपन्न हुए विधान परिषद के चुनावों में मिली शानदार जीत ने कांग्रेस आलाकमान को बड़ी राहत पहुंचाई है। राज्य की सात विधान परिषद सीटों पर हुए इस कड़े मुकाबले में प्रदेश की सत्तारूढ़ कांग्रेस ने अपने बेहतरीन राजनैतिक कौशल का प्रदर्शन करते हुए पांच सीटों पर कब्जा जमा लिया है। गुरुवार को मतगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक परिणामों में कांग्रेस पार्टी सबसे बड़े और एकतरफा विजेता के रूप में उभरकर सामने आई है। दूसरी तरफ, देश की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को महज दो सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है, जबकि उसकी क्षेत्रीय सहयोगी दल जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडीएस अपनी पारंपरिक सीट बचाने में पूरी तरह विफल रही और उसके प्रत्याशी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा।

क्रॉस वोटिंग के चक्रव्यूह में फंसी भाजपा, झारखंड का बदला कर्नाटक में पूरा

इस पूरे चुनावी समर में सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि जिस प्रकार झारखंड में कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग के कारण गहरा नुकसान उठाना पड़ा था, ठीक उसी तर्ज पर कर्नाटक के भीतर भाजपा को अपनी ही पार्टी के भीतर से बड़ा झटका लगा है। राजनैतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि कर्नाटक में भाजपा के अपने ही विधायकों ने ऐन वक्त पर पार्टी लाइन से अलग जाकर क्रॉस वोटिंग की और अपने ही नेतृत्व को धोखा दे दिया। इस अप्रत्याशित राजनैतिक घटनाक्रम को लेकर सियासी पंडितों का मानना है कि कांग्रेस के संकटमोचक और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेहद चालाकी से झारखंड में अपनी पार्टी को मिले जख्मों का हिसाब कर्नाटक की धरती पर भाजपा से बराबर कर लिया है।

सत्तारूढ़ कांग्रेस की सांगठनिक मजबूती और जेडीएस का सूपड़ा साफ

इन चुनाव परिणामों ने सिद्ध कर दिया है कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की जुगलबंदी के चलते कांग्रेस संगठन धरातल पर बेहद मजबूत स्थिति में है। सात में से पांच सीटों पर मिली यह एकतरफा जीत आगामी स्थानीय और निकाय चुनावों के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंकने का काम करेगी। इसके विपरीत, जेडीएस के लिए यह परिणाम किसी दुःस्वप्न से कम नहीं हैं, क्योंकि भाजपा के साथ गठबंधन में होने के बावजूद वे अपने कैडर और विधायकों के मतों को सहेजने में नाकाम रहे, जिसने उनके राजनैतिक वजूद पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

अंतर्कलह से जूझती कर्नाटक भाजपा और आगामी संगठन विस्तार पर संकट

बीजेपी खेमे के लिए दो सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद भी इस चुनाव के मायने बेहद चिंताजनक हैं। अपनी ही पार्टी के विधायकों द्वारा बगावत कर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने से प्रदेश भाजपा की आंतरिक गुटबाजी खुलकर सरेबाजार आ गई है। केंद्रीय नेतृत्व ने इस अनुशासनहीनता और भितरघात को अत्यंत गंभीरता से लिया है। राजनैतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि भाजपा ने समय रहते अपने विधायकों के इस असंतोष को दूर नहीं किया, तो आने वाले दिनों में राज्य के भीतर पार्टी को और भी बड़े राजनैतिक संकटों का सामना करना पड़ सकता है।

थरूर की टिप्पणी से कांग्रेस में हलचल, बीजेपी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को एक बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी खुद अपनी ही पार्टी के भीतर अपनी साख और समर्थन खोते जा रहे हैं। सत्तारूढ़ दल ने विपक्ष के नेता पर तीखा हमला बोलने के लिए कांग्रेस के ही वरिष्ठ सांसद शशि थरूर द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली को लेकर की गई कथित प्रशंसा का विशेष रूप से हवाला दिया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समक्ष भारतीय नाविकों के संवेदनशील मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी के दृढ़ कूटनीतिक रुख को लेकर शशि थरूर की सकारात्मक टिप्पणियां, इस विषय पर राहुल गांधी द्वारा अपनाए गए स्टैंड के बिल्कुल विपरीत हैं। पूनावाला ने एक वीडियो संदेश जारी कर तंज कसा कि यह बेहद निराशाजनक स्थिति है कि बीते दिन राहुल गांधी का जन्मदिन था, लेकिन उन्हें अपनी ही पार्टी के भीतर से ही कोई सकारात्मक उपहार मिलने के बजाय यह विरोधाभास झेलना पड़ा।

शशि थरूर द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व कौशल और ऊर्जा की कथित सराहना

भाजपा प्रवक्ता ने अपने दावों को पुख्ता करने के लिए आगे कहा कि कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशिष्ट नेतृत्व गुणों की खुलकर सराहना की है। उनके अनुसार, थरूर ने प्रधानमंत्री की दूरगामी सोच, कूटनीतिक संवाद स्थापित करने की अद्भुत क्षमता, कार्य के प्रति उनकी अटूट ऊर्जा और जनसभाओं में प्रभावशाली वक्तव्य देने की कला का लोहा माना है। भाजपा का कहना है कि थरूर ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने निर्णयों और योजनाओं के माध्यम से समूचे भारतीयों के जनजीवन पर एक अत्यंत अमिट और गहरी छाप छोड़ी है, जो विपक्षी खेमे की सोच में बड़े मतभेद को उजागर करता है।

'कूल पीएम राहुल' सोशल मीडिया अभियान पर भाजपा का कड़ा प्रहार

शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पार्टी द्वारा राहुल गांधी को भविष्य के प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश करने के लिए चलाए जा रहे विभिन्न राजनीतिक व डिजिटल अभियानों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और जमीनी नेता स्वयं आलाकमान की इस सोच से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। एक तरफ जहां कांग्रेस के रणनीतिकार 'कूल पीएम राहुल' जैसे नारे गढ़कर यह माहौल बनाने में जुटे हैं कि आने वाले समय में राहुल गांधी ही देश की कमान संभालेंगे, वहीं दूसरी ओर उनकी ही पार्टी के निर्वाचित सांसद और कद्दावर नेता उनके इस नेतृत्व पर मौन रहकर विपरीत राय जाहिर कर रहे हैं। भाजपा ने जोर देकर कहा कि राहुल गांधी न केवल आम जनता के बड़े वर्ग का विश्वास खो चुके हैं, बल्कि कभी उनके सबसे करीबी और रणनीतिकार माने जाने वाले सिपहसालार भी अब उनका साथ छोड़ चुके हैं।

इंडी गठबंधन के घटक दलों द्वारा राहुल के राष्ट्रीय नेतृत्व को स्वीकार करने से इनकार

भाजपा प्रवक्ता ने आंतरिक कलह के दायरे को और व्यापक बताते हुए आरोप मढ़ा कि कांग्रेस के कई प्रमुख क्षेत्रीय और राष्ट्रीय सहयोगी दल भी राहुल गांधी के केंद्रीय नेतृत्व के अधीन काम करने को कतई तैयार नहीं हैं। पूनावाला ने विपक्षी एकजुटता पर तंज कसते हुए कहा कि अब उन्हें अपने ही वैचारिक गठबंधन के साथियों का बुनियादी समर्थन हासिल नहीं रह गया है। उन्होंने वामपंथी दलों (लेफ्ट) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) जैसी प्रमुख क्षेत्रीय ताकतों का नाम लेते हुए कहा कि ये दल राष्ट्रीय स्तर पर राहुल गांधी को अपना सर्वमान्य नेता मानने से बचते रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता ने अपने हमले के अंत में कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए राहुल गांधी अब जमीनी स्तर पर जनता के 'असली नेता' नहीं रह गए हैं, बल्कि वे सोशल मीडिया तक सीमित रहने वाले महज एक 'रील नेता' बनकर रह गए हैं।

शादी के बाद विवाद, दुल्हन ने ससुराल जाने से किया इनकार, थाने में पहुंचा मामला

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डबरा। मध्य प्रदेश के डबरा में एक नवविवाहित दुल्हन की शादी के अरमान उस समय बिखर गए, जब उसे ससुराल की चौखट पर कदम रखने से पहले अचानक पुलिस थाने की दहलीज पर पहुंचना पड़ा। विवाह के लाल जोड़े में सजी, हाथों में चूड़ा और पिया के नाम की मेहंदी रचाए वह दुल्हन, जिसकी आँखों में एक नए जीवन के हसीन सपने थे, विदाई के ठीक पहले खुद को पुलिस कोतवाली के कमरों में पाकर स्तब्ध थी। यह कोई पारिवारिक विवाद या आपराधिक षड्यंत्र नहीं था, बल्कि एक सामूहिक विवाह सम्मेलन के प्रबंधकों द्वारा की गई वादाखिलाफी का नतीजा था, जिसने शादी के उत्सव को अचानक कानूनी लड़ाई में तब्दील कर दिया। डबरा सिटी कोतवाली में शुक्रवार की देर रात घटित हुए इस अनोखे मामले ने न केवल पुलिस महकमे को हैरान कर दिया, बल्कि समूचे इलाके में सनसनी फैला दी। अपनी विदाई की रस्मों को बीच में ही रोककर न्याय की गुहार लगाने वाली इस दुल्हन की नाराजगी की मुख्य वजह वह गृहस्थी का साजो-सामान और दोपहिया वाहन (मोटरसाइकिल) था, जिसे आयोजन समिति ने शादी के तोहफे के रूप में देने का लिखित आश्वासन दिया था, परंतु अंतिम क्षणों में वे अपनी बात से साफ पलट गए।

लाखों रुपये जमा कराने के बाद भी ऐन वक्त पर मुकर गए आयोजन समिति के पदाधिकारी

यह पूरा मामला रंग महल गार्डन में 'ईशानी शिक्षा एवं जन कल्याण समिति' द्वारा आयोजित एक सर्वजातीय सामूहिक विवाह सम्मेलन से जुड़ा हुआ है। मीट मार्केट क्षेत्र की निवासी लवली वाल्मीकि का पाणिग्रहण संस्कार इसी पंडाल में झांसी से आए सुनील वाल्मीकि के साथ पूरे विधि-विधान से संपन्न हुआ था। पीड़ित वधु पक्ष का सीधा आरोप है कि विवाह पक्का होने के समय समिति के पदाधिकारियों के पास 90 हजार रुपये की मोटी रकम अग्रिम जमा कराई गई थी, और लगभग इतनी ही धनराशि वर पक्ष द्वारा भी आयोजकों को दी गई थी। यह भारी-भरकम राशि केवल इसी शर्त पर दी गई थी क्योंकि आयोजकों ने दोनों परिवारों को भरोसा दिया था कि विवाह संपन्न होने पर वर-वधू को एक नई मोटरसाइकिल सहित गृहस्थी स्थापना का पूरा आवश्यक सामान भेंट किया जाएगा। दोनों पक्षों ने गरीब होने के कारण इस सामूहिक मंच और आयोजकों के दावों पर अटूट विश्वास कर लिया था।

सामान मांगने पर आयोजकों ने दिखाई धौंस तो विदाई रोककर लाल जोड़े में ही थाने पहुंची दुल्हन

पवित्र अग्नि के फेरे और सिंदूरदान की रस्में पूरी होने के बाद जब विदाई की वेला आई, तो वर पक्ष के लोगों ने वादे के अनुसार समिति के सदस्यों से गाड़ी और गृहस्थी के सामान की मांग की। आरोप है कि इस पर समिति के लोग आनाकानी करने लगे और कोई भी संतोषजनक उत्तर देने के बजाय टालमटोल करने लगे। जब विवाद बढ़ा तो आयोजकों ने सामान देने से साफ मना कर दिया, जिससे दोनों पक्षों का धैर्य जवाब दे गया। आयोजकों द्वारा सरेआम छले जाने से आहत होकर दुल्हन लवली ने एक बेहद साहसी और ऐतिहासिक निर्णय लिया। उसने अपनी विदाई की रस्म को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया और अपने विवाह के भारी जोड़े में ही सीधे डबरा सिटी थाने जा पहुंची। थाने के मुख्य द्वार पर लाल जोड़े में सजी-धजी दुल्हन को देखकर वहां ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी भी एक पल के लिए भौंचक्के रह गए।

एसडीओपी ने दिलाया उचित विधिक कार्रवाई का भरोसा तब जाकर ससुराल रवाना हुई नवविवाहिता

थाने में मचे इस हंगामे और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीओपी सौरभ कुमार ने अविलंब पीड़ित दुल्हन और उसके माता-पिता की पूरी व्यथा सुनी। उन्होंने पीड़ित परिवार को आश्वस्त किया कि पुलिस इस धोखेबाजी को लेकर बेहद गंभीर है और आयोजन समिति के खिलाफ निष्पक्ष व कड़ी विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। पुलिस अधिकारी ने स्वयं हस्तक्षेप करते हुए आयोजकों को तलब करने और नियमानुसार पूरा सामान दिलवाने का ठोस आश्वासन दिया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की इस त्वरित समझाइश और ढाढस बंधाने के बाद दुल्हन लवली का गुस्सा शांत हुआ और उसकी आँखों में छाई मायूसी उम्मीद में बदल गई, जिसके बाद वह मुस्कुराते हुए अपने ससुराल के लिए रवाना हुई। इस अप्रत्याशित घटना ने एक बार फिर मध्य प्रदेश में कुकुरमुत्ते की तरह खुल रहे सामूहिक विवाह सम्मेलनों की प्रामाणिकता, उनकी वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक निगरानी की सख्त जरूरत पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

महज 5 रुपये पर बवाल, भिंड में ग्राहक के कान पर दांत से हमला

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भिंड। मध्य प्रदेश के भिंड जिले से एक बेहद हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां महज चंद रुपयों के लेन-देन को लेकर उपजा विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। मेहगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक आटा चक्की पर पिसाई के पैसों को लेकर ग्राहक और चक्की संचालक के बीच तीखी बहस हो गई। यह विवाद कुछ ही पलों में इतना उग्र हो गया कि चक्की संचालक ने तैश में आकर ग्राहक के कान को अपने दांतों से बुरी तरह काट लिया, जिससे ग्राहक लहूलुहान होकर गंभीर रूप से जख्मी हो गया। वारदात के बाद पीड़ित को तुरंत प्राथमिक उपचार दिलाया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार दोनों पक्षों में काफी देर तक कहासुनी होती रही, लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि एक छोटा सा विवाद इस कदर हिंसक रूप अख्तियार कर लेगा। लहूलुहान हालत में पीड़ित ने थाने पहुंचकर आरोपी के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस मामले की सघन तफ्तीश में जुट गई है।

मात्र पांच रुपये के फेर में हुआ खूनी संघर्ष, संचालक ने आपा खोकर किया हमला

घटनाक्रम के अनुसार, मोरोली ग्राम के निवासी धान सिंह भदौरिया खेरियातोर मोड़ के पास स्थित एक आटा चक्की पर करीब साढ़े सैंतीस किलो गेहूं की पिसाई कराने पहुंचे थे। शुक्रवार की शाम जब वे अपना आटा वापस लेने गए, तो मजदूरी के पैसों को लेकर चक्की मालिक पप्पू ओझा से उनकी अनबन हो गई। बताया जा रहा है कि संचालक पप्पू ओझा ने पिसाई के बदले 45 रुपये की मांग की थी, जबकि धान सिंह केवल 40 रुपये का भुगतान कर रहे थे। इसी महज 5 रुपये के अंतर को लेकर दोनों में मुंहजोरी शुरू हो गई। देखते ही देखते जुबानी जंग मारपीट में तब्दील हो गई और आवेश में आए चक्की संचालक ने ग्राहक के कान पर दांतों से जोरदार हमला कर दिया। वहां उपस्थित राहगीरों और ग्रामीणों ने किसी तरह बीच-बचाव कर पीड़ित को बचाया, मगर तब तक उसे गंभीर चोट आ चुकी थी।

पीड़ित के कान का निचला हिस्सा हुआ अलग, पुलिस ने दर्ज किया मामला

इस अमानवीय हमले में घायल धान सिंह के कान के निचले हिस्से का एक टुकड़ा कटकर अलग हो गया। गंभीर रूप से घायल अवस्था में पीड़ित तुरंत मेहगांव पुलिस थाने पहुंचा और आपबीती सुनाते हुए मामला दर्ज कराया। पुलिस ने भी घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। थाना प्रभारी महेश शर्मा ने बताया कि पुलिस द्वारा दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और पीड़ित की मेडिकल जांच रिपोर्ट आने के बाद उपलब्ध वैधानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी धाराएं जोड़ी जाएंगी। कानून के जानकारों का कहना है कि किसी को जानबूझकर गंभीर शारीरिक क्षति पहुंचाने के मामलों में चिकित्सीय रिपोर्ट सबसे अहम दस्तावेज होती है, जिसके आधार पर ही सजा तय होती है।

छोटी-छोटी बातों पर नियंत्रण खोता समाज, समाजशास्त्रियों ने जताई गहरी चिंता

इस दर्दनाक वाकये ने एक बार फिर सामाजिक व्यवहार और लोगों में घटते धैर्य पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे बेहद मामूली आर्थिक मसले भी अचानक भयानक हिंसा का रूप ले लेते हैं। समाजशास्त्रियों और स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि समकालीन परिवेश में लोगों के भीतर सहनशीलता की भारी कमी देखी जा रही है, जिसके चलते चंद रुपयों के विवाद में भी लोग एक-दूसरे की जान लेने पर आमादा हो जाते हैं। ऐसे संवेदनशील मामलों में हमेशा बातचीत और शांत दिमाग से समाधान ढूंढा जाना चाहिए, क्योंकि चंद मिनटों का बेलगाम गुस्सा किसी की जिंदगी बर्बाद कर सकता है और किसी को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है। फिलहाल इस अजीबोगरीब और खौफनाक मामले को लेकर पूरे भिंड अंचल में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं।

59 बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाकर खंडेलवाल ने दिया सहारा

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बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल से विधायक एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की प्रेरणा से संचालित एक अनूठी परोपकारी पहल के अंतर्गत जिले के 59 अनाथ और साधनहीन बच्चों के शिक्षण एवं उज्ज्वल भविष्य को संवारने का महती उत्तरदायित्व उठाया गया है। इस जनकल्याणकारी योजना के जरिए न केवल इन बेसहारा बच्चों की स्कूली शिक्षा का पूरा प्रबंध किया जा रहा है, बल्कि उनके आश्रित परिवारों को भी सुदृढ़ वित्तीय संबल प्रदान किया जा रहा है। ज्ञात हो कि पूर्व जननेता स्वर्गीय विजय कुमार खंडेलवाल की पुण्य स्मृति में स्थापित 'विजय सेवा न्यास' द्वारा 'बेसहारा को सहारा' नामक एक विशेष सेवा अभियान चलाया जा रहा है। इस मानवीय अभियान के तहत उन मासूम बच्चों को संबल दिया जा रहा है, जिनके सिर से गंभीर बीमारी, अचानक हुई दुर्घटना या किन्हीं अन्य दुखों के कारण उनके माता-पिता या संरक्षकों का साया हमेशा के लिए उठ गया है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में जहां इस अभियान के अंतर्गत 41 बच्चों को सहायता पहुंचाई गई थी, वहीं वर्तमान वर्ष 2026 में इस परोपकारी कार्य का दायरा बढ़ाते हुए हितग्राही बच्चों की संख्या 59 तक पहुंच चुकी है।

निजी स्कूलों की फीस का भुगतान और शैक्षणिक सामग्री के लिए वार्षिक वित्तीय पैकेज

इस परोपकारी योजना के व्यावहारिक स्वरूप के तहत निजी शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे जरूरतमंद बच्चों की संपूर्ण शिक्षण फीस का भुगतान सीधे न्यास द्वारा किया जा रहा है। इसके साथ ही, बच्चों को किताबों, कॉपियों, यूनिफॉर्म तथा अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्रियों की खरीद में कोई असुविधा न हो, इसके लिए अलग से नकद आर्थिक सहायता मुहैया कराई जा रही है। बच्चों की देखरेख करने वाले उनके वृद्ध दादा-दादी, नाना-नानी या अन्य परिजनों को भी एक निश्चित वार्षिक वित्तीय पैकेज दिया जा रहा है ताकि घरेलू तंगी के चलते किसी भी बालक या बालिका की पढ़ाई बीच में न छूटे। इसके अतिरिक्त, जो विद्यार्थी शासकीय विद्यालयों अथवा विभिन्न सरकारी छात्रावासों में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, उन्हें भी उनकी विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप अतिरिक्त वित्तीय मदद दी जा रही है।

घरेलू तंगी से अवरुद्ध हो रही थी शिक्षा और बच्चों को मिला जीवन संवारने का नया संबल

इस कल्याणकारी अभियान से लाभान्वित होने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों ने अत्यंत भावुक होते हुए बताया कि माता-पिता के असमय अवसान के बाद उपजे गहरे आर्थिक संकट के कारण बच्चों की आगे की पढ़ाई जारी रखना पूरी तरह असंभव प्रतीत हो रहा था। ऐसी घोर निराशा के समय विजय सेवा न्यास की इस समयोचित सहायता ने उनके जीवन में उम्मीद का एक नया दीया रोशन किया है। अनेक प्रभावित परिवारों ने इस मानवीय प्रयास की सराहना करते हुए इसे अपने बच्चों के अंधकारमय होते भविष्य के लिए एक वरदान और सबसे बड़ा ईश्वरीय सहारा बताया है।

शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में अनूठी मिसाल और स्थानीय निवासियों में सराहना का माहौल

संपूर्ण बैतूल जिले में यह सामाजिक सरोकार शिक्षा के प्रसार और पीड़ित मानवता की सेवा के क्षेत्र में एक बेहद अनुकरणीय एवं सकारात्मक मिसाल बनकर उभरा है। स्थानीय बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों का दृढ़ विश्वास है कि समाज के संपन्न और सक्षम राजनैतिक नेतृत्व द्वारा किए जाने वाले इस प्रकार के निःस्वार्थ प्रयास वास्तव में हाशिए पर खड़े अंतिम पंक्ति के बच्चों के जीवन में युगांतकारी परिवर्तन ला सकते हैं। लोगों का मानना है कि ऐसी निरंतर सहायता से ये बेसहारा बच्चे आगे चलकर देश के जिम्मेदार और आत्मनिर्भर नागरिक बनेंगे तथा समाज की मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा सकेंगे।

MD पाउडर के खिलाफ अभियान में बड़ी सफलता, हरदा पुलिस ने दबोचे दो आरोपी

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हरदा। जिले की स्थानीय पुलिस ने नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। मुखबिर और गश्त टीम की मुस्तैदी से पुलिस ने प्रतिबंधित एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग्स पाउडर के साथ दो शातिर तस्करों को रंगे हाथों दबोचा है। पकड़े गए आरोपियों में से एक स्थानीय जनपद पंचायत सदस्य का पति बताया जा रहा है। पुलिस ने तस्करों के कब्जे से कुल 54.76 ग्राम उच्च गुणवत्ता का एमडी पाउडर जब्त किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू ब्लैक मार्केट में अनुमानित कीमत करीब ₹5.5 लाख आंकी गई है।

कैदी ढाबे के पास संदिग्ध कार से बरामद हुआ ₹1.10 लाख का कैश

पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में कानून-व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए गुरुवार की रात पुलिस की एक विशेष टीम फोरलेन हाईवे पर पेट्रोलिंग (गश्त) कर रही थी। इसी दौरान कैदी ढाबे के समीप सड़क किनारे खड़ी एक संदिग्ध लग्जरी कार पर पुलिस कर्मियों की नजर पड़ी। संदेह के आधार पर जब टीम ने वाहन की घेराबंदी की और कार की सघन तलाशी ली, तो उसमें सवार दो व्यक्तियों के पास से भारी मात्रा में नशीला पाउडर बरामद हुआ।

पकड़े गए आरोपियों की शिनाख्त रामेश्वर मुडेल (47 वर्ष) और विनोद यादव (48 वर्ष) के रूप में की गई है। ड्रग्स के अलावा पुलिस ने आरोपियों की तलाशी लेने पर उनके पास से ₹1 लाख 10 हजार से अधिक की संदिग्ध नगद राशि भी बरामद की है, जिसे ड्रग्स की बिक्री की रकम माना जा रहा है।

पिछली सीट के नीचे छिपा था नशा, आरोपियों का है पुराना आपराधिक रिकॉर्ड

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक, विनोद यादव, हरदा जनपद पंचायत की मौजूदा सदस्य पूजा यादव का पति है। शातिर तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए कार की पिछली सीट के नीचे एक गुप्त केबिन बनाकर ड्रग्स के पैकेट को छिपा रखा था।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है कि पकड़े गए दोनों आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। इनके खिलाफ स्थानीय थानों में मारपीट, डराने-धमकाने और अन्य संगीन धाराओं के तहत पहले से ही कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने दोनों के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जेल भेज दिया है। अब पुलिस की विशेष टीम इनके पूरे ड्रग्स नेटवर्क और बैकवर्ड-फॉरवर्ड लिंकेज (सप्लायर और खरीदारों) की कुंडली खंगालने में जुट गई है, ताकि इस रैकेट की जड़ों को पूरी तरह से उखाड़ा जा सके।

परीक्षा घोटालों पर गुस्सा फूटा, जंतर-मंतर पर छात्रों का बड़ा प्रदर्शन

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नई दिल्ली। देश की प्रतिष्ठित परीक्षाओं में कथित तौर पर सामने आई धांधलियों, लगातार होने वाले पेपर लीक और युवाओं के भविष्य से जुड़े अन्य गंभीर मसलों पर जवाबदेही तय करने की पुरजोर मांग के साथ शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर एक बड़ा आंदोलन देखने को मिला। युवाओं के नेतृत्व वाले संगठन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के तत्वावधान में आयोजित इस दूसरे विशाल विरोध प्रदर्शन में देश भर से आए छात्रों और उनके समर्थकों का भारी हुजूम उमड़ा। प्रदर्शन की संवेदनशीलता को देखते हुए जंतर-मंतर और आसपास के समूचे इलाके में सुरक्षा के चाक-चौबंद बंदोबस्त किए गए थे, जिसके तहत भारी तादाद में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को मुस्तैद किया गया था। आक्रोशित छात्र अपने हाथों में विभिन्न नारों वाली तख्तियां थामे हुए सरकार से समूची परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी व दोषमुक्त बनाने तथा देश के छात्र समुदाय के अधिकारों की रक्षा करने से जुड़े तीखे सवालों के जवाब मांग रहे थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रबंधन की कथित प्रशासनिक खामियों और लचर व्यवस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए व्यवस्था परिवर्तन की आवाज बुलंद की।

संस्थापक अभिजीत दीपके की अनूठी अपील पर थाली और चम्मच बजाकर दर्ज कराया विरोध

इस अनूठे विरोध प्रदर्शन को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पहले ही एक विशेष अपील जारी की थी। उन्होंने आंदोलन में हिस्सा लेने वाले सभी युवाओं और नागरिकों से अपने-अपने घरों से 'थाली और चम्मच' साथ लाने का आग्रह किया था। दीपके के इसी आह्वान पर जंतर-मंतर पहुंचे हजारों छात्र अपने साथ थालियां और चम्मच लेकर आए और उन्हें एक सुर में जोर-जोर से बजाकर सोए हुए सिस्टम को जगाने का प्रयास किया। इस अनोखे शोर के बीच प्रदर्शनकारियों ने वर्तमान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की और कड़े नारे लगाए।

परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग और लगातार होते पेपर लीक से युवाओं में भारी आक्रोश

आंदोलनकारी छात्रों का मुख्य रूप से यह आरोप था कि देश की शीर्ष अकादमिक और प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता पूरी तरह भंग हो चुकी है, जिससे दिन-रात मेहनत करने वाले होनहार छात्रों का मनोबल टूट रहा है। पेपर लीक और परीक्षा केंद्रों पर होने वाली कथित सेटिंग जैसी अनियमितताओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को अधर में लटका दिया है। छात्रों ने दोटूक शब्दों में कहा कि जब तक सरकार परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय नहीं करती और इस पूरी प्रक्रिया में कड़े कानूनी सुधार लागू नहीं किए जाते, तब तक युवाओं का यह लोकतांत्रिक संघर्ष रुकने वाला नहीं है।

भारी सुरक्षा घेरे के बीच शांतिपूर्ण तरीके से दर्ज हुआ देश के छात्रों का तीखा प्रतिकार

हालाँकि प्रदर्शन में छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर था, लेकिन भारी पुलिस बल की मौजदूगी के कारण पूरा घटनाक्रम नियंत्रण में रहा। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड्स के भीतर ही रोके रखा और उन्हें प्रतिबंधित क्षेत्रों की तरफ बढ़ने की अनुमति नहीं दी। सीजेपी के बैनर तले जुटे युवा नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह केवल उनके आंदोलन का दूसरा चरण था और यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों को अनसुना किया, तो आने वाले दिनों में इस छात्र आंदोलन को राष्ट्रव्यापी रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

दिल दहला देने वाली वारदात, 8 साल की बच्ची की पीट-पीटकर हत्या का आरोप

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ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के अंतर्गत आने वाले पुरानी छावनी थाना क्षेत्र के बरा गांव में आठ साल की अबोध बच्ची अलीना की दर्दनाक हत्या का एक बेहद हृदयविदारक और सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। मासूम की जान किसी धारदार हथियार से नहीं, बल्कि बेरहमी से की गई बर्बर पिटाई के कारण गई है। मृतका के पोस्टमार्टम और चिकित्सकीय परीक्षण में उसके सिर से लेकर पैर तक शरीर के विभिन्न हिस्सों पर १० से अधिक गहरे और गंभीर अंदरूनी जख्मों के निशान पाए गए हैं। इस जघन्य कृत्य को संज्ञान में लेते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए मृतका के पड़ोस में रहने वाले मुख्य संदेही युवक आमीन खान को अपनी कस्टडी में ले लिया है और उससे घटनाक्रम को लेकर गहन पूछताछ शुरू कर दी है।

गुल्लक से चंद रुपये निकालने पर भड़का पड़ोसी का गुस्सा और कमरे में बंद कर की बेदम पिटाई

प्रारंभिक पुलिस तफ्तीश और स्थानीय चश्मदीदों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह पूरा विवाद शुक्रवार की शाम को उस वक्त शुरू हुआ जब अलीना खेलते-खेलते पड़ोस में रहने वाले आमीन खान के एकांत घर के भीतर दाखिल हो गई थी। आरोप है कि वहां रखी एक गुल्लक से मासूम ने कौतूहलवश कुछ रुपये निकाल लिए थे, जिसके बाद एक राहगीर ने बच्ची को उस घर के मुख्य द्वार के समीप देखा था। कुछ देर बाद जब परिजनों और आमीन ने बच्ची की खोजबीन की, तो वह पास की ही एक किराना दुकान पर शीतल पेय (कोल्ड ड्रिंक) पीती हुई पाई गई। जब उससे रुपयों के संबंध में पूछा गया तो मासूम ने बिना किसी डर के पैसे लेने की बात स्वीकार कर ली और चुराए गए रुपये भी तत्परता से वापस मिल गए।

रुपये वापस मिलने के बाद भी नहीं शांत हुआ आक्रोश और रात भर तड़पने के बाद बिस्तर पर दम तोड़ा

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि चोरी गए रुपये पूरी तरह वापस मिल जाने के बाद भी आरोपी आमीन खान का गुस्सा शांत नहीं हुआ और वह बदले की भावना से सुलगता रहा। आरोप है कि वह जबरन अलीना को अपने साथ एक एकांत कमरे में ले गया और दरवाजा अंदर से बंद कर उस पर लात-घूंसों व डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। प्रताड़ना इतनी भयानक थी कि जब वह बच्ची को उसके घर वापस छोड़ने आया, तो मासूम अलीना के पैर कांप रहे थे और वह सीधे खड़े होने की स्थिति में भी नहीं थी। दुर्भाग्यवश, पीड़ित परिवार के सदस्य उसकी शारीरिक स्थिति और अंदरूनी तकलीफ की गंभीरता को समय रहते भांप नहीं पाए और रात भर असहनीय शारीरिक दर्द से बिस्तर पर तड़पने के बाद अंततः शुक्रवार की काली रात को अलीना ने दम तोड़ दिया।

शुरुआती दौर में गुमराह करने की कोशिश नाकाम और फॉरेंसिक साक्ष्यों से खुला हत्या का राज

इस बेहद संवेदनशील मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) के विशेषज्ञों की टीम को मौके पर बुलाया और डॉक्टरों के एक विशेष पैनल के जरिए शव का पोस्टमार्टम संपन्न कराया। चिकित्सकीय रिपोर्ट में यह प्रामाणिक रूप से साफ हो गया कि अत्यधिक बेरहमी से की गई मारपीट के चलते बच्ची के शरीर के भीतर भारी रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) हुआ था, जिससे उसके आंतरिक नाजुक अंगों ने काम करना पूरी तरह बंद कर दिया और यही उसकी अकाल मृत्यु का मुख्य कारण बना। हालांकि, शुरुआत में कुछ स्थानीय तत्वों ने आरोपी को बचाने के उद्देश्य से पुलिस को यह कहकर गुमराह करने की कोशिश की थी कि आमीन ने केवल बच्ची को डराया-धमकाया था, परंतु घटनास्थल से मिले वैज्ञानिक साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने झूठ का पर्दाफाश कर दिया। पुरानी छावनी थाना प्रभारी के अनुसार, आरोपी के खिलाफ हत्या का संगीन मुकदमा दर्ज कर विधिक दंडात्मक कार्रवाई को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

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