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जालोर का 300 साल पुराना हनुमान मंदिर, अकाल में प्रकट हुई प्रतिमा से बसी आस्था की कहानी

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राजस्थान के जालोर जिले के आलासन गांव में स्थित 300 साल पुराना हनुमान मंदिर आस्था और चमत्कार की अनूठी मिसाल माना जाता है. मान्यता है कि भीषण अकाल के दौरान एक साधु के संकेत पर जाल के पेड़ के नीचे बजरंगबली की प्रतिमा प्रकट हुई, जिसके बाद ग्रामीणों ने पलायन का विचार त्याग दिया. आज 35 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा वाला यह मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रमुख केंद्र बन चुका है.

जालोर जिले के आलासन गांव में स्थित हनुमान जी का मंदिर लगभग 300 साल पुराना एक ऐतिहासिक और धार्मिक आस्था का केंद्र माना जाता है. यह मंदिर न सिर्फ स्थानीय लोगों की श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि जालोर की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और इसे चमत्कारी स्थल के रूप में भी देखते हैं. यहां हर मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़ रहती है, जब लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं. मंदिर परिसर में भक्तों की आस्था और भक्ति का माहौल हर समय देखने को मिलता है.

मान्यता के अनुसार, लगभग तीन शताब्दी पहले इस क्षेत्र में भीषण अकाल पड़ा था, जिससे हालात इतने बिगड़ गए कि पूरा गांव पलायन करने को मजबूर हो गया था. उस समय पानी और अनाज की भारी कमी के कारण लोगों के सामने जीवन यापन का संकट खड़ा हो गया था. इसी कठिन समय में इस स्थान पर एक ऐसी घटना हुई, जिसने गांव वालों की दिशा ही बदल दी और इस भूमि को आस्था का नया केंद्र बना दिया. यह घटना आज भी ग्रामीणों के बीच श्रद्धा और विश्वास की मिसाल के रूप में सुनाई जाती है.

किंवदंती है कि एक ग्रामीण को ‘जाल’ के पेड़ के नीचे एक साधु ने रोका और वहीं पर बजरंगबली की प्रतिमा के प्राकट्य की बात कही. साधु के इस संकेत को ग्रामीण ने गंभीरता से लिया और इस बात को पूरे गांव में बताया. इस घटना को ग्रामीणों ने ईश्वरीय संकेत माना और उन्होंने पलायन का विचार छोड़कर यहीं बसने का निर्णय लिया. लोगों का मानना है कि यह स्वयं हनुमान जी की कृपा थी, जिसने उन्हें संकट से बाहर निकलने का रास्ता दिखाया.

धीरे-धीरे यह स्थान श्रद्धा और विश्वास का बड़ा केंद्र बन गया. ग्रामीणों ने मिलकर यहां पूजा-अर्चना शुरू की और समय के साथ इस छोटे से स्थल का विकास होता गया. आसपास के गांवों से भी लोग यहां आने लगे, जिससे इसकी प्रसिद्धि बढ़ती चली गई. मंदिर में समय-समय पर धार्मिक आयोजन और भजन-कीर्तन भी होते हैं, जो इसे जीवंत बनाए रखते हैं. यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी समस्याओं के समाधान और मानसिक शांति के लिए प्रार्थना करते हैं.

आज आलासन हनुमान मंदिर एक भव्य स्वरूप में स्थापित है, जहां लगभग 35 फीट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है. मंदिर का वर्तमान स्वरूप वर्षों की आस्था और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है. यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि लोगों की आस्था, संघर्ष और विश्वास की जीवंत कहानी भी बयां करता है. यहां आने वाला हर व्यक्ति एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा और सुकून का अनुभव करता है.

राशिफल 21 जून 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा

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  • मेष राशि :- तनाव, उदर रोग, विवाद, लाभ, राजभय, पारिवारिक समस्या उलझनें पैदा करेंगी। 
  • वृष राशि :- शत्रुभय, शुभ मंगल कार्य में विरोध, मामले-मुकदमें में जीत की संभावना बनी रहेगी। 
  • मिथुन राशि :- कुसंगति से हानि, रोगभय, यात्रा व सामाजिक कार्यों में सावधानी अवश्य रखें। 
  • कर्क राशि :- पराक्रम, कार्य सिद्धी, व्यापार लाभ सामान्य हो सकता है, कार्य बन ही जायेंगे। 
  • सिंह राशि :- तनाव, प्रवास से बचें, विरोध चिन्ता, राजकार्य में प्रतिष्ठा मिल सकती है। 
  • कन्या राशि :- भूमि लाभ, स्त्री सुख, हर्ष, प्रगति होगी, स्थिति में सुधार होगा, लाभ की गति बढ़ेगी। 
  • तुला राशि :- प्रगति, वाहन भय, भूमि लाभ, कलह, कुछ अच्छे कार्य भी होंगे, लाभ होगा। 
  • वृश्चिक राशि :- कार्य सिद्धी, विरोध, लाभ से हर्ष होगा, व्यय होगा, व्यापार में सुधार कार्य होगा। 
  • धनु राशि :- यात्रा में हानि, मातृ-पितृ कष्ट, व्यय, उन्नति में कुछ कमी, यात्रा व्यवस्थित होगी। 
  • मकर राशि :- शुभ कार्य होंगे, वाहनादि रोगभय, आर्थिक कार्यों में सुधार होगा ध्यान अवश्य दें। 
  • कुंभ राशि :- अभीष्ट सिद्धी, राजभय, कार्य बाधा दूर होगी, सामाजिक कार्यों से लाभ होगा ध्यान दें। 
  • मीन राशि :- अल्प हानि, रोगभय, सम्पत्ति लाभ, राजकार्य में विलम्ब तथा परेशानी बढ़ेगी। 
     

अमित शाह ने पुराने दौर को याद कर साधा निशाना, कहा- तब धमाके होते थे और सरकार मौन रहती थी

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मुंबई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक व्यापारिक व सामाजिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत यूपीए (UPA) सरकार की आंतरिक सुरक्षा नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आयोजित इस भव्य समारोह के दौरान शाह ने कहा कि करीब 12 वर्ष पहले जब केंद्र में पूर्ववर्ती गठबंधन की सरकार थी, तब देश के विभिन्न हिस्सों में आए दिन सिलसिलेवार बम धमाके और आतंकवादी घटनाएं होती थीं। परंतु, तत्कालीन नेतृत्व और प्रधानमंत्री इन गंभीर राष्ट्रीय संकटों पर पूरी तरह मौन साधे रहते थे, जिससे देश की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर दिखाई देती थी।

उरी और पुलवामा का बदला: सर्जिकल व एयर स्ट्राइक से दिया करारा जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार की रक्षा और रणनीतिक नीतियों को रेखांकित करते हुए अमित शाह ने कहा कि साल 2014 के बाद देश की सुरक्षा नीति में एक युगांतकारी परिवर्तन आया है। उन्होंने जोर देकर कहा:

  • त्वरित सैन्य कार्रवाई: पीएम मोदी के कार्यकाल के दौरान जब भी आतंकवादियों ने उरी, पुलवामा या पहलगाम जैसी जगहों पर भारतीय सीमाओं और जवानों को निशाना बनाने का दुस्साहस किया, तब भारत ने सीमा पार जाकर 'सर्जिकल स्ट्राइक' और 'एयर स्ट्राइक' जैसी ऐतिहासिक सैन्य कार्यवाहियों के जरिए दुश्मनों को उनकी ही भाषा में करारा जवाब दिया।

  • आतंक विरोधी अभियान: इसके साथ ही आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे कड़े कदमों ने देश विरोधी ताकतों के हौसले पूरी तरह पस्त कर दिए हैं।

गोला-बारूद की कमी से मिसाइल युग तक: सशस्त्र बलों का हुआ आधुनिकीकरण

गृह मंत्री ने रक्षा क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी सरकार के तहत भारतीय सशस्त्र बलों (थलसेना, वायुसेना और नौसेना) का व्यापक स्तर पर आधुनिकीकरण किया गया है। उन्होंने कहा, "देश में एक ऐसा दौर भी था जब हमारी सेनाओं के लिए बुनियादी गोलियां और छोटे हथियार तक भारत में नहीं बनते थे और हमें विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन आज मेक इन इंडिया (Make in India) के तहत देश के भीतर ही अत्याधुनिक मिसाइलें, लड़ाकू विमान और भारी सैन्य साजो-सामान तैयार किए जा रहे हैं।"

कश्मीर में शांति, पूर्वोत्तर सुरक्षित और नक्सलवाद हुआ बीते दिनों की बात

देश के आंतरिक सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा करते हुए अमित शाह ने दावा किया कि वर्तमान सरकार की प्रभावी और जीरो-टॉलरेंस (शून्य सहिष्णुता) नीति के कारण सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी नेटवर्क की कमर पूरी तरह तोड़ दी है और वहां अब अमन-चैन का माहौल है। इसके अतिरिक्त, पूर्वोत्तर (नॉर्थ-ईस्ट) के राज्य अब उग्रवाद से मुक्त होकर शांति और विकास की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। वहीं, कभी देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जाने वाला नक्सलवाद अब पूरी तरह इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह गया है।

दिल्ली में मेट्रो गार्ड हत्याकांड: योगा एक्सप्रेस से भाग रहे 8 आरोपी मुजफ्फरनगर में गिरफ्तार

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दिल्ली। दिल्ली के शाहदरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ने के दौरान हुए मामूली विवाद में मेट्रो रेल के एक सुरक्षा गार्ड की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस जघन्य वारदात को अंजाम देने के बाद सभी हमलावर 'योगा एक्सप्रेस' में सवार होकर कानून की गिरफ्त से भागने की फिराक में थे। हालांकि, मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन पर राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने मुस्तैदी दिखाते हुए घेराबंदी की और सभी आठ आरोपियों को दबोच लिया। प्रारंभिक पूछताछ के बाद मुजफ्फरनगर पुलिस ने आरोपियों को दिल्ली पुलिस के सुपुर्द कर दिया है। बताया जा रहा है कि आरोपी इस खूनी खेल के बाद उत्तराखंड के देहरादून या ऋषिकेश के वनांचलों में छिपने की योजना बना रहे थे।

ट्रेन में चढ़ने के विवाद में सुरक्षा गार्ड को मरणासन्न होने तक पीटा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम खेकड़ा के निवासी पंकज धामा (पुत्र राजेंद्र धामा) दिल्ली मेट्रो में बतौर सुरक्षा गार्ड तैनात थे। शुक्रवार की रात अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद वह घर वापस लौटने के लिए शनिवार की सुबह करीब 7 बजे पुरानी दिल्ली के शाहदरा रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। स्टेशन पर ट्रेन के सामान्य डिब्बे में सवार होने के दौरान कुछ स्थानीय युवकों से उनकी कहासुनी और धक्का-मुक्की हो गई।

देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि युवकों ने कानून अपने हाथ में ले लिया और गार्ड पंकज धामा पर लात-घूंसों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। आरोपी उन्हें मरणासन्न हालत में प्लेटफॉर्म पर छोड़कर मौके से फरार हो गए। रेलवे पुलिस ने तुरंत घायल पंकज को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने स्टेशन परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर हमलावरों की पहचान की।

उत्तर प्रदेश रेलवे पुलिस को मिला अलर्ट, मुजफ्फरनगर में हुई घेराबंदी

जांच के दौरान तकनीकी इनपुट से पता चला कि हत्या के सभी आरोपी हरिद्वार-ऋषिकेश जाने वाली योगा एक्सप्रेस में सवार हो चुके हैं। इसके बाद दिल्ली रेलवे पुलिस ने तुरंत उत्तर प्रदेश के सभी अलर्ट स्टेशनों को सूचना भेजी।

मुजफ्फरनगर जीआरपी थाना प्रभारी कुलदीप शर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही योगा एक्सप्रेस में तैनात सुरक्षा एस्कॉर्ट टीम से संपर्क साधा गया। जैसे ही ट्रेन मुजफ्फरनगर स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर आकर रुकी, जीआरपी ने ट्रेन के जनरल कोच को चारों तरफ से घेर लिया और यात्रा कर रहे सभी आठ मुख्य आरोपियों को कस्टडी में ले लिया।

पकड़े गए सभी आरोपी दिल्ली के निवासी, हत्या का मुकदमा दर्ज

जीआरपी के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों की पहचान रोहित (पुत्र कैलाश), सागर (पुत्र पप्पू), हर्षित (पुत्र हरवीर), निशांत (पुत्र महेंद्र), जीवन (पुत्र दिलीप), प्रिंस (पुत्र धर्मेंद्र), आकाश (पुत्र सुरेंद्र) और रोहित (पुत्र राजू) के रूप में हुई है। ये सभी आरोपी दिल्ली के शाहदरा अंतर्गत आने वाली न्यू संजय अमर कॉलोनी, विश्वास नगर के निवासी हैं।

स्थानीय स्तर पर कागजी औपचारिकताएं और पूछताछ पूरी करने के बाद मुजफ्फरनगर पुलिस ने सभी आरोपियों को दिल्ली जीआरपी की स्पेशल टीम के हवाले कर दिया, जो उन्हें अपने साथ दिल्ली ले गई है। इस हत्याकांड के संदर्भ में पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के जीआरपी थाने में आरोपियों के खिलाफ हत्या (मर्डर) की संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

कोलकाता में योग दिवस पर पीएम मोदी करेंगे योगाभ्यास का नेतृत्व

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कोलकाता में 10 लाख लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ योगाभ्यास करेंगे

कोलकाता । कोलकाता में करीब 10 लाख लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ योगाभ्यास करेंगे । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में रविवार को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम में नया रिकॉर्ड बन सकता है। कोलकाता में करीब 10 लाख लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ योगाभ्यास करेंगे। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने यह जानकारी दी। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम के बारे में सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा, "यह पहली बार है जब पश्चिम बंगाल के कोलकाता में यह इवेंट हो रहा है और यहां हमारे प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए बहुत उत्साह है।" उन्होंने कहा कि आज, 20 जून को एक बड़ा कार्निवल हुआ । एक बड़ा ड्रोन शो भी हुआ । वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की कोशिश में लगभग 500 नावें एक साथ आएंगी। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने यह भी बताया कि रविवार सुबह रधानमंत्री यहां इस इवेंट की अगुवाई करेंगे। इस जगह पर रविवार को 35 हजार लोग इकट्ठा होंगे। वहीं, पूरे कोलकाता में 10 लाख लोग प्रधानमंत्री मोदी के साथ योग करेंगे। पोर्टल पर अब तक 7 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराए हैं। रात तक यह संख्या 10 लाख के करीब तक पहुंच जाएगी। आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव मोनालिसा दास ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हर साल एक नई जगह पर मनाया जाता है, खासकर इसका मुख्य कार्यक्रम। हर राज्य बढ़-चढ़कर इसे अपने-अपने तरीके से मनाता है। इस साल भी कई नई पहल की गई हैं। जैसा कि आपने देखा होगा, शुक्रवार को कोलकाता में चार जगहों पर 'रन फॉर योग' का आयोजन किया गया था। इसमें 10,000 लोगों, बच्चों, बड़ों और महिलाओं ने हिस्सा लिया और दौड़ लगाई। इसी तरह अन्य जिलों में भी 'रन फॉर योग' का आयोजन हुआ।" संयुक्त सचिव मोनालिसा दास ने बताया कि शनिवार को एक ड्रोन शो का आयोजन हुआ । फिर रविवार को कोलकाता के हर कौने में योग दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर योग गुरु और योग इन्फ्लुएंसर उमंग त्यागी ने कहा, "इस बार प्रधानमंत्री मोदी खुद हमारे साथ योग करेंगे। मुझे गर्व है कि मैं उनके साथ यहां कोलकाता में योग करूंगा। जब आपका नेता आगे बढ़कर ऐसा कुछ करता है, तो यह आपको भी अंदर से वैसा ही करने के लिए प्रेरित करता है।" उन्होंने कहा कि इस बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम 'स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग' बेहद खास है।

दुनिया का सबसे सुरक्षित वीवीआईपी विमान? जानिए ट्रंप के नए एयर फोर्स वन की विशेषताएं

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वाशिंगटन। वैश्विक महाशक्ति अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन के समीप स्थित एंड्रयूज एयरफोर्स बेस पर अमेरिकी राष्ट्रपतियों के आधिकारिक उपयोग के लिए तैयार किए गए नए 'एयर फोर्स वन' विमान का अनावरण किया है। यह विमान पहले खाड़ी देश कतर के राजपरिवार के पास बोइंग बिजनेस जेट के रूप में मौजूद था, जिसे बाद में कतर सरकार द्वारा अमेरिका को एक राजकीय सौगात के रूप में भेंट किया गया। अब सभी आवश्यक सुरक्षा जांचों और बदलावों के बाद इसे राष्ट्रपति के मुख्य आधिकारिक विमान के रूप में बेड़े में शामिल करने की अंतिम तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।

विमान का प्रदर्शन करते हुए ट्रंप ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे वैश्विक मंच पर अमेरिका के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक और दुनिया का सबसे शानदार विमान बताया। उन्होंने दावा किया कि यह 'उड़ता हुआ व्हाइट हाउस' तकनीकी और सामरिक दृष्टि से अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के विमानों की तुलना में कहीं अधिक प्रभावशाली है।

कैसा है नया एयर फोर्स वन और क्या हैं इसकी खूबियां?

अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन रिपोर्टों के अनुसार, इस नए विमान में अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा और गरिमा के अनुकूल कई बड़े तकनीकी व संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं:

  • रंग और रूप में बदलाव: दशकों से एयर फोर्स वन की पहचान रहे पारंपरिक हल्के नीले रंग की जगह अब इस नए विमान को गहरे नीले, चटख लाल और सफेद रंग की आधुनिक थीम दी गई है। विमान के मुख्य हिस्से पर राष्ट्रपति की आधिकारिक मुहर और पिछले हिस्से (पूंछ) पर एक विशाल अमेरिकी ध्वज अंकित किया गया है।

  • विशाल आकार (बोइंग 747-8आई): यह विमान वर्तमान में उपयोग हो रहे राष्ट्रपति के विमानों से लगभग 18 फीट अधिक लंबा है। इसके विंगस्पैन (पंखों का फैलाव) में भी 30 फीट की बढ़ोतरी की गई है, जिससे इसका केबिन काफी चौड़ा हो गया है। इसी विशालता के कारण विशेषज्ञ इसे 'पैलेस इन द स्काई' (आसमान का महल) कह रहे हैं। सामरिक क्षेत्र में इसे औपचारिक रूप से 'वीसी-25बी ब्रिज विमान' का नाम दिया गया है।

  • अभेद्य सुरक्षा चक्र: इस विमान के पंखों में अत्याधुनिक 'मिरर-बॉल डिफेंस सिस्टम' लगाया गया है, जो दुश्मन की इन्फ्रारेड गाइडेड मिसाइलों को आसानी से चकमा दे सकता है। इसके अलावा इसमें 'ईसीएम डिफेंस सिस्टम' (इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर) भी मौजूद है, जो दुश्मन के रडार को जाम करने में सक्षम है। यह विमान 1050 किमी/घंटा की तीव्र रफ्तार से उड़ान भर सकता है।

  • लागत और आलीशान सुविधाएं: कतर से मिले इस विमान को वीवीआईपी सुरक्षा मानकों के अनुरूप अपग्रेड करने में अमेरिकी सरकार को करीब 40 करोड़ डॉलर (लगभग ₹3300 करोड़ से अधिक) की लागत आई है। विमान के भीतर एक अत्याधुनिक मेगा किचन और डाइनिंग रूम बनाया गया है, जहां एक बार में 2,000 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की जा सकती है। साथ ही राष्ट्रपति के लिए एक विशेष सुइट तैयार किया गया है, जिसमें निजी ड्रेसिंग रूम, आधुनिक शौचालय और एक जिम भी शामिल है। इसके अलावा, ट्रंप ने खुलासा किया कि इसमें चौबीसों घंटे हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के लिए स्पेसएक्स की स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा भी जोड़ी गई है।

आखिर क्यों पड़ी नए अस्थायी 'ब्रिज विमान' की जरूरत?

वर्तमान में अमेरिकी राष्ट्रपति जिन दो वीसी-25ए विमानों (बोइंग 747-200बी मॉडल) का उपयोग करते हैं, वे 1990 के दशक की शुरुआत से सेवा में हैं। लगभग 35 वर्ष पुराने होने के कारण इन विमानों के रखरखाव और तकनीकी मरम्मत में अब काफी अधिक समय और खर्च होने लगा था। बोइंग कंपनी द्वारा नए स्थायी विमानों की डिलीवरी में हो रही देरी को देखते हुए अमेरिकी वायुसेना ने 'ब्रिज प्रोग्राम' की शुरुआत की।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब तक 2028 तक पूरी तरह से नए वीसी-25बी स्थायी विमान बनकर तैयार नहीं हो जाते, तब तक राष्ट्रपति के पास उड़ान भरने के लिए हमेशा एक सुरक्षित, विश्वसनीय और आधुनिक विमान उपलब्ध रहे। कतर से मिला यह विमान इसी अस्थायी कमी (ब्रिज) को पूरा करने का काम करेगा।

विदेशी उपहार को लेकर अमेरिका में क्यों छिड़ा है विवाद?

ट्रंप द्वारा किसी विदेशी सरकार से मिले विमान को राष्ट्रपति के मुख्य बेड़े में शामिल करने के फैसले पर अमेरिका के राजनीतिक गलियारों और सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। कुछ रिपब्लिकन नेताओं और रक्षा विश्लेषकों ने सवाल उठाए हैं कि विदेशी धरती से आया विमान तकनीकी और खुफिया सुरक्षा के लिहाज से देश के राष्ट्राध्यक्ष के लिए कितना सुरक्षित हो सकता है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में विमान के कोने-कोने की तकनीकी जांच और जासूसी उपकरणों (बग्स) की स्क्रूटनी के लिए बेहद कड़े प्रोटोकॉल की आवश्यकता होती है। हालांकि, इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने तर्क दिया कि इतने अत्याधुनिक विमान को मुफ्त में हासिल करना देश के खजाने के हित में है और इससे पुराने विमानों के बेड़े पर पड़ रहा अत्यधिक दबाव कम होगा।

अमेरिकी वायुसेना का क्या है रुख?

अमेरिकी वायुसेना ने 19 जून को जारी अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि यह वीसी-25बी ब्रिज एयरक्राफ्ट अब 'प्रेसिडेंशियल एयरलिफ्ट ग्रुप' को सौंप दिया गया है और इसकी शुरुआती परिचालन उड़ानें शुरू हो चुकी हैं। वायुसेना के सचिव ट्रॉय मिंक और वायुसेना प्रमुख जनरल केन विल्सबैक ने संयुक्त रूप से कहा कि राष्ट्रपति की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया गया है।

विशेषज्ञों की एक अंतर-एजेंसी टीम ने इस विमान के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल विकसित किए हैं। इन कमीशनिंग उड़ानों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि विमान मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सेनाध्यक्ष और राष्ट्राध्यक्ष के रूप में राष्ट्रपति की तीनों संवैधानिक भूमिकाओं की कसौटियों पर पूरी तरह खरा उतरे। वायुसेना के प्रवक्ता ने यह भी साफ किया कि पुराने वीसी-25ए विमानों को अभी रिटायर नहीं किया जाएगा; वे भी मिशन की आवश्यकताओं के आधार पर नए विमान के साथ सेवा में बने रहेंगे।

स्वतंत्रता दिवस पर फ्लाईपास्ट और अंतरराष्ट्रीय दौरों की योजना

इस नए एयर फोर्स वन विमान को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप की योजनाएं काफी बड़ी हैं। आगामी महीने में तुर्किये में आयोजित होने वाले नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन और नवंबर में चीन में होने वाले एपेक (APEC) शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति इसी नए विमान से अंतरराष्ट्रीय यात्रा करेंगे। इसके साथ ही, उन्होंने घोषणा की है कि आगामी 4 जुलाई को अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस के भव्य समारोह के दौरान यह अत्याधुनिक विमान वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के ऊपर होने वाले पारंपरिक फ्लाईपास्ट का नेतृत्व करेगा।

राम मंदिर कैंप कार्यालय विवाद में महंत का दावा, ‘सेवा भाव से दी थी जगह’

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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि परिसर से जुड़े कथित वित्तीय विवादों और दानपात्र से जुड़े आरोप-प्रत्यारोप के बीच राम कचहरी चारों धाम मंदिर के पीठाधीश्वर एवं सरयू नित्य आरती समिति के अध्यक्ष महंत शशिकांत दास ने इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने सेवानिवृत्त इंजीनियर दीनानाथ वर्मा द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों से खुद को पूरी तरह अलग और अनभिज्ञ बताते हुए कहा कि उनका इस मामले से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सरोकार नहीं है। महंत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर अस्थायी कैंप कार्यालय के सुचारू संचालन के लिए अपना परिसर पूरी तरह निःशुल्क (मुफ्त) उपलब्ध कराया था।

प्रशासन और ट्रस्ट के अनुरोध पर दिया था नवनिर्मित भवन, नहीं लिया कोई किराया

महंत शशिकांत दास ने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि जब राम मंदिर निर्माण की शुरुआती प्रक्रिया चल रही थी, तब तत्कालीन जिलाधिकारी (डीएम) अनुज झा, तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उनसे संपर्क किया था। उनके विशेष आग्रह पर उन्होंने लोकहित और सेवा भाव के उद्देश्य से राम कचहरी चारों धाम मंदिर परिसर में स्थित अपना नया बना हुआ भवन ट्रस्ट के कार्यों के लिए सौंप दिया था। इस सहयोग के बदले उन्होंने कभी भी ट्रस्ट से कोई किराया, पारिश्रमिक या वित्तीय लाभ स्वीकार नहीं किया।

महंत ने आगे बताया कि कुछ समय तक कार्य संचालित होने के बाद जब इस कैंप कार्यालय को रामनिवास परिसर में स्थानांतरित (शिफ्ट) कर दिया गया, तब ट्रस्ट ने उनके भवन का उपयोग करना बंद कर दिया था। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि वह शिकायतकर्ता दीनानाथ वर्मा नाम के किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते हैं और न ही कभी उनसे कोई मुलाकात हुई है। ऐसे में निर्माण कार्यों की आड़ में हुई कथित कमीशनखोरी या वित्तीय विसंगतियों के दावों के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

क्या हैं सेवानिवृत्त इंजीनियर द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप?

गौरतलब है कि राम मंदिर निर्माण के शुरुआती दौर से जुड़े विवादों के बीच हाल ही में एक नया प्रशासनिक विवाद सामने आया है। मंदिर निर्माण कार्यों की तकनीकी निगरानी से जुड़े रहे रिटायर्ड इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने इंटरनेट मीडिया पर साझा किए गए एक साक्षात्कार में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर उंगली उठाई है। इससे पूर्व टिन्नू यादव नामक व्यक्ति ने भी ट्रस्ट के एक शीर्ष पदाधिकारी पर इसी तरह के सवाल खड़े किए थे।

दीनानाथ वर्मा ने अपने दावों में आरोप लगाया है कि राम मंदिर परिसर के भीतर विभिन्न प्रशासनिक कार्यालयों के निर्माण के दौरान एल्युमिनियम फिटिंग का काम करने वाले एक स्थानीय ठेकेदार से कथित तौर पर 40 फीसदी कमीशन की मांग की गई थी। उनका यह भी संगीन आरोप है कि इस अवैध कमीशन की भरपाई करने के उद्देश्य से ही संबंधित कार्य का सरकारी बिल भी वास्तविक लागत से 40 प्रतिशत तक अधिक बढ़ाकर तैयार करवाया गया था। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर अयोध्या के संत समाज और प्रशासनिक गलियारों में तीखी चर्चाएं चल रही हैं।

आनंदीबेन पटेल का निर्देश, आयोग चयनित प्राचार्यों पर मनमानी नहीं चलेगी

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बरेली। उत्तर प्रदेश के राजकीय व राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रोहिलखंड विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले प्रतिष्ठित बरेली कॉलेज की प्रबंध समिति (मैनेजमेंट कमेटी) को एक बड़ा झटका दिया है। कुलाधिपति ने कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ओपी राय की परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन पीरियड) को आगे बढ़ाने के प्रबंध समिति के विवादित निर्णय को पूरी तरह से गैर-कानूनी और शून्य घोषित करते हुए निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही, राजभवन ने इस पूरे प्रकरण में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह द्वारा पूर्व में लिए गए निर्णय को वैधानिक मानते हुए उस पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।

प्रबंध समिति की कार्रवाई को बताया दुर्भावनापूर्ण और नियम विरुद्ध

मामले के विवरण के अनुसार, प्रो. ओपी राय के सेवाकाल के संदर्भ में कॉलेज की प्रबंध समिति ने नियमों को ताक पर रखकर, अत्यंत अनियमित और गैर-विधिक (अवैध) तरीके से उनकी परिवीक्षा अवधि को दोबारा एक वर्ष के लिए विस्तारित करने का प्रयास किया था।

शैक्षणिक नियमावली और प्रशासनिक कानूनों के मुताबिक, किसी भी अशासकीय सहायता प्राप्त कॉलेज की प्रबंध समिति के पास उच्च शिक्षा सेवा आयोग द्वारा विधिवत चयनित होकर आए स्थायी प्राचार्य की परिवीक्षा अवधि में फेरबदल करने या उसे बढ़ाने का कोई कानूनी अधिकार सुरक्षित नहीं है। इस प्रकार की एकतरफा कार्रवाइयों का एकमात्र उद्देश्य संस्था के प्रशासनिक प्रमुख (प्राचार्य) को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना और उनके दैनिक शैक्षणिक कार्यों में अनुचित गतिरोध पैदा करना होता है।

कुलपति के फैसले पर राजभवन की अंतिम स्वीकृति

इस प्रशासनिक विवाद को देखते हुए रोहिलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने 2 नवंबर 2023 को ही एक आधिकारिक आदेश जारी कर दिया था। कुलपति ने अपने आदेश में बरेली कॉलेज प्रबंध समिति के इस कृत्य को पूरी तरह से मनमाना, विधि-विरुद्ध और अधिकार क्षेत्र से बाहर पाते हुए तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया था।

अब देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद (राज्यपाल) द्वारा 11 जून को जारी नवीनतम आदेश के जरिए कुलपति के उस साहसिक फैसले को न्यायसंगत ठहराया गया है। इस ऐतिहासिक फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन सदैव अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले महाविद्यालयों की शैक्षणिक स्वायत्तता, स्थापित नियमों की अक्षरशः पालना और प्राचार्यों की गरिमा व अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह से संकल्पित है।

प्रबंधकीय दबाव के चलते प्राचार्यों का इस्तीफा एक गंभीर चिंता

उद्यमी और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा का विषय है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश शासन द्वारा उच्च शिक्षा सेवा आयोग के माध्यम से प्रदेश भर के विभिन्न महाविद्यालयों में लगभग 290 योग्य प्राचार्यों की नियुक्तियां की गई थीं। परंतु, यह एक कड़वी हकीकत है कि इनमें से करीब 40 से 50 फीसदी प्राचार्यों को स्थानीय प्रबंधन समितियों की आंतरिक राजनीति, अनावश्यक हस्तक्षेप, अनुचित दबाव और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। इसी असहज वातावरण और विभिन्न व्यक्तिगत व प्रशासनिक कारणों के चलते कई प्राचार्यों को समय से पहले ही अपने गरिमामयी पदों से त्यागपत्र (इस्तीफा) देने के लिए विवश होना पड़ा है। राजभवन का यह ताजा फैसला भविष्य में प्राचार्यों के कार्यस्थल की सुरक्षा के लिहाज से एक नजीर साबित होगा।

मंदिर में दर्दनाक हादसा, छत गिरने से 30-40 श्रद्धालु मलबे में फंसे

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परभणी। महाराष्ट्र के परभणी जिले से आज शनिवार, 20 जून को एक बेहद हृदयविदारक और भीषण हादसे की खबर आई है। यहां स्थित प्रसिद्ध मारुति (हनुमान) मंदिर परिसर में अचानक सभा मंडप की कंक्रीट की छत (स्लैब) भरभराकर नीचे गिर गई। दुर्घटना के समय शनिवार का पावन दिन होने के कारण मंदिर परिसर के भीतर भगवान के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद थी। छत के अचानक ढहने से चारों तरफ चीख-पुकार मच गई और मलबे के विशाल ढेर में लगभग 30 से 40 श्रद्धालुओं के मलबे में दबे होने की बेहद चिंताजनक बात सामने आई है। इस अप्रत्याशित और भयानक तबाही के चलते पूरे धार्मिक स्थल पर अफरा-तफरी और दहशत का माहौल निर्मित हो गया है, जिसमें कई श्रद्धालुओं को गंभीर चोटें आई हैं। यद्यपि प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस महकमे की ओर से अभी तक इस हादसे में हताहत होने वाले या जान गंवाने वाले लोगों की सटीक और आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं की गई है।

यशवाड़ी गांव के हनुमान मंदिर में दोपहर को हुआ हादसा, ३0-४0 भक्तों के दबे होने की आशंका

यह भीषण त्रासदी परभणी जिले के अंतर्गत आने वाले यशवाड़ी गांव के हनुमान मंदिर में घटित हुई। भौगोलिक दृष्टि से यह सुदूर गांव छत्रपति संभाजीनगर से तकरीबन 190 किलोमीटर की दूरी पर मानवत रोड पर स्थित है। स्थानीय प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, शनिवार की दोपहर करीब 3:30 बजे जब मंदिर का मुख्य हॉल यानी 'सभा-मंडप' श्रद्धालुओं से पूरी तरह खचाखच भरा हुआ था, तभी अचानक उसकी ऊपरी छत का एक बहुत बड़ा हिस्सा ढह गया। चूंकि शनिवार का दिन पवनपुत्र हनुमान जी की आराधना के लिए विशेष माना जाता है, इसलिए सामान्य दिनों की तुलना में आज वहां पर बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित भक्तों का जमावड़ा काफी अधिक था। अचानक हुए इस वज्रपात से किसी को भी संभलने या भागने का तनिक भी अवसर नहीं मिल सका।

प्रशासनिक अमला और पुलिस बल मौके पर तैनात, अब तक २५ घायलों को निकाला गया बाहर

विनाशकारी हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन, एम्बुलेंस और जिला आपदा प्रबंधन (राहत एवं बचाव दल) की टीमें बिना कोई वक्त गंवाए तुरंत घटना स्थल पर पहुंच गईं। युद्ध स्तर पर शुरू किए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत भारी पत्थरों और मलबे को हटाकर नीचे दबे हुए जिंदगी की जंग लड़ रहे लोगों को बाहर निकालने की कोशिशें की जा रही हैं। एक प्रशासनिक अधिकारी ने प्रगति रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि अब तक मलबे के नीचे से अत्यंत मुस्तैदी के साथ लगभग 25 से अधिक लोगों को सुरक्षित या घायल अवस्था में बाहर निकाला जा चुका है। घटना स्थल पर खड़ी दर्जनों एम्बुलेंस के जरिए इन सभी घायलों को बिना देरी किए नजदीकी सरकारी और निजी चिकित्सालयों में उपचार हेतु रवाना किया जा रहा है।

मलबे के भीतर फंसे लोगों की सटीक संख्या की खोज जारी, अस्पताल हाई अलर्ट पर

फिलहाल राहत और बचाव दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे के नीचे दबे अन्य संभावित लोगों की खोज करना है, क्योंकि अभी तक यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित नहीं हो सका है कि कुल कितने लोग उस भारी भरकम स्लैब के नीचे पूरी तरह फंसे रह गए हैं। मलबे के भीतर फंसे कुछ लोगों की स्थिति अत्यंत नाजुक बताई जा रही है। जिला चिकित्सालय और आसपास के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को हाई अलर्ट पर रखते हुए डॉक्टरों की विशेष टीमों को तैनात किया गया है। स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस के जवान मिलकर हाथों तथा मशीनों की सहायता से पत्थरों को हटाने में जुटे हैं, ताकि समय रहते हर एक कीमती जान को बचाया जा सके। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे परभणी अंचल को गहरे शोक और चिंता में डुबो दिया है।

पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, राष्ट्रपति मुर्मु के गांव को मिलेगा ‘सूर्यग्राम’ का दर्जा

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भुवनेश्वर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ओडिशा के मयूरभंज जिले के अंतर्गत आने वाले रायरंगपुर में आयोजित एक भव्य राज्यस्तरीय समारोह के मंच से ऐतिहासिक घोषणा की। प्रधानमंत्री ने एलान किया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के पैतृक गांव पहाड़पुर की सूरत जल्द ही पूरी तरह बदलने वाली है और इसे एक आदर्श ‘सूर्यग्राम’ के रूप में तब्दील किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत गांव के हर एक घर को सौर ऊर्जा (सोलर एनर्जी) पर आधारित अत्याधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस किया जाएगा। पीएम मोदी ने आश्वस्त किया कि इस योजना पर धरातल पर बहुत जल्द काम शुरू कर दिया जाएगा और सबसे बड़ी बात यह है कि स्थानीय ग्रामीणों को इसका पूरा लाभ बिना किसी शुल्क के (निशुल्क) प्रदान किया जाएगा। ओडिशा में भाजपा सरकार के कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष उत्सव को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य की शुरुआत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को उनके जन्मदिवस की आत्मीय शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

मयूरभंज की माटी की बेटी सर्वोच्च पद पर आसीन, विद्यालय के बच्चों ने राष्ट्रपति को बताया अपनी मां

जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने भावुक स्वर में कहा कि मयूरभंज की माटी की बेटी आज हमारे राष्ट्र के सर्वोच्च संवैधानिक पद को सुशोभित कर रही हैं, और ऐसे में उनके गृह जनपद आकर उन्हें जन्मदिन की बधाई देना उनके स्वयं के लिए बेहद गर्व और परम सौभाग्य का विषय है। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु ने इस सुदूर अंचल में शिक्षा की अलख जगाने और शैक्षणिक विकास के लिए जो अमूल्य योगदान दिया है, वह पूरे देश के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। अपने प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति द्वारा स्थापित किए गए विद्यालय का भी अवलोकन किया और वहां पढ़ रहे छात्र-छात्राओं से आत्मीय संवाद स्थापित किया। प्रधानमंत्री ने मंच से साझा किया कि बातचीत के दौरान नन्हे बच्चों ने उनसे बेहद मासूमियत से कहा कि आज उनके बीच देश की महामहिम राष्ट्रपति नहीं, बल्कि साक्षात उनकी अपनी मां आई हैं। बच्चों के मुख से निकले ये शब्द राष्ट्रपति के प्रति जनमानस के अगाध प्रेम और गहरे सम्मान को प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शित करते हैं।

मुख्यमंत्री मोहन माझी के नेतृत्व में ओडिशा का कायाकल्प, 'उत्कर्ष ओडिशा' से आएगा २० लाख करोड़ का निवेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की प्रशासनिक प्रगति को रेखांकित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के कुशल मार्गदर्शन में ओडिशा अब तरक्की के एक नए और स्वर्णिम युग में कदम रख चुका है। वर्तमान में समूचे सूबे के भीतर बड़े उद्योगों, मजबूत बुनियादी ढांचे, हरित ऊर्जा और बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसरों के सृजन पर तीव्र गति से कार्य संचालित हो रहा है। उन्होंने वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि राज्य सरकार की ‘उत्कर्ष ओडिशा’ नामक अनूठी पहल के परिणामस्वरूप ओडिशा को तकरीबन २० लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम औद्योगिक निवेश के प्रस्ताव हासिल हुए हैं, जबकि अकेले ऊर्जा के क्षेत्र में ही ६ हजार करोड़ रुपये से अधिक का पूंजी निवेश आकर्षित करने में बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने देश और राज्य में भाजपा की डबल इंजन सरकार होने के फायदों को गिनाते हुए कहा कि केंद्र और सूबे के आपसी समन्वय से लोक-कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक बिना किसी बाधा के बहुत तेजी से पहुंच रहा है, जिसमें सुभद्रा योजना और आयुष्मान भारत जैसी बड़ी जनहितैषी नीतियां शामिल हैं।

स्वच्छ भारत मिशन में बेहतर प्रदर्शन की सराहना और मयूरभंज को नए जवाहर नवोदय विद्यालय की बड़ी सौगात

अपने संबोधन के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ओडिशा सरकार द्वारा किए गए उत्कृष्ट और सराहनीय कार्यों की जमकर पीठ थपथपाई और इसके लिए मुख्यमंत्री मोहन माझी व उनकी पूरी प्रशासनिक टीम को बधाई दी। इसके साथ ही, पीएम मोदी ने मयूरभंज के आदिवासी और ग्रामीण अंचल के युवाओं को एक और बड़ा उपहार देते हुए जिले में एक सर्वसुविधायुक्त नए जवाहर नवोदय विद्यालय की स्थापना को तत्काल मंजूरी देने की घोषणा की। उन्होंने विश्वास जताया कि इस नए संस्थान के खुलने से क्षेत्र के प्रतिभावान और ग्रामीण परिवेश से आने वाले छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वस्तरीय शिक्षा के स्वर्णिम अवसर प्राप्त होंगे। प्रधानमंत्री ने अंत में पूर्ण विश्वास प्रकट किया कि पहाड़पुर गांव का 'सूर्यग्राम' के रूप में होने वाला यह कायाकल्प और शिक्षा, बिजली व इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े ये नए बड़े प्रोजेक्ट्स मयूरभंज को तरक्की के एक नए शिखर पर स्थापित करेंगे और यही 'विकसित ओडिशा' आगे चलकर 'विकसित भारत' के विराट संकल्प को सिद्ध करने में देश का नेतृत्व करेगा।

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