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नीट परीक्षा आज, EVM जैसी सुरक्षा में परीक्षा केंद्रों तक पहुंचे प्रश्नपत्र

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भोपाल: आज दोपहर से शुरू हो रही नीट (NEET UG) परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष माहौल में कराने के लिए राजधानी भोपाल में सुरक्षा के बेहद कड़े और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इस बार परीक्षा के प्रश्नपत्रों को केंद्रों तक पहुंचाने के लिए ठीक वैसी ही मजबूत सुरक्षा व्यवस्था अपनाई गई है जैसी चुनाव में ईवीएम मशीनों के लिए की जाती है। सभी प्रश्नपत्रों को 'स्टॉक रूम' से पूरी गोपनीयता के साथ अलग-अलग परीक्षा केंद्रों के लिए रवाना कर दिया गया है ताकि किसी भी स्तर पर कोई भी गड़बड़ी न हो सके।

तीन परत वाली सुरक्षा और क्यूआर कोड का पहरा

परीक्षा की सुचिता बनाए रखने के लिए प्रश्नपत्रों को तीन परत वाली सुरक्षा सील से बंद विशेष डिब्बों में रखा गया है। इन डिब्बों की सुरक्षा इतनी कड़ी है कि हर परीक्षा केंद्र पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के दो-दो जवान मुस्तैद किए गए हैं। नोडल अधिकारियों की सीधी देखरेख में इन प्रश्नपत्रों को बेहद सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है, जिन्हें परीक्षा शुरू होने के ठीक पहले ही खोला जाएगा। पेपर लीक की किसी भी गुंजाइश को पूरी तरह खत्म करने के लिए हर बॉक्स पर एक खास क्यूआर (QR) कोड लगाया गया है, जिससे प्रश्नपत्रों की आवाजाही और उनके वितरण पर पल-पल की लाइव निगरानी रखी जा सके।

भोपाल में 32 केंद्र और ट्रैफिक पुलिस की विशेष तैयारी

भोपाल शहर में इस परीक्षा के लिए कुल 32 केंद्र बनाए गए हैं, जहां दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक हजारों छात्र अपनी परीक्षा देंगे। परीक्षा के दिन छात्रों को आने-जाने में कोई समस्या न हो, इसके लिए शहर की ट्रैफिक पुलिस ने एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। चूंकि शहर में कई जगहों पर मेट्रो का निर्माण कार्य चल रहा है, इसलिए कुछ रास्तों पर जाम या यातायात प्रभावित होने की आशंका है। ट्रैफिक पुलिस ने सभी अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों से अपील की है कि वे परीक्षा केंद्र के लिए घर से पर्याप्त समय पहले निकलें ताकि किसी भी तरह की देरी से बचा जा सके।

परीक्षा केंद्रों के लिए तय किए गए विशेष रूट

छात्रों की सुविधा के लिए ट्रैफिक पुलिस ने कुछ खास केंद्रों के लिए रूट प्लान तैयार किया है। आनंद नगर स्थित परीक्षा केंद्र जाने वाले छात्रों को सलाह दी गई है कि वे चेतक ब्रिज, गोविंदपुरा, भेल और महात्मा गांधी चौराहा वाले रास्ते का इस्तेमाल करें। वहीं, गौतम नगर के केंद्रों पर जाने वाले परीक्षार्थी नादरा बस स्टैंड, अग्रवाल धर्मशाला, छोला गणेश मंदिर और जेपी ब्रिज तिराहा वाले मार्ग से होकर आसानी से अपने केंद्र तक पहुंच सकते हैं।

हेल्पलाइन नंबर और जरूरी अपील

यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पुलिस ने आम जनता और छात्रों से अपील की है कि वे परीक्षा केंद्रों के आसपास अपने वाहन बिल्कुल पार्क न करें, जिससे जाम की स्थिति पैदा न हो। किसी भी तरह की आपात स्थिति, परेशानी या रास्ते की जानकारी के लिए छात्र पुलिस के हेल्पलाइन नंबर 7049104825 और 7049104640 पर फोन कर सकते हैं। इसके अलावा, व्हाट्सएप नंबर 7587602055 पर भी मैसेज भेजकर तुरंत सहायता प्राप्त की जा सकती है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर देशभर में उत्साह, पीएम मोदी ने किया योगाभ्यास

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कोलकाता: आज देश और दुनिया भर में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष योग दिवस को एक बेहद खूबसूरत और जरूरी विषय 'स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग' की थीम पर आयोजित किया गया है। इस खास मौके पर देश के मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम का गवाह बनने का गौरव पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता को मिला। कोलकाता में आयोजित इस भव्य और ऐतिहासिक योग उत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद शिरकत की, जहां उनके साथ करीब 35,000 लोगों ने एक साथ योगाभ्यास कर स्वास्थ्य और एकजुटता का एक बड़ा संदेश दिया।

दुनिया के बेहतर भविष्य के लिए योग जरूरी: पीएम मोदी

कोलकाता के इस मुख्य कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि योग आज केवल हमारी व्यक्तिगत जीवन शैली का हिस्सा मात्र नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरी दुनिया के एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य के लिए बेहद जरूरी आवश्यकता बन चुका है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कोलकाता वासियों की विशेष तारीफ करते हुए कहा कि वे यहां की एक अद्भुत पहल 'स्वच्छता से स्वागत' और 'स्वच्छता के योग' के लिए वहां के नागरिकों की सराहना करते हैं। इस अवसर पर गृह मंत्री अमित शाह से लेकर देश के कई बड़े राजनेताओं ने भी अलग-अलग राज्यों में इस योग उत्सव में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

झांसी के ऐतिहासिक किले से सीएम योगी का संदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बार वीरांगना महारानी लक्ष्मी बाई की पावन धरती झांसी में आयोजित योग कार्यक्रम में हिस्सा लिया। ऐतिहासिक किले के प्रांगण में योगाभ्यास करने के बाद उन्होंने पूरे प्रदेश वासियों को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की बधाई दी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उनके प्रयासों के कारण ही आज भारत की प्राचीन परंपरा और अनमोल विरासत को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली है, जिसने 140 करोड़ भारतवासियों को दुनिया के सामने गर्व से सिर उठाकर आगे बढ़ने का हौसला दिया है और साथ ही 'विकसित भारत' की संकल्पना को पूरा करने का एक बेहतरीन विजन प्रस्तुत किया है।

अहमदाबाद से लेकर शिलांग तक योग की धूम

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित सामूहिक कार्यक्रम में शामिल होकर योग किया। वहीं दक्षिण भारत की बात करें तो आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने लब्बीपेट के इंदिरा गांधी स्टेडियम में योग गुरु बाबा रामदेव के सानिध्य में आयोजित योग शिविर में हिस्सा लिया और योग के विभिन्न आसन किए। इसके अलावा, देश के सुदूर उत्तर-पूर्वी राज्य मेघालय की राजधानी शिलांग में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सैनिकों और स्थानीय लोगों के साथ योगाभ्यास किया। इस मौके पर रक्षा मंत्री ने योग के फायदों को रेखांकित करते हुए कहा कि योग हमें शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों से पूरी तरह स्वस्थ रखता है और इसे आज जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतनी बड़ी पहचान मिली है, उसका पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी प्रयासों को जाता है।

होर्मुज दोबारा बंद होने की आशंकाओं के बीच भारत के तीन तेल टैंकर सुरक्षित निकले

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होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा बंद होने की आशंकाओं के बीच भारत के तीन बड़े तेल टैंकर सुरक्षित इस समुद्री मार्ग को पार करने में सफल रहे हैं। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की जंग शुरू होने के बाद से यह पहला मौका है, जब एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में भारतीय जहाज होर्मुज पार कर भारत रवाना हुए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय ध्वज वाले टैंकर देश वैभव, देश विभोर और सनमार हेराल्ड शनिवार को सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर गए। इन तीनों जहाजों में कुल 8.6 लाख टन कच्चा तेल लदा है, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के कई देशों तक पहुंचता है। हाल के दिनों में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बाद होर्मुज की नाकेबंदी की वजह से जहाजों की आवाजाही रुक गई थी।
शिपिंग मंत्रालय के मुताबिक अब तक भारत आने वाले कुल 18 जहाज इस मार्ग को सुरक्षित पार कर चुके हैं। इनमें 13 भारतीय ध्वज वाले और 5 विदेशी ध्वज वाले जहाज शामिल हैं। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि सरकार भारतीय समुद्री हितों और नाविकों की सुरक्षा तय करने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ काम कर रही है। उन्होंने बताया कि इन तीन जहाजों पर कुल 94 भारतीय नाविक तैनात हैं।
शिपिंग मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक देश वैभव 24 जून को गुजरात के वडीनार बंदरगाह पहुंच सकता है। वहीं देश विभोर भी 24 जून को गुजरात के सिक्का पोर्ट पहुंचने वाला है। इन जहाजों के पहुंचने से देश की रिफाइनरियों को कच्चे तेल की आपूर्ति में मजबूती मिलेगी और बाजार में संभावित आपूर्ति संकट की आशंकाएं कम होंगी। हालांकि होर्मुज की तस्वीर अभी भी पूरी तरह राहत भरी नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक भारत आने वाले 31 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इनमें 16 जहाज उर्वरक (फर्टिलाइजर) लेकर भारत आने वाले हैं। भारत की ओर आने वाले दो और जहाज एसएसएल कावेरी और देश सुरक्षा अभी होर्मुज के आसपास इंतजार कर रहे हैं. सभी की निगाहें अब इनके सुरक्षित पार होने पर टिकी हैं।

राज्य स्तरीय योग दिवस कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने किया योग, जबलपुर हुआ गौरवान्वित

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जबलपुर: देश और दुनिया के साथ-साथ आज मध्य प्रदेश के सभी जिलों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष राज्यस्तरीय मुख्य योग कार्यक्रम का गौरवशाली आयोजन संस्कारधानी जबलपुर के गैरिसन ग्राउंड में किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल हुईं, जिन्होंने वहां मौजूद हजारों लोगों के साथ योग के अलग-अलग आसन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया।

'योग हजारों सालों की साधना की देन है'

इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मां नर्मदा की इस पावन धरती पर आकर वे बेहद अभिभूत हैं। उन्होंने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग ने हमेशा से मानवता को सरल और सहज बनाने का मार्ग दिखाया है और यह हमारी हजारों सालों की प्राचीन साधना की अद्भुत देन है, जो आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमें मानसिक शांति और संतुलन देता है। राष्ट्रपति ने खुशी जताते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया योग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना रही है। सरकार इसे जन-जन तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास कर रही है, और देश के प्रत्येक नागरिक को स्वस्थ रहने के लिए योग को अपने दैनिक जीवन में जरूर अपनाना चाहिए।

हजारों लोगों ने एक साथ किया योगाभ्यास

जबलपुर के गैरिसन ग्राउंड में आयोजित इस राज्यस्तरीय कार्यक्रम में करीब 5,000 लोगों ने एक साथ योगाभ्यास किया, जिसमें 31 अलग-अलग स्कूलों के 3,400 स्कूली बच्चे भी शामिल हुए। इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए मंच पर राज्यपाल मंगू भाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल भी मौजूद रहे और सभी ने मिलकर योग किया। इसके अलावा ग्वालियर के ऐतिहासिक दुर्ग पर 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का शानदार आयोजन किया गया, जहां प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट के साथ जिले के कलेक्टर, एसपी, कमिश्नर और तमाम प्रशासनिक अधिकारियों ने योगाभ्यास में हिस्सा लिया।

रीवा में डिप्टी सीएम का संदेश और इंदौर में बना नया रिकॉर्ड

योग दिवस की यह धूम प्रदेश के अन्य शहरों में भी देखने को मिली। रीवा के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स परिसर में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने योग किया और लोगों को संदेश दिया कि यदि हमें हमेशा निरोगी और स्वस्थ रहना है, तो सिर्फ एक दिन नहीं बल्कि हर दिन योग करना चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में 21 जून को योग दिवस घोषित कराने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों को देश के लिए एक बड़ा गौरव बताया। वहीं दूसरी तरफ, इंदौर शहर ने इस खास मौके पर एक नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिया। इंदौर में आयोजित सामूहिक योग कार्यक्रम में हजारों लोगों ने एक साथ 3 मिनट से ज्यादा समय तक भ्रामरी प्राणायाम किया। इस कीर्तिमान को बनाने में 70 से ज्यादा योग संस्थाओं और 150 से अधिक सामाजिक संगठनों ने अपनी भागीदारी निभाई, जहां केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उईके, कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

नीट री-एग्जाम आज, 22.79 लाख उम्मीदवारों की परीक्षा पर देशभर की नजर

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नई दिल्ली: देशभर के लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज नीट (UG) की बड़ी परीक्षा आयोजित की जा रही है। इस महापरीक्षा में देशभर से 22.79 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल हो रहे हैं। परीक्षा को लेकर छात्रों और अभिभावकों में भारी उत्सुकता देखी जा रही है। इस बड़े दिन पर परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा करके सभी अभ्यर्थियों को अपनी शुभकामनाएं दी हैं। एनटीए ने छात्रों से अपील की है कि वे परीक्षा के दौरान पूरी तरह शांत रहें, खुद पर आत्मविश्वास बनाए रखें और बिना किसी तनाव के अपना सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करें।

परीक्षा के समय में हुआ बड़ा बदलाव

इस साल की परीक्षा में छात्रों की सुविधा के लिए एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब तक नीट परीक्षा के लिए छात्रों को कुल 180 मिनट का समय मिलता था, लेकिन इस बार परीक्षा की अवधि को बढ़ाकर 195 मिनट (3 घंटे 15 मिनट) कर दिया गया है। परीक्षा दोपहर 2:00 बजे शुरू होगी और शाम 5:15 बजे तक चलेगी। समय में की गई यह बढ़ोतरी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस अतिरिक्त समय के दौरान परीक्षा कक्ष की जरूरी औपचारिकताएं, अटेंडेंस शीट पर हस्ताक्षर और सुरक्षा जांच जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी, जिससे छात्रों का लिखने का समय बर्बाद नहीं होगा। इसके अलावा दिव्यांग उम्मीदवारों को परीक्षा के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा, जिससे वे शाम 6:20 बजे तक अपना पेपर पूरा कर सकेंगे।

एंट्री का समय और कड़े सुरक्षा इंतजाम

परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित माहौल में कराने के लिए देश भर के केंद्रों पर निगरानी के विशेष और कड़े इंतजाम किए गए हैं। हालांकि परीक्षा दोपहर 2:00 बजे से शुरू होगी, लेकिन छात्रों को केंद्र पर काफी पहले पहुंचना होगा। परीक्षा केंद्रों पर एंट्री सुबह 11:00 बजे से ही शुरू कर दी जाएगी और दोपहर 1:30 बजे केंद्रों के मुख्य गेट पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे। एनटीए ने साफ कर दिया है कि दोपहर 1:30 बजे के बाद किसी भी परिस्थिति में किसी भी छात्र को परीक्षा केंद्र के अंदर जाने की अनुमति नहीं मिलेगी, इसलिए सभी उम्मीदवारों को समय का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

मोदी की तारीफ बनी विवाद की वजह, कांग्रेस नेताओं में जुबानी जंग

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को लेकर कांग्रेस के भीतर चल रहा अंदरूनी मतभेद अब खुलकर जनता के सामने आ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता पवन खेड़ा के बीच इस मुद्दे पर तीखी जुबानी तकरार देखने को मिल रही है। पवन खेड़ा द्वारा किए गए एक तीखे कटाक्ष के बाद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर अपनी स्थिति साफ की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी तरफ से ऐसी कोई बात नहीं कही जो प्रधानमंत्री ने न कही हो, बल्कि वे केवल समाचारों में छपी रिपोर्टों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों का ही हवाला दे रहे थे।

शशि थरूर का तथ्यों के साथ पलटवार

शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जवाब देते हुए शशि थरूर ने कहा कि जो लोग यह मान रहे हैं कि उन्होंने प्रधानमंत्री के मुंह से ऐसे शब्द सुन लिए जो कभी कहे ही नहीं गए, उन्हें जमीनी हकीकत समझनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे केवल उन रिपोर्टों का उल्लेख कर रहे थे जो मीडिया में बड़े स्तर पर प्रकाशित हुई थीं। अपनी बात को सही साबित करने के लिए थरूर ने एक समाचार वीडियो और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक रिपोर्ट भी साझा की। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि वे हमेशा पूरी रिसर्च और पुख्ता तथ्यों के आधार पर ही अपनी बात जनता के सामने रखते हैं और उनके पूरे राजनीतिक जीवन में आज तक उन पर गलत जानकारी देने या तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का कोई आरोप नहीं लगा है।

विवाद की मुख्य वजह और पवन खेड़ा का कटाक्ष

दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब शशि थरूर ने दावा किया था कि हाल ही में हुए जी-7 (G7) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक समुद्री रास्तों की सुरक्षा और नाविकों की हिफाजत का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। थरूर के अनुसार, यह बयान उस घटना के बाद आया था जिसमें ओमान की खाड़ी के पास एक कथित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई थी। इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान थरूर पर निशाना साधा था। उन्होंने मजाकिया और तंजिया लहजे में कहा था कि प्रधानमंत्री के प्रति थरूर की तारीफ अब इस दुनिया की सीमाओं से परे जा चुकी है, और अब तो वे वह सब भी सुन लेते हैं जो प्रधानमंत्री ने असल में कभी कहा ही नहीं।

कांग्रेस के इन दो दिग्गज नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से हुई यह बयानबाजी ऐसे समय में आई है जब पार्टी के अंदर कई रणनीतियों को लेकर पहले से ही खींचतान की खबरें आ रही हैं। थरूर के इस करारे जवाब के बाद अब यह मामला सियासी गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

राजभवन से झांसी तक योग की गूंज, राज्यपाल और सीएम योगी ने किया अभ्यास

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पूरे हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष योग दिवस को एक विशेष उद्देश्य के साथ 'स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग' की थीम पर आयोजित किया गया है। सुबह से ही राज्य के कोने-कोने में योग कार्यक्रमों की धूम देखने को मिली, जिसमें आम जनता से लेकर बड़े नेताओं तक ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। राजधानी लखनऊ में स्थित राजभवन के लॉन में सुबह 6 बजे एक भव्य सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने खुद शामिल होकर योग किया और लोगों को अच्छी सेहत का संदेश दिया।

झांसी में मुख्यमंत्री ने किया योगाभ्यास

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बार झांसी में आयोजित मुख्य योग कार्यक्रम में शिरकत की और वहां मौजूद जनसैलाब के साथ योगाभ्यास किया। इस खास अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उनके प्रयासों की बदौलत ही आज भारत की इस महान प्राचीन परंपरा और अनमोल विरासत को वैश्विक स्तर पर एक नई और मजबूत पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश के सामने एक ऐसा विजन रखा है, जिससे 140 करोड़ भारतीय दुनिया के सामने गर्व से खड़े हो सकते हैं और साथ मिलकर 'विकसित भारत' के सपने को सच कर सकते हैं।

'योग से निरोग' अभियान में जुटे दिग्गज

विश्व योग दिवस के मौके पर भारतीय जनता पार्टी पूरे प्रदेश में 'योग से निरोग' का नारा बुलंद कर रही है और हर नागरिक को इस स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ने की कोशिश में जुटी है। इसी अभियान के तहत प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने महाराजगंज में पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के साथ योग किया। इसके साथ ही राजनीति के कई अन्य बड़े चेहरों ने भी अलग-अलग जिलों में कमान संभाली, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने हापुड़ में, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज में, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लखनऊ में और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने लखनऊ के राजाजीपुरम में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लिया। इस महाभियान में प्रदेश सरकार के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, मेयर और नगर निकाय के जनप्रतिनिधियों से लेकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं तक ने स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर योग को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।

घर में बेल वृक्ष लगाना आखिर क्यों है इतना मुश्किल, नियमों व दिशाओं से डर जाते हैं शिवभक्त

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बेलवृक्ष को शास्त्रों में अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है. मान्यता है कि घर में बेल का पेड़ लगाने से भगवान शिव और माता लक्ष्मी दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है. फिर भी अधिकतर लोग इसे घर में लगाने से कतराते हैं, क्योंकि दिशाओं, नियमों और परंपराओं को लेकर भ्रम और डर बना रहता है, जिससे शिवभक्त भी निर्णय नहीं ले पाते… 

हिंदू धर्म की पारंपरिक परंपरा में यह माना जाता है कि कुछ विशेष प्रकार के पेड़-पौधे में दिव्य शक्तियां होती हैं. उन्हीं में से एक है भगवान शिव का प्रिय बेल पत्र, जिसे श्रीफल भी कहा जाता है और तेलुगु में इसे मरेदु के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि शिवलिंग पर अगर आप तीन पत्तियों वाला बेलपत्र और एक लोटा जल अर्पित करते हैं तो भगवान शिव आपकी सभी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं. यह तो हम सभी जानते हैं कि भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का कितना महत्व है लेकिन क्या आप घर में बेलपत्र का पौधे होने के फायदे जानते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस घर में बेलपत्र का पौधा होता हैं, वहां शिव के साथ माता लक्ष्मी स्वयं निवास करती हैं लेकिन इस पौधे की देखरेख में कई नियमों का पालन किया जाता है. आइए जानते हैं घर में बेल पत्र का पौधा होने के फायदे और किन नियमों का करें पालन…

शास्त्रों के अनुसार, बेल वृक्ष शिव का साक्षात रूप और देवी लक्ष्मी की प्रतिकृति माना जाता है. पुराणों के अनुसार, यह बेल वृक्ष देवी महालक्ष्मी की कठोर तपस्या के फलस्वरूप उत्पन्न हुआ था. देवी भागवतम् में बताया गया है कि इस वृक्ष की जड़ों में देवी गिरिजा, तने में देवी महेश्वरी, शाखाओं में देवी कात्यायनी और पत्तियों में स्वयं मां लक्ष्मी निवास करती हैं. इसलिए, घर में बेलवृक्ष लगाने से घर मंदिर के समान हो जाता है. ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि जिस घर में बेल वृक्ष स्वस्थ रूप से उगता है, वहां नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश बिलकुल नहीं हो सकता.

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में बेल वृक्ष लगाने के लिए कुछ विशेष दिशाएं पहले से निर्धारित हैं. घर के उत्तर-पूर्व, उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा में इस वृक्ष को लगाना सबसे शुभ माना जाता है. उत्तर-पूर्व कोने में बेल वृक्ष लगाने से परिवार के पैतृक और वास्तु संबंधी दोष पूरी तरह से दूर हो जाते हैं. साथ ही इससे देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और आर्थिक कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है.

हालांकि, ज्योतिषी चेतावनी देते हैं कि घर में बेल का पौधा उगाने वालों को कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए. इस वृक्ष की देखभाल पूरी श्रद्धा से करनी चाहिए. इसे नियमित रूप से पानी दें और वृक्ष के आसपास के क्षेत्र को साफ रखें. इस वृक्ष को अपवित्र हाथों से या बीमार होने पर नहीं छूना चाहिए. विशेष रूप से चतुर्दशी तिथि, अष्टमी तिथि, अमावस्या तिथि, पूर्णिमा तिथि और सोमवार को पूजा के लिए बेल के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए. अगर आपको शिव पूजन करना है तो इन तिथियों से एक दिन पहले ही बेलपत्र की पत्तियों तोड़कर स्वच्छ स्थान पर रख दें.

ज्योतिषाचार्यों का मानना ​​है कि घर में बेल का वृक्ष लगाना परिवार के लिए कल्प वृक्ष के समान है. शिव पुराण में बताया गया है कि हर दिन सुबह इस वृक्ष के दर्शन करने से अश्वमेध यज्ञ करने के समान पुण्य प्राप्त होता है. हालांकि, जिनके पास जगह नहीं है, वे इसे गमलों में छोटे पौधे के रूप में भी उगा सकते हैं, इसमें कोई समस्या नहीं है. ऐसा कहा जाता है कि अगर बेल का वृक्ष श्रद्धा और भक्ति से घर में उगाया जाए और नियमित रूप से पूजा की जाए, तो घर भगवान शिव और महालक्ष्मी का स्थायी निवास बन जाता है.

घर में गणेश मूर्ति की स्थापना कहां पर करनी चाहिए? जानें वास्तु के नियम

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विघ्नहर्ता श्री गणेश जी प्रथम पूज्य हैं. उनकी पूजा के बिना कोई कार्य सफल सिद्ध नहीं हो सकता है. हर हिंदू घर के पूजा स्थान या पूजा घर में गणेश जी की एक मूर्ति जरूर रहती है. गणेश जी की पूजा विधि विधान से करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. जीवन के संकट और विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं. कई लोगों के घरों में एक से अधिक गणेश जी की मूर्तियां होती हैं, लेकिन वे सही जगह या सही दिशा में नहीं होती है. आइए जानते हैं कि घर में गणेश मूर्ति कहां रखनी चाहिए? इसके संदर्भ में वास्तु के नियम क्या हैं?
घर में गणेश मूर्ति किस दिशा में रखनी चाहिए?
गणेश जी की मूर्ति को हमेशा घर के ईशान कोण यानि की उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए. उत्तर-पूर्व कोने को देवों का स्थान माना जाता है. इस स्थान पर घर का पूजा स्थान होना चाहिए. गणेश जी की मूर्ति इस तरह से रखें कि पूजा के समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा में हो. यदि उत्तर-पूर्व कोना के अलावा पश्चिम और उत्तर दिशा में भी गणेश मूर्ति रख सकते हैं.
गणेश मूर्ति रखने के वास्तु नियम क्या हैं?
गणेश जी मूर्ति को भूलकर भी घर की दक्षिण दिशा में न रखें. इस दिशा को यमराज और पितरों की दिशा कहा जाता है.
वास्तु के अनुसार गणेश जी या अन्य देवी और देवताओं की मूर्तियों को सीढ़ियों के नीचे नहीं रखना चाहिए. सीढ़ियों के नीचे पूजा स्थान न बनाएं, क्योंकि जब आप सीढ़ियों पर चढ़ेंगे तो भगवान की मूर्तियां पैरों के नीचे आएंगी, जिससे दोष लगेगा.
गणेश जी और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों को टॉयलेट या बाथरूम की दीवार से सटाकर न रखें या इस स्थान से सटकर पूजा घर नहीं होना चाहिए. इससे घर में वास्तु दोष उत्पन्न होता है.
घर के बेडरूम में भी गणेश जी या किसी अन्य देवी-देवता की मूर्ति नहीं रखनी चाहिए. इससे वैवाहिक जीवन में तनाव हो सकता है.
पूजा घर में हमेशा बायीं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी की मूर्ति की स्थापना करते हैं. इस मूर्ति की पूजा में कड़े नियमों का पालन नहीं करना होता है. आप सामान्य विधि से वाममुखी गणेश की पूजा कर सकते हैं.
दायीं ओर मुड़ी सूंड वाली गणेश जी की मूर्ति की पूजा के नियम काफी कठिन होते हैं. इस वज​ह से ऐसी मूर्तियों को मंदिरों में ही स्थापित करते हैं और पूरे विधि विधान से पूजा की जाती है.
घर में सुख-शांति के लिए गणेश जी की सफेद रंग की मूर्ति रखें. वहीं परिवार के तरक्की और समृद्धि के लिए गणेश जी की सिंदूरी रंग की मूर्ति स्थापित करें.
घर में एक से ज्यादा गणेश मूर्ति रखना सही है क्या?
हमेशा घर में गणेश जी की एक या दो मूर्ति ही रखनी चाहिए. तीन तीन मूर्तियों को रखने से वास्तु दोष होता है. यदि दो मूर्तियां रखते हैं, तो उनका मुख आमने-सामने नहीं होना चाहिए.

क्या भगवान कृष्ण की बेटी भी थी? पत्नियां भी 16 हजार! जान लें कितने थे बच्चे

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भगवान कृष्ण का जीवन हमेशा से लोगों के लिए आस्था और जिज्ञासा का विषय रहा है. उनके विवाह, परिवार और संतानों से जुड़ी कई बातें धार्मिक ग्रंथों में मिलती हैं. अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि भगवान कृष्ण की कितनी पत्नियां थीं, क्या उनकी बेटी थी और उनके कितने बच्चे थे. इन सभी बातों का वर्णन अलग-अलग धार्मिक कथाओं और मान्यताओं में मिलता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण की 8 प्रमुख पत्नियां थीं, जिन्हें अष्टभार्या कहा जाता है. इनमें रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवती, कालिंदी, मित्रविंदा, नाग्नजिति, भद्रा और लक्ष्मणा का नाम शामिल है. इन रानियों से जुड़ी कई कथाएं पुराणों में बताई गई हैं.
रुक्मिणी को भगवान कृष्ण की प्रमुख पत्नी माना जाता है. धार्मिक कथाओं के अनुसार उनका विवाह कृष्ण से हुआ था और उनके जीवन से जुड़े कई प्रसंगों का वर्णन मिलता है. सत्यभामा और जाम्बवती से जुड़ी कथाएं भी धार्मिक ग्रंथों में प्रसिद्ध हैं.

16 हजार पत्नियों वाली मान्यता क्या है?
धार्मिक कथाओं के अनुसार भगवान कृष्ण ने नरकासुर के बंधन से 16,100 महिलाओं को मुक्त कराया था. मान्यता है कि समाज में सम्मान बनाए रखने के लिए कृष्ण ने उन्हें पत्नी का स्थान दिया. इसी वजह से कई धार्मिक ग्रंथों में कृष्ण की 16,108 पत्नियों का उल्लेख मिलता है. यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पुराणों पर आधारित है. इसके अलग-अलग विवरण अलग परंपराओं में मिल सकते हैं.

क्या भगवान कृष्ण की बेटी भी थी?
भगवान कृष्ण की संतानों में पुत्रों का वर्णन ज्यादा मिलता है, लेकिन कुछ धार्मिक ग्रंथों में उनकी बेटी का भी उल्लेख किया गया है. मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण की पुत्री का नाम चारुमती था. हालांकि उनके बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन कुछ कथाओं में उनका नाम मिलता है.
भगवान कृष्ण के प्रसिद्ध पुत्र कौन थे?
भगवान कृष्ण के सबसे प्रसिद्ध पुत्रों में प्रद्युम्न का नाम लिया जाता है. वे कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र थे. धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रद्युम्न को भगवान कामदेव का स्वरूप भी माना जाता है. इसके अलावा कृष्ण के अन्य पुत्रों का भी अलग-अलग ग्रंथों में वर्णन मिलता है.

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