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POCSO केस में बड़ा अपडेट, केंद्रीय मंत्री के बेटे को मिली 7 दिन की अंतरिम जमानत

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हैदराबाद। तेलंगाना के हैदराबाद में मलकाजगिरि स्थित यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून से जुड़े एक विशेष न्यायालय ने केंद्रीय मंत्री बंदी संजय के पुत्र बंदी साई भागीरथ को सात दिनों की अवधि के लिए अंतरिम जमानत प्रदान कर दी है। आरोपी के विरुद्ध बशीर बाग पुलिस थाने में गंभीर धाराओं के तहत पॉक्सो अधिनियम का आपराधिक मामला पंजीकृत है। आधिकारिक सूत्रों से छनकर आई जानकारी के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल मामले में विधिक प्रक्रिया के तहत आगामी कदम उठाए जा रहे हैं।

वार्षिक परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए मिली कोर्ट से अस्थायी राहत

न्यायिक सूत्रों के अनुसार, विशेष अदालत ने आरोपी भागीरथ की अंतिम परीक्षाओं की अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए यह अस्थायी राहत दी है, ताकि वह बिना किसी बाधा के अपनी परीक्षा में उपस्थित होकर पर्चे दे सके। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह अंतरिम जमानत केवल सात दिनों की समयावधि के लिए ही मान्य होगी और आरोपी को न्यायालय द्वारा अधिरोपित की गई सभी सख्त शर्तों व विधिक नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। इससे पूर्व, कथित यौन उत्पीड़न के इस संगीन मामले में घिरे बंदी साई भागीरथ को कोर्ट के आदेश पर 29 मई तक के लिए न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में भेज दिया गया था, जिसके प्रत्युत्तर में बचाव पक्ष के विधि विशेषज्ञों ने पुलिस की रिमांड अर्जी का पुरजोर विरोध करते हुए उसे खारिज करने के लिए एक विस्तृत प्रतिवाद पत्र दाखिल किया था।

telangana उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत सख्त सुरक्षा उपायों की मांग

बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की ओर से न्यायालय के समक्ष यह दलील पेश की गई कि यदि माननीय अदालत अभियोजन पक्ष को पूछताछ की अनुमति देती भी है, तो तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन संख्या 165/2022 में प्रतिपादित किए गए सभी सुरक्षात्मक विधिक सुरक्षा उपायों को कड़ाई से लागू किया जाए। आरोपी के वकील ने विशेष आग्रह किया कि किसी भी प्रकार की पूछताछ का समय केवल प्रातः 10:00 बजे से सायंकाल 5:30 बजे के मध्य ही नियत किया जाए और प्रक्रिया समाप्त होने के बाद भागीरथ को प्रतिदिन शाम 7:00 बजे तक चेरलापल्ली केंद्रीय कारागार के जेल अधीक्षक की सुरक्षित कस्टडी में वापस सुपुर्द कर दिया जाए।

चिकित्सीय परीक्षण की अनिवार्यता और कानूनी प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग का दावा

बचाव पक्ष द्वारा रखे गए अन्य विधिक सुरक्षा उपायों में यह शर्त भी शामिल थी कि पुलिसिया पूछताछ की शुरुआत और उसकी समाप्ति के तुरंत बाद जेल के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों द्वारा आरोपी की गहन शारीरिक व मानसिक जांच की जाए। इसके साथ ही यह भी निवेदन किया गया कि पूछताछ की अवधि समाप्त होते ही या अदालत द्वारा मुकर्रर की गई तय तारीख पर आरोपी को अविलंब संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाए। आरोपी के मुख्य अधिवक्ता ने बताया कि भागीरथ ने स्वतः ही कानून का सम्मान करते हुए पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद तय कानूनी प्रक्रियाएं शुरू की गईं। उन्होंने दावा किया कि उनके मुवक्किल ने जांच एजेंसी के साथ हर मोड़ पर पूरा सहयोग किया है और उन्हें पूर्ण विधिक विश्वास है कि निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के पूरा होने पर उनका मुवक्किल पूरी तरह बेदाग और निर्दोष साबित होकर बरी होगा।

शाह का ऐलान, अब एक ही शिवसेना; महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़

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मुंबई। महाराष्ट्र के सियासी गलियारे में शिवसेना की विरासत, पहचान और कमान को लेकर जारी अंतहीन खींचतान के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक बयान जारी किया है। कोल्हापुर में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने दोटूक शब्दों में कहा कि पहले राजनीतिक चर्चाओं में लोगों को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे को 'शिवसेना-शिंदे गुट' कहकर संबोधित करना पड़ता था, परंतु अब परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है और राज्य में कोई 'गुट' शेष नहीं बचा है, बल्कि अब सिर्फ और सिर्फ एक ही शिवसेना अस्तित्व में है। गृह मंत्री का यह बड़ा बयान ऐसे नाजुक मोड़ पर सामने आया है जब सूबे के सियासी समीकरण तेजी से करवट ले रहे हैं और मूल शिवसेना के अस्तित्व को लेकर वैधानिक व राजनैतिक बहस जारी है। शाह ने अपने इस संबोधन में न केवल शिवसेना के मुद्दे पर रुख साफ किया, बल्कि प्रदेश सरकार के ढांचागत विकास कार्यों और देश में चल रहे सांस्कृतिक पुनर्जागरण के एजेंडे को भी जनता के समक्ष मजबूती से रेखांकित किया।

शिवसेना के विभाजन और भ्रम की स्थिति पर अमित शाह का बड़ा राजनैतिक संदेश

जनसभा के मंच से बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि एक दौर वह था जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले जनसमूह को महज एक धड़े या 'शिंदे गुट' के रूप में देखा और परिभाषित किया जाता था। उन्होंने आश्वस्त करते हुए कहा कि अब वह दौर बीत चुका है और जनता के समर्थन व विधिक प्रक्रियाओं के बाद केवल एक मूल शिवसेना ही धरातल पर काम कर रही है। राजनैतिक विश्लेषक शाह के इस वक्तव्य को आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति और सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन की आंतरिक सुदृढ़ता के एक बड़े संकेत के तौर पर देख रहे हैं। गृह मंत्री ने इस माध्यम से विपक्षी खेमे को यह स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया कि शिवसेना के नाम और निशान को लेकर पैदा किया गया हर प्रकार का संशय या भ्रम अब पूरी तरह से समाप्त हो चुका है।

१५०० करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले अंबाबाई कॉरिडोर परियोजना की घोषणा

अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए अमित शाह ने कोल्हापुर की आराध्य देवी माता अंबाबाई मंदिर के जीर्णोद्धार और वहां बनने वाले भव्य कॉरिडोर निर्माण कार्य का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने घोषणा की कि महाराष्ट्र की महायुति सरकार धार्मिक स्थलों के पुनर्विकास और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सुख-सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ बड़े पैमाने पर जुटी हुई है। शाह ने जानकारी साझा की कि इस महात्वाकांक्षी अंबाबाई कॉरिडोर परियोजना के क्रियान्वयन पर लगभग १५०० करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि व्यय की जाएगी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस परियोजना के पूर्ण होने से न केवल हर साल आने वाले लाखों भक्तों की राह सुगम होगी, बल्कि इस पूरे अंचल में धार्मिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी एक नई गति मिलेगी।

मोदी सरकार के १२ वर्षों के कार्यकाल को सांस्कृतिक पुनर्जागरण का स्वर्ण काल बताया

केंद्रीय गृह मंत्री ने केंद्र सरकार की उपलब्धियों का बखान करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में पिछले १२ वर्षों के दौरान देश ने ऐसे कई ऐतिहासिक और युगांतकारी कार्यों को हकीकत में बदलते देखा है, जिन्हें पूर्ववर्ती सरकारों में सर्वथा असंभव मान लिया गया था। उन्होंने अयोध्या में निर्मित भव्य राम मंदिर का प्रत्यक्ष उदाहरण देते हुए कहा कि पहले की पीढ़ियां यह सोचती थीं कि शायद वे अपने जीवनकाल में रामलला का मंदिर नहीं देख पाएंगी, परंतु २०१४ में पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार बनने और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद यह ऐतिहासिक सपना साकार हुआ। शाह ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम के पुनर्विकास, सोमनाथ मंदिर के स्वर्ण निर्माण और मां कामाख्या कॉरिडोर का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान सरकार 'विकास भी, विरासत भी' के मूल मंत्र को चरितार्थ करते हुए देश की सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने और भारत को वैश्विक पटल पर एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर अग्रसर है।

लेबनान को लेकर विवादित बयान से भड़की सियासत, कांग्रेस ने जताई नाराजगी

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने शनिवार को इजरायली मंत्री द्वारा 'पूरे लेबनान को राख में तब्दील करने' की दी गई बेहद भड़काऊ धमकी पर भारत सरकार की रहस्यमयी चुप्पी पर कड़े सवाल दागे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में जहां वाशिंगटन और तेहरान के बीच हुए शांति समझौते का दुनिया भर में सतर्कता के साथ स्वागत किया जा रहा है, वहीं इजरायल के शीर्ष हुक्मरानों के ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयान वैश्विक अमन-चैन के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। कांग्रेस महासचिव ने आशंका जताई कि इस बेहद संवेदनशील मसले पर भारत का मौन रहना देश के दीर्घकालिक कूटनीतिक और रणनीतिक हितों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है।

पीएम मोदी की इजरायल नीति और कॉर्पोरेट हितों के संरक्षण का संगीन आरोप

जयराम रमेश ने केंद्र की मोदी सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय महत्व के इतने बड़े घटनाक्रम पर भी हमेशा की तरह प्रधानमंत्री पूरी तरह खामोश बैठे हैं। उन्होंने तीखा तंज कसते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की इजरायल के प्रति यह अंधभक्ति देश के व्यापक राष्ट्रीय हितों की वेदी पर केवल अपने करीबी 'मोदानी' व्यापारिक साम्राज्य के व्यावसायिक हितों को सुरक्षित और पोषित करने के लिए की जा रही है। कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी का यह तीखा बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल और लेबनान के सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य तल्खी अपने चरम पर पहुंच चुकी है और युद्ध के बादल गहरा रहे हैं।

इतामार बेन-गवीर का भड़काऊ युद्धघोष और लेबनान को पूरी तरह तबाह करने की धमकी

इस विवाद की जड़ में इजरायल के धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर का वह अत्यधिक आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट है, जिसमें उन्होंने लेबनान के खिलाफ पूर्ण युद्ध छेड़ने की वकालत की है। बेन-गवीर ने खुलकर लिखा था कि एक इजरायली मां के बहने वाले हर आंसू के बदले लेबनान की एक हजार माताओं को रुलाया जाना चाहिए और पूरे लेबनान को आग के हवाले कर देना चाहिए। अमेरिकी मध्यस्थता के प्रयासों को ठेंगा दिखाते हुए उन्होंने साफ किया था कि इजरायल को पूरी दुनिया पर यह जाहिर कर देना चाहिए कि उनके नागरिकों और आईडीएफ सैनिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और अब इस सीमाई 'पिंग-पोंग' के खेल को बंद कर, नपे-तुले जवाबों के बजाय आतंक को समूल नष्ट करने के लिए पूर्ण आक्रामक रुख अपनाना होगा।

मनमोहन सिंह और इंदिरा गांधी की सशक्त विदेश नीति का हवाला देकर घेरा

इसी सिलसिले में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पूर्व प्रधानमंत्रियों डॉ. मनमोहन सिंह और इंदिरा गांधी की कूटनीतिक दृढ़ता का उदाहरण देते हुए मौजूदा हुकूमत को जमकर आड़े हाथों लिया। खेड़ा ने देवयानी खोबरागड़े के ऐतिहासिक राजनयिक विवाद का स्मरण कराते हुए कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह ने बेहद शालीन रहते हुए भी अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में महज 24 घंटे के भीतर नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के बाहर से सुरक्षा घेरा हटाकर महाशक्ति को भारत की संप्रभुता का स्पष्ट अहसास करा दिया था। उन्होंने इंदिरा गांधी के दौर की सशक्त विदेश नीति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि यदि यह सरकार अंतरराष्ट्रीय मंच पर इजरायल की निंदा करने का साहस नहीं जुटा पा रही थी, तो कम से कम लाल सागर में इजरायली हमलों के कारण मारे गए निर्दोष भारतीय नाविकों की शहादत पर जवाब मांगते हुए औपचारिक माफी की मांग तो कर ही सकती थी।

‘मैं बॉस हूं’ वाले बयान की ट्रंप ने की व्याख्या, कहा- मजाक को बना दिया मुद्दा

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वॉशिंगटन। जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया के शीर्ष राष्ट्राध्यक्षों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई एक अनौपचारिक टिप्पणी अचानक वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई। सम्मेलन कक्ष में प्रवेश करते वक्त ट्रंप ने बेहद चुटीले अंदाज में मुस्कुराते हुए कहा था, 'मैं बॉस हूँ।' यह बयान देखते ही देखते इंटरनेट मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो गया और इस पर तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे। अब इस पूरे मामले पर खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी स्थिति साफ की है। उन्होंने कहा है कि उनके इस बयान का मकसद किसी अन्य देश के नेता पर अपना रसूख या रौब जमाना बिल्कुल नहीं था, बल्कि वे केवल मजाक कर रहे थे। ट्रंप का मानना है कि उनकी इस टिप्पणी को वास्तविक संदर्भ से काटकर देखा गया और लोगों ने इसे जरूरत से ज्यादा गंभीरता से ले लिया।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी टिप्पणी पर क्या स्पष्टीकरण दिया?

एक विशेष बातचीत के दौरान जब ट्रंप से जी7 बैठक के उस चर्चित वाक्य को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वह एक विशुद्ध रूप से मजाकिया पल था और वे किसी भी वैश्विक नेता के सामने खुद को सर्वश्रेष्ठ या सर्वोपरि दिखाने का प्रयास नहीं कर रहे थे। ट्रंप ने उस पल की कड़ियों को जोड़ते हुए बताया कि जब वे मुख्य बैठक कक्ष के भीतर पहुंचे, तो वहां दुनिया के कई ताकतवर देशों के प्रमुख पहले से ही अपनी कुर्सियों पर मौजूद थे। उसी गंभीर माहौल को थोड़ा दोस्ताना और हल्का-फुल्का बनाने के उद्देश्य से उन्होंने सहज भाव में कह दिया, 'मैं बॉस हूँ।' ट्रंप ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर हैरानी होती है कि कैसे एक बेहद सामान्य से परिहास (मजाक) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतना बड़ा मुद्दा बना दिया गया।

शिखर सम्मेलन के भीतर क्या था वास्तविक घटनाक्रम?

यह पूरा वाकया जी7 शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन की सुबह आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान का है। जैसे ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने कक्ष में कदम रखा और यह टिप्पणी की, वहां मौजूद विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच का तनाव कम हो गया और पूरा कमरा हंसी के ठहाकों से गूंज उठा। ट्रंप की यह बात सुनकर वहां उपस्थित कई राजनेता मुस्कुराने लगे। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी इस चुटकी को बेहद सकारात्मक तरीके से लिया और गर्मजोशी से आगे बढ़कर ट्रंप से कुशलक्षेम पूछते हुए कहा, 'आप कैसे हैं?' इसके जवाब में ट्रंप ने सहजता से कहा, 'मैं बिल्कुल ठीक हूँ, आपका शुक्रिया।' इस पूरे वाकये को सम्मेलन के एक बेहद अनौपचारिक और खुशनुमा पल के रूप में दर्ज किया गया था।

वैश्विक मंच पर माहौल को सामान्य करने की थी कोशिश

डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि उस कमरे में बैठे सभी लोग अंतरराष्ट्रीय राजनीति की बड़ी हस्तियां हैं और अपने-अपने लोकतांत्रिक देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे कूटनीतिक माहौल में जहां गंभीर मुद्दों पर चर्चा होनी थी, उन्होंने सिर्फ एक बर्फ तोड़ने (आइस-ब्रेकर) और माहौल को खुशनुमा करने के लिए यह बात कही थी। उनके मुताबिक, किसी भी राजनीतिक विश्लेषक या व्यक्ति को यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि वे हकीकत में खुद को अन्य वैश्विक महाशक्तियों का लीडर या बॉस घोषित कर रहे थे। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से हास्य-विनोद का एक हिस्सा था, भले ही बाद में इसे लेकर दुनिया भर के राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की व्याख्याएं और प्रतिक्रियाएं सामने आती रहीं।

रेलवे का नया बिजनेस मॉडल, राख के ट्रांसपोर्ट से होगी भारी कमाई

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नई दिल्ली। भारतीय रेल ने थर्मल पावर स्टेशनों से निकलने वाली राख (फ्लाई ऐश) के परिवहन के जरिए करोड़ों रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाने की एक व्यापक और पुख्ता कार्ययोजना तैयार की है। जो फ्लाई ऐश कभी ताप बिजली घरों के लिए निस्तारण के लिहाज से एक बड़ा सिरदर्द बनी हुई थी, आज सड़क निर्माण, सीमेंट उत्पादन और ईंट निर्माण में भारी मांग के चलते बेहद मूल्यवान हो चुकी है। अब स्थिति यह है कि इस छाई को हासिल करने के लिए बिजली संयंत्रों के बाहर मालवाहक ट्रकों की लंबी कतारें लगी रहती हैं, जिसे देखते हुए रेल मंत्रालय ने भी इस सेक्टर में व्यावसायिक संभावनाओं को पूरी तरह भुनाने के लिए कदम बढ़ा दिए हैं।

रेल मंत्री की उच्च स्तरीय बैठक और डेडिकेटेड लॉजिस्टिक नेटवर्क की रूपरेखा

इस परियोजना को लेकर रेल मंत्रालय की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव स्वयं इस पूरी योजना में व्यक्तिगत रूप से गहरी रुचि ले रहे हैं। हाल ही में रेलवे बोर्ड के मुख्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता खुद रेल मंत्री ने की, जिसमें इस छाई के परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाने के विभिन्न व्यावहारिक विकल्पों पर गहन मंथन किया गया। रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, फ्लाई ऐश की सुगम और निर्बाध ढुलाई के लिए भविष्य में एक विशेष 'डेडिकेटेड लॉजिस्टिक नेटवर्क' स्थापित करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि इसे मालढुलाई का एक प्रमुख और व्यवस्थित जरिया बनाया जा सके।

वर्तमान में सीमित हिस्सेदारी और फ्लाई ऐश की विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती मांग

वर्तमान आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश के विभिन्न ताप बिजली घरों से सालाना लगभग 34 करोड़ टन राख का उत्पादन होता है, परंतु इसमें से रेलवे अभी केवल 130 लाख टन की ही ढुलाई कर पाता है और इसका बड़ा हिस्सा आज भी ट्रकों के माध्यम से ही भेजा जाता है। कोयले को जलाने के बाद सह-उत्पाद (बाय-प्रोडक्ट) के रूप में निकलने वाली इस छाई की मांग बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी से बढ़ी है। राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनटीपीसी) के वित्तीय वर्ष 2024-25 के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस राख का सर्वाधिक 32 प्रतिशत उपयोग सड़क एवं फ्लाईओवर निर्माण में, 27 प्रतिशत सीमेंट फैक्ट्रियों में, 14 प्रतिशत ईंट व टाइल्स बनाने में तथा शेष हिस्सा खदानों को भरने (बैकफिलिंग) और कृषि कार्यों में किया जा रहा है।

सुरक्षित पर्यावरण अनुकूल परिवहन प्रणाली और भावी राजस्व की संभावनाएं

चूंकि फ्लाई ऐश का असुरक्षित परिवहन पर्यावरण और वायु गुणवत्ता के लिए अत्यंत हानिकारक सिद्ध हो सकता है, इसलिए रेलवे इसके सुरक्षित संचलन के लिए विशेष रूप से निर्मित ढके हुए कंटेनरों का उपयोग करने की तैयारी में है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में कोयला ढोने के लिए प्रयुक्त होने वाले बॉक्स-एन वैगनों का उपयोग भी इस कार्य के लिए किया जा सकता है, बशर्ते उन्हें पूरी तरह से कवर किया जाए ताकि राख हवा में न उड़े। रेल प्रशासन को पूरा भरोसा है कि यदि एक बार इस छाई के परिवहन के लिए एक व्यवस्थित और सुरक्षित तंत्र क्रियान्वित कर दिया जाता है, तो यह कोयले की ही भांति भारतीय रेलवे की वित्तीय आय को बढ़ाने वाला एक नया और बेहद लाभकारी जरिया साबित होगा।

तोड़फोड़ से दहला अजमेर, प्रॉपर्टी डीलर के ऑफिस और थार गाड़ी को बनाया निशाना

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अजमेर। राजस्थान के अजमेर जिले में नसीराबाद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बलवंता चौराहे के समीप एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। यहां स्थित एक जमीन कारोबारी (प्रॉपर्टी डीलर) के दफ्तर को निशाना बनाते हुए दो अज्ञात नकाबपोश युवकों ने जमकर उत्पात मचाया। बेखौफ बदमाशों ने कार्यालय परिसर के बाहर खड़ी एक कीमती थार जीप पर लाठियों और पत्थरों से हमला कर उसके शीशे चकनाचूर कर दिए और वारदात को अंजाम देकर मौके से रफूचक्कर हो गए। यह पूरी घटना वहां सुरक्षा के लिहाज से लगाए गए सीसीटीवी कैमरे में डिजिटल रूप से दर्ज हो गई है, जिसमें दोनों उपद्रवी साफ तौर पर वाहन में तोड़फोड़ करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो साक्ष्य सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन ने दोनों हमलावरों की सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी है।

बिना किसी बातचीत के महिंद्रा थार पर बोला धावा और वाहन को पहुंचाया भारी नुकसान

घटनाक्रम के संबंध में प्राप्त विवरण के अनुसार, यह वारदात उस समय घटित हुई जब दफ्तर में रोजमर्रा का कामकाज चल रहा था। इसी दौरान दो अज्ञात युवक अचानक वहां धमक पड़े और बिना किसी वाद-विवाद या बातचीत के सीधे बाहर खड़ी महिंद्रा थार गाड़ी पर टूट पड़े। आरोपियों ने बर्बरतापूर्वक वाहन के आगे और बगल के शीशों पर ताबड़तोड़ प्रहार किए, जिससे गाड़ी को काफी वित्तीय और भौतिक नुकसान पहुंचा है। हमला इतना अप्रत्याशित था कि जब तक अंदर मौजूद लोग कुछ समझ पाते या बाहर आते, तब तक आरोपी अपना काम तमाम कर वहां से भागने में सफल रहे।

नसीराबाद सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज और आपसी रंजिश के कोण से पड़ताल शुरू

पीड़ित प्रॉपर्टी डीलर ने इस अकारण हुए हमले के तुरंत बाद नजदीकी नसीराबाद सदर पुलिस थाने पहुंचकर घटना की लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया है और आरोपियों के संभावित छिपने के ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है। जांच अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती तफ्तीश और घटना के तरीके को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि यह हमला किसी पुरानी रंजिश, पैसों के लेनदेन या आपसी मनमुटाव का परिणाम हो सकता है। हालांकि, पुलिस सभी संभावित कोणों को ध्यान में रखकर मामले की बारीकी से जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज को एक मुख्य विधिक साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया है।

स्थानीय निवासियों में कानून-व्यवस्था को लेकर रोष और त्वरित कार्रवाई का आश्वासन

इस दुस्साहसिक वारदात के बाद से बलवंता चौराहा और आसपास के व्यापारिक क्षेत्र में व्यापारियों तथा स्थानीय निवासियों के बीच असुरक्षा और तनाव का माहौल व्याप्त हो गया है। स्थानीय लोगों ने सार्वजनिक स्थलों पर दिनदहाड़े होने वाली ऐसी घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की गुंडागर्दी सीधे तौर पर पुलिस के इकबाल और कानून-व्यवस्था को चुनौती देती है। बढ़ते जन-आक्रोश को देखते हुए पुलिस महकमे ने मुस्तैदी बढ़ा दी है और विशेष खोजी टीमों को सक्रिय करते हुए यह दावा किया है कि फुटेज के आधार पर दोनों युवकों को जल्द ही चिन्हित कर सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।

लक्ष्मणगढ़ में बड़ी कार्रवाई, ऑटोमेटिक हथियार और 64 कारतूस के साथ 3 गिरफ्तार

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सीकर। राजस्थान के शेखावाटी अंचल में सक्रिय आपराधिक गिरोहों के बीच जारी वर्चस्व की लड़ाई थमने का नाम नहीं ले रही है। इंटरनेट के माध्यम से विदेशों में छिपे बैठे बड़े गैंगस्टर अपने स्थानीय गुर्गों और शूटरों के जरिए मनचाहे ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। खुफिया सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, विदेश से संचालित एक कुख्यात गिरोह के इशारे पर उसके गुर्गे सीकर के एक रसूखदार राजनेता और एक नामी जौहरी (ज्वैलर) की हत्या करने की नीयत से पिछले तीन महीनों से बेहद गोपनीय और सुनियोजित साजिश रच रहे थे। इस इनपुट पर कार्रवाई करते हुए एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) की सूचना पर सीकर के पुलिस अधीक्षक प्रवीण नायक नूनावत और उनकी विशेष टीम ने देर रात करीब 11 बजे सीकर शहर तथा लक्ष्मणगढ़ के रोरू बड़ी गांव में एक साथ ताबड़तोड़ दबिश देकर तीन खूंखार बदमाशों को धर दबोचा।

फ्लैट पर छापेमारी में मिले आधुनिक हथियार और लक्ष्मणगढ़ तक फैला नेटवर्क

पुलिस अधीक्षक प्रवीण नायक नूनावत के रणनीतिक निर्देशन में गठित विशेष पुलिस और एजीटीएफ की संयुक्त टीम ने सबसे पहले सीकर शहर के बजाज रोड पर स्थित जैन अस्पताल के सामने धोबियों का मोहल्ला इलाके के एक बहुमंजिला फ्लैट में छापा मारा। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से एक मुख्य संदिग्ध को दबोच लिया, जिसके कब्जे से भारी मात्रा में अवैध हथियार और गोलियां बरामद हुईं। गिरफ्त में आए आरोपी से जब पुलिस अधिकारियों ने कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र में छिपे अपने अन्य सहयोगियों के ठिकाने का खुलासा कर दिया। इस इनपुट पर एसपी ने बिना वक्त गंवाए दूसरी टीम को तुरंत लक्ष्मणगढ़ के रोरू बड़ी गांव के लिए रवाना किया, जहां घेराबंदी कर दो और शातिर युवकों को दबोच लिया गया। दोनों स्थानों को मिलाकर पुलिस ने कुल 3 अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से 4 अत्याधुनिक ऑटोमैटिक हथियार तथा 64 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। इस बड़ी सफलता के बाद जयपुर से आए एजीटीएफ के आला अधिकारियों और स्थानीय पुलिस ने जब इनसे सख्ती से पूछताछ की, तो आरोपियों ने अंचल में फैले अपने पूरे सिंडिकेट और नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया।

ज्योतिष का काम करने वाले दोस्तों के नाम पर लिया था आलीशान ठिकाना

पुलिस की विस्तृत पड़ताल में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि इन शूटरों ने सीकर शहर के बीचों-बीच छिपने के लिए बकायदा एक वीआईपी ठिकाना तैयार कर रखा था। गिरफ्तार बदमाशों ने लक्ष्मणगढ़ के रोरू बड़ी गांव के निवासी अपने दो परिचितों, जयप्रकाश शर्मा और विकास शर्मा के माध्यम से करीब तीन महीने पहले (25 मार्च को) बजाज रोड पर 18 हजार रुपये प्रति माह के किराये पर एक फुल फर्निश्ड फ्लैट लिया था। इस फ्लैट में एयर कंडीशनर (एसी), फ्रिज और आरामदायक बेड सहित ऐशो-आराम की सभी आधुनिक सुविधाएं मौजूद थीं। जयप्रकाश और विकास ने अपनी आईडी पर इस फ्लैट को किराये पर लिया और बाद में इसे गुर्गों के हवाले कर दिया। जांच में पता चला है कि ये दोनों युवक ज्योतिष और कर्मकांड का काम करते हैं, जिनसे पुलिस अधिकारियों ने हिरासत में लेकर विस्तृत पूछताछ की है और उनके बयान दर्ज किए हैं।

पहले भी नाकाम हो चुकी है ज्वैलर की रेकी और पुलिस कप्तान की युवाओं से अपील

सीकर के उक्त राजनेता और बड़े जौहरी को मौत के घाट उतारने के लिए गैंगस्टर्स द्वारा पूर्व में भी जानलेवा हमले की बिसात बिछाई जा चुकी है, लेकिन हर बार मुस्तैद पुलिस महकमे ने अपराधियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। कुछ दिनों पहले ही पुलिस ने विदेश में बैठे गैंगस्टर रोहित गोदारा के करीबी और हिस्ट्रीशीटर राहुल रिणाउ के जीजा शिव गौतम को गिरफ्तार किया था, जिसने मोटी रकम का लालच देकर एक छात्र के माध्यम से ज्वैलर की रेकी करवाई थी। इस खतरे को देखते हुए उक्त ज्वैलर को प्रशासन द्वारा हथियारबंद पुलिस गार्ड की सुरक्षा पहले ही मुहैया कराई जा चुकी है। इस पूरे मामले पर सीकर के पुलिस अधीक्षक प्रवीण नायक नूनावत ने बताया कि दोनों क्षेत्रों से गिरफ्तार तीनों आरोपियों के खिलाफ सीकर कोतवाली और लक्ष्मणगढ़ थाने में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिसमें सीकर की एफआईआर की कमान दादिया थानाधिकारी को सौंपी गई है। उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि पुलिस अपराधियों के सामाजिक महिमामंडन (ग्लोरिफिकेशन) को रोकने और उनके हौसले पस्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही उन्होंने युवाओं से भावुक अपील की कि वे सोशल मीडिया के झांसे या छोटे-मोटे आर्थिक प्रलोभन में आकर अपराध के इस अंतहीन दलदल में कदम न रखें।

गैंगवार ने मचाया कोहराम, जोधपुर में फायरिंग और चाकूबाजी में दो लोग गंभीर घायल

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जोधपुर। राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी जोधपुर में शुक्रवार, 19 जून की रात को कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने वाली एक दुस्साहसिक वारदात सामने आई है। शहर के बेहद व्यस्त सरदारपुरा क्षेत्र में स्थित 12वीं रोड चौराहे से बॉम्बे मोटर चौराहे के मध्य करीब एक दर्जन नकाबपोश बदमाशों ने दो युवकों पर सरेराह जानलेवा हमला कर दिया। हमलावरों ने न केवल लाठियों और धारदार हथियारों का खुलकर इस्तेमाल किया, बल्कि इलाके को दहलाते हुए ताबड़तोड़ गोलियां भी बरसाईं। इस खूनी गैंगवार की लाइव तस्वीरें वहां लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई हैं, जिसमें 10 से 15 हमलावर दो युवकों को घेरकर उन पर बर्बरता से टूटते हुए दिखाई दे रहे हैं। दोनों घायल युवकों की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने पीड़ित पक्ष की शिकायत पर संगीन धाराओं में मामला पंजीकृत कर आगे की तफ्तीश शुरू कर दी है।

गैराज पर गाड़ी की मरम्मत करा रहे युवकों पर हथियारों से लैस बदमाशों का अचानक धावा

प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस से मिली प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, इस खूनी संघर्ष में गंभीर रूप से घायल हुए युवक सन्नी हंस और विक्की फाइटर रात के समय अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी को ठीक करवाने के लिए एक ऑटो गैराज पर आए थे। वाहन का बोनट खुला हुआ था और दोनों मैकेनिक के पास ही खड़े थे, तभी अचानक दोपहिया वाहनों पर सवार होकर आए 10-12 हमलावरों ने उन पर अचानक धावा बोल दिया। आक्रमण इतना अप्रत्याशित और तेज था कि दोनों पीड़ितों को संभलने अथवा वहां से भागने का तनिक भी अवसर नहीं मिल सका। घटना के वीडियो फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि एक हमलावर पहले स्कॉर्पियो का बोनट नीचे गिराकर बंद करता है और अगले ही पल उसके बाकी साथी अवैध हथियारों के साथ पीड़ितों की तरफ दौड़ पड़ते हैं। सन्नी और विक्की अपनी जान की खातिर सड़क पर भागते हैं, परंतु आरोपी उनका पीछा करते हुए उन पर पीछे से लगातार प्रहार करते हैं और पिस्तौल से गोलियां दागने लगते हैं।

गैंगवार में दोनों पीड़ितों को लगी गोलियां और पुरानी रंजिश के एंगल से जांच शुरू

इस अंधाधुंध गोलीबारी में विक्की फाइटर को शरीर में दो गोलियां लगी हैं, जबकि सन्नी हंस को एक गोली लगी है। खून से लथपथ दोनों युवकों को स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत महात्मा गांधी अस्पताल (एमडीएम) के ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां चिकित्सकों के अनुसार विक्की की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। सरेबाजार हुई इस सनसनीखेज वारदात की भनक लगते ही पुलिस कमिश्नर शरत कविराज ने भारी पुलिस बल के साथ घटना स्थल का मुआयना किया। कमिश्नर ने बताया कि शुरुआती तफ्तीश से यह साफ हो गया है कि यह पूरा हमला दो गुटों के बीच लंबे समय से चली आ रही पुरानी दुश्मनी और आपसी वर्चस्व की लड़ाई का नतीजा है। पुलिस को अंदेशा है कि इस खूनी खेल के तार कुछ समय पूर्व सरदारपुरा थाना क्षेत्र में ही घटित हुई एक अन्य आपराधिक वारदात से आपस में जुड़े हुए हैं।

हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए तीन विशेष टीमों का गठन और राजनीतिक पृष्ठभूमि की पड़ताल

वारदात की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस के आला अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय इनपुट के आधार पर अधिकांश आरोपियों की पहचान कर उन्हें नामजद कर लिया है। फरार शूटरों और बदमाशों को दबोचने के लिए पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर तीन विशेष कमबैक टीमों का गठन किया गया है, जो आरोपियों के संभावित ठिकानों और छिपने के अड्डों पर लगातार दबिश दे रही हैं। दूसरी ओर, पश्चिम के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) कमल शेखावत और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) नरेंद्र सिंह देवड़ा ने भी अस्पताल पहुंचकर घायलों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके परिजनों के बयान दर्ज किए। गौरतलब है कि घायल सन्नी हंस भारतीय जनता युवा मोर्चा का पूर्व जिला उपाध्यक्ष रह चुका है और उसकी पत्नी भी वर्तमान में संगठन में एक सक्रिय पदाधिकारी हैं, जिसके कारण इस वारदात ने शहर के व्यस्ततम बाजार में सक्रिय आपराधिक गिरोहों के दुस्साहस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

किरोड़ी लाल मीणा का बड़ा बयान, जांच को लेकर सरकार पर साधा निशाना

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जयपुर। राजस्थान के सियासी हलकों में शुक्रवार, 19 जून को उस समय अप्रत्याशित सरगर्मी बढ़ गई जब सूबे के कृषि विभाग के कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा स्वयं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के मुख्यालय पहुंच गए। अपनी ही भजनलाल सरकार की प्रमुख जांच एजेंसी की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करते हुए कैबिनेट मंत्री ने आरोप लगाया कि एसीबी सोची-समझी रणनीति के तहत उनके राजनीतिक और सामाजिक अक्स को धूमिल करने का प्रयास कर रही है। ब्यूरो के दफ्तर में डटकर उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि जांच एजेंसी या तो उन्हें तत्काल प्रभाव से दोषमुक्त करते हुए क्लीन चिट सौंपे, अन्यथा उन्हें फौरन सलाखों के पीछे भेजे। गौरतलब है कि कृषि मंत्री नकली बीज उत्पादक कारखानों में अवैध वसूली की मंशा से की गई कथित छापामार कार्रवाई के एक संवेदनशील मामले में खुद को कानून के हवाले करने पहुंचे थे, जबकि चौंकाने वाली बात यह है कि वर्तमान में उनके विरुद्ध न तो कोई प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई है और न ही ब्यूरो ने उन्हें आधिकारिक तौर पर संदिग्ध माना है। इसके बाद भी उनका यूं जांच एजेंसी के द्वार पहुंचना राजनैतिक हलकों में भारी कौतूहल और चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

'डॉक्टर और मंत्री' के गुप्त संदर्भ पर गहरा रोष और छवि खराब करने का संगीन आरोप

मुख्यालय परिसर में पत्रकारों से रूबरू होते हुए डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने दावा किया कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो एक सुनियोजित षड्यंत्र के जरिए सार्वजनिक जीवन में उनकी साफ-सुथरी छवि पर कीचड़ उछाल रहा है। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि एक मामले में एफआईआर दर्ज होने के पश्चात जांच एजेंसी द्वारा मीडिया को यह अनौपचारिक इनपुट दिया गया कि इस पूरे प्रकरण के तार एक 'डॉक्टर और मंत्री' की संदिग्ध भूमिका से जुड़े हुए हैं। मीणा ने तार्किक पक्ष रखते हुए कहा कि वर्तमान मंत्रिमंडल में वे स्वयं एक पेशेवर चिकित्सक भी हैं और कैबिनेट मंत्री के ओहदे पर भी आसीन हैं, जिसके कारण इस भ्रामक वक्तव्य से आम जनता का संदेह सीधे तौर पर उन पर जाकर टिक गया है। मंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा कि ब्यूरो के इस गैर-जिम्मेदाराना रुख से उनके मान-सम्मान को अपूरणीय क्षति पहुंची है और उन्हें जान-बूझकर लांछित करने का खेल खेला जा रहा है।

जांच एजेंसी की नीयत पर तीखे सवाल और उच्च न्यायालय के जज से निष्पक्ष जांच की मांग

कैबिनेट मंत्री ने एसीबी की पूरी कार्यप्रणाली और उसकी मंशा को कठघरे में खड़ा करते हुए कई गंभीर सवाल दागे। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि जांच ब्यूरो किसी अदृश्य राजनैतिक अथवा प्रशासनिक दबाव के वशीभूत होकर काम कर रहा है और उनके बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए यह पूरा ताना-बाना बुना गया है। इस विवाद के पटाक्षेप और न्याय के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से एक बड़ी मांग करते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम की दूध का दूध और पानी का पानी करने वाली जांच उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश (सीटिंग जज) की अध्यक्षता में करवाई जानी चाहिए। अपनी जिद पर अड़े मंत्री ने साफ कर दिया कि जब तक ब्यूरो के आला अधिकारी मीडिया में आए उस भ्रामक बयान पर स्थिति स्पष्ट नहीं करते, तब तक वे परिसर से एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे, जिसके चलते वे काफी देर तक ब्यूरो के दफ्तर में ही डेरा जमाए रहे।

सत्ता के भीतर शीतयुद्ध की सुगबुगाहट और खुद की छापों पर विपक्ष के पुराने सवाल

एक कैबिनेट मंत्री का अपनी ही सत्ताधारी सरकार की शीर्ष जांच एजेंसी के विरुद्ध मोर्चा खोल देना और बिना किसी कानूनी नोटिस के स्वयं को गिरफ्तार करने की चुनौती देना सूबे की सियासत में कई गंभीर यक्ष प्रश्न खड़े कर रहा है। हालांकि, किरोड़ी लाल मीणा ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि इस कथित बड़ी साजिश के पीछे असल सूत्रधार कौन है, परंतु राजनैतिक विश्लेषक कृषि मंत्री के इस अप्रत्याशित आक्रामक रुख को राजस्थान भाजपा और सरकार के भीतर लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान और वर्चस्व की लड़ाई से जोड़कर देख रहे हैं। इस घटनाक्रम को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या यह कदम केवल जन-सहानुभूति और राजनैतिक दबाव बनाने का एक हिस्सा है अथवा वास्तव में परदे के पीछे कोई बड़ी बिसात बिछाई जा रही है। इन सब के बीच यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि डॉ. मीणा पिछले कई महीनों से विभिन्न जिलों में स्वयं आगे रहकर औचक निरीक्षण और कथित छापेमारियां कर रहे हैं, जिनकी वैधानिकता को लेकर विपक्षी दल पहले भी कई बार यह सवाल उठा चुका है कि इन तमाम हाई-प्रोफाइल दौरों के बाद भी धरातल पर किसी बड़े सिंडिकेट के खिलाफ कोई कठोर विधिक कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी।

खजाने के लालच में टूटी आस्था, मूर्ति के टुकड़े कर चोरी का खुलासा

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जयपुर। गुलाबी नगरी के आमेर थाना अंतर्गत आने वाले साईवाड़ गांव के एक ऐतिहासिक ठाकुर लक्ष्मीनारायण मंदिर से चोरी हुई बेशकीमती अष्टधातु की प्रतिमा के मामले का पुलिस ने महज दो हफ्तों के भीतर पर्दाफाश कर दिया है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस प्रशासन ने एक मुख्य आरोपी को दबोचा है, जबकि उसके साथ शामिल एक नाबालिग को भी कानून के दायरे में लिया गया है। पकड़े गए मुख्य आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने एक खेत में खुदाई करवाकर खंडित की गई प्राचीन मूर्ति के अवशेषों को सफलतापूर्वक अपने कब्जे में ले लिया है।

5 जून को हुई थी वारदात और आक्रोशित ग्रामीणों के बाद बनी एसआईटी

घटनाक्रम के अनुसार, बीती 5 जून 2026 को मंदिर के मुख्य सेवादार रामजीलाल शर्मा ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी कि गर्भगृह से भगवान श्री लक्ष्मीनारायण की करीब दो फीट ऊंची और अत्यंत प्राचीन अष्टधातु की मूर्ति गायब है। इस चोरी के बाद स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं में जबरदस्त गुस्सा भड़क उठा था, जिसके कारण इलाके में चक्काजाम और उग्र प्रदर्शन भी हुए थे। धार्मिक संवेदनशीलता और मामले की अहमियत को देखते हुए उच्चाधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था। जांच टीम ने कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए मंदिर और उसके संपर्क मार्गों पर लगे लगभग 500 सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग जांची तथा तकनीकी सेल की मदद से करीब 1000 मोबाइल नंबरों के कॉल डेटा रिकॉर्ड (सीडीआर) और टावर लोकेशन का गहन विश्लेषण किया।

इंटरनेट पर खोजता था मूर्तियों के दाम और रत्नों के लालच में दिया वारदात को अंजाम

वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जब तफ्तीश आगे बढ़ी, तो पुलिस का शक गांव के ही कुछ स्थानीय युवकों पर गहरा गया। इसी आधार पर पुलिस ने साईवाड़ के रहने वाले 18 वर्षीय गणेश शर्मा को पकड़कर जब कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने अपने एक कम उम्र के साथी के साथ मिलकर इस चोरी की बात कबूल कर ली। पुलिसिया पड़ताल में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी युवक पिछले काफी समय से इंटरनेट पर पुरानी मूर्तियों की तस्करी, उनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत और उनकी बनावट से जुड़े तथ्यों को खंगाल रहा था। उसे किसी ने यह अंधविश्वास घुसा दिया था कि इस सदियों पुरानी अष्टधातु की प्रतिमा के अंदर बेशकीमती नीलम या अन्य रत्न छिपे हो सकते हैं, और इसी अंधाधुंध लालच के फेर में आकर उसने गांव में बत्ती गुल होने का फायदा उठाकर मंदिर में सेंध लगा दी।

ज्वार के खेत में टुकड़े-टुकड़े कर दफन किए अवशेष और तस्करों से संबंध की जांच

चोरी की वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मूर्ति को लेकर चुपके से गांव की सरहद पर स्थित अपने ज्वार के खेत में चला गया था। वहां उसने रत्न और कीमती धातुओं को तलाशने के चक्कर में भारी औजारों से मारकर प्राचीन प्रतिमा के कई टुकड़े कर डाले। जब उसे मूर्ति के भीतर से कुछ हासिल नहीं हुआ, तो वह घबरा गया और साक्ष्य मिटाने की नीयत से उसने उन खंडित हिस्सों को खेत की मिट्टी के नीचे गहरा दफन कर दिया। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर उक्त स्थान की खुदाई करवाकर मूर्ति के सभी टुकड़ों को साक्ष्य के तौर पर बरामद कर लिया है, और अब इस बिंदु पर भी सघन जांच की जा रही है कि कहीं इन आरोपियों के तार किसी बड़े अंतरराज्यीय मूर्ति चोर गिरोह या तस्करों से तो नहीं जुड़े हैं।

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