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बारिश बनी चुनौती, गांव वालों ने कंधों पर उठाकर नदी पार कराई और पहुंचाया दूल्हा

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किशनगंज। भारत-नेपाल सीमा से सटे इस सीमावर्ती जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत दल्लेगांव से एक ऐसी विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने बुनियादी विकास के दावों की पोल खोल कर रख दी है। सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे एक वीडियो और तस्वीरों में एक दूल्हा अपनी बारात के साथ उफनती हुई मेची नदी को पार करने के लिए ग्रामीणों के कंधों पर सवार दिखाई दे रहा है। सुदूर इलाके के इस गांव में नदी पर पुल की सुविधा न होने के कारण पूरी बारात को इसी प्रकार जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ी।

कंधों का सहारा लेकर पार हुआ उफनता दरिया

प्राप्त विवरण के अनुसार, दल्लेगांव में एक विवाह समारोह संपन्न होना था, जिसमें शामिल होने आ रही बारात के रास्ते में मेची नदी मुख्य बाधा बनी हुई थी। मानसूनी बारिश के कारण नदी का जलस्तर काफी बढ़ा हुआ था और वहां चल रहा पुल का निर्माण कार्य अधूरा होने के कारण आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध था। नदी पार करने का कोई अन्य सुरक्षित जरिया या नाव उपलब्ध न होने पर स्थानीय ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाई और दूल्हे को अपने कंधों पर बिठाकर अत्यंत सावधानी से नदी के दूसरे किनारे तक पहुंचाया। इस अनोखी और लाचारी से भरी विदाई का वीडियो वहां उपस्थित किसी ग्रामीण ने अपने कैमरे में सहेज लिया, जो अब इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है।

वर्षों से अधर में लटका है सेतु का निर्माण

क्षेत्रीय नागरिकों ने इस अव्यवस्था पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए बताया कि दल्लेगांव और उसके समीपवर्ती दर्जनों गांवों को मुख्य सड़क मार्ग से जोड़ने के उद्देश्य से मेची नदी पर पुल का निर्माण कार्य वर्षों पूर्व स्वीकृत और शुरू किया गया था, परंतु प्रशासनिक ढुलमुल नीति के कारण यह आज तक मुकम्मल नहीं हो पाया। शुष्क मौसम में तो ग्रामीण नदी की उथली धारा को जैसे-तैसे लांघ लेते हैं, किंतु वर्षा ऋतु आते ही पूरा क्षेत्र टापू में तब्दील हो जाता है। पुल न होने का खामियाजा प्रतिदिन स्कूल जाने वाले नौनिहालों, गंभीर मरीजों, अपनी उपज मंडी तक ले जाने वाले किसानों और आम राहगीरों को भुगतना पड़ता है। कई बार चिकित्सा आपातकाल के समय लोग जान हथेली पर रखकर उफनते पानी के बीच से गुजरने को मजबूर होते हैं।

वायरल दृश्यों ने खड़े किए व्यवस्था पर गंभीर सवाल

दूल्हे को कंधों पर बिठाकर नदी पार कराने के इस दृश्य ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ लोग विषम परिस्थितियों में ग्रामीणों द्वारा की गई इस आपसी सहायता और अनूठे अंदाज की तारीफ कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नेटिजन्स और स्थानीय जनता अधूरे पड़े बुनियादी ढांचे को लेकर शासन-प्रशासन तथा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर तीखे सवाल उठा रही है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक इस महत्वपूर्ण सेतु का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो जाता, तब तक हजारों की आबादी को प्रतिवर्ष इसी प्रकार की जानलेवा दिक्कतों से दो-चार होना पड़ेगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मॉनसून की गंभीरता को देखते हुए इस दिशा में त्वरित और ठोस कदम उठाने की पुरजोर मांग की है।

अंतरिम संरक्षण बढ़ने से फैजल खान को राहत, विरोधी पक्ष के गंभीर आरोपों से बढ़ी हलचल

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पटना। बिहार की राजधानी के चर्चित कोचिंग विवाद मामले में विख्यात शिक्षक फैजल खान (खान सर) को न्यायपालिका से एक बड़ी राहत मिली है। शनिवार को पटना सिविल कोर्ट में संपन्न हुई एक महत्वपूर्ण वैधानिक कार्यवाही के दौरान अदालत ने फैजल खान की अग्रिम जमानत अर्जी पर विचार करते हुए उनके अंतरिम राहत के दायरे को आगामी सुनवाई तक के लिए विस्तारित कर दिया है। न्यायालय के इस न्यायिक आदेश के बाद अगली निर्धारित तिथि तक खान सर की संभावित गिरफ्तारी पर स्थगन आदेश प्रभावी रहेगा।

केस डायरी का अवलोकन और दंडात्मक कार्रवाई पर रोक

शनिवार की अदालती कार्यवाही के दौरान जांच एजेंसी की ओर से मामले की अद्यतन केस डायरी (जांच प्रतिवेदन) न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत की गई। केस डायरी के कानूनी तथ्यों का बारीकी से अध्ययन करने के पश्चात अदालत ने बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के वकीलों की दलीलों को सुना। न्यायालय ने वर्तमान परिस्थितियों में कोई भी अंतिम निर्णय पारित करने के बजाय मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया। इसके साथ ही, अदालत ने फैजल खान और उनके सहयोगियों को दंडात्मक संरक्षण (नो कोर्सिव एक्शन) प्रदान करते हुए पुलिस प्रशासन को किसी भी तरह की दमनकारी या कठोर कार्रवाई न करने की हिदायत दी है।

सुरक्षाकर्मियों की अर्जी पर तीखी कानूनी बहस

इस बहुचर्चित प्रकरण में विधिक प्रक्रिया उस समय और अधिक पेचीदा हो गई, जब मुख्य आरोपी के साथ-साथ उनके दोनों निजी सुरक्षाकर्मियों की जमानत याचिकाएं भी विचारार्थ पटल पर रखी गईं। अदालत कक्ष में एक ओर जहां मुख्य आरोपी फैजल खान को अंतरिम सुरक्षा मिल गई, वहीं दूसरी ओर उनके अंगरक्षकों की विधिक रिहाई के प्रश्न पर दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के मध्य तीखे वैधानिक तर्क-वितर्क और कानूनी दांव-पेंच देखने को मिले।

विपक्षी खेमे के संगीन दावे और एफआईआर की मांग

इससे पूर्व, विरोधी पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता निरंजन कुमार ने खान सर की अग्रिम जमानत याचिका का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने पीठ के समक्ष यह दलील दी कि इस कथित आपराधिक साजिश और कोचिंग विवाद की पूरी रूपरेखा 'खान ग्लोबल स्टडीज' संस्थान के भीतर ही तैयार की गई थी। उन्होंने न्यायालय को अवगत कराया कि पीड़ित रौशन आनंद द्वारा कदमकुआं थाने में लिखित शिकायत दिए जाने के उपरांत भी अब तक पुलिस द्वारा औपचारिक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, जबकि इसके पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं। विपक्षी वकील ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि पीड़ित पर कारागार के भीतर भी जानलेवा हमले का प्रयास किया गया और उनके भाई प्रिंस के साथ भी अमानवीय कृत्य हुआ है, जिसके कारण इस पूरे नेक्सस की निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच अनिवार्य है।

कोलकाता एयरपोर्ट पर सियासी संग्राम, अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में भिड़े भाजपा और TMC समर्थक

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कोलकाता। नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस समय अफरातफरी और तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के समर्थक आपस में भिड़ गए। दोनों राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच हवाई अड्डा परिसर में ही जमकर लात-घूंसे चले और हिंसक झड़प हुई। इस घटना के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं, जिसमें दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे के साथ मारपीट और धक्का-मुक्की करते हुए साफ नजर आ रहे हैं।

नेताओं के आगमन से पहले उपजा विवाद

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के दिल्ली से वापस कोलकाता आगमन से ठीक पहले शुरू हुआ। हवाई अड्डे पर पहले से मौजूद टीएमसी समर्थकों ने आशंका जताई कि भाजपा के कुछ कार्यकर्ता अभिषेक बनर्जी के खिलाफ प्रदर्शन करने तथा उन पर अंडे फेंकने के इरादे से वहां जमा हुए थे। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले तीखी नोकझोंक हुई, जिसने देखते ही देखते एक बड़े खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। हवाई अड्डे जैसे संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में हुई इस घटना से वहां मौजूद आम यात्रियों में भय का माहौल बन गया, जिसे नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

सुरक्षा व्यवस्था और हथियारों की मौजूदगी पर उठे सवाल

इस हिंसक झड़प के बाद टीएमसी समर्थकों ने दावा किया कि वे केवल अपने नेता की अगवानी के लिए शांतिपूर्वक खड़े थे, तभी विपरीत विचारधारा के लोग वहां माहौल बिगाड़ने पहुंच गए। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों के पास न केवल अंडे थे, बल्कि उनमें से कुछ लोगों ने हथियार तक लहराए। सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं ने इसे सुरक्षा में एक बड़ी चूक बताते हुए सवाल उठाया कि हवाई अड्डे की कड़े पहरे वाली सीमा के भीतर कोई भी व्यक्ति घातक सामान लेकर कैसे प्रवेश कर सकता है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से इस पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों को चिन्हित कर दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया और मामले की विधिक जांच

दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए एक अलग दृष्टिकोण सामने रखा है। केंद्रीय मंत्री सुकांता मजूमदार ने इस हिंसक वारदात पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सभी कार्यकर्ताओं और नागरिकों से शांति व संयम बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है और सभी को प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा रखना चाहिए। फिलहाल, एयरपोर्ट थाना पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर मामले की गहनता से तफ्तीश कर रही हैं। यह घटना एक बार फिर राज्य में दोनों प्रमुख दलों के बीच बढ़ते राजनीतिक गतिरोध को बयां करती है।

पंत की घर वापसी के संकेत, कुलदीप यादव बन सकते हैं लखनऊ सुपर जायंट्स का हिस्सा

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नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2027 के आगामी सीजन से पहले क्रिकेट जगत में एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। भारतीय टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत की अपनी पुरानी फ्रेंचाइजी दिल्ली कैपिटल्स में घर वापसी की प्रबल संभावनाएं बन रही हैं। इस महा-ट्रेड डील के तहत दिल्ली कैपिटल्स के चतुर स्पिनर कुलदीप यादव को लखनऊ सुपर जाएंट्स की टीम में भेजा जा सकता है। अंदरूनी सूत्रों के हवाले से खबर है कि दोनों ही फ्रेंचाइजियों के बीच खिलाड़ियों की इस अदला-बदली को लेकर गहन बातचीत जारी है, जिसे अंतिम रूप देने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और आईपीएल गवर्निंग काउंसिल की हरी झंडी मिलना अभी शेष है।

ऋषभ पंत और कुलदीप यादव की अदला-बदली पर बनी सहमति

खिलाड़ियों के इस बड़े ट्रांसफर को लेकर दोनों टीमों के प्रबंधन के बीच सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। हालांकि, दोनों खिलाड़ियों के अनुबंध, वित्तीय शर्तों और अन्य कानूनी औपचारिकताओं को लेकर कागजी कार्रवाई अभी प्रक्रियाधीन है। गौरतलब है कि आईपीएल 2025 की बड़ी नीलामी में लखनऊ सुपर जाएंट्स ने ऋषभ पंत को रिकॉर्ड तोड़ 27 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक बोली लगाकर अपनी टीम में शामिल किया था, जिससे वह लीग के इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी बने थे। उस समय दिल्ली कैपिटल्स के साथ नेतृत्व और कप्तानी को लेकर हुए कुछ वैचारिक मतभेदों के चलते पंत को रिलीज किया गया था, जिसका लखनऊ ने पूरा फायदा उठाया था।

लखनऊ में पंत का निराशाजनक सफर और दिल्ली से पुराना नाता

ऋषभ पंत का लखनऊ सुपर जाएंट्स के साथ कप्तानी और बल्लेबाजी का दो सालों का सफर बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। उनके नेतृत्व में टीम वर्ष 2025 में सातवें स्थान पर रही, जबकि 2026 के सीजन में अंक तालिका में सबसे निचले पायदान पर सिमट गई। बतौर कप्तान पंत 28 मुकाबलों में लखनऊ को सिर्फ 10 जीत दिला सके, जबकि 18 मैचों में टीम को हार का सामना करना पड़ा। इस दौरान उन्होंने बल्ले से 581 रन बनाए। आईपीएल 2026 के मध्य में ही पंत ने लखनऊ की कप्तानी छोड़ दी थी, जिसे फ्रेंचाइजी ने स्वीकार भी कर लिया था। दूसरी ओर, पंत का दिल्ली कैपिटल्स के साथ नौ सीजन का बेहद भावनात्मक रिश्ता रहा है, जहां उन्होंने 43 मैचों में कप्तानी करते हुए टीम को 23 बार जीत का स्वाद चखाया था। आगामी सीजन के लिए दिल्ली के अलावा कोलकाता नाइट राइडर्स ने भी उनसे संपर्क साधा था।

लखनऊ को मिलेगा मैच विनर स्पिनर और दिल्ली में प्रशासनिक बदलाव

इस अदला-बदली के दूसरे मुख्य किरदार कुलदीप यादव पिछले लंबे समय से दिल्ली कैपिटल्स के मुख्य फिरकी गेंदबाज रहे हैं। वर्ष 2022 से अब तक खेले गए 65 मैचों में उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 72 विकेट अपने नाम किए हैं। यदि यह ट्रेड डील फाइनल होती है, तो लखनऊ को अपने स्पिन विभाग के लिए एक भरोसेमंद और मैच जिताऊ गेंदबाज मिल जाएगा। दिल्ली कैपिटल्स में यह बड़ा बदलाव ऐसे समय पर हो रहा है, जब अगले दो वर्षों के लिए टीम के संचालन की कमान जेएसडब्ल्यू ग्रुप के पार्थ जिंदल के हाथों में आई है। इससे पहले के दो सीजन में टीम प्रबंधन जीएमआर ग्रुप के पास था और टीम प्लेऑफ में जगह बनाने में नाकाम रही थी। इसके साथ ही यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह आईपीएल 2027 से पहले दिल्ली कैपिटल्स के मुख्य कोचिंग स्टाफ का हिस्सा बन सकते हैं।

भारत की नजर क्लीन स्वीप पर, यशस्वी से बड़ी पारी की उम्मीद; प्लेइंग 11 पर नजरें

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चेन्नई। अफगानिस्तान के विरुद्ध खेली जा रही एकदिवसीय श्रृंखला को पहले ही अपने पाले में कर चुकी भारतीय क्रिकेट टीम शनिवार को तीसरे व अंतिम मैच में जीत दर्ज कर 3-0 से सूपड़ा साफ (क्लीन स्वीप) करने के इरादे से उतरेगी। दोनों देशों के बीच यह अंतिम भिड़ंत चेन्नई के ऐतिहासिक एमए चिदंबरम स्टेडियम में होने जा रही है। भारत ने शुरुआती दोनों मैचों में एकतरफा खेल दिखाकर सीरीज पर अपना कब्जा जमा लिया है, जिसके चलते इस आखिरी मुकाबले में टीम प्रबंधन कुछ विशेष खिलाड़ियों की फॉर्म और उनकी तकनीकी क्षमताओं को बारीकी से परखना चाहेगा।

युवा बल्लेबाजों की साख और टीम में जगह बनाने की होड़

इस मुकाबले में युवा ओपनर यशस्वी जायसवाल पर सबका ध्यान केंद्रित रहेगा, जो पिछले मैच में महज चार रन बनाकर पवेलियन लौट गए थे। चूंकि उस मैच में कप्तान शुभमन गिल और विकेटकीपर ईशान किशन ने शतकीय पारियां खेलकर अपनी जगह मजबूत कर ली है और आगामी इंग्लैंड सीरीज में विराट कोहली की वापसी भी संभावित है, ऐसे में जायसवाल के लिए खुद को साबित करने का यह अंतिम और सुनहरा अवसर होगा। इसके अतिरिक्त, मध्यक्रम में केएल राहुल की नई भूमिका पर भी फोकस रहेगा, जिनसे उम्मीद की जा रही है कि वे नंबर-6 पर आकर डेथ ओवरों में तेजी से रन बटोरने की जिम्मेदारी को बखूबी निभाएं।

हर्षित राणा की चोट के बाद वापसी और गेंदबाजी में नए प्रयोग

भारतीय टीम के लिए अच्छी खबर यह है कि घुटने की गंभीर चोट से पूरी तरह उबरने के बाद तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर हर्षित राणा की टीम में वापसी हो चुकी है। नितीश कुमार रेड्डी के जांघ की मांसपेशियों में खिंचाव से जूझने के कारण चेन्नई की पिच पर हर्षित राणा को अंतिम एकादश (प्लेइंग-11) में शामिल किए जाने की प्रबल संभावना है। आगामी आयरलैंड और इंग्लैंड दौरों के मद्देनजर टीम मैनेजमेंट राणा की मैच फिटनेस और उनकी धारदार गेंदबाजी का आकलन करने के लिए उत्सुक है। भारतीय गेंदबाजी आक्रमण में प्रसिद्ध कृष्णा और कुलदीप यादव जैसे नाम विरोधी टीम को घुटने टेकने पर मजबूर कर सकते हैं।

अफगानिस्तान के लिए साख बचाने और आत्मसम्मान की लड़ाई

दूसरी तरफ, मेहमान टीम अफगानिस्तान के लिए यह दौरा अब तक बेहद निराशाजनक रहा है और वह दोनों ही प्रारूपों में भारतीय टीम के सामने बेअसर साबित हुई है। चाहे बल्लेबाजी हो या गेंदबाजी, अफगान खिलाड़ी भारतीय परिस्थितियों में संघर्ष करते दिखाई दिए हैं। कप्तान हश्मतुल्लाह शाहिदी, राशिद खान और रहमानुल्लाह गुरबाज जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी में अफगानिस्तान इस अंतिम मैच को जीतकर अपने आत्मसम्मान को बचाने तथा दौरे का सुखद अंत करने की पुरजोर कोशिश करेगा, हालांकि मजबूत फॉर्म में चल रही मेजबान टीम को उनके घर में हराना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।

शिल्पा शिंदे का बड़ा आरोप, कहा- टीवी सीरियल निर्माता माफिया की तरह करते हैं काम

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मशहूर टेलीविजन अभिनेत्री शिल्पा शिंदे ने एक बार फिर छोटे पर्दे के कलाकारों को मिलने वाली चुनौतियों और प्रताड़ना का मुद्दा उठाते हुए टीवी जगत के निर्माताओं पर तीखा हमला बोला है। अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो साझा करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि मनोरंजन जगत के कुछ निर्माता 'व्हाइट कॉलर माफिया' की तरह काम करते हैं। उन्होंने कलाजगत के संघों (आर्टिस्ट एसोसिएशन) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए कि वे संकट के समय अपने ही कलाकारों के साथ खड़े नहीं होते।

निर्माताओं पर धमकाने और काम रोकने का आरोप

शिल्पा शिंदे ने वीडियो के माध्यम से टीवी प्रोड्यूसर्स के रवैये को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह पूरा तंत्र किसी माफिया की तरह संचालित हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि जो निर्माता इस व्यवस्था का समर्थन नहीं करते, उन्हें भी डराया-धमकाया जाता है। कलाकारों को यह कहकर विवश किया जाता है कि यदि उन्होंने निर्माताओं की शर्तों को नहीं माना, तो उनका वर्तमान शो रुकवा दिया जाएगा और भविष्य में उन्हें काम मिलना भी बंद हो जाएगा। इसी सिलसिले में शिल्पा ने अभिनेता शहजादा धामी के लगभग 30 लाख रुपये के बकाया भुगतान न मिलने के दावों पर भी गहरी चिंता और निराशा व्यक्त की।

पुरानी आपबीती और डिप्रेशन की ओर बढ़ते कदम

अपनी पिछली कड़वी यादों को साझा करते हुए अभिनेत्री ने कहा कि जब वे खुद एक बेहद कठिन दौर से गुजर रही थीं, तब भी किसी ने उनका पक्ष नहीं लिया। उन्होंने दुख जताया कि लोग उन पर सिर्फ पैसों के लिए विवाद खड़ा करने का झूठा लांछन लगाते हैं। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि एक दशक बीत जाने के बाद भी शोषण करने वाले निर्माता आज भी धड़ल्ले से फिल्में और टीवी शो बना रहे हैं, जबकि आम कलाकारों में अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की हिम्मत तक नहीं बची है। उन्होंने सचेत किया कि इसी मानसिक दबाव और न्याय न मिलने के कारण कई कलाकार आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं।

'भाबीजी घर पर हैं' का विवाद और सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग

गौरतलब है कि शिल्पा शिंदे ने हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान प्रसिद्ध धारावाहिक 'भाबीजी घर पर हैं' के निर्माताओं के साथ हुए अपने पुराने कानूनी विवाद का जिक्र किया था। उन्होंने बताया था कि शो छोड़ने और भुगतान के विवाद के दौरान उन्होंने निर्माता संजय कोहली के खिलाफ उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे बाद में आपसी समझ से सुलझा लिया गया और उन्हें बकाया राशि मिल गई थी। हालांकि, इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें भारी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है, और अभिनेत्री हिना खान सहित इंडस्ट्री के कई लोग उनके इस पुराने स्टैंड की आलोचना कर रहे हैं, जिनका मानना है कि ऐसे विवादों से वास्तविक पीड़ित महिलाओं की न्याय की लड़ाई कमजोर होती है।

मनोज बाजपेयी का बड़ा बयान, बोले- खराब फिल्मों की भी हो रही है तारीफ

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जाने-माने अभिनेता मनोज बाजपेयी ने हाल ही में फिल्म उद्योग के बदलते माहौल, कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाने वाले फिल्म समीक्षणों (पेड रिव्यू) और कलाकारों के साथ रहने वाले बड़े लाम-लश्कर पर खुलकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि वे स्वयं अपनी फिल्मों के प्रचार-प्रसार के लिए किस तरह की सादगीपूर्ण और अनुशासित कार्यप्रणाली अपनाते हैं।

पेड रिव्यू और दिखावे के माहौल पर बेबाक राय

मनोज बाजपेयी ने खराब फिल्मों को भी जबरन सोशल मीडिया और विज्ञापनों के जरिए बेहतरीन साबित करने की प्रवृत्ति पर कड़ा प्रहार किया। उनका कहना है कि आजकल किसी भी कमजोर फिल्म को सफल दिखाने के लिए अभिनेताओं की पूरी पीआर टीम सक्रिय हो जाती है और कलाकारों के अभिनय की झूठी तारीफों के पुल बांधने लगती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जिस श्रेणी के सिनेमा से जुड़े हैं, वहां इस तरह के दिखावे का कोई स्थान नहीं होता। अभिनेता ने यह भी साफ किया कि वे अपने करियर और फिल्मों से जुड़े तमाम निर्णय स्वयं लेते हैं, न कि किसी टीम के भरोसे छोड़ते हैं।

सेट पर कड़ा अनुशासन और सादगीपूर्ण कार्यशैली

अक्सर देखा जाता है कि बड़े सितारों के साथ सेट पर सहायकों की एक लंबी फौज होती है, लेकिन मनोज बाजपेयी अपनी निजी टीम को शूटिंग के मुख्य दायरे से दूर रखना पसंद करते हैं। उनका मानना है कि अभिनय एक बेहद संवेदनशील काम है, जिसमें केवल निर्देशक, साथी कलाकार और कैमरा टीम की ही सक्रिय मौजूदगी होनी चाहिए। वे आवश्यकता पड़ने पर ही अपने मेकअप मैन या सहायक को बुलाते हैं। उन्होंने साझा किया कि वे कई बार फिल्मों की शूटिंग के लिए अपने साथ हेयर स्टाइलिस्ट तक को नहीं ले जाते और कहानी की मांग के अनुसार बिना किसी अतिरिक्त साज-सज्जा के स्वाभाविक रूप से कैमरे के सामने आते हैं।

बजट की समझ और फिल्म प्रचार का वास्तविक नजरिया

मनोज ने कहा कि वे मुख्य रूप से लघु और मध्यम बजट की फिल्मों का हिस्सा रहे हैं, इसलिए वे फिजूलखर्ची और संसाधनों के दुरुपयोग के सख्त खिलाफ हैं। उनका मानना है कि बड़ी फिल्मों के निर्माताओं को यदि भारी-भरकम सपोर्ट सिस्टम से कोई आपत्ति नहीं है, तो उन्हें बाद में बजट बढ़ने की शिकायत भी नहीं करनी चाहिए। फिल्मों के प्रचार को लेकर उनका नजरिया बिल्कुल स्पष्ट है कि प्रमोशन केवल दर्शकों को जागरूक करने के लिए होना चाहिए, न कि हवा-हवाई माहौल बनाने के लिए। वे अपनी पूरी ईमानदारी से काम करने के बाद परिणाम को नियति पर छोड़ देते हैं और तुरंत अपनी अगली परियोजना की ओर बढ़ जाते हैं।

35 हजार की रिश्वत मांग रहे थे कर्मचारी, एसीबी ने रंगे हाथों किया गिरफ्तार

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भरतपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने महिला एवं बाल विकास विभाग में जारी घूसखोरी के खिलाफ एक बड़ी दंडात्मक कार्रवाई करते हुए तीन महिला कर्मचारियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि शिकायतकर्ता को उसकी नौकरी में प्रताड़ित न करने और पद से न हटाने के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही थी। एसीबी की टीम ने जाल बिछाकर घूस की पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये लेते हुए तीनों आरोपियों को मौके पर ही दबोच लिया।

नौकरी की सुरक्षा के नाम पर सौदा

एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के अनुसार, ब्यूरो को एक पीड़ित द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि विभाग की कुछ महिला कर्मी उसे सेवा से निष्कासित न करने और बिना किसी व्यवधान के काम करने देने के बदले 50 हजार रुपये की मांग कर रही थीं। आपसी बातचीत के बाद यह सौदा 35 हजार रुपये में तय हुआ था। इस गोपनीय शिकायत की प्राथमिक जांच और सत्यापन कराने पर घूस मांगे जाने का मामला पूरी तरह सही पाया गया।

मुखर्जी नगर में जाल बिछाकर रंगे हाथ गिरफ्तारी

घूसखोरी की पुष्टि होने के उपरांत एसीबी रेंज की विशेष टीम ने त्वरित योजना तैयार की। शुक्रवार को मुखर्जी नगर क्षेत्र में जैसे ही शिकायतकर्ता ने रिश्वत की पहली किस्त के तौर पर 10 हजार रुपये आरोपियों को सौंपे, वैसे ही पहले से मुस्तैद ब्यूरो की टीम ने तीनों महिला कर्मचारियों को रंगे हाथ दबोच लिया। पकड़ी गई आरोपियों में सूरजपोल सेक्टर की महिला पर्यवेक्षक क्षमा दहिया, कारे का नगला केंद्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सुनीता मुदगल और डी-ब्लॉक रंजीत नगर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता राजबाला शामिल हैं। टीम ने उनके कब्जे से रिश्वत की रकम भी सफलतापूर्वक बरामद कर ली है।

भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत विधिक कार्रवाई शुरू

इस औचक छापेमारी के बाद से महिला एवं बाल विकास विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने तीनों महिला कर्मियों को हिरासत में लेकर उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है और इस सिंडिकेट में शामिल अन्य संभावित कड़ियों का पता लगाने के लिए मामले के सभी कानूनी पहलुओं की बारीकी से जांच जारी है।

घूसकांड से घिरे बीज निगम की कमान अब गौरव चतुर्वेदी के हाथ, RAS अधिकारियों के तबादले

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जयपुर। राजस्थान सरकार ने प्रशासनिक अमले में एक बड़ा फेरबदल करते हुए शुक्रवार देर रात 178 राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) अधिकारियों के स्थानांतरण और नवीन पदस्थापना की आधिकारिक सूची जारी कर दी है। कार्मिक विभाग द्वारा जारी इस आदेश के तहत विभिन्न सरकारी महकमों के सचिवों, अतिरिक्त जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, रजिस्ट्रारों तथा अन्य वरिष्ठ अफसरों के कार्यक्षेत्रों में बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों को बिना किसी देरी के तुरंत प्रभाव से अपने नए पदों पर कार्यभार संभालने के कड़े निर्देश दिए हैं।

वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई नई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां

नवीनतम स्थानांतरण सूची के मुताबिक, मुख्य सचिव कार्यालय में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत मुकेश कुमार शर्मा को अब राज्य सूचना आयोग, जयपुर के सचिव पद की कमान सौंपी गई है। इसके साथ ही राजस्थान स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के कार्यकारी निदेशक गौरव चतुर्वेदी को राजस्थान बीज निगम का नया प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है, जो श्वेता चौहान का स्थान लेंगे। उल्लेखनीय है कि हाल ही में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने खाद-बीज घूसकांड मामले में बीज निगम के अशासकीय निदेशक को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी प्रकार जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के संयुक्त शासन सचिव प्रवीण कुमार लेखरा को राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण में रजिस्ट्रार और मालाखेड़ा के अतिरिक्त जिला कलेक्टर अनुराग भार्गव को वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा के रजिस्ट्रार पद की जिम्मेदारी दी गई है।

सचिवालय, स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा विभाग में बड़े फेरबदल

प्रशासनिक फेरबदल के अगले चरण में बीकानेर के अतिरिक्त संभागीय आयुक्त अरविंद सारस्वत को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग का नया संयुक्त शासन सचिव बनाया गया है, जबकि स्वायत्त शासन विभाग की अतिरिक्त निदेशक सीमा कुमारी को मुख्य सचिव कार्यालय में संयुक्त सचिव पद पर पदस्थ किया गया है। राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. विष्णु कौशिक को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में मंत्री के विशिष्ट सहायक का प्रभार मिला है। इसके अलावा, सिरोही जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गुलाबचंद प्रजापत को कोटा विश्वविद्यालय का रजिस्ट्रार, पदस्थापन की प्रतीक्षा कर रहे प्रेमल स्वरूप नागर को ईजीएस, जयपुर में अतिरिक्त आयुक्त (प्रथम) और कोटा विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार राजपाल सिंह को उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) का नया सचिव नियुक्त किया गया है। हनुमानगढ़ जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओम प्रकाश बिश्नोई को जोधपुर में भू-प्रबंध अधिकारी तथा आबकारी विभाग के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. प्रवीण कुमार को राज्य बीमा विभाग में अतिरिक्त निदेशक बनाया गया है।

एसडीएम और स्थानीय निकायों की प्रशासनिक संरचना में बदलाव

राज्य सरकार के इस व्यापक प्रशासनिक निर्णय का असर उपखंड स्तर पर भी व्यापक रूप से देखा गया है, जहां कई सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के प्रभार बदले गए हैं। इस क्रम में केशवरायपाटन के एसडीएम ऋतुराज शर्मा को बांदीकुई का नया उपखंड अधिकारी नियुक्त किया गया है, जबकि वैर के एसडीएम गंगाधर मीणा को दौसा नगर विकास न्यास (यूआईटी) के सचिव पद का दायित्व सौंपा गया है। इनके साथ ही महवा के एसडीएम प्रेमराज मीणा को करौली का नया उपखंड अधिकारी बनाकर भेजा गया है। कार्मिक विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस बड़े पैमाने पर हुए स्थानांतरण के बाद जिलों में प्रशासनिक दक्षता को बल मिलेगा और सभी नव-नियुक्त अधिकारी बिना किसी ट्रांजिट लीव (कार्यग्रहण काल) का लाभ लिए तुरंत अपनी सेवाएं शुरू करेंगे।

महंगी हो सकती है बिजली! आयोग में आपत्ति प्रस्ताव के बाद बढ़ीं उपभोक्ताओं की चिंताएं

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नोएडा। नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (एनपीसीएल) के अधिशेष (सरप्लस) को 1500.63 करोड़ रुपये से भारी कटौती कर 593.81 करोड़ रुपये करने का आधिकारिक आदेश जारी हो गया है। इस निर्णय के आते ही राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग में एक औपचारिक आपत्ति प्रस्ताव प्रस्तुत कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने सूबे के मुख्यमंत्री को एक पत्र प्रेषित कर आग्रह किया है कि राज्य सरकार इस फैसले के विरोध में तुरंत अपीलीय न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) की शरण ले, अन्यथा आने वाले समय में पूरे प्रदेश के आम नागरिकों को महंगी बिजली का झटका लग सकता है।

साढ़े तीन करोड़ उपभोक्ताओं पर महंगी बिजली का संकट

वर्तमान में उत्तर प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का विभिन्न विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) पर लगभग 51 हजार करोड़ रुपये का सरप्लस बकाया है, जिसके कारण पिछले कुछ सालों से सूबे में बिजली दरों को स्थिर रखने में मदद मिली है। उपभोक्ता परिषद का मानना है कि एनपीसीएल के पक्ष में आए इस फैसले को आधार बनाकर राज्य की अन्य सरकारी बिजली कंपनियां भी अपने सरप्लस के पुनरीक्षण की मांग उठा सकती हैं। यदि ऐसा हुआ, तो समूचे प्रदेश के लगभग साढ़े तीन करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के मासिक बिलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। इसके साथ ही आयोग को यह भी अवगत कराया गया कि कंपनियां मुकदमों में होने वाले विधिक खर्च का बोझ भी अंततः उपभोक्ताओं पर ही डालती हैं।

नोएडा के ढाई लाख उपभोक्ताओं की सब्सिडी समाप्त होने की आशंका

नियामक आयोग द्वारा शुक्रवार को सुनाए गए इस फैसले का सीधा और तात्कालिक असर नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा के तकरीबन ढाई लाख से अधिक विद्युत उपभोक्ताओं पर पड़ना तय माना जा रहा है। इस आदेश के लागू होने से एनपीसीएल के उपभोक्ताओं को वर्तमान में मिलने वाली 10 प्रतिशत की विशेष छूट या सब्सिडी पूरी तरह समाप्त होने की कगार पर पहुंच गई है। गौरतलब है कि वर्ष 2018-19 से लेकर 2025 तक के पूर्ववर्ती टैरिफ आदेशों के कुछ तकनीकी मानकों को लेकर नोएडा पावर कंपनी ने अपीलीय न्यायाधिकरण में चुनौती दी थी, जिसके बाद ट्रिब्यूनल ने इस मामले को दोबारा समीक्षा के लिए आयोग के पास वापस भेजा था।

पुनः परीक्षण में सरप्लस घटने से बढ़ेगा वित्तीय भार

नियामक आयोग ने अपीलीय न्यायाधिकरण के निर्देश पर जब इस मामले का दोबारा तकनीकी परीक्षण किया, तो वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए पहले से स्वीकृत करीब 1500.63 करोड़ रुपये के अधिशेष को घटाकर सिर्फ 593.81 करोड़ रुपये मंजूर किया। अब तक इसी बड़े सरप्लस फंड की बदौलत स्थानीय उपभोक्ताओं को बिजली बिलों में राहत दी जा रही थी। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मत है कि एनपीसीएल के इस वित्तीय फेरबदल के बाद राज्य की अन्य डिस्कॉम भी इसी तर्ज पर रियायतें कम करने का दबाव बनाएंगी, जिससे अंततः प्रदेश के सभी वर्गों के बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ना निश्चित है।

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