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59 बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाकर खंडेलवाल ने दिया सहारा

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बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल से विधायक एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की प्रेरणा से संचालित एक अनूठी परोपकारी पहल के अंतर्गत जिले के 59 अनाथ और साधनहीन बच्चों के शिक्षण एवं उज्ज्वल भविष्य को संवारने का महती उत्तरदायित्व उठाया गया है। इस जनकल्याणकारी योजना के जरिए न केवल इन बेसहारा बच्चों की स्कूली शिक्षा का पूरा प्रबंध किया जा रहा है, बल्कि उनके आश्रित परिवारों को भी सुदृढ़ वित्तीय संबल प्रदान किया जा रहा है। ज्ञात हो कि पूर्व जननेता स्वर्गीय विजय कुमार खंडेलवाल की पुण्य स्मृति में स्थापित 'विजय सेवा न्यास' द्वारा 'बेसहारा को सहारा' नामक एक विशेष सेवा अभियान चलाया जा रहा है। इस मानवीय अभियान के तहत उन मासूम बच्चों को संबल दिया जा रहा है, जिनके सिर से गंभीर बीमारी, अचानक हुई दुर्घटना या किन्हीं अन्य दुखों के कारण उनके माता-पिता या संरक्षकों का साया हमेशा के लिए उठ गया है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में जहां इस अभियान के अंतर्गत 41 बच्चों को सहायता पहुंचाई गई थी, वहीं वर्तमान वर्ष 2026 में इस परोपकारी कार्य का दायरा बढ़ाते हुए हितग्राही बच्चों की संख्या 59 तक पहुंच चुकी है।

निजी स्कूलों की फीस का भुगतान और शैक्षणिक सामग्री के लिए वार्षिक वित्तीय पैकेज

इस परोपकारी योजना के व्यावहारिक स्वरूप के तहत निजी शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे जरूरतमंद बच्चों की संपूर्ण शिक्षण फीस का भुगतान सीधे न्यास द्वारा किया जा रहा है। इसके साथ ही, बच्चों को किताबों, कॉपियों, यूनिफॉर्म तथा अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्रियों की खरीद में कोई असुविधा न हो, इसके लिए अलग से नकद आर्थिक सहायता मुहैया कराई जा रही है। बच्चों की देखरेख करने वाले उनके वृद्ध दादा-दादी, नाना-नानी या अन्य परिजनों को भी एक निश्चित वार्षिक वित्तीय पैकेज दिया जा रहा है ताकि घरेलू तंगी के चलते किसी भी बालक या बालिका की पढ़ाई बीच में न छूटे। इसके अतिरिक्त, जो विद्यार्थी शासकीय विद्यालयों अथवा विभिन्न सरकारी छात्रावासों में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, उन्हें भी उनकी विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप अतिरिक्त वित्तीय मदद दी जा रही है।

घरेलू तंगी से अवरुद्ध हो रही थी शिक्षा और बच्चों को मिला जीवन संवारने का नया संबल

इस कल्याणकारी अभियान से लाभान्वित होने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों ने अत्यंत भावुक होते हुए बताया कि माता-पिता के असमय अवसान के बाद उपजे गहरे आर्थिक संकट के कारण बच्चों की आगे की पढ़ाई जारी रखना पूरी तरह असंभव प्रतीत हो रहा था। ऐसी घोर निराशा के समय विजय सेवा न्यास की इस समयोचित सहायता ने उनके जीवन में उम्मीद का एक नया दीया रोशन किया है। अनेक प्रभावित परिवारों ने इस मानवीय प्रयास की सराहना करते हुए इसे अपने बच्चों के अंधकारमय होते भविष्य के लिए एक वरदान और सबसे बड़ा ईश्वरीय सहारा बताया है।

शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में अनूठी मिसाल और स्थानीय निवासियों में सराहना का माहौल

संपूर्ण बैतूल जिले में यह सामाजिक सरोकार शिक्षा के प्रसार और पीड़ित मानवता की सेवा के क्षेत्र में एक बेहद अनुकरणीय एवं सकारात्मक मिसाल बनकर उभरा है। स्थानीय बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों का दृढ़ विश्वास है कि समाज के संपन्न और सक्षम राजनैतिक नेतृत्व द्वारा किए जाने वाले इस प्रकार के निःस्वार्थ प्रयास वास्तव में हाशिए पर खड़े अंतिम पंक्ति के बच्चों के जीवन में युगांतकारी परिवर्तन ला सकते हैं। लोगों का मानना है कि ऐसी निरंतर सहायता से ये बेसहारा बच्चे आगे चलकर देश के जिम्मेदार और आत्मनिर्भर नागरिक बनेंगे तथा समाज की मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा सकेंगे।

MD पाउडर के खिलाफ अभियान में बड़ी सफलता, हरदा पुलिस ने दबोचे दो आरोपी

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हरदा। जिले की स्थानीय पुलिस ने नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। मुखबिर और गश्त टीम की मुस्तैदी से पुलिस ने प्रतिबंधित एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग्स पाउडर के साथ दो शातिर तस्करों को रंगे हाथों दबोचा है। पकड़े गए आरोपियों में से एक स्थानीय जनपद पंचायत सदस्य का पति बताया जा रहा है। पुलिस ने तस्करों के कब्जे से कुल 54.76 ग्राम उच्च गुणवत्ता का एमडी पाउडर जब्त किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू ब्लैक मार्केट में अनुमानित कीमत करीब ₹5.5 लाख आंकी गई है।

कैदी ढाबे के पास संदिग्ध कार से बरामद हुआ ₹1.10 लाख का कैश

पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में कानून-व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए गुरुवार की रात पुलिस की एक विशेष टीम फोरलेन हाईवे पर पेट्रोलिंग (गश्त) कर रही थी। इसी दौरान कैदी ढाबे के समीप सड़क किनारे खड़ी एक संदिग्ध लग्जरी कार पर पुलिस कर्मियों की नजर पड़ी। संदेह के आधार पर जब टीम ने वाहन की घेराबंदी की और कार की सघन तलाशी ली, तो उसमें सवार दो व्यक्तियों के पास से भारी मात्रा में नशीला पाउडर बरामद हुआ।

पकड़े गए आरोपियों की शिनाख्त रामेश्वर मुडेल (47 वर्ष) और विनोद यादव (48 वर्ष) के रूप में की गई है। ड्रग्स के अलावा पुलिस ने आरोपियों की तलाशी लेने पर उनके पास से ₹1 लाख 10 हजार से अधिक की संदिग्ध नगद राशि भी बरामद की है, जिसे ड्रग्स की बिक्री की रकम माना जा रहा है।

पिछली सीट के नीचे छिपा था नशा, आरोपियों का है पुराना आपराधिक रिकॉर्ड

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक, विनोद यादव, हरदा जनपद पंचायत की मौजूदा सदस्य पूजा यादव का पति है। शातिर तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए कार की पिछली सीट के नीचे एक गुप्त केबिन बनाकर ड्रग्स के पैकेट को छिपा रखा था।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है कि पकड़े गए दोनों आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। इनके खिलाफ स्थानीय थानों में मारपीट, डराने-धमकाने और अन्य संगीन धाराओं के तहत पहले से ही कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने दोनों के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जेल भेज दिया है। अब पुलिस की विशेष टीम इनके पूरे ड्रग्स नेटवर्क और बैकवर्ड-फॉरवर्ड लिंकेज (सप्लायर और खरीदारों) की कुंडली खंगालने में जुट गई है, ताकि इस रैकेट की जड़ों को पूरी तरह से उखाड़ा जा सके।

परीक्षा घोटालों पर गुस्सा फूटा, जंतर-मंतर पर छात्रों का बड़ा प्रदर्शन

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नई दिल्ली। देश की प्रतिष्ठित परीक्षाओं में कथित तौर पर सामने आई धांधलियों, लगातार होने वाले पेपर लीक और युवाओं के भविष्य से जुड़े अन्य गंभीर मसलों पर जवाबदेही तय करने की पुरजोर मांग के साथ शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर एक बड़ा आंदोलन देखने को मिला। युवाओं के नेतृत्व वाले संगठन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के तत्वावधान में आयोजित इस दूसरे विशाल विरोध प्रदर्शन में देश भर से आए छात्रों और उनके समर्थकों का भारी हुजूम उमड़ा। प्रदर्शन की संवेदनशीलता को देखते हुए जंतर-मंतर और आसपास के समूचे इलाके में सुरक्षा के चाक-चौबंद बंदोबस्त किए गए थे, जिसके तहत भारी तादाद में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को मुस्तैद किया गया था। आक्रोशित छात्र अपने हाथों में विभिन्न नारों वाली तख्तियां थामे हुए सरकार से समूची परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी व दोषमुक्त बनाने तथा देश के छात्र समुदाय के अधिकारों की रक्षा करने से जुड़े तीखे सवालों के जवाब मांग रहे थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रबंधन की कथित प्रशासनिक खामियों और लचर व्यवस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए व्यवस्था परिवर्तन की आवाज बुलंद की।

संस्थापक अभिजीत दीपके की अनूठी अपील पर थाली और चम्मच बजाकर दर्ज कराया विरोध

इस अनूठे विरोध प्रदर्शन को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पहले ही एक विशेष अपील जारी की थी। उन्होंने आंदोलन में हिस्सा लेने वाले सभी युवाओं और नागरिकों से अपने-अपने घरों से 'थाली और चम्मच' साथ लाने का आग्रह किया था। दीपके के इसी आह्वान पर जंतर-मंतर पहुंचे हजारों छात्र अपने साथ थालियां और चम्मच लेकर आए और उन्हें एक सुर में जोर-जोर से बजाकर सोए हुए सिस्टम को जगाने का प्रयास किया। इस अनोखे शोर के बीच प्रदर्शनकारियों ने वर्तमान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की और कड़े नारे लगाए।

परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग और लगातार होते पेपर लीक से युवाओं में भारी आक्रोश

आंदोलनकारी छात्रों का मुख्य रूप से यह आरोप था कि देश की शीर्ष अकादमिक और प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता पूरी तरह भंग हो चुकी है, जिससे दिन-रात मेहनत करने वाले होनहार छात्रों का मनोबल टूट रहा है। पेपर लीक और परीक्षा केंद्रों पर होने वाली कथित सेटिंग जैसी अनियमितताओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को अधर में लटका दिया है। छात्रों ने दोटूक शब्दों में कहा कि जब तक सरकार परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय नहीं करती और इस पूरी प्रक्रिया में कड़े कानूनी सुधार लागू नहीं किए जाते, तब तक युवाओं का यह लोकतांत्रिक संघर्ष रुकने वाला नहीं है।

भारी सुरक्षा घेरे के बीच शांतिपूर्ण तरीके से दर्ज हुआ देश के छात्रों का तीखा प्रतिकार

हालाँकि प्रदर्शन में छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर था, लेकिन भारी पुलिस बल की मौजदूगी के कारण पूरा घटनाक्रम नियंत्रण में रहा। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड्स के भीतर ही रोके रखा और उन्हें प्रतिबंधित क्षेत्रों की तरफ बढ़ने की अनुमति नहीं दी। सीजेपी के बैनर तले जुटे युवा नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह केवल उनके आंदोलन का दूसरा चरण था और यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों को अनसुना किया, तो आने वाले दिनों में इस छात्र आंदोलन को राष्ट्रव्यापी रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

दिल दहला देने वाली वारदात, 8 साल की बच्ची की पीट-पीटकर हत्या का आरोप

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ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के अंतर्गत आने वाले पुरानी छावनी थाना क्षेत्र के बरा गांव में आठ साल की अबोध बच्ची अलीना की दर्दनाक हत्या का एक बेहद हृदयविदारक और सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। मासूम की जान किसी धारदार हथियार से नहीं, बल्कि बेरहमी से की गई बर्बर पिटाई के कारण गई है। मृतका के पोस्टमार्टम और चिकित्सकीय परीक्षण में उसके सिर से लेकर पैर तक शरीर के विभिन्न हिस्सों पर १० से अधिक गहरे और गंभीर अंदरूनी जख्मों के निशान पाए गए हैं। इस जघन्य कृत्य को संज्ञान में लेते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए मृतका के पड़ोस में रहने वाले मुख्य संदेही युवक आमीन खान को अपनी कस्टडी में ले लिया है और उससे घटनाक्रम को लेकर गहन पूछताछ शुरू कर दी है।

गुल्लक से चंद रुपये निकालने पर भड़का पड़ोसी का गुस्सा और कमरे में बंद कर की बेदम पिटाई

प्रारंभिक पुलिस तफ्तीश और स्थानीय चश्मदीदों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह पूरा विवाद शुक्रवार की शाम को उस वक्त शुरू हुआ जब अलीना खेलते-खेलते पड़ोस में रहने वाले आमीन खान के एकांत घर के भीतर दाखिल हो गई थी। आरोप है कि वहां रखी एक गुल्लक से मासूम ने कौतूहलवश कुछ रुपये निकाल लिए थे, जिसके बाद एक राहगीर ने बच्ची को उस घर के मुख्य द्वार के समीप देखा था। कुछ देर बाद जब परिजनों और आमीन ने बच्ची की खोजबीन की, तो वह पास की ही एक किराना दुकान पर शीतल पेय (कोल्ड ड्रिंक) पीती हुई पाई गई। जब उससे रुपयों के संबंध में पूछा गया तो मासूम ने बिना किसी डर के पैसे लेने की बात स्वीकार कर ली और चुराए गए रुपये भी तत्परता से वापस मिल गए।

रुपये वापस मिलने के बाद भी नहीं शांत हुआ आक्रोश और रात भर तड़पने के बाद बिस्तर पर दम तोड़ा

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि चोरी गए रुपये पूरी तरह वापस मिल जाने के बाद भी आरोपी आमीन खान का गुस्सा शांत नहीं हुआ और वह बदले की भावना से सुलगता रहा। आरोप है कि वह जबरन अलीना को अपने साथ एक एकांत कमरे में ले गया और दरवाजा अंदर से बंद कर उस पर लात-घूंसों व डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। प्रताड़ना इतनी भयानक थी कि जब वह बच्ची को उसके घर वापस छोड़ने आया, तो मासूम अलीना के पैर कांप रहे थे और वह सीधे खड़े होने की स्थिति में भी नहीं थी। दुर्भाग्यवश, पीड़ित परिवार के सदस्य उसकी शारीरिक स्थिति और अंदरूनी तकलीफ की गंभीरता को समय रहते भांप नहीं पाए और रात भर असहनीय शारीरिक दर्द से बिस्तर पर तड़पने के बाद अंततः शुक्रवार की काली रात को अलीना ने दम तोड़ दिया।

शुरुआती दौर में गुमराह करने की कोशिश नाकाम और फॉरेंसिक साक्ष्यों से खुला हत्या का राज

इस बेहद संवेदनशील मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) के विशेषज्ञों की टीम को मौके पर बुलाया और डॉक्टरों के एक विशेष पैनल के जरिए शव का पोस्टमार्टम संपन्न कराया। चिकित्सकीय रिपोर्ट में यह प्रामाणिक रूप से साफ हो गया कि अत्यधिक बेरहमी से की गई मारपीट के चलते बच्ची के शरीर के भीतर भारी रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) हुआ था, जिससे उसके आंतरिक नाजुक अंगों ने काम करना पूरी तरह बंद कर दिया और यही उसकी अकाल मृत्यु का मुख्य कारण बना। हालांकि, शुरुआत में कुछ स्थानीय तत्वों ने आरोपी को बचाने के उद्देश्य से पुलिस को यह कहकर गुमराह करने की कोशिश की थी कि आमीन ने केवल बच्ची को डराया-धमकाया था, परंतु घटनास्थल से मिले वैज्ञानिक साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने झूठ का पर्दाफाश कर दिया। पुरानी छावनी थाना प्रभारी के अनुसार, आरोपी के खिलाफ हत्या का संगीन मुकदमा दर्ज कर विधिक दंडात्मक कार्रवाई को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

सरकार का बड़ा फैसला, अब बैठकों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जरूरी

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भोपाल। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिदृश्यों और प्रधानमंत्री के संदेश को आत्मसात करते हुए मध्य प्रदेश शासन ने प्रशासनिक अमले में फिजूलखर्ची रोकने तथा नागरिकों को संसाधनों के समझदारी से इस्तेमाल के लिए जागरूक करने हेतु नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा समस्त जिला कलेक्टरों और विभागाध्यक्षों को प्रेषित इस परिपत्र में सरकारी खजाने पर वित्तीय भार कम करने, बिजली की बचत, पर्यावरण संवर्धन और स्वावलंबन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। नए नियमों के तहत अब सभी शासकीय बैठकों, प्रशिक्षण सत्रों, कार्यशालाओं और गोष्ठियों का आयोजन अनिवार्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या हाइब्रिड माध्यम से किया जाएगा, ताकि राजकीय दौरों पर होने वाले अनावश्यक खर्च को रोका जा सके। इसके अतिरिक्त, मंत्रालय और क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों-कर्मचारियों को दफ्तर आने-जाने के लिए निजी वाहनों के बजाय सामूहिक परिवहन (पब्लिक ट्रांसपोर्ट), कार-पूलिंग अथवा पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

बाहरी राज्यों के आधिकारिक दौरों पर मुख्य सचिव की मंजूरी की बंदिश और उज्ज्वला योजना की समीक्षा

प्रशासनिक स्तर पर वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए मध्य प्रदेश से बाहर होने वाले सरकारी दौरों पर कड़ा पहरा बिठा दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत अधीनस्थ स्तर के कर्मचारियों और अधिकारियों के अंतर-राज्यीय दौरों को केवल बेहद आपातकालीन या अपरिहार्य परिस्थितियों में ही अनुमति दी जाएगी, जबकि सचिव स्तर के वरिष्ठ नौकरशाहों को राज्य की सीमा से बाहर किसी भी राजकीय कार्य के लिए मुख्य सचिव (सीएस) से पूर्वानुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इसी के साथ सरकार ने कृषि और उद्यानिकी जैसे विभागों को निर्देशित किया है कि वे रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल पर रोक लगाने और प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन का रूप देने के लिए कृषकों के बीच अभियान चलाएं। वहीं दूसरी ओर, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को जिम्मेदारी दी गई है कि वह पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) के बुनियादी ढांचे को तेजी से विकसित करे और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना सहित एलपीजी उपभोक्ताओं की सूची से अपात्र तथा फर्जी लाभार्थियों को चिन्हित कर उनके नाम हटाए।

सरकारी परिसरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम की अनिवार्यता और पर्यावरण अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर

विकास कार्यों से जुड़े लोक निर्माण और अन्य निर्माण विभागों को हिदायत दी गई है कि वे अपनी सरकारी परियोजनाओं में पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाली हरित निर्माण सामग्री (इको-फ्रेंडली मटेरियल) को प्राथमिकता दें और आम लोगों को भी इसके प्रति प्रेरित करें। इसके साथ ही, राज्य के सभी सरकारी भवनों और कार्यालयों की छतों पर 'प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना' के अंतर्गत सौर ऊर्जा (रूफटॉप सोलर सिस्टम) प्रणाली स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बिजली के पारंपरिक ग्रिड पर निर्भरता कम हो सके। शासन ने जनसंपर्क विभाग को "मेरा भारत-मेरा योगदान" नामक एक राज्यव्यापी जन-जागरूकता अभियान शुरू करने का दायित्व सौंपा है, जिसके माध्यम से प्रदेश के नागरिकों को बिजली की बचत, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति उत्तरदायी व्यवहार अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

प्रवासी भारतीयों के जरिए घरेलू पर्यटन को बढ़ावा और महत्वपूर्ण खनिजों के खनन को सर्वोच्च प्राथमिकता

आर्थिक और सांस्कृतिक मोर्चे पर सक्रियता बढ़ाते हुए पर्यटन विभाग को "देखो अपना देश" नीति के तहत काम करने को कहा गया है, ताकि विदेशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों (NRIs) को छुट्टियों के दौरान मध्य प्रदेश और देश के अन्य पर्यटन स्थलों की यात्रा करने के लिए आकर्षित किया जा सके, जिसमें "फ्रेंड्स ऑफ एमपी" जैसे वैश्विक संगठनों की मदद ली जाएगी। देश को औद्योगिक रूप से सशक्त करने और अंतरराष्ट्रीय आयात पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से खनिज साधन विभाग को एक बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभाग से कहा गया है कि वह आधुनिक तकनीकों के लिए जरूरी लिथियम, कोबाल्ट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, तांबा (कॉपर) और कोयले जैसी रणनीतिक संपदाओं से संबंधित खनन अनुमतियों, पर्यावरणीय स्वीकृतियों और लीज आवंटन के आवेदनों को बिना किसी देरी के सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर तुरंत मंजूरी प्रदान करे ताकि राष्ट्र की आत्मनिर्भरता को और अधिक बल मिल सके।

राम मंदिर दानपात्र चोरी पर सख्त बयान, दोषियों को नहीं मिलेगी माफी: जमाल सिद्दीकी

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भोपाल। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता महुआ मोइत्रा द्वारा सड़क पर नमाज की तुलना अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से करने पर देशव्यापी बहस छिड़ गई है। इस विवाद की गूंज अब मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में भी तेजी से सुनाई दे रही है। महुआ मोइत्रा ने ट्वीट कर आरोप लगाया था कि बंगाल के रेड रोड पर ईद की नमाज के लिए तो पाबंदी दिखाई गई, लेकिन योग दिवस के नाम पर उसे एक हफ्ते तक यातायात के लिए बंद रखा गया। इस बयान पर तीखी आपत्ति जताते हुए मध्य प्रदेश के खंडवा पहुंचे भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने दोटूक कहा कि कुछ लोग केवल राजनीतिक रोटियां सेकने और मुसलमानों को बदनाम करने के लिए ऐसे धार्मिक मुद्दों को भटकाने का काम करते हैं। मध्य प्रदेश भाजपा के नेताओं का भी मानना है कि इस तरह के बयान केवल तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा हैं, जिनका जमीनी हकीकत से कोई वास्ता नहीं है।

मध्य प्रदेश से उठी आवाज, इस्लाम के प्रोटोकॉल और मस्जिदों में नमाज की वकालत

खंडवा में मीडिया से औपचारिक चर्चा के दौरान जमाल सिद्दीकी ने इस्लामिक सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि इस्लाम में इबादत का एक स्पष्ट और पवित्र प्रोटोकॉल है। दुनिया के 55 प्रमुख मुस्लिम देशों और स्वयं इस्लाम की उद्गम स्थली सऊदी अरब का उदाहरण देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वहां भी नमाज केवल मस्जिदों के भीतर ही पढ़ी जाती है, सार्वजनिक सड़कों पर नहीं। सिद्दीकी ने कहा कि शरिया के अनुसार किसी भी विवादित या आम जनता को परेशान करने वाले स्थान पर की गई इबादत कबूल नहीं होती। मध्य प्रदेश के प्रमुख मुस्लिम विचारकों और राजनीतिक विश्लेषकों ने भी इस बयान का समर्थन करते हुए कहा है कि नमाज जैसी पावन व्यवस्था को वातानुकूलित कमरों में बैठकर राजनीति करने वाले लोग सड़कों पर लाकर खराब न करें।

योग को संस्कृति का हिस्सा बताते हुए एमपी के नागरिकों से निरोगी रहने की अपील

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के विषय पर बात करते हुए भाजपा नेता ने इसे भारत की ऋषि परंपरा और महान संस्कृति का गौरवशाली प्रतीक बताया, जिसके माध्यम से वैश्विक स्तर पर देश का मान बढ़ा है। उन्होंने मध्य प्रदेश सहित देश भर के नागरिकों से अपील की कि वे अपने जीवन में संतुलन स्थापित करें। नमाज जहां आत्मिक शांति का जरिया है, वहीं योग शारीरिक और मानसिक आरोग्यता का आधार है। उन्होंने प्रदेश के युवाओं और आमजन से आह्वान किया कि वे किसी के बहकावे में न आएं; पाबंदी से नमाज भी अदा करें और शरीर को निरोगी रखने के लिए नियमित रूप से योग को भी अपनाएं, ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके।

अयोध्या राम मंदिर मामले में विपक्ष की घेराबंदी पर पलटवार और जांच का भरोसा

इसके अतिरिक्त, अयोध्या स्थित प्रभु श्रीराम मंदिर के दानपात्र से कुछ कथित कर्मचारियों द्वारा चंदा चोरी किए जाने के मामले पर भी मध्य प्रदेश के राजनीतिक हलकों में बयानबाजी तेज है। इस विषय पर जमाल सिद्दीकी ने कहा कि चुनावी पराजय से हताश हो चुका विपक्ष अब हर संवेदनशील मुद्दे पर सरकार को घेरने की नाकाम कोशिशें कर रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार ने तत्काल विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है। भगवान राम के दरबार में ऐसी घिनौनी हरकत करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत उन्हें ऐसी कड़ी सजा दी जाएगी कि देश के सामने एक कड़ा उदाहरण पेश हो सके।

धर्मांतरण के विरोध में नारायणपुर में प्रदर्शन, जनजातीय समाज ने उठाई मांगें

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नारायणपुर| छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम भरंडा में कथित धर्मांतरण और सांस्कृतिक मान्यताओं के साथ छेड़छाड़ का मामला अब पूरी तरह गरमा गया है। इस विषय को लेकर स्थानीय जनजातीय समाज, ग्राम सभा के प्रतिनिधियों और विभिन्न पारंपरिक सामाजिक संगठनों ने बड़ी संख्या में लामबंद होकर उग्र प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने स्थानीय प्रशासन पर इस संवेदनशील मामले में ढुलमुल रवैया अपनाने और निष्क्रियता का सीधा आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि लिखित शिकायत दर्ज कराए जाने के कई दिन बीत जाने के बाद भी शासन-प्रशासन द्वारा जांच की वस्तुस्थिति स्पष्ट नहीं की गई है और न ही धरातल पर कोई ठोस कदम उठाए गए हैं। इसी आक्रोश के तहत समाज प्रमुखों ने जिला प्रशासन के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एक मांग पत्र (ज्ञापन) भी प्रेषित किया है।

आस्था और देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप, बाजार पारा में प्रदर्शन

मामले की गंभीरता को देखते हुए नारायणपुर के बाजार पारा क्षेत्र में आज जनजातीय समुदाय के नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एकत्रित होकर जमकर नारेबाजी की और त्वरित दंडात्मक कार्रवाई की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बीते 9 जून को स्थानीय पुलिस थाने में एक आधिकारिक शिकायत सौंपी गई थी। इस शिकायत में स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया गया था कि कुछ बाहरी व स्थानीय तत्वों द्वारा जनजातीय समाज की प्राचीन धार्मिक आस्था, लोक देवी-देवताओं और पारंपरिक मान्यताओं के विरुद्ध बेहद आपत्तिजनक व अमर्यादित टिप्पणियां की जा रही हैं, साथ ही भोले-भाले ग्रामीणों को प्रलोभन देकर धर्मांतरण के लिए उकसाया जा रहा है। समाज का कहना है कि एफआईआर के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से पूरे अंचल के आदिवासियों में गहरा रोष व्याप्त है।

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग

आंदोलन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन में प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं:

  • समयबद्ध जांच: पूरे प्रकरण की किसी उच्च स्तरीय एजेंसी से निष्पक्ष और समय सीमा के भीतर जांच कराई जाए।

  • कठोर कानूनी कार्रवाई: यदि जांच में धर्मांतरण और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो दोषियों पर रासुका (NSA) जैसी कड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई हो।

  • गतिविधियों पर निगरानी: नारायणपुर जिले के अंदरूनी और वनांचल क्षेत्रों में संचालित हो रही इस तरह की अन्य संदिग्ध गतिविधियों की भी व्यापक स्क्रूटनी (जांच) की जाए।

  • पारदर्शिता: स्थानीय पुलिस और प्रशासन द्वारा इस मामले में अब तक की गई प्रोग्रेस रिपोर्ट को आम जनता के सामने सार्वजनिक किया जाए।

सांस्कृतिक पहचान पर संकट: समाज प्रमुखों की चेतावनी

जनजातीय समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि यह पूरा विवाद सिर्फ एक सामान्य विवाद नहीं है, बल्कि यह उनकी सदियों पुरानी धार्मिक आस्था, मूल सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक मूल्यों को नष्ट करने का एक सुनियोजित प्रयास है। इसलिए, कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से पहले शासन को इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप कर कड़े कदम उठाने चाहिए। फिलहाल, इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर पूरे बस्तर संभाग और नारायणपुर जिले में तनावपूर्ण शांति है और हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन आगे क्या रुख अख्तियार करता है।

हेल्दी खाने और एक्सरसाइज के बावजूद थकान क्यों? जानें इसके पीछे की वजह

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संतुलित खानपान और नियमित तौर पर जिम-व्यायाम करने के बावजूद क्या आपकी सेहत में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है? क्या सुबह सोकर उठते ही आपको अत्यधिक थकान महसूस होती है, पेट में भारीपन रहता है और लगातार वजन बढ़ता जा रहा है? यदि इन सभी सवालों का जवाब 'हाँ' है, तो आपको अपनी दैनिक दिनचर्या और विशेषकर सूर्यास्त के बाद की गतिविधियों पर गहराई से पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। चिकित्सा जगत के जानकार चेतावनी देते हैं कि दिनभर की मेहनत पर पानी फेरने वाली ये समस्याएं असल में आपकी शाम और रात की कुछ अनजानी और गलत आदतों का नतीजा हो सकती हैं।

शाम ढलते ही बदल जाती है शरीर की कार्यप्रणाली

हार्मोनल और फिजियोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार, इंसानी शरीर का आंतरिक चक्र (बॉडी क्लॉक या सर्केडियन रिदम) शाम ढलने के बाद बिल्कुल अलग तरीके से काम करने के लिए प्रोग्राम होता है। इस संवेदनशील समय में की गई छोटी से छोटी लापरवाही भी आगे चलकर मेटाबॉलिज्म से जुड़ी बड़ी बीमारियों का आधार बन जाती है।

आधुनिक कॉर्पोरेट जीवन और काम के अत्यधिक दबाव के चलते अक्सर लोग दफ्तर से देर रात घर लौटते हैं, भूख मिटाने के लिए भारी भोजन करते हैं, मानसिक थकान दूर करने के नाम पर घंटों मोबाइल या टीवी स्क्रीन के सामने आंखें गड़ाए रहते हैं, या फिर चाय-कॉफी का सहारा लेकर देर रात तक काम निपटाते हैं। डिनर समाप्त करते ही सीधे बिस्तर पर सो जाने की यह जीवनशैली भले ही आपको सामान्य और विवशता लगती हो, परंतु यह आपके आंतरिक अंगों पर जानलेवा दबाव डाल रही होती है।

रात का समय: शरीर की मरम्मत और आंतरिक रिकवरी का मुख्य चरण

विभिन्न मेडिकल रिसर्च और लैबोरेटरी रिपोर्ट्स से यह प्रमाणित हो चुका है कि रात का समय मानव शरीर के भीतर जीर्ण-शीर्ण हो चुकी कोशिकाओं (सेल्स) की मरम्मत, टिशू रिकवरी और हार्मोनल संतुलन के लिए सबसे महत्वपूर्ण कालखंड होता है। इसी अवधि के दौरान मस्तिष्क दिनभर के तनाव और सूचनाओं के बोझ को प्रोसेस कर खुद को तरोताजा करता है।

परंतु, यदि इस निर्धारित समय पर पेट में गरिष्ठ भोजन डाल दिया जाए, आँखों के सामने लगातार कृत्रिम रोशनी बनी रहे, या सोने का कोई निश्चित समय न हो, तो शरीर अपनी मरम्मत का काम छोड़कर भोजन पचाने और जागते रहने के संघर्ष में लग जाता है। इससे शरीर की प्राकृतिक रिकवरी प्रक्रिया पूरी तरह बाधित हो जाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा जारी मुख्य स्वास्थ्य गाइडलाइंस

दीर्घायु और निरोगी जीवन के लिए चिकित्सा विज्ञानियों ने निम्नलिखित आदतों में तत्काल सुधार की सिफारिश की है:

1. डिजिटल स्क्रीन से बनाएं दूरी (स्लीप साइकिल सुधारें)

रात के समय स्मार्टफोन, लैपटॉप या टेलीविजन की स्क्रीन से उत्सर्जित होने वाली हानिकारक 'ब्लू लाइट' (नीली रोशनी) मस्तिष्क में नींद लाने वाले मुख्य हार्मोन 'मेलाटोनिन' के स्राव को पूरी तरह रोक देती है। इसके चलते अनिद्रा (इंसोमनिया) और अधूरी नींद की समस्या जन्म लेती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि सोने के समय से कम से कम एक घंटे पहले सभी प्रकार के डिजिटल गैजेट्स को पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।

2. डिनर की टाइमिंग और जंक फूड का त्याग

  • पाचन की धीमी गति: सूर्यास्त के बाद शरीर की जठराग्नि और पाचन क्रिया प्राकृतिक रूप से मंदी हो जाती है। ऐसे में देर रात पिज्जा, बर्गर, पैकेटबंद चिप्स या अत्यधिक तैलीय और मसालेदार भोजन का सेवन करने से एसिडिटी, पेट फूलना (ब्लोटिंग) और शरीर में अवांछित कैलोरी (चर्बी) जमा होने लगती है।

  • 8 बजे की समय-सीमा: स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से रात का भोजन (डिनर) हर हाल में रात 8:00 बजे से पहले संपन्न कर लेना चाहिए।

  • भोजन के बाद वॉक: डिनर करने के तुरंत बाद बिस्तर पर लेटने की आदत बेहद खतरनाक है। भोजन के उपरांत 10 से 15 मिनट की सामान्य सैर (वॉक) पाचन तंत्र को सुचारू रखने, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और भोजन के बेहतर अवशोषण में क्रांतिकारी लाभ देती है।

शाम के समय भूलकर भी न करें ये गलतियां

  • लेट नाइट कैफीन: रात 8:00 बजे के बाद चाय, कॉफी, डार्क चॉकलेट या किसी भी तरह के एनर्जी ड्रिंक का सेवन नींद की गहराई (डीप स्लीप) को नष्ट कर देता है, जिससे अगली सुबह शरीर भारी और थका हुआ रहता है।

  • मसालेदार भोजन से तौबा: रात में अत्यधिक तीखा या गरिष्ठ भोजन खाने से 'एसिड रिफ्लक्स' (सीने में जलन) की समस्या बढ़ जाती है, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए भी ठीक नहीं है।

  • जैविक घड़ी का असंतुलन: प्रतिदिन सोने और जागने का समय बदलना शरीर की जैविक घड़ी को भ्रमित कर देता है। इसका सीधा दुष्प्रभाव आपके थायराइड, इंसुलिन जैसे महत्वपूर्ण हार्मोन्स, ऊर्जा के स्तर और समग्र मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है।

आदिवासी जिलों में बीमारी की दस्तक, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए दिशा-निर्देश

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पहाड़ों की शांत वादियों वाले हिमाचल प्रदेश के जनजातीय अंचलों में इन दिनों स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक गंभीर संक्रामक बीमारी के फैलने की आशंका को लेकर अलर्ट जारी कर रहे हैं। राज्य के सुदूर आदिवासी जिलों— चंबा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति में जमीनी स्तर पर किए गए एक व्यापक सामुदायिक स्वास्थ्य सर्वे में चौंकाने वाली बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बीते एक वर्ष के दौरान इन क्षेत्रों में रहने वाले हर पांच में से एक व्यक्ति ने यौन संचारित रोग (एसटीडी) से मिलते-जुलते लक्षणों का सामना करने की बात स्वीकार की है।

यह महत्वपूर्ण अध्ययन जनजातीय विकास विभाग और शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) के सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया गया था। इस शोध के नतीजों को स्वास्थ्य वैज्ञानिक एक बड़ी सामूहिक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं। चिंता की बात यह है कि समस्या केवल बीमारी के लक्षणों तक सीमित नहीं है, बल्कि रिपोर्ट से पता चलता है कि एक बड़ी आबादी इस संक्रमण से बचने के सबसे सुलभ और सुरक्षित संसाधनों का उपयोग करने से कतरा रही है।

सामुदायिक सर्वे के मुख्य और चौंकाने वाले आंकड़े

जिलाएसटीडी लक्षणों की व्यापकता दर
चंबा24.2 प्रतिशत
किन्नौर20.1 प्रतिशत
लाहौल-स्पीति15.7 प्रतिशत
औसत व्यापकता (तीनों जिले)20.0 प्रतिशत

सामाजिक झिझक और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां बनीं रोड़ा

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि आज के आधुनिक दौर में भी यौन स्वास्थ्य जैसे विषयों पर खुलकर बात न करना, सामाजिक संकोच और सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित पहुंच इस समस्या को और अधिक गंभीर बना रही है। लोक-लाज के डर से कई नागरिक शरीर में लक्षण दिखाई देने के बावजूद समय पर चिकित्सीय जांच नहीं कराते। इस गोपनीयता के कारण संक्रमण लंबे समय तक शरीर में दबा रहता है और अनजाने में ही अन्य लोगों तक स्थानांतरित (फैलने) होने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

इस विशेष शोध के अंतर्गत 15 से 49 वर्ष के आयु वर्ग के करीब 3,000 नागरिकों को शामिल किया गया था, जिनमें 54.3 प्रतिशत पुरुष और 45.7 प्रतिशत महिलाएं थीं। कुल मिलाकर, कम से कम एक एसटीडी लक्षण की मौजूदगी की दर 20 फीसदी दर्ज की गई है। इन तीनों आदिवासी जिलों में चंबा जिला संक्रमण के लक्षणों के मामले में शीर्ष पर रहा।

बचाव के उपायों से दूरी और आधी-अधूरी जानकारी

रिपोर्ट के निष्कर्ष साफ तौर पर इशारा करते हैं कि सुरक्षात्मक उपायों के प्रति घोर लापरवाही ही इस खतरे को बढ़ाने का मुख्य कारण है:

  • सुरक्षा संसाधनों की अनदेखी: सर्वे में शामिल केवल 24.9 प्रतिशत लोगों ने माना कि वे संबंधों के दौरान सुरक्षात्मक साधनों (कंडोम) का नियमित उपयोग करते हैं।

  • शून्य उपयोग दर: इसके विपरीत, 33 फीसदी से अधिक आबादी ऐसी थी जिन्होंने जीवन में कभी भी इन सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल नहीं किया।

  • स्क्रीनिंग की बेहद धीमी रफ्तार: जानलेवा बीमारियों जैसे एचआईवी और हेपेटाइटिस की समय पर जांच कराने की दर भी निराशाजनक रूप से केवल 2 प्रतिशत पाई गई।

अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि लोगों ने इन बीमारियों का नाम (72 प्रतिशत) तो सुन रखा है, लेकिन इसके वैज्ञानिक बचाव को लेकर उनकी समझ आधी-अधूरी है। सिर्फ 46.6 प्रतिशत लोग ही यह जानते थे कि कंडोम का सही इस्तेमाल संक्रमण के इस चक्र को तोड़ने में कारगर साबित हो सकता है।

क्या कहते हैं सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

शिमला के वरिष्ठ चिकित्सकों का कहना है कि यह शोध उन सुदूर पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों के वास्तविक हालात बयां करता है, जहां आबादी बिखरी हुई है और मौसम की प्रतिकूलता के कारण साल के कई महीने संपर्क कटा रहता है। कठिन भौगोलिक रास्ते और सीमित क्लीनिकल संसाधनों के चलते इन संवेदनशील विषयों पर स्वास्थ्य शिक्षा और स्क्रीनिंग कैंप आयोजित करना स्वास्थ्य कर्मियों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता। आज भी ग्रामीण समाज में इसे एक बेहद गोपनीय और संवेदनशील विषय माना जाता है, जिससे लोग खुलकर डॉक्टरों से अपनी समस्या साझा करने में कतराते हैं।

अनदेखी से बढ़ सकता है एचआईवी और कैंसर का जोखिम

चिकित्सा विज्ञान के वैश्विक अध्ययनों के अनुसार, जिन मरीजों में एसटीडी के शुरुआती लक्षण जैसे कि जननांगों में घाव, अल्सर या लगातार सूजन रहती है, उनमें एचआईवी संक्रमण की चपेट में आने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। क्षतिग्रस्त त्वचा के रास्ते खतरनाक वायरस शरीर में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं।

इसके साथ ही, कुछ विशेष प्रकार के यौन जनित संक्रमण आगे चलकर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का रूप ले सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) का लंबे समय तक बने रहना महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की मुख्य वजह बनता है। ठीक इसी प्रकार, हेपेटाइटिस बी वायरस का पुराना संक्रमण सीधे तौर पर लिवर कैंसर के जोखिम को आमंत्रित करता है। इसलिए विशेषज्ञ इन सुदूर क्षेत्रों में तत्काल बड़े स्तर पर अवेयरनेस और मेडिकल कैंप लगाने की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं।

मेडिसिन खरीदने से पहले पढ़ें यह जरूरी सूचना, नहीं तो हो सकती है परेशानी

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देश में आम जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने तत्काल प्रभाव से 16 फिक्स्ड-डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं के निर्माण, विपणन (बिक्री) और वितरण पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

क्यों लगाया गया इन दवाओं पर प्रतिबंध?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और औषधि विशेषज्ञों की गहन समीक्षा में यह बात सामने आई है कि इन कॉकटेल (मिश्रित) दवाओं के फॉर्मूले का कोई भी ठोस चिकित्सीय या वैज्ञानिक आधार नहीं है। सरकार के अनुसार:

  • जोखिम की आशंका: इन कॉम्बिनेशन दवाओं के इस्तेमाल से मरीजों को फायदे के बजाय गंभीर स्वास्थ्य संबंधी नुकसान होने का अंदेशा बना हुआ था।

  • प्रभावशीलता की कमी: वैज्ञानिक पैमानों पर यह दवाएं खरी नहीं उतरीं, जिसके कारण इनका लगातार उपयोग इंसानी शरीर के लिए किसी भी तरह से लाभदायक नहीं माना गया।

मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि: स्वास्थ्य मंत्रालय

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस कड़े फैसले पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि यह कदम देशवासियों की सेहत की सुरक्षा और दवाओं के सही व सुरक्षित इस्तेमाल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस प्रतिबंध का मुख्य लक्ष्य यह पक्का करना है कि देश के बाजारों में केवल वही दवाएं उपलब्ध रहें जो पूरी तरह से असरदार, सुरक्षित और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान द्वारा प्रमाणित हों।

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