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पहले विस्फोट में घायल, फिर रास्ते में दूसरा ब्लास्ट; पाकिस्तान में दहशत

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इस्लामाबाद| पाकिस्तान के अशांत उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में शनिवार को हुए दो सिलसिलेवार और भीषण बम धमाकों ने देश में पैर पसार रहे आतंकवाद के खौफनाक चेहरे को एक बार फिर उजागर कर दिया है। उग्रवादियों ने बेहद सुनियोजित तरीके से पहले एक आम नागरिक गाड़ी को अपना निशाना बनाया। इसके बाद, जब स्थानीय लोग और मददगार पहले धमाके के जख्मियों को लेकर अस्पताल की तरफ भाग रहे थे, तभी रास्ते में दूसरा तगड़ा विस्फोट कर दिया गया। इन दोनों कायराना हमलों में कम से कम सात नागरिकों की जान चली गई है, जबकि दर्जन भर से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय पुलिस प्रशासन ने इसे रिमोट कंट्रोल के जरिए अंजाम दिया गया आईईडी (IED) ब्लास्ट करार दिया है। घटना के फौरन बाद सेना और अर्धसैनिक बलों ने पूरे संवेदनशील बेल्ट की घेराबंदी कर बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

पहला धमाका: डैटसन गाड़ी के उड़े परखच्चे, 5 ने मौके पर ही तोड़ा दम

सुरक्षा अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, पहला आईईडी धमाका बन्नू जिले के फांग मूसा खेल नामक ग्रामीण इलाके में हुआ। यहाँ एक निजी डैटसन गाड़ी आम मुसाफिरों को लेकर डोमेल की तरफ बढ़ रही थी, तभी सड़क किनारे छिपाकर रखे गए रिमोट संचालित बम में अचानक ब्लास्ट कर दिया गया। विस्फोट का असर इतना घातक था कि वह चौपहिया गाड़ी पूरी तरह मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। इस शुरुआती हमले में ही पांच यात्रियों की घटना स्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि गाड़ी में बैठे अन्य लोग गंभीर रूप से लहूलुहान हो गए। धमाके की आवाज सुनते ही नजदीकी गांवों के लोग राहत और बचाव के लिए दौड़े और उन्होंने घायलों को गाड़ियों में लादना शुरू किया।

दूसरा विस्फोट: एम्बुलेंस के रास्ते में हमला, मलबे में तब्दील हुई दूसरी गाड़ी

रोंगटे खड़े कर देने वाली बात यह रही कि जब पहले हमले के पीड़ितों को इलाज के लिए ले जाया जा रहा था, ठीक उसी रूट पर करीब एक किलोमीटर की दूरी पर दूसरा जोरदार धमाका हुआ। चश्मदीदों के अनुसार, आतंकियों ने इस बार उन वाहनों को टारगेट किया जो घायलों की मदद के लिए आगे बढ़े थे। दूसरे विस्फोट की चपेट में आने से दो और नागरिकों की मौत हो गई और वह गाड़ी भी पूरी तरह तबाह हो गई। बैक-टू-बैक दो बम धमाकों के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई और दहशत का माहौल पैदा हो गया। खुफिया एजेंसियों को अंदेशा है कि आतंकियों ने रेस्क्यू टीम और आम लोगों को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने के लिए ही इस डबल-ब्लास्ट की रणनीति बनाई थी।

अस्पतालों में इमरजेंसी लागू, नए बमों की तलाश में जुटे खोजी कुत्ते

वारदात की भयावहता को देखते हुए रेस्क्यू टीमों को तुरंत घटना स्थल के लिए रवाना किया गया। मृतकों के शवों और खून से लथपथ घायलों को तुरंत डोमेल ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र और खलीफा गुल नवाज टीचिंग अस्पताल पहुंचाया गया, जहाँ आपातकाल (इमरजेंसी) घोषित कर दी गई है। दूसरी तरफ, सुरक्षा बलों ने अतिरिक्त बारूदी सुरंगों या बमों की आशंका के मद्देनजर पूरे हाईवे को सील कर दिया है। खोजी कुत्तों और बम निरोधक दस्ते की मदद से झाड़ियों और संदिग्ध रास्तों की सघन चेकिंग की जा रही है ताकि किसी और अनहोनी को रोका जा सके।

हुक्मरानों ने जताई संवेदना, आतंकवाद के वित्तीय तंत्र को ध्वस्त करने की मांग

इस खूनी खेल पर नाराजगी जाहिर करते हुए पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हमले की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है और बेगुनाह लोगों की मौत पर गहरा रंज प्रकट किया है। राष्ट्रपति ने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि न केवल बंदूक उठाने वाले आतंकियों, बल्कि उन्हें पीछे से लॉजिस्टिक सपोर्ट, पनाह और वित्तीय मदद (फंडिंग) देने वाले आकाओं के खिलाफ भी निर्णायक कार्रवाई की जाए। वहीं, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और नेशनल असेंबली के अध्यक्ष अयाज सादिक ने भी इस घटना को बेहद कायराना और इंसानियत को शर्मसार करने वाला कृत्य बताया है।

आतंकवाद का नया गढ़ बनता जा रहा है बन्नू जिला

भौगोलिक रूप से संवेदनशील बन्नू जिला पिछले कई महीनों से उग्रवादी संगठनों की हिंसक गतिविधियों का मुख्य केंद्र बनकर उभरा है। हालिया हफ्तों में यहाँ स्थानीय पुलिसकर्मियों, सीमा सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को लगातार निशाना बनाया गया है। बीते हफ्ते भी चरमपंथियों ने रणनीतिक रूप से अहम एक पुल को उड़ाने की नाकाम कोशिश की थी, जबकि जून महीने की शुरुआत में ही दो अलग-अलग हमलों में पुलिस के जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। क्षेत्र में लगातार खराब होती कानून-व्यवस्था और बढ़ते बारूदी हमलों के कारण स्थानीय कबीलाई समाज में भारी आक्रोश है, और हाल ही में आयोजित एक पारंपरिक जिरगा (पंचायत) में भी स्थानीय नेताओं ने सरकार और फौज से इस इलाके को आतंकवाद से पूरी तरह मुक्त कराने की पुरजोर मांग की थी।

बस और कार की आमने-सामने की भिड़ंत, तीन लोगों की मौके पर मौत

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जबलपुर। मध्य प्रदेश के दमोह-जबलपुर राज्य राजमार्ग (स्टेट हाईवे) पर शुक्रवार की देर शाम एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। यहाँ एक यात्री बस और तेज रफ्तार कार के बीच हुई आमने-सामने की जोरदार टक्कर में कार सवार एक ही परिवार के तीन सदस्यों की घटना स्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस भीषण दुर्घटना में दो अन्य लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं, जिन्हें स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार देने के बाद बेहतर इलाज के लिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। हादसे की भयावहता की सूचना मिलते ही जिला पुलिस अधीक्षक (SP) आनंद कलादगी तुरंत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

सड़क दुर्घटना में उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार

मौके पर सुरक्षा व्यवस्था संभालने पहुंचे थाना प्रभारी विकास सिंह चौहान ने दुर्घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि इस दर्दनाक भिड़ंत में कार के भीतर मौजूद अखिलेश प्रजापति, मुकेश प्रजापति और माया प्रजापति ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था, ये तीनों आपस में रिश्तेदार थे और एक ही परिवार से ताल्लुक रखते थे। वहीं, कार चला रहे ड्राइवर रशीद खान (निवासी शाहगढ़) और परिवार की महिला सदस्य रीना प्रजापति गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका डॉक्टरों की देखरेख में सघन उपचार किया जा रहा है।

क्रॉसिंग के दौरान पुरेनहाउ के पास आपस में टकराए दोनों वाहन

घटना स्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यात्री बस जबलपुर से सवारियां लेकर दमोह की ओर आ रही थी, जबकि कार कटनी मार्ग से होते हुए शाहगढ़ की तरफ जा रही थी। जैसे ही दोनों वाहन जबेरा मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित पुरेनहाउ गांव के समीप पहुंचे, तभी एक मोड़ पर क्रॉसिंग के दौरान दोनों में आमने-सामने की भीषण टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह लोहे के मलबे में तब्दील हो गया। जबेरा स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी (CBMO) डॉ. डी.के. राय ने बताया कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही तीन नागरिकों की सांसें थम चुकी थीं। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम (शव परीक्षण) की वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।

कटर से गाड़ी के दरवाजे काटकर फंसे हुए लोगों को निकाला बाहर

टक्कर की गूंज सुनकर आस-पास के ग्रामीण तुरंत मदद के लिए दौड़े। कार पूरी तरह से चकनाचूर होकर पिचक गई थी, जिसके कारण घायल और मृतक अंदर बुरी तरह फंस गए थे। सूचना मिलते ही पहुंची स्थानीय पुलिस ने ग्रामीणों के सहयोग से लोहे के कटर और रॉड की मदद से कार के दरवाजों और खिड़कियों को कड़े संघर्ष के बाद तोड़ा, जिसके बाद फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला जा सका। हालांकि, तब तक तीन लोग दम तोड़ चुके थे। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को क्रेन की मदद से हाईवे से हटाकर यातायात को सुचारू रूप से बहाल कराया है।

TMC में वित्तीय घमासान, 440 करोड़ विवाद में तीन बैंक अकाउंट फ्रीज

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल के हालिया विधानसभा चुनावों में मिली शिकस्त के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की मुखिया ममता बनर्जी के राजनीतिक गलियारे में उथल-पुथल मची हुई है। पार्टी के भीतर विधायकों और सांसदों के बगावती सुरों के बीच अब संगठन को एक और बड़ा झटका लगा है, जहां टीएमसी के तीन प्रमुख बैंक खातों को पूरी तरह से 'डेबिट फ्रीज' कर दिया गया है। इन खातों में लगभग 440 करोड़ रुपये की विशाल धनराशि जमा है, जिसके निकासी परिचालन पर अब पूरी तरह रोक लग गई है। यह दंडात्मक कार्रवाई पार्टी के ही असंतुष्ट विधायकों की लिखित शिकायत के बाद अमल में लाई गई है, जिन्होंने इन पैसों के वास्तविक स्रोतों की उच्च स्तरीय आपराधिक जांच कराने की मांग उठाई थी। इस नए घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर वित्तीय खजाने और सांगठनिक वर्चस्व पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए चल रहे अंदरूनी शीतयुद्ध को और अधिक हवा दे दी है।

क्या है खातों के फ्रीज होने का गणित और पार्टी के भीतर दो गुटों का टकराव

जांच से जुड़े वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एक निजी वाणिज्यिक बैंक में संचालित इन तीन खातों को 'डेबिट फ्रीज' की श्रेणी में डालने का तात्पर्य यह है कि अब इन खातों से किसी भी प्रकार का वित्तीय भुगतान, चेक क्लीयरेंस या ऑनलाइन ट्रांजैक्शन नहीं किया जा सकेगा, हालांकि पार्टी के देशव्यापी चंदे या अन्य माध्यमों से इसमें पैसे जमा (क्रेडिट) होने की प्रक्रिया सुचारू रहेगी। दरअसल, यह पूरा बवाल टीएमसी के दो शीर्ष धड़ों—पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के गुटों के बीच वित्तीय नियंत्रण को लेकर छिड़ी वर्चस्व की जंग का नतीजा है। बनर्जी खेमे के समर्थक 10 बागी विधायकों ने बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के तहत साइबर क्राइम थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए एक प्राथमिकी (एफआईआर) पंजीकृत कराई थी, जिसमें खातों में जमा अकूत संपत्ति के वैधानिक स्रोतों पर गहरे सवाल खड़े किए गए थे।

संदिग्ध 'कट-मनी' और घोटालों की काली कमाई को सफेद करने का संगीन आरोप

बागी विधायकों द्वारा सौंपी गई शिकायत की प्रति के मुताबिक, जांचकर्ताओं से इस बात की गहराई से तफ्तीश करने का पुरजोर आग्रह किया गया है कि क्या खातों में मौजूद यह फंड पूरी तरह विधिक और पारदर्शी तरीकों से जुटाया गया है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा अवैध तंत्र सक्रिय था। शिकायत पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि पार्टी के रसूख का दुरुपयोग कर बेईमानी से जुटाए गए संदिग्ध 'कट-मनी' कलेक्शन, सार्वजनिक सरकारी फंडों के अवैध डायवर्जन तथा विभिन्न वित्तीय घोटालों से अर्जित काली कमाई को घुमा-फिराकर (मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए) इन बैंक खातों में खपाया गया हो सकता है। दूसरी तरफ, ममता बनर्जी के वफादार विधायक कुणाल घोष सहित अन्य नेताओं ने माना है कि उन्हें पुलिसिया कार्रवाई की भनक लगी है, परंतु वे अभी बैंक और प्रशासन की ओर से मिलने वाले आधिकारिक नोटिस और विवरण का इंतजार कर रहे हैं।

अरूप बिस्वास के पत्र से शुरू हुआ विवाद, कोषाध्यक्ष पद को लेकर छिड़ा नया घमासान

इस पूरे वित्तीय विवाद में नया मोड़ तब आया था जब कुछ दिनों पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता अरूप बिस्वास ने स्वयं बैंक प्रबंधन को एक पत्र लिखकर नेतृत्व का विवाद सुलझने तक पार्टी के करीब 500 करोड़ से अधिक के फंड के संचालन को रोकने की अपील की थी। मजे की बात यह है कि यह शिकायतें उसी साइबर सेल थाने में दर्ज हुई हैं, जो अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी के कोलकाता आगमन के दौरान हुए वित्तीय प्रबंधन की अनियमितताओं के मामले में बिस्वास के खिलाफ जांच कर रहा है। इस बीच, ममता खेमे के कद्दावर नेता कुणाल घोष ने तीखा पलटवार करते हुए स्पष्ट किया है कि अरूप बिस्वास अब पार्टी के आधिकारिक कोषाध्यक्ष नहीं रहे हैं, क्योंकि 5 जून को आयोजित कार्यकारिणी की उच्च स्तरीय बैठक में सर्वसम्मति से सुभाशीष चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया जा चुका है। ऐसे में बिस्वास को पार्टी के किसी भी बैंक खाते या आर्थिक लेन-देन पर बयानबाजी करने का कोई विधिक अधिकार नहीं है।

जबलपुर में आग का कहर, बेकरी जलने से बड़ा आर्थिक नुकसान

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जबलपुर। संसकारधानी के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले घनी आबादी वाले खटीक मोहल्ला स्थित 'जैन बेकरी' में शनिवार, 20 जून की सुबह अचानक भड़की भीषण आग से पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। देखते ही देखते आग की चिंगारियों ने विकराल रूप अख्तियार कर लिया, जिससे बेकरी की दुकान सहित उससे सटे रिहायशी मकान का एक बड़ा हिस्सा भी आग की लपटों की चपेट में आ गया। गनीमत यह रही कि जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय मकान के भीतर परिवार के कई सदस्य मौजूद थे, जिन्हें पड़ोसियों की सजगता, बहादुरी और त्वरित सूझबूझ के चलते वक्त रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस तत्परता की वजह से एक बहुत बड़ा और दर्दनाक हादसा होने से टल गया।

लपटें और धुआं देख दौड़े पड़ोसी, दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद पाया काबू

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शनिवार सुबह तड़के बेकरी के भीतर से अचानक काले धुएं का गुबार और आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठती देख स्थानीय निवासियों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत स्थानीय पुलिस प्रशासन और अग्निशमन दल (फायर ब्रिगेड) को दुर्घटना की जानकारी दी। आपातकालीन सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां और बचाव दल तुरंत घटना स्थल पर पहुंचे। फायर फाइटर्स ने स्थानीय युवाओं की मदद से मोर्चा संभाला और काफी जद्दोजहद व कड़ी मशक्कत करने के बाद आग पर पूरी तरह से काबू पाया।

हालांकि, जब तक आग पर नियंत्रण पाया जाता, तब तक बेकरी के भीतर रखी भारी मात्रा में खाद्य सामग्री, कीमती फर्नीचर, बिजली के बड़े उपकरण (ओवन, फ्रिज) और अन्य व्यावसायिक सामान पूरी तरह जलकर खाक हो चुके थे। इसके अलावा, आग की तपिश और लपटें घर के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचने के कारण घरेलू उपयोग का कीमती सामान और दस्तावेज भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

शॉर्ट सर्किट बना हादसे की वजह, कोई जनहानि नहीं

प्रशासनिक और तकनीकी टीम द्वारा की गई शुरुआती तफ्तीश में इस आगजनी का मुख्य कारण बिजली के बोर्ड में हुआ शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। इस पूरे हादसे में सबसे बड़ी राहत और संतोष की बात यह रही कि किसी भी नागरिक या कर्मचारी को आंच नहीं आई और कोई जनहानि (कैजुअलिटी) नहीं हुई। वर्तमान में स्थानीय पुलिस और दमकल अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा इस हादसे से हुए कुल आर्थिक नुकसान का सटीक मूल्यांकन और सर्वे किया जा रहा है। इस अप्रत्याशित घटना के बाद वार्ड में काफी देर तक तनाव और सुरक्षा को लेकर चिंता का माहौल देखा गया, और स्थिति का जायजा लेने के लिए मौके पर सैकड़ों लोगों का हुजूम जुटा रहा।

स्थापना दिवस पर शिंदे का उद्धव ठाकरे पर बड़ा हमला, दी सख्त चेतावनी

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मुंबई। महाराष्ट्र के राजनैतिक गलियारे में एक बार फिर तीखे बयानों और जुबानी तीरों का दौर चरम पर पहुंच गया है। शिवसेना के स्थापना दिवस के भव्य समारोह के मंच से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे और उनके धड़े (यूबीटी) पर तीखा और सीधा हमला बोला है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट संकेत देते हुए कहा कि उद्धव खेमे में मची भगदड़ और बिखराव की प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं हुई है, बल्कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति में और भी बड़े फेरबदल व चौंकाने वाले घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं। शिंदे के इस आक्रामक तेवर से राजनैतिक गलियारों में यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि यदि उनके दावों में सच्चाई है, तो उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली बची-खुची पार्टी में एक बार फिर बड़ी बगावत देखने को मिल सकती है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए ठाकरे के नेतृत्व क्षमता को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि यदि कोई शीर्ष नेता अपने ही करीबियों और विश्वस्तों को संभालकर साथ रखने में अक्षम साबित हो रहा है, तो उसे दूसरों पर लांछन लगाने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए। सीएम ने यह भी दावा किया कि वर्तमान महायुति सरकार पूरी तरह अडिग है और विपक्ष के कई बड़े चेहरे लगातार उनके संपर्क में बने हुए हैं।

कुत्ते झुंड में भौंकते हैं और शेर अकेला आता है वाले बयान पर मचा सियासी बवाल

स्थापना दिवस के मंच से विरोधियों को ललकारते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बेहद तल्ख लहजे में कहा, “अभी जो कुछ भी राजनीतिक उथल-पुथल हुई है, वह तो महज एक ट्रेलर है, पूरी की पूरी असली फिल्म का आना तो अभी बाकी है। आज आपके समक्ष जो खड़ा है, वह एक शेर है। कुछ लोग कुत्तों की भांति लगातार भौंकने का काम कर रहे हैं, जो कल और परसों भी इसी तरह जारी रहेगा। मैं आप सभी को एक बात पूरी तरह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि कुत्ते हमेशा झुंड बनाकर ही भौंकते हैं, जबकि शेर हमेशा अकेला ही मैदान में आता है। जब शेर शिकार पर निकलता है या अपनी दहाड़ मारता है, तब भी पीछे से कुत्ते केवल भौंक ही सकते हैं। यही असली और जीवंत शिवसेना है, जो आज पूरे महाराष्ट्र के भीतर पूरी मजबूती और स्वाभिमान के साथ सीना ताने खड़ी दिखाई दे रही है।” दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे खेमे ने मुख्यमंत्री के इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे केवल मानसिक और राजनैतिक दबाव बनाने का एक खोखला प्रयास करार दिया है, जिसके चलते पार्टी आलाकमान अपने बचे हुए सांसदों और विधायकों को एकजुट रखने के लिए लगातार आंतरिक मैराथन बैठकें आयोजित कर रहा है।

कांग्रेस ने कभी मातोश्री को लालच से नहीं देखा और शब्द का सम्मान किया

दूसरी तरफ, शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी अपने विरोधियों पर कड़ा पलटवार करते हुए दल के मूल सिद्धांतों को रेखांकित किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि शिवसेना किसी अन्य दल में विलीन होने या घुटने टेकने के लिए पैदा नहीं हुई है, बल्कि इसका निर्माण ही मराठी मानुष के अधिकारों की रक्षा और उनके सतत संघर्ष के लिए किया गया था। अपने राजनैतिक सफर का जिक्र करते हुए ठाकरे ने स्वीकार किया, “मैं इस बात से कतई इनकार नहीं करूंगा कि कांग्रेस ने पूर्व में हमें कभी राजनीतिक रूप से परेशान नहीं किया। हमारी राजनीति का एक बहुत बड़ा हिस्सा कांग्रेस की विचारधारा के विरोध में ही बीता है, क्योंकि उस दौर में हम भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में थे और वंदनीय बालासाहेब ठाकरे पूरी ताकत से उनके समर्थन में खड़े रहते थे।” उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ने भले ही पूर्व में हमारे कुछ नेताओं को अपने पाले में किया हो, परंतु उन्हें कभी शीर्ष पद (मुख्यमंत्री) की कुर्सी तक नहीं पहुंचाया, लेकिन इन सबके बावजूद कांग्रेस ने कभी भी 'मातोश्री' की तरफ लालच भरी नजरों से नहीं देखा और कम से कम अपने दिए हुए वचनों का सम्मान करना बखूबी जानती थी।

यदि आरोप सत्य साबित हुए तो तत्काल छोड़ दूंगा शिवसेना प्रमुख का पद

अपने संबोधन के अंतिम चरण में उद्धव ठाकरे ने खुद पर लग रहे आरोपों को लेकर जनता की अदालत में अपनी बात रखी। उन्होंने अत्यंत आक्रामक और गंभीर मुद्रा में कहा, “मेरे राजनीतिक चरित्र और निर्णयों पर विरोधियों द्वारा जो भी लांछन या गद्दारी के आरोप मढ़े जा रहे हैं, यदि सूबे की जनता को लगता है कि उन आरोपों में रत्ती भर भी सत्यता है, तो वे खुलकर कहें। मैं आज ही पूरी गरिमा के साथ शिवसेना पक्ष प्रमुख का यह सर्वोच्च पद छोड़ने के लिए सहर्ष तैयार हूं।” उन्होंने भाजपा और शिंदे गुट पर निशाना साधते हुए कहा कि वे लोकतंत्र की मूल आत्मा को ठेस पहुंचा रहे हैं, परंतु वे किसी भी सूरत में अपनी विरासत को धोखेबाजों के हवाले नहीं करेंगे। दोनों ही पक्षों के इन बेहद आक्रामक और तीखे बयानों से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की धरती पर यह सियासी जंग और अधिक उग्र रूप धारण करने वाली है।

सेना के डॉक्टर पति पर आरोपों की बौछार, बेटी को न्याय दिलाने की गुहार

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जबलपुर। नवविवाहिता कविता नागार्जुन की रहस्यमयी और संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का संवेदनशील मामला अब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की चौखट पर पहुंच गया है। मृतका के पिता ने स्थानीय पुलिस प्रशासन की अब तक की कार्यशैली और तफ्तीश पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने पूरे मामले की तह तक जाने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से स्वतंत्र जांच कराने की गुहार लगाते हुए जबलपुर खंडपीठ में एक क्रिमिनल रिट पिटीशन (याचिका) दायर की है। गौरतलब है कि 9 जून 2025 को, विवाह के महज 3 महीने के भीतर ही कविता की संदेहास्पद स्थिति में जान चली गई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि घटना वाले दिन ही वह अपने पति मेजर डॉ. ओम नागार्जुन के साथ रहने के लिए मिलिट्री कैंट इलाके में आई थी। पिता का सीधा आरोप है कि साक्ष्यों को छुपाने के लिए अस्पताल ले जाने में जानबूझकर देरी की गई, और यह पूरी तरह से दहेज हत्या का संगीन मामला है।

ससुराल पक्ष की थ्योरी फेल: अस्पताल के दस्तावेजों से हुआ बड़ा खुलासा

वारदात के बाद कविता के पति और ससुराल वालों ने दावा किया था कि वह बाथरूम में अचानक पैर फिसलने से गिर गई थी, जिसके बाद दिल का दौरा पड़ने (हार्ट अटैक) की वजह से उसकी असमय मृत्यु हो गई। हालांकि, कविता के पिता ने अस्पताल के आधिकारिक मेडिकल रिकॉर्ड्स के हवाले से इस थ्योरी को पूरी तरह खारिज करते हुए कोर्ट के सामने एक बड़ा विरोधाभास पेश किया है। याचिका में दर्ज तथ्यों के मुताबिक, बाथरूम में गिरने की कथित घटना के करीब 3 घंटे बाद कविता को सैन्य अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे 'ब्रॉट डेड' (अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत) घोषित कर दिया। पिता ने कानूनी सवाल उठाया है कि अगर यह महज एक आकस्मिक दुर्घटना थी, तो तड़पती हुई पीड़िता को तुरंत चिकित्सीय सहायता क्यों नहीं दिलाई गई? यह तीन घंटे का लंबा समय ससुराल पक्ष की संलिप्तता की ओर साफ इशारा करता है।

करोड़ों के खर्च और 100 तोला सोने के बाद भी 2 करोड़ की अतिरिक्त मांग

पीड़ित परिवार ने दामाद मेजर डॉ. ओम नागार्जुन और उनके करीबियों पर प्रताड़ना के बेहद गंभीर आरोप मढ़े हैं। पिता के अनुसार, उन्होंने बेटी की खुशहाली के लिए विवाह में अपनी हैसियत से कहीं आगे जाकर करीब 100 तोला सोना और लगभग 3 करोड़ रुपये नकद व अन्य सामग्री के रूप में खर्च किए थे। इतनी बड़ी रकम और कीमती उपहारों के बाद भी ससुराल वालों का लालच कम नहीं हुआ। आरोप है कि वे कविता को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर मायके से 2 करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी लाने का लगातार दबाव बना रहे थे। मांग पूरी न होने पर सोची-समझी साजिश के तहत इस वारदात को अंजाम दिया गया। अब इस पूरे घटनाक्रम और स्थानीय पुलिस की ढीली कार्रवाई के बीच, उच्च न्यायालय की आगामी सुनवाई और उसके रुख पर शहर के कानूनविदों की नजरें टिकी हुई हैं।

POCSO केस में बड़ा अपडेट, केंद्रीय मंत्री के बेटे को मिली 7 दिन की अंतरिम जमानत

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हैदराबाद। तेलंगाना के हैदराबाद में मलकाजगिरि स्थित यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून से जुड़े एक विशेष न्यायालय ने केंद्रीय मंत्री बंदी संजय के पुत्र बंदी साई भागीरथ को सात दिनों की अवधि के लिए अंतरिम जमानत प्रदान कर दी है। आरोपी के विरुद्ध बशीर बाग पुलिस थाने में गंभीर धाराओं के तहत पॉक्सो अधिनियम का आपराधिक मामला पंजीकृत है। आधिकारिक सूत्रों से छनकर आई जानकारी के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल मामले में विधिक प्रक्रिया के तहत आगामी कदम उठाए जा रहे हैं।

वार्षिक परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए मिली कोर्ट से अस्थायी राहत

न्यायिक सूत्रों के अनुसार, विशेष अदालत ने आरोपी भागीरथ की अंतिम परीक्षाओं की अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए यह अस्थायी राहत दी है, ताकि वह बिना किसी बाधा के अपनी परीक्षा में उपस्थित होकर पर्चे दे सके। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह अंतरिम जमानत केवल सात दिनों की समयावधि के लिए ही मान्य होगी और आरोपी को न्यायालय द्वारा अधिरोपित की गई सभी सख्त शर्तों व विधिक नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। इससे पूर्व, कथित यौन उत्पीड़न के इस संगीन मामले में घिरे बंदी साई भागीरथ को कोर्ट के आदेश पर 29 मई तक के लिए न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में भेज दिया गया था, जिसके प्रत्युत्तर में बचाव पक्ष के विधि विशेषज्ञों ने पुलिस की रिमांड अर्जी का पुरजोर विरोध करते हुए उसे खारिज करने के लिए एक विस्तृत प्रतिवाद पत्र दाखिल किया था।

telangana उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत सख्त सुरक्षा उपायों की मांग

बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की ओर से न्यायालय के समक्ष यह दलील पेश की गई कि यदि माननीय अदालत अभियोजन पक्ष को पूछताछ की अनुमति देती भी है, तो तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन संख्या 165/2022 में प्रतिपादित किए गए सभी सुरक्षात्मक विधिक सुरक्षा उपायों को कड़ाई से लागू किया जाए। आरोपी के वकील ने विशेष आग्रह किया कि किसी भी प्रकार की पूछताछ का समय केवल प्रातः 10:00 बजे से सायंकाल 5:30 बजे के मध्य ही नियत किया जाए और प्रक्रिया समाप्त होने के बाद भागीरथ को प्रतिदिन शाम 7:00 बजे तक चेरलापल्ली केंद्रीय कारागार के जेल अधीक्षक की सुरक्षित कस्टडी में वापस सुपुर्द कर दिया जाए।

चिकित्सीय परीक्षण की अनिवार्यता और कानूनी प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग का दावा

बचाव पक्ष द्वारा रखे गए अन्य विधिक सुरक्षा उपायों में यह शर्त भी शामिल थी कि पुलिसिया पूछताछ की शुरुआत और उसकी समाप्ति के तुरंत बाद जेल के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों द्वारा आरोपी की गहन शारीरिक व मानसिक जांच की जाए। इसके साथ ही यह भी निवेदन किया गया कि पूछताछ की अवधि समाप्त होते ही या अदालत द्वारा मुकर्रर की गई तय तारीख पर आरोपी को अविलंब संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाए। आरोपी के मुख्य अधिवक्ता ने बताया कि भागीरथ ने स्वतः ही कानून का सम्मान करते हुए पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद तय कानूनी प्रक्रियाएं शुरू की गईं। उन्होंने दावा किया कि उनके मुवक्किल ने जांच एजेंसी के साथ हर मोड़ पर पूरा सहयोग किया है और उन्हें पूर्ण विधिक विश्वास है कि निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के पूरा होने पर उनका मुवक्किल पूरी तरह बेदाग और निर्दोष साबित होकर बरी होगा।

शाह का ऐलान, अब एक ही शिवसेना; महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़

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मुंबई। महाराष्ट्र के सियासी गलियारे में शिवसेना की विरासत, पहचान और कमान को लेकर जारी अंतहीन खींचतान के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक बयान जारी किया है। कोल्हापुर में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने दोटूक शब्दों में कहा कि पहले राजनीतिक चर्चाओं में लोगों को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे को 'शिवसेना-शिंदे गुट' कहकर संबोधित करना पड़ता था, परंतु अब परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है और राज्य में कोई 'गुट' शेष नहीं बचा है, बल्कि अब सिर्फ और सिर्फ एक ही शिवसेना अस्तित्व में है। गृह मंत्री का यह बड़ा बयान ऐसे नाजुक मोड़ पर सामने आया है जब सूबे के सियासी समीकरण तेजी से करवट ले रहे हैं और मूल शिवसेना के अस्तित्व को लेकर वैधानिक व राजनैतिक बहस जारी है। शाह ने अपने इस संबोधन में न केवल शिवसेना के मुद्दे पर रुख साफ किया, बल्कि प्रदेश सरकार के ढांचागत विकास कार्यों और देश में चल रहे सांस्कृतिक पुनर्जागरण के एजेंडे को भी जनता के समक्ष मजबूती से रेखांकित किया।

शिवसेना के विभाजन और भ्रम की स्थिति पर अमित शाह का बड़ा राजनैतिक संदेश

जनसभा के मंच से बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि एक दौर वह था जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले जनसमूह को महज एक धड़े या 'शिंदे गुट' के रूप में देखा और परिभाषित किया जाता था। उन्होंने आश्वस्त करते हुए कहा कि अब वह दौर बीत चुका है और जनता के समर्थन व विधिक प्रक्रियाओं के बाद केवल एक मूल शिवसेना ही धरातल पर काम कर रही है। राजनैतिक विश्लेषक शाह के इस वक्तव्य को आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति और सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन की आंतरिक सुदृढ़ता के एक बड़े संकेत के तौर पर देख रहे हैं। गृह मंत्री ने इस माध्यम से विपक्षी खेमे को यह स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया कि शिवसेना के नाम और निशान को लेकर पैदा किया गया हर प्रकार का संशय या भ्रम अब पूरी तरह से समाप्त हो चुका है।

१५०० करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले अंबाबाई कॉरिडोर परियोजना की घोषणा

अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए अमित शाह ने कोल्हापुर की आराध्य देवी माता अंबाबाई मंदिर के जीर्णोद्धार और वहां बनने वाले भव्य कॉरिडोर निर्माण कार्य का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने घोषणा की कि महाराष्ट्र की महायुति सरकार धार्मिक स्थलों के पुनर्विकास और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सुख-सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ बड़े पैमाने पर जुटी हुई है। शाह ने जानकारी साझा की कि इस महात्वाकांक्षी अंबाबाई कॉरिडोर परियोजना के क्रियान्वयन पर लगभग १५०० करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि व्यय की जाएगी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस परियोजना के पूर्ण होने से न केवल हर साल आने वाले लाखों भक्तों की राह सुगम होगी, बल्कि इस पूरे अंचल में धार्मिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी एक नई गति मिलेगी।

मोदी सरकार के १२ वर्षों के कार्यकाल को सांस्कृतिक पुनर्जागरण का स्वर्ण काल बताया

केंद्रीय गृह मंत्री ने केंद्र सरकार की उपलब्धियों का बखान करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में पिछले १२ वर्षों के दौरान देश ने ऐसे कई ऐतिहासिक और युगांतकारी कार्यों को हकीकत में बदलते देखा है, जिन्हें पूर्ववर्ती सरकारों में सर्वथा असंभव मान लिया गया था। उन्होंने अयोध्या में निर्मित भव्य राम मंदिर का प्रत्यक्ष उदाहरण देते हुए कहा कि पहले की पीढ़ियां यह सोचती थीं कि शायद वे अपने जीवनकाल में रामलला का मंदिर नहीं देख पाएंगी, परंतु २०१४ में पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार बनने और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद यह ऐतिहासिक सपना साकार हुआ। शाह ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम के पुनर्विकास, सोमनाथ मंदिर के स्वर्ण निर्माण और मां कामाख्या कॉरिडोर का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान सरकार 'विकास भी, विरासत भी' के मूल मंत्र को चरितार्थ करते हुए देश की सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने और भारत को वैश्विक पटल पर एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर अग्रसर है।

लेबनान को लेकर विवादित बयान से भड़की सियासत, कांग्रेस ने जताई नाराजगी

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने शनिवार को इजरायली मंत्री द्वारा 'पूरे लेबनान को राख में तब्दील करने' की दी गई बेहद भड़काऊ धमकी पर भारत सरकार की रहस्यमयी चुप्पी पर कड़े सवाल दागे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में जहां वाशिंगटन और तेहरान के बीच हुए शांति समझौते का दुनिया भर में सतर्कता के साथ स्वागत किया जा रहा है, वहीं इजरायल के शीर्ष हुक्मरानों के ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयान वैश्विक अमन-चैन के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। कांग्रेस महासचिव ने आशंका जताई कि इस बेहद संवेदनशील मसले पर भारत का मौन रहना देश के दीर्घकालिक कूटनीतिक और रणनीतिक हितों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है।

पीएम मोदी की इजरायल नीति और कॉर्पोरेट हितों के संरक्षण का संगीन आरोप

जयराम रमेश ने केंद्र की मोदी सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय महत्व के इतने बड़े घटनाक्रम पर भी हमेशा की तरह प्रधानमंत्री पूरी तरह खामोश बैठे हैं। उन्होंने तीखा तंज कसते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की इजरायल के प्रति यह अंधभक्ति देश के व्यापक राष्ट्रीय हितों की वेदी पर केवल अपने करीबी 'मोदानी' व्यापारिक साम्राज्य के व्यावसायिक हितों को सुरक्षित और पोषित करने के लिए की जा रही है। कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी का यह तीखा बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल और लेबनान के सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य तल्खी अपने चरम पर पहुंच चुकी है और युद्ध के बादल गहरा रहे हैं।

इतामार बेन-गवीर का भड़काऊ युद्धघोष और लेबनान को पूरी तरह तबाह करने की धमकी

इस विवाद की जड़ में इजरायल के धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर का वह अत्यधिक आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट है, जिसमें उन्होंने लेबनान के खिलाफ पूर्ण युद्ध छेड़ने की वकालत की है। बेन-गवीर ने खुलकर लिखा था कि एक इजरायली मां के बहने वाले हर आंसू के बदले लेबनान की एक हजार माताओं को रुलाया जाना चाहिए और पूरे लेबनान को आग के हवाले कर देना चाहिए। अमेरिकी मध्यस्थता के प्रयासों को ठेंगा दिखाते हुए उन्होंने साफ किया था कि इजरायल को पूरी दुनिया पर यह जाहिर कर देना चाहिए कि उनके नागरिकों और आईडीएफ सैनिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और अब इस सीमाई 'पिंग-पोंग' के खेल को बंद कर, नपे-तुले जवाबों के बजाय आतंक को समूल नष्ट करने के लिए पूर्ण आक्रामक रुख अपनाना होगा।

मनमोहन सिंह और इंदिरा गांधी की सशक्त विदेश नीति का हवाला देकर घेरा

इसी सिलसिले में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पूर्व प्रधानमंत्रियों डॉ. मनमोहन सिंह और इंदिरा गांधी की कूटनीतिक दृढ़ता का उदाहरण देते हुए मौजूदा हुकूमत को जमकर आड़े हाथों लिया। खेड़ा ने देवयानी खोबरागड़े के ऐतिहासिक राजनयिक विवाद का स्मरण कराते हुए कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह ने बेहद शालीन रहते हुए भी अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में महज 24 घंटे के भीतर नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के बाहर से सुरक्षा घेरा हटाकर महाशक्ति को भारत की संप्रभुता का स्पष्ट अहसास करा दिया था। उन्होंने इंदिरा गांधी के दौर की सशक्त विदेश नीति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि यदि यह सरकार अंतरराष्ट्रीय मंच पर इजरायल की निंदा करने का साहस नहीं जुटा पा रही थी, तो कम से कम लाल सागर में इजरायली हमलों के कारण मारे गए निर्दोष भारतीय नाविकों की शहादत पर जवाब मांगते हुए औपचारिक माफी की मांग तो कर ही सकती थी।

‘मैं बॉस हूं’ वाले बयान की ट्रंप ने की व्याख्या, कहा- मजाक को बना दिया मुद्दा

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वॉशिंगटन। जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया के शीर्ष राष्ट्राध्यक्षों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई एक अनौपचारिक टिप्पणी अचानक वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई। सम्मेलन कक्ष में प्रवेश करते वक्त ट्रंप ने बेहद चुटीले अंदाज में मुस्कुराते हुए कहा था, 'मैं बॉस हूँ।' यह बयान देखते ही देखते इंटरनेट मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो गया और इस पर तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे। अब इस पूरे मामले पर खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी स्थिति साफ की है। उन्होंने कहा है कि उनके इस बयान का मकसद किसी अन्य देश के नेता पर अपना रसूख या रौब जमाना बिल्कुल नहीं था, बल्कि वे केवल मजाक कर रहे थे। ट्रंप का मानना है कि उनकी इस टिप्पणी को वास्तविक संदर्भ से काटकर देखा गया और लोगों ने इसे जरूरत से ज्यादा गंभीरता से ले लिया।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी टिप्पणी पर क्या स्पष्टीकरण दिया?

एक विशेष बातचीत के दौरान जब ट्रंप से जी7 बैठक के उस चर्चित वाक्य को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वह एक विशुद्ध रूप से मजाकिया पल था और वे किसी भी वैश्विक नेता के सामने खुद को सर्वश्रेष्ठ या सर्वोपरि दिखाने का प्रयास नहीं कर रहे थे। ट्रंप ने उस पल की कड़ियों को जोड़ते हुए बताया कि जब वे मुख्य बैठक कक्ष के भीतर पहुंचे, तो वहां दुनिया के कई ताकतवर देशों के प्रमुख पहले से ही अपनी कुर्सियों पर मौजूद थे। उसी गंभीर माहौल को थोड़ा दोस्ताना और हल्का-फुल्का बनाने के उद्देश्य से उन्होंने सहज भाव में कह दिया, 'मैं बॉस हूँ।' ट्रंप ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर हैरानी होती है कि कैसे एक बेहद सामान्य से परिहास (मजाक) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतना बड़ा मुद्दा बना दिया गया।

शिखर सम्मेलन के भीतर क्या था वास्तविक घटनाक्रम?

यह पूरा वाकया जी7 शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन की सुबह आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान का है। जैसे ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने कक्ष में कदम रखा और यह टिप्पणी की, वहां मौजूद विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच का तनाव कम हो गया और पूरा कमरा हंसी के ठहाकों से गूंज उठा। ट्रंप की यह बात सुनकर वहां उपस्थित कई राजनेता मुस्कुराने लगे। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी इस चुटकी को बेहद सकारात्मक तरीके से लिया और गर्मजोशी से आगे बढ़कर ट्रंप से कुशलक्षेम पूछते हुए कहा, 'आप कैसे हैं?' इसके जवाब में ट्रंप ने सहजता से कहा, 'मैं बिल्कुल ठीक हूँ, आपका शुक्रिया।' इस पूरे वाकये को सम्मेलन के एक बेहद अनौपचारिक और खुशनुमा पल के रूप में दर्ज किया गया था।

वैश्विक मंच पर माहौल को सामान्य करने की थी कोशिश

डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि उस कमरे में बैठे सभी लोग अंतरराष्ट्रीय राजनीति की बड़ी हस्तियां हैं और अपने-अपने लोकतांत्रिक देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे कूटनीतिक माहौल में जहां गंभीर मुद्दों पर चर्चा होनी थी, उन्होंने सिर्फ एक बर्फ तोड़ने (आइस-ब्रेकर) और माहौल को खुशनुमा करने के लिए यह बात कही थी। उनके मुताबिक, किसी भी राजनीतिक विश्लेषक या व्यक्ति को यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि वे हकीकत में खुद को अन्य वैश्विक महाशक्तियों का लीडर या बॉस घोषित कर रहे थे। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से हास्य-विनोद का एक हिस्सा था, भले ही बाद में इसे लेकर दुनिया भर के राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की व्याख्याएं और प्रतिक्रियाएं सामने आती रहीं।

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