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बुलडोजर के डर से बाजार में सन्नाटा, गलियों तक बंद रहीं दुकानें

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मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में आवास एवं विकास परिषद द्वारा अवैध निर्माणों के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक ध्वस्तीकरण (मलबे में तब्दील करने के) अभियान ने सेंट्रल मार्केट और उसके आस-पास के व्यापारिक अंचलों में भारी बेचैनी और हड़कंप मचा दिया है। बीते दो दिनों के भीतर प्रशासन द्वारा 30 से अधिक व्यावसायिक व आवासीय भवनों पर की गई सख्त कानूनी कार्रवाई के बाद हताश दुकानदार और मकान मालिक अब किसी बड़े नुकसान से बचने के लिए स्वयं ही अपने अनाधिकृत निर्माणों को हटाने में जुट गए हैं। दूसरी ओर, इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध कर रही स्थानीय महिलाओं ने रविवार से धरनास्थल पर सात दिवसीय सुंदरकांड पाठ की शुरुआत कर दी है और मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

अवकाश के दिन भी गर्जा सरकारी अमला, व्यापारियों में बढ़ी हलचल

शनिवार से शुरू हुई परिषद की यह बड़ी कार्रवाई रविवार को साप्ताहिक अवकाश होने के बावजूद बिना रुके जारी रही। निर्धारित सेट बैक (सड़क से तय दूरी) के लिए जगह छोड़ने और अवैध रूप से संचालित हो रही दुकानों को जमींदोज करने की इस मुहिम से समूचे व्यापारिक समुदाय में घोर चिंता और अनिश्चितता का माहौल है। दिनभर कई बड़े कारोबारी मौके पर पहुंचकर प्रशासनिक गतिविधियों का जायजा लेते रहे, वहीं राहत की उम्मीद लगाए बैठे प्रभावित लोगों की नजरें अधिकारियों और शासन के अंतिम निर्णयों पर टिकी रहीं।

इस कार्रवाई के सीधे प्रभाव के चलते कई दुकानदारों ने प्रशासनिक टीम के पहुंचने से पहले ही खुद हथौड़े उठा लिए हैं। अनेक प्रमुख स्थानों पर लोग स्वेच्छा से अपनी बाहरी दीवारें ढहा रहे हैं और भविष्य की कार्रवाई से बचने के लिए अब निर्धारित दूरी को ध्यान में रखते हुए भीतर की ओर नया निर्माण कर रहे हैं।

दिन-रात चल रहा अवैध निर्माण हटाने का काम, हटाए जा रहे शटर

आवास एवं विकास परिषद कार्यालय से क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर इस समय अजीब सा नजारा है; यहाँ मकान मालिकों ने स्वयं ही अपने अवैध निर्माणों को ढहाना शुरू कर दिया है। रात-दिन मजदूरों की मदद से ड्रिल मशीन, छेनी और भारी हथौड़ों के जरिए पक्के ढांचों को तोड़ा जा रहा है।

प्रशासनिक सख्ती को देखते हुए कई मकानों के भूतल (ग्राउंड फ्लोर) पर बनी दुकानों के लोहे के शटर रातों-रात हटाकर उनकी जगह दोबारा पक्की दीवारें, खिड़कियां और रिहायशी दरवाजे लगाए जा रहे हैं। जो व्यापारी अब तक इस अभियान को हल्के में ले रहे थे, उन्होंने भी आनन-फानन में अपनी दुकानें बंद कर कीमती सामान सुरक्षित स्थानों पर समेटना शुरू कर दिया है। कई बड़े शोरूम के सामने की शानदार बाहरी सजावट और फ्रंट एलिवेशन को भी हटा लिया गया है।

73 दिनों से जारी है धरना, पुलिस ने हटवाया तंबू तो महिलाओं ने शुरू किया सुंदरकांड

सेंट्रल मार्केट में सेट बैक छोड़ने के कड़े नियमों के विरोध में पिछले 73 दिनों से धरने पर बैठी महिलाओं का आंदोलन अब धार्मिक रूप ले चुका है। रविवार को जब पुलिस प्रशासन ने सुबह धरनास्थल पर लगाया जा रहा तंबू जबरन हटवा दिया, तो महिलाओं ने वहीं जमीन पर राम दरबार सजाकर और बजरंग बली का विशेष श्रृंगार कर घरों व आजीविका को बचाने के लिए सुंदरकांड का पाठ शुरू कर दिया। इसके साथ ही सेक्टर-3 और 4 के चौराहे के पास स्थित गोल मंदिर क्षेत्र में महिलाओं ने सामूहिक सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन कर अपना शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया।

27 जून तक चलेगा धार्मिक अनुष्ठान, बड़े आंदोलन की चेतावनी

आंदोलन का नेतृत्व कर रही महिलाओं का कहना है कि वे पिछले ढाई महीने से अधिक समय से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को लेकर बैठी हैं, परंतु अब तक किसी भी स्थानीय जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी ने उनकी सुध नहीं ली और न ही कोई ठोस आश्वासन दिया है।

महिलाओं ने दोटूक शब्दों में घोषणा की है कि आगामी 27 जून तक धरनास्थल पर प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ और भजन-कीर्तन किया जाएगा। यदि इस धार्मिक अनुष्ठान की अवधि के भीतर प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक या सहानुभूतिपूर्ण निर्णय नहीं लिया गया, तो इस आंदोलन को और अधिक व्यापक व आक्रामक रूप दिया जाएगा। रविवार को अनुष्ठान की समाप्ति के बाद बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया, जहाँ सभी ने एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

पंकज त्रिपाठी के परिवार पर हमला, बड़े भाई की हालत नाजुक; दहशत में परिजन

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गोपालगंज। बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता पंकज त्रिपाठी के पैतृक गांव से एक बेहद दुखद और सनसनीखेज खबर सामने आई है। जिले के माधोपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बेलसंड गांव में अभिनेता के बड़े भाई बिजेंद्र नाथ तिवारी पर कुछ बदमाशों ने धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में वे बुरी तरह लहूलुहान हो गए। वारदात के तुरंत बाद परिजन उन्हें आनन-फानन में गोपालगंज सदर अस्पताल ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद भी उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) रेफर कर दिया। वर्तमान में उनकी स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है और वे डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं।

पुरानी दुश्मनी और आपसी रंजिश के चलते हमले की आशंका

स्थानीय सूत्रों और प्राथमिक इनपुट के अनुसार, इस खूनी वारदात के पीछे किसी पुरानी रंजिश या आपसी दुश्मनी के होने का अंदेशा जताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि गांव के ही कुछ लोगों के साथ उनका काफी समय से कोई विवाद चल रहा था, जिसके नतीजे में इस भयावह घटना को अंजाम दिया गया। हालांकि, जांच एजेंसियां जमीनी स्तर पर सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर साक्ष्य जुटा रही हैं ताकि हमले की असली वजह और इसके पीछे के किरदारों का पूरी तरह पर्दाफाश किया जा सके।

मुख्य आरोपी की पहचान और पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी

वारदात की भनक लगते ही स्थानीय थाना पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गई और घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य हमलावर की पहचान स्थापित कर ली है और उसकी धरपकड़ के लिए इलाके में संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बेलसंड गांव और उसके आस-पास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है।

परिजनों के बयान दर्ज और पूरे इलाके में पसरा सन्नाटा

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों से पूछताछ कर बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही इस हिंसक घटना की वास्तविक वजह साफ हो पाएगी। दूसरी ओर, इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद से पूरे गोपालगंज जिले और अभिनेता के पैतृक गांव में गहरी चिंता और तनाव का माहौल है, जहां लोग पीड़ित के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

21 साल से खड़े सपा कार्यालय का हुआ अंत, प्रशासन ने की ध्वस्तीकरण कार्रवाई

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सीतापुर। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में सोमवार को प्रशासन ने एक बड़ी और कड़ी कार्रवाई करते हुए टाउन हॉल परिसर में स्थित समाजवादी पार्टी (सपा) के जिला कार्यालय की इमारत को जमींदोज कर दिया। भारी पुलिस बल और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा घेरे के बीच घटना स्थल पर पहुंचे चार बुलडोजरों ने पूरी इमारत को ढहाकर मलबे के ढेर में बदल दिया। इस अचानक हुई बड़ी कार्रवाई के चलते पूरे इलाके में काफी समय तक अफरातफरी और गहमागहमी का माहौल बना रहा। कार्रवाई को देखने के लिए मौके पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी।

21 साल से संचालित हो रहा था दफ्तर, डीएम कोर्ट ने दिया था आदेश

प्रशासनिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाल ही में जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) न्यायालय ने टाउन हॉल परिसर की इस विवादित भूमि को नियम विरुद्ध कब्जे से मुक्त कर राज्य सरकार के अधीन (निहितीकरण) करने का अंतिम आदेश जारी किया था। समाजवादी पार्टी का यह जिला कार्यालय पिछले 21 वर्षों से इसी परिसर से संचालित किया जा रहा था।

राजस्व विभाग की जांच रिपोर्ट में यह बात पूरी तरह स्पष्ट हो गई थी कि जिस भूखंड पर इस इमारत का निर्माण किया गया था, वह मूल रूप से सरकारी (नजूल) भूमि थी। इस बेशकीमती और मुख्य बाजार स्थित सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से पूरी तरह मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन द्वारा लंबे समय से वैधानिक और कानूनी प्रक्रियाएं चलाई जा रही थीं।

नोटिस के बाद भी खाली न करने पर लिया गया कड़ा एक्शन

अधिकारियों ने बताया कि इस कार्रवाई से पूर्व संबंधित पक्ष को नियमानुसार कई बार परिसर को स्वेच्छा से खाली करने के लिए आधिकारिक नोटिस और वैधानिक निर्देश जारी किए गए थे। समय सीमा समाप्त होने के बावजूद जब इमारत को खाली नहीं किया गया, तब प्रशासन ने कानून का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए भारी मशीनों और बुलडोजर का सहारा लिया। प्रशासन की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई के बाद करोड़ों रुपये मूल्य की यह सरकारी जमीन अब पूरी तरह से शासन के नियंत्रण में आ गई है। सुरक्षा के मद्देनजर इलाके में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

भाई, भाभी और भतीजे की हत्या से मचा हड़कंप, पुलिस कर रही पड़ताल

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गोरखपुर। जिले के बांसगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव में रविवार देर रात एक बेहद रूहकँपा देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ महज 16 साल के एक किशोर ने घरेलू कलह के चलते कथित तौर पर अपने सगे बड़े भाई, भाभी और केवल तीन वर्ष के मासूम भतीजे पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। एक ही घर में तीन लोगों की निर्मम हत्या की खबर फैलते ही पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और कई आला अधिकारी भारी पुलिस बल और फॉरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की तफ्तीश शुरू की।

कमरे में सो रहा था परिवार, रात के सन्नाटे में उतारा मौत के घाट

पुलिस नियंत्रण कक्ष से प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, इस जघन्य हत्याकांड में मारे गए लोगों की पहचान अमित गुप्ता, उनकी पत्नी रंजना गुप्ता और उनके 3 वर्षीय मासूम बेटे रेयान गुप्ता के रूप में हुई है।

परिजनों ने बताया कि रविवार की रात रोज की तरह पूरा परिवार खाना खाकर अपने कमरे में सो रहा था। इसी दौरान देर रात करीब तीन बजे आरोपी छोटा भाई धारदार हथियार लेकर कमरे में दाखिल हुआ और सोते हुए भाई-भाभी सहित भतीजे पर बेरहमी से वार करना शुरू कर दिया। हमले की क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तीनों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और अत्यधिक खून बह जाने के कारण तीनों की बिस्तर पर ही तड़प-तड़प कर मौके पर ही मौत हो गई।

बदहवास पिता ने पुलिस को दी सूचना, आरोपी भाई हथियार सहित हिरासत में

रात में चीख-पुकार और अजीब आवाजें सुनकर जब मृतक के पिता कमरे की ओर भागे, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत स्थानीय पुलिस को घटना की जानकारी दी।

मौके पर पहुंची पुलिस ने तीनों क्षत-विक्षत शवों को अपने कब्जे में लेकर विधिक पंचनामे के बाद पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भागने की फिराक में लगे 16 वर्षीय मुख्य आरोपी किशोर को घेराबंदी कर हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने उसके पास से वारदात में इस्तेमाल किया गया खून से सना हुआ धारदार हथियार भी बरामद कर लिया है, जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

वारदात के पीछे पारिवारिक कलह की आशंका, गांव में पसरा सन्नाटा

मामले की जानकारी देते हुए एसपी दक्षिणी दिनेश पुरी ने बताया कि पुलिस को देर रात लगभग तीन बजे इस तिहरे हत्याकांड की सूचना मिली थी। प्रारंभिक फोरेंसिक जांच और साक्ष्यों से साफ है कि आरोपी ने पूरी योजना के साथ सोते समय इस खूनी खेल को अंजाम दिया।

अधिकारी ने बताया कि शुरुआती पूछताछ में घटना के पीछे गहरा पारिवारिक विवाद और जमीनी या आपसी कलह की बात सामने आ रही है। हालांकि, पुलिस हर छोटे-बड़े पहलू और एंगल की गहनता से वैज्ञानिक जांच कर रही है ताकि हत्या की वास्तविक और सटीक वजह का पता लगाया जा सके।

गाँव में तनाव और आक्रोश, पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

सोमवार की सुबह जैसे ही इस वीभत्स हत्याकांड की खबर पूरे इलाके में फैली, समूचे ग्रामीण अंचल में सन्नाटा पसर गया और चारों तरफ मातम छा गया। पीड़ित के घर के बाहर बड़ी संख्या में आक्रोशित ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। लोग इस बात से हैरान और गुस्से में हैं कि एक नाबालिग लड़का अपने ही परिवार के प्रति इतना हिंसक कैसे हो सकता है।

बांसगांव थाना पुलिस ने मृतक अमित गुप्ता के पिता द्वारा दी गई लिखित तहरीर के आधार पर आरोपी के खिलाफ हत्या की संगीन और सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। पुलिस ने कहा कि चूंकि आरोपी नाबालिग (किशोर) है, इसलिए किशोर न्याय बोर्ड के नियमों के तहत विधिक कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर समाज में बढ़ रहे मानसिक तनाव और पारिवारिक कलह के डरावने अंजाम को उजागर किया है।

भोपाल में UCC पर बड़ी बैठक आज, मानसून सत्र में विधेयक लाने की तैयारी तेज

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भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को अमलीजामा पहनाने के लिहाज से सोमवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में गठित उच्च स्तरीय समिति आज भोपाल में राजनीतिक दलों के नेताओं, धार्मिक गुरुओं, विभिन्न सामाजिक आयोगों के डेलीगेट्स और आला प्रशासनिक अफसरों के साथ मैराथन बैठक करेगी। इस व्यापक विचार-विमर्श के बाद यूसीसी का अंतिम ड्राफ्ट तैयार कर राज्य सरकार को सुपुर्द किए जाने की प्रबल संभावना है। भोपाल की नरोन्हा प्रशासनिक अकादमी में सुबह से लेकर शाम तक चलने वाले इस मंथन में महिला, बाल, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक आयोग समेत कई अहम संस्थाओं के प्रतिनिधि अपनी राय रखेंगे। दोपहर के सत्र में विभिन्न राजनीतिक दलों और शाम को धार्मिक नेताओं के साथ संवाद का कार्यक्रम तय किया गया है।

प्रशासनिक तंत्र से फीडबैक और लाखों सुझावों का विश्लेषण

इस महामंथन के लिए समिति ने शासन के सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अफसरों को भी तलब किया है। बैठक में गृह विभाग कानून-व्यवस्था और इसके प्रशासनिक पक्षों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन देगा, जबकि अन्य महकमे अपने-अपने कार्यक्षेत्र से जुड़े तकनीकी सुझाव समिति के सामने रखेंगे। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, समिति को ऑनलाइन पोर्टल, जनसुनवाई और विभिन्न अन्य स्रोतों के जरिए लगभग दो से ढाई लाख से अधिक सुझाव मिले हैं। विशेषज्ञ इन सभी इनपुट्स का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं ताकि नए कानून के प्रारूप में हर वर्ग की चिंताओं और उनके हितों का पूरा ख्याल रखा जा सके।

मंत्रिमंडल की हरी झंडी के बाद मानसून सत्र में आएगा बिल

समिति की ओर से रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद मुख्य सचिव अनुराग जैन की कप्तानी वाली वरिष्ठ सचिवों की कमेटी इस पूरे ड्राफ्ट का परीक्षण करेगी। वहां से पास होने के बाद इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। मंत्रिमंडल की मुहर लगते ही इसे 20 जुलाई से प्रस्तावित मध्य प्रदेश विधानसभा के आगामी मानसून सत्र के दौरान सदन के पटल पर विधिवत चर्चा और पारित होने के लिए पेश किया जा सकता है।

जनता से संवाद की लंबी प्रक्रिया का आखिरी और निर्णायक दौर

राज्य सरकार यूसीसी के संवेदनशील मसौदे को लेकर पिछले काफी समय से हर स्तर पर जनपरामर्श का अभियान चला रही है। इस कवायद के तहत आम जनता से लेकर कानूनविदों, बुद्धिजीवियों, गैर-सरकारी संगठनों, जन-प्रतिनिधियों और विभिन्न संप्रदायों के प्रमुखों से फीडबैक जुटाया गया है। सोमवार को राजधानी में हो रही इस उच्च स्तरीय बैठक को इस पूरी जनपरामर्श प्रक्रिया का अंतिम और सबसे निर्णायक पड़ाव माना जा रहा है, जिसके बाद सूबे में नए कानून की रूपरेखा पूरी तरह साफ हो जाएगी।

इंस्टाग्राम से रचता था जाल, NEET का फर्जी पेपर बेचने वाला अक्षय मालवीय दबोचा गया

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इन्दौर। इंदौर पुलिस की क्राइम ब्रांच (एसआईटी) ने सोशल मीडिया के माध्यम से नीट परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र बेचने और छात्रों से ठगी करने के आरोप में कानून (लॉ) के एक प्रथम वर्ष के छात्र को गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कोटा पुलिस से मिले एक गोपनीय ईमेल के बाद इंदौर पुलिस सतर्क हुई और इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान लसूड़िया क्षेत्र के आंगन शक्कर खेड़ी निवासी अक्षय मालवीय के रूप में हुई है, जो इंदौर के ही एक प्रतिष्ठित लॉ कॉलेज में पढ़ाई कर रहा है। वह इंस्टाग्राम पर नीट 2026 परीक्षा के पर्चे लीक होने का दावा कर पोस्ट साझा करता था।

इंस्टाग्राम के जरिए जाल बिछाकर परीक्षार्थियों को फंसाने का तरीका

आरोपी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को झांसे में लेने के लिए इंस्टाग्राम पर आकर्षक और भ्रामक विज्ञापन पोस्ट करता था। इन पोस्ट को देखने और लाइक करने वाले छात्रों को वह अपनी प्रोफाइल के बायो में दिए गए एक संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने के लिए उकसाता था। इस लिंक को खोलने और कथित प्रश्नपत्र तक पहुंचने के लिए छात्रों को पहले ऑनलाइन माध्यम से एडवांस पेमेंट करना पड़ता था। डिजिटल भुगतान की पुष्टि होने के बाद ही वह छात्रों को पुराने या खुद से तैयार किए गए फर्जी प्रश्नपत्र थमा देता था।

साइबर सेल की रडार पर आने और अकाउंट ब्लॉक होने से मिला सुराग

नीट परीक्षा को लेकर चल रहे विवादों और सोशल मीडिया पर परीक्षा रद्द होने की चर्चाओं के बीच भी आरोपी लगातार इस तरह की भ्रामक सामग्री फैला रहा था। इस संदिग्ध गतिविधि के कारण वह काफी समय से साइबर पुलिस की विशेष निगरानी सूची में शामिल था। हाल ही में इंस्टाग्राम प्रबंधन ने नियमों के उल्लंघन के चलते उसका सोशल मीडिया अकाउंट स्थाई रूप से बंद कर दिया था, जिसके बाद पुलिस को उसके डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए ठिकाने का सुराग मिला और उसे दबोच लिया गया।

दर्जनों लोगों से यूपीआई से वसूली और गिरोह की जांच

प्रारंभिक पूछताछ और बैंक खातों की पड़ताल में सामने आया है कि आरोपी अक्षय ने अब तक लगभग 30 से 35 परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों को अपने जाल में फंसाकर यूपीआई (UPI) के जरिए अवैध वसूली की है। वह बाजार में उपलब्ध पुरानी अध्ययन सामग्री और पिछले वर्षों के पर्चों को मिलाकर एक नया सेट तैयार करता था और उसे असली प्रश्नपत्र बताकर बेच देता था। फिलहाल अपराध शाखा की टीम आरोपी को रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि इस धोखाधड़ी में उसके साथ कोई और भी शामिल है या नहीं।

UP News: दंपती के झगड़े के बाद हिंसा, व्यक्ति की मौत से फैला आक्रोश

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बलिया। जिले के सुखपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम भरतपुरा में बीती देर रात एक बेहद दुखद और हिंसक घटना सामने आई है। यहाँ पति-पत्नी के बीच हो रहे आपसी घरेलू झगड़े में बीच-बचाव करने पहुंचे पड़ोसियों के साथ हुई तीखी कहासुनी खूनी संघर्ष में बदल गई। इस मारपीट में गंभीर रूप से घायल हुए एक व्यक्ति की अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही मौत हो गई। इस वारदात के बाद से जहां पीड़ित परिवार में कोहराम मच गया है, वहीं पूरे गांव में भारी तनाव और शोक का माहौल व्याप्त है। स्थानीय पुलिस मामले की गहनता से तफ्तीश कर रही है।

कहासुनी शांत कराने पहुंचे थे पड़ोसी, लाठी-डंडों से किया हमला

प्राप्त विवरण के अनुसार, भरतपुरा गांव के निवासी 40 वर्षीय सुरेंद्र राजभर का रविवार रात को किसी पारिवारिक बात को लेकर अपनी पत्नी सुशीला से विवाद चल रहा था। देर रात दोनों के बीच बढ़ती कहासुनी और शोर-शराबे की आवाज सुनकर पड़ोस में रहने वाले कुछ युवक उनके घर पहुंचे और मामले को शांत कराने की कोशिश करने लगे। परंतु, बातचीत के दौरान ही किसी बात को लेकर पड़ोसियों और सुरेंद्र के बीच विवाद और अधिक बढ़ गया और देखते ही देखते युवकों ने कानून अपने हाथ में ले लिया।

परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों के मुताबिक, पड़ोसी युवकों ने उग्र होकर सुरेंद्र राजभर पर लाठी-डंडों और लातों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस बर्बर पिटाई के कारण सुरेंद्र के सिर और शरीर के आंतरिक हिस्सों में गंभीर चोटें आईं और वे लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े।

वाराणसी ले जाते समय रास्ते में तोड़ा दम, परिजनों में मचा कोहराम

वारदात के तुरंत बाद बदहवास परिजन घायल सुरेंद्र को इलाज के लिए नजदीकी जिला अस्पताल लेकर भागे। वहां के डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार तो किया, लेकिन उनकी नाजुक और चिंताजनक स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए उन्हें तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्र वाराणसी के लिए रेफर कर दिया। परिजन उन्हें एम्बुलेंस से वाराणसी ले जा ही रहे थे कि रास्ते में ही सुरेंद्र के शरीर में कोई हलचल बंद हो गई और उन्होंने दम तोड़ दिया।

सुरेंद्र की असमय मौत की खबर जैसे ही घर पहुंची, पत्नी सुशीला और मासूम बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। इस घटना से पूरे ग्रामीण अंचल में आक्रोश फैला हुआ है। सूचना मिलते ही सुखपुरा थाने की पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और घटना स्थल का बारिकी से मुआयना किया। पुलिस ने पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया है।

तहरीर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर होगी सख्त कार्रवाई

सुखपुरा थाना अध्यक्ष रत्नेश दुबे ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि पति-पत्नी के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने गए पड़ोसियों और मृतक सुरेंद्र के बीच अचानक झड़प हो गई थी। इस मारपीट में आई गंभीर चोटों की वजह से सुरेंद्र राजभर की मौत हुई है।

थाना प्रभारी ने आश्वस्त किया है कि पीड़ित पक्ष की ओर से मिलने वाली लिखित तहरीर और मेडिकल (पोस्टमार्टम) रिपोर्ट के वैधानिक आधार पर आरोपियों के खिलाफ हत्या की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। पुलिस की विशेष टीमें फरार हमलावर आरोपियों की पहचान करने और उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

‘सपा समेत विपक्ष में खलबली’, मायावती ने चुनावी समीकरणों पर दिया बड़ा बयान

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां लगातार तेज होती जा रही हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा है कि सूबे में ब्राह्मण समाज और अगड़ी जाति (अपर कास्ट) के लोगों का झुकाव अब तेजी से बसपा की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनता के इस बदलते मिजाज ने विरोधी खेमों की नींद उड़ा दी है। बसपा प्रमुख के अनुसार, जिस प्रकार साल 2007 के विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण समाज के ऐतिहासिक और पूर्ण सहयोग से बसपा ने राज्य में पूर्ण बहुमत की मजबूत सरकार बनाई थी, ठीक उसी तरह के स्पष्ट राजनीतिक संकेत अब धरातल पर दोबारा नजर आने लगे हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर साझा किए गए अपने आधिकारिक बयान में मायावती ने बताया कि आगामी चुनावों के मद्देनजर बसपा ने विभिन्न वर्गों के जिताऊ और कर्मठ कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार बनाने की जमीनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि ब्राह्मण समाज के प्रबुद्ध जनों के पार्टी से जुड़ने के कारण विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर गहरी बेचैनी और घबराहट देखी जा सकती है।

'सर्वजन हिताय' के सिद्धांत से ही सुरक्षित है हर वर्ग का भविष्य

बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य के अपरकास्ट समाज और विशेष रूप से ब्राह्मण वर्ग का वास्तविक हित, सम्मान और सुरक्षा केवल बहुजन समाज पार्टी की नीतियों में ही निहित है। उन्होंने अपने शासनकाल का हवाला देते हुए दावा किया कि उनकी पार्टी ने हमेशा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के मूल सिद्धांत को न केवल संगठन के स्तर पर लागू किया, बल्कि सरकार में रहते हुए भी शासन-प्रशासन के शीर्ष पदों पर हर वर्ग को यथोचित सम्मान और सत्ता में बराबर की भागीदारी सुनिश्चित की थी।

विपक्षियों के राज में खुद को ठगा महसूस कर रहा था प्रबुद्ध वर्ग

पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने विपक्षी दलों की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि गैर-बसपा सरकारों के कार्यकाल में ब्राह्मण समाज के लोगों को लंबे समय तक उपेक्षा, असुरक्षा और प्रशासनिक पक्षपात का दंश झेलना पड़ा है। अन्य राजनीतिक दलों के राज में यह वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा था, यही वजह है कि अब यह चेतनाशील समाज बड़ी संख्या में पुनः बसपा के मंच पर लामबंद हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि आगामी चुनाव के बाद राज्य में बसपा की सरकार बनने पर ब्राह्मण समाज को पूर्ववर्ती बसपा सरकारों की भांति ही पूरा मान-सम्मान, सुरक्षा और सत्ता में महत्वपूर्ण भागीदारी दी जाएगी।

क्षत्रिय, वैश्य सहित सभी समाजों को योग्यता के आधार पर मिलेगा टिकट

बसपा सुप्रीमो ने चुनावी रणनीति को स्पष्ट करते हुए साफ किया कि पार्टी किसी एक वर्ग विशेष तक सीमित नहीं है। आगामी विधानसभा चुनाव में केवल ब्राह्मण ही नहीं, बल्कि क्षत्रिय (राजपूत), वैश्य और अन्य सभी समाजों के सक्रिय व समर्पित लोगों को उनकी जमीनी तैयारी, निष्ठा और सामाजिक योगदान के पुख्ता आधार पर प्रत्याशी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी का केंद्रीय और प्रांतीय नेतृत्व लगातार चुनावी तैयारियों की समीक्षा कर रहा है और प्रदेश के सभी वर्गों को एक सूत्र में पिरोकर आगे बढ़ने की सर्वसमावेशी रणनीति पर तेजी से काम किया जा रहा है।

राम मंदिर चंदा विवाद का हल बनेगा तिरुपति मॉडल? जानिए कैसे रखा जाता है हर पाई का हिसाब

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अयोध्या। भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए सोने-चांदी और नकदी के कथित गबन का मामला इन दिनों पूरे देश में गरमाया हुआ है। इस गंभीर प्रकरण में मंदिर की व्यवस्था और चल-अचल संपत्ति की सुरक्षा देखने वाले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं, जबकि चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) मामले की हर परत को खंगालने में जुटा है। इस बड़े विवाद के बीच, श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने दान व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए दक्षिण भारत के सुप्रसिद्ध तिरुमला तिरुपति मंदिर के प्रशासनिक स्वरूप को अयोध्या में भी लागू करने का अहम सुझाव दिया है। उनका मानना है कि तिरुपति देवस्थानम की तर्ज पर यहाँ भी एक कमिश्नर रैंक के आईएएस अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया जाना चाहिए, जिसे उत्तर प्रदेश में काम करने का लंबा अनुभव हो।

तिरुपति मंदिर का समृद्ध इतिहास और उसका मजबूत प्रशासनिक ढांचा

आंध्र प्रदेश की शेषाचलम पर्वत श्रृंखलाओं के बीच बसे तिरुमला तिरुपति मंदिर का प्रबंधन कोई निजी संस्था नहीं बल्कि राज्य सरकार का एक वैधानिक निकाय (टीटीडी) करता है। ऐतिहासिक रूप से यह मंदिर हिंदू राजाओं, मुस्लिम शासकों और फिर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन रहा। अंग्रेजी हुकूमत ने 1843 में इसका जिम्मा हाथीरामजी मठ को सौंप दिया था। करीब एक सदी बाद 1933 में मद्रास विधानमंडल ने एक विशेष कानून बनाकर टीटीडी समिति का गठन किया। इसके बाद साल 1979 और 1987 में इसे और मजबूत कानूनी अधिकार दिए गए। वर्तमान में इस व्यवस्था के दो मुख्य हिस्से हैं; पहला 'ट्रस्ट बोर्ड' जो मंदिर से जुड़ी बड़ी नीतियां तय करता है और इसके वर्तमान अध्यक्ष बीआर नायडू हैं। दूसरा हिस्सा 'दैनिक प्रशासन' का है जिसे एक सेवारत आईएएस अधिकारी संभालता है, जिन्हें एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (EO) कहा जाता है। फरवरी 2026 से इस पद पर आईएएस मुड्डादा रविचंद्र कार्यरत हैं, जो अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी सीएच वेंकैया चौधरी के साथ मिलकर करीब 14,000 कर्मचारियों की मदद से प्रतिदिन आने वाले 80 हजार से एक लाख तीर्थयात्रियों की व्यवस्था देखते हैं।

चढ़ावे का हिसाब और डिजिटल दान में पारदर्शिता का अनोखा रिकॉर्ड

दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में शुमार तिरुपति में दान की निगरानी के लिए एक अचूक और आधुनिक व्यवस्था लागू है। यहाँ की दानपेटियों (हुंडी) में रोजाना करीब 3.6 करोड़ से 4.1 करोड़ रुपये की नकदी आती है, जो सालाना 1,600 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। इसके अलावा प्रतिवर्ष लगभग 1,400 किलोग्राम सोना भी चढ़ावे में आता है। अक्टूबर 2025 तक के वित्तीय विवरण के अनुसार, इस देवस्थानम के पास बैंकों में 14,000 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट और करीब 20 टन सोना जमा है। इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहाँ आने वाले गुप्त दान की गिनती अगले ही दिन करके उसे जनता के सामने सार्वजनिक कर दिया जाता है। इसके अलावा, पूरे परिसर में डिजिटल कियोस्क लगाने का यह परिणाम रहा कि वर्ष 2025 में मंदिर के इतिहास में पहली बार ऑनलाइन माध्यम से मिलने वाला दान नकद चढ़ावे से आगे निकल गया। अकेले 11 महीनों में भक्तों ने विभिन्न सामाजिक कार्यों जैसे मुफ्त भोजन (अन्नप्रसादम ट्रस्ट), चिकित्सा, गो-रक्षा और शिक्षा से जुड़े ट्रस्टों में 918.6 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड दान दिया।

तिरुपति मॉडल की सीमाएं और राम मंदिर के लिए इसकी उपयोगिता

यूं तो तिरुपति की यह व्यवस्था बेहद पेशेवर मानी जाती है, लेकिन यह पूरी तरह से दोषमुक्त भी नहीं है। नियमानुसार यहाँ के प्रशासनिक अधिकारी का कार्यकाल पांच से सात साल का होना चाहिए, मगर अक्सर राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों के कारण अधिकारियों का समय से पहले तबादला कर दिया जाता है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में टीटीडी में एक साल के भीतर तीन कार्यकारी अधिकारी बदले गए। इसके अतिरिक्त, पिछले दिनों हुए 'लड्डू प्रसादम विवाद' (घी मिलावट प्रकरण) के दौरान भी राजनीतिक दबाव के चलते अधिकारियों को बीच भंवर में ही हटा दिया गया था। इन तमाम व्यावहारिक कमियों के बावजूद नृपेंद्र मिश्र और अन्य विशेषज्ञ इस मॉडल की वकालत इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि यह नीतियां बनाने वाले बोर्ड और उसे जमीन पर उतारने वाले पेशेवर प्रशासनिक अधिकारी के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन करता है। अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट के वर्तमान स्वरूप में इसी जवाबदेही और कार्यविभाजन की कमी खल रही है, जिसे दूर करना अब अनिवार्य हो चुका है।

शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स ने लगाई 400 अंकों की छलांग; निफ्टी 24,100 के ऊपर

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मुंबई। पिछले सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन आई गिरावट के बाद, सोमवार का सवेरा शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। दलाल स्ट्रीट पर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों ने जबरदस्त वापसी करते हुए हरे निशान के साथ कारोबारी हफ्ते की शुरुआत की है। हालांकि, बाजार की इस रफ्तार के बीच एक बड़ी चिंता भी गहरा रही है, जिसने निवेशकों के साथ-साथ आर्थिक नीति-निर्माताओं को भी असमंजस में डाल दिया है—और वह है इस बार मॉनसून की सुस्त रफ्तार।

शुरुआती कारोबार में उछाल और निवेशकों की चांदी

सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने पुराने घावों पर मरहम लगाते हुए एक बार फिर दमदार तेजी का रुख अख्तियार किया। बाजार खुलते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 423.30 अंक यानी 0.55 प्रतिशत की बड़ी बढ़त के साथ 77,226.20 के स्तर पर जा पहुंचा। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी पीछे नहीं रहा और वह 119.11 अंक यानी 0.50 फीसदी की तेजी दर्ज करते हुए 24,132.20 के आंकड़े पर पहुंच गया। बीते शुक्रवार को लगातार पांच दिनों से जारी बाजार की तेजी थम गई थी, लेकिन सोमवार के इस दमदार कमबैक ने दलाल स्ट्रीट में फिर से जान फूंक दी है। शुरुआती ट्रेडिंग सेशन के दौरान एचसीएल टेक और मारुति सुजुकी के शेयरों ने सबसे ज्यादा मुनाफा कमाया और टॉप गेनर्स में शुमार रहे।

कम बारिश और अल नीनो के कारण बाजार पर संकट के बादल

भले ही आज बाजार में चारों तरफ हरियाली दिख रही हो, लेकिन आने वाले समय में बाजार का भविष्य काफी हद तक इस बात पर तय होगा कि इंद्रदेव कितने मेहरबान होते हैं। अल नीनो के प्रभाव की वजह से चालू महीने में अब तक सामान्य के मुकाबले करीब 38 फीसदी कम वर्षा दर्ज की गई है। जानकारों का मानना है कि अगर मॉनसून ने अपनी रफ्तार नहीं पकड़ी तो खरीफ की फसलों की बुवाई बुरी तरह प्रभावित होगी। कृषि उत्पादन में कमी आने की वजह से देश में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे खाद्य महंगाई दर में उछाल आएगा। इसके साथ ही ग्रामीण भारत की क्रय शक्ति कमजोर होगी, जिससे मांग में बड़ी गिरावट आ सकती है। यह पूरा चक्र सीधे तौर पर देश की जीडीपी और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बुरा असर डाल सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख और घरेलू निवेशकों के लिए आगे की राह

एक तरफ जहां भारतीय बाजारों में लिवाली का माहौल बना हुआ है, वहीं विदेशी बाजारों से मिलने वाले संकेत बहुत ज्यादा उत्साहजनक नहीं हैं। वैश्विक स्तर पर मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है, जहां जापान के टॉपिक्स इंडेक्स में 1.3 प्रतिशत और ऑस्ट्रेलिया के शेयर बाजार में 0.1 प्रतिशत का सुधार देखा गया। इसके उलट अमेरिकी बाजारों में मंदी का असर दिखा और एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 0.4 प्रतिशत टूट गए। एशियाई बाजारों में भी मंदी हावी रही, जिसके चलते हांगकांग का हैंगसेंग 1.3 फीसदी और शंघाई कंपोजिट 0.2 फीसदी की कमजोरी के साथ ट्रेड करते दिखे। यूरोपियन मार्केट के यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स में भी 0.3 फीसदी की गिरावट रही। बहरहाल, घरेलू बाजार के लिए यह हफ्ता नई उम्मीदों वाला साबित हुआ है, लेकिन निवेशकों को आगे कोई भी बड़ा दांव लगाने से पहले अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और मॉनसून के आंकड़ों को ध्यान में रखना होगा।

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