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कोलकाता में योग दिवस पर पीएम मोदी करेंगे योगाभ्यास का नेतृत्व

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कोलकाता में 10 लाख लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ योगाभ्यास करेंगे

कोलकाता । कोलकाता में करीब 10 लाख लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ योगाभ्यास करेंगे । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में रविवार को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम में नया रिकॉर्ड बन सकता है। कोलकाता में करीब 10 लाख लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ योगाभ्यास करेंगे। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने यह जानकारी दी। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम के बारे में सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा, "यह पहली बार है जब पश्चिम बंगाल के कोलकाता में यह इवेंट हो रहा है और यहां हमारे प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए बहुत उत्साह है।" उन्होंने कहा कि आज, 20 जून को एक बड़ा कार्निवल हुआ । एक बड़ा ड्रोन शो भी हुआ । वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की कोशिश में लगभग 500 नावें एक साथ आएंगी। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने यह भी बताया कि रविवार सुबह रधानमंत्री यहां इस इवेंट की अगुवाई करेंगे। इस जगह पर रविवार को 35 हजार लोग इकट्ठा होंगे। वहीं, पूरे कोलकाता में 10 लाख लोग प्रधानमंत्री मोदी के साथ योग करेंगे। पोर्टल पर अब तक 7 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराए हैं। रात तक यह संख्या 10 लाख के करीब तक पहुंच जाएगी। आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव मोनालिसा दास ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हर साल एक नई जगह पर मनाया जाता है, खासकर इसका मुख्य कार्यक्रम। हर राज्य बढ़-चढ़कर इसे अपने-अपने तरीके से मनाता है। इस साल भी कई नई पहल की गई हैं। जैसा कि आपने देखा होगा, शुक्रवार को कोलकाता में चार जगहों पर 'रन फॉर योग' का आयोजन किया गया था। इसमें 10,000 लोगों, बच्चों, बड़ों और महिलाओं ने हिस्सा लिया और दौड़ लगाई। इसी तरह अन्य जिलों में भी 'रन फॉर योग' का आयोजन हुआ।" संयुक्त सचिव मोनालिसा दास ने बताया कि शनिवार को एक ड्रोन शो का आयोजन हुआ । फिर रविवार को कोलकाता के हर कौने में योग दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर योग गुरु और योग इन्फ्लुएंसर उमंग त्यागी ने कहा, "इस बार प्रधानमंत्री मोदी खुद हमारे साथ योग करेंगे। मुझे गर्व है कि मैं उनके साथ यहां कोलकाता में योग करूंगा। जब आपका नेता आगे बढ़कर ऐसा कुछ करता है, तो यह आपको भी अंदर से वैसा ही करने के लिए प्रेरित करता है।" उन्होंने कहा कि इस बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम 'स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग' बेहद खास है।

दुनिया का सबसे सुरक्षित वीवीआईपी विमान? जानिए ट्रंप के नए एयर फोर्स वन की विशेषताएं

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वाशिंगटन। वैश्विक महाशक्ति अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन के समीप स्थित एंड्रयूज एयरफोर्स बेस पर अमेरिकी राष्ट्रपतियों के आधिकारिक उपयोग के लिए तैयार किए गए नए 'एयर फोर्स वन' विमान का अनावरण किया है। यह विमान पहले खाड़ी देश कतर के राजपरिवार के पास बोइंग बिजनेस जेट के रूप में मौजूद था, जिसे बाद में कतर सरकार द्वारा अमेरिका को एक राजकीय सौगात के रूप में भेंट किया गया। अब सभी आवश्यक सुरक्षा जांचों और बदलावों के बाद इसे राष्ट्रपति के मुख्य आधिकारिक विमान के रूप में बेड़े में शामिल करने की अंतिम तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।

विमान का प्रदर्शन करते हुए ट्रंप ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे वैश्विक मंच पर अमेरिका के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक और दुनिया का सबसे शानदार विमान बताया। उन्होंने दावा किया कि यह 'उड़ता हुआ व्हाइट हाउस' तकनीकी और सामरिक दृष्टि से अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के विमानों की तुलना में कहीं अधिक प्रभावशाली है।

कैसा है नया एयर फोर्स वन और क्या हैं इसकी खूबियां?

अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन रिपोर्टों के अनुसार, इस नए विमान में अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा और गरिमा के अनुकूल कई बड़े तकनीकी व संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं:

  • रंग और रूप में बदलाव: दशकों से एयर फोर्स वन की पहचान रहे पारंपरिक हल्के नीले रंग की जगह अब इस नए विमान को गहरे नीले, चटख लाल और सफेद रंग की आधुनिक थीम दी गई है। विमान के मुख्य हिस्से पर राष्ट्रपति की आधिकारिक मुहर और पिछले हिस्से (पूंछ) पर एक विशाल अमेरिकी ध्वज अंकित किया गया है।

  • विशाल आकार (बोइंग 747-8आई): यह विमान वर्तमान में उपयोग हो रहे राष्ट्रपति के विमानों से लगभग 18 फीट अधिक लंबा है। इसके विंगस्पैन (पंखों का फैलाव) में भी 30 फीट की बढ़ोतरी की गई है, जिससे इसका केबिन काफी चौड़ा हो गया है। इसी विशालता के कारण विशेषज्ञ इसे 'पैलेस इन द स्काई' (आसमान का महल) कह रहे हैं। सामरिक क्षेत्र में इसे औपचारिक रूप से 'वीसी-25बी ब्रिज विमान' का नाम दिया गया है।

  • अभेद्य सुरक्षा चक्र: इस विमान के पंखों में अत्याधुनिक 'मिरर-बॉल डिफेंस सिस्टम' लगाया गया है, जो दुश्मन की इन्फ्रारेड गाइडेड मिसाइलों को आसानी से चकमा दे सकता है। इसके अलावा इसमें 'ईसीएम डिफेंस सिस्टम' (इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर) भी मौजूद है, जो दुश्मन के रडार को जाम करने में सक्षम है। यह विमान 1050 किमी/घंटा की तीव्र रफ्तार से उड़ान भर सकता है।

  • लागत और आलीशान सुविधाएं: कतर से मिले इस विमान को वीवीआईपी सुरक्षा मानकों के अनुरूप अपग्रेड करने में अमेरिकी सरकार को करीब 40 करोड़ डॉलर (लगभग ₹3300 करोड़ से अधिक) की लागत आई है। विमान के भीतर एक अत्याधुनिक मेगा किचन और डाइनिंग रूम बनाया गया है, जहां एक बार में 2,000 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की जा सकती है। साथ ही राष्ट्रपति के लिए एक विशेष सुइट तैयार किया गया है, जिसमें निजी ड्रेसिंग रूम, आधुनिक शौचालय और एक जिम भी शामिल है। इसके अलावा, ट्रंप ने खुलासा किया कि इसमें चौबीसों घंटे हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के लिए स्पेसएक्स की स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा भी जोड़ी गई है।

आखिर क्यों पड़ी नए अस्थायी 'ब्रिज विमान' की जरूरत?

वर्तमान में अमेरिकी राष्ट्रपति जिन दो वीसी-25ए विमानों (बोइंग 747-200बी मॉडल) का उपयोग करते हैं, वे 1990 के दशक की शुरुआत से सेवा में हैं। लगभग 35 वर्ष पुराने होने के कारण इन विमानों के रखरखाव और तकनीकी मरम्मत में अब काफी अधिक समय और खर्च होने लगा था। बोइंग कंपनी द्वारा नए स्थायी विमानों की डिलीवरी में हो रही देरी को देखते हुए अमेरिकी वायुसेना ने 'ब्रिज प्रोग्राम' की शुरुआत की।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब तक 2028 तक पूरी तरह से नए वीसी-25बी स्थायी विमान बनकर तैयार नहीं हो जाते, तब तक राष्ट्रपति के पास उड़ान भरने के लिए हमेशा एक सुरक्षित, विश्वसनीय और आधुनिक विमान उपलब्ध रहे। कतर से मिला यह विमान इसी अस्थायी कमी (ब्रिज) को पूरा करने का काम करेगा।

विदेशी उपहार को लेकर अमेरिका में क्यों छिड़ा है विवाद?

ट्रंप द्वारा किसी विदेशी सरकार से मिले विमान को राष्ट्रपति के मुख्य बेड़े में शामिल करने के फैसले पर अमेरिका के राजनीतिक गलियारों और सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। कुछ रिपब्लिकन नेताओं और रक्षा विश्लेषकों ने सवाल उठाए हैं कि विदेशी धरती से आया विमान तकनीकी और खुफिया सुरक्षा के लिहाज से देश के राष्ट्राध्यक्ष के लिए कितना सुरक्षित हो सकता है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में विमान के कोने-कोने की तकनीकी जांच और जासूसी उपकरणों (बग्स) की स्क्रूटनी के लिए बेहद कड़े प्रोटोकॉल की आवश्यकता होती है। हालांकि, इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने तर्क दिया कि इतने अत्याधुनिक विमान को मुफ्त में हासिल करना देश के खजाने के हित में है और इससे पुराने विमानों के बेड़े पर पड़ रहा अत्यधिक दबाव कम होगा।

अमेरिकी वायुसेना का क्या है रुख?

अमेरिकी वायुसेना ने 19 जून को जारी अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि यह वीसी-25बी ब्रिज एयरक्राफ्ट अब 'प्रेसिडेंशियल एयरलिफ्ट ग्रुप' को सौंप दिया गया है और इसकी शुरुआती परिचालन उड़ानें शुरू हो चुकी हैं। वायुसेना के सचिव ट्रॉय मिंक और वायुसेना प्रमुख जनरल केन विल्सबैक ने संयुक्त रूप से कहा कि राष्ट्रपति की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया गया है।

विशेषज्ञों की एक अंतर-एजेंसी टीम ने इस विमान के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल विकसित किए हैं। इन कमीशनिंग उड़ानों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि विमान मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सेनाध्यक्ष और राष्ट्राध्यक्ष के रूप में राष्ट्रपति की तीनों संवैधानिक भूमिकाओं की कसौटियों पर पूरी तरह खरा उतरे। वायुसेना के प्रवक्ता ने यह भी साफ किया कि पुराने वीसी-25ए विमानों को अभी रिटायर नहीं किया जाएगा; वे भी मिशन की आवश्यकताओं के आधार पर नए विमान के साथ सेवा में बने रहेंगे।

स्वतंत्रता दिवस पर फ्लाईपास्ट और अंतरराष्ट्रीय दौरों की योजना

इस नए एयर फोर्स वन विमान को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप की योजनाएं काफी बड़ी हैं। आगामी महीने में तुर्किये में आयोजित होने वाले नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन और नवंबर में चीन में होने वाले एपेक (APEC) शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति इसी नए विमान से अंतरराष्ट्रीय यात्रा करेंगे। इसके साथ ही, उन्होंने घोषणा की है कि आगामी 4 जुलाई को अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस के भव्य समारोह के दौरान यह अत्याधुनिक विमान वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के ऊपर होने वाले पारंपरिक फ्लाईपास्ट का नेतृत्व करेगा।

राम मंदिर कैंप कार्यालय विवाद में महंत का दावा, ‘सेवा भाव से दी थी जगह’

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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि परिसर से जुड़े कथित वित्तीय विवादों और दानपात्र से जुड़े आरोप-प्रत्यारोप के बीच राम कचहरी चारों धाम मंदिर के पीठाधीश्वर एवं सरयू नित्य आरती समिति के अध्यक्ष महंत शशिकांत दास ने इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने सेवानिवृत्त इंजीनियर दीनानाथ वर्मा द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों से खुद को पूरी तरह अलग और अनभिज्ञ बताते हुए कहा कि उनका इस मामले से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सरोकार नहीं है। महंत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर अस्थायी कैंप कार्यालय के सुचारू संचालन के लिए अपना परिसर पूरी तरह निःशुल्क (मुफ्त) उपलब्ध कराया था।

प्रशासन और ट्रस्ट के अनुरोध पर दिया था नवनिर्मित भवन, नहीं लिया कोई किराया

महंत शशिकांत दास ने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि जब राम मंदिर निर्माण की शुरुआती प्रक्रिया चल रही थी, तब तत्कालीन जिलाधिकारी (डीएम) अनुज झा, तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उनसे संपर्क किया था। उनके विशेष आग्रह पर उन्होंने लोकहित और सेवा भाव के उद्देश्य से राम कचहरी चारों धाम मंदिर परिसर में स्थित अपना नया बना हुआ भवन ट्रस्ट के कार्यों के लिए सौंप दिया था। इस सहयोग के बदले उन्होंने कभी भी ट्रस्ट से कोई किराया, पारिश्रमिक या वित्तीय लाभ स्वीकार नहीं किया।

महंत ने आगे बताया कि कुछ समय तक कार्य संचालित होने के बाद जब इस कैंप कार्यालय को रामनिवास परिसर में स्थानांतरित (शिफ्ट) कर दिया गया, तब ट्रस्ट ने उनके भवन का उपयोग करना बंद कर दिया था। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि वह शिकायतकर्ता दीनानाथ वर्मा नाम के किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते हैं और न ही कभी उनसे कोई मुलाकात हुई है। ऐसे में निर्माण कार्यों की आड़ में हुई कथित कमीशनखोरी या वित्तीय विसंगतियों के दावों के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

क्या हैं सेवानिवृत्त इंजीनियर द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप?

गौरतलब है कि राम मंदिर निर्माण के शुरुआती दौर से जुड़े विवादों के बीच हाल ही में एक नया प्रशासनिक विवाद सामने आया है। मंदिर निर्माण कार्यों की तकनीकी निगरानी से जुड़े रहे रिटायर्ड इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने इंटरनेट मीडिया पर साझा किए गए एक साक्षात्कार में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर उंगली उठाई है। इससे पूर्व टिन्नू यादव नामक व्यक्ति ने भी ट्रस्ट के एक शीर्ष पदाधिकारी पर इसी तरह के सवाल खड़े किए थे।

दीनानाथ वर्मा ने अपने दावों में आरोप लगाया है कि राम मंदिर परिसर के भीतर विभिन्न प्रशासनिक कार्यालयों के निर्माण के दौरान एल्युमिनियम फिटिंग का काम करने वाले एक स्थानीय ठेकेदार से कथित तौर पर 40 फीसदी कमीशन की मांग की गई थी। उनका यह भी संगीन आरोप है कि इस अवैध कमीशन की भरपाई करने के उद्देश्य से ही संबंधित कार्य का सरकारी बिल भी वास्तविक लागत से 40 प्रतिशत तक अधिक बढ़ाकर तैयार करवाया गया था। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर अयोध्या के संत समाज और प्रशासनिक गलियारों में तीखी चर्चाएं चल रही हैं।

आनंदीबेन पटेल का निर्देश, आयोग चयनित प्राचार्यों पर मनमानी नहीं चलेगी

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बरेली। उत्तर प्रदेश के राजकीय व राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रोहिलखंड विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले प्रतिष्ठित बरेली कॉलेज की प्रबंध समिति (मैनेजमेंट कमेटी) को एक बड़ा झटका दिया है। कुलाधिपति ने कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ओपी राय की परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन पीरियड) को आगे बढ़ाने के प्रबंध समिति के विवादित निर्णय को पूरी तरह से गैर-कानूनी और शून्य घोषित करते हुए निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही, राजभवन ने इस पूरे प्रकरण में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह द्वारा पूर्व में लिए गए निर्णय को वैधानिक मानते हुए उस पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।

प्रबंध समिति की कार्रवाई को बताया दुर्भावनापूर्ण और नियम विरुद्ध

मामले के विवरण के अनुसार, प्रो. ओपी राय के सेवाकाल के संदर्भ में कॉलेज की प्रबंध समिति ने नियमों को ताक पर रखकर, अत्यंत अनियमित और गैर-विधिक (अवैध) तरीके से उनकी परिवीक्षा अवधि को दोबारा एक वर्ष के लिए विस्तारित करने का प्रयास किया था।

शैक्षणिक नियमावली और प्रशासनिक कानूनों के मुताबिक, किसी भी अशासकीय सहायता प्राप्त कॉलेज की प्रबंध समिति के पास उच्च शिक्षा सेवा आयोग द्वारा विधिवत चयनित होकर आए स्थायी प्राचार्य की परिवीक्षा अवधि में फेरबदल करने या उसे बढ़ाने का कोई कानूनी अधिकार सुरक्षित नहीं है। इस प्रकार की एकतरफा कार्रवाइयों का एकमात्र उद्देश्य संस्था के प्रशासनिक प्रमुख (प्राचार्य) को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना और उनके दैनिक शैक्षणिक कार्यों में अनुचित गतिरोध पैदा करना होता है।

कुलपति के फैसले पर राजभवन की अंतिम स्वीकृति

इस प्रशासनिक विवाद को देखते हुए रोहिलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने 2 नवंबर 2023 को ही एक आधिकारिक आदेश जारी कर दिया था। कुलपति ने अपने आदेश में बरेली कॉलेज प्रबंध समिति के इस कृत्य को पूरी तरह से मनमाना, विधि-विरुद्ध और अधिकार क्षेत्र से बाहर पाते हुए तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया था।

अब देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद (राज्यपाल) द्वारा 11 जून को जारी नवीनतम आदेश के जरिए कुलपति के उस साहसिक फैसले को न्यायसंगत ठहराया गया है। इस ऐतिहासिक फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन सदैव अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले महाविद्यालयों की शैक्षणिक स्वायत्तता, स्थापित नियमों की अक्षरशः पालना और प्राचार्यों की गरिमा व अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह से संकल्पित है।

प्रबंधकीय दबाव के चलते प्राचार्यों का इस्तीफा एक गंभीर चिंता

उद्यमी और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा का विषय है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश शासन द्वारा उच्च शिक्षा सेवा आयोग के माध्यम से प्रदेश भर के विभिन्न महाविद्यालयों में लगभग 290 योग्य प्राचार्यों की नियुक्तियां की गई थीं। परंतु, यह एक कड़वी हकीकत है कि इनमें से करीब 40 से 50 फीसदी प्राचार्यों को स्थानीय प्रबंधन समितियों की आंतरिक राजनीति, अनावश्यक हस्तक्षेप, अनुचित दबाव और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। इसी असहज वातावरण और विभिन्न व्यक्तिगत व प्रशासनिक कारणों के चलते कई प्राचार्यों को समय से पहले ही अपने गरिमामयी पदों से त्यागपत्र (इस्तीफा) देने के लिए विवश होना पड़ा है। राजभवन का यह ताजा फैसला भविष्य में प्राचार्यों के कार्यस्थल की सुरक्षा के लिहाज से एक नजीर साबित होगा।

मंदिर में दर्दनाक हादसा, छत गिरने से 30-40 श्रद्धालु मलबे में फंसे

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परभणी। महाराष्ट्र के परभणी जिले से आज शनिवार, 20 जून को एक बेहद हृदयविदारक और भीषण हादसे की खबर आई है। यहां स्थित प्रसिद्ध मारुति (हनुमान) मंदिर परिसर में अचानक सभा मंडप की कंक्रीट की छत (स्लैब) भरभराकर नीचे गिर गई। दुर्घटना के समय शनिवार का पावन दिन होने के कारण मंदिर परिसर के भीतर भगवान के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद थी। छत के अचानक ढहने से चारों तरफ चीख-पुकार मच गई और मलबे के विशाल ढेर में लगभग 30 से 40 श्रद्धालुओं के मलबे में दबे होने की बेहद चिंताजनक बात सामने आई है। इस अप्रत्याशित और भयानक तबाही के चलते पूरे धार्मिक स्थल पर अफरा-तफरी और दहशत का माहौल निर्मित हो गया है, जिसमें कई श्रद्धालुओं को गंभीर चोटें आई हैं। यद्यपि प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस महकमे की ओर से अभी तक इस हादसे में हताहत होने वाले या जान गंवाने वाले लोगों की सटीक और आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं की गई है।

यशवाड़ी गांव के हनुमान मंदिर में दोपहर को हुआ हादसा, ३0-४0 भक्तों के दबे होने की आशंका

यह भीषण त्रासदी परभणी जिले के अंतर्गत आने वाले यशवाड़ी गांव के हनुमान मंदिर में घटित हुई। भौगोलिक दृष्टि से यह सुदूर गांव छत्रपति संभाजीनगर से तकरीबन 190 किलोमीटर की दूरी पर मानवत रोड पर स्थित है। स्थानीय प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, शनिवार की दोपहर करीब 3:30 बजे जब मंदिर का मुख्य हॉल यानी 'सभा-मंडप' श्रद्धालुओं से पूरी तरह खचाखच भरा हुआ था, तभी अचानक उसकी ऊपरी छत का एक बहुत बड़ा हिस्सा ढह गया। चूंकि शनिवार का दिन पवनपुत्र हनुमान जी की आराधना के लिए विशेष माना जाता है, इसलिए सामान्य दिनों की तुलना में आज वहां पर बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित भक्तों का जमावड़ा काफी अधिक था। अचानक हुए इस वज्रपात से किसी को भी संभलने या भागने का तनिक भी अवसर नहीं मिल सका।

प्रशासनिक अमला और पुलिस बल मौके पर तैनात, अब तक २५ घायलों को निकाला गया बाहर

विनाशकारी हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन, एम्बुलेंस और जिला आपदा प्रबंधन (राहत एवं बचाव दल) की टीमें बिना कोई वक्त गंवाए तुरंत घटना स्थल पर पहुंच गईं। युद्ध स्तर पर शुरू किए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत भारी पत्थरों और मलबे को हटाकर नीचे दबे हुए जिंदगी की जंग लड़ रहे लोगों को बाहर निकालने की कोशिशें की जा रही हैं। एक प्रशासनिक अधिकारी ने प्रगति रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि अब तक मलबे के नीचे से अत्यंत मुस्तैदी के साथ लगभग 25 से अधिक लोगों को सुरक्षित या घायल अवस्था में बाहर निकाला जा चुका है। घटना स्थल पर खड़ी दर्जनों एम्बुलेंस के जरिए इन सभी घायलों को बिना देरी किए नजदीकी सरकारी और निजी चिकित्सालयों में उपचार हेतु रवाना किया जा रहा है।

मलबे के भीतर फंसे लोगों की सटीक संख्या की खोज जारी, अस्पताल हाई अलर्ट पर

फिलहाल राहत और बचाव दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे के नीचे दबे अन्य संभावित लोगों की खोज करना है, क्योंकि अभी तक यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित नहीं हो सका है कि कुल कितने लोग उस भारी भरकम स्लैब के नीचे पूरी तरह फंसे रह गए हैं। मलबे के भीतर फंसे कुछ लोगों की स्थिति अत्यंत नाजुक बताई जा रही है। जिला चिकित्सालय और आसपास के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को हाई अलर्ट पर रखते हुए डॉक्टरों की विशेष टीमों को तैनात किया गया है। स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस के जवान मिलकर हाथों तथा मशीनों की सहायता से पत्थरों को हटाने में जुटे हैं, ताकि समय रहते हर एक कीमती जान को बचाया जा सके। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे परभणी अंचल को गहरे शोक और चिंता में डुबो दिया है।

पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, राष्ट्रपति मुर्मु के गांव को मिलेगा ‘सूर्यग्राम’ का दर्जा

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भुवनेश्वर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ओडिशा के मयूरभंज जिले के अंतर्गत आने वाले रायरंगपुर में आयोजित एक भव्य राज्यस्तरीय समारोह के मंच से ऐतिहासिक घोषणा की। प्रधानमंत्री ने एलान किया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के पैतृक गांव पहाड़पुर की सूरत जल्द ही पूरी तरह बदलने वाली है और इसे एक आदर्श ‘सूर्यग्राम’ के रूप में तब्दील किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत गांव के हर एक घर को सौर ऊर्जा (सोलर एनर्जी) पर आधारित अत्याधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस किया जाएगा। पीएम मोदी ने आश्वस्त किया कि इस योजना पर धरातल पर बहुत जल्द काम शुरू कर दिया जाएगा और सबसे बड़ी बात यह है कि स्थानीय ग्रामीणों को इसका पूरा लाभ बिना किसी शुल्क के (निशुल्क) प्रदान किया जाएगा। ओडिशा में भाजपा सरकार के कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष उत्सव को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य की शुरुआत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को उनके जन्मदिवस की आत्मीय शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

मयूरभंज की माटी की बेटी सर्वोच्च पद पर आसीन, विद्यालय के बच्चों ने राष्ट्रपति को बताया अपनी मां

जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने भावुक स्वर में कहा कि मयूरभंज की माटी की बेटी आज हमारे राष्ट्र के सर्वोच्च संवैधानिक पद को सुशोभित कर रही हैं, और ऐसे में उनके गृह जनपद आकर उन्हें जन्मदिन की बधाई देना उनके स्वयं के लिए बेहद गर्व और परम सौभाग्य का विषय है। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु ने इस सुदूर अंचल में शिक्षा की अलख जगाने और शैक्षणिक विकास के लिए जो अमूल्य योगदान दिया है, वह पूरे देश के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। अपने प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति द्वारा स्थापित किए गए विद्यालय का भी अवलोकन किया और वहां पढ़ रहे छात्र-छात्राओं से आत्मीय संवाद स्थापित किया। प्रधानमंत्री ने मंच से साझा किया कि बातचीत के दौरान नन्हे बच्चों ने उनसे बेहद मासूमियत से कहा कि आज उनके बीच देश की महामहिम राष्ट्रपति नहीं, बल्कि साक्षात उनकी अपनी मां आई हैं। बच्चों के मुख से निकले ये शब्द राष्ट्रपति के प्रति जनमानस के अगाध प्रेम और गहरे सम्मान को प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शित करते हैं।

मुख्यमंत्री मोहन माझी के नेतृत्व में ओडिशा का कायाकल्प, 'उत्कर्ष ओडिशा' से आएगा २० लाख करोड़ का निवेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की प्रशासनिक प्रगति को रेखांकित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के कुशल मार्गदर्शन में ओडिशा अब तरक्की के एक नए और स्वर्णिम युग में कदम रख चुका है। वर्तमान में समूचे सूबे के भीतर बड़े उद्योगों, मजबूत बुनियादी ढांचे, हरित ऊर्जा और बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसरों के सृजन पर तीव्र गति से कार्य संचालित हो रहा है। उन्होंने वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि राज्य सरकार की ‘उत्कर्ष ओडिशा’ नामक अनूठी पहल के परिणामस्वरूप ओडिशा को तकरीबन २० लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम औद्योगिक निवेश के प्रस्ताव हासिल हुए हैं, जबकि अकेले ऊर्जा के क्षेत्र में ही ६ हजार करोड़ रुपये से अधिक का पूंजी निवेश आकर्षित करने में बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने देश और राज्य में भाजपा की डबल इंजन सरकार होने के फायदों को गिनाते हुए कहा कि केंद्र और सूबे के आपसी समन्वय से लोक-कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक बिना किसी बाधा के बहुत तेजी से पहुंच रहा है, जिसमें सुभद्रा योजना और आयुष्मान भारत जैसी बड़ी जनहितैषी नीतियां शामिल हैं।

स्वच्छ भारत मिशन में बेहतर प्रदर्शन की सराहना और मयूरभंज को नए जवाहर नवोदय विद्यालय की बड़ी सौगात

अपने संबोधन के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ओडिशा सरकार द्वारा किए गए उत्कृष्ट और सराहनीय कार्यों की जमकर पीठ थपथपाई और इसके लिए मुख्यमंत्री मोहन माझी व उनकी पूरी प्रशासनिक टीम को बधाई दी। इसके साथ ही, पीएम मोदी ने मयूरभंज के आदिवासी और ग्रामीण अंचल के युवाओं को एक और बड़ा उपहार देते हुए जिले में एक सर्वसुविधायुक्त नए जवाहर नवोदय विद्यालय की स्थापना को तत्काल मंजूरी देने की घोषणा की। उन्होंने विश्वास जताया कि इस नए संस्थान के खुलने से क्षेत्र के प्रतिभावान और ग्रामीण परिवेश से आने वाले छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वस्तरीय शिक्षा के स्वर्णिम अवसर प्राप्त होंगे। प्रधानमंत्री ने अंत में पूर्ण विश्वास प्रकट किया कि पहाड़पुर गांव का 'सूर्यग्राम' के रूप में होने वाला यह कायाकल्प और शिक्षा, बिजली व इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े ये नए बड़े प्रोजेक्ट्स मयूरभंज को तरक्की के एक नए शिखर पर स्थापित करेंगे और यही 'विकसित ओडिशा' आगे चलकर 'विकसित भारत' के विराट संकल्प को सिद्ध करने में देश का नेतृत्व करेगा।

सामंथा ने मनाया फिल्म की दमदार शुरुआत का जश्न, टीम की महिलाओं की तारीफ की

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भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु की नई मुख्य भूमिका वाली फिल्म ‘मां इंटी बंगारम’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। रिलीज के पहले दिन (ओपनिंग डे) इस फिल्म ने ₹5.35 करोड़ की बेहतरीन शुरुआत की थी, वहीं दूसरे दिन भी इसका जलवा बरकरार रहा और फिल्म ने ₹2.54 करोड़ का शानदार कलेक्शन किया। इसके साथ ही फिल्म की कुल दो दिनों की कमाई का आंकड़ा ₹7.89 करोड़ तक पहुंच गया है। सिनेमाघरों में इस पारिवारिक और थ्रिलर ड्रामा को देखने के लिए दर्शकों, विशेषकर महिला वर्ग की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिससे फिल्म की पूरी टीम और सामंथा बेहद उत्साहित हैं। अभिनेत्री ने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से अपने तमाम प्रशंसकों का दिल से आभार जताया है।

सिनेमा का बदलता दौर: ओपनिंग डे पर महिलाओं के योगदान की सराहना

सामंथा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक भावुक और विचारणीय पोस्ट साझा की है। उन्होंने लिखा, "रिलीज के पहले ही दिन किसी फिल्म को दर्शकों का इतना अपार प्यार और शानदार ओपनिंग मिलते देखना एक अद्भुत और सुखद अहसास है। यह सफलता हमारे पूरे क्रू के लिए बहुत मायने रखती है। आज का दर्शक कंटेंट को प्रधानता दे रहा है, चाहे फिल्म पुरुष-केंद्रित (मेल-लीड) हो या महिला-केंद्रित (फीमेल-लीड)। लोग पूरे दिल से थिएटर्स तक पहुंच रहे हैं।"

अभिनेत्री ने आगे सिनेमा के बदलते स्वरूप पर जोर देते हुए कहा, "सबसे क्रांतिकारी बात यह रही कि ओपनिंग डे के कलेक्शन में महिला दर्शकों की भागीदारी बहुत ज्यादा दर्ज की गई है। दशकों से फिल्म इंडस्ट्री में यह धारणा बनी हुई थी कि पहले दिन की बम्पर कमाई केवल पुरुष दर्शकों के कारण होती है। ऐसे में सिनेमा देखने के इस ट्रेंड और दर्शकों की सोच में आ रहा यह सकारात्मक बदलाव वाकई सराहनीय है। हमारे एक छोटे से प्रोडक्शन हाउस की इस कोशिश को बड़ा बनाने के लिए सभी का धन्यवाद।"

क्या है ‘मां इंटी बंगारम’ की रहस्यमयी कहानी?

यह फिल्म एक ऐसी संस्कारी और पारंपरिक महिला के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक रूढ़िवादी परिवार में नई बहू बनकर कदम रखती है। वह स्वभाव से अत्यंत शांत, बड़ों की आज्ञा मानने वाली और हर कसौटी पर खरी उतरने वाली आदर्श बहू दिखाई देती है। हालांकि, ससुराल के लोगों को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं होता कि उसकी इस सादगी के पीछे एक गहरा रहस्य छिपा है। कहानी में मोड़ तब आता है जब उसका छुपा हुआ अतीत अचानक सबके सामने उजागर होने लगता है। विपरीत परिस्थितियों के बीच उसे अंततः उन्हीं लोगों की ढाल बनना पड़ता है, जो उस पर शक कर रहे होते हैं।

पारिवारिक मूल्यों और सस्पेंस से भरपूर इस बेहतरीन फिल्म का निर्देशन विख्यात निर्देशक नंदिनी रेड्डी ने किया है, जिनकी सधे हुए निर्देशन शैली की समीक्षक और दर्शक जमकर तारीफ कर रहे हैं।

आय घटने वाले बयान पर कांग्रेस सांसद ने दी सफाई, कहा- गलत पेश किया गया

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लातूर। कांग्रेस के लोकसभा सदस्य डॉ. शिवाजी कालगे ने अपनी आमदनी में गिरावट को लेकर दिए गए अपने पिछले बयान पर मचे सियासी घमासान के बीच एक औपचारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि उनके द्वारा दिए गए वक्तव्य को पूरी तरह से प्रसंग से अलग करके और तोड़-मरोड़कर जनता के सामने परोसा गया है। उन्होंने साफ किया कि सार्वजनिक जीवन में कदम रखने को लेकर उनके मन में रत्ती भर भी मलाल नहीं है और न ही उन्होंने सांसद के पद को किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत या आर्थिक नुकसान बताया है। लातूर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले डॉ. कालगे ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा किए गए अपने संदेश में आरोप लगाया कि कुछ तत्वों द्वारा सोची-समझी रणनीति के तहत उनके शब्दों का अनर्थ निकाला गया, जिससे आम जनता के बीच यह भ्रामक संदेश गया कि वे राजनीति में आकर दुखी हैं, जबकि हकीकत इसके सर्वथा विपरीत है।

आयकर भुगतान में भारी गिरावट के आंकड़ों से शुरू हुआ था समूचा विवाद

विवाद की पृष्ठभूमि दरअसल कुछ दिनों पूर्व डॉ. शिवाजी कालगे द्वारा अपनी पेशेवर जिंदगी को लेकर दिए गए एक बयान से जुड़ी हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि संसद सदस्य निर्वाचित होने के उपरांत उनकी चिकित्सकीय सेवाएं (मेडिकल प्रैक्टिस) काफी हद तक प्रभावित हुई हैं। उन्होंने तुलनात्मक आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया था कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान उन्होंने बतौर चिकित्सक लगभग 36 लाख रुपये का इनकम टैक्स (आयकर) अदा किया था, जबकि वर्ष 2024-25 में उनकी व्यावसायिक आय अत्यधिक कम हो जाने के कारण यह टैक्स घटकर महज 8.75 लाख रुपये के आसपास रह गया। उन्होंने अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए कहा था कि जनसेवा के दायित्वों के कारण वे अब अपने निजी अस्पताल और वहां आने वाले मरीजों को पहले की भांति पर्याप्त समय प्रदान करने में असमर्थ हैं।

साक्षात्कार के जवाब को गलत ढंग से परोसने का आरोप, जनसेवा को बताया अमूल्य

अपने नए स्पष्टीकरण में डॉ. कालगे ने स्थिति को साफ करते हुए बताया कि एक हालिया मीडिया साक्षात्कार के दौरान पत्रकारों ने उनसे यह सीधा सवाल किया था कि सक्रिय राजनीति और जनसेवा में आने के बाद उनके मुख्य चिकित्सा व्यवसाय पर क्या व्यावहारिक प्रभाव पड़ा है। इसके उत्तर में उन्होंने केवल एक सहज सत्य साझा किया था कि सामाजिक व राजनैतिक व्यस्तताओं के चलते उनके डॉक्टर वाले पेशे पर असर पड़ा है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि विरोधियों ने इस निष्कपट स्वीकारोक्ति को इस प्रकार प्रचारित किया जैसे कि वे जनसेवा के इस पावन कार्य को केवल पैसों के घाटे-मुनाफे की तराजू पर तौल रहे हों। उन्होंने अत्यंत दृढ़ता से कहा कि भारतीय लोकतंत्र के इस सबसे बड़े मंदिर (लोकसभा) में देश और क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व करने का जो अभूतपूर्व गौरव उन्हें प्राप्त हुआ है, वह उनके लिए पूरी तरह अमूल्य है और इसकी तुलना संसार के किसी भी बड़े वित्तीय लाभ या व्यक्तिगत स्वार्थ से कभी नहीं की जा सकती।

बिना किसी राजनैतिक पृष्ठभूमि के मिला जनसमर्थन, निष्ठा से कार्य करने का संकल्प

कांग्रेस सांसद ने भावुक होते हुए कहा कि वे किसी रसूखदार राजनैतिक घराने या पृष्ठभूमि से ताल्लुक नहीं रखते हैं, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उनकी योग्यता पर पूर्ण विश्वास जताते हुए उन्हें वर्ष 2024 के आम चुनाव में लातूर से अपना प्रत्याशी बनाया। इसके बाद क्षेत्र के जागरूक मतदाताओं ने भी उन पर अगाध स्नेह बरसाते हुए भारी मतों से विजयी बनाकर देश की संसद में भेजा। उन्होंने कहा कि दल और जनता द्वारा दिया गया यह अपार सम्मान ही उनके जीवन की सर्वश्रेष्ठ थाती है, जो उन्हें दिन-रात जनता के दुखों को दूर करने की ऊर्जा देती है। डॉ. शिवाजी कालगे ने अंत में दोहराया कि मतदाताओं, कार्यकर्ताओं और महाविकास अघाड़ी गठबंधन के नेताओं से उन्हें जो अमूल्य स्नेह मिल रहा है, उसकी कीमत रुपयों-पैसों में कतई नहीं मापी जा सकती और वे अपनी आखिरी सांस तक पूरी ईमानदारी, शुचिता तथा निष्ठा के साथ आमजन के कल्याण के लिए समर्पित रहेंगे।

कर्नाटक MLC चुनाव में कांग्रेस का दबदबा, बीजेपी को झटका

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बेंगलुरु। झारखंड में राज्यसभा चुनाव के दौरान लगे तगड़े झटके के बाद कांग्रेस पार्टी के लिए दक्षिण भारत से एक बेहद सुकून देने वाली खबर सामने आई है। कर्नाटक में संपन्न हुए विधान परिषद के चुनावों में मिली शानदार जीत ने कांग्रेस आलाकमान को बड़ी राहत पहुंचाई है। राज्य की सात विधान परिषद सीटों पर हुए इस कड़े मुकाबले में प्रदेश की सत्तारूढ़ कांग्रेस ने अपने बेहतरीन राजनैतिक कौशल का प्रदर्शन करते हुए पांच सीटों पर कब्जा जमा लिया है। गुरुवार को मतगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक परिणामों में कांग्रेस पार्टी सबसे बड़े और एकतरफा विजेता के रूप में उभरकर सामने आई है। दूसरी तरफ, देश की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को महज दो सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है, जबकि उसकी क्षेत्रीय सहयोगी दल जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडीएस अपनी पारंपरिक सीट बचाने में पूरी तरह विफल रही और उसके प्रत्याशी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा।

क्रॉस वोटिंग के चक्रव्यूह में फंसी भाजपा, झारखंड का बदला कर्नाटक में पूरा

इस पूरे चुनावी समर में सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि जिस प्रकार झारखंड में कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग के कारण गहरा नुकसान उठाना पड़ा था, ठीक उसी तर्ज पर कर्नाटक के भीतर भाजपा को अपनी ही पार्टी के भीतर से बड़ा झटका लगा है। राजनैतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि कर्नाटक में भाजपा के अपने ही विधायकों ने ऐन वक्त पर पार्टी लाइन से अलग जाकर क्रॉस वोटिंग की और अपने ही नेतृत्व को धोखा दे दिया। इस अप्रत्याशित राजनैतिक घटनाक्रम को लेकर सियासी पंडितों का मानना है कि कांग्रेस के संकटमोचक और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेहद चालाकी से झारखंड में अपनी पार्टी को मिले जख्मों का हिसाब कर्नाटक की धरती पर भाजपा से बराबर कर लिया है।

सत्तारूढ़ कांग्रेस की सांगठनिक मजबूती और जेडीएस का सूपड़ा साफ

इन चुनाव परिणामों ने सिद्ध कर दिया है कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की जुगलबंदी के चलते कांग्रेस संगठन धरातल पर बेहद मजबूत स्थिति में है। सात में से पांच सीटों पर मिली यह एकतरफा जीत आगामी स्थानीय और निकाय चुनावों के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंकने का काम करेगी। इसके विपरीत, जेडीएस के लिए यह परिणाम किसी दुःस्वप्न से कम नहीं हैं, क्योंकि भाजपा के साथ गठबंधन में होने के बावजूद वे अपने कैडर और विधायकों के मतों को सहेजने में नाकाम रहे, जिसने उनके राजनैतिक वजूद पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

अंतर्कलह से जूझती कर्नाटक भाजपा और आगामी संगठन विस्तार पर संकट

बीजेपी खेमे के लिए दो सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद भी इस चुनाव के मायने बेहद चिंताजनक हैं। अपनी ही पार्टी के विधायकों द्वारा बगावत कर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने से प्रदेश भाजपा की आंतरिक गुटबाजी खुलकर सरेबाजार आ गई है। केंद्रीय नेतृत्व ने इस अनुशासनहीनता और भितरघात को अत्यंत गंभीरता से लिया है। राजनैतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि भाजपा ने समय रहते अपने विधायकों के इस असंतोष को दूर नहीं किया, तो आने वाले दिनों में राज्य के भीतर पार्टी को और भी बड़े राजनैतिक संकटों का सामना करना पड़ सकता है।

थरूर की टिप्पणी से कांग्रेस में हलचल, बीजेपी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को एक बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी खुद अपनी ही पार्टी के भीतर अपनी साख और समर्थन खोते जा रहे हैं। सत्तारूढ़ दल ने विपक्ष के नेता पर तीखा हमला बोलने के लिए कांग्रेस के ही वरिष्ठ सांसद शशि थरूर द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली को लेकर की गई कथित प्रशंसा का विशेष रूप से हवाला दिया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समक्ष भारतीय नाविकों के संवेदनशील मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी के दृढ़ कूटनीतिक रुख को लेकर शशि थरूर की सकारात्मक टिप्पणियां, इस विषय पर राहुल गांधी द्वारा अपनाए गए स्टैंड के बिल्कुल विपरीत हैं। पूनावाला ने एक वीडियो संदेश जारी कर तंज कसा कि यह बेहद निराशाजनक स्थिति है कि बीते दिन राहुल गांधी का जन्मदिन था, लेकिन उन्हें अपनी ही पार्टी के भीतर से ही कोई सकारात्मक उपहार मिलने के बजाय यह विरोधाभास झेलना पड़ा।

शशि थरूर द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व कौशल और ऊर्जा की कथित सराहना

भाजपा प्रवक्ता ने अपने दावों को पुख्ता करने के लिए आगे कहा कि कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशिष्ट नेतृत्व गुणों की खुलकर सराहना की है। उनके अनुसार, थरूर ने प्रधानमंत्री की दूरगामी सोच, कूटनीतिक संवाद स्थापित करने की अद्भुत क्षमता, कार्य के प्रति उनकी अटूट ऊर्जा और जनसभाओं में प्रभावशाली वक्तव्य देने की कला का लोहा माना है। भाजपा का कहना है कि थरूर ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने निर्णयों और योजनाओं के माध्यम से समूचे भारतीयों के जनजीवन पर एक अत्यंत अमिट और गहरी छाप छोड़ी है, जो विपक्षी खेमे की सोच में बड़े मतभेद को उजागर करता है।

'कूल पीएम राहुल' सोशल मीडिया अभियान पर भाजपा का कड़ा प्रहार

शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पार्टी द्वारा राहुल गांधी को भविष्य के प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश करने के लिए चलाए जा रहे विभिन्न राजनीतिक व डिजिटल अभियानों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और जमीनी नेता स्वयं आलाकमान की इस सोच से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। एक तरफ जहां कांग्रेस के रणनीतिकार 'कूल पीएम राहुल' जैसे नारे गढ़कर यह माहौल बनाने में जुटे हैं कि आने वाले समय में राहुल गांधी ही देश की कमान संभालेंगे, वहीं दूसरी ओर उनकी ही पार्टी के निर्वाचित सांसद और कद्दावर नेता उनके इस नेतृत्व पर मौन रहकर विपरीत राय जाहिर कर रहे हैं। भाजपा ने जोर देकर कहा कि राहुल गांधी न केवल आम जनता के बड़े वर्ग का विश्वास खो चुके हैं, बल्कि कभी उनके सबसे करीबी और रणनीतिकार माने जाने वाले सिपहसालार भी अब उनका साथ छोड़ चुके हैं।

इंडी गठबंधन के घटक दलों द्वारा राहुल के राष्ट्रीय नेतृत्व को स्वीकार करने से इनकार

भाजपा प्रवक्ता ने आंतरिक कलह के दायरे को और व्यापक बताते हुए आरोप मढ़ा कि कांग्रेस के कई प्रमुख क्षेत्रीय और राष्ट्रीय सहयोगी दल भी राहुल गांधी के केंद्रीय नेतृत्व के अधीन काम करने को कतई तैयार नहीं हैं। पूनावाला ने विपक्षी एकजुटता पर तंज कसते हुए कहा कि अब उन्हें अपने ही वैचारिक गठबंधन के साथियों का बुनियादी समर्थन हासिल नहीं रह गया है। उन्होंने वामपंथी दलों (लेफ्ट) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) जैसी प्रमुख क्षेत्रीय ताकतों का नाम लेते हुए कहा कि ये दल राष्ट्रीय स्तर पर राहुल गांधी को अपना सर्वमान्य नेता मानने से बचते रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता ने अपने हमले के अंत में कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए राहुल गांधी अब जमीनी स्तर पर जनता के 'असली नेता' नहीं रह गए हैं, बल्कि वे सोशल मीडिया तक सीमित रहने वाले महज एक 'रील नेता' बनकर रह गए हैं।

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