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हाथ में रक्षा सूत्र बांधते समय कितनी बार लपेटना चाहिए? 3, 5 या 7 बार, जानें क्या कहता है नियम

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हिंदू धर्म में जब कोई व्यक्ति अपने घर या तीर्थ स्थान पर पूजा पाठ, हवन, यज्ञ आदि या कोई अन्य मांगलिक कार्य करता है तो पंडित जी उसके हाथों में रक्षा सूत्र या कलावा बांधते हैं. इसे कुछ स्थानों पर मौली भी कहा जाता है. पंडित जी वह रक्षासूत्र हाथ में 3 बार या 5 बार लपेटते हैं. कुछ लोगों को देखेंगे कि वे अपनी कलाई में एक ही बार कलावा लपेटकर बांधे होते हैं तो कुछ 7 या उससे अधिक बार रक्षा सूत्र को लपेटते हैं. ऐसे में सवाल यह है कि हाथ में रक्षा सूत्र कितनी बार लपेटना चाहिए, 3, 5 या 7 बार?
हाथ में रक्षा सूत्र कितनी बार लपेटना चाहिए?
मुख्य रूप से हाथ में जब रक्षा सूत्र बांधा जाता है तो उसे कम से कम 3 बार लपेटा जाता है. यह अ​धिकतर पंडित और पुरोहित करते हैं. कुछ लोग 5 बार कलावे को हाथ से लपेटकर बांध देते हैं. हाथ में रक्षा सूत्र या कलावे को 3 या 5 बार लपेटना चाहिए.

रक्षा सूत्र को जब 3 बार लपेटा जाता है तो उसका संंबंध त्रिदेवों और त्रिशक्तियों से हो जाता है. हिंदू धर्म में त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश शामिल हैं, वहीं त्रिशक्तियों में माता महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली हैं. जब आप 3 बार रक्षा सूत्र लपेटकर बांधते हैं तो आपको त्रिदेव और त्रिशक्तियों ये सुरक्षा प्राप्त होती है. वे आपकी रक्षा करते हैं.
कलावा 5 बार लपेटने का महत्व

जब आप हाथ में कलावा या रक्षा सूत्र को 5 बार लपेटकर बांधते हैं तो इसका संबंध इस सृष्टि के पंच तत्वों से होता है. उन पंच तत्वों में पृथ्वी, आकाश, जल, अग्नि और वायु शामिल हैं. इससे मिलकर मनुष्य का शरीर बना है. रक्षा सूत्र को 5 बार लपेटना इन पंच तत्वों को संतुलित और सुरक्षित रखने का प्रतीक माना जाता है.

रक्षा सूत्र किस हाथ में बांधना चाहिए?
पुरुषों को रक्षा सूत्र उनके दाहिने हाथ में बांधना चाहिए, वहीं विवाहित महिलाओं के बाएं हाथ में रक्षा सूत्र बांधने का नियम है. लड़कियों और अविवाहित युवतियों के दाएं हाथ में रक्षा सूत्र बांध सकते हैं.
रक्षा सूत्र बांधते समय आपका हाथ खुला न रहे, मुट्ठी बांध लेनी चाहिए. मंत्रोच्चार के साथ ही रक्षा सूत्र बंधवाना चाहिए. रक्षा सूत्र बांधने के बाद पंडित और पुरोहित को दक्षिणा देते हैं.

कैसे बनाएं बाती कि पूजा के समय खिला-खिला जले दीपक, भगवान प्रसन्न होकर दें मनचाहा आशीर्वाद!

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देवी और देवता की पूजा के समय एक दीपक जलाते हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. यह दीपक घी का या फिर तेल का होता है. दीपक की बाती ठीक नहीं होती है तो वह सही से नहीं जलती है. बीच में बूझ जाती है या फिर उसकी लौ खिली-खिली नहीं होती है. इससे दीपक के अंदर चारों ओर काला घेरा भी बन जाता है. पूजा के दौरान वह दीपक बूझ जाए तो उसे अशुभ माना जाता है. इस वजह से दीपक की बाती बहुत ही सावधानी से बनाते हैं, नहीं तो वह सही से जलती नहीं है.
दो तरह की होती है दीपक की बाती
दीपक की बाती दो तरह की होती है. एक गोल बाती होती है, जो मुख्यत: घी वाले दीपक में लगाते हैं, वहीं दूसरी लंबी बाती होती है, जिसे तेल वाले दीपक के लिए प्रयोग में लाते हैं.

घी के दीपक के लिए गोल बाती बनाते हैं. इसके लिए आपको कच्चा सूत या फिर कपास वाली रुई का उपयोग करना है. सिंथेटिक रुई का उपयोग न करें. अपने हाथ में थोड़ी सी रुई लें और उस गोलकर दें. उसके बीच में ऊपर की ओर एक चोंच बनाएं और उस चोंच पर थोड़ा सा कपूर का पाउडर लगा दें. या फिर उस जगह पर कच्चा दूध लगाएं, इससे वह चोंच नुकीली हो जाएगी. फिर गाय के घी में उस बाती को डूबो दें. पूजा के समय उसे जलाएं, उसकी लौ खिली-खिली होगी और लंबे समय तक जलेगी. समय-समय पर उसमें घी डालते रहें.
लंबी बाती कैसे बनाएं?
यदि आप तेल वाले दीपक के लिए बाती बनाना चाहते हैं तो उसके लिए बाती लंबी होनी चाहिए ताकि वह अच्छे से तेल में डूब जाए और दीपक के किनारे के सहारे देर तक जलती रहे.

लंबी बाती बनाने के लिए अपने हाथ में थोड़ी सी रुई लें. उसे लंबा आकार दें, उसके दोनों छोर को ​पतला और नुकीला कर दें. इस प्रक्रिया में इस बात का ध्यान रखें कि उसे बहुत जोर से दबाकर टाइट नहीं करना है. बाती अगर बहुत टाइट होगी, तो तेल उसके ऊपर तक नहीं जा पाएगा, इससे व​ह बाती बीच में ही बूझ सकती है. जिस छोर से बाती को जलाना है, उस पर कपूर का पाउडर लगा सकते हैं, ताकि आसानी से जल जाए.
जलाने से पहले करें ये काम
जब आपको दीपक जलाना है, तो उससे कुछ समय पहले मिट्टी के दीपक को पानी में डालकर रख दें, फिर थोड़े देर बाद बाहर निकाल कर सुखा दें. ऐसे ही बाती को तेल में डुबोएं, इससे बाती अच्छी तरह से तेल में भीग जाएगी. जब आप दीपक जलाएंगे तो वह खिला-खिला जलेगा.

कौन हैं खीर भवानी देवी? जिनके मंदिर के कुंड का जल देता है संकट और खुशहाली का संकेत, 22 जून से लगेगा मेला

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खीर भवानी देवी का मंदिर जम्मू-कश्मीर में गांदरबल जिले के तुलमुला में है. हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को खीर भवानी मेले का आयोजन होता है. उस दिन इस ऐतिहासिक मंदिर में बड़ी संख्या में लोग आते हैं. यह कश्मीरी पंडितों के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में से एक है. खीर भवानी मंदिर में एक जल कुंड है, जिसके जल का रंग संकट और खुशहाली का संकेत देता है.
कौन हैं खीर भवानी देवी?
खीर भवानी मंदिर में माता रागन्या देवी विराजमान हैं. इनको कश्मीरी पंडितों की कुलदेवी कहा जाता है. इस देवी को भोग में खीर अर्पित करते हैं. इस वजह से इस देवी को खीर भवानी कहा जाता है. श्रद्धालु माता को विशेष रूप से दूध, खीर और बताशे अर्पित करते हैं.
कुंड का जल देता है शुभ-अशुभ संकेत
यह मंदिर अपने प्राकृतिक जलस्रोत के लिए प्रसिद्ध है. मान्यता है कि इसका पानी चमत्कारिक रूप से रंग बदलता है. गहरे रंग को कठिन समय का संकेत माना जाता है, जबकि हल्के रंग को शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.

इस साल 22 जून को खीर भवानी मेला लगेगा. यह मेला कश्मीर की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है. स्थानीय कश्मीरी मुस्लिम परंपरागत रूप से मेले की व्यवस्थाओं में सहयोग करते हैं, जलपान और लंगर की व्यवस्था करते हैं तथा लौटकर आने वाले कश्मीरी पंडितों का स्वागत करते हैं. यह सदियों पुरानी सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का उदाहरण माना जाता है.
मुख्य मेला 22 जून को तुलमुला में आयोजित होगा. इसके अलावा कश्मीर घाटी के अन्य क्षेत्रों जैसे कुपवाड़ा, अनंतनाग और कुलगाम में भी इससे जुड़े धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
देशभर से हजारों श्रद्धालु कश्मीर घाटी पहुंचते हैं. आमतौर पर प्रशासन की ओर से विशेष परिवहन व्यवस्था की जाती है, जिसमें जम्मू से बसों के बेड़े को रवाना किया जाता है.
सीएम उमर अब्दुल्ला ने मेले की तैयारी का लिया जायजा
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को माता खीर भवानी मेले की तैयारियों की समीक्षा की. सीएम उमर अब्दुल्ला ने देश और विदेश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए की जा रही व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया. श्रद्धालु हर वर्ष आयोजित होने वाले इस मेले में भाग लेने और देवी का आशीर्वाद लेने के लिए यहां पहुंचते हैं.
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि 22 जून को खीर भवानी मेले का पावन अवसर है, जिसमें दुनिया भर से श्रद्धालु शामिल होते हैं. उन्होंने कहा कि स्थानीय विधायक होने के नाते उन्होंने स्वयं मंदिर पहुंचकर व्यवस्थाओं का आकलन किया और विभिन्न विभागों की तैयारियों की समीक्षा की.
सीएम ने बताया कि उन्होंने मंदिर के पुजारियों और अन्य संबंधित लोगों से बातचीत कर उनकी आवश्यकताओं और चिंताओं को समझा. उन्होंने कहा कि कुछ जरूरी कार्य अभी बाकी हैं और प्रशासन मेले के शुरू होने से पहले उन्हें पूरा करने का हरसंभव प्रयास करेगा.
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि श्रद्धालुओं के लिए सुचारु व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है और संबंधित अधिकारियों को शेष कार्य तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं.
उन्होंने विश्वास जताया कि मेले के शुरू होने से पहले श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं, बुनियादी व्यवस्थाएं और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध करा दी जाएगी.

30 साल से कम आयु के लोग चाणक्य नीति की इन 5 बातों का जरूर करें पालन, तभी मिलेगी सफल व्यक्ति की पहचान

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आचार्य चाणक्य को भारत के महानतम विद्वानों में गिना जाता है. उनके द्वारा सिखाए गए सिद्धांत और जीवन के सबक आज भी लोगों को सही मार्ग दिखाते हैं. चाणक्य का मानना ​​था कि अगर कोई व्यक्ति 30 वर्ष की आयु से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातें सीख ले, तो उसका भविष्य का जीवन बहुत सुगम और सफल होगा. आइए जानते हैं ऐसी 5 बातें कौन सी हैं.

आचार्य चाणक्य को भारत के महानतम नीति-निर्माताओं और विद्वानों में गिना जाता है. उनकी नीतियां आज भी जीवन मैनेज, करियर और सफलता के क्षेत्र में लोगों का मार्गदर्शन करती हैं. खासकर युवावस्था को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दौर माना जाता है, क्योंकि इसी समय लिए गए फैसले भविष्य की दिशा तय करते हैं. चाणक्य नीति के अनुसार 30 वर्ष की आयु से पहले कुछ विशेष सिद्धांतों को अपनाने वाला व्यक्ति न केवल अपने लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकता है, बल्कि समाज में सम्मान और सफलता भी हासिल कर सकता है. आचार्य चाणक्य ने अनुशासन, शिक्षा, सही संगति, समय के सदुपयोग और आत्मसंयम को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया है. अगर युवा इन बातों को अपने जीवन में उतार लें, तो वे कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सफलता की नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं. आइए जानते हैं चाणक्य नीति की वे 5 महत्वपूर्ण बातें, जिन्हें हर युवा को अवश्य अपनाना चाहिए.

आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में बताया है कि सभी को अपने समय का सदुपयोग करना चाहिए. समय का सम्मान ना करने वाले लोग जीवन में कई बड़े अवसरों से वंचित रह जाते हैं. युवावस्था में समय का सदुपयोग करने वाले ही आगे चलकर बड़ी सफलता प्राप्त करते हैं. जो लोग इस अवसर को खो देते हैं, वे जीवन भर भटकते रहते हैं और वे अपनी असफलता के लिए किस्मत, भगवान, दुनिया समेत सभी को दोष देते हैं.

केवल कमाना ही नहीं, बल्कि बचत करना भी बहुत महत्वपूर्ण है. चाणक्य के अनुसार, हर किसी को अपनी आय का कुछ हिस्सा भविष्य के लिए जरूर बचाना चाहिए. जो लोग कम उम्र से ही धन को मैनेज करना सीख लेते हैं, उन्हें भविष्य में आर्थिक कठिनाइयों का सामना बहुत कम करना पड़ता है. धन का आना और उसको साथ के साथ खर्च कर देना, बहुत गलत बात है. आप अगर धन को सही तरह से मैनेज नहीं कर पाएंगे तो 30 के बाद का जीवन आपके लिए कई कठिनाई लेकर आएगा.
चाणक्य ने नीति में कहा है कि जिन लोगों के साथ हम उठते-बैठते हैं या जिनसे दोस्ती करते हैं, उनका प्रभाव सीधे हमारे जीवन पर पड़ता है. इसलिए, हमें हमेशा अच्छे और सकारात्मक विचारों वाले लोगों से ही दोस्ती करनी चाहिए. इस तरह से मेलजोल रखने से हमारे जीवन में सकारात्मक विचार बने रहेंगे. लेकिन, बुरी दोस्ती सफलता के रास्ते से भटका सकती है इसलिए दोस्त चुनते समय हमेशा ध्यान रखना चाहिए. अगर आप माता-पिता या परिवार के लिए कुछ करना चाहते हैं तो अभी से इन आदतों को बदल दें.

चाणक्य ने नीति में कहा है कि जिन लोगों के साथ हम उठते-बैठते हैं या जिनसे दोस्ती करते हैं, उनका प्रभाव सीधे हमारे जीवन पर पड़ता है. इसलिए, हमें हमेशा अच्छे और सकारात्मक विचारों वाले लोगों से ही दोस्ती करनी चाहिए. इस तरह से मेलजोल रखने से हमारे जीवन में सकारात्मक विचार बने रहेंगे. लेकिन, बुरी दोस्ती सफलता के रास्ते से भटका सकती है इसलिए दोस्त चुनते समय हमेशा ध्यान रखना चाहिए. अगर आप माता-पिता या परिवार के लिए कुछ करना चाहते हैं तो अभी से इन आदतों को बदल दें.

कुछ लोग भावनाओं के आवेश में आकर गलत निर्णय ले लेते हैं, इससे बचना चाहिए. चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति सही समय पर अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना सीख लेता है, वह कभी धोखे में नहीं आएगा और ना ही गलत निर्णय लेगा. 30 से पहले आपको ये आदत जरूर बदल लेनी चाहिए. जो लोग अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना जानते हैं, वे कठिन परिस्थितियों में भी सही निर्णय ले सकते हैं. यही आपको आगे चलकर एक सफल व्यक्ति के रूप में पहचान दिलाएगा.

ज्ञान का कोई अंत नहीं है इसलिए, हमें हमेशा नई चीजें सीखने के लिए उत्सुक रहना चाहिए. चाणक्य के अनुसार, व्यक्ति को हमेशा नई चीजें सीखने के लिए तत्पर रहना चाहिए. जितना आप नई चीजों को जानेंगे या पढ़ेंगे, उतना ही आपको भविष्य में फायदा मिलेगा. बदलते समय के साथ खुद को अपडेट करने वाले ही जीवन में प्रगति करते हैं और समाज में सम्मान प्राप्त करते हैं. वहीं जो लोग जानना छोड़ देते हैं, वे हमेशा पीछे रह जाते हैं.

राशिफल 20 जून 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा

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  • मेष राशि :- हर्ष, यात्रा, राजसुख, सफलता, आलस्य से हानि, गृह कलह तथा मानसिक अशांति रहेगी। 
  • वृष राशि :- विरोध होगा, व्यय से कष्ट, लाभ होगा, शिक्षा-लेखन कार्य में सफलता मिलेगी ध्यान दें। 
  • मिथुन राशि :- व्यापार में क्षति, यात्रा विवाद, उद्योग-व्यापार की स्थिति में कमी, हानि होगी। 
  • कर्क राशि :- शरीरादि मध्यम, भूमि व राजलाभ, असफलता का दिन, आलस्य का अनुभव होगा। 
  • सिंह राशि :- वाहन आदि भय, कष्ट, राज सुख, यात्रा होगी, शुभ कार्य में व्यवधान होगा। 
  • कन्या राशि :- व्यय, प्रवास, विरोध होगा, भूमि लाभ, राजकार्य में व्यवधान होगा, धैर्य से कार्य करें। 
  • तुला राशि :- रोगभय, यात्रा सुख, खर्च की अधिकता, व्यापार में सुधार हो सकता है, कार्य बनेंगे ध्यान दें।
  • वृश्चिक राशि :– कार्य सिद्धी से लाभ, विरोध होगा, भूमि लाभ होगा, राजकार्य में व्यवस्था बनेगी। 
  • धनु राशि :- लाभ, यश, हर्ष होगा, धर्म में रुचि बढ़ेगी, यात्रा सामान्य रहेगी, शिक्षा जगत से ख्याति मिलेगी। 
  • मकर राशि :- विरोध, व्यापार से हानि, शरीर कष्ट, अधिक खर्च करने से कुछ कार्य होंगे। 
  • कुंभ राशि :- व्यय होगा, प्रभाव में वृद्धि होगी, रोगभय, प्रतिष्ठा प्राप्त होगी तथा विरोधी असफल अवश्य होंगे। 
  • मीन राशि :- राजभय, यशमान, लाभ, चोरी भय, कार्य में विलम्ब, परेशानी होगी ध्यान दें। 
     

नियमित एवं कड़ाई से मॉनिटरिंग कर गुणवत्ता सुनिश्चित करने व समय-सीमा में कार्यों को पूर्ण करने के निर्देश

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रायपुर :  लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने आज जशपुर जिले में विभाग द्वारा निर्माणाधीन कार्यों का निरीक्षण कर उनकी प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सभी कार्यों का सतत पर्यवेक्षण करते हुए निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से काम पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बंसल ने जशपुर में रौनीघाट से बगीचा मार्ग, बगीचा से चराईडांड मार्ग तथा मेडिकल कॉलेज के लिए प्रस्तावित पहुंच मार्ग का स्थल निरीक्षण किया। उन्होंने मेडिकल कॉलेज पहुंच मार्ग को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर जोर देते हुए फोरलेन सड़क निर्माण का प्रस्ताव शीघ्र प्रेषित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने जशपुर से पत्थलगांव राष्ट्रीय राजमार्ग का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्यों में तेजी लाने और त्वरित गति से निर्माण कार्य संपादित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क एवं अन्य अधोसंरचनात्मक परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

विभागीय सचिव ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर जशपुर और पत्थलगांव में निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित सड़कों, पुलों तथा भवनों के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने, नियमित मॉनिटरिंग करने तथा कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों का लाभ लोगों तक समय पर पहुंचे, इसके लिए सभी अधिकारी जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। कार्यों के निरीक्षण और बैठक के दौरान कलेक्टर रोहित व्यास, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता व्ही.के. भतपहरी, मुख्य अभियंता सर्वबी.एस. बघेल, ज्ञानेश्वर कश्यप और जी.एस. मंडावी सहित जिले के कार्यपालन अभियंता तथा अनुविभागीय अधिकारी भी मौजूद थे।
 

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन बनी किसानों की उम्मीद, शिकायत पर अतिक्रमण मुक्त हुई नहर

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रायपुर : मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एक बार फिर आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम साबित हुई है। बलरामपुर जिले के ग्राम राधानगर में किसानों की शिकायत पर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण से बाधित नहर को मुक्त कराया, जिससे क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था पुनः सुचारु हो गई है।

जानकारी के अनुसार, किसानों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी कि धमनी जलाशय योजना की नहर के जल प्रवाह को एक निजी व्यक्ति द्वारा निर्धारित दिशा से मोड़कर अतिक्रमण कर पाट दिया गया है। इससे नहर का जल प्रवाह बाधित हो रहा था और किसानों को सिंचाई के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

शिकायत मिलते ही संबंधित विभागों के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच की। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर अतिक्रमणकर्ता को तत्काल अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए। प्रशासन की सक्रिय पहल के बाद अतिक्रमणकर्ता ने स्वयं नहर से अतिक्रमण हटा लिया। इसके पश्चात नहर का सुधार कार्य भी कराया गया, जिससे जल प्रवाह पुनः शुरू हो गया।

नहर के पुनर्संचालन से राधानगर एवं आसपास के किसानों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा, जिससे कृषि कार्यों को गति मिलेगी और फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में सहायता मिलेगी। 

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं जिला प्रशासन की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि समयबद्ध समाधान से उन्हें बड़ी राहत मिली है।

यह मामला दर्शाता है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं का शीघ्र निराकरण कर शासन की योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचाया जा रहा है।
 

पासपोर्ट सत्यापन में उत्कृष्ट कार्य के लिए मध्यप्रदेश पुलिस को लगातार दूसरे वर्ष राष्ट्रीय सम्मान

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भोपाल : नागरिक सेवाओं को सरल, त्वरित और पारदर्शी बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस के निरंतर प्रयासों को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान किए गए पासपोर्ट आवेदनों के पुलिस सत्यापन के प्रदर्शन के आधार पर मध्यप्रदेश पुलिस को 5 लाख से कम पासपोर्ट आवेदन श्रेणी में देश में प्रथम स्थान प्रदान किया गया है।

विदेश मामलों के माननीय मंत्री डॉ. एस. जयशंकर द्वारा 19 जून 2026 (शुक्रवार) को "सीबी मुथम्मा हॉल", 'सी' विंग, जवाहरलाल नेहरू भवन, विदेश मंत्रालय, नई दिल्ली" में मध्यप्रदेश पुलिस को वर्ष 2025-26 के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए “Institutional Performance Award for State Police” से सम्मानित किया गया।उपरोक्त कार्यकम में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व उप पुलिस महानिरीक्षक कानून व्यवस्था श्री तरूण नायक एवं सहायक पुलिस महानिरीक्षक विशेष शाखा सुरक्षाश्रीमती रश्मि मिश्रा ने किया।

इस उपलब्धि के लिए पुलिस महानिदेशकश्री कैलाश मकवाणा ने प्रदेश के सभी जिलों, विशेष शाखा, पासपोर्ट सत्यापन से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान पूरी मध्यप्रदेश पुलिस के सामूहिक प्रयासों, समर्पण और सेवा भावना का परिणाम है। उन्होंने भविष्य में भी नागरिकों को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ प्रदान करने के लिए इसी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच कुल 3लाख 35हजार 647 पासपोर्ट सत्यापनसमयबद्ध एवं गुणवत्ता पूर्ण तरीके से संपादित किए गए। उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश को इस श्रेणी में प्रथम पुरस्कार (Citation) प्रदान किया गया है।

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पुलिस ने पिछले वर्ष भी पहली बार यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किया था और अब लगातार दूसरे वर्ष यह उपलब्धि अर्जित कर प्रदेश पुलिस ने अपनी कार्यकुशलता, जवाबदेही और नागरिक सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः सिद्ध किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों, समयबद्ध सत्यापन प्रक्रिया तथा तकनीक आधारित कार्यप्रणाली का परिणाम है।
 

रतलाम के डायल-112 हीरोज

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भोपाल : रतलाम जिले के थाना औद्योगिक क्षेत्र जावरा में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं त्वरित कार्यवाही से रेलवे ब्रिज के नीचे परित्यक्त अवस्था में मिली एक नवजात बच्ची को सुरक्षित संरक्षण प्रदान करते हुए समय पर अस्पताल पहुँचाया गया। पुलिस की मानवीय पहल से नवजात को तत्काल चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई जा सकी।

18 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना औद्योगिक क्षेत्र जावरा अंतर्गत रेलवे ब्रिज के नीचे एक नवजात बच्ची परित्यक्त अवस्था में मिली है, जिसे कोई अज्ञात व्यक्ति छोड़कर चला गया है। तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया तथा वरिष्ठ अधिकारियों को भी घटना से अवगत कराया गया।

डायल-112 स्टाफ आरक्षक हीरालाल दांगी एवं पायलट अशोक सेन तत्काल घटनास्थल पर पहुँचे और नवजात बच्ची को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। इसके उपरांत डायल-112 टीम ने बच्ची को डायल-112 वाहन से शासकीय चिकित्सालय जावरा पहुँचाकर भर्ती कराया।

डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों एवं जरूरतमंद नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य निरंतर कर रही है।
 

छत्तीसगढ़ के पर्यटन रिसॉर्ट्स में मिलेगा विश्वस्तरीय भोजन

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रायपुर : छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों पर आने वाले सैलानियों को अब वैश्विक स्तर का खान-पान और शानदार आतिथ्य अनुभव मिलेगा। इस दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के रिसॉर्ट कर्मचारियों के लिए आयोजित द्वितीय कलिनरी स्किल प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (आईएचएम) नवा रायपुर द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य के पर्यटन रिसॉर्ट्स की सेवाओं को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपग्रेड करना है।

आधुनिक पाक कला और स्वच्छता मानकों का मिला व्यावहारिक ज्ञान

 इस प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न रिसॉर्ट्स से आए कर्मचारियों को आधुनिक कुकिंग तकनीकों, फूड प्रेजेंटेशन (खाद्य प्रस्तुतीकरण), लागत नियंत्रण और रसोई संचालन (किचन मैनेजमेंट) के गुर सिखाए गए। साथ ही, पर्यटकों की सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हाइजीन (स्वच्छता) एवं खाद्य सुरक्षा मानकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। आईएचएम रायपुर के अनुभवी संकाय सदस्यों और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को भारतीय, क्षेत्रीय और समकालीन व्यंजनों को तैयार करने की बारीकियां सिखाईं।

आतिथ्य सेवाओं से मजबूत होगी छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय पहचान- डॉ. भारती दासन

आईएचएम रायपुर परिसर में आयोजित समापन एवं प्रमाण-पत्र वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारती दासन उपस्थित रहे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पर्यटन उद्योग में गुणवत्तापूर्ण भोजन और उत्कृष्ट सेवाएं किसी भी पर्यटक के सफर को यादगार बनाती हैं। यदि प्रशिक्षित कर्मचारी इन तकनीकों को अपने रिसॉर्ट्स में लागू करेंगे, तो इससे न केवल पर्यटकों की संतुष्टि बढ़ेगी बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ के पर्यटन की प्रतिष्ठा और मजबूत होगी।

बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच सर्विस क्वालिटी ही सफलता की कुंजी- विवेक आचार्य

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक तथा आईएचएम रायपुर के प्राचार्य विवेक आचार्य ने कौशल विकास के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के इस दौर में सेवाओं की गुणवत्ता ही सबसे बड़ा अंतर पैदा करती है। यह प्रशिक्षण कर्मचारियों में नवाचार, दक्षता और व्यावसायिकता लाने में मील का पत्थर साबित होगा।

 यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल और आईएचएम रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। समापन समारोह में पर्यटन मंडल मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न रिसॉर्ट्स के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थी शामिल हुए। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले सभी प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि द्वारा प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
 

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