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PM मोदी का नया ‘मास्टर प्लान’? नीतीश कुमार को लेकर सियासी अटकलें

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पटना। बिहार की सियासत में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गए हैं। सियासी गलियारों में यह चर्चा पुरजोर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित कैबिनेट विस्तार में नीतीश कुमार का नाम मंत्रियों की सूची में सबसे आगे चल रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करने के पीछे भाजपा उत्तर प्रदेश के कुर्मी वोट बैंक को साधने की रणनीति बना रही है। हालांकि, इसके समानांतर एक दूसरी थ्योरी यह भी चल रही है कि इस कदम के जरिए नीतीश कुमार को बिहार की सक्रिय राजनीति से दूर करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि राज्य की सत्ता पर उनकी पकड़ को शिथिल किया जा सके।

मुख्यमंत्री पद का त्याग और केंद्रीय मंत्री के रूप में कद का आकलन

बिहार के राजनीतिक हलकों में यह यक्ष प्रश्न तैर रहा है कि यदि नीतीश कुमार केंद्र में मंत्री पद की भारी-भरकम जिम्मेदारी संभालने में सक्षम हैं, तो उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री का पद क्यों छोड़ा। विदित हो कि कुछ समय पहले उनके स्वास्थ्य, सार्वजनिक भाषणों और कार्यक्रमों के दौरान उनके आचरण को लेकर कई तरह के सवाल उठे थे, जिसके बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ और सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली। राजनीतिक विश्लेषकों का तर्क है कि जब भी नीतीश कुमार के भविष्य के राजनीतिक पुनर्वास की बात होती थी, तो उनके कद के अनुरूप उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति या एनडीए संयोजक जैसे बड़े पदों की चर्चा की जाती थी। ऐसे में उन्हें महज एक केंद्रीय मंत्री बनाना उनके लंबे राजनीतिक योगदान का प्रमोशन तो कतई नहीं कहा जा सकता।

दिल्ली का स्थायी ठिकाना और बिहार यात्रा पर संशय के बादल

चर्चाओं के अनुसार, यदि नीतीश कुमार केंद्रीय मंत्री बनते हैं तो उनका कार्यक्षेत्र संपूर्ण भारत हो जाएगा और परिणाम-आधारित कार्यशैली के कारण उन्हें देश के अन्य राज्यों को भी पर्याप्त समय देना होगा। ऐसी स्थिति में केवल बिहार उनकी इकलौती प्राथमिकता नहीं रह जाएगा। सबसे बड़ा संकट उनके उस वादे पर मंडरा रहा है जो उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ते समय अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और सूबे की जनता से किया था। जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने घोषणा की थी कि वे जल्द ही जमीनी हकीकत जानने के लिए बिहार की यात्रा पर निकलेंगे। परंतु, केंद्र की राजनीति में सक्रिय होने के बाद उनके इस जनसंवाद और विकास कार्यों की व्यक्तिगत मॉनिटरिंग वाली योजना पर पूरी तरह ग्रहण लग सकता है।

सक्रिय राजनीति से दूर रखने और सांगठनिक पिंजरे की कूटनीति

राजनैतिक विश्लेषकों का एक धड़ा इस पूरे घटनाक्रम को नीतीश कुमार के खिलाफ एक सोची-समझी सांगठनिक रणनीति के तौर पर देख रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, जदयू और उसके सहयोगी दल के भीतर ही एक ऐसा गुट सक्रिय है जो नीतीश कुमार को बिहार की मुख्य राजनीति से बेदखल कर दिल्ली स्थानांतरित करना चाहता है, ताकि राज्य में भाजपा को अपने पैर पसारने का खुला मैदान मिल सके। ठीक ऐसा ही कुछ निशांत कुमार के साथ भी देखने को मिला था, जिन्हें पार्टी संगठन को मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी देने के बजाय स्वास्थ्य मंत्रालय के विभागीय कार्यों में उलझा दिया गया। जानकार मानते हैं कि नीतीश कुमार को दिल्ली की जिम्मेदारी सौंपना और निशांत कुमार को विभाग में व्यस्त रखना, दरअसल डूबती हुई पार्टी को बचाने की कवायद नहीं बल्कि दोनों कद्दावर नेताओं को 'मंत्री पद' के पिंजरे में कैद कर बिहार की सियासत से दूर रखने की एक सोची-समझी बिसात है।

केतन मर्डर केस में नया खुलासा, क्रिकेट के मैदान से शुरू हुई थी चेतन और सिया की कहानी

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पुणे। महाराष्ट्र के पुणे के चर्चित कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिसिया तफ्तीश में अब यह साफ हो गया है कि मुख्य आरोपी चेतन चौधरी और मुख्य संदेही गोयल परिवार के बीच पहली कड़ी कैसे जुड़ी थी। पुलिस के आधिकारिक दावों के अनुसार, क्रिकेट के खेल में गहरी और साझा रुचि होने के कारण आरोपी चेतन चौधरी और मृत कारोबारी की मंगेतर सिया के भाई साहिल के बीच घनिष्ठता बढ़ी थी। इसी दोस्ती का फायदा उठाकर साहिल के माध्यम से चेतन की मुलाकात सिया से हुई थी। दूसरी ओर, लोहागढ़ किले में हुई इस संदिग्ध मौत की कड़ियों को जोड़ने में जुटे जांच अधिकारियों ने शुक्रवार को साहिल से करीब 10 घंटे तक कड़ी पूछताछ की, जिसमें उसने स्वीकार किया कि वह सिया और चेतन के गुप्त संबंधों से पिछले कई महीनों से वाकिफ था और केतन से सगाई होने के बाद उसने अपनी बहन से इस रिश्ते को तत्काल खत्म करने की मिन्नतें भी की थीं।

क्रिकेट पिच से शुरू हुआ था संपर्क और परिजनों की भूमिका की जांच

मामले की तह तक जाने में जुटे जांचकर्ताओं के मुताबिक, सिया के भाई साहिल और आरोपी चेतन की पहली मुलाकात वर्ष 2024 में एक स्थानीय क्रिकेट मैच के दौरान हुई थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि दोनों अक्सर साथ में क्रिकेट खेला करते थे, जिसका फायदा उठाकर चेतन ने बेहद चालाकी से साहिल के जरिए उसकी बहन सिया तक अपनी पहुंच बनाई। खेल के मैदान से शुरू हुआ यह साधारण सा परिचय धीरे-धीरे प्रगाढ़ दोस्ती में बदल गया और चेतन का गोयल परिवार के घर पर आना-जाना शुरू हो गया। लंबी पूछताछ के दौरान पुलिस मुख्य रूप से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि साहिल को दोनों के इस प्रेम प्रसंग की भनक असल में कब लगी थी और क्या घर के अन्य वरिष्ठ सदस्यों को भी इस समानांतर रिश्ते की पूरी जानकारी थी।

हजारों कॉल्स, बाली का प्री-वेडिंग प्लान और विग को लेकर उपजा विवाद

चौंकाने वाली बात यह है कि जब एक तरफ केतन अग्रवाल और सिया की शादी की रस्में तथा तैयारियां पूरे शबाब पर थीं, तब भी सिया और चेतन लगातार एक-दूसरे के संपर्क में बने हुए थे। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि सिया एक आदर्श मंगेतर की तरह शादी के आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही थी, केतन के परिजनों से आत्मीयता से मिल रही थी और उसने केतन के साथ बाली (इंडोनेशिया) में एक भव्य प्री-वेडिंग फोटोशूट की पूरी रूपरेखा भी तैयार कर ली थी। हालांकि, इसी दौरान बैकग्राउंड में जनवरी से जून के बीच सिया और चेतन ने आपस में 2,000 से अधिक बार फोन पर बात की, जिसका कुल समय लगभग 238 घंटे दर्ज किया गया है। इसके अलावा, पुलिस सूत्रों ने बताया कि सिया अंदरखाने केतन से विवाह के लिए बिल्कुल राजी नहीं थी, क्योंकि उसे पता चला था कि केतन के सिर पर बाल कम हैं और वह विग का इस्तेमाल करता है, जबकि केतन के परिवार का तर्क है कि उन्होंने गोयल परिवार को पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि केतन बालों का एक छोटा सा पैच लगाता है।

लोहागढ़ किले का खौफनाक घटनाक्रम और संदिग्ध हत्या की थ्योरी

इस पूरे रहस्यमयी हत्याकांड की शुरुआत 18 जून को हुई थी, जब पुणे की एक प्रतिष्ठित रियल एस्टेट कंपनी के निदेशक केतन अग्रवाल की ऐतिहासिक लोहागढ़ किले की पहाड़ी से नीचे गिरने के कारण दर्दनाक मौत हो गई थी। पुलिस प्राथमिक साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स के आधार पर इसे एक सोची-समझी साजिश और हत्या का मामला मानकर आगे बढ़ रही है। इस अपराध में संलिप्तता के आरोप में केतन की मंगेतर सिया और उसके प्रेमी चेतन चौधरी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और दोनों वर्तमान में सख्त पुलिस रिमांड पर हैं। अब जांच एजेंसियां इस कूटनीतिक कत्ल के पीछे छिपे उन सभी चेहरों और चेतावनी के संकेतों की तलाश कर रही हैं, जिन्हें शायद घटना से पहले परिवार के किसी सदस्य ने भांप लिया था लेकिन नजरअंदाज कर दिया।

राजस्थान के जय मूंदड़ा ने आयरलैंड के लिए किया कमाल, डेब्यू की पहली ही गेंद पर झटका विकेट

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भारत और आयरलैंड के बीच खेले गए टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में जहां एक तरफ आयरिश टीम ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की, वहीं दूसरी तरफ इस मैच में एक ऐसा सितारा चमका जिसका दिल भारतीय है लेकिन जर्सी आयरलैंड की थी। भारतीय मूल के 29 वर्षीय तेज गेंदबाज जय मूंदड़ा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने पदार्पण (डेब्यू) मैच में ही अपनी घातक गेंदबाजी से तहलका मचा दिया। मूल रूप से राजस्थान में जन्मे इस खिलाड़ी ने अपने करियर के पहले ही इंटरनेशनल मैच में वह कारनामा कर दिखाया, जिसका सपना हर गेंदबाज देखता है। जय मूंदड़ा ने मैच में अपनी पहली ही अंतरराष्ट्रीय गेंद पर भारत के स्टार बल्लेबाज संजू सैमसन के स्टंप्स बिखेर कर उन्हें क्लीन बोल्ड कर दिया।

टोंक से डबलिन का सफर: उच्च शिक्षा के लिए छोड़ा था देश, ऐसे मिली टीम में जगह

जय मूंदड़ा के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बनने की कहानी बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायक है। राजस्थान की राजधानी जयपुर के समीप स्थित एक छोटे से शहर टोंक में जन्मे जय ने साल 2021 में एक समय क्रिकेट की दुनिया से दूरी बना ली थी। वे इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विषय में अपनी मास्टर डिग्री (एमटेक) की पढ़ाई पूरी करने के लिए आयरलैंड चले गए थे।

आयरलैंड पहुंचने के बाद शिक्षा के साथ-साथ उनका क्रिकेट के प्रति प्रेम फिर से जागा और उन्होंने वहां के स्थानीय लेनस्टर क्रिकेट क्लब (डबलिन) के लिए खेलना शुरू कर दिया। साल 2023 में वे आयरिश सीनियर कप जीतने वाली चैंपियन टीम के मुख्य सदस्य रहे। इसके बाद वे घरेलू क्रिकेट में लगातार 'लेनस्टर लाइटनिंग' के लिए शानदार प्रदर्शन करते रहे। जय मूंदड़ा को आयरलैंड की राष्ट्रीय टीम में शामिल होने का मौका तब मिला, जब उनके मुख्य तेज गेंदबाज जोश लिटिल चोटिल होकर सीरीज से बाहर हो गए।

डेब्यू मैच को जिंदगी भर संजोकर रखेंगे जय, शिवम दुबे को भी बनाया शिकार

जय मूंदड़ा ने इस मिले हुए सुनहरे मौके को दोनों हाथों से लपका और भारत के मजबूत बैटिंग लाइनअप के खिलाफ अपने कोटे के ओवरों में महज 26 रन खर्च करके 2 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए। पहली गेंद पर संजू सैमसन को आउट करने के बाद उन्होंने खतरनाक बल्लेबाज शिवम दुबे को भी पवेलियन की राह दिखाई। आयरलैंड की इस ऐतिहासिक जीत में उनकी किफायती और आक्रामक गेंदबाजी का योगदान निर्णायक रहा।

मैच के बाद भावुक होते हुए जय मूंदड़ा ने कहा, "यह मंच मेरे, मेरे परिवार और मेरे साथी खिलाड़ियों के लिए बहुत बड़ा था। मैदान पर सभी मेरा हौसला बढ़ा रहे थे। मैंने बस खुद को शांत रखने और अपनी लाइन-लेंथ पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश की, क्योंकि इसी सादगी ने मुझे आज इस मुकाम तक पहुंचाया है। भारत जैसी दिग्गज टीम के खिलाफ पहली ही गेंद पर विकेट मिलना किसी सपने के सच होने जैसा है। हालांकि मैं शुरुआती सफलता के बाद ज्यादा भावुक नहीं होना चाहता था, क्योंकि मैच में तब 9 विकेट और लेने बाकी थे। इस पल को मैं जीवन भर संजोकर रखूंगा।"

मां की ममता: भारत की हार से निराश, लेकिन बेटे की सफलता पर गर्व से चौड़ा हुआ सीना

जय मूंदड़ा के इस शानदार प्रदर्शन के बाद राजस्थान में रह रहे उनके परिवार में जश्न का माहौल है। जय की मां विद्या मूंदड़ा ने एक बातचीत में अपने मिले-जुले जज्बात जाहिर करते हुए कहा, "एक भारतीय होने के नाते मुझे इस बात का दुख जरूर है कि हमारी भारतीय टीम मैच हार गई, लेकिन एक मां के तौर पर मेरे बेटे ने मैदान पर जो कमाल किया, उससे उसने हमारे परिवार, राजस्थान और पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। हमें उस पर बेहद नाज है।"

उन्होंने जय के बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया, "बचपन में जो भी उसे खेलता देखता था, यही कहता था कि इसे बड़ा क्रिकेटर बनना चाहिए। हालांकि, 10वीं कक्षा के बाद उसके पिता की इच्छा थी कि वह पहले अपनी उच्च शिक्षा (डिग्री) पूरी करे और फिर खेल पर ध्यान दे। जय ने अपने पिता के सपने का सम्मान करते हुए पहले अपनी पढ़ाई पूरी की और उसके बाद एक क्रिकेट अकादमी ज्वाइन कर अपने जुनून को आगे बढ़ाया, जिसका सुखद परिणाम आज पूरी दुनिया के सामने है।"

हर सफर में साथ रहती है बचपन की तस्वीर, शाहरुख खान ने बताई इसकी खास वजह

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बॉलीवुड के 'किंग खान' यानी शाहरुख खान ने हाल ही में भारतीय सिनेमा जगत में अपने शानदार और बेमिसाल 34 वर्ष पूरे कर लिए हैं। उनकी लोकप्रियता का आलम यह है कि दुनिया भर में मौजूद उनके करोड़ों फैंस अभिनेता की जिंदगी से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात को जानने के लिए हमेशा उत्सुक रहते हैं। इसी बीच, सुपरस्टार आज कर्नाटक के तटीय शहर मंगलुरु में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान शाहरुख खान ने न सिर्फ अपने सिग्नेचर पोज (दोनों बाहें फैलाने वाला अंदाज) से वहां मौजूद हजारों फैंस का दिल जीता, बल्कि अपने बचपन का एक बेहद दिलचस्प और अनदेखा किस्सा भी मंच से साझा किया।

जेब से निकाली बचपन की इकलौती तस्वीर, सुनाया मजेदार वाकया

कार्यक्रम के दौरान शाहरुख खान ने अचानक अपनी पॉकेट से एक बहुत पुरानी और धुंधली तस्वीर निकालकर वहां मौजूद दर्शकों को अचंभित कर दिया। किंग खान ने भावुक होते हुए बताया कि यह उनके पूरे बचपन के शुरुआती दौर की एकमात्र बची हुई मूल तस्वीर है, और सबसे खास बात यह है कि इसे इसी मंगलुरु शहर में ही कैमरे में कैद किया गया था।

हंसते हुए प्रशंसकों को वह फोटो दिखाते हुए शाहरुख ने कहा, "शायद आज के समय में यह तस्वीर देखने में थोड़ी अजीब या मजाकिया लग सकती है, क्योंकि इसमें मैंने कोई कपड़े नहीं पहने हैं। मेरे पूरे बचपन की यही एक इकलौती याद आज मेरे पास सुरक्षित है, जो मंगलुरु की ही है। इस तस्वीर में, मैं बिना कपड़ों के एक पानी की बाल्टी के अंदर बैठा हुआ दिखाई दे रहा हूं।"

मंगलुरु से है शाहरुख खान का बेहद गहरा और पुराना नाता

यूं तो शाहरुख खान का जन्म और लालन-पालन देश की राजधानी नई दिल्ली में हुआ है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनके बचपन के शुरुआती पांच बेहद महत्वपूर्ण साल इसी मंगलुरु शहर में गुजरे थे। दरअसल, उस समय वे यहां अपने नाना इफ्तिखार अहमद के साथ रहा करते थे। इस वजह से इस तटीय शहर के साथ उनका एक बेहद गहरा भावनात्मक जुड़ाव रहा है, जिसने आज के इस खास पल को वहां मौजूद स्थानीय जनता के लिए और भी यादगार बना दिया।

कन्नड़ भाषा में किया संवाद, 'झूमे जो पठान' पर जमकर थिरके किंग खान

मंच पर आते ही शाहरुख खान ने स्थानीय संस्कृति का सम्मान करते हुए कन्नड़ भाषा में वहां मौजूद लोगों का अभिवादन किया, जिसे सुनते ही पूरा स्टेडियम तालियों और हूटिंग की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसके बाद उन्होंने अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' के सदाबहार गीतों पर परफॉर्म किया। सिर्फ इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी हालिया सुपरहिट फिल्मों के गानों जैसे 'झूमे जो पठान' और 'छम्मक छल्लो' पर भी अपने सिग्नेचर डांस स्टेप्स दिखाए, जिससे कार्यक्रम में मौजूद युवाओं का जोश सातवें आसमान पर पहुंच गया।

आगामी फिल्म ‘किंग’ से बड़ी स्क्रीन पर डेब्यू करेंगी बेटी सुहाना खान

अगर बात शाहरुख खान के वर्कफ्रंट की करें, तो वे जल्द ही अपनी बहुप्रतीक्षित और बड़े बजट की फिल्म ‘किंग’ के जरिए सिनेमाघरों में तहलका मचाने की तैयारी कर रहे हैं। इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें शाहरुख पहली बार अपनी बेटी सुहाना खान के साथ स्क्रीन साझा करते नजर आएंगे। सुहाना खान इस फिल्म के माध्यम से बड़े पर्दे (थिएटर) पर अपना पहला कदम रखने जा रही हैं। सुजॉय घोष के निर्देशन में बनने जा रही इस एक्शन-थ्रिलर फिल्म में शाहरुख और सुहाना के अलावा ग्लोबल स्टार दीपिका पादुकोण, अभिषेक बच्चन, अरशद वारसी, राघव जुयाल और जयदीप अहलावत जैसे बेहतरीन और मंझे हुए कलाकार भी बेहद महत्वपूर्ण और दमदार भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं।

सोना चढ़ा या उतरा? चांदी हुई ₹15,000 तक सस्ती, जानें आज के ताजा भाव

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नई दिल्ली / मुंबई:वैश्विक बाजारों में मची उथल-पुथल शांत होने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आए बदलावों के कारण इस हफ्ते सर्राफा बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सोने और चांदी की कीमतों में आई इस बड़ी कमजोरी से निवेशकों और खरीदारों के बीच हलचल तेज हो गई है। महज एक हफ्ते के भीतर सोना जहां करीब 5 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक टूट गया है, वहीं चांदी की कीमतों में 15 हजार रुपये प्रति किलो से ज्यादा की बड़ी गिरावट आई है।

24 कैरेट से लेकर 18 कैरेट तक; जानिए सोने के नए दाम

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सोने के सभी कैरेट्स में इस हफ्ते भारी बिकवाली देखी गई:

  • 24 कैरेट (शुद्ध सोना): इस हफ्ते ₹5,097 की भारी कटौती के साथ अब ₹1,39,873 प्रति 10 ग्राम पर आ गया है, जो पहले ₹1,44,970 के स्तर पर था।

  • 22 कैरेट (ज्वेलरी सोना): इसकी कीमत भी घटकर अब ₹1,28,124 प्रति 10 ग्राम रह गई है, जो पहले ₹1,32,793 पर ट्रेंड कर रही थी।

  • 18 कैरेट सोना: इसमें भी कमी आई है और यह ₹1,08,728 से गिरकर ₹1,04,905 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है।

हफ्ते का उतार-चढ़ाव: इस कारोबारी हफ्ते में सोने ने अपना उच्चतम स्तर 22 जून की सुबह ₹1,47,310 छुआ था, जबकि सबसे निचला स्तर 25 जून की शाम को ₹1,39,461 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।

चांदी की कीमतों में आया बड़ा रिबाउंड, ₹15,400 से ज्यादा की गिरावट

सोने के साथ-साथ चांदी के खरीदारों के लिए भी राहत की खबर है। चांदी की कीमतों में इस हफ्ते एकतरफा गिरावट देखने को मिली। चांदी का भाव ₹15,432 प्रति किलो तक लुढ़क गया है। इस गिरावट के बाद चांदी अब ₹2,16,541 प्रति किलो पर बिक रही है, जबकि हफ्ते की शुरुआत में यह ₹2,31,973 के ऊंचे स्तर पर थी। चांदी ने इस हफ्ते का अपना सर्वोच्च स्तर ₹2,37,801 (22 जून) और न्यूनतम स्तर ₹2,15,485 (25 जून) दर्ज किया।

ग्लोबल मार्केट का असर: $4100 के नीचे आया सोना

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आई स्थिरता के चलते ग्लोबल मार्केट में भी दोनों कीमती धातुओं पर दबाव साफ दिख रहा है। वैश्विक बाजार में सोना अब 4,100 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गया है, वहीं चांदी भी कमजोर होकर 60 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे ट्रेड कर रही है।

क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट? एक्सपर्ट्स की राय

बाजार विशेषज्ञों (मार्केट एक्सपर्ट्स) के मुताबिक, सोने और चांदी में इस महा-गिरावट के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण काम कर रहे हैं:

  1. यूएस फेडरल रिजर्व का रुख: दुनिया भर में बढ़ती महंगाई को काबू में करने के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) ने आने वाले समय में ब्याज दरें बढ़ाने के सख्त संकेत दिए हैं।

  2. मुनाफावसूली (Profit Booking): ब्याज दरें बढ़ने के डर से बड़े ट्रेडर्स और निवेशकों ने सोने-चांदी में ऊंचे स्तरों पर अपनी पोजीशन काटकर मुनाफावसूली शुरू कर दी है।

  3. मजबूत होता डॉलर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर इंडेक्स के मजबूत होने से कीमती धातुओं में बिकवाली का दबाव और ज्यादा बढ़ गया है।

एक महीने का रिपोर्ट कार्ड:

अगर पिछले एक महीने के आंकड़ों पर नजर डालें, तो सर्राफा बाजार में लगातार सुधार देखा जा रहा है। बीते 30 दिनों के भीतर सोना अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 10 प्रतिशत और चांदी अपने उच्चतम स्तर से लगभग 25 प्रतिशत तक सस्ती हो चुकी है।

Green Hydrogen Mission: परमाणु ऊर्जा से हाइड्रोजन उत्पादन की दुनिया की पहली सुविधा शुरू

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नई दिल्ली । भारत के स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकी कार्यक्रम ने वैश्विक स्तर पर एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) ने तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (आईजीसीएआर) में दुनिया के पहले कॉपर-क्लोरीन (Cu-Cl) थर्मोकेमिकल चक्र आधारित हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र का सफलतापूर्वक शुभारंभ किया है। यह अनूठी और दूरगामी तकनीक परमाणु ऊर्जा से पैदा होने वाली उच्च तापमान वाली ऊष्मा का सीधा उपयोग करती है, जो आईजीसीएआर के फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (एफबीटीआर) से प्राप्त की जा रही है। इस मील के पत्थर साबित होने वाले संयंत्र का उद्घाटन परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव और परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी) के अध्यक्ष अजीत कुमार मोहंती ने आईजीसीएआर के निदेशक श्रीकुमार जी. पिल्लई की गरिमामयी उपस्थिति में किया। मुम्बई स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) द्वारा पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित यह तकनीकी प्रदर्शन इकाई यह सिद्ध करेगी कि परमाणु रिएक्टरों की मदद से बिना कार्बन उत्सर्जन के बड़े पैमाने पर हरित हाइड्रोजन का व्यावसायिक उत्पादन संभव है।

भविष्य का ईंधन और कॉपर-क्लोरीन तकनीक की विशेषता

हाइड्रोजन को वैश्विक स्तर पर आने वाले समय का सबसे महत्वपूर्ण, टिकाऊ और स्वच्छ ऊर्जा स्रोत माना जा रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। वैसे तो हाइड्रोजन निर्माण की कई विधियां मौजूद हैं, परंतु कॉपर-क्लोरीन थर्मोकेमिकल चक्र को दुनिया भर में सबसे प्रभावी और उत्तम माना जाता है क्योंकि यह अन्य प्रक्रियाओं की तुलना में बेहद कम तापमान पर काम करता है और इसकी कुल ऊर्जा दक्षता (एफिशिएंसी) कहीं अधिक होती है। इस अत्याधुनिक संयंत्र की स्थापना में वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को शोध, ब्लूप्रिंट डिजाइनिंग, विशिष्ट उपकरणों के निर्माण, इंस्टॉलेशन और कड़े परीक्षणों में कई वर्षों का लंबा समय लगा है। बीएआरसी और आईजीसीएआर के साझा प्रयासों से तैयार यह पायलट प्लांट अब वास्तविक परिस्थितियों में काम करेगा, जिससे मिले व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर इस तकनीक को भविष्य में और अधिक परिष्कृत कर इसका औद्योगिक स्तर पर विस्तार किया जाएगा।

परमाणु ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और कार्बन मुक्ति का संकल्प

इस ऐतिहासिक उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अजीत कुमार मोहंती ने कहा कि परमाणु शक्ति को हाइड्रोजन उत्पादन जैसी नवीन स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों के साथ एकीकृत करना भारत के कूटनीतिक और पर्यावरणीय लक्ष्यों के लिए एक युगांतरकारी कदम है। उन्होंने रेखांकित किया कि परमाणु ऊर्जा न केवल बिना कार्बन वाली निरंतर बिजली देती है, बल्कि उच्च क्षमता वाली थर्मल ऊर्जा (गर्मी) भी प्रदान करती है, जो जीवाश्म ईंधन (कोयला-गैस) पर देश की निर्भरता को न्यूनतम करने तथा ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को पूरी तरह समाप्त करने में सहायक है। उन्होंने इस वैज्ञानिक विचार को धरातल पर सच कर दिखाने वाली पूरी तकनीकी टीम की सराहना की और कहा कि यह बड़ी सफलता वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती परमाणु अनुसंधान क्षमताओं और आत्मनिर्भरता का एक जीवंत प्रमाण है।

आईजीसीएआर का ऐतिहासिक योगदान और भावी परमाणु रोडमैप

इस अभूतपूर्व परियोजना में अहम भूमिका निभाने वाला आईजीसीएआर संस्थान वर्ष 1971 से ही देश के महत्वाकांक्षी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहा है। इसके वैज्ञानिकों ने पिछले 40 से अधिक वर्षों के दौरान फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर के सफल संचालन के माध्यम से उन्नत ईंधन, सोडियम तकनीक और परमाणु सामग्रियों के विकास में अमूल्य योगदान दिया है। एफबीटीआर से प्राप्त इसी बहुमूल्य तकनीकी अनुभव और परिपक्वता ने देश के परमाणु कार्यक्रम को एक बेहद मजबूत आधार दिया है। वर्तमान में इसी तकनीकी विशेषज्ञता के बल पर कलपक्कम में ही 500 मेगावाट क्षमता वाले 'प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर' (पीएफबीआर) के निर्माण का कार्य अंतिम चरणों में है, जो भारत के स्वदेशी त्रि-स्तरीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे और सबसे महत्वपूर्ण चरण का प्रतिनिधित्व करता है।

73 की उम्र में के. भाग्यराज का निधन, हार्ट अटैक बना मौत की वजह

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दक्षिण भारतीय सिनेमा, विशेष रूप से तमिल फिल्म उद्योग से एक बेहद दुखद और स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आई है। लगभग पांच दशकों तक अपनी अनूठी कला, बेजोड़ अभिनय और उत्कृष्ट लेखन से तमिल सिनेमा को एक नया आयाम देने वाले दिग्गज निर्देशक और अभिनेता के. भाग्यराज अब हमारे बीच नहीं रहे। 73 वर्षीय बहुमुखी प्रतिभा के धनी के. भाग्यराज का दिल का दौरा (कार्डियक अरेस्ट) पड़ने के कारण आकस्मिक निधन हो गया है। उनके जाने से पूरी फिल्म इंडस्ट्री और उनके लाखों प्रशंसकों के बीच शोक की गहरी लहर दौड़ गई है।

एक अदने जूनियर आर्टिस्ट से शुरू कर संभाली निर्देशन की कमान

के. भाग्यराज का फिल्मी सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महान प्रेरणा है। उन्होंने सिनेमाई पर्दे पर एक मामूली जूनियर आर्टिस्ट के रूप में अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। वे पहली बार साल 1977 में आई कल्ट फिल्म '16 वयथिनिले' में एक बेहद संक्षिप्त भूमिका में नजर आए थे। इसके बाद साल 1978 में आई फिल्म 'सिगप्पू रोजक्कल' में न केवल उन्होंने स्क्रीन साझा की, बल्कि फिल्म के दमदार संवाद (डायलॉग्स) लिखकर अपनी कल्पनाशून्यता का लोहा भी मनवाया।

धीरे-धीरे वे तमिल सिनेमा में एक सहायक निर्देशक (असिस्टेंट डायरेक्टर) के रूप में सक्रिय हुए और कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों की पटकथाएं लिखीं। साल 1979 में रिलीज हुई फिल्म 'सुवरिल्लाधा चित्थिरांगल' के जरिए उन्होंने पहली बार मुख्य निर्देशक की कमान संभाली। बतौर डायरेक्टर उन्होंने ‘ओरु काई ओसाई’, ‘डार्लिंग, डार्लिंग, डार्लिंग’ और ‘अवसारा पुलिस 100’ जैसी कई कालजयी फिल्मों का निर्माण किया। साल 2010 में उन्होंने फिल्म ‘सिद्दू 2’ का निर्देशन किया, जिसमें उनके खुद के बेटे मुख्य भूमिका में नजर आए थे। उन्होंने अपने पूरे करियर में 75 से अधिक फिल्मों में यादगार अभिनय किया और 20 से ज्यादा फिल्मों का सफल निर्देशन किया।

डायरेक्शन से दूरी बनाकर भी एक्टिंग में रहे सक्रिय, धनुष संग किया आखिरी काम

साल 2010 में आई फिल्म के बाद के. भाग्यराज ने निर्देशन की दुनिया से एक लंबा ब्रेक ले लिया था, लेकिन उन्होंने अभिनय से कभी नाता नहीं तोड़ा। वे लगातार तमिल फिल्मों में कद्दावर और महत्वपूर्ण सहायक भूमिकाएं निभाते रहे। हाल ही में रिलीज हुई सुपरस्टार धनुष की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'कुबेरा' (2025) में भी उन्होंने अपने सशक्त अभिनय की छाप छोड़ी थी, जो उनके करियर की आखिरी फिल्मों में से एक साबित हुई।

अपने पीछे छोड़ गए भरा-पूरा कलात्मक परिवार

के. भाग्यराज के निजी जीवन की बात करें, तो उनका पूरा परिवार सिनेमाई कला से गहराई से जुड़ा हुआ है। वे अपने पीछे अपनी धर्मपत्नी पूर्णिमा जयराम और दो बच्चों—बेटी सरन्या भाग्यराज और बेटे शांतनु भाग्यराज को छोड़ गए हैं। उनके बेटे शांतनु भाग्यराज भी अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए वर्तमान तमिल सिनेमा में बतौर मुख्य अभिनेता अपनी पहचान स्थापित कर चुके हैं। चेन्नई के कला जगत और तमाम राजनीतिक व फिल्मी हस्तियों ने उनके निवास स्थान पर पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

रोजगार के मुद्दे पर टीकाराम जूली ने सरकार को घेरा, उठाए कई गंभीर सवाल

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जयपुर:राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सूबे की भाजपा सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार में प्रदेश के युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार देने की इच्छाशक्ति पूरी तरह खत्म हो चुकी है, जिसकी वजह से आज का युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। जूली ने कहा कि बड़े-बड़े दावों और विज्ञापनों के बीच धरातल पर युवाओं के हाथ सिर्फ निराशा ही लग रही है।

लोन के लिए भटक रहे युवा, स्वरोजगार योजना फाइलों में दफन

टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना की जमीनी हकीकत को उजागर करते हुए कहा कि युवाओं को खुद का बिजनेस शुरू कराने के सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। बैंकों की कछुआ चाल और लचर कार्यप्रणाली के कारण हजारों युवाओं के लोन आवेदन दफ्तरों की धूल फांक रहे हैं। हालत यह है कि कई जिलों में 30 फीसदी आवेदन भी बैंकों तक नहीं पहुंच पाए हैं। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की हाई-लेवल समीक्षा (उच्चस्तरीय जांच) की जाए और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।

'राइजिंग राजस्थान' पर सवाल— 83% से ज्यादा प्रोजेक्ट्स सिर्फ कागजों पर!

इन्वेस्टमेंट के बड़े-बड़े दावों को घेरते हुए नेता प्रतिपक्ष ने 'राइजिंग राजस्थान' अभियान को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सरकारी आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जितने एमओयू (MOU) साइन किए गए, उनमें से केवल 3,895 परियोजनाओं पर ही जमीनी काम शुरू हो सका है। बाकी की 83 प्रतिशत से अधिक योजनाएं आज भी सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। जूली ने सरकार को नसीहत दी कि इवेंट और प्रचार आधारित राजनीति छोड़कर सरकार को असलियत में फैक्ट्रियां लगाने और युवाओं के लिए नौकरियां पैदा करने पर ध्यान देना चाहिए।

पचपदरा रिफाइनरी में देरी से लाखों युवाओं का नुकसान

रोजगार के मुद्दे पर टीकाराम जूली ने पचपदरा रिफाइनरी प्रोजेक्ट का भी विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने सिर्फ राजनीतिक नफा-नुकसान के चक्कर में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अधर में लटकाए रखा। अगर यह रिफाइनरी समय पर पूरी हो जाती, तो आज राजस्थान के लाखों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल चुका होता।

घोषणाओं से पेट नहीं भरता: जूली

बयान के आखिर में नेता प्रतिपक्ष ने साफ लहजे में कहा कि राजस्थान का युवा अब सरकार के हवाई वादों और खोखली घोषणाओं के बहकावे में आने वाला नहीं है। उन्हें कागजी आंकड़ों के बजाय धरातल पर काम और रोजगार के ठोस अवसर चाहिए।

22 साल की शादी के बाद भी पति से नाराज हैं फराह खान, बताई चौंकाने वाली वजह

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बॉलीवुड की दिग्गज निर्देशिका और कोरियोग्राफर फराह खान इन दिनों अपने काम के साथ-साथ अपनी निजी जिंदगी और पारिवारिक रिश्तों को लेकर लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। हाल ही में एक टॉक शो में बतौर मुख्य मेहमान शामिल हुईं फराह खान ने अपने लंबे फिल्मी सफर और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े कई दिलचस्प और अनछुए पहलुओं को साझा किया। इस बातचीत के दौरान उन्होंने अपने पति शिरीष कुंदर और अपने अनूठे वैवाहिक रिश्ते पर बेबाकी से बात की और बताया कि समय के साथ एक पति-पत्नी के बीच प्यार और प्राथमिकताएं किस तरह बदल जाती हैं।

विवाह के बाद घटने लगता है आकर्षण, अब दूसरी खूबियों की है अहमियत

रिश्तों के बदलते ताने-बाने पर अपने विचार साझा करते हुए फराह खान ने कहा कि विवाह के बंधन में बंधने के बाद शुरुआती दौर का रोमांस अक्सर धीमा पड़ जाता है। उन्होंने अपने अनुभव से बताया, "जब आप किसी को डेट कर रहे होते हैं, तो उस इंसान को पाने की चाहत बेहद शिद्दत से होती है। लेकिन एक बार जब वह साथी आपको जीवनसाथी के रूप में मिल जाता है, तो समय के साथ जीवन में उसकी अहमियत के पैमाने बदल जाते हैं। आज के दौर में मैं शिरीष की अहमियत को सिर्फ रोमांस से नहीं, बल्कि जीवन की दूसरी जरूरी चीजों में देखती हूं। मैं उन्हें एक बेहद जिम्मेदार पिता और एक ऐसे समर्पित इंसान के रूप में देखती हूं जो पर्दे के पीछे रहकर पूरे परिवार की खुशियों और जरूरतों का ख्याल रखता है। सच कहूं तो मैं उनके बिना रहने की कल्पना भी नहीं कर सकती, शिरीष के बिना हमारा घर पूरी तरह बिखर जाएगा।"

फराह ने पति की तारीफ करते हुए आगे कहा, "वह बच्चों के लिए एक आदर्श पिता साबित हुए हैं। अक्सर फिल्म इंडस्ट्री और बाहर के लोग मुझसे अचरज से पूछते हैं कि मेरे तीनों बच्चों को इतनी कम उम्र में दुनिया की इतनी प्रतिष्ठित और टॉप यूनिवर्सिटीज में दाखिला (एडमिशन) कैसे मिल गया? तब मैं उन सभी को गर्व से बताती हूं कि इसके पीछे कोई जादुई छड़ी नहीं, बल्कि उनके पिता की सालों की मेहनत है। शिरीष ही बच्चों के मुख्य मार्गदर्शक और काउंसलर थे, जो हर बच्चे की पढ़ाई और करियर को बहुत बारीकी से समय देते हैं।"

शिरीष को पसंद है एकांत, एआई (AI) तकनीक सीखकर खुद को कर रहे हैं अपडेट

बातचीत के दौरान फराह खान ने शिरीष कुंदर के स्वभाव का एक और दिलचस्प पहलू उजागर करते हुए बताया कि उनके पति को लाइमलाइट से दूर अकेले समय बिताना (एकांत) बेहद पसंद है। फराह के अनुसार, "शिरीष स्वभाव से थोड़े अंतर्मुखी हैं और वे अपने स्पेस में रहना पसंद करते हैं। इन दिनों वे अपनी नई फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखने के साथ-साथ आधुनिक एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक की बारीकियां भी सीख रहे हैं। उन्हें अकेले समय बिताना अच्छा लगता है और यह बात मुझे शादी से पहले से ही पता थी। असल में, उनकी यही शांत और गंभीर खूबी मुझे सबसे ज्यादा पसंद आई थी।"

इसके बाद फराह ने हंसते हुए एक मजेदार पारिवारिक वाकया भी साझा किया। उन्होंने बताया, "मेरे बेटे और शिरीष का कद-काठी और लंबाई अब बिल्कुल एक जैसी हो चुकी है। कभी-कभी देर रात में अगर कोई बेडरूम में आता है, तो मैं अंधेरे में पहचान ही नहीं पाती कि वो शिरीष हैं या मेरा बेटा। जब तक वह पास आकर मुझे गले नहीं लगा लेता, तब तक मुझे पता नहीं चलता कि यह मेरा बेटा है।"

बॉलीवुड करियर से कहीं ज्यादा यूट्यूब से हो रही है फराह खान की बंपर कमाई

अगर बात फराह खान के मौजूदा करियर फ्रंट की करें, तो उन्होंने इन दिनों खुद को एक बेहद सफल कंटेंट क्रिएटर के रूप में स्थापित कर लिया है। वे अपना एक डिजिटल वीडियो चैनल चलाती हैं, जहां वे कुकिंग, रेसिपी और मजेदार फूड व्लॉग्स साझा करती हैं। इस प्लेटफॉर्म पर वे अक्सर सिनेमा जगत के अपने नामचीन दोस्तों को दावत पर बुलाती हैं, उनके लिए अपने खास रसोइए 'दिलीप' (जो अब खुद एक इंटरनेट सेलिब्रिटी बन चुके हैं) से लजीज डिशेज बनवाती हैं और खाना खाते हुए पुरानी यादों को ताजा करती हैं। फराह का हाजिरजवाब और मजाकिया अंदाज दर्शकों को बेहद पसंद आ रहा है।

एक हालिया इंटरव्यू में फराह ने वित्तीय सफलता का एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि पिछले एक साल के भीतर उन्होंने इस डिजिटल माध्यम और बड़े ब्रांड्स के विज्ञापनों के जरिए इतनी मोटी कमाई की है, जितनी उन्होंने अपने पूरे बॉलीवुड करियर के दौरान फिल्में डायरेक्ट या कोरियोग्राफ करके भी नहीं की थी। इस तरह कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में कदम रखकर फराह खान की वित्तीय स्थिति को एक नया आसमान मिला है। वर्तमान में उनके इस डिजिटल चैनल पर 2.7 मिलियन (27 लाख) से भी अधिक चाहने वाले जुड़ चुके हैं।

श्रीलंका को कच्चातीवू सौंपने के मुद्दे पर BJP का कांग्रेस पर तीखा हमला

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नई दिल्ली। वर्ष 1974 में कच्चातीवू द्वीप को श्रीलंका को सौंपे जाने के ऐतिहासिक निर्णय को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बार फिर कांग्रेस पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को भाजपा ने कांग्रेस की तीखी आलोचना करते हुए इस समझौते को उसके तत्कालीन शासनकाल का एक और काला अध्याय करार दिया। सत्तारूढ़ दल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस द्वीप पर से अपना हक छोड़कर देश के राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता के साथ बड़ा समझौता किया था। गौरतलब है कि भारत और श्रीलंका के बीच पाक जलडमरूमध्य में स्थित कच्चातीवू एक निर्जन द्वीप है, जिस पर भारत सरकार ने 1974 में एक द्विपक्षीय समझौते के तहत श्रीलंका के अधिकार को मान्यता दे दी थी।

ऐतिहासिक समझौतों पर प्रहार और मछुआरों की बदहाली का मुद्दा

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इस विषय पर देश का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आपातकाल की बरसी के तुरंत बाद कांग्रेस के इतिहास की एक और बड़ी कूटनीतिक चूक सामने आती है। उन्होंने रेखांकित किया कि 26 जून 1974 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तमिलनाडु के तट के निकट स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कच्चातीवू द्वीप को श्रीलंका के हवाले कर दिया था, जिसके चलते आज तक तमिलनाडु के स्थानीय मछुआरों को समुद्र में निरंतर कई तरह की प्रताड़नाओं और गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। त्रिवेदी ने द्वीप पर स्थित ऐतिहासिक सेंट एंथनी चर्च का विशेष उल्लेख करते हुए दावा किया कि आज भारतीय नाविकों को अपनी नौकाओं पर तिरंगा झंडा लगाने के बावजूद उस क्षेत्र में जाने की अनुमति नहीं मिलती है, जो कांग्रेस की कमजोर विदेश नीति का नतीजा है।

देश की सीमाओं और भूभागों को गंवाने का लंबा इतिहास

भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस की पुरानी नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश की सीमाओं और राष्ट्रीय हितों के साथ समझौता करने का विपक्ष का इतिहास बेहद पुराना रहा है। उन्होंने सिलसिलेवार ढंग से आरोप लगाया कि इस कूटनीतिक आत्मसमर्पण की शुरुआत वर्ष 1947 में देश के विभाजन और मुस्लिम लीग के समक्ष घुटने टेकने के साथ हुई थी। इसके बाद वर्ष 1948 में कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा (पीओके) पाकिस्तान के नियंत्रण में चला गया और फिर 1962 के युद्ध के दौरान अक्साई चिन का इलाका चीन को सौंप दिया गया। उन्होंने देश की ऐतिहासिक धरोहरों का जिक्र करते हुए कहा कि मानसरोवर सहित असम का क्षेत्र भी लगभग खोने की कगार पर पहुंच गया था और इसी कड़ी के तहत 26 जून को कच्चातीवू का हस्तांतरण हुआ, जो 28 जून को पूरी तरह श्रीलंका के नियंत्रण में चला गया।

केरल की आबकारी नीति पर वार और बढ़ते नशे पर चिंता

कच्चातीवू विवाद के साथ-साथ भाजपा ने केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) गठबंधन के हालिया राजनीतिक फैसलों को भी आड़े हाथों लिया है। भाजपा ने राज्य में कम अल्कोहल वाली मदिरा पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) को 251% से भारी कटौती कर 121% करने के निर्णय पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पार्टी का आरोप है कि इस रियायत से राज्य के युवाओं में शराब पीने की प्रवृत्ति बढ़ेगी और चुनिंदा शराब कारोबारियों को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए राज्य के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। त्रिवेदी ने विपक्ष के ही वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि जब राज्य में नशीले पदार्थों की समस्या पहले से ही पंजाब जैसी गंभीर चुनौती बन चुकी है, ऐसे में शराब को बढ़ावा देना बेहद चिंताजनक है और इस मामले में यूडीएफ व एलडीएफ दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

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