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पेपर लीक के बाद अब किताबें भी लीक! कांग्रेस ने NCERT और केंद्र सरकार पर साधा निशाना

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राष्ट्रपति भवन तक पहुँची अभिभावकों की गुहार

सिर्फ सर्कुलर जारी कर जिम्मेदारी से नहीं बच सकती केंद्र सरकार — विवेक त्रिपाठी

शिक्षा माफियाओ के ख़िलाफ़ कांग्रेस ने शुरू किया छात्रो की गूंज अभियान

अभिभावकों की माँग पेपर बेचने वालो को मृत्यदंड और ख़रीदने वाले को आजीवन कारावास की सजा मिले

भोपाल, 26 जून 2026 कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने एनसीईआरटी द्वारा जारी उस चेतावनी पत्र को लेकर महामहिम राष्ट्रपति महोदया को विस्तृत पत्र भेजा है, जिसमें अभिभावकों और विद्यार्थियों को नकली एवं पायरेटेड एनसीईआरटी पुस्तकों से सावधान रहने की सलाह दी गई है। त्रिपाठी ने कहा कि इस सर्कुलर ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।कांग्रेस ने देश की गिरती हुई शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए की कैसे केंद्र सरकार पर शिक्षा माफिया हावी हो चुका है,इस विवाद की शुरुआत एनसीईआरटी के उस सर्कुलर से हुई जिसे जारी कर NCRT ने देश के अभिभावकाओ को नक़ली किताबों से सावधान रहने की नसीहत दी,पत्र को ले कर अभिभावकों में नारजगी नज़र आई उनका कहना है कि उन्होंने कहा कि एक ओर नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए महीनों बीत चुके हैं, वहीं दूसरी ओर सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराने का दावा करने वाली एनसीईआरटी मांग के अनुरूप मूल पुस्तकें उपलब्ध कराने में विफल रही है।इस स्थिति ने शिक्षा माफियाओं, नकली प्रकाशकों और कालाबाजारी करने वाले गिरोहों को खुला अवसर प्रदान किया है, जिसका खामियाजा देश के करोड़ों अभिभावकों और विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा  है शिक्षा माफिया को अवसर मिला और माता पिता ठगे गए।विवेक त्रिपाठी ने कहा कि जब देश की सबसे बड़ी शैक्षणिक संस्था एनसीईआरटी को स्वयं अपनी पुस्तकों की पायरेसी को लेकर चेतावनी जारी करनी पड़ रही है,तो देश की शिक्षा व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है।त्रिपाठी ने कहा कि आज देश में अभिभावक निजी स्कूलों की मनमानी फीस, निर्धारित दुकानों से किताबें और ड्रेस खरीदने की मजबूरी तथा शिक्षा के बढ़ते व्यावसायीकरण का दंश झेल रहे हैं।इन मुद्दों को लेकर कांग्रेस लगातार जनआंदोलन और विरोध प्रदर्शन कर रही है।अब पेपर लीक के बाद किताबों के लीक होने की घटनाएं यह साबित करती हैं कि भाजपा राज में शिक्षा व्यवस्था पर माफियाओं का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है।जिसके ख़िलाफ़ कांग्रेस ने राष्ट्रव्यापी अभियान छात्रो की गूंज की शुरुआत की है।विवेक त्रिपाठी ने कहा कि छात्रो की गूंज अभियान उन छात्रो और अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए है जिसे देश की सब से प्रतिष्ठ नीट परीक्षा सहित अनेक महत्वपूर्ण परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों ने मानसिक पीड़ा दी है जिसके चलते कई छात्रों ने अपनी जान गवाई है।कई परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।इस विषम परिस्थितियों में जनमानस का लामबंद होना आवश्यक है वरना सरकार सिर्फ सर्कुलर निकाल कर खानापूर्ति करती रहेगी।राष्ट्रपति महोदया से कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने अपील करते हुए कहा कि देश के करोड़ों विद्यार्थी और उनके अभिभावक आशा भरी निगाहों से आपकी ओर देख रहे हैं। शिक्षा माफियाओं, पेपर लीक गिरोहों और नकली किताबों के कारोबारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित कर देश की शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।उन्होंने मांग की कि महमाहिम इस पूरे मामले हस्तक्षेप कर सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायधीश की कमेटी से स्वतंत्र जांच कर दोषियों को कड़ी सजा देने की कृपा करे साथ ही शिक्षा व्यवस्था को माफियाओं और भ्रष्ट तंत्र के चंगुल से मुक्त कराने के लिए ठोस राष्ट्रीय नीति और सक्त कानून बनाये जाए पेपर लीक करने वाले शिक्षा माफियाओ को मृत्य दंड और पेपर खरीदने वालो को आजीवन कारावास की सजा के प्रावधान हो।विवेक त्रिपाठी ने कहा कि देश के अभिभावक यह जानना चाहते हैं कि जब केंद्र सरकार स्वयं स्वीकार कर रही है कि नकली और पायरेटेड किताबें बाजार में बिक रही हैं, तो इन शिक्षा माफियाओं के खिलाफ क्यो बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है।केवल चेतावनी जारी कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता केवल सलाह देने की नहीं, बल्कि शिक्षा माफियाओं की कमर तोड़ने और उन्हें कानून के कठघरे में खड़ा करने की है। देश के विद्यार्थियों का भविष्य किसी भी कीमत पर मुनाफाखोर गिरोहों और भ्रष्ट तंत्र के हवाले नहीं छोड़ा जा सकता।साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति महोदया से अनुरोध किया है कि इस विषय पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने हेतु कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल को भेंट करने का समय प्रदान किया जाए।

चमत्कार से कम नहीं जिंदा बचना, मलबों से निकल रहे इंसान और पशु

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काराकस (वेनेजुएला): वेनेजुएला में बुधवार को महज एक मिनट के भीतर आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो विनाशकारी भूकंपों ने भारी तबाही मचाई है। इस भीषण आपदा में अब तक कम से कम 235 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि घायलों की संख्या बढ़कर 4,300 से अधिक हो गई है। हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। संकट की इस घड़ी में देश के उत्तरी इलाकों में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। सबसे ज्यादा प्रभावित ला गुआरा क्षेत्र में आपातकालीन टीमें और स्वयंसेवक कंक्रीट के मलबे को हटाकर लगातार जिंदगियां तलाशने में जुटे हैं।

मलबे से सुरक्षित निकले तीन मासूम, जागी उम्मीद की किरण

इस महाविनाश और अपनों को खोने के गम के बीच मलबे से कुछ ऐसे चमत्कारिक रेस्क्यू सामने आए हैं, जिसने सबको हैरान कर दिया है। ला गुआरा में भारी कंक्रीट को खोदकर एक मासूम बच्चे को पूरी तरह सुरक्षित बाहर निकाला गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में बच्चे को सही-सलामत देखकर बचाव कर्मी खुशी से रोते और चिल्लाते नजर आए। इसके तुरंत बाद वेनेजुएला की नेशनल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर एक और नवजात बच्चे को मलबे से सुरक्षित निकाला। वहीं, घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद 12 साल के एक लड़के को भी जिंदा बचा लिया गया। इन मासूमों की सुरक्षा ने उन परिवारों के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगा दी है जिनके अपने अब भी लापता हैं।

महिला और बेजुबान कुत्ते का भी हुआ भावुक रेस्क्यू

मलबे के नीचे से जिंदगी बचाने का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। रेस्क्यू टीमों ने घंटों की कड़ी मेहनत के बाद एक महिला को भी मलबे से जिंदा बाहर निकाला, जिससे बचाव दलों का उत्साह दोगुना हो गया है। इसी बीच एक बेहद दिल छू लेने वाली घटना तब सामने आई, जब मलबे के एक बेहद संकरे हिस्से से एक बेजुबान कुत्ते को सुरक्षित निकाला गया। कई घंटों तक बिना हवा, पानी और रोशनी के दबे रहने के कारण वह बुरी तरह सहमा हुआ था और हांफ रहा था। मलबे से बाहर आते ही एक राहतकर्मी ने अपनी बोतल से उसे पानी पिलाया। बेजुबान का तड़पकर पानी पीने का यह भावुक वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लाखों लोगों की आंखें नम हैं।

500वें दिन भी जारी रहा आंदोलन, महाबोधि महाविहार को लेकर बौद्ध भिक्षुओं का संघर्ष

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बोधगया (बिहार): विश्व धरोहर और बौद्ध धर्म के सर्वोच्च आस्था केंद्र महाबोधि महाविहार के प्रबंधन से जुड़े 'बोधगया टेंपल एक्ट' (BT Act) 1949 को पूरी तरह समाप्त करने की मांग अब तेज हो गई है। महाविहार का पूरा नियंत्रण और प्रशासनिक अधिकार बौद्ध समाज को सौंपने के लिए चल रहा शांतिपूर्ण आंदोलन शुक्रवार को अपने 500वें दिन में प्रवेश कर गया। इस ऐतिहासिक पड़ाव पर देश-विदेश से बोधगया पहुंचे सैकड़ों बौद्ध भिक्षुओं (लामाश्रणों) और अनुयायियों ने बीटीएमसी गोलंबर पर इकट्ठा होकर एक दिवसीय सामूहिक भूख हड़ताल की। प्रशासन द्वारा धरनास्थल से हटाए जाने के बावजूद आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह संघर्ष थमेगा नहीं।

वैश्विक आस्था का केंद्र है महाबोधि, दुनिया के कई देशों में भी सांकेतिक उपवास

बीटीएमसी गोलंबर पर आयोजित इस प्रदर्शन में भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से आए बौद्ध प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने हिस्सा लिया। आंदोलनकारियों ने एकजुट होकर आवाज उठाई कि यह मुद्दा केवल किसी एक शहर या क्षेत्र का नहीं है, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों बौद्ध अनुयायियों के अधिकारों और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा है। इसी के समर्थन में शुक्रवार को वैश्विक स्तर पर कई अन्य देशों में भी बौद्ध समुदायों द्वारा प्रतीकात्मक उपवास रखकर एकजुटता प्रदर्शित की गई।

"जब मंदिर, मस्जिद और चर्च का प्रबंधन उनके समाज के पास, तो महाविहार का क्यों नहीं?"

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मुख्य समन्वयक आकाश लामा ने प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार देश में हिंदू मंदिरों का संचालन हिंदू समाज, मस्जिदों का मुस्लिम समुदाय और चर्चों की देखरेख ईसाई समुदाय के हाथों में है; ठीक उसी तर्ज पर महाबोधि महाविहार की कमान भी शत-प्रतिशत बौद्ध समाज को मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 1949 में बने वर्तमान बीटी एक्ट के तहत गठित प्रबंधन समिति में बौद्ध समुदाय को पर्याप्त हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है, जो इस अंतरराष्ट्रीय पवित्र स्थल की गरिमा और भावनाओं के खिलाफ है।

74 साल पुराने बीटी एक्ट को बताया असंवैधानिक, 12 फरवरी 2025 से जारी है मोर्चा

प्रदर्शनकारियों ने बोधगया टेंपल एक्ट 1949 को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पूरी तरह अप्रासंगिक और असंवैधानिक करार दिया। आकाश लामा ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि इस कानूनी विसंगति को दूर करने के लिए वर्ष 2012 में अदालत की शरण भी ली गई थी, लेकिन लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी शासन-प्रशासन के स्तर पर कोई ठोस और न्यायसंगत समाधान नहीं निकल सका। इसी उदासीनता के खिलाफ 12 फरवरी 2025 से यह महा-अभियान लगातार चलाया जा रहा है, जिसे आज पूरे 500 दिन हो चुके हैं।

त्योहार के मद्देनजर प्रशासन ने नहीं दी अनुमति, भिक्षुओं को हटाया पर संकल्प अडिग

स्थानीय प्रशासन ने आगामी मुहर्रम त्योहार की सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इस भूख हड़ताल को आधिकारिक अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए धरनास्थल से बौद्ध भिक्षुओं को हटा दिया। हालांकि, इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद भी आंदोलनकारियों का हौसला नहीं डिगा। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि वे कानून का सम्मान करते हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की हिंसा का रास्ता नहीं चुनेंगे। लेकिन अपनी जायज मांगों को लेकर उनका यह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार इस कानून को निरस्त नहीं कर देती।

बेटी से मिलकर घर लौट रहे थे ससुर-दामाद, पुलिया के नीचे मिले दोनों के शव

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मनोहरथाना (झालावाड़): राजस्थान के झालावाड़ जिले में मनोहरथाना थाना क्षेत्र के टोडरी-जगन्नाथ रोड पर एक दर्दनाक और रहस्यमयी हादसा सामने आया है। यहाँ तलवाड़ा पुलिया के पास मध्य प्रदेश के रहने वाले ससुर और दामाद की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। दोनों शुक्रवार रात को मोटरसाइकिल से अपने गांव वापस लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में उनकी बाइक अनियंत्रित होकर पुलिया के नीचे जा गिरी। रातभर दोनों गंभीर हालत में वहीं पड़े रहे और शनिवार सुबह अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस दोहरे हादसे से पीड़ित परिवारों में कोहराम मच गया है।

बेटी से मिलकर लौट रहे थे वापस, रात में बंद हो गया था मोबाइल

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश के मृगवास गांव के रहने वाले प्रभुलाल अपने दामाद गजानंद भील के साथ मनोहरथाना क्षेत्र के नेश गुजरान गांव में अपनी बेटी से मिलने आए थे। शुक्रवार रात को दोनों बाइक पर सवार होकर वापस अपने गांव के लिए रवाना हुए। जब वे देर रात तक घर नहीं पहुंचे, तो चिंतित परिजनों ने उनके मोबाइल पर कॉल किया, लेकिन फोन बंद आता रहा। इसके बाद परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की, मगर रात के अंधेरे में उनका कुछ पता नहीं चल सका।

सुबह पुलिया के नीचे लहूलुहान मिले दोनों, अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ा दम

शनिवार सुबह टोडरी-जगन्नाथ रोड से गुजर रहे स्थानीय ग्रामीणों ने तलवाड़ा पुलिया के नीचे एक बाइक और दो लोगों को गंभीर हालत में पड़े देखा। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस और परिजनों को दी। दोनों को आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अत्यधिक खून बह जाने और समय पर इलाज न मिलने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें देखते ही मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना पर पहुंची मनोहरथाना थाना पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर स्थानीय अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया, जहाँ पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिए गए।

हादसा या साजिश? संदिग्ध मौत का मामला दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस

मनोहरथाना थाना प्रभारी महेंद्र कुमार ने बताया कि शुरुआती तौर पर यह मामला अनियंत्रित होकर बाइक गिरने यानी सड़क दुर्घटना का लग रहा है। हालांकि, मौत की सही वजह और वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस ने फिलहाल 'संदिग्ध मौत' का मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस हादसे के सभी तकनीकी और अन्य पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि यह महज एक दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई और वजह थी। एक साथ ससुर और दामाद की मौत से गांव में शोक की लहर है।

ग्वालियर में मानसून का इंतजार जारी, उमस ने बढ़ाई लोगों की परेशानी

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ग्वालियर: मध्य प्रदेश के कई जिलों में मानसून की झमाझम बारिश का दौर शुरू हो चुका है, लेकिन ग्वालियर-चंबल अंचल को अभी भी मानसून का इंतजार है। यहाँ के लोग पहली अच्छी बारिश की बेसब्री से राह देख रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, ग्वालियर में 28 जून के बाद कभी भी मानसून दस्तक दे सकता है, जिसके बाद ही लोगों को इस तपिश से राहत मिलने की उम्मीद है।

भीषण उमस और पसीने से लोग बेहाल

ग्वालियर अंचल में इन दिनों तापमान से ज्यादा लोग भीषण उमस और चिपचिपी गर्मी से परेशान हैं। शुक्रवार को सुबह से ही हवा में नमी (आर्द्रता) बहुत ज्यादा होने के कारण लोग बेहाल दिखे। सुबह-सुबह खिली तेज धूप और उमस ने लोगों को जमकर पसीना छुड़ाया। मौसम विभाग के अनुसार, सुबह 5:30 बजे ही पारा 30°C दर्ज किया गया, जिससे यह साफ है कि अब लोगों को रात के समय भी गर्मी से कोई राहत नहीं मिल पा रही है।

क्यों बढ़ रही है इतनी घुटन?

मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि अरब सागर से लगातार आ रही नमी और पश्चिमी दिशा से चल रही हवाओं के कारण हवा में आर्द्रता बहुत ज्यादा बढ़ गई है। यही वजह है कि तापमान बहुत ज्यादा न होने के बावजूद गर्मी और घुटन का अहसास कहीं अधिक हो रहा है। इस चिपचिपी गर्मी के कारण बच्चों, बुजुर्गों और दफ्तर आने-जाने वाले कामकाजी लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

दो दिन बादलों की आवाजाही, 28 के बाद बारिश के आसार

मौसम वैज्ञानिक डॉ. एचएस पांडेय के अनुसार, फिलहाल मानसून की रफ्तार सामान्य है। अगर मौसम की परिस्थितियां इसी तरह अनुकूल बनी रहीं, तो 28 जून के बाद ग्वालियर-चंबल अंचल में मानसून एंट्री कर लेगा। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो दिनों तक आसमान में बादलों की आवाजाही तो बनी रहेगी, लेकिन झमाझम और व्यापक बारिश 28 जून के बाद ही शुरू होगी। डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे दोपहर के समय धूप में निकलने से बचें, शरीर में पानी की कमी न होने दें और हल्के सूती कपड़े पहनें।

10वीं तक पुराने भाषा नियम जारी, CBSE ने छात्रों को दी बड़ी राहत

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नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। शिक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, वर्तमान शैक्षणिक सत्र में सातवीं, आठवीं और नौवीं कक्षा में पढ़ रहे जिन विद्यार्थियों ने तीन-भाषा फॉर्मूले के अंतर्गत दो विदेशी भाषाओं को चुना है, वे दसवीं कक्षा तक बिना किसी बदलाव के इसी संयोजन (कॉम्बिनेशन) के साथ अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगे। सरकार के इस कदम से उन हजारों छात्रों को बड़ी राहत मिली है, जो बीच सत्र में अपने विषय बदले जाने की आशंका से परेशान थे।

नए नियम आगामी बैचों पर होंगे लागू

मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि तीन-भाषा नीति के तहत कम से कम दो भारतीय भाषाओं को पढ़ने की जो अनिवार्यता तय की गई है, उसे पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि वर्तमान में पढ़ रहे छात्रों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। यह नई व्यवस्था पूरी तरह से भविष्य के बैचों के लिए होगी और इसे कक्षा 6 (छठी) से चरणबद्ध तरीके से अमल में लाया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला किसी नीतिगत यू-टर्न या सरकार के पीछे हटने का संकेत नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद प्रावधान को लेकर पैदा हुए भ्रम को दूर करने के लिए केवल एक जरूरी स्पष्टीकरण जारी किया गया है।

सीमित संख्या में प्रभावित होंगे छात्र

आंकड़ों के नजरिए से देखें तो सीबीएसई की दसवीं बोर्ड परीक्षा में हर साल तकरीबन 24 लाख विद्यार्थी बैठते हैं। इनमें से मात्र 30 हजार के आसपास ही ऐसे छात्र होते हैं जो दो विदेशी भाषाओं का विकल्प चुनते हैं। प्रतिशत के लिहाज से देखा जाए तो लगभग 18.5 फीसदी छात्र पहले से ही तीन-भाषा नीति के तहत भारतीय भाषाओं की पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में सरकार के इस ताजा स्पष्टीकरण का मुख्य फायदा महानगरों और बड़े शहरी इलाकों के उन चुनिंदा छात्रों को मिलेगा, जिन्होंने अपनी रुचि के हिसाब से विदेशी भाषाओं का चयन किया था।

सर्कुलर और अदालती विवाद की पृष्ठभूमि

इस पूरे विवाद की शुरुआत मई 2026 में सीबीएसई द्वारा जारी एक सर्कुलर के बाद हुई थी, जो राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के दिशानिर्देशों पर आधारित था। उस आदेश में कहा गया था कि सत्र 2026-27 से नौवीं कक्षा में आने वाले छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाओं का होना लाजमी था। इस नियम के सामने आते ही अभिभावकों और छात्रों के बीच असंतोष फैल गया और मामला देश की शीर्ष अदालत तक पहुंच गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस नीति पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार करते हुए याचिकाओं को पहले से लंबित मामलों के साथ संबद्ध करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद अब मंत्रालय ने खुद आगे आकर छात्रों की चिंताओं को शांत किया है।

अयोध्या में केजरीवाल का बयान- मंदिर चढ़ावा चोरी को बताया महापाप

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अयोध्या: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शुक्रवार सुबह उत्तर प्रदेश के अयोध्या पहुंचे। अयोध्या आते ही उन्होंने सबसे पहले प्रसिद्ध राम मंदिर में जाकर रामलला के दर्शन किए और विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने राम दरबार के भी दर्शन किए और लगभग 15 मिनट का समय मंदिर परिसर में बिताया। रामलला का आशीर्वाद लेने के बाद वे हनुमानगढ़ी मंदिर भी गए, जहाँ उन्होंने संकटमोचन हनुमान जी की पूजा की और दर्शन किए।

चंदा चोरी के मुद्दे पर केजरीवाल का बड़ा बयान

रामलला के दर्शन करने के बाद मीडिया से बातचीत में अरविंद केजरीवाल ने राम मंदिर में चल रहे चंदा चोरी के विवाद पर तीखा बयान दिया। उन्होंने चढ़ावे की चोरी को एक गंभीर मामला बताते हुए इसे 'महापाप' करार दिया। केजरीवाल ने कहा कि इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बाद केवल छोटे स्तर के कर्मचारियों को ही गिरफ्तार किया गया है, जो कि सही नहीं है। उन्होंने एलान किया कि वे आज शाम चार बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रहे हैं, जिसमें इस पूरे विषय पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे।

मामले में राजनीति और पुलिस जांच तेज

अरविंद केजरीवाल के इस बयान के बाद अब अयोध्या चंदा चोरी मामले में सियासत गरमाने के पूरे आसार बन गए हैं। शाम को होने वाली उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सभी राजनीतिक दलों और आम श्रद्धालुओं की नजरें टिकी हुई हैं। दूसरी तरफ, इस पूरे मामले पर पुलिस का कहना है कि चंदा चोरी की जांच पूरी तरह से निष्पक्ष और कानूनी तरीके से की जा रही है। पुलिस की टीमें सभी तथ्यों और सबूतों की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में कुछ और लोगों की गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा बढ़ा, गोल्डमैन सैक्स ने जीडीपी ग्रोथ अनुमान बढ़ाया

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नई दिल्ली: वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने कैलेंडर वर्ष 2026 के लिए भारत के वृहद आर्थिक परिदृश्य (Macroeconomic Outlook) को पहले से कहीं अधिक मजबूत और बेहतर बताया है। हाल ही में संपन्न हुए ऐतिहासिक अमेरिकी-ईरान शांति समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और मजबूत घरेलू आर्थिक स्थितियों को देखते हुए बैंक ने भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (Real GDP) वृद्धि दर का अनुमान बढ़ा दिया है।

जीडीपी ग्रोथ अनुमान बढ़कर हुआ 6.8 फीसदी, महंगाई और घाटे में आएगी कमी

गोल्डमैन सैक्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2026 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 0.3 फीसदी बढ़ाकर अब 6.8 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही भारतीय उपभोक्ताओं और सरकार को राहत देने वाली कई अन्य घोषणाएं भी की गई हैं:

  • कोर इन्फ्लेशन (मुख्य महंगाई): इसके अनुमान में 0.2 फीसदी की कटौती कर इसे 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।

  • करंट अकाउंट डेफिसिट (चालू खाता घाटा): कच्चे तेल का आयात सस्ता होने से यह 0.2 फीसदी घटकर जीडीपी का महज 1.1 प्रतिशत रह जाएगा।

  • क्रूड ऑयल (कच्चा तेल): बैंक की कमोडिटी टीम का मानना है कि 2026 की दूसरी छमाही में तेल औसतन 82 डॉलर प्रति बैरल और 2027 तक घटकर 75 डॉलर प्रति बैरल पर आ सकता है।

वैश्विक तनाव के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था रही लचीली, पहली तिमाही में 7.8% की विकास दर

रिपोर्ट में इस बात की सराहना की गई है कि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में लंबे समय तक रहे भू-राजनीतिक तनाव और व्यवधानों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत बनी रही। भारत सरकार द्वारा उठाए गए राजकोषीय और अर्ध-राजकोषीय कदमों ने वैश्विक स्तर पर बढ़ी ऊर्जा कीमतों का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ने दिया। यही वजह है कि वर्ष 2026 की पहली तिमाही (Q1) में भारत की आर्थिक गतिविधियां उम्मीद से कहीं ज्यादा बेहतर रहीं और देश ने 7.8 प्रतिशत की शानदार विकास दर दर्ज की।

उर्वरक सब्सिडी और ईंधन की कीमतों पर कम होगा राजकोषीय दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिरने से घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने का खतरा अब पूरी तरह टल गया है। इसके अलावा पेट्रोकेमिकल आधारित उत्पादों की लागत कम होने से खुदरा महंगाई भी नियंत्रण में रहेगी। वैश्विक स्तर पर यूरिया की कीमतों में आए सुधार के चलते सरकार पर बढ़ने वाला फर्टिलाइजर (उर्वरक) सब्सिडी का बोझ भी अब कम होगा, जिससे देश के अल्पकालिक राजकोषीय दबाव (Fiscal Pressure) को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।

अल्पकालिक चुनौतियों के बाद साल के अंत में रफ्तार पकड़ेगी घरेलू खपत

गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि पहले हुई ईंधन की मूल्य वृद्धि के असर के कारण वर्ष 2026 की दूसरी और तीसरी तिमाही में घरेलू खपत (Consumption Growth) की रफ्तार थोड़ी धीमी रह सकती है। हालांकि, कच्चे तेल की ताजा गिरावट के बाद अब आगे खुदरा ईंधन के दाम बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके परिणामस्वरूप, तीसरी तिमाही के बाद आम जनता के घरेलू खर्च पर अतिरिक्त दबाव सीमित हो जाएगा और साल के अंत तक भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर जबरदस्त रफ्तार पकड़ लेगी।

मजबूत विदेशी मुद्रा प्रवाह और संतुलित भुगतान शेष

भारत का बाहरी आर्थिक परिदृश्य (External Sector Outlook) भी बेहद सुरक्षित नजर आ रहा है। सस्ते तेल आयात और विदेशों से आने वाले मजबूत प्रेषण प्रवाह (Remittance Flow) के दम पर भारत का विदेशी व्यापार संतुलन बेहतर स्थिति में है। बैंक को उम्मीद है कि इस साल भारत का भुगतान संतुलन अधिशेष (Balance of Payments Surplus) जीडीपी का 0.7 फीसदी रहेगा। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी सचेत किया गया है कि मौसम संबंधी अनिश्चितताएं (अल नीनो या बेमौसम बारिश) और पूर्व में बढ़ी तेल की कीमतें अल्पकालिक तौर पर बाजार के सामने कुछ चुनौतियां खड़ी रख सकती हैं।

CM फडणवीस का बड़ा फैसला, 1722 करोड़ की सड़क परियोजना को मिली मंजूरी

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मुंबई: मुंबईकरों को ट्रैफिक की भारी समस्या से निजात दिलाने और यात्रा के समय को बेहद कम करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। महाराष्ट्र कैबिनेट की इंफ्रास्ट्रक्चर उप-समिति ने 1,722.40 करोड़ रुपये की लागत वाली एक नई और महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता वाली उप-समिति ने गुरुवार को इस परियोजना को हरी झंडी दिखाई, जिसे इससे पहले 17 जून को मुख्य सचिव की समिति ने भी अपनी मंजूरी दे दी थी। इस सड़क निर्माण का पूरा जिम्मा महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) को सौंपा गया है।

समय की होगी भारी बचत (वर्ली से फोर्ट सिर्फ 5 मिनट में)

यह नई सड़क कनेक्टिविटी मुंबई के दो प्रमुख हिस्सों के बीच की दूरी और सफर के समय को नाटकीय रूप से कम कर देगी:

  • वर्ली से फोर्ट: इस 3.55 किलोमीटर लंबी सड़क के बन जाने से वर्ली से फोर्ट की यात्रा का समय 45 मिनट से घटकर मात्र 5 से 10 मिनट रह जाएगा।

  • फोर्ट से वर्सोवा: इसी तरह, फोर्ट से वर्सोवा जाने में जहां अभी एक घंटे का लंबा समय लगता है, वह सफर घटकर केवल 15 से 20 मिनट का रह जाएगा।

वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक और सावरकर सी ब्रिज को जोड़ेगी सड़क

भौगोलिक रूप से यह बेहद महत्वपूर्ण पैच होगा, क्योंकि यह 3.55 किलोमीटर लंबी सड़क वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक के बांद्रा फोर्ट छोर को सीधे सावरकर सी ब्रिज से जोड़ने का काम करेगी। इससे पश्चिमी उपनगरों और दक्षिण मुंबई के बीच का संपर्क बेहद सुचारू हो जाएगा।

पुनर्वास, मछुआरों और पर्यावरण के लिए विशेष बजट

परियोजना के सुगम क्रियान्वयन के लिए सरकार ने प्रभावितों के मुआवजे और पर्यावरण का भी विशेष ध्यान रखा है:

  • झुग्गी पुनर्वास: इस परियोजना के दायरे में आने वाली 40 झुग्गियों के पुनर्वास के लिए 50 करोड़ रुपये का मुआवजा और फंड तय किया गया है।

  • मछुआरा समुदाय: स्थानीय मछुआरों के हितों की रक्षा और सहायता के लिए 20 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।

  • पर्यावरणीय उपाय: निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई और इको-फ्रेंडली उपायों के लिए अलग से 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

मई 2028 तक पूरी होगी परियोजना

अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरी सड़क परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर उप-समिति की मंजूरी के बाद अब इस पर तेजी से काम शुरू होगा और इसके मई 2028 तक पूरी तरह से बनकर तैयार होने की उम्मीद है।

क्रीमिया में ड्रोन अटैक से बढ़ा तनाव, रूस ने 660 ड्रोन नष्ट करने का किया दावा

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मॉस्को/कीव: चार साल से भी अधिक समय से जारी रूस और यूक्रेन की जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। फरवरी 2022 में शुरू हुआ दोनों देशों का यह संघर्ष अब एक बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ताजा घटनाक्रम में रूस ने यूक्रेन पर अब तक के सबसे बड़े और भीषण ड्रोन हमलों में से एक करने का आरोप लगाया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी 'एपी' के हवाले से आई रिपोर्ट के मुताबिक, रूस का कहना है कि यूक्रेन ने उसकी मुख्य जमीन और कब्जे वाले क्रीमिया इलाके को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ हमले किए हैं।

यूक्रेन का अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला

रूस के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को आधिकारिक जानकारी दी कि उनकी वायु सेना ने यूक्रेन के रिकॉर्ड 660 ड्रोनों को मार गिराया है। यूक्रेन का यह हमला कितना बड़ा था, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह रूस के 12 अलग-अलग इलाकों के साथ-साथ क्रीमिया प्रायद्वीप, काला सागर और आजोव सागर में एक साथ किया गया। इस भीषण हमले के बाद दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच टकराव और ज्यादा बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।

रूस के ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाने की रणनीति

यूक्रेन पिछले कई महीनों से रूस के तेल उत्पादन और ऊर्जा केंद्रों को लगातार निशाना बना रहा है। अंतरराष्ट्रीय जानकारों का मानना है कि यूक्रेन की इस रणनीति से रूस की ईंधन सप्लाई और सेना के लिए रसद (सामान) पहुंचाने की व्यवस्था कमजोर हुई है। इसके चलते युद्ध के मैदान में रूस की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है और राष्ट्रपति पुतिन पर दबाव बढ़ गया है।

यह हमला यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के उस बयान के कुछ ही घंटों बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने '40 दिनों के प्रभाव अभियान' का आदेश दिया था। माना जा रहा है कि जेलेंस्की ने हमलों को तेज करके रूस को युद्ध खत्म करने के लिए मजबूर करने का मन बना लिया है, क्योंकि पिछले एक साल से अमेरिका की शांति कोशिशों का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।

हमले में कहाँ कितना हुआ नुकसान

  • रूस में नुकसान: मॉस्को के दक्षिण में स्थित तुला क्षेत्र में एक घर तबाह हो गया और एक महिला घायल हो गई। तुला के गवर्नर दिमित्री मिल्याएव ने बताया कि नोवोमोस्कोव्स्क शहर में एक बिजली लाइन और एक औद्योगिक केंद्र को नुकसान पहुंचा है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि वहाँ एक केमिकल प्लांट और हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट में आग लग गई है। वहीं, राजधानी मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने बताया कि शहर की तरफ बढ़ रहे 47 ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया गया, जिससे वहाँ कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

  • यूक्रेन पर रूस का पलटवार: दूसरी तरफ, रूस ने भी यूक्रेन के खार्किव क्षेत्र पर जोरदार हमले किए। खार्किव के क्षेत्रीय प्रमुख ओलेह सिनीहुबोव ने बताया कि पिछले 24 घंटों में रूसी हमलों में दो नागरिकों की मौत हो गई और सात लोग घायल हुए हैं। रूस ने इस इलाके में गाइडेड बमों और ड्रोनों से हमला किया। यूक्रेन की वायु सेना के मुताबिक, उन्होंने रूस के 189 ड्रोनों में से 174 को तो नष्ट कर दिया, लेकिन रूस की चार इस्कंदर-एम बैलिस्टिक मिसाइलें अपने निशाने पर गिरने में कामयाब रहीं।

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