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ग्वालियर में दर्दनाक घटना, महिला बोली- शादी के बाद से करता था प्रताड़ित

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ग्वालियर: ग्वालियर के एक अस्पताल में भर्ती 26 वर्षीय महिला की इलाज के दौरान दर्दनाक मौत हो गई। महिला ने अपनी मौत से ठीक पहले अस्पताल के बेड से एक वीडियो रिकॉर्ड किया है, जिसमें उसने अपने पति पर बेरहमी से मारपीट करने और जबरन तेजाब पिलाने का रोंगटे खड़े कर देने वाला आरोप लगाया है। पुलिस अब इस वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों के आधार पर मामले की गहराई से जांच कर रही है।

अस्पताल में तोड़ा दम, वीडियो में बयां किया दर्द

बीते 22 जून को थाटीपुर थाना क्षेत्र की न्यू मेहर कॉलोनी में रहने वाली निशा राठौर को बेहद गंभीर हालत में जयारोग्य अस्पताल (JAH) में भर्ती कराया गया था, जहाँ बुधवार शाम को उन्होंने दम तोड़ दिया। मौत से पहले सामने आए वीडियो में निशा की हालत बेहद नाजुक दिख रही है। वीडियो में वह कह रही हैं कि उनके पति गजेंद्र राठौर पिछले तीन-चार दिनों से उनके साथ लगातार मारपीट कर रहे थे और जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो पति ने उन्हें जबरन तेजाब (एसिड) पिला दिया।

दो महीने की गर्भवती थीं निशा, पूर्व में भी की थी शिकायत

निशा के मायके वालों के मुताबिक, वह दो महीने की गर्भवती थीं और उन्होंने इस बात की जानकारी अपनी मां सुनीता राठौर को भी दी थी। हालांकि, पुलिस का कहना है कि गर्भावस्था की आधिकारिक पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगी।

जांच में यह भी पता चला है कि निशा और गजेंद्र की शादी 1 मई 2022 को हुई थी, लेकिन शादी के बाद से ही दोनों के बीच विवाद चल रहा था। निशा ने करीब ढाई साल पहले (31 दिसंबर 2023) भी थाटीपुर थाने में पति के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और मारपीट की शिकायत दर्ज कराई थी। उस समय पति गजेंद्र ने थाने में लिखित समझौता किया था कि वह भविष्य में कभी पत्नी को परेशान नहीं करेगा और यदि उसने ऐसा किया, तो पुलिस उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकती है।

मर्ग कायम, हर एंगल से जांच में जुटी पुलिस

इस मामले में ग्वालियर के सीएसपी रोबिन जैन ने बताया कि महिला की मौत के बाद फिलहाल मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने साफ किया कि निशा द्वारा बनाए गए वीडियो, परिजनों के बयानों और डॉक्टरों की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पति के खिलाफ आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस हर एंगल से मामले की पड़ताल कर रही है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है ताकि मौत के सटीक कारणों का पता चल सके।

तलाक के बाद ईशा देओल ने खोला दिल, रिश्तों और प्यार पर कही बड़ी बात

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बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री ईशा देओल ने अपने पति भरत तख्तानी से अलग होने के बाद अपनी निजी जिंदगी और अकेलेपन को लेकर खुलकर बात की है। हाल ही में दिए एक विशेष इंटरव्यू में ईशा ने स्वीकार किया कि इस अलगाव के बाद उनकी जिंदगी में 'प्यार और रोमांस' का वैक्यूम (कमी) पैदा हो गया है, जिसे वे काफी ज्यादा मिस कर रही हैं। ईशा ने बताया कि वे स्वभाव से बेहद भावुक और रोमांटिक इंसान हैं, और उनके लिए जीवन में प्यार के बहुत गहरे मायने हैं।

पूरी तरह 'रोम-कॉम' मिजाज की इंसान हूं, ब्रेकअप से नहीं बदलती सोच: ईशा

अपनी भावनाओं को साझा करते हुए ईशा देओल ने कहा, "मेरा मानना है कि हर इंसान के जीवन में प्रेम और रोमांस का होना बेहद लाजमी और जरूरी है। इस समय मैं अपनी लाइफ के उस खूबसूरत अहसास को बहुत मिस कर रही हूं। मुझे रोमांटिक फिल्में देखना, रोमांटिक गाने सुनना और लव स्टोरीज पढ़ना बेहद पसंद है। मैं पूरी तरह से एक 'रोम-कॉम' (रोमांटिक-कॉमेडी) मिजाज की इंसान हूं।"

जब ईशा से सवाल किया गया कि क्या वैवाहिक जीवन में आए इस उतार-चढ़ाव के बाद प्यार को लेकर उनका नजरिया बदला है? तो उन्होंने बेहद परिपक्वता से जवाब देते हुए कहा, "बिल्कुल नहीं, जीवन के इस मोड़ पर आकर भी मेरी सोच नहीं बदली है। रिश्तों का टूटना या ब्रेकअप होना जिंदगी का एक हिस्सा है। इस शादी से पहले भी मेरी लाइफ में बॉयफ्रेंड्स रहे हैं और हमारे बीच अलगाव हुआ, लेकिन इससे प्यार की अहमियत कम नहीं होती। हम सबने मेरे माता-पिता (हेमा मालिनी और धर्मेंद्र) के बीच का वह अटूट और बिना शर्त वाला प्यार देखा है, जो आज भी मेरे लिए प्रेरणा है।"

तलाक की बात सार्वजनिक होना प्रोफेशन की मजबूरी, संवेदनशील दौर में मिला परिवार का साथ

भरत तख्तानी से अलग होने के अपने फैसले पर बात करते हुए ईशा ने बताया कि इस मुश्किल घड़ी में उनका पूरा परिवार चट्टान की तरह उनके साथ खड़ा रहा। ईशा ने कहा, "यह एक बेहद निजी और पारिवारिक मामला होता है, जो सिर्फ दो इंसानों के बीच का होता है। लेकिन हम जिस फिल्म इंडस्ट्री और प्रोफेशन में काम करते हैं, वहां हमारी पर्सनल लाइफ की बातें बहुत जल्दी सुर्खियां बन जाती हैं और जनता के बीच आ जाती हैं। मैं, भरत या उनका परिवार, हम में से कोई भी अपनी निजी बातों को सरेआम डिस्कस करने वाले लोग नहीं हैं। उस वक्त परिस्थितियां अलग थीं और चूंकि इस पूरे मामले में हमारे बच्चे भी शामिल थे, इसलिए वह समय बेहद नाजुक और संवेदनशील था, जिसे बहुत ही संभलकर और समझदारी से संभालने की जरूरत थी।"

प्राइवेसी बनाए रखने की अपील के साथ आपसी सहमति से हुए थे अलग

गौरतलब है कि ईशा देओल और बिजनेसमैन भरत तख्तानी ने कभी भी अपने अलग होने की मुख्य वजहों का खुलासा मीडिया के सामने नहीं किया। दोनों ने एक संयुक्त बयान (जॉइंट स्टेटमेंट) जारी कर इस बात की पुष्टि की थी कि वे आपसी रजामंदी और समझदारी से अपनी राहें जुदा कर रहे हैं।

उन्होंने अपने बयान में कहा था, "हम दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का यह बड़ा निर्णय लिया है। जीवन के इस नए बदलाव के दौरान हमारी दोनों बेटियों का बेहतर भविष्य और उनकी भलाई हमारे लिए सबसे पहली प्राथमिकता है। हम उम्मीद करते हैं कि इस मुश्किल समय में हमारे परिवार की प्राइवेसी (गोपनीयता) का पूरा सम्मान किया जाएगा।" आपको बता दें कि ईशा और भरत की दो प्यारी बेटियां हैं, जिनका नाम राध्या और मिराया है।

300 महिला नगर सैनिकों ने न्याय की लगाई गुहार, पूर्व कमांडेंट पर गंभीर शिकायत

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कोरबा: छत्तीसगढ़ के ऊर्जाधानी कहे जाने वाले कोरबा जिले में महिला सुरक्षा और कार्यस्थल पर उत्पीड़न से जुड़ा एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। जिले में तैनात करीब 300 महिला नगर सैनिकों (होमगार्ड जवानों) ने एकजुट होकर अपने ही विभाग के तत्कालीन नगर सेना कमांडेंट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महिला जवानों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभालते हुए तत्कालीन अधिकारी पर ड्यूटी के दौरान अभद्र आचरण करने, अमर्यादित व अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने और लंबे समय तक मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के संगीन आरोप लगाए हैं। यह लिखित शिकायत छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में कोरबा में आयोजित की गई विशेष जनसुनवाई के दौरान सीधे आयोग को सौंपी गई।

सामूहिक शिकायती पत्र में बयां किया अपना दर्द

महिला नगर सैनिकों द्वारा महिला आयोग को सौंपे गए सामूहिक हस्ताक्षरयुक्त आवेदन में विस्तार से अपनी आपबीती बताई गई है। पीड़ित महिला जवानों का आरोप है कि उक्त तत्कालीन कमांडेंट तैनाती और परेड के दौरान अक्सर महिला कर्मचारियों के साथ बेहद अनुचित और गैर-पेशेवर व्यवहार करते थे। शिकायत में कहा गया है कि कई मर्तबा विभागीय बैठकों और सार्वजनिक जगहों पर उनके लिए बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिसकी वजह से तमाम महिला स्टाफ को भारी मानसिक तनाव, हीन भावना और असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा था।

कड़ा एक्शन: महिला आयोग ने दिए 'आंतरिक परिवाद समिति' से जांच के आदेश

मामले की संवेदनशीलता और इतनी बड़ी संख्या में महिला कर्मचारियों की शिकायत को देखते हुए छत्तीसगढ़ महिला आयोग ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने नगर सेना विभाग के उच्च अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से 'आंतरिक परिवाद समिति' (Internal Complaints Committee) के माध्यम से इस पूरे प्रकरण की बारीकी से जांच कराने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पीड़ित महिला कर्मियों और आरोपी अधिकारी, दोनों के बयान दर्ज कर पूरी निष्पक्षता के साथ दो महीने के भीतर जांच रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

जनसुनवाई में आए घरेलू और कार्यस्थल उत्पीड़न के कई अन्य मामले

कोरबा में आयोजित इस जनसुनवाई के दौरान केवल नगर सेना का ही नहीं, बल्कि घरेलू हिंसा, भरण-पोषण भत्ता न मिलना, कार्यस्थल पर प्रताड़ना, जमीन-मकान से जुड़े संपत्ति विवाद और पुलिस कार्रवाई से असंतुष्ट पीड़ितों के कई अन्य मामलों की भी गहन सुनवाई हुई। महिला आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें और गवाहियां सुनने के बाद मौके पर मौजूद संबंधित विभागों के अफसरों को त्वरित दिशा-निर्देश दिए। कुछ बेहद पेचीदा मामलों में पक्षकारों को उचित विधिक सलाह देते हुए सक्षम न्यायालय जाने की बात कही गई, जबकि अन्य संवेदनशील मामलों को आगे की काउंसलिंग और कार्रवाई के लिए स्थानीय महिला थाना और 'सखी वन स्टॉप सेंटर' को ट्रांसफर किया गया।

लापरवाह पति पर लगाया जुर्माना, मकान खाली करने की भी दी समझाइश

सुनवाई के दौरान आए एक अन्य पारिवारिक विवाद में, जहाँ एक पति अपनी पत्नी और मासूम बच्चे की बुनियादी जरूरतों और भरण-पोषण की जिम्मेदारी से भाग रहा था, वहां आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए पति को हर महीने अनिवार्य रूप से 5,000 रुपये की गुजारा राशि देने का आदेश सुनाया। इसी तरह, मकान के मालिकाना हक से जुड़े एक अन्य विवादित प्रकरण में अनाधिकृत पक्ष को निर्धारित समयसीमा के भीतर शांतिपूर्वक मकान खाली करने की अंतिम हिदायत और समझाइश दी गई।

तय समयसीमा में न्याय दिलाना हमारी पहली प्राथमिकता: डॉ. किरणमयी नायक

सत्र के समापन पर छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने प्रशासनिक अधिकारियों को दोटूक लहजे में हिदायत दी कि आधी आबादी यानी महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके सम्मान से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि पीड़ित महिलाओं को त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी न्याय दिलाना ही आयोग का मुख्य संकल्प है। सभी संबंधित जांच अधिकारी समय-सीमा का विशेष ध्यान रखें, ताकि पीड़ितों को न्याय के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

चढ़ावा चोरी कांड में बड़ा एक्शन, ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने दिया इस्तीफा

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अयोध्या: अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में सामने आया चंदा (चढ़ावा) चोरी का मामला अब बेहद गरमा गया है। इस बड़े विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बहुत बड़ा फेरबदल हुआ है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और प्रमुख ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव को भी मंदिर की व्यवस्थाओं से बाहर कर दिया गया है। चंपत राय के पास पूरे मंदिर की मुख्य जिम्मेदारी थी, जबकि अनिल मिश्रा और गोपाल राव भी मंदिर व्यवस्था में बड़ी भूमिका निभा रहे थे। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे के समय चंपत राय को दूर रखा गया था, जिसके बाद से ही उन्हें हटाए जाने की सुगबुगाहट तेज हो गई थी। अब जल्द ही ट्रस्ट का पुनर्गठन (नया गठन) किया जा सकता है।

एसआईटी (SIT) की रिपोर्ट के बाद हुई गिरफ्तारियां

यह मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया था। एसआईटी ने 23 जून को गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को अपनी शुरुआती रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट के ठीक दो दिन बाद, गुरुवार देर शाम ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर पहली एफआईआर (FIR) दर्ज की गई और मंदिर व्यवस्था से जुड़े 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस आज इन सभी को कोर्ट में पेश करेगी। हालांकि, इस एफआईआर में चंपत राय या डॉ. अनिल मिश्रा जैसे बड़े पदाधिकारियों के नाम शामिल नहीं हैं।

गिरफ्तार आरोपियों में बड़े पदाधिकारियों के रिश्तेदार शामिल

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू (चंपत राय का ड्राइवर), लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी अनुकल्प और लवकुश आपस में जीजा-साले हैं और ये दोनों ट्रस्टी अनिल मिश्रा के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। वहीं, आरोपी मनीष यादव ड्राइवर टिन्नू का भतीजा है।

मामले पर तेज हुई देशव्यापी सियासत

इस बड़े खुलासे के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है और बड़े नेताओं के बयान सामने आ रहे हैं:

  • संजय राउत (शिवसेना यूबीटी): उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल 'X' पर सवाल उठाते हुए पूछा कि राम मंदिर के लिए उद्धव ठाकरे द्वारा दान की गई 4 किलो चांदी कहाँ गई? अब इस चोरी की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

  • अरविंद केजरीवाल (पूर्व मुख्यमंत्री, दिल्ली): शुक्रवार को रामलला के दर्शन करने पहुंचे केजरीवाल ने कहा कि मंदिर में चोरी करना महापाप है। दर्ज की गई एफआईआर महज एक दिखावा है, जिसके जरिए बड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की।

  • योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश): इस पूरे विवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि आस्था के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सनातन धर्म के मूल्यों को ठेस पहुंचाने वाले अपराधियों के खिलाफ सरकार 'जीरो टॉलरेंस' (कठोर नीति) के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई करेगी।

बिना DJ निकले मुहर्रम के जुलूस, ग्वालियर में शांतिपूर्ण माहौल

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ग्वालियर: ग्वालियर में मुहर्रम के अवसर पर गुरुवार रात से शुक्रवार सुबह तक ताजियों ने ऐतिहासिक महाराज बाड़ा में गश्त की। बाड़े पर रात 10:30 बजे से ही ताजियों का पहुंचना शुरू हो गया था, जहाँ मातमी धुनों के बीच ऊंचे और भव्य ताजिए लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। इस दौरान सुरक्षा के लिहाज से रात 10 बजे के बाद बाड़े पर बड़े वाहनों की एंट्री पूरी तरह बंद कर दी गई थी। शुक्रवार दोपहर से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के ताजियों को सागरताल स्थित कर्बला में नम आंखों से सुपुर्द-ए-खाक (दफन) और विसर्जित किया जा रहा है। शाम को कर्बला परिसर में प्रशासनिक अधिकारियों और कमेटी की मौजूदगी में शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

पहली बार बिना डीजे (DJ) के निकले ताजिए

प्रशासन की सख्त चेतावनी के बाद इस साल मुहर्रम के जुलूसों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। ग्वालियर की सड़कों पर इस बार पहली बार डीजे (DJ) नजर नहीं आए। ताजियेदारों ने डीजे की जगह ढोल-नगाड़े और ताशे जैसे परंपरागत वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल किया। इन पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मातमी धुनों का लोगों ने खूब लुत्फ उठाया। अलग-अलग इमामबाड़ों से उठे ताजियों के महाराज बाड़ा पहुंचने पर अखाड़ेदारों ने हैरतअंगेज प्रदर्शन भी किए। इस बार शंकरपुर, आपागंज, पिछोरो की पहाड़िया और रामाजी के पुरा के ताजिए विशेष रूप से चर्चा में रहे।

ड्रोन और एक हजार जवानों से निगरानी

जुलूस के दौरान शहर का माहौल न बिगड़े, इसके लिए पुलिस और जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। सड़कों पर पुलिस के एक हजार जवानों को तैनात किया गया है, जो किसी भी शरारत पर तुरंत एक्शन लेंगे। इसके साथ ही पूरे रास्ते पर सीसीटीवी (CCTV) कैमरों और आसमान से ड्रोन के जरिए निगरानी रखी जा रही है।

पुलिस कप्तान धर्मवीर सिंह यादव ने बताया कि पुलिस बल पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। थाना प्रभारियों समेत जवान सड़कों पर मुस्तैद हैं जो भीड़ में बदमाशों और जेबकतरों पर भी नजर रख रहे हैं। सोशल मीडिया पर अफवाह या भड़काऊ पोस्ट फैलाने वालों पर कार्रवाई के लिए साइबर सेल की टीम को भी एक्टिव किया गया है।

इन 9 रास्तों पर ट्रैफिक रहेगा डायवर्ट

मुहर्रम और विसर्जन को देखते हुए यातायात पुलिस ने शुक्रवार (26 जून) को शहर के 9 प्रमुख रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया है। एएसपी शियाज केएम ने आम जनता से असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की अपील की है:

  • चार शहर का नाका से सागरताल: इस तरफ जाने वाले वाहन मल्लगढ़ा से जलालपुर-अटलद्वार होकर निकल सकेंगे।

  • बहोड़ापुर से सागरताल/जलालपुर: इस मार्ग पर वाहनों की एंट्री पूरी तरह बंद रहेगी। मुरैना जाने वाले वाहन शिंदे की छावनी, फूलबाग और गोले का मंदिर मार्ग का उपयोग कर सकते हैं।

  • अटलद्वार से शिवपुरी: यहाँ जाने वाले वाहन मोतीझील से शंकरपुर और गोल पहाड़िया होकर जा सकेंगे।

  • सागरताल से रेलवे क्रॉसिंग/मोतीझील: इस तरफ जाने वाले वाहनों पर पूरा प्रतिबंध रहेगा।

  • अटलद्वार से बहोड़ापुर (मोतीझील होकर): सभी वाहन जलालपुर चौराहा और पड़ाव से शिंदे की छावनी होकर जा सकेंगे।

  • सिकंदर कंपू से बहोड़ापुर (बाड़ा होकर): वाहन रॉक्सी पुल के नीचे से हुजरात पुल और शिंदे की छावनी से रामदास घाटी मार्ग का इस्तेमाल करेंगे।

  • बहोड़ापुर से सिकंदर कंपू (महाराज बाड़ा होकर): यह ट्रैफिक शिंदे की छावनी की तरफ मोड़ा गया है।

  • गोल पहाड़िया/गिरवाई मार्ग: यहाँ से वाहन नाका चंद्रवदनी, बेटी बचाओ तिराहा और अचलेश्वर होकर निकल सकेंगे।

  • फूलबाग/सिटी सेंटर से गिरवाई: इस ओर जाने वाले वाहन चेतकपुरी और बेटी बचाओ तिराहा से होते हुए वीरपुर बांध की तरफ जा सकेंगे।

‘द इंडिया स्टोरी’ टीजर आउट: कीटनाशकों पर छिड़ी कानूनी जंग, काजल अग्रवाल का दमदार अंदाज

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भारतीय सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री काजल अग्रवाल और बहुप्रतिभाशाली अभिनेता श्रेयस तलपड़े बहुत जल्द एक बेहद संवेदनशील और विचारोत्तेजक फिल्म 'द इंडिया स्टोरी' में स्क्रीन साझा करते नजर आने वाले हैं। मेकर्स ने आज इस फिल्म का आधिकारिक ट्रेलर सोशल मीडिया पर दर्शकों के बीच जारी कर दिया है, जिसके बाद से ही फैंस और सिनेमा प्रेमियों के बीच फिल्म को लेकर उत्सुकता काफी बढ़ गई है। यह फिल्म देश के एक ऐसे बड़े और छिपे हुए संकट को उजागर करती है, जो सीधे तौर पर आम आदमी की थाली से जुड़ा हुआ है।

क्या है ट्रेलर में खास? सड़कों पर विरोध और कोर्टरूम की जंग

फिल्म के ट्रेलर की शुरुआत एक बेहद तनावपूर्ण और बड़े आंदोलन के दृश्य से होती है, जहाँ उग्र किसान और आम नागरिक सड़कों पर उतरकर वकील अर्चना (काजल अग्रवाल द्वारा अभिनीत किरदार) के खिलाफ जबरदस्त नारेबाजी और प्रदर्शन करते दिख रहे हैं। आक्रोशित भीड़ उनकी तुरंत गिरफ्तारी की मांग कर रही है और गुस्से में उनके पोस्टरों पर कालिख पोतती नजर आती है।

इसके तुरंत बाद कहानी का रुख अदालत (कोर्टरूम) की तरफ मुड़ता है। यहाँ अभिनेता श्रेयस तलपड़े, जो योगेश पांडे नाम के एक लाचार पिता की भूमिका में हैं, अपनी 7 वर्षीय मासूम बेटी की मौत के लिए न्याय की गुहार लगाते दिखते हैं। उनका कोर्ट में यह दावा है कि उनकी बेटी की जान किसी सामान्य बीमारी या कैंसर से नहीं, बल्कि रोजमर्रा के भोजन में मिलाए जाने वाले जानलेवा रसायनों (पेस्टिसाइड) और मिलावट की वजह से गई है।

कॉर्पोरेट घरानों से अकेले भिड़ेंगी काजल अग्रवाल, अंत में मिला बड़ा शॉक

इस कानूनी लड़ाई में काजल अग्रवाल का किरदार यानी एडवोकेट अर्चना बेहद निडर अंदाज में कीटनाशक और पेस्टिसाइड बनाने वाली बड़ी-बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों के खिलाफ मोर्चा खोलती नजर आती हैं। वे अदालत में दलीलें पेश करती हैं कि कैसे ये कंपनियां मुनाफे के चक्कर में आम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही हैं। ट्रेलर के अंतिम हिस्से में एक बेहद चौंकाने वाला सीन भी डाला गया है, जहाँ भारी विरोध प्रदर्शन और अफरा-तफरी के बीच एक अज्ञात महिला वकील अर्चना (काजल अग्रवाल) को सरेआम थप्पड़ जड़ देती है, जो कहानी में एक बड़ा सस्पेंस पैदा करता है।

पब्लिक हेल्थ और आने वाली पीढ़ी के खतरे पर केंद्रित है कहानी

'द इंडिया स्टोरी' मुख्य रूप से हमारे खान-पान में मौजूद पेस्टिसाइड और खाद्य सामग्री में होने वाली मिलावट जैसे अति-गंभीर सामाजिक मुद्दे को देश के सामने लाती है। फिल्म यह कड़ा संदेश देती है कि कैसे यह धीमा जहर हमारे स्वास्थ्य को खोखला कर रहा है और हमारी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहा है। फिल्म में देश के इस सबसे बड़े लेकिन कम चर्चा में रहने वाले पब्लिक हेल्थ इश्यू (जन स्वास्थ्य संकट) को बेहद संजीदगी से फिल्माया गया है।

स्टारकास्ट, टेक्निकल टीम और रिलीज की तारीख

इस महत्वपूर्ण फिल्म का निर्देशन प्रतिभावान निर्देशक चेतन डीके ने किया है, जबकि इसकी कहानी लिखने और निर्माण (प्रोड्यूस) करने का जिम्मा सागर बी शिंदे ने संभाला है। फिल्म के सह-निर्माताओं की सूची में स्वाति विनायक सैंदाने, अनीता जाधव, विनायक सैदानी, कल्पेश शाह, देवयानी खोराटे और प्रेम जोशी जैसे नाम शामिल हैं।

तकनीकी टीम की बात करें, तो निशांत भगवत ने बतौर सिनेमैटोग्राफर काम किया है, संगीत मंगेश धाकड़े का है, संपादन (एडिटिंग) आशीष म्हात्रे ने किया है, जबकि गानों के बोल शकील आजमी ने लिखे हैं और साउंड डिजाइनिंग अनमोल भावे की है। 'द इंडिया स्टोरी' आगामी 24 जुलाई 2026 को हिंदी, तेलुगु और तमिल भाषाओं में एक साथ दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है।

एयरलिफ्ट हुईं कंटेंट क्रिएटर जिनी, ICU से बाहर आते ही लगाए गंभीर आरोप

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इंदौर: इंदौर में गैस पाइपलाइन हादसे में गंभीर रूप से झुलसीं मशहूर कंटेंट क्रिएटर गिरी राजकुमारी उर्फ 'जिनी झाला' को शुक्रवार को हाई कोर्ट के आदेश के बाद एयरलिफ्ट करके अहमदाबाद ले जाया गया है। अब उनका आगे का इलाज अहमदाबाद के जाइडस हॉस्पिटल में होगा। डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें पूरी तरह ठीक होने में कम से कम तीन से चार महीने का समय लगेगा। इससे पहले, गुरुवार शाम को डॉक्टरों की एक विशेष टीम ने उनकी सेहत की जांच कर रिपोर्ट तैयार की थी, जिसके बाद शुक्रवार सुबह उन्हें कड़ी सुरक्षा और मेडिकल निगरानी में आईसीयू (ICU) से बाहर लाया गया।

अस्पताल से बाहर आते ही छलका जिनी का दर्द

आईसीयू से बाहर लाते समय जिनी झाला दर्द से कराह रही थीं, लेकिन उन्होंने अपना दर्द और गुस्सा साझा करते हुए प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। जिनी ने कहा, "मेरी इस हालत के लिए स्थानीय पार्षद और अधिकारी पूरी तरह जिम्मेदार हैं। उनके खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? पुलिस को उनके खिलाफ भी एफआईआर (FIR) दर्ज करनी चाहिए।" इस दौरान उनके माता-पिता (नवल और धर्मेंद्रसिंह झाला) ने भी दोषियों को सख्त से सख्त सजा देने की मांग की।

बोरिंग पर बैन के बावजूद हो रहा था काम: मंगेतर का आरोप

जिनी झाला के मंगेतर रजत प्रतापसिंह ने आरोप लगाया कि प्रशासन और पुलिस इस मामले को शुरू से ही गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उन्होंने बताया:

  • स्थानीय पार्षद बालमुकुंद सोनी ही उस जगह पर बोरिंग करवा रहे थे और उन्होंने झूठ बोला कि वहाँ वाटर हार्वेस्टिंग का काम चल रहा है।

  • इंदौर प्रशासन ने आगामी 30 जुलाई तक बिना अनुमति बोरिंग कराने पर पूरी तरह रोक (प्रतिबंध) लगा रखी है, फिर भी नियमों की धज्जियां उड़ाकर यह काम कराया जा रहा था।

  • हादसे के बाद न तो कोई अधिकारी और न ही कोई नेता पीड़ितों की सुध लेने अस्पताल पहुंचा। पुलिस ने केवल खानापूर्ति करते हुए बोरिंग गाड़ी को जब्त किया और ड्राइवर-ठेकेदार पर केस दर्ज कर असली जिम्मेदारों को छोड़ दिया।

तीन और सर्जरी होना बाकी, अन्य घायलों की हालत स्थिर

रजत ने जिनी की सेहत की जानकारी देते हुए बताया कि हादसे में उनके हाथ की त्वचा (स्किन) की दो परतें पूरी तरह जल चुकी हैं और तीसरी परत को भी भारी नुकसान पहुंचा है। उनकी एक सर्जरी हो चुकी है, जबकि अभी तीन और बड़ी सर्जरी होना बाकी हैं। वहीं, इस हादसे में झुलसे दो अन्य नागरिकों—गोपाल मालाकार (10-15% बर्न) और सुभाष ठाकुर (10-12% बर्न) की हालत फिलहाल ठीक और स्थिर बताई जा रही है।

तीन अधिकारियों की टीम करेगी मामले की जांच

गैस पाइपलाइन फटने की इस गंभीर घटना की जांच के लिए नगर निगम ने तीन बड़े अधिकारियों की एक कमेटी बनाई है। इस टीम में अपर आयुक्त आशीष पाठक, और कार्यपालन यंत्री आसित खरे व पीएस कुशवाह शामिल हैं। यह कमेटी हादसे के हर पहलू की जांच कर अगले दो दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी।

‘चौहान’ का टीजर आते ही सोशल मीडिया पर बवाल, मीम्स और तुलना ने बढ़ाई चर्चा

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बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अजय देवगन की बहुप्रतीक्षित और आगामी फिल्म 'चौहान' का पहला आधिकारिक टीजर सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज कर दिया गया है। टीजर के सामने आते ही इंटरनेट पर दर्शकों और सिनेमा प्रेमियों के बीच हलचल तेज हो गई है। फिल्म की पहली झलक को लेकर दर्शकों की बेहद मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां एक तरफ अजय देवगन के फैंस उनके इस नए अवतार को लेकर बेहद उत्साहित हैं, वहीं दूसरी तरफ माइक्रोब्लॉगिंग साइट एक्स (ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर फिल्म को लेकर दिलचस्प मीम्स और चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है।

टीजर के धांसू डायलॉग 'चौहान आ रहा है' पर बने मजेदार एडिट्स

इस फिल्म के टीजर में अजय देवगन का एक कड़क और दमदार डायलॉग है, जिसमें वे कहते हैं— 'पठानों से कहना, चौहान आ रहा है'। यह वन-लाइनर सोशल मीडिया पर देखते ही देखते वायरल हो गया है। डिजिटल क्रिएटर्स और यूजर्स इस डायलॉग को लेकर अपने-अपने अंदाज में मजेदार मीम्स और वीडियो एडिट्स बनाकर शेयर कर रहे हैं। कई प्रशंसक इस टीजर पर अपनी राय देते हुए लिख रहे हैं कि यह अनाउंसमेंट वीडियो इंटरनेट पर पूरी तरह तहलका मचा रहा है और लंबे समय बाद अजय देवगन को उनके असली और आक्रामक एक्शन हीरो वाले अंदाज में देखना बेहद रोमांचक है।

अजय के लुक को प्रशंसकों का मिला जबरदस्त समर्थन, बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर की उम्मीद

अजय देवगन के चाहने वाले उनके इस नए लुक और तेवर से बेहद गदगद नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, "फिल्म का टीजर बेहतरीन है और इसमें एक्शन का लेवल जबरदस्त लग रहा है।" वहीं, एक अन्य प्रशंसक ने प्रतिक्रिया दी, "अजय सर, हम आपसे इसी तरह के सिनेमा की उम्मीद करते हैं। असली एक्शन किंग की वापसी हो चुकी है और यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी के सारे रिकॉर्ड तोड़कर ब्लॉकबस्टर साबित होगी।" फैंस का मानना है कि अजय देवगन एक बार फिर हाई-वोल्टेज ड्रामा और कड़े एक्शन जॉनर में तहलका मचाने के लिए तैयार हैं।

विवादों से भी जुड़ा नाम, सोशल मीडिया पर छिड़ी 'प्रोपेगेंडा' की बहस

जहां एक बड़ा वर्ग फिल्म के टीजर की सराहना कर रहा है, वहीं इंटरनेट पर एक तबका ऐसा भी है जो इस फिल्म की कहानी और थीम को लेकर सवाल उठा रहा है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का आरोप है कि 'चौहान' की कहानी कुछ हद तक 'धुरंधर', 'द कश्मीर फाइल्स' और 'द केरल स्टोरी' जैसी राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील व विवादित फिल्मों की राह पर चलती दिख रही है। कुछ नेटिजन्स ने इसे 'प्रोपेगेंडा' आधारित सिनेमा करार देते हुए चिंता जताई है कि ऐसी फिल्में समाज में ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकती हैं।

पिता वीरू देवगन को समर्पित है टीजर, कश्मीर के बैकड्रॉप पर बनी है कहानी

फिल्म के मेकर्स ने इस खास टीजर को रिलीज करने के लिए एक बेहद भावुक और खास दिन को चुना। इसे अजय देवगन के पूजनीय पिता और भारतीय सिनेमा के मशहूर एक्शन डायरेक्टर स्वर्गीय वीरू देवगन की जयंती के मौके पर दर्शकों के बीच साझा किया गया। टीजर वीडियो की शुरुआत कश्मीर घाटी में पिछले 75 वर्षों से जारी संघर्ष और वहां तैनात भारतीय सेना के पराक्रम पर केंद्रित एक गंभीर संवाद से होती है, जिसके बाद स्क्रीन पर अजय देवगन का खूंखार और देशभक्ति से लबरेज एक्शन अवतार दिखाई देता है।

जानिए कब होगी सिनेमाघरों में रिलीज और कौन है डायरेक्टर?

इस कड़े एक्शन-ड्रामा फिल्म का निर्देशन प्रतिभावान डायरेक्टर नीरज यादव कर रहे हैं। वहीं, फिल्म के निर्माण की कमान आनंद एल राय, ज्योति देशपांडे और हिमांशु शर्मा जैसी फिल्म इंडस्ट्री की दिग्गज हस्तियों ने संयुक्त रूप से संभाली है। यह भारतीय सिनेमा में पहला मौका है जब अजय देवगन और मशहूर फिल्ममेकर आनंद एल राय किसी प्रोजेक्ट के लिए एक साथ आए हैं। फिल्म की रिलीज डेट की बात करें, तो 'चौहान' 1 अक्टूबर 2027 को देश-विदेश के सिनेमाघरों में बड़े पैमाने पर रिलीज की जाएगी।

केतन अग्रवाल मर्डर केस: कंगना रनौत का कड़ा रिएक्शन, बोलीं- हर गलती के लिए माता-पिता जिम्मेदार नहीं

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महाराष्ट्र के पुणे में रहने वाले 26 वर्षीय होनहार युवक केतन अग्रवाल की रहस्यमयी मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है, और यह मामला अब सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक में एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। शुरुआत में इस घटना को एक सामान्य दुर्घटना माना जा रहा था, क्योंकि शुरुआती जानकारी में यह कहा गया था कि 18 जून को लोहागढ़ किले पर ट्रेकिंग के दौरान पैर फिसलने से केतन की खाई में गिरने से मौत हो गई। हालांकि, पुलिस की गहन तफ्तीश और नए सबूतों के सामने आने के बाद अब कानून व्यवस्था इस पूरे मामले को सोची-समझी हत्या की साजिश (मर्डर मिस्ट्री) के नजरिए से देख रही है।

मंगेतर और उसका खास दोस्त पुलिस कस्टडी में, पूछताछ जारी

नवीनतम जानकारी के मुताबिक, इस मामले में केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित करीबी साथी चेतन चौधरी के खिलाफ मिलकर हत्या की खौफनाक साजिश रचने का गंभीर आरोप लगा है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को अपनी हिरासत में ले लिया है। दोनों से अलग-अलग कमरों में कड़ाई से पूछताछ की जा रही है ताकि घटना वाले दिन की कड़ियों को आपस में जोड़ा जा सके और हत्या के असली इरादे (मोटिव) का पता लगाया जा सके।

एक्ट्रेस कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर रखा अपना पक्ष

इस बीच, बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने भी इस मर्डर केस पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक विचारणीय स्टोरी साझा की है। कंगना ने आधुनिक जीवनशैली पर सवाल उठाते हुए लिखा कि आज के इस डिजिटल युग में बच्चों द्वारा किए जाने वाले किसी भी गलत कृत्य या अपराध के लिए सीधे तौर पर उनके माता-पिता या परवरिश को कसूरवार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंसान का वर्चुअल माहौल किसी भी व्यक्ति की मानसिकता और उसके व्यवहार को पूरी तरह से बदलने का दम रखता है।

'दोहरी जिंदगी जी रहे हैं आज के युवा, परिवार को जज करना बेमानी'

आरोपी सिया गोयल के पिता के एक बयान का समर्थन करते हुए कंगना ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, "आजकल के दौर में सिर्फ पारिवारिक पृष्ठभूमि या माता-पिता के अच्छे व्यवहार को देखकर यह अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि बच्चों के भीतर कैसे संस्कार पनप रहे हैं। असल बात तो यह है कि वे बाहरी दुनिया में किससे प्रभावित हो रहे हैं, इंटरनेट पर उनका उठना-बैठना किन लोगों के साथ है और सोशल मीडिया या वास्तविक जीवन में उन पर किसका सबसे ज्यादा असर है। आज की युवा पीढ़ी एक ही समय में कई तरह की दोहरी जिंदगी जी रही है और समाज के सामने अपनी एक बिल्कुल अलग और भ्रामक छवि बनाकर रखती है। इसलिए, बच्चों के किसी भी भयंकर कदम के लिए उनके पूरे परिवार को कटघरे में खड़ा करना या उन्हें जज करना बिल्कुल भी सही नहीं है।"

दोषी मिलने पर बेटी को मिले सख्त सजा: सिया के माता-पिता

दूसरी तरफ, आरोपी सिया गोयल के माता-पिता भी अपनी बेटी पर लगे इन आरोपों से बेहद सदमे में हैं। मीडिया से बातचीत में सिया की मां ने भावुक होते हुए बताया कि केतन के साथ रिश्ता तय करने से पहले उन्होंने कई बार अपनी बेटी से अकेले में पूछा था कि क्या वह इस शादी से खुश है और क्या केतन उसे पसंद है। हर बार सिया ने बेहद खुशी-खुशी इस रिश्ते के लिए अपनी रजामंदी दी थी।

हालांकि, सिया के माता-पिता ने एक मिसाल पेश करते हुए दोटूक शब्दों में कहा कि यदि कानून की जांच में उनकी बेटी दोषी और गुनहगार पाई जाती है, तो उसे उसके किए की सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि पीड़ित परिवार के साथ पूरा न्याय होना चाहिए और इस कानूनी प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी नहीं की जानी चाहिए।

मृत्यु भोज में साधारण खाना परोसना पड़ा भारी, 43 परिवारों का सामाजिक बहिष्कार

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सिरोही: राजस्थान के सिरोही जिले के मंडवारिया गांव से सामाजिक कुरीतियों और दबंगई का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ समाज के पंचों ने एक तानाशाही फरमान जारी करते हुए गरीब और पिछड़े वर्ग के 43 परिवारों को समाज से बहिष्कृत (आउटकास्ट) कर दिया है। इन परिवारों का दोष सिर्फ इतना था कि उन्होंने एक गमी (मृत्यु) के बाद आयोजित भोज में अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण शुद्ध घी के मालपुए नहीं बनवाए थे। पंचों के इस अमानवीय फैसले के बाद से इन सभी परिवारों का हुक्का-पानी पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जिससे उनके सामने भरण-पोषण और अस्तित्व का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

आर्थिक तंगी में कराया था सादा भोजन, भड़के पंचों ने सुनाया बहिष्कार का फरमान

पीड़ित कुनबों का आरोप है कि हाल ही में गांव के एक घर में मृत्युभोज का कार्यक्रम था। परिवार की माली हालत ठीक नहीं होने के चलते वे घी के महंगे मालपुए बनवाने में असमर्थ थे, इसलिए उन्होंने आए हुए लोगों को सादा और पारंपरिक भोजन परोस दिया। यह बात समाज के ठेकेदारों और करीब एक दर्जन से अधिक पंचों को नागवार गुजरी। पंचों ने इसे समाज के नियमों का उल्लंघन और अपनी नाक कटना माना। इसके बाद एक पंचायत बुलाकर न सिर्फ उस पीड़ित परिवार को, बल्कि उनके समर्थन में खड़े अन्य 43 परिवारों को भी जाति और समाज से बेदखल करने का फरमान सुना दिया गया।

कुएं से पानी भरने पर रोक, दुकानदारों ने राशन और जमींदारों ने मजदूरी देने से किया मना

इस बर्बर सामाजिक बहिष्कार के कारण पीड़ित परिवारों का गांव में जीना दूभर हो चुका है। पीड़ित तेजाराम ने रोते हुए बताया कि पंचों के डर से अब गांव का कोई भी व्यक्ति उनसे बात तक नहीं करता है। स्थानीय राशन दुकानदारों ने उन्हें खाने-पीने का सामान देना बंद कर दिया है, और खेतों के मालिकों ने उन्हें मजदूरी पर रखने से मना कर दिया है। हद तो तब हो गई जब इन परिवारों को गांव के सार्वजनिक कुएं से पीने का पानी तक भरने से रोक दिया गया। वहीं, पीड़ित महिला कमला देवी ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी बहू-बेटियों के साथ रास्ते में बदसलूकी और अछूत जैसा व्यवहार किया जा रहा है।

थाने में सुनवाई न होने पर कलेक्ट्रेट का घेराव, जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए पीड़ितों ने करीब एक दर्जन नामजद पंचों के खिलाफ स्थानीय पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, उनका आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने राजनैतिक रसूख के चलते मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया और आरोपियों पर कोई ठोस एक्शन नहीं लिया। पुलिस के इस ढुलमुल रवैये से निराश होकर मंगलवार को सभी 43 परिवारों के महिला, पुरुष और बच्चे सिरोही जिला कलेक्ट्रेट दफ्तर पहुंचे। वहाँ उन्होंने जिला प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी सुरक्षा व न्याय की गुहार लगाई।

कानून की नजर में महापाप है सामाजिक बहिष्कार, हो सकती है 7 साल की जेल

इस पूरे मामले पर कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय संविधान के तहत किसी का भी सामाजिक तौर पर बहिष्कार करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है।

राजस्थान सामाजिक बहिष्कार निषेध अधिनियम 2019: इस कड़े कानून के तहत किसी भी व्यक्ति या उसके परिवार का सामाजिक, आर्थिक, व्यावसायिक या धार्मिक तौर पर हुक्का-पानी बंद करना, सार्वजनिक संपत्तियों (जैसे कुएं, मंदिर) के इस्तेमाल से रोकना पूरी तरह गैर-कानूनी है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने वाले पंचों या व्यक्तियों को 7 साल तक की सश्रम कारावास और भारी जुर्माने की सजा का स्पष्ट प्रावधान है।

इस तुगलकी फरमान के बाद मंडवारिया गांव के ये बेबस परिवार अब न्याय की उम्मीद में दर-दर भटक रहे हैं। जिला कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपने के बाद अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और पुलिस महकमा इन तानाशाह पंचों के खिलाफ कितनी जल्दी और क्या सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाता है।

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