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मृत्यु भोज में साधारण खाना परोसना पड़ा भारी, 43 परिवारों का सामाजिक बहिष्कार

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सिरोही: राजस्थान के सिरोही जिले के मंडवारिया गांव से सामाजिक कुरीतियों और दबंगई का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ समाज के पंचों ने एक तानाशाही फरमान जारी करते हुए गरीब और पिछड़े वर्ग के 43 परिवारों को समाज से बहिष्कृत (आउटकास्ट) कर दिया है। इन परिवारों का दोष सिर्फ इतना था कि उन्होंने एक गमी (मृत्यु) के बाद आयोजित भोज में अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण शुद्ध घी के मालपुए नहीं बनवाए थे। पंचों के इस अमानवीय फैसले के बाद से इन सभी परिवारों का हुक्का-पानी पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जिससे उनके सामने भरण-पोषण और अस्तित्व का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

आर्थिक तंगी में कराया था सादा भोजन, भड़के पंचों ने सुनाया बहिष्कार का फरमान

पीड़ित कुनबों का आरोप है कि हाल ही में गांव के एक घर में मृत्युभोज का कार्यक्रम था। परिवार की माली हालत ठीक नहीं होने के चलते वे घी के महंगे मालपुए बनवाने में असमर्थ थे, इसलिए उन्होंने आए हुए लोगों को सादा और पारंपरिक भोजन परोस दिया। यह बात समाज के ठेकेदारों और करीब एक दर्जन से अधिक पंचों को नागवार गुजरी। पंचों ने इसे समाज के नियमों का उल्लंघन और अपनी नाक कटना माना। इसके बाद एक पंचायत बुलाकर न सिर्फ उस पीड़ित परिवार को, बल्कि उनके समर्थन में खड़े अन्य 43 परिवारों को भी जाति और समाज से बेदखल करने का फरमान सुना दिया गया।

कुएं से पानी भरने पर रोक, दुकानदारों ने राशन और जमींदारों ने मजदूरी देने से किया मना

इस बर्बर सामाजिक बहिष्कार के कारण पीड़ित परिवारों का गांव में जीना दूभर हो चुका है। पीड़ित तेजाराम ने रोते हुए बताया कि पंचों के डर से अब गांव का कोई भी व्यक्ति उनसे बात तक नहीं करता है। स्थानीय राशन दुकानदारों ने उन्हें खाने-पीने का सामान देना बंद कर दिया है, और खेतों के मालिकों ने उन्हें मजदूरी पर रखने से मना कर दिया है। हद तो तब हो गई जब इन परिवारों को गांव के सार्वजनिक कुएं से पीने का पानी तक भरने से रोक दिया गया। वहीं, पीड़ित महिला कमला देवी ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी बहू-बेटियों के साथ रास्ते में बदसलूकी और अछूत जैसा व्यवहार किया जा रहा है।

थाने में सुनवाई न होने पर कलेक्ट्रेट का घेराव, जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए पीड़ितों ने करीब एक दर्जन नामजद पंचों के खिलाफ स्थानीय पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, उनका आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने राजनैतिक रसूख के चलते मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया और आरोपियों पर कोई ठोस एक्शन नहीं लिया। पुलिस के इस ढुलमुल रवैये से निराश होकर मंगलवार को सभी 43 परिवारों के महिला, पुरुष और बच्चे सिरोही जिला कलेक्ट्रेट दफ्तर पहुंचे। वहाँ उन्होंने जिला प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी सुरक्षा व न्याय की गुहार लगाई।

कानून की नजर में महापाप है सामाजिक बहिष्कार, हो सकती है 7 साल की जेल

इस पूरे मामले पर कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय संविधान के तहत किसी का भी सामाजिक तौर पर बहिष्कार करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है।

राजस्थान सामाजिक बहिष्कार निषेध अधिनियम 2019: इस कड़े कानून के तहत किसी भी व्यक्ति या उसके परिवार का सामाजिक, आर्थिक, व्यावसायिक या धार्मिक तौर पर हुक्का-पानी बंद करना, सार्वजनिक संपत्तियों (जैसे कुएं, मंदिर) के इस्तेमाल से रोकना पूरी तरह गैर-कानूनी है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने वाले पंचों या व्यक्तियों को 7 साल तक की सश्रम कारावास और भारी जुर्माने की सजा का स्पष्ट प्रावधान है।

इस तुगलकी फरमान के बाद मंडवारिया गांव के ये बेबस परिवार अब न्याय की उम्मीद में दर-दर भटक रहे हैं। जिला कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपने के बाद अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और पुलिस महकमा इन तानाशाह पंचों के खिलाफ कितनी जल्दी और क्या सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाता है।

दिनदहाड़े झपटमारी: खजरी बायपास पर महिला की सोने की झुमकी लेकर बदमाश फरार

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जबलपुर: संस्कारधानी में राहजनी और सरेराह लूटपाट करने वाले बदमाशों के हौसले बुलंद हैं। अधारताल के महाराजपुर के बाद अब माढ़ोताल थाना क्षेत्र के खजरी बाईपास पर दिनदहाड़े लूट की एक और सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहाँ अपने पति के साथ मोटरसाइकिल पर जा रही एक महिला को निशाना बनाते हुए बाइक सवार तीन अज्ञात लुटेरों ने झपट्टा मारकर उनके कान से सोने की झुमकी नोच ली। लुटेरों की इस बर्बरता के कारण महिला का कान बुरी तरह फट गया और उससे खून बहने लगा। वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों आरोपी खजरी बाईपास की तरफ रफूचक्कर हो गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

हाईवे पर पीछे से आए काले कपड़ों में तीन बदमाश, कान फाड़कर खींचा गहना

माढ़ोताल थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, रांझी के मढ़ई क्षेत्र की रहने वाली सविता चौधरी ने थाने पहुँचकर इस खौफनाक आपबीती की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पीड़िता ने बताया कि वह 24 जून की शाम अपने पति गणेश चौधरी के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर बिहरिया से कटंगी बाईपास होते हुए हाईवे के रास्ते खजरी बाईपास की तरफ जा रही थीं। शाम के करीब 5:30 बजे, पीछे से एक मोटरसाइकिल पर सवार तीन अज्ञात युवक उनके करीब आए। आरोपियों की उम्र करीब 20 से 25 वर्ष के बीच थी और वे काले रंग के कपड़े पहने हुए थे। बाइक पर बीच में बैठे लड़के ने तेजी से हाथ बढ़ाकर सविता के दाहिने कान में पहनी सोने की झुमकी पर झपट्टा मारा और उसे बेरहमी से खींच लिया।

पति ने दूर तक किया पीछा, घायल पत्नी के दर्द के कारण लौटना पड़ा

झुमकी खींचने का झटका इतना तेज था कि पीड़िता का कान बीच से फट गया और लहुलुहान हो गया। वारदात के तुरंत बाद तीनों बदमाश अपनी बाइक की रफ्तार बढ़ाकर खजरी बाईपास की ओर भागने लगे। सविता के पति गणेश ने हिम्मत दिखाते हुए कुछ दूरी तक लुटेरों की गाड़ी का पीछा भी किया, लेकिन शातिर बदमाश तेज रफ्तार का फायदा उठाकर आँखों से ओझल हो गए। इधर कान फटने के कारण सविता दर्द से बुरी तरह कराह रही थीं और खून लगातार बह रहा था, जिसके चलते उनके पति पीछा छोड़ वापस लौटे। गंभीर रूप से घायल महिला का पहले प्राथमिक उपचार कराया गया, जिसके बाद पीड़ित दंपत्ति ने थाने पहुँचकर शिकायत दर्ज कराई।

50 हजार के सोने के जेवर पार, इलाके में लगे सीसीटीवी खंगाल रही पुलिस

पीड़िता के मुताबिक, लुटेरों ने जो सोने की झुमकी खींची है, उसका वजन करीब 3.5 ग्राम था, जिसकी बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 50 हजार रुपये है। अधारताल और माढ़ोताल क्षेत्र में लगातार हो रही इन वारदातों से स्थानीय राहगीरों और महिलाओं में दहशत का माहौल है। माढ़ोताल पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ लूट और मारपीट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस की एक विशेष टीम घटनास्थल के आसपास के रूट और खजरी बाईपास हाईवे पर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज खंगाल रही है, ताकि बदमाशों की बाइक के नंबर और उनके हुलिए का सुराग लगाकर उन्हें जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जा सके।

तमिलनाडु में अमित शाह का बड़ा संदेश, नशे के खिलाफ लड़ाई में सभी की भागीदारी जरूरी

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नई दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को 'अंतरराष्ट्रीय नशामुक्ति दिवस' (अंतरराष्ट्रीय नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ दिवस) के अवसर पर देश की युवा पीढ़ी को मादक पदार्थों के चंगुल से बचाने के लिए सरकार के अटूट संकल्प को दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार एक सुरक्षित समाज के निर्माण और नशे से प्रभावित व्यक्तियों को सहानुभूति व उचित देखभाल प्रदान करने के साथ-साथ ड्रग तस्करी के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मोदी सरकार की 'शून्य सहिष्णुता नीति' और विजन डॉक्यूमेंट

गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा हाइब्रिड मोड में आयोजित इस बैठक में 44 केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के 108 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर गृह मंत्री "नशीली दवाओं पर नियंत्रण (2026-2029) संबंधी विजन दस्तावेज" जारी करेंगे। गृह मंत्रालय (MHA) के अनुसार, यह विजन दस्तावेज देश में ड्रग्स की मांग में कमी, आपूर्ति पर लगाम और इससे होने वाले नुकसान को रोकने के लिए एक साझा और ठोस रोडमैप प्रदान करेगा, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'शून्य सहिष्णुता नीति' (Zero Tolerance Policy) को और मजबूती मिलेगी।

उपराष्ट्रपति ने की शिक्षण संस्थानों की सराहना

इस मुहिम को अपना समर्थन देते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर लिखा कि वे उन सभी विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों और संगठनों की सराहना करते हैं जो इस नशामुक्ति अभियान को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने समाज से अपील की कि जागरूकता फैलाएं और नशा छोड़ने की प्रक्रिया (रिकवरी) से गुजर रहे लोगों का पूरा समर्थन करें ताकि युवा उम्मीद और सेहत का रास्ता चुनें।

तमिलनाडु के सीएम विजय ने दौड़कर बढ़ाया युवाओं का हौसला

अंतरराष्ट्रीय नशामुक्ति दिवस के मौके पर तमिलनाडु में भी एक शानदार नजारा देखने को मिला। राज्य के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने चेन्नई के प्रसिद्ध मरीना बीच पर 'स्टार्ट रन, स्टॉप ड्रग्स' एंटी-ड्रग अवेयरनेस रन (नशामुक्ति जागरूकता दौड़) को हरी झंडी दिखाई।

युवाओं को प्रेरित करने के लिए मुख्यमंत्री विजय खुद भी ट्रैकसूट, स्नीकर्स और धूप का चश्मा पहनकर 'स्टार्ट रन, स्टॉप ड्रग्स' की टी-शर्ट पहने प्रतिभागियों के साथ दौड़ पड़े। मुख्यमंत्री को अपने बीच दौड़ता देख वहां मौजूद युवाओं और प्रतिभागियों ने जोरदार तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।

मोहर्रम जुलूस में धमाके से मचा हड़कंप, विधायक की मांग पर NSA लगाने के निर्देश

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उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर इलाके में मोहर्रम के जुलूस के दौरान क्रेन से हवा में लटकाए गए एक मैजिक वाहन में हुए धमाके का मामला बेहद गंभीर हो गया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत एक्शन में आ गईं। पुलिस ने मामले में इस्तेमाल किए गए मैजिक वाहन और क्रेन को पहले ही जब्त कर लिया था। अब इस बात की गहराई से पड़ताल की जा रही है कि यह धमाका कैसे हुआ और इसके पीछे की असली वजह क्या थी।

कलेक्टर ने दिए रासुका (NSA) के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए उज्जैन के कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने इस घटना के आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, जिले के उन्हेल, नागदा और महिदपुर जैसे संवेदनशील इलाकों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और विस्तृत होगी।

एटीएस (ATS) की टीम करेगी जांच

घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस के साथ-साथ एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) को भी जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच एजेंसियां हर एंगल से यह पता लगाने में जुटी हैं कि मैजिक गाड़ी में हुआ यह ब्लास्ट महज एक हादसा था या इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश थी। घटनास्थल से मिले सबूतों और जब्त वाहन की तकनीकी (फॉरेंसिक) जांच भी कराई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विधायक रामेश्वर शर्मा ने खड़े किए गंभीर सवाल

इस घटना पर बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोपियों पर हत्या के प्रयास की धाराओं में केस दर्ज करने की मांग करते हुए कहा कि अगर धमाके के बाद गाड़ी के टुकड़े, कांच या आग नीचे खड़े लोगों पर गिरती, तो कई लोगों की जान जा सकती थी।

विधायक ने प्रशासन से कई सीधे सवाल पूछे हैं:

  • धमाके के लिए इस्तेमाल की गई विस्फोटक सामग्री कहाँ से लाई गई थी?

  • क्या यह कोई सामान्य घटना थी या इसके पीछे पहले से तय कोई साजिश थी?

  • घटना के समय 'ले फिर आ गए' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किस मकसद से किया गया था?

  • अगर इस धमाके से कोई बड़ी अनहोनी हो जाती, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता?

फिलहाल, प्रशासन ने आम जनता से किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारियों पर ही भरोसा करने की अपील की है। सच क्या है, यह पूरी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा।

करौंदा बाईपास पर नाकेबंदी सफल, 15 किलो गांजे की बड़ी खेप पकड़ी गई

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जबलपुर: संस्कारधानी में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार और तस्करी के खिलाफ पुलिस ने एक बार फिर बड़ी सफलता हासिल की है। जबलपुर के अधारताल थाना क्षेत्र में पुलिस ने घेराबंदी कर गांजे की एक बड़ी खेप पकड़ी है। पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय के सख्त दिशा-निर्देशों पर काम करते हुए अधारताल थाना प्रभारी विपिन ताम्रकार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने करौंदा बाईपास के पास चार शातिर तस्करों को दबोचा है। इनके कब्जे से कुल 15 किलोग्राम अवैध गांजा जब्त किया गया है। पकड़े गए आरोपियों में एक अपचारी (नाबालिग) बालक भी शामिल है, जिसे तस्करों ने अपने गिरोह में शामिल कर रखा था।

चेकिंग के दौरान स्कूटी छोड़कर भाग रहे थे आरोपी, पुलिस ने खदेड़कर दबोचा

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह अधारताल पुलिस की टीम करौंदा बाईपास के पास नियमित वाहन चेकिंग और गश्त (पेट्रोलिंग) पर थी। इसी दौरान दो अलग-अलग स्कूटी पर सवार चार लड़के संदिग्ध हालत में आते दिखाई दिए। पुलिस को सामने देखकर आरोपियों ने घबराकर गाड़ियां मोड़ने और भागने का प्रयास किया। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत घेराबंदी की और पीछा कर चारों को धर दबोचा। जब उनके पास मौजूद बैगों की तलाशी ली गई, तो उनमें भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने नशीले पदार्थ और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही दोनों स्कूटियों को जब्त कर लिया है। सभी आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

सतना से सिवनी जा रही थी नशीली खेप, अंतरजिला नेटवर्क का खुलासा

प्रारंभिक पूछताछ में तस्करों ने पुलिस के सामने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आरोपियों ने कबूल किया है कि वे गांजे की यह बड़ी खेप सतना जिले से लेकर आए थे और जबलपुर के रास्ते इसे सिवनी जिले की ओर ले जा रहे थे। इस खेप को सिवनी के केवलारी क्षेत्र में रहने वाले दो स्थानीय तस्करों को सप्लाई किया जाना था, जिसके बदले इन्हें मोटी रकम मिलने वाली थी। इस खुलासे के बाद अब यह साफ हो गया है कि इस अवैध धंधे के तार कई जिलों से जुड़े हुए हैं।

मुख्य सरगना की तलाश तेज, पूछताछ में खुलेंगे कई और बड़े नाम

अधारताल थाना पुलिस अब पकड़े गए आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि इस पूरे रैकेट के मुख्य सरगना (मास्टरमाइंड) तक पहुँचा जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई जबलपुर में नशे के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान का एक हिस्सा है। पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ने में जुटी है कि सतना में इन्हें यह गांजा किसने उपलब्ध कराया और सिवनी में इसे कौन रिसीव करने वाला था। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस अंतरजिला ड्रग्स तस्करी नेटवर्क से जुड़े कुछ और बड़े सफेदपोश नामों का पर्दाफाश होगा।

ईरानी ड्रोन हमले से 11,000 नाविकों का बचाव अभियान ठप

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दुबई/वॉशिंगटन: दुनियाभर में तेल के व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाने वाला 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) एक बार फिर तनाव का केंद्र बन गया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, गुरुवार को एक ईरानी ड्रोन ने एक मालवाहक जहाज पर हमला कर दिया। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) को फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में फंसे हजारों नाविकों (सीफर्स) को सुरक्षित निकालने का अपना मानवीय अभियान अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है। हालांकि, ईरान ने अभी तक इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन इस घटना ने समुद्री सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंताएं पैदा कर दी हैं।

जहाज को पहुंचा नुकसान, नाविक सुरक्षित

यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने पुष्टि की है कि ओमान के तट के पास एक मालवाहक जहाज पर किसी अज्ञात चीज (प्रोजेक्टाइल) से हमला हुआ। इस हमले के कारण जहाज के मुख्य हिस्से (ब्रिज) को नुकसान पहुंचा है। राहत की बात यह रही कि इस घटना में चालक दल का कोई भी सदस्य घायल नहीं हुआ और समुद्र में तेल रिसाव या प्रदूषण जैसी कोई समस्या नहीं हुई। अधिकारियों ने साफ किया है कि जिस जहाज पर हमला हुआ, वह नाविकों को निकालने वाले अभियान का हिस्सा नहीं था।

नाविकों को निकालने का अभियान क्यों रुका?

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ था। इसी समझौते के तहत खाड़ी में फंसे 11 हजार से ज्यादा नाविकों को सुरक्षित बाहर निकालने की योजना शुरू की गई थी। आईएमओ (IMO) के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज ने कहा कि नाविकों की सुरक्षा हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है। जब तक सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा नहीं हो जाती और जहाजों की सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं मिलती, तब तक के लिए इस अभियान को रोक दिया गया है।

ईरान की चेतावनी और सुरक्षा मार्ग

हमले के बाद ईरानी अधिकारियों ने एक नई चेतावनी जारी की है। ईरान का कहना है कि केवल उन्हीं जहाजों की सुरक्षा की गारंटी होगी जो ईरान द्वारा तय किए गए समुद्री रास्तों से गुजरेंगे। अगर कोई जहाज स्वीकृत (अप्रूव्ड) रास्ता छोड़कर किसी अन्य मार्ग से जाता है, तो उसकी सुरक्षा और बीमा की जिम्मेदारी खुद जहाज के मालिक की होगी। यह चेतावनी समुद्री बारूदी सुरंगों (माइंस) और क्षेत्र के हालातों को देखते हुए जारी की गई है।

वैश्विक व्यापार और कूटनीति पर असर

यह पूरी घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो खाड़ी देशों के दौरे पर हैं और इस समझौते के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। इस ताजा हमले ने न केवल फंसे हुए नाविकों की सुरक्षित वापसी पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि खाड़ी क्षेत्र की नाजुक सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना दिया है। जानकारों का मानना है कि इस तनाव का सीधा असर वैश्विक तेल व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पड़ सकता है।

यूसीसी बिल पर सियासी हलचल तेज, बंगाल विधानसभा में हो सकता है पेश

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार आगामी सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित एक बड़ा विधेयक पेश कर सकती है। विधानसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इस विधेयक के मसौदे (ड्राफ्ट) को सभी विधायकों को देने और सदन में इस पर चर्चा कराने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही ‘वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026’ भी सदन में लाया जा सकता है। विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस की अध्यक्षता में हुई बैठक में सोमवार को कुल पांच विधेयक पेश करने की मंजूरी दी गई है, जिनमें यूसीसी को सबसे अहम माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इन विधेयकों पर चर्चा के लिए एक घंटे का समय तय किया गया है, जिसमें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और विपक्ष के प्रमुख नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।

यूसीसी विधेयक में क्या हो सकते हैं नियम

इस प्रस्तावित कानून में उन राज्यों के मॉडल को आधार बनाया जा सकता है, जहाँ पहले से ही यूसीसी लागू है। इसके संभावित नियमों में बहुविवाह (एक से अधिक शादी) पर रोक, शादी की एक समान कानूनी उम्र तय करना, संपत्ति और विरासत में महिलाओं व पुरुषों को बराबर का अधिकार देना शामिल है। इसके अलावा लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने जैसी व्यवस्थाएं भी इसमें हो सकती हैं। साथ ही, अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को इस कानून के दायरे से बाहर रखने पर विचार किया जा सकता है।

असामाजिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए नया बिल

यूसीसी के साथ ही सरकार राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ‘वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026’ भी पेश करने जा रही है। इस बिल का मुख्य उद्देश्य संगठित अपराध और समाज विरोधी हरकतों पर रोक लगाना है। इसके तहत पुलिस और जिला प्रशासन को विशेष परिस्थितियों में कड़ी कार्रवाई करने के अधिकार दिए जा सकते हैं, जिसमें कुछ मामलों में संदिग्धों को एहतियातन हिरासत में लेने का प्रावधान भी शामिल है।

हिरासत की समीक्षा और अपील का अधिकार

प्रस्तावित ड्राफ्ट के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया जाता है, तो उस मामले की जांच और समीक्षा के लिए एक सलाहकार बोर्ड (एडवाइजरी बोर्ड) बनाया जाएगा। इस बोर्ड के अध्यक्ष हाई कोर्ट के वर्तमान या रिटायर्ड जज होंगे, जो एक तय समय के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेंगे। इसके साथ ही प्रभावित व्यक्ति को सरकार के सामने अपनी अपील रखने का पूरा मौका भी दिया जाएगा।

विधेयकों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज

इन दोनों बड़े विधेयकों के सामने आने की खबर से राज्य की राजनीति में बहस काफी तेज हो गई है। जहाँ सरकार और इसके समर्थकों का मानना है कि इन कानूनों से सामाजिक समानता आएगी और अपराधों पर लगाम लगेगी, वहीं आलोचकों का कहना है कि इतने संवेदनशील विषयों पर जल्दबाजी के बजाय व्यापक चर्चा होनी चाहिए। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, सोमवार को विधानसभा में होने वाली यह चर्चा न सिर्फ इन कानूनों का भविष्य तय करेगी, बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा को भी प्रभावित कर सकती है।

बारिश की पहली बौछार में चमोली में तबाही, सड़कें बनीं नदियां

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चमोली (उत्तराखंड): उत्तराखंड के चमोली जिले में मानसून की पहली तेज बारिश ने ही लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। जिले के नारायणबगड़ इलाके में भारी बारिश (अतिवृष्टि) के कारण पहाड़ों से भारी मात्रा में मलबा, कीचड़ और पत्थर बहकर मुख्य सड़कों पर आ गए हैं, जिससे पूरा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। तेज बहाव के साथ आए इस मलबे ने कई दुकानों, दफ्तरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे स्थानीय लोगों के बीच डर और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

दुकानों और दफ्तरों में भरा मलबा

पहाड़ियों से गिरे इस मलबे और पत्थरों के कारण कई स्थानों पर पूरी तरह से आवाजाही रुक गई है। पानी और कीचड़ का बहाव इतना तेज था कि यह लोगों की दुकानों और कार्यालयों के भीतर तक घुस गया, जिससे वहां रखे सामान को भारी नुकसान पहुंचा है। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में सड़कों पर फैला कीचड़, फंसे हुए वाहन और टूटी दुकानें इस प्राकृतिक आपदा की गंभीरता को साफ बयां कर रही हैं।

वाहनों को नुकसान और राहत कार्य शुरू

मलबे की चपेट में आने से सड़क पर खड़े और वहां से गुजर रहे कई वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कुछ गाड़ियां मलबे के बीच फंस गईं, तो कुछ पर भारी पत्थर गिरने से नुकसान हुआ। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस पूरी घटना में अभी तक किसी भी तरह की जनहानि (जान माल के नुकसान) की खबर नहीं है। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोग खुद ही एक-दूसरे की मदद और मलबा हटाने में जुट गए। इसके बाद जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं। वर्तमान में जेसीबी मशीनों की मदद से सड़कों को साफ करने का काम तेजी से चल रहा है ताकि यातायात को दोबारा शुरू किया जा सके। अधिकारी नुकसान का आकलन करने में जुटे हैं।

प्रशासन ने जारी किया अलर्ट

मौसम के खराब मिजाज और लगातार हो रही बारिश को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने आम जनता से बेहद सतर्क रहने की अपील की है। लोगों को सलाह दी गई है कि जब तक बहुत जरूरी न हो, वे यात्रा करने से बचें। संवेदनशील और खतरनाक इलाकों में सुरक्षा के लिहाज से विशेष निगरानी रखी जा रही है और आपदा प्रबंधन की टीमों को चौबीस घंटे अलर्ट पर रखा गया है। इसके साथ ही प्रशासन ने लोगों से कहा है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में वे तुरंत संबंधित विभागों को इसकी सूचना दें।

रेलवे का बड़ा फैसला: ट्रेन में स्मोकिंग पर सख्त कार्रवाई, भीख मांगने पर भी रोक

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नई दिल्ली: भारतीय रेल से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है। रेल मंत्रालय ने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को बढ़ाने के साथ-साथ उनके सफर के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए नियमों को काफी सख्त कर दिया है। आगामी पहली जुलाई से भारतीय रेल कई बड़े बदलाव लागू करने जा रही है, जो विशेष रूप से स्लीपर और जनरल क्लास में सफर करने वाले आम यात्रियों के लिए बेहद आरामदायक साबित होंगे। नए नियमों के तहत ट्रेनों के भीतर और रेलवे परिसर में अनधिकृत गतिविधियों पर पूरी तरह नकेल कसने की तैयारी कर ली गई है।

ट्रेन में स्मोकिंग करने पर भारी जुर्माना और टिकट ज़ब्ती

नए सख्त नियमों के मुताबिक, अब अगर कोई भी यात्री ट्रेन के अंदर धूम्रपान (स्मोकिंग) करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। मंत्रालय ने जुर्माने की राशि को बढ़ाकर अब सीधे 2,000 रुपये कर दिया है। इतना ही नहीं, पकड़े जाने पर उस यात्री का टिकट भी ज़ब्त किया जा सकता है और उसे बीच सफर में ही ट्रेन से नीचे उतारा जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति मौके पर जुर्माना देने से इनकार करता है, तो मामला सीधे कोर्ट के समक्ष भेजा जाएगा, जहां अदालत अधिकतम 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगा सकती है।

भीख मांगने और अवैध फेरी लगाने वालों पर सख्त ऐक्शन

स्मोकिंग करने वालों के अलावा, रेल मंत्रालय ने ट्रेनों और स्टेशनों पर भीख मांगने वालों और बिना लाइसेंस के सामान बेचने वाले फेरीवालों के खिलाफ भी बड़े ऐक्शन की तैयारी की है। नए बदलावों के तहत अब रेलवे परिसर या ट्रेन के भीतर भीख मांगने की अनुमति बिल्कुल नहीं होगी। यदि कोई भीख मांगते हुए पाया जाता है, तो रेलवे का कोई भी कर्मचारी उसे तुरंत ट्रेन से उतार सकता है। ऐसे लोगों को अवैध रूप से फेरी लगाने वालों के समान ही कड़ी सजा और जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।

बिना लाइसेंस फेरी लगाने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान

सरकार ने जन विश्वास अधिनियम की धारा 144 के तहत बिना आधिकारिक लाइसेंस के ट्रेन में सामान बेचने वाले फेरीवालों पर नकेल कसना शुरू कर दिया है। अब पकड़े जाने पर इन अवैध फेरीवालों पर 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माना न भरने की स्थिति में मामला अदालत जाएगा, जहां तीन महीने की जेल और 5,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। नियमों को इतना कड़ा किया गया है कि यदि कोई फेरीवाला चौथी बार बिना लाइसेंस के पकड़ा जाता है, तो उसे एक साल की कैद, 5,000 रुपये का जुर्माना या फिर ये दोनों सजाएं एक साथ भुगतनी पड़ सकती हैं।

जेलेंस्की की बहादुरी के कायल हुए ट्रंप, युद्ध को लेकर दिया बड़ा बयान

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वाशिंगटन / अंकारा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने यूक्रेनी समकक्ष वोलोडिमिर जेलेंस्की की जमकर सराहना करते हुए उन्हें रूस के खिलाफ जारी युद्ध में बेहद साहसी और बहादुर बताया है। ट्रंप ने कहा कि जेलेंस्की अपनी स्थिति पर मजबूती से डटे हुए हैं और युद्ध क्षेत्र में यूक्रेन काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। व्हाइट हाउस में नाटो (NATO) के महासचिव मार्क रूटे के साथ एक महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान, जब राष्ट्रपति ट्रंप से पूछा गया कि क्या यूक्रेन रूस के खिलाफ यह लड़ाई जीत रहा है, तो उन्होंने सकारात्मक जवाब देते हुए कहा, "वे काफी अच्छा कर रहे हैं।"

यूक्रेनी सैनिकों की बहादुरी और सैन्य क्षमता की तारीफ

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस भीषण युद्ध की मानवीय कीमत को स्वीकार करते हुए दुख जताया कि दोनों तरफ बहुत से बेकसूर लोग मारे जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने यूक्रेन की सैन्य क्षमता और उसके सैनिकों के जज्बे की प्रशंसा की।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मुख्य बयान: "आपको यह मानना होगा कि वे (यूक्रेनी) बेहद हिम्मतवाले हैं। उनके पास न केवल आधुनिक और बढ़िया सैन्य उपकरण हैं, बल्कि बहुत बेहतरीन लोग भी हैं। वे असली फाइटर्स हैं।"

अंकारा नाटो शिखर सम्मेलन से पहले अहम टिप्पणी

डोनाल्ड ट्रंप की यह टिप्पणी अगले महीने तुर्की के अंकारा में होने वाले आगामी नाटो शिखर सम्मेलन की तैयारियों के बीच आई है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस सम्मेलन में यूक्रेन को लगातार मिलने वाली वैश्विक मदद एक मुख्य एजेंडा रहेगी।

मुलाकात के दौरान नाटो महासचिव मार्क रूटे ने भी यूक्रेन की युद्ध क्षेत्र में सुधरती स्थिति की पुष्टि की। रूटे ने कहा कि पिछले पांच-छह महीनों में यूक्रेन का प्रदर्शन पहले से कहीं बेहतर हुआ है और उन्होंने कीव (यूक्रेन) को रूसी सेना का मजबूती से सामना करने में मदद करने के लिए लगातार मिल रही अमेरिकी सहायता को इसका मुख्य श्रेय दिया।

ईरान और यूक्रेन मामलों पर ट्रंप के नेतृत्व की सराहना

नाटो प्रमुख रूटे ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के गंभीर मामलों पर राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने ईरान और यूक्रेन दोनों ही संवेदनशील मुद्दों पर मजबूत लीडरशिप दिखाई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका द्वारा कीव को आवश्यक सैन्य समर्थन देना जारी है, जिसका वित्तीय भुगतान यूरोपीय और कनाडाई सहयोगी देश कर रहे हैं। आगामी नाटो शिखर सम्मेलन में रक्षा औद्योगिक उत्पादन (डिफेंस इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन) को और मजबूत करने पर भी विस्तृत चर्चा होगी, ताकि सभी सहयोगी देश यूक्रेन को लगातार हथियार और रसद की आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए अपने स्वयं के सैन्य स्टॉक को भी फिर से भर सकें। नाटो का अंतिम लक्ष्य यूक्रेन में स्थायी शांति स्थापित करना है, और इसके लिए कीव की सैन्य स्थिति को मजबूत बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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