मनुष्य का बाह्य जीवन वस्तुत: उसके आंतरिक स्वरूप का प्रतिबिम्ब मात्र होता है। जैसे ड्राइवर मोटर की दिशा में मनचाहा बदलाव कर सकता है। उसी प्रकार, जीवन के बाहरी ढर्रे में भारी और आश्चर्यकारी परिवर्तन हो सकता है। वाल्मीकि और अंगुलिमाल जैसे भयंकर डाकू क्षण भर में परिवर्तित होकर इतिहास प्रसिद्ध संत बन गये। गणिका और आम्रपाली जैसी वीरांगनाओं को सती-साध्वी का प्रात: स्मरणीय स्वरूप ग्रहण करते देर न लगी। वामित्र और भतृहरि जैसे विलासी राजा उच्च कोटि के योगी बन गये। नृशंस अशोक बौद्ध धर्म का महान प्रचारक बना। तुलसीदास की कामुकता का भक्ति भावना में परिणत हो जाना प्रसिद्ध है। ऐसे असंख्य चरित्र इतिहास में पढ़े जा सकते हैं। छोटी श्रेणी में छोटे-मोटे आश्चर्यजनक परिवर्तन नित्य ही देखने को मिल सकते हैं।
इससे स्पष्ट है कि जीवन का बाहरी ढर्रा जो चिर प्रयत्न से बना हुआ होता है, विचारों में भावनाओं में परिवर्तन आते ही बदल जाता है। मित्र को शत्रु बनते, शत्रु को मित्र रूप में परिणत होते, दुष्ट को संत बनते, संत को दुष्टता पर उतरते, कंजूस को उदार, उदार को कंजूस, विषयी को तपस्वी, तपस्वी को विषयी बनते देर नहीं लगती। आलसी उद्योगी बनते हैं और उद्योगी आलस्यग्रस्त होकर दिन बिताते हैं। दुगरुणियों में सद्गुण बढ़ते और सद्गुणी में दुगरुण उपजते देर नहीं लगती। इसका एकमात्र कारण इतना ही है कि उनकी विचारधारा बदल गई, भावनाओं में परिवर्तन हो गया।
संसार का जो भी भला-बुरा स्वरूप हमें दृष्टिगोचर हो रहा है, समाज में जो कुछ भी शुभ-अशुभ दिखाई पड़ रहा है, व्यक्ति के जीवन में जो कुछ उत्कृष्ट-निकृष्ट है, उसका मूल कारण उसकी अंत:स्थिति ही होती है। धनी-निर्धन, रोग-नीरोग, अकाल मृत्यु-दीर्घ जीवन, मूर्ख-विद्वान, घृणित-प्रतिष्ठत और सफल-असफल का बाहरी अंतर देखकर उसके व्यक्तित्व का मूल्यांकन किया जाता है। यह बाहरी भली-बुरी परिस्थितियां मनुष्य के मनोबल, आस्था और अंत:प्रेरणाओं की प्रतीक हैं।
भाग्य यदि कभी कुछ करता होगा तो निश्चय ही उसे पहले मनुष्य की मनोरुचि में ही प्रवेश करना पड़ता होगा, जिसकी अंत:गतिविधियां सही दिशा में चलने लगीं हैं। किंतु जिसका मानसिक स्तर चंचलता, अवसाद, अवास, आलस्य, आवेश, दैन्य आदि से दूषित हो रहा है, उसके लिए अच्छी परिस्थितियां और अच्छे साधन उपलब्ध होने पर भी दुर्गति का ही सामना करना पड़ेगा।
अपूर्णता से पूर्णता की ओर
धनतेरस की पूजा कैसे करें, जानिए सरल पूजन विधि और शुभ मुहूर्त
जीवन का सबसे बड़ा धन उत्तम स्वास्थ है, इसलिए आयुर्वेद के देव धन्वंतरि के अवतरण दिवस यानि धनतेरस पर स्वास्थ्य रूपी धन की प्राप्ति के लिए यह त्योहार मनाया जाता है।
23 अक्टूबर को धनतेरस का त्योहार मनाया जाएगा। आओ जानते हैं कि धनतेरस की क्या है सरल तरीके की पूजा विधि।
धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त : शाम 5 बजकर 44 मिनट से से 6 बजकर 5 मिनट तक रहेगा।
धनतेरस की पूजा विधि | Dhanteras puja vidhi
– इस दिन प्रात: उठकर नित्यकर्म से निवृत्त होकर पूजा की तैयारी करें। घर के ईशान कोण में ही पूजा करें। पूजा के समय हमारा मुंह ईशान, पूर्व या उत्तर में होना चाहिए।
– पूजन के समय पंचदेव की स्थापना जरूर करें। सूर्यदेव, श्रीगणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु को पंचदेव कहा गया है। पूजा के समय सभी एकत्रित होकर पूजा करें। पूजा के दौरान किसी भी प्रकार शोर न करें।
– इस दिन धन्वंतरि देव की षोडशोपचार पूजा करना चाहिए। अर्थात 16 क्रियाओं से पूजा करें। पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नेवैद्य, आचमन, ताम्बुल, स्तवपाठ, तर्पण और नमस्कार। पूजन के अंत में सांगता सिद्धि के लिए दक्षिणा भी चढ़ाना चाहिए।
– इसके बाद धन्वंतरि देव के सामने धूप, दीप जलाएं। फिर उनके के मस्तक पर हलदी कुंकू, चंदन और चावल लगाएं। फिर उन्हें हार और फूल चढ़ाएं।
– पूजन में अनामिका अंगुली गंध अर्थात चंदन, कुमकुम, अबीर, गुलाल, हल्दी आदिलगाना चाहिए। इसी तरह उपरोक्त षोडशोपचार की सभी सामग्री से पूजा करें। पूजा करते वक्त उनके मंत्र का जाप करें।
– पूजा करने के बाद प्रसाद चढ़ाएं। ध्यान रखें कि नमक, मिर्च और तेल का प्रयोग नैवेद्य में नहीं किया जाता है। प्रत्येक पकवान पर तुलसी का एक पत्ता रखा जाता है।
– अंत में उनकी आरती करके नैवेद्य चढ़ाकर पूजा का समापन किया जाता है।
– मुख्य पूजा के बाद अब मुख्य द्वार या आंगन में प्रदोष काल में दीये जलाएं। एक दीया यम के नाम का भी जलाएं। रात्रि में घर के सभी कोने में भी दीए जलाएं।
2022 में कब है रमा एकादशी? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त, पारण समय व पूजन विधि
कार्तिक का महीना चल रहा है और बता दें कि कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को रमा एकादशी कहते हैं। यह महीना और एकादशी तिथि दोनों ही भगवान विष्णु को अति प्रिय है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस माह की रमा एकादशी का व्रत रखकर श्री हरि की पूजा अर्चना करता है उस पर महालक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है और मोक्ष के साथ साथ सौभाग्य की प्राप्ति होती है। जी हां, इतना ही नहीं इस दिन विष्णु जी के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करना भी बहुत शुभ और मंगलकारी होता है। तो ऐसे में आइए जानते हैं इस साल कार्तिक माह की रमा एकादशी कब है साथ ही इसके शुभ मुहूर्त, व्रत पारण का समय व पूजन विधि के बारे में भी पूरी जानकारी देंगे।
पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि का आरंभ 20 अक्टूबर को शाम 04 बजकर 04 पर होगा और इसका समापन 21 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 22 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के हिसाब से रमा एकादशी का व्रत 21 अक्टूबर, दिन शुक्रवार को रखा जाएगा और व्रत का पारण अगले दिन 22 अक्टूबर, दिन शनिवार को किया जाएगा। बताते चलें कि व्रत पारण का समय सुबह 06 बजकर 29 मिनट से 08 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इसी के साथ रमा एकादशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा।
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रमा एकादशी की पूजन विधि-
एकादशी के दिन सुबह प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के समक्ष घी का दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें और विधि पूर्वक भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। फिर उन्हें पूजा के समय तुलसी दल और फल का भोग लगाएं। भगवान को रोली व अक्षत का तिलक लगाएं। बता दें कि इस दिन भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी के भी मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें। इसके बाद रात में भगवान का स्मरण और भजन करें। वहीं फिर एकादशी के अगले दिन द्वादशी पर एकादशी व्रत का पारण कर जरूरतमंदों को फल, चावल आदि चीजों का दान करें। ध्यान रखें एकादशी के दिन भूलकर भी चावल का सेवन न करें।
रमा एकादशी व्रत के प्रभाव से जातक को सभी पापों से मुक्ति मिलती हैं और मृत्यु उपरांत विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि रमा एकादशी पर संध्या के समय दीपदान करने से देवी लक्ष्मी अति प्रसन्न होती हैं। इससे सुख-समृद्धि, धन में वृद्धि होती है और समस्त बिगड़े काम बन जाते हैं।
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन (16 अक्टूबर 2022)
मेष :- कार्य-कुशलता से संतोष, व्यवसायिक वृत्ति में सुधार तथा योजना फलीभूत होगी।
वृष :- मनोवृत्ति संवेदनशील रहे, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, समय स्थिति का ध्यान रखें।
मिथुन :- मनोबल उत्साहवर्धक रहे, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि, कार्यकुशलता से संतोष होगा।
कर्क :- मनोबल संवेदनशील रहे, भाग्या का सितारा साथ देगा, बिगड़े हुए कार्य अवश्य ही बन जायेंगे।
सिंह :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष, कार्य- कुशलता से संतोष एवं व्यापार अनुकूल होगा।
कन्या :- इष्ट-मित्रों से मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि, समय पर सोचे कार्य पूर्ण होंगे, ध्यान रखें।
तुला :- कुटुम्ब की समस्याओं में धन व्यय होगा, भ्रमणशील स्थति बनी ही रहेगी।
वृश्चिक :- आर्थिक योजना पूर्ण होगी, सफलता के साधन बनेंगे, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, कार्य बनेंगे।
धनु :- धन लाभ, अधिकारियों से मेल-मिलाप होगा, कार्य-कुशलता अच्छी रहेगी।
मकर :- कार्य वृत्ति में सुधार होगा, स्थिति पर नियंत्रण रखें, स्त्री-वर्ग से हर्ष-उल्लास अवश्य ही होगा।
कुम्भ :- विशेष कार्य स्थिगित रखें, मानसिक उद्विघ्नता बनेगी, कार्य अवरुद्ध होगा।
मीन :- प्रयास सफल होंगे, इष्ट मित्र सहायक रहेंगे, दैनिक कार्य में उत्तम सफलता अवश्य मिलेगी।
अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रबंधन में वित्त सेवा का योगदान महत्वपूर्ण – वित्त मंत्री देवड़ा
भोपाल : वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि वित्त सेवा के अधिकारी-कर्मचारियों ने कोरोना काल के विषम समय में अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रबंधन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वित्त मंत्री यहाँ मध्यप्रदेश वित्त सेवा अधिकारियों के दो दिवसीय प्रांतीय अधिवेशन एवं मिलन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
वित्त मंत्री देवड़ा ने कहा कि वित्त सेवा का काम निरंतर चलने वाला काम है। इसमें समय और ऊर्जा दोनों खर्च होते हैं। उन्होंने वित्त सेवा अधिकारी संघ की प्रतिष्ठित त्रैमासिक पत्रिका "वित्त व्यवस्था" के दीपावली विशेषांक का विमोचन किया।
अधिकारी संघ के अध्यक्ष डॉ. विजय मोहन चौधरी ने वित्त सेवा की प्रासंगिकता एवं संघ के लक्ष्यों को रेखांकित किया। संचालक पेंशन जे.के. शर्मा ने बताया कि पूरे देश में मध्यप्रदेश डिजिटलाइजेशन के क्षेत्र में अग्रणी है। इसमें वित्त सेवा के अधिकारियों का विशेष योगदान है। वित्त मंत्री ने संघ की नई कार्यकारिणी के निर्वाचन एवं गठन के लिए शुभकामनाएँ दी। प्रांतीय अधिवेशन में अधिकारियों के परिजन ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
मुख्यमंत्री चौहान ने कवि तथा ओजस्वी वक्ता सुमित ओरछा के साथ किया पौध-रोपण
भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्मार्ट सिटी उद्यान में राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय मंत्री तथा ओजस्वी वक्ता सुमित ओरछा के साथ नीम, करंज और सारिका इंडिका के पौधे लगाए। सुमित ओरछा केंद्रीय फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड, मुंबई के सदस्य भी हैं। मुख्यमंत्री चौहान के साथ परम्परा फाउण्डेशन के मीत और कुमारी मैत्री शर्मा ने अपने जन्म-दिवस पर पौधे लगाए। नीलेश शर्मा और पूजा अश्वनी शर्मा भी पौध-रोपण में शामिल हुई।
पौधे का महत्व
आज लगाए गए पौधों में सारिका इंडिका भारत, नेपाल और में पाया जाता है। इसका आयुर्वेद में काफी महत्व है। एंटीबायोटिक तत्वों से भरपूर नीम सर्वोच्च औषधि है। करंज का पौधा आयुर्वेदिक चिकित्सा में महत्वपूर्ण माना गया है। करंज के पौधे का उपयोग धार्मिक कार्यों में भी किया जाता है।
मुख्यमंत्री चौहान ने पूर्व राष्ट्रपति स्व. डॉ. कलाम की जयंती पर किया नमन
भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व राष्ट्रपति स्व. डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती पर उन्हें नमन कर स्मरण किया। मुख्यमंत्री चौहान ने निवास कार्यालय स्थित सभागार में डॉ. कलाम के चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की। डॉ. कलाम को मिसाइल मेन के नाम से भी जाना जाता है। धनुषकोड़ी रामेश्वरम, तमिलनाडु में 15 अक्टूबर 1931 को जन्में डॉ. कलाम भारतीय गणतंत्र के 11वें निर्वाचित राष्ट्रपति थे। उन्होंने 4 दशक तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को अपनी सेवाएँ दी। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और सैन्य मिसाइल विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने परमाणु परीक्षण में निर्णायक, संगठनात्मक और तकनीकी भूमिका निभाई। डॉ. कलाम का अवसान 27 जुलाई 2015 को हुआ। उनको सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से सम्मनित किया गया।
हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई के आरंभ से शुरू हो रहा है नया युग : मुख्यमंत्री चौहान
भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि हिन्दी माध्यम की शिक्षा कई विद्यार्थियों के जीवन में नया प्रकाश लेकर आयेगी। हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई के साथ एक नया युग शुरू हो रहा है। यह एक सामाजिक क्रांति है। गरीब परिवार का बेटा भी मेडिकल की पढ़ाई के बारे में सोच सकेगा। प्रदेश में मातृ-भाषा हिन्दी में अध्ययन और अध्यापन को प्रोत्साहित करने और हिन्दी के लिए गर्व की अनुभूति उत्पन्न कराने के उद्देश्य से पिछले कई वर्षों से गतिविधियाँ जारी हैं। हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना, प्रदेश के विभिन्न अंचलों के निवासियों को भावनात्मक रूप से बाँधने के लिए मध्यप्रदेश गीत को कार्यक्रम और उत्सव का भाग बनाने की पहल, पाणिनी संस्कृत विद्यालय की स्थापना और भोपाल में विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन इसी उद्देश्य से किया गया। मुख्यमंत्री चौहान आज भारत भवन के अंतरंग सभागार में चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित "हिन्दी की व्यापकता एक विमर्श" कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संकल्प व्यक्त किया गया है कि शिक्षा का माध्यम मातृ-भाषा हो, नई शिक्षा नीति में भी इस भावना का प्रकटीकरण हुआ है। मध्यप्रदेश ने देश में पहली बार मेडिकल की पढा़ई हिन्दी में कराने का संकल्प लिया। चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के नेतृत्व में हिन्दी में मेडिकल की पाठ्य-पुस्तकें विकसित हुईं। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 16 अक्टूबर को भोपाल में मेडिकल की हिन्दी पुस्तकों का लोकार्पण करेंगे। अपनी मातृ-भाषा हिन्दी में शिक्षा को नया आयाम देना हमारे लिए स्वाभिमान और गौरव का क्षण होगा।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग, भोपाल महापौर मालती राय, हिन्दी सेवी पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा, कैलाश चंद्र पंत, वरिष्ठ पत्रकार महेश , राजेन्द्र शर्मा,विजयदत्त , रमेश शर्मा, रवीन्द्रनाथ टेगौर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे, पूर्व महापौर आलोक शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता सुमित पचौरी विशेष रूप से उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि अंग्रेजी के सरल और चलन में आ चुके शब्दों के देवनागरी लिपि में अधिक से अधिक उपयोग से मेडिकल और तकनीकी शिक्षा की पढ़ाई विद्यार्थियों के लिए सरल होगी। हिन्दी को लेकर मानसिकता बदलने की आवश्यकता है। अंग्रेजी भाषा से ही हम समाज में प्रतिष्ठा और सम्मान प्राप्त करते हैं, इस सोच को बदलना होगा। भाषा से व्यक्ति कुंठित हो, उसमें हीन-भावना उत्पन्न हो, इस स्थिति से मुक्ति आवश्यक है। हमें अंग्रेजी के भय को समाप्त करना है। हिन्दी भाषा में पढ़ाई से कस्बों और ग्रामीण परिवेश के विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा के प्रकटीकरण का अवसर मिलेगा। मध्यप्रदेश की यह पहल सामाजिक क्रांति सिद्ध होगी।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि जब माता-पिता अपनी मातृ-भाषा हिन्दी पर गौरव और सम्मान का प्रकटीकरण करेंगे तभी बच्चे भी हिन्दी को आत्म-सात कर उसे जीवन में अपनाने के लिए अग्रसर होंगे। हिन्दी का संपूर्ण विश्व में सम्मान है। मैंने सभी विदेश यात्राओं में अपनी मातृ-भाषा हिन्दी में ही संबोधन दिए हैं, सभी जगह हिन्दी को सम्मान से सुना जाता है। राज्य सरकार द्वारा मातृ-भाषा हिन्दी में पढ़ाई का विस्तार इंजीनियरिंग, पॉलीटेक्निक, नर्सिंग और पैरामेडिकल में भी किया जाएगा।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प के क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री चौहान द्वारा सौंपे गए दायित्व के निर्वहन में शासकीय मेडिकल कॉलेज के 97 चिकित्सक की टीम ने 4 माह के परिश्रम से एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पुस्तकें विकसित की।
हिन्दी सेवी कैलाश चंद्र पंत ने कहा कि मुख्यमंत्री चौहान के नेतृत्व में हिन्दी में शिक्षा आरंभ हुई। यह पहल अंग्रेजी भाषा की मानसिक गुलामी से मुक्ति की दिशा में उठाया गया प्रभावी कदम सिद्ध होगी। प्रदेश के कस्बों और गाँवों में भी जन-जन को हिन्दी में शिक्षा सुविधा के संबंध में जागरूक कर उन्हें हीन-भावना से मुक्त कराने के लिए गतिविधियाँ संचालित की जाएँ।
वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा ने कहा कि इस पहल से यह भ्रम दूर होगा कि तकनीकी विषयों की शिक्षा हिन्दी में नहीं हो सकती। उन्होंने हिन्दी भाषी विद्यार्थियों में आत्म-विश्वास के लिए देश की संस्कृति, स्वाभिमान, मानवीय मूल्यों पर प्रति शनिवार स्कूल और कॉलेजों में संगोष्ठियाँ करने का सुझाव दिया।
वरिष्ठ पत्रकार महेश ने कहा कि मुख्यमंत्री चौहान ने प्रदेश के युवाओं को अंग्रेजी के भय से मुक्त किया है। कस्बाई और ग्रामीण परिवेश के विद्यार्थियों में भाषायी अस्मिता और मातृ-भाषा के गौरव के लिए स्वदेशी आंदोलन के समान हिन्दी के आंदोलन का घर-घर में विस्तार किया जाना चाहिए।
रवीन्द्रनाथ टेगौर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे ने कृषि के अध्ययन के लिए हिन्दी में पुस्तकें विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि माता-पिता की प्राय: यह सोच होती है कि अंग्रेजी में पढ़ाई से ही बच्चों का भविष्य सँवरेगा। इस मानस को बदलना आवश्यक है। विश्व के 112 विश्वविद्यालय में हिन्दी पढा़ई जा रही है। तकनीकी में आए बदलाव से भी हिन्दी का बहुत विस्तार हुआ है।
पत्रकार राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री चौहान के नेतृत्व में प्रदेश में हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना कर इस दिशा में कदम उठाए गए थे। हिन्दी के प्रोत्साहन के साथ हिन्दी की शुद्धता और सुरक्षा के लिए भी कदम उठाना आवश्यक है। मानस भवन के कार्यकारी अध्यक्ष रघुनंदन शर्मा ने कहा कि हिन्दी के सरल शब्दों के उपयोग से भाषा की लोकप्रियता बढ़ेगी। डॉक्टरों को अपने मरीजों से हिन्दी में बात करने और दवा के पर्चे देवनागरी में लिखने की पहल करना चाहिए। विजयदत्त ने स्वाधीनता के अमृत महोत्सव में हुई इस पहल के लिए मुख्यमंत्री चौहान को शुभकामनाएँ दी।
इंदौर में बोलीं हुमा कुरैशी- सपने साकार करने के लिए रूप नहीं, गुण पर दें ध्यान
इंदौर । वजन ज्यादा होना या बहुत कम होना हर दूसरे व्यक्ति की कहानी है। इसके लिए हर किसी को बहुत कुछ सुनना पड़ता है। कई लोग इस बात का मजाक बनाते हैं, ताने देते हैं। हर व्यक्ति की अपनी कद-काठी, रंग-रूप है। क्यों बच्चों के मन में भी बार्बीडाल, सिंड्रेला आदि की छवि ‘जीरो साइज’ की बनाई जाती है। क्यों उन्हें मोटा नहीं बनाया जाता। भारत तो क्या बल्कि दुनिया में कहीं भी वयस्क व्यक्ति ‘जीरो साइज’ की बात पर खरा नहीं उतरता, बच्चों की बात अलग है। पुरानी फिल्मों की नायिकाएं तो ऐसी नहीं होती थीं, फिर भी वे पूरी दुनिया पर छाई रही तो आज दुबली लड़की की बात क्यों की जाती है। जरूरत है तो अपने गुणों से अपनी पहचान बनाने की, सपनों को साकार करने की। यह बात माडल व अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने शनिवार को इंदौर में मीडिया से हुई चर्चा में कही। हुमा ने अपनी आगामी फिल्म ‘डबल एक्सएल’ के बारे में भी चर्चा करते हुए कहा कि फिल्म के जरिए बेशक बहुत बदलाव न हो, लेकिन लोग इस विषय पर सोचेंगे तो सही। मेरा मानना है कि बाडी शेपिंग की बात ही गलत है। जो जैसा है उसे वैसा ही रहने दें, उसके गुणों को देखें।
पर्दे के आगे और पीछे अब महिलाएं भी –
हुमा ने कहा कि अब फिल्मों के विषय भी बदल रहे हैं। एक वक्त था जब पुरुष प्रधान मुद्दों पर फिल्में बनती थी क्योंकि पर्दे के आगे और पर्दे के पीछे पुरुष ही ज्यादा होते थे, इसलिए उनसे जुड़े मुद्दे ही सामने आ पाते थे। अब महिलाएं पर्दे के आगे और पीछे महत्वपूर्ण दायित्व निभा रही हैं। इसके ही परिणाम हैं कि जो उन्होंने अनुभव किया उसे वे फिल्मों के जरिए सामने ला रही हैं। मेरा मानना है कि हर व्यक्ति को अपने मन की आवाज सुनना चाहिए। लोग क्या सोचेंगे, कहेंगे इस बारे में हम कब तक विचार करते रहें।
छोला में होगी सार्वजनिक गोवर्धन पूजा, कोलकाता के कलाकार बनाएंगे 15 फीट की प्रतिमा
भोपाल । तेजस जनकल्याण समिति का राजधानी भोपाल का प्रथम सार्वजनिक गोवर्धन पूजा एवम परिक्रमा प्रतिष्ठित आयोजन इस वर्ष कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा 26 अक्टूबर को होगा। इसकी तैयारियों को लेकर समिति के सदस्यों ने बैठक की। बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा को लेकर चर्चा हुई। समिति के अध्यक्ष प्रवीण गुप्ता और सचिव वरूण गुप्ता ने बताया कि राजधानी के सबसे प्रचीन छोला दशहरा मैदान में होने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान की तैयारियां शुरू कर दी गई है। इस साल गोवर्धन जी की 15 फीट की प्रतिमा गोबर से बनाई जाएगी। सचिव वरुण गुप्ता ने बताया कि प्रतिमा का निर्माण भोपाल के प्रख्यात मूर्तिकार राजू कुशवाह के नेतृत्व में कोलकाता के कलाकार करेंगे। वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम मां भगवती आराधना मंच के बैनर तले पंडित हरिओम शर्मा के नेतृत्व में होगी। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सामाजिक कार्य करने वाले सात लोगों को समिति के संस्थापक संरक्षक और वरिष्ट समाजसेवी स्व, रामनारायण कुदरिया की स्मृति में स्थापित तेजस सम्मान से सम्मानित किया जायेगा। साथ ही समिति की आधिकारिक वेबसाइट कर लोकार्पण भी होगा।















