आयुष्मान खुराना की कैंपस कॉमेडी ड्रामा फिल्म डॉक्टर जी सिनेमाघरों में रिलीज कर दी गई है। फिल्म में आयुष्मान के साथ रकुल प्रीत सिंह और शेफाली शाह लीड रोल में है। डॉक्टर जी को लेकर शुरुआत से ही पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिल रहा था। पहले फिल्म के ट्रेलर और बाद में एडवांस बुकिंग को देखकर कहा जा रहा था कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल साबित हो सकती है। अब फिल्म के पहले दिन के कलेक्शन की जानकारी भी सामने आ गई है, जिसके अनुसार डॉक्टर जी ने शुक्रवार को उम्मीद से ज्यादा का कलेक्शन किया है और वीकेंड पर कलेक्शन में गजब का इजाफा देखने को मिल सकता है।आयुष्मान खुराना की पिछली दोनों ही फिल्में चंडीगढ़ करे आशिकी और अनेक बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई थी। 'चंडीगढ़ करे आशिकी' ने 1.77 करोड़ के साथ ओपनिंग की थी तो वहीं अनेक ने पहले दिन 1.75 करोड़ कमाए थे। ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि डॉक्टर जी भी 1 से 2 करोड़ के बीच का कलेक्शन करेगी। हालांकि, फिल्म को लेकर ज्यादा प्रमोशन नहीं किया गया था, फिर भी डॉक्टर जी ने पहले दिन 3 करोड़ ज्यादा का कलेक्शन कर पाने में सफल रही है। बॉक्स ऑफिस इंडिया का रिपोर्ट की मानें तो शुरुआती अनुमान के अनुसार डॉक्टर जी ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर 3 से 3.25 करोड़ के बीच की कमाई की है।
सबके चहेते हैरी पॉटर के ‘Hagrid’का हुआ निधन
हॉलीवुड फिल्म सीरीज 'हैरी पॉटर' में हैग्रिड की अहम भूमिका निभाने वाले मशहूर स्कॉटिश अभिनेता रॉबी कोलट्रन का 72 साल की उम्र में निधन हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार थे। उनका अस्पताल इलाज चल रहा था जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। 'हैरी पॉटर' के अलावा वह आईटीवी के जासूसी ड्रामा 'क्रैकर' और जेम्स बॉन्ड की फिल्मों 'गोल्डनआई' और 'द वर्ल्ड इज नॉट इनफ' में भी दिखाई दिए थे।
एक बयान में, उनकी एजेंट बेलिंडा राइट ने पुष्टि की कि अभिनेता की मृत्यु स्कॉटलैंड में फल्किर्क के पास अस्पताल में हुई। उन्होंने कोलट्रन को एक "अद्वितीय प्रतिभा" का धनी बताया। हैग्रिड के रूप में उनकी भूमिका को जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि वह "दुनिया भर में बच्चों और वयस्कों के बीच सम्मान से याद किए जाएंगे।"
हैरी पॉटर की लेखिका जेके राउलिंग ने भी ट्विटर पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। राउलिंग ने कोलट्रन को "अविश्वसनीय प्रतिभा" बताया। राउलिंग ने लिखा, "मैं रॉबी की तरह फिर कभी किसी को इस तरह से नहीं जान पाऊंगी। वह एक अविश्वसनीय प्रतिभा थे। वह अपनी तरह के इकलौते थे, और मैं उन्हें जानने, उनके साथ काम करने और उनके साथ हंस पाने के लिए खुद को भाग्यशाली मानती हूं। मैं उनके सभी बच्चों और उनके परिवार के लिए अपना प्यार और गहरी संवेदना भेजती हूं।"
Keeway ने लांच की Yamaha RX100 जैसी दिखने वाली शानदार बाइक, देखें कीमत….
Keeway India ने भारतीय बाजार में एक नई बाइक SR125 लॉन्च की है। Keeway SR125 कंपनी की भारत में मौजूद सबसे सस्ती बाइक है। यूरोपियन टू-व्हीलर कंपनी इससे पहले छह टू-व्हीलर लॉन्च कर चुकी है। बाजार में Keeway SR125 की एक्स-शोरूम कीमत 1।19 लाख रुपये है और इसे तीन कलर ऑप्शन में पेश किया गया है। लेटेस्ट बाइक देखने में यामाहा RX100 जैसी लगती है। Keeway SR125 में 125cc इंजन की पावर मिलती है। इच्छुक ग्राहक कंपनी की वेबसाइट से इसे 1,000 रुपये में बुक कर सकते हैं। फिलहाल इसका किसी भी बाइक से सीधा मुकाबला नहीं है।
Keeway SR125 के डिजाइन की बात करें तो इसका लुक स्क्रैंबलर बाइक जैसा है। लेटेस्ट बाइक में ब्लॉक-पैटर्न टायर, रिब्ड-सीट, छोटा गोल हेडलैंप और एक रेट्रो-लुकिंग फ्यूल टैंक मिलते हैं। रेट्रो लुक में चार चांद लगाने के लिए स्पोक रिम, गोल टेल लैंप और टर्न इंडिकेटर भी दिए गए हैं।

Keeway SR125: फीचर्स
कीवे एसआर125 के फीचर्स की बात करें तो इसमें डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, LED डेटाइम रनिंग लैंप दिए गए हैं। इसके अलावा बिल्ट-इन इंजन कट-ऑफ स्विच के साथ साइड स्टैंड, कॉम्बी-ब्रेकिंग सिस्टम और हजार्ड स्विच जैसे फीचर्स भी मिलते हैं। बाइक को तीन कलर वेरिएंट- व्हाइट, ब्लैक और रेड में पेश किया गया है।
Keeway SR125: स्पेसिफिकेशंस
यूरोपियन टू-व्हीलर कंपनी ने Keeway SR125 में 125cc एयर-कूल्ड इंजन का इस्तेमाल किया है। इसमें फ्यूल इंजेक्शन भी दिया गया है। बाइक में 5 स्पीड ट्रांसमिशन दिया गया है। भारत में लेटेस्ट बाइक की एक्स-शोरूम कीमत 1।19 लाख रुपये है। कंपनी की वेबसाइट से इस बाइक को 1,000 रुपये में बुक किया जा सकता है।
Keeway SR125: सस्पेंशन और ब्रेक
कीवे की 125cc बाइक में सस्पेंशन ड्यूटी टेलीस्कॉपिक फोर्क दिए गए हैं। रियर सस्पेंशन में 5 स्टेप एडजस्टेबिलिटी भी दी गई है। ब्रेकिंग के लिए बाइक के फ्रंट में 300mm डिस्क और रियर में 210mm डिस्क ब्रेक दिये गए हैं। लेटेस्ट बाइक के फ्रंट और रियर में 17 इंच के स्पोक व्हील का इस्तेमाल किया गया है।

Keeway SR 125 इंजन
Keeway SR 125 इंजन नई मोटरसाइकिल SR 125 लॉन्च कीवे SR 125 कंपनी की एंट्री लेवल बाइक है Keeway SR 125 इंजन कीवे SR 125 में 125cc, सिंगल-सिलेंडर, 4-स्ट्रोक, फ्यूल-इंजेक्टेड इंजन दिया है। ये बाइक 9,000 RPM पर 9।5 bhp का पावर और 7,500 RPM पर 8।2 Nm का पीक टॉर्क जेनरेट करता है। इंजन 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स से जोड़ा गया है। इसमें टेलिस्कोपिक फ्रंट फोर्क्स और रियर में डुअल स्प्रिंग-लोडेड शॉक एब्जॉर्बर दिए गए हैं। मोटरसाइकिल में कम्बाइंड ब्रेकिंग सिस्टम (CBS) के साथ फ्रंट और रियर दोनों में ही डिस्क ब्रेक दिए हैं। टेलिस्कोपिक फ्रंट फोर्क्स और रियर में डुअल स्प्रिंग-लोडेड शॉक एब्जॉर्बर दिए गए हैं।
हेलमेट पहना होता तो बच जाती जान, ट्रैक्टर ट्राली से टकराया वाहन, सिर में चोट से दो युवकों की मौत
सागर । पुलिस प्रशासन के तमाम प्रयास के बाद भी कई दोपहिया वाहन चालक हेलमेट नहीं लगा रहे हैं। ऐसी ही अनदेखी शुक्रवार की रात दस बजे दो युवकों पर भारी पड़ गई। यह युवा बरौदा गांव से बाइक पर सागर आ रहे थे, लेकिन हेलमेट नहीं पहना था। बीच रास्ते में तालचिरी गांव के पास उनकी बाइक की ट्रैक्टर ट्राली से भिड़ंत हो गई। इस भिड़ंत में सिर में गंभीर चोट लगने की वजह से दोनों युवाओं की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक बरौदा गांव निवासी 22 वर्षीय विनोद पिता हरी साहू व 22 वर्षीय गोलू पिता शंकर पटेल शुक्रवार को देर शाम एटीएम से रुपये निकालने के लिए बरौदा से सागर आ रहे थे। दोनों साथी बाइक से बरौदा से निकले थे, लेकिन हेलमेट नहीं पहना था। जब उनकी बाइक तालचिरी गांव के पास पहुंची तो सागर की ओर से जा रहे ट्रैक्टर ट्राली से भिड़ंत हो गई। इस भिड़ंत में ट्रैक्टर ट्राली उनके सिर से गुजर गई। मौके पर ही विनोद साहू ने दम तोड़ दिया। वहीं गोलू पटेल गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसे बुंदेलखंड मेडिकल कालेज उपचार के लिए लाया गया। यहां उसने भी उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। बरौदा गांव से आए राजेश कुर्मी ने बताया कि विनोद साहू जहां पुट्टी का काम करता है। वहीं गोलू मोबाइल सुधारने व बेलदारी का काम करता है। वे शुक्रवार को दिनभर काम करते रहे। शाम के बाद उन्हें रुपये की जरूरत थी, इसीलिए एटीएम से रुपये निकालने सागर आ रहे थे। तभी रास्ते में यह हादसा हो गया।
शहर में कार्रवाई, हाइवे पर हेलमेट पर नहीं दे रहे ध्यान
गौरतलब है कि पुलिस प्रशासन द्वारा शहर के अंदर तो बगैर हेलमेट के वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन हाइवे सहित अन्य मार्गों पर वाहन चलाने वालों पर ध्यान नहीं दिया जाता। कई लोग तो हाइवे से अपने साथ हेलमेट लाते हैं, लेकिन शहर आते ही कार्रवाई से बचने के लिए हेलमेट लगा लेते हैं। लोगों का कहना है कि पुलिस को शहर के साथ-साथ हाइवे व अन्य मार्गों पर वाहन चलाने वालों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। जहां बाइक चालक तेज गति में वाहन चलाते हैं और हादसों की आशंका रहती है।
मध्यप्रदेश में 15 आईएएस अधिकारियों के तबादले
भोपाल । एक बड़ी प्रशासनिक सर्जरी के तहत मध्यप्रदेश शासन ने 15 आईएएस के तबादले कर दिए हैं। वहीं दो अधिकारियों की सेवाएं उनके मूल विभाग को लौटा दी गई हैं।
जिन आईएस के तबादले किए गए हैं उनमें सिवनी के लखनादौन के अनुविभागीय अधिकारी सिद्धार्थ जैन को टीकमगढ़ में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पद पर भेजा गया है। बड़वानी की अनुविभागीय अधिकारी तपस्या परिहार छतरपुर जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाई गई हैं। पेटलावद के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व शिशिर गेमावत को कटनी जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। पुष्पराजगढ़ के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अभिषेक चौधरी को अलीराजपुर जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। कसरावद के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व संघप्रिय को पन्ना जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। राजगढ़ के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अमन वैष्णव को झाबुआ जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। गुना के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अक्षय कुमार तेम्रवाल को राजगढ़ जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। अशोकनगर की अनुविभागीय अधिकारी राजस्व नेहा जैन को अशोकनगर जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। नेपानगर की अनुविभागीय अधिकारी ज्योति शर्मा को खरगोन जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है।
इसके अलावा टीकमगढ़ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुदेश कुमार मालवीय, अशोकनगर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी भगवान सिंह जाटव की सेवाएं उनके मूल विभाग पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को तत्काल प्रभाव से लौटा दी गई हैं।
वहीं कुछ अन्य आईएएस अधिकारियों के तबादले भी किए गए हैं। इनमें छतरपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अमर बहादुर सिंह को जबलपुर संभाग का अपर आयुक्त राजस्व नियुक्त किया गया है। अलीराजपुर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी संस्कृति जैन को सतना जिले का अपर कलेक्टर नियुक्त किया गया है। पन्ना जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बालागुरु के. को जल निगम भोपाल में मुख्य महाप्रबंधक बनाया गया है। झाबुआ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन को नगर पालिक निगम इंदौर में अपर आयुक्त बनाया गया है। राजगढ़ जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रीति यादव को मध्य प्रदेश शासन में उप सचिव बनाया गया है। खरगोन जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिव्यांग किस सिंह को इंदौर में वाणिज्य कर आयुक्त बनाया गया है।
क्या आप जानते हैं एक मिट्टी का घड़ा बना सकता है आपका Bank Balance
आजकल के बदलते दौर में हर कोई मार्डन तौर-तरीकों को अपनाकर भीड़ से अलग दिखना चाहता है। हालांकि इनका चलन केवल गांव के लोगों तक ही सीमित रह गया है।
इन सब के बावजूद भी पुरातन वस्तुओं का मूल्य कभी कम नहीं होगा। इसलिए हम आज की वीडियो में आपको एक ऐसी ही वस्तु के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसके उपयोग से न सिर्फ शारीरिक समस्याएं दूर होंगी। बल्कि वास्तु शास्त्र में भी इसे घर पर रखना बहुत शुभ माना जाता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं मिट्टी के बने घड़े की। इसमें पीए गए पानी से शरीर निरोगी और स्वस्थ रहता है और वास्तु शास्त्र के मुताबिक इसे घर में रखने से कभी धन की कमी नहीं आती है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में एक मिट्टी का घड़ा ज़रूर रखना चाहिए। ध्यान रखें कि वो घड़ा खाली नहीं होना चाहिए। हमेशा उस घड़े को पानी से ऊपर तक भरकर ही रखें। इससे आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होगा।
माना जाता है कि पानी के मटके को उत्तर दिशा मे ही रखें। वास्तु के हिसाब से इस दिशा में रखे पानी के घड़े से लाभदायक स्थितियां बनती है और वैसे भी उत्तर दिशा जल देव को समर्पित होती है।
वास्तु के अनुसार, अगर परिवार में से कोई व्यक्ति मानसिक रूप से ठीक नहीं है तो उस व्यक्ति को मिट्टी के घड़े से पौधों को पानी डालना चाहिए। ऐसा करके उस व्यक्ति का तनाव धीरे-धीरे कम होने लगेगा और मन को शांति मिलेगी
यही नहीं बेहतरिन रिजल्ट्स के लिए आप मिट्टी से बनी भगवान की मूर्ति को घर पर रखें। इससे आपके घर में खुशहाली आएगी और घर में धन संबंधी परेशानियां से छुटकारा होगा। यही नहीं पैसों में स्थिरता भी आएगी।
इसके अलावा घर में आए दिन पैसों की बर्बादी होती रहती है।तो आप एक बार वास्तु का नियम जरूर अपनाएं। आपको बता दें कि नियमित रूप से मिट्टी के घड़े के समक्ष दीपक जलाएं। ऐसा करने से आपके घर में आर्थिक संकट दूर हो जाएंगे।
हो सके तो आप अपने घर में मिट्टी की छोटी-छोटी सजावटी मटकियां रखें। इससे रिश्तों में मधुरता आएगी और घर में खुशहाली का माहौल बनेगा।
इसके वैज्ञानिक फायदे-
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक मिट्टी के घड़े में पानी से मेटाबॉलिज्म की प्रकिया को दुरुस्त बनाए रखने में मददगार साबित होता है। जिससे व्यक्ति हमेशा स्वस्थ और निरोगी रहता है। बताते चलें तो मिट्टी के घड़े में स्टोर किए हुए पानी पीने से पेट संबंधी समस्याएं दूर होती है। जैसी की एसिडिटी, पेट में दर्द होना आदि।
जानकारी के लिए बता दें तो एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, इस बात का दावा किया जाता है कि अगर आप सन स्ट्रोक से बचना चाहते हैं तो मिट्टी के बर्तन में पाएं क्योंकि मिट्टी के घड़े में पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है ।जिसके चलते ये शरीर को लंबे समय तक ठंडा रखने मे लाभप्रद साबित होता है और आप सन स्ट्रोक की चपेट में आने से बच सकते हैं।
धनतेरस पर घर ले आयें ये यंत्र, बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, नहीं होगी धन की कमी
देवी लक्ष्मी धन की देवी हैं तो जाहिर है इन्हें धन के बजाय अपनी श्रद्धा अर्पित करके ही खुश कर सकते हैं.
धनतेरस के दिन लोग सोना, चांदी, बर्तन और न जाने क्या-क्या खरीदते हैं. लेकिन इस दिन श्रयंत्र की खरीदारी करना बेहद शुभ होता है.
दिवाली के दिन श्रीयंत्र की पूरे भक्ति भाव के साथ स्थापना करें. यह यंत्र देवी लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है. इसकी पूजा से मन शांत और एकाग्रचत होता है. सकारात्मक उर्जा का संचार होता है जिससे जीवन में सकारात्मकता आती है.
इसे विज्ञान में भी शक्तिशाली यंत्र माना गया है. दीपावली के दिन देवी लक्ष्मी के साथ इस यंत्र की भी स्थापना कर पूजा करें. ऐसा करना अत्यंत शुभ माना जाता है. श्रीयंत्र खरीदते समय इस बात का भी ध्यान रखें कि बाजार में कई नकली श्रीयंत्र भी हैं ऐसे में असली श्रीयंत्र की पहचान होना बहुत जरूरी है.
श्रीयंत्र के असली होने की पहचान यह है कि इसमें 9 बड़े त्रिभुज और 43 लघु त्रिभुज होते हैं. श्रीयंत्र की स्थापना दिवाली के दिन करना शुभ होता है. वैसे इसकी स्थापना का सबसे शुभ समय गुरु या रवि पुष्य योग है.
श्री यंत्र की स्थापना कर पूजा कर रहे हैं तो सबसे पहले अपने मन का लोभ त्याग दें. क्योंकि किसी भी तरह का मन में लोभ या लालच रहने पर आपकी पूजा व्यर्थ जायेगी. मन का स्वच्छ होना बहुत जरूरी है.
दिवाली के दिन श्री यंत्र की स्थापना लक्ष्मी पूजा के समय ही करें. श्रीयंत्र की स्थापना के दिन सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. सच्चे मन और पूरी श्रद्धा के साथ स्थापना करें. श्री यंत्र की स्थापना महालक्ष्मी के साथ कभी नहीं करनी चाहिए.
श्री यंत्र को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां से उसके सभी त्रिभुज स्पष्ट रूप से नजर आयें. श्रीयंत्र को एक लाल कपड़े पर रखें. पंचामृत अर्पित करने के बाद गंगाजल से साफ करें और तिलक एवं अक्षत लगाकर श्रीयंत्र पूजा शुरू करें.
shri yantra iअब श्रीयंत्र को सिद्ध करने के लिए ओम श्री मंत्र का जाप 108 मनकों की माला 1 बार या 21 बार जाप करें. दिवाली के दिन इसकी स्थापना करने के बाद हर दिन इस मंत्र का जाप करें.
श्रीयंत्र की पूजा विधि में श्रीयंत्र को अच्छी तरह से देखना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. यानी पूजा के समय आपको श्रीयंत्र के सभी त्रिभुजों को अच्छी तरह से आंखों से देखना चाहिए. इस दौरान श्रीयंत्र से निकलने वाली ऊर्जा मन को पवित्र करती है और व्यक्ति को अंदर से शांति और सुख की अनुभूति होती है.
घर में श्री यंत्र हमेशा इतनी ऊंचाई पर रखें कि उसका लेवल आपकी आंखों के बराबर हो और आप उसे अच्छी तरह से देखे पायें. श्रीयंत्र को घर के उत्तर-पूर्व दिशा में ही रखा जाना चाहिए.
आप नहीं जानते होंगे शिरडी के साईं बाबा के पैरों का ये चौकाने वाला रहस्य
साईंबाबा को भारतीय गुरु, संत एवं फ़क़ीर माना जाता है। कहा जाता है उन्होंने जीवन में कई चमत्कार किये हैं। जी हाँ और अगर आप हर साल शिरडी के साईंबाबा के दर्शन के लिए जाते हैं, तो आपको इस मंदिर से जुड़ी कुछ बातों को जरूर जानना चाहिए।
आज हम आपको उन्ही के बारे में बताने जा रहे हैं।
जी दरअसल शिरडी देश में देखे जाने वाले सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है और हर साल लाखों लोग शिर्डी के साई बाबा के दर्शन करने पहुंचते हैं। जी दरअसल साईंनाथ पर लोगों की आस्था इस कदर है, कि उनके दर्शन के लिए लोग 7-8 घंटे भी लाइन में खड़े रहकर इंतजार करते हैं। जी दरअसल मुंबई से लगभग 300 किमी दूर स्थित शिरडी का साईं बाबा का घर माना जाता है। आप सभी को यह भी बता दें कि साईंबाबा एक संत थे, जिन्होंने जीवनभर जरूरतमंदों की सेवा की।
आज हम आपको बताएंगे साईंबाबा के चरणों के पीछे का रहस्य- जी दरअसल जब कुछ लोगों ने साईं बाबा की शक्ति के बारे में सुना, तो वो उनकी एक तस्वीर खींचना चाहते थे। हालांकि, साईं बाबा ने कोई भी तस्वीर लेने से मना कर दिया। वहीं बाद में वह अपने पैरों की फोटो वाने के लिए तैयार हो गए। जी हाँ और भक्तों में से एक ने फायदा उठाया और उनकी पूरी लंबाई वाली तस्वीर क्लिक की। हालाँकि बाद में जब उन्होंने वह तस्वीर देखी, तो उसमें केवल साईं बाबा के पैर दिख रहे थे।
मीठे पत्तों वाला नीम का पेड़ – कहा जाता है जब साईं बाबा शिरडी आते थे, तो वह अपना ज्यादातर समय एक नीम के पेड़ के नीचे बिताते थे। जिसको अब गुरूस्थान के नाम से जाना जाता है। एक किवदंती के अनुसार, जब कुछ ग्रामीणों ने पेड़ के पास की जमीन खोदना शुरू की , तो साईं बाबा ने उन्हें रूकने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि यह पूर्वजों का विश्राम स्थल है। अगर आप कभी शिरडी की यात्रा करते हैं और आपको पेड़ से गिरे नीम के पत्ते चखने का मौका मिले , तो आप इसका स्वाद चखकर हैरान रह जाएंगे। सबसे हैरानी की और दिलचस्प बात यह है कि यहां नीम की पत्तियों का स्वाद कड़वा नहीं बल्कि मीठा होता है। जी हाँ और ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों को नीम की पत्ती चखने का मौका मिलता है , वे स्वस्थ रहते हैं और उन्हें कोई बीमारी नहीं होती।
मुक्त शहर है शिरडी – शिरडी में शराब पीने के नियम अलग हैं। जी दरअसल शहर में न तो शराब बिकती है और न ही सर्व की जाती है और यह शहर पूरी तरह से शराब मुक्त है।
साईंबाबा मंदिर का निर्माण – कहा जाता है शिरडी में साईं बाबा मंदिर का निर्माण 1922 में किया गया था। साईं बाबा के निधन के चार साल बाद यह मंदिर बनाया गया था। इस मंदिर का नीजि स्वामित्व श्रीमंत गोपालराव के पास था, जो नागपुर के एक करोड़पति थे।
शनिवार को बरतें ये सावधानी, शनि महाराज करेंगे हर कष्ट से मुक्त
शास्त्रनुसार शनि ऐसे देवता हैं, जो अच्छे कामों व मेहनत के बल पर खुशहाल बनने की प्रेरणा देते हैं।
जगत न्यायाधीश होने के कारण वह अनुशासन, संयम, पवित्रता और संकल्प के साथ मकसद को पूरा करने का सबक भी देते हैं। कुंडली में शनि की शुभ या अशुभ स्थिति से शेष 8 ग्रहों के फल बदल जाते हैं। अक्सर लोग शनि को क्रूर ग्रह कहते हैं लेकिन यह बात सच नहीं है। शनि न्यायप्रिय हैं। वे गलत कार्य करने वालों को दंडित करते हैं और अच्छे कार्य करने वालों को पुरस्कृत। हां, उन्हें इतनी शक्ति प्राप्त है कि मानव तो क्या, देवता भी उनसे डरें। शनि को स्वर्ण मुकुट धारण किए दर्शाया जाता है। वे नीले वस्त्र धारण करते हैं। इनकी चार भुजाओं में क्रमश: धनुष, बाण, त्रिशूल व वरमुद्रा है। उनका वाहन कौआ है।
ज्योतिषशास्त्र के खगोल खंड के अनुसार शनि नवग्रहों में से एक हैं व इनके चारों तरफ एक रिंग नुमा आकृति है। शनि धीमे चलते हैं अतः इन्हें शनैश्चर भी कहा जाता है। ज्योतिष में शनि के प्रभाव का साफ संकेत मिलता है। शनि ग्रह वायु तत्व व पश्चिम दिशा के स्वामी हैं। शास्त्रनुसार शनिवार पर उनकी पूजा-आराधना व अनुष्ठान करने से शनि विशिष्ट फल प्रदान करते हैं।
क्या करें शनिवार
शरीर पर सरसों के तेल से मालिश करें।
तिल मिले पानी से स्नान करें।
काले कपड़े पहनें।
पीपल की पूजा कर सात परिक्रमा करें।
कोहड़ियों व विकलांगो की सेवा करें।
काली गाय, कौए, काले कुत्ते व चींटी को तेल में बने पकवान डालें।
यहां आधी रात में किया गया स्नान देता है संतान प्राप्ति का वरदान
पुत्र रत्न प्राप्ति की कामना के साथ उत्तर प्रदेश में कान्हा की नगरी मथुरा के राधाकुंड में अहोई अष्टमी की पूर्व संध्या पर कृष्ण भक्तों का जमावड़ा लगने लगता है।
गोवर्धन तहसील के छोटे से कस्बे के बारे में मान्यता है कि मध्य रात्रि की बेला पर राधाकुंड में पति-पत्नी के साथ-साथ स्नान करने पर पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। इस बार अहोई अष्टमी का यह स्नान 17 अक्टूबर को होगा। राधाकुंड गोवर्धन होकर या छटीकरा होकर पहुंचा जा सकता है। गोवर्धन जाने के लिए मथुरा से उत्तर प्रदेश रोडवेज की बस से नए बस स्टैंड से जाया जा सकता है और वहां से राधाकुंड बस या आटो से पहुंचा जा सकता है क्योंकि गोवर्धन बस स्टैंड से राधाकुंड की दूरी मात्र साढ़े चार किलोमीटर ही है।
द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण अरिष्टासुर का वध करने के बाद जब राधारानी से उनके निज महल में मिलने गए तो राधारानी ने उनसे मिलने को मना कर दिया और निज महल का दरवाजा नहीं खोला बल्कि यह कहा कि चूंकि उन्होंने गोवंश की हत्या की है इसलिए वे हत्या के दोषी हैं और इसके लिए वे कम से कम सात तीर्थों में जाकर वहां स्नान करें और तब यहां आएं तो उन्हें निज महल में प्रवेश मिलेगा। उस समय उनका निज महल वहां था जहां पर आज राधाकुंड कस्बे में श्याम कुंड और कंगनकुंड का संगम है।
इसके बाद श्रीकृष्ण ने अपनी वंशी से गड्ढा खोदकर सात तीर्थों की जगह सभी तीर्थों का आह्वान किया और सभी तीर्थों का जल आने के बाद उन्होंने उस कुंड में स्नान किया। बाद में इसका नाम कृष्ण कुंड या श्याम कुंड पड़ गया। जिस समय श्रीकृष्ण तीर्थों का आह्वान कर रहे थे, उस समय राधारानी अन्य गोपिकाओं के साथ इसे देख रही थीं। इसके बाद वे गोपियों से बातचीत करने लगीं लेकिन इसी बीच श्रीकृष्ण स्नान करके निज महल में पहुंच गए और उसे अंदर से बंद कर दिया।
इसके बाद जब राधारानी ने निज महल में प्रवेश करना चाहा तो श्यामसुन्दर ने दरवाजा नहीं खोला। राधारानी के बहुत अनुरोध के बाद उन्होंने कहा कि चूंकि वे उनकी अर्धांगिनी हैं इसलिए अरिष्टासुर की हत्या का आधा पाप उन्हें भी लगा है इसलिए वे शुद्ध जल से स्नान करके आएं तभी उन्हें निज महल में प्रवेश मिलेगा। इसके बाद राधारानी ने अपने कंगन से खोदकर कुंड को प्रकट किया और उसमें स्नान करने के बाद वे निज महल में पहुंची तो श्यामसुन्दर ने दरवाजा खोल दिया। चूंकि राधारानी ने इस कुंड को अपने कंगन से प्रकट किया था इसलिए इसका नाम कंगन कुंड हो गया। श्यामसुन्दर ने इस कुंड को और महत्वपूर्ण बनाने के लिए बाद में श्यामकुंड से कंगन कुंड को जोड़ दिया। जिससे सभी तीर्थों का जल कंगन कुंड में मिल गया और दोनो ही कुंड तीर्थमय हो गए।
जिस दिन श्यामसुन्दर और राधारानी ने यह लीला की थी उस दिन अहोई अष्टमी थी इसलिए उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ कंगन कुंड में आज के दिन स्नान करेगा उसे अच्छी संतान की प्राप्ति होगी तथा जो व्यक्ति इस दिन के बाद अन्य दिनों में दोनों कुडों में से किसी कुंड में स्नान करेगा उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी।
यह स्थल बड़ा ही पावन एवं मनोकामना पूर्ण करने वाला है। इसी कारण देश के कोने-कोने से लोग सन्तान प्राप्ति की आशा में अहोई अष्टमी को अपनी पत्नी के साथ राधा कुंड पहुंचते हैं और दोनो ही साथ-साथ कंगन कुंड में आधी रात यानी रात के 12 बजे स्नान करते हैं और बाद में सन्तान के रूप में उन्हें ठाकुर जी का आशीर्वाद मिलता है। पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए पेठे का दान (पेठा बनाने वाले कुहड़े का दान) किया जाता है। यह स्नान संतान प्राप्ति से जुड़ जाने के कारण इस दिन दोपहर से ही राधाकुंड में मेला लग जाता है, जो अगले दिन तक जारी रहता है। संतान प्राप्ति की आशा में लोग दूर प्रांतों से आते हैं। वातावरण धार्मिकता से भर जाता है तथा चारों ओर स्वर गूंजते हैं- राधे तेरे चरणों की अगर धूल भी मिल जाए। सच कहते हैं बस इतना तकदीर बदल जाए।















