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शक्ति की आराधना के लिए सजे मां के दरबार

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59 साल बाद नवरात्रि प्रारंभ पर चतुग्रही योग

भोपाल । सिंह वाहिनी मां दुर्गा इस बार शेर पर सवार न होकर हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। नवरात्रि का पर्व 26 सितंबर से शुरू होकर 4 अक्टूबर तक चलेगा। इन दिनों में मैया की भक्ति में शहर डूबा रहेगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. सतीश सोनी के अनुसार नवरात्रि 26 सितंबर से शुरू हो रही हैं। इस बार वाराणसी पंचांग और मिथिला पंचांग के अनुसार माता का आगमन हाथी पर होगा। जिसे शुभ माना जा रहा है। शारदीय नवरात्रि शुक्ल योग और ब्रह्म योग में शुरू होगी। वही कन्या राशि में बुध, सूर्य, शुक्र, चंद्रमा मिलकर चतुर ग्रही योग का निर्माण करेंगे। शुक्र ग्रह कन्या में नीच के होते हैं। किंतु बुध के साथ होने से नीच राज भंग योग बनाएंगे जिससे लक्ष्मी मां प्रसन्न होंगी। 26 सितंबर को सुबह 8:06 से ब्रह्म योग लगेगा। जो 27 सितंबर को समाप्त होगा। वही शुक्ल योग 25 सितंबर सुबह 9:06 से अगले दिन 8:00 बजे तक रहेगा। शारदीय नवरात्रि में यह दोनों योग के होने से माता के भक्तों के जीवन में सुख समृद्धि बढ़ेगी। संतान शिक्षा के साथ स्त्रियों के लिए धन प्राप्ति के अवसर नवरात्रि पर बनेंगे। तथा सर्वत खुशहाली और सुख संपदा फैलेगी।
ऐसे करें घटस्थापना
पवित्र स्थान की मिट्टी लेकर बेदी बनाएं वहां गेहूं वोये अपनी सामथ्र्य के हिसाब से बनाए गए। सोना, तांबा, मिट्टी के कलश को विधिपूर्वक स्थापित करें। कलश के ऊपर सोना, चांदी, तांबा, पत्थर या मिट्टी की प्रतिमा रख दें, मूर्ति नहीं रख पाने की दशा में कलश पर स्वास्तिक और उनके दोनों और माता के चित्र रखकर पूजा अर्चना करें, कलश में जल, गंगाजल ,रोली, हल्दी सिक्का, सुपारी डालें। कलश के मुंह से 5 बार मौली बाधै। कलश के ऊपर आम के पत्तों में नारियल रखें। इसे भी मौली से बाधे। तुलसी का उपयोग नहीं करें।
घट स्थापना शुभ मुहूर्त
कन्या लग्न की शुभ चौघडिय़ा अमृत में सुबह 6:08 से 7:38 तक
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:44 से 12:32 तक सर्वश्रेष्ठ
विजय मुहूर्त दोपहर 2:18 से 3:07 तक
गोधूलि बेला शाम 6:07 से 6:31 तक

पूरे देश में लागू होगा इंदौर का सिटी ट्रांसपोर्ट मॉडल

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इंदौर । पब्लिक ट्रांसपोर्ट मॉडल इंदौर के लिए केंद्र सरकार ने 20 हजार करोड़ रुपये की योजना बनाई है, जिसका ड्राफ्ट फाइनल हो चुका है। पीएमओ की मंजूरी के बाद जल्द कैबिनेट में रखा जाएगा। योजना के तहत 108 शहरों को 100-100 बसों के लिए फंड दिया जाएगा। इसके पहले सरकार बसें खरीदने के लिए राशि देती थी, जबकि इस बार इंदौर के मॉडल को आदर्श मानते हुए ऑपरेशन कॉस्ट में होने वाले घाटे की राशि का वहन सरकार करेगी। शहर के लिए गर्व की बात है कि भारत सरकार के सचिव मनोज जोशी और अपर सचिव डॉ. सुरेंद्र बागड़े ने इंदौर के पब्लिक ट्रांसपोर्ट मॉडल की स्टडी की। साथ ही विस्तृत रूप से मॉडल को समझा। साल 2006 में इंदौर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था संभालने के लिए अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस (एआईसीटीएसएल) का गठन किया गया था। कंपनी की ओर से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) पर बसें चलाई जा रही हैं। सिस्टम पर लोगों के भरोसे का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि साल 2012 में जहां 40 हजार लोग यात्रा करते थे, आज यह संख्या ढाई लाख को पार कर चुकी है। 400 सीएनजी बसों के लिए तैयार किए मॉडल में एआईसीटीएसएल प्रति बस प्रति किमी 90 पैसे की आमदनी कर रहा है। भारत सरकार के अपर सचिव डॉ. सुरेंद्र बागड़े का कहना है, 108 शहरों को नई बसें देने की स्कीम का ड्राफ्ट तैयार हो रहा है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू करेंगे।
एआईसीटीएसएल ने बस संचालन और रेवेन्यू कलेक्शन के लिए दो अलग-अलग एजेंसी नियुक्त कर रखी हैं। बस ऑपरेटर के रेट फिक्स कर दिए गए कि उन्हें प्रति किमी बस चलाने के लिए प्रति किमी 31.50 रुपये देंगे। टिकट कलेक्शन के लिए एजेंसी से 32.40 रुपये प्रति किमी लिए जा रहे हैं। इससे एआईसीटीएसएल को सात साल में 16.32 करोड़ का मुनाफा होगा।
अहमदाबाद में 950 बसें चल रही हैं, जिनमें 5.50 लाख लोग प्रतिदिन यात्रा कर रहे हैं। इसमें सालाना 340 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है। जयपुर में 300 बसें संचालित कर रहे हैं। प्रतिदिन 2.20 लाख यात्री सफर करते हैं। यहां कंपनी को 90 करोड़ रुपये सालाना घाटा हो रहा है। भोपाल में 317 बसें हैं। यहां इसमें बसों से होने वाले घाटे का भार ऑपरेटर पर ही है। निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने बताया, यह सही है कि भारत सरकार के सचिव और अपर सचिव ने इंदौर के पब्लिक ट्रांसपोर्ट मॉडल की स्टडी की है। हमें बस संचालन में मुनाफा ही हो रहा है। एआईसीटीएसएल के संचालन में निगम का कोई खर्च नहीं आता। यात्रियों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए इस बार के बजट में 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाएगा।

भारत ने मैच के साथ श्रृंखला जीती, कोहली और सूर्यकुमार यादव के अर्धशतक

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हैदराबाद । विराट कोहली और सूर्यकुमार यादव के शानदार अर्धशतक की बदौलत भारत ने ऑस्ट्रेलिया के साथ 20 -20 क्रिकेट श्रृंखला के तीसरे मैच में जीत हासिल करते हुए श्रृंखला अपने नाम कर ली। पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट खोकर 186 रन बनाए। जवाब में भारत ने 19.5 ओवर में 187 रन बनाकर मैच जीत लिया। भारत की जीत के शिल्पकार रहे विराट कोहली और सूर्यकुमार यादव। लोकेश राहुल और रोहित शर्मा के सस्ते में आउट होने के बाद कोहली और यादव ने तीसरे विकेट के लिए 104 रन की साझेदारी कर भारत को मजबूती प्रदान की। सूर्यकुमार यादव ने 36 गेंदों में पांच चौके और पांच छक्के की सहायता से 69 रन की पारी खेली। यादव को जोश हेजलवुड की गेंद पर एरोन फिंच ने कैच किया। विराट कोहली 48 गेंदों में तीन चौके और 4 छक्के की सहायता से 65 रन बनाकर डेनियल सैम्स की गेंद पर एरोन फिंच द्वारा लपक लिए गए। हार्दिक पंड्या ने 14 गेंदों में एक चौके और एक छक्के की सहायता से नाबाद 21 रन का योगदान दिया। ऑस्ट्रेलिया के लिए डेनियल डेनियल सैम्स ने 2, जोश हेजलवुड और पैटकमिंस ने एक-एक विकेट लिए।
इससे पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट खोकर 186 रन बनाए। ऑस्ट्रेलिया के ओपनर कैमरन ग्रीन ने विस्फोटक बल्लेबाजी की। दूसरे छोर से विकेट गिरते रहे लेकिन ग्रीन ने 21 गेंदों में 7 चौके और तीन छक्के की सहायता से 52 रन बना डाले। ग्रीन के रहते एरोन फिंच 7 रन बना कर अक्षर पटेल की गेंद पर हार्दिक पंड्या द्वारा लपक लिए गए। ग्रीन का विकेट भुवनेश्वर कुमार ने उन्हें हार्दिक पंड्या के हाथों कैच कराकर लिया। स्टीव स्मिथ को 9 रन के स्कोर पर युजवेंद्र चहल की गेंद पर दिनेश कार्तिक ने स्टंप कर दिया। ग्लेन मैक्सवेल को अक्षर पटेल ने रन आउट कर दिया। टिम डेविड ने 27 गेंदों में 2 चौके और 4 छक्के की सहायता से 54 रन बनाए। डेविड को हर्षल पटेल ने रोहित शर्मा के हाथों कैच करा दिया। निचले क्रम में डेनियल सेम्स 20 गेंदों में 28 रन बनाकर नाबाद रहे। भारत की तरफ से जसप्रीत बुमराह ने तीन विकेट लिए। भुवनेश्वर कुमार, यूज़वेंद्र चहल और हर्षल पटेल को एक-एक विकेट मिले।

नवरात्रि में इन भजनों से करें माता रानी को प्रसन्न, पूरी हो जाएगी हर मनोकामना

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शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। इस साल 26 सितंबर से शुरू हुआ नवरात्रि के ये पावन पर्व 04 अक्टूबर को यानी नवमी तिथि के दिन समाप्त होगा। इन नौ दिनों में देवी मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाएगी। नवरात्रि के नौ दिनों में लोग व्रत रखते हैं और मां अंबे की विधि-विधान से पूजा करते हैं। इन नौ दिनों में हर कोई भक्तिमय दिखाई देता है। नवरात्रि के भक्तिमय माहौल में माता रानी के गीत और भजन इधर-उधर सुनाई पड़ते हैं। ऐसे में यदि आप भी माता रानी को प्रसन्न करने के लिए उनके भजन और गीत सुनना या गाना चाहते हैं, तो यहां हम कुछ भजनों के लिरिक्स लेकर आए हैं। ये भजन ऐसे हैं जिनको सुनते ही हर किसी का मन भक्ति के भीने-भीने भावों में भीग जाएगा। इन गीतों में मां की महिमा का बेहद भावुक वर्णन किया गया है। इन गीतों को गाकर या सुनकर आप मां दुर्गा की विशेष कृपा पा सकते हैं।

1- हे नाम रे, सबसे बड़ा तेरा नाम लिरिक्स…

काल के पंजे से माता बचाओ, जय माँ अष्ट भवानी।
काल के पंजे से माता बचाओ, जय माँ अष्ट भवानी।।
हे नाम रे, सबसे बड़ा तेरा नाम,
ओ शेरोंवाली, ऊँचे डेरों वाली,

बिगड़े बना दे मेरे काम।

ऐसा कठिन पल, ऐसी घड़ी है,
विपदा आन पड़ी है।
तू ही दिखा अब रास्ता,
ये दुनिया रास्ता रोके खड़ी है।
मेरा जीवन बना इक संग्राम।।

भक्तों को दुष्टों से छुड़ाए,
भुजती जोत जगाई।
जिसका नहीं है कोई जगत में,
तू उसकी बन जाए।
तीनो लोक करे तोहे प्रणाम।।

हे, क्या भेट चढ़ाऊं तुझपे,
तू प्रसन्न हो जाए।
दुश्मन थर थर काँपे माँ,
जब तू गुस्से में आये।।

2- चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है लिरिक्स…

चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।

चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।
ऊँचे पर्वत पर रानी माँ ने दरबार लगाया है।

चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।

सारे जग मे एक ठिकाना, सारे गम के मारो का,
रास्ता देख रही है माता, अपने आंख के तारों का।
मस्त हवाओं का एक झोखा यह संदेशा लाया है।

चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।
जय माता दी॥ जय माता दी॥

जय माता की कहते जाओ, आने जाने वालो को,
चलते जाओ तुम मत देखो अपने पीछे वालों को।
जिस ने जितना दर्द सहा है, उतना चैन भी पाया है।

चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।
जय माता दी॥ जय माता दी॥

वैष्णो देवी के मन्दिर मे, लोग मुरादे पाते हैं,
रोते रोते आते है, हस्ते हस्ते जाते हैं।
मैं भी मांग के देखूं, जिस ने जो माँगा वो पाया है।

चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।
जय माता दी॥ जय माता दी॥

मैं तो भी एक माँ हूँ माता, माँ ही माँ को पहचाने।
बेटे का दुःख क्या होता है, और कोई यह क्या जाने।
उस का खून मे देखूं कैसे, जिसको दूध पिलाया है।

चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।

चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।

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3- दुर्गा है मेरी मां…

जयकारा. शेरोवाली का
बोलो सांचे दरबार की जय

दुर्गा है मेरी माँ, अम्बे है मेरी माँ
दुर्गा है मेरी माँ, अम्बे है मेरी माँ

बोलो जय माता दी, जय हो
बोलो जय माता दी, जय हो
जो भी दर पे आए, जय हो
वो खाली न जाए, जय हो
सबके काम है करती, जय हो
सबके दुख ये हरती, जय हो

मैया शेरोवाली, जय हो
भरदो झोली खाली, जय हो
मैया शेरोवाली, जय हो
भरदो झोली खाली, जय हो

दुर्गा है मेरी माँ, अम्बे है मेरी माँ
दुर्गा है मेरी माँ, अम्बे है मेरी माँ
मेरी माँ… शेरोवालिये

पूरे करे अरमान जो सारे,
पूरे करे अरमान जो सारे,
देती है वरदान जो सारे
देती है वरदान जो सारे
दुर्गे ज्योतावालिये
देती है वरदान जो सारे
दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ

सारे जग को खेल खिलाये
सारे जग को खेल खिलाये
बिछड़ो को जो खूब मिलाये
बिछड़ो को जो खूब मिलाये
दुर्गे…शेरोवालिये
बिछड़ो को जो खूब मिलाये
दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ

दुर्गा है मेरी माँ, अम्बे है मेरी माँ
दुर्गा है मेरी माँ, अम्बे है मेरी माँ
शेरोवालिये…ज्योतावालिये…
शेरोवालिये…

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3- तूने मुझे बुलाया शेरा वालिये लिरिक्स…

साँची ज्योतो वाली माता, तेरी जय जय कार।

तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये, मैं आया मैं आया शेरा वालिये।
तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये, मैं आया मैं आया शेरा वालिये।
ज्योता वालिये, पहाड़ा वालिये, मेहरा वालिये॥

तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये, मैं आया मैं आया शेरा वालिये।
तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये, मैं आया मैं आया शेरा वालिये।

सारा जग है इक बंजारा, सारा जग है इक बंजारा,
सब की मंजिल तेरा द्वारा।
ऊँचे परबत लम्बा रास्ता, ऊँचे परबत लम्बा रास्ता,
पर मैं रह ना पाया, शेरा वालिये॥
॥ तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये॥

सूने मन में जल गयी बाती,
तेरे पथ में मिल गए साथी।
मुंह खोलूं क्या तुझ से मांगू, मुंह खोलूं क्या तुझ से मांगू,
बिन मांगे सब पाया, शेरा वालिये॥
॥ तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये॥

कौन है राजा, कौन भिखारी,
एक बराबर तेरे सारे पुजारी।
तुने सब को दर्शन देके, तुने सब को दर्शन देके,
अपने गले लगाया, शेरा वालिये॥

तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये, मैं आया मैं आया शेरा वालिये।
तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये, मैं आया मैं आया शेरा वालिये।

प्रेम से बोलो, जय माता दी॥
सारे बोलो, जय माता दी॥
आते बोलो, जय माता दी॥
जाते बोलो, जय माता दी॥
कष्ट निवारे, जय माता दी॥
पार निकले, जय माता दी॥
देवी माँ भोली, जय माता दी॥
भर दे झोली, जय माता दी॥
वादे के दर्शन, जय माता दी॥
जय माता दी, जय माता दी॥
 

शक्ति की उपासना का मंगल पर्व शारदीय नवरात्र’’

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भारत की सांस्कृतिक चेतना के भव्य और विराट स्वरूप की अभिव्यक्ति हमारे पर्व और त्योहार हैं जो राष्ट्रीय हर्ष, उल्लास, उमंग और उत्साह के प्रतीक हैं। ये देश काल और परिस्थिति के अनुसार अपने रंग-रूप आकार में भिन्न भिन्न हो सकते हैं और उन्हें व्यक्त करने के तरीके भी भिन्न भिन्न हो सकते हैं किंतु उनका सरोकार अंततः मानवीय कल्याण, सुख और आनंद की उपलब्धि अथवा किसी आस्था, विश्वास, परम्परा या संस्कार का संरक्षण ही होता है। इस दृष्टि से भारतीय चिंतन अनेक संदर्भों, प्रसंगों, द्रष्टांतों और प्रेरक कथाओं से समृद्ध है जिनमें हमारी संस्कृति के सौम्य तत्वों की धरोहर विद्यमान है। यह धरोहर मानवीय मूल्यों की प्रेरक शक्ति है जो असत्य पर सत्य की और अधर्म पर धर्म की  विजय का प्रतीक होती है।
शक्ति की उपासना का पर्व शारदीय नवरात्र आत्म संयमी साधकों को आध्यात्मिक प्रेरणा देने की शक्ति का पर्व समूह है। ऋग्वेद के दसवें मंडल में एक पूरा सूक्त शक्ति की आराधना पर आधारित है, जिसमें शक्ति की भव्यता का दुर्लभ स्वरूप मुखरित हुआ है। " मैं ही ब्रह्म के दोषियों को मारने के लिए रुद्र का धनुष चलाती हूं। मैं ही सेनाओं को मैदान में लाकर खड़ा करती हूं। मैं ही आकाश और पृथ्वी में सर्वत्र व्याप्त हूं। मैं ही संपूर्ण जगत की अधिकारी हूं। मैं पारब्रह्म को अपने से अभिन्न रूप में जानने वाले पूजनीय देवताओं में प्रधान हूं। संपूर्ण भूतों में मेरा प्रवेश है।"
भारतीय परंपरा  में मनोयोग पूर्वक की गई शक्ति की साधना आध्यात्मिक कायाकल्प की वैज्ञानिक विधि का ही पर्याय है। इस साधना की समग्र सिद्धि इस बात पर निर्भर करती है कि साधक का मन निष्पाप हो, ह्रदय निष्कलंक हो और उसकी साधना मानवीय मूल्यों, आदर्शों के लिए समर्पित हो। वस्तुतः साधना का आधार आत्म संयम ही है। मन वचन और कर्म की पवित्रता से ओतप्रोत भक्ति भाव  शक्ति की उपासना को सार्थक और फलदायी बनाता  है।
सनातन हिन्दू धर्म में परमेश्वर की तीन महा शक्तियों यथा महाकाली, महालक्ष्मी तथा महासरस्वती की अर्चना और आराधना आदिकाल से ही चली आ रही है। किसी भी राष्ट्र की सर्वतोमुखी प्रगति के लिए केवल शास्त्र बल ही नहीं वरन शस्त्र और धन बल भी परम आवश्यक है। इसीलिए हम विद्या बुद्धि के लिए ज्ञान की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की समर्चना करते हैं तो शक्ति, साहस, शौर्य और पराक्रम के लिए आदि शक्ति मां दुर्गा की अर्चना  तो वहीं सुख संपत्ति और ऐश्वर्य के लिए महालक्ष्मी की आराधना करते हैं। मार्कंडेय पुराण का देवी महात्म्य खंड 'दुर्गा सप्तशती' के नाम से जाना जाता है। इसमें मां दुर्गा के तीन चरित्र वर्णित हैं। त्रिगुणात्मक शक्ति के प्रतीक रूप में सत्वगुणात्मिक शक्ति सरस्वती, रजोगुणात्मिका शक्ति के रूप में महालक्ष्मी तथा तमोगुणात्मिकता शक्ति के रूप में महाकाली। तीनों चरित्रों से संबंधित तीन महान शौर्य गाथाएं हैं। प्रथम चरित्र में मधु और कैटभ नामक राक्षसों के वध का विस्तृत वर्णन है। मध्यम चरित्र में कुख्यात संत्रासक  महिषासुर के विनाश की रोमांचकारी घटना है और अंतिम चरित्र में आततायी राक्षस शुंभ तथा निशुंभ के समग्र विनाश की रौद्र कथा  चित्रित है।
 नवरात्र की प्रतिपदा के पवित्र दिवस पर घट स्थापना कर  सात प्रकार की मिट्टियों से भरे हुए पात्र में शुद्ध जल के साथ जो बोई जाती है जो पल्लवित होकर पवित्र ज्वारे का रूप धारण करती है। पंच पल्लव और पंचरत्न मिलाकर स्थापित घट या कलश के समीप ही  मां दुर्गा की उज्जवल छवि वाली अप्रतिम सौंदर्य की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाती है और नवरात्र में नवदुर्गा के नौ स्वरूपों की यथा शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री के रूप में भक्ति भाव से अर्चना की जाती है।
      नवरात्रि में मां दुर्गा अर्थात दुखेन गम्यते प्राप्यते वा, की उपासना का विशिष्ट महत्व और अनूठा रहस्य है । हम यदि मां की अर्चना, आराधना, पूजा पाठ, मेवा मिष्ठान्न,  आभूषण, परिधान आदि समर्पण से ही तृप्त हो जाएं तो हम उपासना  के मूल मंतव्य और मर्म को सही अर्थों में समझ नहीं पाएंगे। वस्तुतः मां दुर्गा की विराट प्रतिमा संपूर्ण राष्ट्र का प्रतीक है।  राष्ट्र का समग्र शारीरिक बल, संपदा बल और ज्ञान बल अदम्य पराक्रमी  सिंह  के समान ही है। शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा  का यह मुखर स्वरूप राष्ट्र भारती के रूप में प्रकट होता है। यद्यपि राष्ट्र को शास्त्र,शस्त्र और धन तीनों अवश्य चाहिए किंतु बुद्धि और विवेक के बिना यह तीनों बल  निरर्थक ही नहीं वरन पूर्णत: विनाशक और संहारक भी होते हैं। इसीलिए इनके साथ बुद्धि विनायक महाकाय श्री गणेश भी रहते हैं जिनकी नीर क्षीर विवेक द्रष्टि के समक्ष विघ्न बाधाओं के, चुनौतियों के तूफान नत मस्तक हो जाते हैं। अपने भव्य स्वरूप में चहुंओर फैली हुई आदि शक्ति की दसों भुजाओं के अस्त्र-शस्त्र महान अपराजेय राष्ट्र की  अमित शक्ति की ओर संकेत करते है। संसार में ऐसा कोई भी व्यक्ति अथवा राष्ट्र  नहीं है जिसका कोई विरोधी अथवा गुप्त शत्रु न हो।अतः शक्ति की उपासना और कुछ नहीं वरन महिमामयी अखंड मां भारती की शक्ति की ही उपासना है।
 जिस प्रकार वेद अनादि हैं उसी प्रकार  दुर्गा सप्तशती भी अनादि है। इसमें वर्णित मधुकैटभ, महिषासुर और शुंभ, निशुंभ जैसी आसुरी शक्तियां महामोह, महामाया, महाअविद्या, अन्याय, आतंक, शोषण, अनाचार, विध्वंस और सर्वनाश की प्रतीक  हैं। यदि मानसिक विकारों, चिंताओं और संकटों से मुक्त सुखद, समृद्ध, यशस्वी, आनंदमय स्वस्थ जीवन चाहते हैं  तो हमें मां दुर्गा का आराधन निर्मल भक्ति भाव से सुनिश्चित करना चाहिए।
सुरथ रूपी कर्म और एकाग्रता रूपी समाधि के समक्ष जब-जब विघ्न बाधाओं की चुनौतियां आई हैं तब मां दुर्गा ही उनके विनाश का कारक सिद्ध हुई है । 
निसंदेह मन के धरातल पर मां दुर्गा की उपासना से हम महारोग,महासंकट,महादुख, महाशोक और महोत्पात से मुक्त हो जीवन को धन्य और मंगल बना सकते हैं। 
     भारत की सांस्कृतिक चेतना प्रारंभ से ही मातृशक्ति के प्रति श्रद्धा, सम्मान,अर्चन और वंदन के भाव से  समर्पित रही है। और इसीलिए हम सभी नवरात्रि में अपने अपने मनोरथ सिद्धि के लिए विद्या, लक्ष्मी और शक्ति की उपासना करते हैं। यह अद्भुत परंपरा संसार में अन्यत्र कहीं भी वर्तमान नहीं है। वहीं दूसरी ओर हम बड़े ही श्रद्धा और आस्था के भाव से नवमी के दिन कन्याओं को रोली का तिलक लगाकर, हाथ में मौली बांधकर और उपहार भेंट सहित उनका पूजन भी करते हैं। यह संस्कार भी संसार के किसी भी देश या समाज में नहीं है। किंतु हमारे देश में कन्या भ्रूण हत्या तथा महिलाओं के प्रति बढते जघन्य अपराध हमारी दूषित मानसिकता के विरोधाभास की पराकाष्ठा है। विख्यात बांग्ला लेखक शरतचंद्र ने कहा था " मानव की मौत देखकर इतना दुख नहीं होता जितना मानवता की मौत पर।"  निसंदेह मातृशक्ति के प्रति हमारी नकारात्मक सोच और कन्या भ्रूण हत्या मानवता की मौत से कम नहीं है।  आजादी के अमृत काल में शारदीय नवरात्र का सबसे बड़ा संकल्प यही है कि हम मातृशक्ति और बेटियों के प्रति सम्मान तथा पूजन के पवित्र  संस्कार को  सही अर्थों में कार्य रूप में परिणित कर आदि शक्ति की सच्ची उपासना करें क्योंकि मातृशक्ति और बेटियों की वास्तविक आजादी के बिना हमारी आजादी अधूरी है।
 

मां दुर्गा अपने पहले स्वरूप में ‘शैलपुत्री’ के नाम से जानी जाती है

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मां दुर्गा अपने पहले स्वरूप में ‘शैलपुत्री’ के नाम से जानी जाती है। पर्वतराज हिमालय के यहां पुत्री के रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका यह ‘शैलपुत्री’ नाम पड़ा था। वृषभ-स्थिता इन माताजी के दाहिने हाथ में त्रिशुल और बाये हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। यही नव दुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं।  
अपने पूर्वजन्म में ये प्रजापति कन्या के रूप में उत्पन्न थीं। तब इनका नाम ‘सती’ था। इनका विवाह भगवान शंकर के साथ हुआ था। एक बार प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया। इसमें इन्होंने सारे देवता को अपना-अपना यज्ञ-भाग प्राप्त करने के लिये आमंत्रित किया। किन्तु शंकरजी को उन्होंने इस निमत्रित नहीं किया। सती ने जब सुना कि हमारे पिता एक अत्यन्त विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहें हैं, तब वहां जाने के लिये उनका मन विकल हो उठा। अपनी यह इच्छा उन्होंने शंकर जी को बतायी। सारी बातों पर विचार करने के बाद उन्होंने कहा-‘प्रजापति दक्ष किसी कारणवश रूष्ट है। अपे यज्ञ में उन्होंने सारे देवताओं को निमत्रित कया है। उनके यज्ञ-भाग भी उन्हें समर्पित किये हैं। किन्तु हमें जान-बूझकर नहीं बुलाया है। कोई सूचनातक नहीं भेजी है। ऐसी स्थिति में तुम्हारा वहां जाना किसी भी प्रकार भी श्रेयस्कर नहीं होगा।’ शंकरजी के इस उपदेश से सती का प्रबोध नहीं हुआ। पिता का यज्ञ देखने, वहां जाकर माता और बहनों से मिलने की उनकी व्यग्रता किसी प्रकार भी कम न हो सकी। उनका प्रबल आग्रह देखकर भगवान शंकरजी ने उनको जाने की अनुमति दी। 
सती ने पिता के घर पहंचकर देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम के साथ बातचीत नहीं कर रहा है। सारे लोग मुंह फेरे हुए हैं। केवल उनकी माता ने स्नेह से उन्हें गले लगाया। बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव भरे हुए थे। परिजनों के इस व्यवहार से उनके मन को बहुत क्लेश पहुंचा। उन्होंने यह भी देखा कि वहां चतुर्दिक भगवान शंकर जी के पति तिरसकार भाव हुआ है। दक्ष ने उनके प्रति कुछ अपमानजनक वचन भी कहे। यह सब देखकर सती का हृदय क्षोभ, ग्लानि और प्रोध से सन्तप्त हो उठा। उन्होंने सोचा भगवान शंकरजी की बात न मानकर यहां आकर मैंने बहुत बड़ी गलती की है।  
वह अपने पति भगवान शंकर के इस अपमान को सह नह सकीं। उन्होंने अपने उस रूप को तक्षण वहीं योगाग्निद्वारा जलाकर भस्म कर दिया। वज्रपात के समान इस दारूण-दु:खद घटना को सुनकर शंकर जी ने व्रुद्ध को अपने शरीर को भस्मकर अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया। इस बार वह ‘शैलपुत्री’ नाम से विख्यात हुई। पार्वती, हैमवती भी उन्हीं के नाम हैं उपनिषद की एक कथा के अनुसार इन्हेंने हैमवती स्वरूप से देवताओं गर्व-भंजन किया था। 
‘शैलपुत्री’ देवी का विवाह भी शंकर जी से हुआ। पूर्व जन्म की भांति इस जन्म में भी वह शिवजी की अर्द्धांगिनी बनीं। नव दुर्गाओं में प्रथम शैलपुत्री दुर्गा का महत्त्व और शक्तियां अनन्त हैं। नव दुर्गा पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को ‘मूलाधार’ चप्र में स्थित करते हैं। यहीं से उनकी योगसाधना प्रारम्भ होती है।  

ध्वनि तंरगों से रोगें का उपचार  

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यह बात जान कर आप सभी को आश्चर्य होगा की ध्वनि तंरगें से भी रोगों के उपाच होते है। यह विश्व जीवों से भरा है। ध्वनि तंरगों की टकराहट से सुक्ष्म जीव मर जाते है, रात्री में सूर्य की पराबैगनी किरणां के अभाव में सूक्ष्म जीव उत्पन्न होते है जो ध्वनि तरगों की टकराहट से मर जाते है। ध्वनि तरगों से जीवों  के मरने की खोज सर्वप्रथम बर्लिन विश्वविधालय में 1928 में हुई थी। शिकागों के डॉ.ब्राइन ने ध्वनि तरगों से जीवों के नष्ट होने की बात सिद्ध की है। आधुनिक वैज्ञानिकों ने सिद्ध किया कि शंख और घण्टा की ध्वनि लहरों से 27 घन फुट प्रति सेकिंड वायु शक्ति वेग से 1200फुट दूरी के बैक्टीरिया नष्ट हो जाते है।    
पूर्व में मंदिरों का निमार्ण गुम्वजाकार होता था दरवाजे छोटे होते थे अन्दर की ध्वनि  बाहर नही निकलती थी, बाहर की ध्वनि अन्दर प्रवेश नही करती थी। मन्दिर में एक ईष्ट देव की प्रतिमा, एक दीपक, एक घण्टा, शंख होता था। यहां कोई भी रोगी श्रद्धा से जाता घण्टा या शंख ध्वनि कर दीप जलता बैठ कर श्रद्धा से प्रार्थना भक्ति करता, मौन ध्यान करता। रोंगों के ठीक होने की कामना करता वह ठीक हो जाता था। इसका बैज्ञानिक कारण घण्टा -शंख  ध्वनि भक्ति प्रार्थना की ध्वनि तंरगें बाहर न जाकर गुम्वजाकार शिखर से टकराकर  शरीर से टकराती जिससे शरीर के रोगाणु नष्ट हो जाते रोग ठीक हो जाते। आज भी पुराने मंदिरों में यह होता है। इसलिये सीमित मात्रा में बोलना ठीक है। ध्वनि ज्यादा मात्रा में प्रदूषण का रूप ले लेती है, जो शारीरिक एवं मानसिक दृष्टि से हानिकारक होती है। मौन रहने में ही सुख एवं सुख मय जीवन है।  
 

राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन (26 सितम्बर 2022)

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  • मेष राशि – अच्छे कार्य का लाभ प्राप्त होगा, जमीन-जायजाद से लाभ होगा, रुके कार्य परिश्रम से बनेंगे।
  • वृष राशि – आर्थिक स्थिति साधारण रहेगी, आकस्मिक हानि तथा खेद के साथ रहना पड़ेगा, तनाव से बचें।
  • मिथुन राशि – पारिवारिक सुखमय आनंद की प्राप्ति होगी, धार्मिक पुण्य कार्यों में प्रवृत रहेंगे, शुभ कार्य होंगे।
  • कर्क राशि – देश में सम्मान बढ़ेगा, इच्छित कार्य की प्राप्ति होगी, राजनेता तथा संतान योग बनेंगे, समय का लाभ लें।
  • सिंह राशि – मानसिक कष्ट होगा, शत्रु आपके कार्य में बाधा डालेंगे, आलस्य-प्रमाद की स्थिति बनेगी, कार्य पर ध्यान दें।
  • कन्या राशि – शारीरिक कष्टों से छुटकारा मिलेगा, पद-प्रतिष्ठा का लाभ मिलेगा किन्तु मानसिक अवरोध होगा।
  • तुला राशि – परीक्षा-प्रतियोगिता के लिये दूर की यात्रा होगी, कार्य सफलता पूर्वक होंगे, रुके कार्य ध्यान देने से बनेंगे।
  • वृश्चिक राशि – यश-प्रतिष्ठा में सुधार होगा, व्यक्तिव में निखार आयेगा तथा उद्योग-धंधा बढ़ेगा, परिश्रम से लाभ होगा।
  • धनु राशि – समस्याओं का समाधान होगा, आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, उच्च पद-प्रतिष्ठा बढ़ेगी ध्यान अवश्य दें।
  • मकर राशि – मानसिक कष्ट से हानि होगी, परिवार में अनबन होगी, कार्य में धन खर्च अधिक होगा, सावधानी रहें।
  • कुंभ राशि – पत्नी से संबंध ठीक नहीं रहेंगे, धंधे में अनबन व परेशानी का सामना करना पड़ेगा, कार्य का चिन्तन होगा।
  • मीन राशि – स्थिति में सुधार तथा स्वास्थ्य की खराबी होगी तथा धन व्यय अधिक होगा, धन व्यय पर नियंत्रण रखें।
     

कभी धूप-कभी वर्षा, फिलहाल ऐसा ही रहेगा राजधानी का मौसम

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भोपाल । कभी धूप, कभी वर्षा… कुछ इसी तरह रहने वाला है राजधानी का मौसम। वर्षा का दौर राजधानी में रुक-रुक कर जारी रहने के आसार है। भोपाल के कुछ इलाकों में छुट-पुट वर्षा मौसम सुहाना करेगी, तो दूसरी तरफ लोग धूप व गर्मी से परेशान होंगे।
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर बनी मौसम प्रणालियों के असर से मध्य प्रदेश में कुछ नमी आ रही है। इससे ग्वालियर, चंबल संभागों के जिलों में कहीं-कही छिटपुट वर्षा होने के आसार हैं। शेष जिलों में धीरे-धीरे मौसम अब साफ होने लगेगा। इससे दिन के तापमान में बढ़ोतरी भी होगी। वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डा. ममता यादव बताती हैं कि वर्तमान में उत्तर-पूर्वी राजस्थान पर हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात बना हुआ है। इस चक्रवात से लेकर उत्तर छत्तीसगढ़ तक एक ट्रफ लाइन बनी हुई है। एक पश्चिमी विक्षोभ ट्रफ के रूप में पाकिस्तान और उसके आसपास बना हुआ है। इसके अतिरिक्त आंध्र प्रदेश के तट पर हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात बन गया है। अलग-अलग स्थानों पर बनी इन चार प्रणालियों के असर से मप्र में कुछ नमी आ रही है। विशेषकर राजस्थान से लगे ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में मिल रही नमी से वहां छिटपुट वर्षा की संभावना अभी बनी हुई है। प्रदेश के शेष संभागों के जिलों में बादल छंटने लगे हैं। धूप निकलने के कारण अब दिन के तापमान में भी बढ़ोतरी होने लगेगी। हालांकि वातावरण में नमी मौजूद रहने के कारण तापमान बढऩे की स्थिति में कहीं-कहीं छिटपुट वर्षा होने की भी संभावना बनी रहेगी। डा. ममता बताती हैं कि आंध्रा कोस्ट पर बने चक्रवात के कम दबाव के क्षेत्र में बदलकर आगे बढऩे की स्थिति में तीन-चार दिन बाद पूर्वी मध्य प्रदेश में कहीं-कहीं वर्षा हो सकती है।

184 स्कूलों की मान्यता खत्म

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भोपाल । मध्यप्रदेश के कई स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी गई है। लोक शिक्षण संचालनालय ने प्रदेश के अनेक हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों की मान्यता समाप्त की है। मान्यता समाप्त हो जाने से इन स्कूलों में पढऩे वाले हजारों विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लग गया है। जानकारी के अनुसार लोक शिक्षण संचालनालय ने प्रदेश के 184 हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी है। इसमें भोपाल के 12 स्कूल भी शामिल हैं। प्रदेश के 1064 स्कूलों में कमियां निकालकर मान्यता समाप्त कर दी थी। अपील के बाद कुछ स्कूलों की मान्यता जारी कर दी गई थी लेकिन 184 स्कूल में मापदंड के अनुसार व्यवस्था नहीं थी। अब डीपीआई ने इन स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत सिंह ने बताया कि संयुक्त संचालकों ने प्रदेश के 1064 स्कूलों में कमियां निकालकर मान्यता समाप्त कर दी थी। इसमें भोपाल के 56 स्कूल भी शामिल थे। इसके बाद डीपीआई में अपील लगाई गई थी। अपील के मामलों की सुनवाई का काम 23 अप्रेल से 31 मई तक किया गया। अपील के बाद कुछ स्कूलों की मान्यता जारी कर दी गई थी लेकिन जांच के बाद 184 स्कूल ऐसे पाए गए जिनमें मापदंड के अनुसार व्यवस्था नहीं थी। डीपीआई ने अब इन स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी है।

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