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एयर इंडिया बम विस्फोट मामले में कनाडा ने पहली बार मानी बड़ी बात

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टोरंटो: 23 जून 1985 को एयर इंडिया की फ्लाइट 182 (सम्राट कनिष्क) में हुए आत्मघाती और घातक बम विस्फोट के 41 वर्ष बाद, कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) ने आखिरकार आधिकारिक तौर पर कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथियों को इस भीषण आतंकवादी हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया है। कनाडा की खुफिया एजेंसी की यह खुली स्वीकारोक्ति भारत के उस लंबे समय से चले आ रहे रुख की पुष्टि करती है, जिसे कनाडाई सरकारें दशकों तक राजनीतिक कारणों से नजरअंदाज करती आई थीं।

सीएसआईएस ने सोशल मीडिया पर इस हमले की बरसी पर जारी एक पोस्ट में स्पष्ट लिखा कि 23 जून 1985 को कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा लगाए गए बम ने विमान को नष्ट कर दिया था, जिसमें सवार सभी 329 लोग मारे गए थे। खुफिया एजेंसी ने इसे कनाडाई इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला और अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक निर्णायक क्षण बताया है।

हवा में ही टुकड़े-टुकड़े हो गया था 'सम्राट कनिष्क'

टोरंटो से वैंकूवर और लंदन होते हुए मुंबई जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट 182 (बोइंग 747-200बी विमान) आयरलैंड के दक्षिण-पश्चिमी तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर उड़ रही थी, तभी उसमें जोरदार धमाका हुआ। प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन 'बब्बर खालसा' के आतंकवादियों ने चेक-इन किए गए सामान (लगैज) के डिब्बे में यह बम छिपाकर रखा था। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि विमान हवा में ही बिखर गया।

इस हमले में 268 कनाडाई नागरिक, 27 ब्रिटिश और बाकी भारतीय मूल के यात्रियों व चालक दल के सदस्यों सहित कुल 329 निर्दोष लोगों की जान गई थी। साल 2001 में अमेरिका में हुए 9/11 के हमलों से पहले तक, इसे विमानन इतिहास का सबसे बड़ा और भयावह आतंकी हमला माना जाता था।

दोषियों का नाम लेने में क्यों लगे 41 साल?

अब वैश्विक स्तर पर यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि कनाडा को इस हमले के असली मास्टरमाइंड और विचारधारा का नाम सार्वजनिक करने में चार दशक (41 वर्ष) का समय क्यों लग गया। इसके पीछे कई बड़ी वजहें और कनाडाई सिस्टम की नाकामियां सामने आई हैं:

  • एजेंसियों की आपसी लड़ाई और सबूत नष्ट होना: साल 2010 में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस जॉन मेजर की अध्यक्षता वाली आधिकारिक सार्वजनिक जांच रिपोर्ट में इसे 'गलतियों की एक श्रृंखला' कहा गया था। कनाडाई खुफिया एजेंसी (CSIS) और रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के बीच वर्चस्व की लड़ाई के चलते तालमेल की भारी कमी थी। सीएसआईएस ने बब्बर खालसा के नेता और मुख्य साजिशकर्ता तलविंदर सिंह परमार पर निगरानी तो रखी थी, लेकिन एजेंसी ने सैकड़ों घंटों की महत्वपूर्ण जासूसी वॉयस रिकॉर्डिंग्स को खुद ही नष्ट कर दिया, जो अपराधियों को सजा दिलाने के लिए सबसे अचूक सबूत साबित हो सकते थे।

  • संस्थागत उदासीनता: हालांकि मारे गए अधिकांश लोग कनाडाई नागरिक थे, लेकिन कनाडाई राजनेताओं और वहां के मीडिया ने इसे लंबे समय तक "दूर देश (भारत) की एक आंतरिक समस्या" मानकर ठंडे बस्ते में डाले रखा। साल 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि पीड़ितों के परिवारों के साथ सरकारी स्तर पर घोर उदासीनता बरती गई थी।

  • गवाहों की हत्या और कानूनी अड़चनें: इस मामले से जुड़े अहम गवाहों को लगातार डराया-धमकाया गया और कई प्रमुख गवाहों की रहस्यमयी तरीके से हत्या कर दी गई। इसके परिणामस्वरूप, साल 2005 में चले एक हाई-प्रोफाइल मुकदमे में सबूतों के अभाव में मुख्य आरोपी बरी हो गए। बाद में जनता के भारी दबाव के बाद ही इस पर पूर्ण सार्वजनिक जांच बैठाई गई थी।

खालिस्तानी चरमपंथ को पहले ही बताया था गंभीर खतरा

हवाई हमले के लिए सीधे तौर पर नाम लेने से पहले, मार्च 2025 में जारी अपनी वार्षिक सार्वजनिक रिपोर्ट में भी सीएसआईएस ने पहली बार कड़ा रुख अपनाया था। उस रिपोर्ट में एजेंसी ने माना था कि कनाडा की धरती पर सक्रिय खालिस्तानी चरमपंथी समूह कनाडाई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन चुके हैं। खुफिया एजेंसी ने आगाह किया था कि ये संगठन भोले-भाले सिख समुदाय का फायदा उठाकर हिंसक एजेंडे के नाम पर भारी फंड जुटाते हैं, जिसका इस्तेमाल बाद में हिंसक गतिविधियों और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।

छोटी ताजिया जुलूस में युवाओं का दमखम, हैरतअंगेज लाठी-डंडा प्रदर्शन बना आकर्षण

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रामगढ़: जिले में मुहर्रम के पवित्र अवसर पर शुक्रवार को विभिन्न ग्रामीण अंचलों में भारी उत्साह और धार्मिक आस्था का माहौल देखा गया। सोलिया, उच्चारिंगा, पलानी, जयनगर और पतरातू बस्ती समेत कई गांवों के मुस्लिम समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार छोटी ताजिया के साथ भव्य जुलूस निकाला। इस मातमी जुलूस में बड़ी तादाद में ग्रामीण शामिल हुए, जो हाथों में मजहबी परचम (धार्मिक ध्वज) थामे शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहे थे। रास्ते भर लोगों ने आपसी भाईचारे, अमन-चैन और सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल पेश की।

इकनॉमिक्स स्कूल मैदान में युवाओं की युद्ध कला का प्रदर्शन

निर्धारित रास्तों और चौराहों से गुजरते हुए यह जुलूस बिरसा मार्केट स्थित इकनॉमिक्स स्कूल के खेल मैदान में पहुँचा। यहाँ अखाड़ा दल से जुड़े युवाओं और खिलाड़ियों ने अपनी पारंपरिक युद्ध कला का हैरतअंगेज प्रदर्शन किया। अखाड़े में लाठी-डंडे और पारंपरिक हथियारों के साथ किए गए हैरतअंगेज करतबों को देखकर वहां मौजूद दर्शकों ने दांतों तले उंगलियां दबा लीं और खिलाड़ियों की खूब हौसलाअफजाई की। इस मनमोहक प्रदर्शन को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी हजारों की भीड़ जुटी थी, जिससे पूरा मैदान काफी समय तक गुलजार बना रहा।

कड़े सुरक्षा घेरे में व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ आयोजन

मुहर्रम के इस आयोजन को लेकर जिला व पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। संवेदनशील मोड़ों और जुलूस के रास्तों पर भारी संख्या में पुलिस बल के जवानों को तैनात किया गया था। प्रशासनिक सतर्कता, पूजा कमेटियों के समन्वय और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों के सक्रिय सहयोग के चलते पूरा कार्यक्रम बेहद अनुशासित, व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।

सामाजिक एकता और आपसी तालमेल की दिखी मिसाल

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि रामगढ़ क्षेत्र में मुहर्रम का त्योहार हमेशा से ही आपसी एकता का प्रतीक रहा है। हर साल की तरह इस बार भी सभी समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर जुलूस का स्वागत किया और व्यवस्था बनाने में अपना अमूल्य सहयोग दिया। पूरे आयोजन के दौरान न सिर्फ धार्मिक निष्ठा देखने को मिली, बल्कि विभिन्न वर्गों के बीच की सामाजिक एकजुटता भी साफ तौर पर उजागर हुई।

शहादत-ए-इमाम हुसैन की याद में निकले ताजिए, शहर में दिखी आस्था की मिसाल

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जबलपुर: संस्कारधानी जबलपुर में मुहर्रम की नौवीं तारीख के पवित्र अवसर पर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में गहरी अकीदत, श्रद्धा और रूहानी माहौल देखने को मिला। कर्बला के महान शहीदों और इमाम हुसैन की लासाpayload शहादत को याद करते हुए समाज के लोगों ने मस्जिदों और इमामबाड़ों में विशेष नमाज व इबादत की। इस दौरान देश में अमन-चैन, भाईचारे और तरक्की के लिए सामूहिक रूप से विशेष दुआएं मांगी गईं।

इंसानियत की मिसाल: राहगीरों के लिए सबीलें और लंगर का आयोजन

मुहर्रम के इस मौके पर शहर में इंसानियत और खिदमत (सेवा) की कई खूबसूरत तस्वीरें भी सामने आईं। भीषण गर्मी और उमस को देखते हुए जगह-जगह स्वयंसेवकों द्वारा सबीलें (पियाऊ) स्थापित की गई थीं। इन सबीलों के माध्यम से वहां से गुजरने वाले राहगीरों और जायरीनों को ठंडा पानी, रूहअफजा और विभिन्न प्रकार के शरबत पिलाकर राहत पहुंचाई गई। इसके साथ ही कई प्रमुख चौराहों और इलाकों में 'लंगर-ए-हुसैनी' (भंडारे) के बड़े आयोजन किए गए, जहां हर वर्ग और सभी धर्मों के आम नागरिकों ने आदरपूर्वक शिरकत की, जो शहर की सामाजिक समरसता को और मजबूत करता है।

आकर्षण का केंद्र बने ताजिए, रोशनी से नहाई मशीन वाले बाबा की दरगाह

इस वर्ष भी जबलपुर शहर के अलग-अलग मोहल्लों में बेहद नक्काशीदार, ऊंचे और कलात्मक ताजिए तैयार किए गए हैं। इन खूबसूरत ताजियों की एक झलक पाने और जियारत करने के लिए दूर-दराज के इलाकों से भी अकीदतमंदों के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। इस विशेष दिन के मद्देनजर ऐतिहासिक ओमती मस्जिद और आस्था के बड़े केंद्र 'मशीन वाले बाबा सरकार दरगाह' को बेहद आकर्षक और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। रात के समय रोशनी से नहाए ये पवित्र धार्मिक स्थल पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर रहे हैं और लोगों के कौतूहल व श्रद्धा का मुख्य केंद्र बने हुए हैं। मुहर्रम पर आस्था, सेवा और समर्पण का यह मिला-जुला रूप जबलपुर की ऐतिहासिक गंगा-जमुनी तहजीब को पूरी दुनिया के सामने पेश करता है।

कैंसर से जूझ रही महिला की जमीन पर अवैध कब्जा, प्रशासन से लगाई गुहार

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जबलपुर: जिले की पाटन तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम नुनसर से भू-माफियाओं की प्रताड़ना का एक बेहद भावुक और गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ की रहने वाली 68 वर्षीय कैंसर पीड़ित बुजुर्ग महिला केशर देवी चौरसिया अपनी पुश्तैनी जमीन को बचाने के लिए न्याय की गुहार लेकर सीधे पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंची हैं। पीड़िता ने लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि क्षेत्र के रसूखदार गजेंद्र दुबे, गणेश उर्फ गन्नू दुबे और उनके साथियों ने उनकी 68 डिसमिल कृषि भूमि पर अवैध रूप से जबरन कब्जा कर रखा है। राजस्व विभाग द्वारा की गई आधिकारिक जांच और सीमांकन में इस अतिक्रमण की पुष्टि भी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

सरकारी रिपोर्ट के बाद भी बेअसर तंत्र, आरोपियों के हौसले बुलंद

राजस्व विभाग की सीमांकन रिपोर्ट में यह साफ हो चुका है कि केशर देवी की जमीन पर सरकारी नक्शे के विपरीत अवैध कब्जा किया गया है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़िता का कहना है कि जब उन्होंने अपनी जमीन को सुरक्षित करने के लिए उसकी सीमाओं पर सुरक्षा खंभे (पिलर) लगवाए, तो आरोपियों ने कानून को ठेंगा दिखाते हुए उन खंभों को उखाड़ फेंका। इस अमानवीय और आपराधिक कृत्य के बाद भी पुलिस ने अब तक आरोपियों के खिलाफ कोई सख्त मुकदमा दर्ज नहीं किया है, जिससे उनके हौसले और अधिक बुलंद हो गए हैं। इस समय, जब बुजुर्ग महिला को अस्पताल में अपना कैंसर का इलाज कराना चाहिए, तब उन्हें इस गंभीर बीमारी की हालत में दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

परिवार पर मंडरा रहा खतरा, सुरक्षा और न्याय की मांग

पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि आरोपी गजेंद्र और गणेश दुबे इतने पर ही नहीं रुके, वे लगातार केशर देवी के बेटे को जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं। इन लगातार मिल रही धमकियों के कारण पूरा परिवार गहरे खौफ, मानसिक तनाव और असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर है, यहाँ तक कि उनका घर से निकलना भी दूभर हो गया है। प्रशासन की इस सुस्ती के चलते इलाके में किसी बड़ी अनहोनी की आशंका बनी हुई है। पीड़ित बुजुर्ग महिला ने पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है कि उनकी पैतृक कृषि भूमि को तत्काल प्रभाव से भू-माफियाओं से मुक्त कराया जाए और उन्हें तथा उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि वे शांतिपूर्वक अपना इलाज करवा सकें।

3000 किलो हेरोइन मामले में बड़ी गिरफ्तारी, ईडी ने दबोचा मुख्य आरोपी

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नई दिल्ली: वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप ने भारत के तेल व्यापार के लिए नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। मिडिल ईस्ट में जारी संकट के बीच भारत ने वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ाया था, लेकिन अब इस प्राकृतिक आपदा के चलते वहां बिजली कटौती, परिवहन व्यवस्था में बाधा और बंदरगाहों पर आपातकालीन प्रतिबंध लग गए हैं। इसके कारण कच्चे तेल की माल ढुलाई कई दिनों या हफ्तों तक धीमी होने की आशंका है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाद अब एक और संकट

यह आपदा ऐसे समय में आई है जब भारत पहले से ही मिडिल ईस्ट के 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' मार्ग पर तनाव के कारण तेल आपूर्ति में व्यवधान का सामना कर रहा था। हालांकि, कुछ दिन पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते से उम्मीद जगी थी कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग का व्यवधान कम हो जाएगा। लेकिन अब वेनेजुएला में आए इस संकट ने भारतीय तेल बाजार के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।

मुंद्रा पोर्ट ड्रग्स केस में कबीर तलवार गिरफ्तार

दूसरी ओर, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने 24 और 25 जून को दिल्ली के छह ठिकानों पर छापेमारी के बाद दिल्ली निवासी हरप्रीत सिंह तलवार उर्फ कबीर तलवार को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई सितंबर 2021 में गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर जब्त की गई लगभग 3000 किलोग्राम हेरोइन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। इस मामले में एनआईए (NIA) भी तलवार को पहले गिरफ्तार कर चुकी है और ईडी ने उसे इस पूरे सिंडिकेट का मुख्य आरोपी बताया है।

पाकिस्तानी और अफगान नेटवर्क से जुड़े तार

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा मामला अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दुबई से संचालित होने वाले एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट से जुड़ा है। आरोप है कि तलवार ने दुबई में बैठे वांछित आरोपी विटेश कोसर उर्फ राजू दुबई, पाकिस्तानी आईएसआई (ISI) एजेंटों और अफगान नागरिकों के साथ मिलकर अर्ध-संसाधित टैल्क की आड़ में नशीले पदार्थों की तस्करी की थी। जांच में सामने आया है कि ड्रग्स की बिक्री से कमाए गए लगभग 74 करोड़ रुपये हवाला के जरिए अफगानिस्तान भेजे गए, जिसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों की फंडिंग में हुआ। इस मदद के बदले तलवार को करीब 1.65 करोड़ रुपये की अवैध कमाई और कई कीमती विदेशी सामान मिले थे।

दिल्ली के नामी नाइट क्लबों में किया निवेश

ईडी की तफ्तीश में यह भी खुलासा हुआ है कि कबीर तलवार अपने दोस्तों और कर्मचारियों के नाम पर कई फर्जी कंपनियां चला रहा था, जिनका इस्तेमाल ड्रग्स मंगाने के लिए किया गया। इन अवैध गतिविधियों और मादक पदार्थों की काली कमाई से प्राप्त धन को ठिकाने लगाने के लिए तलवार ने दिल्ली के कई नामी नाइट क्लबों और लाउंज में भारी निवेश किया था। जांच के दायरे में आए इन क्लबों में प्लेबॉय क्लब, व्हाइट क्लब दिल्ली, आरएसवीपी नाइट क्लब, जसबा लाउंज, वेलवेट रूम और लिट लाउंज शामिल हैं। फिलहाल कोर्ट ने आरोपी को रिमांड पर भेज दिया है और ईडी उसके करीबियों से पूछताछ कर रही है।

चार युवतियों और दो युवकों पर नाबालिग को अगवा करने का आरोप, इलाके में हड़कंप

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जबलपुर: संस्कारधानी के ग्वारीघाट थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की और उसकी सहेली का घर से जबरन अपहरण करने, उनके साथ बर्बरता से मारपीट करने और इस खौफनाक कृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। स्थानीय ग्वारीघाट थाना पुलिस द्वारा मामले में सख्त एक्शन न लेने और आरोपियों को खुला छोड़ देने से नाराज होकर पीड़िता, अपने परिवार और क्षेत्र के नागरिकों के साथ सीधे पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंची। पीड़िता ने एसपी को सौंपे अपने शिकायत पत्र में पड़ोस की 4 युवतियों सहित पवन, शिब्बू और एक सौतेली मां पर सुनसान खंडहर में ले जाकर अमानवीय व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया है। तीन दिन पहले हुई इस वारदात में अब तक कोई गिरफ्तारी न होने से स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है।

घर में घुसकर किया अगवा, ये थी विवाद की मुख्य वजह

इस पूरे विवाद के पीछे की वजह बेहद चौंकाने वाली है। जांच के अनुसार, पीड़ित किशोरियों ने अपनी एक सहेली को अपने घर में शरण (पनाह) दे रखी थी। उस सहेली का आरोप था कि उसकी सौतेली मां उसके साथ अक्सर बेरहमी से मारपीट और प्रताड़ना करती है। जब सौतेली मां को पता चला कि इन लड़कियों ने उसकी बेटी को अपने घर में रखा है, तो वह आगबबूला हो गई। उसने लड़कियों को सबक सिखाने के लिए एक खौफनाक साजिश रची। इस काम के लिए उसने पड़ोस की चार बालिग युवतियों और पवन व शिब्बू नाम के दो युवकों को अपने साथ मिलाया। योजना के तहत ये सभी आरोपी जबरन पीड़ित किशोरी के घर में घुसे, वहां जमकर हंगामा किया और दोनों किशोरियों को अगवा कर एक सुनसान खंडहर में ले गए।

खौफ फैलाने के लिए सोशल मीडिया पर डाला मारपीट का वीडियो

खंडहर में ले जाकर आरोपियों ने दोनों किशोरियों के साथ जमकर मारपीट की। इलाके में अपना खौफ और दहशत फैलाने के इरादे से आरोपियों ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस अमानवीय घटना के बाद से दोनों पीड़ित किशोरियां गहरे सदमे और मानसिक तनाव में हैं।

घटना के तुरंत बाद पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लेकर ग्वारीघाट थाने पहुंचा था, लेकिन आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने मामले को बेहद हल्के में लिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बेहद मामूली धाराओं में केस दर्ज कर औपचारिकता पूरी कर ली और किसी भी नामजद आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया। पुलिस के इसी ढीले रवैए से तंग आकर पीड़ित परिवार को एसपी कार्यालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पीड़ित पक्ष को आश्वस्त किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और वीडियो के आधार पर सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मध्य प्रदेश की बेटी कृष्णा शर्मा पहनेंगी टीम इंडिया की जर्सी, ग्वालियर में खुशी की लहर

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ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर की प्रतिभावान हॉकी खिलाड़ी कृष्ण शर्मा ने अपनी असाधारण प्रतिभा, कड़े परिश्रम और बेहतरीन खेल के बदौलत भारतीय अंडर-21 महिला हॉकी टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है। कृष्ण शर्मा के इस अंतरराष्ट्रीय चयन से न सिर्फ ग्वालियर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश का गौरव बढ़ा है। हॉकी इंडिया द्वारा यूनाइटेड किंगडम (यूके) के आगामी दौरे के लिए घोषित की गई राष्ट्रीय टीम में कृष्ण को शामिल किया गया है। तमाम चुनौतियों और सामाजिक बंधनों को पार कर देश की मुख्य टीम तक पहुंचने वाली कृष्ण की यह प्रेरक कहानी आज देश की हर बेटी के लिए एक बड़ी मिसाल बन चुकी है।

यूके दौरे पर चार देशों की मजबूत टीमों से भिड़ेगी टीम इंडिया

हॉकी इंडिया की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम आगामी 5 जुलाई से स्कॉटलैंड और इंग्लैंड के महत्वपूर्ण दौरे पर रवाना होने जा रही है। इस दौरे के दौरान भारतीय टीम स्कॉटलैंड, इंग्लैंड, अमेरिका (यूएसए) और बेल्जियम जैसी दुनिया की मजबूत जूनियर महिला टीमों के खिलाफ द्विपक्षीय टेस्ट मैच श्रृंखला खेलेगी। ग्वालियर की कृष्ण शर्मा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीली जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व करती और मैदान पर विरोधियों को शिकस्त देती नजर आएंगी।

स्कर्ट पहनने पर मिले समाज के ताने, पिता बने सपनों के सारथी

कृष्ण शर्मा का भारतीय टीम की जर्सी तक पहुंचने का रास्ता कांटों भरा रहा है। एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली कृष्ण को शुरुआती दिनों में मैदान पर हॉकी किट और स्कर्ट पहनकर खेलने को लेकर रूढ़िवादी समाज के कड़े तानों और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने इन सब बातों की परवाह किए बिना अपने खेल पर ध्यान केंद्रित रखा। इस कठिन सफर में उनके पिता सुनील शर्मा, जो एक निजी सिक्योरिटी सर्विस कंपनी चलाते हैं, अपनी बेटी के सबसे बड़े मददगार बने। आर्थिक और सामाजिक तंगहाली के बावजूद पिता ने कभी कृष्ण के हौसले को कम नहीं होने दिया और हर कदम पर उसके सपनों को नई उड़ान दी।

अकादमी से शुरू हुआ सफर, साल 2023 में भी खेल चुकी हैं विदेश में मैच

कृष्ण शर्मा के सुनहरे करियर की शुरुआत साल 2019 में मध्य प्रदेश महिला हॉकी अकादमी से हुई थी। यहाँ के अनुभवी प्रशिक्षकों (कोचों) के कुशल मार्गदर्शन और खुद की दिन-रात की कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने बहुत जल्द राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमा ली। इससे पहले साल 2023 में भी कृष्ण को भारतीय अंडर-18 सब जूनियर टीम की तरफ से नीदरलैंड और बेल्जियम के खिलाफ टेस्ट सीरीज खेलने का गौरव प्राप्त हो चुका है। लगातार मिल रही सफलताओं के बाद अब वे भारतीय अंडर-21 टीम की मुख्य रीढ़ बनकर उभर रही हैं।

‘धर्मग्रंथ के आधार पर नहीं बनते कानून’—योगेश कदम का बड़ा बयान

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मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पर चल रही चर्चा के दौरान राजनीतिक घमासान मच गया है। एनसीपी (अजित पवार गुट) की विधायक सना मलिक द्वारा सदन में पाकिस्तान का संदर्भ दिए जाने पर जताई गई आपत्ति और बहुविवाह व धार्मिक अधिकारों को लेकर दिए गए बयान पर राजनीति गरमा गई है। इस पर राज्य के गृह मंत्री योगेश कदम ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि देश या राज्य में कोई भी कानून किसी धर्मग्रंथ को आधार बनाकर तैयार नहीं किया जाता है।

धर्मग्रंथ के आधार पर नहीं बनते कानून: योगेश कदम

विधायक सना मलिक को सीधे शब्दों में जवाब देते हुए गृह मंत्री योगेश कदम ने कहा कि वह यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि कानून निर्माण की प्रक्रिया में किसी भी धार्मिक पुस्तक या ग्रंथ के हिसाब से फैसले नहीं लिए जा सकते। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारा विधिमंडल समाज के किसी भी घटक या वर्ग के साथ होने वाले अन्याय को खत्म करने और उसे न्याय दिलाने के लिए है, न कि किसी धर्मग्रंथ को आधार बनाकर निर्णय लेने के लिए।

अन्याय को रोकने के लिए बनते हैं नियम

योगेश कदम ने आगे कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा अब तक जितने भी कानून बनाए गए हैं, वे किसी एक विशेष धर्म या समाज को ध्यान में रखकर तैयार नहीं किए जाते। कानून का एकमात्र उद्देश्य समाज में व्याप्त कुरीतियों और अन्याय को समाप्त करना तथा हर नागरिक को समान अधिकार देना होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता का लक्ष्य भी समाज के सभी वर्गों के साथ न्याय सुनिश्चित करना है।

पाकिस्तान के जिक्र पर सना मलिक ने जताई थी आपत्ति

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब समान नागरिक संहिता विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन में पाकिस्तान का संदर्भ (जिक्र) आया। विधायक सना मलिक ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए अपना तर्क रखा कि यूसीसी जैसे महत्वपूर्ण बिल पर चर्चा के दौरान बेवजह पड़ोसी देश पाकिस्तान का हवाला देना पूरी तरह से अप्रासंगिक और गलत है। इसी बयान के बाद से सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है।

29 जून से खुलेगा Aastha Spintex IPO, ₹170 करोड़ जुटाने की तैयारी

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मुंबई: प्राइमरी मार्केट के मेनबोर्ड सेगमेंट में निवेश का एक और नया मौका मिलने जा रहा है। टेक्सटाइल सेक्टर की जानी-मानी कंपनी आस्था स्पिनटेक्स लिमिटेड (Aastha Spintex Ltd) अपना आगामी आईपीओ (IPO) लेकर आ रही है। कंपनी इस पब्लिक इश्यू के जरिए बाजार से ₹170 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। यह आईपीओ निवेश के लिए सोमवार, 29 जून को खुलेगा और बुधवार, 1 जुलाई को बंद हो जाएगा। इस पूरे इश्यू के तहत कंपनी 1.25 करोड़ नए फ्रेश शेयर जारी करने जा रही है।

क्या है प्राइस बैंड और लॉट साइज?

कंपनी ने इस आईपीओ के लिए ₹125 से ₹136 प्रति शेयर का प्राइस बैंड (मूल्य दायरा) तय किया है। रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम लॉट साइज 110 शेयरों का रखा गया है, यानी निवेशकों को कम से कम एक लॉट के लिए बोली लगानी होगी। आईपीओ बंद होने के बाद, शेयरों का आवंटन (Alotment) 2 जुलाई को फाइनल किया जाएगा। जिन निवेशकों को शेयर नहीं मिलेंगे, उन्हें रिफंड प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके बाद 6 जुलाई को कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर होने की उम्मीद है।

फंड जुटाने का मुख्य उद्देश्य और कंपनी की भविष्य की रणनीति

आस्था स्पिनटेक्स लिमिटेड मुख्य रूप से कॉटन बेल्स और अलग-अलग वैरायटी के कॉटन यार्न (सूती धागे) का निर्माण और व्यापार करती है। इसके धागों का इस्तेमाल डेनिम, मोजे, शर्टिंग, स्वेटर, होम टेक्सटाइल और इंडस्ट्रियल फैब्रिक बनाने में बड़े पैमाने पर होता है। कंपनी के प्रमोटर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर पटेल डी. जशवंतभाई ने बताया कि इस आईपीओ से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल 'फाल्कन यार्न्स प्राइवेट लिमिटेड' के अधिग्रहण (खरीद) की आंशिक अदायगी करने, उसकी वर्किंग कैपिटल (कार्यशील पूंजी) की जरूरतों को पूरा करने और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इस कदम से कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और बिजनेस ग्रोथ को नई रफ्तार मिलेगी।

किस कैटेगरी के लिए कितना हिस्सा है रिजर्व?

कंपनी ने अलग-अलग प्रकार के निवेशकों के लिए कोटा निर्धारित किया है। इस पब्लिक इश्यू में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए 20 फीसदी हिस्सा सुरक्षित रखा गया है। वहीं, हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स यानी नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) के लिए 40 फीसदी और आम रिटेल निवेशकों के लिए भी 40 फीसदी हिस्सा आरक्षित किया गया है।

ग्रे मार्केट में प्रीमियम पर ट्रेडिंग शुरू

बाजार के जानकारों और अनऑफिशियल सोर्सेज के मुताबिक, आस्था स्पिनटेक्स के शेयरों ने ग्रे मार्केट में भी दस्तक दे दी है। फिलहाल अनऑफिशियल मार्केट (GMP) में कंपनी के शेयर अपने तय प्राइस बैंड से करीब 2.94 प्रतिशत के प्रीमियम (बढ़त) के साथ ट्रेड कर रहे हैं, जो निवेशकों के बीच इसके प्रति सकारात्मक रुझान को दर्शाता है। गौरतलब है कि हाल ही में सेबी (Sebi) से मंजूरी मिलने के बाद यह इश्यू बाजार में आ रहा है।

थाने में अनुशासन तार-तार: फरियादी के सामने टेबल पर पैर रखे बैठी कांस्टेबल पर गिरी गाज

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डूंगरपुर: राजस्थान के डूंगरपुर जिले के बिछीवाड़ा थाने से पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाली एक तस्वीर सामने आई है, जिसने खाकी की कार्यप्रणाली और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही इस फोटो में थाने के भीतर तैनात एक महिला सिपाही अपनी फरियाद लेकर आए एक असहाय बुजुर्ग के सामने बेहद गैर-जिम्मेदाराना और अमर्यादित अंदाज में कुर्सी पर बैठी दिखाई दे रही है। मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आते ही डूंगरपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) ने तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी महिला कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से नौकरी से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है।

सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा, पुलिस की छवि पर उठे सवाल

यह विवाद तब शुरू हुआ जब थाने के अंदर की यह तस्वीर किसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट कर दी। फोटो में महिला कांस्टेबल का अशिष्ट रवैया देखकर इंटरनेट यूजर्स का गुस्सा भड़क गया। लोगों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि न्याय की उम्मीद में पुलिस के पास आने वाले बुजुर्गों और आम नागरिकों के साथ ऐसा अपमानजनक व्यवहार बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। यूजर्स ने लिखा कि चंद पुलिसकर्मियों की ऐसी हरकतों की वजह से पूरे पुलिस महकमे की छवि धूमिल होती है।

एसपी ने दिखाई सख्ती, कांस्टेबल रीना गर्ग लाइन हाजिर

मामले के लगातार तूल पकड़ने और जनता के विरोध को देखते हुए जिला पुलिस कप्तान ने इस पूरे प्रकरण की प्राथमिक जांच के आदेश दिए। शुरुआती तफ्तीश में शिकायत और वायरल फोटो को पूरी तरह सही पाया गया। इसके बाद बिछीवाड़ा थाने में कार्यरत महिला कांस्टेबल रीना गर्ग के खिलाफ निलंबन की गाज गिरी। पुलिस मुख्यालय ने साफ शब्दों में कहा है कि ऑन-ड्यूटी किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता, लापरवाही या आम जनता से बदसलूकी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विभागीय जांच शुरू, नियमों का उल्लंघन करने पर होगी सख्त कार्रवाई

इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों के बीच भी पुलिस के इस कदम की सराहना हो रही है। हालांकि, घटना को लेकर अब उच्च स्तरीय विभागीय जांच की मांग भी उठने लगी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में कोई अन्य पुलिसकर्मी जनता के साथ ऐसा रवैया न अपनाए। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुलिस को जनता के प्रति अधिक संवेदनशील, मददगार और मर्यादित होना चाहिए।

जनता का भरोसा जीतना हमारी प्राथमिकता: पुलिस प्रशासन

इस पूरे मामले पर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुलिस विभाग का मुख्य ध्येय आमजन में विश्वास और अपराधियों में डर पैदा करना है। विभाग की साख को बनाए रखने के लिए जनता के साथ सीधा और सम्मानजनक संवाद बेहद जरूरी है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि आगे भी कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने पद की गरिमा के खिलाफ काम करता पाया गया, तो उसके खिलाफ इससे भी सख्त कानूनी और अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे।

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