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थाने में अनुशासन तार-तार: फरियादी के सामने टेबल पर पैर रखे बैठी कांस्टेबल पर गिरी गाज

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डूंगरपुर: राजस्थान के डूंगरपुर जिले के बिछीवाड़ा थाने से पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाली एक तस्वीर सामने आई है, जिसने खाकी की कार्यप्रणाली और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही इस फोटो में थाने के भीतर तैनात एक महिला सिपाही अपनी फरियाद लेकर आए एक असहाय बुजुर्ग के सामने बेहद गैर-जिम्मेदाराना और अमर्यादित अंदाज में कुर्सी पर बैठी दिखाई दे रही है। मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आते ही डूंगरपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) ने तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी महिला कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से नौकरी से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है।

सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा, पुलिस की छवि पर उठे सवाल

यह विवाद तब शुरू हुआ जब थाने के अंदर की यह तस्वीर किसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट कर दी। फोटो में महिला कांस्टेबल का अशिष्ट रवैया देखकर इंटरनेट यूजर्स का गुस्सा भड़क गया। लोगों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि न्याय की उम्मीद में पुलिस के पास आने वाले बुजुर्गों और आम नागरिकों के साथ ऐसा अपमानजनक व्यवहार बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। यूजर्स ने लिखा कि चंद पुलिसकर्मियों की ऐसी हरकतों की वजह से पूरे पुलिस महकमे की छवि धूमिल होती है।

एसपी ने दिखाई सख्ती, कांस्टेबल रीना गर्ग लाइन हाजिर

मामले के लगातार तूल पकड़ने और जनता के विरोध को देखते हुए जिला पुलिस कप्तान ने इस पूरे प्रकरण की प्राथमिक जांच के आदेश दिए। शुरुआती तफ्तीश में शिकायत और वायरल फोटो को पूरी तरह सही पाया गया। इसके बाद बिछीवाड़ा थाने में कार्यरत महिला कांस्टेबल रीना गर्ग के खिलाफ निलंबन की गाज गिरी। पुलिस मुख्यालय ने साफ शब्दों में कहा है कि ऑन-ड्यूटी किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता, लापरवाही या आम जनता से बदसलूकी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विभागीय जांच शुरू, नियमों का उल्लंघन करने पर होगी सख्त कार्रवाई

इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों के बीच भी पुलिस के इस कदम की सराहना हो रही है। हालांकि, घटना को लेकर अब उच्च स्तरीय विभागीय जांच की मांग भी उठने लगी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में कोई अन्य पुलिसकर्मी जनता के साथ ऐसा रवैया न अपनाए। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुलिस को जनता के प्रति अधिक संवेदनशील, मददगार और मर्यादित होना चाहिए।

जनता का भरोसा जीतना हमारी प्राथमिकता: पुलिस प्रशासन

इस पूरे मामले पर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुलिस विभाग का मुख्य ध्येय आमजन में विश्वास और अपराधियों में डर पैदा करना है। विभाग की साख को बनाए रखने के लिए जनता के साथ सीधा और सम्मानजनक संवाद बेहद जरूरी है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि आगे भी कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने पद की गरिमा के खिलाफ काम करता पाया गया, तो उसके खिलाफ इससे भी सख्त कानूनी और अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे।

80-90 का दौर था सबसे खास, नीलम कोठारी ने बताई गोविंदा संग हिट फिल्मों की कहानी

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बॉलीवुड की मशहूर और दिग्गज अभिनेत्री नीलम कोठारी ने हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर को याद करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। नीलम का मानना है कि आज के आधुनिक दौर के मुकाबले उन्हें फिल्मों का पुराना समय कहीं ज्यादा पसंद है। उन्होंने बीते जमाने की सादगी और उसकी असल खूबसूरती को याद करते हुए अपने दिल की बातें साझा की हैं, जो आज के चकाचौंध वाले दौर से बेहद अलग हैं।

न वैनिटी वैन थी, न एसी; फिर भी उस दौर का कोई मुकाबला नहीं

नीलम कोठारी ने उस दौर की चुनौतियों और सादगी का जिक्र करते हुए कहा कि 80 और 90 के दशक में आज की तरह कलाकारों को लग्जरी सुविधाएं नहीं मिलती थीं। उन्होंने बताया, "उस समय शूटिंग सेट्स पर न तो एयर कंडीशनर (एसी) होते थे और न ही आराम करने के लिए वैनिटी वैन मिलती थी। हम जैसे ही सेट पर कदम रखते थे, पसीने से पूरी तरह भीज जाते थे। घंटों मेहनत करके जो हेयरस्टाइल और मेकअप किया जाता था, वह गर्मी के कारण कुछ ही देर में बिगड़ जाता था। लेकिन इन सब दिक्कतों के बावजूद, अगर आज भी मुझसे पूछा जाए कि मेरा पसंदीदा दौर कौन सा है, तो मैं बिना सोचे 80-90 का दशक ही चुनूंगी। उस दौर की सादगी और खूबसूरती का कोई मुकाबला नहीं है।"

गोविंदा संग डांस फ्लोर पर होती थी कड़ी टक्कर

सुपरस्टार गोविंदा के साथ अपनी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री पर बात करते हुए नीलम ने बताया कि उन दोनों के बीच हमेशा एक दोस्ताना मुकाबला (कंपटीशन) रहता था, खासकर डांस नंबर्स में। नीलम के अनुसार, "जब भी हम किसी गाने की शूटिंग करते थे, तो हम दोनों के मन में यह बात रहती थी कि कौन सबसे बेहतरीन डांस स्टेप्स करेगा। हमारे बीच का यही अनकहा कंपटीशन और जबरदस्त तालमेल (सिंक्रोनाइजेशन) पर्दे पर जादू बिखेर देता था, जिसे दर्शकों ने खूब प्यार दिया।"

39 साल बाद भी 'आप के आ जाने से' का जलवा कायम

अपने करियर के सबसे बड़े चार्टबस्टर गाने का जिक्र करते हुए नीलम ने कहा कि 'आप के आ जाने से' आज भी उनके सबसे आइकॉनिक गानों में से एक है। यह सदाबहार गाना वर्ष 1987 में आई सुपरहिट फिल्म 'खुदगर्ज' का है, जिसका निर्देशन राकेश रोशन ने किया था। यह गाना आज भी शादियों और पार्टियों की शान बना हुआ है और इसे भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन डांस नंबर्स में गिना जाता है।

सिनेमाई सफर: रील लाइफ जोड़ी को रियल समझने लगे थे फैंस

नीलम कोठारी ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत साल 1984 में आई फिल्म 'जवानी' से की थी। इसके बाद उन्होंने 'लव 86', 'इल्जाम', 'हत्या', 'सिंदूर' और 'घराना' जैसी एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया। गोविंदा और नीलम की जोड़ी उस दौर में सिल्वर स्क्रीन पर इतनी हिट और लोकप्रिय थी कि सिनेमा प्रेमी अक्सर यह मान बैठते थे कि दोनों असल जिंदगी में भी एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं।

तेलंगाना में छापा: निलंबित महिला तहसीलदार से 5 करोड़ से अधिक की संपत्ति बरामद

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हैदराबाद: तेलंगाना में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में आमतौर पर पुरुष अधिकारियों के नाम सामने आते रहे हैं, लेकिन इस बार एक महिला अधिकारी के पास मिली अकूत संपत्ति ने सबको हैरान कर दिया है। एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने शमीरपेट की निलंबित तहसीलदार टी. सुचरिता के ठिकानों पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक बार फिर बड़ा तलाशी अभियान चलाया है। गौरतलब है कि सुचरिता रिश्वतखोरी के एक अन्य मामले में पहले से ही जांच एजेंसियों की हिरासत में हैं, और इसी कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए एसीबी ने उनके ठिकानों पर नए सिरे से शिकंजा कसा है।

छापेमारी में जमीनों के दस्तावेज और फ्लैट्स बरामद

एसीबी द्वारा की गई इस व्यापक छापेमारी के दौरान तहसीलदार के पास से करोड़ों रुपये की अचल संपत्ति के दस्तावेज बरामद हुए हैं। जांच टीम ने कार्रवाई करते हुए सिद्दीपेट जिले के दमरकुंटा गांव में 2.17 एकड़ कृषि भूमि के कागजात जब्त किए हैं। इसके साथ ही हैदराबाद शहर के पॉश इलाकों में तीन आलीशान फ्लैट और कीसारा व खानमेट गांवों में दो कीमती प्लॉट के दस्तावेज भी जांच एजेंसी के हाथ लगे हैं।

लाखों की नकदी, लग्जरी गाड़ियां और करोड़ों के गहने जब्त

जमीन और फ्लैट्स के अलावा सुचरिता के ठिकानों से बड़ी मात्रा में नकदी और आभूषण भी मिले हैं। एसीबी की टीम ने उनके पास से 12 लाख रुपये की नकद राशि और विभिन्न बैंक खातों में जमा करीब 38 लाख रुपये का बैंक बैलेंस जब्त किया है। वहीं, उनके घर से करीब 1.20 करोड़ रुपये की कीमत के सोने और हीरे के महंगे आभूषण भी बरामद किए गए हैं। इन संपत्तियों के अलावा, उनके आवास से दो लग्जरी गाड़ियां (एक फॉक्सवैगन और एक हुंडई क्रेटा कार) भी जब्त की गई हैं, जिन्हें उन्होंने काली कमाई से अर्जित किया था। फिलहाल जांच टीम सभी दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

हेमा मालिनी का आलीशान नहीं, यादों से भरा आशियाना; आज भी है डांस का केंद्र

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बॉलीवुड की 'ड्रीम गर्ल' यानी हेमा मालिनी ने जब हिंदी सिनेमा जगत में कदम रखा था, तो उन्होंने अपनी बेहतरीन अदाकारी से खूब शोहरत, नाम और दौलत कमाई। करीब 54 साल पहले उन्होंने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में अपने सपनों का एक बेहद खूबसूरत आशियाना बनाया था, जो अंदर से किसी राजमहल जैसा दिखता है। हाल ही में हेमा मालिनी की बड़ी बेटी और अभिनेत्री ईशा देओल ने प्रशंसकों को अपनी मां के इस आलीशान घर का अंदरूनी दौरा (होम टूर) कराया है, जिसके बाद से ही इस घर के इंटीरियर की तस्वीरें और जानकारियां टॉक ऑफ द टाउन बनी हुई हैं।

घर में मौजूद है 30 लोगों के लिए बड़ा डांस हॉल

अभिनय की दुनिया में नाम कमाने के साथ-साथ हेमा मालिनी एक प्रख्यात क्लासिकल डांसर (शास्त्रीय नृत्यांगना) भी हैं। कला के प्रति उनके इसी समर्पण की झलक उनके घर में भी साफ देखने को मिलती है। बंगले का एक बहुत बड़ा हिस्सा और हॉल पूरी तरह से सिर्फ नृत्य अभ्यास (डांस) के लिए रिजर्व रखा गया है। इस हॉल की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ एक समय में करीब 30 लोग एक साथ डांस सीख सकते हैं।

दीवारों पर सजी हैं सुनहरे दौर की यादें

घर के इंटीरियर को बेहद करीने से डिजाइन किया गया है। पूरे घर की दीवारों पर हेमा मालिनी के बचपन से लेकर अब तक के सफर की खूबसूरत तस्वीरें सजी हुई हैं। इसके अलावा उनकी सदाबहार और ब्लॉकबस्टर फिल्मों से जुड़े कई यादगार लम्हों को भी तस्वीरों के रूप में दीवारों पर जगह दी गई है, जो घर के भीतर कदम रखते ही सिनेमा के सुनहरे दौर की याद दिला देते हैं।

धर्मेंद्र की यादों को किया गया है जीवित, भावुक हुईं ईशा

हेमा मालिनी और ईशा देओल ने अभिनेता धर्मेंद्र की अनमोल यादों को भी इस घर में बहुत ही सम्मान के साथ संजोकर रखा है। घर के उसी बड़े डांस हॉल में धर्मेंद्र की एक बहुत बड़ी और सजीव तस्वीर लगाई गई है। इस होम टूर के दौरान अपने पिता की तस्वीर को देखकर बेटी ईशा देओल काफी भावुक भी हो गईं। इसके अलावा बंगले के एक अन्य विशेष कमरे में रखे सोफों पर जो कुशन (तकिए) मौजूद हैं, उन पर भी हेमा मालिनी और धर्मेंद्र की बेहद खूबसूरत तस्वीरें छपी हुई हैं, जो लिविंग एरिया की रौनक में चार चांद लगाती हैं।

सादगी भरा डाइनिंग एरिया और घर में हैं दो रसोई घर

इतने बड़े और आलीशान बंगले के बावजूद हेमा मालिनी के रहने के अंदाज में आज भी सादगी झलकती है। घर का डाइनिंग एरिया काफी बड़ा, खुला और बेहद सादगी से भरा हुआ है, जहां पूरा परिवार एक साथ बैठकर भोजन करता है। एक और दिलचस्प बात यह सामने आई कि इस आलीशान आशियाने की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए घर के भीतर दो आधुनिक किचेन (रसोई घर) बनाए गए हैं।

‘दोषी साबित हुई तो बेटी को भी सजा मिले’—माता-पिता ने न्याय व्यवस्था पर जताया भरोसा

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पुणे: केतन अग्रवाल मर्डर केस में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस दर्दनाक घटना ने जहां पूरे देश को हिलाकर रख दिया है, वहीं अब इस मामले में मुख्य आरोपी सिया गोयल के माता-पिता ने पहली बार मीडिया के सामने आकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। अपनी बेटी पर लगे देश को झकझोर देने वाले गंभीर आरोपों के बावजूद, उन्होंने साफ तौर पर कहा कि न्याय सबके लिए बराबर होना चाहिए और जो भी दोषी पाया जाए, उसे सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।

प्रेम प्रसंग में रची गई हत्या की खौफनाक साजिश

पुणे के एक जाने-माने रियल एस्टेट डेवलपर के 22 वर्षीय बेटे केतन अग्रवाल की शादी सिया गोयल से तय हुई थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि सिया का चेतन चौधरी नाम के एक युवक के साथ प्रेम संबंध था और इसी रिश्ते के चलते 18 जून को केतन की बेरहमी से हत्या कर दी गई। आरोप है कि केतन को पहले लोहागढ़ किले ले जाया गया और फिर वहां से लगभग 400 फीट गहरी खाई में धकेल दिया गया। इस खौफनाक वारदात के बाद से ही पूरे राज्य में भारी आक्रोश है और जांच एजेंसियां लगातार सबूत जुटाने में लगी हैं।

"दोषी हो तो बेटी को भी खाई में धकेल दो"

इस घटना के बाद से सिया गोयल का परिवार भी गहरे सदमे में है। तबीयत बिगड़ने के कारण सिया के पिता प्रवीण गोयल को अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराना पड़ा है। अस्पताल से ही मीडिया से बात करते हुए सिया की मां पूजा गोयल ने बेहद भावुक होकर कहा, 'इस मामले में जो भी दोषी हो, उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। भले ही वह मेरी बेटी ही क्यों न हो, कोई भी उसका पक्ष नहीं लेगा। अगर मेरी बेटी का दोष साबित हो जाता है, तो उसे भी ठीक उसी जगह से नीचे धकेल दिया जाना चाहिए जहां से केतन को घाटी में धकेला गया।'

अंधेरे में था परिवार, चेतन के बारे में नहीं थी जानकारी

सिया के पिता प्रवीण गोयल ने न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि अगर केतन के परिवार को सिया के बर्ताव पर कोई शक था और उन्होंने हालात गंभीर होने से पहले हमें बताया होता, तो शायद हम अपनी बेटी को समझाते और इस अनहोनी को रोका जा सकता था। मुख्य सह-आरोपी चेतन चौधरी के बारे में बताते हुए प्रवीण गोयल ने कहा कि उन्होंने कभी चेतन का चेहरा तक नहीं देखा और न ही कभी सिया के मुंह से उसका नाम सुना था, वह कभी उनके घर नहीं आया था।

वर्षों पुराना पारिवारिक रिश्ता हुआ खत्म

केतन के परिवार को याद करते हुए प्रवीण गोयल भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि दोनों परिवारों के बीच कई सालों से बेहद करीबी और दोस्ताना रिश्ते थे। केतन के पिता देवीचंद अग्रवाल अक्सर उनकी ड्राई फ्रूट की दुकान पर आते थे और वे बहुत ही अच्छे संस्कार वाले इंसान हैं। गोयल ने अफसोस जताते हुए कहा कि इस दुखद घटना की वजह से उन्होंने न सिर्फ एक बहुत अच्छे नौजवान को खो दिया, बल्कि एक अच्छे परिवार से अपना सालों पुराना रिश्ता भी हमेशा के लिए गंवा दिया है। फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस के आरोपियों के खिलाफ तेजी से पुख्ता सबूत इकट्ठा करने में जुटी हुई हैं।

 

2 हजार की शिकायत बनी बड़ी कार्रवाई की वजह, 20 करोड़ का बेटिंग गिरोह बेनकाब

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वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक महिला के साथ हुई महज दो हजार रुपये की साइबर धोखाधड़ी की पड़ताल करते हुए साइबर क्राइम पुलिस ने ऑनलाइन सट्टेबाज़ी (बेटिंग ऐप) के एक बहुत बड़े अंतर्राज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। जांच में सामने आया है कि 'ओम वेबसाइट बुक ऐप' के जरिए अब तक करीब 20 करोड़ रुपये का अवैध वित्तीय लेन-देन (ट्रांजेक्शन) किया जा चुका है। पुलिस ने इस रैकेट को ऑपरेट करने वाले दो मुख्य जालसाजों—दीपक सिंह और प्रवीण सिंह (दोनों निवासी कानपुर नगर)—को वाराणसी के जगतगंज स्थित दासनगर कॉलोनी से दबोच लिया है।

डिजिटल सबूत बरामद, 5 लाख रुपये बैंक खातों में कराए गए फ्रीज

पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने 9 स्मार्टफोन, 12 सक्रिय सिम कार्ड और अन्य संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं। इसके साथ ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगों के बैंक खातों में मौजूद 5 लाख रुपये की राशि को होल्ड (फ्रीज) करवा दिया है। तफ्तीश में खुलासा हुआ है कि ये आरोपी ठगी और सट्टे के पैसों को छिपाने के लिए 'म्यूल बैंक खातों' (दूसरों के नाम पर खुले फर्जी खाते), डिजिटल वॉलेट और थर्ड-पार्टी ऐप्स का इस्तेमाल कर निकाल लेते थे। पूछताछ में गैंग के दो अन्य गुर्गों—दिलावर और प्रवीण उर्फ अक्षय—के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।

प्रतिबिंब पोर्टल की शिकायत से खुला राज, इंस्टाग्राम हैक कर फंसाया था जाल में

एसीपी साइबर क्राइम विदुष सक्सेना ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि 'प्रतिबिंब पोर्टल' पर एक पीड़ित महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि किसी ने उसकी इंस्टाग्राम आईडी हैक कर ली और उसके परिचितों से क्यूआर कोड के जरिए 2,000 रुपये ऐंठ लिए। जब पुलिस ने उस ठगी वाले नंबर को सर्विलांस पर लिया, तो कड़ियां जुड़ती चली गईं और पता चला कि यह पैसा 'ओम वेबसाइट ऐप' के सट्टा नेटवर्क में ट्रांसफर हुआ है। यह गिरोह टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर वर्चुअल (विदेशी) नंबरों का इस्तेमाल कर एडमिन पैनल चला रहा था और रोजाना करीब 5 लाख रुपये का अवैध ट्रांजेक्शन कर रहा था।

फर्जी सिम और मर्चेंट क्यूआर कोड का हथकंडा

गिरोह के काम करने का तरीका बेहद शातिर था। सट्टे की रकम जमा कराने और जीतने वालों को 'पे-आउट' (भुगतान) देने के लिए अलग-अलग फर्जी मर्चेंट क्यूआर कोड और बैंक खातों का सहारा लिया जाता था। पकड़े गए मोबाइल फोन्स से पुलिस को बेटिंग पैनल, यूजर आईडी, बैंकिंग स्टेटमेंट्स और ट्रांजेक्शन के स्क्रीनशॉट्स जैसे मजबूत डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। इसके आधार पर पुलिस अब इस नेटवर्क के वित्तीय स्रोतों और इसमें शामिल अन्य सफेदपोशों की कुंडली खंगाल रही है। चार राज्यों में फैले इस नेटवर्क का यह मॉड्यूल वाराणसी में पिछले 3 साल से सक्रिय था और सोशल मीडिया पर बकायदा विज्ञापन चलाकर लोगों को मुनाफे का लालच देता था।

साइबर पुलिस की 23 दिनों के भीतर दूसरी बड़ी कामयाबी

वाराणसी साइबर पुलिस ने महज 23 दिनों के अंतराल में ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ यह दूसरा सबसे बड़ा एक्शन लिया है। इससे पहले 1 जून को पुलिस ने आईपीएल (IPL) सट्टे के नाम पर करीब 2 लाख लोगों से 700 करोड़ रुपये की महाठगी का पर्दाफाश किया था। उस बड़ी कार्रवाई में बीटेक और मैनेजमेंट डिग्री धारकों सहित 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्होंने सिर्फ एक महीने में ही जनता के 25 करोड़ रुपये दांव पर लगवा दिए थे।

पशुपालकों के लिए बड़ी खुशखबरी, दो गाय खरीदने पर मिलेगा 80 हजार रुपये का अनुदान

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने और ग्रामीण पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा 'मुख्यमंत्री स्वदेशी गो-संवर्धन योजना' चलाई जा रही है। इस जनकल्याणकारी योजना के अंतर्गत पशुपालकों को दो उन्नत नस्ल की स्वदेशी गायें खरीदने पर सरकार की तरफ से अधिकतम 80 हजार रुपये तक की सब्सिडी (अनुदान) दी जाएगी। इस कदम से न सिर्फ राज्य में दूध की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि पारंपरिक डेयरी व्यवसाय को भी एक नई दिशा मिलेगी।

महिला और पुरुष पशुपालकों को मिलेगा बराबर मौका

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. डीके पांडे ने योजना की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिले में कुल 28 पशुपालकों को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए इस लक्ष्य में 14 महिला और 14 पुरुष पशुपालकों को शामिल किया गया है। योजना के तहत योग्य और इच्छुक लाभार्थियों का अंतिम चयन दुग्ध विकास विभाग द्वारा पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाएगा।

बाहरी राज्यों से लानी होंगी इन उन्नत नस्लों की गायें

योजना के नियमों के मुताबिक, आवेदन करने वाले गोपालकों को दूसरे राज्यों से उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली स्वदेशी नस्ल की गायें खरीदनी होंगी। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित नस्लें शामिल हैं:

  • गिर

  • साहीवाल

  • थारपारकर

  • हरियाणा नस्ल

इन गायों को खरीदने में आने वाली कुल लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार अनुदान के रूप में वहन करेगी।

कैसे करें आवेदन?

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जो भी पशुपालक या किसान इस योजना का लाभ उठाने के इच्छुक हैं, वे 'नंद बाबा दुग्ध मिशन' के आधिकारिक वेब पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से अपना आवेदन दर्ज करा सकते हैं। आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज और पात्रता संबंधी शर्तें पोर्टल पर उपलब्ध हैं।

वेनेजुएला में भूकंप से तबाही, 235 लोगों की मौत, बचाव अभियान तेज

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कराकस (वेनेजुएला):वेनेजुएला इस समय एक बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है, जहां एक भीषण प्राकृतिक आपदा ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। गुरुवार को आए इस विनाशकारी भूकंप के बाद जानमाल का भारी नुकसान हुआ है, जिसने करीब 28 साल पहले यानी वर्ष 1999 में आए ला गुआइरा (वेनेजुएला) के उस ऐतिहासिक भूस्खलन की यादें ताजा कर दी हैं, जिसे देश की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जाता है। आपदा के इस संकटकाल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवेदनाएं और मदद के हाथ बढ़ने लगे हैं, जिसमें डोमिनिकन गणराज्य की रेस्क्यू टीम सबसे पहले प्रभावित इलाकों में पहुंची है।

राजनीतिक अस्थिरता के बीच राहत कार्यों की चुनौती

प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ वेनेजुएला इस समय गंभीर राजनीतिक संकट से भी जूझ रहा है, जिससे समन्वय के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना बेहद जटिल हो गया है। दरअसल, करीब छह महीने पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर एक अप्रत्याशित सैन्य कार्रवाई में तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया था, जो अब अमेरिकी कोर्ट में मुकदमे का सामना कर रहे हैं। इस गिरफ्तारी के बाद जनवरी में पूर्व उपराष्ट्रपति रोड्रिगेज ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला। वर्तमान माहौल और सत्ता के प्रति जनता के एक वर्ग में पूरी तरह स्वीकार्यता न होने के कारण यह स्थिति कार्यवाहक राष्ट्रपति रोड्रिगेज के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।

स्थानीय सहयोग की अपील और वैश्विक एकजुटता

बदलते हालातों और चुनौतियों को देखते हुए कार्यवाहक राष्ट्रपति रोड्रिगेज ने स्थानीय व्यवसायियों से आगे आने और ला गुआइरा जैसे सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में राहत-बचाव कार्यों के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने की भावुक अपील की है। इस बीच, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वेनेजुएला के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा है कि संकट की इस घड़ी में भारत हरसंभव मदद करने के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं, ओडिशा के पुरी समुद्र तट पर मशहूर सैंड आर्टिस्ट पद्मश्री सुदर्शन पटनायक ने एक खूबसूरत रेत की कलाकृति (सैंड आर्ट) बनाकर वेनेजुएला के भूकंप पीड़ितों के प्रति अपनी और पूरे देश की एकजुटता प्रकट की है।

पेट्रोल-डीजल फिर हो सकते हैं महंगे! वेनेजुएला संकट से बढ़ी चिंता

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काराकास: वेनेजुएला में बीते दिनों एक के बाद एक आए दो विनाशकारी भूकंपों ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण देश में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है और मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस मानवीय संकट के बीच, वैश्विक ऊर्जा बाजार (ग्लोबल एनर्जी मार्केट) में भी हड़कंप मच गया है। वेनेजुएला दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में गिना जाता है, ऐसे में अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या इस संकट की आंच भारत के आम उपभोक्ताओं की जेब तक पहुँचेगी और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे?

भारत के लिए क्यों बढ़ गई है वेनेजुएला की अहमियत?

इस संकट का समय भारत के नजरिए से काफी संवेदनशील है। दरअसल, पिछले कुछ महीनों में मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत ने रणनीतिक रूप से वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात (इम्पोर्ट) काफी बढ़ा दिया था। पेट्रोलियम मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल और मई 2026 में वेनेजुएला भारत के प्रमुख क्रूड सप्लायर्स की सूची में ऊपर आ गया है। जहाँ वित्त वर्ष 2025-26 में वेनेजुएला से हर महीने औसतन 64,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल आता था, वहीं अप्रैल-मई 2026 में यह आयात बढ़कर 10 लाख मीट्रिक टन प्रति माह के पार पहुँच चुका है।

क्या तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को पहुँचा है नुकसान?

शुरुआती समीक्षा रिपोर्टों के अनुसार, भारत के लिए एक राहत भरी खबर यह है कि वेनेजुएला का मुख्य ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर इस भीषण भूकंप की मार से काफी हद तक सुरक्षित है। तेल उत्पादन, रिफाइनिंग और निर्यात से जुड़े कामकाज में फिलहाल किसी बड़े व्यवधान या रुकावट की पुष्टि नहीं हुई है। भूकंप का सबसे घातक असर राजधानी काराकास और उसके आस-पास के आवासीय क्षेत्रों, परिवहन नेटवर्क और सार्वजनिक सुविधाओं पर पड़ा है। हालांकि, औद्योगिक क्षेत्रों, बड़ी पाइपलाइनों और एक्सपोर्ट टर्मिनल्स की सुरक्षा की बारीकी से जांच की जा रही है। अगर भविष्य में किसी आंतरिक या ढांचागत नुकसान का पता चलता है, तो ही सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है।

भारत के पास हैं कई विकल्प, तेल संकट का खतरा बेहद कम

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इस आपदा से भारत में तेल का कोई बड़ा संकट पैदा होने की उम्मीद न के बराबर है। इसकी मुख्य वजह यह है कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों के लिए किसी एक देश पर निर्भर नहीं है, बल्कि वह रूस, इराक, सऊदी अरब, यूएई, अमेरिका और ब्राजील समेत 35 से अधिक देशों से क्रूड ऑयल खरीदता है। इस समय रूस भारत का सबसे बड़ा तेल भागीदार बना हुआ है। यदि वेनेजुएला से तेल की खेप आने में कुछ देरी भी होती है, तो भारतीय तेल कंपनियों के पास पर्याप्त बैकअप इन्वेंट्री (सुरक्षित स्टॉक) मौजूद है और वे दूसरे देशों से भी इसकी भरपाई कर सकती हैं।

आम जनता की जेब पर क्या होगा असर?

भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सीधी बात यह है कि इस भूकंप का घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ने वाला है। भारत में ईंधन की खुदरा कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय क्रूड के दामों से तय नहीं होतीं, बल्कि इनमें डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, केंद्र व राज्य सरकारों के टैक्स और घरेलू तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के मार्जिन की बड़ी भूमिका होती है।

विशेषज्ञों का आकलन: हालांकि तुरंत कोई असर नहीं दिखेगा, लेकिन यदि आने वाले हफ्तों में वेनेजुएला के ऑयल फील्ड्स में किसी बड़े गुप्त नुकसान की बात सामने आती है और ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक आसमान पर बनी रहती हैं, तो भविष्य में भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका आंशिक बोझ पड़ सकता है।

भाजपा की नई कार्यकारिणी में कई चौंकाने वाले नाम, 27 समीकरण साधने की कोशिश

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लखनऊ: आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लंबी प्रतीक्षा, अनगिनत अटकलों और लखनऊ से दिल्ली तक कई दौर की मैराथन बैठकों के बाद अपनी नई प्रदेश कार्यकारिणी घोषित कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी द्वारा घोषित इस 48 सदस्यीय टीम पर प्रभावशाली नेताओं के सामंजस्य, समझौते और अंदरूनी संतुलन की स्पष्ट छाया दिखाई दे रही है। इस नई टीम में पुराने चेहरों के स्थान पर नए लोगों को मौका देकर नयापन लाने की कोशिश की गई है, जिसमें दूसरे दलों से आए नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

कई दिग्गजों की छुट्टी, नीरज सिंह को बड़ी जिम्मेदारी

पार्टी ने आगामी चुनाव में नया नेतृत्व उभारने का संदेश देने के लिए पुरानी टीम के आधे से ज्यादा चेहरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इस बड़े बदलाव में विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र व नोएडा से विधायक पंकज सिंह जैसे कद्दावर नेताओं को नई टीम में जगह नहीं मिली है। हालांकि, पंकज सिंह की जगह उनके छोटे भाई नीरज सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है, जो संगठन पर बड़े नेताओं के प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। कुछ पुराने पदाधिकारियों को पदोन्नति देकर कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने का प्रयास भी किया गया है।

कोर वोट बैंक पर फोकस, पर जातीय असंतुलन बरकरार

पार्टी नेतृत्व ने इस टीम के जरिए अपने कोर वोट बैंक—पिछड़ी, अति पिछड़ी और दलित जातियों को भरपूर हिस्सेदारी दी है। अगड़े और पिछड़े वर्ग के बीच संतुलन बनाने की पुरजोर कोशिश की गई है, लेकिन इसके बावजूद जातियों की आबादी के लिहाज से समानुपातिक असंतुलन खुलकर सामने आ गया है। इस कोशिश में कुछ ऐसे विवादित या अप्रत्याशित चेहरों को भी जगह मिल गई है, जो आने वाले दिनों में संगठन के लिए तीखी आलोचना का आधार बन सकते हैं।

ब्राह्मणों और भूमिहारों के प्रतिनिधित्व पर उठे सवाल

नई कार्यकारिणी में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने का दावा तो किया गया है, लेकिन आंकड़ों के लिहाज से यह पूरी तरह संभव नहीं हो पाया है। प्रदेश में करीब 12 से 14 फीसदी आबादी वाले ब्राह्मण समाज को इस बार जनसंख्या के अनुपात में कम प्रतिनिधित्व मिला है। इसके विपरीत, राज्य में महज 1 फीसदी आबादी वाले भूमिहार या त्यागी समाज को ज्यादा तवज्जो दी गई है। घोषित 48 सदस्यीय टीम में अकेले भूमिहार समाज से 4 पदाधिकारी बनाए गए हैं, जिसे लेकर अब संगठन के भीतर और बाहर असंतुलन के सवाल खड़े होने लगे हैं।

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