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भोपाल में बाघ से आमना-सामना, महिला की सूझबूझ से बची दंपती की जान

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भोपाल: राजधानी भोपाल के चंदनपुरा क्षेत्र में शुक्रवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने एक टाइगर (बाघ) को बेहद करीब से देखा। सुबह करीब 6:30 से 7:00 बजे के बीच हुई इस घटना में एक दंपती तो बाघ के बिल्कुल आमने-सामने आ गया था। महिला के सूझबूझ दिखाते हुए शोर मचाने पर बाघ झाड़ियों की तरफ भाग गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद सुबह करीब 9:00 बजे वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और इलाके में सर्चिंग अभियान शुरू कर दिया है।

दंपती के करीब पहुंचा बाघ, मचा हड़कंप

मॉर्निंग वॉक पर निकली महिला ने बताया कि वह अपने पति के साथ टहल रही थी, तभी उसके पास से एक जानवर गुजरा। शुरुआत में उसे लगा कि वह कोई कुत्ता है, लेकिन ध्यान से देखने पर पता चला कि वह साक्षात बाघ था। महिला ने तुरंत चिल्लाकर कुछ दूरी पर चल रहे अपने पति को आवाज दी, जिसके बाद बाघ झाड़ियों में ओझल हो गया। इस दौरान वहां मौजूद अन्य लोगों ने भी बाघ को देखा और उसकी दहाड़ सुनी, जिससे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ लोगों ने सुरक्षित दूरी से बाघ का वीडियो भी बनाया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बाद में बाघ चंदनपुरा के ही एक निजी फार्महाउस की बाउंड्री के अंदर चला गया।

सुरक्षा जाली का खुला हिस्सा और बढ़ती इंसानी दखल

वन्यजीव एक्सपर्ट राशिद नूर ने बताया कि इस क्षेत्र में सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी जाली लगाई गई है, लेकिन उसका एक हिस्सा खुला हुआ है। आशंका है कि बाघ उसी खुले रास्ते से रिहायशी इलाके की तरफ आ गया। एक्सपर्ट्स के अनुसार, चंदनपुरा क्षेत्र बाघों के प्राकृतिक कॉरिडोर (रास्ते) के बेहद नजदीक है, जहां लंबे समय से बाघों का मूवमेंट रहा है। लेकिन अब इस इलाके में लगातार हो रहे निर्माण कार्यों, भूमि विकास और लोगों की बढ़ती आवाजाही के कारण बाघों के प्राकृतिक रास्ते प्रभावित हो रहे हैं, जिससे मानव-बाघ संघर्ष का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

इलाके में स्थायी चौकी नहीं, वन विभाग की अपील

विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए कहा है कि इस संवेदनशील इलाके में वन विभाग की कोई स्थायी चौकी नहीं है, जिससे वन्यजीवों की निगरानी प्रभावित होती है। यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। फिलहाल, वन विभाग की टीम लगातार बाघ की लोकेशन ट्रेस करने और उसे वापस जंगल की ओर खदेड़ने के प्रयास में जुटी हुई है। प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों और मॉर्निंग वॉकर्स से अपील की है कि जब तक सर्चिंग ऑपरेशन पूरा नहीं हो जाता, तब तक वे चंदनपुरा और जंगल से लगे इलाकों में जाने से पूरी तरह बचें।

रींगस में दर्दनाक रात: खाटूश्यामजी से लौट रहे दो श्रद्धालुओं की मौत

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सीकर: राजस्थान के सीकर जिले के रींगस इलाके में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-52 (NH-52) पर गुरुवार की रात हादसों का दौर रहा। हाईवे पर अलग-अलग जगहों पर हुए भीषण हादसों में एक महिला सहित दो लोगों ने अपनी जान गंवा दी, जबकि 13 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पहली दर्दनाक घटना सिंगोद मोड़ के समीप हुई, जहाँ खाटूश्यामजी के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं की गाड़ी दुर्घटना का शिकार हो गई। इस हादसे में एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई और दो युवतियां घायल हो गईं।

पीछे से आ रही पिकअप ने कार को मारी जोरदार टक्कर

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के लखनऊ का रहने वाला एक श्रद्धालु परिवार निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर बाबा श्याम के दर्शन करने आया था। दर्शन करने के बाद सभी अर्टिगा कार से वापस जयपुर की तरफ लौट रहे थे। इसी दौरान रींगस-जयपुर मार्ग पर पीछे से आ रही एक अनियंत्रित तेज रफ्तार पिकअप ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। इस हादसे में कार सवार महिला मंजू तिवारी की घटनास्थल पर ही सांसें थम गईं, जबकि कार में बैठी दो अन्य युवतियां गंभीर रूप से जख्मी हो गईं। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तुरंत राजकीय उप जिला अस्पताल पहुँचाया गया।

दूध के कंटेनर ने टेंपो को रौंदा, 9 भक्त घायल

रींगस क्षेत्र में ही दूसरा बड़ा हादसा एनएच-52 पर सीएनजी पेट्रोल पंप के ठीक सामने हुआ। यहाँ श्याम भक्तों से खचाखच भरे एक टेंपो को तेज रफ्तार दूध के कंटेनर ने अपनी चपेट में ले लिया। इस टक्कर के कारण टेंपो में सवार 9 श्रद्धालु घायल हो गए। अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद 6 श्रद्धालुओं की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बड़े मेडिकल सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि टेंपो में सवार सभी भक्त उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, जो खाटूश्यामजी के दर्शन के लिए आगे बढ़ रहे थे।

क्रेन चालक ने पेश की इंसानियत की मिसाल

इस हादसे के बीच मौके पर मौजूद रिकवरी क्रेन के ड्राइवर सोहनलाल यादव ने तत्परता दिखाते हुए मानवता की मिसाल पेश की। उन्होंने बिना वक्त गंवाए सभी लहूलुहान घायलों को तुरंत अपनी मदद से अस्पताल पहुँचाया, जिससे कई लोगों की जान बच सकी।

ठिकरिया के पास अज्ञात वाहन की टक्कर से एक और मौत

रींगस के ठिकरिया इलाके के पास एक तीसरी घटना भी सामने आई, जहाँ सड़क पार कर रहे या चल रहे एक अज्ञात श्रद्धालु को किसी तेज रफ्तार वाहन ने कुचल दिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि उस व्यक्ति ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सूचना मिलने के बाद रींगस थाना पुलिस ने सभी दुर्घटना स्थलों पर पहुँचकर क्षतिग्रस्त वाहनों को क्रेन की मदद से हटवाया और हाईवे पर यातायात व्यवस्था को दोबारा सुचारू किया। फिलहाल पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर सभी मामलों की जांच शुरू कर दी है।

घर से बुलाकर ले गए और उतार दिया मौत के घाट, हत्या से सनसनी

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आरा: भोजपुर जिले के आरा शहर में बेखौफ अपराधियों ने कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए एक सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है। नगर थाना क्षेत्र के धरहरा पुल के पास अपराधियों ने एक युवक की गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा और दहशत का माहौल है। वारदात की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और शव को अपने कब्जे में लेकर मामले की तफ्तीश में जुट गई है।

नाश्ते के बहाने घर से ले गए थे साथ

मृतक की पहचान नवादा थाना क्षेत्र के श्री टोला (वार्ड संख्या-36) के रहने वाले 28 वर्षीय चंदन यादव के रूप में हुई है। चंदन की पत्नी गीता देवी ने बताया कि गुरुवार की रात कुछ लोग चंदन को नाश्ता करने के बहाने बहला-फुसलाकर अपने साथ घर से बुलाकर ले गए थे। इसके बाद धरहरा मुसहर टोली के पास घात लगाए अपराधियों ने चंदन पर बेहद करीब से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली चंदन के पेट के दाहिने हिस्से में लगी, जिससे अत्यधिक खून बह जाने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

साजिश के तहत हत्या का आरोप

इस घटना को लेकर मृतक की पत्नी गीता देवी ने कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि चंदन का पहले भी कुछ स्थानीय लोगों के साथ विवाद चल रहा था। आरोप है कि उन्हीं विरोधियों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत चंदन को घर से बाहर बुलाया और उसकी हत्या कर दी।

प्रेम-प्रसंग और पुराना विवाद: दोनों पहलुओं पर जांच तेज

दूसरी ओर, इस हत्याकांड को लेकर इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मामले में प्रेम-प्रसंग का एंगल भी सामने आ रहा है। नगर थाना पुलिस का कहना है कि वे किसी एक नतीजे पर पहुँचने के बजाय हर संभावित पहलू को खंगाल रहे हैं। परिजनों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और उस आधार पर संदिग्धों की तलाश तेज कर दी गई है।

जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे आरोपी

नगर थाना पुलिस ने स्थानीय निवासियों और परिजनों को आश्वासन दिया है कि अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। डिजिटल साक्ष्य और गुप्त सूचनाओं के आधार पर छापेमारी की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और इस जघन्य हत्याकांड की असली वजह दुनिया के सामने आ जाएगी।

मुहर्रम जुलूस में मातम, रतलाम में करंट लगने से 3 लोगों की मौत, कई घायल

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रतलाम (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है, जहां गुरुवार की रात मोहर्रम के कार्यक्रम के दौरान करंट लगने से एक बड़ा हादसा हो गया। इस दुखद घटना में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 11 अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए इलाज जारी है।

हाईटेंशन लाइन की चपेट में आया ताजिया

यह दर्दनाक हादसा पिपलोदा क्षेत्र के हतनारा गांव का है, जहां मुहर्रम के मौके पर ताजिया का जुलूस निकाला जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, निकाले जा रहे ताजिया की ऊंचाई करीब 20 फीट थी। जुलूस के दौरान रास्ते से गुजर रही बिजली की हाईटेंशन लाइन काफी नीचे थी, जिस पर किसी का ध्यान नहीं गया और ताजिया सीधे तारों से टकरा गया। ताजिया के संपर्क में आते ही पूरी गाड़ी में करंट फैल गया, जिससे वहां चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई।

प्रशासनिक लापरवाही के आरोप, पुलिस जांच में जुटी

अस्पताल के डॉक्टर रविंद्र सोलंकी ने हादसे में तीन लोगों की मौत की पुष्टि की है, जिनकी पहचान रशीद खान, सड्डू हुसैन और अरबाज खान के रूप में हुई है। इस घटना को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। मौके पर मौजूद लोगों का आरोप है कि इतने बड़े आयोजन के दौरान प्रशासन और बिजली विभाग की गंभीर लापरवाही रही, क्योंकि हादसे के वक्त न तो वहां कोई पुलिसकर्मी तैनात था और न ही बिजली कटौती की गई थी। फिलहाल, पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हाईटेंशन लाइन की ऊंचाई व सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर बारीकी से जांच शुरू कर दी है।

बस्तर परिवहन विभाग का अलर्ट, ई-चालान के फर्जी मैसेज से रहें सतर्क

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जगदलपुर (बस्तर): अगर आपके मोबाइल फोन पर भी अचानक ट्रैफिक नियम उल्लंघन या किसी ई-चालान के भुगतान का मैसेज आया है, तो फौरन सतर्क हो जाइए। यह आपके बैंक खाते को पूरी तरह खाली करने के लिए साइबर अपराधियों द्वारा बुना गया एक खतरनाक जाल हो सकता है। बस्तर क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) ने इस संबंध में एक बेहद जरूरी सुरक्षा एडवाइजरी जारी करते हुए आम नागरिकों और वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की हिदायत दी है।

असली सरकारी पोर्टल जैसी हूबहू नकली वेबसाइट से धोखा

परिवहन विभाग की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, इन दिनों साइबर ठग लोगों को झांसा देने के लिए फर्जी ई-चालान लिंक का सहारा ले रहे हैं। ये धोखेबाज मुख्य रूप से अनजान मोबाइल नंबरों के जरिए एसएमएस (SMS), व्हाट्सएप या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिंक भेजते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इस संदिग्ध लिंक पर क्लिक करता है, उसके सामने परिवहन विभाग के असली सरकारी पोर्टल जैसी ही दिखने वाली एक फर्जी वेबसाइट खुल जाती है।

डर का फायदा उठाकर चुरा रहे हैं बैंकिंग डिटेल्स

विभाग ने बताया कि इस नकली वेबसाइट पर लोगों को भारी-भरकम जुर्माने या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया जाता है। इसके बाद डरे हुए नागरिकों से ऑनलाइन भुगतान करने के नाम पर उनके बैंक खाते की गोपनीय जानकारी, क्रेडिट/डेबिट कार्ड के नंबर और ओटीपी (OTP) चुरा लिए जाते हैं। परिवहन विभाग ने साफ तौर पर अपील की है कि किसी भी गैर-आधिकारिक या अज्ञात नंबर से आए संदेश को सच न मानें और न ही घबराएं।

परिवहन विभाग की ओर से जरूरी सुरक्षा टिप्स:

  • आधिकारिक माध्यम का ही करें उपयोग: अपने वाहन का चालान चेक या भुगतान करने के लिए हमेशा सीधे भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर ही जाएं।

  • लिंक पर न करें क्लिक: किसी भी अनजान नंबर से आए मैसेज में दिए गए लिंक को भूलकर भी न छुएं।

  • ऐप डाउनलोड करने से बचें: चालान भरने के बहाने अगर कोई अज्ञात ऐप डाउनलोड करने को कहा जाए, तो ऐसा बिल्कुल न करें।

  • गोपनीयता बनाए रखें: अपने बैंक या कार्ड से जुड़ी कोई भी जानकारी किसी अनजान प्लेटफॉर्म पर साझा न करें।

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का बड़ा खुलासा, आठ लोगों की साजिश से उड़ाए गए लाखों

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अयोध्या: राम मंदिर में हुए करोड़ों रुपये के चढ़ावा और दान राशि चोरी मामले में आखिरकार बड़ा खुलासा हुआ है। घटना उजागर होने के 19 दिन बाद और एसआईटी (SIT) की सिफारिश के दो दिन बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। यह मुकदमा ट्रस्टी कृष्ण मोहन की तहरीर पर कोतवाली रामजन्मभूमि में दर्ज किया गया है। पुलिस ने साजिश के तहत धोखाधड़ी और चोरी के आरोप में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव समेत सात मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्हें आज जेल भेजा जाएगा।

बाथरूम में छिपाते थे नोट, तीन करोड़ बरामद

जांच में सामने आया है कि चढ़ावे की चोरी का यह खेल पिछले दो से तीन साल से चल रहा था। आरोपी रकम पार करने के बाद नोटों की गड्डियों को बाथरूम में छिपा देते थे और मौका मिलते ही उसे मंदिर से बाहर ले जाकर आपस में बांट लेते थे। एसआईटी की जांच में करोड़ों की नकदी और जेवरातों की हेराफेरी की पुष्टि हुई है। ट्रस्ट ने संदिग्धों को पकड़कर उनकी निशानदेही पर करीब तीन करोड़ रुपये बरामद किए थे, वहीं पुलिस पूछताछ के दौरान अब तक करीब 60 लाख रुपये और बरामद होने की सूचना है।

संगठित अपराध के तहत लगेगा गैंगस्टर एक्ट

इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार चंपत राय का करीबी टिन्नू यादव और गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव थे। सुभाष ही तय करता था कि पैसों की गिनती (गणना) में किसकी ड्यूटी लगेगी। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इन सभी की पहचान की गई है। चूंकि यह करोड़ों की हेराफेरी का बेहद संवेदनशील मामला है, इसलिए इसकी जांच के लिए किसी आईपीएस या पीपीएस अफसर के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की जा सकती है। इस सुनियोजित चोरी को संगठित अपराध मानते हुए पुलिस जांच पूरी होने के बाद आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट भी लगाएगी।

बैंक अफसरों की मिलीभगत और इस्तीफों की अफवाह

पकड़े गए आरोपियों से रात भर हुई पूछताछ में कई सरकारी बैंक अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस को बैंककर्मियों के इस खेल में शामिल होने के पुख्ता साक्ष्य मिले हैं, जिसके चलते एफआईआर में सरकारी अधिकारी के शामिल होने की धारा भी जोड़ी गई है। इस बड़े विवाद के बीच रामनगरी में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे की अफवाहें दिनभर उड़ती रहीं। हालांकि, मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव ने इन चर्चाओं को पूरी तरह भ्रामक और गलत बताया है।

मामले पर गरमाई राजनीति, केजरीवाल ने उठाए सवाल

इस मामले को लेकर अब सियासत भी पूरी तरह गरमा गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल अयोध्या पहुंचे हैं, जहां उन्होंने आरोप लगाया कि भगवान के घर में डाका डाला गया है और एसआईटी केवल बड़े लोगों को बचाने के लिए लीपापोती कर रही है। दूसरी तरफ, अयोध्या के संत समाज के एक वर्ग ने केजरीवाल के इस दौरे का कड़ा विरोध किया है। हनुमानगढ़ी के पुजारी राजूदास और जगद्गुरु परमहंसाचार्य समेत पंडा समाज ने उनके आगमन पर गहरी आपत्ति जताई है।

सुरक्षा घेरे को भेदकर शहर में दाखिल हुए निहंग, देहरादून में बढ़ी चिंता

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देहरादून: उत्तराखंड के कर्णप्रयाग और रुद्रप्रयाग में हुई हालिया घटनाओं के बाद पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चमोली जिले के कर्णप्रयाग में निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के बीच हुए विवाद के बाद तनाव का माहौल है। इसके जवाब में चंडीगढ़ से हिमाचल के रास्ते उत्तराखंड की ओर कूच कर रहे करीब 200 निहंगों को रोकने के लिए देहरादून पुलिस ने हिमाचल सीमा से लगे कुल्हाल चेक पोस्ट पर कड़े इंतजाम किए थे। पुलिस ने दावा किया था कि सीमावर्ती इलाकों, वाहनों की जांच और बैरिकेडिंग के साथ-साथ प्रेमनगर क्षेत्र में भी भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

सुरक्षा घेरा तोड़कर शहर में घुसा जत्था

पुलिस की इस भारी मुस्तैदी और दावों के बावजूद निहंगों का एक जत्था सुरक्षा घेरे को चकमा देकर देहरादून शहर के भीतर दाखिल हो गया। मुख्य मार्गों पर चौकसी होने के कारण यह जत्था वैकल्पिक और अंदरूनी रास्तों का इस्तेमाल करते हुए शहर के काफी अंदर तक पहुंच गया। जब निहंगों की यह टोली पटेलनगर थाना क्षेत्र तक आ गई, तब जाकर पुलिस प्रशासन को इसकी भनक लगी। सीमा पर इतनी सख्त पहरेदारी होने के बाद भी जत्थे का शहर के बीचों-बीच पहुंच जाना पुलिस के खुफिया तंत्र, घेराबंदी और आपसी तालमेल की बड़ी नाकामी को दर्शाता है।

बातचीत के बाद जत्था वापस लौटा, चौकसी बढ़ी

निहंगों के शहर में प्रवेश की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आई और मौके पर भारी फोर्स तैनात की गई। पुलिस अधिकारियों ने निहंगों के इस जत्थे को पटेलनगर में ही रोक लिया। इसके बाद पुलिस और जत्थे के बीच काफी देर तक बातचीत और समझाइश का दौर चला, जिसके बाद उन्हें शहर से वापस भेज दिया गया। एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि निहंगों को वापस भेज दिया गया है और फिलहाल पूरे क्षेत्र में शांति व्यवस्था पूरी तरह कायम है। हालांकि, सीमा पर मुस्तैदी के बावजूद हुए इस घटनाक्रम से स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है और पुलिस अब हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रख रही है।

राजस्थान में 76 नई नगरपालिकाएं बनेंगी, चुनाव से पहले सरकार का बड़ा फैसला

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जयपुर: राजस्थान में होने वाले आगामी नगरीय निकाय चुनावों से पहले राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने राज्य में 76 नई नगरपालिकाओं के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। स्वायत्त शासन विभाग (DLB) द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, इन नई नगरपालिकाओं को तुरंत प्रभाव से मंजूरी दे दी गई है। आपको बता दें कि यह कदम सरकार द्वारा बजट में की गई घोषणाओं को धरातल पर उतारने के तहत उठाया गया है। इसके साथ ही, इन नए निकायों को व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए प्रशासन ने 684 नए सरकारी पदों को भी मंजूरी दी है।

प्रदेश में अब 385 हुए नगरीय निकाय, जयपुर-झुंझुनूं में सबसे ज्यादा

सरकार के इस बड़े फैसले के बाद राजस्थान में नगर निकायों की कुल संख्या अब 309 से छलांग लगाकर सीधे 385 पर पहुँच जाएगी। आंकड़ों की बात करें तो इस बार जयपुर और झुंझुनूं जिलों को सबसे ज्यादा सौगात मिली है, जहाँ दोनों ही जिलों में 7-7 नई नगरपालिकाएं बनाई गई हैं। राजधानी जयपुर की बात करें तो यहाँ के वाटिका, दूदू, फागी, जमवारामगढ़, कानोता, खेजरोली और कालाडेरा को नगरपालिका का दर्जा दिया गया है।

शहरीकरण को मिलेगी रफ्तार और युवाओं के लिए खुलेंगे नौकरियों के द्वार

इस फैसले से राज्य के उन कस्बों को सीधा फायदा मिलेगा जो बहुत तेजी से शहर का रूप ले रहे हैं। नई व्यवस्था लागू होने से स्थानीय स्तर पर न सिर्फ प्रशासनिक कामकाज मजबूत होगा, बल्कि आम जनता को पानी, सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं बेहतर ढंग से मिल सकेंगी। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को भी जमीन पर तेजी से लागू किया जा सकेगा। इसके अलावा, नए पद सृजित होने से युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों के बेहतरीन अवसर पैदा होंगे, जिससे भर्ती प्रक्रिया को भी गति मिलेगी।

इन महत्वपूर्ण पदों की भर्ती को मिली हरी झंडी

नई नगरपालिकाओं के प्रशासनिक ढांचे को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने विभिन्न विभागों के लिए 76-76 पदों के सृजन को मंजूरी दी है। स्वीकृत किए गए कुल 684 पदों में ये प्रमुख पद शामिल हैं:

  • अधिशाषी अधिकारी-चतुर्थ (EO)

  • सहायक राजस्व निरीक्षक (ARI)

  • कनिष्ठ अभियंता – सिविल (JEN)

  • कनिष्ठ लेखाकार (Junior Accountant)

  • ठोस कचरा प्रबंधक / स्वास्थ्य निरीक्षक-सेकंड

  • वरिष्ठ प्रारूपकार (Senior Draftsman)

  • वरिष्ठ सहायक और कनिष्ठ सहायक (LDC)

नशे के खिलाफ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संकल्प, युवाओं से की जागरूक बनने की अपील

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भोपाल: आज 26 जून को देश और दुनिया भर में 'अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस' मनाया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी प्रदेशवासियों से नशे के खिलाफ चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों में सक्रिय रूप से जुड़ने की भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि यह दिन हमें नशे के घातक दुष्प्रभावों के प्रति हमेशा सजग रहने की प्रेरणा देता है। सीएम ने आह्वान किया कि हर नागरिक नशामुक्त समाज के निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान दे, ताकि एक स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त भारत के संकल्प को साकार किया जा सके।

संयुक्त राष्ट्र ने 1987 में की थी शुरुआत

इस दिन का इतिहास काफी महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 1987 में पारित किए गए एक विशेष प्रस्ताव के बाद हुई थी। तब से लेकर आज तक हर साल 26 जून को यह दिवस वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य मादक पदार्थों के सेवन और उनकी अवैध तस्करी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाना है, ताकि सरकारों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को एक मंच पर लाकर नशे से प्रभावित लोगों के इलाज और उनके पुनर्वास को बढ़ावा दिया जा सके।

नशे के दुष्प्रभाव और समाज पर इसका असर

स्वास्थ्य और सामाजिक विशेषज्ञों के अनुसार, नशा केवल एक व्यक्ति के शरीर को ही नष्ट नहीं करता, बल्कि उसके पूरे परिवार, समाज और देश की तरक्की को भी पूरी तरह बर्बाद कर देता है। मादक पदार्थों का लगातार सेवन करने से दिल, लिवर, फेफड़ों और दिमाग पर बेहद गंभीर और जानलेवा असर पड़ता है। इसके कारण मानसिक तनाव, अवसाद (Depression), चिंता और हिंसक प्रवृत्तियां तेजी से बढ़ती हैं। इतना ही नहीं, इससे युवाओं की शिक्षा, करियर और आर्थिक स्थिति खराब होती है, जिससे समाज में अपराध और सड़क दुर्घटनाएं भी बढ़ती हैं।

जागरूकता और एकजुटता ही है एकमात्र समाधान

इस वैश्विक अभियान का मूल संदेश यही है कि केवल कड़े कानून, सही शिक्षा, परिवार के अटूट सहयोग और समय पर उचित इलाज के जरिए ही नशे की इस भयानक चुनौती का सामना किया जा सकता है। यह दिन महज एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को नशे के खिलाफ एकजुट करने का एक बड़ा आंदोलन है। सभी की सक्रिय भागीदारी से ही एक नशामुक्त, सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य का निर्माण संभव है।

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अयोध्या घोटाला: जांच रिपोर्ट के गायब होने से तेज हुई सियासी और प्रशासनिक हलचल

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अयोध्या: राम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि की चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद, ट्रस्ट द्वारा की गई जमीनों की खरीद-फरोख्त के पुराने विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। इस पूरे प्रकरण में जमीन सौदों संबंधी वित्तीय गड़बड़ियों की जांच के लिए पांच साल पहले गठित की गई 'राधेश्याम मिश्रा कमेटी' की रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं हो सकी है। हालांकि, ताजा घटनाक्रम के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम (SIT) ने अब इन पुराने जमीन विवादों को भी अपनी जांच के दायरे में शामिल कर लिया है।

5 मिनट में 2 करोड़ की जमीन हुई 18 करोड़ की, चंदे के पैसों के नुकसान का आरोप

सामने आए विवरण के मुताबिक, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने वर्ष 2020 और 2021 के दौरान कई जमीनों के सौदे किए थे, जिन पर बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत चुकाने के गंभीर आरोप लगे हैं। एक मामले में एक किसान से महज 2 करोड़ रुपये में खरीदी गई जमीन को सिर्फ 5 मिनट के भीतर ट्रस्ट को 18.5 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। इस अकेले सौदे में करीब 16.5 करोड़ रुपये के अंतर का दावा किया गया है। इस बैनामे में तत्कालीन मेयर ऋषिकेश उपाध्याय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा गवाह के रूप में शामिल थे।

इसी तरह एक अन्य सौदे के तहत, तत्कालीन मेयर के भतीजे दीप नारायण ने फरवरी 2021 में जो जमीन 20 लाख रुपये में खरीदी थी, उसे महज कुछ महीनों बाद मई 2021 में ट्रस्ट को 2.5 करोड़ रुपये में बेच दिया गया, जिससे सीधे तौर पर 2.30 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया गया।

सरकारी और नजूल भूमि को भी महंगे दामों पर खरीदने का दावा

इस मामले को लेकर विपक्षी दल के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एसआईटी के अध्यक्ष विजय विश्वास पंत और सदस्य नील रतन से मुलाकात कर 11 महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंपे हैं। सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार:

  • गाटा संख्या 247 की जमीन: अप्रैल 2024 में इस जमीन को 2.93 करोड़ रुपये के वास्तविक मूल्य के बजाय ₹23.61 करोड़ की भारी-भरकम राशि में खरीदा गया। आरोप है कि यह जमीन राजस्व रिकॉर्ड में नजूल (सरकारी भूमि) के रूप में दर्ज थी।

  • नवंबर 2023 का सौदा: करीब 9 करोड़ रुपये मूल्य की एक अन्य जमीन को ₹55.47 करोड़ में ट्रस्ट द्वारा खरीदा गया।

सांसद ने आरोप लगाया है कि चढ़ावा चोरी में संलिप्त कुछ लोगों की भूमिका इन जमीन सौदों में भी रही है, जिससे मंदिर के चंदे की राशि को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने महंत रघुवर शरण और यशोदा नंदन त्रिपाठी से जुड़े भूमि सौदों की भी गहन जांच की मांग की है।

कमेटी की जांच अधूरी, जनहित याचिका पर भी बढ़ा दबाव

इन विवादों को लेकर पूर्व में अदालत में एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई थी। उस दौरान सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए राधेश्याम मिश्रा कमेटी का गठन किया जा चुका है और उसे एक से दो सप्ताह का समय दिया गया है। इस आश्वासन के बाद अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया था, लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी वह जांच रिपोर्ट ठंडे बस्ते में ही पड़ी रही। अब एसआईटी इन नए और पुराने दोनों दस्तावेजों के आधार पर विस्तृत जांच को आगे बढ़ा रही है।

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