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रामगढ़ सड़क हादसे से दहला झारखंड, यात्री वाहन के परखच्चे उड़े, 7 की मौत

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रामगढ़ (झारखंड): झारखंड के रामगढ़ जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां गुरुवार की देर रात एक भीषण सड़क हादसे में सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है। यह दर्दनाक दुर्घटना रामगढ़-बोकारो मार्ग पर स्थित राजरप्पा थाना क्षेत्र के लारी के पास करीब आधी रात को हुई।

ट्रक और यात्री वाहन में जोरदार भिड़ंत

जानकारी के अनुसार, रात के करीब 12 बजे एक यात्री वाहन और ट्रक के बीच इतनी जोरदार टक्कर हुई कि वाहन के परखच्चे उड़ गए। बताया जा रहा है कि इस गाड़ी में ताशा पार्टी (बैंड-बाजा समूह) के सदस्य सवार थे, जो हादसे की चपेट में आ गए। टक्कर इतनी भयानक थी कि सात लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

घायल अस्पताल में भर्ती, जांच जारी

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से बचाव कार्य शुरू किया। इस घटना में गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति को तुरंत इलाज के लिए रामगढ़ सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस के मुताबिक, जान गंवाने वाले लोगों में राजरप्पा थाना क्षेत्र के मरांगमरचा के रहने वाले लोग भी शामिल हैं। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई व जांच शुरू कर दी है।

भोपाल कांग्रेस को मिला नया नेतृत्व, प्रवीण सक्सेना के हाथों में जिला अध्यक्ष की कमान

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भोपाल: आगामी चुनावों को देखते हुए और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भोपाल जिला कांग्रेस की नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की मंजूरी मिलने के बाद गुरुवार (25 जून 2026) को 52 पदाधिकारियों के नामों वाली नई लिस्ट जारी की गई है। इस नई टीम में प्रवीण सक्सेना को भोपाल जिला कांग्रेस का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि अभिषेक शर्मा को संगठन महासचिव और महेंद्र जाधव को कोषाध्यक्ष की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वरिष्ठ टीम में उपाध्यक्ष और महासचिवों की तैनाती

संगठन में संतुलन बनाने के लिए अनुभवी और युवा चेहरों को शामिल किया गया है। नई कार्यकारिणी में मनीष यादव, वात्सायन जैन (सोनू भाभा), नवीन चौबे, दुली चंद पटेल, अनस उर रहमान, नईम खान, मोहम्मद नफीस, रमीज राजा, महमूद खान और राकेश सुशील शर्मा को उपाध्यक्ष पद की कमान मिली है। वहीं, राम राज तिवारी, भानु प्रकाश सिसौदिया, बाबर खान, फिरोज खान, मेवालाल, अमजद अंजुम, कमाल पाशा, अनिल जाधव, दान सिंह दानी ठाकुर, राकेश कुरेले, राहुल टांक (दाहिया), सादिया खान, दानिश शब्बीर, योगेश सराठे और गोपिल कोटवाल को महासचिव बनाया गया है।

सचिव, प्रवक्ता और सोशल मीडिया विंग को मिली जिम्मेदारी

संगठन के कामकाज में तेजी लाने के लिए सचिवों और प्रवक्ताओं की भी बड़ी टीम उतारी गई है। चेतन साहू, तुफेल अहमद सिद्दीकी, मोहम्मद फैसल कुरैशी, मोहम्मद रिजवान, भंवर लाल प्रजापति, अब्दुल जावेद, इफ्तिखार बेग, नुसरत खान, गिरीश साहू, रेखा रघुवंशी, लीलाधर पंवार, दिनेश मारन, रजनी दुबे, रोशन यादव, उमेश बाथम, विष्णु मारन, मोहम्मद साजिद खान, नादिर शरीफ, रतनलाल, पिंकी सागोडे और पूनम राय को सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा, प्रशांत कुमार गुरुदेव और आनंद सबधानी को प्रवक्ता नियुक्त किया गया है, जबकि आज के दौर में डिजिटल मोर्चे को संभालने के लिए राहुल बबेले और मानवेंद्र शर्मा को सोशल मीडिया प्रभारी बनाया गया है।

अयोध्या चढ़ावा चोरी कांड में नए आरोपियों की एंट्री तय, सबूत खंगाल रही पुलिस

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अयोध्या: राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि में हुई करोड़ों की हेराफेरी के सनसनीखेज खुलासे के 19 दिन बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) की संस्तुति के महज़ दो दिन के भीतर पुलिस ने इस मामले में नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। यह एफआईआर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी अनिल मिश्रा के रिश्तेदार अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा समेत गणना कर्मी मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र और गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव के खिलाफ दर्ज की गई है। इसके अलावा कई अज्ञात लोग भी इस साजिश में शामिल हैं। पुलिस ने मुख्य आरोपी टिन्नू सहित सभी नामजद आरोपियों को हिरासत में ले लिया है।

बाथरूम में छिपाते थे नोटों की गड्डियां, संगठित गिरोह की तरह 3 साल से चल रहा था खेल

पुलिसिया जांच में इस बात का बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी इस चोरी को पिछले दो से तीन साल से अंजाम दे रहे थे। चढ़ावे की गिनती के दौरान आरोपी नोटों की गड्डियों को पार कर मंदिर के ही बाथरूम में छिपा देते थे। बाद में मौका पाकर इन पैसों को मंदिर परिसर से बाहर निकाला जाता था और एक तय ठिकाने पर ले जाकर आपस में बांट लिया जाता था। चूंकि इस पूरे कांड को एक संगठित अपराध (Organized Crime) की तरह अंजाम दिया गया है, इसलिए पुलिस ने साफ किया है कि आरोपियों के खिलाफ जल्द ही गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी विवेचना किसी आईपीएस (IPS) या पीपीएस (PPS) स्तर के वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में गठित टीम को सौंपी जा सकती है।

सरकारी बैंक कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध, बढ़ सकती है आरोपियों की संख्या

इस मामले में पुलिस को कुछ सरकारी बैंक कर्मचारियों के भी शामिल होने के पुख्ता सबूत मिले हैं। एफआईआर में सरकारी अधिकारियों द्वारा चोरी की धाराओं को भी शामिल किया गया है। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में जैसे-जैसे सबूत सामने आएंगे, वैसे-वैसे आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है। ट्रस्ट ने शुरुआत में संदिग्धों को पकड़कर जब पूछताछ की थी, तब इनकी निशानदेही पर करीब 3 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की जा चुकी है। अब गहन जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि कुल कितने करोड़ रुपयों और सोने-चांदी के जेवरातों की हेराफेरी की गई है।

6 जून को हुआ था पर्दाफाश, ट्रस्टी की तहरीर पर दर्ज हुआ केस

राम मंदिर में दान राशि की चोरी का यह पूरा मामला पहली बार 6 जून को सामने आया था, जिसके बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने अपने स्तर पर जांच शुरू की। इसके बाद 13 जून को मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी ने 23 जून को शासन को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी, जिसमें तत्काल एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई थी। इसके बाद बृहस्पतिवार को ट्रस्टी कृष्ण मोहन की लिखित शिकायत पर कोतवाली रामजन्मभूमि में आधिकारिक मामला दर्ज किया गया।

जानिए कौन है आरोपी और मंदिर में क्या थी इनकी भूमिका:

  • रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू: चंपत राय का बेहद करीबी और इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार। इसके पास ही गणना कक्ष की चाबियां रहती थीं और मंदिर की हर व्यवस्था में इसका सीधा दखल था।

  • लवकुश मिश्रा व अनुकल्प मिश्रा: ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा के रिश्तेदार (जीजा-साला)। दोनों की ड्यूटी चढ़ावा गिनने में लगी थी और इनके घरों से चोरी की बड़ी रकम बरामद हुई है।

  • मनीष यादव: मुख्य आरोपी टिन्नू यादव का भतीजा। यह भी नोटों की गिनती की प्रक्रिया में शामिल था और इसके पास से भी चोरी के पैसे मिले हैं।

  • अविनाश शुक्ला: चढ़ावा गणना कर्मी। सूत्रों के मुताबिक, इसके बैंक खाते से करीब 5 लाख रुपये बरामद होने की बात सामने आ रही है।

  • सुभाष श्रीवास्तव: गणना इंचार्ज, जिसकी देखरेख और निगरानी में नोटों की गिनती का पूरा काम होता था।

  • करुणेश पांडेय व रमाशंकर मिश्र: अनुकल्प और लवकुश के साथ मिलकर इस पूरी चोरी की साजिश और पैसों को ठिकाने लगाने में शामिल रहे।

पूजा में कपूर होता है अहम

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सनातन धर्म में पूजा में कपूर बहुत जरुरी होता है। पूजा के बाद आरती में कपूर का उपयोग किया जाता है। कपूर के बिना आरती अधूरी मानी जाती है। कपूर जलाने से नकारात्मकता सकारात्मक ऊर्जा में बदल जाती है। कपूर का उपयोग बीमारियों के इलाज में भी किया जाता है। इसलिए धर्मग्रंथों के साथ आयुर्वेद में भी कपूर के बारे में खासतौर से बताया गया है। ज्योतिषीय और वास्तु उपायों में भी कपूर का उपयोग महत्वपूर्ण रूप से किया जाता है।  भारतीय पूजा पद्धति वैज्ञानिक नजरिये से भी महत्वपूर्ण है।  कपूर के बारे में वैज्ञानिक शोधों के आधार पर भी कहा जाता है कि इसकी सुगंध से जीवाणु, विषाणु आदि बीमारी फैलाने वाले जीव खत्म हो जाते हैं। यह वातावरण को शुद्ध करता है जिससे बीमारी होने खतरा कम हो जाता है।  घर में कपूर जलाने से हानिकारक बैक्टीरिया खत्म होते हैं।
 बाहर हो जाती है दूषित वायु
पूजा या हवन करते समय जब हम कपूर जलाते हैं, तो उससे निकलने वाला धुआं आसपास की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है। कपूर जलाने से आसपास की हवा साफ होने लगती है। खराब हवा घर से बाहर हो जाती है और वातावरण शुद्ध हो जाता है। सुबह-शाम कपूर जलाने से बाहरी नकारात्मक ऊर्जा घर में नहीं आ पाती है। कपूर जलाने से हवा में ऑक्सीजन की मात्रा भी बढ़ सकती है। प्रदूषित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बीमारियों से बचने के लिए कपूर जलाना चाहिए। वास्तु दोष दूर करने में भी कपूर का अच्छा असर होता है। घर के जिस कमरे में शुद्ध वायु आने-जाने के लिए खिड़की, रोशनदान आदि न हों वहां कांच के बर्तन में कपूर रखने से शुद्ध वायु का संचार होता है।

खुशहाली के लिए वास्तुशास्त्र का पालन करें

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सभी अपने घर और जीवन में खुशहाली चाहते हैं पर कई बार हमें मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। अगर हम इस दौरान वास्तुशास्त्र का पालन करें तो आने वाली परेशानियां कम हो सकती हैं। वास्तु विज्ञानियों की मानें तो घर में रखी हर चीज़ को वास्तुशास्त्र के अनुसार रखना चाहिए। इससे वहां रहने वाले लोगों के जीवन पर सकारात्मक असर पड़ता है। अगर कोई व्यक्ति इन नियमों का पालन नहीं करता तो उसके जीवन में कईं तरह की मुसीबतें पैदा हो जाती हैं। कहा जाता है कि वास्तुशास्त्र की हर बात इंसान के जीवन में अहम मानी जाती है। अगर इसमें लिखी सभी बातों को मान लिया जाए तो परिवार के लोगों का जीवन खुशहाल होता है। वहीं अगर वास्तुशास्त्र का पूरी तरह से पालन न किया जाए तो घर में खुशहाली नहीं रहती। कई बार घर के सदस्यों के बीच क्लेश और झगड़े बढ़ने लगते हैं। वास्तुशास्त्र के खास नियम अपनाकर कलह और आर्थिक समस्या से बचा जा सकता है।
उत्तर-पूर्व दिशा को हमेशा साफ-सुधरा रखें
अगर आपके घर में आर्थिक परेशानी चल रही है तो घर की उत्तर-पूर्व दिशा को हमेशा साफ-सुधरा रखें। उत्तर-पूर्व दिशा देवताओं के आगमन की दिशा मानी गई है। इसी दिशा से परिवार में खुशियों और धन की बारिश होती है। कहा जाता है कि इस दिशा में कभी भी कोई भारी सामान नहीं रखना चाहिए। घर की उत्तर-पश्चिम दिशा को भी धन का महत्वपूर्ण स्त्रोत माना गया है। जानकारों का कहना है कि इस दिशा में हमेशा रोशनी मौज़ूद होनी चाहिए। कभी भी इस दिशा में गंदगी नहीं होनी चाहिए। घर की इस दिशा में रोज़ सफाई करना शुभ माना जाता है।
दक्षिण दिशा रखें बंद
दक्षिण दिशा को यम का द्वार माना गया है। कोशिश करें कि इस दिशा को हमेशा बंद रखें और इस बात का भी ध्यान रखें कि कभी भी घर का प्रवेश द्वारा इस दिशा में न हो। इस दिशा को धन का नुकसान करने वाली दिशा कहा जाता है, इसलिए यहां कभी भी धन न रखें। इस दिशा को लेकर कुछ मान्यताएं यह भी है कि यह दिशा यहां रहने वाले सदस्यों की उम्र कम करती है। कहा जाता है कि दक्षिण-पूर्वी कोने में घर के मुखिया का कमरा कभी नहीं होना चाहिए। अगर घर के मुखिया का कमरा इस दिशा में है तो उसका जीवन कभी सुखी नहीं रहता। हमेशा परेशानियों से भरा रहता है। साथ ही घर का रसोईघर कभी उत्तर-पूर्वी दिशा में नहीं होना चाहिए।

हृदय रेखा छोटी सा फिर हल्कीं होना अच्छा नहीं

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विवाह के लिए वर-वधू का योग देखने में हस्तशरेखा का बहुत बड़ा योगदान होता है। किसी भी विवाह का भविष्यं वर और कन्यास की हथेली पर उपस्थित विभिन्ना रेखाओं, पर्वतों और चिह्नों की स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ ऐसी रेखाओं के बारे में जान लें जो विवाह के मामले में अच्छी साबित नहीं होतीं।
हृदय रेखा
यदि आपकी हृदय रेखा छोटी सा फिर हल्कीो है तो आपके लिए वैवाहिक संयोग अच्छें नहीं हैं। ऐसे में विवाह होने के बाद भी आपके संबंधों में विच्छेंद हो सकता है।
मंगल पर्वत
यदि आपका मंगल पर्वत जरूरत से ज्या दा विकसित हो या फिर मंगल पर दोषपूर्ण चिह्न हो तो ऐसे में विवाह करना आपके लिए सही नहीं होगा।
शुक्र पर्वत हों कम विकसित
शुक्र पर्वत कम विकसित होने पर वैवाहिक जीवन में शारीरिक संतुष्टि नहीं प्राप्त् होती। चंद्र पर्वत और बृहस्पनति के कम विकसित होने पर भी ऐसा ही होता है।
हृदय रेखा पर काले चिह्न अशुभ
यदि आपकी हृदय रेखा पर किसी प्रकार के काले चिह्न शुभ नहीं है। मस्तिष्क  रेखा और जीवन रेखा में जरूरत से ज्याकदा दूरी होना सही नहीं है। हाथ का निचला क्षेत्र अत्य धिक विकसित होना अच्छा् नहीं माना जाता। ये सभी बातें विवाह पश्चा्त शारीरिक अनुकूलता के लिए सही नहीं है। ये सभी विकार असंतुष्ट  यौन संबंधों को दर्शाते हैं।
संतान सुख नहीं मिल पाता इनको
अगर आपकी हृदय रेखा छोटी है और शुक्र व गुरु पर्वत के उभार भी कम हैं। विवाह रेखा के ऊपर क्रॉस है। जिस स्थारन पर मस्तिष्कक रेखा बुध रेखा को काटती है, अगर वहां तारा है तो यह शुभ नहीं है।
ऐसे में हो सकता है तलाक भी
विवाह रेखा अंत में दो भागों में बंट रही हो। शुक्र पर्वत पर जाल या फिर एक-दूसरे को काटती हुई रेखाएं हो तो ये शारीरिक अक्षमता को दर्शाता है। विवाह रेखा को कोई रेखा काटे तो तलाक की आशंका बढ़ जाती है।

इसलिए ईश्वर को प्रकाश के रूप में बताया जाता है

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हमें हमेशा ईश्वर को प्रकाश के रूप में बताना होता है, क्योंकि प्रकाश से आप देखते हैं, प्रकाश से हर चीज स्पष्ट होती है। लेकिन जब आपका अनुभव बुद्धि की सीमाओं को पार करना शुरू करता है, तब हम ईश्वर को अंधकार के रूप में बताने लगते हैं। आप मुझे यह बताएं कि इस अस्तित्व में कौन ज्यादा स्थायी है? कौन अधिक मौलिक है, प्रकाश या अंधकार? निश्चित ही अंधकार।  शिव अंधकार की तरह सांवले हैं। क्या आप जानते हैं कि शिव शाश्वत क्यों हैं? क्योंकि वे अंधकार हैं। वे प्रकाश नहीं हैं। प्रकाश बस एक क्षणिक घटना है। अगर आप अपनी तर्क-बुद्धि की सीमाओं के अंदर जी रहे हैं तब हम आपको ईश्वर को प्रकाश जैसा बताते हैं। अगर आपको बुद्धि की सीमाओं से परे थोड़ा भी अनुभव हुआ है, तो हम ईश्वर को अंधकार जैसा बताते हैं, क्योंकि अंधकार सर्वव्यापी है।
अंधकार की गोद में ही प्रकाश अस्तित्व में आया है। वह क्या है जो अस्तित्व में सभी चीजों को धारण किए हुए है? यह अंधकार ही है। प्रकाश बस एक क्षणिक घटना है। इसका स्रोत जल रहा है, कुछ समय के बाद यह जलकर खत्म हो जाएगा। चाहे वह बिजली का बल्ब हो या सूरज हो। एक कुछ घंटों में जल जाएगा, तो दूसरे को जलने में कुछ लाख साल लगेंगे, लेकिन वह भी जल जाएगा।
तो सूर्य से पहले और सूर्य के बाद क्या है? क्या चीज हमेशा थी और क्या हमेशा रहेगी? अंधकार। वह क्या है जिसे आप ईश्वर कहते हैं? वह जिससे हर चीज पैदा होती है, उसे ही तो आप ईश्वर के रूप में जानते हैं। अस्तित्व में हर चीज का मूल रूप क्या है? उसे ही तो आप ईश्वर कहते हैं। अब आप मुझे यह बताएं कि ईश्वर क्या है, अंधकार या प्रकाश? शून्यता का अर्थ है अंधकार। हर चीज शून्य से पैदा होती है। विज्ञान ने आपके लिए यह साबित कर दिया है।
और आपके धर्म हमेशा से यही कहते आ रहे हैं -ईश्वर सर्वव्यापी है। और केवल अंधकार ही है जो सर्वव्यापी हो सकता है।
प्रकाश का अस्तित्व बस क्षणिक है, प्रकाश बहुत सीमित है, और खुद जलकर खत्म हो जाता है, लेकिन चाहे कुछ और हो या न हो, अंधकार हमेशा रहता है। लेकिन आप अंधकार को नकारात्मक समझते हैं। हमेशा से आप बुरी चीजों का संबंध अंधकार से जोड़ते रहे हैं। यह सिर्फ आपके भीतर बैठे हुए भय के कारण है। आपकी समस्या की यही वजह है। यह सिर्फ आपकी समस्या है, अस्तित्व की नहीं। अस्तित्व में हर चीज अंधकार से पैदा होती है। प्रकाश सिर्फ कभी-कभी और कहीं-कहीं घटित होता है। आप आसमान में देखें, तो आप पाएंगे कि तारे बस इधर-उधर छितरे हुए हैं और बाकी सारा अंतरिक्ष अंधकार है, शून्य है, असीम और अनन्त है।
यही स्वरूप ईश्वर का भी है। यही वजह है कि हम कहते हैं कि मोक्ष का अर्थ पूर्ण अंधकार है। यही वजह है कि योग में हम हमेशा यह कहते हैं कि चैतन्य अंधकार है। केवल तभी जब आप मन के परे चले जाते हैं, आप अंधकार का आनन्द उठाना जान जाते हैं, उस अनन्त, असीम सृष्टा को अनुभव करने लगते हैं। जब आपकी आंखें बंद होती हैं, तो उस अंधकार में आपके सभी अनुभव और ज्यादा गहरे हो जाते हैं।

नंदी के बिना शिवलिंग को माना जाता है अधूरा

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भगवान शिव के किसी भी मंदिर में शिवलिंग के आसपास एक नंदी बैल जरूर होता है क्यों नंदी के बिना शिवलिंग को अधूरा माना जाता है। इस बारे में पुराणों की एक कथा में कहा गया है शिलाद नाम के ऋषि थे जिन्होंने लम्बे समय तक शिव की तपस्या की थी। जिसके बाद भगवान शिव ने उनकी तपस्या से खुश होकर शिलाद को नंदी के रूप में पुत्र दिया था।
शिलाद ऋषि एक आश्रम में रहते थे। उनका पुत्र भी उन्हीं के आश्रम में ज्ञान प्राप्त करता था। एक समय की बात है शिलाद ऋषि के आश्रम में मित्र और वरुण नामक दो संत आए थे। जिनकी सेवा का जिम्मा शिलाद ऋषि ने अपने पुत्र नंदी को सौंपा। नंदी ने पूरी श्रद्धा से दोनों संतों की सेवा की। संत जब आश्रम से जाने लगे तो उन्होंने शिलाद ऋषि को दीर्घायु होने का आर्शिवाद दिया पर नंदी को नहीं।
इस बात से शिलाद ऋषि परेशान हो गए। अपनी परेशानी को उन्होंने संतों के आगे रखने की सोची और संतों से बात का कारण पूछा। तब संत पहले तो सोच में पड़ गए। पर थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा, नंदी अल्पायु है। यह सुनकर मानों शिलाद ऋषि के पैरों तले जमीन खिसक गई। शिलाद ऋषि काफी परेशान रहने लगे।
एक दिन पिता की चिंता को देखते हुए नंदी ने उनसे पूछा, ‘क्या बात है, आप इतना परेशान क्यों हैं पिताजी।’ शिलाद ऋषि ने कहा संतों ने कहा है कि तुम अल्पायु हो। इसीलिए मेरा मन बहुत चिंतित है। नंदी ने जब पिता की परेशानी का कारण सुना तो वह बहुत जोर से हंसने लगा और बोला, ‘भगवान शिव ने मुझे आपको दिया है। ऐसे में मेरी रक्षा करना भी उनकी ही जिम्मेदारी है, इसलिए आप परेशान न हों।’
नंदी पिता को शांत करके भगवान शिव की तपस्या करने लगे। दिनरात तप करने के बाद नंदी को भगवान शिव ने दर्शन दिए। शिवजी ने कहा, ‘क्या इच्छा है तुम्हारी वत्स’. नंदी ने कहा, मैं ताउम्र सिर्फ आपके सानिध्य में ही रहना चाहता हूं।नंदी से खुश होकर शिवजी ने नंदी को गले लगा लिया। शिवजी ने नंदी को बैल का चेहरा दिया और उन्हें अपने वाहन, अपना मित्र, अपने गणों में सबसे उत्तम रूप में स्वीकार कर लिया।इसके बाद ही शिवजी के मंदिर के बाद से नंदी के बैल रूप को स्थापित किया जाने लगा।

राशिफल 26 जून 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा

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  • मेष राशि :- तनाव व उदर रोग, मित्र लाभ, राजभय तथा दाम्पत्य जीवन पूर्ण संतोषप्रद रहेगा।
  • वृष राशि :- शत्रुभय, शुभ मंगल कार्य, विरोध मामले-मुकदमे में प्राय: जीत की संभावना है।
  • मिथुन राशि :– कुसंग हानि, रोगभय, यात्रा, उद्योग, व्यापार की स्थिति लाभ-हानि की बनी ही रहेगी।
  • कर्क राशि :- पराक्रम, कार्यसिद्धी, व्यापार लाभ, खेती व गृह कार्य में व्यवस्था अवश्य बढ़ेगी।
  • सिंह राशि :- तनावपूर्ण स्थिति से बचें, विरोध, चिन्ता, उद्योग, व्यापार से लाभ, कार्य सफल होंगे।
  • कन्या राशि :- भूमि-लाभ, स्त्री-सुख, प्रगति, उद्योग-व्यापार में अड़चने होगी, ध्यान अवश्य रखें।
  • तुला राशि :- प्रगति, वाहन भय, भूमि-लाभ, कलह, व्यर्थ अनाप-शनाप खर्च से परेशानी होगी।
  • वृश्चिक राशि :- कार्यसिद्धी, विरोध, लाभ, कष्ट, हर्ष होगा, व्यापार में सुधार अवश्य ही होगा।
  • धनु राशि :- यात्रा से हानि, मातृ-पितृ कष्ट, व्यय होगा, लिखा-पढ़ी व शिक्षा जगत से सुख होगा।
  • मकर राशि :– शुभ कार्य, वाहनादि भय, नौकरी की स्थिति सामान्य बनी रहेगी, ध्यान दें।
  • कुंभ राशि :- अभीष्ट कार्य सिद्धी, राजभय, कार्य बाधा, धार्मिक व कुछ अच्छे कार्य बनेंगे।
  • मीन राशि :- अल्प हानि, रोगभय, सम्पत्ति का लाभ, मित्रों व पारिवारिक लोगों से सावधान रहें।

वनांचल की बिंदा बाई के सपनों को मिला अपना आशियाना : योजनाओं के समन्वय से बदली जीवन की तस्वीर

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रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में विकास की एक नई और सुखद तस्वीर उभर रही है। बालोद जिले के डौण्डी विकासखंड के वनांचल ग्राम नर्राटोला की निवासी बिंदा बाई इसका एक जीवंत और सशक्त उदाहरण हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पक्का घर मिलने से न सिर्फ उनके सपनों को उड़ान मिली है, बल्कि शासन की अन्य योजनाओं के समन्वय ने उनके जीवन में खुशहाली और आत्मविश्वास का नया संचार किया है।

कच्चे घर की परेशानियां अब बीती बात

        एक समय था जब बिंदा बाई अपने परिवार के साथ एक जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर थीं। खासकर मानसून के दिनों में छत से पानी टपकना, दीवारों में सीलन और वनांचल क्षेत्र होने के कारण जहरीले जीव-जंतुओं का डर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था। बेहद सीमित आर्थिक संसाधनों के चलते पक्का मकान बनाना उनके लिए एक दूर का सपना था। लेकिन ग्राम पंचायत के माध्यम से जब प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत उनका आवेदन स्वीकृत हुआ, तो समय पर मिली किस्तों की मदद से उन्होंने बिना किसी बाधा के अपना पक्का घर तैयार कर लिया।

मनरेगा और अन्य योजनाओं के समन्वय से मिली मजबूती

          बिंदा बाई के घर को संवारने में कई सरकारी योजनाओं ने एक साथ मिलकर काम किया कि आवास निर्माण के दौरान बिंदा बाई को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत मजदूरी का समय पर भुगतान मिला, जिससे निर्माण के दौरान उन्हें कोई आर्थिक तंगी नहीं झेलनी पड़ी। घर की दहलीज तक नल कनेक्शन पहुंचने से अब उन्हें और उनके परिवार को शुद्ध पेयजल के लिए दूर नहीं भटकना पड़ता। रसोई में गैस कनेक्शन और चूल्हा मिलने से बिंदा बाई का घर अब धुएं से पूरी तरह मुक्त हो चुका है, जिससे उनकी सेहत भी सुरक्षित है। इस योजना के तहत हर महीने मिलने वाली वित्तीय सहायता राशि से वे अपने परिवार की छोटी-मोटी और आवश्यक जरूरतों को बिना किसी पर निर्भर रहे पूरा कर पा रही हैं।

योजनाओं ने दिया सम्मान और सुरक्षित जीवन का भरोसा

        अपनी खुशी जाहिर करते हुए बिंदा बाई कहती हैं कि शासन की इन योजनाओं ने हमें केवल एक पक्का मकान ही नहीं दिया, बल्कि समाज में सम्मान और एक सुरक्षित जीवन का भरोसा भी दिया है। अब मेरा परिवार एक बेहतर माहौल में रह रहा है। उन्होंने इस सकारात्मक बदलाव के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया है।

अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा विकास का लाभ

        वनांचल के दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास योजनाओं की यह प्रभावी पहुंच साफ दर्शाती है कि राज्य सरकार की जनहितकारी पहलें समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने के अंत्योदय के लक्ष्य को सफलतापूर्वक साकार कर रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य योजनाओं का यह कन्वर्जेंस (समन्वय) ग्रामीण परिवारों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक बदलाव का मजबूत आधार बन रहा है।

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