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सहकारिता सप्ताह को जनआंदोलन बनाने की तैयारी, प्रदेशभर में होंगे विविध आयोजन

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रायपुर :  भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 29 जून से 6 जुलाई 2026 तक पूरे देश में सहकारी सप्ताह मनाया जाएगा। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में भी सहकारिता के माध्यम से समृद्धि, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। राज्य स्तरीय सहकारी चिंतन शिविर, सहकार मेला, अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस समारोह एवं सहकारी संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा, इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि तथा सहकारिता मंत्री केदार कश्यप अध्यक्षता करेंगे।

सहकारिता सप्ताह को जनआंदोलन बनाने की तैयारी, प्रदेशभर में होंगे विविध आयोजन

सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने तैयारियों की समीक्षा की

               गौरतलब है कि सहकारी सप्ताह के सफल आयोजन के लिए सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने विगत 23 जून को विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। इसके साथ ही उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश की पैक्स समितियों के प्राधिकृत अधिकारियों एवं संभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंत्री कश्यप ने सभी संबंधित संस्थाओं और समितियों को आयोजन में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने तथा सहकारिता आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने के निर्देश दिए।

2573 पैक्स समितियों में होंगे विविध कार्यक्रम

            सहकारी सप्ताह के दौरान प्रदेश की सभी 2573 पैक्स समितियों सहित दुग्ध, मत्स्य, बुनकर एवं अन्य सहकारी समितियों द्वारा विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से सहकारी ध्वजारोहण,सदस्यता अभियान,माइक्रो एटीएम, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) एवं रू-पे केसीसी कार्ड वितरण,सहकार दौड़,वृक्षारोपण अभियान,मृदा परीक्षण,कृषक संगोष्ठियां एफपीओ एवं पैक्स की भूमिका पर परिचर्चा आदि कार्यक्रम शामिल हैं।

9 पैक्स गोदामों का होगा भूमिपूजन

            सहकारी सप्ताह के समापन अवसर पर 6 जुलाई 2026 को भारत सरकार के केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा सहकारी क्षेत्र में विकेंद्रीकृत विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के अंतर्गत प्रदेश के 9 पैक्स में गोदाम निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया जाएगा।

रायपुर में होगा राज्य स्तरीय सहकारी चिंतन शिविर एवं सहकार मेला

            राज्य स्तरीय सहकारी चिंतन शिविर, सहकार मेला, अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस समारोह एवं सहकारी संगोष्ठी का आयोजन 3 एवं 4 जुलाई 2026 को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित कृषि मंडपम ऑडिटोरियम, लाभांडी (रायपुर) में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि तथा सहकारिता मंत्री केदार कश्यप अध्यक्षता करेंगे। सहकारी संस्थाओं और राष्ट्रीय संगठनों की होगी भागीदारी कार्यक्रम में पैक्स, दुग्ध, मत्स्य, लघु वनोपज, बुनकर एवं अन्य सहकारी समितियों के साथ-साथ नाबार्ड, एनसीडीसी, एनसीसीएफ, नैफेड, सीएससी, इफको, कृभको, राज्य सहकारी संघ तथा अन्य प्रमुख संस्थाएं अपनी सहभागिता सुनिश्चित करेंगी।

सहकारिता से समृद्धि के मॉडल होंगे प्रदर्शित

             सहकार मेले में सहकारिता क्षेत्र की उपलब्धियों, नवाचारों और सफल मॉडलों का प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही किसानों, महिला समूहों, दुग्ध उत्पादकों, मत्स्य पालकों, बुनकरों एवं ग्रामीण उद्यमियों को सहकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

आयोजन की रूपरेखा पर हुई विस्तृत चर्चा

           बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा, सहभागिता और विभिन्न गतिविधियों के सफल संचालन पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में सभी ने सहकारिता आंदोलन को और अधिक सशक्त बनाने तथा सहकारी सप्ताह को व्यापक जनभागीदारी के साथ सफल बनाने का संकल्प व्यक्त किया।

          सहकारी सप्ताह के आयोजन को लेकर सहकारिता मंत्री केदार कश्यप की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्या० (अपेक्स बैंक) के प्राधिकृत अधिकारी केदार नाथ गुप्ता, छ०ग०राज्य सहकारी विपणन संघ मार्कफेड के अध्यक्ष शशिकांत द्विवेदी, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक दुर्ग के अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक राजनांदगांव अध्यक्ष सचिन बघेल, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक रायपुर अध्यक्ष निरंजन सिन्हा, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक बिलासपुर अध्यक्ष रजनीश सिंह, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक जगदलपुर दिनेश कश्यप, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक अध्यक्ष अंबिकापुर रामकिशुन सिंह एवं अन्य सहकारी प्रतिनिधियों अपेक्स बैंक, मार्कफेड, जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों तथा अन्य सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।

आईईएचई एवं सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखंड के बीच हुआ एमओयू

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भोपाल : उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल एवं सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखंड, रांची के बीच गुरुवार को एक एमओयू हुआ है। एमओयू के अंतर्गत रिसर्च स्कॉलर्स एवं फैकल्टी एक्सचेंज, वैज्ञानिक शोध, अकादमिक प्रोजेक्ट्स, सेमिनार, कॉन्फ्रेंस एवं संयुक्त शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। एमओयू से दोनों संस्थाओं के विद्यार्थियों, रिसर्च स्कॉलर्स एवं फैकल्टी को लाभ होगा। साथ ही दोनों संस्थाओं के बीच जॉइंट रिसर्च प्रोजेक्ट एवं पेटेंट पर भी कार्य किया जाएगा। इस दौरान आईईएचई संस्थान द्वारा संस्थान की अकादमिक गतिविधि, रिसर्च कार्यों एवं उपलब्धियों के बारे में प्रेजेंटेशन दिया गया।
एमओयू के अंतर्गत दोनों संस्थान एक मॉनिटरिंग टीम गठित करेंगे। एमओयू के दौरान सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखंड के कुलगुरु, प्रोफेसर सारंग मेढेकर, रजिस्ट्रार, श्री के. खोसला राव, डीन (आर एंड डी), प्रोफेसर मनोज कुमार तथा आईईएचई के संचालक, डॉक्टर प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल, प्रोफेसर अनुज, प्रोफेसर शैलजा दुबे, प्रोफेसर बी.के. सिन्हा, प्रोफेसर अमित जैन, प्रोफेसर महेंद्र सिंघई, प्रोफेसर सभाकांत द्विवेदी आदि उपस्थित रहे।

बुजुर्गों और असहाय लोगों का आदर करना हमारा धर्म : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि घर में बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद होना, तपती धूप में ठंडी छांव के समान होता है। हमारी संस्कृति में बुजुर्गों, असहायों और समाज के सबसे कमजोर वर्ग को आदर देना केवल कर्तव्य नहीं बल्कि हमारा धर्म माना गया है। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारी कोशिश है कि राज्य का कोई भी निर्धन परिवार, माताएं, बहनें या हमारे दिव्यांग साथी स्वयं को बेसहारा न समझें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में अंत्योदय का संकल्प सिद्ध हो रहा है। इसी दिशा में राज्य सरकार भी गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों के कल्याण में जुटी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से सामाजिक सुरक्षा पेंशन वितरण के लिए मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में यह विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम से विभिन्न जिलों के हितग्राही वर्चुअली जुड़े।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 33 लाख 92 हजार 695 से अधिक भाई-बहनों और बुजुर्गों के खातों में माह मई महीने की 203 करोड़ 56 लाख रुपये की सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की। इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, संजय शुक्ला, मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर कार्यक्रम में उपस्थित थी।

सामाजिक सुरक्षा पेंशन सरकार के स्नेह, सम्मान और सुरक्षा का वचन है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन केवल आर्थिक सहायता नहीं है, अपितु निर्धन परिवारों, दिव्यांग साथियों में आपके प्रति सरकार का स्नेह, सम्मान और सुरक्षा का वचन है। राज्य सरकार सभी को अपने परिवार का हिस्सा मानती है। सरकार प्रत्येक नागरिक के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में राज्य सरकार ने किसान हितैषी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रदेश के किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज दिया जाएगा और इसे चुकाने की समयावधि 31 मार्च नहीं होगी, बल्कि किसान जिस तारीख को कर्ज लेंगे, उसे अगले 12 माह की अवधि में ऋण भरना होगा।

10 साल में देश के 25 करोड़ से ज्यादा लोग बाहर आए गरीबी से

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश का प्रत्येक नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहा है। पिछले 10 वर्षों में देश के 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से 80 करोड़ से अधिक लोगों को हर महीने मुफ्त राशन मिल रहा है। प्रधानमंत्री आवास, आयुष्मान भारत, जल-जीवन मिशन, उज्जवला योजना जैसी योजनाओं ने जन-कल्याण का इतिहास लिखा है। राज्य सरकार अधिकांश कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में देश में अग्रणी है। सरकार गरीब, युवा, नारी और किसान कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि वितरण कार्यक्रम में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से वरिष्ठजन, माताएं-बहनें और हितग्राही वर्चुअली सम्मिलत हुए।

समय पूर्व जन्मे मासूम के जीने की उम्मीद छोड़ चुके थे माता-पिता

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रायपुर : छत्तीसगढ़ के चिकित्सकों ने एक बार फिर सेवा और समर्पण की मिसाल पेश की है।रायगढ़ मेडिकल कालेज के बाल्य एवं शिशु रोग विभाग की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (NICU) की टीम ने जूटमिल, रायगढ़ निवासी ललित एवं सुगंधी के समयपूर्व जन्मे गंभीर रूप से बीमार नवजात को 50 दिनों के सफल उपचार के बाद स्वस्थ अवस्था में उनके माता-पिता को सौंपा।

केस की गंभीरता:  

गर्भावस्था के 33वें सप्ताह में जन्मा यह शिशु मात्र 1.7 किलोग्राम वजन का था। जन्म लेते ही शिशु को गंभीर श्वसन संबंधी समस्या हुई और पहले ही दिन से बार-बार दौरे पड़ने लगे। जांच में फेफड़ों में रक्तस्राव, गंभीर संक्रमण सेप्सिस एवं निमोनिया जैसी जटिलताएं पाई गईं। शिशु की हालत इतनी नाजुक थी कि उसे तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।

उपचार के दौरान शिशु को कई बार रक्त एवं प्लाज्मा चढ़ाया गया। व्यापक एंटीबायोटिक एवं एंटीफंगल दवाओं से संक्रमण पर काबू पाया गया। स्थिति में सुधार होने पर वेंटिलेटर से हटाकर नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन NIV पर लाया गया। भर्ती के दौरान हुए कोलेस्टेटिक पीलिया का भी सफल उपचार किया गया।

सेवा भावना की मिसाल:  

डॉ.एल .के.सोनी ने बताया कि उपचार के दौरान एक समय शिशु की स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि माता-पिता उम्मीद छोड़कर अस्पताल आना बंद कर चुके थे। इसके बावजूद NICU टीम ने हार नहीं मानी और शिशु का उपचार निरंतर जारी रखा। टीम के प्रयासों से शिशु ने धीरे-धीरे दूध लेना शुरू किया, वजन बढ़ा और सामान्य गतिविधियां विकसित हुईं।छुट्टी के समय शिशु पूरी तरह स्थिर था, दौरे-मुक्त ,सामान्य वातावरण में पर्याप्त ऑक्सीजन स्तर बनाए हुए था ।

NICU टीम का अथक प्रयास:  

डॉ. लक्ष्मणेश्वर कुमार सोनी ,विभागाध्यक्ष बाल्य एवं शिशु रोग के नेतृत्व में डॉ. गौरव क्लॉडियस सहायक प्राध्यापक , वरिष्ठ रेसिडेंट डॉ. फारूज अहमद, डॉ. पल्लवी एवं समस्त नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ ने 23दिन वेंटिलेटर  और 17दिन ऑक्सीजन सपोर्ट में रहे शिशु को पूरे 50 दिनों तक दिन-रात निगरानी कर उपचार किया और एक नन्ही जिंदगी को बचाया ।

अस्पताल अधीक्षक डॉ. दुर्गा शंकर पटेल ने कहा कि यह सफलता हमारे चिकित्सकों ,नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के समर्पण का परिणाम है। मरीज की जान बचाना हमारी प्राथमिकता है। कठिन से कठिन केस में भी हम पूरी निष्ठा से उपचार करते हैं। इस उपचार में लगे रक्त, प्लाज्मा और अन्य सुविधाओं का पूरा खर्च अस्पताल प्रबंधन ने वहन किया l वही निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च 6-7लाख रुपए आता हैं । जो हमारे यहाँ पूर्णतः निःशुल्क इलाज हुआ।

इस सफलता पर अधिष्ठाता डॉ. संतोष कुमार ने NICU टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि चिकित्सकों के समर्पण, सतत निगरानी, उत्कृष्ट चिकित्सकीय कौशल एवं उत्कृष्ट टीमवर्क का परिणाम है l जिसने एक नन्हे जीवन को नई शुरुआत दी है l

मनरेगा कर्मचारियों के हित में सरकार की संवेदनशील पहल

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रायपुर :  मनरेगा (MGNREGA) कर्मचारियों और श्रमिकों के परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा कई संवेदनशील पहल की गई हैं। काम के दौरान किसी अनहोनी (मृत्यु) की स्थिति में उनके आश्रितों को अनुग्रह अनुदान/मुआवजा और अन्य लाभ दिए जाने का प्रावधान है।

         मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशन और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने मार्गदर्शन में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों के कल्याण और उनके परिवारों की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का उदाहरण सामने आया है। जनपद पंचायत केशकाल में पदस्थ रहे दिवंगत सहायक प्रोग्रामर (मनरेगा) दीपक मरकाम के असामयिक निधन के पश्चात उनके परिवार को आर्थिक संबल प्रदान किया गया।

        सड़क दुर्घटना में दीपक मरकाम के निधन के बाद एक्सिस बैंक द्वारा सैलरी अकाउंट के अंतर्गत उपलब्ध दुर्घटना मृत्यु बीमा (Accidental Death Cover) के तहत 30 लाख रुपए की बीमा राशि तथा बच्चों की शिक्षा के लिए 8 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता प्रदान की गई। इस प्रकार उनके परिवार को कुल 38 लाख रुपये की सहायता राशि मिली।

       जिला प्रशासन एवं बैंक के समन्वय से त्वरित कार्रवाई करते हुए आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण की गईं और सहायता राशि का चेक दिवंगत कर्मचारी की पत्नी श्रीमती मालती मरकाम को प्रदान किया गया। यह पहल मनरेगा सहित ग्रामीण विकास योजनाओं में कार्यरत कर्मचारियों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और उनके परिवारों के हितों की सुरक्षा के संकल्प को दर्शाती है। कठिन समय में मिली यह सहायता परिवार के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा बनेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आपदा में बचाव पर ब्रेल लिपि में प्रकाशित पुस्तक का किया लोकार्पण

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भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नि:शक्तजन के लिए आग, हीटवेब (लू) और आकाशीय बिजली से बचाव के संबंध में ब्रेललिपि में प्रकाशित पुस्तक का गुरूवार को मंत्रालय में लोकार्पण किया। पुस्तक का मुद्रण आपदा प्रबंध संस्थान भोपाल द्वारा सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सहयोग से कराया गया है।

केरल और असम के बाद नि:शक्तजन के लिए आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में इस तरह की पहल मध्यप्रदेश द्वारा की गई है। दृष्टिबाधित भाई-बहनों के लिए यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ला, प्रमुख सचिव सोनाली वायंगणकर उपस्थित थी।

शैक्षणिक पाठ्यक्रम में नशे के दुष्परिणामों पर जानकारी देना आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दिव्यांगजन के आवागमन के लिए सभी शासकीय भवनों को बाधारहित बनाना आवश्यक है। बच्चों में दिव्यांगता के बारे में संवेदनशीलता विकसित करने के लिए स्कूली पाठ्यक्रम में आवश्यक सामग्री शामिल की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नशामुक्ति के लिए चलायें जा रहे अभियान के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे के दुष्परिणामों से किशोरों और युवाओं को समय रहते परिचित कराना जरूरी है। नशे के विरूद्ध वातावरण बनाने के उद्देश्य से स्कूली और महाविद्यालयीन स्तरों के पाठ्यक्रमों में नशे के विरूद्ध जागरूकता पर केंद्रित सामग्री शामिल की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दिव्यांगजन को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने और उनकी क्षमता अनुसार कौशल उन्नयन की गतिविधियां भी संचालित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उक्त निर्देश सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की समीक्षा बैठक में दिए। मंत्रालय में गुरूवार को हुई बैठक में विभाग के मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, मुख्य सचिव अनुराग जैन विशेष रूप से उपस्थित थे।

दिव्यांगजन के लिए की गई है 168 स्मार्ट क्लास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जन्म दिवस, विवाह वर्षगांठ जैसे शुभ अवसरों और परिजन की स्मृति में जरूरतमंदों को भोजन कराने की परंपरा भारतीय संस्कृति में रही है। उन्होंने ऐसी व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक पहल को, प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर निराश्रितों को भोजन कराने के लिए निश्चित व्यवस्था के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया। बैठक में जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री सेवा पखवाड़ा अभियान वर्ष 2025 अंतर्गत प्रदेश में 6 करोड़ 52 लाख रुपए के कृत्रिम अंग एवं सहायक यंत्र दिव्यागंजन को उपलब्ध कराये गये। प्रदेश में दिव्यांगजन के लिए संचालित विशेष विद्यालयों में दिव्यांगजन के लिए 168 स्मार्ट क्लास तैयार की गई हैं। नशामुक्ति भारत अभियान के अंतर्गत 12 हजार वालेंटियर्स बनाये गये हैं, जो नशे के दुष्परिणामों से जन सामान्य को अवगत करा रहे हैं। दिव्यांगजन को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें रोजगार उपलबध कराने के लिए भारत सरकार से प्राप्त पुरस्कार संस्थानों से एमओयू किया गया है। इन संस्थाओं द्वारा 12 दिव्यांगजनों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। वृद्धजनों की देखभाल के लिए 54 प्रतिभागियों को केयर-गिवर का प्रशिक्षण दिलवाया गया। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग में संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की। बैठक में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, संजय शुक्ला, मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम हेल्पलाइन से मिला त्वरित समाधान, 24 घंटे के भीतर मिला विवाह प्रमाण पत्र

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रायपुर :  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और त्वरित जनसेवा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसी दिशा में संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन आम नागरिकों की समस्याओं के शीघ्र समाधान का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है। कोण्डागांव जिले में इसका एक सकारात्मक उदाहरण सामने आया है, जहां एक नागरिक को सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने के मात्र 24 घंटे के भीतर विवाह प्रमाण पत्र प्राप्त हो गया।

कोण्डागांव जिले के बड़ेराजपुर तहसील अंतर्गत ग्राम खालारी निवासी जितेन्द्र कुमार मरकाम एवं ग्राम आमगांव निवासी श्रीमती सरिता मरकाम का विवाह 27 अप्रैल 2026 को संपन्न हुआ था। विवाह प्रमाण पत्र की आवश्यकता होने पर उन्होंने संबंधित प्रक्रिया पूर्ण की, किंतु प्रमाण पत्र प्राप्त होने में विलंब होने के कारण उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से अपनी समस्या दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही जनपद पंचायत बड़ेराजपुर द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की गई और आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कर 24 घंटे के भीतर विवाह प्रमाण पत्र जारी कर हितग्राहियों को उपलब्ध करा दिया गया।

विवाह प्रमाण पत्र प्राप्त होने पर जितेन्द्र कुमार मरकाम एवं श्रीमती सरिता मरकाम ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से उनकी समस्या का त्वरित समाधान हुआ, जिससे उन्हें काफी राहत मिली। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन और जनकल्याण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का लाभ अब सीधे आम नागरिकों तक पहुंच रहा है, जिससे शासन के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हो रहा है।

प्रधानमंत्री आवास योजना: नगर पंचायत जरहागांव की रामकुमारी कश्यप के पक्के आवास का सपना हुआ पूरा

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रायपुर :  केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना ने हजारों जरूरतमंद परिवारों के पक्के आवास के सपनों को साकार किया है। अपने घर का सपना हर परिवार की सबसे बड़ी आकांक्षा होती है। एक सुरक्षित और पक्का आवास न केवल जीवन में स्थिरता लाता है, बल्कि आत्मसम्मान और सुरक्षा की भावना भी प्रदान करता है। मुंगेली जिले के नगर पंचायत जरहागांव की निवासी रामकुमारी कश्यप का वर्षों पुराना पक्के मकान का सपना अब हकीकत बन चुका है। रामकुमारी कश्यप का परिवार लंबे समय तक कच्चे मकान में रहने को मजबूर था। बारिश के मौसम में छत से पानी टपकना, दीवारों में सीलन और मौसम की मार झेलना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया था। परिवार के लिए सुरक्षित आवास की चिंता हमेशा बनी रहती थी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्रता के आधार पर उन्हें आवास स्वीकृत हुआ। शासन से प्राप्त आर्थिक सहायता के माध्यम से उन्होंने अपना पक्का और सुरक्षित घर बनवाया। आज उनका परिवार सभी मूलभूत सुविधाओं से युक्त अपने नए आवास में सुखद और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रहा है।
      
रामकुमारी ने बताया कि पहले हर बारिश उनके लिए चिंता और परेशानी लेकर आती थी। कच्चे मकान में परिवार की सुरक्षा को लेकर डर बना रहता था, लेकिन अब पक्का घर बनने से वे स्वयं को सुरक्षित महसूस करती हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना ने केवल उन्हें एक मकान नहीं दिया, बल्कि परिवार को नई उम्मीद, आत्मविश्वास और सम्मानजनक जीवन भी दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने का कार्य किया है। आज उनका परिवार बिना किसी चिंता के अपने घर में सुखपूर्वक जीवन यापन कर रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के पात्र परिवारों को आवासीय सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। योजना के माध्यम से हजारों परिवारों को न केवल पक्का घर मिल रहा है, बल्कि उनका जीवन स्तर भी बेहतर हो रहा है।

विकसित भारत के निर्माण में युवाओं को मिले अधिक से अधिक अवसर : राज्यपाल पटेल

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भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विकसित भारत@2047 की संकल्पना को साकार करने की दिशा में प्रदेश के युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालयों द्वारा अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी वर्ष 2047 में भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के लिये सभी वर्गों से सतत् विचार-विमर्श करते रहे है जिसमें युवा भी शामिल है। विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि विद्यार्थियों में राष्ट्र निर्माण के जज्बे को और अधिक सुदृढ़ करने में अपना सक्रिय योगदान दें। राज्यपाल पटेल गुरूवार को लोकभवन में आयोजित विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 102वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के संचालन एवं समन्वय संबंधी विभिन्न विषयों की समीक्षा की गई।

राज्यपाल पटेल ने विश्वविद्यालयों को सेवायोजित पूर्व विद्यार्थियों के लिए प्रत्येक 2 वर्ष में प्लेसमेंट सम्मेलन आयोजित करने की सलाह दी है। प्लेसमेंट सम्मेलन में वर्तमान छात्र-छात्राओं को प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा। विश्वविद्यालय का गौरव भी बढ़ेगा। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विश्व के लगभग 200 देशों में किये गये योगाभ्यास से योग की वैश्विक स्वीकार्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को योग को नियमित गतिविधियों को मासिक साप्ताहिक आयोजन के क्रम में शुरू करना चाहिए। इसकी शुरुआत छात्रावासों से की जा सकती है। उन्होंने रोजगारोन्मुखी प्रमाण-पत्र एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को गरीब एवं वंचित परिवारों की आत्मनिर्भरता में व्यवहारिक पहल बताया। कृषि संबद्ध विभिन्न कार्यों के लिए भी प्रमाणन व्यवस्था विकसित किए जाने पर बल दिया।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के विश्वास के साथ उन्हें विश्वविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने भेजते हैं। इस विश्वास को बनाये रखना कुलगुरुओं और प्राध्यापकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ज्ञान और कौशल के साथ सामाजिक संवेदनशीलता से भी जोड़ना जरूरी है। विश्वविद्यालय गाँव को गोद लेकर ग्रामीणों के साथ संवाद और विकास गतिविधियों में विद्यार्थियों को सहभागी बनाएं। पिछड़े समुदायों एवं क्षेत्रों के विकास की अभूतपूर्व योजना पीएम-जनमन, धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए विद्यार्थियों को भी जोड़े। महाविद्यालयीन और विश्वविद्यालयीन छात्रों को गाँवों का भ्रमण करवाएं। इससे प्राप्त अनुभव विद्यार्थियों को भावी जीवन में वंचित और गरीब वर्गों के प्रति संवेदनशील बनाएगा।

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विश्वविद्यालयों द्वारा वित्तीय प्रबंधन को व्यवस्थित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रावधानों और निर्देशों का उल्लंघन गंभीर अनियमितता है। कुलगुरू वित्तीय निर्देशों की सीमा का कड़ाई से पालन करें। मंत्री परमार ने कहा कि कॉमन पोर्टल के माध्यम से एकीकृत ई-प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ना निजी विश्वविद्यालयों के लिए स्वैच्छिक है, किन्तु विश्वविद्यालय में प्रवेश होने की सूचना आयोग के पोर्टल पर प्रदर्शित होने की ऑटोमेडेट व्यवस्था की जाना अनिवार्य है।

बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा, राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, लोकभवन एवं उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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