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सीएम हेल्पलाइन से मिला त्वरित समाधान, 24 घंटे के भीतर मिला विवाह प्रमाण पत्र

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रायपुर :  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और त्वरित जनसेवा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसी दिशा में संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन आम नागरिकों की समस्याओं के शीघ्र समाधान का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है। कोण्डागांव जिले में इसका एक सकारात्मक उदाहरण सामने आया है, जहां एक नागरिक को सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने के मात्र 24 घंटे के भीतर विवाह प्रमाण पत्र प्राप्त हो गया।

कोण्डागांव जिले के बड़ेराजपुर तहसील अंतर्गत ग्राम खालारी निवासी जितेन्द्र कुमार मरकाम एवं ग्राम आमगांव निवासी श्रीमती सरिता मरकाम का विवाह 27 अप्रैल 2026 को संपन्न हुआ था। विवाह प्रमाण पत्र की आवश्यकता होने पर उन्होंने संबंधित प्रक्रिया पूर्ण की, किंतु प्रमाण पत्र प्राप्त होने में विलंब होने के कारण उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से अपनी समस्या दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही जनपद पंचायत बड़ेराजपुर द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की गई और आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कर 24 घंटे के भीतर विवाह प्रमाण पत्र जारी कर हितग्राहियों को उपलब्ध करा दिया गया।

विवाह प्रमाण पत्र प्राप्त होने पर जितेन्द्र कुमार मरकाम एवं श्रीमती सरिता मरकाम ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से उनकी समस्या का त्वरित समाधान हुआ, जिससे उन्हें काफी राहत मिली। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन और जनकल्याण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का लाभ अब सीधे आम नागरिकों तक पहुंच रहा है, जिससे शासन के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हो रहा है।

प्रधानमंत्री आवास योजना: नगर पंचायत जरहागांव की रामकुमारी कश्यप के पक्के आवास का सपना हुआ पूरा

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रायपुर :  केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना ने हजारों जरूरतमंद परिवारों के पक्के आवास के सपनों को साकार किया है। अपने घर का सपना हर परिवार की सबसे बड़ी आकांक्षा होती है। एक सुरक्षित और पक्का आवास न केवल जीवन में स्थिरता लाता है, बल्कि आत्मसम्मान और सुरक्षा की भावना भी प्रदान करता है। मुंगेली जिले के नगर पंचायत जरहागांव की निवासी रामकुमारी कश्यप का वर्षों पुराना पक्के मकान का सपना अब हकीकत बन चुका है। रामकुमारी कश्यप का परिवार लंबे समय तक कच्चे मकान में रहने को मजबूर था। बारिश के मौसम में छत से पानी टपकना, दीवारों में सीलन और मौसम की मार झेलना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया था। परिवार के लिए सुरक्षित आवास की चिंता हमेशा बनी रहती थी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्रता के आधार पर उन्हें आवास स्वीकृत हुआ। शासन से प्राप्त आर्थिक सहायता के माध्यम से उन्होंने अपना पक्का और सुरक्षित घर बनवाया। आज उनका परिवार सभी मूलभूत सुविधाओं से युक्त अपने नए आवास में सुखद और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रहा है।
      
रामकुमारी ने बताया कि पहले हर बारिश उनके लिए चिंता और परेशानी लेकर आती थी। कच्चे मकान में परिवार की सुरक्षा को लेकर डर बना रहता था, लेकिन अब पक्का घर बनने से वे स्वयं को सुरक्षित महसूस करती हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना ने केवल उन्हें एक मकान नहीं दिया, बल्कि परिवार को नई उम्मीद, आत्मविश्वास और सम्मानजनक जीवन भी दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने का कार्य किया है। आज उनका परिवार बिना किसी चिंता के अपने घर में सुखपूर्वक जीवन यापन कर रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के पात्र परिवारों को आवासीय सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। योजना के माध्यम से हजारों परिवारों को न केवल पक्का घर मिल रहा है, बल्कि उनका जीवन स्तर भी बेहतर हो रहा है।

विकसित भारत के निर्माण में युवाओं को मिले अधिक से अधिक अवसर : राज्यपाल पटेल

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भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विकसित भारत@2047 की संकल्पना को साकार करने की दिशा में प्रदेश के युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालयों द्वारा अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी वर्ष 2047 में भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के लिये सभी वर्गों से सतत् विचार-विमर्श करते रहे है जिसमें युवा भी शामिल है। विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि विद्यार्थियों में राष्ट्र निर्माण के जज्बे को और अधिक सुदृढ़ करने में अपना सक्रिय योगदान दें। राज्यपाल पटेल गुरूवार को लोकभवन में आयोजित विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 102वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के संचालन एवं समन्वय संबंधी विभिन्न विषयों की समीक्षा की गई।

राज्यपाल पटेल ने विश्वविद्यालयों को सेवायोजित पूर्व विद्यार्थियों के लिए प्रत्येक 2 वर्ष में प्लेसमेंट सम्मेलन आयोजित करने की सलाह दी है। प्लेसमेंट सम्मेलन में वर्तमान छात्र-छात्राओं को प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा। विश्वविद्यालय का गौरव भी बढ़ेगा। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विश्व के लगभग 200 देशों में किये गये योगाभ्यास से योग की वैश्विक स्वीकार्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को योग को नियमित गतिविधियों को मासिक साप्ताहिक आयोजन के क्रम में शुरू करना चाहिए। इसकी शुरुआत छात्रावासों से की जा सकती है। उन्होंने रोजगारोन्मुखी प्रमाण-पत्र एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को गरीब एवं वंचित परिवारों की आत्मनिर्भरता में व्यवहारिक पहल बताया। कृषि संबद्ध विभिन्न कार्यों के लिए भी प्रमाणन व्यवस्था विकसित किए जाने पर बल दिया।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के विश्वास के साथ उन्हें विश्वविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने भेजते हैं। इस विश्वास को बनाये रखना कुलगुरुओं और प्राध्यापकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ज्ञान और कौशल के साथ सामाजिक संवेदनशीलता से भी जोड़ना जरूरी है। विश्वविद्यालय गाँव को गोद लेकर ग्रामीणों के साथ संवाद और विकास गतिविधियों में विद्यार्थियों को सहभागी बनाएं। पिछड़े समुदायों एवं क्षेत्रों के विकास की अभूतपूर्व योजना पीएम-जनमन, धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए विद्यार्थियों को भी जोड़े। महाविद्यालयीन और विश्वविद्यालयीन छात्रों को गाँवों का भ्रमण करवाएं। इससे प्राप्त अनुभव विद्यार्थियों को भावी जीवन में वंचित और गरीब वर्गों के प्रति संवेदनशील बनाएगा।

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विश्वविद्यालयों द्वारा वित्तीय प्रबंधन को व्यवस्थित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रावधानों और निर्देशों का उल्लंघन गंभीर अनियमितता है। कुलगुरू वित्तीय निर्देशों की सीमा का कड़ाई से पालन करें। मंत्री परमार ने कहा कि कॉमन पोर्टल के माध्यम से एकीकृत ई-प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ना निजी विश्वविद्यालयों के लिए स्वैच्छिक है, किन्तु विश्वविद्यालय में प्रवेश होने की सूचना आयोग के पोर्टल पर प्रदर्शित होने की ऑटोमेडेट व्यवस्था की जाना अनिवार्य है।

बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा, राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, लोकभवन एवं उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कृषक कल्याण वर्ष में अगली छमाही में 14 जिलों में 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बढ़ेंगी सिंचाई सुविधाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृषक कल्याण वर्ष में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। इस वर्ष 14 जिलों में जिन सिंचाई परियोजनाओं के कार्य पूर्ण हो गए हैं, उनके लोकार्पण की तैयारी कर ली गई है। आगामी 6 माह में लगभग 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि करने वाली इन परियोजनाओं का लोकार्पण होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में गुरूवार को मंत्रालय में हुई जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभागों के कार्यों की समीक्षा बैठक में जानकारी दी गई कि कृषक कल्याण वर्ष में अनेक सिंचाई परियोजनाओं के लोकार्पण होंगे। इनमें बड़वानी, सीहोर, शाजापुर, देवास, झाबुआ, धार, खण्डवा, खरगोन, आलीराजपुर, राजगढ़, जबलपुर, कटनी और मण्डला जिलों की सिंचाई परियोजनाएं शामिल हैं। बैठक में सिंहस्थ से जुड़ी तीन परियोजनाओं के कार्यों की प्रगति की समीक्षा भी की गई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा घाटी विकास और जल संसाधन विभाग के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव जल संसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास विभाग डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी सहित संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

केन-मंदाकिनी लिंक अंतर प्रांतीय परियोजना का प्रस्ताव भारत सरकार को प्रेषित

बैठक में जानकारी दी गई कि केन-मंदाकिनी लिंक अन्तर्राज्यीय सिंचाई परियोजना का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है। इस परियोजना से 93 हजार 310 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का विकास होगा और 15.8 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया जा सकेगा। परियोजना में 20 किलोमीटर लंबाई की टनल भी बनाई जाएगी। परियोजना की लागत 8400 करोड़ रुपए से अधिक होगी।

सिंहस्थ से जुड़ी परियोजनाओं के कार्यों में प्रगति

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ आयोजन के उद्देश्य से पूर्ण की जाने वाली परियोजनाओं के कार्यों की जानकारी प्राप्त की। इनमें सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना का 82% कार्य पूर्ण हो गया है। बैठक में बताया गया कि कान्ह डायवर्सन क्लोज्ड डक्ट परियोजना में 66% प्रगति है। शिप्रा तट पर सिंहस्थ में करोड़ों लोगों द्वारा सुविधाजनक ढंग से पुण्य स्नान का लाभ लेने के दृष्टि से 29 किलोमीटर लंबाई में बनाए जा रहे घाटों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस कार्य में भी 60% प्रगति है।

सिंचाई क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि

प्रदेश में सिंचित रकबा निरंतर बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में निर्मित और निर्माणाधीन परियोजनाओं से निकट भविष्य में मिलने वाले लाभ को जोड़ें तो प्रदेश में सिंचित क्षेत्र 95. 45 लाख हेक्टेयर हो जाएगा। इसके अलावा अन्य स्वीकृति प्राप्त परियोजनाओं को समाहित करें तो यह आंकड़ा 108 लाख हेक्टेयर होगा। कार्यों को तेजी से पूरा किए जाने के फलस्वरूप सिंचाई क्षेत्र का निरंतर विस्तार हो रहा है। गत ढाई वर्ष में लगभग 10 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र में वृद्धि हुई है।

केन-बेतवा अंतर्राज्यीय परियोजनाओं में पुनर्व्यवस्थापन के लिए विशेष पैकेज

बैठक में जानकारी दी गई कि केन -बेतवा अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना में बुंदेलखण्ड क्षेत्र के दस जिलों में 8.11 लाख हेक्टेयर वार्षिक सिंचाई के साथ 130 मेगावॉट ऊर्जा उत्पादन भी होगा। परियोजना में भू-अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन के लिए विशेष पैकेज के तहत अवार्ड पारित कर 90 प्रतिशत भुगतान किया चुका है। बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देश्य परियोजना में चकरपुर एवं मड़िया बांध का काम पूरा हो गया है। संशोधित पार्वती काली सिंध चम्बल अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना में 13 जिलों के 6.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी।

कारम परियोजना और छिंदवाड़ा की चतुर्थ बांध परियोजना

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि वर्ष 2022 में क्षतिग्रस्त हुए कारम बांध के वर्ष 2024 से पुनर्निर्माण के कार्य प्रारंभ हुए, जो लगभग पूर्ण हो गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चतुर्थ बांध परियोजना (छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स) के कार्यों और अन्य परियोजनाओं के कार्यों की समीक्षा की।

स्लीमनाबाद टनल के उद्घाटन की तैयारी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा की अमृत धारा को सोन नदी से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण स्लीमनाबाद टनल के उद्घाटन के लिए आवश्यक तैयारी के निर्देश दिए। बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत जबलपुर स्थित बरगी बांध से निकलने वाली यह ट्रांस-वैली केनाल प्रदेश की सबसे ज्यादा 227 क्यूमेक डिस्चार्ज करयिंग कैपेसिटी वाली नहर के माध्यम से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना के लगभग डेढ़ हजार गांव की करीब ढाई लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का वरदान प्राप्त होगा। दायीं तट मुख्य नहर के किलोमीटर 104 से 116 के मध्य निर्मित इस टनल का कार्य लगभग डेढ़ दशक से चल रहा था, जो लगभग पूर्ण हो चुका है। टनल की कुल लम्बाई 11.952 किलोमीटर और जल प्रवाह क्षमता 152 क्यूमेक है। टनल का डायमीटर 10.140 मीटर है। किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने में इस टनल की विशेष उपयोगिता होगी।

बिहार को मिलेगा नया धार्मिक धाम, मोकामा में बनेगा तिरुपति बालाजी मंदिर

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पटना। बिहार को धार्मिक पर्यटन के एक वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में पटना जिले के मोकामा शहर को एक बड़े धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत मोकामा खास मौजा स्थित कुल 10.11 एकड़ सरकारी भूमि को आंध्र प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध 'तिरुमला तिरुपति देवस्थानम्' (TTD) को सौंपने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार यह कीमती जमीन टीटीडी को 99 वर्षों की लंबी अवधि के लिए मात्र 1 रुपये के सांकेतिक (टोकन) मूल्य पर लीज पर उपलब्ध कराएगी, जहां भगवान वेंकटेश्वर (बालाजी) के भव्य मंदिर और परिसर का निर्माण किया जाएगा।

नीतिगत नियमों में दी गई विशेष ढील; एमओयू (MoU) के प्रारूप को भी मिली प्रशासनिक हरी झंडी

मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस विशेष परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने अपने तय नियमों में भी नरमी दिखाई है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पुराने प्रविधानों और 'बिहार खासमहल नीति, 2011' के कुछ कड़े नियमों व शर्तों को शिथिल (रिलैक्स) करते हुए इस भूमि बंदोबस्ती को विशेष स्वीकृति दी गई है। इसके साथ ही, बिहार सरकार और तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् के बीच होने वाले आगामी समझौता ज्ञापन (MoU) के अंतिम प्रारूप को भी कैबिनेट ने अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है, जिससे अब जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सकेगी।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर खुलेंगे

माना जा रहा है कि मोकामा में दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला पर आधारित तिरुपति बालाजी मंदिर के निर्माण से न केवल बिहार, बल्कि पूरे पूर्वी भारत के श्रद्धालुओं को भगवान बालाजी के दर्शन का सौभाग्य अपने नजदीक ही मिल सकेगा। इस भव्य मंदिर के निर्माण से मोकामा और आसपास के क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) का तेजी से विकास होगा। इसके साथ ही होटल, परिवहन और स्थानीय व्यापार को नई गति मिलेगी, जिससे क्षेत्र के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। प्रशासन का मानना है कि यह परियोजना आने वाले समय में बिहार पर्यटन का मुख्य आकर्षण केंद्र बनेगी।

केतन मर्डर केस में नया मोड़, सिया और चेतन ने एक-दूसरे पर लगाए गंभीर आरोप

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मुंबई: पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। इस मर्डर मिस्ट्री में मुख्य आरोपी और केतन की मंगेतर सिया गोयल, अपने ही प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर हत्या की वारदात को अंजाम देने के आरोपों में घिरी हुई है। लेकिन अब इस केस में एक नया ट्विस्ट आ चुका है। पुलिस सूत्रों से मिली ताज़ा जानकारी के मुताबिक, लोहागढ़ किले की ऊंचाइयों से केतन को नीचे धकेलकर मौत के घाट उतारने के महज़ कुछ दिनों बाद ही, दोनों मुख्य आरोपी—सिया और चेतन—अब एक-दूसरे के जानी दुश्मन बन बैठे हैं।

प्यार में मिलाया हाथ, अब गुनाह से पल्ला झाड़ रहे दोनों आरोपी

जांच से जुड़े वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, पुलिस कस्टडी में पूछताछ के दौरान सिया और चेतन के बीच भारी फूट पड़ चुकी है। दोनों अब खुद को बेकसूर साबित करने और सजा से बचने के लिए एक-दूसरे पर केतन की हत्या की पूरी साजिश रचने का ठीकरा फोड़ रहे हैं। जहां एक तरफ सिया का कहना है कि यह पूरा प्लान चेतन का था, वहीं चेतन का दावा है कि सिया के कहने पर ही उसने इस खौफनाक कदम को अंजाम दिया। पुलिस अब दोनों के बयानों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

कैफे में बैठकर तैयार की गई थी खौफनाक साजिश

पुलिसिया तफ्तीश में इस बात की भी पुष्टि हुई है कि केतन को रास्ते से हटाने की पूरी प्लानिंग बेहद ठंडे दिमाग से की गई थी। वारदात वाले दिन यानी 18 जून को चेतन और सिया एक स्थानीय कैफे में मिले थे। इसी मुलाकात के दौरान दोनों ने बैठकर यह पूरा मास्टरप्लान तैयार किया था कि केतन को किस बहाने से लोहागढ़ किले पर ले जाया जाएगा और वहां से नीचे फेंक कर उसे कैसे हादसे का रूप देने की कोशिश की जाएगी। फिलहाल पुलिस इस कैफे के सीसीटीवी फुटेज और दोनों के मोबाइल लोकेशन को पुख्ता सबूत के तौर पर खंगाल रही है।

मुहर्रम जुलूस विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का हस्तक्षेप से इन्कार, कहा- जरूरत नहीं

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प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुहर्रम के जुलूस से जुड़ी एक जनहित याचिका को यह कहते हुए बंद (दाखिल दफ्तर) कर दिया है कि यह पूरा मामला मुस्लिम समुदाय का आपसी विषय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस स्थिति में राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है और न ही इसमें कोर्ट के किसी दखल की आवश्यकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने इलाहाबाद ऐतिहासिक मोहर्रम कमेटी के अध्यक्ष असरार अहमद नियाजी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

प्रशासन को जुलूस से कोई आपत्ति नहीं: सरकारी पक्ष

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से मुख्य स्थायी अधिवक्ता मनोज सिंह ने कोर्ट के सामने प्रयागराज कमिश्नरेट के सहायक पुलिस आयुक्त द्वारा 23 जून 2026 को जारी लिखित निर्देश पेश किए। इन दस्तावेजों के आधार पर कोर्ट को बताया गया कि सरकार या स्थानीय प्रशासन को मुहर्रम का जुलूस निकालने पर कोई आपत्ति नहीं है। प्रशासन ने साफ किया कि जुलूस न निकालने का फैसला 'वक्फ तजिया कलां, इलाहाबाद' नामक संस्था का अपना निजी निर्णय है, जिसका याचिकाकर्ता कमेटी से कोई लेना-देना नहीं है।

आपसी तालमेल से सुलझाएं आंतरिक विषय: हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि यह पूरा विवाद याचिकाकर्ता और मुस्लिम समुदाय के अन्य सदस्यों के बीच का एक घरेलू और आंतरिक मामला है। इस तरह के विषयों में राज्य सरकार या प्रशासन का कोई हस्तक्षेप नहीं बनता है।

इस मामले में याचिकाकर्ता का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता सैयद मोहम्मद इकबाल हसन ने रखा, जबकि प्रतिवादी की ओर से पुनीत कुमार गुप्ता कोर्ट में उपस्थित रहे।

1000 किमी दूर के परमिट पर रेत परिवहन का खेल, बिना नंबर डंपर जब्त

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सिंगरौली। जिले के बैढ़न थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बलियारी इलाके में बहने वाली रेड नदी से माफियाओं द्वारा किए जा रहे अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के खिलाफ प्रशासनिक अमले ने बड़ी कार्रवाई की है। गुरुवार तड़के खनिज विभाग, राजस्व और स्थानीय पुलिस की एक संयुक्त टीम ने नदी क्षेत्र में औचक दबिश दी। इस छापेमारी के दौरान टीम ने अवैध रेत से ओवरलोड एक डंपर को मौके पर ही जब्त कर लिया। हालांकि, कार्रवाई की भनक लगते ही नदी में मौजूद दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक अपने वाहन लेकर भागने में सफल रहे। इस कार्रवाई में सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब जब्त डंपर की तलाशी के दौरान उसमें बुरहानपुर जिले की 'ट्रांजिट परमिट' (TP) पाई गई, जिसने रेत के इस अवैध खेल में अंतरजिला सिंडिकेट के सक्रिय होने की पोल खोल दी है।

वायरल वीडियो ने खोली थी पोल; सुबह 5 बजे टीम ने मारा छापा

दरअसल, यह त्वरित कार्रवाई बुधवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद अमल में लाई गई। उस वीडियो में रेड नदी के भीतर एक दर्जन से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में 35 से 40 मजदूरों द्वारा सरेआम और बेखौफ होकर रेत की लोडिंग की जा रही थी। वीडियो का संज्ञान लेते हुए कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गुरुवार सुबह करीब 5:00 बजे ही संयुक्त टीम ने बलियारी क्षेत्र में घेराबंदी की। मौके पर रेत के अवैध खनन के पुख्ता साक्ष्य और ताजे निशान मिले हैं, जिससे साफ है कि यहाँ बड़े पैमाने पर खेल चल रहा था।

917 किलोमीटर की दूरी और फर्जीवाड़ा: सिंगरौली की रेत पर बुरहानपुर का परमिट!

जब्त डंपर से बुरहानपुर जिले की टीपी (ट्रांजिट परमिट) मिलने के बाद खनिज विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं। भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो बुरहानपुर और सिंगरौली के बीच करीब 917 किलोमीटर की लंबी दूरी है। ऐसे में सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह खड़ा होता है कि जब खुद सिंगरौली जिले में शासन द्वारा 42 रेत खदानें स्वीकृत की गई हैं, तो इतनी दूर स्थित जिले की टीपी यहाँ चल रहे डंपर में क्या कर रही थी? आशंका जताई जा रही है कि माफिया द्वारा बाहरी जिले की वैध टीपी की आड़ में सिंगरौली की नदियों से चुराई गई रेत को वैध ठिकाने पर भेजने और अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने का एक बड़ा रैकेट चलाया जा रहा था।

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सरकारी सिस्टम और पारदर्शिता के घेरे में: जांच के बाद ही खुलेगा पूरा राज

इस हाई-प्रोफाइल मामले ने खनिज विभाग की ऑनलाइन ट्रांजिट परमिट व्यवस्था और उसकी मॉनिटरिंग प्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। इस संबंध में खनिज अधिकारियों का कहना है कि जब्त डंपर, बरामद टीपी और गाड़ी के इंजन-चेसिस नंबर से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से स्क्रूटनी की जा रही है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही इस अंतरजिला अवैध रेत नेटवर्क के मुख्य सरगना, वाहन मालिक और इसमें शामिल सफेदपोशों के चेहरों से नकाब हटेगा। फिलहाल मामले में बैढ़न थाने में मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

अभिषेक बनर्जी को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर रोक फिलहाल जारी

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जबलपुर (मध्य प्रदेश)। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से एक बार फिर बड़ी कानूनी राहत मिली है। न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय लेते हुए बनर्जी के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक को फिर से बहाल कर दिया है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने उनकी उस मुख्य याचिका को भी पुनर्जीवित (बहाल) कर दिया है, जिसे तकनीकी कारणों से खारिज कर दिया गया था। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकल पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए यह नया आदेश जारी किया है, जिससे टीएमसी सांसद को तात्कालिक कानूनी सुरक्षा कवच मिल गया है।

वकील की अनुपस्थिति के कारण 17 जून को खारिज हो गई थी याचिका, हट गई थी राहत

इस मामले में मोड़ तब आया था जब बीते 17 जून 2026 को हुई सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी या उनके पक्ष का कोई भी अधिवक्ता न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ था। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने माना था कि याचिकाकर्ता इस कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने का इच्छुक नहीं है। परिणाम स्वरूप, कोर्ट ने बनर्जी की याचिका को खारिज करते हुए उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक को हटा लिया था, जिससे उनकी गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया था। हालांकि, अब एकल पीठ ने अपने पूर्व के उस सख्त आदेश को पलटते हुए याचिकाकर्ता को दोबारा राहत प्रदान की है।

क्या है विवाद? आकाश विजयवर्गीय को 'गुंडा' कहने पर भोपाल में दर्ज हुआ था मुकदमा

यह पूरा विवाद साल 2020 का है, जब कोलकाता में आयोजित एक राजनीतिक रैली के दौरान अभिषेक बनर्जी ने मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बेटे और इंदौर के पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय को कथित तौर पर 'गुंडा' कहकर संबोधित किया था। इस सार्वजनिक बयान को अपनी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा पर गहरा आघात बताते हुए आकाश विजयवर्गीय ने साल 2021 में भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट (MP-MLA Court) में बनर्जी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

एमपी-एमएलए कोर्ट के वारंट को दी थी चुनौती; फिलहाल टली गिरफ्तारी

भोपाल की निचली अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद टीएमसी सांसद के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इस वारंट के विरोध में अभिषेक बनर्जी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की शरण ली थी। उनके वकीलों ने तर्क दिया था कि वे एक जिम्मेदार सांसद हैं और उनके कानून से भागने की कोई आशंका नहीं है। हाई कोर्ट ने इन दलीलों के आधार पर पहली बार 12 नवंबर 2025 को गिरफ्तारी वारंट पर अंतरिम रोक लगाई थी। अब ताजा आदेश के बाद हाई कोर्ट से मिली वह राहत आगे भी बरकरार रहेगी और आगामी सुनवाई तक पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकेगी।

CBSE छात्रों को मिली नई सुविधा, क्षेत्रीय कार्यालय में जाकर देख सकेंगे उत्तर पुस्तिका

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रायपुर। छत्तीसगढ़ मंत्रालय (महानदी भवन) से स्कूल शिक्षा विभाग को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण खबर आ रही है। राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में प्रदेश की शैक्षणिक गुणवत्ता को सुधारने के लिए कई कड़े और दूरगामी निर्देश जारी किए हैं। बैठक में यह साफ किया गया कि सरकारी स्कूलों के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए अब प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के बच्चों की बुनियादी दक्षता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

विभागीय आदेश के अनुसार, अब राज्य के प्राथमिक स्तर के बच्चों को अनिवार्य रूप से बारहखड़ी और 20 तक के पहाड़े, तथा माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को 25 तक के पहाड़े पूरी तरह कंठस्थ होने चाहिए। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के बच्चों में भाषाई कौशल सुधारने के लिए हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में धाराप्रवाह पठन (रीडिंग) को अनिवार्य कर दिया गया है, जिसके लिए पूरे प्रदेश के स्कूलों में एक विशेष अभियान चलाया जाएगा।

सत्र 2027-28 से 1 अप्रैल को ही होगा किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल का वितरण

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर समय पर संचालित करने के लिए एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री ने घोषणा की है कि आगामी शैक्षणिक सत्र 2027-28 से प्रदेश के सभी शासकीय विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया और नए सत्र का शुभारंभ प्रतिवर्ष 1 अप्रैल से कर दिया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसी तिथि (1 अप्रैल) को ही छात्रों को पाठ्यपुस्तक, गणवेश (यूनिफॉर्म) और साइकिल का वितरण भी शत-प्रतिशत सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि सत्र के पहले दिन से ही छत्तीसगढ़ के बच्चों की पढ़ाई बिना किसी बाधा के शुरू हो सके।

31 जुलाई तक ड्रॉपआउट बच्चों को वापस लाने और अटैचमेंट खत्म करने का अल्टीमेटम

प्रदेश में शिक्षा के अधिकार को पूरी तरह लागू करने के लिए शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि शाला त्यागी (ड्रॉपआउट) बच्चों को चिह्नित कर आगामी 31 जुलाई तक हर हाल में दोबारा स्कूल वापस लाया जाए। इसके अलावा, जो शिक्षक मूल रूप से अध्यापन कार्य छोड़कर लंबे समय से कार्यालयों में संलग्न (अटैच) हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर उनके मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में भेजने का आदेश दिया गया है। छत्तीसगढ़ के सभी जर्जर स्कूली भवनों की पहचान कर उन्हें डिस्मेंटल करने और भवनविहीन स्कूलों की स्थिति की समीक्षा जिला कलेक्टर स्तर पर करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

वीएसके ऐप से ऑनलाइन हाजिरी अनिवार्य, जुलाई से रुकेगा वेतन

शिक्षकों की दैनिक उपस्थिति और समयबद्धता को लेकर बैठक में वीएसके (विद्या समीक्षा केंद्र) ऐप की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान जून महीने में ऐप का उपयोग न करने पर किसी भी शिक्षक के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाएगी। हालांकि, जुलाई माह से इस ऐप पर सभी शिक्षकों का पंजीकरण और दैनिक ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना पूरी तरह अनिवार्य होगा। जुलाई महीने का मासिक वेतन केवल वीएसके ऐप में दर्ज प्रामाणिक डेटा और उपस्थिति के आधार पर ही जारी किया जाएगा, अन्यथा बिना ऐप हाजिरी के वेतन रोक दिया जाएगा।

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