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CBSE छात्रों को मिली नई सुविधा, क्षेत्रीय कार्यालय में जाकर देख सकेंगे उत्तर पुस्तिका

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रायपुर। छत्तीसगढ़ मंत्रालय (महानदी भवन) से स्कूल शिक्षा विभाग को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण खबर आ रही है। राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में प्रदेश की शैक्षणिक गुणवत्ता को सुधारने के लिए कई कड़े और दूरगामी निर्देश जारी किए हैं। बैठक में यह साफ किया गया कि सरकारी स्कूलों के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए अब प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के बच्चों की बुनियादी दक्षता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

विभागीय आदेश के अनुसार, अब राज्य के प्राथमिक स्तर के बच्चों को अनिवार्य रूप से बारहखड़ी और 20 तक के पहाड़े, तथा माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को 25 तक के पहाड़े पूरी तरह कंठस्थ होने चाहिए। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के बच्चों में भाषाई कौशल सुधारने के लिए हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में धाराप्रवाह पठन (रीडिंग) को अनिवार्य कर दिया गया है, जिसके लिए पूरे प्रदेश के स्कूलों में एक विशेष अभियान चलाया जाएगा।

सत्र 2027-28 से 1 अप्रैल को ही होगा किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल का वितरण

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर समय पर संचालित करने के लिए एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री ने घोषणा की है कि आगामी शैक्षणिक सत्र 2027-28 से प्रदेश के सभी शासकीय विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया और नए सत्र का शुभारंभ प्रतिवर्ष 1 अप्रैल से कर दिया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसी तिथि (1 अप्रैल) को ही छात्रों को पाठ्यपुस्तक, गणवेश (यूनिफॉर्म) और साइकिल का वितरण भी शत-प्रतिशत सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि सत्र के पहले दिन से ही छत्तीसगढ़ के बच्चों की पढ़ाई बिना किसी बाधा के शुरू हो सके।

31 जुलाई तक ड्रॉपआउट बच्चों को वापस लाने और अटैचमेंट खत्म करने का अल्टीमेटम

प्रदेश में शिक्षा के अधिकार को पूरी तरह लागू करने के लिए शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि शाला त्यागी (ड्रॉपआउट) बच्चों को चिह्नित कर आगामी 31 जुलाई तक हर हाल में दोबारा स्कूल वापस लाया जाए। इसके अलावा, जो शिक्षक मूल रूप से अध्यापन कार्य छोड़कर लंबे समय से कार्यालयों में संलग्न (अटैच) हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर उनके मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में भेजने का आदेश दिया गया है। छत्तीसगढ़ के सभी जर्जर स्कूली भवनों की पहचान कर उन्हें डिस्मेंटल करने और भवनविहीन स्कूलों की स्थिति की समीक्षा जिला कलेक्टर स्तर पर करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

वीएसके ऐप से ऑनलाइन हाजिरी अनिवार्य, जुलाई से रुकेगा वेतन

शिक्षकों की दैनिक उपस्थिति और समयबद्धता को लेकर बैठक में वीएसके (विद्या समीक्षा केंद्र) ऐप की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान जून महीने में ऐप का उपयोग न करने पर किसी भी शिक्षक के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाएगी। हालांकि, जुलाई माह से इस ऐप पर सभी शिक्षकों का पंजीकरण और दैनिक ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना पूरी तरह अनिवार्य होगा। जुलाई महीने का मासिक वेतन केवल वीएसके ऐप में दर्ज प्रामाणिक डेटा और उपस्थिति के आधार पर ही जारी किया जाएगा, अन्यथा बिना ऐप हाजिरी के वेतन रोक दिया जाएगा।

स्कूली शिक्षा में बड़ा कदम: पहाड़े, बारहखड़ी और हिंदी-अंग्रेजी रीडिंग पर रहेगा विशेष फोकस

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रायपुर। मंत्रालय स्थित महानदी भवन में आयोजित स्कूल शिक्षा विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने प्रदेश में शैक्षणिक गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के संबंध में कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं। बैठक में छात्र-छात्राओं की बुनियादी दक्षता और समझ को विकसित करने वाले व्यावहारिक उपायों को तत्काल धरातल पर उतारने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्राथमिक स्तर के बच्चों को अनिवार्य रूप से बारहखड़ी व 20 तक के पहाड़े और माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को कम से कम 25 तक के पहाड़े पूरी तरह याद होने चाहिए। इसके साथ ही, सरकारी स्कूलों के बच्चों को हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में बिना अटके धाराप्रवाह पढ़ना (रीडिंग) आना चाहिए, जिसके लिए पूरे प्रदेश में एक विशेष अभियान संचालित किया जाएगा।

शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने आगे बताया कि आगामी शैक्षणिक सत्र 2027-28 से राज्य के समस्त विद्यालयों में दाखिले की पूरी प्रक्रिया और नए सत्र की शुरुआत हर साल 1 अप्रैल से कर दी जाएगी। इसी निर्धारित तिथि पर छात्र-छात्राओं को निशुल्क पाठ्यपुस्तकें, स्कूल यूनिफॉर्म (गणवेश) और साइकिलों का वितरण भी सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि प्राइवेट स्कूलों की तरह ही शासकीय विद्यालयों में भी समय पर नियमित रूप से पठन-पाठन का कार्य शुरू किया जा सके।

ड्रॉपआउट बच्चों की घर वापसी और अटैचमेंट समाप्ति के निर्देश

शिक्षा के अधिकार को मजबूत करने के लिए मंत्री ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि शाला त्यागी (ड्रॉपआउट) बच्चों को चिह्नित कर आगामी 31 जुलाई तक हर हाल में दोबारा स्कूल में दाखिला दिलाया जाए। इसके अतिरिक्त, जो शिक्षक मूल रूप से अध्यापन कार्य छोड़कर लंबे समय से विभिन्न प्रशासनिक कार्यालयों में संलग्न (अटैच) हैं, उनका अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर उन्हें उनके मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में भेजने का आदेश दिया गया है। साथ ही, राज्य के जर्जर स्कूली भवनों को चिह्नित कर उन्हें ढहाने (डिस्मेंटल करने) और जिन स्थानों पर स्कूल के पास खुद की बिल्डिंग नहीं है, वहां जिला कलेक्टर स्तर पर स्थिति की गहन समीक्षा करने को कहा गया है।

वीएसके एप से हाजिरी अनिवार्य, जुलाई से रुकेगा वेतन

शिक्षकों की दैनिक उपस्थिति को लेकर बैठक में वीएसके (विद्या समीक्षा केंद्र) एप की कार्यप्रणाली पर विस्तृत चर्चा की गई। विभागीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि तकनीकी दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान महीने में ऐप का उपयोग न करने पर किसी भी शिक्षक के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाएगी। हालांकि, जुलाई महीने से इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सभी शिक्षकों का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) और रोजाना की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। जुलाई माह और उसके बाद का मासिक वेतन केवल वीएसके एप में उपलब्ध प्रामाणिक डेटा और उपस्थिति के आधार पर ही कोषालय से जारी किया जाएगा।

अधोसंरचना विकास और कड़े प्रशासनिक सुधारात्मक कदम

बैठक के समापन पर विभागीय सचिव और आला अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे इन सभी घोषणाओं और नियमों का जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं। स्कूलों में पेयजल, शौचालय और ब्लैकबोर्ड जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता की भी रैंडम चेकिंग की जाएगी। सरकार का मुख्य ध्येय सरकारी स्कूलों के प्रति आम जनता के विश्वास को दोबारा बहाल करना है, जिसके लिए प्राचार्यों और संकुल प्रभारियों की जवाबदेही तय की जा रही है और लापरवाही बरतने वाले स्टाफ पर सीधे निलंबन जैसी दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी की जा चुकी है।

काबुल निकासी के चेहरे रहे डोनाह्यू ने छोड़ा पद, अमेरिका में चर्चा तेज

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वाशिंगटन: अफगानिस्तान में दो दशक लंबे चले युद्ध के बाद जब अमेरिकी सेना वहां से वापस लौट रही थी, तब काबुल एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाले आखिरी अमेरिकी फौजी के रूप में जनरल क्रिस डोनाह्यू का चेहरा पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया था। उनकी नाइट विजन कैमरे से ली गई वह आखिरी तस्वीर वैश्विक मीडिया में अमेरिकी सैन्य अभियान के अंत का प्रतीक बनी थी। अब उन्हीं जनरल क्रिस डोनाह्यू से जुड़ी एक बड़ी खबर आ रही है कि उन्होंने अपनी मौजूदा जिम्मेदारी छोड़ने का फैसला कर लिया है। हालांकि, उनके पद छोड़ने की कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ चल रहे मतभेदों को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है। डोनाह्यू के हटने के बाद अब उनके डिप्टी (उपाध्यक्ष) इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को संभालेंगे।

चार-स्टार कमांड को घटाने की तैयारी में थे रक्षा मंत्री

रिपोर्ट्स के अनुसार, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ जनरल डोनाह्यू की ताकत और उनके अधिकारों को कम करने की तैयारी कर रहे थे। हेगसेथ की योजना डोनाह्यू के चार-स्टार कमांड (फोर-स्टार) दर्जे को घटाकर तीन-स्टार (थ्री-स्टार) करने की थी। अगर ऐसा होता, तो जनरल डोनाह्यू के अधिकार और सैन्य जिम्मेदारियां काफी सीमित हो जातीं, जिसका उनके शानदार सैन्य करियर पर बहुत बुरा असर पड़ता। इस फैसले से आहत होकर ही उन्होंने पद छोड़ने का मन बनाया।

सेना प्रमुख पद के माने जा रहे थे मजबूत दावेदार

साल 1992 में अमेरिकी सेना में बतौर अधिकारी शामिल होने वाले जनरल क्रिस डोनाह्यू को अपनी बेहतरीन नेतृत्व क्षमता के लिए जाना जाता है। अगस्त 2021 में अफगानिस्तान से सेना की अंतिम विदाई के समय उनके द्वारा निभाए गए नेतृत्व के बाद से उन्हें भविष्य में अमेरिकी सेना प्रमुख (आर्मी चीफ) या जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जैसे देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण सैन्य पदों के लिए एक बेहद मजबूत दावेदार माना जा रहा था।

पेंटागन में बड़े स्तर पर फेरबदल का दौर जारी

जनरल डोनाह्यू का अपना पद छोड़ने का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के नेतृत्व में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय 'पेंटागन' के भीतर बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल चल रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता संभालने के बाद से ही रक्षा क्षेत्र की नीतियों और नेतृत्व में कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं, जिसके तहत अब तक कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को या तो उनके पदों से हटाया जा चुका है या फिर वे स्वयं अपने पदों से इस्तीफा दे रहे हैं।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली में गड़बड़ी का खुलासा, चावल हेराफेरी मामले में FIR

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत संचालित होने वाली शासकीय उचित मूल्य की दुकानों (राशन दुकानों) में खाद्यान्न की अफरा-तफरी और गड़बड़ी के मामले लगातार तूल पकड़ रहे हैं। खाद्य विभाग द्वारा औचक निरीक्षण और भौतिक सत्यापन के दौरान कई राशन दुकानों के स्टॉक में बड़े पैमाने पर चावल की भारी कमी (शॉर्टेज) उजागर हुई है। इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और धांधली को देखते हुए खाद्य विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। इसी कड़ी में, जोरा स्थित राशन दुकान की जांच के दौरान कुल 389 क्विंटल चावल कम पाए जाने पर विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए संबंधित समिति अध्यक्ष और विक्रेता के विरुद्ध तेलीबांधा पुलिस थाने में नामजद प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करा दी है।

विभागीय जांच का दायरा केवल एक दुकान तक सीमित नहीं है, बल्कि सेरीखेड़ी, कोसमखुटा, गनौद सहित रायपुर शहर की कई अन्य सहकारी समितियों के स्टॉक में भी 175 क्विंटल से लेकर 450 क्विंटल तक चावल गायब मिला है। खाद्य नियंत्रक अधिकारियों के मुताबिक, इन सभी डिफाल्टर समितियों को पूर्व में कई बार कारण बताओ नोटिस जारी कर गायब राशन की शत-प्रतिशत भरपाई करने अथवा उसके समतुल्य बाजार राशि सरकारी खजाने में जमा कराने के कड़े निर्देश दिए गए थे। तय समयसीमा के भीतर जवाब न मिलने और राशि की रिकवरी न होने के कारण अब विभाग ने इन सभी के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज कराने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। कुछ चुनिंदा दुकानों के स्टॉक में तो 1250 क्विंटल तक खाद्यान्न की भारी कमी सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे को हिला कर रख दिया है।

जोरा राशन दुकान से 15 लाख का खाद्यान्न गायब

खाद्य विभाग से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जोरा में संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान (आईडी संख्या 442001026) के गोदामों की जब बारीकी से गिनती की गई, तो कागजी रिकॉर्ड के मुकाबले जमीन पर 389 क्विंटल चावल कम मिला। बाजार भाव के आकलन के अनुसार गायब किए गए इस सरकारी चावल की कुल कीमत 15 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है। इस वित्तीय अनियमितता को लेकर दुकान के प्रबंधन और विक्रेता को लगातार रिमाइंडर नोटिस भेजे गए थे, परंतु महीनों बीत जाने के बाद भी उनकी तरफ से कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण या राशि जमा नहीं की गई, जिसके परिणामस्वरूप पुलिस ने अब इस मामले में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया है।

सेरीखेड़ी से लेकर गनौद तक फैली गड़बड़ी की जड़ें

जांच दल को जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण अंचलों तक की राशन दुकानों में व्यापक विसंगतियां देखने को मिली हैं। सेरीखेड़ी स्थित उचित मूल्य दुकान (आईडी 442001044) के भौतिक सत्यापन में लगभग 450 क्विंटल चावल का स्टॉक कम पाया गया, जबकि आरंग विकासखंड के कोसमखुटा (आईडी 442003042) में तकरीबन 220 क्विंटल राशन गायब था। इसके साथ ही रायपुर शहर की दो अन्य दुकानों (आईडी 441001290 और 441001291) के रिकॉर्ड में भी 200 से 250 क्विंटल तक की कमी दर्ज की गई है। इसी प्रकार ग्राम गनौद की दुकान में भी 175 क्विंटल चावल की किल्लत पाई गई है, जिन्हें अंतिम चेतावनी पत्र जारी किया जा चुका है।

हजार क्विंटल से अधिक के शॉर्टेज पर कानूनी हंटर

खाद्य विभाग के विशेष विंग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में खुलासा किया है कि राशन दुकान आईडी 442001040 में सबसे बड़ी गड़बड़ी सामने आई है, जहां रिकॉर्ड से पूरे 1250 क्विंटल चावल नदारद मिले हैं। इसके अलावा, दुकान आईडी 442000149 में 385 क्विंटल और दुकान आईडी 442001059 में 300 क्विंटल खाद्यान्न के स्टॉक की कमी पकड़ी गई है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जिन भी समितियों ने गरीबों के हक के इस राशन की हेराफेरी की है, उन्हें कतई बख्शा नहीं जाएगा। यदि निर्धारित अवधि में स्टॉक का मिलान या उसकी निर्धारित राशि राजकोष में जमा नहीं कराई जाती है, तो इन सभी प्रभारियों के खिलाफ भी पुलिसिया कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

नकली दस्तावेज बनाने वाले रैकेट का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, जांच में जुटी पुलिस

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पाकुड़। झारखंड के पाकुड़ जिले में फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह के खिलाफ स्थानीय पुलिस का ताबड़तोड़ अभियान जारी है। मुफस्सिल थाना पुलिस ने इस रैकेट के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए प्राथमिकी अभियुक्त उत्कृष्ट राठौर उर्फ दीपक को गोड्डा जिले से गिरफ्तार कर लिया है। मुफस्सिल थाना प्रभारी गौरव कुमार ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि बीते 21 जून को दर्ज मामले के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। पुलिस ने आरोपी के पास से भारी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज भी बरामद किए हैं, जिनकी गहनता से जांच की जा रही है।

सह-आरोपी हेमंत की निशानदेही पर गोड्डा के सोनारचक में पुलिस ने मारा छापा

थाना प्रभारी के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत तब हुई थी जब सदर प्रखंड के पहाड़िया टोला गांव से हेमंत कुमार साह नामक व्यक्ति को जाली दस्तावेज बनाने के आरोप में पकड़ा गया था। नवरोत्तमपुर के पंचायत सचिव उत्तम कुमार घोष की लिखित शिकायत पर पुलिस ने कांड संख्या 79/26 दर्ज कर हेमंत को न्यायिक हिरासत में भेजा था। जेल में बंद हेमंत से जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, तो उसने अपने पूरे नेटवर्क का खुलासा किया। इसी इनपुट के आधार पर पुलिस टीम ने गोड्डा जिले के पथरगामा थाना क्षेत्र अंतर्गत सोनारचक में छापेमारी कर मुख्य सूत्रधार उत्कृष्ट राठौर को धर दबोचा।

साइबर कैफे और सॉफ्टवेयर का खेल: गांव से कलेक्ट होते थे पैसे और कागजात

गिरोह के काम करने के तौर-तरीकों का खुलासा करते हुए मुफस्सिल थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी हेमंत कुमार साह ग्रामीण इलाकों से सीधे-साधे लोगों को झांसा देकर उनसे दस्तावेज और मोटी रकम वसूल करता था। वह इन जानकारियों को गोड्डा में बैठे उत्कृष्ट को भेज देता था। इसके बाद, उत्कृष्ट एक विशेष कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के जरिए हूबहू दिखने वाले फर्जी डिजिटल दस्तावेज तैयार करता था और साइबर कैफे से उसका प्रिंट निकालकर हेमंत को दे देता था, जिसे ग्रामीणों में बांट दिया जाता था।

ठगी से परेशान ग्रामीणों ने चालाकी से बिछाया था जाल, पिटाई के बाद किया था पुलिस के हवाले

उल्लेखनीय है कि हिरणपुर प्रखंड के बागशीशा गांव निवासी हेमंत कुमार साह ने पहाड़िया टोला के भोले-भाले ग्रामीणों से जन्म प्रमाण पत्र, जाति, निवास तथा अन्य जरूरी पहचान पत्र बनाने के नाम पर हजारों रुपये की ठगी की थी। पैसे लेने के बाद वह फरार हो गया था। परेशान ग्रामीणों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए गांव के कुछ अन्य लोगों का प्रमाण पत्र बनवाने के बहाने हेमंत को दोबारा गांव बुलाया। जैसे ही वह गांव पहुंचा, ग्रामीणों ने उसे पकड़कर सबक सिखाया और तुरंत मुफस्सिल थाना पुलिस को सौंप दिया था। पुलिस फिलहाल इस रैकेट में शामिल अन्य तकनीकी एक्सपर्ट्स और स्थानीय दलालों की तलाश में जुटी है।

दिल्ली में CM साय और नड्डा की अहम बैठक, खेती में नैनो यूरिया-डीएपी के विस्तार पर चर्चा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गुरुवार को देश की राजधानी नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा से उनके आधिकारिक निवास पर एक शिष्टाचार भेंट की। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, चिकित्सा अधोसंरचना के विस्तार, जीवन रक्षक औषधियों की उपलब्धता और कृषि क्षेत्र के लिए आवश्यक उर्वरकों की आपूर्ति सहित कई अत्यंत महत्वपूर्ण एवं नीतिगत विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि उनकी सरकार छत्तीसगढ़ के दूरस्थ, वनांचल और जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य के भीतर शासकीय अस्पतालों, जिला चिकित्सालयों और मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्थाओं को उन्नत किया जा रहा है, ताकि गंभीर से गंभीर बीमारियों का गुणवत्तापूर्ण इलाज स्थानीय स्तर पर ही सुलभ हो सके और नागरिकों को चिकित्सा के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े।

खरीफ सीजन में उर्वरक और उन्नत बीजों की निर्बाध आपूर्ति

मुख्यमंत्री साय ने कृषि और उर्वरक मंत्रालय से जुड़े विषयों पर चर्चा करते हुए बताया कि राज्य प्रशासन किसानों को खरीफ सीजन के दौरान खाद और उन्नत बीजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए निरंतर समीक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा कि मानसून और बोआई के समय को देखते हुए मैदानी स्तर के अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं कि वे सोसायटियों और वितरण केंद्रों पर कृषि आदानों का पर्याप्त बफर स्टॉक बनाए रखें। सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता यह है कि खेती-किसानी के इस महत्वपूर्ण समय में अन्नदाताओं को किसी भी प्रकार की किल्लत या परेशानी का सामना न करना पड़े।

जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग के खिलाफ कड़े दंडात्मक कदम

खाद की न्यायसंगत वितरण व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री के सामने राज्य सरकार के कड़े रुख को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रासायनिक खादों की कालाबाजारी, अवैध भंडारण या कृत्रिम किल्लत पैदा करने वाले असामाजिक तत्वों और जमाखोरों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। ऐसे मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति या डीलर के विरुद्ध आर्म्स एक्ट या संबंधित नियमों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके साथ ही, ग्रामीण अंचलों में विशेष अभियान चलाकर किसानों को आधुनिक कृषि प्रणालियों के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।

नैनो यूरिया तकनीक और केंद्र-राज्य समन्वय पर विशेष बल

कृषि लागत को कम करने और भूमि की उर्वरा शक्ति को बचाए रखने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा उठाए जा रहे नवाचारी कदमों की जानकारी भी इस बैठक में दी गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे कृषि उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी और खेती मुनाफे का सौदा बनेगी। वहीं, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने छत्तीसगढ़ सरकार की इन जनकल्याणकारी प्राथमिकताओं और किसान हितैषी योजनाओं की सराहना करते हुए आश्वस्त किया कि स्वास्थ्य, चिकित्सा और रसायन-उर्वरक के क्षेत्रों में केंद्र सरकार की ओर से राज्य को हरसंभव तकनीकी व वित्तीय सहयोग निरंतर प्रदान किया जाता रहेगा।

IPS बद्रीनारायण मीणा को बस्तर रेंज की कमान, IG पद पर हुई नियुक्ति

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बस्‍तर। छत्तीसगढ़ शासन ने बस्तर संभाग की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक बड़ा फेरबदल किया है। राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के तहत, साल 2004 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी बद्रीनारायण मीणा को बस्तर रेंज के नए पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) की कमान सौंपी गई है। आईपीएस बद्रीनारायण मीणा का छत्तीसगढ़ में काम करने का लंबा और व्यापक प्रशासनिक अनुभव रहा है; इससे पहले वे दुर्ग रेंज के आईजी तथा एसएसपी जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, वे बिलासपुर जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एडिशनल एसपी) के पद पर भी अपनी सराहनीय सेवाएं दे चुके हैं। गृह विभाग के आदेश के मुताबिक, बस्तर की कमान मिलने से पहले वे पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू), नवा रायपुर में आईजी के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे।

सुंदरराज पी की जगह संभालेंगे बस्तर की कमान

आईपीएस बद्रीनारायण मीणा की इस संवेदनशील क्षेत्र में नियुक्ति को बस्तर संभाग की आंतरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था को नया आयाम देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। उनसे ठीक पहले, वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी पिछले लगभग पांच वर्षों से बस्तर के आईजी के रूप में लगातार मोर्चे पर तैनात थे। राज्य सरकार ने अब सुंदरराज पी को प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर भेजते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) में आईजी के पद पर नियुक्त किया है, जिसके बाद रिक्त हुए इस बेहद महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी बद्रीनारायण मीणा को सौंपी गई है।

राजस्थान के जयपुर से है गहरा नाता

आईपीएस अधिकारी बद्रीनारायण मीणा मूल रूप से राजस्थान के जयपुर जिले के निवासी हैं और छत्तीसगढ़ कैडर के 2004 बैच के अफसर हैं। उनके पिता जनगणना विभाग में अपनी सेवाएं देते थे। बद्रीनारायण मीणा की प्रारंभिक से लेकर उच्च शिक्षा जयपुर में ही संपन्न हुई है, जहां उन्होंने सनफ्लावर पब्लिक स्कूल से मैट्रिक (दसवीं) और राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पोद्दार से इंटरमीडिएट (बारहवीं) की पढ़ाई पूरी की। इसके पश्चात, उन्होंने प्रतिष्ठित राजस्थान कॉलेज, जयपुर से साल 2000 में कला स्नातक (बीए) की उपाधि प्राप्त की।

पहले ही प्रयास में पाई सिविल सेवा में सफलता

बद्रीनारायण मीणा बचपन से ही प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखते थे, जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने साल 2001 में पहली बार संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा दी और अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर साल 2004 में वे आईपीएस के लिए चुन लिए गए। एक बेहद दिलचस्प बात यह भी है कि उनके भाई श्रवण मीणा भी इसी 2004 बैच में उनके साथ आईपीएस अधिकारी बने थे, हालांकि बाद में श्रवण मीणा ने दोबारा यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की और भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) को चुनकर उसमें शामिल हो गए।

Emergency पर संजय राउत का बड़ा बयान, इंदिरा गांधी के फैसले का किया बचाव

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मुंबई: आपातकाल की बरसी पर शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। संजय राउत ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने आपातकाल के दौरान कभी किसी राजनीतिक दल को नहीं तोड़ा था। राउत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने पाला बदलकर शिंदे गुट का दामन थाम लिया है। मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राउत ने दावा किया कि देश पिछले 12 सालों से अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति का सामना कर रहा है।

संविधान में है आपातकाल का प्रावधान: संजय राउत

संजय राउत ने 1975 में देश में लागू किए गए आपातकाल के फैसले का खुलकर बचाव किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में आपातकाल लगाने का बकायदा स्पष्ट प्रावधान मौजूद है। राउत ने कहा, "इंदिरा गांधी ने न तो कोई राजनीतिक पार्टी तोड़ी थी और न ही देश के संविधान को खत्म किया था। अगर देश के भीतर अराजकता फैलती है, तो संविधान सरकार को आपातकाल लगाने का अधिकार देता है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि संविधान का सम्मान नहीं किया गया।" उन्होंने सवाल उठाते हुए आगे कहा कि अगर नोटबंदी लागू की जा सकती है और कोविड-19 महामारी के दौरान कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, तो उस समय के फैसले पर सवाल क्यों? उन्होंने याद दिलाया कि शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने भी उस समय आपातकाल का समर्थन किया था।

एनसीईआरटी की नई किताब में आपातकाल का पाठ

इसी बीच, नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई किताब में 1975 के आपातकाल को शामिल किया है। 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' नाम की इस नई पाठ्यपुस्तक में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक के रूप में पढ़ाया जाएगा। किताब के इस अध्याय में बताया गया है कि आपातकाल के उस दौर में देश के नागरिकों के ज्यादातर मौलिक अधिकारों को सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया था।

सचिन पायलट ने सरकार पर साधा निशाना

दूसरी तरफ, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने एनसीईआरटी के इस कदम की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा जब भी केंद्र या किसी राज्य की सत्ता में आती है, तो वह इतिहास को अपने नजरिए और सहूलियत से पेश करने की कोशिश करती है। पायलट ने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में लोकतंत्र के सामने आज जैसी चुनौती पहले कभी नहीं देखी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार मीडिया, सोशल मीडिया, न्यायपालिका, नौकरशाही और चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संस्थाओं का दुरुपयोग करके विपक्ष और जनता की आवाजों को दबाने का काम कर रही है, जो कि अभूतपूर्व है।

WHO तक पहुंचा नकली दवा का मामला, भारत सरकार से मांगी गई रिपोर्ट

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कोटा। शिक्षा नगरी कोटा के जेके लोन अस्पताल और सुपर स्पेशियलिटी विंग में सिजेरियन ऑपरेशन (प्रसव) के बाद महिलाओं की मौत के बेहद गंभीर मामले में प्रशासन ने एक और बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। औषधि नियंत्रण विभाग ने सरकारी अस्पतालों में नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की खेप सप्लाई करने वाली कोटा की स्थानीय फर्म का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। इससे पहले इस जानलेवा नेटवर्क से जुड़ी अमृतसर की मुख्य दवा निर्माता कंपनी का लाइसेंस भी रद्द किया जा चुका है।

दवाइयों की खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड में बड़ा फर्जीवाड़ा; जांच में गायब मिला जरूरी साल्ट

सहायक औषधि नियंत्रक देवेंद्र गर्ग द्वारा जारी किए गए आदेश के मुताबिक, अस्पतालों को भेजे गए 'टोसिन' (ऑक्सीटोसिन) इंजेक्शन प्रयोगशाला जांच में पूरी तरह सब-स्टैंडर्ड और नकली पाए गए हैं। लैब टेस्टिंग की रिपोर्ट में इन इंजेक्शनों के भीतर मुख्य जीवनरक्षक साल्ट (ऑक्सीटोसिन) की मात्रा शून्य प्रतिशत मिली है। इसके अलावा, जांच में एक और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। फर्म ने अमृतसर की मैसर्स जैक्सन लेबोरेट्री से महज 9,300 डोज खरीदे थे, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में 10,050 डोज की बिक्री दिखा दी। ड्रग विभाग अब इस बात की तफ्तीश कर रहा है कि बिना बिल के ये अतिरिक्त 750 नकली इंजेक्शन कहां से और किसके माध्यम से मंगाए गए थे।

निरीक्षण के दौरान मिलीं कई गंभीर अनियमितताएं, कारण बताओ नोटिस का नहीं मिला सही जवाब

बीती 19 मई को इंद्रप्रस्थ इंडस्ट्रियल एरिया स्थित इस फर्म पर ड्रग विभाग की टीम ने अचानक छापा मारा था। निरीक्षण के दौरान फर्म से जुड़े फार्मासिस्ट शादाब खान मौके से नदारद थे, जबकि नियमों के विरुद्ध फर्म संचालक महेश मित्तल स्वयं गैर-कानूनी ढंग से दवाओं की बिक्री कर रहे थे। इन गंभीर लापरवाहियों और अनियमितताओं को देखते हुए विभाग ने 21 मई को 'कारण बताओ नोटिस' जारी कर जवाब मांगा था। फर्म संचालक की ओर से कोई भी संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए फर्म को हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गूंजा कोटा का मामला, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वतः संज्ञान लेकर मांगी डिटेल

कोटा के सरकारी अस्पताल में हुई प्रसूताओं की मौत का यह खौफनाक मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर इस घटना पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है। डब्ल्यूएचओ ने भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिखकर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है। वैश्विक संस्था ने विशेष रूप से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या इस बैच के नकली इंजेक्शन भारत के अलावा किसी अन्य देश में भी एक्सपोर्ट (सप्लाई) किए गए हैं? यदि ऐसा है, तो उन देशों के नाम सार्वजनिक किए जाएं ताकि वहां भी समय रहते अलर्ट जारी कर इस जानलेवा नेटवर्क पर रोक लगाई जा सके। फिलहाल, ड्रग विभाग के साथ अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी इस अंतरराज्यीय नकली दवा रैकेट के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने में जुटी हैं।

पासपोर्ट को लेकर कन्फ्यूजन क्यों? जानिए हाईकोर्ट के फैसले की पूरी कहानी

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नई दिल्ली। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के एक हालिया बयान ने देश में एक नई बहस छेड़ दी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से सिर्फ एक यात्रा दस्तावेज (ट्रैवल डॉक्यूमेंट) है, इसे नागरिकता का पक्का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस स्पष्टीकरण के बाद अब आम जनता के बीच यह सवाल बड़ा हो गया है कि आखिर किन सरकारी दस्तावेजों को भारतीय नागरिकता के वैध प्रूफ के रूप में स्वीकार किया जाता है।

पासपोर्ट पर क्यों उठा सवाल?

आमतौर पर माना जाता है कि विदेशी दौरों के लिए जारी होने वाला पासपोर्ट किसी भी व्यक्ति की राष्ट्रीयता को दर्शाता है। लेकिन विदेश मंत्रालय के इस तकनीकी पक्ष को सामने रखने के बाद कानूनी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जानकारों का कहना है कि पासपोर्ट एक निश्चित अवधि के लिए जारी होता है और यह मुख्य रूप से विदेश यात्रा की अनुमति देने वाला दस्तावेज है, न कि नागरिकता का अंतिम दस्तावेज।

कौन से दस्तावेज माने जाते हैं नागरिकता का प्रमाण?

इस बयान के बाद कानूनी विशेषज्ञों और सरकारी गाइडलाइंस के अनुसार, कुछ चुनिंदा दस्तावेजों को ही नागरिकता के ठोस प्रमाण के तौर पर देखा जाता है:

  • जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate): भारत में जन्में नागरिकों के लिए उनका आधिकारिक जन्म प्रमाण पत्र सबसे बुनियादी और मजबूत दस्तावेज माना जाता है।

  • वंशानुगत दस्तावेज: यदि किसी का जन्म देश से बाहर हुआ है, तो उनके माता-पिता के भारतीय होने के प्रमाण और पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज।

  • नागरिकता प्रमाण पत्र (Citizenship Certificate): गृह मंत्रालय द्वारा विशेष रूप से जारी किया गया नागरिकता प्रमाण पत्र।

पहचान पत्र और नागरिकता में अंतर

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में मिलने वाले कई सरकारी दस्तावेज जैसे वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड या अन्य सरकारी पहचान पत्र केवल देश में रहने, टैक्स भरने या मतदान करने का अधिकार और पहचान सुनिश्चित करते हैं। ये सभी 'पहचान और पते के प्रमाण' (Proof of Identity & Address) तो हैं, लेकिन तकनीकी और कानूनी रूप से इन्हें 'भारतीय नागरिकता का अकाट्य प्रमाण' नहीं कहा जा सकता। विदेश मंत्रालय के इस बयान के बाद अब नागरिकता के नियमों और इसके कानूनी दस्तावेजों को लेकर स्पष्टता की मांग और बढ़ गई है।

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