बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज इन दिनों अपने काम से ज्यादा सुकेश चंद्रशेखर के साथ उनके रिश्ते को लेकर सुर्खियां बटोर रही हैं। सुकेश के साथ रिश्ते के कारण श्रीलंकन ब्यूटी पर ईओडब्ल्यू का शिकंजा कस चुका है। पिछले काफी समय से उनसे लगातार मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूछताछ चल रही है। हालांकि अभी अभिनेत्री अंतरिम जमानत पर रिहा हैं, लेकिन उनके लिए आज यानी 11 नवंबर का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। आज शुक्रवार को महाठग और जैकलीन के कथित बॉयफ्रेंड सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े इस 200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की पटियाला कोर्ट अभिनेत्री को जेल या जमानत देने को लेकर फैसला सुना सकती है।दरअसल, गुरुवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में हुई इस केस की सुनवाई के बाद जैकलीन फर्नांडीज की जमानत याचिका जारी रखने पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने सुनवाई के बाद उस दिन कहा था कि फैसला शुक्रवार को सुनाया जाएगा। ऐसे में सुरक्षित रखे गए आदेश को आज सुनाया जाएगा।ऐसे में अगर आज जैकलीन जमानत याचिका खारिज हुई तो अभिनेत्री को जेल की हवा खानी पड़ सकती है।
फिल्म ‘ऊंचाई’ देख अपने आंसू नहीं रोक पाए सितारे
सूरज बड़जात्या के निर्देशन में बनी 'ऊंचाई' आज सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। फिल्म में अमिताभ बच्चन, बोमन ईरानी, अनुपम खेर और नीना गुप्ता सहित कई दिग्गज कलाकार शामिल हैं। मुंबई में फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग रखी थी, जिसमें इंडस्ट्री के सितारों ने शिरकत की थी। वहीं, अब दोस्ती की कहानी दिखाती इस फिल्म को सेलेब्स की ओर से बढ़िया रिस्पांस मिल रहा है। सितारे सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर फिल्म की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
बॉलीवुड अभिनेता रितेश देशमुख ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, 'कल रात ऊंचाई देखी। सर्वोत्कृष्ट राजश्री फिल्म। सूरज एक असाधारण निर्देशक हैं जो दर्शकों के दिलों को छूना जानते हैं और उन्होंने इस फिल्म से यह फिर से साबित किया है। बच्चन का अभिनय शानदार है और बोमन ईरानी, अनुपम खेर, परिणीति चोपड़ा, नीना,सारिका भी बहुत अच्छे हैं।'
फिल्ममेकर अशोक पंडित ने लिखा, 'ऊंचाई बस एक फिल्म ही नहीं है। यह नई शुरुआत और बुढ़ापे में वन के नए अर्थों की भावना है। सूरज बड़जात्या आपका बहुत शुक्रिया कि आपने स्क्रीन पर इसे दिखाया। दिग्गजों का प्रदर्शन आपको इस कारण का एहसास कराता है कि वे लीजेंड क्यों हैं।'
'द कश्मीर फाइल्स' स्टार दर्शन कुमार ने लिखा, 'ऊंचाई प्यार, भावनाओं, वन, दोस्ती की एक रोलर कोस्टर राइड है। अमिताभ बच्चन, नीना गुप्ता, बोमन ईरानी, अनुपम खेर, परिणीति चोपड़ा. सारिका, डैनी डेन्जोंगपा और पूरी कास्ट शानदार है। सूरज बड़जात्या का निर्देशन भी कमाल है।'
वरुण शर्मा ने कहा कि वह फिल्म देखने के दौरान हंसे और रो भी गए। उन्होंने लिखा, 'ऊंचाई साल की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक है। इस तरह के शानदार अभिनय के साथ इतनी भावपूर्ण फिल्म। इसे आज स्क्रीनिंग पर मां के साथ देखा और हम दोनों हंसे..रोए..बहुत सारी भावनाओं के साथ फिल्म को देखा। सूरज सर आप जादूगर हैं। इस फिल्म को बनाने के लिए धन्यवाद।'
अभिनेत्री काजोल की बहन तनीषा मुखर् को भी फिल्म से प्यार हो गया, और उन्होंने लिखा,'क्या अद्भुत कलाकार हैं,एक फ्रेम में बिल्कुल अभूतपूर्व कलाकार और क्या अद्भुत विचार है।आज रिलीज हो रही है ऊंचाई,अनुपम खेर,अमिताभ बच्चन,नीना गुप्ता,बोमन ईरानी,परिणीति चोपड़ा को शुभकामनाएं।'
वहीं, शहनाज गिल स्क्रीनिंग के बाद जब फिल्म देखकर बाहर निकलीं, तो उनकी आंखें सू हुई दिख रही थी जिससे साफ पता चल रहा था कि वह रोई हैं। जब शहनाज से फिल्म को लेकर सवाल किया गया था, तो उन्होंने कहा कि यह इतनी अच्छी है कि वह अपने आंसू नहीं रोक पाई थीं।
महिला यात्री का यौन उत्पीड़न करने पर बस क्लीनर गिरफ्तार
दक्षिण कन्नड़ (कर्नाटक)| दक्षिण कन्नड़ जिले में एक महिला यात्री का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में 26 वर्षीय बस क्लीनर को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।आरोपी की पहचान मंगलुरु में बाजपे के पास केंजारू निवासी मोहम्मद इमरान के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक पेशे से डॉक्टर महिला ने इस संबंध में उल्लाल थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। घटना उस समय हुई जब महिला बेंगलुरु से मंगलुरु जा रही थी। पीड़िता के मुताबिक आरोपी ने उसके सामने अपनी पतलून खोल दी, जब उसने विरोध किया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की धमकी दी तो उसने भी उसे धमकाया। आईपीसी की धारा 151 (सार्वजनिक स्थान पर अशांति पैदा करना) और 354 (जो कोई भी किसी महिला पर हमला करता है या आपराधिक बल का उपयोग करता है, शील भंग करने का इरादा रखता है या यह जानता है कि वह इस तरह से शील भंग करेगा) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
Earthquake in India : पिछले नौ माह में 948 बार भूकंप के झटके महसूस हुए
Earthquake in India : भारत में जनवरी से सिंतबर तक बीते 9 माह में 948 बार भूकंप के झटके महसूस हुए हैं। क्या ये किसी बड़े खतरे की चेतावनी है? भूकंप की तीव्रता जब 4 से कम होती है, तब आमतौर पर वे महसूस नहीं होते हैं। भारत में पिछले 9 माह में 240 इसतरह के भूकंप के झटके महसूस किए गए, जो 4 तीव्रता से ज्यादा वाले थे। बीती रात को नेपाल में आए भूकंप के झटको की तीव्रता भी 4 से अधिक थी। नेपाल में इससे पहले 2015 में आए विनाशकारी भूकंप में 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) के अनुसार, मौजूद डेटा के मुताबिक, इस साल 152 स्टेशनों से 1090 बार भूकंप आने की जानकारी मिली। हालांकि, इसमें सिर्फ 948 बार इसतरह के भूकंप दर्ज हुए जो भारत और उसके आसपास देशों आए। बता दें कि एनसीएस के पास मौजूद ये डेटा इस साल जनवरी से सितंबर तक का ही है।
हर महीने करीब 105 से ज्यादा भूकंप के झटके, क्या ये खतरे की घंटी है?
ऐसा अनुमान है कि भारत में इस साल अब तक आए भूकंप की संख्या 1000 के पार पहुंच गई होगी। जनवरी से सितंबर तक 948 भूकंप यानि हर महीने करीब 105 से ज्यादा भूकंप के झटके। क्या ये खतरे की घंटी है? जानकार मानते हैं कि कम तीव्रता के भूकंप से कोई खास खतरा नहीं होता है। हां, भूकंप की तीव्रता अगर ज्यादा है, तब चिंता की बात होती है। तब हमें एक अलार्म सिस्टम बनाने की जरूरत है। इससे लोगों को भूकंप आने से कुछ मिनट पहले ही जानकारी मिल जाएगी।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भारत में आमतौर पर ज्यादा तीव्रता के भूकंप कम ही आते हैं। देश में इस साल महसूस किए गए सबसे ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप की बात करें, तब इनमें एक बीती रात नेपाल में आया 6.3 तीव्रता का भूकंप है। वहीं, दूसरा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह से 431 किलोमीटर दूर उत्तरी सुमात्रा में आया 6.1 तीव्रता का भूकंप था। इस भूकंप के झटकों को भारत में सबसे ज्यादा दक्षिण के राज्यों में महसूस किया गया। इसके अलावा भारत 5 से 5.9 तीव्रता के 14 भूकंप और 4 से लेकर 4.9 तक के 224 भूकंप आए।
मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी ढेर
श्रीनगर| दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में चल रही मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) का एक विदेशी आतंकवादी मारा गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कश्मीर जोन) विजय कुमार का हवाला देते हुए एक ट्वीट में कहा, जेईएम आतंकी संगठन का एक आतंकी मारा गया, उसकी पहचान कामरान भाई उर्फ हनीस के रूप में हुई, जो कुलगाम-शोपियां इलाके में सक्रिय था। अन्य आतंकियों की तलाश जारी है।
कापरेन इलाके में शुक्रवार को मुठभेड़ तब शुरू हुई जब आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर पुलिस और सुरक्षा बलों की एक संयुक्त टीम मौके पर पहुंची।
इलाके की घेराबंदी कर सुरक्षाबलों ने जब वहां छिपे आतंकवादियों को आत्मसमर्पण के लिए कहा, तो उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी। इसके जवाब में सुरक्षाबलों के जवानों भी फायरिंग की। मुठभेड़ में एक आतंकवादी मारा गया।
सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को जारी किया अवमानना का नोटिस
नई दिल्ली| सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) की याचिका पर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) को एक अवमानना नोटिस जारी किया है। इसमें अदालत के 5 अगस्त के आदेश का पालन न करने का आरोप लगाया गया है, जिसमे कोर्ट ने बाजार नियामक को कुछ दस्तावेजों का उपलब्ध कराने का आदेश दिया था। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एम.एम. सुंदरेश ने मामले की सुनवाई करते हुए नोटिस जारी करने का आदेश दिया।
आरआईएल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश एन साल्वे ने कहा कि शीर्ष अदालत द्वारा 5 अगस्त को दिए आदेश के बावजूद प्रतिवादी (सेबी) ने दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत के पूर्व महान्यायवादी के.के. वेणुगोपाल ने सेबी का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा कि सेबी की याचिका अदालत के समक्ष लंबित है, इसलिए वर्तमान कार्यवाही में आगे कोई आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए।
पीठ ने अपने आदेश में कहा, "हमने समीक्षा याचिका में इस अदालत द्वारा 12 अक्टूबर, 2022 को पारित आदेश को देखा है। एक अपील और या रिट याचिका के स्थगन के साथ-साथ लंबित के साथ बराबरी नहीं की जा सकती है।"
इस अदालत द्वारा एक अपील में अंतिम निर्णय लिया गया है। केवल इसलिए कि स्थगन आवेदन याचिका लंबित है, प्रतिवादी द्वारा अपने आप पर रोक लगाने और इस अदालत द्वारा जारी निदेशरें का पालन नहीं करने का आधार नहीं हो सकता।
पीठ ने कहा कि ध्यान देने वाली बात है कि जम्मू-कश्मीर राज्य बनाम मो. याकूब खान और एक ऐसे अन्य मामले में जहां एकल न्यायाधीश द्वारा पारित एकतरफा आदेश के खिलाफ रिट याचिका लंबित होने के कारण अवमानना कार्यवाही शुरू की गई थी।
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को निर्धारित की है।
कंपनी ने सेबी से तीन दस्तावेज मांगे थे। इसमें दावा किया गया था कि 1994 और 2000 के बीच अपने स्वयं के शेयरों के अधिग्रहण में कथित अनियमितताओं से संबंधित एक मामले में शुरू किए गए आपराधिक मुकदमे से उसे और उसके प्रमोटरों को दोषमुक्त कर दिया जाएगा।
5 अगस्त को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना की अगुवाई वाली एक पीठ ने कहा था, "सेबी का ²ष्टिकोण, दस्तावेजों का खुलासा करने में विफल होने पर, पारदर्शिता और निष्पक्ष सुनवाई की चिंताओं को भी उठाता है। अस्पष्टता केवल पूर्वाग्रह और पक्षपात का प्रचार करती है। "
शीर्ष अदालत ने कहा था कि, "सेबी को निष्पक्षता दिखानी चाहिए और आरआईएल द्वारा मांगे गए दस्तावेजों को प्रस्तुत करना चाहिए और सेबी का कर्तव्य है कि वह कार्यवाही करते समय या पार्टियों के खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू करते हुए निष्पक्ष रूप से कार्य करे।"
सेबी द्वारा दस्तावेजो को साझा न करने पर आरआईएल ने अवमानना याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी.एन. श्रीकृष्णा और आईसीएआई के पूर्व अध्यक्ष वाई.एच. मालेगाम ने अनियमितता की जांच की थी।
कंपनी ने दावा किया कि, "सेबी इन दस्तावेजों को देना नहीं चाहती। उसने सेबी को यह कहते हुए नोटिस भी भेजा था कि अगर दस्तावेज 18 अगस्त तक प्राप्त नहीं हुए, तो माना जाएगा कि सेबी शीर्ष अदालत के आदेश का पालन नहीं करना चाहती।"
2002 में, चार्टर्ड एकाउंटेंट एस. गुरुमूर्ति ने सेबी में एक शिकायत दर्ज की, जिसमें आरआईएल, उसकी सहयोगी कंपनियों और मुकेश अंबानी और उनकी पत्नी नीता,अनिल अंबानी और उनकी पत्नी टीना और 98 अन्य सहित उनके निदेशकों/प्रवर्तकों द्वारा अनियमितताओं का आरोप लगाया गया।
शिकायत में 1994 में गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर के दो तरजीही प्लेसमेंट के मुद्दे का हवाला दिया गया था।
सेबी ने आरोप लगाया था कि रिलायंस पेट्रोलियम के साथ आरआईएल ने कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 77 और 77 ए के उल्लंघन में अपने स्वयं के शेयरों के अधिग्रहण को वित्त पोषित किया था।
उत्तराखंड : पतंजलि की 5 दवाओं पर बैन
पतंजलि की 5 दवाओं पर बैन: उत्तराखंड सरकार ने योग गुरु बाबा रामदेव के पतंजलि ग्रुप की 5 दवाओं के प्रोडक्शन पर बैन लगा दिया है। ये दवाएं दिव्य फार्मेसी बनाती है। केरल के नेत्र रोग विशेषज्ञ केवी बाबू द्वारा जुलाई में दायर एक शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। केवी बाबू ने 11 अक्टूबर को ईमेल के जरिए राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण (एसएलए) को एक और शिकायत भेजी थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक बैन का आदेश उत्तराखंड आयुर्वेदिक और यूनानी सेवा के लाइसेंस अधिकारी डॉ. जीसीएस जंगपांगी ने जारी किया था। उन्होंने पतंजलि पर भ्रामक विज्ञापनों का आरोप लगाया था। बाद में यह खबर कई मीडिया हाउस ने पब्लिश की थी।
दवाओं के नाम, जिन पर लगा बैन
एक रिपोर्ट के अनुसार, डॉ जीसीएस जंगपांगी, लाइसेंस अधिकारी, उत्तराखंड आयुर्वेदिक और यूनानी सेवा द्वारा आदेश जारी किया गया था और पतंजलि पर भ्रामक विज्ञापनों का आरोप लगाया था। उत्तराखंड के देहरादून में आयुर्वेद और यूनानी लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने दिव्य फार्मेसी को मधुग्रित, आईग्रिट, थायरोग्रिट, बीपीग्रिट और लिपिडोम का उत्पादन बंद करने का निर्देश दिया है।
प्रोडक्शन लाइसेंस वापस लेने की चेतावनी भी दी
अथॉरिटी ने इस आदेश में पतंजलि को फॉर्मुलेशन शीट और लेबल में बदलाव करने के बाद बैन दवाओं पर दोबारा मंजूरी लेने कहा है। यानी कंपनी बदलावों की मंजूरी के बाद ही दोबारा प्रोडक्शन कर सकेगी। अथॉरिटी ने कंपनी को भ्रामक विज्ञापनों को तुरंत हटाने के लिए कहा है। साथ ही भविष्य में परमिशन मिलने के बाद ही कोई विज्ञापन चलाने की सलाह दी है। ऐसा न करने पर प्रोडक्शन लाइसेंस वापस लेने की चेतावनी भी दी है। जंगपांगी ने कंपनी से एक हफ्ते में जवाब भी मांगा है।
हर दवा 500 वैज्ञानिकों के निरीक्षण में बनती है : बाबा रामदेव
कंपनी ने एक बयान में कहा- पतंजलि में बनने वाले सभी प्रोडक्ट और दवाओं को बनाने में निर्धारित मानकों का ध्यान रखा जाता है। हर प्रोडक्ट को 500 से अधिक वैज्ञानिकों की मदद से आयुर्वेद परंपरा की हाई लेवल रिसर्च और क्वालिटी में बनाया जाता है। आयुर्वेद और यूनानी सेवा उत्तराखंड ने 9 नवंबर को जो लेटर प्रायोजित तरीके से सर्कुलेट किया था, वह अभी तक किसी भी रूप में पतंजलि संस्थान को उपलब्ध नहीं कराया गया है। कंपनी ने कहा है- या तो विभाग अपनी गलती सुधार कर साजिश में शामिल व्यक्ति के खिलाफ उचित कार्रवाई करे, वरना इसमें शामिल लोगों के साथ-साथ पतंजलि को हुए नुकसान की भरपाई के लिए कंपनी कानूनी कार्रवाई करेगी।
मन में होना चाहिए सेवा का भाव
एक समय की बात है, कागावा नामक एक युवक जापान में रहता था। उसने अपनी पढ़ाई समाप्त करने के पश्चात जरूरतमंद जापानी लोगों व वहां के दीन-दुखियों की सेवा करने लगा।
सेवा करते-करते उसे अपने कार्यों में इतना आनंद आने लगा कि उसने अन्य लोगों को भी इस सेवा कार्य में जुड़ने के लिए प्रेरित किया और बहुत थोड़े समय में ही उसने अपने साथ सेवा करने वालों की सेना तैयार कर ली।
सेवा में अपना जीवन समॢपत करते हुए स्वयं को कोई आॢथक समस्या न हो इसलिए वह पार्ट टाइम किसी कम्पनी में काम भी करता था। धीरे-धीरे उसके सेवा कार्यों की जगह-जगह चर्चा होने लगी। सेवा कार्यों के कारण वह अनेक लोगों के सम्पर्क में आया। उसके कार्यों से प्रभावित होकर एक सुन्दर युवती ने उसके सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। विवाह की स्वीकृति इस संकल्प के साथ हुई कि सांसारिकता में न उलझ कर सेवा के कार्यों को दोनों मिलकर निरंतर आगे बढ़ाएंगे।
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युवती ने भी किसी कम्पनी में पार्ट टाइम काम तलाश कर लिया, ताकि वह समाज पर बोझ न बने और प्रसन्न मन से सबकी सेवा कर सके। दोनों के समन्वित प्रयास ने रंग दिखाया और सेवा क्षेत्र में निरंतर वृद्धि होती रही। उदार लोग उनके काम में सहयोग करने लगे। सरकार ने भी पूरे जापान में पिछड़ों की सेवा के लिए उनकी संस्था का चयन किया।
धीरे-धीरे कागावा के प्रति जापानी लोगों में बहुत अधिक श्रद्धा एवं प्रेम बढ़ा, लोगों ने उनके सेवा कार्य से जुड़कर जापान में एक नई क्रांति का निर्माण किया। जापान में कागावा को लोग दूसरा गांधी मानने लगे। कागावा ने सेवा के क्षेत्र में जापान में एक अनूठी मिसाल कायम की।
भगवान पर भरोसा रखें पर अंधविश्वास में न पड़ें
उसका नाम था दिवेश था लेकिन सभी उसे देवु ही कहते थे। उम्र होगी 12 साल की। शरीर दुबला-पतला, आठवीं कक्षा में पढ़ता लेकिन शरारती बहुत था।इतना शरारती कि बच्चों को डराने के लिए कई बार मेंढक उठाकर ले आता था और बच्चों की जेब में डाल देता था। कई बार कबूतर पकड़ कर ले आता और उसे क्लास में मेज के ऊपर छोड़ देता था। कई बार चलते-चलते कुत्ते की पूंछ पकड़ लेता था। एक बार तो कुत्तों ने उसे काट भी लिया था। उसके टीके भी लगे थे। एक बार उसने काक्रोच पकड़कर क्लास में सो रहे गुरु जी के कोट की जेब में डाल दिया था। जब गुरु जी को पता चला तो उन्होंने क्लास में उसे बहुत फटकारा और स्कूल टीचर ने इसके लिए उसके मम्मी-पापा को बुलाकर भी डांट लगाई तथा स्कूल से निकालने की भी धमकी दी।
लेकिन उसमें एक बात बहुत अच्छी थी कि वह पढ़ाई में कक्षा में हमेशा प्रथम आता था। इस कारण उसकी बहुत सारी शरारतें छिप जाती थीं। स्कूल में विज्ञान के मास्टर दीनदयाल जी नए-नए आए थे। वह कक्षा में अपने विषय के अलावा और नई-नई बातें बताते थे। उन्हें शरारती बच्चे बहुत अच्छे लगते थे। वह कहते थे कि जो शरारती बच्चा होगा, वही ज्यादा ऊर्जावान होगा। उसे अच्छे तरीके से समझाया जाए तो समाज के लिए बहुत अच्छे कार्य कर सकता है और बहुत ही ऊंचे पद पर भी पहुंच सकता है।
एक दिन मास्टर जी बच्चों को वैज्ञानिक तरीके से अंधविश्वास के बारे में बता रहे थे। बीच में ही देवु खड़ा हो गया और पूछने लगा, ''मास्टर जी, हमारे घर के पास चौराहे पर कमला दादी एक पेड़ के नीचे टोना-टोटका करती है। क्या उस टोने-टोटके को देखने या हाथ लगाने से आदमी मर जाता है?''
उन्हें प्रश्न बहुत अच्छा लगा। उन्होंने कहा, ''टोने-टोटके से कुछ नहीं होता, कोई नहीं मरता। इससे केवल कमजोर दिल वाले ही डरते हैं, बहादुर उसे उठाकर फैंक देते हैं या मंदिर में रख देते हैं।''
देवु ने पक्का मन बना लिया कि आज वह टोने-टोटके को फैंक कर पेड़ के नीचे ही खेलेगा। उसने लोगों से सुना था कि पीपल के पेड़ के नीचे टोना-टोटका किया जाता है। बच्चे उस पेड़ के नीचे नहीं खेलते। जैसे ही शनिवार आया, देवु जल्दी उठ गया। उसने देखा कमला दादी टोना-टोटका कर रही है।
उसने टोटके वाली गठरी को खोला। उसमें कुछ खुले पैसे थे, लाल कपड़े में मिठाई थी। रामू ने स्टेशन पर बैठे भिखारियों को मिठाई बांट दी और लाल कपड़ा मंदिर में रख दिया। उसमें जो खुले पैसे रखे थे, उसकी कुल्फी खरीद कर खा ली।
उसकी मां को पता चल गया कि देवु ने टोटका उठा लिया है तो वह जोर-जोर से रोने लगी और बोली, ''देवु तूने टोटके को क्यों उठाया। अरे सारा घर बर्बाद हो जाएगा। तू एक ही मेरा लाल है। अब में कहां जाऊं। हे भगवान मेरे देवु की रक्षा करना।''
लेकिन देवु ने मां से कहा, ''मां जब आप भगवान पर भरोसा रखती हैं तो ऐसी चीजों से डरती क्यों हो। मुझे कुछ नहीं होगा। दीनदयाल गुरु जी कहते हैं कि यह तो सब अंधविश्वास है।''
अब देवु प्रत्येक शनिवार व मंगलवार को साइकिल उठाकर अपने आस-पास पेड़ के नीचे व चौराहे पर जहां भी टोने-टोटका देखता, उन्हें उठाकर गरीब भिखारियों को बांटने लगा। अंतत: कमला दादी व अन्य लोगों ने तो टोना-टोटका करना ही बंद कर दिया, आस-पास के लोग भी उसका साथ देने लगे। उसके काम की सभी ने प्रशंसा की। अब बच्चे पेड़ के नीचे फिर खेलने लगे।
स्कूल के हैड मास्टर जी ने देवु को उसके सराहनीय कार्य और अंधविश्वास दूर भगाने के लिए सम्मानित किया।
उसे बधाई देने वालों में सबसे आगे विज्ञान के मास्टर दीनदयाल जी थे। उन्होंने कहा, ''मैं पहले ही कहता था कि यह बच्चा आगे जाकर बहुत बड़े-बड़े काम करेगा और गांव का नाम रोशन करेगा। हमें गर्व है कि यह हमारे स्कूल का छात्र है।''
वह बोले, ''यह आज से अंधविश्वास भगाने का हमारा ब्रांड एम्बैसेडर है।''
क्या है संकष्टी चतुर्थी?
माह में दो चतुर्थी तिथि रहती है। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं।
इस तरह 24 चतुर्थी और प्रत्येक तीन वर्ष बाद अधिमास की मिलाकर 26 चतुर्थी होती है। सभी चतुर्थी की महिमा और महत्व अलग-अलग है। चतुर्थी का व्रत भगवान गणेशजी को प्रसन्न करने के लिए रखा जाता है। आओ जानते हैं कि संकष्टी चतुर्थी क्या है और क्या है इसका महत्व।
संकष्टी का अर्थ : संकट को हरने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। संस्कृत भाषा में संकष्टी शब्द का अर्थ होता है- कठिन समय से मुक्ति पाना। यदि किसी भी प्रकार का दु:ख है तो उससे छुटकारा पाने के लिए विधिवत रूप से इस चतुर्थी का व्रत रखकर गौरी पुत्र भगवान गणेशजी की पूजा करना चाहिए। इस दिन लोग सूर्योदय के समय से लेकर चन्द्रमा उदय होने के समय तक उपवास रखते हैं।
संकष्टी और विनायक चतुर्थी में अंतर : अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायकी चतुर्थी कहते हैं और पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं।
चतुर्थी तिथि : यह खला तिथि व रिक्ता संज्ञक है। तिथि 'रिक्ता संज्ञक' कहलाती है। अतः इसमें शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। यदि चतुर्थी गुरुवार को हो तो मृत्युदा होती है और शनिवार की चतुर्थी सिद्धिदा होती है और चतुर्थी के 'रिक्ता' होने का दोष उस विशेष स्थिति में लगभग समाप्त हो जाता है। चतुर्थी तिथि की दिशा नैऋत्य है।















