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कोयले के खपत बढऩे का असर बिजली के दाम पड़ेगा

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भोपाल ।  पावर प्लांट में बिजली बनाने पर कोयले की खपत बढ़ गई है। ऐसा उन इकाइयों में हो रहा है जहां सुपर क्रिटिकल यूनिट लगी हुई है। इन इकाइयों में कम कोयले में अधिक बिजली पैदा होती है, इसके बावजूद श्री सिंगाजी पावर प्लांट खंडवा में एक यूनिट बिजली बनाने में तय मानक से 200-250 ग्राम कोयला अधिक जलाना पड़ रहा है। इससे जहां कोयले की खपत अधिक हो रही है, वहीं आम उपभोक्ता पर भी बिजली के दाम बढऩे पर इसका असर पड़ेगा। हर तिमाही फ्यूल कास्ट एडजस्टमेंट (एफसीए ) के जरिए दर का निर्धारण होता है। अभी अक्टूबर माह से ही एफसीए 20 पैसे प्रति यूनिट हो गया। ऊर्जा विभाग ने श्री सिंगाजी पावर प्लांट की लगातार खामियों को देखते हुए मप्र पावर जनरेशन कंपनी ने जानकारी मांगी है। जिसके बाद प्रबंध संचालक और आला अधिकारी प्लांट पहुंचे हैं।

बार-बार खराब हो रही प्लांट की इकाई
बिजली मामलों के जानकार एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल का दावा है कि करीब 15 हजार करोड़ रुपये का खर्च श्री सिंगाजी पावर प्लांट पर हुआ। इस प्लांट के निर्माण की उपयोगिता आम जनता को नहीं मिल रही है। तकनीकी संचालन सहीं नहीं होने की वजह से प्लांट की इकाई बार-बार खराब हो रही है। सिंगाजी की नवीन इकाइयों में 600 ग्राम कोयले में एक यूनिट बिजली तैयार होनी चाहिए लेकिन विगत 10 अक्टूबर को 600 की जगह 800 ग्राम कोयला प्रति यूनिट निर्माण में जलाया गया। कई बार एक यूनिट बिजली बनाने में 850 ग्राम कोयला भी जलाया गया है। वर्तमान में कुल चार इकाई में महज दो इकाई से ही बिजली पैदा हो रही है। इसके उलट बिरसिंहपुर पावर प्लांट, सारणी पावर प्लांट में एक यूनिट बिजली बनाने में 620 ग्राम से 660 ग्राम कोयला जलाना पड़ रहा है। यहां पुरानी इकाई से बिजली पैदा हो रही है। इस प्लांट में 660 मेगावाट की तीन नंबर और चार नंबर इकाई बंद है। तीन नंबर इकाई का टरबाइन खराब है जो बन रहा है वहीं चार नंबर इकाई दो दिन पहले बंद हुई है। हाल ही में सालाना रखरखाव के बाद यह इकाई पुन: चालू हुई थी, जिसे फुल लोड पर भी नहीं चलाया जा रहा था। इस तरह की तकनीकी खराबी आने के बाद प्रमुख सचिव ऊर्जा ने मामले में जांच करवाने के निर्देश भी दिए हैं। इस मामले में मप्र पावर जनरेशन कंपनी के ईडी ओएडंएम जनरेशन बीएल नेबल से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन बात नहीं हो पाई।

ऐसे जनता पर असर
हर तिमाही बिजली कंपनी बिजली उत्पादन की लागत का आकलन करती है। मुख्य रूप से कोयला और तेल के व्यय का आकलन होता है। जिसके आधार पर तिमाही एफसीए के लिए दर तय होती है। ये किसी तिमाही घट जाती है, कभी बढ़ती है। मप्र विद्युत नियामक आयोग के पास मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी की तरफ से प्रस्ताव भेजा जाता है, जिसके बाद अंतिम निर्णय होता है। उपभोक्ता बिजली की खपत करते हैं उसकी प्रति यूनिट पर एफसीए देय होता है।

पोषण की थाली हुई मंहगी, त्योहार बीतते ही आया सब्जियों में उछाल

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भोपाल ।  हाल ही में बीते दशहरा और करवाचौथ के त्योहार के बाद सब्जियों और फलों के दाम में अच्छा खासा उछाल देखने मिल रहा है। आमतौर पर रोजाना प्रयोग में आने वाली सब्जियों और फलों की कीमतों में प्रति किलो 10 से 15 रुपये का उछाल आया है। अचानक से मंहगी हुई सब्जी और फलों का सीधा असर मध्यम वर्गी परिवार की रसोई पर पड़ रहा है। आलू-प्याज जैसी सब्जियों की कीमतों में बढ़ोत्तरी होने से लोगों की थालियों में से स्वाद और पोषण कम हो गया है। मंहगाई के कारण के बारे में सब्जी विक्रेता शिवकुमार बताते हैं कि बीते दिनों में अचानक हुई बारिश की वजह से सब्जियां काफी खराब हुई हैं लिहाजा मंहगाई हुई है। सोमवार को सब्जियों की कीमतों में और उछाल आने की संभावना है।

फिर महंगी हुई प्याज
अमूमन व्रत, उपवास में प्याज से परहेज किया जाता है, जिससे खपत पर असर पड़ता है। पिछले दिनों दस दिन के गणेशोत्सव व फिर नौ दिन की नवरात्रि के व्रत, उपवास ने प्याज की खपत पर असर डाला। इससे भाव नहीं मिल सके, लेकिन अब खपत बढऩे से भाव में फिर उछाल आ रहा है। व्रत त्योहार खत्म होने के साथ ही प्याज साउथ, महाराष्ट्र, बिहार, आसाम के साथ बंगलादेश जा रहा है, जिससे भाव बढ़ रहे हैं।

ये सब्जियां-फल हुए मंहगे-
सब्जी-फल – कीमतें(प्रति किलो)
प्याज – पहले-20 अब-33
करेला – पहले-30 अब- 45
लौकी – पहले-20 अब-40
बैगन – पहले-20 अब-35
पपीता – पहले-40 अब-60
मोसम्मी – पहले-30 अब-45

मप्र में फिर चुनाव आने वाले हैं, गलती मत करना : शाह

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ग्वालियर| मध्य प्रदेश के ग्वालियर में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया हवाईअड्डा के नए टर्मिनल एवं हवाईअड्डे के विस्तार कार्य की आधारशिला रखी। उसके बाद जनसमुदाय के संबोधन में वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव की याद दिलाते हुए कहा, "फिर चुनाव आने वाले हैं, गलती मत करना, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा करना और कमल पर बटन दबाना।" केंद्रीय गृहमंत्री शाह के निशाने पर कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कमल नाथ रहे। उन्होंने कहा, "यहां थोड़े समय के लिए कमल नाथ की सरकार आई थी, उन्होंने सारी योजनाएं बंद कर दी थीं, शिवराज जी फिर से मुख्यमंत्री बने तो फिर से सभी योजनाएं पटरी पर ला दी।"

उन्होंने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तरफ इशारा करते हुए कहा, "फिर से चुनाव आने वाले हैं। गलती मत करना। प्रधानमंत्री मोदी पर भरोसा करना और कमल पर बटन दबाना।"

भाजपा द्वारा किए गए वादों और लिए गए फैसलों का जिक्र करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य राम मंदिर की आधारशिला रखी, वह जल्द ही मूर्त रूप लेना वाला है। प्रधानमंत्री के दृढ़ संकल्प के चलते ही कश्मीर से धारा 370 हटाई जा सकी। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वो सब काम हुए जो कभी नहीं हुए थे। देश के गरीब को मुफ्त राशन और आवास देने का काम भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।

गृहमंत्री अमित शाह ने विभिन्न धार्मिक स्थलों में हो रहे विकास कार्यो का जिक्र करते हुए कहा, "इतने वर्षो के शासन में कांग्रेस ने कभी भी केदारनाथ, बद्रीनाथ, काशी विश्वनाथ और महाकाल लोक की कभी सुध नहीं ली। हम जब राम मंदिर की बात करते थे, तो हमसे कहा जाता था कि मंदिर वहीं बनाएंगे, लेकिन तारीख नहीं बताएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में ही बिना रक्त की एक बूंद बहाए अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाने का काम किया है।"

मध्यप्रदेश को लगातार मिल रही सौगातों की चर्चा करते हुए गृहमंत्री शाह ने कहा कि लगता है शिवराज जी ने कोई यज्ञ किया है, मध्यप्रदेश रोज सुर्खियों में रहता है। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने उज्जैन में महाकाल लोक की सौगात दी। प्रधानमंत्री ने तुष्टिकरण की राजनीति की बजाय सबका सम्मान किया।

इससे पहले केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री शाह ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया हवाईअड्डा ग्वालियर के नए टर्मिनल एवं हवाईअड्डे के विस्तार कार्य की आधारशिला रखी। हवाईअड्डे के नए टर्मिनल का निर्माण लगभग 500 करोड़ रुपये की लागत से किया जाना है।

इस मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि एवं किसान-कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय नागर विमानन एवं इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया उपस्थित थे।

गृहमंत्री शाह ने नए टर्मिनल के निर्माण संबंधी मॉडल का भी अवलोकन किया। मॉडल के माध्यम से अत्याधुनिक नए टर्मिनल की जानकारी प्रदर्शित की गई।

लोगों को स्टील-पीतल के साथ लुभा रहे मिट्टी के फैंसी बर्तन

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भोपाल ।  22 अक्टूबर को धनतेरस पर जोरदार बिक्री के लिए बाजारों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। बर्तन बाजार में दुकानों यह तैयारी साफ नजर आ रही है। धनतेरस के लिए नए डिजाइन और पैटर्न के बर्तन आना शुरू हो गए हैं। रुझान की बात की जाए तो दुकानदारों का कहना है कि आमतौर पर स्टील के बर्तन ही अधिक मांग में रहते हैं। इस बार लोग मिट्टी के बर्तनों में भी रुचि ले रहे हैं। कोरोना काल के बाद इस बार के बाजार में लगभग डेढ़ गुना अधिक व्यापार होने का अनुमान जताया जा रहा है। धनतेरस पर तांबे-पीतल के बर्तनों की मांग काफी रहती है, लेकिन स्टील के अपेक्षाकृत कम रहती है। स्टील के बर्तनों में आमतौर पर रोजाना उपयोग होने वाले बर्तन जैसे- गिलास, कटोरी, थाली आदि को धनतेरस पूजन के लिए अधिक खरीदे जाते हैं। वहीं कुछ लोग स्टील के डिनर सेट में भी रुचि दिखाते हैं। प्रतिशत के आंकड़े से समझें तो अभी तक 85 प्रतिशत स्टील के बर्तन व शेष 15 प्रतिशत में तांबे और पीतल के बर्तन खरीदे जाते रहे हैं। अब नए ट्रेंड में मिट्टी की बोतल, तवा, हांडी और कढ़ाई भी धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहे हैं। शहर में इस तरह के बर्तन कुछ चुनिंदा जगहों पर ही मिलते हैं। इस कारण से लोग मिट्टी के बर्तन ई-कामर्स से भी मंगवाते हैं।

नार्मल बर्तनों से ज्यादा नानस्टिक बर्तन पसंद
बर्तन व्यापारी बताते हैं कि शहरवासियों को खाना पकाने के लिए साधारण बर्तनों की अपेक्षा नानस्टिक बर्तन अधिक पसंद आते हैं। यह साधारण बर्तनों से 200 से 350 रुपये तक अधिक मंहगे होते हैं, लेकिन इनका नानस्टिक और कम चिकनाई में भोजन पका देने का गुण लोगों को इनकी ओर आकर्षित करता है।

धनतेरस पर मिलेंगे फैंसी बर्तन
इस बार धनतेरस पर बर्तनों के कई तरह के विकल्प देखे जा सकेंगे। कई फैंसी बर्तन इस धनतेरस पर लोगों का मन मोह लेंगे, लेकिन बर्तन व्यापारियों के अनुसार यह बर्तन साधारण स्टील के बर्तनों से डेढ़ गुना तक अधिक महंगे होंगे।

धनतेरस पर बर्तन खरीदना शुभ
मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर नए बर्तन खरीदने से आर्थिक लाभ होता है और साल भर घर में संपन्नता आती है। इस मौके पर लोग सोना-चांदी तो खरीदते ही हैं, लेकिन उसके साथ-साथ स्टील, तांबा, पीतल और मिट्टी के बर्तन भी खरीदने की परंपरा है।

कूनो राष्ट्रीय उद्यान में लाए गए सभी आठ चीते स्वस्थ एवं तंदुरुस्त

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भोपाल । नामीबिया से लाकर 28 दिन पहले मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में बसाए गए सभी आठ चीते स्वस्थ एवं तंदुरूस्त हैं। साथ ही उन्हें विशेष बाड़ों में भैंस का मांस खिलाया जा रहा है।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 1952 में भारत में विलुप्त हुए चीतों की आबादी को पुनर्जीवित करने की परियोजना के तहत इन चीतों को 17 सितंबर को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में एक मंच से लीवर घुमाकर लकड़ी के पिंजड़ों के दरवाजे खोलकर विशेष बाड़ों में छोड़ा है। वन अधिकारियों ने बताया, ये विशेष बाड़े पांच वर्ग किलोमीटर के दायरे में बने हुए हैं। इन चीतों को अंतर्राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के अनुसार एक महीने के पृथकवास में रखा जाना है, जो अब दो दिन में पूरा होने वाला है। उन्होंने कहा, एक महीने के पृथकवास की अवधि समाप्त होने पर इन चीतों को बसाए जाने की निगरानी के लिए गठित कार्यबल की दो दिन बाद सोमवार को ऑनलाइन बैठक होगी। वन अधिकारियों ने कहा कि इस बैठक में यह कार्यबल इन चीतों को पांच वर्ग किलोमीटर से थोड़ा अधिक क्षेत्र में फैले 'सॉफ्ट रिलीज बाड़ेÓ में स्थानांतरित करने पर निर्णय लेगा।
उन्होंने कहा, हमें लगता है कि एक या दो महीने या उससे कुछ अधिक समय में इन चीतों को जंगल में स्वच्छंद विचरण के लिए आजाद किया जाएगा। मध्यप्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) जेएस चौहान ने बताया, कार्यबल चीतों को सॉफ्ट रिलीज बाड़े में स्थानांतरित करने पर निर्णय लेगा। इन आठ चीतों में से पांच मादा एवं तीन नर हैं और उनकी उम्र 30 से 66 महीने के बीच की है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान के संचालक उत्तम शर्मा ने बताया, 'सभी चीतों का स्वास्थ्य ठीक है। वे अपनी दिनचर्या करते रहते हैं। इधर-उधर घूमते रहते हैं। विशेषज्ञों की देखरेख में उन्हें भैंस का मांस दिया जा रहा है।

भक्त के भीतर रहते हैं कृष्ण

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जब भगवान चैतन्य बनारस में हरे कृष्ण महामंत्र के कीर्तन का प्रवर्तन कर रहे थे, तो हजारों लोग उनका अनुसरण कर रहे थे। 
तत्कालीन बनारस के अत्यंत प्रभावशाली और विद्वान प्रकाशानंद सरस्वती उनको भावुक कहकर उनका उपहास करते थे। कभी-कभी भक्तों की आलोचना दार्शनिक यह सोचकर करते हैं कि भक्तगण अंधकार में हैं और दार्शनिक दृष्टि से भोले-भाले भावुक हैं, किंतु यह तथ्य नहीं है। ऐसे अनेक बड़े-बड़े विद्वान पुरुष हैं, जिन्होंने भक्ति का दर्शन प्रस्तुत किया है। किंतु यदि कोई भक्त उनके इस साहित्य का या अपने गुरु का लाभ न भी उठाए और यदि वह अपनी भक्ति में एकनिष्ठ रहे, तो उसके अंतर से कृष्ण स्वयं उसकी सहायता करते हैं।अत: कृष्णभावनामृत में रत एकनिष्ठ भक्त ज्ञानरहित नहीं हो सकता। इसके लिए इतनी ही योग्यता चाहिए कि वह पूर्ण कृष्णभावनामृत में रहकर भक्ति संपन्न करता रहे। 
आधुनिक दार्शनिकों का विचार है कि बिना विवेक के शुद्ध ज्ञान प्राप्त नहीं किया जा सकता। उनके लिए भगवान का उत्तर है- जो लोग शुद्धभक्ति में रत हैं, भले ही वे पर्याप्त शिक्षित न हों तथा वैदिक नियमों से पूर्णतया अवगत न हों, किंतु भगवान उनकी सहायता करते ही हैं। भगवान अजरुन को बताते हैं कि मात्र चिंतन से परम सत्य भगवान को समझ पाना असंभव है, क्योंकि भगवान इतने महान हैं कि कोरे मानसिक प्रयास से उन्हें न तो जाना जा सकता है, न ही प्राप्त किया जा सकता है। 
भले ही कोई लाखों वर्षो तक चिंतन करता रहे, किंतु यदि भक्ति नहीं करता, यदि वह परम सत्य का प्रेमी नहीं है, तो उसे कभी भी कृष्ण या परम सत्य समझ में नहीं आएंगे।परम सत्य, कृष्ण, केवल भक्ति से प्रसन्न होते हैं और अपनी अचिंत्य शक्ति से वे शुद्ध भक्त के हृदय में स्वयं प्रकट हो सकते हैं।शुद्धभक्त के हृदय में तो कृष्ण निरंतर रहते हैं और कृष्ण की उपस्थिति सूर्य के समान है, जिसके द्वारा अज्ञान का अंधकार तुरंत दूर हो जाता है।

अहोई अष्टमी एक मां का अपने बच्चों के लिए त्यौहार! 

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प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को अहोई का त्यौहार मनाया जाता है।यह त्यौहार एक मां का अपने बच्चों के लिए सबसे बड़ा पर्व है।अहोई 17 अक्टूबर को अहोई अष्टमी मनाई जा रही है। यह दिन अहोई देवी को समर्पित है। इस दिन वंश वृद्धि और संतान के सारे कष्ट दूर करने के लिए मां पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है।
सूर्योदय के साथ यह व्रत शुरु हो जाता है, जो रात में तारों को देखने के बाद ही पूरा होता है। कई जगह महिलाएं रात में चांद को अर्घ्य देने के बाद व्रत को पूरा करती है।इस सप्ताह  सूर्य का राशि परिवर्तन होने वाला है,सूर्य तुला राशि में प्रवेश करेंगे, जो सूर्य की तुला संक्रांति होगी।सूर्य का तुला राशि में गोचर करने से कई राशियों पर प्रभाव पड़ेगा। अहोई अष्टमी पर इस बार तीन शुभ योग बन रहे हैं, जिससे यह व्रत और भी शुभता प्रदान करने वाला हो गया है। अहोई अष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग, शिव और सिद्ध योग बन रहे हैं। ये तीनों ही योग शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए अच्छे माने जाते हैं।यानि इस बार की अहोई अत्यंत शुभ घड़ी में संतान सुख प्रदान करने वाली है।जिन महिलाओं को संतान का सुख नहीं मिल रहा है। वह इस दिन अहोई मैया और महादेव की पूजा करें। इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करें। अहोई देवी को सफेद पुष्प अर्पित करें। साथ ही घर में जितने सदस्य रहते हैं। उतनी संख्या से एक ज्यादा संख्या में पौधे लगाएं।यदि संतान के करियर में रुकावट आ रही हैं तो अहोई अष्टमी के दिन देवी मां को लाल फूल चढ़ाएं। महादेव को खीर का भोग लगाएं। फिर वह भोग मां अपने हाथों से संतान को खिलाएं। साथ ही लाल फूल भी संतान को दें। जब फूल सूख जाए तो इसे किसी लाल कपड़े में रख लें। नौकरी या काम पूरा होने पर उसे बहते जल में प्रवाहित कर दें।संतान के वैवाहिक जीवन में परेशानी है। या उसकी शादी नहीं हो रही है, तो अहोई अष्टमी पर  देवी अहोई को चांदी की चेन के साथ गुड़ अर्पित करें। पूजा के बाद चांदी की चेन संतान के गले में पहना कर उसे गुड़ का प्रसाद दें।संतान प्राप्ति के लिए अहोई अष्टमी के दिन से 45 दिन तक भगवान श्रीगणेश को बेलपत्र चढ़ाएं। इस दिन माता अहोई देवी की तस्वीर या प्रतिमा पर सिंदूर चढ़ाएं तथा अपनी मन्नत के लिए प्रार्थना करे।अहोई अष्टमी पूजा का मुहूर्त 17 अक्टूबर की शाम को  5 बजकर 50 मिनट  से शुरू हो रहा है, जो शाम 7 बजकर 05 मिनट तक रहेगा। पूजा मुहूर्त की अवधि लगभग 1 घंटा 15 मिनट तक है।तारों को देखने का मुहूर्त 17 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 13 मिनट पर है। अहोई अष्टमी के दिन चांद निकलने का समय 11 बजकर 24 मिनट पर है। तारों को देखने के बाद 6 बजकर 36 मिनट पर व्रत खोल सकते हैं। वहीं चांद देखकर व्रत खोलने के लिए रात 11 बजकर 24 मिनट के बाद खाना खाया जा सकता हैं।

क्या है कर्म की महिमा

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वसु सेन नाम का एक पुरुषार्थी व चक्रवर्ती सम्राट था लेकिन उसके राज ज्योतिष ने उसका मस्तिष्क ज्योतिष की ओर मोड़ रखा था।

एक दिन राजा वसु सेन राज ज्योतिषी के साथ देश के दौरे पर निकले। उन्हें रास्ते में एक किसान मिला जो हल-बैल लेकर खेत जोतने जा रहा था। राज ज्योतिषी ने उसे रोककर कहा, ''मूर्ख! जानता नहीं, आज इस दिशा में जाना ठीक नहीं है, और तुम उसी दिशा की ओर जा रहे हो। यदि तुम इसी दिशा में फिर से गए तो तुम्हें हानि उठानी पड़ सकती है।'' तब किसान ने राज ज्योतिषी से कहा, ''मैं पिछले कई वर्षों से इसी दिशा में जा रहा हूं। ऐसे में कई ऐसे दिन भी आए होंगे जब यह दिशा ज्योतिष की लिहाज से ठीक नहीं होगी। लेकिन मुझे आज तक कुछ भी नहीं हुआ।''

किसान ने जब राज ज्योतिषी की बात को सिरे से नकार दिया तो ज्योतिषी ने कहा, ''अच्छा तो तुम अपना
हाथ दिखाओ, तुम्हारी हस्तरेखा देखूं।'' किसान ने उसकी ओर हाथ किया।

तब राज ज्योतिषी ने गुस्से में कहा, ''मूर्ख हाथ दिखाते समय सीधा हाथ दिखाते हैं, उलटा नहीं।''
किसान नाराज होकर बोला, ''मैं अपना हाथ किसी के सामने क्यों फैलाऊं, मेहनत करता हूं। मुहूर्त व हस्तरेखा तो वे देखते हैं जो कर्महीन व निठल्ले होते हैं।'' यह सुनकर राज ज्योतिषी कोई उत्तर न दे सके। नजदीक ही राजा वसु सेन खड़े थे उन्हें इस घटना से कर्म की महिमा का ज्ञान हुआ और फिर ज्योतिषी की बातों में नहीं उलझे।''
 

धनतेरस पर क्या खरीदना होता है शुभ, किन चीजों से घर में आती है कंगाली

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वैसे तो धनतेरस का पर्व दिवाली से दो दिन पहले मनाई जाती है, लेकिन इस बार धनतेरस के अगले दिन ही दिवाली मनाई जाएगी। धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहते हैं। इस दिन सोना-चांदी या बर्तन खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। धनतेरस पर देवताओं के वैद्य माने जाने वाले भगवान धन्वंतरि और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। धनतेरस पर लोग इस कामना के साथ नया सामान घर में लाते हैं कि उनके घर में सुख-समृद्धि बनी रहे। हालांकि धनतेरस के दिन सामान खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इस दिन कुछ चीजों को खरीदना शुभ नहीं माना जाता है। ऐसे में चलिए जानते हैं धनतेरस पर क्या खरीदें क्या नहीं…

धनतेरस पर क्या खरीदें ?
भगवान धनवंतरी की धातु पीतल मानी गई है, इसलिए धनतेरस के दिन पीतल के बर्तन खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। पीतल के अलावा धनतेरस के दिन सोने, चांदी, तांबे आदि का सामान और बर्तन खरीद सकते हैं। इन धातुओं की चीजें बहुत शुभ मानी जाती हैं। मान्यता है कि धनतेरस के दिन ये चीजें घर में लाने से मां लक्ष्मी और धनवंतरी भगवान की कृपा से आरोग्यता और समृद्धि आती है। इसके अलावा इस दिन झाड़ू खरीदना भी शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। इसलिए धनतेरस पर झाड़ू खरीदने का भी महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन नई झाड़ू लाने से मां लक्ष्मी का आगमन होता है। धनतेरस के दिन लोहा खरीदना शुभ नहीं माना जाता है। मान्यता है कि धनतेरस पर कोई भी लोहे की नुकीली चीज भूलकर भी नहीं खरीदनी चाहिए। इससे आपको हानि हो सकती है। साथ ही धनतेरस पर एल्युमिनियम की चीजें खरीदने से भी बचना चाहिए। धनतेरस के दिन शीशा या शीशे की बनी हुई चीजें नहीं खरीदनी चाहिए। इस दिन शीशा खरीदने से आपको नुकसान हो सकता है और घर की बरकत रुक सकती है।
 

राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन (17 अक्टूबर 2022)

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मेष :- आशानुकूल सफलता से संतोष, सफलता के साधन अवश्य बन ही जायेंगे।
वृष :- समय ऐशो आराम से बीतेगा, व्यवसायिक क्षमता, कार्यकुशलता में वृद्धि होगी।
मिथुन :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा, किन्तु इष्ट मित्रों से अशांति परेशानी अवश्य बनेगी।
कर्क :- इष्ट-मित्र सुखवर्धक होंगे, कुटुम्ब की समस्याएं सुलझेंगी, धैर्य रखकर कार्य बना लेंगे।
सिंह :- प्रतिष्ठा वृद्धि एवं बड़े लोगों से मेल-मिलाप हर्षप्रद होगा, समय सुविधा का ध्यान रखें।
कन्या :- मान-प्रतिष्ठा प्रभुत्व वृद्धि, कार्यक्षमता बढ़े, समाज में प्रतिष्ठा के योग बनेंगे।
तुला :- मान-प्रतिष्ठा प्रभुत्व वृद्धि, कार्यक्षमता व्यवसायिक क्षमता अनुकूल बन जायेगी।
वृश्चिक :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा, समाज में मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
धनु :- अचानक कोई शुभ समाचार मिले, कार्यगति में सुधार होगा तथा चिन्ताएं कम हेंगी, समय का ध्यान रखें।
मकर :- स्थिति यथावत रहे, समय पर सोचे हुए कार्य बनेंगे, कार्यवृत्ति में सुधार होगा।
कुम्भ :- इष्ट-मित्र सुखवर्धक होंगे, शरीर-कष्ट, चिन्ता तथा असमंजस की स्थिति बनेगी, ध्यान रखें।
मीन :- इष्ट-मित्र सहायक रहें, दैनिक-कार्यगति में अनुकूलता अवश्य ही बन जायेगी।
 

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