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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी महाकाल मंदिर में 40 मिनट रहेंगे, गर्भगृह में पूजन करेंगे

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उज्जैन ।  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना करेंगे। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री करीब 40 मिनट मंदिर में रहेंगे। इस दौरान वे गर्भगृह में पूजन तथा नंदी मंडपम् में बैठकर ध्यान लगाएंगे। प्रधानमंत्री परिसर में भी जा सकते हैं। इसको लेकर तैयारी की जा रही हैं। प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर मंदिर में तैयारी अंतिम दौर में है। गर्भगृह में चांदी के दीवार की सफाई हो चुकी है। कोटितीर्थ कुंड तथा परिसर के मंदिरों में रंग रोगन किया गया है। मंदिर में आकर्षक लाइटिंग की जा रही है। सोमवार से मंदिर में पुष्प सज्जा का काम शुरू हो जाएगा। उज्जैन व इंदौर के पुष्प डेकोरेटर मंदिर में नयनाभिराम पुष्प सज्जा करेंगे। बताया जाता है कि महाकाल दर्शन के समय केवल प्रधानमंत्री गर्भगृह में रहेंगे। शासकीय पुजारी पं.घनश्याम शर्मा तथा एक सहयोगी पुजारी पूजा अर्चना कराएंगे। पूजन के पश्चात प्रधानमंत्री कुछ देर नंदी मंडपम् में बैठकर ध्यान लगाएंगे। प्रधानमंत्री वीआईपी अथवा निर्गम गेट से मंदिर में प्रवेश कर सकते है। मंदिर प्रशासन द्वारा दोनों ही द्वारों की साज सज्जा करवाई जा रही है। प्रधानमंत्री के लिए महानिर्वाणी अखाड़े के समीप एक ग्रीन रूप बनाए जाने की भी सूचना है।

चप्पे चप्पे पर सुरक्षा…शनिवार से ही बल तैनात

प्रधानमंत्री के महाकाल दर्शन करने के दौरान चप्पे चप्पे पर सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। प्रशासन ने शनिवार से ही मंदिर में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया है। सोमवार से सुरक्षा व्यवस्था और भी कड़ी हो जाएगी। फिलहाल मंदिर प्रशासन ने मंगलवार तड़के होने वाली भस्म आरती तथा प्रधानमंत्री के मंदिर में रहने के समय दर्शन व्यवस्था में परिवर्तन का निर्णय नहीं लिया है।

Weight Loss के लिए घर पर बनाएं देसी कुट्टू मेवा चॉकलेट, जानें रेसिपी…

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आपने कुट्टू के आटे की कई रेसिपीज ट्राई की होगी। पकौड़े, डोसा, पूड़ी और मिठाई कुछ ऐसी डिशेज हैं, जो काफी लोग पसंद करते हैं। आज हम आपको इन डिशेज से अलग एक डिफरेंट रेसिपी बनाना सिखा रहे हैं। कुट्टू मेवा चॉकलेट एक देसी मिठाई है, जिसे आप वेटलॉस के लिए भी खा सकते हैं। बस इसे एक बार बनाकर एयर टाइट कंटेनर में रख लें और फिर जब मन करे, खाते रहें।

सामग्री-

तिल, सूखा नारियल, इलायची पाउडर, दूध, कुट्टू का आटा, गुड़, घी, बटर पेपर, डार्क चॉकलेट

कुट्टू मेवा चॉकलेट बनाने की विधि-
इसे बनाने के लिए सबसे पहले तिल और सूखे नारियल को भून कर पीस कर पेस्ट बना लें। अब गैस मीडियम आंच पर रखते हुए इसपर एक पैन रखें और उसमें तिल भूनें। सूखे नारियल को भी डालें और दोनों को अच्छी तरह भून लें। अब भुने हुए तिल और भुना हुआ सूखा नारियल डालें। इन्हें एक साथ पीसकर चिकना पेस्ट बना लें। इसके बाद मीडियम आंच पर एक पैन रखें और उसमें गुड़ डालें। गरम होने पर इसमें दूध डालें और 5-7 मिनट तक पकाएं। अब इसमें तिल और नारियल का पेस्ट डालें।रोस्ट कुट्टू का आटा, मेल्ट डार्क चॉकलेट और इलायची पाउडर डालें। मिक्सचर को बटर पेपर पर डालें, चपटा करें और ऊपर से मेवे डालें, दूसरे बटर पेपर से ढक दें और फिर सेट होने के लिए रख दें और अपनी पसंद के अनुसार काटकर परोसें।

ढाबा स्टाइल भरवा बैंगन करी बनाने की आसान सी रेसिपी…

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क्या आपने कभी ढाबे वाले भरवा बैंगन करी खाए हैं?  आप सोच रहे होंगे कि ढाबे पर बैंगन कौन-ऑर्डर करता है? लेकिन आपको बता दें कि ढाबे पर बनने वाले बैंगन स्वाद के मामले में पनीर, गोभी और किसी और पॉप्युलर सब्जी तक को फेल कर सकते हैं। यह बैंगन इतने मसालेदार होते हैं कि आप इन्हें रोटी, नान और यहां तक की चावल के साथ भी खा सकते हैं। आइए, जानते हैं कैसे बनाएं ढाबा स्टाइल भरवा बैंगन करी।

सामग्री- 

बैंगन, मूंगफली, साबुत धनिया, हल्दी, लाल मिर्च, गरम मसाला, अमचूर, नमक, हींग, तेजपत्ता, टमाटर, जीरा

भरवा बैंगन करी बनाने की विधि-
सबसे पहले एक बैंगन को धोकर इन्हें एक्स की शेप में चीरा लगाकर काट लें। बैंगन छोटे आकार वाले लें। अब इसे अच्छी तरह साफ करके पानी में भिगो दें। अब एक पैन में मूंगफली, साबुत धनिया, जीरा, सौंफ और मेथी रोस्ट कर लें। आंच कम होनी चाहिए। अब इस मसाले को मिक्सी जार में ठंडा करके डालें। इसमे हल्दी, नमक, लाल मिर्च और अमचूर पाउडर डालकर पीस लें। अब इसका पाउडर एक कटोरी में निकालकर इस सूखे पाउडर को बैंगन में भर दें। अब एक कहाड़ी में घी डालें। इसमें हींग, जीरा और तेजपत्ता डालकर रोस्ट करें। अब इसमें बैंगन डालकर पकने के लिए रख दें। अब बैंगन 15-20 मिनट में पक जाएं, तो इन्हें आराम से पकड़कर एक प्लेट में निकाल लें। अब इसी कहाड़ी में थोड़ा तेल डालें। बारीक कटा प्याज डालकर भूनें। अब हल्दी, नमक, गरम मसाला डालकर भून लें। अब टमाटर प्यूरी डालें। अच्छी तरह पका लें। अब बैंगन को इसमें डाल दें। थोड़ा-पानी डालें। मसालेदार ग्रेवी बना लें। आपकी भरवा बैंगन करी तैयार है।   

 

मुलायम सिंह यादव के निधन से बॉलीवुड में शोक की लहर…

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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का आज निधन हो गया है।  उन्होंने आज 82 साल की उम्र में गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल अंतिम सांस ली। वह पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे। मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद बॉलीवुड में भी शोक की लहर है। बॉलीवुड सेलेब्स मुलायम सिंह यादव को श्रद्धांजलि अर्पित की। 

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता राज बब्बर ने ट्वीट कर लिखा- "उम्मीद की डोर टूट गयी। मुलायम सिंह यादव जी नहीं रहे। समाजवाद का समर्पित पहरेदार चला गया। राहें जुदा हुईं लेकिन परस्पर सम्मान कभी नहीं घटा। वजह थी उनकी सादगी जिसने कभी किसी में प्रतिद्वंदी नहीं देखा। मिट्टी की ख़ुशबु समेटे जीवन पर्यंत संघर्ष के पर्याय रहे नेता जी।" श्रद्धांजलि

अभिनेता अनुपम खेर ने भी मुलायम सिंह यादव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा- "मुलायम सिंह यादव जी के निधन का सुनकर दुःख हुआ। उनसे अलग अलग आयोजनो में मुलाक़ात हुई थी। हमेशा ख़ुशमिज़ाजी से मिलते थे! प्रभु उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।"

बॉलीवुड अभिनेत्री से राजनीति में कदम रखने वाली उर्मिला मातोंडकर ने ट्वीट कर लिखा- "समाजवाद को जमीन पर साकार करने वाले, वंचित और पिछड़ों के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले मुलायम सिंह जी केवल एक नेता नहीं बल्कि विचारधारा थे।" विनम्र श्रद्धांजलि। "अखिलेश यादव जी, उनके परिवार और समर्थकों के प्रति गहरी संवेदना।"

तिरुमाला में अभूतपूर्व भीड़, 30 घंटे से अधिक के इंतजार के बाद दर्शन

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तिरुमाला: तिरुमाला के वार्षिक ब्रह्मोत्सव के समापन के एक दिन बाद, भक्त बड़ी संख्या में पवित्र मंदिर में आ रहे हैं। इस कारण दर्शन करने में 30 घंटों से अधिक तक का वक्त लग रहा है। पुरातासी महीने के तीसरे शनिवार के कारण भीड़ बढ़ गई जो तमिलनाडु के लोगों के लिए एक पवित्र महीना है।

दूसरी ओर, तिरुमाला में दशहरे की छुट्टियों और कर्मचारियों के लिए लगातार छुट्टियां होने के कारण भक्तों की भीड़ लगी रही। तिरुमाला में भक्तों की भीड़, जो इस महीने की 4 तारीख तक सामान्य थी, 5 तारीख की दोपहर से धीरे-धीरे बढ़ती गई।
 

‘भूखे भूतों’ को खाना खिला रहे लोग, 15 दिन के लिए इस जगह खुले नरक के द्वार!

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आपने भूत-प्रेत की कई कहानियां सुनी होंगी. कुछ लोग इन पर विश्वास करते हैं तो कई लोग नहीं करते. लेकिन एक देश ऐसा है जहां पर 15 दिन भूतों को खाना खिलाया जाता है. वहां माना जाता है अगर लोग ऐसा नहीं करते हैं तो बुरी आत्माएं और भूत उनकी परिवार वालों को परेशान करते हैं.

अब इस कहानी के पीछे कितनी सच्चाई है यह तो हम नहीं बता सकते हैं लेकिन लोगों की ऐसा करने के पीछे क्या मान्यता है? इस बारे में आर्टिकल में जानेंगे.

कहां की है यह मान्यता

Themirror के मुताबिक, यह मान्यता कंबोडिया (एशियन कंट्री) की है. यहां शरद ऋतु में एक फेस्टिवल होता है जिसे पचम बेन फेस्टिवल (Pchum Ben festival) कहा जाता है. यह फेस्टिवल हर साल सितंबर और अक्टूबर के बीच खमेर चंद्र कैलेंडर (Khmer Lunar calendar) के 10 वें महीने के दौरान 15 दिनों के लिए होती है.

माना जाता है कि इस फेस्टिवल के दौरान 15 दिन तक नरक के द्वार खुल जाते हैं और भूखी बुरी आत्माएं और भूत बाहर आते हैं. इसके बाद उन्हें खाना खिलाकर शांत कराया जाता है.

The mirror के मुताबिक, इस फेस्टिवल में चार तरह की आत्माएं या भूत होते हैं. वह भूत जो अस्थायी रूप से मुक्त होते हैं वह केवल खून और मवाद खाते हैं. अगर भूतों को खाना खिलाया जाए तो वह आशीर्वाद देते हैं और फिर नरक में वापस लौट जाते हैं.

भूखी आत्मा और भूतों को खिलाते हैं खाना!

मान्यता है कि इस समय भूखी आत्माएं बाहर आती हैं और उन्हें खाना खिलाना होता है. इस उत्सव को खमेर महोत्सव (Khmer festival) के रूप में भी जाना जाता है. इस दौरान भूत मंदिरों, कब्रिस्तानों और अपने रिश्तेदारों के घरों के आसपास अच्छे भोजन की तलाश में घूमते हैं. अगर उन्हें अच्छा भोजन नहीं मिलता है तो वह उन्हें परेशान करते हैं.

सुबह से ही परिवार वाले करते हैं तैयारी

प्राचीन रिवाज के मुताबिक, दक्षिण पूर्व एशियाई देश कंबोडिया में इस मान्यता को काफी अधिक माना जाता है. इसमें परिवार अपने पिछले सात पूर्वजों को भोजन कराता है. इस त्योहार के शुरू होने से पहले दिन परिजन सुबह जल्दी उठ जाते हैं और सूरज निकलने से पहले ही खाना तैयार कर लेते हैं. बताया जाता है कि भूतों को रोशनी पसंद नहीं है. अगर थोड़ी सी भी धूप दिखाई दे जाए तो भोजन स्वीकार नहीं होता.

पापों की सजा मिलती है.

कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह में एक भिक्षु ओम सैम ओल (Om Sam Ol) के मुताबिक, “ऐसा माना जाता है कि कुछ मृतक लोगों को उनके पापों की सजा मिलती है और वे नरक में चले जाते हैं. उन्हें वहां बहुत पीड़ा मिलती है और काफी प्रताड़ित भी किया जाता है. नरक के बारे में आम लोग सोच भी नहीं सकते. नरक की आत्माएं सूर्य को नहीं देख सकतीं. उनके पास पहनने के लिए कपड़े नहीं हैं और खाने के लिए खाना भी नहीं है. फचम बेन वह समय है जब वे आत्माएं अपने जीवित रिश्तेदारों से खाना ग्रहण करती हैं और उन्हें थोड़ी राहत मिलती है क्योंकि रिश्तेदार उन्हें भोजन और प्रसाद अर्पित करते हैं.”

ओम सैम ओल आगे बताते हैं, “यह जानने का कोई तरीका नहीं है कि किसी का मृत रिश्तेदार स्वर्ग में है या नरक में. इसलिए कंबोडियाई लोग अपने पूर्वजों के लिए खाना लेकर जाते हैं ताकि उनकी पीड़ा कम हो सके जो वह सहन कर रहे हैं. यह त्यौहार अंगकोरियन काल से मनाया जा रहा है जो 9वीं शताब्दी ईस्वी पूर्व का है.”
 

उज्जैन में है सप्त सागर, कहीं चढ़ाते हैं खीर तो कहीं मालपुआ, जानें क्या है ये परंपरा

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उज्जैन. 11 अक्टूबर, मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) महाकाल लोक (Mahakal Lok) का लोकार्पण करने उज्जैन आ रहे हैं। महाकाल मंदिर के विस्तारीकरण को ही महाकाल लोक का नाम दिया गया है।

इस लोक योजना में लगभग 800 करोड़ रूपए खर्च किए गए हैं। पहले महाकाल मंदिर कुछ हेक्टेयर में था और विस्तारीकरण के बाद ये मंदिर 20 हेक्टेयर में फैल चुका है। उज्जैन को सप्तपुरियों (Sapt Sagar of Ujjain) में से एक कहा जाता है यानी 7 सबसे पवित्र और धार्मिक शहर। उज्जैन में कई धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है। आज हम आपको एक ऐसी ही धार्मिक परंपरा के बारे में बता रहे हैं।

उज्जैन में की जाती है सप्तसागरों की परिक्रमा
उज्जैन में अलग-अलग स्थानों पर 7 तालाब हैं, जिन्हें सप्त सागर कहा जाता है। इनका वर्णन स्कंद पुराण आदि कई ग्रंथों में मिलता है। वैसे तो यहां प्रतिदिन पूजा-पाठ की जाती है, लेकिन अधिक मास के दौरान एक ही दिन में 7 सप्तसागरों की परिक्रमा करने की परंपरा है। इस दौरान हर तालाब में कुछ खास चीजें चढ़ाई जाती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से शुभ फल मिलते हैं जीवन के सभी कष्ट भी दूर होते हैं। आगे जानिए किस तालाब (सागर) में कौन-सी चीज चढ़ाई जाती है.

1. सप्तसागर के अंतर्गत आने वाले पहले सागर का नाम रुद्रसागर है, जो महाकाल मंदिर और हरसिद्धि मंदिर के बीच स्थित है। भक्त यहां नमक, सफेद कपड़े और चांदी के नंदी अर्पित करते हैं।
2. सप्त सागरों में दूसरा है पुष्कर सागर। ये महाकाल मंदिर से कुछ ही दूरी पर नलिया बाखल क्षेत्र में स्थित है। यहां पीले वस्त्र व चने की दाल चढ़ाई जाती है।
3. नई सड़क पर स्थित है क्षीर सागर। यहां साबूदाने की खीर और बर्तन चढ़ाने की परंपरा है।।
4. चौथे सागर का नाम है गोवर्धन। ये निकास चौराहे पर स्थित है। यहां माखन-मिश्री, गेहूं और लाल कपड़े चढ़ाने का विधान है।
5. उज्जैन शहर के लगभग 4 किमी दूर ग्राम उंडासा में है रत्नाकर सागर। यहां पंचरत्न, महिलाओं के शृंगार की सामग्री और महिलाओं के वस्त्र चढ़ाने की परंपरा है।
6. प्राचीन राम जनार्दन के पास स्थित है विष्णु सागर, भक्त यहां पंचपात्र, ग्रंथ, माला आदि चीजें चढ़ाते हैं।
7. इंदिरा नगर के नजदीक स्थित है पुरुषोत्तम सागर, यहां चलनी और मालपुआ अर्पित करते हैं।

अधिक मास में ही क्यों करते हैं सप्तसागरों की परिक्रमा?
अधिक मास 3 साल में एक बार आता है। इसे मल मास भी कहते हैं। धार्मिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व है। जब भी अधिक मास होता है तो श्रृद्धालु सप्तसागरों की परिक्रमा जरूर करते हैं, मान्यता है ऐसा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। अधिक मास भगवान विष्णु से संबंधित है, इसलिए इस महीने में किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना होकर मिलता है। यहीं कारण है कि अधिक मास में सप्त सागरों की परिक्रमा की जाती है।

अपूर्णता से पूर्णता की ओर 

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मनुष्य का बाह्य जीवन वस्तुत: उसके आंतरिक स्वरूप का प्रतिबिम्ब मात्र होता है। जैसे ड्राइवर मोटर की दिशा में मनचाहा बदलाव कर सकता है। उसी प्रकार, जीवन के बाहरी ढर्रे में भारी और आश्चर्यकारी परिवर्तन हो सकता है। वाल्मीकि और अंगुलिमाल जैसे भयंकर डाकू क्षण भर में परिवर्तित होकर इतिहास प्रसिद्ध संत बन गये। गणिका और आम्रपाली जैसी वीरांगनाओं को सती-साध्वी का प्रात: स्मरणीय स्वरूप ग्रहण करते देर न लगी। वामित्र और भतृहरि जैसे विलासी राजा उच्च कोटि के योगी बन गये। नृशंस अशोक बौद्ध धर्म का महान प्रचारक बना। तुलसीदास की कामुकता का भक्ति भावना में परिणत हो जाना प्रसिद्ध है। ऐसे असंख्य चरित्र इतिहास में पढ़े जा सकते हैं। छोटी श्रेणी में छोटे-मोटे आश्चर्यजनक परिवर्तन नित्य ही देखने को मिल सकते हैं। इससे स्पष्ट है कि जीवन का बाहरी ढर्रा जो चिर प्रयत्न से बना हुआ होता है, विचारों में भावनाओं में परिवर्तन आते ही बदल जाता है। मित्र को शत्रु बनते, शत्रु को मित्र रूप में परिणत होते, दुष्ट को संत बनते, संत को दुष्टता पर उतरते, कंजूस को उदार, उदार को कंजूस, विषयी को तपस्वी, तपस्वी को विषयी बनते देर नहीं लगती। 
आलसी उद्योगी बनते हैं और उद्योगी आलस्यग्रस्त होकर दिन बिताते हैं। दुगरुणियों में सद्गुण बढ़ते और सद्गुणी में दुगरुण उपजते देर नहीं लगती। इसका एकमात्र कारण इतना ही है कि उनकी विचारधारा बदल गई, भावनाओं में परिवर्तन हो गया। संसार का जो भी भला-बुरा स्वरूप हमें दृष्टिगोचर हो रहा है, समाज में जो कुछ भी शुभ-अशुभ दिखाई पड़ रहा है, व्यक्ति के जीवन में जो कुछ उत्कृष्ट-निकृष्ट है, उसका मूल कारण उसकी अंत:स्थिति ही होती है। धनी-निर्धन, रोग-नीरोग, अकाल मृत्यु-दीर्घ जीवन, मूर्ख-विद्वान, घृणित-प्रतिष्ठत और सफल-असफल का बाहरी अंतर देखकर उसके व्यक्तित्व का मूल्यांकन किया जाता है। यह बाहरी भली-बुरी परिस्थितियां मनुष्य के मनोबल, आस्था और अंत:प्रेरणाओं की प्रतीक हैं। भाग्य यदि कभी कुछ करता होगा तो निश्चय ही उसे पहले मनुष्य की मनोरुचि में ही प्रवेश करना पड़ता होगा, जिसकी अंत:गतिविधियां सही दिशा में चलने लगीं हैं। किंतु जिसका मानसिक स्तर चंचलता, अवसाद, अवास, आलस्य, आवेश, दैन्य आदि से दूषित हो रहा है, उसके लिए अच्छी परिस्थितियां और अच्छे साधन उपलब्ध होने पर भी दुर्गति का ही सामना करना पड़ेगा।  
 

राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन (10 अक्टूबर 2022)

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  • मेष :- व्यवसायिक क्षमता अनुकूल है, किसी तनाव में विवादग्रस्त होने से बचें।
  • वृष :- स्त्री-वर्ग से भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति तथा कार्य संतोषप्रद होगा, ध्यान रखें।
  • मिथुन :- सामाजिक कार्यों में मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व-वृद्धि, कार्यकुशलता से संतोष होगा।
  • कर्क :- कार्यकुशलता से संतोष एवं नवीन योजना फलप्रद हो, रुके कार्य बन ही जायेंगे।
  • सिंह :- मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्च वृद्धि किन्तु अधिकारियों की उपेक्षा से कार्य हानि अवश्य होगी।
  • कन्या :- दैनिक कार्यों में सुधार, तत्परता से रुके कार्य निपटा लेवें, चिन्तामुक्त होंगे।
  • तुला :- तनाव, अशांति व कष्ट, घटनाग्रस्त होने से बचें, रुके कार्य निपटा लेवें, कार्य बनेंगे।
  • वृश्चिक :- स्त्री-शरीर सुख, मनोबल उत्साहवर्धक होगा, विरोध होगा, ध्यान अवश्य रखें।
  • धनु :- स्वभाव में उद्विघ्नता, क्लेश, मन अशांति से बचें, कार्य अवरोध अवश्य होगा।
  • मकर :- सफलता के साधन जुटायें, मनोबल उत्साहवर्धक होगा, समय का ध्यान अवश्य रखें।
  • कुम्भ :- विशेष कार्य स्थिगित रखें, मानसिक-विभ्रम व उद्विघ्नता से आप अवश्य बचेंगे।
  • मीन :- किसी तनाव व क्लेश से बचें, मानसिक उद्विघ्नता बनेगी, परेशानी होगी, ध्यान दें।
     

मुख्यमंत्री चौहान ने मांडू में किया पौध-रोपण

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भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव के साथ धार जिले में मांडू के जहाज़ महल परिसर में बहेड़ा का पौधा लगाया। मुख्यमंत्री चौहान अपने संकल्प के क्रम में प्रतिदिन पौध-रोपण कर रहे हैं। आज लगाया गया बहेड़ा मध्यप्रदेश सहित उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब में होता है। औषधीय गुणों से भरपूर इस वृक्ष के फल और छाल का उपयोग कई रोगों के उपचार में किया जाता है।

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