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उज्जैन दर्शन के लिये आने वाले यहाँ से अमिट छाप लेकर जायें : मुख्यमंत्री चौहान

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भोपाल : मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर कॉरिडोर का निरीक्षण किया गया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि महाकालेश्वर कॉरिडोर का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये। उज्जैन दर्शन के लिये देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालु यहाँ से उनके मन में भगवान महाकालेश्वर और मंदिर के कॉरिडोर की अमिट छाप लेकर जायें। मुख्यमंत्री ने महाकालेश्वर कॉरिडोर में निर्मित नवग्रह मूर्तियों, भगवान शिव से संबंधित कथाओं पर केन्द्रित चित्रों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि संबंधित चित्रों के नीचे सरल भाषा में उसका विवरण अंकित करायें, जिससे आमजन को आसानी से संबंधित कथा की जानकारी मिल सके।

मुख्यमंत्री श्री चौहान को कलेक्टर श्री आशीष सिंह ने महाकालेश्वर कॉरिडोर प्रोजेक्ट की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकालेश्वर कॉरिडोर का जन-जन में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये, जिससे महाकालेश्वर कॉरिडोर के उद्घाटन के पूर्व सभी को यहाँ की विशेषता के बारे में जानकारी मिल सके। उज्जैन भ्रमण में उपयुक्त वातावरण निर्मित हो, जिससे भगवान महाकालेश्वर के दर्शन के बाद उज्जैन से प्रस्थान के दौरान भी लोगों को कॉरिडोर दिखाई दे। मुख्यमंत्री द्वारा कॉरिडोर में किये गये सौन्दर्यीकरण कार्य की प्रशंसा की गई। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव, सांसद श्री अनिल फिरोजिया सहित विधायक, जन-प्रतिनिधि, नागरिक और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।
 

मुख्यमंत्री चौहान ने स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज की प्रतिमा का अनावरण किया

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भोपाल : मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को उज्जैन नृसिंह घाट स्थित आश्रम में ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज की प्रतिमा का अनावरण किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रतिमा का अनावरण किया गया। मुख्यमंत्री ने परिसर में स्थित नवनिर्मित स्वामी श्री सत्यमित्रानंद गिरि समन्वय निलयम कार्यालय का लोकार्पण भी किया। समन्वय निलयम कार्यालय में मुख्यमंत्री श्री चौहान, स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, श्री गोविन्ददेव गिरि महाराज एवं सन्तों ने ब्रह्मलीन सत्यमित्रानंद गिरिजी महाराज की चरण पादुका को नमन किया।

प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज एवं विशेष अतिथि के रूप में स्वामी श्री गोविन्ददेव गिरि महाराज, श्री पुण्यानंद गिरिजी महाराज, अध्यक्ष गो-संवर्धन आयोग श्री अखिलेश्वरानंद गिरि महाराज, स्वामी श्री चिदानंदजी महाराज उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, सांसद श्री अनिल फिरोजिया, सहित विधायक एवं जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री चौहान ने मृतकों के परिजन को स्वेच्छानुदान मद से राशि उपलब्ध कराने के दिये निर्देश

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भोपाल : मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने उज्जैन के नागझिरी की पोहा फैक्टरी में 16 सितम्बर की शाम को आगजनी से नागझिरी निवासी श्रीमती ज्योति पति ईश्वरलाल डाबी एवं श्रीमती क्षमाबाई पति प्रभुलाल की मृत्यु पर दु:ख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज उज्जैन प्रवास पर उक्त घटना में मृतकों के परिजन से भेंट की। उन्होंने सांत्वना देते हुए मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से 2-2 लाख रूपये की राशि मृतकों के परिजन को तत्काल देने के निर्देश जिला प्रशासन को दिये हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आश्वस्त किया कि मृतकों के परिजन को 2-2 लाख रूपये की अतिरिक्त राशि भी दी जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पोहा फैक्टरी में घायलों का इलाज सरकारी खर्चे पर किया जायेगा। इस सम्बन्ध में उन्होंने कलेक्टर को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, सांसद श्री अनिल फिरोजिया, विधायक श्री पारस जैन, पूर्व विधायक श्री रोड़मल राठौर, श्री विवेक जोशी, श्री अनिल जैन कालूहेड़ा एवं मृतकों के परिजन उपस्थित थे।
 

जिला अस्पतालों में अब प्रबंधक संभालेंगे सफाई व सुरक्षा का कार्य

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भोपाल ।  मध्‍य प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में प्रबंधकीय कार्यों के लिए पहली बार अस्पताल प्रबंधक नियुक्त किए जा रहे हैं। इनकी भर्ती मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (पीएससी) से की जा रही है। अगले माह इनके नियुक्ति आदेश जारी हो सकते हैं। ये अस्पताल में सफाई, सुरक्षा, बायो मेडिकल वेस्ट का निपटान, हेल्प डेस्क, भीड़ का प्रबंधन जैसे काम देखेंगे। इससे व्यवस्थाओं में सुधार होगा। अभी यह जिम्मेेदारी अस्पताल अधीक्षक की होती है, जबकि वह इसके विशेषज्ञ नहीं होते। चिकित्सकोें द्वारा लंबे समय से यह मांग की जा रही थी कि सफाई, सुरक्षा देखने का काम डाक्टर का नहीं है। कई बार अध‍िकारियों के निरीक्षण में इसके लिए अस्पताल अधीक्षक पर कार्रवाई की जाती है जो गलत है। इस कारण पिछले तीन साल से अस्पताल प्रबंधक नियुक्ति करने के प्रयास चल रहे थे। अस्पताल प्रबंधन में डिग्री या डिप्लोमा प्रमाण पत्र वाले उम्मीदवारों को इस पद पर पदस्थ किया जाएगा।

गुणवत्ता प्रबंधक भी पदस्थ होंगे

अस्पताल प्रबंधकों के साथ हर जिले में एक गुणवत्ता प्रबंधक भी पदस्थ किया जा रहा है। इसी साल 14 जिलों में इनकी नियुक्ति हो चुकी है। बाकी जिलों में अगले माह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इनकी जिम्मेदारी, जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक की व्यवस्थाएं देखने की रहेगी। इन पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी अस्पतालों को कायाकल्प पुरस्कार और नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (एनक्यूएएस) के लिए तैयार करना है। दोनों मूल्यांकन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा कराए जाते हैं। कायाकल्प पुरस्कार में अस्पताल का संपूर्ण मापदंडों के तहत मूल्यांकन किया जाता है। इसमें सफाई, सुरक्षा, संक्रमण रोकथाम, मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं और आसपास का वातावरण शामिल है। वहीं, एनक्यूएएस में अस्पताल को 18 अलग-अलग विभागों में बांटकर मूल्यांकन किया जाता है। 70 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाने पर अस्पताल को प्रति बिस्तर 10 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि तीन साल तक दी जाती है। गुणवत्‍ता प्रबंधकों की नियुक्ति संविदा आधार पर की जाएगी।

लाल पुल से हरसिद्धि सड़क मार्ग का नाम अब ‘ब्रह्मलीन पद्मभूषण स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी महाराज’ होगा : मुख्यमंत्री चौहान

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भोपाल : मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार को उज्जैन में सद्गुरूदेव ब्रह्मलीन पद्मभूषण स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में शामिल हुए और उनके श्रीचरणों में प्रणाम किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि श्री सत्यमित्रानंद गिरि महाराज का तेज ओजस्वी था। उनकी वाणी सुनते थे तो साक्षात स्वामी विवेकानंद जैसी वाणी सुनाई देती थी। एक नई ऊर्जा का प्रवाहमान था। ऐसे ओजस्वी एवं सनातन धर्म की ध्वजा को फहराने में अग्रणी श्री गिरि महाराज को श्रद्धा सहित नमन करता हूँ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान को प्राप्त करने के तीन मार्ग हैं- ज्ञान मार्ग, भक्ति मार्ग तथा कर्म मार्ग। ये तीनों त्रिवेणी स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरिजी महाराज में थी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने घोषणा की कि लाल पुल से हरसिद्धि मंदिर तक सड़क मार्ग का नाम अब ब्रह्मलीन श्री सत्यमित्रानंद गिरिजी मार्ग होगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि ब्रह्मलीन श्री सत्यमित्रानंद गिरि महाराज हमेशा जगत के हित के कल्याणकारी कामों में लगे रहते थे। उन्होंने समाज में सत् कार्यों की जागरूकता के प्रसार का काम किया। उन्होंने भारत माता का अद्भुत मन्दिर बनवाया। आज उनकी प्रतिमा का उज्जयिनी में अनावरण हुआ है। वे सदैव हमारे मन में रहेंगे।

प्रारंभ में मुख्यमंत्री श्री चौहान, जूना पीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी, स्वामी गोविन्ददेव गिरि जी, स्वामी पुण्यानंद गिरि जी, स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि जी, स्वामी चिदानंद महाराज, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, सांसद श्री अनिल फिरोजिया सहित विधायक और जन-प्रतिनिधियों ने ब्रह्मलीन श्री सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की। छत्रसाल युनिवर्सिटी के अध्यक्ष एवं कुलपति डॉ.टीआर थापक ने अतिथियों का स्वागत किया। समन्वय परिवार के सचिव श्री महेश कानड़ी ने कार्यक्रम की जानकारी दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की मूर्ति बनाने वाले श्री नरेश भारद्वाज का सम्मान और पुस्तक का विमोचन किया गया।
 

नि-क्षय मित्र और रोगी के मध्य नियमित संवाद का प्लेटफार्म बनाएँ : पटेल

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भोपाल :        राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने राजभवन की ओर से तीन जिलों के टी.बी. रोगियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि टी.बी. रोग उन्मूलन प्रयासों में रोग संबंधी जरूरी सावधानियों, आहार, पोषण, दिनचर्या और दवाओं के नियमित सेवन के बारे में रोगी और नि-क्षय मित्र के दिशा-दर्शन के प्रयास किए जाएँ। उन्होंने कहा कि रोगी को पोषण अनुदान के रूप में दी जाने वाली आर्थिक सहायता में वृद्धि की संभावनाओं को तलाशे रोगी के बैंक खाते और मोबाइल नंबर की जानकारी नि-क्षय मित्र को उपलब्ध कराने की पहल भी करें, जिससे नि-क्षय मित्र और रोगी के मध्य नियमित सीधा संवाद, सहायता और सहयोग का प्लेटफार्म उपलब्ध हो।  

      राज्यपाल श्री पटेल राजभवन में में टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सामुदायिक सहभागिता नि-क्षय 2.0 की गतिविधियों पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा कर रहे थे।

      राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि टी.बी. उपचार प्रयासों में रोगी द्वारा उचित आहार, आवश्यक सावधानियों का पालन और नियमित दवा का सेवन सभी पर समग्र रूप से फोकस किया जाना जरूरी है। रोगी धूम्रपान नहीं करें। चूल्हे पर खाना नहीं बनाए। खखार को इधर-उधर नहीं फैलने दें। पोषक तत्वों वाला आहार ग्रहण करें। यह बताना भी जरूरी है कि टी.बी. शरीर को धीरे-धीरे अंदर ही अंदर खोखला करता है। इसलिए जितनी जल्दी उपचार शुरू होगा, सावधानियों का जितनी कड़ाई से पालन होगा, रोगी भी उतनी ही जल्दी स्वस्थ होगा। उन्होंने उपचार प्रयासों में सहयोग के कार्यों को व्यवहारिक स्वरूप में प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि टी.बी. प्रभावित महिलाओं को उज्जवला योजना में गैस चूल्हे की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि लंबे उपचार से कई बार रोगी में नैराश्य का भाव उत्पन्न हो जाता है। यह आवश्यक है कि उसका मनोबल कम नहीं हो। नि-क्षय मित्र एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता का इस संबंध में उन्मुखीकरण किया जाना जरूरी है। उन्होंने सक्रिय नि-क्षय मित्रों के प्रोत्साहन प्रयासों पर भी ध्यान दिए जाने की जरूरत बताई। उनके सम्मान और प्रसिद्ध व्यक्तियों के साथ संवाद के कार्यक्रम भी किए जाने पर बल दिया।

अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य श्री मोहम्मद सुलेमान ने बताया कि नि-क्षय मित्र 2.0 प्रदेश में तीव्र गति से संचालित किया जा रहा है। केंद्र शासित प्रदेशों को छोड़ कर क्षय रोगियों को नि-क्षय मित्रों के साथ जोड़ने में 90 प्रतिशत की उपलब्धि के साथ मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर है। विकासखण्ड स्तर पर मॉलिक्यूलर टेस्टिंग की व्यवस्था से रोगी चिन्हांकन कार्य में भी तेज गति आई है।

     राज्यपाल के प्रमुख सचिव श्री डी.पी. आहूजा, स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, मिशन संचालक एन.एच.एम. सुश्री प्रियंका दास सहित अधिकारी उपस्थित थे।                      
 

प्रदेश के कूनो में पर्यटन की चीता रफ्तार…

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Raghavendra Singh

अंततः आज़ादी के सत्तर साल बाद तीन नर और पांच मादा वाले आठ चीतों का कुनबा भारत आ ही गया। कांग्रेस काल से शुरू हुई कोशिशों का श्रेय पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों में जाता है। मौका था मोदी के 17 सितंबर को उनके जन्मदिन का। इस अवसर पर मोदी ने चीतों का परिवार मध्यप्रदेश के कूनो पालपुर के हवाले किया। यह घटनाक्रम प्रदेश के सबसे पिछड़े जिला श्योपुर का भाग्य बदलने वाला भी साबित हुआ। पांच सेकेंड से कम समय में 95 किलोमीटर की स्पीड पकड़ने वाले चीतों के आने के पहले ही यहां जमीनों के भाव चीता गति से भी आगे निकल गए। एक लाख रु एकड़ का भाव तीस लाख रु एकड़ तक उछल गया है।
श्योपुर के कूनो पालपुर में रफ्तार के इन बादशाहों के कदम पड़ने के पहले ही आर्थिक तंगी और इलाके की बदहाली दूर होने के शगुन होना शुरू हो गए। इस पर लाख सियासत हो मगर इस बात से कोई इनकार नही कर सकता कि वाइल्ड लाइफ टूरिज्म के नजरिए से अच्छे दिन आने वाले हैं।
लाख शंका- कुशंकाओं और तकनीकी मुद्दों पर आलोचना के बीच कह सकते हैं कूनो नदी के किनारे बना ये नेशनल पार्क आर्थिक दृष्टि से इलाके की दशा और दिशा बदलने वाला है। यहां के विकास को पर लग जाएंगे और यह चीते की रफ़्तार से दिन दूना रात चौगुना बढ़ेगा। मिसाल के तौर पर एक- दो महीने पहले जिस कूनो पालपुर में जमीन की कीमत एक लाख रुपए एकड़ थी उसके दाम चीतों के आने की खबर से बढ़कर करीब साढ़े ग्यारह लाख रु एकड़ तक हो गए थे। चीतों के आने के कुछ दिन पहले यह आंकड़ा लगभग तीस लाख रु के पार चला गया। इसके बाद पर्यटकों की आवाजाही से यहां रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ने का अनुमान है।
असल में चीतों के आने के बाद कूनो नेशनल पार्क में पर्यावरण का भी सख्ती से ध्यान रखा जाएगा। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से राजस्थान तक वन्य प्राणियों के प्रेमी पर्यटकों की भरमार हो जाएगी । एमपी पहले से ही टाइगर स्टेट लेपर्ड स्टेट था, अब चीता स्टेट का तमगा पाने के बाद मध्य प्रदेश दुनिया का पहला ऐसा राज्य हो गया जो चीतों का भी घर बन गया है । इससे भारत आने वाले दुनिया भर के पर्यटक यहां खिचे चले आएंगे। इससे यहां के जंगल और पर्यावरण दोनों ही पहले से ज्यादा समृद्ध होंगे। कह सकते हैं पर्यटन के लिहाज से अच्छे दिन आने वाले हैं। इसके लिए टाइगर- लेपर्ड के बाद चीतों की रक्षा करना सरकार और समाज दोनों का संयुक्त जिम्मा होगा। टाइगर और लेपर्ड स्टेट तमगा लिए मध्य प्रदेश पहले भी इसे बखूबी अंजाम देता रहा है। इसलिए किसी किस्म के शक शुबह की जरूरत नहीं है। अभी तो यहां रिसार्ट्स, रेस्तरां और होटल-मोटल खोलने का एक नया दौर शुरू होगा ।इससे रोजगार के साथ आर्थिक समृद्धि में इजाफा होने के संकेत मिल रहे हैं। गाइड के तौर पर पर्यटकों के रहने खाने पीने और घुमाने फिराने के लिए स्थानीय आदिवासियों से लेकर आम लोगों को कामकाज के अच्छे अवसर भी मिलेंगे। एक तरह से एमपी के साथ पडौसी राज्य राजस्थान की टूरिज्म इंडस्ट्री को एक नई गति मिलेगी। एक नया टूरिस्ट सर्किट बनने वाला है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ज्योतिरादित्य सिंधिया कि यह त्रिमूर्ति ग्वालियर चंबल क्षेत्र में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर सकती है।

बदनाम बिलाबोंग स्कूल…
भोपाल के इंटरनेशल बिलाबोंग स्कूल में साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ दुराचार की घटना ने स्कूल और पुलिस प्रशासन की प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी है। मध्य प्रदेश बाल आयोग इस घटना पर सक्रिय और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सख्त कार्रवाई करने की सिफारिश कर रहा है लेकिन दूसरी तरफ पुलिस कमिश्नर प्रणाली के बावजूद दोषियों और स्कूल प्रबंधन पर कानूनी कार्रवाई की खानापूर्ति भर की जा रही है । घटना में पुलिस की धीमी और ठंडी कार्यवाही को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद एक्शन में आए उन्होंने पुलिस कमिश्नर और बड़े अधिकारियों की सुबह 7:00 बजे मीटिंग बुलाई और दोषियों पर कठोर कदम उठाने के निर्देश दिए इसके बावजूद हैरत की बात यह है कार्यवाही करने के बजाए अभी भी पुलिस रस्म अदायगी करती दिख रही है। स्कूल प्रबंधन पर सांप्रदायिकता केपी गंभीर आरोप अभिभावक लगा रहे हैं सबसे चौंकाने वाली बात यह है प्रबंधन से जुड़ी एक महिला घटना के उजागर होते ही गायब कर दी गई हैं उसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है सीसी टीवी कैमरे के फुटेज भी गायब हैं रिकॉर्डिंग के डाटा भी नहीं मिल रहे हैं और इसके लिए जिम्मेदारों की गिरफ्तारी करने के बजाए स्कूल के परिवहन से जुड़े लोगों को ही सामने लाया जा रहा है अभी तक इस घटना में आरोपी बस ड्राइवर और उसका सहयोग करने वाली एक महिला को गिरफ्तार किया गया है बच्चों के अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन के शीर्ष कर्ताधर्ताओं को बचाया जा रहा है। इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि प्रशासनिक और रसूखदार लोगों के बच्चे भी इस स्कूल में पढ़ते हैं। लिहाजा जांच के लिए गठित एसआईटी भी उन मुद्दों की अनदेखी कर रही है जो पूरे मामले में कई रहस्य उजागर कर सकते हैं। शोषण की शिकार बच्ची को न्याय दिलाने के लिए बाल आयोग के सदस्य बृजेश चौहान सक्रिय है। उनका कहना है कि जो तथ्य और सबूत मिले हैं उसके हिसाब से एक से अधिक बच्चे शारीरिक शोषण का शिकार हो रहे हैं। यह बेहद गम्भीर बात है। दूसरी तरफ स्कूल प्रबंधन पर एक अभिभावक निर्मल का आरोप है कि यहां धर्मांतरण का काम बड़े सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है। जिसमें स्कूल में कार्यरत उनकी पत्नी और उनके बच्चे का ब्रेन वॉश कर धर्म परिवर्तन या तो कर दिया गया है या उनका धर्मांतरण करा दिया जाएगा। मामला अत्यंत सम्वेदनशील है। इस पर पुलिस प्रशासन के साथ सरकार की भी प्रतिष्ठा भंग हो रही है ।

सीएम एक्शन में, पुलिस डिफेंस में…
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश के बावजूद पुलिस एक्शन के बजाए बचाव मोड पर ज्यादा दिख रही है। असल दिक्कत यह है कि पुलिस आरोपी पक्ष के इनकार से सहमत होते दिख रही है। परिस्थितजन्य प्रमाण ,तथ्य और पीड़ितों की शिकायत को नकारने वाले स्कूल प्रबंधन को सही मान रही है। दुराचार की घटना , इसमे लापरवाही, सीसीटीवी कैमरे का डेटा नही होना, सबूत मिटाने और उनसे छेड़छाड़ करने, डेटा डिलीट करना संगीन घटनाक्रम है। धर्मांतरण, पास्को एक्ट के साथ साइबर क्राइम का भी मामला बनता है। स्कूल के तार खाड़ी देश से भी जुड़े हैं। पूरे मामले में स्कूल के निदेशकों- प्रबन्धकों की भी बारीकी से जांच की जरूरत है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि अधिकांश निदेशकों ने अंतरजातीय विवाह किए हैं।

Raghavendra Singh Ke Facebook Wall Se

सीमेंट कंपनी अंबुजा-ACC के स्टॉक्स में तेजी

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सीमेंट कंपनी अंबुजा और ACC के शेयरों में कारोबारी सप्ताह के पहले दिन यानी सोमवार को 19 सितंबर  तेजी देखने को मिली। अंबुजा का शेयर 45 रुपए यानी करीब 9% की बढ़त के साथ 564 रुपए पर बंद हुआ। वहीं ACC का शेयर 28 रुपए यानी 1.09% बढ़कर 2,63 रुपए पर बंद हुआ।

एशिया के सबसे अमीर आदमी गौतम अडाणी के अंबुजा और ACC का अधिग्रहण करने के बाद से इन दोनों कंपनियों के शेयरों में यह तेजी आई है। 5 महीने पहले मई में गौतम अडाणी ने अंबुजा और ACC के साथ डील साइन की थी। इस डील के बाद से ही दोनों कंपनियों के शेयरों में लगातार तेजी देखने को मिली है।

गौतम अडाणी ने 2 दिन पहले 16 सितंबर अंबुजा और ACC का अधिग्रहण पूरा किया था। अडाणी ग्रुप ने अंबुजा और ACC सीमेंट का 6.5 अरब डॉलर यानी 51.79 हजार करोड़ में यह टेकओवर किया। इस टेकओवर के साथ ही अडानी ग्रुप देश का दूसरा सबसे बड़ा सीमेंट मैन्युफैक्चरर बन गया है। 

गौतम अडाणी के बड़े बेटे करण अडाणी सीमेंट कारोबार की कमान संभालेंगे। सूत्रों के मुताबिक, गौतम अडाणी अंबुजा सीमेंट के चेयरमैन बने हैं। वहीं 35 साल के करण अडाणी को इसका नॉन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बनाया है। इसके अलावा करण को ACC का चेयरमैन और नॉन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर भी नियुक्त किया गया है। बता दें कि करण फिलहाल अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) के CEO हैं।

इस कंपनी के चेयरमैन ने बोर्ड से दिया इस्तीफा…

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ब्रॉडकास्ट सैटेलाइट सर्विस प्रोवाइडर डिश टीवी (Dish TV) के चेयरमैन जवाहर लाल गोयल ने सोमवार को कंपनी के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया। कंपनी के सबसे बड़े शेयर होल्डर Yes Bank की आपत्ति के बाद गोयल 1 सितंबर को बोर्ड से हटने के लिए राजी हुए थे। बता दें कि कंपनी के शेयर इंट्रा डे में लगभग 10% चढ़कर 16.85 रुपये पर पहुंच गए।

डिश टीवी ने बीएसई फाइलिंग में कहा,"… हम आपको सूचित करना चाहते हैं कि जवाहर लाल गोयल, कंपनी के निदेशक ने अपने पत्र दिनांक 19 सितंबर, 2022 के माध्यम से कंपनी के निदेशक मंडल और उसकी समिति (समितियों) से अपना इस्तीफा दे दिया है।"

बता दें कि हाल ही में डिश टीवी समूह के सीईओ अनिल कुमार दुआ ने कहा था कि वित्त वर्ष 22 कंपनी के लिए "आसान साल नहीं" है और इसे "कॉर्पोरेट और व्यावसायिक दोनों मोर्चे पर चुनौतियों का सामना करना पड़ा।"

आपको बता दें कि Yes Bank की डिश टीवी में करीब 25 फीसदी हिस्सेदारी है। Yes Bank कॉरपोरेट गवर्नेंस के मुद्दों का हवाला देते हुए गोयल, नारंग और अन्य सदस्यों को हटाने सहित बोर्ड के पुनर्गठन पर जोर दे रहा है। बैंक का आरोप है कि बोर्ड कुछ अल्पसंख्यक शेयरधारकों के इशारे पर काम कर रहा है।

मध्यभारत का औद्योगिक हब बनेगा भोपाल

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भोपाल। मालवा के पीथमपुर की तरह मध्यभारत के भोपाल को औद्योगिक हब बनाया जाएगा। इसके लिए सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। दरअसल, देश-विदेश के कई बड़े निवेशक भोपाल के आसपास औद्योगिक इकाईयां स्थापित करना चाहते हैं। ऐसे निवेशकों के लिए सरकार ने राजधानी के आसपास के इंडस्ट्रियल एरिया में  निवेश करने के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। जानकारी के अनुसार राजधानी के आसपास रोजगार को बढ़ावा देने के लिए नई इंडस्ट्री लगाई जा रही हैं। इसके लिए 4 हजार 601 करोड़ रु. का निवेश विभिन्न प्रकार की इंडस्ट्री में किया जा रहा है। अकेले बगरोदा इंडस्ट्रियल एरिया में अगले साल कुल 440 इंडस्ट्री के लिए करीब 220 करोड़ रु. का निवेश होगा।
उद्योग विभाग के सूत्रों का कहना है मप्र  में भोपाल के आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश की अपार संभावनाएं है। इसको देखते हुए नई इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने जमीनें देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें लकड़ी, स्टील, यूपी के बुलंदशहर में संचालित खुर्जा की क्रॉकरी इंडस्ट्री, गारमेंट्स, बेकरी प्रोडक्ट में ब्रेड, पाव व अन्य खाद्य सामग्री की फैक्टरी और प्लांट लगाए जाएंगे। इसके लिए करीब 500 एकड़ जमीन दी जा रही है। 230 एकड़ जमीन अचारपुरा और बांदीपुरा में दी जाएगी। जबकि गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में संचालित फर्नीचर और लकड़ी इंडस्ट्री को ही 198 एकड़ जमीन बांदीपुरा में दी जा रही है। इसमें सैकड़ों की संख्या में नई फैक्ट्री और प्लांट लगाए जाएंगे। हर तरह के प्लास्टिक उद्योग के लिए पांच एकड़ जमीन अचारपुरा में दी जा रही है। प्रदेश में रोजगार के मद्देनजर उन उद्योगों को जल्द से जल्द स्थापित करने जमीनें आवंटित की जा रही हैं, जिनसे लोगों को रोजगार उपलब्ध हो सके। भोपाल ही नहीं आस-पास जिलों के लोगों को भी यहां रोजगार मिलेगा। जिला उद्योग केंद्र के अफसरों के साथ मिलकर नए उद्योगों को जमीनें आवंटित करते जा रहे हैं। उम्मीद है कि आने वाले तीन साल के भीतर शहर के अलग-अलग इलाकों में नई इंडस्ट्री लग जाएंगी। नई इंडस्ट्री के लगने के बाद करीब 1 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सकेगा। ग्राम अगरिया छापर में लगभग 200 एकड़ पर औद्योगिक क्लस्टर बनाया जा रहा है। इसमें 450 से अधिक इंडस्ट्री को जगह दी जाएगी। यहां पर करीब 950 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश होगा। करीब 12 हजार से ज्यादा लोगों को यहां रोजगार से जोड़ा जाएगा। 6 अन्य .. क्लस्टर जैसे फूड, प्लास्टिक, फार्मा, मेडिकल डिवाइस, मल्टी प्रोडक्ट एवं रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर स्थापित होंगे। इसमें 600 करोड़ का निवेश और 10 हजार लोगों को रोजगार दिया जाना है। वहीं आनंद नगर, रायसेन रोड में शमां फूड पार्क में 25 करोड़ का निवेश होगा, जिससे 600 को रोजगार मिलेगा। बैरसिया में चित्रांश सेल्स कॉर्पोरेशन द्वारा 6.004 एकड़ जमीन पर फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर की स्थापना की जा रही है।
भोपाल के औद्योगिक क्षेत्र अचारपुरा में 161 इंडस्ट्री लगाने की योजना है। यहां करीब 300 करोड़ निवेश आएगा। यहां पर करीब 1656 लोगो को रोजगार से जोडऩे की योजना है। गोकुलदास एक्सपोर्टस द्वारा रेडीमेड गारमेंटस का निर्माण करने के लिए 40 करोड़ का निवेश किया गया है। यहां पर करीब 2 हजार स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं जेल रोड पर स्थित बड़वई के पास स्थित आईटी पार्क में 207 एकड़ में 119 इंडस्ट्री में करीब 250 करोड़ का निवेश होगा। 15 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा। यहां पर प्रमुख आईटी कंपनियां जैसे टेक्नो टास्क द्वारा 100 करोड़ का निवेश किया जाएगा। अन्य आईटी कंपनी जैसे एचएलबीएस आरटेक, गोल्ड डस्ट, सदर लैंड की प्रमुख इकाइयां निवेश करेंगी। फाइनेंसियल ईयर 2022-23 में गोविंदपुरा, कालीपरेड इंडस्ट्रियल एरिया में 42 नई इंडस्ट्री लगेंगी। इसमें करीब 36 करोड़ का निवेश होगा। लगभग नए 600 लोगो को रोजगार दिया जाएगा। बगरोदा में कुल 440 इंडस्ट्री को जगह दी जाएगी। यहां पर करीब 220 करोड़ निवेश होगा। यहां पर 4155 लोगों को रोजगार दिया जाएगा। सूखी सेवनिया के पास स्वस्तिक लॉजिस्टिक 50 करोड़ रु., आकांक्षा इंडस्ट्रीज 50 करोड़ रु., कोचर इण्ड. 50 करोड़ रु., काकडा ग्रुप 250 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। बीनापुर औद्योगिक क्षेत्र में 50 एकड़ पर बी फाक इंडस्ट्री द्वारा पोट्री निर्माण शुरू किया जा रहा है, यहां पर 150 करोड़ रुपए का निवेश हो सकता है।
बगरोदा में ही 147 एकड़ में व्हीकल इंडस्ट्री के लिए जगह दी जा रही है। यहां पर मार्शल लॉजिस्टिक 25 करोड़ रु., वीवा लॉजिस्टिर 25 करोड़ रु., सनमार्क फूड 25 करोड़ रु., सनफील्ड इंडस्ट्री 50 करोड़ रु., वेल मार्क इण्डस्ट्रीज 25 करोड़ रु., ल्युमेक्स 25 करोड़ रु., महिन्द्रा लॉजिस्टिक 25 करोड़ रु. निवेश करेगी। पहले चरण में यहां पर कमर्शियल 10 हजार गाडिय़ों का प्रोडक्शन हर साल किया जाएगा। इसके लिए करीब 1450 करोड़ निवेश होगा। इससे करीब 5 हजार नए लोगों को रोजगार मिलेगा। भोपाल के आस-पास ग्राम अगरिया में लगभग 100 एकड़, गोकलकुंडी एवं पातालपुर में 80 एकड़ पर एग्रो एंड फूड पार्क औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना की जाना है। राधा शरण गोस्वामी द्वारा ग्राम आदमपुर में 18089 मीटर रकबे में मेडिकल डिवाइस इक्विपमेंट निर्माण के लिए बहुमंजिला औद्योगिक क्लस्टर की स्थापना की जा रही है। इन प्रयासों से भोपाल में फार्मा इंडस्ट्री के क्षेत्र में बढ़ोतरी हो सकेगी। वहीं ज्यादातर फैक्टरी और उद्योगों को चलाने के लिए जमीनें शहर से कुछ दूर दी जा रही हैं। इससे शहर में कम प्रदूषण होगा। गोविंदपुरा से लकड़ी और प्लास्टिक इंडस्ट्री शिफ्ट होने से ही प्रदूषण से काफी राहत मिलेगी। यहां से गंदे पानी की निकासी के लिए बेहतर व्यवस्थाएं की जा रही हैं। बिजली कंपनी लाइटिंग के लिए लाइनें बिछाकर ट्रांसफार्मर लगाएगी।

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