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पितरों का आशीर्वाद जरुरी 

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पितरों के आशीर्वाद से जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं रहती है। घर के बड़े-बुजुर्ग सिर्फ मान-सम्मान चाहते हैं, इनको कभी नहीं भूलना चाहिए। जैसे प्यार पर घर के छोटों का अधिकार होता है वैसे ही पूर्वज सम्मान के अधिकारी होते हैं। खुश होकर ये दिल से अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं लेकिन पितृ जब नाराज हो जाते हैं तो बसा हुआ संसार उजड़ जाता है। पितर उस स्थिति में नाराज होते हैं, जब घर के किसी मांगलिक कार्यक्रम में, किसी शुभ कार्य में उन्हें याद नहीं करते, उनकी अनदेखी करते हैं। 
मान-प्रतिष्ठा का अभाव
पितरों की नाराजगी से व्यक्ति को मान-प्रतिष्ठा के अभाव का सामना करना पड़ सकता है। परिवार के सदस्यों को पग-पग पर समस्याओं से जूझना पड़ता है।
धन का अभाव
पितृदोष होने के कारण धन का अभाव रहता है। व्यक्ति को किसी भी तरह की मदद नहीं मिल पाती। जमा धन बर्बाद हो जाता है। फिजूल खर्ची को वह रोक नहीं पाता है। साथ ही लाख कोशिश के बाद भी कर्ज कभी नहीं उतार पाता।
घर-परिवार में अशांति
पितरों के नाराज होने से घर-परिवार में किसी न किसी कारण झगड़ा होता है। परिवार के सदस्यों में मनमुटाव बना रहता है। घर में अशांति का वातावरण बना रहता है। घर के सदस्यों की शादी में कई प्रकार की समस्याएं आती हैं।
संतान की ओर से कष्ट
पितृदोष के कारण संतान की ओर से कष्ट मिलता है। उनके यहां संतान होने में परेशानी आती है। संतान का स्वास्थ्य खराब रहने या संतान का बुरी संगति में फंसने से परेशानी झेलना होती है।
कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाना
पितृदोष जब होता है तो जाने-अनजाने ऐसी गलती कर बैठते हैं, जिसके कारण कोर्ट-कचहरी का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन की वजह से कोई समस्या हो सकती है, जिससे लंबे समय तक मामला उलझा रहता है।
गंभीर प्रकार का रोग होना
पितृदोष के कारण कई गंभीर व असाध्य रोग घर के सदस्यों को हो जाते हैं। पितर दोष का प्रभाव घर की स्त्रियों पर भी रहता है। इन्हें ऐसी बीमारियों का सामना करना पड़ता है, जो जल्दी ठीक नहीं होती। ऐसी धार्मिक मान्यताएं हैं।
 

स्नान भी बना सकता धनवान

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ग्रहों की स्थिति का आपके जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। अगर यह अनुकूल होते हैं तो आपके जीवन में सब कुछ अच्‍छा चलता है। ग्रहों की दशा बदलने पर व्‍यक्ति को अमीर से गरीब और राजा से रंक बनने में देर नहीं लगती। आज हम आपको बता रहे हैं औषधि स्‍नान के माध्‍यम से 9 ग्रहों के दुष्‍प्रभाव को कम करने के उपाय…
सूर्य के दुष्‍प्रभाव को कम करने के लिए
इलाइची, केसर एपवं गुलहठी, लाल रंग के फूल मिश्रित जल द्वारा स्‍नान करने से सूर्य के दुष्‍प्रभाव कम होते हैं।
चंद्र की पीड़ा के निवारण के लिए
सफेद चंदन, सफेद फूल, सीप, शंख और गुलाब जल मिश्रित पानी से नहाने से आपकी राशि पर चंद्र के दुष्‍प्रभाव कम होते हैं।
ऐसे दूर कर सकते हैं मंगल की पीड़ा
लाल चंदन, लाल फूल, बेल वृक्ष की छाल, जटामांसी, हींग मिश्रित जल से नहाने से मंगल ग्रह के दुष्‍परिणों को भी कम किया जा सकता है।
बुध की कृपा ऐसे कर सकते हैं प्राप्‍त
अगर आप चाहते हैं कि आप पर बुध की कृपा दृष्टि बनी रहे तो आपको अपने स्‍नान के जल में अक्षत, जायफल, गाय का गोबर मिश्रित करके स्‍नान करना होगा।
गुरु के दुष्‍प्रभाव ऐसे करें दूर
सफेद सरसों, दमयंती, गूलर और चमेली के फूल मिलाकर स्‍नान करने से आप पर गुरु के दुष्‍प्रभावों का असर बहुत कम होता है।
शुक्र को ऐसे कर सकते हैं प्रसन्‍न
शुक्र को आपके वैवाहिक जीवन का कारक माना गया है। शुक्र को खुश रखने से आपका वैवाहिक जीवन सदैव खुशहाल रहता है। इसके लिए बस आपको अपने स्‍नान के जल में जायफल, मैनसिल, केसर, इलाइची और मूली के बीज मिलाकर नहाना होगा। ऐसा करने से शुक्र ग्रह के दुष्‍प्रभाव दूर हो सकते हैं।
शनि ग्रह के प्रकोप से ऐसे बचें
शनि को न्‍याय के देवता का सम्‍मान प्राप्‍त है। यह व्‍यक्ति को उसके कर्म के अनुरूप परिणाम देते हैं। अत: हमको अपने कर्म तो दुरुस्‍त रखने ही चाहिए साथ ही कुछ विशेष चीजों को स्‍नान के जल में मिलाकर नहाने से आप शनि के दुष्‍प्रभावों से दूर रह सकते हैं। इन चीजों में सरसों, काले तिल, सौंफ, लोबान, सुरमा, काजल आदि शामिल हैं।
राहु की पीड़ा ऐसे कर सकते है दूर
इसके लिए आप स्‍नान औषधि के रूप में लोबान, कस्‍तूरी, गजदंत आदि सामग्री से मिश्रित जल से स्‍नान करके राहु की पीड़ा को दूर कर सकते हैं।
केतु की पीड़ा ऐसे करें दूर
लाल चंदन और छाग मूत्र मिश्रित जल से स्‍नान करके आप केतु के दुष्‍प्रभावों को अपने आप खत्‍म कर देंगे।
 

अष्टविनायक वरदविनायक मंदिर की अनोखी कथा 

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रायगढ़ जिले के कोल्हापुर में महड़ गांव में है अष्टविनायक तीर्थ का चौथा मंदिर वरदविनायक श्री गणेश मंदिर जहां सालों से एक दीप लगातार जल रहा है। अष्ट विनायक में चौथे गणेश हैं श्री वरदविनायक। यह मंदिर महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के कोल्हापुर क्षेत्र में एक सुन्दर पर्वतीय गांव है महड़। इसी गांव में श्री वरदविनायक मंदिर स्थित है। यहां प्रचलित मान्यता के अनुसार वरदविनायक भक्तों की सभी कामनों को पूरा होने का वरदान प्रदान करते हैं। इस मंदिर में नंददीप नाम का एक दीपक है जो 1892 से लगातार प्रज्जवलित है। वरदविनायक का नाम लेने मात्र से ही सारी कामनाओं को पूरा होने का वरदान प्राप्त होता है। इस मंदिर में माघी चतुर्थी पर विशेष पूजा होती है। इसके अतिरिक्त भाद्रपद की गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक भी विशेष उत्सव होता है जिसे देखने भक्तों का हुजूम उमड़ता है।  
मंदिर से जुड़ी कहानी
पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में एक संतानहीन राजा था। अपने दुख के निवारण के लिए वो ऋषि विश्वामित्र की शरण में गया और सलाह मांगी। ऋषि ने उसे श्री गणेश के एकाक्षरी मंत्र का जाप करने के लिए कहा। राजा ने एेसा ही किया आैर भक्ति भाव गजानन की पूजा करते हुए उनके मंत्र का जाप किया। मंत्र के प्रभाव आैर गणपति के आर्शिवाद से उसका रुक्मांगद नाम का सुंदर पुत्र हुआ जो अत्यंत धर्मनिष्ठ भी था। युवा होने पर एक बार शिकार के दौरान जंगल में घूमते हुए रुक्मांगद, ऋषि वाचक्नवी के आश्रम में पहुंचा। यहां ऋषि की पत्नी मुकुंदा राजकुमार के पुरुषोचित सौंदर्य को देख कर उस पर मोहित हो गर्इ आैर उससे प्रणय याचना की। धर्म के मार्ग पर चलने वाले रुक्मांगद ने इसे अस्वीकार कर दिया आैर तुरंत आश्रम से चला गया। दूसरी आेर ऋषि पत्नी उसके प्रेम में पागल जैसी हो गर्इ। उसकी अवस्था के बारे में जान कर देवराज इंद्र ने इसका लाभ उठाने के लिए रुक्मांगद का भेष धारण कर मुकुंदा से प्रेम संबंध बनाये, जिससे वो गर्भवती हो गर्इ। कुछ समय बाद उसने ग्रिसमाद नामक पुत्र को जन्म दिया। युवा होने पर अपने जन्म की कहानी जान कर इस पुत्र ने मुकुंदा को श्राप दिया कि वो कांटेदार जंगली बेर की झाड़ी बन जाये। इस पर मुकुंदा ने भी अपने बेटे को श्राप दिया कि वो एक क्रूर राक्षस का पिता बनेगा। उसी समय एक आकाशवाणी से पता चला कि मुंकुदा की संतान का पिता वास्तव में इंद्र है। दोनों माता और पुत्र अत्यंत लज्जित हुए और मुकुंदा एक कांटेदार झाड़ी में बदल गयी जबकि उसका पुत्र पुष्पक वन में जाकर श्री गणेश की तपस्या करने लगा। बाद में प्रसन्न हो गणेश जी ने उसे त्रिलोकविजयी संतान का पिता बनने आैर एक वर मांगने का आर्शिवाद दिया। तब ग्रिसमाद ने कहा कि वे स्वयं यहां विराजमान हों और प्रत्येक भक्त की मनोकामना पूर्ण करें। इसके बाद उसने भद्रका नाम से प्रसिद्घ स्थान पर मंदिर का निर्माण किया और श्री गणेश यहां वरदविनायक के रूप में प्रतिष्ठित हुए।  
मंदिर का स्थापत्य 
वर्तमान वरदविनायक मंदिर के बारे में कहा जाता है की इसका निर्माण 1725 में सूबेदार रामजी महादेव बिवलकर ने करवाया था। मंदिर का परिसर सुंदर तालाब के एक किनारे बना हुआ है। ये पूर्व मुखी अष्टविनायक मंदिर पूरे महाराष्ट्र में काफी प्रसिद्ध है। यहां गणपति के साथ उनकी पत्नियों रिद्धि और सिद्धि की मूर्तियां भी स्थापित हैं। मंदिर के चारों तरफ चार हाथियों की प्रतिमायें बनार्इ गर्इ हैं। मंदिर के ऊपर 25 फीट ऊंचा स्वर्ण शिखर निर्मित है। इसके नदी तट के उत्तरी भाग पर गौमुख है। मंदिर के पश्चिम में एक पवित्र तालाब बना है। मंदिर में एक मुषिका, नवग्रहों के देवताओं की मूर्तियां और एक शिवलिंग भी स्थापित है। अष्टविनायक वरदविनायक मंदिर के गर्भगृह में भी श्रद्धालुओं को जाने की अनुमति है।
 

कर्ज से बचने करें ये काम

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पूरे दिन जाने-अनजाने हमसे ऐसे कई कार्य हो जाते हैं, जिनके प्रभाव के बारे में बाद में पता चलता है। शास्त्रों में बताया गया है कि सही समय पर सही कार्य करने से ना सिर्फ भगवान की कृपा मिलती है बल्कि आपकी आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होती है। वहीं कुछ काम ऐसे हैं, जिन्हें भूलकर भी सुबह और शाम के समय नहीं करना चाहिए। इन्हें करने से पैसा और तरक्की दोनों का नाश होता है। यहां जानिए, सुबह शाम कौन से कार्य नहीं करने चाहिए…
नाराज हो जाती हैं मां लक्ष्मी
तुलसी के पत्तों को भूलकर भी शाम के समय नहीं तोड़ना चाहिए। ऐसा करने से मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। पूजा के लिए सुबह ही पत्ते तोड़कर रख लें। शाम के समय तुलसी के पत्ते तोड़ने से आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगती है।
दरिद्रता का होता है वास
शास्त्रों के अनुसार, शाम के समय घर की साफ-सफाई नहीं करनी चाहिए। भूलकर भी घर का कूड़ा शाम को बाहर नहीं फेकना चाहिए। ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा बाहर चली जाएगी। साथ ही घर में दरिद्रता का वास होने से आप पर कर्ज बढ़ सकता है।
भगवान की नहीं होती कृपा
शाम के समय कभी भी नहीं सोना चाहिए, ऐसा करने से पाप लगता है। सुबह और शाम का समय पूजा-ध्यान करने का है। जो लोग इस समय सोते हैं, उन पर भगवान की  कृपा नहीं रहती है। हां, बीमार लोग और बच्चे इस नियम से बाहर होते हैं।
इस दिन करें धन का लेन-देन
धन से संबंधित कोई भी कार्य करना हो तो आप सोमवार या बुधवार को करें। इन दिनों में किया गया धन का लेन-देने फायदेमंद माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से कर्जा धीरे-धीरे खत्म होने लगता है।
इस दिन करें व्रत
लक्ष्मी माता को प्रसन्न करने के लिए सुहागिन महिलाओं को गुरुवार का व्रत करने से लाभ होता है। इस दिन किसी गरीब महिला को सुहाग की सामग्री दान देने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। ऐसा करने से आपके जीवन की सभी समस्याएं धीरे-धीरे खत्म होने लग जाएंगी।
इससे निशान न बनने दें
घर की दीवारों या फर्श पर पेंसिल या चॉक आदि का निशान न बनाने दें। ऐसा माना जाता है कि दीवार और फर्श पर बनी ये रेखाएं घर में नकारात्मकता को बढ़ाती है, जिससे आर्थिक तरक्की बाधित होती है और कर्ज बढ़ने की संभावना रहती है।
रूठ जाती है लक्ष्मी
घर में सुबह की गतिविधियों की शुरुआत झाड़ू लगाने के बाद ही करनी चाहिए। जैसे, पूजा करना, नाश्ता करना। घर में झाड़ू लगा देने से रातभर की नकारात्मक ऊर्जा घर से बाहर चली जाती है। घर में ताजगी का माहौल बनता है, जिससे परिवार के लोग उर्जावान रहते हैं और हर तरह की तरक्की के लिए ऊर्जा ही तो चाहिए।
 

पितरों का आशीर्वाद हासिल करने करते हैं श्राद्ध

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भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन श्राद्ध पक्ष शुरू हो जाते हैं। पितरों का आशीर्वाद हम पर बना रहे इसलिए उनकी आत्मा की शांति के लिए हर साल श्राद्ध करते हैं। उनके आशीर्वाद से घर में सुख-शांति बनी रहती है। 
इतने होते हैं श्राद्ध
निर्णय सिंधु और भविष्य में पुराण में श्राद्ध के 12 प्रकारों का वर्णन मिलता है। ये हैं नित्य, नैमित्तिक, काम्य, वृद्धि, सपिंडन, पार्वण, गोष्ठी, शुद्धयर्थ, कर्मांग, तीर्थ, यात्रार्थ, पुष्ट्यर्थ।
पितरों के प्रसन्न करने के लिए करें यह श्राद्ध
नित्य श्राद्ध: कोई भी व्यक्ति अन्न, जल, दूध, कुश, फूल व फल से हर रोज श्राद्ध करके हर रोज पितरों को प्रसन्न कर सकता है।
नैमित्तिक श्राद्ध: यह श्राद्ध विशेष अवसर पर किया जाता है। जैसे- पिता आदि की मृत्यु तिथि के दिन इसे एकोदिष्ट कहा जाता है।
काम्य श्राद्ध: इस श्राद्ध को किसी कामना विशेष, सिद्धि की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
वृद्धि श्राद्ध: इस श्राद्ध को सौभाग्य प्राप्ति के लिए किया जाता है। इसमें वृद्धि की कामना के लिए किया जाता है।
सपिंडन श्राद्ध: इस श्राद्ध को मृत व्यक्ति के 12वें दिन पितरों से मिलने के लिए किया जाता है। इसे स्त्रियां भी कर सकती हैं।
पार्वण श्राद्ध: पिता, दादा, परदादा और दादी, परदादी के निमित्त किया जाता है। इसे पर्व की तिथि पर ही किया जाता है।
समूह में किया जाता है यह श्राद्ध
गोष्ठी श्राद्ध: इस श्राद्ध को परिवार के सभी लोग मिलकर करते हैं। यह श्राद्ध हमेशा समूह में किया जाता है।
शुद्धयर्थ श्राद्ध: परिवार की शुद्धता के लिए शुद्धयर्थ श्राद्ध किया जाता है।
कर्मांग श्राद्ध: यह श्राद्ध को किसी संस्कार के अवसर पर ही किया जाता है। कर्मांग का अर्थ कर्म के अंग से होता है।
यात्रा के लिए करते हैं यह श्राद्ध
तीर्थ श्राद्ध: यह श्राद्ध हमेशा तीर्थ पर ही किया जाता है।
यात्रार्थ श्राद्ध: यात्रा की सफलता के लिए यात्रार्थ श्राद्ध किया जाता है।
पुष्ट्यर्थ श्राद्ध: आर्थिक उन्नति में बढ़ोतरी, अच्छे स्वास्थ्य के लिए पुष्टि के निमित्त जो श्राद्ध किए जाते हैं वे पुष्ट्यर्थ श्राद्ध कहलाते हैं।
अमावस्या को किया जाता है इनका श्राद्ध
जिन लोगों की मृत्यु के दिन की सही-सही जानकारी न हो, उनका श्राद्ध अमावस्या तिथि को करना चाहिए। सांप काटने से मृत्यु और बीमारी में या अकाल मृत्यु होने पर भी अमावस्या तिथि को श्राद्ध किया जाता है। जिनकी आग से मृत्यु हुई हो या जिनका अंतिम संस्कार न किया जा सका हो, उनका श्राद्ध भी अमावस्या को करते हैं।
 

राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन (22 सितम्बर 2022)

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  • मेष राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति, मानसिक विभ्रम, किसी घटना का शिकार होने से बचें।
  • वृष राशि – असमंजस की स्थिति क्लेशप्रद रखे, विरोधी तत्व परेशान करेंगे ध्यान रखें।
  • मिथुन राशि – समय की अनुकूलता से लाभांवित होंगे, विरोधी तत्व परेशान अवश्य करेंगे।
  • कर्क राशि – इष्ट-मित्र सुखवर्धक हों, व्यावसायिक क्षमता अनुकूल होगी, समय का ध्यान रखें।
  • सिंह राशि – कुटुम्ब की समस्यायें सुलझें, स्त्री-वर्ग से हर्ष-उल्लास हो, कार्य पर ध्यान दें।
  • कन्या राशि – अर्थ-लाभ, कुटुम्ब की समस्यायें सुलझें, स्त्री-वर्ग से हर्ष-उल्लास होगा।
  • तुला राशि – विवादग्रस्त हेने से बचें अन्यथा संकट में फंस सकते हैं, धैर्य से काम लें।
  • वृश्चिक राशि – अधिकारी वर्ग सहायक बनेंगे, कार्यवृत्ति में सुधार होगा, सफलता मिलेगी।
  • धनु राशि – व्यर्थ विवाद, अनावश्यक विभ्रम, धन का व्यय, स्थिति कष्टप्रद बनेगी।
  • मकर राशि – योजनायें फलीभूत हों, कार्य कुशलता से संतोष, समृद्धि के साधन जुटायें।
  • कुंभ राशि – विरोधी तत्व परेशान करेंगे, व्यर्थ विभ्रम, मानसिक बेचैनी बनेगी।
  • मीन राशि – सोचे हुये कार्य समय पर पूरे होंगे किन्तु अधिक ढीलेपन से परेशानी होगी।
     

पूर्व क्षेत्र कंपनी ने अनुकंपा नियुक्तियों में दी बड़ी राहत

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भोपाल : म.प्र.पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा दिवंगत बिजली कर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने में बड़ी राहत दी गई है। यदि दिवंगत बिजली कर्मी के परिवार का आश्रित सदस्य 12 वीं कक्षा उत्तीर्ण है, तो उसे कार्यालय सहायक के तृतीय श्रेणी के पद पर नियमानुसार अनुकंपा नियुक्ति दे दी जायेगी। इस पद के लिए आवश्यक योग्यता हासिल करने के लिए उसे तीन वर्ष का समय भी दिया जायेगा। उल्लेखनीय है कि पहले आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवश्यक योग्यता प्राप्त करने के लिए तीन वर्ष का समय दिया जाता था तथा योग्यता प्राप्त करने के बाद आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति दी जाती थी। प्रदेश की तीनों वितरण कंपनियों में यह सुविधा सर्वप्रथम पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा दी जा रही है।

कंपनी के एम.डी. श्री अनय द्विवेदी ने बताया कि बिजली कर्मियों के दिवंगत हो जाने पर उनके आश्रितों को भरण पोषण के लिए तत्काल नौकरी की जरूरत रहती है। पूर्व में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवश्यक योग्यता हासिल करने के लिए उन्हें तीन वर्षो तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे अनुकंपा नियुक्ति का उद्वेश्य पूर्ण नहीं हो रहा था। श्री द्विवेदी ने कहा कि कंपनी के इस निर्णय से दिवंगत कर्मियों के परिवार को निश्चित रूप से राहत मिलेगी तथा वे निर्धारित की गई अवधि में वांक्षित योग्यता हासिल करने में भी सक्षम होंगे।

कंपनी द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार दिवंगत कंपनी सेवक के आश्रित को कार्यालय सहायक श्रेणी-तीन के पद पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए कम्प्यूटर डिप्लोमा तथा कम्प्यूटर टाइपिंग दक्षता प्रमाण-पत्र परीक्षा मान्यता प्राप्त संस्था से उत्तीर्ण किए जाने के लिए तीन वर्ष का समय दिया जायेगा। यह प्रावधान सभी लंबित पात्र आवेदनों पर भी लागू होंगे तथा लंबित आवेदनों का निराकरण संशोधित अनुकंपा नियुक्ति नीति-2018 के प्रावधानों के अनुरूप किया जायेगा।

विदित हो कि कंपनी द्वारा अनुकंपा नियुक्ति के लिए प्राप्त 939 पात्र आवेदनों में से 552 आवेदनों का निराकरण करते हुए तृतीय श्रेणी के पद पर 265 एवं चतुर्थ श्रेणी के पद पर 287 अनुकंपा नियुक्तियाँदी जा चुकी हैं। शेष 387 आवेदनों पर कार्यवाही की जा रही है।
 

प्रोजेक्ट मुस्कान से लौटा बच्चों का स्वास्थ्य और माँ की मुस्कान

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भोपाल : सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण एवं बुरहानपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री प्रेमसिंह पटेल ने जिला चिकित्सालय बुरहानपुर में संचालित नवीन पोषण पुनर्वास केन्द्र का सोमवर को निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। श्री पटेल ने केन्द्र से उपचार के बाद स्वस्थ हुए 30 बच्चों को खिलौने और मेडिकल किट के साथ उन्हें घर रवाना किया। माताओं और बच्चों का उत्साह देखते ही बनता था। श्री पटेल ने प्रोजेक्ट मुस्कान में किये जा रहे कार्यों पर प्रसन्नता व्यक्त की और कलेक्टर श्री प्रवीण सिंह सहित पूरी टीम को बधाई दी।

मंत्री श्री पटेल ने माताओं से कहा कि वे स्वस्थ हुए बच्चों के पोषण आहार और साफ-सफाई का आगे भी ध्यान रखें। केन्द्र में डॉक्टरों और स्टाफ द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जो समझाईश दी गई है, उसका प्रचार-प्रसार अपने आस-पड़ोस और रिश्तेदारी में भी करें, जिससे हर बच्चा स्वस्थ रहे और उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़े।

कलेक्टर श्री प्रवीण सिंह ने बताया कि जब ये माताएँ 14 दिन पहले अपने बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्र लेकर आयी थीं, तो उनके चेहरे पर चिंता और घबराहट की लकीरें साफ देखी जा सकती थीं। आज इनके चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान देखने को मिल रही है, जो प्रोजेक्ट मुस्कान के नाम और उद्देश्य को सार्थक बना रहीं है।
 

150 करोड़ की लागत से लगेंगे ऑटोमेटेड मोटर फिटनेस सेंटर : परिवहन मंत्री राजपूत

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भोपाल : परिवहन एवं राजस्व मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश के 10 संभागीय मुख्यालयों पर लगभग 150 करोड़ रूपये की लागत से कॉमर्शियल वाहनों की फिटनेस के लिये ऑटोमेटिव व्हीकल फिटनेस सेंटर की स्थापना की जाना प्रस्तावित है। सेंटर्स की स्थापना से फिटनेस प्रमाण-पत्र देने के पूर्व वाहनों की फिजिकल चेकिंग एक ही स्थान पर हो जायेगी। वाहन दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार द्वारा सभी राज्यों में ऑटोमेटिव मोटर फिटनेस सेंटर की स्थापना के निर्देश दिये हैं।

परिवहन मंत्री श्री राजपूत मंगलवार को मंत्रालय में प्रमुख सचिव परिवहन श्री फैज अहमद किदवई, परिवहन आयुक्त श्री संजय कुमार झा एवं कंसलटेंसी कम्पनी आई-केट के अधिकारियों के साथ प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि वर्तमान में वाहनों का फिटनेस मेन्युअली किया जा रहा है।

संस्था द्वारा अवगत कराया गया कि एक सेंटर की स्थापना पर लगभग 15 करोड़ रूपये का व्यय होगा। एक सेंटर की स्थापना से एक साल में लगभग 40 हजार वाहनों की फिटनेस एवं जाँच की जा सकेगी। फिटनेस सेंटर में वाहन की चेकिंग के दौरान पॉल्यूशन, ऑइल लीकेज, ब्रेक, लाइट्स, व्हील अलाइनमेंट, स्पीड गवर्नर आदि की मशीनों से जाँच के बाद ही फिटनेस प्रमाण-पत्र दिया जायेगा।
 

मुख्यमंत्री चौहान ने पंडित श्रीराम शर्मा की जयंती पर नमन किया

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भोपाल : मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने गायत्री परिवार के संस्थापक आध्यात्मिक लेखक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की 111वीं जयंती पर मुख्यमंत्री निवास सभाकक्ष में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर नमन किया।
 

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