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बड़ा साइबर फ्रॉड उजागर! फर्जी कॉल सेंटर पर छापा, 20 मोबाइल और 35 सिम जब्त

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नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल को एक बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने निर्यातकों (एक्सपोर्टर्स) से ठगी करने वाले एक बहुत बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी कर इसके मालिक समेत कुल 18 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह शातिर गिरोह भोले-भले कारोबारियों को विदेशी खरीदार (बायर) और जरूरी एक्सपोर्ट सर्टिफिकेट दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी कर रहा था।

वेबसाइट और झूठे वादों का जाल

इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की जांच के बाद हुआ। यह गिरोह INDIA2EXPORTS.COM नाम की एक फर्जी वेबसाइट चला रहा था। इसके जरिए वे निर्यातकों को झांसा देते थे कि वे उन्हें विदेशों से बड़े-बड़े आर्डर दिलाएंगे। शुरुआत में वे रजिस्ट्रेशन के नाम पर 5,000 रुपये लेते थे, और फिर सर्विस पैकेज के नाम पर 19,780 रुपये ऐंठ लेते थे।

फर्जी विदेशी खरीदार बनकर ठगी

पीड़ितों को पूरी तरह अपने जाल में फंसाने के लिए यह गिरोह इंटरनेशनल व्हाट्सएप नंबरों का इस्तेमाल करता था। आरोपी खुद ही विदेशी खरीदार बनकर निर्यातकों से चैटिंग करते थे, ताकि उन्हें लगे कि सच में कोई विदेशी डील हो रही है। इसके बाद ग्लोबल जीएपी और अन्य जरूरी सर्टिफिकेट दिलाने के बहाने वे पीड़ितों से 41,300 रुपये और वसूलते थे। जैसे ही पैसे उनके खाते में आते, वे अपना फोन बंद कर संपर्क तोड़ देते थे। अब तक ऐसे 19 मामलों में यह गिरोह करीब 10.57 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है।

फर्जी कॉल सेंटर पर छापा और गिरफ्तारियां

नई दिल्ली जिले की साइबर पुलिस टीम ने पुख्ता जानकारी के बाद इस फर्जी कॉल सेंटर पर अचानक छापा मारा। इस दौरान पुलिस ने कॉल सेंटर के मालिक प्रदीप कुमार और मुख्य आरोपी सम्मी कुमार गिरी को धर दबोचा। इनके साथ ही मौके पर मौजूद 16 टेलीकॉलर्स को भी गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 14 महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं। पुलिस ने मौके से 20 मोबाइल फोन, 35 सिम कार्ड, 6 लैपटॉप, 9 सीपीयू और डेबिट कार्ड बरामद किए हैं।

पुलिस की कारोबारियों को सतर्क रहने की सलाह

पुलिस अब बरामद किए गए डिजिटल सामानों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह ने और कितने लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है। इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने सभी निर्यातकों और व्यापारियों को अलर्ट रहने की सलाह दी है। पुलिस का कहना है कि किसी भी ऑनलाइन सर्विस देने वाली कंपनी को पैसा भेजने से पहले उसकी अच्छी तरह जांच-पड़ताल कर लें। अगर कोई भी व्यक्ति ऐसी साइबर धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो वह तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज कराए।

धर्म परिवर्तन की चर्चा: आजाद पठान ने अपनाया सनातन, बताया फैसले का कारण

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खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहाँ एक मुस्लिम युवक ने अपना पुराना धर्म छोड़कर सनातन धर्म अपना लिया है। घर वापसी करने के बाद युवक ने अपना नाम बदल लिया है और कहा है कि वह अपनी माँ की इच्छा और खुद की गहरी आस्था के चलते सनातन धर्म में वापस लौटा है। युवक का कहना है कि अब वह जीवनभर इसी धर्म के रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन करेगा।

वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान से हुई घर वापसी

यह पूरी प्रक्रिया शहर के प्रसिद्ध महादेवगढ़ मंदिर परिसर में संपन्न हुई। मंदिर के संरक्षक अशोक पालीवाल ने बताया कि युवक आजाद पठान ने पूरी धार्मिक विधि-विधान के साथ सनातन धर्म ग्रहण किया, जिसके बाद उनका नया नाम 'अजय कश्यप' रखा गया है। मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार किया गया। इसके साथ ही दस विधि स्नान और सनातन परंपरा के अनुसार सभी जरूरी संस्कार करवाकर युवक की घर वापसी कराई गई। इस खास मौके पर मंदिर में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौजूद रहे।

माता-पिता की अलग पृष्ठभूमि और माँ का आग्रह

मंदिर संरक्षक अशोक पालीवाल के अनुसार, अजय कश्यप (आजाद पठान) की माँ हिंदू हैं और उनके पिता मुस्लिम थे। बताया गया कि युवक की माँ पहले लव जिहाद का शिकार हुई थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कभी अपना धर्म नहीं बदला और बाद में अपने पति से तलाक ले लिया। माँ की इसी इच्छा और आग्रह पर उनके बेटे ने भी सनातन धर्म में आने का बड़ा फैसला लिया। अजय कश्यप ने समाज के सामने खुलकर कहा कि वह अपनी माँ के सम्मान और हिंदू धर्म के प्रति अपनी श्रद्धा के कारण यह कदम उठा रहे हैं।

धरती हिली, इमारतें गिरीं! वेनेजुएला में भूकंप से हजारों जानें खतरे में

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काराकास। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला से एक बहुत ही दुखद और बड़ी खबर सामने आ रही है। यहाँ प्रकृति का ऐसा कहर टूटा है जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। वेनेजुएला में एक के बाद एक आए दो भीषण भूकंपों ने भयंकर तबाही मचाई है, जिससे चारों तरफ सिर्फ मलबे का ढेर और चीख-पुकार सुनाई दे रही है।

मात्र एक मिनट में दो तगड़े झटके

इस प्राकृतिक आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ मात्र एक मिनट के भीतर दो बेहद शक्तिशाली भूकंप आए। पहले झटके की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.1 मापी गई, और लोग संभल पाते उससे पहले ही 7.5 तीव्रता का दूसरा विनाशकारी झटका आ गया। इन दोनों बड़े झटकों ने संभलने का जरा सा भी मौका नहीं दिया और देखते ही देखते हंसते-खेलते शहर मलबे में तब्दील हो गए।

चारों तरफ भारी तबाही और नुकसान

भूकंप के इन तेज झटकों के कारण देश में भारी नुकसान हुआ है। कई गगनचुंबी इमारतें, दफ्तर और सैकड़ों मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं। इस भीषण त्रासदी में अब तक 10 हजार से भी अधिक लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। मलबे के नीचे अभी भी भारी संख्या में लोग दबे हुए हैं, जिससे जान-माल का नुकसान और ज्यादा बढ़ने का खतरा बना हुआ है।

युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य जारी

इस महाविनाश के बाद प्रभावित इलाकों में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियां युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। मलबे को हटाकर दबे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है, जहाँ डॉक्टरों की टीमें चौबीसों घंटे घायलों के इलाज में जुटी हुई हैं। इस मुश्किल घड़ी में पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है।

राममंदिर चढ़ावे पर घमासान, संजय सिंह के दावों के बीच VHP ने मांगी FIR

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अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा और चंदा चोरी का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष की तरफ से लगातार बेहद गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। इसी बीच, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट पेश कर दी है, जिसमें साफ कहा गया है कि इस पूरे मामले में कुछ भी 'क्लीन' नहीं है। एसआईटी ने अब अपनी जांच का दायरा काफी बड़ा कर दिया है। जांच टीम अब उन सभी लोगों से सबूत, रिकॉर्ड और दस्तावेज इकट्ठा करने में जुट गई है, जिन्होंने चंदा चोरी को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे।

आप सांसद संजय सिंह को एसआईटी का समन

राम मंदिर चंदा चोरी मामले में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि राम मंदिर के नाम पर कई सौ करोड़ रुपये की चंदा चोरी की गई है। इसी सिलसिले में एसआईटी ने उन्हें पूछताछ और सबूत पेश करने के लिए बुलाया है। संजय सिंह आज गुरुवार को सुबह 11 बजे जांच टीम के सामने पेश होंगे।

संजय सिंह के पास घोटाले के पुख्ता सबूत

सांसद संजय सिंह का दावा है कि उनके पास दान चोरी और अयोध्या में जमीन की खरीद-फरोख्त में हुए बड़े घोटाले से जुड़े कई पुख्ता सबूत मौजूद हैं। पिछले दिनों उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि अगर जांच एजेंसियां उनसे ये सबूत मांगेंगी, तो वह इन्हें सौंपने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसी को देखते हुए एसआईटी ने फैसला किया कि जो भी व्यक्ति इस मामले से जुड़े साक्ष्य देना चाहता है, वह जांच टीम के सामने आकर दे सकता है।

चंपत राय ने साधी चुप्पी, रिकॉर्ड देने से किया इनकार

चंदा चोरी के गंभीर आरोपों से घिरे राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साध ली है। उन्होंने एसआईटी जांच का हवाला देते हुए ट्रस्ट की आमदनी, खर्च, दान और बैंक खातों का कोई भी रिकॉर्ड देने से साफ इनकार कर दिया है। ट्रस्ट के इस रवैये से मामले में सस्पेंस और ज्यादा बढ़ गया है।

चंपत राय समेत 17 लोगों पर केस दर्ज करने की सिफारिश

एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में ट्रस्ट के सचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव समेत कुल 17 लोगों को आरोपी माना है। एसआईटी ने इन सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की सिफारिश भी की है। वहीं दूसरी तरफ, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी राम मंदिर चंदा चोरी केस में जल्द से जल्द एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

क्या आपके घर का टॉयलेट सही दिशा में है? वास्तु के अनुसार जानें कौन-सी दिशा मानी जाती है शुभ

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घर बनवाते समय लोग अक्सर रसोई, बेडरूम और पूजा घर की दिशा पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन बाथरूम और टॉयलेट की लोकेशन को लेकर उतने सतर्क नहीं रहते. कई बार फ्लैट या छोटे घरों में जगह की कमी के कारण बाथरूम ऐसी दिशा में बन जाता है, जो वास्तु मान्यताओं के अनुसार शुभ नहीं मानी जाती. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में घर की हर दिशा को किसी न किसी ग्रह और तत्व से जोड़ा गया है.

माना जाता है कि अगर बाथरूम गलत दिशा में हो, तो इसका असर घर के सदस्यों की सेहत, रिश्तों, करियर और मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है. हालांकि, इन मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन देश के कई हिस्सों में लोग आज भी इन नियमों का पालन करते हैं और वास्तु उपायों पर भरोसा जताते हैं.
कौन-सी दिशाएं मानी जाती हैं बाथरूम के लिए अनुकूल?
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की 16 दिशाओं में से कुछ दिशाएं ऐसी हैं, जहां बाथरूम या टॉयलेट बनाना अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है.

दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम-उत्तर-पश्चिम का महत्व
वास्तु विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा को वायु तत्व और परिवर्तन का क्षेत्र माना जाता है. वहीं, दक्षिण की ओर स्थित कुछ हिस्सों को अपशिष्ट और निकासी से जोड़ा जाता है. इसी वजह से कई वास्तु सलाहकार इन क्षेत्रों में टॉयलेट निर्माण को उपयुक्त मानते हैं. हालांकि, किसी भी घर की दिशा तय करते समय उसकी बनावट, प्रवेश द्वार, कमरे और परिवार के सदस्यों की कुंडली जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाता है.

इन दिशाओं में टॉयलेट बनाने से बचने की सलाह
उत्तर-पूर्व दिशा को क्यों माना जाता है संवेदनशील?
वास्तु और ज्योतिष में उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण को बेहद पवित्र माना गया है. यह दिशा जल तत्व, आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से जुड़ी मानी जाती है. मान्यता है कि अगर इस दिशा में टॉयलेट बना हो, तो घर में मानसिक तनाव, आर्थिक रुकावटें और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं. हालांकि, कुछ विशेषज्ञों द्वारा बताए जाने वाले गंभीर दावों, जैसे किसी खास बीमारी का सीधा संबंध, को लेकर कोई वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है.
उत्तर-पश्चिम दिशा और करियर पर प्रभाव
कुछ वास्तु मान्यताओं के अनुसार, उत्तर-पश्चिम दिशा में गलत तरीके से बना टॉयलेट व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता और पेशेवर स्थिरता को प्रभावित कर सकता है. माना जाता है कि मेहनत के बावजूद सफलता टिक नहीं पाती और बार-बार बाधाएं आती हैं.

दक्षिण-पश्चिम दिशा और रिश्तों की चुनौतियां
वास्तु शास्त्र में दक्षिण-पश्चिम दिशा को स्थिरता और पारिवारिक संबंधों का क्षेत्र माना गया है. कई ज्योतिषियों का मानना है कि इस दिशा में टॉयलेट होने से वैवाहिक जीवन में तनाव बढ़ सकता है. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि रिश्तों में आने वाली समस्याओं के पीछे कई सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत कारण भी हो सकते हैं. केवल वास्तु को इसका एकमात्र कारण मानना उचित नहीं होगा.
अगर बाथरूम की दिशा बदलना संभव न हो तो क्या करें?
आज के समय में अपार्टमेंट और छोटे घरों में बाथरूम की दिशा बदलना आसान नहीं होता. ऐसे में वास्तु विशेषज्ञ कुछ आसान उपाय सुझाते हैं.

पीले रंग का इस्तेमाल
दक्षिण-पश्चिम दिशा में बने टॉयलेट के लिए कई विशेषज्ञ पीले या हल्के भूरे रंग के उपयोग की सलाह देते हैं. माना जाता है कि ये रंग पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं और नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं.
साफ-सफाई का रखें खास ध्यान
ज्योतिष और वास्तु दोनों में स्वच्छता को सकारात्मक ऊर्जा का आधार माना गया है. बाथरूम को हमेशा साफ, हवादार और सूखा रखने की सलाह दी जाती है.
नियमित रूप से करें ऊर्जा संतुलन
घर में नमक के पानी से पोछा लगाना, सुगंधित धूप या कपूर जलाना और पर्याप्त रोशनी बनाए रखना भी कई लोग सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखते हैं.
वास्तु उपायों पर कितना भरोसा करें?
विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तु उपायों को जीवन की समस्याओं का अंतिम समाधान नहीं समझना चाहिए. अगर परिवार में स्वास्थ्य, रिश्तों या आर्थिक चुनौतियां हैं, तो उनके वास्तविक कारणों को समझना और जरूरी विशेषज्ञों से सलाह लेना ज्यादा महत्वपूर्ण है. वास्तु और ज्योतिष भारतीय परंपरा का हिस्सा हैं. इन पर विश्वास करना या न करना पूरी तरह व्यक्ति की निजी आस्था पर निर्भर करता है.
घर का वास्तु कई लोगों के लिए मानसिक सुकून और सकारात्मकता का माध्यम हो सकता है. लेकिन किसी भी परेशानी को केवल दिशाओं और ग्रहों से जोड़ने के बजाय संतुलित सोच अपनाना जरूरी है. सही योजना, साफ-सफाई और सकारात्मक माहौल किसी भी घर की सबसे बड़ी ताकत होते हैं.

गंगा दशहरा कब? हर की पौड़ी पर स्नान से खत्म हो जाते हैं जन्म मरण के बंधन

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वैदिक पंचांग के अनुसार एक संवत में कुछ खास तिथियों का आगमन होता है. खास तिथियों में मोक्ष प्राप्त करने के लिए किए गए धार्मिक कार्यों का संपूर्ण फल प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है. एक संवत में 12 अमावस्याएं, 12 पूर्णिमा, एकादशी, प्रदोष, गंगा सप्तमी, गंगा दशहरा आदि कई शुभ तिथियों का आगमन होता है. इन खास तिथियां पर यदि कोई भी धार्मिक कार्य या धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा पूर्वक किया जाए तो उस पर्व का विशेष फल प्राप्त होता है. ज्येष्ठ माह में होने वाले गंगा दशहरे का पर्व हिंदू धर्म के लोग बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं. संवत 2083 में ज्येष्ठ मास में अधिक मास का आगमन हुआ था, जिस कारण अधिक मास के शुक्ल पक्ष में गंगा दशहरे पर्व का आगमन पंचांग के अनुसार हुआ था, लेकिन ज्येष्ठ शुद्ध शुक्ल पक्ष में भी दशमी तिथि का आगमन होगा.

करना क्या होगा
पंचांग की गणना के अनुसार, ज्येष्ठ शुद्ध शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा स्नान का महत्व बताया गया है. इसकी ज्यादा जानकारी करने के लिए हमने शास्त्रों की जानकार पंडित श्रीधर शास्त्री से बातचीत की. उन्होंने कहा कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरे का पर्व मनाया जाता है, लेकिन ज्येष्ठ माह में अधिक मास आने से गंगा दशहरे का पर्व 26 मई को मनाया गया था. ज्येष्ठ शुद्ध शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि का आगमन 24 जून की सुबह 9:37 बजे से शुरू होगा जो 25 जून की सुबह 8:46 तक रहेगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हिंदू धर्म में किसी भी पर्व का सबसे अधिक फल उसकी उदया तिथि में मिलता है. 24 जून को दशमी तिथि सूर्य निकलने के बाद शुरू होगी जबकि 25 जून में सूर्य का उदय दशमी तिथि में होने के कारण गंगा स्नान का संपूर्ण फल प्राप्त होगा.
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10 सुखों की प्राप्ति
पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि दशमी तिथि का आगमन भले ही 24 जून सुबह 9:37 से होगा, लेकिन इसका संपूर्ण फल 25 जून को गंगा स्नान करने से ही मिलेगा. ज्येष्ठ शुद्ध शुक्ल पक्ष में दशमी तिथि को हरिद्वार हर की पौड़ी के ब्रह्म कुंड घाट, मालवीय घाट, सुभाष घाट, अस्थि घाट, कुशा घाट, नील धारा यानी नील घाट पर 25 जून को ब्रह्म मुहूर्त से लेकर पूरे दिन स्नान करने पर गंगा दशहरे के समान ही 10 सुखों की प्राप्ति होगी. वह आगे बताते हैं कि गंगा स्नान करना हो या गंगा के विशेष घाटों पर पूजा आराधना, जाप आदि का सबसे अधिक महत्व धर्म नगरी हरिद्वार में है. गंगा गोमुख से निकलकर पहाड़ों से होते हुए समतल क्षेत्र हरिद्वार में सबसे पहले प्रवेश करती है. हर की पौड़ी पर ब्रह्मा की तपस्थली होने और अमृत की बूंदें छलक कर गिरने के कारण हरिद्वार में गंगा का महत्व सबसे अधिक होता है.

 

खाना खाने से पहले या बाद में… कब जाना चाहिए मंदिर? जानिए क्या कहते हैं हमारे शास्त्र और नियम

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भारतीय संस्कृति में मंदिर जाना सिर्फ़ पूजा-पाठ या रस्म-रिवाज़ निभाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे आध्यात्मिक शांति और ईश्वर के प्रति भक्ति का प्रतीक भी माना जाता है. कई लोग सोचते हैं कि मंदिर जाने का सही समय क्या है क्या खाना खाने के बाद जाना चाहिए, या खाली पेट भगवान के दर्शन करना ज़्यादा शुभ माना जाता है? हमारे धर्मग्रंथों और धार्मिक परंपराओं में इस बारे में कुछ खास नियम बताए गए हैं, और उनका पालन करना शुभ माना जाता है…

खाने से पहले मंदिर जाना सबसे अच्छा क्यों माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सुबह नहाने के बाद और कुछ खाने से पहले मंदिर जाकर सबसे अच्छा माना जाता है. शास्त्रों में कहा गया है कि जब कोई व्यक्ति शुद्ध शरीर और शांत मन से अभिषेक (भगवान को स्नान कराने की रस्म) करता है, तो पूजा का आध्यात्मिक फल अधिक मिलता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि बहुत से लोग खाली पेट मंदिर की रस्में निभाते हैं और उसके बाद ही भोजन करते हैं.
क्या खाना खाने के बाद मंदिर जाना अशुभ माना जाता है?
ऐसा नहीं है कि खाना खाने के बाद मंदिर जाना पूरी तरह से गलत है. अगर किसी कारणवश आप सुबह मंदिर नहीं जा पाते हैं, तो आप खाना खाने के बाद भी भगवान का आशीर्वाद ले सकते हैं. हालांकि, शास्त्र मंदिर से लौटने के तुरंत बाद भारी भोजन करने से मना करते हैं. खाने के बाद कुछ समय का अंतर रखना बेहतर माना जाता है ताकि शरीर और मन दोनों शांत अवस्था में रहें.

मंदिर जाने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
-मंदिर जाने से पहले स्नान करना और साफ कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.
-मन में गुस्सा, लालच या नकारात्मक विचार नहीं रखने चाहिए.
-नशीली चीज़ें या मांसाहारी भोजन करने के तुरंत बाद मंदिर जाने से बचना चाहिए.
-मंदिर में प्रवेश करते समय श्रद्धा और एकाग्रता बनाए रखना ज़रूरी माना जाता है.
-दर्शन (भगवान के दर्शन) से पहले हाथ-पैर धोना भी एक पुण्य का काम माना जाता है.

शास्त्र क्या कहते हैं?
हिंदू शास्त्र पूजा के एक ज़रूरी हिस्से के रूप में शारीरिक और मानसिक पवित्रता के महत्व पर ज़ोर देते हैं. इसलिए, सुबह नहाने के बाद और खाना खाने से पहले मंदिर जाना सबसे अच्छा माना जाता है. लेकिन ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा और भक्ति को सबसे ज़्यादा महत्व दिया जाता है. अगर मन पवित्र हो, तो कोई भी कभी भी भगवान का आशीर्वाद ले सकता है.

घेरे हो आर्थिक तंगी या जोंख की तरह चिपक गया हो असाध्य रोग…निर्जला एकादशी दिलाएगी मुक्ति

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एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है. एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा आराधना करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है. धार्मिक ग्रंथों, वेदों-पुराणों के अनुसार एक संवत में 24 एकादशियों का आगमन मानव कल्याण के लिए होता है. एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करने पर जीवन में चल रही सभी समस्याएं खत्म हो जाती हैं और भगवान विष्णु की कृपा सदैव बनी रहती है. सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी का अपना ही महत्व बताया गया है. सबसे कठिन और सभी एकादशियों का फल प्रदान करने वाली निर्जला एकादशी विशेष नक्षत्र और योग में होने के कारण जातकों को इसका दोगुना लाभ मिलेगा.

सबसे ज्यादा ये वाली खास
ज्येष्ठ शुद्ध शुक्ल पक्ष में होने वाली निर्जला एकादशी के महत्व के बारे में पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि एक संवत में 24 एकादशी होती है, जिसमें 12 एकादशी कृष्ण पक्ष और 12 एकादशी शुक्ल पक्ष में आती हैं. सभी 24 एकादशियों में ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में होने वाली निर्जला एकादशी का सबसे अधिक महत्व बताया गया है. यदि किसी कार्य में बाधा आ रही है, बनते-बनते कार्य बिगड़ रहे हैं, जीवन में आर्थिक तंगी, असाध्य रोग आदि से परेशान हैं तो निर्जला एकादशी का व्रत विधि पूर्वक करने से सब अनुकूल हो जाता है. साल 2026 में निर्जला एकादशी 25 जून गुरुवार को होगी. 25 जून की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके व्रत का संकल्प करें और पूरे दिन निर्जला रहकर मन ही मन भगवान विष्णु की आराधना करने से लाभ की प्राप्ति होती है.

करना क्या-क्या होगा
पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि संयोग से निर्जला एकादशी का आगमन शिव योग और स्वाति नक्षत्र में हो रहा है. शिव योग और स्वाति नक्षत्र में धार्मिक अनुष्ठान करने का संपूर्ण से अधिक कई गुना फल प्राप्त होता है. एकादशी तिथि और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए विष्णु भगवान की आराधना, उनके स्तोत्र, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, बीज मंत्र आदि का जाप करने से धार्मिक लाभ होगा. इस दिन व्रत का पालन शास्त्रों में बताई गई विधि अनुसार करें. संयोग से निर्जला एकादशी गुरुवार को होगी, जिस कारण इस व्रत को करने से साधकों को ग्रह बाधा, ग्राहक कलेश, कार्यों में रुकावट आदि सभी से निजात मिलेगी और सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाएगा.
 

राशिफल 25 जून 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा

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  • मेष राशि :- हर्ष, यात्रा, राजसुख, सफलता, हानि, खर्च अधिक होगा, व्यर्थ का विरोध होगा।
  • वृष राशि :- विरोध, व्यय, कष्ट, अशांति, कार्यलाभ की स्थिति संतोषप्रद बनी ही रहेगी।
  • मिथुन राशि :- व्यापार में क्षति, यात्रा, विवाद, गृहकार्य, राजकार्य, व्यवसाय पर ध्यान दें।
  • कर्क राशि :- भूमि व राज-लाभ, वायु विकार का योग है, शरीर कष्ट होगा, ध्यान दें।
  • सिंह राशि :- वाहनादि का भय, कष्ट, राजसुख, यात्रा, शिक्षा की स्थिति में विकास होगा।
  • कन्या राशि :- व्यय, प्रवास, विरोध, भूमि-लाभ, उद्योग-व्यापार में अड़चने आयेंगी।
  • तुला राशि :- कार्यसिद्धी, लाभ, विरोध, प्रगति के साथ कुछ अच्छे कार्य भी होंगे, संतान से प्रसन्नता मिले।
  • वृश्चिक राशि :- रोगभय, मातृ-सुख, कष्ट, यात्रा, गृहकार्य व राजकार्य में रुकावट बनेगी।
  • धनु राशि :- लाभ, धर्म रुचि, हर्ष, यश, यात्रा कार्य में रुकावट बढ़ेगी, ध्यान दें।
  • मकर राशि :- विरोध, व्यापार में हानि, शरीर खर्च, धार्मिक खर्च बढ़ेंगे, कार्य में रुकावट होगी।
  • कुंभ राशि :- व्यय, प्रवास लाभ, प्रतिष्ठा, रोग, सामाजिक कार्यों में रुकावट की अनुभूमि होगी।
  • मीन राशि :- राजभय, यश, लाभ, मान, चोट-चपेट का भय, मित्रों व पारिवारिक लोगों से परेशानी होगी।

अवैध रेत उत्खनन पर जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 200 ट्रैक्टर-ट्रॉली रेत जब्त

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रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन पर सख्त कार्रवाई के निर्देशों के अनुरूप जशपुर जिले में खनिज विभाग द्वारा लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है। अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन की शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेते हुए विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 200 ट्रैक्टर-ट्रॉली रेत जब्त की है तथा 1 लाख 46 हजार 800 रुपये का अर्थदंड वसूल किया है।

जिला सहायक खनिज अधिकारी ने बताया कि 11 जून 2026 को झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा क्षेत्र स्थित ग्राम पोड़ी के शंख नदी तट का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान लगभग 200 ट्रैक्टर-ट्रॉली (करीब 600 घनमीटर) रेत अवैध रूप से संग्रहित पाई गई। इस पर खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 के तहत प्रकरण दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की गई।

कार्रवाई के तहत निर्धारित 1 लाख 46 हजार 800 रुपये की अर्थदंड राशि 16 जून 2026 को खनिज मद में जमा कराई गई। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध उत्खनन और परिवहन के विरुद्ध आगे भी इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

खनिज विभाग के अनुसार जिले में रेत की वैध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा क्षेत्र के ग्राम पोड़ी एवं ग्राम पुत्रीचौरा में 5-5 हेक्टेयर क्षेत्रफल की रेत खदानें घोषित की गई हैं। इन खदानों के संचालन हेतु निविदा आमंत्रित की जा चुकी है और खदान स्वीकृति की प्रक्रिया प्रगति पर है। इससे क्षेत्र में रेत की वैध आपूर्ति को बढ़ावा मिलेगा तथा अवैध उत्खनन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

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