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महुआ ने सुनाई मुश्किल दौर की कहानी, कहा- सिर्फ सुवेंदु ने दिया साथ

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कोलकातातृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने एक हालिया साक्षात्कार में पश्चिम बंगाल के सियासी समीकरणों और आपसी रिश्तों पर बेबाकी से अपनी राय साझा की है. उन्होंने कहा कि राजनीति के मैदान में मतभेद होना एक आम बात है, लेकिन इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि नेताओं के आपसी व्यक्तिगत रिश्ते भी खत्म हो जाएं. महुआ ने साझा किया कि उनके और नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के बीच निजी स्तर पर हमेशा एक-दूसरे के प्रति आदर का भाव रहा है.

सुवेंदु के फैसले में थी पारदर्शिता

महुआ मोइत्रा ने कहा कि जब सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी से नाता तोड़कर भाजपा का दामन थामने का निर्णय लिया था, तब उन्होंने अपने इस कदम को छुपाया नहीं था. उन्होंने दल के भीतर रहते हुए किसी तरह की दोहरी राजनीति करने के बजाय स्पष्ट रूप से अपना नया मार्ग चुना. महुआ के अनुसार, किसी भी राजनेता का ऐसा कदम ज्यादा साफ-सुथरा और ईमानदारी से भरा माना जा सकता है.

जब टिकट न मिलने पर रोई थीं महुआ

अपने पुराने राजनीतिक दिनों को याद करते हुए महुआ भावुक हुईं. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने शुरुआती दौर में करीमपुर से चुनाव लड़ा था, तब उनके साथ कोई बड़ा नेता नहीं था, लेकिन उस मुश्किल समय में सुवेंदु उनकी जनसभा में शामिल होने आए थे. इसके बाद साल 2014 का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब उन्हें लोकसभा का टिकट मिलते-मिलते रह गया था, तब वे हताशा में पूरी रात रोई थीं. उस कठिन मोड़ पर सुवेंदु ने ढांढस बंधाते हुए कहा था, 'बहन, मैं तुम्हारे साथ खड़ा हूं.' महुआ के मुताबिक, यही वह दौर था जिसने उनके बीच एक मजबूत पारिवारिक और व्यक्तिगत जुड़ाव बनाया.

भीतरघात करने वाले नेताओं पर साधा निशाना

सांसद महुआ मोइत्रा ने उन राजनेताओं को आड़े हाथों लिया जो दल के भीतर मलाई खाते हुए भी असंतोष फैलाते हैं और खुलकर अपना स्टैंड साफ नहीं करते. महुआ ने दोटूक कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि को अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से कोई शिकायत या वैचारिक समस्या है, तो उसे तुरंत स्पष्ट फैसला लेना चाहिए और मैदान में उतरकर जनता के बीच अपनी ताकत साबित करनी चाहिए.

वैचारिक मतभेद अपनी जगह, व्यक्तिगत सम्मान अपनी जगह

महुआ ने यह भी साफ तौर पर रेखांकित किया कि राजनीतिक मोर्चे पर उनकी और सुवेंदु अधिकारी की विचारधाराएं पूरी तरह विपरीत हैं और दोनों ही बिल्कुल अलग राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करते हैं. इसके बावजूद, उनका मानना है कि व्यक्तिगत आदर और राजनीतिक जंग को अलग-अलग चश्मे से देखा जाना चाहिए. यही कारण है कि कड़वाहट से भरी राजनीतिक लड़ाइयों के बीच भी वे सुवेंदु अधिकारी के प्रति सम्मान रखना नहीं भूलतीं.

संकट में फंसे युवक को मिला नया जीवन, पुलिस की तत्परता आई काम

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उरई"मुझे माफ कर देना, मैं तुम्हारे लायक नहीं था… तुम्हारे बिना मैं नहीं जी सकता." इंटरनेट मीडिया पर इस तरह का दर्दभरा अलविदा संदेश लिखकर एक युवक ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लाइव आकर हेयर डाई (जहर) पी ली. गनीमत यह रही कि सोशल मीडिया कंपनी मेटा ने तुरंत हरकत में आते हुए स्थानीय पुलिस को आपातकालीन अलर्ट भेजा, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने समय रहते छात्र को अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचा ली.

शादी से इनकार करने पर डिप्रेशन में था युवक

माधौगढ़ कोतवाली क्षेत्र के कुंवरपुरा गांव के रहने वाले 20 वर्षीय दीपेंद्र गौतम का एक युवती से प्रेम प्रसंग चल रहा था. वह युवती पर विवाह करने का दबाव बना रहा था, लेकिन लड़की ने शादी करने से साफ मना कर दिया. इस बात से दीपेंद्र गहरे सदमे और अवसाद में चला गया था. 21 जून की सुबह उसकी फिर से युवती से फोन पर बहस हुई, जिससे हताश होकर उसने दोपहर को सोशल मीडिया पर अपनी दिल की पीड़ा लिखी और डाई पीते हुए 27 सेकंड का एक वीडियो अपनी प्रोफाइल पर लाइव अपलोड कर दिया.

कमरे में बेहोश मिला छात्र, मेटा मुख्यालय से आया अलर्ट

जैसे ही दीपेंद्र ने यह आत्मघाती वीडियो इंटरनेट पर पोस्ट किया, फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा ने उसकी लोकेशन ट्रैक कर तुरंत माधौगढ़ कोतवाली पुलिस को इसकी सूचना भेजी. अलर्ट मिलते ही कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अभिलाष मिश्रा पुलिस बल के साथ तत्काल दीपेंद्र के घर पहुंचे. कमरे में दीपेंद्र बेसुध हालत में पड़ा हुआ था. पुलिस ने बिना वक्त गंवाए उसे तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में दाखिल कराया.

समय पर मिला इलाज, पुलिस ने की काउंसलिंग

चिकित्सकों की त्वरित कार्रवाई के कारण दीपेंद्र की जान बच गई. पूरी तरह होश में आने के बाद 22 जून को पुलिस ने दीपेंद्र और उसके पिता वीरेंद्र गौतम को पास बिठाकर लंबी काउंसलिंग की. कोतवाली प्रभारी ने युवक को समझाते हुए कहा कि वह अभी आईटीआई का छात्र है और उसे अपने करियर व भविष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. जीवन में सफलता मिलने के बाद परिस्थितियां बदल जाती हैं. पुलिस के समझाने के बाद युवक को उसके परिजनों के साथ सुरक्षित घर भेज दिया गया.

CBI अफसर बनकर ठगों ने बुजुर्ग महिला को बनाया शिकार, 1.58 करोड़ की ठगी

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ग्वालियरशहर में ऑनलाइन धोखाधड़ी की एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है. शातिर साइबर अपराधियों ने एक 69 वर्षीय बुजुर्ग महिला, मीनाक्षी नाखरे को करीब 33 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' (इंटरनेट पर बंधक) रखकर 1.58 करोड़ रुपये की बड़ी रकम ऐंठ ली. मीनाक्षी एक सेवानिवृत्त लैब टेक्नीशियन हैं. जालसाजों ने खुद को दूरसंचार विभाग, दिल्ली पुलिस और सीबीआई का आला अफसर बताकर महिला को डराया और मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे मामले से बरी करने का झांसा देकर मोटी रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा ली. पुलिस तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि ठगी के पैसे शुरुआत में चार करंट बैंक खातों में भेजे गए थे, जहां से बाद में इन्हें 129 अन्य बैंक खातों में फैला दिया गया.

मनी लॉन्ड्रिंग और गिरफ्तारी का दिखाया खौफ

सरदार पाटनकर साहब का बाड़ा क्षेत्र की रहने वाली मीनाक्षी ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि बीते 10 मई को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात कॉल आया था. फोन करने वाले ने खुद को टेलीकॉम डिपार्टमेंट का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उनके नाम पर रजिस्टर्ड एक सिम कार्ड और बैंक अकाउंट का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए हो रहा है. ठग ने कहा कि इस खाते से 6.80 करोड़ रुपये का अवैध हेरफेर हुआ है. इसके तुरंत बाद कॉल को दिल्ली पुलिस के एक कथित अफसर के पास ट्रांसफर कर दिया गया.

अगले चरण में, वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहने एक शख्स सामने आया, जिसने खुद का परिचय आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार गौतम के रूप में दिया. उसने महिला पर आरोप लगाया कि इस गैरकानूनी लेनदेन के बदले उन्हें 68 लाख रुपये का कमीशन मिला है. इसके बाद अपराधियों ने महिला को जेल जाने से बचने के लिए एक गुप्त जांच (प्रायोरिटी इन्वेस्टिगेशन) में सहयोग करने का दबाव बनाया.

डरा-धमकाकर पार करा दी जीवनभर की पूंजी

इसके बाद खुद को सीबीआई का अधिकारी बताने वाले एक अन्य जालसाज ने कमान संभाली. उसने महिला से कहा कि जांच प्रक्रिया पूरी होने तक उनकी सारी जमा-पूंजी को सरकार के सुरक्षित खातों में ट्रांसफर करना होगा, जो तफ्तीश पूरी होने के बाद लौटा दी जाएगी. डर और झांसे में आकर मीनाक्षी ने बैंक में मौजूद अपनी चार फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तुड़वा दीं. उन्होंने 33 दिनों के भीतर ठगों के बताए खातों में कुल 1.58 करोड़ रुपये भेज दिए. यह रकम उन्हें हाल ही में अपनी पुश्तैनी जमीन बेचने से मिली थी.

एनओसी न मिलने पर हुआ धोखे का अहसास

11 जून को जालसाजों ने महिला से कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और 18 जून तक उन्हें क्लीन चिट की एनओसी डाक के जरिए मिल जाएगी. हालांकि, इसी बीच 16 जून को ठगों के सभी संपर्क नंबर अचानक बंद हो गए. तय तारीख तक जब कोई सरकारी कागज नहीं पहुंचा, तो महिला को अनहोनी की आशंका हुई. वह सच्चाई जानने के लिए आरोपियों के बताए दिल्ली वाले पते पर भी गईं, जहां पहुंचकर उन्हें पता चला कि वे एक बड़े फ्रॉड का शिकार हो चुकी हैं. इसके बाद उन्होंने वापस आकर स्थानीय पुलिस स्टेशन में इस मामले की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई.

हर्निया ऑपरेशन के बाद महिला की मौत, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप

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जिला मुख्यालय। शहर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में हर्निया का ऑपरेशन होने के बाद एक महिला की मौत हो गई, जिसके बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा खड़ा हो गया। मृतका के परिजनों और ग्रामीणों ने डॉक्टरों पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पताल के बाहर जमकर नारेबाजी की और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

ऑपरेशन के बाद बिगड़ी तबीयत, मौत का आरोप

मिली जानकारी के अनुसार, पनोतिया गाँव की रहने वाली कसनी बाई गुर्जर को हर्निया की बीमारी के चलते इस निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। शाम के वक्त डॉक्टरों ने महिला का ऑपरेशन किया, लेकिन कुछ ही देर बाद अचानक उनकी हालत गंभीर हो गई। पीड़ित परिवार का सीधा आरोप है कि महिला ने देर रात ही अस्पताल में दम तोड़ दिया था, मगर अपनी गलती पर पर्दा डालने के लिए अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन में उन्हें उदयपुर रेफर करने का नाटक किया। जैसे ही महिला की मौत की खबर ग्रामीणों तक पहुँची, बड़ी संख्या में लोग अस्पताल के बाहर जुट गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

हार्ट अटैक की वजह से किया रेफर: डॉक्टर

दूसरी ओर, अस्पताल प्रशासन ने परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अस्पताल के मुख्य चिकित्सक डॉ. अशोक कुलदीप ने अपनी सफाई में कहा कि हर्निया का ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा था। लेकिन ऑपरेशन के तुरंत बाद मरीज को दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने के शुरुआती लक्षण दिखाई देने लगे। मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए ही उन्हें उच्च स्तरीय इलाज के लिए तुरंत उदयपुर रेफर करने का फैसला लिया गया, जिसकी जानकारी समय रहते परिवार को दे दी गई थी।

परिसर में तनाव, पुलिस बल तैनात

हंगामे और प्रदर्शन के चलते अस्पताल परिसर में माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए डीएसपी नेत्रपाल सिंह भारी पुलिस जाब्ते के साथ तुरंत मौके पर पहुँचे और गुस्साए लोगों को शांत कराया। सुरक्षा के मद्देनजर अस्पताल के अंदर और बाहर अतिरिक्त पुलिस कर्मियों को तैनात कर दिया गया है।

मामले की जांच में जुटी पुलिस

फिलहाल पीड़ित परिवार और अस्पताल प्रबंधन अपनी-अपनी बातों पर अड़े हुए हैं और दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे दोनों पक्षों से लगातार बातचीत कर रहे हैं और शिकायत के आधार पर मामले की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार, महिला की मौत की असली वजह क्या थी, इसका साफ-साफ खुलासा विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम आने के बाद ही हो सकेगा।

मवेशी बचाने की कोशिश बनी हादसा, नहर में डूबने से एक भाई की गई जान

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बीकानेर। जिले के लूणकरणसर इलाके में बुधवार सुबह एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया। यहाँ कंवरसेन लिफ्ट नहर में गिरी एक भेड़ को बचाने के चक्कर में दो सगे भाई पानी के तेज बहाव में बह गए। इस दर्दनाक घटना में एक भाई की पानी में डूबने से मौत हो गई, जबकि दूसरे भाई को ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाते हुए सुरक्षित बाहर निकाल लिया। यह पूरी घटना उदेसिया गाँव के पास सुबह करीब 11 बजे की बताई जा रही है।

भेड़ को बचाते समय हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, खिलेरिया गाँव के रहने वाले भेड़ पालक हाल ही में पंजाब से अपनी भेड़ों का झुंड लेकर वापस लौटे थे। बुधवार सुबह जब वे नहर के किनारे भेड़ों को पानी पिला रहे थे, तभी अचानक एक भेड़ अनियंत्रित होकर गहरे पानी में गिर गई। उसे डूबता देख डूंगरराम (26 वर्ष, पुत्र आसाराम खिलेरी) ने बिना सोचे-समझे नहर में छलांग लगा दी।

भाई को बचाने उतरा दूसरा भाई भी बहा

नहर में पानी का बहाव बेहद तेज था, जिसके कारण डूंगरराम खुद को संभाल नहीं पाया और डूबने लगा। अपने भाई को जिंदगी और मौत से जूझता देख छोटा भाई दौलतराम भी उसे बचाने के लिए नहर में कूद गया। दोनों भाइयों को डूबता देख उनके एक साथी भादरराम (पुत्र फुसाराम खिलेरी) ने भी कोशिश की, लेकिन तेज बहाव के आगे उसकी एक न चली। खुद की जान पर बनती देख भादरराम किसी तरह तैरकर किनारे वापस आया।

राहगीर बना मसीहा, एक की बचाई जान

इसी दौरान उदेसिया के रहने वाले मनीराम नामक युवक वहाँ से अपनी मोटरसाइकिल पर गुजर रहे थे। मौके पर चीख-पुकार सुनकर वे तुरंत रुके और स्थिति को भांपते हुए सीधे नहर में कूद गए। मनीराम ने भारी मशक्कत के बाद दौलतराम को बेहोशी की हालत में पानी से बाहर निकाल लिया। ग्रामीणों ने बिना वक्त गंवाए दौलतराम को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उसका इलाज जारी है।

लाउडस्पीकर से बुलाई मदद, गाँव में पसरा सन्नाटा

जब मनीराम को पता चला कि पानी के अंदर एक और युवक (डूंगरराम) फंसा हुआ है, तो उन्होंने फिर से तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। इस बीच हादसे की सूचना पुलिस को दी गई। स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए पास के उदेसिया मंदिर के लाउडस्पीकर (भोपू) से घटना का ऐलान करवाया।

घोषणा सुनते ही भारी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय गोताखोर मौके पर जमा हो गए। काफी प्रयासों के बाद गोताखोरों ने डूंगरराम को बाहर निकाला, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अस्पताल पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस हादसे के बाद से खिलेरिया गाँव में मातम पसरा हुआ है। पुलिस ने मर्ग दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

खेत बेचकर ससुर ने जोड़ी थी पूंजी, दामाद ने दोस्तों संग बिजनेस के लिए चुराई रकम

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बीकानेर: राजस्थान के बीकानेर जिले से रिश्तों को तार-तार करने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहाँ एक दामाद ने अपने ससुर की मेहनत की गाढ़ी कमाई पर ही हाथ साफ कर दिया। ससुर द्वारा खेत बेचने से मिले 22 लाख रुपये की भनक लगते ही दामाद के मन में लालच आ गया। उसने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर न सिर्फ चोरी का ताना-बाना बुना, बल्कि आधी रात को ससुराल के मकान की दीवार में कुंबल (छेद) कर भीतर दाखिल हुआ और बक्से का ताला तोड़कर नकद रकम लेकर चंपत हो गया।

खेत की बिक्री से मिले थे पैसे, दामाद को लग गई थी भनक

यह पूरा मामला खाजूवाला थाना क्षेत्र के चक 17 बीडी गांव का है। पीड़ित ससुर गिरधारीराम मेघवाल ने 17 जून को थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि 16 जून की रात उनके घर में रखे 22 लाख रुपये चोरी हो गए हैं।

उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया कि हाल ही में उन्होंने अपनी कृषि भूमि बेची थी, जिससे उन्हें यह मोटी रकम मिली थी और उन्होंने इसे सुरक्षित एक संदूक में ताला लगाकर रखा था। इस बात की जानकारी उनकी बेटी के पति सोहनलाल नायक को मिल गई थी।

दोस्तों ने दिखाए 'बिजनेस' के सपने, नशेड़ी दामाद जाल में फंसा

पुलिस तफ्तीश में सामने आया कि मुख्य आरोपी दामाद सोहनलाल नायक मूल रूप से श्रीगंगानगर का निवासी है और फिलहाल पास के ही एक खेत में मजदूरी करता था। सोहनलाल नशे की लत का शिकार है। जब उसने ससुर के घर में इतनी बड़ी रकम होने की बात अपने दोस्तों—बूटा सिंह और दुलीचंद नायक को बताई, तो उन्होंने सोहनलाल को खुद का नया बिजनेस शुरू करने के हसीन ख्वाब दिखाए। इसके बाद तीनों ने मिलकर इस बड़ी चोरी को अंजाम दे डाला। ससुर को अगले ही दिन अपने दामाद के हाव-भाव देखकर उस पर पक्का शक हो गया था।

पुलिस ने बिछाया जाल; ₹13.35 लाख बरामद, बाकी ₹9 लाख की तलाश

खाजूवाला थाना प्रभारी सुरेंद्र प्रजापत ने बताया कि पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंगलवार की शाम नामजद दामाद और उसके दोनों साथियों को धर दबोचा। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपियों के पास से चोरी की गई राशि में से 13 लाख 35 हजार रुपये की नकदी बरामद कर ली है।

हालांकि, बचे हुए करीब 9 लाख रुपये अभी तक बरामद नहीं हो सके हैं। पुलिस आरोपियों को रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि शेष धनराशि उन्होंने कहाँ छुपा कर रखी है या फिर किन-किन जगहों पर खर्च कर दी है।

नई औद्योगिक परियोजनाओं से बिहार में विकास को मिलेगी रफ्तार

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पटना: बिहार को औद्योगिक निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को विकास आयुक्त-सह-अध्यक्ष, राज्य निवेश प्रोत्साहन परिषद् मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (SIPB) की 68वीं उच्च स्तरीय बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के भीतर नए उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देने, व्यापारिक माहौल को सुगम बनाने और बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए विभिन्न औद्योगिक प्रस्तावों पर गहन मंथन किया गया।

36 बड़े प्रोजेक्ट्स को मिली स्टेज-1 क्लीयरेंस; करोड़ों के फंड मंजूर

बिहार में औद्योगिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बोर्ड ने इस बैठक में कई बड़े फैसलों पर मुहर लगाई। इसके तहत:

  • स्टेज-1 क्लीयरेंस: राज्य में कुल 1,628.60 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 36 महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को स्टेज-1 क्लीयरेंस (शुरुआती मंजूरी) दे दी गई है।

  • वित्तीय स्वीकृति: इसके अतिरिक्त, 07 अन्य चालू परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए 44.89 करोड़ रुपये की अंतिम वित्तीय स्वीकृति भी प्रदान की गई।

बोर्ड का मानना है कि इन प्रोजेक्ट्स के शुरू होने से न केवल बिहार में औद्योगिक गतिविधियों को रफ्तार मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

निवेशकों के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम और पारदर्शिता पर जोर

बैठक के दौरान राज्य में निवेश की प्रक्रियाओं को और अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध (टाइम-बाउंड) बनाने पर विशेष रणनीति तैयार की गई। वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात पर चर्चा की कि उद्योगपतियों और निवेशकों को जमीन आवंटन या अन्य सरकारी स्वीकृतियों के दौरान आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को कैसे तुरंत दूर किया जाए। इसके लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और डिजिटल मॉनिटरिंग को और मजबूत करने का निर्णय लिया गया है।

उद्योग-अनुकूल नीतियां और मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर देने की प्रतिबद्धता

समीक्षा बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि बिहार को देश के अन्य विकसित राज्यों की तरह एक प्रतिस्पर्धी और उद्योग-अनुकूल (इन्वेस्टर-फ्रेंडली) राज्य के रूप में स्थापित करने के लिए नीतियां बदली जा रही हैं। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य निवेशकों को विश्वस्तरीय आधारभूत सुविधाएं (इन्फ्रास्ट्रक्चर), बिजली की निर्बाध आपूर्ति और सुगम प्रशासनिक प्रक्रियाएं उपलब्ध कराना है, ताकि देश-विदेश की बड़ी कंपनियां बिहार का रुख कर सकें।

राज्य की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती

इन स्वीकृत परियोजनाओं के धरातल पर आने से बिहार के आर्थिक और औद्योगिक आधार को एक नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई गई है। बुनियादी ढांचा मजबूत होने से न केवल पलायन रुकेगा, बल्कि राज्य के राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी होगी। सरकार का अंतिम लक्ष्य बिहार को पूर्वी भारत के एक प्रमुख औद्योगिक हब के रूप में विकसित करना है, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति को दीर्घकालिक मजबूती मिल सके।

BHIM App की रफ्तार तेज, 11 महीनों में ट्रांजैक्शन तीन गुना बढ़े

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नई दिल्ली: भारत में कैशलेस इकोनॉमी (नकद-रहित अर्थव्यवस्था) अब आम नागरिकों की जीवनशैली का अभिन्न अंग बन चुकी है। जेब में कैश रखने के बजाय मोबाइल से स्कैन कर भुगतान करने के बढ़ते चलन के बीच एनपीसीआई भीम सर्विसेज लिमिटेड (NBSL) के 'भीम (BHIM) ऐप' ने सफलता का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले महज 11 महीनों के भीतर इस स्वदेशी भुगतान प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाले ट्रांजैक्शंस की तादाद में तीन गुना से भी ज्यादा की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

जून 2025 से मई 2026 के बीच आंकड़ों में भारी उछाल

बुधवार को जारी किए गए आधिकारिक बयान के मुताबिक, जून 2025 से लेकर मई 2026 के बीच भीम ऐप के उपयोग में अभूतपूर्व तेजी आई है। अगर आंकड़ों की तुलना करें तो:

  • वॉल्यूम में बढ़त: जून 2025 में जहां इस ऐप के माध्यम से 7.96 करोड़ (79.64 मिलियन) ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए थे, वहीं मई 2026 में यह ग्राफ तेजी से चढ़कर 24.4 करोड़ (244 मिलियन) पर जा पहुंचा।

  • लेन-देन की कुल कीमत: सिर्फ संख्या ही नहीं, बल्कि पैसों के लेनदेन के मामले में भी नया रिकॉर्ड बना है। अकेले मई 2026 के महीने में उपभोक्ताओं ने भीम ऐप के जरिए कुल 26,952 करोड़ रुपये की धनराशि का डिजिटल ट्रांसफर किया।

रोजमर्रा की किन चीजों पर सबसे ज्यादा खर्च कर रहे हैं लोग?

राष्ट्रीय स्तर पर दिख रहा यह डिजिटल बदलाव राज्यों में भी समान रूप से प्रभावी है। उदाहरण के लिए, तेलंगाना में भी इसी 11 महीने की अवधि के दौरान ट्रांजैक्शन वॉल्यूम तीन गुना हो चुका है।

मई 2026 में हुए कुल मर्चेंट ट्रांजैक्शंस (व्यापारिक भुगतानों) का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि लोग अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए सबसे ज्यादा ऑनलाइन पेमेंट का सहारा ले रहे हैं:

श्रेणी (Category)कुल मर्चेंट ट्रांजैक्शन में हिस्सेदारी
किराना और राशन की खरीदारी23.9%
फूड आउटलेट्स (होटल और रेस्टोरेंट)18.1%
क्विक कॉमर्स (तत्काल डिलीवरी सेवाएं)11.6%

एनबीएसएल की एमडी और सीईओ ललिता नटराज के अनुसार, रूटीन खरीदारी के लिए इस ऐप की बढ़ती स्वीकार्यता यह साफ दर्शाती है कि उपभोक्ता अब पारंपरिक नकदी को छोड़कर पूरी तरह डिजिटल विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।

कम इंटरनेट और क्षेत्रीय भाषाएं बनीं ग्रामीण भारत में सफलता की चाबी

भीम ऐप की इस कामयाबी के पीछे इसकी सुलभ और यूजर-फ्रेंडली तकनीक का बहुत बड़ा हाथ है। कंपनी का मुख्य ध्यान ऐसे डिजिटल उत्पाद तैयार करने पर रहा है जो बिना किसी तकनीकी बाधा के हर वर्ग के लिए सुरक्षित और आसान हों।

ग्रामीण और अर्ध-शहरी (Semi-urban) इलाकों में इस ऐप की पैठ बढ़ने की दो मुख्य वजहें हैं:

  1. 15+ क्षेत्रीय भाषाओं का सपोर्ट: यह ऐप तेलुगु सहित देश की 15 से अधिक क्षेत्रीय भाषाओं में काम करता है, जिससे गैर-अंग्रेजी भाषी लोगों के लिए इसे चलाना बेहद सरल हो जाता है।

  2. लो-कनेक्टिविटी मोड: इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि देश के सुदूर गांवों या कम इंटरनेट स्पीड (Low Internet Connectivity) वाले क्षेत्रों में भी यह ऐप बिना अटके काम कर सके।

भविष्य की मजबूत डिजिटल अर्थव्यवस्था का संकेत

भीम ऐप के ट्रांजैक्शन में आई यह ऐतिहासिक तेजी भारत की जमीनी डिजिटल अर्थव्यवस्था के मजबूत ढांचे को प्रमाणित करती है। छोटे किराना स्टोर से लेकर बड़े फूड चेन तक इसका बढ़ता उपयोग और टियर-2 व टियर-3 शहरों में इसकी मजबूत पकड़ यह साफ इशारा करती है कि आने वाले समय में देश के ग्रामीण अंचलों में भी कैशलेस ट्रांजैक्शन का दायरा और अधिक व्यापक और सुदृढ़ होने वाला है।

क्रिकेट के दिग्गज बॉब ब्लेयर का निधन, फैंस और खिलाड़ियों ने जताया दुख

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जीलैंड के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज बॉब ब्लेयर का देहावसान हो गया है. विशेष बात यह है कि ब्लेयर ने अपने 94वें जन्मदिन के दिन ही आखिरी सांस ली. उन्होंने 1952 से 1964 के दरमियां न्यूजीलैंड के लिए 19 टेस्ट मैचों में प्रतिनिधित्व किया, जिसमें उन्होंने 35 की औसत से 43 विकेट चटकाए. घरेलू स्तर पर भी उनका रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा. प्रथम श्रेणी क्रिकेट के 59 मुकाबलों में उन्होंने मात्र 15 की औसत से 330 विकेट अपने नाम किए. वे मुख्य रूप से वेलिंगटन के लिए खेले, जबकि कुछ वक्त तक उन्होंने सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट्स का भी प्रतिनिधित्व किया.

रेल दुर्घटना में खो दिया था मंगेतर को

ब्लेयर के करियर का सबसे स्वर्णिम दौर 1956-57 का रहा, जब उन्होंने महज 9 की हैरतअंगेज औसत से 46 विकेट झटके. इस दौरान उन्होंने एक पारी में दो बार 9-9 विकेट लेने का कारनामा किया. हालांकि, ब्लेयर को वैश्विक पहचान 1953 के दक्षिण अफ्रीका दौरे से मिली. एलिस पार्क में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के दौरान उन्हें यह दर्दनाक सूचना मिली कि तांगीवाई रेल हादसे में जान गंवाने वाले 151 लोगों में उनकी मंगेतर नेरिसा लव भी शामिल थीं. इस गहरे सदमे के बाद भी उन्होंने मैदान पर उतरने का फैसला किया.

खेल जगत का सबसे भावुक पल

मैच के दूसरे दिन जब न्यूजीलैंड ने अपने 9 विकेट खो दिए, तब सबको चौंकाते हुए ब्लेयर क्रीज पर बल्लेबाजी करने आए. मैदान पर उनके साथ चोटिल बल्लेबाज बर्ट सटक्लिफ मौजूद थे. दोनों ने मिलकर अंतिम विकेट के लिए 33 रनों की यादगार साझेदारी की. इसी दौरान दक्षिण अफ्रीकी स्पिनर ह्यूग टेफील्ड के एक ओवर में 25 रन बने, जो उस दौर का एक वर्ल्ड रिकॉर्ड था. स्टेडियम में मौजूद दर्शकों से लेकर दोनों टीमों के खिलाड़ी इस दृश्य को देखकर भावुक हो गए थे. इसी मर्मस्पर्शी घटना से प्रेरित होकर आगे चलकर 'तांगीवाई शील्ड ट्रॉफी' की शुरुआत हुई, जिसे साल 2024 में न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के क्रिकेट बोर्ड ने संयुक्त रूप से लॉन्च किया.

श्रद्धांजलि स्वरूप काली पट्टी बांधकर खेलेगी टीम

ब्लेयर का अंतरराष्ट्रीय सफर इसके बाद भी जारी रहा. उन्होंने 1964 में ऑकलैंड के मैदान पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ही अपना विदाई टेस्ट मैच खेला, जिसमें उन्होंने 7 विकेट हासिल किए. सक्रिय क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद भी वे खेल से दूर नहीं हुए. उन्होंने 60 साल की उम्र तक क्रिकेट खेलना जारी रखा और बाद में क्वींसलैंड, जिम्बाब्वे, दक्षिण अफ्रीका, उत्तरी आयरलैंड और इंग्लैंड जैसे देशों में बतौर कोच अपनी सेवाएं दीं. जीवन के आखिरी पड़ाव में वे अपनी पत्नी बारबरा के साथ चेशायर में रहने लगे थे. इस महान क्रिकेटर को सम्मान देने के लिए न्यूजीलैंड की टीम इंग्लैंड के विरुद्ध होने वाले तीसरे टेस्ट मैच के पहले दिन अपनी बांह पर काली पट्टी बांधकर मैदान में उतरेगी.

जयराम रमेश ने CJP आंदोलन को बताया युवाओं की आवाज, लोकतंत्र पर भी दी नसीहत

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नई दिल्ली. पेपर लीक और परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। इसी कड़ी में 'कॉकरोच जनता पार्टी' द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश की बड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने बातचीत करते हुए कहा कि यह एक स्वाभाविक आंदोलन है, जिसे लेकर लोगों की अलग-अलग राय हैं। कुछ लोग इसे 'डीप स्टेट' द्वारा प्रायोजित बता रहे हैं, तो कुछ इसे देश के युवाओं की हताशा और गहरी नाराजगी का रूप मान रहे हैं।

आंदोलन ने मीडिया में बनाई जगह

जयराम रमेश ने आगे कहा कि इस आंदोलन ने मीडिया और सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोरी हैं और लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि यह कोई राजनीतिक दल नहीं है। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में आखिरी फैसला और सबसे महत्वपूर्ण भूमिका राजनीतिक दलों और उनकी संगठनात्मक संरचना की ही होती है।

राजनीतिक दलों को निभानी चाहिए जिम्मेदारी

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि यह आंदोलन युवाओं की निराशा और व्यवस्था के प्रति उनके असंतोष को सामने लाने का एक बड़ा माध्यम बना है। उन्होंने कहा कि युवाओं के इस संदेश को आगे बढ़ाने की असली जिम्मेदारी अब राजनीतिक दलों को निभानी होगी। लोकतंत्र में आंदोलनों की अपनी एक खास भूमिका होती है, लेकिन पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था केवल आंदोलनों के भरोसे नहीं चल सकती, इसकी असली नींव राजनीतिक दल ही होते हैं।

सोनिया गांधी के साथ काम करने का अनुभव

इस बातचीत के दौरान जयराम रमेश ने सोनिया गांधी के साथ काम करने के अपने अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने साल 2004 के दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि कांग्रेस चुनाव जीत पाएगी। अटल बिहारी वाजपेयी एक बेहद मजबूत, प्रभावशाली और करिश्माई नेता थे, जिसके कारण किसी को कांग्रेस की जीत का भरोसा नहीं था। लेकिन कांग्रेस ने एक बड़ा चमत्कार कर दिखाया और 145 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर यूपीए सरकार का गठन किया, जिसके बाद अगले 10 वर्षों तक डॉ. मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री रहे।

सोनिया ने पार्टी को रखा एकजुट

उन्होंने सोनिया गांधी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी को हमेशा एकजुट बनाए रखा और एक सही दिशा दी। उन्होंने याद दिलाया कि एक समय ऐसा था जब देश में कांग्रेस के 15 मुख्यमंत्री थे और उनके लिए खास सम्मेलन आयोजित किए जाते थे। पहला सम्मेलन गुवाहाटी में, दूसरा श्रीनगर में और उसके बाद दिल्ली में हुआ था। जयराम रमेश के मुताबिक, इन्हीं सम्मेलनों के दौरान ही 'मनरेगा' और 'वन अधिकार अधिनियम' जैसी बड़ी और ऐतिहासिक योजनाओं के विचारों की नींव पड़ी थी।

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