Home Blog Page 87

चैलेंज के बाद रात में हमला, अधारताल में पड़ोसी नर्स को निशाना बनाकर फेंके गए 3 बम

0

जबलपुर: शहर के अधारताल थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले पटेल नगर में मंगलवार की देर रात सिलसिलेवार बम धमाकों से पूरा इलाका दहल उठा। यहाँ रहने वाली एक निजी अस्पताल की नर्स के घर को निशाना बनाकर स्कूटी सवार दो बदमाशों ने हमला किया। आरोपियों ने घर के सामने गाली-गलौज करते हुए आंगन में एक के बाद एक तीन देसी बम पटके और मौके से रफूचक्कर हो गए। पुलिस के मुताबिक, यह पूरी वारदात मकान से जुड़े एक पुराने विवाद के चलते अंजाम दी गई है। पीड़ित महिला की शिकायत पर पुलिस ने नामजद आरोपियों के खिलाफ संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है।

सुबह दी थी धमकी, रात को सच कर दिखाया खौफनाक इरादा

अधारताल थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पटेल नगर की रहने वाली प्रीति सिंह, जो शीतल छाया हॉस्पिटल में नर्सिंग स्टाफ के रूप में कार्यरत हैं, ने मामले की शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के मुताबिक, 22 जून की सुबह करीब 9 बजे जब वह अपने घर के बाहर खड़ी थीं, तभी पड़ोस में रहने वाले प्रिंस साहू और दक्ष राजपूत वहां से गुजरे।

मकान के पुराने विवाद को लेकर दोनों ने प्रीति को सरेआम धमकाते हुए कहा कि आज रात वे उसके घर पर बम फिंकवा देंगे। उस वक्त महिला ने इस धमकी को गंभीरता से नहीं लिया और रोजमर्रा के काम में जुट गईं।

'सुअरमार' बमों के धमाकों से गूंजा आंगन, दहल गया सो रहा परिवार

वारदात की रात प्रीति सिंह अपने पति अविनाश सिंह, सास प्रमिला सिंह और बच्चों के साथ घर के भीतर सो रही थीं। रात के करीब 2:15 बजे अचानक घर के बाहर एक स्कूटी आकर रुकी, जिस पर दक्ष राजपूत अपने एक अज्ञात साथी के साथ सवार था।

दक्ष ने जोर-जोर से अपशब्द कहते हुए चिल्लाया, "तुमने प्रिंस साहू से दुश्मनी मोल ली है, अब उसका सबक भुगतो!" इतना कहते ही स्कूटी पर पीछे बैठे युवक ने घर के आंगन में तीन खतरनाक 'सुअरमार' बम फेंक दिए।

बाल-बाल बचीं मासूमों की जानें, आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस

देसी बमों के गिरते ही जोरदार धमाके हुए और पूरा मकान हिल गया। धमाकों की भीषण आवाज सुनकर जब प्रीति सिंह अपने सहमे हुए परिवार के साथ तुरंत बाहर निकलीं, तब तक आरोपी दक्ष राजपूत अपने साथी के साथ स्कूटी से तेजी से भाग चुका था। गनीमत रही कि इस हमले में सो रहे परिवार के किसी सदस्य को सीधी चोट नहीं आई। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना कर साक्ष्य जुटा लिए हैं और आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के लिए दबिश दे रही है।

डोटासरा ने उठाए भ्रष्टाचार के सवाल, कृषि विभाग मामले में निष्पक्ष जांच की मांग

0

जयपुर: राजस्थान की सियासत में एक बार फिर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर गरमाहट आ गई है। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कृषि विभाग में सामने आए कथित घपले को लेकर सूबे की सरकार और कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा को सीधे कटघरे में खड़ा किया है। पत्रकारों से चर्चा करते हुए डोटासरा ने कहा कि जब भी किसी महकमे में अनियमितताओं के आरोप लगते हैं, तो सबसे पहली जिम्मेदारी उस विभाग के मुखिया की होती है कि वह एक पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कराए। उन्होंने कहा कि वह गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाने वालों का सम्मान करते हैं, लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब जांच बिना किसी भेदभाव के पूरी हो और सच जनता के सामने आए।

'गंभीर तथ्य आने के बावजूद नहीं हुई व्यापक जांच'

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कृषि विभाग से जुड़े इस पूरे प्रकरण में अब तक कई चौंकाने वाले और गंभीर तथ्य सामने आ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद भी सरकार ने इस मामले की कोई व्यापक या उच्च स्तरीय जांच शुरू नहीं कराई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम सीधे तौर पर एफआईआर (FIR) में दर्ज हैं या जिनकी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है, उन पर अब तक कोई प्रशासनिक गाज क्यों नहीं गिरी और उनकी जवाबदेही तय करने में देरी क्यों की जा रही है?

जांच एजेंसियों से डर नहीं, फर्जी दस्तावेजों की भी हो जांच

अपने ऊपर लगने वाले राजनीतिक आरोपों का जवाब देते हुए डोटासरा ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी भी जांच से कोई डर नहीं है। सरकार चाहे जिस भी एजेंसी से उनके मामलों की जांच कराना चाहे, करा सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि राजनीतिक बयानों से इतर इस समय प्रदेश के युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों का सच सामने आना ज्यादा जरूरी है। यदि किसी ने भी जाली दस्तावेजों, फर्जी डिग्री या गलत तरीकों का इस्तेमाल करके सरकारी नौकरी हासिल की है, तो उसके खिलाफ भी एक स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि बिना किसी पुख्ता सबूत के सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए आरोप लगाना गलत है।

मुख्यमंत्री से मांग: 'ईमानदारी साबित हुई तो खुद करूंगा धन्यवाद'

डोटासरा ने मुख्यमंत्री से सीधे तौर पर मांग की है कि कृषि विभाग के इस पूरे मामले की तह तक जाकर गहनता से जांच करवाई जाए। उन्होंने कहा कि जांच के दायरे में जो भी रसूखदार या दोषी सामने आए, उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।

प्रदेशाध्यक्ष का बयान: "अगर इस जांच के बाद विभागीय मंत्री और वर्तमान सरकार पूरी तरह पाक-साफ और ईमानदार साबित होती है, तो मैं खुद आगे बढ़कर उनका धन्यवाद करूँगा। लेकिन अगर इसमें कोई भी गड़बड़ी या हेरफेर पाया जाता है, तो जिम्मेदारी तय होना बेहद जरूरी है। लोकतंत्र में जनता का भरोसा जीतने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही से समझौता नहीं किया जा सकता।"

PM मोदी को ईरान से न्योता, क्या खामेनेई के अंतिम संस्कार में होंगे शामिल?

0

नई दिल्ली. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेदेशकियन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बेहद खास निमंत्रण भेजा है। उन्होंने पीएम मोदी को ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह अंतिम संस्कार समारोह आगामी 5 जुलाई से 9 जुलाई तक आयोजित किया जाएगा। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले इस आधिकारिक निमंत्रण और उसमें उनके शामिल होने को लेकर अभी तक भारत सरकार या विदेश मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान सामने नहीं आया है।

तेहरान पर हमलों के बीच हुई थी खामेनेई की मौत

ईरान पर लगभग तीन दशकों तक एकछत्र शासन करने वाले शक्तिशाली सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन इसी साल 28 फरवरी को हुआ था। उनकी मौत उस समय हुई थी, जब तेहरान पर अमेरिका और इजरायल द्वारा बड़े हवाई हमले किए जा रहे थे और उन हमलों का वह पहला ही दिन था। उनके निधन के बाद से ही ईरान में शोक का माहौल है और अब उनके अंतिम विदाई समारोह की बड़े स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।

चार दिनों तक अलग-अलग शहरों में होगा कार्यक्रम

राजनयिक सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान ने खुद भारतीय प्रधानमंत्री को इस बेहद संवेदनशील और बड़े समारोह के लिए बुलावा भेजा है। तय कार्यक्रम के अनुसार, अंतिम संस्कार की मुख्य रस्में तेहरान और कोम शहरों में 5, 6 और 7 जुलाई को आयोजित की जाएंगी। इसके बाद, अंतिम विदाई का समापन समारोह 9 जुलाई को ईरान के मशहूर मशहद शहर में संपन्न होगा। इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम पर अब पूरी दुनिया की कूटनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।

एलबी शिक्षकों को बड़ी राहत, पेंशन और सेवा गणना पर आया अहम फैसला

0

बिलासपुर छत्तीसगढ़ में एलबी संवर्ग के शिक्षकों की पेंशन पात्रता से जुड़े एक बेहद अहम मामले में उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की अपील को नामंजूर कर दिया है. अदालत ने अपने फैसले में एकल पीठ (सिंगल बेंच) के पूर्व आदेश को कायम रखते हुए सरकार को सेवा अवधि की गिनती से जुड़े मुद्दे पर दोबारा विचार करने को कहा है. इस निर्णय को राज्य के हजारों शिक्षकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है.

डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को ठहराया सही

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि सिंगल बेंच द्वारा पूर्व में दिया गया निर्देश न्यायिक अधिकार क्षेत्र के भीतर था. अदालत का मानना था कि उस आदेश में सरकार को कोई नई नीति लागू करने को नहीं कहा गया था, बल्कि इस संवेदनशील विषय पर उचित विचार-विमर्श कर निर्णय लेने की बात कही गई थी. यही वजह है कि राज्य सरकार की इस रिट अपील को स्वीकार करने का कोई ठोस आधार नहीं मिला.

पूर्व सेवा अवधि को जोड़ने की मांग पर अड़े शिक्षक

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि नियमित शासकीय सेवा में आने से पहले उन्होंने एक लंबे अरसे तक शिक्षाकर्मी के तौर पर अपनी सेवाएं दी हैं. इसलिए पेंशन की पात्रता निर्धारित करते समय उनकी इस पुरानी सेवा अवधि को भी शामिल किया जाना चाहिए. वर्तमान व्यवस्था के तहत सरकार केवल 1 जुलाई 2018 से ही सेवा की गणना कर रही है, जब शिक्षाकर्मियों का संविलियन कर उन्हें नियमित शासकीय सेवक का दर्जा दिया गया था.

पेंशन के रास्ते में आ रही है तकनीकी बाधा

मौजूदा नियमों के मुताबिक, शासकीय पेंशन का लाभ लेने के लिए कम से कम 10 साल की नियमित सरकारी सेवा का होना अनिवार्य है. शिक्षकों का कहना है कि यदि शिक्षाकर्मी के रूप में बिताए गए सालों को नहीं जोड़ा गया, तो एक बड़ा वर्ग जीवनभर सेवा देने के बाद भी रिटायरमेंट के बाद पेंशन के अधिकार से वंचित रह जाएगा. यही कारण है कि यह पूरा मामला लंबे समय से कानूनी विवाद का विषय बना हुआ है.

विवाद सुलझाने के लिए स्पष्ट नीति बनाने की जरूरत

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि यह मामला महज कुछ याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कर्मचारियों की एक बड़ी संख्या प्रभावित हो रही है. अदालत ने सुझाव दिया कि प्रशासन को इस विषय पर एक स्पष्ट और व्यावहारिक नीति तैयार करनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह के कानूनी विवादों और मुकदमों को बार-बार कोर्ट तक आने से रोका जा सके.

हजारों शिक्षकों के लिए उम्मीद की किरण

अदालत के इस रुख के बाद अब राज्य सरकार को सेवा अवधि के आकलन और पेंशन पात्रता के नियमों की समीक्षा करनी होगी. यदि शासन की ओर से इस पर कोई सकारात्मक कदम उठाया जाता है, तो प्रदेश के हजारों एलबी संवर्ग के शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा.

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर इजराइल, स्वदेशी हथियार निर्माण पर जोर

0

तेल अवीव:इजराइल के प्रधानमंत्री ने देश की सुरक्षा और रक्षा नीतियों को लेकर एक बेहद बड़ा और रणनीतिक बयान दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि इजराइल को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब अमेरिका पर अपनी सैन्य और हथियारों की निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना होगा। प्रधानमंत्री के मुताबिक, भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए इजराइल को अब आत्मनिर्भर बनना होगा और अपने अत्याधुनिक रक्षा उपकरण व हथियार खुद बनाने की क्षमता (सेल्फ-रिलायंस) तेजी से विकसित करनी होगी।

अमेरिका पर निर्भरता कम करने की वजह

इजराइल लंबे समय से आधुनिक हथियारों, मिसाइल डिफेंस सिस्टम (जैसे आयरन डोम के इंटरसेप्टर्स) और सैन्य फंड के लिए बहुत हद तक अमेरिका पर निर्भर रहा है। हालांकि, हाल के दिनों में वैश्विक राजनीति और आंतरिक अमेरिकी राजनीति के बदलते रुख को देखते हुए इजराइली नेतृत्व को यह अहसास हुआ है कि किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर रहना दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

घरेलू रक्षा उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

इस फैसले के बाद अब इजराइल अपने घरेलू रक्षा विनिर्माण (डोमेस्टिक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग) पर निवेश बढ़ाएगा। इजराइल की राफेल (Rafael), एलबिट सिस्टम्स (Elbit Systems) और इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) जैसी दिग्गज कंपनियां अब घरेलू स्तर पर ही बड़े पैमाने पर हथियारों और गोला-बारूद का उत्पादन शुरू करेंगी, ताकि विदेशी सप्लायर्स पर निर्भरता खत्म की जा सके। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया शांति समझौते के बाद मध्य-पूर्व (मिडल-ईस्ट) के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और इजराइल अपनी भविष्य की सुरक्षा प्राथमिकताओं को नए सिरे से तय कर रहा है।

‘जिन शिक्षकों पर भरोसा था, उन्होंने धोखा दिया’, NEET मामले में धर्मेंद्र प्रधान का खुलासा

0

नई दिल्ली. देशभर में बीते कई दिनों से विवादों में चल रहे नीट (NEET-UG) परीक्षा के मामले में अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों पर परीक्षा को सुरक्षित और निष्पक्ष तरीके से कराने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने ही इसके साथ धोखा किया और परीक्षा के भरोसे को नुकसान पहुँचाया। रविवार को दोबारा हुई नीट परीक्षा के बिना किसी गड़बड़ी के पूरे होने के बाद, शिक्षा मंत्री ने पहली बार इस मुद्दे पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने शिक्षकों को बहुत जिम्मेदारी वाले काम सौंपे थे, लेकिन कुछ लोग इस भरोसे को बनाए रखने में नाकाम रहे। उन्होंने पहली परीक्षा में कुछ लोगों द्वारा किए गए विश्वासघात पर दुख जताया, जिसके कारण परीक्षा को रद्द करना पड़ा था।

राहुल गांधी पर 'सस्ती राजनीति' का आरोप

इसके साथ ही धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष की तरफ से लगाए गए सभी आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब देश के 22 लाख से ज्यादा छात्र दोबारा होने वाली परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, तब राहुल गांधी 'सस्ती राजनीति' कर रहे थे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सिस्टम को सुधारने के लिए कोई अच्छा सुझाव देने के बजाय, कांग्रेस सांसद ने छात्रों को डराने और परीक्षा की तैयारियों को भटकाने की कोशिश की, जिससे देश में भ्रम की स्थिति पैदा हो।

विपक्ष पर बरसे शिक्षा मंत्री

पेपर लीक विवाद और परीक्षा प्रणाली को लेकर विपक्षी दल लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए शिक्षा मंत्री ने विरोध प्रदर्शन कर रहे कुछ संगठनों पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन्हें देश की जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से नकार दिया है, वे अब नए-नए बैनरों के तहत आकर देश की संस्थाओं को निशाना बना रहे हैं और देश को नुकसान पहुँचाने वाली ताकतों के पक्ष में नारे लगा रहे हैं।

दोबारा हुई परीक्षा पूरी तरह सफल

उन्होंने साफ किया कि रविवार को दोबारा हुई परीक्षा पूरी तरह सफल और सुरक्षित रही है। इसके बावजूद जंतर-मंतर पर कुछ गुटों द्वारा केवल व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए राजनीति की जा रही है, जो कि बिल्कुल भी ठीक नहीं है। सरकार छात्रों के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है और आगे व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

पूंजीपथरा प्लांट हादसे की जांच शुरू, पुलिस जुटी कारणों की पड़ताल में

0

रायगढ़ छत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र पूंजीपथरा में स्थित रायगढ़ इस्पात प्लांट (Raigarh Ispat Plant) में मंगलवार को एक गंभीर औद्योगिक दुर्घटना घटित हो गई. कारखाने में काम के दौरान अचानक फर्नेस (भट्टी) पंचर हो गया, जिससे निकले अत्यधिक गर्म पिघले हुए लोहे (Molten Metal) की चपेट में आने से वहां कार्यरत तीन श्रमिक झुलस गए.

निजी अस्पताल में उपचार जारी, स्थिति नियंत्रण में

हादसे के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. प्रबंधन ने मुस्तैदी दिखाते हुए तीनों घायल कर्मचारियों को तत्काल पास के एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया. चिकित्सकों के अनुसार, त्वरित चिकित्सा सुविधा मिलने की वजह से फिलहाल तीनों मजदूरों की हालत स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं.

कारणों का पता लगाने में जुटी पुलिस और प्रबंधन

औद्योगिक दुर्घटना की जानकारी मिलते ही पूंजीपथरा थाना पुलिस की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति का मुआयना किया. पुलिस ने मामले में शुरुआती डायरी दर्ज कर तफ्तीश आरंभ कर दी है. यह हादसा किसी तकनीकी खामी की वजह से हुआ या फिर सुरक्षा नियमों की अनदेखी इसका कारण थी, इसकी गहनता से जांच की जा रही है. प्रबंधन और स्थानीय पुलिस की टीम दुर्घटना की असली वजह तलाशने में लगी है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद कानून के मुताबिक आगे की उचित कार्रवाई की जाएगी.

डुमना सहित शहर के कई स्पॉट का बदला जाएगा नाम, अब रानी दुर्गावती के नाम से मिलेंगी नई पहचान

0

जबलपुर. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीरांगना रानी दुर्गावती को नमन करते हुए एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि जबलपुर में रानी दुर्गावती के नाम पर एक भव्य चिड़ियाघर (जू) और रेस्क्यू सेंटर बनाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। जबलपुर के ठाकुर ताल में करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से इस विशाल परियोजना का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की मांग पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि डुमना एयरपोर्ट का नाम बदलकर 'रानी दुर्गावती एयरपोर्ट' किए जाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से चर्चा की जाएगी और इसे आगे बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री बरगी स्थित वीरांगना के नरई नाला समाधि स्थल पर आयोजित रानी दुर्गावती बलिदान दिवस के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।

किसानों को मिली बड़ी राहत, अब साल भर में चुका सकेंगे लोन

रानी दुर्गावती बलिदान दिवस के इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश के किसानों के हित में भी एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों को कर्ज चुकाने के तय नियमों में ढील देते हुए 31 मार्च की पुरानी और अनिवार्य समय सीमा के झंझट को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है। अब राज्य के किसान जिस तारीख को बैंक से लोन लेंगे, उन्हें उसे चुकाने के लिए पूरे एक साल यानी अगली उसी तारीख तक का पूरा समय मिलेगा।

बदली व्यवस्था से बढ़ेगी किसानों की समृद्धि

इस नई व्यवस्था को सरल शब्दों में समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मान लीजिए यदि किसी किसान ने 30 जून को बैंक से लोन लिया है, तो अब उसे अगले साल 30 जून तक ही उसे वापस भरने की सुविधा मिलेगी। इससे किसानों पर बेवजह का मानसिक और आर्थिक दबाव नहीं रहेगा और उनके लिए समृद्धि के नए रास्ते खुलेंगे। इस नई ऋण योजना को सुचारू रूप से चलाने और किसानों को राहत देने के लिए सरकार अपनी तरफ से 880 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार उठाएगी, ताकि प्रदेश के अन्नदाताओं का ज्यादा से ज्यादा भला हो सके।

क्रॉस वोटिंग पर भाजपा सख्त, संदिग्ध MLAs की रिपोर्ट शीर्ष नेतृत्व के पास

0

नई दिल्ली: कर्नाटक विधान परिषद (MLC) चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी लाइन से अलग हटकर क्रॉस-वोटिंग करने वाले बागी विधायकों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने मंगलवार को नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं से मुलाकात की और चुनाव के दौरान हुए पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी।

शुरुआती अटकलों में कहा जा रहा था कि केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य के इन दोनों बड़े नेताओं को दिल्ली तलब किया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक विजयेंद्र और अशोक ने खुद दिल्ली आकर राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने स्थिति स्पष्ट करने की पेशकश की थी।

गुप्त मतदान बना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती

भाजपा के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती उन 'विभीषणों' (क्रॉस-वोटिंग करने वाले विधायकों) की सटीक पहचान करना है जिन्होंने जेडीएस-भाजपा गठबंधन के बजाय कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया। राज्यसभा चुनाव के विपरीत, जहां विधायकों को पार्टी के अधिकृत एजेंट को अपना मत दिखाना अनिवार्य होता है, विधान परिषद का चुनाव पूरी तरह गुप्त मतदान (Secret Ballot) के जरिए होता है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि चूंकि किसी को भी अपना वोट दिखाने की जरूरत नहीं थी, इसलिए क्रॉस-वोटिंग करने वाले सटीक विधायकों को पकड़ना घास के ढेर में सुई ढूंढने जैसा बेहद पेचीदा काम बन गया है। हालांकि, शुरुआती जांच के आधार पर करीब एक दर्जन संदिग्ध विधायकों की एक शॉर्टलिस्ट तैयार की गई है, जिनमें से 3 से 4 विधायकों के क्रॉस-वोट करने की प्रबल आशंका है।

कहां गड़बड़ाया NDA का गणित?

16 जून को घोषित हुए नतीजों के बाद भाजपा के आंतरिक समीकरणों में बड़ी कमियां उजागर हुईं:

  • एनडीए (NDA) के 11 विधायकों ने गठबंधन के सहयोगी जेडीएस (JDS) उम्मीदवार गोविंदराजू के पक्ष में मतदान नहीं किया।

  • भाजपा के 4 वोट अप्रभावी रहे।

  • एक वोट को तकनीकी कमियों के चलते पूरी तरह अमान्य (Invalide) घोषित कर दिया गया।

  • भाजपा विधायकों द्वारा कम से कम 3 मामलों में सीधी क्रॉस-वोटिंग की पुष्टि हो चुकी है।

सीटी रवि कमेटी 25 जून को सौंपेगी रिपोर्ट

चुनाव के तुरंत बाद भाजपा ने वरिष्ठ नेता सीटी रवि के नेतृत्व में एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था। इस समिति का मुख्य काम उन 3-4 विधायकों की पहचान करना है जिन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को जिताने में पर्दे के पीछे से मदद की।

यह कमेटी 25 जून को अपनी पहली विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र को सौंपने जा रही है। दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए विपक्ष के नेता आर. अशोक ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि रिपोर्ट में जिन भी विधायकों के नाम सामने आएंगे, उनके खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों के तहत कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

Trent AGM में बड़ा एलान, नोएल टाटा ने चेयरमैन पद से इस्तीफा देने की घोषणा की

0

मुंबई: टाटा ग्रुप की दिग्गज रिटेल कंपनी 'ट्रेंट' (Trent) को भारतीय बाजार में एक नई पहचान दिलाने वाले नोएल टाटा जल्द ही चेयरमैन पद की जिम्मेदारी से मुक्त होने जा रहे हैं। लगभग तीस वर्षों तक कंपनी को अपनी सेवाएं देने के बाद उन्होंने ट्रेंट की 47वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) के दौरान इस बात का आधिकारिक ऐलान किया। शेयरहोल्डर्स को संबोधित करते हुए नोएल टाटा ने भावुक अंदाज में कहा कि बतौर चेयरमैन यह उनकी अंतिम एजीएम है। इस वर्ष नवंबर में 70 वर्ष के होने जा रहे नोएल टाटा टाटा समूह के आंतरिक नियमों के मुताबिक सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिसके तहत नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के लिए अधिकतम उम्र सीमा 70 साल तय है।

सिमोन टाटा के सपने को नोएल ने दिया नया आसमान

ट्रेंट के विशाल साम्राज्य को खड़ा करने में नोएल टाटा और उनके परिवार का योगदान अतुलनीय है। इस कंपनी की शुरुआत उनकी माता सिमोन टाटा ने की थी। नोएल टाटा साल 1998 में कंपनी के बोर्ड में बतौर डायरेक्टर शामिल हुए और ठीक एक साल बाद 1999 में उन्होंने कंपनी के पहले मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) के रूप में कार्यभार संभाला। इसके बाद उन्होंने अपनी दूरगामी सोच से कंपनी की पूरी रिटेल रणनीति को बदलकर रख दिया।

वेस्टसाइड से जूडियो तक; 1,200 स्टोर्स का विशाल नेटवर्क

नोएल टाटा के कुशल नेतृत्व का ही नतीजा है कि जो कंपनी कभी महज एक 'वेस्टसाइड' स्टोर के सहारे चल रही थी, वह आज देश के कोने-कोने में 1,200 से अधिक आउटलेट्स के साथ रिटेल सेक्टर की सबसे बड़ी ताकतों में से एक बन चुकी है। विशेष रूप से किफायती फैशन ब्रांड 'जूडियो' (Zudio) और ग्रोसरी चेन 'स्टार' (Star) की अभूतपूर्व सफलता ने ट्रेंट के मुनाफे को कई गुना बढ़ा दिया।

वित्त वर्ष 2025-26 में 19,701 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड रेवेन्यू

वित्तीय मजबूती के लिहाज से भी नोएल टाटा का कार्यकाल ऐतिहासिक रहा है। हालिया संपन्न वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, ट्रेंट की कुल सालाना आय रिकॉर्ड 19,701 करोड़ रुपये के स्तर पर जा पहुँची है। यह शानदार आंकड़ा कंपनी की आक्रामक विस्तार नीति और मजबूत कामकाजी मॉडल का सीधा प्रमाण है।

एक स्वर्णिम युग का अंत; अब टाटा ट्रस्ट्स पर रहेगा पूरा ध्यान

अपनी विदाई के पलों को साझा करते हुए नोएल टाटा ने स्पष्ट किया कि ट्रेंट की यह कामयाबी किसी एक दिन की मेहनत नहीं, बल्कि निरंतर नवाचार और सुधारों का एक लंबा सफर है। उन्होंने भविष्य के लिए जूडियो और स्टार ब्रांड्स को कंपनी की रीढ़ बताया।

विदित हो कि दिवंगत दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा वर्तमान में देश के सबसे बड़े चैरिटेबल ट्रस्ट्स में से एक, 'टाटा ट्रस्ट्स' के प्रमुख की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। कॉर्पोरेट जगत ट्रेंट से उनकी इस विदाई को टाटा समूह के रिटेल इतिहास के एक बेहद सफल और स्वर्णिम अध्याय के समापन के रूप में देख रहा है।

Join Whatsapp Group
Join Our Whatsapp Group