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रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर इजराइल, स्वदेशी हथियार निर्माण पर जोर

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तेल अवीव:इजराइल के प्रधानमंत्री ने देश की सुरक्षा और रक्षा नीतियों को लेकर एक बेहद बड़ा और रणनीतिक बयान दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि इजराइल को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब अमेरिका पर अपनी सैन्य और हथियारों की निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना होगा। प्रधानमंत्री के मुताबिक, भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए इजराइल को अब आत्मनिर्भर बनना होगा और अपने अत्याधुनिक रक्षा उपकरण व हथियार खुद बनाने की क्षमता (सेल्फ-रिलायंस) तेजी से विकसित करनी होगी।

अमेरिका पर निर्भरता कम करने की वजह

इजराइल लंबे समय से आधुनिक हथियारों, मिसाइल डिफेंस सिस्टम (जैसे आयरन डोम के इंटरसेप्टर्स) और सैन्य फंड के लिए बहुत हद तक अमेरिका पर निर्भर रहा है। हालांकि, हाल के दिनों में वैश्विक राजनीति और आंतरिक अमेरिकी राजनीति के बदलते रुख को देखते हुए इजराइली नेतृत्व को यह अहसास हुआ है कि किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर रहना दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

घरेलू रक्षा उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

इस फैसले के बाद अब इजराइल अपने घरेलू रक्षा विनिर्माण (डोमेस्टिक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग) पर निवेश बढ़ाएगा। इजराइल की राफेल (Rafael), एलबिट सिस्टम्स (Elbit Systems) और इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) जैसी दिग्गज कंपनियां अब घरेलू स्तर पर ही बड़े पैमाने पर हथियारों और गोला-बारूद का उत्पादन शुरू करेंगी, ताकि विदेशी सप्लायर्स पर निर्भरता खत्म की जा सके। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया शांति समझौते के बाद मध्य-पूर्व (मिडल-ईस्ट) के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और इजराइल अपनी भविष्य की सुरक्षा प्राथमिकताओं को नए सिरे से तय कर रहा है।

‘जिन शिक्षकों पर भरोसा था, उन्होंने धोखा दिया’, NEET मामले में धर्मेंद्र प्रधान का खुलासा

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नई दिल्ली. देशभर में बीते कई दिनों से विवादों में चल रहे नीट (NEET-UG) परीक्षा के मामले में अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों पर परीक्षा को सुरक्षित और निष्पक्ष तरीके से कराने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने ही इसके साथ धोखा किया और परीक्षा के भरोसे को नुकसान पहुँचाया। रविवार को दोबारा हुई नीट परीक्षा के बिना किसी गड़बड़ी के पूरे होने के बाद, शिक्षा मंत्री ने पहली बार इस मुद्दे पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने शिक्षकों को बहुत जिम्मेदारी वाले काम सौंपे थे, लेकिन कुछ लोग इस भरोसे को बनाए रखने में नाकाम रहे। उन्होंने पहली परीक्षा में कुछ लोगों द्वारा किए गए विश्वासघात पर दुख जताया, जिसके कारण परीक्षा को रद्द करना पड़ा था।

राहुल गांधी पर 'सस्ती राजनीति' का आरोप

इसके साथ ही धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष की तरफ से लगाए गए सभी आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब देश के 22 लाख से ज्यादा छात्र दोबारा होने वाली परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, तब राहुल गांधी 'सस्ती राजनीति' कर रहे थे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सिस्टम को सुधारने के लिए कोई अच्छा सुझाव देने के बजाय, कांग्रेस सांसद ने छात्रों को डराने और परीक्षा की तैयारियों को भटकाने की कोशिश की, जिससे देश में भ्रम की स्थिति पैदा हो।

विपक्ष पर बरसे शिक्षा मंत्री

पेपर लीक विवाद और परीक्षा प्रणाली को लेकर विपक्षी दल लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए शिक्षा मंत्री ने विरोध प्रदर्शन कर रहे कुछ संगठनों पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन्हें देश की जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से नकार दिया है, वे अब नए-नए बैनरों के तहत आकर देश की संस्थाओं को निशाना बना रहे हैं और देश को नुकसान पहुँचाने वाली ताकतों के पक्ष में नारे लगा रहे हैं।

दोबारा हुई परीक्षा पूरी तरह सफल

उन्होंने साफ किया कि रविवार को दोबारा हुई परीक्षा पूरी तरह सफल और सुरक्षित रही है। इसके बावजूद जंतर-मंतर पर कुछ गुटों द्वारा केवल व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए राजनीति की जा रही है, जो कि बिल्कुल भी ठीक नहीं है। सरकार छात्रों के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है और आगे व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

पूंजीपथरा प्लांट हादसे की जांच शुरू, पुलिस जुटी कारणों की पड़ताल में

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रायगढ़ छत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र पूंजीपथरा में स्थित रायगढ़ इस्पात प्लांट (Raigarh Ispat Plant) में मंगलवार को एक गंभीर औद्योगिक दुर्घटना घटित हो गई. कारखाने में काम के दौरान अचानक फर्नेस (भट्टी) पंचर हो गया, जिससे निकले अत्यधिक गर्म पिघले हुए लोहे (Molten Metal) की चपेट में आने से वहां कार्यरत तीन श्रमिक झुलस गए.

निजी अस्पताल में उपचार जारी, स्थिति नियंत्रण में

हादसे के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. प्रबंधन ने मुस्तैदी दिखाते हुए तीनों घायल कर्मचारियों को तत्काल पास के एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया. चिकित्सकों के अनुसार, त्वरित चिकित्सा सुविधा मिलने की वजह से फिलहाल तीनों मजदूरों की हालत स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं.

कारणों का पता लगाने में जुटी पुलिस और प्रबंधन

औद्योगिक दुर्घटना की जानकारी मिलते ही पूंजीपथरा थाना पुलिस की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति का मुआयना किया. पुलिस ने मामले में शुरुआती डायरी दर्ज कर तफ्तीश आरंभ कर दी है. यह हादसा किसी तकनीकी खामी की वजह से हुआ या फिर सुरक्षा नियमों की अनदेखी इसका कारण थी, इसकी गहनता से जांच की जा रही है. प्रबंधन और स्थानीय पुलिस की टीम दुर्घटना की असली वजह तलाशने में लगी है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद कानून के मुताबिक आगे की उचित कार्रवाई की जाएगी.

डुमना सहित शहर के कई स्पॉट का बदला जाएगा नाम, अब रानी दुर्गावती के नाम से मिलेंगी नई पहचान

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जबलपुर. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीरांगना रानी दुर्गावती को नमन करते हुए एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि जबलपुर में रानी दुर्गावती के नाम पर एक भव्य चिड़ियाघर (जू) और रेस्क्यू सेंटर बनाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। जबलपुर के ठाकुर ताल में करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से इस विशाल परियोजना का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की मांग पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि डुमना एयरपोर्ट का नाम बदलकर 'रानी दुर्गावती एयरपोर्ट' किए जाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से चर्चा की जाएगी और इसे आगे बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री बरगी स्थित वीरांगना के नरई नाला समाधि स्थल पर आयोजित रानी दुर्गावती बलिदान दिवस के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।

किसानों को मिली बड़ी राहत, अब साल भर में चुका सकेंगे लोन

रानी दुर्गावती बलिदान दिवस के इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश के किसानों के हित में भी एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों को कर्ज चुकाने के तय नियमों में ढील देते हुए 31 मार्च की पुरानी और अनिवार्य समय सीमा के झंझट को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है। अब राज्य के किसान जिस तारीख को बैंक से लोन लेंगे, उन्हें उसे चुकाने के लिए पूरे एक साल यानी अगली उसी तारीख तक का पूरा समय मिलेगा।

बदली व्यवस्था से बढ़ेगी किसानों की समृद्धि

इस नई व्यवस्था को सरल शब्दों में समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मान लीजिए यदि किसी किसान ने 30 जून को बैंक से लोन लिया है, तो अब उसे अगले साल 30 जून तक ही उसे वापस भरने की सुविधा मिलेगी। इससे किसानों पर बेवजह का मानसिक और आर्थिक दबाव नहीं रहेगा और उनके लिए समृद्धि के नए रास्ते खुलेंगे। इस नई ऋण योजना को सुचारू रूप से चलाने और किसानों को राहत देने के लिए सरकार अपनी तरफ से 880 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार उठाएगी, ताकि प्रदेश के अन्नदाताओं का ज्यादा से ज्यादा भला हो सके।

क्रॉस वोटिंग पर भाजपा सख्त, संदिग्ध MLAs की रिपोर्ट शीर्ष नेतृत्व के पास

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नई दिल्ली: कर्नाटक विधान परिषद (MLC) चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी लाइन से अलग हटकर क्रॉस-वोटिंग करने वाले बागी विधायकों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने मंगलवार को नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं से मुलाकात की और चुनाव के दौरान हुए पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी।

शुरुआती अटकलों में कहा जा रहा था कि केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य के इन दोनों बड़े नेताओं को दिल्ली तलब किया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक विजयेंद्र और अशोक ने खुद दिल्ली आकर राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने स्थिति स्पष्ट करने की पेशकश की थी।

गुप्त मतदान बना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती

भाजपा के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती उन 'विभीषणों' (क्रॉस-वोटिंग करने वाले विधायकों) की सटीक पहचान करना है जिन्होंने जेडीएस-भाजपा गठबंधन के बजाय कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया। राज्यसभा चुनाव के विपरीत, जहां विधायकों को पार्टी के अधिकृत एजेंट को अपना मत दिखाना अनिवार्य होता है, विधान परिषद का चुनाव पूरी तरह गुप्त मतदान (Secret Ballot) के जरिए होता है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि चूंकि किसी को भी अपना वोट दिखाने की जरूरत नहीं थी, इसलिए क्रॉस-वोटिंग करने वाले सटीक विधायकों को पकड़ना घास के ढेर में सुई ढूंढने जैसा बेहद पेचीदा काम बन गया है। हालांकि, शुरुआती जांच के आधार पर करीब एक दर्जन संदिग्ध विधायकों की एक शॉर्टलिस्ट तैयार की गई है, जिनमें से 3 से 4 विधायकों के क्रॉस-वोट करने की प्रबल आशंका है।

कहां गड़बड़ाया NDA का गणित?

16 जून को घोषित हुए नतीजों के बाद भाजपा के आंतरिक समीकरणों में बड़ी कमियां उजागर हुईं:

  • एनडीए (NDA) के 11 विधायकों ने गठबंधन के सहयोगी जेडीएस (JDS) उम्मीदवार गोविंदराजू के पक्ष में मतदान नहीं किया।

  • भाजपा के 4 वोट अप्रभावी रहे।

  • एक वोट को तकनीकी कमियों के चलते पूरी तरह अमान्य (Invalide) घोषित कर दिया गया।

  • भाजपा विधायकों द्वारा कम से कम 3 मामलों में सीधी क्रॉस-वोटिंग की पुष्टि हो चुकी है।

सीटी रवि कमेटी 25 जून को सौंपेगी रिपोर्ट

चुनाव के तुरंत बाद भाजपा ने वरिष्ठ नेता सीटी रवि के नेतृत्व में एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था। इस समिति का मुख्य काम उन 3-4 विधायकों की पहचान करना है जिन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को जिताने में पर्दे के पीछे से मदद की।

यह कमेटी 25 जून को अपनी पहली विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र को सौंपने जा रही है। दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए विपक्ष के नेता आर. अशोक ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि रिपोर्ट में जिन भी विधायकों के नाम सामने आएंगे, उनके खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों के तहत कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

Trent AGM में बड़ा एलान, नोएल टाटा ने चेयरमैन पद से इस्तीफा देने की घोषणा की

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मुंबई: टाटा ग्रुप की दिग्गज रिटेल कंपनी 'ट्रेंट' (Trent) को भारतीय बाजार में एक नई पहचान दिलाने वाले नोएल टाटा जल्द ही चेयरमैन पद की जिम्मेदारी से मुक्त होने जा रहे हैं। लगभग तीस वर्षों तक कंपनी को अपनी सेवाएं देने के बाद उन्होंने ट्रेंट की 47वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) के दौरान इस बात का आधिकारिक ऐलान किया। शेयरहोल्डर्स को संबोधित करते हुए नोएल टाटा ने भावुक अंदाज में कहा कि बतौर चेयरमैन यह उनकी अंतिम एजीएम है। इस वर्ष नवंबर में 70 वर्ष के होने जा रहे नोएल टाटा टाटा समूह के आंतरिक नियमों के मुताबिक सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिसके तहत नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के लिए अधिकतम उम्र सीमा 70 साल तय है।

सिमोन टाटा के सपने को नोएल ने दिया नया आसमान

ट्रेंट के विशाल साम्राज्य को खड़ा करने में नोएल टाटा और उनके परिवार का योगदान अतुलनीय है। इस कंपनी की शुरुआत उनकी माता सिमोन टाटा ने की थी। नोएल टाटा साल 1998 में कंपनी के बोर्ड में बतौर डायरेक्टर शामिल हुए और ठीक एक साल बाद 1999 में उन्होंने कंपनी के पहले मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) के रूप में कार्यभार संभाला। इसके बाद उन्होंने अपनी दूरगामी सोच से कंपनी की पूरी रिटेल रणनीति को बदलकर रख दिया।

वेस्टसाइड से जूडियो तक; 1,200 स्टोर्स का विशाल नेटवर्क

नोएल टाटा के कुशल नेतृत्व का ही नतीजा है कि जो कंपनी कभी महज एक 'वेस्टसाइड' स्टोर के सहारे चल रही थी, वह आज देश के कोने-कोने में 1,200 से अधिक आउटलेट्स के साथ रिटेल सेक्टर की सबसे बड़ी ताकतों में से एक बन चुकी है। विशेष रूप से किफायती फैशन ब्रांड 'जूडियो' (Zudio) और ग्रोसरी चेन 'स्टार' (Star) की अभूतपूर्व सफलता ने ट्रेंट के मुनाफे को कई गुना बढ़ा दिया।

वित्त वर्ष 2025-26 में 19,701 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड रेवेन्यू

वित्तीय मजबूती के लिहाज से भी नोएल टाटा का कार्यकाल ऐतिहासिक रहा है। हालिया संपन्न वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, ट्रेंट की कुल सालाना आय रिकॉर्ड 19,701 करोड़ रुपये के स्तर पर जा पहुँची है। यह शानदार आंकड़ा कंपनी की आक्रामक विस्तार नीति और मजबूत कामकाजी मॉडल का सीधा प्रमाण है।

एक स्वर्णिम युग का अंत; अब टाटा ट्रस्ट्स पर रहेगा पूरा ध्यान

अपनी विदाई के पलों को साझा करते हुए नोएल टाटा ने स्पष्ट किया कि ट्रेंट की यह कामयाबी किसी एक दिन की मेहनत नहीं, बल्कि निरंतर नवाचार और सुधारों का एक लंबा सफर है। उन्होंने भविष्य के लिए जूडियो और स्टार ब्रांड्स को कंपनी की रीढ़ बताया।

विदित हो कि दिवंगत दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा वर्तमान में देश के सबसे बड़े चैरिटेबल ट्रस्ट्स में से एक, 'टाटा ट्रस्ट्स' के प्रमुख की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। कॉर्पोरेट जगत ट्रेंट से उनकी इस विदाई को टाटा समूह के रिटेल इतिहास के एक बेहद सफल और स्वर्णिम अध्याय के समापन के रूप में देख रहा है।

एक छोटी सी चूक और बड़ा दर्द, जानिए जिम में कैसे बचें सिर-गर्दन की समस्या से

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खुद को फिट और तंदुरुस्त रखने के लिए आज के दौर में युवाओं से लेकर हर उम्र के लोग जिम में पसीना बहा रहे हैं। हालांकि, एक परफेक्ट बॉडी और बेहतर स्टैमिना पाने की होड़ में कई बार लोग अनजाने में कुछ ऐसी शारीरिक गलतियाँ कर बैठते हैं, जो उनकी सेहत पर भारी पड़ सकती हैं। अक्सर देखा गया है कि इंटेंस वर्कआउट (कठिन कसरत) करने के अगले दिन कुछ लोगों को गर्दन में भीषण जकड़न, सिर के पिछले हिस्से में भारीपन या पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द महसूस होने लगता है। अमूमन लोग इसे कसरत के बाद होने वाला सामान्य मांसपेशियों का खिंचाव समझकर इग्नोर कर देते हैं, लेकिन फिटनेस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसके पीछे कसरत के दौरान होने वाली एक बेहद अनजानी मगर आम आदत जिम्मेदार होती है। आइए जानते हैं क्या है यह गलती और इससे कैसे बचा जाए।

क्या है वह अनजानी गलती जो बढ़ाती है दर्द?

जिम में कसरत के दौरान बहुत से लोग अनजाने में अपने जबड़ों को सिकोड़ लेते हैं और दांतों को आपस में जोर से भींचने या पीसने लगते हैं। यह आदत आमतौर पर तब देखने को मिलती है जब कोई हैवी वेट लिफ्टिंग (भारी वजन उठाना), पुश-अप्स, कोर को मजबूत करने वाला प्लैंक या फिर भारी डेडलिफ्ट जैसी कठिन एक्सरसाइज कर रहा होता है।

दांत भींचने से सिर और गर्दन के दर्द का क्या है कनेक्शन?

  • तनाव वाला सिर दर्द: एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब कोई एक्सरसाइज के दौरान दांतों को कसकर दबाता है, तो जबड़े की मांसपेशियों पर लगातार दबाव बनता है। यह प्रेशर धीरे-धीरे सिर के किनारों पर मौजूद टेम्पोरल मसल्स और गर्दन की नसों तक फैल जाता है। यही वजह है कि वर्कआउट खत्म होने के बाद सिर में भारीपन और माइग्रेन जैसा दर्द शुरू हो जाता है।

  • गर्दन में अकड़न: हमारे जबड़े और गर्दन का मस्कुलर सिस्टम (मांसपेशियां) आपस में गहराई से जुड़ा हुआ है। दांतों पर अत्यधिक दबाव पड़ने से गर्दन की मांसपेशियां भी जरूरत से ज्यादा सख्त हो जाती हैं। इसके चलते अगले दिन सोकर उठने पर गर्दन को घुमाने में तकलीफ और दर्द का सामना करना पड़ता है।

किन लोगों में होती है यह आदत ज्यादा?

  1. हैवी वेट लिफ्टर्स: जो लोग अपनी क्षमता से अधिक भारी वजन उठाते हैं।

  2. शुरुआती लोग (बिगिनर्स): जो जिम में नए हैं और जिन्हें अभी सही पोस्चर की समझ नहीं है।

  3. तनावग्रस्त लोग: जो मानसिक तनाव या चिंता के चलते अनजाने में ही शरीर को टाइट रखते हैं।

  4. गलत ब्रीदिंग तकनीक वाले: जो कसरत के दौरान अपनी सांस को रोककर रखते हैं।

इस समस्या से बचने के कारगर उपाय

अगर आप भी इस दर्द से निजात पाना चाहते हैं, तो वर्कआउट के दौरान इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • जबड़े को ढीला छोड़ें: कसरत करते समय सजग रहें और अपने जबड़े को बिल्कुल रिलैक्स रखें। दोनों दांतों के बीच थोड़ा अंतर बनाए रखें।

  • सही तरीके से सांस लें: भारी वजन उठाते समय सांस को रोकने के बजाय सही तकनीक से सांस अंदर लें और बाहर छोड़ें। इससे शरीर पर फालतू दबाव नहीं बनता।

  • ट्रेनर की सलाह लें: यदि आपकी यह आदत खुद से नहीं सुधर रही है, तो अपने जिम ट्रेनर को इस बारे में बताएं ताकि वे एक्सरसाइज के दौरान आपके पोस्चर पर नजर रख सकें।

  • माउथगार्ड का उपयोग: अगर समस्या गंभीर है और दांत पीसने की आदत नहीं छूट रही है, तो डेंटिस्ट (दंत चिकित्सक) की सलाह पर जिम के लिए कस्टमाइज्ड माउथगार्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है।

  • विशेष नोट: यदि कसरत के बाद बार-बार कानों के पास दबाव, जबड़े में खिंचाव या सिर दर्द की समस्या बनी रहती है, तो इसे केवल थकान न मानें। अपनी इस छोटी सी आदत को सुधारकर आप अपने वर्कआउट को अधिक सुरक्षित और सेहतमंद बना सकते हैं।

दुनिया की ऊर्जा लाइफलाइन सक्रिय, होर्मुज जलडमरूमध्य से 1.9 करोड़ बैरल तेल पार

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वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि सोमवार को 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से रिकॉर्ड 1.9 करोड़ (19 मिलियन) बैरल कच्चे तेल की आवाजाही हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक, वैश्विक तेल व्यापार के इतिहास में एक ही दिन के भीतर इस समुद्री मार्ग से कच्चे तेल की इतनी बड़ी मात्रा की सप्लाई होना अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।

शांति समझौते का सीधा असर

अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद इस क्षेत्र में बना सैन्य तनाव काफी कम हुआ है। पहले जहां युद्ध और जहाजों के पकड़े जाने के डर से तेल टैंकर इस रूट पर आने से कतरा रहे थे, वहीं अब तनाव घटने के बाद से व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों ने पूरी क्षमता के साथ इस मार्ग का उपयोग करना शुरू कर दिया है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए संजीवनी

होर्मुज स्ट्रेट से रिकॉर्ड मात्रा में तेल की इस सुरक्षित निकासी से वैश्विक ऊर्जा बाजार (ग्लोबल एनर्जी मार्केट) ने बड़ी राहत की सांस ली है। कच्चे तेल की इतनी भारी और निर्बाध सप्लाई से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी, जिससे भारत सहित दुनिया के तमाम बड़े आयातक देशों को बड़ी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

बिना Form 16 भी भर सकते हैं ITR, जानिए स्टेप-बाय-स्टेप पूरा प्रोसेस

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नई दिल्ली: देश में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का सीजन शुरू होते ही नौकरीपेशा कर्मचारियों के बीच फॉर्म 16 (Form 16) को लेकर सुगबुगाहट तेज हो जाती है। यह दस्तावेज टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया को बेहद सरल बना देता है। हालांकि, कई बार बीच में नौकरी बदलने, संस्थान के बंद होने या न्यूनतम वेतन सीमा जैसी वजहों से कर्मचारियों को यह फॉर्म नहीं मिल पाता। ऐसे में परेशान होने की जरूरत नहीं है; क्योंकि आयकर विभाग के नियमों के मुताबिक, फॉर्म 16 के बिना भी आप अपना रिटर्न बेहद आसानी से दाखिल कर सकते हैं।

क्या होता है फॉर्म 16 और क्या यह अनिवार्य है?

सरल शब्दों में कहें तो फॉर्म 16 आपकी कंपनी द्वारा जारी किया जाने वाला एक प्रामाणिक टैक्स सर्टिफिकेट है। इसमें आपकी सालाना सैलरी, भत्ते, काटा गया टीडीएस (TDS) और टैक्स सेविंग्स क्लेम की पूरी जानकारी होती है।

आयकर विशेषज्ञों का कहना है कि यह फॉर्म निश्चित रूप से आईटीआर भरने में मददगार है, लेकिन टैक्स डिपार्टमेंट ने रिटर्न फाइल करने के लिए इसे कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं बनाया है। आप कुछ अन्य वित्तीय दस्तावेजों की मदद से भी अपना रिटर्न खुद जमा कर सकते हैं।

बिना फॉर्म 16 के रिटर्न फाइल करने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका

यदि आपके पास फॉर्म 16 उपलब्ध नहीं है, तो आप नीचे दिए गए तरीकों से अपनी टैक्स फाइलिंग पूरी कर सकते हैं:

  • सैलरी स्लिप्स को आधार बनाएं: सबसे पहले संबंधित वित्त वर्ष की अपनी सभी महीनों की सैलरी स्लिप (वेतन पर्ची) इकट्ठा करें। इसमें आपकी बेसिक सैलरी, हाउस रेंट अलाउंस (HRA), स्पेशल अलाउंस और भविष्य निधि (PF) कटौती का पूरा विवरण होता है। अगर आपने साल के बीच में नौकरी बदली है, तो दोनों नियोक्ताओं की सैलरी स्लिप साथ रखें।

  • AIS और TIS पोर्टल की मदद लें: इनकम टैक्स की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन करके अपना एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) डाउनलोड करें। इस डिजिटल स्टेटमेंट में आपकी सैलरी, बचत खाते का ब्याज, डिविडेंड और शेयर बाजार से होने वाली कमाई का सटीक ब्योरा दर्ज होता है।

  • फॉर्म 26AS से टैक्स मिलान करें: रिटर्न सबमिट करने से पहले फॉर्म 26AS का बारीकी से अध्ययन करें। यह आपके पैन (PAN) कार्ड से लिंक एक टैक्स पासबुक है, जो यह दर्शाती है कि आपकी कंपनी या बैंक ने आपके नाम पर कुल कितना टीडीएस (TDS) काटा और सरकार को जमा किया है।

अन्य स्रोतों से होने वाली कमाई को न छुपाएं

अक्सर टैक्सपेयर्स केवल अपनी मुख्य सैलरी की जानकारी पोर्टल पर भरते हैं और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज या अन्य निवेशों से होने वाले मुनाफे को छोड़ देते हैं। ऐसी चूक होने पर आयकर विभाग से स्क्रूटनी का नोटिस आ सकता है। इसलिए बैंक स्टेटमेंट और निवेश पोर्टफोलियो को देखकर सभी प्रकार की आदमनी को कुल आय में जोड़ें।

डिडक्शन क्लेम और नौकरी बदलने वाले रखें विशेष ध्यान

अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) के तहत रिटर्न फाइल कर रहे हैं, तो धारा 80C, 80D, होम लोन के ब्याज और एनपीएस (NPS) में किए गए निवेश पर मिलने वाली छूट का पूरा लाभ उठाएं।

अंबिकापुर के निजी अस्पताल में बड़ी कार्रवाई, निरीक्षण के दौरान डॉक्टर मिले नदारद

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अंबिकापुर| शहर में संचालित DHT केयर हॉस्पिटल में नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के तहत प्रशासनिक दल द्वारा औचक निरीक्षण किया गया. कलेक्टर के आदेश पर बनाई गई पांच सदस्यीय टीम ने जब अस्पताल की व्यवस्थाओं को परखा, तो वहां नियमों की गंभीर अनदेखी पाई गई.

ड्यूटी से डॉक्टर नदारद, अप्रशिक्षित स्टाफ के भरोसे मरीज

औचक जांच के वक्त टीम को अस्पताल में कोई भी ड्यूटी डॉक्टर तैनात नहीं मिला. मरीजों का इलाज बिना ट्रेनिंग वाले नर्सिंग स्टाफ द्वारा किए जाने का मामला प्रकाश में आया है. इसके साथ ही जब अस्पताल के रिकॉर्ड खंगाले गए, तो अधिकांश दस्तावेज अधूरे मिले. कर्मचारियों का उपस्थिति रजिस्टर (अटेंडेंस रजिस्टर) भी कई दिनों से अपडेट नहीं किया गया था, जो प्रबंधन की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है.

सरकारी डॉक्टरों के होर्डिंग पर कार्रवाई

जांच टीम के पहुंचने के काफी देर बाद डॉ. मनोज सिंह अस्पताल पहुंचे, लेकिन उनका नाम भी स्टाफ अटेंडेंस रजिस्टर में दर्ज नहीं था. गौरतलब है कि इस अस्पताल के खिलाफ फर्जी डॉक्टरों और सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा सेवाएं दिए जाने की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई. जांच के दौरान अस्पताल परिसर में लगे सरकारी डॉक्टर अशोक तिर्की के होर्डिंग को प्रशासन ने तुरंत हटवा दिया. टीम ने प्रबंधन को सख्त हिदायत देते हुए जल्द से जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं.

नोडल अधिकारी का बयान: पंजीयन हो सकता है रद्द

नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी पी.के. सिन्हा ने जानकारी दी कि निरीक्षण के दौरान अस्पताल में व्यापक पैमाने पर अनियमितताएं मिली हैं. सभी दस्तावेजों और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद नियमानुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने बताया कि नियमों के विरुद्ध जाकर अस्पताल में सरकारी डॉक्टर अशोक टोप्पो का बोर्ड लगाया गया था, जिसे टीम ने हटवा दिया है, क्योंकि शासकीय सेवा में कार्यरत डॉक्टर निजी अस्पतालों में कार्य नहीं कर सकते.

अधिकारी ने आगे बताया कि इस गंभीर लापरवाही को लेकर अस्पताल प्रबंधन को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का नोटिस भेजा जा रहा है. यदि तय समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो अस्पताल का रजिस्ट्रेशन (पंजीयन) निरस्त कर दिया जाएगा.

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