Home Blog Page 90

करीना की चुनौती पर बुमराह का दमदार जवाब, बोले- मुझे बिल्कुल शक नहीं

0

भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री करीना कपूर खान द्वारा दी गई एक मजेदार चुनौती पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। दरअसल, करीना ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर बड़े बेटे तैमूर अली खान के साथ क्रिकेट खेलते हुए कुछ तस्वीरें साझा की थीं। इन तस्वीरों के साथ उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में बुमराह को ललकारते हुए लिखा था कि वे खेल के मामले में उन्हें भी कड़ी टक्कर दे सकती हैं। अब टीम इंडिया के इस यॉर्कर किंग ने इस पर बेहद दिलचस्प जवाब दिया है।

क्या था करीना कपूर का सोशल मीडिया पोस्ट?

अभिनेत्री करीना कपूर ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर कुछ तस्वीरें पोस्ट की थीं, जिसमें वे धूप में बेटे तैमूर के साथ बैट-बॉल का लुत्फ उठाती नजर आ रही थीं। एक फोटो में करीना हाथ में गेंद थामे गेंदबाजी के एक्शन में दिखाई दे रही थीं। इसी पोस्ट के कैप्शन में उन्होंने मजाकिया लहजे में जसप्रीत बुमराह को टैग करते हुए लिखा था, "मेरे हुनर को हल्के में मत लीजिए, मैं बुमराह को भी कड़ी टक्कर देने का दम रखती हूँ।"

तेज गेंदबाज ने भी चुटीले अंदाज में दिया रिप्लाई

करीना की इस गुगली पर जसप्रीत बुमराह ने भी शानदार शॉट खेला। उन्होंने इस पोस्ट को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर री-शेयर करते हुए चुटकी ली और लिखा, "मुझे इस बात पर रत्ती भर भी संदेह नहीं है। आप वाकई में बेहद प्रतिभाशाली हैं।" बुमराह ने अपने इस जवाब के साथ हंसने वाले इमोजी का भी इस्तेमाल किया। खेल और सिनेमा जगत के इन दो बड़े सितारों के बीच सोशल मीडिया पर हुई इस मजेदार बातचीत को फैंस काफी पसंद कर रहे हैं।

इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज से मैदान पर लौटेंगे बुमराह

भारत के मुख्य तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह आईपीएल 2026 के समापन के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर चल रहे हैं। वर्कलोड मैनेजमेंट के तहत उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ हुए एकमात्र टेस्ट मैच और तीन मैचों की एकदिवसीय सीरीज के दौरान विश्राम दिया गया था। इसके अलावा, वे आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की टी-20 सीरीज और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली पांच मैचों की टी-20 श्रृंखला का भी हिस्सा नहीं हैं। हालांकि, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा इंग्लैंड के खिलाफ घोषित की गई तीन मैचों की वनडे टीम में बुमराह की वापसी हो गई है, जहाँ वे एक बार फिर अपनी रफ्तार का जादू बिखेरते नजर आएंगे।

यशस्वी जायसवाल को लेकर भी चर्चाएं गर्म, IPL ट्रेड बाजार में हलचल

0

आईपीएल 2027 के सीजन की शुरुआत में अभी काफी समय शेष है, लेकिन फ्रेंचाइजी टीमों ने अभी से अपनी गोटियां बिछाना और रणनीतियां बनाना शुरू कर दिया है। मुंबई इंडियंस में ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या की घर वापसी उम्मीद के मुताबिक अच्छी नहीं रही है। जब से वे दोबारा टीम के साथ जुड़े हैं, तब से उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन और टीम के नतीजों, दोनों में गिरावट देखी गई है। अब क्रिकेट गलियारों से यह बड़ी खबर आ रही है कि हार्दिक मुंबई फ्रेंचाइजी से अपना नाता तोड़ सकते हैं, और इस रेस में उन्हें दो बड़ी टीमों से प्रस्ताव भी मिल चुके हैं।

केकेआर की मुंबई मैनेजमेंट के साथ बातचीत जारी

शाहरुख खान के मालिकाना हक वाली कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) और राजस्थान रॉयल्स ने हार्दिक को अपनी टीम में शामिल करने की इच्छा जताई है। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, नाइट राइडर्स के आला अधिकारियों और मुंबई इंडियंस के मालिकों के बीच 'प्लेयर स्वैपिंग' (खिलाड़ियों की अदला-बदली) को लेकर कई दौर की चर्चा हो चुकी है। सूत्र ने बताया कि अजिंक्य रहाणे कोलकाता के लिए सिर्फ एक अस्थाई विकल्प थे और इस सीजन के बाद उनका रिलीज होना लगभग तय है। केकेआर मैनेजमेंट ने पिछले सीजन के अंत में भी मुंबई से संपर्क किया था, लेकिन तब रिलायंस की एजीएम (वार्षिक आम बैठक) के चलते इस पर बात आगे नहीं बढ़ सकी थी। अब दोनों फ्रेंचाइजी के बीच दोबारा सक्रिय बातचीत शुरू हो गई है।

अगर हार्दिक कैश डील या खिलाड़ियों की अदला-बदली के तहत कोलकाता जाते हैं, तो उन्हें टीम की कमान सौंपी जा सकती है, क्योंकि कप्तानी के लिए रिंकू सिंह अभी पूरी तरह तैयार नजर नहीं आ रहे हैं।

ट्रेडिंग को लेकर क्या हैं आईपीएल के नियम?

  • आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के नियमों के मुताबिक, कोई भी खिलाड़ी सीधे तौर पर किसी दूसरी फ्रेंचाइजी से व्यक्तिगत बातचीत या सौदेबाजी नहीं कर सकता।

  • खिलाड़ियों के ट्रांसफर या ट्रेड को लेकर आधिकारिक बातचीत सिर्फ दोनों संबंधित फ्रेंचाइजी के बीच ही संभव है।

  • यह भी स्पष्ट है कि किसी भी खिलाड़ी का ट्रेड उसकी खुद की लिखित सहमति के बिना नहीं किया जा सकता।

  • यदि खिलाड़ी टीम बदलने के लिए राजी नहीं होता, तो फ्रेंचाइजी के पास उसे रिलीज कर दोबारा मेगा ऑक्शन (नीलामी) में भेजने का ही विकल्प बचता है।

राजस्थान रॉयल्स की तरफ से भी मिला बड़ा प्रस्ताव

मुंबई को दूसरा ऑफर राजस्थान रॉयल्स की तरफ से यशस्वी जायसवाल और हार्दिक पांड्या के बीच अदला-बदली के रूप में मिला है। हालांकि, यह बातचीत किस स्तर तक पहुँची है, इसकी पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। रॉयल्स की टीम गुवाहाटी (असम) के युवा स्टार रियान पराग को भविष्य के दीर्घकालिक कप्तान के रूप में तैयार कर रही है, इसलिए हार्दिक को वहाँ लीडरशिप की भूमिका मिलना मुश्किल लग रहा है। ऐसे में कप्तानी और सहूलियत के लिहाज से राजस्थान के मुकाबले कोलकाता की टीम हार्दिक के लिए ज्यादा बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।

शिशुकुंज स्कूल फूड पॉइजनिंग केस में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, 23 नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार

0

इंदौर: इंदौर के प्रतिष्ठित द शिशुकुंज इंटरनेशनल स्कूल में दूषित भोजन (फूड पॉइजनिंग) के कारण 150 से अधिक बच्चों की तबीयत बिगड़ने का मामला लगातार गरमाया हुआ है। शनिवार को स्कूल में परोसे गए लंच के बाद इतनी बड़ी संख्या में छात्र बीमार हुए थे। घटना के बाद से ही जिला प्रशासन, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में हैं। इस बीच मंगलवार को स्कूल में बच्चों की उपस्थिति काफी कम दर्ज की गई, और जो बच्चे स्कूल पहुंचे भी, वे प्रबंधन की सलाह पर अपने घरों से टिफिन लेकर आए।

स्कूल का किचन सील, बच्चों को घर से भोजन लाने की सलाह

हादसे के तुरंत बाद स्कूल प्रबंधन ने सभी अभिभावकों को ई-मेल भेजकर स्थिति सामान्य होने तक बच्चों को घर से ही खाना भेजने की सलाह दी थी। वहीं, प्रशासनिक कार्रवाई के तहत स्कूल परिसर में संचालित मुख्य रसोई (किचन) को पूरी तरह सील कर दिया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव हसानी ने बताया कि स्कूल प्रशासन ने एहतियातन उसी दिन 85 विद्यार्थियों को घर भेज दिया था, जबकि कई अन्य अभिभावकों ने बाद में ई-मेल के जरिए बच्चों के अस्वस्थ होने की सूचना दी।

डॉक्टरों की टीमें पहुंचीं बच्चों के घर, सेहत पर रखी जा रही नजर

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित बच्चों की सघन मॉनिटरिंग (निगरानी) शुरू कर दी है:

  • मंगलवार को डॉक्टरों की विशेष टीमों ने प्रभावित बच्चों के घरों पर जाकर उनके स्वास्थ्य की जांच की।

  • स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अच्छी बात यह है कि सभी बच्चों की स्थिति फिलहाल पूरी तरह स्थिर है और किसी भी छात्र को अस्पताल में भर्ती (एडमिट) करने की नौबत नहीं आई है।

  • आने वाले दिनों में डॉक्टरों की टीमें बाकी बचे हुए प्रभावित बच्चों के घर भी जाकर उनके स्वास्थ्य का फीडबैक लेंगी।

मासूमों में गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन के लक्षण

स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती मेडिकल जांच में सामने आया है कि बीमार हुए अधिकांश बच्चों में गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट और आंतों में सूजन व संक्रमण) और डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) जैसे लक्षण पाए गए हैं। शनिवार को लंच करने के कुछ ही देर बाद बच्चों ने पेट दर्द, उल्टी, घबराहट और कमजोरी की शिकायत की थी। प्रभावित छात्रों में सबसे बड़ी संख्या चौथी कक्षा (क्लास 4) तक के छोटे बच्चों की है। घटना से गुस्साए और चिंतित अभिभावकों ने स्कूल पहुंचकर प्रबंधन से तीखे सवाल भी किए थे।

किचन में मिली एक्सपायरी डेट की सामग्री, 23 सैंपलों की रिपोर्ट का इंतजार

जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) की संयुक्त टीम ने जब स्कूल के किचन का औचक निरीक्षण किया, तो वहां कुछ खाद्य सामग्रियां एक्सपायरी डेट (उपयोग की समय सीमा) खत्म होने के बाद भी रखी पाई गईं। इसके बाद ही तत्काल प्रभाव से किचन को सील किया गया।

जांच टीम ने किचन से पनीर, दूध, दाल, मसाले, तैयार भोजन, आइसक्रीम और पीने के पानी समेत कुल 23 संदिग्ध नमूने (सैंपल्स) एकत्र किए हैं। इन सभी नमूनों को सूक्ष्म जांच के लिए शासकीय प्रयोगशाला (लैब) भेज दिया गया है। अधिकारियों का साफ कहना है कि लैब रिपोर्ट आने के बाद ही फूड पॉइजनिंग की सटीक वजह साफ हो सकेगी और इसके आधार पर स्कूल प्रबंधन व वेंडर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उद्धव का साथ छोड़ने वाले सांसदों के आरोपों पर सवाल, दावों की सच्चाई आई सामने

0

मुंबई: उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) से बगावत कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट (शिवसेना) में शामिल होने वाले छह सांसदों को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इन सांसदों ने पाला बदलते समय आरोप लगाया था कि उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार की आधिकारिक ‘सांसद निधि’ (MPLADS) वेबसाइट पर उपलब्ध पिछले तीन साल के आंकड़ों ने इन दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन बागी सांसदों ने आवंटित फंड में से महज 1.07% से लेकर 26.84% हिस्सा ही जमीन पर खर्च किया है।

₹100 करोड़ के कुल फंड में से सिर्फ ₹13.60 करोड़ ही हुए खर्च

केंद्र सरकार की ‘सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना’ (MPLADS) के तहत हर लोकसभा सांसद को स्थानीय विकास कार्यों के लिए प्रति वर्ष 5 करोड़ रुपये आवंटित किए जाते हैं। नियम के मुताबिक, यदि यह फंड खर्च नहीं होता, तो बची हुई राशि अगले वित्तीय वर्ष के बजट में जोड़ दी जाती है।

पोर्टल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इन छह सांसदों के खातों में कुल मिलाकर लगभग 100 करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध था। लेकिन पिछले दो वित्तीय वर्षों और इस साल की पहली तिमाही (First Quarter) के दौरान इनमें से औसतन केवल 13.60 करोड़ रुपये का ही इस्तेमाल किया जा सका है, जबकि बड़ी राशि बिना खर्च हुए बैंक खातों में ही पड़ी रही।

सांसदों का रिपोर्ट कार्ड: किसने कितना किया काम?

बागी सांसदों द्वारा अपने क्षेत्रों में सुझाए गए और अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स की स्थिति कुछ इस प्रकार है:

  • नागेश पाटिल आष्टीकर (हिंगोली): छह सांसदों में इनका प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। इन्होंने 26.84% फंड खर्च किया। हालांकि, इनके द्वारा प्रस्तावित 107 कार्यों में से केवल 28 ही पूरे हो सके हैं; सीमेंट रोड और कब्रिस्तान की बाउंड्री वॉल जैसे अन्य काम अभी भी जारी हैं।

  • संजय दीना पाटिल (मुंबई नॉर्थ-ईस्ट): इस सूची में इनका प्रदर्शन सबसे खराब दर्ज किया गया। इन्होंने उपलब्ध फंड का महज 1.07% ही इस्तेमाल किया। मैदानों के सौंदर्यीकरण और ड्रेनेज लाइन बिछाने जैसे इनके द्वारा सुझाए गए सभी 40 प्रोजेक्ट्स अब भी अधूरे हैं।

  • ओमराजे निंबालकर (धाराशिव): इन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए 130 काम प्रस्तावित किए थे, जिनमें से 21 पूरे हो चुके हैं और 109 पर काम चल रहा है।

  • संजय जाधव (परभणी): इनके द्वारा अनुशंसित 81 कार्यों में से 25 पूरे हुए हैं, जबकि 56 काम या तो पेंडिंग हैं या प्रक्रिया में हैं।

  • भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी): इन्होंने कुल 137 प्रोजेक्ट्स की सिफारिश की थी, लेकिन जमीन पर अब तक सिर्फ 2 ही पूरे हो सके हैं, जबकि 135 काम अभी भी अधूरे लटके हैं।

  • संजय देशमुख (यवतमाल): इनके द्वारा सुझाए गए 113 कार्यों में से केवल 7 ही पूरे हो पाए हैं, जबकि 106 पर काम चल रहा है।

आंकड़ों पर बागी सांसदों की सफाई

रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद सांसदों की तरफ से भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं:

  • नागेश पाटिल आष्टीकर ने कहा कि पोर्टल के आंकड़ों को गलत संदर्भ में देखा जा रहा है। उन्होंने सफाई दी, "सांसद निधि के तहत मिलने वाले सालाना 5 करोड़ रुपये 6 विधानसभाओं वाले बड़े क्षेत्र के लिए बहुत कम हैं। जब हमने फंड की कमी की बात की थी, तो हमारा इशारा 'जिला योजना और विकास समिति' (DPTC) और राज्य सरकार के भारी-भरकम बजटीय प्रोजेक्ट्स की तरफ था, जो सत्ता पक्ष के समर्थन के बिना पूरे नहीं हो सकते।"

  • ओमराजे निंबालकर ने तर्क दिया, "मेरे काम का आकलन सिर्फ पिछले दो-ढाई साल के आधार पर करना गलत है। मैंने 2019-24 के अपने पिछले कार्यकाल के दौरान क्षेत्र के लिए आवंटित 100% फंड का इस्तेमाल किया था। पोर्टल पर दिख रही रिपोर्ट साल 2024 के बाद के वित्तीय वर्षों की है।" हालांकि, अन्य चार सांसदों ने इस पर फिलहाल कोई बयान नहीं दिया है।

संजय राउत का तीखा हमला

इस रिपोर्ट के सामने आते ही शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता और सांसद संजय राउत ने बागियों पर चौतरफा हमला बोला। राउत ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा:

"ये आधिकारिक आंकड़े साफ गवाही दे रहे हैं कि ये सांसद अपने क्षेत्रों में एमपीलैड्स (MPLADS) फंड का इस्तेमाल करने में बुरी तरह नाकाम रहे हैं। जब 14 करोड़ रुपये का फंड बिना खर्च हुए बेकार पड़ा था, तो उन्हें काम करने से किसने रोका था? अब वे किस विकास और फंड के नाम पर पाला बदल रहे हैं, यह जनता के सामने साफ हो चुका है।"

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत के 11 जहाजों ने होर्मुज पार किया

0

दुबई: अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। इस समझौते के लागू होने के बाद से अब तक भारत से जुड़े 11 बड़े कमर्शियल और व्यापारिक जहाज कच्चे तेल के मुख्य समुद्री मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को सुरक्षित पार कर भारत के लिए रवाना हो चुके हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व

ओमान और ईरान के बीच स्थित होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग है। वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के व्यापार का लगभग पांचवां (20%) हिस्सा इसी तंग रास्ते से होकर गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल खाड़ी देशों (मिडल-ईस्ट) से इसी मार्ग के जरिए आयात करता है।

भारत के लिए क्यों है यह बड़ी राहत?

  • सप्लाई चेन हुई सुरक्षित: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से जारी सैन्य तनाव के कारण इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर हमले और उन्हें बंधक बनाए जाने का खतरा काफी बढ़ गया था। इस नए समझौते से भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को स्थिरता मिली है।

  • मालभाड़े और बीमा में कमी: तनाव कम होने से समुद्री जहाजों के लिए युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम (War-Risk Insurance Premium) और मालभाड़े की दरों में कमी आएगी, जिसका सीधा फायदा भारतीय तेल कंपनियों और अंततः उपभोक्ताओं को मिल सकता है।

इस समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियां एक बार फिर पूरी रफ्तार से बहाल हो रही हैं।

विपक्षी दलों से कांग्रेस की अपील, बोली- एकजुटता ही जीत की कुंजी

0

नई दिल्ली| कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रदर्शन को युवाओं के भीतर पनप रहे भारी असंतोष का नतीजा करार दिया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल प्रदर्शनों और आंदोलनों के बलबूते लोकतांत्रिक व्यवस्था को नहीं चलाया जा सकता। किसी भी जनहित के मुद्दे को तार्किक परिणति तक पहुँचाने का अंतिम उत्तरदायित्व राजनीतिक दलों और उनके संगठनों पर ही होता है।

आंदोलन ने युवाओं की चिंताओं को मंच दिया

एक हालिया बातचीत में रमेश ने उल्लेख किया कि सीजेपी को लेकर बाजार में कई तरह की अटकलें हैं। कुछ लोग इसके पीछे किसी अदृश्य ताकत का हाथ मान रहे हैं, तो कुछ इसे छात्रों के स्वाभाविक गुस्से के रूप में देख रहे हैं। हकीकत चाहे जो भी हो, इस अभियान ने सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस को जन्म दिया है और नौजवानों की आवाज को बुलंद किया है। उन्होंने साफ किया कि यह कोई राजनीतिक दल नहीं है, इसलिए युवाओं के इस संघर्ष को आगे बढ़ाने का काम स्थापित सियासी पार्टियों को ही करना होगा।

देशभर में मुख्य विपक्षी दल का जन-संवाद कार्यक्रम

मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में हुई गड़बड़ियों और देश की ढर्रे पर चल रही शिक्षा प्रणाली के खिलाफ कांग्रेस ने एक राष्ट्रव्यापी मोर्चा खोल रखा है। इसी सिलसिले में राहुल गांधी ने राजस्थान के कोटा में छात्रों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं। आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और बिहार के पटना में भी इसी तरह के छात्र संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह पूरा अभियान जुलाई के महीने में देश की राजधानी दिल्ली में संपन्न होगा। रमेश ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ पेपर लीक या बोर्ड परीक्षाओं की कमियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा की विश्वसनीयता, सरकारी बजट और अंधाधुंध निजीकरण जैसी बुनियादी समस्याओं के खिलाफ है।

सरकारी बजट से भारी पड़ रही कोचिंग सेंटरों की फीस

कांग्रेस नेता ने कोटा में राहुल गांधी द्वारा उठाए गए एक गंभीर मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि आज देश के आम परिवार अपने बच्चों की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थानों को जितना पैसा दे रहे हैं, वह भारत सरकार के कुल शिक्षा बजट से भी कहीं ज्यादा है। यह आंकड़ा देश की शिक्षा व्यवस्था में मौजूद गहरी असमानता को दर्शाता है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर कोचिंग सेंटरों का यह जाल इतना मजबूत क्यों हो गया और मेडिकल की पढ़ाई आम आदमी की पहुंच से बाहर क्यों होती जा रही है? गौरतलब है कि देश के करीब 20 लाख से अधिक छात्रों ने रविवार को नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा दी है।

जंतर-मंतर पर डटे प्रदर्शनकारी, शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग

दूसरी तरफ, दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और विभिन्न संगठनों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। कथित नीट पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जिद पर अड़े हुए हैं। अपनी इसी मांग के तहत प्रदर्शनकारी छात्रों ने मंगलवार को एक अनोखा 'डायपर दान अभियान' भी चलाया। छात्रों का कहना है कि जब तक नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री अपने पद से नहीं हटते, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण धरना समाप्त नहीं होगा।

घंटों फोन पर बातचीत और बार-बार चेतन का जिक्र, हत्या के बाद जुड़े कई सुराग

0

पुणे/मुंबई: महाराष्ट्र के प्रसिद्ध लोहगढ़ किला मर्डर केस (Lohagad Fort Murder Case) में हर दिन रिश्तों की कड़वाहट, धोखे और साजिश की ऐसी परतें खुल रही हैं, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। 25 वर्षीय होनहार रियल एस्टेट डायरेक्टर केतन अग्रवाल की निर्मम हत्या के मामले में अब उनके पिता विशाल अग्रवाल का एक बड़ा दर्द और पश्चाताप सामने आया है। पिता ने भावुक होते हुए स्वीकार किया कि सगाई के बाद से ही मंगेतर सिया के व्यवहार में ऐसे कई गंभीर बदलाव (Red Flags) आ रहे थे, जिन्हें अगर समय रहते समझ लिया जाता, तो आज उनका बेटा जिंदा होता।

पुणे ग्रामीण पुलिस द्वारा केतन की मंगेतर सिया गोयल (20 वर्ष) और उसके प्रेमी चेतन चौधरी को 400 फीट गहरी खाई में धक्का देकर हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के बाद, इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री के पीछे की पूरी कहानी सामने आ रही है।

केतन को पहले से ही था मंगेतर पर शक

केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने उन पुरानी बातों को याद करते हुए बताया कि फरवरी में सगाई होने के बाद से ही केतन और सिया के रिश्ते सामान्य नहीं थे। उन्होंने बताया:

"सगाई के बाद जब दोनों मिलने-जुलने लगे, तो केतन ने सिया के बर्ताव को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की थीं। उसने मुझसे सीधे पूछा था कि 'क्या हमने शादी तय करने से पहले लड़की के बैकग्राउंड की ठीक से जांच-पड़ताल की थी?' लेकिन चूंकि उनका परिवार हमारे दूर के रिश्तेदारों के जरिए जुड़ा था, इसलिए मैंने यह कहकर बेटे को आश्वस्त कर दिया कि सब ठीक है और चिंता की कोई बात नहीं है।"

घंटों फोन पर बिजी रहना और 'चेतन' के नाम का शक

पिता के अनुसार, सगाई के बाद दोनों के बीच छोटी-छोटी बातों पर तीखे झगड़े होने लगे थे। सिया का अधिकांश समय फोन पर बीतता था और वह घंटों किसी से बात करने में व्यस्त रहती थी। केतन ने बातचीत के दौरान कई बार अपने परिवार के सामने 'चेतन चौधरी' नाम के एक लड़के का जिक्र भी किया था और संदेह जताया था कि सिया और उसके बीच कोई चक्कर चल रहा है।

विशाल अग्रवाल ने बताया कि सिया की कम उम्र (20 साल) को देखते हुए उन्होंने एक बार शादी को कुछ समय के लिए टालने का विचार भी बनाया था, लेकिन सिया के माता-पिता ने यह कहते हुए जल्द शादी करने की जिद की कि केतन जैसा अच्छा लड़का उन्हें दोबारा नहीं मिलेगा।

बाली ट्रिप रोकने के लिए मंगेतर ने ही छुपाया था पासपोर्ट

केतन महाराष्ट्र के एक बड़े वेयरहाउस डेवलपर 'सक्सेस ग्रुप' में डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने अमेरिका के मैसाचुसेट्स स्थित बैबसन कॉलेज (एफ.डब्ल्यू. ओलिन ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस) से मास्टर डिग्री ली थी और साल 2023 में ही पुणे लौटकर अपना पारिवारिक बिजनेस संभाल रहे थे।

पुलिस जांच में एक और बेहद चौंकाने वाला 'रेड फ्लैग' और बड़ी साजिश साफ हुई है। इसी महीने दोनों परिवार प्री-वेडिंग फोटोशूट के लिए इंडोनेशिया के बाली जाने वाले थे, लेकिन मुंबई एयरपोर्ट पर अचानक केतन का पासपोर्ट रहस्यमय तरीके से गायब हो गया, जिसके चलते पूरी ट्रिप कैंसिल करनी पड़ी। पुलिस ने जब सिया के फोन की फॉरेंसिक जांच की, तो पता चला कि सिया और चेतन पिछले एक साल से गहरे प्रेम संबंध में थे। सिया ने ही जानबूझकर केतन का पासपोर्ट छुपाया था ताकि उसे केतन के साथ बाली न जाना पड़े।

जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले दे दिया मौत को अंजाम

केतन एक अनुभवी ट्रेकर थे, लेकिन इसके बावजूद 18 जून को (सिया के जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले) उन्हें लोहगढ़ किले की 400 फीट गहरी खाई में धकेल दिया गया, जहां गिरकर उनकी मौत हो गई। पिता को अब मंगेतर के उन सभी इशारों और संदेहों का अहसास हो रहा है, जिसे केतन ने भांप लिया था, लेकिन पारिवारिक लिहाज के चलते पिता ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया था। फिलहाल पुणे पुलिस इस पूरे मामले में दोनों आरोपियों से सख्त पूछताछ कर रही है।

‘बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं चलेगा’, हिंदी मीडियम बंद करने पर नाराजगी

0

जबलपुर कटंगा स्थित स्वामी विवेकानंद स्कूल में हिंदी माध्यम की कक्षाएं बंद किए जाने के फैसले के खिलाफ बुधवार को अभिभावकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। स्कूल परिसर में जुटे दर्जनों माता-पिता ने प्रबंधन की इस मनमानी पर जमकर नाराजगी जताई। अभिभावकों का तर्क था कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले ही वे बच्चों के लिए यूनिफॉर्म और महंगी किताबें खरीद चुके हैं। ऐसे में बीच मंझधार में लिया गया यह फैसला बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगा।

अचानक जारी हुआ फरमान, टीसी लेने का बनाया दबाव

केंट बोर्ड द्वारा संचालित इस हायर सेकंडरी स्कूल में अचानक यह निर्देश जारी कर दिया गया कि कक्षा 6वीं से 9वीं तक के हिंदी मीडियम के विद्यार्थियों को केंट बोर्ड के लाल स्कूल या गोराबाजार स्कूल में ट्रांसफर कर दिया जाए, अथवा वे अपनी टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) ले लें। इस तुगलकी आदेश से अभिभावक हैरान रह गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए जय महाकाल संघ अंतरराष्ट्रीय बजरंग दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष कन्हैया रामकृष्ण तिवारी ने स्कूल प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के मासूम बच्चों के भविष्य के साथ ऐसा अन्याय कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई इसी स्कूल में नियमित रखने की मांग की और ऐसा न होने पर बड़े पैमाने पर धरना प्रदर्शन व पास्को एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराने की बात कही।

हजारों रुपये की किताबें खरीदीं, सीबीएसई के फॉर्म भी भरवाए

अभिभावकों ने बताया कि स्कूल प्रबंधन ने इसी साल अप्रैल महीने में बच्चों से सीबीएसई (CBSE) के फॉर्म भी भरवा लिए थे। इसके बाद सभी पालकों ने हजारों रुपये खर्च करके नई किताबें और कॉपियां भी खरीद ली थीं। कई लोग ड्रेस भी लेने की तैयारी में थे, तभी अचानक यह फरमान सुना दिया गया। अभिभावकों के बढ़ते आक्रोश और आंदोलन की चेतावनी को देखते हुए मौके पर पहुँचे स्कूल के वरिष्ठ अधिकारी ने तुरंत बीच-बचाव किया। उन्होंने पालकों को आश्वस्त किया कि बच्चों को कहीं नहीं भेजा जाएगा और उनकी पढ़ाई यहीं जारी रहेगी, जिसके बाद जाकर मामला शांत हुआ।

उज्जैन के महाकाल मंदिर ने रचा इतिहास, आय ने पार किया 142 करोड़ का आंकड़ा

0

उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक, मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर बड़ी सुर्खियों में है। इस बार चर्चा का कारण श्रद्धालुओं की अगाध आस्था के साथ-साथ मंदिर समिति की रिकॉर्डतोड़ कमाई है। इस वित्तीय वर्ष में महाकाल मंदिर समिति की कुल आय 142 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो कि मंदिर के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस भारी-भरकम आय का सबसे मुख्य जरिया भक्तों द्वारा दिया गया दान और विश्व प्रसिद्ध 'लड्डू प्रसादी' की रिकॉर्ड बिक्री रही है।

'महाकाल लोक' के बाद 4 गुना बढ़े श्रद्धालु

साल 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भव्य 'श्री महाकाल लोक' के लोकार्पण के बाद से ही उज्जैन आने वाले भक्तों की संख्या में अभूतपूर्व उछाल आया है। मंदिर प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक:

  • पहले जहां सामान्य दिनों में प्रतिदिन लगभग 50 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर रोज करीब 2 लाख तक पहुंच गई है।

  • महाशिवरात्रि, सावन सोमवार और भगवान महाकाल की शाही सवारी जैसे विशेष व पावन अवसरों पर यह संख्या 6 से 7 लाख को भी पार कर जाती है। श्रद्धालुओं की इसी बढ़ती आमद ने मंदिर के आर्थिक और प्रबंधकीय ढांचे को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।

कमाई का गणित: दान और लड्डू प्रसादी की धूम

मंदिर की कुल 142 करोड़ रुपये की आय को अगर बारीकी से समझें, तो इसका विभाजन कुछ इस प्रकार है:

  • कुल दान (Donation): ₹78 करोड़ (विभिन्न माध्यमों से)

    • दान पेटियां (Hundi): करीब ₹62 करोड़

    • नकद काउंटर (Cash Counter): ₹5.5 करोड़

    • ऑनलाइन माध्यम (Digital/Online): ₹3.6 करोड़

    • गुप्त दान (Anonymous Donation): ₹4.65 करोड़

    • अन्न क्षेत्र दान (Free Kitchen Fund): ₹3.38 करोड़

  • लड्डू प्रसादी बिक्री (Prasad Sale): ₹65 करोड़

इसके अलावा, देश-विदेश से आने वाले भक्तों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना और चांदी भी बाबा महाकाल के चरणों में अर्पित किया गया है, जिसकी बाजार कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु प्रसादी के रूप में बड़ी मात्रा में शुद्ध घी के लड्डू अपने साथ ले जा रहे हैं, जिससे प्रसादी काउंटर की आय में भारी बढ़ोतरी हुई है।

खर्च और प्रबंधन: प्रति माह ₹5 करोड़ से अधिक का व्यय

आय बढ़ने के साथ ही मंदिर की व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखने का खर्च भी तेजी से बढ़ा है। मंदिर प्रशासन के अनुसार:

  • वर्तमान में मंदिर परिसर की व्यवस्था संभालने के लिए करीब 306 नियमित और संविदा कर्मचारी चौबीसों घंटे कार्यरत हैं, जिनके वेतन (सैलरी) पर एक बड़ी राशि खर्च होती है।

  • इसके अतिरिक्त, सुरक्षा व्यवस्था, अत्याधुनिक साफ-सफाई, मंदिर के रखरखाव और वीआईपी व सामान्य श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े नए प्रोजेक्ट्स पर लगातार निवेश किया जा रहा है।

  • इस समय मंदिर का औसतन मासिक खर्च 5 करोड़ रुपये से अधिक चल रहा है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला नया बूस्ट

आर्थिक विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि महाकाल मंदिर का यह रिकॉर्ड केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरे उज्जैन शहर की किस्मत बदल दी है। धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) में आए इस उफान के कारण स्थानीय होटल इंडस्ट्री, लॉज, ट्रैवल एजेंसियां, हस्तशिल्प और पूजा-सामग्री बेचने वाले छोटे-बड़े व्यापारियों के कारोबार में जबरदस्त तेजी आई है। आने वाले समय में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन दर्शन व्यवस्था को और अधिक सुलभ और हाईटेक बनाने की तैयारी में जुटा है।

क्या होने जा रहा है मंत्रिमंडल विस्तार? जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे से बढ़ीं अटकलें

0

नई दिल्ली: केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन के मंत्रिपरिषद से इस्तीफे के बाद मोदी सरकार के आगामी कैबिनेट फेरबदल और विस्तार को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। दरअसल, कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया था और भाजपा द्वारा उन्हें दोबारा उच्च सदन न भेजने के फैसले के बाद उनका इस्तीफा पहले से ही तय माना जा रहा था।

इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे एक शिष्टाचार भेंट कहा गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक इस दौरान संभावित कैबिनेट फेरबदल की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई है। यह फेरबदल आगामी संसद के मॉनसून सत्र से पहले होने की पूरी संभावना है।

इन मंत्रियों की भी हो सकती है छुट्टी, 'एक व्यक्ति, एक पद' पर जोर

कैबिनेट फेरबदल की सुगबुगाहट केवल जॉर्ज कुरियन तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के आंतरिक नीतिगत बदलावों और सांगठनिक नियुक्तियों के कारण कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं:

  • रवनीत सिंह बिट्टू: जॉर्ज कुरियन की तरह ही केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का भी राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है और पार्टी ने उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया है, जिससे उनका भी मंत्रिपरिषद से बाहर होना तय माना जा रहा है।

  • पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा: भाजपा के 'एक व्यक्ति, एक पद' के सिद्धांत के तहत इन दोनों नेताओं को केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। हाल ही में पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश और हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली का भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वर्तमान में ये क्रमशः वित्त और शहरी विकास मंत्रालयों के राज्य मंत्री हैं।

  • हरदीप सिंह पुरी और बी.एल. वर्मा: इन दोनों केंद्रीय मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल भी इसी साल नवंबर में समाप्त हो रहा है, जिस पर पार्टी जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकती है।

क्यों जरूरी हुआ यह फेरबदल? (मुख्य राजनीतिक समीकरण)

  • प्रशासनिक गति बढ़ाना: सूत्रों के अनुसार, कुछ मंत्रालय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तय की गई प्रशासनिक प्राथमिकताओं और रफ्तार के साथ तालमेल बिठाने में पीछे छूट रहे हैं। ऐसे मंत्रालयों में नई ऊर्जा फूंकने के लिए नए चेहरों को मौका दिया जाएगा।

  • शिंदे गुट का बढ़ता कद: उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसदों के पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली मूल शिवसेना (NDA घटक) में शामिल होने के बाद एनडीए में इस गुट की ताकत बढ़ी है। राजनीतिक संतुलन साधने के लिए शिंदे गुट को कैबिनेट में अतिरिक्त हिस्सेदारी मिल सकती है।

  • पश्चिम बंगाल को बड़ा इनाम: हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में पश्चिम बंगाल के भीतर भाजपा को मिली अप्रत्याशित और शानदार जीत के बाद, इस बात की प्रबल संभावना है कि मोदी कैबिनेट में बंगाल का प्रतिनिधित्व और मजबूत किया जाएगा।

जॉर्ज कुरियन को मिल सकती है गवर्नर की जिम्मेदारी

राजनीतिक गलियारों में मजबूत चर्चा है कि जॉर्ज कुरियन की संगठनात्मक निष्ठा को देखते हुए सरकार जल्द ही उन्हें किसी राज्य का राज्यपाल (गवर्नर) नियुक्त कर सकती है। गौरतलब है कि आगामी जुलाई महीने में तीन प्रमुख राज्यों— कर्नाटक (थावरचंद गहलोत), मध्य प्रदेश (मंगूभाई पटेल) और उत्तराखंड (लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह) के राज्यपालों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। केरल में लंबे समय तक भाजपा कार्यालय का कामकाज संभालने वाले कुरियन को पीएम मोदी ने सीधे मंत्री पद के लिए चुनकर सबको चौंका दिया था।

वरिष्ठ नेताओं को मिलेगी विदेशी दौरों पर राजदूत की कमान

पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं को अब राजनयिक भूमिकाओं में भेजने की भी तैयारी चल रही है। इसी रणनीति के तहत हाल ही में भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश का उच्चायुक्त (हाई कमिश्नर) नियुक्त किया गया है। माना जा रहा है कि इस फेरबदल के बाद कुछ और वरिष्ठ चेहरों को विभिन्न देशों में राजदूत बनाकर भेजा जा सकता है।

Join Whatsapp Group
Join Our Whatsapp Group