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‘राका’ से ‘AA23’ तक, अल्लू अर्जुन के व्यस्त शेड्यूल ने बढ़ाई फैंस की उत्सुकता

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पैन-इंडिया ब्लॉकबस्टर फिल्म 'पुष्पा' फ्रैंचाइजी से देशभर के दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले सुपरस्टार अल्लू अर्जुन अब अपने करियर की सबसे बड़ी ऊंचाइयों को छूने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पिछले कुछ समय से फिल्मों की सफलता और अपनी ऑफ-स्क्रीन लाइफ को लेकर सुर्खियों में रहने वाले यह अभिनेता अब भारतीय सिनेमा के दो सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स—'राका' और 'AA23' पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

साल के अंत तक पूरी होगी 'राका' की शूटिंग

सामने आ रही हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अल्लू अर्जुन फिलहाल अपनी आगामी फिल्म 'राका' के शेड्यूल को पूरा करने में व्यस्त हैं। इस बड़े बजट की फिल्म का निर्माण कार्य साल 2026 के अंत तक चलने की उम्मीद है। अभिनेता का लक्ष्य सितंबर 2026 तक अपने हिस्से की शूटिंग को हर हाल में खत्म करना है, ताकि वह दिसंबर से शुरू होने वाली अपनी अगली बहुप्रतीक्षित फिल्म 'AA23' के काम में पूरी तरह जुट सकें।

हाई-लेवल VFX और विजुअल्स से सजी होगी 'राका'

फिल्म 'राका' को बेहद भव्य पैमाने पर तैयार किया जा रहा है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के विजुअल इफेक्ट्स (VFX) देखने को मिलेंगे। बड़े प्रोडक्शन स्केल के कारण फिल्म की शूटिंग खत्म होने के बाद भी इसके पोस्ट-प्रोडक्शन और ग्राफिक्स के काम में लंबा समय लगेगा। यही वजह है कि मेकर्स इसे साल 2028 के मध्य में रिलीज करने की योजना बना रहे हैं, ताकि फिल्म की तकनीकी बारीकियों और विजुअल क्वालिटी को शानदार बनाया जा सके।

निर्देशक एटली के साथ 'AA23' को लेकर बढ़ा क्रेज

अल्लू अर्जुन की फिल्म 'AA23' को लेकर हैदराबाद और मुंबई समेत पूरे देश के सिनेमाप्रेमियों में भारी उत्सुकता है। इस फिल्म का निर्देशन भारतीय सिनेमा के सबसे सफल मास डायरेक्टर एटली कर रहे हैं।

ग्लोबल कमर्शियल एंटरटेनर: इस प्रोजेक्ट को वैश्विक स्तर पर रिलीज करने की तैयारी है। देश के सबसे बड़े मास स्टार और सबसे कामयाब फिल्ममेकर की यह जुगलबंदी बॉक्स ऑफिस के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त करने का दम रखती है।

पैन-इंडिया से ग्लोबल स्टार बनने की तैयारी

'पुष्पा' की ऐतिहासिक सफलता के बाद अल्लू अर्जुन पहले ही भारतीय सिनेमा का एक बड़ा चेहरा बन चुके हैं। अब 'राका' की अनूठी कहानी और एटली के निर्देशन में बनने वाली 'AA23' की घोषणा से यह साफ हो गया है कि वह आने वाले समय में ग्लोबल लेवल पर अपना परचम लहराने के लिए तैयार हैं।

15 सूत्रीय मांगों को लेकर सड़कों पर उतरा आदिवासी समाज, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

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बिलासपुरजल, जंगल और जमीन समेत अपनी कई बुनियादी मांगों और हकों को लेकर सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले लोग सड़कों पर उतरे। जिला मुख्यालय के समक्ष आयोजित इस विशाल प्रदर्शन में समाज के सैकड़ों पदाधिकारी और आम लोग शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने शासन-प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के समापन पर एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल, शिक्षा मंत्री और संस्कृति मंत्री को संबोधित 15 सूत्रीय मांगपत्र स्थानीय प्रशासन को सौंपा।

जल, जंगल और जमीन के पारंपरिक हकों पर जोर

आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए समाज के प्रवक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से आदिवासियों से जुड़े गंभीर मुद्दों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के पारंपरिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने की पुरजोर वकालत की। नेताओं का कहना था कि समुदाय के सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास के लिए सरकार को तत्काल कड़े और सकारात्मक कदम उठाने होंगे।

सरकारी स्कूलों में धार्मिक प्रार्थनाओं को अनिवार्य करने का विरोध

इस प्रदर्शन के दौरान समाज के पदाधिकारियों ने स्कूलों में गायत्री मंत्र, शांति मंत्र, गुरु मंत्र और सरस्वती वंदना जैसे धार्मिक अनुष्ठानों को लागू करने के निर्देशों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने तर्क दिया कि हमारा देश एक धर्मनिरपेक्ष और विविधतापूर्ण राष्ट्र है। किसी एक विशिष्ट धार्मिक परंपरा को थोपने के बजाय सरकार को सभी समुदायों और आस्थाओं की भावनाओं का आदर करना चाहिए।

सांस्कृतिक पहचान और विरासतों के संरक्षण की अपील

आदिवासी नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी अपनी एक अनूठी संस्कृति, जीवन शैली और धार्मिक मान्यताएं हैं, जिनका संरक्षण बेहद जरूरी है। उन्होंने मांग की कि प्रशासन को ऐसी नीतियां तैयार करनी चाहिए जो किसी भी वर्ग की सांस्कृतिक पहचान को ठेस न पहुँचाएं और सभी को बराबरी का दर्जा दें।

मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

घेराव और प्रदर्शन के बाद समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी मांगों का पुलिंदा सौंपा। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी इन 15 सूत्रीय मांगों पर जल्द ही कोई ठोस और सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में इस जनांदोलन को पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर तेज किया जाएगा।

अब सरकार के रुख का इंतजार

इस सामूहिक प्रदर्शन के बाद अब गेंद सरकार और जिला प्रशासन के पाले में है। आदिवासी समाज अब यह देख रहा है कि उनकी इन जायज मांगों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है। समुदाय को उम्मीद है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही कोई उचित समाधान निकाला जाएगा।

दमोह में जनसुनवाई के दौरान गूंजी बुजुर्ग की पीड़ा, PM आवास को लेकर उठाए सवाल

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दमोहजिले के तेंदूखेड़ा में बीते मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में एक अनोखा मामला सामने आया। इस प्रशासनिक शिविर में अपनी फरियाद लेकर खुद केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र सिंह खटीक की सगी मौसी भी पहुँची थीं। वह पिछले काफी समय से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान की राह देख रही हैं। जनसुनवाई के दौरान जब उन्होंने जनपद सीईओ से अपने आशियाने की मंजूरी को लेकर सवाल किया, तो अधिकारी ने जवाब दिया कि इस प्रक्रिया में अभी कम से कम एक साल का वक्त लग सकता है।

अधिकारी का टका सा जवाब सुन छलके बुजुर्ग महिला के आंसू

सीईओ की बात सुनते ही वह भावुक हो गईं और दुखी मन से कहा, "अगर मैं तब तक जिंदा ही रही, तभी तो इस सरकारी मकान का सुख देख पाऊंगी।" गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक की मौसी तुलसा खटीक तेजगढ़ इलाके में बिल्कुल अकेली रहती हैं। उनकी कोई संतान नहीं है और पति का काफी समय पहले देहांत हो चुका है। वह अपनी आजीविका चलाने के लिए सब्जी बेचने का काम करती हैं।

साल भर पहले केंद्रीय मंत्री के दौरे पर मिला था भरोसा

तुलसा खटीक अपनी इस समस्या को लेकर जनपद सीईओ मनीष बागड़ी के पास पहुँची थीं, जहाँ उन्होंने पीएम आवास के साथ-साथ अपने मोहल्ले में नाली बनवाने की मांग रखी। इस पर सीईओ ने नाली का काम जल्द शुरू कराने का आश्वासन तो दिया, लेकिन पक्के मकान के लिए एक साल का इंतजार करने को कहा। इस पर बुजुर्ग तुलसा ने अपनी उम्र का हवाला देते हुए लाचारी जताई। करीब एक साल पहले जब खुद केंद्रीय मंत्री उनके घर आए थे, तब भी स्थानीय अमले ने उन्हें जल्द से जल्द आवास मुहैया कराने का भरोसा दिया था।

प्रशासनिक शिविर में निपटाए गए कई मामले

इस जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान पूरे इलाके से बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी लगभग 20 से 25 शिकायतें और आवेदन दर्ज किए गए। मौके पर मौजूद अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) सीजी गोस्वामी, जनपद सीईओ मनीष बागड़ी, तहसीलदार विवेक व्यास और नायब तहसीलदार चंद्रशेखर शिल्पी समेत विभिन्न विभागों के आला अफसरों ने आम जनता की तकलीफों को सुना और संबंधित महकमों को तय समय सीमा के भीतर उचित कदम उठाने के सख्त निर्देश दिए।

दो दिग्गजों का महा-मिलन, ‘धर्मन’ में साथ आए रजनीकांत और कमल हासन

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यह बात तो हर कोई जानता है कि दिग्गज अभिनेता कमल हासन, थलाइवा रजनीकांत की आगामी फिल्म का निर्माण करने जा रहे हैं। इस फिल्म के निर्देशन को लेकर लंबे समय से कयासों का बाजार गर्म था। पूर्व में कुछ निर्देशकों के नाम सामने आए थे, लेकिन बाद में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिल सकी। मगर अब खुद कमल हासन ने इन अफवाहों पर विराम लगाते हुए घोषणा की है कि युवा निर्देशक अश्वथ मारिमुथु इस मेगा प्रोजेक्ट का निर्देशन करेंगे। इसके साथ ही फिल्म का एक धांसू पोस्टर जारी कर इसके नाम 'धर्मन' का भी खुलासा कर दिया गया है।

कैसा है फिल्म का पहला लुक?

जारी किए गए फर्स्ट लुक पोस्टर में सुपरस्टार रजनीकांत का अंदाज बेहद जुदा और स्टाइलिश नजर आ रहा है। वे एक सर्जन (डॉक्टर) की वेशभूषा में दिखाई दे रहे हैं। उनके हाथों में सर्जिकल ग्लव्स (दस्ताने) हैं, जिन पर खून के गहरे धब्बे लगे हुए हैं। इसके साथ ही थलाइवा के हाथ में एक सर्जिकल ब्लेड भी दिखाई दे रहा है। पोस्टर का यह खौफनाक और रहस्यमयी बैकग्राउंड फैंस के बीच उत्सुकता पैदा कर रहा है कि आखिर इस फिल्म की कहानी क्या मोड़ लेने वाली है।

बैक-टू-बैक फिल्मों से धमाका करने को तैयार थलाइवा

रजनीकांत इन दिनों अपने करियर के बेहद व्यस्त दौर से गुजर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म 'जेलर 2' की शूटिंग पूरी की है। इसके अलावा, वे निर्देशक नेल्सन दिलीप कुमार के एक और बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं, जिसमें रजनीकांत और कमल हासन दोनों मुख्य भूमिकाओं में एक साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे। अब इस नई फिल्म 'धर्मन' की घोषणा के बाद से उनके फैंस की उम्मीदें सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं।

भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट

चेन्नई और मुंबई समेत देश भर के सिनेमा प्रेमियों के लिए यह फिल्म किसी विजुअल ट्रीट से कम नहीं होने वाली है। कमल हासन का प्रोडक्शन हाउस, अश्वथ मारिमुथु का आधुनिक निर्देशन और रजनीकांत का यह हैरान कर देने वाला नया अवतार—इन तीनों के कॉम्बिनेशन ने 'धर्मन' को भारतीय सिनेमा जगत की सबसे चर्चित और बहुप्रतीक्षित फिल्मों की सूची में शामिल कर दिया है। आने वाले समय में फिल्म की बाकी स्टारकास्ट, कहानी और शूटिंग शेड्यूल से जुड़े कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमका जैसलमेर, हॉस्पिटैलिटी रैंकिंग में बड़ी उपलब्धि

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जैसलमेर: किलों की भव्यता, सुनहरी रेत के धोरों और शाही खातिरदारी के लिए मशहूर 'स्वर्ण नगरी' जैसलमेर ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया है। अपनी शानदार मेहमाननवाजी और पर्यटकों के प्रति अनूठे लगाव की वजह से जैसलमेर ने दुनिया के सबसे बेहतरीन स्वागत करने वाले शहरों में अपनी जगह पक्की कर ली है।

विख्यात ग्लोबल ट्रैवल पोर्टल 'बुकिंग डॉट कॉम' द्वारा जारी विश्व के टॉप-10 सबसे शानदार मेहमाननवाज शहरों की ताजा सूची में जैसलमेर को 9वां स्थान मिला है। इस अंतरराष्ट्रीय कामयाबी के पीछे यहाँ के आलीशान होटलों का सबसे बड़ा योगदान है, जिसमें 'होटल सूर्यगढ़' एक मुख्य नायक के रूप में उभरा है। सूर्यगढ़ की बेमिसाल सेवाओं और अनूठे अंदाज ने जैसलमेर को वैश्विक पटल पर यह मुकाम दिलाने में सबसे अहम भूमिका अदा की है।

वैश्विक मंच पर चमका 'होटल सूर्यगढ़' का जादू

दुनिया के सबसे बड़े ट्रैवल पोर्टल 'ट्रिप एडवाइजर' के प्रतिष्ठित 'ट्रैवलर्स चॉइस अवार्ड्स-2026' में भी जैसलमेर के पर्यटन उद्योग का डंका बजा है। देश के टॉप-25 आलीशान और बेहतरीन होटलों की मुख्य सूची में यहाँ के होटलों ने शान से अपनी जगह बनाई है, जिसमें 'होटल सूर्यगढ़' शीर्ष पर काबिज है।

थार रेगिस्तान के बीचो-बीच स्थित सूर्यगढ़ सिर्फ ठहरने की जगह नहीं, बल्कि यह राजस्थानी संस्कृति, आधुनिक सुख-सुविधाओं और शाही जीवनशैली का एक बेजोड़ संगम है। यहाँ आने वाले देसी-विदेशी पर्यटकों ने सूर्यगढ़ की वास्तुकला, स्टाफ के सेवा भाव और यहाँ के अनुभवों को दुनिया में सबसे लाजवाब माना है। इस होटल ने अपनी बेहतरीन सेवाओं और एकदम अनूठी लोकेशन के दम पर दुनियाभर के सैलानियों का दिल जीता है।

अन्य होटलों ने भी बिखेरी चमक

जैसलमेर की इस कामयाबी को दोगुना करने में यहाँ के अन्य होटलों का भी बड़ा हाथ रहा है। 'रिसोर्ट द सराय' ने भी देश के चुनिंदा आलीशान होटलों की मुख्य सूची में अपनी जगह बनाई है। वहीं, ट्रिप एडवाइजर की अन्य विशेष श्रेणियों में 'मेरियट रिसोर्ट एवं स्पा' तथा 'द गढ़ जैसल' ने भी शानदार रेटिंग पाकर बाजी मारी है। हालांकि, इन सबमें सूर्यगढ़ का आकर्षण सबसे अलग और खास रहा।

पर्यटकों को भा रहा सोनार किला और मखमली धोरे

विभिन्न ट्रैवल पोर्टल्स पर सैलानियों द्वारा दिए गए रिव्यूज से साफ है कि जैसलमेर का जादू अब पहले से कहीं ज्यादा गहरा गया है। सैलानी यहाँ के इकलौते जीवित किले 'सोनार किला' को बेहद पसंद करते हैं, जहाँ आज भी शहर की एक बड़ी आबादी निवास करती है। इसके साथ ही पटवा हवेली की बारीक नक्काशी को देखने के लिए भी लोग खिंचे चले आते हैं।

दूसरी ओर, सम के मखमली धोरों के बीच स्थित डेजर्ट कैंप्स में रात गुजारना और राजस्थानी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लुत्फ उठाना पर्यटकों का सबसे बड़ा क्रेज बन चुका है। लेकिन इन सबके बीच, होटल सूर्यगढ़ में बिताए गए पल सैलानियों के लिए सबसे यादगार अनुभव साबित हो रहे हैं।

पर्यटन के टूटे सारे रिकॉर्ड, रोजगार को मिलेगी रफ्तार

इस शानदार मेहमाननवाजी का ही नतीजा है कि बीते वर्ष जैसलमेर में 41 लाख से अधिक देसी-विदेशी सैलानी पहुंचे थे, जो कि पर्यटन के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड है। इस नई वैश्विक रैंकिंग के बाद स्थानीय पर्यटन व्यवसायियों में जबरदस्त उत्साह का माहौल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि होटल सूर्यगढ़ को मिली इस अंतरराष्ट्रीय पहचान के बाद आगामी सीजन में पर्यटकों की संख्या में और भारी इजाफा होगा। इससे स्थानीय हस्तशिल्प, होटल व्यवसाय, ट्रैवल एजेंसियों और गाइड सहित हजारों लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, जिससे पूरे जिले की अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार मिलेगी।

सेलिब्रिटीज की पहली पसंद: शाही शादियों का गवाह

सूर्यगढ़ सिर्फ अपनी सामान्य मेहमाननवाजी ही नहीं, बल्कि आलीशान डेस्टिनेशन वेडिंग्स के लिए भी पूरी दुनिया में मशहूर है। बॉलीवुड के प्रसिद्ध सितारे सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी जैसी बड़ी हस्तियों ने इसी होटल के पारंपरिक प्रांगण (बावड़ी) में सात फेरे लेकर अपनी शादी को यादगार बनाया था। यहाँ की भव्य सजावट, मशालों की रोशनी और लोक संगीत के बीच होने वाली शादियां किसी सपने जैसी लगती हैं।

शाही कमरों का किराया और आधुनिक सुविधाएं

होटल सूर्यगढ़ में पर्यटकों के लिए बेहद आलीशान कमरे, हेरिटेज सुइट्स और प्राइवेट विला बनाए गए हैं, जो पुराने महलों की याद दिलाते हैं। यहाँ कमरों का शुरुआती किराया सीजन के अनुसार सामान्यतः 12 हजार से 50 हजार रुपए प्रति रात से शुरू होता है, जो यहाँ के आलीशान और बड़े विला के लिए लाखों रुपए तक जाता है। यहाँ ठहरने वाले सैलानियों को स्विमिंग पूल, स्पा और थार की संस्कृति से जुड़े कस्टमाइज्ड टूर जैसी बेहतरीन सुविधाएं मिलती हैं, जो पर्यटकों के इस सफर को पूरी तरह पैसा वसूल और लाइफटाइम एक्सपीरियंस बना देती हैं।

पद्म भूषण मिलने के बाद छलका अलका याग्निक का दर्द और गर्व

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मशहूर पार्श्व गायिका अलका याग्निक इन दिनों अपनी सेहत को लेकर काफी सुर्खियों में हैं। इसी बीच देश के प्रतिष्ठित 'पद्म भूषण' सम्मान से नवाजे जाने पर उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपनी गहरी भावनाएं और आभार व्यक्त किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित गरिमामयी समारोह में उन्हें इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया।

समारोह में सहारा लेकर चलती दिखीं अलका, फैंस हुए चिंतित

पद्म भूषण सम्मान समारोह के दौरान जब अलका याग्निक मंच की ओर बढ़ीं, तो उन्हें चलने-फिरने के लिए वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों और कार्यक्रम के स्टाफ की मदद लेनी पड़ी। उनकी शारीरिक कमजोरी को देखकर वहां मौजूद लोग और उनके करोड़ों फैंस उनकी सेहत को लेकर काफी चिंतित हो गए। इसके बाद सिंगर ने खुद अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर एक भावुक पोस्ट साझा कर अपनी स्थिति स्पष्ट की।

पिछले दो साल से जनता और सुर्खियों से दूर थीं सिंगर

अलका याग्निक ने अपनी पोस्ट में लिखा:

"पिछले दो सालों से मैं सार्वजनिक रूप से सामने आने और अपने व्यक्तिगत सफर के बारे में बात करने से बच रही थी। आप में से बहुत से लोग यह बात अच्छी तरह जानते थे कि मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा है। लेकिन इस पूरे मुश्किल दौर में आपका असीम प्यार, प्रार्थनाएं, संदेश और समर्थन हर कदम पर मेरी सबसे बड़ी ताकत बनकर मेरे साथ रहे।"

सम्मान मिलने पर फैंस को दिया इसका श्रेय

प्रतिष्ठित पुरस्कार मिलने की खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने आगे लिखा, "आज जब मैं देश के इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान को ग्रहण करने के लिए आगे बढ़ी, तो मेरा दिल कृतज्ञता से भर गया। यह सम्मान मेरे लिए बेहद अनमोल है। भले ही इस पर मेरा नाम अंकित है, लेकिन यह पुरस्कार मेरे हर उस श्रोता का है जिसने मेरी आवाज को अपने जीवन का हिस्सा बनाया और मेरी हर मुश्किल में मेरा हौसला बढ़ाया। मैं धीरे-धीरे अपनी इस बीमारी से उबरने का रास्ता तलाश रही हूं। मैं आज इस समारोह में सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि अपने उन करोड़ों चाहने वालों के लिए मौजूद रहना चाहती थी।"

संगीत जगत में अलका याग्निक का सफर

अपनी बेहद सुरीली और सदाबहार आवाज के लिए पहचानी जाने वाली अलका याग्निक ने कई दशक तक भारतीय संगीत उद्योग पर राज किया है। उन्होंने विभिन्न भारतीय भाषाओं में एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर गाने गाए हैं। उनके कुछ सबसे यादगार तरानों में शामिल हैं:

  • 'खलनायक' का 'चोली के पीछे'

  • 'धड़कन' का 'दिल ने यह कहा है दिल से'

  • 'हम तुम' का 'हम तुम'

  • 'हम हैं राही प्यार के' का 'घूंघट की आड़ से'

  • 'कुछ कुछ होता है' का टाइटल ट्रैक 'कुछ कुछ होता है'

‘तुम जादू की हकदार हो’, सपना चौधरी की पोस्ट ने जीता फैंस का दिल

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हरियाणवी डांस और म्यूजिक इंडस्ट्री की मशहूर कलाकार सपना चौधरी इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर काफी चर्चा में हैं। खबरों के मुताबिक, उनकी शादीशुदा जिंदगी में इन दिनों काफी उतार-चढ़ाव चल रहा है और उन्होंने अपने पति पर घरेलू हिंसा जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इन सब विवादों के बीच, सपना का एक नया सोशल मीडिया पोस्ट इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है।

क्रूज पर बिंदास अंदाज और गहरा कैप्शन

सपना चौधरी ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर कुछ नई तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों में वे एक शानदार क्रूज पर सवार होकर बेहद बेबाक और बिंदास अंदाज में पोज देती नजर आ रही हैं। लेकिन इन तस्वीरों से ज्यादा उनके लिखे कैप्शन ने फैंस का ध्यान अपनी ओर खींचा है, जिसे उनकी मौजूदा निजी जिंदगी से जोड़कर देखा जा रहा है।

सपना ने कैप्शन में लिखा: "एक महिला दूसरी महिला से: सिर्फ काम-चलाऊ चीजों से समझौता मत करो। तुम तो जादू की हकदार हो।"

ब्लैक लुक में ढाया कहर, फैंस ने लुटाया प्यार

तस्वीरों में हरियाणवी 'देसी क्वीन' ब्लैक कलर की कार्गो जींस और मैचिंग ब्लैक टॉप पहने हुए बेहद स्टाइलिश लग रही हैं। आंखों पर लगे काले चश्मे ने उनके इस कूल लुक को और भी ज्यादा शानदार बना दिया है।

नई दिल्ली और हरियाणा समेत पूरे देश में उनके फैंस उनके इस नए लुक और मजबूत इरादों की जमकर तारीफ कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर नेटिजंस उनकी पोस्ट पर लगातार हार्ट और फायर इमोजी कमेंट कर उनका हौसला बढ़ा रहे हैं।

अमेरिका में ईरान युद्ध को लेकर मतभेद, सीनेट ने पास किया विरोध प्रस्ताव

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वाशिंगटन/दुबई: अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट (Senate) ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किया है। सीनेट में यह प्रस्ताव 50 के मुकाबले 48 वोटों से मंजूर किया गया, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के खिलाफ बिना संसद की मंजूरी के सैन्य कदम न उठाने को कहा गया है। चूंकि इस प्रस्ताव को संसद के निचले सदन 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' में पहले ही हरी झंडी मिल चुकी है, इसलिए अब अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से इसे मंजूरी मिल गई है।

वॉर पॉवर्स एक्ट के बाद ऐतिहासिक कदम, रिपब्लिकन सांसदों की बगावत

अमेरिकी इतिहास में साल 1973 के 'वॉर पॉवर्स एक्ट' (War Powers Act) के लागू होने के बाद यह पहला ऐतिहासिक मौका है, जब अमेरिकी संसद के दोनों सदनों ने किसी राष्ट्रपति से युद्ध जैसी सैन्य कार्रवाई को खत्म करने की औपचारिक मांग की है। इस वोटिंग के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप की अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों ने पाला बदलकर विपक्षी डेमोक्रेट्स का साथ दिया, जिसने ट्रंप सरकार के भीतर आंतरिक असंतोष और बगावत को भी खुलकर सामने ला दिया है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ किया है कि इस प्रस्ताव का कोई कानूनी असर नहीं होगा और ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पहले ही समाप्त हो चुकी है।

खाड़ी देशों को मनाने पहुंचे विदेश मंत्री मार्को रूबियो

इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया पीस डील (शांति समझौते) को लेकर खाड़ी देशों (Gulf Countries) की चिंताओं को दूर करने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और कुवैत के कूटनीतिक दौरे पर पहुंचे हैं। दरअसल, इन सहयोगी देशों को डर है कि इस समझौते के बाद कच्चे तेल के मुख्य समुद्री मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) में ईरान का वर्चस्व और प्रभाव काफी बढ़ सकता है। इसके अलावा, इस समझौते में ईरान के खतरनाक मिसाइल कार्यक्रम पर कोई स्पष्ट और सख्त शर्त न होने की वजह से भी सहयोगी देश वॉशिंगटन पर सवाल उठा रहे हैं।

ईरान के पुनर्निर्माण के लिए $300 अरब का फंड

परदे के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं से एक और बड़ी बात सामने आई है। ईरान के पुनर्निर्माण (Reconstruction) के लिए करीब 300 अरब डॉलर के एक संभावित फंड को तैयार करने पर चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि अमेरिका इस भारी-भरकम राशि के लिए खाड़ी के अमीर देशों से बड़े आर्थिक सहयोग की मांग कर सकता है। यही कारण है कि वॉशिंगटन इस समय मध्य-पूर्व (मिडल-ईस्ट) में अपने पुराने सहयोगी देशों का समर्थन जुटाने के लिए पूरा जोर लगा रहा है।

छतरपुर का वोट बैंक बनेगा निर्णायक, बार काउंसिल चुनाव में बढ़ी हलचल

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भोपाल: मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल चुनाव 2026 की काउंटिंग के छठे दिन भोपाल के उम्मीदवारों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए शुरुआती रुझानों के टॉप-5 स्थानों पर अपना कब्जा जमा लिया है। जबलपुर में मुख्य चुनाव अधिकारी एसके पालो, सहायक चुनाव अधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह बघेल और दीपक अवस्थी की निगरानी में वोटों की गिनती सुचारू रूप से चल रही है। चुनाव समिति के सचिव प्रशांत दुबे ने बताया कि अब तक 35 जिला और तहसील बार एसोसिएशनों के पहली वरीयता के कुल 8,791 वोटों की गिनती हो चुकी है। इनमें से 8,514 वोट वैध मिले हैं, जबकि 376 वोटों को रिजेक्ट कर दिया गया है। फिलहाल, 647 वोटों के साथ राजेश व्यास पहले नंबर पर और 645 वोट हासिल करके डॉक्टर विजय चौधरी दूसरे पायदान पर बने हुए हैं। अब बुधवार से छतरपुर जिले के मतों की गिनती शुरू होगी, जिससे चुनावी समीकरण बदलने की उम्मीद है।

शुरुआती आंकड़ों में भोपाल के दिग्गजों का दबदबा

सोमवार और मंगलवार को भोपाल और बुरहानपुर जिलों की मतपेटियां खुलने के बाद कई बड़े नामों ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, डॉक्टर पीसी कोठारी 528 वोट पाकर तीसरे, महेश कुमार मौर्य 450 वोटों के साथ चौथे और मोहम्मद महबूब अंसारी 394 वोट लेकर पांचवें नंबर पर चल रहे हैं। वहीं, इंदौर के राकेश सिंह भदौरिया 369 वोटों के साथ छठे और भिंड के दिनेश शुक्ला 268 वोट लेकर सातवें स्थान पर संघर्ष कर रहे हैं। आठवें नंबर पर भोपाल के प्रताप भानु सिंह (263 वोट) मौजूद हैं। जबलपुर के शैलेंद्र वर्मा 207 वोटों के साथ नौवें और इंदौर के नरेंद्र कुमार जैन 199 वोट लेकर दसवें स्थान पर टिके हुए हैं। इंदौर और जबलपुर के कई कद्दावर चेहरे फिलहाल उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं।

छतरपुर के वोट तय करेंगे जीत-हार का नया समीकरण

बार काउंसिल इलेक्शन के अगले राउंड को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं और अब सभी की नजरें बुंदेलखंड के छतरपुर जिले पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस जिले के वोटों की गिनती शुरू होते ही टॉप-10 उम्मीदवारों की रैंकिंग और उनके बीच का फासला पूरी तरह बदल सकता है। छतरपुर से मिलने वाला समर्थन ही प्रत्याशियों की किस्मत का असली फैसला करेगा। यहाँ के वकीलों का झुकाव कई बड़े दिग्गजों को रेस से बाहर कर सकता है और पिछड़ रहे उम्मीदवारों की किस्मत चमका सकता है। यही वजह है कि जानकार छतरपुर के नतीजों को इस पूरे चुनाव का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट मान रहे हैं।

कुर्सी के अहंकार में झुलसते खजरी खिरिया के उद्योग, कारखानों पर संकट

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जबलपुर। शहर के खजरी खिरिया इंडस्ट्रियल एरिया में बिजली कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों की घोर लापरवाही के कारण स्थानीय उद्यमी खून के आंसू रोने को मजबूर हैं। यहाँ तैनात असिस्टेंट इंजीनियर (AE), जूनियर इंजीनियर (JE) और लाइनमैन की तिकड़ी ने अपनी मनमानी से व्यापारियों का जीना मुहाल कर दिया है। तकनीकी खराबी और मेंटेनेंस का बहाना बनाकर इस औद्योगिक क्षेत्र की बिजली कभी भी काट दी जाती है। बार-बार होने वाली इस अघोषित कटौती की वजह से फैक्ट्रियों में काम पूरी तरह ठप हो जाता है और व्यापारियों को मजबूरन भारी-भरकम डीजल फूंककर जनरेटर चलाने पड़ रहे हैं। सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों से लेकर मैदानी अमले तक, कोई भी इन उद्यमियों की फरियाद सुनने को तैयार नहीं है। हफ्ते में कम से कम 5 दिन उद्योगों को इसी नरकीय स्थिति का सामना करना पड़ता है।

अजीब खेल: बिजली आने पर ले लिया जाता है 'मेंटेनेंस परमिट'

खजरी खिरिया औद्योगिक क्षेत्र में बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। बिना किसी पूर्व सूचना या शेड्यूल के मुख्य लाइनों की बिजली सप्लाई अचानक बंद कर दी जाती है। हद तो तब हो जाती है जब आंधी-तूफान के कारण गुल हुई बत्ती को घंटों तक सुधारा नहीं जाता। इसके बाद जब सप्लाई अपने आप बहाल होती है, तो विभाग का अमला मेंटेनेंस का 'परमिट' लेकर दोबारा लाइट बंद कर देता है। इस आंख-मिचौली के खेल ने फैक्ट्रियों के उत्पादन को पूरी तरह चौपट कर दिया है।

महीनों से रोज़ आ रहा है 'फॉल्ट', विभाग के पास बहानों की भरमार

जब भी परेशान उद्योगपति बिजली कटौती की शिकायत लेकर दफ्तर का रुख करते हैं, तो उन्हें हर बार 'लाइन में फॉल्ट' होने का घिसा-पिटा जवाब थमा दिया जाता है। व्यापारियों का सवाल है कि आखिर यह कैसा तकनीकी फॉल्ट है जो पिछले कई महीनों से रोज आ रहा है और जिसे विभाग के इंजीनियर आज तक ठीक नहीं कर पाए? अब जबकि मानसून की शुरुआत हो चुकी है, तो बिजली विभाग ने अपनी नाकामी को छुपाने के लिए बारिश और तेज हवाओं को नया ढाल बना लिया है। गर्मी के मौसम में भी यहाँ के हालात ऐसे ही बदतर थे।

बिजली बिल के साथ डीजल का डबल खर्च, बर्बादी की कगार पर उद्योग

लगातार होने वाली कटौती के बीच उद्योगों को जिंदा रखने के लिए व्यापारियों को रोजाना सैकड़ों लीटर डीजल जलाना पड़ रहा है। एक तरफ फैक्ट्रियों को हर महीने लाखों रुपये का बिजली बिल चुकाना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ डीजल का यह अतिरिक्त खर्च उनकी कमर तोड़ रहा है। इस दोहरी आर्थिक मार के कारण खजरी खिरिया के उद्योगों का बजट पूरी तरह से बिगड़ चुका है। आर्थिक मंदी के इस दौर में बिजली विभाग का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया स्थानीय व्यापार को तबाह कर रहा है।

शिकायत पर दुर्व्यवहार, संवेदनहीन बने जिम्मेदार अफसर

क्षेत्र में तैनात लाइनमैनों का अड़ियल रवैया व्यापारियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। कोई भी पीड़ित व्यापारी जब अपनी समस्या बताता है, तो लाइनमैन सीधे मुंह बात तक नहीं करते। वहीं, कनिष्ठ और सहायक यंत्री (JE और AE) जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी भी पूरी तरह संवेदनहीन हो चुके हैं। शिकायतों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। अपनी जायज मांगों के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे इन बेबस उद्यमियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

दोषी कर्मचारियों पर होगी कड़ी कार्रवाई: मुख्य अभियंता (Chief Engineer)

"खजरी खिरिया औद्योगिक क्षेत्र से व्यापारियों की परेशानियां सामने आई हैं, जो कि बेहद गंभीर मामला है। इस क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को देखने वाले जिम्मेदार अमले की भूमिका की जांच की जाएगी और लापरवाही बरतने वालों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। उद्योगों को निर्बाध बिजली मिले, इसके लिए इस समस्या का जल्द से जल्द स्थाई निराकरण किया जाएगा।"

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