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एक दिन, तीन बुरी खबरें और जिंदगी का बड़ा सबक; मनोज बाजपेयी का खुलासा

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दमदार अभिनय और बेजोड़ संजीदगी के दम पर आज मनोज बाजपेयी को बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन और दिग्गज अदाकारों में गिना जाता है। पर्दे पर उनकी एक्टिंग देखकर कई बार ऐसा लगता है कि मानो वह फिल्म सिर्फ और सिर्फ उन्हीं को ध्यान में रखकर लिखी गई थी। इसका सबसे ताजा और बेहतरीन उदाहरण उनकी हालिया रिलीज फिल्म 'गवर्नर' है। हालांकि, मनोज बाजपेयी का यह फिल्मी सफर हमेशा से इतना सुनहरा नहीं था। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने संघर्षों की एक लंबी और कटीली राह पार की है। हाल ही में दिग्गज अभिनेता ने अपने करियर के उस सबसे मुश्किल और अंधियारे दौर को याद करते हुए एक बेहद भावुक कर देने वाला किस्सा साझा किया है।

जब एक ही दिन में किस्मत ने पलटी बाजी; हाथ से छूटे तीन बड़े काम

मशहूर एंकर और अभिनेता शेखर सुमन के साथ एक विशेष बातचीत के दौरान मनोज बाजपेयी ने अपने पुराने दिनों का दर्द बयां किया। उन्होंने कहा:

"जब इंसान का वक्त खराब होता है, तो वह दिन या वह महीना ऐसा लगता है जैसे कभी खत्म ही नहीं होगा। मेरे करियर की शुरुआत में एक ऐसा वक्त आया था जब मेरे पास एक साथ तीन बड़े प्रोजेक्ट्स थे। एक टीवी शो में मैं मुख्य भूमिका (लीड रोल) निभा रहा था, एक बड़ी कॉरपोरेट फिल्म में भी मेरा लीड रोल तय था और एक आने वाले बड़े शो में मेरा सेकंड लीड किरदार फाइनल हो चुका था। लेकिन किस्मत का क्रूर मजाक देखिए कि मुझे उन तीनों ही प्रोजेक्ट्स से एक ही दिन के भीतर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।"

शूटिंग सेट से कॉस्ट्यूम उतरवाकर कहा— 'कपड़े बदलो और घर जाओ'

अभिनेता ने उस अपमानजनक वाकये को याद करते हुए बताया कि वे तय समय पर अपने पहले शो की शूटिंग के लिए सेट पर पहुंचे थे। उन्होंने बताया, "मैं बकायदा तैयार हुआ और मेरा पहला टेक (शॉट) लिया गया। पहला शॉट पूरा होते ही अचानक डायरेक्टर और असिस्टेंट डायरेक्टर गंभीर चेहरा बनाकर एक कमरे के भीतर चले गए। कुछ देर बाद डायरेक्टर बाहर आया और मुझे वापस कॉस्ट्यूम रूम में ले गया। उसने बेहद रूखे लहजे में मुझसे कहा कि आप अपने खुद के कपड़े पहन लीजिए और यहां से चले जाइए। अभी आपके साथ कुछ सही नहीं लग रहा है। भविष्य में अगर आपके लायक कोई दूसरा छोटा-मोटा रोल होगा, तो हम आपको जरूर बताएंगे।"

जब दोस्त को सताने लगा मनोज के सुसाइड का डर

पहले शो से निकाले जाने के बाद मनोज बाजपेयी बेहद मायूस होकर वापस लौट रहे थे। तभी उनके दिमाग में आया कि उनकी जो कॉरपोरेट फिल्म थी, उसकी शूटिंग भी शुरू हो चुकी है। वे यह देखने के लिए उस सेट पर पहुंच गए कि वहां क्या चल रहा है।

मनोज बाजपेयी ने आगे बताया, "जब मैं कॉरपोरेट फिल्म के सेट पर पहुंचा, तो वहां मौजूद मेरे दोस्त विक्टर ने मुझे देखकर हैरानी से पूछा कि तुम यहां कैसे? मैंने कहा कि बस ऐसे ही घूमने चला आया। विक्टर ने जब मुझसे मेरे पहले शो के बारे में पूछा तो मैंने उदास होकर कहा कि मुझे वहां से निकाल दिया गया है। फिर मैंने उम्मीद से पूछा कि अपनी इस फिल्म में मेरा काम दो-तीन दिन बाद शुरू होना है ना? इस पर विक्टर ने झिझकते हुए कहा कि मुझे तुम्हें यह बात इस तरह नहीं बोलनी चाहिए, लेकिन यहां प्रबंधन ने तुम्हारी जगह किसी दूसरे एक्टर को साइन कर लिया है। मेरा चेहरा देखकर विक्टर इतना डर गया कि उसने तुरंत मेरा हाथ पकड़ा और कहा— यार, तुम यहां से सीधे अपने कमरे पर ही जाओगे ना? प्लीज, वहां जाकर कोई गलत कदम या आत्महत्या (सुसाइड) मत कर लेना।"

असिस्टेंट डायरेक्टर ने फोन पर दिया तीसरा झटका

दो बड़े झटके एक साथ लगने के बाद मनोज बाजपेयी पूरी तरह टूट चुके थे। उन्होंने सोचा कि क्यों न उस तीसरे सीरियल के बारे में पता किया जाए, जिसकी शूटिंग जल्द ही शुरू होने वाली थी। उन्होंने भारी मन से उस शो के असिस्टेंट डायरेक्टर को फोन लगाया और पूछा कि शूटिंग का क्या प्लान है?

इस पर सामने से असिस्टेंट डायरेक्टर ने बेहद लापरवाही से जवाब दिया, "अरे! क्या आपको किसी ने बताया नहीं? हमने उस रोल के लिए फलां एक्टर को फाइनल कर लिया है और उसकी शूटिंग शुरू होने वाली है। हम आपके लिए किसी दूसरे रोल की तलाश कर रहे हैं।" इस तरह मनोज बाजपेयी को महज कुछ घंटों के भीतर अपने तीनों काम गंवाने पड़े थे।

बॉक्स ऑफिस पर 'गवर्नर' ने जीता आलोचकों का दिल

संघर्ष के उसी तपे-तपाए दौर का नतीजा है कि आज मनोज बाजपेयी की फिल्मों का फैंस को बेसब्री से इंतजार रहता है। उनकी मुख्य भूमिका वाली फिल्म 'गवर्नर' इसी महीने 12 जून को देश भर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। इस फिल्म को सिनेमा समीक्षकों और दर्शकों की तरफ से बेहद शानदार समीक्षाएं मिली हैं। फिल्म में मनोज बाजपेयी के अभिनय को एक बार फिर से मास्टरक्लास बताया गया है। सीमित स्क्रीन्स और गंभीर विषय होने के बावजूद इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ बनाए रखते हुए कुल 5.63 करोड़ रुपये का शानदार कलेक्शन दर्ज किया है।

पद्म श्री मिलने पर भावुक हुईं सरिता, आर. माधवन के लिए लिखा खास संदेश

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भारतीय सिनेमा (बॉलीवुड और साउथ) में अपने बेजोड़ और संजीदा अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले मशहूर अभिनेता आर माधवन (R Madhavan) के नाम एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है। महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य और गरिमामयी समारोह के दौरान अभिनेता आर माधवन को प्रतिष्ठित 'पद्म श्री' पुरस्कार से नवाजा। इस खास पल के बाद अभिनेता की पत्नी सरिता बिरजे ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक और खास पोस्ट साझा कर अपने पति को बधाई दी है, जो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है।

राष्ट्रपति भवन में जुटे दिग्गज; माधवन ने जताया सरकार का आभार

देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक 'पद्म पुरस्कार' के वितरण समारोह का दूसरा संस्करण राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित किया गया था। इस हाई-प्रोफाइल गरिमामयी सम्मान समारोह में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत कई कद्दावर राजनेता और हस्तियां मौजूद रहीं।

मनोरंजन जगत और कला के क्षेत्र में आर माधवन के अतुलनीय योगदान को देखते हुए उन्हें इस वर्ष के 'पद्म श्री' सम्मान के लिए चुना गया था। राष्ट्रपति के हाथों यह प्रतिष्ठित मेडल और प्रशस्ति पत्र प्राप्त करने के बाद आर माधवन बेहद भावुक नजर आए और उन्होंने इस सम्मान के लिए भारत सरकार का सहृदय आभार व्यक्त किया।

पत्नी सरिता बिरजे का भावुक पोस्ट: 'तुम वाकई इसके हकदार हो'

जब आर माधवन को राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में इस गौरवशाली सम्मान से नवाजा जा रहा था, तब उस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए उनका पूरा परिवार वहां दर्शक दीर्घा में मौजूद था। समारोह संपन्न होने के बाद अभिनेता की पत्नी सरिता बिरजे ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर राष्ट्रपति भवन की कुछ खूबसूरत तस्वीरें साझा कीं।

तस्वीरें पोस्ट करते हुए सरिता ने लिखा:

"बहुत-बहुत बधाई, माय लव। तुम्हें यह 'पद्म श्री' सम्मान बेहद मुबारक हो, तुम सचमुच इसके हकदार हो। सिनेमा के प्रति तुम्हारे जुनून, बेइंतहा कठिन परिश्रम और तुम्हारी अद्भुत कला ने अनगिनत लोगों का दिल जीता है। मुझे आज और हमेशा तुम पर बहुत ज्यादा गर्व रहेगा।"

माधवन ने महाराष्ट्र सरकार और फैंस का कहा— शुक्रिया

पद्म श्री से सम्मानित होने के बाद खुद अभिनेता आर माधवन ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल से एक दिल छू लेने वाला संदेश पोस्ट किया। उन्होंने लिखा:

"पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित होने पर मुझे बेहद खुशी, विनम्रता और गर्व की अनुभूति हो रही है। इस गरिमामय और बड़े सम्मान के लिए मैं भारत सरकार को दिल की गहराइयों से धन्यवाद देता हूं। इसके साथ ही, मैं महाराष्ट्र सरकार का भी विशेष रूप से आभारी हूं, जिन्होंने इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए मेरे नाम की सिफारिश की और मुझ पर यह भरोसा जताया।"

फैंस के साथ इस खुशी को साझा करते हुए माधवन ने आगे कहा कि, "यह दिन मेरे और मेरे पूरे परिवार के लिए हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बन गया है। मेरी फिल्मों को देखने, मेरे निभाए किरदारों को इतना प्यार देने और इतने लंबे फिल्मी सफर में मेरा लगातार साथ निभाने के लिए आप सभी फैंस का बहुत-बहुत शुक्रिया। यह सम्मान जितना मेरा है, उतना ही आप सबका भी है। आपके इसी निश्छल प्यार और दुआओं की बदौलत मैं आज जीवन के इस मुकाम तक पहुंच पाया हूं।"

50 रुपए के विवाद में बड़ा हादसा, फल विक्रेता ने हाथ ठेला मालिक पर चाकू से किया हमला

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जबलपुर। जबलपुर-पाटन मार्ग से जुड़े तेंदूखेड़ा बस स्टैंड पर एक बेहद खौफनाक वारदात सामने आई है। महज 50 रुपये फेंककर देने के विवाद में एक फल विक्रेता ने बेरहमी से हाथ ठेला मालिक अतुल अहिरवार (25 वर्ष) के सीने पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया। व्यस्त इलाके में हुई इस खुलेआम हत्या से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। वारदात के बाद गुस्साए स्थानीय लोगों ने जबलपुर-दमोह हाईवे पर शव रखकर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया।

क्या था पूरा मामला?

बताया जा रहा है कि तेंदूखेड़ा बस स्टैंड पर साप्ताहिक बाजार के चलते सुबह से लेकर देर रात तक भारी भीड़ रहती है। यहाँ दूर-दराज और जबलपुर शहर से कई व्यापारी अपनी दुकानें लगाने आते हैं। दोपहर के वक्त स्थानीय निवासी अतुल अहिरवार (पिता वीरन अहिरवार) ने अपना हाथ ठेला एक बाहर से आए फल विक्रेता को किराए पर दिया था।

रात करीब 10 बजे जब अतुल अपने ठेले का किराया वसूलने गया, तो फल विक्रेता ने घमंड में आकर ₹50 जमीन पर फेंक दिए। अतुल ने इस तरह पैसे फेंकने पर आपत्ति जताई, जिससे फल विक्रेता आगबबूला हो गया। दोनों के बीच तीखी बहस और गाली-गलौज शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि फल विक्रेता ने चाकू निकाला और अतुल के सीने पर कई जानलेवा हमले कर दिए।

अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ा दम, आरोपी फरार

सरेराह हुए इस हमले से बाजार में चीख-पुकार मच गई। अतुल लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़ा। जब तक आसपास के दुकानदार और लोग कुछ समझ पाते, आरोपी मौका पाकर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत घायल अतुल को अस्पताल पहुँचाया, लेकिन डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

हाइवे पर लगा लंबा जाम, पुलिस ने दिया आश्वासन

हत्या की खबर मिलते ही मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने जबलपुर-दमोह रोड पर धरना दे दिया, जिससे हाईवे के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और चक्काजाम की स्थिति बन गई।

घटना की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस अधिकारियों ने आक्रोशित जनता को शांत कराया और आश्वासन दिया कि आरोपी की पहचान कर ली गई है और उसे जल्द से जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश में टीमें रवाना कर दी हैं।

शेयर बाजार में जोरदार उछाल, IT और बैंकिंग सेक्टर ने बढ़ाई रफ्तार

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मुंबई: शेयर बाजार में तूफानी तेजी, सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा उछला; निफ्टी 23,900 के पार

घरेलू शेयर बाजार में आज सुबह के कारोबार में शानदार रौनक देखने को मिली। ग्लोबल मार्केट से मिले मजबूत संकेतों और आईटी व प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में आई जोरदार खरीदारी के दम पर मुख्य सूचकांक रिकॉर्ड स्तर पर नजर आए। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स ने 500 अंकों से अधिक की छलांग लगाई, वहीं निफ्टी 50 भी 23,900 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। हालांकि, बीच में सरकारी (PSU) बैंकों में आई बिकवाली और मुनाफावसूली के कारण बाजार कुछ पलों के लिए लाल निशान में भी फिसला, लेकिन निचले स्तरों से आई रिकवरी ने बाजार को दोबारा संभाल लिया।

दूसरी ओर, बड़े बाजार (Broader Market) में थोड़ा दबाव देखा जा रहा है। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में सुस्ती का माहौल है और निफ्टी मिडकैप 100 व निफ्टी स्मॉलकैप 100 गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं।

बाजार की मौजूदा स्थिति: सेंसेक्स और निफ्टी में बढ़त

अगर मुख्य सूचकांकों की बात करें, तो सुबह 10:36 बजे के करीब:

  • सेंसेक्स (Sensex): 538.77 अंक (0.71%) की मजबूती के साथ 76,739.45 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

  • निफ्टी 50 (Nifty 50): 125.85 अंक (0.53%) की तेजी लेकर 23,949.95 पर बना हुआ है।

इंट्रा-डे का उतार-चढ़ाव: आज के कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने ₹76,788.88 का ऊपरी स्तर छुआ (588.20 अंकों की बढ़त), जबकि निफ्टी ने 146.20 अंकों की तेजी के साथ ₹23,970.30 का इंट्रा-डे हाई बनाया।

क्रूड ऑयल में नरमी से मिला बड़ा सहारा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट भारतीय शेयर बाजार के लिए बूस्टर साबित हुई। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1% टूटकर अपने चार महीने के निचले स्तर पर आ गया है।

क्रूड अपडेट: कुछ समय पहले अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड उछलकर $120 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। लेकिन अब दोनों देशों के बीच शांति समझौते की संभावनाओं और होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई सामान्य होने की उम्मीदों के चलते, यह घटकर $76 प्रति बैरल के पास आ गया है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार को बड़ी राहत मिली है।

आईटी और प्राइवेट बैंकों ने संभाली कमान

आज के कारोबार में सेक्टोरल ट्रेंड मिला-जुला देखने को मिल रहा है:

  • गिरावट वाले सेक्टर्स: मेटल इंडेक्स में करीब 1% की कमजोरी है, जबकि निफ्टी ऑटो भी आधे फीसदी से ज्यादा टूट चुका है।

  • तेजी वाले सेक्टर्स: आईटी और प्राइवेट बैंकिंग शेयरों ने आज बाजार की कमान अपने हाथों में ले रखी है। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 1% की बढ़त देखी जा रही है। वहीं, निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स भी 1% से ज्यादा की तेजी के साथ कारोबार कर रहा है। सुबह की गिरावट के बाद सरकारी (PSU) बैंकों में लौटी खरीदारी ने भी बाजार को सहारा दिया है।

विदेशी निवेशकों (FIIs) का बदला रुख

बाजार के सेंटिमेंट को मजबूत करने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी ने भी अहम भूमिका निभाई। हालांकि निवेश की रकम बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन बिकवाली के दौर के बीच इसका आना सकारात्मक रहा। बीते मंगलवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में ₹17.86 करोड़ की शुद्ध (Net) खरीदारी की, जिससे घरेलू निवेशकों का भरोसा बढ़ा।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की उम्मीदों से उत्साह

बाजार की इस तेजी के पीछे एक बड़ा भू-राजनीतिक (Geopolitical) कारण भी है। अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, भारत और अमेरिका बेहद जल्द एक बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं। इस सकारात्मक खबर ने दलाल स्ट्रीट के सेंटिमेंट को और मजबूत कर दिया है, जिससे निवेशकों में नए निवेश को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाजार इसी तरह ऊपरी स्तरों को थामे रखता है, तो क्लोजिंग भी रिकॉर्ड स्तर पर देखने को मिल सकती है।

हेडलाइट की चकाचौंध बनी मौत का कारण, तीन परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

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बांदा| उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के अतर्रा और बिसंडा थाना क्षेत्र के बीच एक बेहद हृदयविदारक सड़क हादसा सामने आया है। अपनी शादी के कार्ड बांटकर घर लौट रहे एक होने वाले दूल्हे और दूसरी बाइक पर सवार मामा की शादी की खरीदारी कर लौट रहे दो युवकों की बाइकों के बीच आमने-सामने की जोरदार टक्कर हो गई। यह भीषण दुर्घटना रात के वक्त बाइकों की हेडलाइट की तेज रोशनी आंखों पर पड़ने के कारण हुई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों बाइकों के परखच्चे उड़ गए और उन पर सवार तीनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस और राहगीरों ने सभी को तुरंत रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि दोनों ही बाइकों पर सवार किसी भी युवक ने हेलमेट नहीं पहन रखा था।

सात दिन बाद उठनी थी बारात, अब उठेगी अर्थी

बिसंडा थाना क्षेत्र के चौसड़ गांव निवासी पिता रामानंद ने रोते हुए बताया कि उनका 22 वर्षीय पुत्र रामजी उनके चार बेटों में सबसे बड़ा था। वह खेती-किसानी में पिता का हाथ बंटाता था। रामजी की शादी तय हो चुकी थी और ठीक सात दिन बाद यानी पहली जुलाई को बबेरू कोतवाली क्षेत्र के टोलाकला गांव उसकी बारात जानी थी। रामजी खुद अपनी शादी के कार्ड सगे-संबंधियों को बांटने गया था।

सोमवार की देर रात जब वह कार्ड बांटकर बिसंडा-ओरन मार्ग पर चौसड़ गांव के हाऊली बरा के पास पहुंचा, तभी सामने से आ रही तेज रफ्तार बाइक ने उसकी बाइक को सीधी टक्कर मार दी। शादी के ऐन वक्त पर इकलौते कमाऊ बेटे की मौत से मां शोभा देवी और पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। इस दर्दनाक हादसे से चौसड़ और लड़की पक्ष के गांव टोलाकला, दोनों ही गांवों में सन्नाटा पसर गया है।

मामा की शादी में आया था भांजा, बाजार से लौटते समय हुआ काल का ग्रास

दुर्घटना की शिकार हुई दूसरी बाइक पर चौसड़ गांव के ही राजू कुशवाहा (40 वर्ष) और उनके साथ पारा बिहारी निवासी राहुल (16 वर्ष) सवार थे। चौसड़ गांव के निवासी दिलीप कुशवाहा ने बताया कि उनके बड़े भाई सुनील की शादी 24 जून को होनी तय है। इसी शादी के समारोह में शामिल होने के लिए उनका सगा भांजा राहुल करीब 15 दिन पहले ही अपने ननिहाल आया था।

राहुल ने पिछले वर्ष ही हाईस्कूल की परीक्षा पास की थी और वह दो भाइयों में बड़ा था। अभी महज एक साल पहले ही राहुल की मां गिरजा का देहांत हुआ था और अब इस हादसे ने पिता राजकुमार को पूरी तरह तोड़ दिया है। सोमवार की देर रात राहुल गांव के ही राजू के साथ ओरन मार्ग स्थित बाजार की एक दुकान से शादी का कुछ सामान और खरीदारी करने गया था। बाजार से लौटते समय दोनों इस भयावह हादसे का शिकार हो गए।

बुढ़ापे का एकमात्र सहारा भी छिन गया

इस हादसे में जान गंवाने वाले 40 वर्षीय राजू कुशवाहा के वृद्ध पिता बृजलाल ने बदहवास हालत में बताया कि राजू उनका इकलौता बेटा था और उनके बुढ़ापे का एकमात्र लाठी का सहारा था, जो अब इस दुनिया में नहीं रहा। राजू पेशे से किसान था और खेती करके अपने पूरे परिवार का पेट पालता था। उसके पीछे अब उसकी पत्नी शोभा, एक मासूम बेटा और एक बेटी अनाथ हो गए हैं।

बिसंडा थानाध्यक्ष चंद्रप्रकाश तिवारी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि दो मोटरसाइकिलों की आपसी भिड़ंत में तीन लोगों की असमय मौत हुई है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से अपील की है कि रात के समय वाहनों की हेडलाइट को डिपर पर रखें और दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें, क्योंकि इस हादसे में किसी भी मृतक ने हेलमेट नहीं पहना था, जिसके कारण सिर पर गंभीर चोटें आईं और उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

मुंबई में मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, रेलवे ट्रैक तक डूबे

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मुंबई: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में मानसून की पहली बारिश ही आम जनता के लिए बड़ी आफत बनकर बरसी है। मंगलवार को हुई मूसलाधार बारिश के कारण शहर की सड़कें, रेलवे ट्रैक और कई सबवे पूरी तरह पानी में डूब गए, जिससे मुंबईकरों का जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बुधवार के लिए भी मुंबई में भारी बारिश का अनुमान जताते हुए 'येलो अलर्ट' जारी किया है। इसके साथ ही पूरे महाराष्ट्र में सक्रिय मानसून को देखते हुए राज्य के अलग-अलग हिस्सों के लिए भी येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं।

जलभराव से थमी रफ्तार, अंधेरी अंडरपास बंद

मंगलवार को हुई भारी बारिश की वजह से मुंबई के कई इलाकों में घुटनों तक पानी भर गया। सड़कों पर जलभराव के कारण यातायात रेंगता नजर आया और प्रशासन को बाढ़ जैसे हालात वाले क्षेत्रों में आवाजाही पर रोक लगानी पड़ी। एवरार्ड नगर में पानी से लबालब भरे सबवे को आम लोगों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया। वहीं, साकी नाका मेट्रो स्टेशन समेत कई प्रमुख इलाकों में भी जलभराव का असर साफ देखने को मिला। सबसे खराब स्थिति अंधेरी अंडरपास की रही, जिसे सुरक्षा के लिहाज से बंद करना पड़ा। नगर निगम (BMC) के अधिकारियों के मुताबिक, अंडरपास में पानी भरने की समस्या का कोई तात्कालिक समाधान नहीं मिल पाया है, जिसके चलते वहां जवानों को तैनात किया गया है ताकि कोई गाड़ी अंदर न जा सके।

जोरदार बारिश के बीच रेल सेवा सामान्य

एक तरफ जहां सड़कों पर पानी भरने से यातायात बाधित हुआ, वहीं दूसरी तरफ मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवा पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ा। नगर निगम के अनुसार, पानी से भरे अंधेरी अंडरपास को छोड़कर शहर के अन्य सभी सबवे खुले रहे। वेस्टर्न रेलवे ने पुष्टि की है कि भारी बारिश के बावजूद सुबह के व्यस्त समय (पीक ऑवर्स) के दौरान हार्बर लाइन और चर्चगेट-दहानू कॉरिडोर समेत सभी मुख्य रूटों पर उपनगरीय ट्रेनें सामान्य रूप से चलती रहीं, जिससे नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत मिली। हालांकि, रातभर हुई बारिश के कारण मुंबई और नवी मुंबई के निचले इलाकों में पानी जमा हो गया था।

जानिए कहाँ कितनी हुई बारिश

नगर निगम द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को सुबह 8:00 बजे से रात 11:00 बजे के बीच मुंबई शहर में औसतन 56 एमएम बारिश दर्ज की गई। इस दौरान पूर्वी उपनगरों में 23 एमएम और पश्चिमी उपनगरों में 33 एमएम बारिश हुई। रात के समय पश्चिमी उपनगरों में बारिश की रफ्तार काफी तेज थी, जिसमें कांदिवली के चारकोप में 32 मिमी, मलाड में 28 मिमी, गजधरबंध पंपिंग स्टेशन पर 26 मिमी, जुहू में 22 मिमी और सांताक्रूज में 21 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। आपदा प्रबंधन की टीमें स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

युवक की संदिग्ध मौत: बगीचे में पेड़ से लटका मिला शव

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वैशाली। बिहार के वैशाली जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ बेलसर थाना अंतर्गत मिश्रौलिया गाँव में बुधवार की सुबह एक युवक का शव आम के पेड़ से लटका हुआ पाया गया। सुबह-सुबह इस खबर के फैलते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और घटनास्थल पर ग्रामीणों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। मृतक की शिनाख्त मिश्रौलिया निवासी विनोद मिश्रा के 35 वर्षीय बेटे कुंदन कुमार के तौर पर की गई है। इस घटना के बाद से पूरे गाँव में सन्नाटा और दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुँची पुलिस ने मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है।

रात में कुछ लोगों के साथ देखा गया था युवक

स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कुंदन कुमार गाँव से थोड़ी दूरी पर एक एकांत जगह में मुर्गी फार्म चलाता था और अक्सर रात के समय वहीं रुकता था। बताया जा रहा है कि मंगलवार की रात को भी उसे कुछ लोगों के साथ पोल्ट्री फार्म पर देखा गया था। लेकिन अगली सुबह उसका शव गाँव के पास ही एक बगीचे में पेड़ से झूलता मिला। कुंदन शादीशुदा था, मगर पारिवारिक विवाद और अनबन के चलते काफी समय से अपनी पत्नी से अलग रह रहा था। घटना की भनक लगते ही रोते-बिलखते परिजन भी मौके पर पहुँच गए, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है।

फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को बुलाया गया, पुलिस जाँच में जुटी

वारदात की जानकारी मिलते ही प्रभारी थाना अध्यक्ष मनीष कुमार दलबल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने फौरन शव को अपने नियंत्रण में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है। कानून व्यवस्था बनाए रखने और सुराग तलाशने के लिए पुलिस टीम ने मौके का गहन मुआयना किया। मामले के पेचीदा होने के कारण साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर तलब किया गया है।

हत्या या आत्महत्या? गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस

इस घटना को लेकर गाँव के भीतर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इलाके का एक धड़ा जहाँ इसे सुसाइड मान रहा है, वहीं दूसरी ओर भारी संख्या में ग्रामीण इसे सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या करार दे रहे हैं। फिलहाल, मौत की असली वजह क्या है, इसे लेकर सस्पेंस बना हुआ है।

थाना प्रभारी मनीष कुमार ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि पुलिस हर एंगल को खंगाल रही है। केस की जाँच मर्डर और सुसाइड, दोनों ही बिंदुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। पीड़ित परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और फॉरेंसिक लैब की वैज्ञानिक जाँच रिपोर्ट के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बचपन के यारों का साथ आखिरी सांस तक, अग्निकांड ने छीनी दोनों की जिंदगी

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कानपुर| उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण और कलेजा कंपा देने वाले अग्निकांड की तपिश ने कानपुर शहर के दो आशियानों के चिरागों को हमेशा के लिए बुझा दिया। इस हादसे में जान गंवाने वाले गोविंद नगर निवासी संयम और बर्रा के रहने वाले सूरज की वर्षों पुरानी और अटूट दोस्ती थी। दोनों ने रतनलाल नगर के दून स्कूल से एक साथ अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की, अपने सुनहरे भविष्य और करियर के सपने संजोकर एक साथ एनीमेशन स्टूडियो में नौकरी की शुरुआत की, और अफसोस कि इस भयानक हादसे में दोनों ने एक साथ इस दुनिया को भी अलविदा कह दिया।

परिजनों और चश्मदीदों के मुताबिक, दोनों दोस्तों की मौत इमारत के भीतर फैले अत्यधिक जहरीले धुएं के कारण दम घुटने से हुई है। उनके शरीर पूरी तरह काले पड़ चुके थे। आशंका जताई जा रही है कि आग की लपटों और धुएं से खुद को बचाने के लिए दोनों दोस्तों ने खुद को किसी सुरक्षित कमरे या बाथरूम में बंद कर लिया था, जो बाद में उनका काल बन गया। मंगलवार तड़के करीब 5:00 बजे संयम का पार्थिव शरीर गोविंद नगर 11 ब्लॉक स्थित उनके निवास पर पहुंचा और उसके कुछ ही देर बाद सुबह 6:30 बजे सूरज का शव भी बर्रा-7 लाया गया, जिसके बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई।

"एक बार तो बोल बेटा…" मां की करुण पुकार से रो पड़ा पूरा मोहल्ला

मंगलवार की सुबह जब संयम का शव उसके घर के चौखट पर लाया गया, तो उसकी मां सोनिया बेटे के शव से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगीं। उनकी दर्दनाक चीखें वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर रही थीं। वे बार-बार कह रही थीं, "ऐसे कैसे बिना कुछ बताए चला गया बेटा… कुछ तो बोल, तेरी मां तेरी एक आवाज सुनने के लिए तड़प रही है।"

परिजनों ने बताया कि संयम के जीवन को लेकर परिवार के ढेरों अरमान थे। उसके मामा सौरभ दुआ ने रुआंसे गले से कहा कि, "भांजे की बारात निकालने की तैयारियां सोच रखी थीं, क्या पता था कि बारात की जगह उसकी अंतिम यात्रा में शामिल होना पड़ेगा।"

दादी के 17वें संस्कार के दिन ही उठी पोते की अर्थी

संयम के परिवार पर दुखों का यह पहाड़ बेहद अजीब और दर्दनाक समय पर टूटा है। महज 17 दिन पहले ही संयम की दादी ऊषा रानी का स्वर्गवास हुआ था और मंगलवार को ही उनका सत्रहवां संस्कार संपन्न होना था। संयम ने परिवार को वचन दिया था कि वह मंगलवार की सुबह की ट्रेन से इस संस्कार में शामिल होने के लिए कानपुर पहुंचेगा। लेकिन सुबह उसकी जगह जब उसका शव घर आया, तो पूरे मोहल्ले का कलेजा फट गया। बर्रा-2 स्थित स्वर्गाश्रम घाट पर गमगीन माहौल में संयम का अंतिम संस्कार किया गया।

मां से कहा था— 'घर पहुंच गया हूं, ख्याल रखना', कुछ घंटों बाद आया शव

दूसरी तरफ, बर्रा-7 में सोमवार की पूरी रात सूरज की मां मीरा को इस अनहोनी की भनक तक नहीं लगने दी गई थी। परिजनों ने उन्हें ढांढस बंधाने के लिए कह रखा था कि सूरज सिर्फ मामूली रूप से जख्मी है और उसे इलाज के लिए अस्पताल से घर लाया जा रहा है। लेकिन जैसे ही सुबह गाड़ी से सूरज का शव नीचे उतारा गया, मां बदहवास होकर जमीन पर गिर पड़ीं।

वे रोते हुए चिल्लाने लगीं, "तूने तो कल ही फोन पर कहा था कि मैं बस घर पहुंचने वाला हूं, तुम अपना ख्याल रखना… अब तेरे बिना मेरा ख्याल कौन रखेगा।" सूरज के मामा जितेंद्र ने बताया कि सूरज अभी दो दिन पहले ही अपनी शादी के लिए लड़की देखने शहर आया था। तीन साल पहले एक पेट्रोल पंप हादसे में पिता शिवराम सिंह की मौत के बाद पूरे घर, छोटी बहन सौम्या और भाई सम्राट की जिम्मेदारी अकेले सूरज के ही कंधों पर थी। दोपहर में जब उसका छोटा भाई ऋषिकेश से कानपुर पहुंचा, तब भैरव घाट पर सूरज का अंतिम संस्कार किया गया।

शॉर्ट सर्किट और एसी कंप्रेसर फटने से भड़की थी आग, 15 छात्रों की मौत

यह पूरी त्रासदी लखनऊ के अलीगंज स्थित एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में लगी भीषण आग के कारण हुई। इस दर्दनाक हादसे में एनीमेशन और कोचिंग करने वाले कुल 15 छात्र-छात्राओं की जलने और दम घुटने से असमय मौत हो गई, जबकि 9 से अधिक छात्र गंभीर रूप से झुलस गए और खिड़कियों से कूदने के कारण चोटिल हो गए, जिनका अस्पताल में इलाज जारी है।

अलीगंज बिल्डिंग का लेआउट और घटनाक्रमविवरण
ग्राउंड फ्लोर (भूतल)पेट शॉप (पालतू जानवरों की दुकान) संचालित थी।
प्रथम तल (First Floor)पेट शॉप मालिक का मुख्य वेयरहाउस (गोदाम) था।
द्वितीय व तृतीय तल3D एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर, गेमिंग जोन और 12वीं की कोचिंग।
आग का कारण और समयदोपहर करीब 2:30 बजे वेयरहाउस में शॉर्ट सर्किट के बाद एसी का कंप्रेसर फटा।

दमकल और पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, वेयरहाउस में लगी आग ने चंद मिनटों में ही विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी सीढ़ी को धुएं की चपेट में ले लिया। दूसरी और तीसरी मंजिल पर पढ़ रहे छात्रों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिल सका। करीब दो घंटे तक चले एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद खिड़कियां काटकर 15 शवों को बाहर निकाला जा सका।

दौरा छोड़ मौके पर पहुंचे सीएम योगी; मृतकों को 7-7 लाख रुपये का मुआवजा

हादसे की भयावहता की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना अलीगढ़ का वीआईपी दौरा बीच में ही रद्द कर तुरंत लखनऊ वापस लौटे और सीधे घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दिल्ली से तत्काल लखनऊ पहुंचकर अस्पताल में भर्ती घायल बच्चों का हालचाल जाना। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश पर गृह सचिव और डीजीपी सहित तमाम आला अधिकारियों की विशेष टीम आग के तकनीकी कारणों की जांच कर रही है।

इस राष्ट्रीय त्रासदी पर शोक व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार की तरफ से मृतकों के आश्रितों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से प्रत्येक मृतक के शोकाकुल परिवार को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज के साथ 50-50 हजार रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है।

‘आरोप बेबुनियाद हैं’— सीएम मोहन यादव के बचाव में उतरी बीजेपी, कांग्रेस पर साधा निशाना

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भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों को भारतीय जनता पार्टी ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने एक बयान जारी कर कहा है कि कांग्रेस राजनीतिक साजिश के तहत तथ्यों को तोड़-मरोड़कर जनता के बीच भ्रम फैला रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार का किसी भी प्रकार के अवैध भूमि सौदे से कोई लेना-देना नहीं है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस एक बेहद लोकप्रिय मुख्यमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है।

मुख्यमंत्री और परिवार की जमीनों का दिया ब्यौरा

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री और उनके परिवार की संपत्तियों का विवरण साझा करते हुए कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह तथ्यहीन बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. मोहन यादव की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर ही ये निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं। खंडेलवाल ने आंकड़ों के जरिए स्पष्ट किया कि:

  • मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2023 के चुनावी नामांकन पत्र में दर्ज 17 एकड़ भूमि का विवरण वर्ष 2026 में भी वैसा ही है।

  • उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम दर्ज 12.29 एकड़ भूमि में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है।

  • मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव यादव के नाम दर्ज 16 एकड़ भूमि भी वैसी ही है और यह जमीन मास्टर प्लान लागू होने से पहले की है।

  • उनकी बहू शालिनी यादव द्वारा खरीदी गई 10 एकड़ कृषि भूमि मास्टर प्लान क्षेत्र की सीमा से पूरी तरह बाहर स्थित है।

उन्होंने यह भी साफ किया कि आरोपों में जिन रिश्तेदारों का जिक्र किया गया है, उनका अपना स्वतंत्र अस्तित्व है और उनके भूमि लेन-देन से मुख्यमंत्री परिवार का कोई संबंध नहीं है।

सिद्धि विनायक कंपनी के आरोपों पर दी सफाई

कांग्रेस के आरोपों में शामिल 'सिद्धि विनायक कंपनी' को लेकर भी भाजपा ने स्थिति साफ की है। प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि इस कंपनी के पास वर्ष 2023 में 68 एकड़ भूमि थी, जो जून 2026 तक बढ़ने के बजाय घटकर 65 एकड़ रह गई है। इसके साथ ही उन्होंने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि डॉ. मोहन यादव वर्ष 2017 में ही इस कंपनी के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे चुके थे। इसके बाद से कंपनी के कामकाज या संचालन से उनका कोई वास्ता नहीं रहा है।

पिछड़ा वर्ग नेतृत्व को निशाना बनाने का लगाया आरोप

हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस की इस रणनीति पर तीखा हमला बोलते हुए इसे पिछड़े वर्ग के नेताओं के खिलाफ एक बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि जब भी मध्य प्रदेश में पिछड़े वर्ग का कोई नेता मुख्यमंत्री बना है, कांग्रेस ने हमेशा उन्हें कमजोर करने और निशाना बनाने का काम किया है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, शिवराज सिंह चौहान और अब वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस पिछड़े वर्ग के नेतृत्व को पचा नहीं पाती है। उन्होंने अंत में कहा कि कांग्रेस विकास के मुद्दे पर बीजेपी का सामना करने में नाकाम रही है, इसलिए ऐसे झूठे आरोप लगा रही है, लेकिन प्रदेश की समझदार जनता इस सच्चाई को भली-भांति जानती है।

‘मुगल, पठान और अंग्रेज शासकों के नाम नहीं रहेंगे’, बंगाल में नामकरण पर सियासत तेज

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों के नामों को लेकर एक नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार को एक बड़ा एलान करते हुए कहा कि आने वाले समय में राज्य की किसी भी सड़क या इलाके का नाम मुगलों, पठानों या अत्याचारी ब्रिटिश शासकों के नाम पर नहीं रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए एक विशेष समिति बनाई गई है, जो मौजूदा नामों की जांच और समीक्षा करेगी।

सड़क का नाम बदलने से शुरू हुआ विवाद

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब कोलकाता नगर निगम ने पार्क सर्कस इलाके में स्थित 'सुहरावर्दी एवेन्यू' का नाम बदलकर 'गोपाल मुखर्जी रोड' कर दिया। निगम के इस फैसले के बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और सरकार पर इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है।

नामकरण के इतिहास पर विपक्ष के दावे

विपक्ष के नेताओं का तर्क है कि सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री हुसैन शहीद सुहरावर्दी के नाम पर नहीं है। बल्कि, यह नाम उनके परिवार से ताल्लुक रखने वाले नामचीन शिक्षाविद और डॉक्टर, सर हसन सुहरावर्दी के सम्मान में रखा गया था। विपक्षी नेताओं के दावों के मुताबिक, साल 1932 में तत्कालीन कलकत्ता इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट ने इस सड़क का नामकरण किया था।

विदेशी नामों की समीक्षा के लिए बनी समिति

सुवेंदु अधिकारी ने विपक्ष के इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि कोलकाता की पहचान अब केवल देश के सच्चे भक्तों के नामों से होनी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि शहर में मुगल, पठान या ब्रिटिश काल से जुड़े नामों की समीक्षा होगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें बदला जाएगा। इसके लिए स्वामी प्रदीप्तानंद की अगुवाई में एक समिति बनाई गई है जो आम जनता से भी इस बारे में सुझाव लेगी। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि सिस्टर निवेदिता जैसे महान व्यक्तित्व इसके अपवाद रहेंगे, लेकिन विदेशी या विवादित नामों को बदला जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे राष्ट्रनायकों के नाम सामने आते हैं, तो उनके नाम पर विचार किया जाएगा।

फैसले पर तेज हुई राजनीतिक खींचतान

भाजपा के इस कदम के बाद बंगाल की राजनीति में घमासान मच गया है। कांग्रेस और वामपंथी दलों ने इसे ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी बताया है। पवन खेड़ा और जयराम रमेश सहित कई दिग्गज विपक्षी नेताओं ने कहा है कि इतिहास को राजनीतिक चश्मे से बदलने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। सड़कों के नाम बदलने के इस फैसले ने अब बंगाल के सियासी पारे को गरमा दिया है, जहां संस्कृति, इतिहास और पहचान को लेकर जंग छिड़ गई है।

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