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युद्ध जैसी तैयारी! बेलारूस ने सेना के पुनर्गठन का किया बड़ा ऐलान

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मिन्स्क: बेलारूस की सरकार रूस-यूक्रेन युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने की बड़ी तैयारी कर रही है। बेलारूस के विपक्षी संगठन 'यूनाइटेड ट्रांजिशनल कैबिनेट' ने इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट यूक्रेन सरकार को सौंपी है। विपक्ष का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में बेलारूस सरकार ने कई ऐसे कदम उठाए हैं, जो साफ तौर पर युद्ध की तैयारियों की ओर इशारा करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बेलारूस ने अपने सैन्य कानूनों में बड़े बदलाव किए हैं, जिससे अब जरूरत पड़ने पर विदेशी धरती पर भी अपनी सेना भेजने का रास्ता साफ हो गया है।

यूक्रेन की जीत से जुड़ी है बेलारूस की आजादी

इस रिपोर्ट को लेकर बेलारूस की प्रमुख विपक्षी नेता स्वेतलाना त्सिखानोव्सकाया का एक बड़ा बयान सामने आया है। उनका कहना है कि यूक्रेन का यह संघर्ष केवल उसकी अपनी आजादी की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह खुद बेलारूस के लोकतांत्रिक भविष्य से भी गहरा संबंध रखता है। विपक्ष का मानना है कि यदि यूक्रेन इस युद्ध में सफल होता है, तो इससे बेलारूस के भीतर भी तानाशाही के खिलाफ राजनीतिक बदलाव की उम्मीदों को नई ताकत मिलेगी।

सेना का विस्तार और कैदियों की भर्ती का आरोप

विपक्ष की इस रिपोर्ट में बेलारूस की सैन्य तैयारियों को लेकर कई चौंकाने वाले दावे किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बेलारूस ने पिछले कुछ समय में अपनी सेना का तेजी से आधुनिकीकरण और विस्तार किया है। इसके तहत न केवल नियमित सैनिकों की संख्या बढ़ाई गई है, बल्कि नए मिलिट्री कमांड भी गठित किए जा रहे हैं। इसके अलावा, आपातकालीन स्थितियों के लिए बड़ी संख्या में रिजर्व बल (सैनिकों) को तैयार किया जा रहा है। विपक्ष ने यह गंभीर आरोप भी लगाया है कि सरकार ने सेना में भर्ती के नियमों को काफी ढीला कर दिया है और अब कैदियों को भी फौज में शामिल करने की कोशिशें की जा रही हैं।

रूसी सेना और परमाणु हथियारों की तैनाती

रिपोर्ट में एक और बड़ा दावा करते हुए कहा गया है कि बेलारूस की धरती पर रूसी सैनिकों की हलचल और मौजूदगी पहले के मुकाबले काफी ज्यादा बढ़ गई है। रूस ने अपने सामरिक परमाणु हथियार (टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन्स) और अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम भी बेलारूस में तैनात कर दिए हैं। इसके साथ ही, रूस का कुख्यात 'वैगनर ग्रुप' बेलारूस के सैनिकों को युद्ध के लिए विशेष ट्रेनिंग दे रहा है। हालांकि, ये सभी दावे पूरी तरह से बेलारूस के विपक्षी दल की रिपोर्ट पर आधारित हैं और बेलारूस सरकार की तरफ से अभी तक इन आरोपों पर कोई भी आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

गर्मी से राहत: कक्षा 8 तक के स्कूलों पर लगा अस्थायी अवकाश

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मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में आसमान से बरसती आग और चिलचिलाती धूप को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने बच्चों की सेहत की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। जिला मजिस्ट्रेट कुमार गौरव ने बुधवार को एक आधिकारिक निर्देश जारी करते हुए 24 जून से 27 जून 2026 तक जिले के सभी सरकारी, प्राइवेट और प्ले-स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई पूरी तरह स्थगित करने का फैसला किया है।

नए कानून की धारा-163 के तहत प्रतिबंध लागू

डीएम द्वारा जारी किए गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में पारा लगातार बढ़ रहा है, और दोपहर की भीषण लू बच्चों के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती है। छात्रों की भलाई को सर्वोपरि मानते हुए प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा-163 के अंतर्गत इस पाबंदी को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है।

कक्षाओं के संचालन के लिए समय में बदलाव

प्रशासनिक आदेश के मुताबिक, नर्सरी से लेकर सातवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए सभी शैक्षणिक कार्य पूरी तरह बंद रहेंगे। हालांकि, आठवीं और उससे ऊपर की बड़ी कक्षाओं के लिए थोड़ी राहत दी गई है; इन कक्षाओं की पढ़ाई सुबह 10:00 बजे तक ही संचालित की जा सकेगी। स्कूल संचालकों को निर्देश दिया गया है कि वे इस समयावधि के अनुसार ही अपनी कक्षाओं और अन्य गतिविधियों का शेड्यूल तय करें।

आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए भी कड़े नियम

स्कूली बच्चों के साथ-साथ छोटे बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) विभाग को भी सख्त गाइडलाइन दी है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर सुबह 9:00 बजे से पहले ही बच्चों को पोषाहार बांट दिया जाए। इस तय समय के बाद केंद्रों पर होने वाली अन्य सभी रोज़मर्रा की गतिविधियां पूरी तरह बंद रहेंगी।

लापरवाही बरतने पर होगी सख्त कार्रवाई

जिलाधिकारी कुमार गौरव ने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की है कि वे इस मौसम में बच्चों को बिना वजह तेज धूप में बाहर न निकलने दें और उन्हें हाइड्रेटेड रखें। प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों और पुलिस बल को निर्देश दिया है कि इस आदेश का जमीन पर कड़ाई से पालन कराया जाए। यदि कोई भी संस्थान नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह व्यवस्था 27 जून तक प्रभावी रूप से लागू रहेगी।

सोनभद्र में हादसे के बाद तनाव, बच्ची की मौत पर फूटा लोगों का आक्रोश

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सोनभद्र| उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के बभनी थाना क्षेत्र से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां के बड़होर गांव में स्थित मस्जिद तिराहे पर मंगलवार की देर रात एक अनियंत्रित 14 चक्का भारी ट्रक की चपेट में आने से दो साल की एक मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत हो गई। इस भयावह हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उग्र भीड़ ने ट्रक को चारों तरफ से घेरकर लाठी-डंडों और ईंट-पत्थरों से भारी पथराव कर दिया, जिससे वाहन के शीशे पूरी तरह चकनाचूर हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और बड़ी मशक्कत के बाद हालात पर काबू पाया।

सड़क किनारे खड़ी थी मासूम, अनियंत्रित ट्रक ने ली जान

परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, बड़होर गांव के रहने वाले नूर आलम की दो वर्षीय मासूम बेटी रानादिल देर रात अपने घर के पास सड़क के किनारे खड़ी थी। इसी दौरान मुख्य मार्ग से गुजर रहे एक तेज रफ्तार 14 चक्का ट्रक के चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए बच्ची को अपनी चपेट में ले लिया।

ट्रक के पहिए की चपेट में आने से बच्ची गंभीर रूप से लहूलुहान हो गई। हादसे को देख आसपास मौजूद लोग चीखते हुए मौके पर दौड़े और बच्ची को तुरंत उठाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) बभनी लेकर पहुंचे। हालांकि, अस्पताल के डॉक्टरों ने गहन परीक्षण के बाद मासूम रानादिल को मृत घोषित कर दिया।

मौत की खबर से फैला तनाव; पुलिस वाहन को ग्रामीणों ने घेरा

जैसे ही अस्पताल से बच्ची की मौत की खबर गांव में पहुंची, देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में आक्रोशित ग्रामीण घटना स्थल पर जमा हो गए। बच्ची की असमय मौत से गुस्साए लोगों ने भागने की कोशिश कर रहे भारी ट्रक को तिराहे पर ही रोक लिया।

भीड़ का गुस्सा इस कदर था कि लोगों ने हाथ में जो आया— ईंट, पत्थर, लाठी और डंडे, उससे ट्रक पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। पथराव के कारण मौके पर अफरा-तफरी मच गई और सड़क पर दोनों तरफ वाहनों का लंबा जाम लग गया। हालात बिगड़ते देख स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद बभनी थाना के प्रभारी निरीक्षक डीपी यादव अपने दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे।

भारी पुलिस बल ने संभाला मोर्चा; आरोपी चालक हिरासत में

ग्रामीणों के लगातार बढ़ते गुस्से और भारी तनाव को भांपते हुए प्रभारी निरीक्षक ने तुरंत नियंत्रण कक्ष को सूचित कर आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुला लिया। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने आक्रोशित ग्रामीणों को समझा-बुझाकर कानून हाथ में न लेने की अपील की और काफी देर की मशक्कत के बाद भीड़ को शांत कराया।

पुलिस ने सूझबूझ दिखाते हुए क्षतिग्रस्त ट्रक और उसके चालक को उग्र भीड़ के बीच से सुरक्षित निकालकर अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते हुए मासूम के शव को पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। प्रभारी निरीक्षक डीपी यादव ने बताया कि आरोपी ट्रक चालक को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की जा रही है और पीड़ित परिवार से मिलने वाली लिखित तहरीर के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बच्चों की शरारत बनी हादसे की वजह, मधुमक्खियों के हमले में बुजुर्ग की मौत

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आजमगढ़| उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के निजामाबाद थाना क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां के फरिहा कस्बे के अंतर्गत आने वाले कुरैशी मोहल्ले में रहने वाले इश्तियाक कुरैशी (65 वर्ष) की मधुमक्खियों के भीषण और जानलेवा हमले में मौत हो गई। इस दुखद हादसे के बाद से जहां पीड़ित परिवार में कोहराम मचा हुआ है, वहीं पूरे गांव और आसपास के इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।

बकरियां चराने गए थे बुजुर्ग, लड़कों की नादानी पड़ी भारी

परिजनों और चश्मदीदों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना मंगलवार की शाम को हुई। बुजुर्ग इश्तियाक कुरैशी हमेशा की तरह अपनी बकरियों को चराने के लिए फरिहा कस्बे में स्थित एक सरकारी ट्यूबवेल के पास गए हुए थे। उसी दौरान वहां कुछ स्थानीय लड़के पास में ही मौजूद आम के एक बड़े पेड़ से फल तोड़ने की कोशिश कर रहे थे और इसके लिए वे पेड़ पर लगातार कंकड़ मार रहे थे।

बदकिस्मती से, उसी आम के पेड़ की टहनी पर मधुमक्खियों का एक बहुत बड़ा छत्ता लगा हुआ था। लड़कों द्वारा फेंका गया एक कंकड़ सीधे जाकर मधुमक्खियों के छत्ते पर लग गया। कंकड़ टकराते ही हजारों मधुमक्खियां बुरी तरह भड़क गईं और उन्होंने झुंड बनाकर आसपास मौजूद लोगों पर हमला बोल दिया। पत्थर मारने वाले लड़के तो फुर्ती दिखाते हुए मौके से भागने में सफल रहे, लेकिन उम्रदराज होने के कारण इश्तियाक कुरैशी वहां से समय पर नहीं भाग सके और मधुमक्खियों के जानलेवा झुंड के बीच बुरी तरह फंस गए।

जान बचाने के लिए हौज के पानी में उतरे, फिर भी नहीं छोड़ा पीछा

हजारों मधुमक्खियों ने इश्तियाक के पूरे शरीर पर बेरहमी से डंक मारना शुरू कर दिया। इस अचानक हुए हमले से घबराकर अपनी जान बचाने के लिए वे पास में ही स्थित सरकारी ट्यूबवेल के पानी से लबालब भरे हौज (कुंड) में कूद गए। उन्होंने खुद को बचाने के लिए काफी देर तक पानी के भीतर डुबोकर रखा। इसके बावजूद, शिकारी मधुमक्खियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ और वे पानी की सतह के ठीक ऊपर झुंड बनाकर मंडराती रहीं।

काफी देर तक पानी में रहने के कारण जब बुजुर्ग को सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी, तो वे लाचार होकर पानी से बाहर निकले और खेतों की तरफ दौड़ पड़े। लेकिन खूंखार मधुमक्खियों के दल ने उनका पीछा नहीं छोड़ा और उनके चेहरे, सिर और पूरे शरीर पर लगातार सैकड़ों डंक मारते रहे।

हमले से खेत में ही हुए अचेत; कंबल ओढ़कर युवकों ने बचाया

मधुमक्खियों के लगातार और भीषण हमले के कारण बुजुर्ग का शरीर जहर से नीला पड़ने लगा और वे तड़पते हुए खेत में ही बेहोश होकर गिर पड़े। मैदान में चारों तरफ मधुमक्खियों का भयंकर आतंक फैला हुआ था, जिसके कारण शुरुआती कुछ मिनटों तक कोई भी ग्रामीण या राहगीर उनके पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।

बाद में गांव के कुछ साहसी युवकों ने सूझबूझ दिखाई। उन्होंने अपने शरीर पर मोटे कंबल ओढ़े और धुएं व आग की मदद से बड़ी मशक्कत के बाद मधुमक्खियों को वहां से खदेड़ा। युवकों ने तुरंत अचेत हो चुके इश्तियाक को वहां से बाहर निकाला और इलाज के लिए फरिहा के एक नजदीकी निजी अस्पताल लेकर भागे।

जिला अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम

निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने बुजुर्ग की गंभीर और नाजुक हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें तुरंत जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में डॉक्टरों की विशेष टीम ने रातभर उनके शरीर से जहर निकालने और उन्हें बचाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन अत्यधिक डंक मारे जाने के कारण देर रात इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इश्तियाक की मौत की खबर जैसे ही गांव में पहुंची, परिजनों की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया। ग्रामीण और रिश्तेदार बड़ी संख्या में पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने उनके घर पहुंच रहे हैं।

मोहन यादव विवाद पर राजभर का हमला, बोले- आखिर क्या छिपाना चाहते हैं अखिलेश?

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लखनऊ। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार से जुड़े जमीन खरीद विवाद ने अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया और बेहद आक्रामक मोड़ ले लिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा मोहन यादव का खुलकर बचाव किए जाने के बाद यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने उन पर पलटवार किया है। राजभर ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट साझा कर अखिलेश यादव और सैफई परिवार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि इस मामले में अखिलेश यादव की घबराहट और बौखलाहट के पीछे करोड़ों रुपये के बेनामी निवेश का छिपा हुआ राज है।

अखिलेश जी! आप इतना शोर मचाकर क्या छिपाना चाहते हैं?

कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अखिलेश यादव को सीधे संबोधित करते हुए तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने लिखा अखिलेश यादव जी, मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री के संबंध में आप इतना हल्ला क्यों मचा रहे हैं? इतना शोर करके आप आखिर क्या छुपाना चाहते हैं? आप ऐसा क्यों चाहते हैं कि दुनिया सिर्फ वही देखे जो आप दिखाना चाहते हैं? अब मैं उत्तर प्रदेश की जनता को बताता हूं कि आपकी असली पीड़ा क्या है और आप क्यों घबरे हुए हैं।"

राजभर ने आरोप लगाया कि जैसे ही मध्य प्रदेश के इस जमीन मामले की परतें खुलीं, वैसे ही अखिलेश यादव के निवेश पर चोट पहुंच गई और इसी वजह से वे पूरी तरह बौखला गए हैं।

एमपी के आईएएस भरत यादव और सपा कोषाध्यक्ष के रिश्ते का पर्दाफाश

राजभर ने अपनी पोस्ट में एक बेहद चौंकाने वाला प्रशासनिक और पारिवारिक कनेक्शन सामने रखा है। उन्होंने दावा किया कि:

  • मध्य प्रदेश (एमपी) कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भरत यादव, जो वर्तमान में राज्य सड़क विकास निगम के चेयरमैन हैं, उनसे अखिलेश यादव के बेहद करीबी रिश्ते हैं।

  • भरत यादव दरअसल समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष चंद्रपाल यादव के सगे दामाद हैं, जिन्हें राजभर ने अखिलेश यादव का "कुबेर" (वित्तीय रणनीतिकार) बताया है।

  • राजभर का आरोप है कि मध्य प्रदेश में नए हाईवे का रूट कहां से गुजरेगा, इसकी पूरी सटीक जानकारी आईएएस भरत यादव के पास होती है, जो सैफई परिवार के बेहद खास हैं।

राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव की तिलमिलाहट साफ बयां कर रही है कि भरत यादव के जरिए उनके और उनके करीबियों के पैसे मध्य प्रदेश की उन जमीनों में भारी मात्रा में निवेश कराए गए हैं, जहां से हाईवे गुजरने वाला है।

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे का जिक्र: 'जमीन खाने में सैफई परिवार अनुभवी'

अखिलेश यादव पर हमला जारी रखते हुए राजभर ने उत्तर प्रदेश के पुराने कार्यकाल का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन 'खाने' के मामले में सैफई परिवार को पुराना और बड़ा अनुभव है, जिसे पूरा उत्तर प्रदेश अच्छी तरह जानता है।

उन्होंने दावा किया कि लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान भी यही खेल खेला गया था। फिरोजाबाद से लेकर इटावा तक सपा नेताओं ने पहले ही औने-पौने दामों पर किसानों से जमीनें खरीद ली थीं। बाद में निजी और पारिवारिक फायदे के लिए एक्सप्रेसवे के रूट को मनमाने तरीके से सैफई गांव की तरफ घुमा दिया गया, जिससे एक्सप्रेसवे की कुल दूरी बेवजह 30 किलोमीटर और बढ़ गई। बाद में उन जमीनों के बदले सरकार से भारी-भरकम मुआवजा वसूला गया।

'गोमती रिवर फ्रंट' के बाद अब एमपी एक्सप्रेसवे रिपोर्ट का डर

ओपी राजभर ने सपा कार्यकर्ताओं पर निशाना साधते हुए लिखा कि गोमती रिवर फ्रंट घोटाले की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद से अखिलेश यादव के मन में एक गहरा डर बैठ गया है। उन्हें डर है कि यदि मध्य प्रदेश की एक्सप्रेसवे लैंड डील की वास्तविक रिपोर्ट सामने आ गई, तो वहां किया गया उनका सारा बेनामी निवेश पूरी तरह डूब जाएगा। राजभर ने देश की केंद्रीय जांच एजेंसियों से मांग की है कि वे इस बात का पता लगाएं कि मध्य प्रदेश के इस जमीन विवाद में उत्तर प्रदेश के कौन-कौन से बड़े सफेदपोश और राजनेता शामिल हैं।

अखिलेश यादव ने किया था मोहन यादव का बचाव; बताया था बीजेपी की साजिश

गौरतलब है कि इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार पर रियल एस्टेट और जमीन खरीद को लेकर कुछ आरोप लगे थे। इस मामले में अचानक कूदते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मोहन यादव का खुलकर समर्थन किया था।

अखिलेश यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आंतरिक साजिश करार देते हुए कहा था कि मोहन यादव को बदनाम करने के लिए खुद बीजेपी के लोगों ने यह जाल बुना है। अखिलेश ने सवाल उठाया था कि क्या बीजेपी को पहले से पता नहीं था कि मुख्यमंत्री बनने से पहले मोहन यादव रियल एस्टेट का कारोबार करते थे?

अखिलेश ने दावा किया था कि, "यह आरोप इसलिए लगाए जा रहे हैं क्योंकि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व राज्यों के मुख्यमंत्री बदलने का बहाना ढूंढ रहा है। वे मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को पद से हटाना चाहते हैं, और इन दोनों को इसलिए हटाया जा रहा है ताकि अंततः वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को उनके पद से हटा सकें।" अब अखिलेश के इसी बयान पर यूपी में नया सियासी घमासान छिड़ गया है।

अलीगंज की इमारत में पहले भी सुलगी थी आग, फिर क्यों नहीं चेता प्रशासन?

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लखनऊ| उत्तर प्रदेश की राजधानी के अलीगंज इलाके में स्थित एनीमेशन सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और हैरान कर देने वाला खुलासा सामने आया है। इस भयावह हादसे के दो वर्ष पहले भी इसी संस्थान में मौत की चिंगारियां उठी थीं। उस वक्त भी सेंटर के भीतर भयंकर शॉर्ट सर्किट हुआ था, लेकिन सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार अधिकारी और प्रबंधन गहरी नींद में सोए रहे।

न तो पूर्व की घटना से कोई सबक लिया गया और न ही सेंटर के भीतर सुरक्षा व आग से बचाव के कोई पुख्ता इंतजाम किए गए। अलीगंज अग्निकांड में साक्षात मौत के मुंह से बाल-बाल बचकर बाहर आए आशियाना इलाके के निवासी मोहम्मद आसिफ ने इस पूरे लापरवाही तंत्र का पर्दाफाश किया है। आसिफ ने बताया कि वर्ष 2024 के मई-जून के महीनों में भीषण गर्मी के दौरान दोपहर के वक्त सेंटर में तगड़ा शॉर्ट सर्किट हुआ था। उस समय चिंगारियां निकलने के बाद पूरे सेंटर में काला धुआं फैल गया था और छात्रों में अफरा-तफरी मच गई थी। उस वक्त प्रबंधन ने तुरंत सबकी छुट्टी कर दी थी और दो दिन बाद हालात सामान्य होने पर दोबारा क्लास शुरू की थी।

छत का दरवाजा लोहे के ताले से था बंद; जाने की नहीं थी इजाजत

प्रत्यक्षदर्शी मोहम्मद आसिफ ने बताया कि दो वर्ष पहले हुए हादसे के वक्त भी सेंटर में आने-जाने के लिए केवल एक ही संकरा रास्ता मौजूद था। सबसे बड़ी लापरवाही यह थी कि किसी भी छात्र या कर्मचारी को आपातकालीन स्थिति में भी छत पर जाने की अनुमति नहीं थी। छत के मुख्य रास्ते पर लोहे का एक बेहद मजबूत दरवाजा लगाकर उसमें हमेशा बड़ा ताला जड़कर रखा जाता था।

आसिफ ने भरे गले से कहा कि दो साल पहले हुए शॉर्ट सर्किट में किस्मत अच्छी थी कि कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन वहां पढ़ने वाले छात्रों और कर्मचारियों के जेहन में एक गहरा डर बैठ गया था। अगर उसी वक्त प्रशासन और प्रबंधन जाग जाता और इमारत में एक आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की व्यवस्था कर दी गई होती, तो आज उनके 15 बेकसूर साथियों की जान नहीं जाती। इस सामूहिक हत्याकांड के लिए स्थानीय प्रशासन भी बराबर का कसूरवार है, जिसने कभी भी इस कमर्शियल सेंटर की सुरक्षा और फायर एनओसी की जांच करने की जहमत नहीं उठाई।

महज 30 मिनट में बिछ गईं 15 लाशें; फेस डिटेक्शन गेट बना काल

हादसे के उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए आसिफ ने बताया कि अलीगंज अग्निकांड में महज 30 मिनट के भीतर ही उनके 15 साथियों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। आग लगने के बाद अंदर के हालात इतने बदतर और रूह कँपा देने वाले थे कि जिंदा लोगों को बचाना तो दूर, दम टूटने के बाद शवों को बाहर निकालने तक का कोई रास्ता नहीं बचा था।

इसकी सबसे बड़ी और तकनीकी वजह यह थी कि सेंटर का मुख्य प्रवेश द्वार पूरी तरह हाई-टेक और बायोमीट्रिक सिस्टम पर काम करता था। यह गेट केवल 'फेस डिटेक्शन' (चेहरा पहचानने) के बाद ही खुलता या बंद होता था। जैसे ही सेंटर में शॉर्ट सर्किट के बाद आग भड़की, बिजली गुल होते ही वह ऑटोमैटिक बायोमीट्रिक सिस्टम अपने आप पूरी तरह जाम (लॉक) हो गया। इसके कारण अंदर फंसे छात्र चाहकर भी मुख्य द्वार को धक्का देकर बाहर नहीं भाग सके।

इंटरनेट केबल के सहारे खिड़की से कूदे; 2 मिनट में आ गई थी मौत पास

आसिफ कहते हैं कि, "मेरी किस्मत बहुत अच्छी थी कि मैं आज जिंदा यह दास्तां सुना पा रहा हूं। आग लगने के केवल दो मिनट के भीतर ही मौत हमारे सिर पर नाच रही थी। मुख्य दरवाजा लॉक हो चुका था और चारों तरफ से आग की लपटें हमें घेर रही थीं। ऐसे में हमने बिना वक्त गंवाए सूझबूझ दिखाई और कमरे की खिड़की का भारी शीशा तोड़ दिया।"

खिड़की तोड़ने के बाद आसिफ और उनके कुछ दोस्तों ने दीवार के सहारे लटक रहे इंटरनेट और वाई-फाई के मोटे केबलों (तारों) को कसकर पकड़ा और उसके सहारे नीचे कूदने का जानलेवा फैसला किया। उस समय नीचे सड़क पर भारी भीड़ जमा हो चुकी थी और लोग चिल्ला रहे थे कि, "बस नीचे कूद जाओ, हम संभाल लेंगे, जिंदगी बच जाएगी।" केबल के सहारे केवल 5 से 6 साथी ही किसी तरह नीचे कूदकर मौत के चंगुल से सकुशल बाहर निकल पाए, जबकि बाकी अन्य साथी अंदर ही घने धुएं और आग की लपटों के बीच फंस गए और दम तोड़ने के कारण असमय काल के गाल में समा गए।

एक ही परिवार में चार मौतें: ट्रिपल मर्डर के बाद युवक ने की आत्महत्या, इलाके में सनसनी

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बटाला: पंजाब के बटाला के अंतर्गत आने वाले गांव मुंडी कलार में एक बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ एक युवक ने खूनी खेल खेलते हुए अपनी चाची, चचेरे भाई और अपने ही दोस्त की गोली मारकर हत्या कर दी, जिसके बाद उसने खुद को भी गोली से उड़ा लिया। इस तिहरे हत्याकांड और आत्महत्या की घटना से पूरे इलाके में मातम और दहशत का माहौल है।

सोते हुए चाची और भाई पर चलाई गोलियां

यह सनसनीखेज घटना मंगलवार की देर रात हुई। आरोपी मनजोत सिंह अपने एक दोस्त परगट सिंह के साथ अपने चाचा निशान सिंह के घर दाखिल हुआ। परगट सिंह एक पूर्व फौजी था, जिसकी पिस्टल मनजोत सिंह ने अपने हाथ में पकड़ रखी थी। घर के अंदर पहुंचते ही मनजोत ने गहरी नींद में सो रही अपनी 40 वर्षीय चाची हरदीप कौर और उनके 13 साल के बेटे हरमीत सिंह पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

दोस्त को मौत के घाट उतार कर की आत्महत्या

इस खौफनाक दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने के तुरंत बाद मनजोत सिंह और उसके दोस्त परगट सिंह के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई। यह कहासुनी इतनी बढ़ गई कि घर से कुछ ही दूरी पर मनजोत ने अपने उसी दोस्त पूर्व फौजी परगट सिंह को भी गोली मार दी, जिससे उसकी भी मौत हो गई। तीन लोगों की बेरहमी से जान लेने के बाद आरोपी मनजोत सिंह ने उसी पिस्टल से अपने सिर में गोली मारकर खुदकुशी कर ली। पुलिस अब इस खूनी वारदात के पीछे की असल वजह का पता लगाने में जुट गई है।

भोपाल मेट्रो का इंतजार बढ़ा, 48 घंटे के लिए रुका संचालन का फैसला

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भोपाल: राजधानी भोपाल में मेट्रो के सफर को और ज्यादा रफ्तार देने और यात्रियों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसके तहत शहर के सुभाष नगर से एम्स के बीच संचालित हो रही मेट्रो सेवा अगले दो दिनों यानी बुधवार और गुरुवार को पूरी तरह से बंद रहेगी। इस दौरान कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की विशेष टीम मेट्रो के सिग्नलिंग सिस्टम की बारीकी से जांच करेगी और सबकुछ मानकों के अनुरूप पाए जाने पर अपनी अंतिम 'ओके' रिपोर्ट जारी करेगी। इस तकनीकी परीक्षण को सुरक्षित ढंग से पूरा करने के लिए ही आम जनता के लिए दो दिनों तक मेट्रो का संचालन रोकने का फैसला लिया गया है।

फिलहाल एक ही ट्रैक पर चल रही है मेट्रो

वर्तमान में भोपाल और इंदौर दोनों ही शहरों की मेट्रो में अत्याधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह सक्रिय नहीं है। इस तकनीकी सीमा के कारण मेट्रो प्रबंधन को केवल एक ही ट्रैक (डाउन ट्रैक) का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। वर्तमान व्यवस्था में सुभाष नगर से एम्स के बीच जाने और आने वाली, दोनों ही ट्रेनें एक ही ट्रैक पर दौड़ रही हैं। इसी वजह से ट्रेनों के फेरों के बीच का समय (फ्रीक्वेंसी) पूरे 75 मिनट का है, जिसके कारण यात्रियों को स्टेशन पर लंबा इंतजार करना पड़ता है, जबकि दूसरा ट्रैक (अप ट्रैक) अभी खाली रहता है।

जांच के बाद दोनों ट्रैक पर शुरू होगी सेवा

इस दो दिवसीय सघन जांच और कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी की हरी झंडी मिलने के बाद दोनों ही ट्रैक पर मेट्रो ट्रेनों का सुचारू संचालन शुरू हो जाएगा। नया सिग्नलिंग सिस्टम चालू होते ही मेट्रो का नया टाइम-टेबल और शेड्यूल जारी किया जाएगा, जिसकी संभावना आगामी जुलाई महीने में जताई जा रही है। नया शेड्यूल लागू होने से ट्रेनों के बीच का समय काफी कम हो जाएगा और यात्रियों को हर कुछ मिनटों में मेट्रो मिल सकेगी।

आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम पर खर्च हुए करोड़ों

सुभाष नगर से एम्स के बीच तैयार किए गए इस कॉरिडोर पर बेहद आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर का सिग्नलिंग सिस्टम स्थापित किया गया है। यह पूरा कॉरिडोर भोपाल में लगभग ₹800 करोड़ की लागत से बन रहे 30 किलोमीटर लंबे विस्तृत प्रोजेक्ट के पहले चरण का एक अहम हिस्सा है। इस नए सिस्टम के पूरी तरह चालू होने के बाद भोपाल मेट्रो का संचालन न सिर्फ तेज और सुरक्षित होगा, बल्कि बेहद सुव्यवस्थित भी हो जाएगा, जिससे राजधानी के यात्रियों को एक विश्वस्तरीय यात्रा का अनुभव मिलेगा।

बांग्लादेश की नजर चीनी लड़ाकू विमानों पर, पीएम रहमान की यात्रा में लग सकती है मुहर

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ढाका: बांग्लादेश अपनी वायुसेना को और अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए चीन से 24 आधुनिक जे-10सीई (J-10CE) मल्टी-रोल फाइटर जेट खरीदने की बड़ी तैयारी कर रहा है। दोनों देशों के बीच इस रक्षा सौदे को लेकर बातचीत अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। इस सैन्य समझौते को लेकर इसी हफ्ते चीन के दौरे पर जा रहे बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की यात्रा के दौरान बड़ी प्रगति होने की उम्मीद है, जहां 26 जून को वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। रक्षा जानकारों का मानना है कि पूर्वी मोर्चे पर हो रही यह रणनीतिक हलचल भारत के लिए चिंता की बात हो सकती है, क्योंकि पाकिस्तानी वायुसेना भी पहले से ही इसी चीनी लड़ाकू विमान का इस्तेमाल कर रही है।

अगस्त तक फाइनल हो सकती है करीब 9000 करोड़ की डील

ढाका और बीजिंग के बीच की यह बड़ी रक्षा डील दोनों देशों के मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों को दर्शाती है। बांग्लादेश सरकार को उम्मीद है कि आगामी अगस्त महीने तक इस विमान सौदे को पूरी तरह फाइनल कर लिया जाएगा। बांग्लादेश के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर पुष्टि की है कि दोनों देश अगस्त तक इस खरीद समझौते पर दस्तखत कर सकते हैं। यह पूरा सौदा आर्थिक रूप से बेहद बड़ा है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 960 मिलियन डॉलर (करीब 9000 करोड़ भारतीय रुपये से अधिक) है। इसके तहत एक लड़ाकू विमान की कीमत लगभग 40 मिलियन डॉलर आएगी। इस बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए हाल ही में चीन का एक उच्चस्तरीय दल ढाका भी आया था।

प्रधानमंत्री की चीन यात्रा के दौरान होंगे कई बड़े समझौते

प्रधानमंत्री तारिक रहमान की यह बीजिंग यात्रा सिर्फ रक्षा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि कई अन्य मायनों में भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बांग्लादेश के विदेश सचिव के मुताबिक, इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कुल 17 महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं, जिनमें 15 समझौता ज्ञापन (एमओयू), 2 समझौते और भविष्य की एक कार्ययोजना शामिल है। व्यापार और विकास के मामले में चीन इस समय बांग्लादेश का एक बेहद करीबी और बड़ा साझेदार बन चुका है। चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग के विशेष निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा के दौरान बहुप्रतीक्षित तीस्ता नदी परियोजना और चीन की अन्य वैश्विक योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।

शिक्षक तबादला प्रक्रिया हुई आसान, अब वैकल्पिक दस्तावेजों से भी मिलेगा लाभ

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भोपाल: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्वैच्छिक तबादलों (Voluntary Transfers) के नियमों में किए गए एक अचानक बदलाव के बाद, हजारों शिक्षकों को आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए प्रशासन ने एक बड़ा और संवेदनशील फैसला लिया है। अब शिक्षक मैरिज सर्टिफिकेट (विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र) के बिना भी अपने ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकेंगे।

मैरिज सर्टिफिकेट की अनिवार्य शर्त से बढ़ी थी परेशानी

दरअसल, विभाग ने इस बार स्वैच्छिक तबादलों के लिए एक नई शर्त लागू की थी। इसके तहत जो शिक्षक अपने पति या पत्नी के कार्यस्थल के पास ट्रांसफर चाहते थे, उनके लिए विवाह का मैरिज सर्टिफिकेट अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया था। शिक्षक संगठनों का कहना था कि अधिकांश शिक्षकों की शादी 15 से 20 साल पहले हुई थी, जब मैरिज सर्टिफिकेट बनवाने का चलन आम नहीं था। इस अचानक आए नियम के कारण हजारों शिक्षक मंगलवार को आवेदन की अंतिम तारीख तक परेशान होते रहे और आवेदन करने से चूक रहे थे।

लोक शिक्षण संचालनालय ने दी बड़ी राहत

शिक्षकों की इस जायज समस्या को गंभीरता से लेते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के आयुक्त अभिषेक सिंह ने मंगलवार देर रात एक नया आदेश जारी कर बड़ी राहत दी है। इस नए आदेश के मुताबिक, अब शिक्षकों को मैरिज सर्टिफिकेट की जगह वैकल्पिक दस्तावेज अपलोड करने की छूट दे दी गई है। शिक्षक अब विवाह संबंधी दस्तावेज के स्थान पर अपना 'समग्र आईडी कार्ड', 'सेवा पुस्तिका (सर्विस बुक) का सत्यापित पृष्ठ' या अन्य कोई भी इससे जुड़ा वैध दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं।

दिव्यांग शिक्षकों के लिए नियम और समय सीमा

इस ट्रांसफर प्रक्रिया में दिव्यांग शिक्षकों के लिए भी नियम तय किए गए हैं, जिसके तहत उनसे एक साल के भीतर बना हुआ नवीनतम दिव्यांगता प्रमाण-पत्र मांगा जा रहा है। आपको बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग में इन स्वैच्छिक तबादलों के लिए आवेदन प्रक्रिया 20 जून से शुरू हुई थी और मंगलवार को इसकी अंतिम तिथि थी। इस पूरी प्रक्रिया के बाद अब शिक्षकों के स्थानांतरण आदेश 28 से 30 जून तक जारी कर दिए जाएंगे।

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