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भोपाल मेट्रो का इंतजार बढ़ा, 48 घंटे के लिए रुका संचालन का फैसला

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भोपाल: राजधानी भोपाल में मेट्रो के सफर को और ज्यादा रफ्तार देने और यात्रियों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसके तहत शहर के सुभाष नगर से एम्स के बीच संचालित हो रही मेट्रो सेवा अगले दो दिनों यानी बुधवार और गुरुवार को पूरी तरह से बंद रहेगी। इस दौरान कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की विशेष टीम मेट्रो के सिग्नलिंग सिस्टम की बारीकी से जांच करेगी और सबकुछ मानकों के अनुरूप पाए जाने पर अपनी अंतिम 'ओके' रिपोर्ट जारी करेगी। इस तकनीकी परीक्षण को सुरक्षित ढंग से पूरा करने के लिए ही आम जनता के लिए दो दिनों तक मेट्रो का संचालन रोकने का फैसला लिया गया है।

फिलहाल एक ही ट्रैक पर चल रही है मेट्रो

वर्तमान में भोपाल और इंदौर दोनों ही शहरों की मेट्रो में अत्याधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह सक्रिय नहीं है। इस तकनीकी सीमा के कारण मेट्रो प्रबंधन को केवल एक ही ट्रैक (डाउन ट्रैक) का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। वर्तमान व्यवस्था में सुभाष नगर से एम्स के बीच जाने और आने वाली, दोनों ही ट्रेनें एक ही ट्रैक पर दौड़ रही हैं। इसी वजह से ट्रेनों के फेरों के बीच का समय (फ्रीक्वेंसी) पूरे 75 मिनट का है, जिसके कारण यात्रियों को स्टेशन पर लंबा इंतजार करना पड़ता है, जबकि दूसरा ट्रैक (अप ट्रैक) अभी खाली रहता है।

जांच के बाद दोनों ट्रैक पर शुरू होगी सेवा

इस दो दिवसीय सघन जांच और कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी की हरी झंडी मिलने के बाद दोनों ही ट्रैक पर मेट्रो ट्रेनों का सुचारू संचालन शुरू हो जाएगा। नया सिग्नलिंग सिस्टम चालू होते ही मेट्रो का नया टाइम-टेबल और शेड्यूल जारी किया जाएगा, जिसकी संभावना आगामी जुलाई महीने में जताई जा रही है। नया शेड्यूल लागू होने से ट्रेनों के बीच का समय काफी कम हो जाएगा और यात्रियों को हर कुछ मिनटों में मेट्रो मिल सकेगी।

आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम पर खर्च हुए करोड़ों

सुभाष नगर से एम्स के बीच तैयार किए गए इस कॉरिडोर पर बेहद आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर का सिग्नलिंग सिस्टम स्थापित किया गया है। यह पूरा कॉरिडोर भोपाल में लगभग ₹800 करोड़ की लागत से बन रहे 30 किलोमीटर लंबे विस्तृत प्रोजेक्ट के पहले चरण का एक अहम हिस्सा है। इस नए सिस्टम के पूरी तरह चालू होने के बाद भोपाल मेट्रो का संचालन न सिर्फ तेज और सुरक्षित होगा, बल्कि बेहद सुव्यवस्थित भी हो जाएगा, जिससे राजधानी के यात्रियों को एक विश्वस्तरीय यात्रा का अनुभव मिलेगा।

बांग्लादेश की नजर चीनी लड़ाकू विमानों पर, पीएम रहमान की यात्रा में लग सकती है मुहर

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ढाका: बांग्लादेश अपनी वायुसेना को और अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए चीन से 24 आधुनिक जे-10सीई (J-10CE) मल्टी-रोल फाइटर जेट खरीदने की बड़ी तैयारी कर रहा है। दोनों देशों के बीच इस रक्षा सौदे को लेकर बातचीत अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। इस सैन्य समझौते को लेकर इसी हफ्ते चीन के दौरे पर जा रहे बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की यात्रा के दौरान बड़ी प्रगति होने की उम्मीद है, जहां 26 जून को वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। रक्षा जानकारों का मानना है कि पूर्वी मोर्चे पर हो रही यह रणनीतिक हलचल भारत के लिए चिंता की बात हो सकती है, क्योंकि पाकिस्तानी वायुसेना भी पहले से ही इसी चीनी लड़ाकू विमान का इस्तेमाल कर रही है।

अगस्त तक फाइनल हो सकती है करीब 9000 करोड़ की डील

ढाका और बीजिंग के बीच की यह बड़ी रक्षा डील दोनों देशों के मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों को दर्शाती है। बांग्लादेश सरकार को उम्मीद है कि आगामी अगस्त महीने तक इस विमान सौदे को पूरी तरह फाइनल कर लिया जाएगा। बांग्लादेश के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर पुष्टि की है कि दोनों देश अगस्त तक इस खरीद समझौते पर दस्तखत कर सकते हैं। यह पूरा सौदा आर्थिक रूप से बेहद बड़ा है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 960 मिलियन डॉलर (करीब 9000 करोड़ भारतीय रुपये से अधिक) है। इसके तहत एक लड़ाकू विमान की कीमत लगभग 40 मिलियन डॉलर आएगी। इस बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए हाल ही में चीन का एक उच्चस्तरीय दल ढाका भी आया था।

प्रधानमंत्री की चीन यात्रा के दौरान होंगे कई बड़े समझौते

प्रधानमंत्री तारिक रहमान की यह बीजिंग यात्रा सिर्फ रक्षा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि कई अन्य मायनों में भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बांग्लादेश के विदेश सचिव के मुताबिक, इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कुल 17 महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं, जिनमें 15 समझौता ज्ञापन (एमओयू), 2 समझौते और भविष्य की एक कार्ययोजना शामिल है। व्यापार और विकास के मामले में चीन इस समय बांग्लादेश का एक बेहद करीबी और बड़ा साझेदार बन चुका है। चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग के विशेष निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा के दौरान बहुप्रतीक्षित तीस्ता नदी परियोजना और चीन की अन्य वैश्विक योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।

शिक्षक तबादला प्रक्रिया हुई आसान, अब वैकल्पिक दस्तावेजों से भी मिलेगा लाभ

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भोपाल: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्वैच्छिक तबादलों (Voluntary Transfers) के नियमों में किए गए एक अचानक बदलाव के बाद, हजारों शिक्षकों को आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए प्रशासन ने एक बड़ा और संवेदनशील फैसला लिया है। अब शिक्षक मैरिज सर्टिफिकेट (विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र) के बिना भी अपने ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकेंगे।

मैरिज सर्टिफिकेट की अनिवार्य शर्त से बढ़ी थी परेशानी

दरअसल, विभाग ने इस बार स्वैच्छिक तबादलों के लिए एक नई शर्त लागू की थी। इसके तहत जो शिक्षक अपने पति या पत्नी के कार्यस्थल के पास ट्रांसफर चाहते थे, उनके लिए विवाह का मैरिज सर्टिफिकेट अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया था। शिक्षक संगठनों का कहना था कि अधिकांश शिक्षकों की शादी 15 से 20 साल पहले हुई थी, जब मैरिज सर्टिफिकेट बनवाने का चलन आम नहीं था। इस अचानक आए नियम के कारण हजारों शिक्षक मंगलवार को आवेदन की अंतिम तारीख तक परेशान होते रहे और आवेदन करने से चूक रहे थे।

लोक शिक्षण संचालनालय ने दी बड़ी राहत

शिक्षकों की इस जायज समस्या को गंभीरता से लेते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के आयुक्त अभिषेक सिंह ने मंगलवार देर रात एक नया आदेश जारी कर बड़ी राहत दी है। इस नए आदेश के मुताबिक, अब शिक्षकों को मैरिज सर्टिफिकेट की जगह वैकल्पिक दस्तावेज अपलोड करने की छूट दे दी गई है। शिक्षक अब विवाह संबंधी दस्तावेज के स्थान पर अपना 'समग्र आईडी कार्ड', 'सेवा पुस्तिका (सर्विस बुक) का सत्यापित पृष्ठ' या अन्य कोई भी इससे जुड़ा वैध दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं।

दिव्यांग शिक्षकों के लिए नियम और समय सीमा

इस ट्रांसफर प्रक्रिया में दिव्यांग शिक्षकों के लिए भी नियम तय किए गए हैं, जिसके तहत उनसे एक साल के भीतर बना हुआ नवीनतम दिव्यांगता प्रमाण-पत्र मांगा जा रहा है। आपको बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग में इन स्वैच्छिक तबादलों के लिए आवेदन प्रक्रिया 20 जून से शुरू हुई थी और मंगलवार को इसकी अंतिम तिथि थी। इस पूरी प्रक्रिया के बाद अब शिक्षकों के स्थानांतरण आदेश 28 से 30 जून तक जारी कर दिए जाएंगे।

लोहागढ़ किले का CCTV बना गवाह, 33°C की गर्मी में हुडी पहनने वाला युवक निकला सिया का प्रेमी

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पुणे: महाराष्ट्र के पुणे के पास स्थित ऐतिहासिक लोहागढ़ किले में जाने-माने बिल्डर केतन अग्रवाल की हत्या के मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस सनसनीखेज हत्याकांड की जांच कर रही पुलिस के हाथ अब एक बड़ा और महत्वपूर्ण सुराग लगा है। पुलिस ने बुधवार को इस केस से जुड़ी एक बेहद चौंकाने वाली जानकारी साझा की है, जिसने पूरी जांच की दिशा को बदल दिया है।

सीसीटीवी फुटेज से हुआ बड़ा खुलासा

मामले की तफ्तीश के दौरान पुलिस को घटना स्थल के आस-पास के इलाकों से कुछ सीसीटीवी फुटेज मिले हैं। इन फुटेज की जांच करने पर पुलिस को एक संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिया है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक अज्ञात शख्स, जिसने हुडी पहनी हुई है, लगातार केतन अग्रवाल और उनकी मंगेतर सिया गोयल का पीछा कर रहा था। वह दोनों के हर कदम पर नजर रखे हुए था और उनके पीछे चल रहा था।

पुलिस महकमे में मचा हड़कंप

इस नए और पुख्ता सबूत के सामने आते ही पुलिस प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। इस फुटेज के मिलने के बाद अब पुलिस को यकीन हो गया है कि यह हत्या अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे एक सोची-समझी साजिश थी। पुलिस अब उस हुडी पहने संदिग्ध व्यक्ति की पहचान करने और उसकी तलाश में जुट गई है, ताकि इस खौफनाक हत्याकांड की पूरी सच्चाई और इसके पीछे की वजह को जल्द से जल्द बेनकाब किया जा सके।

प्रसूता की मौत से भड़का गुस्सा, पीबीएम अस्पताल में मोर्चरी के बाहर बवाल

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राजस्थान: बीकानेर के पीबीएम (PBM) अस्पताल में प्रसूता शारदा नायक की मृत्यु के बाद उपजा विवाद मंगलवार को उस समय बेहद गंभीर हो गया, जब मृतका के पति ने मोर्चरी के बाहर आत्मदाह का प्रयास किया। पति ने अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क लिया, जिससे वहाँ उपस्थित लोगों और पुलिस बल में हड़कंप मच गया। हालांकि, आस-पास मौजूद सजग नागरिकों ने तत्परता दिखाते हुए युवक के हाथ से पेट्रोल की बोतल छीन ली, जिससे एक बड़ी अनहोनी होने से बच गई।

जानकारी के मुताबिक, प्रसूता की मौत के बाद से ही परिवार के लोग न्याय और दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर अड़े हुए हैं। इस तनाव के बीच, मोर्चरी के बाहर खड़े मृतका के पति मुकेश नायक ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन और पुलिस बल मिलकर उस पर शव के पोस्टमार्टम के लिए दबाव बना रहे हैं।

पुलिस पर जबरन दस्तखत कराने के आरोप

मुकेश नायक का दावा है कि पुलिस उसके माता-पिता को अपने साथ ले गई और उनसे जबरदस्ती कागजों पर हस्ताक्षर कराने का प्रयास किया गया। उसने कुछ आला अधिकारियों पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप भी मढ़ा। इसी प्रताड़ना और विरोध के स्वरूप उसने खुद पर पेट्रोल डाल लिया, जिसके बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई।

मोर्चरी के बाहर भारी तनाव, राजनीतिक दखल

इस आत्मघाती कदम की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत हरकत में आए। उन्होंने मुकेश को समझा-बुझाकर शांत किया और स्थिति को बिगड़ने से रोका। इस घटनाक्रम के दौरान मोर्चरी परिसर में भारी तनाव देखा गया।

अब इस मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पीड़ित परिवार पर पोस्टमार्टम कराने के लिए अनुचित दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

परिजनों में अंतर्विरोध: दूसरा पक्ष आया सामने

दूसरी ओर, पीड़ित परिवार के ही एक अन्य सदस्य राजेश नायक ने इस मामले में अलग रुख अपनाया है। उनका कहना है कि इस समय नवजात शिशु की तबीयत बेहद नाजुक है और उसका सही इलाज कराना उनकी पहली प्राथमिकता है। राजेश ने प्रशासन का बचाव करते हुए कहा कि उन पर कोई दबाव नहीं बनाया जा रहा है, बल्कि घर के बुजुर्गों की सहमति से प्रशासन हर संभव मदद कर रहा है।

तीन दिन से मोर्चरी में रखा है शव

आपको बता दें कि पीबीएम अस्पताल में भर्ती शारदा नायक ने 21 जून को दम तोड़ दिया था। इससे ठीक पहले, 18 जून को प्रीति नायक नामक एक अन्य प्रसूता की भी यहाँ मौत हुई थी। प्रीति के परिजनों ने पोस्टमार्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया था, लेकिन शारदा का शव पिछले तीन दिनों से मोर्चरी में ही रखा हुआ है। परिजन ठोस कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं, जिसके कारण यह गतिरोध लगातार बढ़ता जा रहा है।

ब्रिटेन में सत्ता परिवर्तन का असर, वैश्विक कूटनीति पर पड़ सकते हैं बड़े प्रभाव

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लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के अचानक इस्तीफे ने न केवल ब्रिटिश राजनीति में भूचाल ला दिया है, बल्कि इसके अंतर्राष्ट्रीय प्रभावों को लेकर भी चर्चाएं तेज कर दी हैं। लेबर पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री पद से उनके हटने के बाद अब ब्रिटेन में नए नेतृत्व की तलाश शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि इस बड़े बदलाव का असर वैश्विक कूटनीति, व्यापारिक संबंधों और यूरोपीय राजनीति पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।

पार्टी के भीतर असंतोष और घटती लोकप्रियता बनी वजह

प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद 10 डाउनिंग स्ट्रीट (ब्रिटिश पीएम आवास) से देश को संबोधित करते हुए स्टार्मर ने कहा कि लेबर पार्टी अब उन्हें अगले चुनाव में नेतृत्व के लिए उपयुक्त नहीं मानती है। उन्होंने देशहित को सबसे ऊपर रखते हुए पद छोड़ने का फैसला किया और नए बनने वाले नेता को पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया। दरअसल, पिछले कुछ महीनों से पार्टी के भीतर उनकी नीतियों और फैसलों को लेकर सांसदों और नेताओं में असंतोष लगातार बढ़ रहा था। साथ ही स्थानीय चुनावों में मिली नाकामी और लगातार गिरती लोकप्रियता ने उन पर पद छोड़ने का भारी दबाव बना दिया था।

जुलाई में होगा नए प्रधानमंत्री का फैसला

ब्रिटेन की राजनीतिक व्यवस्था के अनुसार, वहाँ प्रधानमंत्री का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं किया जाता, बल्कि संसद में बहुमत रखने वाली पार्टी का नेता ही देश का प्रधानमंत्री बनता है। ऐसे में अब लेबर पार्टी के नए नेता का चुनाव ही यह तय करेगा कि ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति आगामी जुलाई महीने में नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगी और उम्मीद जताई जा रही है कि मध्य जुलाई तक नए नेता के नाम पर मुहर लग जाएगी।

एंडी बर्नहैम रेस में सबसे आगे

ब्रिटेन के नए नेतृत्व की इस रेस में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और वर्तमान में मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें पार्टी के विभिन्न गुटों का अच्छा समर्थन हासिल है। उनके अलावा संभावित उम्मीदवारों की सूची में एंजेला रेनर, यवेट कूपर और वेस स्ट्रीटिंग जैसे कद्दावर नेताओं के नाम भी रेस में शामिल हैं।

भारत सहित वैश्विक संबंधों पर पड़ेगा असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नेतृत्व परिवर्तन का सीधा असर भारत और ब्रिटेन के बीच चल रहे व्यापारिक संबंधों पर पड़ सकता है। इसके साथ ही, ब्रेक्जिट के बाद यूरोपीय संघ (EU) के साथ रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की प्रक्रिया में नए प्रधानमंत्री की नीतियां बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगी। हालांकि स्टार्मर के इस्तीफे को लेकर कई तरह के कयास और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनके इस कदम को मुख्य रूप से राजनीतिक दबाव और पार्टी के आंतरिक असंतोष का नतीजा ही माना जा रहा है। अब पूरी दुनिया की नजरें ब्रिटेन के इस नए राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

फायर सेफ्टी में लापरवाही पड़ी भारी, PDA ने 3 कोचिंग सेंटरों पर लगाया ताला

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लखनऊ/प्रयागराज: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया, जहां एक कोचिंग संस्थान की बिल्डिंग में भीषण आग लगने की वजह से 15 लोगों की जान चली गई। इस भीषण हादसे के बाद हरकत में आए प्रशासन ने पूरे राज्य में कोचिंग संस्थानों के खिलाफ अपनी जांच और कार्रवाई तेज कर दी है। इसी सिलसिले में मंगलवार को प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मशहूर शिक्षक खान सर के कोचिंग संस्थान सहित तीन सेंटरों को सील कर दिया है।

छात्रों को बाहर निकालकर की गई सीलिंग

यह बड़ी कार्रवाई प्रयागराज विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ऋषि राज के दिशा-निर्देशों पर की गई। प्राधिकरण के जोनल अधिकारी गंगेश कुमार सिंह मंगलवार को अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। कार्रवाई शुरू करने से पहले अधिकारियों ने कोचिंग संस्थानों के भीतर पढ़ रहे सभी छात्रों को पूरी तरह सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद संस्थानों के कार्यालयों को बंद कराकर, नियमों में कमियां पाए जाने के कारण बिल्डिंग के संबंधित हिस्सों को सील कर दिया गया।

बिना अनुमति सील खोलने पर होगी FIR

प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों को सील करने के बाद उनके बाहर एक सख्त नोटिस भी चिपका दिया है। इस नोटिस में साफ चेतावनी दी गई है कि अगर किसी भी संचालक ने प्रशासन की अनुमति के बिना सील तोड़ने या दोबारा कोचिंग शुरू करने की कोशिश की, तो उनके खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के इस कड़े रुख से साफ है कि अब लापरवाही बरतने वालों पर सख्त शिकंजा कसा जाएगा।

नियमों की अनदेखी पर प्रशासन सख्त

इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद से पूरे क्षेत्र के कोचिंग संचालकों में हड़कंप मच गया है। मामले की जानकारी देते हुए जोनल अधिकारी गंगेश कुमार सिंह ने बताया कि कोचिंग संस्थान का संचालन 'सामुदायिक सुविधा' के अंतर्गत आता है। इन संस्थानों ने भवन के लिए आवश्यक सामुदायिक सुविधा भू-उपयोग (लैंड यूज) की मंजूरी नहीं ली थी। इसी नियम के उल्लंघन और लापरवाही के कारण प्रशासन को यह सख्त कदम उठाना पड़ा।

शनि की उल्टी चाल बढ़ाएगी 3 राशियों की परेशानी! जुलाई में बिगड़ सकते हैं प्लान, करें ये उपाय, मिलेगी राहत

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जुलाई का महीना शुरू होने वाला है और इसके साथ ही ग्रह-नक्षत्रों की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. ज्योतिषशास्त्र में शनि देव को कर्मफलदाता और न्याय का देवता माना जाता है. मान्यता है कि शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं. जब शनि की कृपा किसी व्यक्ति पर होती है तो उसके जीवन में तरक्की, सम्मान और सफलता के नए रास्ते खुलते हैं, लेकिन जब शनि की दृष्टि प्रतिकूल हो जाती है तो अच्छे-भले कामों में भी रुकावट आने लगती है.
ऐसे में जुलाई का महीना तीन राशियों के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि शनि देव मीन राशि में वक्री होने जा रहे हैं. वक्री होने का मतलब है कि शनि अपनी सीधी चाल छोड़कर उल्टी दिशा में चलते हुए दिखाई देंगे. इसका प्रभाव तीन राशियों पर बेहद नकारात्मक पड़ सकता है. कौन सी हैं वह तीन राशियां, जानते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य से? साथ ही ये भी कि इसका उपाय क्या है.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि शनि की वक्री चाल अक्सर लोगों के जीवन में पुराने अधूरे काम, रुके हुए मामले और मानसिक दबाव को बढ़ाने का काम करती है. जुलाई में शनि मीन राशि में ही वक्री होंगे, जिसका प्रभाव तीन राशियों कुंभ, मीन और मेष राशि में नकारात्मक पड़ने वाला है. कई बार व्यक्ति को लगता है कि उसकी मेहनत का फल नहीं मिल रहा है या उसके काम बार-बार अटक रहे हैं. ऐसे समय में धैर्य बनाए रखना सबसे बड़ी परीक्षा होती है. उन्होंने कहा कि जुलाई के दौरान लोगों को जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए.

इन तीन राशियों के जीवन में मचेगी उथल-पुथल
कुंभ राशि वालों के लिए यह समय विशेष रूप से सावधानी बरतने का संकेत दे रहा है. नौकरीपेशा लोगों को अपने कार्यस्थल पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. काम का दबाव बढ़ने से मानसिक तनाव भी बढ़ सकता है. अधिकारियों या सहकर्मियों के साथ विचारों का टकराव होने की संभावना बनी रहेगी. व्यापार करने वाले लोगों को किसी भी नए सौदे या निवेश से पहले पूरी जानकारी जुटानी चाहिए. आर्थिक मामलों में जोखिम लेने से बचना बेहतर रहेगा. परिवार में भी छोटी-छोटी बातों को लेकर बहस हो सकती है, इसलिए वाणी और व्यवहार पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा.
मीन राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना मन की अशांति और उलझन बढ़ा सकता है. कई बार ऐसा महसूस हो सकता है कि मेहनत के बावजूद परिणाम उम्मीद के अनुसार नहीं मिल रहे हैं. मन बार-बार विचलित रहेगा और निर्णय लेने में परेशानी हो सकती है. कुछ लोगों को अनावश्यक खर्चों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे आर्थिक दबाव महसूस होगा. स्वास्थ्य के मामले में भी लापरवाही भारी पड़ सकती है. नींद की कमी, तनाव, थकान और सिरदर्द जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं. ऐसे समय में अपने स्वास्थ्य और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा.
मेष राशि वालों के लिए भी जुलाई का महीना धैर्य और संयम की परीक्षा लेने वाला साबित हो सकता है. कई कामों में देरी होने से निराशा बढ़ सकती है. जो लोग लंबे समय से किसी सफलता का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें थोड़ा और धैर्य रखने की जरूरत होगी. व्यापार और नौकरी दोनों क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है. कुछ लोगों को अपने करीबी लोगों से अपेित सहयोग नहीं मिल पाएगा, जिससे मन दुखी रह सकता है. पारिवारिक मामलों में भी गलतफहमियां पैदा होने की संभावना है, इसलिए बातचीत के दौरान शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए.
उपाय : अभी से हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ना शुरू कर दें. एक सौ बार हनुमान चालीसा का पाठ करने से शनि शांत हो जाएंगे.

क्या सच में चुराकर लगाया गया मनी प्लांट बदल देता है घर की तकदीर? जानें वास्तु शास्त्र का यह हैरान करने वाला सच!

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वर्षों से एक मान्यता प्रचलित है कि चुराकर लाया गया मनी प्लांट घर में लगाने से धन और समृद्धि बढ़ती है. कई लोग इसे सौभाग्य का प्रतीक मानते हैं, लेकिन क्या वास्तव में वास्तु शास्त्र भी इस बात का समर्थन करता है? आइए जानते हैं इस मान्यता के पीछे की सच्चाई और वास्तु के अनुसार मनी प्लांट लगाने के सही नियम…

 मनी प्लांट को धन, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. सोशल मीडिया और लोक मान्यताओं में अक्सर यह दावा किया जाता है कि अगर मनी प्लांट किसी के घर से चुराकर लाया जाए और अपने घर में लगाया जाए, तो वह अधिक बरकत देता है और आर्थिक स्थिति में सुधार लाता है. लेकिन क्या वास्तव में वास्तु शास्त्र इस बात का समर्थन करता है? क्या चोरी करके लाया गया पौधा सच में घर की तकदीर बदल सकता है? वास्तु शास्त्र की मानें तो समृद्धि का संबंध सकारात्मक ऊर्जा और अच्छे कर्मों से होता है, ना कि चोरी जैसे कार्यों से. ऐसे में जानिए मनी प्लांट से जुड़ी इस लोकप्रिय मान्यता का सच, प्लांट को लगाने की सही दिशा और दिन…

शुक्र ग्रह से मनी प्लांट का संबंध – मनी प्लांट को धन, उन्नति और आर्थिक स्थिरता का प्रतीक माना जाता है. इसकी हरी-भरी बेल घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है. मान्यता है कि जिस घर में मनी प्लांट स्वस्थ और तेजी से बढ़ता है, वहां आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. ज्योतिष शास्त्र में मनी प्लांट का संबंध मुख्य रूप से शुक्र ग्रह से माना जाता है. शुक्र ग्रह को भौतिक सुख-सुविधाओं, ऐश्वर्य, धन और वैभव का कारक ग्रह माना गया है. इसलिए घर में मनी प्लांट लगाने से शुक्र ग्रह की शुभता बढ़ने की मान्यता है.

इस दिशा में लगाएं मनी प्लांट का पौधा – वास्तु शास्त्र के अनुसार, मनी प्लांट लगाने के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है. यह दिशा अग्नि तत्व और भगवान गणेश से जुड़ी मानी जाती है. इस दिशा में लगाया गया मनी प्लांट आर्थिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने में सहायक माना जाता है. वहीं मनी प्लांट का पौधा उत्तर-पूर्व दिशा में लगाने से बचने की सलाह देते हैं, क्योंकि यह दिशा जल तत्व और आध्यात्मिक ऊर्जा से संबंधित मानी जाती है. यहां मनी प्लांट लगाने से ऊर्जा संतुलन प्रभावित हो सकता है.
फायदे की जगह हो सकता है नुकसान – वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी पौधे को चोरी करके घर में लाना शुभ नहीं माना जाता. वास्तु शास्त्र सकारात्मक ऊर्जा, नैतिकता और सद्भाव पर आधारित है. ऐसे में किसी की अनुमति के बिना पौधा लेना नकारात्मक कर्म माना जाता है, जिससे शुभ फल मिलने की संभावना कम हो सकती है. यह केवल अफवाह है कि किसी अमीर के यहां से मनी प्लांट का पौधा चुराकर घर पर लगाने से बरकत देता है. वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि मनी प्लांट का पौधा चुराकर घर पर लगाने से लाभ के बजाय आर्थिक नुकसान होता है और कर्ज लेने की स्थिति बन जाती है.

किस दिन लगाना शुभ माना जाता है? – मनी प्लांट लगाने के लिए बुधवार और शुक्रवार को विशेष रूप से शुभ माना जाता है. बुधवार बुध ग्रह का दिन है, जो व्यापार और प्रगति का कारक माना जाता है, जबकि शुक्रवार शुक्र ग्रह से संबंधित है, जो धन और वैभव का प्रतिनिधित्व करता है. साथ ही ध्यान रखें कि मनी प्लांट का पौधा कभी भी कांच की बोतल में ना लगाएं, ऐसा करने से फायदे की जगह नुकसान हो सकता है.

इन बातों का रखें ध्यान – मनी प्लांट की बेल को कभी जमीन पर नहीं फैलने देना चाहिए. सूखे या पीले पत्तों को समय-समय पर हटा देना चाहिए. पौधे की नियमित देखभाल करना और उसे स्वस्थ रखना शुभ माना जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, बरकत और समृद्धि का संबंध केवल पौधे से नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच, अच्छे कर्म और घर के ऊर्जा संतुलन से भी जुड़ा होता है. इसलिए मनी प्लांट को हमेशा उचित तरीके से प्राप्त कर सही दिशा में लगाना ही अधिक लाभकारी माना जाता है.

गणेश कृपा प्राप्त करने के लिए बुधवार के कितने व्रत करने है विधान? जानिए व्रत नियम, पूजा विधि, मंत्र और फायदे

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हिंदू धर्म में बुधवार का दिन बुध ग्रह और भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुध ग्रह बुद्धि, वाणी, व्यापार, शिक्षा और संचार का कारक है. मान्यता है कि बुधवार का व्रत रखने से बुध ग्रह की शुभता बढ़ती है और जीवन में सफलता, सुख-समृद्धि तथा मानसिक शांति प्राप्त होती है. अक्सर लोग यह सवाल पूछते हैं कि बुधवार को कितने व्रत करने चाहिए, शास्त्रों में कितने व्रत करने का विधान बताया गया है. माना जाता है कि नियमित रूप से बुधवार व्रत करने से व्यापार में लाभ, शिक्षा में सफलता और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं बुधवार व्रत के नियम, पूजा विधि, मंत्र और फायदे…
बुधवार के कितने व्रत करने चाहिए?
शास्त्रों में बुधवार के 7, 11 या 21 व्रत करने का विधान बताया गया है. श्रद्धालु अपनी क्षमता, समय और संकल्प के अनुसार इनमें से किसी भी संख्या का चयन कर सकते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुधवार व्रत करने से बुद्धि और स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है. विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में लाभ मिलता है, जबकि व्यापारियों को आर्थिक उन्नति के अवसर प्राप्त हो सकते हैं. इसके अलावा वाणी में मधुरता आती है, पारिवारिक संबंध मजबूत होते हैं और मानसिक तनाव में कमी महसूस होती है. बुधवार का व्रत करने से कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होती है.

बुधवार व्रत के नियम
बुधवार व्रत करने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होना चाहिए. इस दिन हरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. व्रत के दौरान सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और क्रोध, झूठ तथा नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए. कई श्रद्धालु दिन में एक समय भोजन करते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार का पालन करते हैं.

बुधवार व्रत पूजा विधि
बुधवार के दिन भगवान गणेश और बुध देव की पूजा का विशेष महत्व है. पूजा स्थल को साफ कर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. उन्हें दूर्वा, हरे रंग के पुष्प, सिंदूर और मोदक अर्पित करें. इसके बाद बुध देव का ध्यान कर हरी मूंग, हरे फल या हरे वस्त्र अर्पित किए जा सकते हैं. पूजा के दौरान दीपक जलाकर आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें.

बुधवार व्रत का मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नम कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा॥
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुंडाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्॥
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥

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