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गणेश कृपा प्राप्त करने के लिए बुधवार के कितने व्रत करने है विधान? जानिए व्रत नियम, पूजा विधि, मंत्र और फायदे

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हिंदू धर्म में बुधवार का दिन बुध ग्रह और भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुध ग्रह बुद्धि, वाणी, व्यापार, शिक्षा और संचार का कारक है. मान्यता है कि बुधवार का व्रत रखने से बुध ग्रह की शुभता बढ़ती है और जीवन में सफलता, सुख-समृद्धि तथा मानसिक शांति प्राप्त होती है. अक्सर लोग यह सवाल पूछते हैं कि बुधवार को कितने व्रत करने चाहिए, शास्त्रों में कितने व्रत करने का विधान बताया गया है. माना जाता है कि नियमित रूप से बुधवार व्रत करने से व्यापार में लाभ, शिक्षा में सफलता और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं बुधवार व्रत के नियम, पूजा विधि, मंत्र और फायदे…
बुधवार के कितने व्रत करने चाहिए?
शास्त्रों में बुधवार के 7, 11 या 21 व्रत करने का विधान बताया गया है. श्रद्धालु अपनी क्षमता, समय और संकल्प के अनुसार इनमें से किसी भी संख्या का चयन कर सकते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुधवार व्रत करने से बुद्धि और स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है. विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में लाभ मिलता है, जबकि व्यापारियों को आर्थिक उन्नति के अवसर प्राप्त हो सकते हैं. इसके अलावा वाणी में मधुरता आती है, पारिवारिक संबंध मजबूत होते हैं और मानसिक तनाव में कमी महसूस होती है. बुधवार का व्रत करने से कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होती है.

बुधवार व्रत के नियम
बुधवार व्रत करने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होना चाहिए. इस दिन हरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. व्रत के दौरान सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और क्रोध, झूठ तथा नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए. कई श्रद्धालु दिन में एक समय भोजन करते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार का पालन करते हैं.

बुधवार व्रत पूजा विधि
बुधवार के दिन भगवान गणेश और बुध देव की पूजा का विशेष महत्व है. पूजा स्थल को साफ कर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. उन्हें दूर्वा, हरे रंग के पुष्प, सिंदूर और मोदक अर्पित करें. इसके बाद बुध देव का ध्यान कर हरी मूंग, हरे फल या हरे वस्त्र अर्पित किए जा सकते हैं. पूजा के दौरान दीपक जलाकर आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें.

बुधवार व्रत का मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नम कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा॥
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुंडाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्॥
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥

धन लाभ और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला एकादशी पर अपनाएं ये 5 उपाय

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हिंदू धर्म की सभी 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और सबसे ज्यादा फलदायी माना गया है। ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की इस एकादशी पर बिना पानी पिए व्रत रखने का नियम है, जिससे भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन में सफलता, मानसिक शांति और धन-वैभव की कामना रखता है, तो उसे इस पावन तिथि पर विशेष रूप से पांच प्रमुख कार्य अवश्य करने चाहिए। इस कठिन व्रत में सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी के सूर्योदय तक जल का पूरी तरह त्याग किया जाता है। जो लोग शारीरिक रूप से पूरी तरह निर्जल व्रत रखने में असमर्थ हैं, वे अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए फलाहार या पानी पीकर भी यह व्रत कर सकते हैं क्योंकि भगवान केवल सच्चे भाव के भूखे हैं।

व्रत की महिमा और इसके लाभ

निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सर्वोच्च माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति साल भर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाता है, तो वह केवल इस एक व्रत को सच्चे मन से करके पूरे वर्षभर के व्रतों के बराबर पुण्य फल प्राप्त कर सकता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से संसार के सभी तीर्थों में स्नान करने के समान फल मिलता है और साधक के जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। इसके साथ ही इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करने से कुंडली में मौजूद पितृदोष और चंद्रदोष से भी मुक्ति मिलती है।

जल कलश का दान और विष्णु-लक्ष्मी पूजन

इस व्रत में जल दान करने का सबसे बड़ा महत्व है क्योंकि यह भीषण गर्मी के मौसम में आता है। इस दिन एक मिट्टी के कोरे घड़े को साफ पानी से भरकर, उसमें थोड़ा गंगाजल, चीनी या गुड़ मिलाकर और उस पर दक्षिणा या मौसमी फल रखकर किसी जरूरतमंद को दान करने से पूरे वर्ष की एकादशियों का पुण्य मिल जाता है। इसके अलावा, जीवन से दरिद्रता दूर करने के लिए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का संयुक्त पूजन करना चाहिए। पूजा के दौरान घी का दीपक जलाकर "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करना चाहिए, जिससे नौकरी और व्यापार में तरक्की के रास्ते खुलते हैं।

पीले वस्त्र, तुलसी दल और राहगीरों के लिए प्याऊ

भगवान विष्णु को पीला रंग और तुलसी का पत्ता बेहद प्रिय है। इस दिन भगवान को पीले फूल, फल और मिठाइयों का भोग लगाना चाहिए और उसमें तुलसी का पत्ता जरूर रखना चाहिए। ध्यान रहे कि एकादशी के दिन तुलसी में जल नहीं चढ़ाया जाता और न ही पत्ता तोड़ा जाता है, इसलिए पत्ता एक दिन पहले ही तोड़ लेना चाहिए। इसके साथ ही, इस दिन किसी सार्वजनिक स्थान पर राहगीरों के लिए ठंडे पानी या मीठे शर्बत की व्यवस्था (प्याऊ) करानी चाहिए। प्यासे को पानी पिलाने और धूप से बचने के लिए छाता या चप्पल दान करने से पितृदेव प्रसन्न होते हैं और घर में खुशहाली आती है।

शाम को दीपदान और विष्णु सहस्रनाम का पाठ

एकादशी की शाम का समय आध्यात्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समय घर के मुख्य द्वार और तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक अवश्य जलाना चाहिए। दीपदान करने के बाद शांत मन से आसन पर बैठकर 'विष्णु सहस्रनाम' या 'नारायण कवच' का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से घर के भीतर मौजूद सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक परेशानियाँ नष्ट हो जाती हैं, कर्ज से मुक्ति मिलती है और धन के नए स्रोत बनते हैं।

राशिफल 24 जून 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा

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  • मेष राशि :- यात्रा वृत्ति से लाभ, कुसंग से हानि, गृह कलह तथा मानसिक अशांति अवश्य ही बनेगी। 
  • वृष राशि :- आर्थिक व्यय, स्वजन कष्ट, विवाद, अस्थिर व अशांति का वातावरण बना ही रहेगा। 
  • मिथुन राशि :- शुभ कार्य, भूमि से हानि, कार्य सिद्धी, लॉटरी-सट्टा से हानि की संभावना बनी रहेगी। 
  • कर्क राशि :- धन हानि, रोगभय, नौकरी में चिन्ता, राजकार्य, गृहकार्य में व्यवस्था बनी रहेगी। 
  • सिंह राशि :- कार्य में निराशा, खेती से लाभ तथा शत्रु-भय, उद्योग-व्य वसाय से लाभ होगा। 
  • कन्या राशि :- शरीर कष्ट, राजलाभ, व्यय-भार बढ़ेगा, दाम्पत्य जीवन असमंजसपूर्ण रहेगा, ध्यान रखें। 
  • तुला राशि :- चोटाग्नि भय, धार्मिक कार्य कष्ट, व्यापार में उलझन की स्थिति बनी रहेगी। 
  • वृश्चिक राशि :- बाधा, आरोप, धन लाभ, यात्रा-कष्ट, गृहकार्य, राजकार्य में रुकावट की स्थिति बनेगी। 
  • धनु राशि :- रोग-भय, मुकदमे में जीत, मानसिक परेशानी, अपवाद तथा व्यर्थ उलझन बढ़ेंगी। 
  • मकर राशि :- व्यापार में लाभ, शत्रु-भय, धन सुख, कार्यों में सफलता का योग, रुके कार्य बनेंगे। 
  • कुंभ राशि :- कलह, व्यर्थ खर्च, सफलता प्राप्त होगी, सामाजिक कार्यों में सफलता तथा रुकावट का अनुभव होगा। 
  • मीन राशि :- स्वजन सुख, पुत्र चिन्ता, धन-हानि, राजकार्य में विलम्ब, परेशानी बन सकती है। 
     

उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने कृषि विभाग की कड़ी कार्रवाई, 12.65 टन खाद की बिक्री पर लगाई रोक

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रायपुर :  रासायनिक उर्वरकों की कालाबाजारी, अनियमित बिक्री एवं किसानों के बीच कृत्रिम अभाव की स्थिति को रोकने कृषि विभाग द्वारा लगातार निरीक्षण एवं जांच अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में आज बिलासपुर जिले में बिल्हा के उर्वरक निरीक्षक आर.एस. गौतम द्वारा ग्राम पोड़ी सरवानी स्थित प्रजापति ट्रेडर्स का औचक निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान पाया गया कि प्रतिष्ठान द्वारा यूरिया एवं सिंगल सुपर फॉस्फेट उर्वरक का विक्रय आवश्यक प्राधिकार पत्र के बिना किया जा रहा था, जो उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के प्रावधानों का उल्लंघन है। अनियमितता पाए जाने पर उर्वरक निरीक्षक ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 9.5 टन यूरिया एवं 3.15 टन सुपर फॉस्फेट, कुल 12.65 टन उर्वरक की बिक्री पर रोक लगा दी। साथ ही विक्रेता को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पाई गई कमियों को तत्काल दूर करने तथा निर्धारित समयावधि में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

कृषि विभाग के उप संचालक पी.डी. हाथेश्वर ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होने की स्थिति में उर्वरक विक्रय लाइसेंस के निलंबन सहित नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उर्वरक निरीक्षक आर.एस. गौतम ने बताया कि किसानों के हितों की रक्षा एवं उर्वरकों की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकासखंड बिल्हा में इस प्रकार की जांच एवं निरीक्षण कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। उन्होंने सभी उर्वरक विक्रेताओं से उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के प्रावधानों का पूर्णतः पालन करते हुए ही खाद का भंडारण एवं विक्रय करने की अपील की है।
 

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से बदली ग्रामीणों की जिंदगी, सिधमा के ज्ञानेश्वर को मिली आवागमन की बड़ी सुविधा

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रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ग्रामीण अंचलों में आवागमन की तस्वीर बदल रही है। दूरस्थ गांवों तक सुरक्षित, नियमित और सुलभ परिवहन सुविधा पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाने के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित कर रही है।

सरगुजा जिले के ग्राम सिधमा निवासी ज्ञानेश्वर, जो बर्तनों की साफ-सफाई और पॉलिश का कार्य कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, इस योजना के प्रत्यक्ष लाभार्थियों में से एक हैं। उनके अनुसार पहले नियमित परिवहन सुविधा नहीं होने के कारण रोज काम पर जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बस तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी और कई बार निजी साधनों या अन्य लोगों पर निर्भर रहना पड़ता था।

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना शुरू होने के बाद उनकी दिनचर्या काफी सरल हो गई है। अब वे प्रतिदिन समय पर अपने कार्यस्थल तक पहुंच पा रहे हैं, जिससे उनके समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। इस सुविधा का लाभ केवल श्रमिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों, महिलाओं और अन्य ग्रामीणों को भी मिल रहा है, जिन्हें विभिन्न कार्यों के लिए गांव से बाहर जाना पड़ता है।

ज्ञानेश्वर बताते हैं कि पहले आवागमन ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती था, लेकिन अब बस सेवा शुरू होने से लोगों को काफी राहत मिली है। गांव के लोग आसानी से अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं, जिससे उनके दैनिक कार्यों में सुविधा आई है। उन्होंने इस जनहितकारी पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन नेटवर्क को मजबूत करते हुए अंतिम छोर तक बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित कर रही है। बेहतर परिवहन व्यवस्था के कारण अब ग्रामीणों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आजीविका के अवसरों तक पहुंच पहले से अधिक सहज हो गई है, जिससे ग्रामीण विकास को नई गति मिल रही है।
 

आधुनिक एवं स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में जीआरपी का महत्वपूर्ण कदम

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भोपाल : बदलते अपराध स्वरूपों और आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप पुलिस बल को अधिक सक्षम, तकनीकी रूप से दक्ष एवं जनोन्मुख बनाने के उद्देश्य से शासकीय रेल पुलिस (जीआरपी) द्वारा आयोजित 15 दिवसीय विशेष पुलिस प्रशिक्षण (Smart Policing Training) शिविर का समापन विशेष पुलिस महानिदेशक दूरसंचार संजीव कुमार शमी तथा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रेल, भोपाल राजाबाबू सिंह के मुख्य आतिथ्‍य में पी.टी.आर.आई. प्रशिक्षण केंद्र, भोपाल में सम्पन्न हुआ।

08 जून से 22 जून तक आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में जीआरपी भोपाल, इंदौर एवं जबलपुर इकाइयों के आरक्षक से निरीक्षक स्तर तक के कुल 30 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता कर प्रशिक्षण प्राप्त किया।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस बल को आधुनिक अधिक 'स्मार्ट', तकनीकी रूप से सक्षम, और संवेदनशील बनाना था। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को साइबर अपराधों की जांच एवं रोकथाम, फॉरेंसिक विज्ञान, मानवाधिकार संरक्षण, तनाव प्रबंधन तथा नागरिकों के साथ बेहतर संवाद एवं जनसंपर्क स्थापित करने संबंधी विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। पुलिस अधीक्षक रेल भोपाल अंकित जायसवाल ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हेमंत रुपानी ने की भेंट

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भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हेमंत रुपानी ने मंत्रालय में सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रूपानी को प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित योजनाओं गतिविधियों की जानकारी दी। रूपानी ने राज्य सरकार की उद्योग मित्र नीतियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि हिंदुस्तान कोका कोला समूह मध्यप्रदेश में 300 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रहा है। इससे रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उल्लेखनीय है कि राजगढ़ जिले के पिलूखेड़ी इंडस्ट्रियल एरिया में हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेस की इकाई पहले से ही संचालित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट के दौरान हिंदुस्तान कोका-कोला के नेशनल हेड विवेक झा, राज्य प्रमुख सुअश्विनी यीलेने तथा औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
 

बिहान योजना से बदली उर्वशी बंजारे की तकदीर, गृहणी से बनीं सफल उद्यमी और ‘लखपति दीदी’

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रायपुर :  राज्य शासन की महत्वाकांक्षी बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा विकासखंड की निवासी उर्वशी बंजारे इसकी एक प्रेरणादायी मिसाल हैं। कभी परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली उर्वशी आज सफल उद्यमी बनकर न केवल आत्मनिर्भर हुई हैं, बल्कि ‘‘लखपति दीदी’’ के रूप में अपनी अलग पहचान भी स्थापित कर चुकी हैं।

    अकलतरा जनपद अंतर्गत स्वतंत्र महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य उर्वशी बंजारे का परिवार पहले मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर था। सीमित आय और संसाधनों के कारण आर्थिक चुनौतियां बनी रहती थीं। इसी दौरान उन्होंने बिहान योजना से जुड़कर स्वयं सहायता समूह के माध्यम से नए अवसरों की तलाश शुरू की।

    योजना के तहत उनके समूह को प्रारंभिक रूप से 15 हजार रुपये की चक्रीय निधि तथा ग्राम संगठन के माध्यम से 60 हजार रुपये का सामुदायिक निवेश कोष प्राप्त हुआ। बाद में बैंक लिंकेज के माध्यम से समूह को विभिन्न चरणों में ऋण सुविधा भी मिली। इस आर्थिक सहयोग और प्रशिक्षण का लाभ उठाते हुए उर्वशी ने ईंट निर्माण का व्यवसाय शुरू किया। व्यवसाय की सफलता के बाद उन्होंने एक फोटो कॉपी सेंटर भी स्थापित किया, जिससे उनकी आय के स्रोत और मजबूत हुए।

    शिक्षा और परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति में भी किया। लगातार मेहनत और योजनाबद्ध कार्य से उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया। वर्तमान में वे ईंट निर्माण और फोटो कॉपी सेंटर के माध्यम से प्रतिमाह 12 से 15 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।

    उर्वशी बंजारे बिहान योजना के अंतर्गत अपने संकुल संगठन में एफएलसीआरपी (फाइनेंशियल लिटरेसी कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन) के रूप में भी कार्य कर रही हैं, जिससे उन्हें प्रतिमाह लगभग 6 हजार रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। इस प्रकार उनकी कुल वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो गई है और वे सफलतापूर्वक ‘‘लखपति दीदी’’ के रूप में स्थापित हुई हैं।

    उर्वशी बंजारे का कहना है कि बिहान योजना ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का नया मार्ग भी दिया है। आज वे अपने गांव की अन्य महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने और आर्थिक रूप से सशक्त बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

    बिहान योजना के माध्यम से उर्वशी बंजारे जैसी अनेक महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
 

नैनो उर्वरकों से बढ़ रही फसलों की उत्पादकता, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण को भी मिल रहा बढ़ावा

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रायपुर : कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक तकनीकों और नवाचारों के बढ़ते उपयोग से किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के नए अवसर मिल रहे हैं। नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरक खेती को अधिक लाभकारी बनाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्रदेश के किसान अब आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाते हुए टिकाऊ एवं संतुलित खेती की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम मेंड्राखुर्द के प्रगतिशील किसान नैहर साय ने नैनो उर्वरकों के उपयोग को किसानों के लिए लाभकारी बताते हुए कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ कृषि भूमि की गुणवत्ता को भी लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। धान एवं सब्जी उत्पादन से जुड़े नैहर साय का मानना है कि खेती में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक दानेदार उर्वरकों के अत्यधिक एवं असंतुलित उपयोग से समय के साथ मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसके विपरीत नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे उर्वरक पोषक तत्वों को अधिक प्रभावी ढंग से पौधों तक पहुंचाने में सक्षम हैं, जिससे फसलों की वृद्धि और उत्पादन क्षमता में सकारात्मक सुधार देखने को मिलता है।

    कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो उर्वरकों का उपयोग पर्णीय छिड़काव के माध्यम से किया जाता है, जिससे पोषक तत्व सीधे पौधों द्वारा अवशोषित किए जाते हैं। इससे उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ती है, पोषक तत्वों की बर्बादी कम होती है तथा फसलों को आवश्यक पोषण समय पर प्राप्त होता है। परिणामस्वरूप बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

    नैनो उर्वरकों का एक महत्वपूर्ण लाभ उनका आसान परिवहन, भंडारण और उपयोग भी है। कम मात्रा में अधिक प्रभावी होने के कारण किसानों की लागत घटती है तथा कृषि कार्यों में सुविधा बढ़ती है। साथ ही मिट्टी की उर्वरता और उत्पादक क्षमता को बनाए रखने में भी यह तकनीक सहायक सिद्ध हो रही है।

    राज्य सरकार और कृषि विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, नैनो उर्वरकों तथा वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश में अधिक से अधिक किसान उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    नैहर साय ने किसानों से अपील की है कि वे नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरकों का उपयोग कर खेती को अधिक लाभकारी, पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ बनाएं। उनका मानना है कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए कृषि भूमि की उर्वरता और गुणवत्ता को भी सुरक्षित रख सकते हैं।
 

जीआरपी जबलपुर ने त्वरित कार्रवाई कर ट्रेन में चोरी गए आभूषण एवं सामान को मात्र दो घंटे में किया बरामद

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भोपाल : मध्यप्रदेश पुलिस की संवेदनशील, तकनीक आधारित एवं त्वरित कार्रवाई का एक उत्कृष्ट उदाहरण सामने आया है। जीआरपी थाना जबलपुर ने अमरकंटक एक्सप्रेस में यात्रा के दौरान चोरी गए 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य के आभूषण एवं अन्य सामान को घटना के मात्र दो घंटे के भीतर बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है।

पुलिस अधीक्षक रेल जबलपुर श्री सुंदर सिंह कनेश ने बताया कि 22 जून को नर्मदापुरम जिले के इटारसी निवासी श्री नीलेश मालपानी ने जीआरपी थाना जबलपुर में शिकायत दर्ज कराई थी कि ट्रेन क्रमांक 12853 अमरकंटक एक्सप्रेस में यात्रा के दौरान उनकी पत्नी के पर्स से सोने के आभूषण, एप्पल एयरपॉड, नगदी एवं अन्य दस्तावेज सहित लगभग 10 लाख 47 हजार रूप्ए की सामग्री चोरी हो गई हैं। रिपोर्ट पर थाना जीआरपी जबलपुर में प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई।

मामले को गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रेल श्री राजा बाबू सिंह के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम द्वारा रेलवे स्टेशन एवं आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों तथा मोबाइल लोकेशन का गहन विश्लेषण किया गया। जांच के दौरान चोरी गए एप्पल एयरपॉड की लोकेशन ट्रेस होने पर प्राप्त तकनीकी जानकारी एवं मुखबिर सूचना के आधार पर शिवनगर, गोहलपुर क्षेत्र में दबिश दी गई।

कार्रवाई के दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया। आरोपी के कब्जे से चोरी गया सोने का हार, अंगूठियां, कान के टॉप्स, ब्रेसलेट, एप्पल एयरपॉड, नगदी, आधार कार्ड सहित अन्य सामग्री लगभग 10 लाख 47 हजार रूपए की जब्‍त की।

मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों की सुरक्षा के प्रति तथा आधुनिक तकनीक और त्वरित कार्रवाई के माध्यम से अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने हेतु प्रतिबद्ध है।

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