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भरत तिवारी मुठभेड़ मामले में नया ट्विस्ट, पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुआ मुकदमा

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भोजपुर। बिहार के भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में कानून का एक बहुत बड़ा डंडा चला है। इस कथित पुलिस मुठभेड़ को लेकर मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी द्वारा दिए गए शिकायती आवेदन के आधार पर पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ शाहपुर थाने में एफआईआर (प्राथमिकी) दर्ज कर ली गई है। भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राज ने मंगलवार (23 जून, 2026) को इस बड़ी कानूनी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि की है।

घटना के बाद पीड़ित परिवार द्वारा शाहपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए लिखित आवेदन दिया गया था। इसी आवेदन पर संज्ञान लेते हुए विभाग ने जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ), शाहपुर थाना अध्यक्ष और उनके सहयोगी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

पांच पुलिसकर्मी पहले ही हो चुके हैं सस्पेंड

इस संवेदनशील मामले में विभागीय जांच के बाद पहले ही पांच पुलिसकर्मियों को सेवा से निलंबित (सस्पेंड) किया जा चुका है। सस्पेंड होने वाले पुलिसकर्मियों की सूची इस प्रकार है:

  1. राजेश कुमार मालाकार (तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष)

  2. अंकित आर्यन (पुलिस अवर निरीक्षक – एसआई)

  3. हरिश्चंद्र कुमार (पुलिस अवर निरीक्षक – एसआई)

  4. रामाशंकर यादव (सहायक अवर निरीक्षक – एएसआई)

  5. मीरा कुमारी (महिला सिपाही)

मां का गंभीर आरोप: 'फेसबुक लाइव पर हथियार फेंकने के बाद भी मार दी 5 गोलियां'

मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) को सौंपे गए अपने शिकायती पत्र में बेहद चौंकाने वाले और गंभीर आरोप लगाए हैं:

  • प्रशासन से संघर्ष: आवेदन के मुताबिक, भरत भूषण तिवारी इलाके के बाढ़ विस्थापितों और पीड़ितों की समस्याओं व हक की लड़ाई को लेकर स्थानीय प्रशासन के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रहा था, जिससे पुलिस उससे नाराज थी।

  • घर से ले गई पुलिस: घटना वाले दिन कई पुलिस अधिकारी और भारी संख्या में जवान उनके घर पहुंचे और भरत तिवारी को जांच के बहाने अपने साथ चलने को कहा।

  • फेसबुक लाइव और सरेंडर: मां का दावा है कि जब पुलिस ने उसे घेरा, तो भरत तिवारी ने बकायदा फेसबुक लाइव (Facebook Live) शुरू किया। लाइव वीडियो के दौरान ही उसने अपने हाथ में मौजूद हथियार को दूर फेंक दिया और पूरी तरह से खुद को पुलिस के हवाले (सरेंडर) कर दिया था।

  • जमीन पर गिराकर मारी गोली: आरोप है कि निहत्था होने और आत्मसमर्पण करने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने उसे बेरहमी से पकड़कर जमीन पर गिरा दिया। इसके बाद जगदीशपुर पुलिस उपाधीक्षक (एसडीपीओ) के सीधे आदेश पर उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। पोस्टमार्टम और आवेदन के अनुसार, भरत तिवारी को बेहद करीब से 5 गोलियां मारी गईं।

परिजनों को घंटों रखा अंधेरे में; अब शुरू हुई निष्पक्ष जांच

आशा देवी ने पुलिसिया कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए यह भी आरोप लगाया कि कत्ल की इस वारदात को अंजाम देने के बाद पुलिस उन्हें और परिवार के अन्य सदस्यों को अपने साथ ले गई। कई घंटों तक परिजनों को बंधक जैसी स्थिति में रखा गया और एनकाउंटर या भरत की स्थिति के बारे में कोई सही जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद देर शाम को उन्हें अचानक सूचना दी गई कि भरत तिवारी की मौत हो चुकी है।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब सीधे आला अधिकारियों और पुलिस दल पर ही एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरे महकमे में खलबली मची हुई है। मानवाधिकार आयोग के कड़े नियमों के तहत अब इस पूरे एनकाउंटर की कड़ियों, फेसबुक लाइव के फुटेज और फॉरेंसिक साक्ष्यों की स्वतंत्र जांच की जा रही है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद गहराया

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बाड़मेर। राजस्थान में भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा ‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’ अब महज एक प्रशासनिक अभियान नहीं रह गया है। सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने की इस मुहिम ने अब सूबे में एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक रूप ले लिया है। सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा पुख्ता करने और अवैध निर्माणों को ढहाने के लिए चलाए जा रहे इस बुलडोजर अभियान को प्रशासन राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ रहा है, जबकि विपक्षी दलों और स्थानीय नागरिकों ने इस कार्रवाई की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

सीमाई जिलों में व्यापक स्तर पर बुलडोजर अभियान

भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और फलौदी जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिलों में प्रशासन बड़े पैमाने पर अवैध निर्माणों को चिन्हित कर उन्हें हटाने में जुटा है। इस विशेष अभियान के तहत रामसर, गडरारोड, मालाणा, नाचना और नोख समेत दर्जनों गांवों में सरकारी जमीनों पर बने अवैध ढांचों और कुछ धार्मिक स्थलों को ध्वस्त किया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यह पूरी कार्रवाई राजस्व रिकॉर्ड की गहन जांच और स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही की जा रही है, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में देश की आंतरिक सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

स्थानीय स्तर पर विरोध और भेदभाव के आरोप

दूसरी तरफ, सीमा क्षेत्र के कई गांवों के बाशिंदों ने इस कार्रवाई को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। केलन का पार गांव के ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों पुरानी एक मस्जिद को अचानक नोटिस थमाकर जमींदोज कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन एक विशेष वर्ग से जुड़े स्थलों को निशाना बना रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि यह अभियान वास्तव में सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए है, तो बिना किसी भेदभाव के सभी अवैध निर्माणों पर समान रूप से बुलडोजर चलना चाहिए।

ओवैसी और गहलोत ने उठाए कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम पर अब राष्ट्रीय और राज्य स्तर के राजनेताओं ने भी मोर्चा खोल दिया है। एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमावर्ती जिलों में चुनिंदा धार्मिक स्थलों को ढहाया जा रहा है, और इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।

वहीं, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार को आगाह करते हुए कहा कि धार्मिक व संवेदनशील स्थलों पर इस तरह की त्वरित कार्रवाई से आपसी सौहार्द बिगड़ सकता है। उन्होंने सरकार को सलाह दी कि ऐसे मामलों में बल प्रयोग के बजाय स्थानीय संवाद का रास्ता चुना जाना चाहिए। नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई में किसी भी प्रकार के पक्षपात की बू नहीं आनी चाहिए।

जनप्रतिनिधियों का सीमावर्ती गांवों का दौरा

कार्रवाई से प्रभावित भलगांव और दहेवा जैसे सुदूर क्षेत्रों में स्थिति का जायजा लेने के लिए बाड़मेर-जैसलमेर के सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल और बायतु के विधायक हरीश चौधरी जमीनी स्तर पर पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों और ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। सांसद बेनीवाल ने जनता से शांति और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि थार का यह मरुस्थलीय इलाका हमेशा से आपसी भाईचारे की मिसाल रहा है और किसी भी विवाद का निपटारा कानून के दायरे में रहकर बातचीत से ही होना चाहिए। विधायक हरीश चौधरी ने भरोसा दिलाया कि वे इस मुद्दे को उचित मंच पर उठाएंगे ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता बनी रहे।

सत्तारूढ़ दल का पलटवार: सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं

विपक्ष के इन तीखे हमलों पर पलटवार करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक एजेंसियां केवल अपने तय कर्तव्यों का पालन कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक किसी भी तरह का अवैध कब्जा या संदिग्ध गतिविधि देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है। चौधरी ने जोर देकर कहा कि यह अभियान किसी जाति, धर्म या समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने और सरकारी संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने का एक वैध प्रयास है, जो आगे भी बिना किसी दबाव के जारी रहेगा।

केंद्रीय गृह मंत्री के दौरे के बाद बढ़ी सक्रियता

गौरतलब है कि यह प्रशासनिक तेजी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया राजस्थान सीमाई दौर के बाद देखने को मिली है, जहां उन्होंने उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की थी। केंद्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, सीमा के बेहद नजदीक बने अनधिकृत ढांचे भविष्य में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं। विपक्ष के कड़े रुख और स्थानीय संगठनों के विरोध के बीच, ‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’ अब महज एक जमीन खाली कराने की कार्रवाई न रहकर सुरक्षा, सियासत और सामाजिक संतुलन के एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है।

चलते हाईवे पर आग का गोला बनी बस, मची अफरा-तफरी

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अजमेर। अजमेर-किशनगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब राजस्थान रोडवेज की एक चलती बस में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि पूरी बस लपटों से घिर गई। गनीमत यह रही कि बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने सूझबूझ दिखाई और समय रहते बस में सवार सभी 35 मुसाफिरों को सुरक्षित नीचे उतार लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

ड्राइवर-कंडक्टर की सूझबूझ से टला हादसा

चश्मदीदों के मुताबिक, बस हाईवे पर सामान्य रफ्तार से आगे बढ़ रही थी, तभी अचानक उसके इंजन से धुआं निकलने लगा। खतरे को भांपते हुए चालक ने बिना देर किए बस को हाईवे के किनारे रोक दिया। इसके तुरंत बाद चालक और परिचालक ने मिलकर तत्परता दिखाई और सभी यात्रियों को फौरन बस से बाहर निकालना शुरू किया। यात्रियों के उतरते ही कुछ ही पलों में आग पूरी बस में फैल गई।

शॉर्ट सर्किट हो सकता है कारण

हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंच गईं। दमकलकर्मियों ने काफी प्रयासों के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया, लेकिन तब तक बस पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी और सिर्फ उसका लोहे का ढांचा ही बचा। शुरुआती तफ्तीश में कयास लगाए जा रहे हैं कि आग लगने की मुख्य वजह शॉर्ट सर्किट हो सकती है।

यात्रियों ने जताया आभार, यातायात हुआ सामान्य

इस घटना की वजह से हाईवे पर कुछ देर के लिए वाहनों की रफ्तार थम गई और जाम की स्थिति बन गई, जिसे पुलिस ने बाद में खुलवाकर यातायात को सुचारू रूप से चालू करवाया। सुरक्षित बचे यात्रियों ने बस स्टाफ की जमकर तारीफ की और कहा कि अगर ड्राइवर-कंडक्टर थोड़ी भी लापरवाही बरतते, तो कई जिंदगियां खतरे में पड़ सकती थीं। राहत की बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम में कोई भी हताहत नहीं हुआ है।

राहुल गांधी पर मानहानि मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई जारी Rahul Gandhi

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जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में आज भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है। हाईकोर्ट ने इस जवाब को रिकॉर्ड पर ले लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मांगी गई अंतरिम राहत पर अब अगली सुनवाई 24 जून को तय की गई है। इस सुनवाई में यह साफ हो जाएगा कि राहुल गांधी को ट्रायल कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट मिलेगी या उन्हें अदालत के सामने हाजिर होना पड़ेगा।

समन को दी गई है चुनौती

दरअसल, राहुल गांधी ने भोपाल की विशेष अदालत द्वारा जारी किए गए समन के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान द्वारा दर्ज कराए गए मानहानि के मामले में भोपाल कोर्ट ने यह समन जारी किया था। राहुल गांधी की याचिका में तर्क दिया गया है कि समन जारी करने की पूरी प्रक्रिया और उसके कानूनी आधार की न्यायिक समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने अदालत से इस समन को पूरी तरह निरस्त करने की मांग की है।

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा मामला साल 2018 का है, जब झाबुआ में एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी ने पनामा पेपर्स लीक मामले का उल्लेख किया था। कार्तिकेय सिंह चौहान का आरोप है कि राहुल गांधी ने उस भाषण में उनका और उनके पिता शिवराज सिंह चौहान का नाम घसीटा, जिससे उनकी सामाजिक छवि को गहरा धक्का लगा। इसी वजह से उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

राहुल गांधी की ओर से दी गई थी सफाई

इस विवाद पर अगले ही दिन राहुल गांधी ने अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा था कि वे मंच से छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे का नाम लेना चाहते थे, लेकिन मानवीय भूल (गलती) के कारण उनके मुंह से कार्तिकेय चौहान का नाम निकल गया था।

नोट: इस ड्राफ्ट में से आपकी आवश्यकता के अनुसार 'अभी तक न्यूज' या किसी भी अन्य न्यूज चैनल का नाम पूरी तरह हटा दिया गया है।

कूटनीति के चौराहे पर ट्रंप, ईरान और इजरायल के बीच संतुलन की चुनौती

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वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे चल रही गुप्त कूटनीतिक बातचीत ने पूरे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के सुरक्षा समीकरणों को एक नया और बेहद अप्रत्याशित मोड़ दे दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी शीर्ष अधिकारियों के बीच परवान चढ़ रही इस नई सहमति को लेकर इजरायल के भीतर गहरी चिंता और भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इजरायल को यह डर सता रहा है कि इस गुप्त समझौते से न सिर्फ लेबनान में ईरान का राजनीतिक और सैन्य दबदबा और ज्यादा मजबूत हो जाएगा, बल्कि कट्टर दुश्मन हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की आक्रामक सैन्य क्षमता भी बेहद कमजोर पड़ जाएगी।

विभिन्न अंतरराष्ट्रीय खुफिया और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के शीर्ष प्रतिनिधियों के बीच स्विट्जरलैंड के जिनेवा में कई दौर की अत्यंत गुप्त वार्ता संपन्न हुई है। इस गोपनीय बैठक के बाद दोनों देशों ने एक रणनीतिक 'सहमति पत्र' (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र में चल रहे विनाशकारी युद्ध और सैन्य तनाव को तुरंत रोकना है।

समझौते से बेंजामिन नेतन्याहू आखिर क्यों हैं परेशान?

ईरान और अमेरिका के बीच हो रहे इस सीधे समझौते ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (जिन्हें राजनीतिक हलकों में 'बीबी' भी कहा जाता है) की रातों की नींद उड़ा दी है। तेल अवीव (इजरायल) के एक उच्च पदस्थ रणनीतिक सूत्र ने साफ शब्दों में कहा कि, "प्रधानमंत्री नेतन्याहू वाशिंगटन के इस बदले रुख से बेहद घबराए हुए और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।" इस समझौते से इजरायल की चिंता के मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं:

  • हिजबुल्लाह को मिला सुरक्षा कवच: इजरायल का पुख्ता मानना है कि ईरान ने अमेरिका के साथ सौदेबाजी में लेबनान के मुद्दे को चालाकी से शामिल कर लिया है। ऐसा करके ईरान ने अपने सबसे बड़े और घातक छद्म संगठन (प्रॉक्सी वॉर ग्रुप) 'हिजबुल्लाह' को इजरायली हमलों से एक तरह का अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा कवच दिला दिया है।

  • सैन्य कार्रवाई की आजादी पर पाबंदी: अब तक इजरायल अपनी खुफिया जानकारी के आधार पर जब चाहता, तब लेबनान में घुसकर हिजबुल्लाह के ठिकानों और हथियारों के जखीरे पर एयरस्ट्राइक (हवाई हमले) कर देता था। लेकिन इस नए समझौते के बाद, इजरायल को लेबनान में कोई भी सैन्य कदम उठाने से पहले वाशिंगटन (व्हाइट हाउस) के कड़े सवालों, जांच और जवाबदेही का सामना करना पड़ेगा।

  • सेना वापसी का दबाव: तीसरा और सबसे तात्कालिक डर यह है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायल पर यह कड़ा दबाव बना सकते हैं कि वह दक्षिणी लेबनान की सीमा से अपनी जमीनी सेना (IDF) को तुरंत पीछे बुलाए, जबकि इजरायल का मानना है कि हिजबुल्लाह का खतरा अभी सीमा पर टला नहीं है।

जो बाइडेन के पुराने समझौते और ट्रंप के नए मैकेनिज्म में जमीन-आसमान का अंतर

इजरायली रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बन रहा यह नया ढांचा नवंबर 2024 में जो बाइडेन प्रशासन के कार्यकाल के दौरान हुए युद्धविराम समझौतों को पूरी तरह से कमजोर और बेअसर करता है। दोनों समझौतों की रूपरेखा में यह बड़ा अंतर है:

तुलनात्मक बिंदुपुराना मैकेनिज्म (नवंबर 2024 – बाइडेन)नया मैकेनिज्म (2026 – ट्रंप प्रशासन)
मुख्य वार्ताकार और भागीदारइजरायल, लेबनान, अमेरिका और फ्रांस सीधे मेज पर थे।केवल अमेरिका और ईरान ही मुख्य भूमिका में हैं (इजरायल बाहर)।
रणनीतिक फोकसदक्षिणी लेबनान से हिजबुल्लाह के सैन्य ढांचे को उखाड़ना।हिजबुल्लाह को खत्म करने के बजाय केवल आपसी झड़पें रोकना।
ऑपरेशनल फ्रीडम (हमले की आजादी)संभावित खतरे की भनक लगते ही तुरंत हमले की छूट थी।अत्यधिक सीमित। केवल तब कार्रवाई जब हमला सिर पर आ चुका हो।

पाकिस्तान और कतर बने मध्यस्थ; पश्चिम एशिया में नया सुरक्षा संतुलन

सीमा पर जारी तनाव को कम करने और युद्धविराम को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए एक नए 'डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल' का गठन किया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस सेल में लेबनान के साथ-साथ मुख्य मध्यस्थ और शांति तंत्र की निगरानी के रूप में पाकिस्तान और कतर को शामिल किया गया है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इन दो मुस्लिम देशों की एंट्री से पश्चिम एशिया में सुरक्षा का संतुलन इजरायल के खिलाफ और ईरान के पक्ष में झुक सकता है।

अक्टूबर में होने वाले चुनाव और नेतन्याहू की लॉबिंग

इस पूरे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम में इजरायल की घरेलू राजनीति भी एक बड़ा फैक्टर बनी हुई है, क्योंकि इजरायल में आगामी अक्टूबर महीने में आम चुनाव होने वाले हैं। ऐसे नाजुक समय में हिजबुल्लाह के खिलाफ किसी भी तरह की ढिलाई या कमजोरी बेंजामिन नेतन्याहू की राष्ट्रवादी नेता वाली छवि को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अपनी साख बचाने के लिए नेतन्याहू ने अपने सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार रॉन डर्मर को ट्रंप के करीबियों को प्रभावित करने और लॉबिंग के काम पर लगाया था। इसी बैकचैनल लॉबिंग के बाद ही ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान को चेतावनी देते हुए एक सख्त पोस्ट लिखा था, ताकि इजरायल के गुस्से को शांत किया जा सके।

लेबनान में खुशी की लहर, ट्रंप बोले— "मैं प्रॉब्लम सॉल्वर हूं"

दूसरी तरफ, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन इस नए अमेरिकी-ईरानी सिस्टम से बेहद खुश और संतुष्ट नजर आ रहे हैं। खुद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर ने फोन पर उन्हें इस पूरे शांति प्लान की विस्तृत जानकारी दी है।

जब वाशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप से इजरायल की इस गहरी चिंता और नाराजगी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने अपने चिरपरिचित कारोबारी अंदाज में कहा, "मैं एक 'प्रॉblem सॉल्वर' (समस्याएं सुलझाने वाला) हूं। मैं बहुत तेजी से और कुशलता के साथ बड़ी से बड़ी वैश्विक समस्याओं को हल कर लेता हूं, और बीबी (नेतन्याहू) के साथ भी इस मसले को बहुत जल्द सुलझा लूंगा।"

हालांकि, इस नीति का विरोध खुद अमेरिका के भीतर भी शुरू हो गया है। नेतन्याहू के सबसे पक्के समर्थक माने जाने वाले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा, "लेबनान के लिए बनाया जा रहा यह नया सिस्टम जिसमें मुख्य हितधारक इजरायल ही शामिल नहीं है, मेरी नजर में एक बहुत बड़ी रणनीतिक भूल है।"

फिलहाल, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की देखरेख में इजरायल और लेबनान के बीच अलग से एक औपचारिक बातचीत की रूपरेखा तैयार की जा रही है, ताकि दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना सुरक्षित हट सके। लेकिन अमेरिका-ईरान की इस नई गुप्त समझ ने हिजबुल्लाह को जो संजीवनी दी है, उसने इजरायल के पूरे रक्षा तंत्र में हड़कंप मचा रखा है।

दूसरे युवक के साथ देख पत्नी पर भड़का पति, सड़क पर हुआ हंगामा

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जबलपुर। महानगर के गोराबाजार अंतर्गत बिलहरी इलाके में उस समय भारी अफरा-तफरी मच गई, जब एक शख्स ने बीच सड़क पर अपनी ही पत्नी के बाल पकड़कर उसे बेरहमी से घसीटना और पीटना शुरू कर दिया। इस खौफनाक मंजर को देखकर मौके पर राहगीरों की भारी भीड़ जमा हो गई और काफी देर तक सड़क पर तमाशा चलता रहा।

ऑटो रुकवाकर किया हमला, बचाने आए युवक से भी उलझा

मिली जानकारी के मुताबिक, दोपहर करीब 2:00 बजे एक व्यक्ति ऑटो का पीछा करते हुए बिलहरी चौराहे के पास पहुंचा। वहां उसने ऑटो को जबरन रुकवाया और उसमें बैठी महिला को नीचे उतारकर गाली-गलौज करने लगा। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि उसने महिला की सरेआम पिटाई शुरू कर दी। स्थानीय लोगों ने जब बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो आरोपी महिला को बचाने आए एक अन्य युवक से भी भिड़ गया। करीब आधे घंटे तक मौके पर अराजकता का माहौल बना रहा। इसी बीच किसी राहगीर ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

पत्नी को दूसरे युवक के साथ देखकर भड़का था पति

स्थानीय स्तर पर चल रही चर्चाओं के अनुसार, महिला किसी अन्य युवक के साथ ऑटो में जा रही थी। इस बात की भनक लगते ही पति ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया था। बिलहरी के पास जब उसने ऑटो रुकवाकर अपनी पत्नी को किसी और के साथ देखा, तो उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उसने सरेराह मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान तमाशबीन बने लोग बीच-बचाव करने के बजाय अपने मोबाइल से वीडियो बनाते रहे।

बिना शिकायत दर्ज किए मौके से गायब हुए दोनों पक्ष

घटना की जानकारी मिलते ही गोराबाजार थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही पति-पत्नी और वहां मौजूद अन्य लोग जा चुके थे। पुलिस प्रशासन का कहना है कि अब तक किसी भी पक्ष की तरफ से कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। अगर इस मामले में कोई भी शिकायत मिलती है, तो कानून के मुताबिक उचित कार्रवाई की जाएगी।

बिकवाली के दबाव में धड़ाम हुआ बाजार, निवेशकों में घबराहट

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सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार के लिए दिन बेहद निराशाजनक रहा। शुरुआती कारोबार में स्थिरता दिखने के बाद बाजार में अचानक बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। इस चौतरफा गिरावट के कारण सेंसेक्स करीब 900 अंक टूट गया, वहीं निफ्टी ने भी 23,900 का अपना अहम स्तर खो दिया। बाजार को सबसे ज्यादा नुकसान आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी) और सरकारी बैंकों के शेयरों में आई भारी गिरावट से हुआ।

बाजार बंद होने तक सूचकांकों का हाल

मंगलवार को बाजार बंद होने तक सेंसेक्स 893.39 अंक (1.15%) की भारी गिरावट के साथ 76,200.68 के स्तर पर आ गया। दूसरी ओर, निफ्टी भी 278.81 अंक (1.16%) फिसलकर 23,824.10 पर बंद हुआ। इस तेज गिरावट की वजह से महज एक ही दिन में निवेशकों के करीब 6 लाख करोड़ रुपये डूब गए। बाजार के जानकारों ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए ट्रेडर्स को फूंक-फूंक कर कदम रखने की सलाह दी है।

आखिर क्यों डूबा बाजार? गिरावट की मुख्य वजहें

बाजार में आए इस बड़े उछाल-पुथल के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण रहे:

  • आईटी सेक्टर पर मार: सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई, जिससे निफ्टी आईटी इंडेक्स 2% से अधिक टूट गया।

  • वैश्विक बाजारों का दबाव: अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे कमजोर और नकारात्मक संकेतों ने घरेलू निवेशकों का सेंटिमेंट बिगाड़ा।

  • मुनाफावसूली की होड़: ऊंचे स्तरों पर घरेलू निवेशकों ने जमकर प्रॉफिट बुकिंग (मुनाफावसूली) की, जिससे बाजार संभल नहीं पाया।

  • बैंकिंग और मेटल में कमजोरी: सरकारी बैंकों और धातु (Metal) क्षेत्र के शेयरों में भी तेज बिकवाली दर्ज की गई, जिसने गिरावट की आग में घी का काम किया।

विपरीत परिस्थितियों में भी चमके ये सेक्टर्स

बाजार में मचे इस हाहाकार के बीच भी कुछ क्षेत्रों में हरियाली देखने को मिली। निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए डिफेंसिव सेक्टर्स का रुख किया:

  • फार्मा और हेल्थकेयर: फार्मा और स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।

  • स्मॉलकैप और मिडकैप: बड़े शेयरों में गिरावट के बावजूद मझोली और छोटी कंपनियों के सूचकांकों ने बाजार के विपरीत जाकर मजबूती दिखाई।

महिला खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी, मां बनने के बाद करियर को मिलेगा संरक्षण

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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने महिला क्रिकेटरों के करियर को एक नया जीवन और सुरक्षा देने के उद्देश्य से एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कदम उठाया है। क्रिकेट इतिहास में पहली बार आईसीसी ने महिला खिलाड़ियों के लिए 'पोस्ट-प्रेग्नेंसी रिटर्न टू प्ले' (गर्भावस्था के बाद खेल में दोबारा वापसी) से जुड़ी आधिकारिक गाइडलाइंस (दिशानिर्देश) जारी की हैं।

भले ही यह नई नीति अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) और फीफा (FIFA) के मौजूदा नियमों व परामर्शों से प्रेरित है, लेकिन महिला क्रिकेटरों के खेल, उनकी मनोवैज्ञानिक स्थिति और व्यावहारिक (लॉजिस्टिक) जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे पूरी तरह से क्रिकेट के अनुकूल ढाला गया है। इस बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज को तैयार करने वाली आईसीसी की चिकित्सा सलाहकार समिति की प्रमुख सदस्य डॉ. फिलिपा इंगे ने इस नीति को महिला क्रिकेट के लिए मील का पत्थर बताया है।

ऑस्ट्रेलियाई टीम की डॉक्टर ने तैयार किया रोडमैप

इस संवेदनशील और जरूरी पॉलिसी को बनाने में मुख्य भूमिका निभाने वाली डॉ. फिलिपा इंगे ऑस्ट्रेलिया (मेलबर्न) की एक बेहद प्रतिष्ठित स्पोर्ट्स एंड एक्सरसाइज मेडिसिन फिजिशियन हैं। वे वर्तमान में ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट टीम की मुख्य डॉक्टर के रूप में इंग्लैंड में चल रहे टी20 विश्व कप के दौरान टीम के साथ ही मौजूद हैं।

क्या है '6-R' का अनूठा फ्रेमवर्क?

महिला खिलाड़ियों की सुरक्षित और चरणबद्ध वापसी के लिए इस नई खेल नीति के तहत छह 'R' (6-R) का एक विशेष वैज्ञानिक ढांचा तैयार किया गया है। यह फ्रेमवर्क इस प्रकार है:

  1. रेडी (Ready): गर्भधारण और डिलीवरी के बाद खिलाड़ी के शरीर को खेल के लिए तैयार करना।

  2. रिव्यू (Review): मेडिकल टीम द्वारा खिलाड़ी की शारीरिक क्षमताओं की समय-समय पर समीक्षा करना।

  3. रिस्टोर (Restore): पुरानी फिटनेस, ताकत और स्टेमिना को प्राकृतिक रूप से वापस पाना।

  4. रीकंडीशन (Recondition): क्रिकेट के अनुकूल मसल्स और शरीर को ढालना।

  5. रिटर्न (Return): मैदान पर नेट प्रैक्टिस और अभ्यास मैचों के जरिए वापसी करना।

  6. रिफाइन (Refine): खेल की पुरानी लय और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को दोबारा हासिल करना।

डॉ. इंगे ने साझा किया कि दुनिया भर के कई क्रिकेट बोर्ड्स के विशेष आग्रह पर पिछले एक साल से इस नीति पर गहन शोध और विचार-विमर्श चल रहा था, जिसके बाद सभी सदस्य देशों के मेडिकल विभागों से मिले सुझावों के आधार पर इसे अंतिम रूप दिया गया है। यह नीति इतनी लचीली है कि हर देश इसे अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लागू कर सकता है।

शारीरिक से ज्यादा व्यावहारिक और मानसिक चुनौतियां थीं बड़ी रुकावट

डॉ. इंगे के मुताबिक, रिसर्च के दौरान यह बात सामने आई कि मां बनने के बाद एक महिला खिलाड़ी के लिए शारीरिक रूप से फिट होने से कहीं ज्यादा व्यावहारिक (लॉजिस्टिक्स) और मानसिक मोर्चे पर तालमेल बिठाना सबसे कठिन होता है। जब उन्होंने दुनिया भर की महिला क्रिकेटरों से संवाद किया, तो उनके सामने कई व्यावहारिक सवाल आए:

  • मैदान पर या मैच के दौरान शिशु को स्तनपान (ब्रेस्टफीडिंग) कैसे कराया जाएगा?

  • मां बनने के बाद शरीर की ऊर्जा और पोषण को बनाए रखने के लिए कैसा विशेष आहार होना चाहिए?

  • दौरों (इंटरनेशनल ट्रेवल) और होटलों में रुकने के दौरान बच्चे की देखरेख की क्या व्यवस्थाएं होंगी?

  • सबसे बड़ी दुविधा यह थी कि खिलाड़ी इस संवेदनशील विषय पर अपने संबंधित क्रिकेट बोर्ड से बातचीत शुरू करने में झिझकती थीं।

इसके अलावा, लंबे ब्रेक के बाद मैदान पर उतरने पर फॉर्म खोने और दोबारा खुद को साबित करने का एक भारी मनोवैज्ञानिक दबाव भी खिलाड़ियों पर रहता है। डॉ. इंगे ने उम्मीद जताई कि यदि सभी क्रिकेट बोर्ड अपने सपोर्ट स्टाफ में खेल मनोवैज्ञानिकों (स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट) को अनिवार्य रूप से शामिल करेंगे, तो खिलाड़ी इस तनाव से आसानी से बाहर आ सकेंगी।

आगामी 10 वर्षों में दिखेगा असर; कम होगा खिलाड़ियों का 'ड्रॉपआउट रेट'

क्रिकेट इतिहास में पाकिस्तान की पूर्व कप्तान बिस्माह मारूफ जैसी कई बेहतरीन खिलाड़ियों ने मां बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की पुरजोर कोशिश की, लेकिन पुख्ता नियमों और व्यावहारिक सहयोग के अभाव में आखिरकार उन्हें असमय क्रिकेट को अलविदा कहना पड़ा। वहीं, दूसरी ओर वेस्टइंडीज की स्टार खिलाड़ी एफी फ्लेचर मां बनने के बाद भी आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन कर रही हैं।

डॉ. इंगे को पूरा भरोसा है कि आगामी 8 से 10 वर्षों में इस नई आईसीसी गाइडलाइंस का बेहद सकारात्मक और व्यापक असर देखने को मिलेगा। शादी या मातृत्व (मां बनने) के कारण महिला खिलाड़ियों का खेल छोड़ने का ग्राफ (ड्रॉपआउट रेट) अब काफी तेजी से नीचे गिरेगा। यह नीति युवा लड़कियों को यह भरोसा देगी कि एक सफल क्रिकेट करियर और एक खुशहाल परिवार, दोनों को एक साथ पूरी गरिमा के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।

टी20 क्रिकेट की नई क्वीन बनीं श्री चरणी, नंबर-1 पर जमाया कब्जा

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आईसीसी (ICC) महिला टी20 विश्व कप के बीच भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए एक बेहद गौरवशाली और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की जादुई बाएं हाथ की स्पिनर श्री चरणी ने विश्व क्रिकेट में अपनी फिरकी का लोहा मनवाते हुए इतिहास रच दिया है। विश्व कप में अपने लगातार मैच जिताऊ और घातक प्रदर्शन के दम पर वे पहली बार आईसीसी महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय गेंदबाजी रैंकिंग में दुनिया के शीर्ष (नंबर-1) पायदान पर पहुंच गई हैं। आईसीसी द्वारा जारी ताजा साप्ताहिक रैंकिंग में उन्हें इस वैश्विक टूर्नामेंट में किए गए उनके शानदार प्रदर्शन का यह सर्वोच्च इनाम मिला है।

महज 21 साल की उम्र में दुनिया पर राज; लिन्से स्मिथ की बादशाहत खत्म

21 वर्षीय इस युवा भारतीय स्पिन सनसनी ने मौजूदा विश्व कप में अब तक सबसे ज्यादा विकेट चटकाने वाली गेंदबाज बनकर वैश्विक मंच पर पहला स्थान हासिल किया है। इस धमाकेदार प्रदर्शन की बदौलत उन्होंने लंबे समय से शीर्ष पर काबिज इंग्लैंड की धाकड़ स्पिनर लिन्से स्मिथ को नंबर-1 के सिंहासन से नीचे धकेल दिया है।

श्री चरणी के करियर का यह सफर इसलिए भी बेजोड़ माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने महज एक साल पहले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना पदार्पण (डेब्यू) किया था और इतनी कम उम्र में वे दुनिया की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज बन गई हैं। इंग्लैंड की सरजमीं पर खेले जा रहे इस विश्व कप में वे कप्तान का सबसे मुख्य और भरोसेमंद गेंदबाजी हथियार बनकर उभरी हैं। चरणी ने विश्व कप के शुरुआती केवल तीन मैचों में ही 10 विकेट चटकाकर सनसनी फैला दी है।

नीदरलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ स्पेल ने दिलाई नंबर-1 की कुर्सी

श्री चरणी को गेंदबाजी रैंकिंग के शिखर तक पहुंचाने में लगातार दो मैचों में किए गए उनके ऐतिहासिक स्पेल की सबसे बड़ी भूमिका रही:

  • नीदरलैंड के खिलाफ: लीड्स के मैदान पर नीदरलैंड के खिलाफ खेलते हुए चरणी ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में दूसरी बार चार विकेट (फोर-विकेट हॉल) लेने का कारनामा किया।

  • दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ: इसके ठीक बाद मैनचेस्टर में खेले गए कड़े मुकाबले में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के मजबूत बल्लेबाजी क्रम को ध्वस्त करते हुए तीन महत्वपूर्ण विकेट चटकाए। इन दोनों प्रदर्शनों से मिले भारी रेटिंग अंकों की बदौलत उन्होंने स्मिथ को पीछे छोड़ दिया।

गेंदबाजी रैंकिंग में भारी उलटफेर: चार्ली डीन नंबर-2 पर पहुंचीं

ताजा आईसीसी रैंकिंग में श्री चरणी की इस ऐतिहासिक छलांग के अलावा अन्य गेंदबाजों के स्थान में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिला है:

  • इंग्लैंड की लिन्से स्मिथ विश्व कप की धीमी शुरुआत के कारण दो पायदान फिसलकर अब सीधे तीसरे स्थान पर आ गई हैं।

  • उनकी हमवतन खिलाड़ी चार्ली डीन तीन मैचों में पांच विकेट लेकर दूसरे पायदान पर काबिज हो गई हैं।

  • पूर्व विश्व नंबर-1 सोफी एक्लेस्टोन चार स्थानों के सुधार के साथ चौथे नंबर पर आ गई हैं।

  • वेस्टइंडीज की कप्तान हेली मैथ्यूज 9 स्थानों की छलांग लगाकर 11वें और ऑस्ट्रेलिया की किम गार्थ 25 स्थानों की लंबी छलांग के साथ शीर्ष 20 में शामिल हो गई हैं।

  • इसके अलावा पाकिस्तान की कप्तान फातिमा सना 25वें और आयरलैंड की ओर्ला प्रेंडरगास्ट 26वें स्थान पर पहुंच गई हैं।

बल्लेबाजी रैंकिंग: जॉर्जिया वोल का दबदबा कायम, हरमनप्रीत-शेफाली को फायदा

बल्लेबाजी रैंकिंग पर नजर डालें तो शीर्ष स्थानों पर ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है:

  • ऑस्ट्रेलिया की सलामी बल्लेबाज जॉर्जिया वोल विश्व कप की तीन पारियों में केवल 62 रन बनाने के बाद भी अपने नंबर-1 स्थान पर सुरक्षित बनी हुई हैं।

  • उनकी जोड़ीदार बेथ मूनी दूसरे स्थान पर मजबूत स्थिति में हैं।

  • भारतीय बल्लेबाजों की बात करें तो ताबड़तोड़ ओपनर शेफाली वर्मा छठे स्थान पर पहुंच गई हैं, जबकि भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर एक स्थान के सुधार के साथ दोबारा शीर्ष 10 बल्लेबाजों में शामिल हो गई हैं।

  • न्यूजीलैंड की कप्तान सोफी डिवाइन 11वें और बांग्लादेश की कप्तान निगार सुल्ताना जोटी भी शीर्ष 20 में जगह बनाने में सफल रही हैं।

ऑलराउंडर्स रैंकिंग: हेली मैथ्यूज शीर्ष पर बरकरार, मरिज़ैन कैप की लंबी छलांग

टी20 अंतरराष्ट्रीय ऑलराउंडर्स की सूची में शीर्ष पायदान पर कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है:

  • वेस्टइंडीज की हेली मैथ्यूज न्यूजीलैंड की मेली केर को पीछे छोड़ते हुए नंबर-1 के आसन पर मजबूती से जमी हुई हैं।

  • श्रीलंका की दिग्गज कप्तान चमारी अथापथु तीसरे स्थान पर आ गई हैं।

  • आयरलैंड की ओर्ला प्रेंडरगास्ट और पाकिस्तान की फातिमा सना क्रमशः पांचवें और छठे स्थान पर पहुंच गई हैं।

  • दक्षिण अफ्रीका की अनुभवी ऑलराउंडर मरिज़ैन कैप के लिए भी यह हफ्ता बेहद शानदार रहा, जिन्होंने भारत के खिलाफ 'प्लेयर ऑफ द मैच' प्रदर्शन करने की बदौलत पांच स्थानों का सुधार किया और सीधे नौवें नंबर पर अपनी जगह पक्की कर ली है।

तालाबों की खुदाई की मिट्टी को लेकर मोहन सरकार के मंत्री आमने-सामने

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भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में कई बड़े और अहम फैसले लिए गए। इस बैठक के दौरान पंचायतों के तालाबों से निकलने वाली काली मिट्टी के परिवहन को लेकर मंत्रियों के बीच तीखी बहस (नोकझोंक) देखने को मिळाली। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा और पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल का तर्क था कि मिट्टी ले जाने पर जल संसाधन विभाग आपत्ति जताता है, जिससे तालाबों को गहरा करने का काम रुक रहा है। वहीं, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि काली मिट्टी के नाम पर कई जगह पीली मिट्टी का अवैध खनन और परिवहन किया जा रहा है, इसलिए विभाग कार्रवाई करता है। विवाद बढ़ता देख मुख्यमंत्री ने इस मामले को सुलझाने के लिए तीनों विभागों की एक संयुक्त समिति बनाने के निर्देश दिए हैं, जो मिट्टी निकालने और परिवहन के नियम तय करेगी।

5 जुलाई तक तैयार होगा समान नागरिक संहिता (UCC) का ड्राफ्ट

कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) का ड्राफ्ट आगामी 5 जुलाई तक तैयार कर लिया जाएगा, जिसे मानसून सत्र में विधेयक के रूप में विधानसभा में पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस कानून को लेकर अब तक 9 लाख से ज्यादा सुझाव मिले हैं, जिनमें से करीब 90 फीसदी लोग इसके समर्थन में हैं। खास बात यह है कि अल्पसंख्यक समाज की अधिकांश महिलाओं ने भी इस कानून का खुलकर समर्थन किया है। यूसीसी पर जनता से सुझाव लेने की यह प्रक्रिया 30 जून तक पूरी कर ली जाएगी।

635 करोड़ की लागत से सुधरेगा स्कूलों का स्तर

प्रदेश में शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों की पढ़ाई बीच में छूटने (ड्रॉप आउट) की दर को कम करने के लिए कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लिया है। अगले तीन सालों में प्रदेश के 529 स्कूलों का उन्नयन (अपग्रेडेशन) किया जाएगा, जिसके तहत 315 माध्यमिक स्कूलों को हाई स्कूल और 214 हाई स्कूलों को हायर सेकेंडरी स्कूल बनाया जाएगा। इसके लिए सरकार ने 635 करोड़ 24 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि मंजूर की है। वर्तमान में राज्य में हायर सेकेंडरी स्तर पर एडमिशन की दर सिर्फ 55 प्रतिशत है, क्योंकि स्कूल काफी दूर होते हैं। सरकार का लक्ष्य 'विकसित मध्यप्रदेश@2047' के तहत साल 2029 तक शत-प्रतिशत (100%) एडमिशन दर हासिल करना है।

किसानों को अब एक साल के लिए मिलेगा बिना ब्याज का लोन

कैबिनेट ने किसानों को जीरो प्रतिशत (0%) ब्याज पर मिलने वाले अल्पकालीन फसल ऋण (लोन) की व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया है। अब तक किसानों को खरीफ और रबी सीजन के हिसाब से अलग-अलग लोन लेना और चुकाना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें पूरे एक साल की अवधि के लिए लोन दिया जाएगा। इस योजना के तहत किसानों को करीब 25 हजार करोड़ रुपए का लोन बांटा जाता है, जिसका ब्याज सरकार खुद भरती है और इस वजह से सरकारी खजाने पर 880 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आता है। अब इस लोन की अवधि हर साल 1 अप्रैल से 31 मार्च तक गिनी जाएगी।

गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा और कैबिनेट के अन्य बड़े फैसले

बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि प्रदेश में 15 जुलाई से 30 जुलाई तक 'गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा' धूमधाम से मनाया जाएगा, जिसमें सभी जिलों के प्रभारी मंत्री सांदीपनि स्कूलों के कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इसके अलावा कैबिनेट ने शाजापुर जिले के शुजालपुर में एक नया सरकारी विधि (लॉ) कॉलेज खोलने की मंजूरी दी है। साथ ही मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के लिए 1740 करोड़ रुपए, खाद्यान्न आपूर्ति के लिए 180 करोड़ रुपए और अन्य विकास योजनाओं को जारी रखने के लिए 5365 करोड़ रुपए की भारी राशि को मंजूरी दी गई है। जल गंगा संवर्धन अभियान में मध्य प्रदेश को देश में तीसरा स्थान मिलने पर डिंडोरी, खंडवा और शहडोल जिलों की सराहना की गई जो देश के टॉप-10 जिलों में शामिल रहे हैं।

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