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बिकवाली के दबाव में धड़ाम हुआ बाजार, निवेशकों में घबराहट

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सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार के लिए दिन बेहद निराशाजनक रहा। शुरुआती कारोबार में स्थिरता दिखने के बाद बाजार में अचानक बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। इस चौतरफा गिरावट के कारण सेंसेक्स करीब 900 अंक टूट गया, वहीं निफ्टी ने भी 23,900 का अपना अहम स्तर खो दिया। बाजार को सबसे ज्यादा नुकसान आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी) और सरकारी बैंकों के शेयरों में आई भारी गिरावट से हुआ।

बाजार बंद होने तक सूचकांकों का हाल

मंगलवार को बाजार बंद होने तक सेंसेक्स 893.39 अंक (1.15%) की भारी गिरावट के साथ 76,200.68 के स्तर पर आ गया। दूसरी ओर, निफ्टी भी 278.81 अंक (1.16%) फिसलकर 23,824.10 पर बंद हुआ। इस तेज गिरावट की वजह से महज एक ही दिन में निवेशकों के करीब 6 लाख करोड़ रुपये डूब गए। बाजार के जानकारों ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए ट्रेडर्स को फूंक-फूंक कर कदम रखने की सलाह दी है।

आखिर क्यों डूबा बाजार? गिरावट की मुख्य वजहें

बाजार में आए इस बड़े उछाल-पुथल के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण रहे:

  • आईटी सेक्टर पर मार: सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई, जिससे निफ्टी आईटी इंडेक्स 2% से अधिक टूट गया।

  • वैश्विक बाजारों का दबाव: अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे कमजोर और नकारात्मक संकेतों ने घरेलू निवेशकों का सेंटिमेंट बिगाड़ा।

  • मुनाफावसूली की होड़: ऊंचे स्तरों पर घरेलू निवेशकों ने जमकर प्रॉफिट बुकिंग (मुनाफावसूली) की, जिससे बाजार संभल नहीं पाया।

  • बैंकिंग और मेटल में कमजोरी: सरकारी बैंकों और धातु (Metal) क्षेत्र के शेयरों में भी तेज बिकवाली दर्ज की गई, जिसने गिरावट की आग में घी का काम किया।

विपरीत परिस्थितियों में भी चमके ये सेक्टर्स

बाजार में मचे इस हाहाकार के बीच भी कुछ क्षेत्रों में हरियाली देखने को मिली। निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए डिफेंसिव सेक्टर्स का रुख किया:

  • फार्मा और हेल्थकेयर: फार्मा और स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।

  • स्मॉलकैप और मिडकैप: बड़े शेयरों में गिरावट के बावजूद मझोली और छोटी कंपनियों के सूचकांकों ने बाजार के विपरीत जाकर मजबूती दिखाई।

महिला खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी, मां बनने के बाद करियर को मिलेगा संरक्षण

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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने महिला क्रिकेटरों के करियर को एक नया जीवन और सुरक्षा देने के उद्देश्य से एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कदम उठाया है। क्रिकेट इतिहास में पहली बार आईसीसी ने महिला खिलाड़ियों के लिए 'पोस्ट-प्रेग्नेंसी रिटर्न टू प्ले' (गर्भावस्था के बाद खेल में दोबारा वापसी) से जुड़ी आधिकारिक गाइडलाइंस (दिशानिर्देश) जारी की हैं।

भले ही यह नई नीति अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) और फीफा (FIFA) के मौजूदा नियमों व परामर्शों से प्रेरित है, लेकिन महिला क्रिकेटरों के खेल, उनकी मनोवैज्ञानिक स्थिति और व्यावहारिक (लॉजिस्टिक) जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे पूरी तरह से क्रिकेट के अनुकूल ढाला गया है। इस बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज को तैयार करने वाली आईसीसी की चिकित्सा सलाहकार समिति की प्रमुख सदस्य डॉ. फिलिपा इंगे ने इस नीति को महिला क्रिकेट के लिए मील का पत्थर बताया है।

ऑस्ट्रेलियाई टीम की डॉक्टर ने तैयार किया रोडमैप

इस संवेदनशील और जरूरी पॉलिसी को बनाने में मुख्य भूमिका निभाने वाली डॉ. फिलिपा इंगे ऑस्ट्रेलिया (मेलबर्न) की एक बेहद प्रतिष्ठित स्पोर्ट्स एंड एक्सरसाइज मेडिसिन फिजिशियन हैं। वे वर्तमान में ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट टीम की मुख्य डॉक्टर के रूप में इंग्लैंड में चल रहे टी20 विश्व कप के दौरान टीम के साथ ही मौजूद हैं।

क्या है '6-R' का अनूठा फ्रेमवर्क?

महिला खिलाड़ियों की सुरक्षित और चरणबद्ध वापसी के लिए इस नई खेल नीति के तहत छह 'R' (6-R) का एक विशेष वैज्ञानिक ढांचा तैयार किया गया है। यह फ्रेमवर्क इस प्रकार है:

  1. रेडी (Ready): गर्भधारण और डिलीवरी के बाद खिलाड़ी के शरीर को खेल के लिए तैयार करना।

  2. रिव्यू (Review): मेडिकल टीम द्वारा खिलाड़ी की शारीरिक क्षमताओं की समय-समय पर समीक्षा करना।

  3. रिस्टोर (Restore): पुरानी फिटनेस, ताकत और स्टेमिना को प्राकृतिक रूप से वापस पाना।

  4. रीकंडीशन (Recondition): क्रिकेट के अनुकूल मसल्स और शरीर को ढालना।

  5. रिटर्न (Return): मैदान पर नेट प्रैक्टिस और अभ्यास मैचों के जरिए वापसी करना।

  6. रिफाइन (Refine): खेल की पुरानी लय और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को दोबारा हासिल करना।

डॉ. इंगे ने साझा किया कि दुनिया भर के कई क्रिकेट बोर्ड्स के विशेष आग्रह पर पिछले एक साल से इस नीति पर गहन शोध और विचार-विमर्श चल रहा था, जिसके बाद सभी सदस्य देशों के मेडिकल विभागों से मिले सुझावों के आधार पर इसे अंतिम रूप दिया गया है। यह नीति इतनी लचीली है कि हर देश इसे अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लागू कर सकता है।

शारीरिक से ज्यादा व्यावहारिक और मानसिक चुनौतियां थीं बड़ी रुकावट

डॉ. इंगे के मुताबिक, रिसर्च के दौरान यह बात सामने आई कि मां बनने के बाद एक महिला खिलाड़ी के लिए शारीरिक रूप से फिट होने से कहीं ज्यादा व्यावहारिक (लॉजिस्टिक्स) और मानसिक मोर्चे पर तालमेल बिठाना सबसे कठिन होता है। जब उन्होंने दुनिया भर की महिला क्रिकेटरों से संवाद किया, तो उनके सामने कई व्यावहारिक सवाल आए:

  • मैदान पर या मैच के दौरान शिशु को स्तनपान (ब्रेस्टफीडिंग) कैसे कराया जाएगा?

  • मां बनने के बाद शरीर की ऊर्जा और पोषण को बनाए रखने के लिए कैसा विशेष आहार होना चाहिए?

  • दौरों (इंटरनेशनल ट्रेवल) और होटलों में रुकने के दौरान बच्चे की देखरेख की क्या व्यवस्थाएं होंगी?

  • सबसे बड़ी दुविधा यह थी कि खिलाड़ी इस संवेदनशील विषय पर अपने संबंधित क्रिकेट बोर्ड से बातचीत शुरू करने में झिझकती थीं।

इसके अलावा, लंबे ब्रेक के बाद मैदान पर उतरने पर फॉर्म खोने और दोबारा खुद को साबित करने का एक भारी मनोवैज्ञानिक दबाव भी खिलाड़ियों पर रहता है। डॉ. इंगे ने उम्मीद जताई कि यदि सभी क्रिकेट बोर्ड अपने सपोर्ट स्टाफ में खेल मनोवैज्ञानिकों (स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट) को अनिवार्य रूप से शामिल करेंगे, तो खिलाड़ी इस तनाव से आसानी से बाहर आ सकेंगी।

आगामी 10 वर्षों में दिखेगा असर; कम होगा खिलाड़ियों का 'ड्रॉपआउट रेट'

क्रिकेट इतिहास में पाकिस्तान की पूर्व कप्तान बिस्माह मारूफ जैसी कई बेहतरीन खिलाड़ियों ने मां बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की पुरजोर कोशिश की, लेकिन पुख्ता नियमों और व्यावहारिक सहयोग के अभाव में आखिरकार उन्हें असमय क्रिकेट को अलविदा कहना पड़ा। वहीं, दूसरी ओर वेस्टइंडीज की स्टार खिलाड़ी एफी फ्लेचर मां बनने के बाद भी आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन कर रही हैं।

डॉ. इंगे को पूरा भरोसा है कि आगामी 8 से 10 वर्षों में इस नई आईसीसी गाइडलाइंस का बेहद सकारात्मक और व्यापक असर देखने को मिलेगा। शादी या मातृत्व (मां बनने) के कारण महिला खिलाड़ियों का खेल छोड़ने का ग्राफ (ड्रॉपआउट रेट) अब काफी तेजी से नीचे गिरेगा। यह नीति युवा लड़कियों को यह भरोसा देगी कि एक सफल क्रिकेट करियर और एक खुशहाल परिवार, दोनों को एक साथ पूरी गरिमा के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।

टी20 क्रिकेट की नई क्वीन बनीं श्री चरणी, नंबर-1 पर जमाया कब्जा

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आईसीसी (ICC) महिला टी20 विश्व कप के बीच भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए एक बेहद गौरवशाली और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की जादुई बाएं हाथ की स्पिनर श्री चरणी ने विश्व क्रिकेट में अपनी फिरकी का लोहा मनवाते हुए इतिहास रच दिया है। विश्व कप में अपने लगातार मैच जिताऊ और घातक प्रदर्शन के दम पर वे पहली बार आईसीसी महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय गेंदबाजी रैंकिंग में दुनिया के शीर्ष (नंबर-1) पायदान पर पहुंच गई हैं। आईसीसी द्वारा जारी ताजा साप्ताहिक रैंकिंग में उन्हें इस वैश्विक टूर्नामेंट में किए गए उनके शानदार प्रदर्शन का यह सर्वोच्च इनाम मिला है।

महज 21 साल की उम्र में दुनिया पर राज; लिन्से स्मिथ की बादशाहत खत्म

21 वर्षीय इस युवा भारतीय स्पिन सनसनी ने मौजूदा विश्व कप में अब तक सबसे ज्यादा विकेट चटकाने वाली गेंदबाज बनकर वैश्विक मंच पर पहला स्थान हासिल किया है। इस धमाकेदार प्रदर्शन की बदौलत उन्होंने लंबे समय से शीर्ष पर काबिज इंग्लैंड की धाकड़ स्पिनर लिन्से स्मिथ को नंबर-1 के सिंहासन से नीचे धकेल दिया है।

श्री चरणी के करियर का यह सफर इसलिए भी बेजोड़ माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने महज एक साल पहले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना पदार्पण (डेब्यू) किया था और इतनी कम उम्र में वे दुनिया की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज बन गई हैं। इंग्लैंड की सरजमीं पर खेले जा रहे इस विश्व कप में वे कप्तान का सबसे मुख्य और भरोसेमंद गेंदबाजी हथियार बनकर उभरी हैं। चरणी ने विश्व कप के शुरुआती केवल तीन मैचों में ही 10 विकेट चटकाकर सनसनी फैला दी है।

नीदरलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ स्पेल ने दिलाई नंबर-1 की कुर्सी

श्री चरणी को गेंदबाजी रैंकिंग के शिखर तक पहुंचाने में लगातार दो मैचों में किए गए उनके ऐतिहासिक स्पेल की सबसे बड़ी भूमिका रही:

  • नीदरलैंड के खिलाफ: लीड्स के मैदान पर नीदरलैंड के खिलाफ खेलते हुए चरणी ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में दूसरी बार चार विकेट (फोर-विकेट हॉल) लेने का कारनामा किया।

  • दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ: इसके ठीक बाद मैनचेस्टर में खेले गए कड़े मुकाबले में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के मजबूत बल्लेबाजी क्रम को ध्वस्त करते हुए तीन महत्वपूर्ण विकेट चटकाए। इन दोनों प्रदर्शनों से मिले भारी रेटिंग अंकों की बदौलत उन्होंने स्मिथ को पीछे छोड़ दिया।

गेंदबाजी रैंकिंग में भारी उलटफेर: चार्ली डीन नंबर-2 पर पहुंचीं

ताजा आईसीसी रैंकिंग में श्री चरणी की इस ऐतिहासिक छलांग के अलावा अन्य गेंदबाजों के स्थान में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिला है:

  • इंग्लैंड की लिन्से स्मिथ विश्व कप की धीमी शुरुआत के कारण दो पायदान फिसलकर अब सीधे तीसरे स्थान पर आ गई हैं।

  • उनकी हमवतन खिलाड़ी चार्ली डीन तीन मैचों में पांच विकेट लेकर दूसरे पायदान पर काबिज हो गई हैं।

  • पूर्व विश्व नंबर-1 सोफी एक्लेस्टोन चार स्थानों के सुधार के साथ चौथे नंबर पर आ गई हैं।

  • वेस्टइंडीज की कप्तान हेली मैथ्यूज 9 स्थानों की छलांग लगाकर 11वें और ऑस्ट्रेलिया की किम गार्थ 25 स्थानों की लंबी छलांग के साथ शीर्ष 20 में शामिल हो गई हैं।

  • इसके अलावा पाकिस्तान की कप्तान फातिमा सना 25वें और आयरलैंड की ओर्ला प्रेंडरगास्ट 26वें स्थान पर पहुंच गई हैं।

बल्लेबाजी रैंकिंग: जॉर्जिया वोल का दबदबा कायम, हरमनप्रीत-शेफाली को फायदा

बल्लेबाजी रैंकिंग पर नजर डालें तो शीर्ष स्थानों पर ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है:

  • ऑस्ट्रेलिया की सलामी बल्लेबाज जॉर्जिया वोल विश्व कप की तीन पारियों में केवल 62 रन बनाने के बाद भी अपने नंबर-1 स्थान पर सुरक्षित बनी हुई हैं।

  • उनकी जोड़ीदार बेथ मूनी दूसरे स्थान पर मजबूत स्थिति में हैं।

  • भारतीय बल्लेबाजों की बात करें तो ताबड़तोड़ ओपनर शेफाली वर्मा छठे स्थान पर पहुंच गई हैं, जबकि भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर एक स्थान के सुधार के साथ दोबारा शीर्ष 10 बल्लेबाजों में शामिल हो गई हैं।

  • न्यूजीलैंड की कप्तान सोफी डिवाइन 11वें और बांग्लादेश की कप्तान निगार सुल्ताना जोटी भी शीर्ष 20 में जगह बनाने में सफल रही हैं।

ऑलराउंडर्स रैंकिंग: हेली मैथ्यूज शीर्ष पर बरकरार, मरिज़ैन कैप की लंबी छलांग

टी20 अंतरराष्ट्रीय ऑलराउंडर्स की सूची में शीर्ष पायदान पर कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है:

  • वेस्टइंडीज की हेली मैथ्यूज न्यूजीलैंड की मेली केर को पीछे छोड़ते हुए नंबर-1 के आसन पर मजबूती से जमी हुई हैं।

  • श्रीलंका की दिग्गज कप्तान चमारी अथापथु तीसरे स्थान पर आ गई हैं।

  • आयरलैंड की ओर्ला प्रेंडरगास्ट और पाकिस्तान की फातिमा सना क्रमशः पांचवें और छठे स्थान पर पहुंच गई हैं।

  • दक्षिण अफ्रीका की अनुभवी ऑलराउंडर मरिज़ैन कैप के लिए भी यह हफ्ता बेहद शानदार रहा, जिन्होंने भारत के खिलाफ 'प्लेयर ऑफ द मैच' प्रदर्शन करने की बदौलत पांच स्थानों का सुधार किया और सीधे नौवें नंबर पर अपनी जगह पक्की कर ली है।

तालाबों की खुदाई की मिट्टी को लेकर मोहन सरकार के मंत्री आमने-सामने

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भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में कई बड़े और अहम फैसले लिए गए। इस बैठक के दौरान पंचायतों के तालाबों से निकलने वाली काली मिट्टी के परिवहन को लेकर मंत्रियों के बीच तीखी बहस (नोकझोंक) देखने को मिळाली। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा और पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल का तर्क था कि मिट्टी ले जाने पर जल संसाधन विभाग आपत्ति जताता है, जिससे तालाबों को गहरा करने का काम रुक रहा है। वहीं, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि काली मिट्टी के नाम पर कई जगह पीली मिट्टी का अवैध खनन और परिवहन किया जा रहा है, इसलिए विभाग कार्रवाई करता है। विवाद बढ़ता देख मुख्यमंत्री ने इस मामले को सुलझाने के लिए तीनों विभागों की एक संयुक्त समिति बनाने के निर्देश दिए हैं, जो मिट्टी निकालने और परिवहन के नियम तय करेगी।

5 जुलाई तक तैयार होगा समान नागरिक संहिता (UCC) का ड्राफ्ट

कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) का ड्राफ्ट आगामी 5 जुलाई तक तैयार कर लिया जाएगा, जिसे मानसून सत्र में विधेयक के रूप में विधानसभा में पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस कानून को लेकर अब तक 9 लाख से ज्यादा सुझाव मिले हैं, जिनमें से करीब 90 फीसदी लोग इसके समर्थन में हैं। खास बात यह है कि अल्पसंख्यक समाज की अधिकांश महिलाओं ने भी इस कानून का खुलकर समर्थन किया है। यूसीसी पर जनता से सुझाव लेने की यह प्रक्रिया 30 जून तक पूरी कर ली जाएगी।

635 करोड़ की लागत से सुधरेगा स्कूलों का स्तर

प्रदेश में शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों की पढ़ाई बीच में छूटने (ड्रॉप आउट) की दर को कम करने के लिए कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लिया है। अगले तीन सालों में प्रदेश के 529 स्कूलों का उन्नयन (अपग्रेडेशन) किया जाएगा, जिसके तहत 315 माध्यमिक स्कूलों को हाई स्कूल और 214 हाई स्कूलों को हायर सेकेंडरी स्कूल बनाया जाएगा। इसके लिए सरकार ने 635 करोड़ 24 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि मंजूर की है। वर्तमान में राज्य में हायर सेकेंडरी स्तर पर एडमिशन की दर सिर्फ 55 प्रतिशत है, क्योंकि स्कूल काफी दूर होते हैं। सरकार का लक्ष्य 'विकसित मध्यप्रदेश@2047' के तहत साल 2029 तक शत-प्रतिशत (100%) एडमिशन दर हासिल करना है।

किसानों को अब एक साल के लिए मिलेगा बिना ब्याज का लोन

कैबिनेट ने किसानों को जीरो प्रतिशत (0%) ब्याज पर मिलने वाले अल्पकालीन फसल ऋण (लोन) की व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया है। अब तक किसानों को खरीफ और रबी सीजन के हिसाब से अलग-अलग लोन लेना और चुकाना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें पूरे एक साल की अवधि के लिए लोन दिया जाएगा। इस योजना के तहत किसानों को करीब 25 हजार करोड़ रुपए का लोन बांटा जाता है, जिसका ब्याज सरकार खुद भरती है और इस वजह से सरकारी खजाने पर 880 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आता है। अब इस लोन की अवधि हर साल 1 अप्रैल से 31 मार्च तक गिनी जाएगी।

गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा और कैबिनेट के अन्य बड़े फैसले

बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि प्रदेश में 15 जुलाई से 30 जुलाई तक 'गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा' धूमधाम से मनाया जाएगा, जिसमें सभी जिलों के प्रभारी मंत्री सांदीपनि स्कूलों के कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इसके अलावा कैबिनेट ने शाजापुर जिले के शुजालपुर में एक नया सरकारी विधि (लॉ) कॉलेज खोलने की मंजूरी दी है। साथ ही मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के लिए 1740 करोड़ रुपए, खाद्यान्न आपूर्ति के लिए 180 करोड़ रुपए और अन्य विकास योजनाओं को जारी रखने के लिए 5365 करोड़ रुपए की भारी राशि को मंजूरी दी गई है। जल गंगा संवर्धन अभियान में मध्य प्रदेश को देश में तीसरा स्थान मिलने पर डिंडोरी, खंडवा और शहडोल जिलों की सराहना की गई जो देश के टॉप-10 जिलों में शामिल रहे हैं।

संजय राउत के बयान पर बागी सांसद का पलटवार, कहा- जनता सब देख रही है

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मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत रविवार को एक बहुत बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला। उद्धव ठाकरे गुट के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों ने उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में उनकी पार्टी का दामन थाम लिया। इस मौके पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सभी बागी सांसदों का स्वागत करते हुए उन्हें 'छह टाइगर' कहा और उनके कामों की जमकर तारीफ की। इस बड़े घटनाक्रम के बाद से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, पार्टी बदलने के बाद ज्यादातर सांसद मीडिया से बात किए बिना ही निकल गए, लेकिन मुंबई उत्तर-पूर्व से सांसद संजय दीना पाटिल ने खुलकर अपनी बात रखी और उद्धव ठाकरे के करीबी नेताओं पर जमकर निशाना साधा।

अपमान के कारण छोड़ी पार्टी

सांसद संजय दीना पाटिल ने पार्टी छोड़ने की वजह बताते हुए कहा कि शिवसेना (यूबीटी) में उनके समर्थकों का लगातार अपमान हो रहा था। उन्होंने कहा कि वे पिछले सात वर्षों से पार्टी में थे, लेकिन सांसद होने के बावजूद उन्हें वह मान-सम्मान नहीं मिल रहा था जिसके वे हकदार थे। पाटिल ने स्पष्ट किया कि उन्हें उद्धव ठाकरे या आदित्य ठाकरे से कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर मौजूद 'एक खास शख्स' के बर्ताव और तानाशाही की वजह से उन्होंने पार्टी छोड़ने का यह बड़ा फैसला लिया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उद्धव ठाकरे ने उनकी बात पहले सुनी होती, तो आज यह नौबत ही नहीं आती।

उद्धव ठाकरे ने खुद बुलाया था

संजय दीना पाटिल ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि वह कभी खुद उद्धव ठाकरे के पास टिकट या पद मांगने नहीं गए थे, बल्कि ठाकरे ने खुद उन्हें फोन करके बुलाया था। उन्होंने बताया कि उस समय उद्धव ठाकरे मुंबई उत्तर-पूर्व की सीट राज ठाकरे की पार्टी मनसे को नहीं देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने मुझे उम्मीदवार बनाया था। पाटिल ने कहा कि उन्हें न तो सांसद बनने की लालसा थी और न ही वे कोई मांग लेकर गए थे। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि पार्टी छोड़ने के फैसले के बाद उन्हें गालियां दी गईं। वे चाहते थे कि पार्टी नेतृत्व उनसे बात करे और माफी मांगकर वापस बुलाए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

विरोधियों को दी सीधी चेतावनी

रविवार को उद्धव ठाकरे और उनके करीबी नेता संजय राउत ने पाटिल के संसदीय क्षेत्र में एक सभा की थी, जिसमें संजय राउत ने बागी सांसदों को 'गद्दार' कहते हुए उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने और सबक सिखाने की धमकी दी थी। राउत ने यहाँ तक कहा था कि बागी सांसदों को शिवसैनिकों के गुस्से से बचने के लिए वायुसेना की सुरक्षा भी कम पड़ेगी। इस पर पलटवार करते हुए संजय दीना पाटिल ने ठाकरे गुट के कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी कि वे किसी के भड़कावे में न आएं। पाटिल ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि अगर किसी ने उनके या उनके परिवार पर हमला करने की कोशिश की, तो उसे अस्पताल या श्मशान जाना पड़ सकता है, इसलिए ऐसा कदम उठाने से पहले लोग अपना इंश्योरेंस करवा लें।

सुरक्षा लेने से किया इनकार

इस सियासी तनाव के बीच महाराष्ट्र पुलिस ने बागी सांसदों को 'वाई-प्लस' (Y-Plus) सुरक्षा दी है, लेकिन संजय दीना पाटिल ने इस सुरक्षा को लेने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा है कि उन्हें किसी भी तरह की सरकारी सुरक्षा की जरूरत नहीं है। पाटिल का मानना है कि अगर उनके साथ पुलिस होगी और किसी ने उन पर या उनके करीबियों पर हमला किया, तो वे कानून के कारण सामने वाले को मुंहतोड़ जवाब नहीं दे पाएंगे। उन्होंने कहा कि वे अपनी सुरक्षा खुद करने में पूरी तरह सक्षम हैं, इसलिए पुलिस को यह सुरक्षा उन लोगों को देनी चाहिए जो डर रहे हैं।

शादी से पहले मंगेतर को खाई में धकेलने का आरोप, सनसनीखेज मामला

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पुणे। महाराष्ट्र के पुणे जिले में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जो इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड की याद दिलाता है। यहाँ 26 साल के रियल एस्टेट कारोबारी केतन विशाल अग्रवाल की उनकी 20 वर्षीय मंगेतर सिया गोयल और उसके 22 वर्षीय बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी ने मिलकर बेरहमी से हत्या कर दी। पुलिस के मुताबिक, दोनों ने केतन को ऐतिहासिक लोहागढ़ किले से करीब 400 फीट गहरी खाई में धक्का दे दिया और इसे एक महज हादसा साबित करने की कोशिश की। शुरुआत में मंगेतर सिया ने पुलिस को बताया था कि तेज हवा के बीच फोटो खींचते समय केतन का पैर फिसल गया था, जिसके आधार पर पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया था।

17 करोड़ की शाही शादी और मर्डर की साजिश

केतन अग्रवाल पुणे के गहुंजे के रहने वाले थे और अपनी पारिवारिक रियल एस्टेट कंपनी में डायरेक्टर थे, जबकि सिया पुणे के एक बड़े मसाला व्यापारी की बेटी है। दोनों के परिवारों ने मिलकर इसी साल नवंबर में राजस्थान के उदयपुर के एक शाही पैलेस में शादी तय की थी, जिस पर करीब 17 करोड़ रुपए खर्च होने वाले थे। यहाँ तक कि मेहमानों के लिए दो चार्टर्ड प्लेन तक बुक किए जा चुके थे। शादी से पहले दोनों बाली (इंडोनेशिया) घूमने जाने वाले थे, लेकिन सिया ने पासपोर्ट खोने का बहाना बनाकर ट्रिप कैंसिल करा दी क्योंकि वह केतन से शादी नहीं करना चाहती थी। वह पुणे के कोंढवा निवासी चेतन चौधरी से प्यार करती थी और केतन को अपने रास्ते का कांटा मानती थी।

पहली कोशिश नाकाम, दूसरी बार में दिया धक्का

पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि सिया और चेतन ने केतन को मारने की पहली कोशिश 14 जून को ही लोहागढ़ किले पर की थी। तब दोनों ने सांप का डर पैदा कर केतन को खाई में धकेलने की योजना बनाई थी, लेकिन वह नाकाम रही और केतन को इस पर कोई शक भी नहीं हुआ। इसके बाद 18 जून की सुबह सिया प्री-बर्थडे सेलिब्रेट करने और प्री-वेडिंग शूट के बहाने केतन को दोबारा लोहागढ़ किले पर ले गई। योजना के मुताबिक चेतन चौधरी भी वहाँ पहुंच गया और सुबह करीब 10:30 बजे दोनों ने मिलकर केतन को 400 फीट गहरी खाई में धक्का दे दिया, जहाँ अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

सीसीटीवी फुटेज और फोन रिकॉर्ड्स से खुला राज

मौत की परिस्थितियां संदिग्ध लगने पर जब पुलिस ने सिया के फोन रिकॉर्ड्स और सोशल मीडिया एक्टिविटी की जांच की, तो उसके और चेतन के अफेयर का सच सामने आ गया। इसके साथ ही किले के पास लगे सीसीटीवी (CCTV) फुटेज में केतन की मौत से ठीक पहले आरोपी चेतन चौधरी किले की तरफ जाता हुआ दिखाई दिया। इन पुख्ता सबूतों के आधार पर क्राइम ब्रांच ने पहले चेतन को हिरासत में लिया और उससे सख्ती से पूछताछ के बाद मंगेतर सिया गोयल को भी गिरफ्तार कर लिया। केतन के पिता विशाल अग्रवाल की शिकायत पर मंगलवार को दोनों के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज कर लिया गया है।

इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड से मिलती-जुलती वारदात

यह घटना पूरी तरह से इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या जैसी है। मई 2025 में राजा रघुवंशी की शादी सोनम रघुवंशी से हुई थी, जिसके बाद दोनों हनीमून के लिए मेघालय गए थे। वहाँ पत्नी सोनम ने अपने प्रेमी राज कुशवाह के साथ मिलकर राजा की हत्या कर दी थी और उनका शव भी एक गहरी खाई से बरामद हुआ था। पुणे पुलिस अब लोहागढ़ किले वाले मामले में भी फोरेंसिक साक्ष्य जुटा रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि इस खौफनाक साजिश में इन दोनों के अलावा कोई और भी शामिल था या नहीं।

ट्रंप के दावे को नेतन्याहू ने किया खारिज, बोले- निर्णय हमारा अपना है

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तेलअवीव। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को साफ तौर पर खारिज कर दिया है, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि नेतन्याहू उनके इशारे पर काम करते हैं। नेतन्याहू ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया है कि इजरायल एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है। वह अपने सभी फैसले किसी बाहरी दबाव या देश के कहने पर नहीं, बल्कि केवल अपने राष्ट्रीय हितों और देश की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लेता है। नेतन्याहू का यह बयान दोनों नेताओं के रिश्तों को लेकर चल रही चर्चाओं को शांत करने और इजरायल की स्वतंत्र विदेश नीति को दुनिया के सामने रखने की एक बड़ी कोशिश है।

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या दावा किया था

दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक इंटरव्यू में दावा किया था कि इजरायली प्रधानमंत्री उनका बहुत सम्मान करते हैं और वही करते हैं जो ट्रंप उनसे करने को कहते हैं। ट्रंप ने यहाँ तक कहा था कि कई संवेदनशील मुद्दों पर तो उन्हें नेतन्याहू को समझाना भी पड़ता है। ट्रंप के इस बयान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश जा रहा था कि इजरायली सरकार पूरी तरह से अमेरिकी नेतृत्व के नियंत्रण में काम कर रही है। यह दावा उस समय और ज्यादा चर्चा में आ गया जब ईरान और लेबनान जैसे गंभीर मुद्दों पर अमेरिका और इजरायल के बीच अंदरूनी मतभेदों की खबरें लगातार सामने आ रही थीं।

नेतन्याहू ने मजाकिया अंदाज में दिया जवाब

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ट्रंप के इस दावे पर पलटवार करते हुए मजाकिया लेकिन बेहद मजबूत अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका में लोग सोचते हैं कि ट्रंप वही करते हैं जो मैं उनसे कहता हूँ, और इसके उलट इजरायल में लोग कहते हैं कि मैं वही करता हूँ जो ट्रंप चाहते हैं। सच्चाई यह है कि इन दोनों में से कोई भी बात ठीक नहीं है। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका और इजरायल दोनों ही आजाद देश हैं। कई महत्वपूर्ण मामलों पर दोनों देशों की सोच और रणनीतियाँ जरूर एक जैसी होती हैं, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कोई भी देश एक-दूसरे के इशारे पर चलता है।

मतभेदों के बीच रणनीतिक साझेदारी

नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि उनका सबसे पहला और मुख्य लक्ष्य इजरायल की सुरक्षा करना है, ठीक उसी तरह जैसे ट्रंप हमेशा अमेरिका के हितों को आगे रखते हैं। दोनों नेता एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, लेकिन फैसले लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई को लेकर दोनों देशों के बीच कुछ रणनीतिक मतभेद दिखे हैं। इसके बावजूद, दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम कर रहे हैं, जो यह दिखाता है कि आपसी मतभेद उनकी गहरी दोस्ती और सहयोग के आड़े नहीं आते हैं।

जेल के भीतर बहा खून, हत्या के मामले में बंद कैदी ने फिर किया कत्ल

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर की जिला जेल से सुरक्षा व्यवस्था को तार-टार कर देने वाली एक बेहद सनसनीखेज और खौफनाक वारदात सामने आई है। जेल के भीतर बनी एक बैरक में एक विचाराधीन बंदी (अंडरट्रायल कैदी) की बेरहमी से हत्या कर दी गई। वारदात को अंजाम देने का आरोप तिहरे हत्याकांड के मामले में पहले से ही आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा भुगत रहे एक खूंखार कैदी पर लगा है, जिसने बैरक के अंदर ही दूसरे बंदी के सिर पर भारी पत्थर से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस दुस्साहसिक घटना के बाद जेल प्रबंधन, वहां की आंतरिक सुरक्षा और प्रहरियों की मुस्तैदी पर बेहद गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बैरक के भीतर अचानक खूनी खेल; बंदियों में मची चीख-पुकार

जेल सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह खूनी वारदात मंगलवार सुबह उस वक्त हुई जब बैरक नंबर के भीतर कई कैदी मौजूद थे। रोज की तरह सुबह के समय सभी बंदी अपनी सामान्य गतिविधियों और बातचीत में व्यस्त थे। इसी दौरान अचानक सजायाफ्ता कैदी ने बैरक में ही रखे एक भारी-भरकम पत्थर को उठाया और दूसरे बंदी के सिर पर पूरी ताकत से दे मारा।

अचानक हुए इस जानलेवा हमले से पूरी बैरक में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। वहां मौजूद अन्य बंदियों ने हिम्मत दिखाकर किसी तरह हमलावर कैदी को पकड़ा और उसे काबू में किया। इधर, लहूलुहान हालत में जमीन पर गिरे गंभीर रूप से घायल बंदी को जेल प्रहरियों की मदद से तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

हाई-सुरक्षा और विशेष निगरानी वाली बैरक में थे दोनों कैदी

इस वारदात ने जेल प्रशासन को इसलिए भी कटघरे में खड़ा कर दिया है क्योंकि मृतक और आरोपी दोनों ही कोई आम कैदी नहीं थे। जेल प्रबंधन के अनुसार, दोनों बंदियों की विशेष चिकित्सकीय और मानसिक स्थिति को देखते हुए उन्हें सामान्य कैदियों से अलग एक 'विशेष निगरानी' (स्पेशल ऑब्जर्वेशन) वाली बैरक में रखा गया था। दोनों ही कैदियों को कुछ गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं थीं और वे जेल के डॉक्टरों के नियमित उपचार के दायरे में थे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि विशेष निगरानी वाली बैरक के भीतर इतना बड़ा और भारी पत्थर आखिर आया कहां से?

सजा माफी की अर्जी खारिज होने से डिप्रेशन में था हत्यारा!

पुलिस और जेल मैन्युअल की शुरुआती जांच में इस कत्ल के पीछे एक बेहद चौंकाने वाली वजह सामने आ रही है। पता चला है कि आजीवन कारावास काट रहे आरोपी कैदी ने हाल ही में अपनी सजा कम करने या माफी के लिए शासन के समक्ष एक दया याचिका (अर्जी) लगाई थी, जिसे कुछ दिनों पहले ही कानूनी आधार पर खारिज (अस्वीकृत) कर दिया गया था।

माना जा रहा है कि अर्जी खारिज होने के बाद से ही वह गहरे मानसिक तनाव और डिप्रेशन में चल रहा था। पुलिस अब इस मुख्य पहलू की बारीकी से तफ्तीश कर रही है कि क्या उसने यह आत्मघाती कदम सिर्फ अपनी इसी नाराजगी और हताशा के कारण उठाया या फिर दोनों बंदियों के बीच जेल के भीतर कोई पुराना विवाद या रंजिश चल रही थी।

जेल महकमे में हड़कंप; उच्च स्तरीय जांच के आदेश

जेल के भीतर हुए इस मर्डर से पूरे प्रदेश के जेल महकमे में हड़कंप मच गया है। स्थानीय थाना पुलिस ने जेल प्रबंधन की शिकायत पर आरोपी कैदी के खिलाफ हत्या का एक नया मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस की फॉरेंसिक टीम और मजिस्ट्रेट जांच के जरिए घटना के समय बैरक की सुरक्षा में तैनात प्रहरियों के बयानों को दर्ज किया जा रहा है। अधिकारियों का साफ कहना है कि जांच में यदि जेल प्रशासन या किसी प्रहरी की लापरवाही उजागर होती है, तो उस पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

जबलपुर पीडब्ल्यूडी में प्रशासनिक बदलाव, नया नेतृत्व हुआ तय

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जबलपुर। लोक निर्माण विभाग (PWD) जबलपुर परिक्षेत्र में प्रशासनिक फेरबदल के साथ ही विकास कार्यों को गति देने की तैयारी शुरू हो गई है। विभाग के नए मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) और अधीक्षण यंत्री (सुपरिटेंडिंग इंजीनियर) ने औपचारिक रूप से अपनी नई जिम्मेदारियां संभाल ली हैं। पदभार ग्रहण करते ही नए अधिकारियों ने जमीनी हकीकत जानने के लिए सीधे मैदानी स्टाफ से संपर्क साधा।

नए अधिकारियों ने संभाला कार्यभार

लोक निर्माण विभाग जबलपुर परिक्षेत्र के नए मुख्य अभियंता आनन्द प्रकाश राणे और जबलपुर मंडल के अधीक्षण यंत्री बी एल भलावी ने अपना पदभार ग्रहण कर लिया है। बता दें कि पूर्व मुख्य अभियंता आर एल वर्मा का स्थानांतरण भोपाल में प्रमुख अभियंता के पद पर होने के बाद से अधीक्षण यंत्री डीके सारीवान इस पद का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे।

कर्मचारियों के टेबल तक पहुंचे मुख्य अभियंता

अपनी कार्यशैली का परिचय देते हुए नए मुख्य अभियंता आनंद प्रकाश राणे ने पदभार लेते ही हर विभाग और कर्मचारियों की सीटों (टेबल) पर जाकर उनसे सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कर्मचारियों से परिचय प्राप्त करने के साथ-साथ विभागीय कामकाज और वर्तमान में चल रहे प्रोजेक्ट्स की विस्तृत समीक्षा की।

पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया स्वागत

इस खास मौके पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने नए मुखिया का आत्मीय स्वागत किया। स्वागत करने वालों में भवन अधीक्षण यंत्री शिवेंद्र सिंह, अनुविभागीय अधिकारी मनीष ठाकुर और मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष अटल उपाध्याय शामिल रहे। इनके साथ ही जीपी द्विवेदी, अर्जुन सोमवंशी, सुशील गुप्ता, राजा राम डेहरिया, नितिन सेलेट, संजय मजूमदार, अनुराग गुप्ता, राजेंद्र गुप्ता, रोशन पासी, अरविंद शाहू और अरविंद बनखेड़े ने भी नए अधिकारियों को गुलदस्ता भेंट कर शुभकामनाएं दीं।

विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार

विभाग में नई लीडरशिप आने से अटके हुए और लंबित पड़े विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। मुख्य अभियंता द्वारा पहले ही दिन से जमीनी स्तर पर फीडबैक लेने की इस पहल की सराहना हो रही है। वहीं, विभागीय कर्मचारियों ने भी नए अधिकारियों को आश्वस्त किया है कि वे पूरी निष्ठा के साथ शासकीय योजनाओं और निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करने में अपना पूरा सहयोग देंगे।

एलएनसीटी ग्रुप के कई ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, जांच में जुटी एजेंसी

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के प्रतिष्ठित शैक्षणिक समूह एलएनसीटी (LNCT) ग्रुप के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने एक बड़ी छापेमारी की है। ईडी की यह कार्रवाई ग्रुप में हुई लगभग 200 करोड़ रुपए की भारी वित्तीय हेराफेरी (पैसों के घोटाले) को लेकर की जा रही है। यह जांच भोपाल समेत देश भर में फैले इस ग्रुप के अन्य शैक्षणिक संस्थानों और ठिकानों पर एक साथ चल रही है। दरअसल, एलएनसीटी ग्रुप के प्रमोटर चौकसे परिवार पर पहले मध्य प्रदेश की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने धोखाधड़ी और वित्तीय गड़बड़ियों का मामला दर्ज किया था, जिसके बाद अब इस मामले की कमान ईडी ने संभाल ली है।

स्कॉलरशिप का गबन और छात्रों की फीस में हेराफेरी

शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस घोटाले का सीधा संबंध छात्रों की फीस और स्कॉलरशिप (छात्रवृत्ति) के पैसों से है। ईओडब्ल्यू की जांच के मुताबिक, इस ग्रुप ने विद्यार्थियों से वसूली गई बस फीस, हॉस्टल फीस और सरकार की तरफ से आने वाली स्कॉलरशिप की राशि में भारी हेराफेरी की। यह वह पैसा था जिसे नियमों के मुताबिक शैक्षणिक संस्थान या सीधे छात्रों के खातों में जाना चाहिए था, लेकिन इस ग्रुप के कर्ता-धर्ताओं ने इस पूरी रकम को चौकसे परिवार की निजी कंपनियों (जैसे- कल्चुरी कॉन्ट्रैक्टर्स लिमिटेड) के बैंक खातों में ट्रांसफर (डायवर्ट) कर दिया।

निजी संपत्तियाँ बनाने के लिए शिक्षा लोन का दुरुपयोग

आरोपियों पर यह भी गंभीर आरोप हैं कि उन्होंने विभिन्न बैंकों से शिक्षा के विकास और शैक्षणिक कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपए का भारी-भरकम लोन लिया था। इस लोन की राशि का उपयोग पढ़ाई-लिखाई या कॉलेज के विकास में करने के बजाय चौकसे परिवार ने अपनी निजी संपत्तियां खरीदने और परिवार के सदस्यों के निजी इस्तेमाल के लिए किया। इस पूरी वित्तीय गड़बड़ी और पैसों को इधर-उधर करने के लिए आस्था फाउंडेशन नामक संस्था और कुछ अन्य सोसायटियों का इस्तेमाल किया गया था। फिलहाल, ईडी की टीमें सभी दस्तावेजों को खंगाल रही हैं और आने वाले समय में इस मामले में बड़ी गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

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