श्रमिक सुरक्षा पर कांग्रेस का बड़ा सवाल, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बताया चिंताजनक

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नई दिल्लीकांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर गंभीर चिंता जताई है, जिसमें कहा गया है कि 'उद्योग' शब्द की 1978 में दी गई श्रमिक हितैषी व्याख्या औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के तहत नए मामलों पर लागू नहीं होगी। पार्टी का तर्क है कि कानून के दायरे को सीमित करने से श्रमिकों के संरक्षण को कमजोर करने वाला जोखिम पैदा हो सकता है।

कांग्रेस द्वारा उठाए गए मुख्य सवाल कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने एक बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने उत्तर प्रदेश राज्य बनाम जय बीर सिंह मामले में अपने 1978 के चर्चित फैसले में तय 'ट्रिपल टेस्ट' पर टिप्पणी की है। यह ट्रिपल टेस्ट फरवरी 1978 के बंगलूरू वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड बनाम ए राजप्पा मामले में तय किया गया था।

  • श्रम कानूनों का दायरा: 1978 के फैसले के तहत व्यवस्थित गतिविधि, नियोक्ता-कर्मचारी सहयोग और वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन जैसे तत्वों को 'उद्योग' माना गया था, जिससे बड़ी संख्या में श्रमिकों को सुरक्षा मिली।

  • व्यावसायिक प्रकृति की शर्त: 2026 के बहुमत वाले फैसले ने इसमें व्यापार जैसी स्पष्ट व्यावसायिक प्रकृति होने की शर्त जोड़ी है, जिससे संप्रभु कार्यों का दायरा बढ़ सकता है।

कांग्रेस का पक्ष और न्यायूर्ति नागरत्ना की असहमति कांग्रेस नेताओं ने तर्क दिया है कि ऐसे समय में जब खुली अर्थव्यवस्था और निजी सेवा क्षेत्र बढ़ रहे हैं, श्रमिक सुरक्षा को कमजोर करने वाली कोई भी कोशिश उचित नहीं है। पार्टी ने न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना के असहमति वाले फैसले को साहसिक बताया, जिन्होंने स्थापित कानून को बदलने से बचने की चेतावनी दी थी।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या था? सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 1978 की व्यापक व्याख्या नए श्रम कोड (औद्योगिक संबंध संहिता, 2020) की व्याख्या का आधार नहीं बनेगी, हालांकि पुराने औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत लंबित मामलों पर पुराना 'ट्रिपल टेस्ट' लागू रहेगा।