नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने देश की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर पर सवाल उठाने वाले विपक्षी दलों और पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग पर तीखा हमला बोला है।
पीयूष गोयल का पलटवार: आलोचकों पर साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आलोचकों की आलोचना करते हुए कहा कि वे ‘सेब की तुलना सेब से करना’ भी नहीं जानते। उन्होंने स्पष्ट किया कि आलोचक पुरानी और नई जीडीपी श्रृंखला (बदले गए आधार वर्ष) के आंकड़ों की गलत तुलना करके जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। उनके अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है और यह आंकड़े इसकी वास्तविकता को दर्शाते हैं।
आधार वर्ष में बदलाव और जीडीपी श्रृंखला का अंतर
नई जीडीपी श्रृंखला में आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर फरवरी 2026 से नया आधार वर्ष 2022-23 कर दिया गया है। सरकार के मुताबिक, यह संशोधन सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें बेहतर आंकड़ा स्रोतों, नई आईआईपी-पीपीआई श्रृंखला और अतिरिक्त जानकारियों को शामिल किया गया है। यही कारण है कि पुरानी और नई दरों की सीधी तुलना करना तकनीकी रूप से सही नहीं है।
रोजगार के मुद्दे पर उद्योग मंत्री का बयान
आलोचकों द्वारा उठाए जा रहे इस सवाल पर कि विकास के साथ रोजगार कहां हैं, पीयूष गोयल ने कहा कि कपड़ा और विनिर्माण क्षेत्रों में श्रमिकों की भारी मांग बनी हुई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अकेले तिरुपुर के उद्योग क्षेत्र में एक लाख श्रमिकों की आवश्यकता है और वहां श्रम की मजबूत मांग है।
पूर्व वित्त सचिव के दावों पर सरकार का स्पष्टीकरण
पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने दावा किया था कि यदि पिछले साल के आंकड़ों में संशोधन न किया जाता, तो वृद्धि दर करीब 2.6 प्रतिशत ही रहती। इस पर सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय और 15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एन. के. सिंह ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि नई जीडीपी श्रृंखला अधिक विश्वसनीय है, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप और सटीक उत्पादन आंकड़ों पर आधारित है।









